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सलमान का हिन्दू लड़की से अफेयर और मार डाला साथी बादल सक्सेना को: 76 दिन बाद UP पुलिस ने मुंबई से दबोचा आदिल को

उत्तर प्रदेश के नोएडा जिले में 20 साल के बादल सक्सेना की हत्या के मामले में पुलिस ने आदिल नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस से बचने के लिए आदिल मुंबई भाग गया था। इस मामले में सलमान नाम के युवक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सलमान का अपने ही ऑफिस में काम करने वाली एक हिन्दू लड़की से अफेयर चल रहा था। हत्या की वजह बादल सक्सेना द्वारा सलमान और हिन्दू लड़की के रिश्ते को कम्पनी में सबको बताने से उठे गुस्से को बताया जा रहा है। आदिल की गिरफ्तारी मंगलवार (5 मार्च 2024) को हुई है।

यह मामला नोएडा के थानाक्षेत्र ईकोटेक-3 का है। 30 दिसंबर 2023 को नोएडा पुलिस को आम्रपाली पुलिया के पास एक अज्ञात युवक का शव पड़े होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने शव को बरामद किया, जिसकी पहचान 20 वर्षीय बादल सक्सेना के तौर पर हुई थी। मूल रूप से अलीगढ़ जिले के मायापुरी इलाके का रहने वाला बादल सक्सेना नोएडा की एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता था। बादल के बड़े भाई विष्णु ने इस मामले की तहरीर 30 दिसंबर को ही थाने में दी थी।

तहरीर में विष्णु सक्सेना ने बताया है कि उनका भाई 21 दिसंबर 2023 से ही तब लापता हो गया था, जब वो कम्पनी में काम करने गया था लेकिन लौट कर नहीं आया। 1 सप्ताह तक तलाश करने के बाद विष्णु सक्सेना ने 28 दिसंबर को पुलिस में अपने भाई की गुमशुदगी दर्ज करवा दी थी। 30 दिसंबर को भाई की लाश नाले के पास मिलने के बाद विष्णु ने आशंका जताई कि उनके भाई की ही कम्पनी में काम करने वाले सलमान ने एक लड़की के साथ मिल कर हत्या कर दी। शिकायत में यह भी बताया गया था कि कुछ दिनों पहले बादल का कम्पनी में ही काम करने वाले एक अन्य युवक आदिल से झगड़ा भी हुआ था।

तब पुलिस ने यह केस IPC की धारा 302 और 201 के तहत दर्ज कर लिया था और मामले में जाँच शुरू कर दी थी। FIR में सलमान के साथ उनकी एक सहकर्मी महिला को नामजद किया गया था। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। केस दर्ज होते ही सलमान और आदिल फरार हो गए थे। जाँच के दौरान पुलिस ने 18 जनवरी 2024 को सलमान को गिरफ्तार कर लिया था। इस बीच पुलिस का शिकंजा कसते ही आदिल मुंबई फरार हो गया। हालाँकि पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी रही।

आखिरकार मार्च 2024 में पुलिस को मुंबई में आदिल की सटीक लोकेशन मिली। इस लोकेशन के आधार पर 5 मार्च 2024 को नोएडा पुलिस ने पूर्वी मुंबई के मसूरी नगर स्थित मारिया मंजिल पर दबिश दी। यहाँ आदिल मौके पर मिल गया, जिसे गिरफ्तार करके नोएडा लाया गया। पुलिस ने बताया कि सलमान का अपनी ही कम्पनी में काम करने वाली एक लड़की शालिनी (बदला हुआ नाम) से अफेयर चल रहा था। इस अफेयर की जानकारी बादल सक्सेना को हो गई थी। इसके बाद सलमान को लगा कि बादल उसे कम्पनी में बदनाम कर रहा है।

इस वजह से सलमान ने बादल सक्सेना की हत्या करने की साजिश रच डाली। इस साजिश में उसने कम्पनी में अपने साथ काम करने वाले बिजनौर निवासी 24 वर्षीय आदिल को अपने साथ मिला लिया। आखिरकार 21 दिसंबर 2023 को सलमान और आदिल ने मिल कर बादल सक्सेना की हत्या कर दी और लाश को आम्रपाली मॉल के पास नाले में फेंक दिया था।

वामपंथी गुंडों की प्रताड़ना से छात्र की मौत के मामले में होगी CBI जाँच, परिवार ने SFI नेताओं पर हत्या का लगाया है आरोप

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने ऐलान किया है कि छात्र जे एस सिद्धार्थन की मौत के मामले में राज्य केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) जाँच करवाएगा। मुख्यमंत्री विजयन ने यह ऐलान सिद्धार्थन के परिवार से मिलने के बाद किया है। फरवरी में वायनाड के एक कॉलेज में सिद्धार्थन की मौत रहस्यमयी परिस्थितयों में हो गई थी।

मुख्यमंत्री के दफ्तर द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि सिद्धार्थन की माता ने उन्हें एक मेमोरेंडम सौंपा है जिसमें सीबीआई जाँच की माँग की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में पुलिस सभी आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और पुलिस जाँच कर रही है। हालाँकि, अब राज्य सरकार सीबीआई जाँच की अनुशंसा करेगी।

गौरतलब है कि 18 फरवरी, 2024 को वायनाड के पुक्कोड़ यूनिवर्सिटी में पशु विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र जे एस सिद्धार्थन की मौत हो गई थी। सिद्धार्थ को कॉलेज हॉस्टल के एक टॉयलेट में लटकता पाया गया था। इसके बाद सिद्धार्थन की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में कई खुलासे हुए थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि मौत से पहले सिद्धार्थ को बुरी तरीके से मारा पीटा गया था। उसका पेट खाली था और शरीर पर घाव थे।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था। इस मामले में 12 छात्रों को कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया था। निलंबित किए जाने वालों में SFI के वामपंथी छात्र नेता भी हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने बताया था कि उनके बेटे को वामपंथी छात्रों ने काफी प्रताड़ित किया जिसके कारण यह मौत हुई।

उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ ने 14 फरवरी (वैलेंटाइन डे) के दिन एक छात्रा के साथ डांस किया था। वामपंथी छात्र इससे खीझ गए थे। वह अगले दिन घर लौटने वाला था। लेकिन इन SFI नेताओं ने बेटे को हॉस्टल में बुलाकर प्रताड़ित करना चालू किया। तीन दिनों तक लगातार उसे प्रताड़ित किया गया। उसे खाना पीना नहीं दिया गया। उसे रॉड से पीटा गया। उसको नंगा करके हॉस्टल में घुमाया गया और बेइज्जत किया गया। इसके बाद सिद्धार्थ के आत्महत्या की खबर आई।

सिद्धार्थ के पिता ने आरोप लगाया था कि उसकी मौत की खबर से दो घंटे पहले उसने फ़ोन किया था। उसने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसे मार कर लटकाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में सभी 18 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें से 12 को मुख्य आरोपित बनाया गया था। इन आरोपितों में वामपंथी छात्र सगठन SFI के छात्र नेता भी शामिल थे। इसमें मुख्य आरोपित सिंजो को भी गिरफ्तार कर लिया गया था जो कि सिद्धार्थन को प्रताड़ित करने का आरोपित है।

सिद्धार्थन का परिवार लगातार इस मामले में उच्च स्तरीय जाँच की माँग कर रहा था। उनका कहना था कि पुलिस सिद्धार्थन की मौत मामले में ढील बरत रही है क्योंकि आरोपित सत्ताधारी पार्टी के छात्र समूह से जुड़े हैं। इसी को लेकर वह लगातार सीबीआई जाँच की माँग कर रहे थे। उनके मुख्यमंत्री विजयन से मिलने के बाद यह बात स्पष्ट हुई है कि इस मामले की तह तक सीबीआई जाएगी।

मुस्लिम बहुल इलाके में 31 साल से बंद पड़ा था शिव मंदिर, भाजपा MLA बालमुकुंद ने ताला तोड़ की पूजा: विरोध में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारे लगाए

राजस्थान के जयपुर के हवामहल से भाजपा विधायक आचार्य बालमुकुंद एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार चर्चा की वजह महाशिवरात्रि पर लम्बे समय से बंद एक प्राचीन शिव मंदिर में जाकर पूजा करना है। यह मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित है। वे मंदिर पर लटक रहे ताले को आरी से काटकर अंदर घुसे। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक रफीक खान को जमकर कोसा।

पूजा के दौरान मुस्लिम पक्ष ने नाराजगी जताई और ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारे लगाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्राचीन मंदिर जयपुर के आदर्श नगर इलाके में स्थित है। यहाँ से कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान चुनाव जीते हैं। आचार्य बालमुकुंद का दावा है कि पहले मंदिर के आसपास हिन्दू समाज की अच्छी-खासी आबादी थी, जो एक-एक करके वहाँ से विभिन्न कारणों से चले गए।

ऐसी स्थिति में मंदिरों के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बताते हुए आचार्य बालमुकुंद इस मंदिर में पहुँच गए। मंदिर के गेट पर बड़ा-सा ताला लटक रहा था। लम्बे समय से वह मंदिर खुला भी नहीं था। विधायक ने कुछ देर तक चाबी न मिलने के बाद मंदिर में लगे ताले को आरी से काट डाला। मंदिर के अंदर जाने पर वहाँ काफी गंदगी दिखी। इसमें लम्बे समय से साफ-सफाई भी नहीं हुई थी।

धर्मस्थल की इस दुर्दशा पर भाजपा विधायक को काफी गुस्सा आया। उन्होंने रफीक खान पर मंदिरों के प्रति उपेक्षा बरतने का आरोप लगाया। इस दौरान विधायक आचार्य बालमुकुंद ने समर्थकों से मंदिर की सफाई करवाई और फिर भगवान महादेव की पूजा अर्चना की। एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है कि यह मंदिर 1993 यानी 31 साल से बंद है।

इस दौरान आसपास के मुस्लिम वहाँ जमा हो गए। आरोप है कि जब आचार्य बालमुकुंद भगवान शिव की पूजा कर रहे थे, तब ‘अल्लाह हु अकबर’ के नारे लगाए जा रहे थे। इसके बावजूद मोहल्ले के मुस्लिम तबके के कुछ लोगों ने माहौल खराब करने का आरोप भाजपा विधायक पर ही मढ़ने की कोशिश की। दलील के तौर पर उन्होंने महाशिवरात्रि के दिन अपने जुमे का दिन होना बताया।

BJP ने 10 MLC उम्मीदवारों की सूची घोषित की: बिहार में 3 और यूपी में 7 नामों की घोषणा, झारखंड के राज्यसभा की 1 सीट पर प्रदीप वर्मा को उतारा

बीजेपी ने बिहार और उत्तर प्रदेश के विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों का ऐलान किया है। बिहार से बीजेपी ने मंगल पांडेय, डॉ लाल मोहन गुप्ता और अनामिका सिंह को उम्मीदवार बनाया है। उत्तर प्रदेश से बीजेपी ने विजय बहादुर पाठक, महेंद्र कुमार सिंह, अशोक कटारिया, मोहित बेनीवाल, धर्मेंद्र सिंह, रामतीरथ सिंघल, संतोष सिंह को उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी गई है।

बीजेपी ने इन 3 लोगों को बनाया उम्मीदवार

बीजेपी ने बिहार से विधान परिषद के लिए मंगल पाण्डेय, डॉ लाल मोहन गुप्ता और अनामिका सिंह के नाम घोषित किए हैं। वहीं, मौजूदा एमएलसी और सीनियर नेता शाहनवाज हुसैन को पार्टी ने टिकट नहीं दिया है, उनके बारे में माना जा रहा है कि वो लोकसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार बन सकते हैं। आगामी 21 मार्च को बिहार विधान परिषद के लिए 11 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं।

यूपी में इन 7 लोगों को टिकट

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के लिए जिन सात लोगों को उम्मीदवार बनाया है, उनमें बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल का नाम शामिल है। इसके अलावा इस लिस्ट में विजय बहादुर पाठक, डॉ. महेंद्र कुमार सिंह, अशोक कटारिया, धर्मेंद्र सिंह, रामतीरथ सिंघल और संतोष सिंह का नाम भी शामिल हैं।

झारखंड की राज्यसभा सीट के लिए भी उम्मीदवार की घोषणा

बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने झारखंड में होने वाले आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा की है। बीजेपी ने झारखंड से डॉ प्रदीप वर्मा को उम्मीदवार बनाया है।

बता दें कि बिहार में एमएलसी चुनाव के लिए 11 सीटें खाली हैं। जिसमें बीजेपी के अलावा जेडीयू से नीतीश कुमार, खालिद अनवर, हम पार्टी से संतोष सुमन के नाम हैं, तो आरजेडी से राबड़ी देवी, अब्दुल बारी सिद्दीकी, फैसल अली, उर्मिला ठाकुर और सीपीआईएमएल से शशि यादव शामिल हैं।

नाइजीरिया में 287 छात्र-छात्राओं का फिर अपहरण, सरकार ने सेना भेजी: कुछ दिन पहले ही इस्लामी आतंकी संगठन बोको हरम ने 200 बच्चों का किया था अपहरण

अफ्रीकी देश नाइजीरिया के उत्तर पश्चिमी प्रान्त के एक स्कूल से सशस्त्र हमलावरों ने 287 बच्चों का अपहरण कर लिया। जिन बच्चों का अपहरण किया गया है वह सभी 8-15 वर्ष के आयु के हैं। उन्हें मोटरसाइकिल पर आए हमलावर उठा ले गए। इन बच्चों को मुक्त करवाने के लिए नाइजीरिया के राष्ट्रपति ने सेना भेजी है।

जानकारी के अनुसार, नाइजीरिया के उत्तर पश्चिमी हिस्से के कुरीगा कस्बे में बृहस्पतिवार (7 मार्च, 2024) को यह घटना हुई। जब बच्चों का अपहरण किया गया तब वह रोजाना सभा में खड़े थे। इसी दौरान हमलावर आकर उन्हें उठा ले गए। बीबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पहले इन बच्चों की संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी लेकिन बाद में पता चला कि कुल 312 बच्चों का अपहरण हुआ था जिसमें से 25 सकुशल वापस आ गए। हमलावरों के कब्जे में अभी भी 287 बच्चे हैं। इनमें से 187 बच्चे सेकंडरी स्कूल जबकि 125 प्राथमिक स्कूल से थे।

हमलावरों ने एक बच्चे को गोली भी मार दी थी। उसकी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत भी हो गई। बच्चों को बचाने के लिए जो भी लोग गए थे उन पर इन हमलावरों ने गोलियाँ बरसा दी। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। बताया गया है कि यह हमलावर बोको हराम से अलग हुई एक शाखा अनासारु के सदस्य हैं। बोको हराम नाइजीरिया का एक आतंकी संगठन है। हालाँकि, अभी तक किसी भी संगठन ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है। माना जा रहा है कि इन बच्चों का अपहरण फिरौती वसूलने के लिए किया गया है।

इन बच्चों के साथ ही एक शिक्षक का भी इन हमलावरों ने अपहरण किया है। रिपोर्ट बताती है कि कुरीगा कस्बे के लगभग हर परिवार का एक बच्चा इस अपहृत बच्चों में शामिल है। नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला टिनुबू ने इन बच्चों को मुक्त करवाने के लिए सेना भेज दी है। सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल भी यहाँ पहुँच चुका है। राज्य के राज्यपाल ने लोगों को आश्वासन दिया है कि हर बच्चे को बचा लिया जाएगा। इसके लिए सुरक्षा एजेंसियाँ काम कर रही हैं।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब नाइजीरिया में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अपहरण हुआ है। इसी हफ्ते हमलावरों ने लगभग 200 बच्चों और महिलाओं को नाइजीरिया के उत्तरपूर्वी हिस्से से अपहरण कर लिया था। इनका अपहरण तब हुआ जब यह जलाने वाली लकड़ी इकट्ठा कर रहे थे। इससे पहले भी लगातार बच्चों और महिलाओं का अपरहण होता रहा है। गौरतलब है कि नाइजीरिया में बीते वर्षों में इस्लामिक आतंकवाद के कारण स्थितियाँ काफी बिगड़ी हैं।

PM मोदी का अपमान मुइज्जु सरकार को पड़ गया भारी: मालदीव में भारतीय पर्यटकों की संख्या में 33% की भारी गिरावट, अर्थव्यवस्था भी चरमराई

मालदीव के कुछ मंत्रियों की भारत विरोधी करतूतों का असर वहाँ के पर्यटन पर दिखाई देने लगा है। मालदीव की वेबसाइट अधाधू ने वहाँ आने वाले यात्रियों नया आँकड़ा जारी किया है। इस आँकड़े के मुताबिक, मालदीव की यात्रा पर जाने वाले भारतीय पर्यटकों की तादाद पिछले साल के मुकाबले इस साल तेजी से गिरी है। आँकड़ों की मानें तो इसमें लगभग 33 प्रतिशत की गिरावट आई है।

ये हालात तब पैदा हुए हैं, जब नई दिल्ली और माले के बीच कूटनीतिक संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं। अधाधू वेबसाइट पर मालदीव के पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आँकड़े दिखाए गए हैं। इन आँकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 4 मार्च 2023 तक तक कुल 41,054 भारतीय पर्यटकों ने मालदीव का दौरा किया था, लेकिन महज एक साल में यह संख्या काफी घट गई है।

ताजा आँकड़ों के मुताबिक, 2 मार्च 2024 तक महज 27,224 भारतीय टूरिस्ट ही मालदीव गए। मालदीव की वेबसाइट अधाधू ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले यह संख्या 13,830 कम है। दरअसल, 1 साल पहले तक मालदीव के पर्यटन बाजार में भारत दूसरे नंबर पर था। तब वहाँ के पर्यटन व्यवसाय में 10% हिस्सा भारतीय पर्यटकों का हुआ करते थे। अब यह हिस्सेदारी महज 6 प्रतिशत बची है।

इसी के साथ मालदीव के बाजार में दूसरे नंबर पर रहने वाला भारत अब खिसक कर 6वें नंबर पर आ चुका है। वर्तमान हालातों को देख कर कुछ विशेषज्ञ यह मानते हैं कि आने वाले समय में इन आँकड़ों में और अधिक गिरावट आ सकती है। इस तरह पर्यटन भर पूरी तरह टिकी मालदीव की अर्थव्यवस्था अब भरभराकर गिरने की कगार पर पहुँच गई है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी, जब मालदीव सरकार के तीन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर अपमानजनक टिप्पणी कीं। उस ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस द्वीप समूह को पर्यटन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया था। इस आह्वान पर मालदीव के मंत्रियों की पीएम मोदी और भारत पर अशोभनीय टिप्पणी की थीं, जिसके बाद राजनयिक विवाद खड़ा हो गया था।

भारत ने दिल्ली स्थित मालदीव के राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध जताया था। इस विरोध का असर भी दिखा था और अभद्र टिप्पणियाँ करने वाले तीन मंत्रियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया था। मालदीव की यह कार्रवाई भारत की जनता को नाकाफी लगी। भारत में मालदीव के बॉयकॉट का अभियान चलाया गया, जिसमें फिल्म जगत सहित कई क्षेत्रों की हस्तियों ने मालदीव की आलोचना की थी।

साल 2024 की शुरुआत में मालदीव के औद्योगिक संस्थानों ने भारतीयों के बहिष्कार का गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई थी। दरअसल, विवाद शुरू होने के बाद कई यात्रियों ने मालदीव की अपनी एडवांस बुकिंग कैंसिल करवानी शुरू कर दी थी। मालदीव एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स एंड टूर ऑपरेटर्स (MATATO) ने भारतीयों द्वारा रद्द की गई बुकिंग के असर को लेकर एक सर्वे भी किया था।

हालाँकि, MATATO ने अभी तक अपनी सर्वे रिपोर्ट अधाधू की तरह सार्वजानिक नहीं की है। साल 2021-23 तक हर वर्ष भारत से लगभग 2,00,000 से अधिक पर्यटक मालदीव जाया करते थे। बदले हालातों में अब सबसे ज्यादा चीनी पर्यटक मालदीव जा रहे हैं। इस साल 54,000 से अधिक पर्यटकों के साथ मालदीव की यात्रा करने वाले देशों में चीन सबसे ऊपर है।

कॉन्ग्रेस शासित तेलंगाना में पूजा करने गए लोगों पर लाठीचार्ज, महिलाओं को भी नहीं छोड़ा गया: महाशिवरात्रि पर कोमुरावेल्ली मंदिर में जलाभिषेक के लिए गए थे श्रद्धालु

तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले में श्रद्धालुओं पर पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया। ये श्रद्धालु महाशिवरात्रि के मौक पर जल अर्पित करने पहुँचे थे। ये मामला सिद्दिपेट जिले का है, जहाँ के कोमुरावेल्ली मंदिर में श्रद्धालु महाशिवरात्रि के अवसर पर जलाभिषेक के लिए पहुँचे थे। कोमुरावेल्ली मंदिर में श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटनाक्रम शुक्रवार (8 मार्च 2024) की है, जब तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले के प्रतिष्ठित कोमुरावेल्ली मंदिर में श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज की घटना सामने आई। इस घटनाक्रम में जैसे ही श्रद्धालु महाशिवरात्री मनाने के लिए एकत्र हुए, पुलिस अधिकारियों की बदइंतजामी के कारण माहौल तनावपूर्ण हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पुजारियों द्वारा पारंपरिक पूजा करने के बाद भक्तों की भीड़ का दबाव बढ़ गया। दरअसल, कोमुरावेल्ली के मंदिर में पांरपरिक रूप से पीली बंदरी अनुष्ठान किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर के आसपास लगे बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें नियंत्रित करने की जगह सीधे लाठीचार्ज कर दिया।

इस लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने आक्रामक तरीके का सहारा लिया और महिलाओं को भी निशाना बना डाला। यहाँ पुलिस को पहले से जानकारी थी कि मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने वाली है, लेकिन प्रशासन ने व्यवस्था बनाने की जगह लाठियों के दम पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने की कोशिश की। इस लाठीचार्ज में काफी मात्रा में श्रद्धालु घायल हो गए।

तेलंगाना बीजेपी के कोषाध्यक्ष शांतिकुमार ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, “रेवंत रेड्डी की सरकार का हिंदुओं पर अत्याचार! तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले के कोमुरावेली मंदिर में पुलिस ने निर्दोष श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज किया। पुलिस ने महिला श्रद्धालुओं को भी नहीं बख्शा। यह हिंदुओं के मौलिक अधिकारों पर हमला है। राज्य में हिंदुओं के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार क्यों, रेवंत रेड्डी?”

इस मामले में एक्स यूजर सिन्हा ने पोस्ट किया, “कांग्रेस शासित तेलंगाना में कोमुरावेल्ली मंदिर के अंदर हिंदू भक्तों को इस तरह पीटा जा रहा है, जैसे वो अपराधी हो। वो न तो सड़कों को जाम कर रहे थे और न ही लोगों के लिए असुविधाएँ बढ़ा रहे थे। वो तो सिर्फ मंदिर के अंदर पूजा कर रहे थे।”

बता दें कि तेलंगाना में रेवंत रेड्डी की अगुवाई में कॉन्ग्रेस की सरकार है। ऐसे में लोगों को इस तरह की खबरें अचंभित नहीं करती हैं। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद लोग रेवंत रेड्डी की सरकार से निराशा जता रहे हैं।

मद्रास HC ने ‘जाति-वर्ण’ वाले फैसले में किया बदलाव, कहा था: वर्तमान जाति व्यवस्था 100 साल से भी कम पुरानी, इसे वर्ण व्यवस्था से जोड़ना ठीक नहीं

मद्रास हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार (7 मार्च, 2024) को तमिलनाडु के राज्य मंत्री उदयानिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान की निंदा की थी। मद्रास हाई कोर्ट ने कहा था कि वर्तमान जाति व्यवस्था एक सदी से भी कम पुरानी है और उसे पुरातन वर्ण व्यवस्था से नहीं जोड़ा जा सकता। अब कोर्ट ने अपने इस आदेश में बदलाव किए हैं और कहा है कि जातियों का वर्गीकरण एक नई और हालिया व्यवस्था है।

पुराने आदेश में मद्रास हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अनीता सुमंत ने कहा था कि जाति व्यवस्था में समस्या है लेकिन यह व्यवस्था एक सदी से भी कम पुरानी है और इसका दोष पुरातन वर्ण व्यवस्था पर नहीं मढ़ा जा सकता। अब कोर्ट के संशोधित आदेश में लिखा गया है, “जातियों का वर्गीकरण, जैसा कि हमें आज दिखता है, काफी नई और हालिया सोच है।”

असली आदेश में में क्या था?

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में कहा था कि तमिलनाडु में 370 पंजीकृत जाति हैं और जातियों के बीच की समस्याओं को भी देखा गया है। उन्होंने आगे कहा कि अलग-अलग जातियों के लोगों के बीच यह मतभेद कुछ हद तक उन्हें दिए जाने वाले फायदों के कारण हैं।

उन्होंने कहा, “यह न्यायालय इस बात से सहमत है कि समाज में जाति के आधार पर अभी भी असमानताएँ मौजूद हैं और उन्हें दूर किया जाना चाहिए। हालाँकि, जाति व्यवस्था की उत्पत्ति, जैसा कि हम आज इसे देखते हैं, एक सदी से भी कम पुरानी है। तमिलनाडु में 370 पंजीकृत जातियाँ हैं। राज्य में एक या दूसरी जाति के प्रति निष्ठा का दावा करने वाले समूहों द्वारा खींचतान और दबाव चलता आया है। अलग-अलग जातियों के लोगों के बीच यह मतभेद कुछ हद तक उन्हें उपलब्ध दिए गए फायदों के कारण भी है।”

किस मामले में कोर्ट ने यह कहा?

यह आदेश हिंदू मुन्नानी संस्था द्वारा उदयानिधि स्टालिन, तमिलनाडु के राज्य मंत्री पीके शेखरबाबू सांसद ए राजा के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया था। इस याचिका में विवादित बयानों के बावजूद उनके पद पर बने रहने पर प्रश्न उठाए गए थे। गौरलतब है कि 2 सितंबर, 2023 को चेन्नई में एक कार्यक्रम में उदयानिधि स्टालिन ने कहा था कि कुछ चीजों का न केवल विरोध होना चाहिए बल्कि उन्हें समाप्त कर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा था, “जिस तरह डेंगू, मच्छर, मलेरिया और कोरोनो वायरस को खत्म किया जाना चाहिए, उसी तरह हमें सनातन धर्म को भी खत्म करना होगा।” उनके इस बयान के बाद पूरे देश भर में आक्रोश देखा गया गया था।

उनके इस बयान पर एक संगठन हिंदू मुन्नानी के पदाधिकारियों ने आपत्ति जताते हुए मद्रास हाई कोर्ट में तीन याचिकाएँ दायर कीं थीं। उन्होंने स्टालिन, शेखरबाबू और ए राजा से स्पष्टीकरण दिए जाने की माँग करते हुए कहा था सनातन धर्म के विलुप्त होने का आह्वान करने वाले एक सम्मेलन में भाग लेने के बाद भी यह लोग सार्वजनिक पद पर क्यों बने हुए हैं।

क्या था कोर्ट इस मामले पर रुख?

उदयानिधि ने इस मामले में कोर्ट के सामने कहा कि उनका बयान हिंदुओं या हिंदू धर्म पर नहीं बल्कि जाति व्यवस्था पर था। बुधवार(6 मार्च, 2024) को कोर्ट ने इस मामले को सुनते हुए स्टालिन की टिप्पणी की निंदा की। हालाँकि, कोर्ट उन्हें मंत्रिपद से हटाने की माँग नहीं मानी। कोर्ट ने कहा कि वह तब तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं कर सकता जब तक कि उन्हें इस पद के लिए अयोग्य घोषित नहीं कर दिया जाता।

कोर्ट ने कहा कि सनातन धर्म के बारे में उल्टे सीधे बयान गलत सूचना को बढ़ावा देना है। हाई कोर्ट ने कहा कि उदयानिधि स्टालिन का मौजूदा जाति व्यवस्था को लेकर सनातन धर्म पर हमला करना ठीक नहीं था। कोर्ट ने कहा, “सनातन धर्म को दी गई यह संज्ञा सर्वथा गलत है क्योंकि यह ऐसी जीवनशैली को बढ़ावा देता है जो कि सात्विकता, आगे बढ़ने और पवित्र है।”

कोर्ट ने की अन्य कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

कोर्ट ने कहा कि इतिहास में लोगों ने जाति के नाम पर एक-दूसरे पर प्रश्न उठाए हैं। उसने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे काम स्वीकार नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने इतिहास में हुए अन्याय को लेकर कहा कि इनके लिए डैमेज कंट्रोल की आवश्यकता है, जिससे बराबरी आए।

कोर्ट ने कहा, ”यह कोर्ट स्पष्ट रूप से इस बात पर राजी है कि समाज में आज जाति के नामा पर गैर बराबरी मौजूद है और उन्हें दूर किया जाना चाहिए। लेकिन, जाति व्यवस्था की उत्पत्ति, जैसा कि आज हमारे सामने है, एक सदी से भी कम पुरानी है। क्या इन दुखद परिस्थितियों के लिए पूरी तरह से प्राचीन वर्ण व्यवस्था को दोषी ठहराया जा सकता है? इसका उत्तर ना है।

कोर्ट ने माना न्यायालय ने माना कि वर्ण व्यवस्था वर्गीकरण के लिए जन्म के बजाय व्यक्ति के व्यवसाय को आधार मानती है। कोर्ट ने कहा “वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर नहीं, बल्कि व्यवसाय के आधार पर वर्गीकरण करती है। इस व्यवस्था को सदियों पहले समाज को आसानी से चलाने के लिए बनाया गया था, तब समाज की आवश्यकताओं के आधार पर प्रमुख व्यवसायों की पहचान की गई थी। आज ऐसी व्यवस्था कितनी कारगर है, यह बात विवादास्पद है।”

टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए बीसीसीआई का बड़ा ऐलान, अब खिलाड़ियों को मिलेगी मोटी रकम, BCCI ने घोषित किया इंसेंटिव प्लान

भारत के लिए टेस्ट मैच खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए इंसेंटिव की घोषणा की गई है। ताकि खिलाड़ी खेल के इस लंबे प्रारूप के बारे में भी गंभीरता से सोचें। कुछ समय पहले टेस्ट मैचों से कन्नी काटने वाले श्रेयस अय्यर और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों के कदमों के बाद बीसीसीआई ने ये कदम उठाया है। दरअसल, टेस्ट मैच पूरे 5 दिन खेले जाते हैं, लेकिन समय और मेहनत के हिसाब से अब तक कम पैसे मिलते थे। ऐसे में खिलाड़ी फर्स्ट क्लास और टेस्ट क्रिकेट की जगह क्रिकेट के छोटे प्रारूप यानी टी-20 और वनडे पर ध्यान लगाते थे। ऐसा न हो और सभी बेहतरीन खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान दें, इसके लिए बीसीसीआई ने इंसेन्टिव देने का प्लान बनाया है।

खिलाड़ी हो जाएँगे मालामाल, पहले से कई गुना ज्यादा मिलेगी रकम

इस बीच बीसीसीआई ने टेस्ट मैच खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए इंसेंटिव की घोषणा की है। जिसके बाद खिलाड़ियों पर पैसों की बारिश होने लगेगी। इसमें तीन शर्तें हैं। पहली शर्त ये है कि अगर एक सीजन में 9 टेस्ट मैच खेले जाते हैं, तो 4 या कम टेस्ट मैच खेलने वाले खिलाड़ियों को कोई इंसेंटिंव नहीं मिलेगा, लेकिन अगर खिलाड़ी अगर पूरे सीजन के 9 टेस्ट मैचों में 50 प्रतिशत यानि 5 से 6 मैच खेलते हैं तो मैच फीस 30 लाख प्रति मैच इंसेंटिव के तौर पर मिलेंगे।

इस प्लान के तहत प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रहे बगैर 5 से 6 मैच तक बैठे रहते हैं तो उन्हें 15 लाख इंसेंटिव के तौर पर प्रति मैच मिलेंगे। इसके अलावा अगर कोई खिलाड़ी 9 मैचों के सीजन में 75 प्रतिशत यानि 7 से ज्यादा मैच खेलता हो तो मैच फीस 45 लाख प्रति मैच इंसेंटिव के तौर पर मिलेंगे. वहीं, सात मैचों के दौरान प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रहे बगैर वह बेंच पर ही बैठा रहता है तो उसे 22.5 लाख इंसेंटिव के तौर पर प्रति मैच मिलेंगे।

धर्मशाला टेस्ट में भारतीय टीम का शानदार प्रदर्शन

इस बीच, भारत-इंग्लैंड के बीच धर्मशाला में खेले गए पाँच मैचों के आखिरी मैच को भारतीय टीम ने पारी और 64 रनों से जीत लिया है। धर्मशाला टेस्ट मैच में भारत ने पहली पारी में कुलदीप यादव के 5 विकेट और अश्विन के 4 विकेट की बदौलत इंग्लैंड को पहली पारी में 218 रन पर समेट दिया था। इसके बाद भारत ने शुभमन गिल (110) और रोहित शर्मा (103) के शतकों से पहली पारी में 477 रनों का विशाल स्कोर बनाकर इंग्लैंड पर 259 रनों की बढ़त हासिल कर डाली थी। इंग्लैंड की दूसरी पारी में अपना 100वाँ टेस्ट मैच खेलने वाले अश्विन ने 5 विकेट झटके और इंग्लैंड की पूरी पारी को महज 195 रनों पर समेट दिया। इस तरह से टीम इंडिया ने धर्मशाला टेस्ट मैच को पारी और 64 रनों के अंतर से जीत लिया और 4-1 से सीरीज पर कब्जा कर लिया।

इस मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कुलदीप यादव को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने इस मैच में 112 रन देकर 7 विकेट लिए, तो बल्ले से भी 30 रनों का योगदान दिया। वहीं, पूरी सीरीज में 2 दोहरे शतकों और तीन अर्धशतकों की मदद से 712 रन बनाने वाले यशस्वी जायसवाल को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया।

धर्मशाला टेस्ट में भारतीय टीम ने पारी और 64 रनों से इंग्लैंड को हराया, 4-1 से टीम इंडिया ने सीरीज पर किया कब्जा, बने कई बड़े रिकॉर्ड

भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई 5 टेस्ट मैचों की सीरीज भारतीय टीम ने 4-1 से जीत ली है। धर्मशाला में खेले गए पाँचवें और आखिरी टेस्ट मैच को टीम इंडिया ने पारी और 54 रनों से जीतते हुए कई रिकॉर्ड बना डाले। इस मैच में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कुलदीप यादव को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। उन्होंने इस मैच में 112 रन देकर 7 विकेट लिए, तो बल्ले से भी 30 रनों का योगदान दिया। वहीं, पूरी सीरीज में 2 दोहरे शतकों और तीन अर्धशतकों की मदद से 712 रन बनाने वाले यशस्वी जायसवाल को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया।

बल्ले और गेंद से धाकड़ प्रदर्शन

इस मैच में भारतीय गेंदबाजों ने जलवा तो बिखेरा ही, बल्लेबाजों ने भी शानदार पारियाँ खेली। शीर्ष 5 बल्लेबाजों ने 50 रन से अधिक का स्कोर बनाया, जिसमें रोहित शर्मा और शुबमन गिल ने शतकीय पारियाँ खेली। भारतीय टीम ने इंग्लैंड के 218 रनों के जवाब में 477 रन बनाए थे। इसमें यशस्वी जायसवाल ने 57, रोहित शर्मा ने 103, शुबमन गिल ने 110, देवदत्त पड्डिकल ने 65 और सरफराज खान ने 56 रन बनाए। वहीं, रविद्र जडेजा-ध्रुव जुरेल ने 15-15 रन तो कुलदीप यादव ने 30 और जसप्रीत बुमराह ने 20 रनों का योगदान दिया। इंग्लैंड के लिए शोएब बशीर ने 5 विकेट लिए, लेकिन उन्हें 173 रन खर्च करने पड़े, तो जेम्स एंडरसन और टॉम हार्टली ने 2-2 विकेट लिए। वहीं बेन स्टोक्स ने करीब साल भर बार गेंदबाजी करते हुए रोहित शर्मा को आउट किया।

भारत ने पहली पारी के आधार पर 259 रनों की बढ़त बनाई थी, लेकिन इंग्लैंड की दूसरी पारी महज 195 रनों पर सिमट गई। जो रुट ने सर्वाधिक 84 रन बनाए। भारत के लिए अश्विन ने 5 विकेट लिए, तो बुमराह-कुलदीप ने 2-2 विकेट लिए वहीं, जडेजा ने भी एक विकेट लिया।

धर्मशाला मैच का संक्षिप्त हाल

धर्मशाला टेस्ट मैच में भारत ने पहली पारी में कुलदीप यादव के 5 विकेट और अश्विन के 4 विकेट की बदौलत इंग्लैंड को पहली पारी में 218 रन पर समेट दिया था। इसके बाद भारत ने शुभमन गिल (110) और रोहित शर्मा (103) के शतकों से पहली पारी में 477 रनों का विशाल स्कोर बनाकर इंग्लैंड पर 259 रनों की बढ़त हासिल कर डाली थी। इंग्लैंड की दूसरी पारी में अपना 100वाँ टेस्ट मैच खेलने वाले अश्विन ने 5 विकेट झटके और इंग्लैंड की पूरी पारी को महज 195 रनों पर समेट दिया। इस तरह से टीम इंडिया ने धर्मशाला टेस्ट मैच को पारी और 64 रनों के अंतर से जीत लिया और 4-1 से सीरीज पर कब्जा कर लिया।

धर्मशाला टेस्ट मैच में बने कई रिकॉर्ड

इस मैच के साथ ही रविचंद्रन अश्विन और इंग्लैंड के जॉनी बेयरेस्टो ने अपने करियर में 100-100 टेस्ट मैच खेलने की उपलब्धि पाई।

इस टेस्ट मैच में जेम्स एंडरसन ने 700 टेस्ट विकेट का आँकड़ा छुआ, ऐसा करने वाले वो पहले तेज गेंदबाज हैं।

इस टेस्ट मैच के साथ ही अश्विन ने अनोखा कारनामा किया। उन्होंने अपने पहले, 25वें, 50वें और 100वें टेस्ट मैच में पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा किया, वो ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी हैं।

इस टेस्ट मैच में जीत के साथ ही भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की रेस में एक बार फिर से आगे बढ़ गई है। भारतीय टीम ने 9 मैचों में 6 मैचों में जीत, 2 हार और 1 ड्रॉ के साथ कुल 74 अंक हासिल कर लिए हैं। जो कुल अंकों का 68.51 प्रतिशत है।

इस सीरीज के सभी पाँच मैचों के परिणाम

पहला टेस्ट मैच: हैदराबाद में इंग्लैंड ने पहला टेस्ट मैच 28 रनों से जीता

दूसरा टेस्ट मैच: विशाखापत्तनम में भारतीय टीम ने दूसरा टेस्ट मैर 106 रनों से जीता और सीरीज में बराबरी पाई

तीसरा टेस्ट मैच: राजकोट में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच को भारतीय टीम ने 434 रनों के बड़े अंतर से जीता

चौथा टेस्ट मैच: राँची में भारतीय टीम ने 5 विकेट से चौथा टेस्ट मैच जीता

पाँचवाँ टेस्ट मैच: धर्मशाला में भारतीय टीम ने पारी और 64 रनों से मैच जीता और सीरीज पर 4-1 से कब्जा किया।