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छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल पर FIR, आर्थिक अपराध शाखा करेगी महादेव बेटिंग एप धोखाधड़ी की जाँच: नामांकन पर भी लटक सकती है तलवार

महादेव बेटिंग एप मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है। इस FIR में भूपेश बघेल के अलावा 20 अन्य आरोपित भी शामिल हैं। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित कई अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है। यह केस सोमवार (4 मार्च 2024) को ED (प्रवर्तन निदेशालय) की जाँच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 4 मार्च को महादेव बेटिंग एप मामले में FIR दर्ज की है। इस FIR में पूर्व CM भूपेश बघेल सहित कुल 21 लोगों के नाम आरोपितों के तौर पर हैं। इन सभी पर जालसाजी, साजिश रचना, सम्पत्ति हड़पना, फर्जी कागजात लगाना जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। सभी पर IPC की धारा 467, 468, 471, 406, 120 बी, 34 और 420 के तहत कार्रवाई की गई है। EOW ने मामले की जाँच शुरू भी कर दी है।

साधना न्यूज़ के मुताबिक भूपेश बघेल के अलावा इस FIR में रवि उप्पल, शुभम सोनी, चंद्रभूषण वर्मा, असीम दास, सतीश चंद्राकर, नीतीश दीवान, सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल, विकास छापरिया, रोहित गुलाटी, विशाल आहूजा, धीरज, अनिल कुमार दमबानी, भीम सिंह यादव, सुनील कुमार, हरिशंकर, सुरेंद्र बागड़ी और सुरेश चोखानी आदि के नाम हैं। वहीं आरोपितों की लिस्ट में 20वें नंबर पर संबंधित ब्यूरोक्रेट्स व पुलिस अधिकारी का जिक्र है। 21वें नंबर पर अज्ञात निजी व्यक्ति लिखा गया है। पूर्व CM भूपेश बघेल का नाम आरोपितों की लिस्ट में 6वे नंबर पर है।

बताते चलें कि भूपेश बघेल को कॉन्ग्रेस ने राजनादगांव से लोकसभा प्रत्याशी के तौर पर टिकट दिया है। कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अब ED भूपेश बघेल को चुनाव में नामांकन करने से रोक सकती है। चुनाव आयोग की नियमावली के मुताबिक यदि किसी प्रत्याशी पर FIR दर्ज है तो उसे केस की जानकारी सार्वजानिक करनी होगी। साथ ही दागी प्रत्याशी को टिकट देने वाली पार्टी को भी ऐसे उम्मीदव्वार को चुनाव लड़ाने की वजह को स्पष्ट करना पड़ता है।

महादेव बेटिंग एप से हो रहे गैरकानूनी काम और उसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कनेक्शन की पूरी क्रोनोलॉजी समझने के लिए हमारी इस रिपोर्ट पर क्लिक करें।

दीवार पर ‘बिस्मिल्लाह अल-रहमान अल-रहीम’ लिख बना दी खुली मस्जिद, 5 बार होने लगी नमाज: लोगों ने पूछा तो अफगान छात्र ने मारा थप्पड़, गुजरात यूनिवर्सिटी में बवाल

गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रावास में शनिवार (16 मार्च) को विदेशी और स्थानीय छात्रों के बीच टकराव हो गया। इसके चलते ‘ए’ ब्लॉक के कमरा नंबर 23 में लैपटॉप, एसी यूनिट और अन्य सामान को नुकसान पहुँचा। इसके साथ ही बाहर पार्क किए गए वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए। इसको लेकर छात्रावास के सुरक्षाकर्मियों की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

विश्वविद्यालय के छात्रावास में अफगानिस्तान, अफ्रीका, श्रीलंका और अन्य देशों के लगभग 300 विद्यार्थी रहते हैं। इनमें से 75 को ‘ए’ ब्लॉक में रखा गया है। 16 मार्च 2024 को इनमें से कुछ छात्र हॉस्टल के मैदान में खुली जगह पर नमाज पढ़ रहे थे। इसी दौरान लगभग 25 हिंदू छात्रों ने सवाल उठाया और किसी सार्वजनिक स्थान, मस्जिद और मदरसा में जाने के लिए कहा।

इसके जवाब में हारून अफगानी नाम का एक अफगान छात्र आगे बढ़कर एक हिंदू युवक को थप्पड़ मार दिया। देखते ही देखते यह विवाद झड़प में तब्दील हो गया। झड़प के दौरान पथराव किया गया और कमरों में तोड़फोड़ की गई। इस झड़प में कुछ छात्र घायल भी हुए हैं। घटना रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि दो विदेशी छात्र – एक श्रीलंका से और दूसरा कजाकिस्तान से – विवाद में घायल हो गए हैं। सिटी पुलिस कमिश्नर ने बताया कि घटना के दस मिनट के भीतर कानून प्रवर्तन घटनास्थल पर पहुंँच गया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि निर्णायक थप्पड़ समेत झड़प को कैद करने वाले विभिन्न वीडियो फिलहाल जाँच के दायरे में हैं।

अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त जीएस मलिक ने कहा, ”गुजरात विश्वविद्यालय में लगभग 300 विदेशी छात्र पढ़ते हैं और लगभग 75 विदेशी छात्र ए ब्लॉक (छात्रावास) में रहते हैं। कल रात करीब साढ़े दस बजे छात्रों का एक समूह नमाज पढ़ रहा था। लगभग 20-25 लोग आए और उनसे पूछा कि वे यहाँ नमाज क्यों पढ़ रहे हैं, उन्हें मस्जिद में जाकर पढ़ना चाहिए। इसके बाद उनके बीच बहस छिड़ गई।”

उन्होंने कहा, “बहस झड़प में बदल गई, पथराव हुआ और बाहर से आए लोगों ने उनके कमरों में तोड़फोड़ की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और 20-25 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एक व्यक्ति की पहचान कर ली गई है। कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है। दोनों छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।”

जाँच के दौरान पता चला है कि हाल ही में विदेशी छात्रों द्वारा एक दीवार और मंच का खुली मस्जिद के रूप में अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा था। दीवार पर अरबी लिपि में ‘बिस्मिल्लाह अल-रहमान अल-रहीम’ लिखा हुआ था। यहाँ विदेशी मुस्लिमों छात्रों द्वारा समूहों में दिन में पाँच बार नमाज अता की जाती थी।

कॉन्ग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने घटना में शामिल विदेशी मुस्लिम छात्रों को अपना समर्थन दिया है। ओवैसी ने विदेशी छात्रों के नजरिए से वीडियो साझा किया है, जिससे सांप्रदायिक माहौल गरमा गया है। कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक गयासुद्दीन शेख भी विदेशी मुस्लिम छात्रों के पक्ष में बोल चुके हैं।

घटना के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ एसीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रावास पहुँचे। इसके अतिरिक्त, घटना की जाँच के लिए नौ जाँच टीमों का गठन किया गया है। गुजरात के गृह राज्यमंत्री ने इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सर्किट हाउस में पुलिस आयुक्त के साथ एक बैठक बुलाई।

छात्र संगठन ABVP ने कहा, “गुजरात विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों के साथ कल देर रात हुई घटना पर एबीवीपी गुजरात सरकार और पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग करती है। कैंपस में इस तरह की घटनाएँ कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हम विश्वविद्यालय प्रशासन से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की माँग करते हैं।”

बजरंग दल की गुजरात इकाई ने अपने एक्स हैंडल से पोस्ट किया, “पहले गुजरात यूनिवर्सिटी में हुई घटना की सच्चाई देखनी चाहिए। कैडरों के साथ गार्ड (कैंपस का सुरक्षा गार्ड) भी थे और उन्होंने नमाजियों को सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने से रोकने का प्रयास किया। नमाजियों ने उग्र होकर हमला किया तो हिंदू समाज ने अपनी प्रतिक्रिया दी और आगे भी देते रहेंगे।”

बिग बॉस OTT 2 का विनर Elvish Yadav गिरफ्तार, साँपों के जहर की तस्करी मामले में नोएडा पुलिस ने पूछताछ के बाद की कार्रवाई

बिग बॉस ओटीटी 2 के विजेता यूट्यूबर एल्विश यादव को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें साँप के जहर मामले में गिरफ्तार किया गया है। एल्विश से पूछताछ चल रही है, जिसके बाद उन्हे कोर्ट में पेश किया जाएगा। बता दें कि एल्विश यादव पर पार्टी में साँपों के जहर के इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि जिस जहर का नमूना लैब गया था वह कोबरा का ही था।

दरअसल नोएडा पुलिस ने रेव पार्टी में साँप के जहर के इस्तेमाल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें पाँच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। उस मामले में एल्विश ने खुद को बेगुनाह बताया था, लेकिन फॉरेंसिक लैब, कॉल डिटेल्स व अन्य सबूतों के आधार पर नोएडा पुलिस ने उनसे जाँच में शामिल होने के लिए कहा था। एल्विश यादव इसी मामले में पुलिस के पास पहुँचे थे। उनसे पुलिस ने पूछताछ की और सवालों के संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

नोएडा पुलिस एल्विश को गिरफ्तार करने के बाद जिला अस्पताल लेकर गई और उनका मेडिकल चेकअप कराया। इसके बाद वो एल्विश को अपने साथ ले गई। अब नोएडा पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश करेगी। हालाँकि रविवार होने के चलते अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि उन्हें सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, या जज के घर पर उन्हें पेश किया जाएगा।

ये है पूरा मामला

बता दें कि बीते साल यानी 8 नवंबर 2023 को नोएडा पुलिस ने रेव पार्टी में साँप के जहर के इस्तेमाल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में नोएडा पुलिस ने राहुल, टीटूनाथ, जयकरन, नारायण और रविनाथ को गिरफ्तार किया था। नोएडा पुलिस ने राहुल नाम के शख्स के पास से साँप का जहर भी बरामद किया था और बाद में इनके ठिकानों से छापेमारी कर कुछ जिंदा साँप भी पकड़े थे। इस मामले में बीजेपी सांसद मेनका गाँधी के संगठन ने भी दखल दिया था और एल्विश के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

नोएडा पुलिस ने फार्म हाउसों में चलने वाली पार्टियों में इस जहर के इस्तेमाल की बात कही थी। इस मामले में एल्विश यादव का नाम सामने आया था। बताया गया कि एल्विश यादव पार्टी के आयोजक एल्विश से ही संपर्क करते थे। हालाँकि मामला सामने आने के बाद एल्विश ने सफाई देते हुए इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था।

अपनी सफाई में एल्विश यादव ने कहा था, “मैं सुबह उठा, मैंने मीडिया में न्यूज देखी कि एल्विश नशीले पदार्थ के बिजनेस में शामिल हैं। मैं बता दूँ कि मेरे खिलाफ जितने भी चीजें चल रही हैं वो फेक हैं। मेरा इससे कोई लेना देना नहीं है।” हालाँकि नोएडा पुलिस ने फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल्स और बयानों के आधार पर अब एल्विश को गिरफ्तार कर लिया है।

मानसिक दिव्यांग युवक का अपहरण, कुकर्म की वजह से गुप्तांग से आ गया खून; पहले भी नाबालिग बच्चे को हवस का शिकार बना चुका मोहम्मद अयूब खाँ धराया

राजस्थान के पाली जिले में एक 21 वर्षीय युवक से कुकर्म का मामला सामने आया है। पीड़ित मानसिक तौर पर दिव्यांग बताया जा रहा है। अप्राकृतिक सेक्स का आरोप मोहम्मद अयूब खाँ नाम के एक व्यक्ति पर लगा है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना 10 मार्च 2024 की है। अयूब पर पूर्व में भी एक नाबालिग बच्चे से कुकर्म करने का आरोप लग चुका है। पुलिस अयूब को रिमांड पर ले कर उसकी अन्य करतूतों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना पाली जिले के थाना क्षेत्र सुमेरपुर की है। यहाँ मस्जिद गली के पास रहने वाला अयूब एक ढाबे पर काम करता है। 10 मार्च को मानसिक तौर पर दिव्यांग युवक भटकते हुए उसकी गली के पास पहुँच गया। यहाँ रास्ते में उसे अयूब मिला। उसने युवक को डराया-धमकाया और जबरन एक ऑटो में बिठा लिया। यहाँ से वो पीड़ित को अपने साथ शिवगंज और फालना नाम की 2 जगहों पर ले गया। आरोप है कि इन दोनों स्थानों पर उसने पीड़ित से कुकर्म किया।

कुकर्म के बाद अयूब पीड़ित को ऑटो से सुमेरपुर इलाके में छोड़ दिया और खुद भाग निकला। अयूब की करतूत से पीड़ित के प्राइवेट पार्ट में घाव हो गया था। वह जैसे-तैसे अपने घर पहुँचा तो परिजनों ने घाव देख कर इसकी वजह पूछी। अयूब का नाम सामने आने पर उसके खिलाफ पुलिस में तहरीर दी गई। पीड़ित को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मोहम्मद अयूब खाँ को गिरफ्तार कर लिया है। अपहरण और अप्राकृतिक सेक्स की धाराओं में FIR दर्ज की गई है।

शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि कुकर्म को ले कर अयूब का इतिहास भी कलंकित रहा है। उस पर साल 2005 में भी एक नाबालिग बच्चे से कुकर्म करने का आरोप लगा था। इस्माइल खान के बेटे अयूब पर आरोप है कि वो नाबालिग बच्चों को अपना शिकार बनाता है। बाद में वो मासूमों को डरा धमका कर मुँह बंद रखने की धमकी भी देता है। पुलिस ने अयूब का काला इतिहास खँगालने के लिए अदालत से उसका कस्टडी रिमांड लिया है। माना जा रहा है कि अभी अयूब की कई और करतूतों से पर्दा उठ सकता है।

बाराबंकी में काशी विश्वनाथ की तर्ज पर ‘महादेवा कॉरिडोर’: लोध्रेश्वर मंदिर क्षेत्र की 15 एकड़ जमीन परियोजना में शामिल, यूपी सरकार ने जारी किया बजट

लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने बाराबंकी में लोध्रेश्वर महादेवा मंदिर के क्षेत्र को कॉरिडोर में बदलने के लिए निर्णायक कदम उठाया और लोध्रेश्वर मंदिर के आसपास की 15 एकड़ जमीन पर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर महादेवा कॉरिडोर बनाने के लिए बजट पास कर दिया। ये बजट आसपास की जमीनों के अधिग्रहण के लिए जारी किया गया है, जिसकी कुल रकम 48.70 करोड़ रुपए है। इसमें से सरकार ने पहली किस्त के लिए करीब 7 करोड़ रुपए की पहली किस्त भी जारी कर दी।

बाराबंकी के डीएम सत्येंद्र कुमार ने बीते दिनों महादेवा कॉरिडोर के लिए लोध्रेश्वर महादेव मंदिर के आसपास की 4.7 हेक्टेअर जमीन की खरीद के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इसके साथ ही पास की .372 हेक्टेअर सरकारी जमीन को भी खाली कराया जाना है। इस जमीन के अधिग्रहण में 127 घर और दुकानें आ रही हैं, जिसका अधिग्रहण किया जाना जरूरी हो गया था। हालाँकि अब सारे रास्ते खुल चुके हैं और प्रशासन जल्द ही महादेवा कॉरिडोर क्षेत्र में आने वाले घरों और मंदिरों का अधिग्रहण कार्य शुरू कर बैनामे की कार्रवाई पूरी कराएगी।

बाराबंकी के डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि सरकार ने बजट की पहली किस्त पास कर दी है, जिसके बाद अब कॉरिडोर के दायरे में आने वाली जमीनों का बैनामा कराया जाएगा। महादेवा कॉरिडोर के तहत कुल 15 एकड़ जमीन की पहचान की गई है, जो मंदिर क्षेत्र में है। इसके इलावा इस कॉरिडोर के आसपास भी करीब 25 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य कराए जाएँगे।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाराबंकी में बाढ़ के दौरान राहत सामग्री के वितरण के लिए रामनगर पहुँचे थे, तो उन्होंने लोध्रेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक भी किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोध्रेश्वर महादेव मंदिर को काशी विश्वनाम कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने की इच्छा जताई थी, और प्रशासन से इस परियोजना को तैयार करने के लिए कहा था। इस पर छह माह से काम चल रहा था और पैमाइश के बाद कार्ययोजना शासन को भेज दी गई थी, जिसे कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई। इसके लिए बजट जारी होने के साथ ही अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इच्छा तेजी से पूरी होती दिख रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ केस दर्ज करो: कोर्ट ने पुलिस को दिया आदेश, हिंदुओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दी गई थी याचिका

हिंदू देवी-देवता को लेकर सवाल उठाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने लखनऊ की वजीरगंज थाना पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। स्वामी प्रसाद पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंबरीश कुमार श्रीवास्तव ने समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव मौर्या के खिलाफ विवादित बयान की जाँच के आदेश दिए हैं। मौर्या के खिलाफ मामला दर्ज करने का आग्रह रागिनी रस्तोगी ने किया था। रागिनी का आरोप है कि पिछले साल 15 नवंबर को अखबारों में छपे उनके एक बयान से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुई हैं।

शिकायत के अनुसार, स्वामी प्रसाद मौर्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा था कि जब विभिन्न धर्मों के लोग दो हाथ और दो पैरों के साथ पैदा हुए थे, तो एक हिंदू देवी चार हाथों के साथ कैसे पैदा हो सकती है। रागिनी ने कहा कि मौर्या ने कई मौकों पर इस तरह के बयान देकर हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।

बता दें कि अगस्त 2023 में स्वामी प्रसाद एक वीडियो X पर पोस्ट किया था। इस वीडियो में वे कहते दिखे, “ब्राह्मणवाद की जड़ें बहुत गहरी हैं और सारी विषमताओं का कारण ब्राह्मणवाद है। हिंदू नाम का कोई धर्म है ही नहीं। यह केवल धोखा है।” उन्होंने कहा था कि जो ब्राह्मण धर्म है, उसी को हिंदू धर्म कहकर देश के दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों को अपने धर्म के मकड़जाल में फँसाने की एक साजिश है।

नवंबर 2023 में उन्होंने दिवाली त्योहार और माँ लक्ष्मी का मजाक बनाया था। अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने दिवाली पर अपनी पत्नी की पूजा करते हुए तस्वीरें शेयर की हैं। उन्होंने माँ लक्ष्मी पर भी सवाल खड़ा किए। बता दें कि दिवाली में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिन्हें धन-धान्य एवं समृद्धि की देवी माना गया है। इससे पहले उन्होंने रामचरितमानस को भी भला-बुरा कहा था।

बता दें कि मौर्या के खिलाफ उत्तर प्रदेश में रामचरितमानस पर विवादित बयान देने के कारण कई मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनवरी 2024 को समाजवादी पार्टी के निवर्तमान नेता एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्या के ऊपर चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

मौर्या ने रामचरितमानस का नाम लेते हुए था कहा कि अब करोड़ों लोग इस किताब को नहीं पढ़ते हैं, क्योंकि इसमें सब बकवास लिखा गया है। स्वामी प्रसाद ने रामचरितमानस के कुछ हिस्से को आपत्तिजनक बताते हुए सरकार से उसे हटाने की माँग की थी। उन्होंने आगे कहा था कि अगर वो अंश ना हट पाए तो पूरी किताब को ही बैन कर देना चाहिए।

मौर्या ने यहाँ तक कहा था कि वह रामचरितमानस को धर्मग्रंथ मानते ही नहीं हैं, क्योंकि इस किताब को तुलसीदास ने अपनी खुद की ख़ुशी के लिए लिखा था। स्वामी प्रसाद ने आरोप लगाया था कि रामचरितमानस में कुछ ऐसी चौपाइयाँ हैं, जिनमें शूद्रों को अधम होने का सर्टिफिकेट दिया गया है। उन्होंने उन चौपाइयों को एक वर्ग के लिए गाली जैसे बताया था।

मौर्या ने करीब एक महीने पहले समाजवादी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले उन्होंने पार्टी के महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता भी छोड़ दी थी। मौर्या ने अपनी नई पार्टी का गठन कर लिया था, जिसका नाम राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी रखा है।

हिन्दू लड़की को भगा ले गया इम्तियाज, ग्राम प्रधान नरगिस खातून ने घोषित कर दिया मुस्लिम: कोचिंग के नाम पर धर्मांतरण की क्लास का ‘जय श्री राम’ के नारों से विरोध

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यहाँ की एक महिला ग्राम प्रधान पर एक हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल कराने का आरोप लगा है। पीड़िता दिल्ली की रहने वाली बताई जा रही है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने इस मामले की जड़ में ‘लव जिहाद’ होने का दावा किया है। वहीं एक अन्य घटनाक्रम में राजस्थान के उदयपुर में ईसाई धर्म परिवर्तन का आरोप लगा कर एक इंस्टिट्यूट के बाहर प्रदर्शन हुआ है। पुलिस इस केस में भी जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र हाफिजगंज का है। यहाँ शिवसागर नाम के ‘बजरंग दल’ पदाधिकारी ने गुरुवार (14 मार्च, 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि गाँव लाडपुर उस्मानपुर निवासी इम्तियाज अंसारी दिल्ली से बहला-फुसला कर एक हिन्दू लड़की को भगा कर लाया है। गाँव में पीड़िता को इस्लाम कबूल करवाने की तैयारियों की आशंका जताई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगा है कि गाँव की महिला प्रधान नरगिस खातून और उनके शौहर तस्लीम ने पीड़िता का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया है।

शिकायत में आगे बताया गया है कि इम्तियाज अंसारी ने 10 मार्च, 2024 में जारी हुए इस प्रमाण पत्र में लड़की का नाम कुमकुम बानो और जाति व धर्म मुस्लिम कर दिया है। लड़की का दिल्ली वाला पता भी छिपा कर उसे लाडपुर उस्मानपुर कर दिया गया है। इन कागजातों के आधार पर पीड़िता के अन्य दस्तावेज ब्लॉक से बनवाने की शिकायत हुई है। X हैंडल पर हुई शिकायत के बाद बरेली पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

ईसाई धर्मांतरण की साजिश के आरोप में प्रदर्शन

दूसरा मामला राजस्थान के उदयपुर जिले का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ के थानाक्षेत्र सुखेर में शनिवार (16 मार्च 2024) को एक इंस्टिट्यूट के अंदर ईसाई धर्म परिवर्तन का आरोप लगा कर स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन किया है। यह इंस्टिट्यूट पन्ना विहार इलाके में चलता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि किराए के मकान में चलने वाले ‘द पिक्सल्स एरा’ नाम के इस इंस्टिट्यूट में पढ़ने वाले छात्रों को बाइबिल आदि बाँटी जाती हैं। इंस्टिट्यूट में कुछ बाहरी लोगों के भी आने-जाने की बात कही गई है। प्रदर्शनकारी यहाँ जय श्री राम के नारे लगा रहे थे।

जब स्थानीय लोग यहाँ प्रदर्शन कर रहे थे तभी इंस्टिट्यूट चलाने वाले बाहर निकल आए। उनकी प्रदर्शनकारियों से नोकझोंक भी हुई। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। कुछ लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। हिरासत में लिए गए लोगों में महिलाएँ भी शामिल हैं। इंस्टिट्यूट के अंदर मिले लैपटॉप आदि की भी जाँच करवाई जा रही है। बताया जा रहा है कि अंदर कुछ ईसाई मजहब की पुस्तकें भी बरामद हुई हैं। क्षेत्रवासियों ने आरोपितों पर धर्मान्तरण को बढ़ावा देने का आरोप लगा कर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

शाहजहाँ शेख का भाई आलमगीर 2 दोस्तों के साथ गिरफ्तार, पूछताछ में सब CBI को भटका रहे थे: खेती लायक नहीं रहे संदेशखाली में कब्ज़ा किए गए जमीन, राज्यपाल ने बनाई कमिटी

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण का मुद्दा पूरे देश में चर्चा में रहा, जिसमें राज्य की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) का नेता शाहजहाँ शेख मुख्य आरोपित था। शाहजहाँ शेख ED अधिकारियों पर हमले के बाद से ही फरार रहा, जो अब CBI की गिरफ्त में है। अब उसके भाई आलमगीर और दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। न सिर्फ यौन शोषण, बल्कि इन सब पर अवैध जमीन कब्जे के भी आरोप हैं। पीड़िताओं में अधिकतर जनजातीय समाज के हैं।

आलमगीर और उसके दोनों साथियों को CBI ने समन जारी किया था। 5 जनवरी, 2024 को ED अधिकारियों के खिलाफ हुई हिंसा में उन पर कार्रवाई की गई है। अब शनिवार (16 मार्च, 2024) को गिरफ्तार किया गया है। महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद संदेशखाली का मुद्दा चर्चा में आया था। भाजपा ने भी इसे उठाया था। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बंगाल में ये मुद्दा गर्म है। गिरफ़्तारी से पहले आलमगीर से CBI के कार्यालय में 9 घंटे पूछताछ की गई।

बताया गया है कि पूछताछ के दौरान न सिर्फ आलमगीर, बल्कि उसके साथी माफीजुल मोल्ला और सिराजुल मोल्ला भी CBI के अधिकारियों को गुमराह कर रहे थे। ये लोग सवालों का अलग-अलग जवाब दे रहे थे। अंततः रात के करीब 9 बजे CBI ने उनकी गिरफ़्तारी की कार्रवाई की। अगले दिन रविवार (17 मार्च, 2024) को इन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। संदेशखाली मामले में अब तक 14 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। कई ED अधिकारी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे।

उधर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है, जो संदेशखाली में कब्जा किए गए जमीनों का सही उपयोग कैसे किया जाए इस संबंध में अध्ययन करेगी। इन जमीनों को कब्ज़ा कर के अवैध रूप से मछलीपालन किया जा रहा था। ये जमीन उनके मालिकों को लौटा दी गई है, लेकिन अब ये खेती के लायक नहीं रह गई है। मिट्टी की ऊपरी परत को रिप्लेस करना पड़ेगा, ताकि इसमें खेती हो। दिल्ली के कृषि विशेषज्ञों से बोस ने इस संबंध में बात की थी।

असम के कवि रकीबुद्दीन अहमद ने नीलाभ सौरभ के नाम से फेसबुक पर बनाई आईडी, भगवान राम और माता सीता का किया अपमान: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को असम के मुस्लिम कवि रकीबुद्दीन अहमद को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी, जिस पर हिंदू देवताओं भगवान राम और सीता के बारे में एक अश्लील कविता पोस्ट करने का आरोप है। सुप्रीन कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने एकपक्षीय सुनवाई में इस मामले में असम सरकार से जवाब भी माँगा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को पटलते हुए अहमद को जमानत दी, क्योंकि उसने ‘माफी’ माँग ली थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रकीब उद्दीन जाँच में सहयोग करेगा, इसलिए उसे गिरफ्तार न किया जाए। खास बात ये है कि रकीबुद्दीन अहमद को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में उतरे 4 वकीलों में से 3 हिंदू हैं। इस केस में रकीबुद्दीन के लिए एडवोकेट शाहरुख खान, आकृति चौधरी, शांतनु सिंह और साधना माधवन ने कोर्ट में पैरवी की।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने नहीं दी थी राहत

रकीबुद्दीन अहमद ने फेसबुक पर नीलाभ सौरभ नाम से गलत पहचान वाली एक आईडी बनाई और उस पर भगवान राम और माता सीता का अपमान करने वाली कविता पोस्ट की। इस मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में वो फरार चल रहा था और 22 फरवरी को गुवाहाटी हाई कोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण के लिए कहा था।

इस मामले में रकीबुल हसन के खिलाफ दो धार्मिक समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने और धार्मिक भावनाओं को ढेस पहुँचाने के मामले में केस दर्ज हुआ था। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कहा था कि रकीब ने अपनी पहचान बदल कर जो काम किया, वो बेहद गंभीर है। ऐसे में उसे पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत है। हाई कोर्ट ने इस मामले में गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई थी। इसके बाद उसने तुरंत ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे गिरफ्तारी से राहत दे दी है।

ऑपइंडिया के पास मौजूद सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने रकीबुद्दीन अहमद को पुलिस जाँच में शामिल होने के निर्देश दिए हैं, साथ ही कहा है कि पुलिस उसे पूछताछ पूरी होने तक गिरफ्तार नहीं करेगी। उसके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के बताया कि आरोपित एक नामी कवि है और उसे साहित्य अकादमी सम्मान भी दिया जा चुका है। उसने इस मामले में पहले ही माफी माँग ली थी।

‘माल-ए-गनीमत’ व्यवस्था पर ISIS के आतंकियों को था विश्वास, पैसे जुटाने के लिए लूटपाट का लेते थे सहारा: NIA ने कोर्ट में जमानत का किया विरोध

केरल के त्रिशूर और पलक्कड़ से पकड़ाए इस्लामिक स्टेट (IS) के आतंकियों की जाँच में पता चला है कि यह मॉड्यूल ‘ग़नीमा’ की पुरानी अवधारणा में विश्वास करता था। गनीमा अरबी का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘युद्ध के दौरान की लूट’ है। दरअसल, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मन्नारक्कड़ से पकड़ाए पाँचवें आरोपित साहिर ईपी की जमानत याचिका के दौरान इसे अदालत में बताया।

यह मामला साल 2023 में गठित आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ से संबंधित है। इस मॉड्यूल के आतंकी समाज के प्रमुख सदस्यों और अन्य समुदायों के धार्मिक स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे थे। इस मामले में NIA ने मथिलाकाथ कोदायिल आसिफ, सैयद नबील अहमद, शियास टीएस, रईस टीएस और साहिर को गिरफ्तार किया था।

एनआईए द्वारा मामला दर्ज करने के बाद इस मॉड्यूल के संस्थापक नबील और एक अन्य सदस्य अमीर भूमिगत हो गए थे। हालाँकि, उन्हें बाद में पकड़ लिया गया था। वहीं, इन दोनों को भूमिगत होने में मदद करने वाले साहिर को भी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने उठाया था। एजेंसी ने कोर्ट बताया कि इन आरोपितों के अपराध गनीमा पर आधारित हैं।

एजेंसी ने कोर्ट ने बताया कि वे चोरी और डकैती करके अपनी गतिविधियों के लिए फंडिंग करने में विश्वास करते थे। एनआईए ने कहा कि मॉड्यूल के सदस्यों का मानना था कि चोरी से प्राप्त धन लूट का माल है, जिसका इस्तेमाल अपने लाभ के लिए किया जा सकता है। केंद्रीय एजेंसी ने कहा कि नबील प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सदस्य था।

नबील 20 अप्रैल 2023 को हुई एक डकैती सहित कई अपराधों में शामिल था। बाद में उसे केरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और चावक्कड़ जेल में बंद कर दिया। हालाँकि, जमानत पर रिहा होने के बाद भी उसने अपने आपराधिक तरीके जारी रखे। यहाँ तक कि वह केरल में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों के लिए भी धन की व्यवस्था करने लगा।

इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए NIA ने जब आसिफ को सत्यमंगलम से गिरफ्तार किया तो नबील ने साहिर को संपर्क किया। इसके बाद साहिर ने नबील की बीवी के लिए एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड की व्यवस्था की। साहिर ने नबील को अलानल्लूर में स्थित एक लॉज में किराए पर कमरा लेने में मदद की। इसके लिए साहिर ने अपना आईडी कार्ड दिया।

सहीर ने बताया था कि नबील उसे शेयर ट्रेडिंग का प्रशिक्षण दे रहा था और फोन एवं सिम कार्ड उसी के लिए है। उन लोगों को नबील के आपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी नहीं थी। हालाँकि, NIA ने कहा कि डकैती के बाद नबील की गिरफ्तारी की खबरें मीडिया में थीं और उन खबरों को नजरअंदाज करना असंभव था।

आसिफ की गिरफ्तारी के बाद नबील से उसके संबंधों की भी खबरें भी खूब प्रसारित हुईं। एजेंसी ने कहा कि कॉल डिटेल्स और अन्य सबूतों से पता चलता है कि सितंबर 2023 में चेन्नई से गिरफ्तार होने से पहले साहिर ने नबील को पुलिस को चकमा देने में मदद की थी। इस तरह साहिर ने नबील की कई दफे मदद की।

तमाम तर्कों को सुनने के बाद एनआईए कोर्ट ने साहिर की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उस पर लगे आरोप गंभीर हैं। न्यायाधीश पीके मोहनदास ने कहा, “मेरे सामने रखी गई सामग्रियों की जाँच पर अदालत का विचार है कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सच है।”