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नाम अब्दुल, पर सुमित बनकर घूमता था: बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट का मास्टरमाइंड कर रहा था ‘हिंदू पहचान’ का इस्तेमाल, फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। बेंगलुरु में रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुवस्सिर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाले आतंकियों अब्दुल मतीन ताहा और मुसव्विर हुसैन पर NIA ने ₹10-10 लाख का इनाम घोषित किया है। यह आतंकी धमाके के लिए हिन्दू पहचान का इस्तेमाल कर रहे थे। यह आतंकी हिन्दू नामों का उपयोग अलग-अलग जगह रुकने और यात्रा के लिए करते थे। यह खुलासा NIA जाँच में हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाके की योजना बनाने वाले आतंकी अब्दुल मतीन ताहा ने हिन्दू नाम विग्नेश डी और सुमित अपनाए हुए थे। इनका उपयोग वह अलग अलग जगह जाने और रहने में करता था। रामेश्वरम कैफे जाकर धमाके को अंजाम देने वाला मुसव्विर हुसैन, मोहम्मद जुनैद सैयद नाम के पहचान पत्रों पर फर्जी दस्तावेज बनाए हुए था।

इन दोनों पर NIA ने ₹10 लाख का इनाम घोषित किया है। इनकी फोटो भी जारी की गई हैं। बताया गया है कि यह दोनों 2020 से ही गायब हैं। यह अल हिन्द मॉड्यूल में शामिल थे। NIA की दबिश पर यह गायब हो गए थे। इसके बाद से यह आतंक की प्लानिंग कर रहे थे। इन्होने मिलकर बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में मार्च 2023 में धमाके को अंजाम दिया।

इससे पहले NIA ने रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले में एक आरोपित मुजम्मिल शरीफ को पकड़ा था। इस पर आरोप है कि इसने अब्दुल मतीन ताहा और मुवस्सिर हुसैन को छुपने और शहर छोड़ कर भागने में सहायता की थी। उसने बम बनाने के लिए भी सामान इन आतंकियों को उपलब्ध करवाया था। वह अभी NIA की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुस्लिम आतंकियों के हिन्दू नाम उपयोग करने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। अक्टूबर 2022 में मंगलुरु में चलते ऑटो में हुए प्रेसर कुकर ब्लास्ट में भी यह सामने आया था कि आतंकी शारिक ने प्रेमराज नाम का एक आधार बना रखा था।

यह आधार एक रेलवे कर्मचारी प्रेमराज का था जो कि इसे एक बार बस में भूल गया था। शारिक ने इस पर तस्वीर बदल कर इसे अपना नाम दे दिया था और अपनी आतंकी गतिविधियाँ इसी के सहारे चला रहा था। शारिक भी इसी अल हिन्द मॉड्यूल का हिस्सा था और अब्दुल मतीन ताहा से जुड़ा हुआ था।

शारिक मैंगलूरू का ही रहने वाला था और इस धमाके के पहले वह आतंक समर्थक पोस्टर बनाने के मामले में पकड़ा गया था और जमानत पर बाहर आ गया था। शारिक एक रेडीमेड कपड़े की दुकान चलाता था। उसे इस ऑटो धमाके के बाद दुबारा पकड़ लिया गया था। उनसे कुछ और युवाओं को भी आतंकी बनाया था।

गौरतलब है कि 1 मार्च, 2024 को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इसमें शामिल आतंकियों को पकड़ने का प्रयास जारी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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