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रूस से वीडियो बना फैसल खान भारतीयों को फँसाता, फिर नौकरी का लालच दे सेना में कराता शामिल: 2 नागरिकों की मौत, भारत सरकार बोली- कार्रवाई हो

रूस में भारतीयों को सेना में जबरन भर्ती कराए जाने के आरोपों के बीच एक नाम सामने आया है, ये नाम है यूट्यूबर फैसल खान का, जिसका पूरा नाम अब्दुल मुतल्लिब खान है। वो इस पूरे रैकेट को चलाता था और बाबा व्लॉग्स नाम से यूट्यूब चैनल भी चलाता था। महज पाँचवीं कक्षा तक पढ़े फैसल खान पर जबरन धर्मांतरण जैसे आरोप भी हैं, जिसमें उससे पूछताछ भी की गई थी। बाद में वो दुबई चला गया और फिर मैन-पॉवर मैनेजमेंट की एक कंपनी चलाने लगा।

भारत की जाँच एजेंसियों ने युवकों को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराने वाले एक रैकेट को पकड़ा है, जिससे जुड़े 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग भारतीयों को रूस की नागरिकता एवं अन्य लालच देकर उन्हें रूस बुलाते थे। फिर उन्हें सेना में भर्ती करा देते थे। इस रैकेट से ही फैसल खान के भी जुड़ने की जानकारी आ रही है। वो अपने वीडियो में कहता था कि उन लोगों को रूसी सेना के साथ जोड़ा जाएगा, लेकिन उनका काम सहायकों का होगा, लड़ाकू भूमिका की नहीं। जबकि रूस के अग्रिम मोर्चे पर दो भारतीयों की जान जा चुकी है, जिसके बाद एजेंसियों ने इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

इस पूरे मामले में जिस फैसल खान का नाम सामने आ रहा है, वो लोगों को रूसी सेना में हर महीने 2 लाख की सैलरी दिलाने का वादा करके भेजता था। फैसल खान बाबा व्लॉग्स नाम से यूट्यूब चैनल चलाता है। वो वीडियो के माध्यम से लोगों को रूस आने की लालच देता था। सितंबर 2023 में ऐसे ही एक वीडियो में फैसल खान ने अपने सब्सक्राइबर्स से वादा किया था कि रूसी सेना में शामिल होने वालों को मोटी तनख्वाह के अलावा एक सरकारी कार्ड भी मिलेगा। यह उन्हें स्थाई निवास पाने में मदद करेगा।

फैसल ने कथित तौर पर रूसी सेना में सहायक भूमिकाओं में नौकरी का वादा करके बड़ी संख्या में भारतीयों को रूस भेजा। उनमें से एक मोहम्मद अफसान थे, जिसकी यूक्रेन में रूस के अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई के दौरान मौत हो गई। इस वीडियो में फैसल लोगों को लालच दे रहा है।

इस पूरे मुद्दे पर भारत सरकार के विदेश मामलों के मंत्रालयय (MEA) का बयान भी सामने आया है, जिसमें सरकार ने कहा है कि उसने रूसी प्रशासन से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है, जो भारतीयों को धोखा देकर रूस बुला रहे हैं और उन्हें सेना में भर्ती करा रहे हैं। अभी भी कई भारतीय रूस में हैं, जिन्हें वापस लाने की कोशिश की जा रही है।

कौन है फैसल खान, जिसके वीडियो के बाद रूस गए भारतीय

फैसल खान एक मैनपावर कंसल्टेंसी फर्म चलाते हैं, जो कई देशों में कर्मचारी उपलब्ध कराती है। उसकी उम्र लगभग 30 वर्ष के बीच है। फैसल खान का दावा है कि उसने 35 लोगों को रूस भेजा। उन्हें रूस ने बताया था कि भारतीयों को युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर तैनात नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह खुद पीड़ित हैं।

फैसल खान ने दावा किया कि उन्होंने उन्हें वापस लाने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों के रूस पहुँचने के बाद जो हुआ वह उनके नियंत्रण से बाहर था। खान ने कहा कि जो लोग रूस गए वे सभी जोखिमों से अवगत थे। उन्होंने कहा कि अगर उनका इरादा उन्हें धोखा देने का होता तो वह कोई सबूत नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि उन्होंने रूस पर अपने वीडियो नहीं हटाए हैं क्योंकि वह दोषी नहीं हैं।

फैसल खान मुंबई के दादर का रहने वाला है। वो साल 2008 में दुबई गया था और शुरू में सेल्समैन के तौर पर काम किया था। साल 2026 में उसने अपनी कंसल्टेंसी बाबाव्लॉग्स शुरू किया था। जानकारी के मुताबिक, साल 2018 में उससे धर्म परिवर्तन के मामले में पूछताछ भी की गई थी।

‘दार्जिलिंग चाय या गोमूत्र?’: ABP के पत्रकार ने पूर्व जज के इंटरव्यू के दौरान कसा तंज, संदेशखाली को लेकर बंगाल सरकार ने सुमन पर दर्ज किया है FIR

एबीपी आनंद के पत्रकार सुमन डे ने गुरुवार (7 मार्च 2024) को कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय के साथ एक साक्षात्कार के दौरान हिंदूफोबिक गौमूत्र पर कटाक्ष किया। इसको लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 50 मिनट के इंटरव्यू के दौरान पत्रकार सुमन डे ने उनसे ‘दार्जिलिंग चाय’ और ‘गोमूत्र’ के बीच चुनाव करने के लिए कहा।

कार्यक्रम के दौरान लगभग 46:18 मिनट पर पत्रकार सुमन डे ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय के साथ रैपिड-फायर राउंड आयोजित किया। इस दौरान उनसे सुमन डे ने शरारती मुस्कान के साथ पूछा, “दार्जिलिंग चाय या गौमूत्र?” इस पत्रकार को हिंदू-विरोधी टिप्पणी करने में कोई हिचकिचाहट नहीं हुई। वह साक्षात्कार के दौरान इस बारे में मुस्कुराते हुए देखे गए।

ध्यान देने वाली बात है कि ‘गौमूत्र’ तंज को इस्लामी कट्टरपंथियों और उनके समर्थकों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ नस्लवादी एवं अपमानजनक गाली के रूप में प्राय: इस्तेमाल किया जाता है। साल 2019 में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने आत्मघाती हमले में कश्मीर के पुलवामा में 40 CRPF जवानों को मार डाला।

हमले के बाद आतंकी संगठन ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें एक आतंकवादी ने था कि वह अल्लाह के नाम पर ‘गोमूत्र पीने वालों’ को दंडित करना और मारना चाहता था। आतंकवादी की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई। वीडियो में उसने भारतीयों को गाय का पेशाब पीने वाला कहा था।

यहाँ तक कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा, शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे और डीएमके राजनेता डीएनवी सेंथिलकुमार ने अतीत में भाजपा के साथ राजनीतिक हिसाब बराबर करने के लिए गौमूत्र पर कटाक्ष किया है। इस श्रेणी में अब एबीपी आनंद के पत्राकर सुमन डे भी आ गए हैं।

हाल ही में एबीपी आनंद के पत्रकार सुमन डे पर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखली गाँव में रिपोर्टिंग करने को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। यह मामला इस साल 17 फरवरी को संदेशखाली पुलिस उप-निरीक्षक मोहम्मद मोनैम हसन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।

अपनी शिकायत में उन्होंने कहा था, “मेरे संज्ञान में आया कि 12.02.24 को सुमन डे द्वारा होस्ट किए गए ‘घंटा खानेक संगे सुमन’ के एक एपिसोड में यह बार-बार उल्लेख किया गया था कि दो गिरफ्तार लोगों- सुशांत सरदार उर्फ ​​उत्तम सरदार और बिकास सिंह को संदेशखेल पुलिस ने बशीरहाट कोर्ट में दोनों व्यक्तियों के लिए पुलिस हिरासत की माँग नहीं की थी।”

हसन ने दावा किया था, “तथ्य यह है कि संबंधित मामले के जाँच अधिकारी ने दो गिरफ्तार लोगों को आगे बढ़ाते हुए एलडी को एक प्रार्थना पत्र सौंपा था। अदालत से दोनों गिरफ्तार आरोपियों के लिए 10 दिन की पुलिस हिरासत की माँग की।” सुमन पर IPC की धारा 153 (उकसावे) और 505 (सार्वजनिक उत्पात फैलाने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया।

‘पत्नी को सबक सिखाना था, इसीलिए बेटे को मार डाला’: दिल्ली के हत्यारे बाप का खुलासा, बेटे की शादी से कुछ घंटे पहले 15 बार घोंपा था चाकू

दिल्ली में अपने बेटे गौरव सिंघल की हत्या करने वाले पिता रंगलाल सिंघल ने पुलिस को बताया है कि वह अपनी पत्नी को इस तरीके सबक सिखाना चाहता था। उसने कहा है कि उसे अपने बेटे की हत्या करने का कोई पछतावा नहीं है। उसे जयपुर से गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि बुधवार (6 मार्च, 2024) को दिल्ली में शादी से कुछ ही घंटों पहले एक युवक गौरव सिंघल की बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। गौरव सिंघल फिट बॉक्स नाम का जिम चलाता था और कुछ ही घंटों बाद वो दूल्हा बनने वाला था।

बीते 3 मार्च को ही गौरव की सगाई हुई थी। इस हत्याकांड को अंजाम देने वाला उसका पिता रंगलाल मौके से फरार हो गया था, जिसे जयपुर से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए जाने के बाद इस मामले में कई खुलासे हुए हैं।

बेटे गौरव की हत्या करने वाले रंगलाल ने पुलिस को बताया है कि उसके अपने बेटे और पत्नी से सम्बन्ध सही नहीं थे। उसकी पत्नी उससे अलग रहती थी। उसका अपनी पत्नी और बेटे से विवाद चल रहा था। हत्या करने से पहले उसका अपने बेटे से विवाद भी हुआ था।

गौरव ने उसको थप्पड़ भी मार दिया था। इसी को लेकर वह और भी नाराज था। वह पत्नी से इसलिए गुस्सा था क्योंकि वह लगातार अपने बेटे का ही पक्ष लेती थी। इन सब बातों से गुस्सा होकर उसने बेटे को मार दिया। उसने कहा कि उसे हत्या करने का कोई पछतावा भी नहीं है।

जाँच में सामने आया है कि रंगलाल ने तीन और लड़कों को इस हत्या के लिए पैसे दिए थे। हत्या करने के लिए ₹1.5 लाख देने का वादा हुआ था। ₹75,000 पहले ही दे दिए गए थे जबकि हत्या के बाद ₹75,000 देने की बात कही गई थी।

रंगलाल इस हत्या की योजना पिछले 3-4 महीने से बना रहा था। वह हत्या करने के बाद घर से ₹15 लाख नकद और ₹50 लाख के जेवर लेकर भी भाग गया था जो कि उसके पास से ही बरामद किए गए हैं। पुलिस रंगलाल को जयपुर से दिल्ली ले आई है।

रंगलाल ने शादी से पहले संगीत वाले दिन गौरव को अकेले बुलाया और इसी दौरान उसने तीनों साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। उसकी हत्या करने के लिए चाकुओं और कैंचियों से उस पर लगातार वार किए गए।

इसके बाद वह गौरव को वहीं छोड़ कर फरार हो गए। पुलिस ने सीसीटीवी जाँच में पाया कि यह लोग अपने साथ एक बैग लेकर गए हैं। रंगलाल ने जयपुर पहुँचने के बाद अपना फ़ोन बंद कर दिया था। उसने एक ऑटो वाले के फ़ोन से सम्पर्क साधा था। इसी के आधार पर पुलिस उस तक पहुँच गई। अभी रंगलाल पुलिस की गिरफ्त में है और उससे पूछताछ चल रही है।

दिल्ली की शाहीना ने वेद मंत्रों के बीच की घर वापसी, बनीं आराधना; अग्नि के 7 फेरे लेकर शिवम को चुना जीवन साथी… अपनी और पति की सुरक्षा की लगाई गुहार

देश की राजधानी दिल्ली में एक मुस्लिम लड़की ने घर वापसी की है। घर वापसी करने वाली लड़की पश्चिमी दिल्ली की बताई जा रही है। लड़की का नाम शाहीना है, जो घर वापसी के बाद आराधना बन चुकी है और शिवम नाम के लड़के को अपना जीवनसाथी चुना है। शाहीना ने हिन्दू धर्म में वापसी को अपनी खुद की मर्जी बताया और कहा कि वह इससे ख़ुश जताई है।

शाहीना और शिवम ने वैदिक विधि-विधान से दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में शादी की है। खुद को बेवजह तंग नहीं करने की माँग करते हुए शाहीना ने दिल्ली प्रशासन से अपनी और अपने पति की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है। यह विवाह गुरुवार (7 मार्च 2024) को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर हिन्दू मोर्चा नाम का संगठन चलाने वाले दीपक मलिक भी मौजूद थे।

दीपक मलिक ने ऑपइंडिया को बताया कि मोहम्मद कुतुबद्दीन की बेटी शाहीना लगभग 8 साल से शिवम से प्यार करती है। अलग-अलग मजहब होने की वजह से शाहीना के परिजन इस शादी के लिए तैयार नहीं थे। कपड़े बेचने का काम करने वाले शिवम भी शाहीना से शादी के लिए प्रयास कर रहे थे। इस बीच दोनों ने हिन्दू मोर्चा से सम्पर्क किया। मोर्चा ने दोनों को सुरक्षा और सहयोग का वादा किया है।

शिवम से शादी के लिए 22 साल की शाहीना 7 मार्च 2024 को अपने घर से जैसे-तैसे करके निकली और 26 वर्षीय शिवम के पास पहुँची। यहाँ से दोनों पहले अदालत गए। कोर्ट में वकील के माध्यम से शाहीना ने जरूरी कागजात बनवाए। इन कागजातों में एक शपथ पत्र भी शामिल है, जिसमें बिना किसी दबाव में सनातन धर्म में घर वापसी करने और अपना नाम आराधना रखने की जानकारी दी गई है।

कोर्ट में जरूरी कागजात बनवाने के बाद यह प्रेमी जोड़ा शाहदरा क्षेत्र के एक आर्य समाज मंदिर पहुँचा। यहाँ पर वैदिक विधि-विधान से शाहीना ने शिवम से विवाह किया। ऑपइंडिया के पास विवाह प्रमाण पत्र और शाहीना का वीडियो बयान मौजूद हैं। शादी के दौरान दोनों ने वेद मंत्रों के बीच अग्नि के 7 फेरे लिए। इस अवसर पर हिन्दू मोर्चा के सदस्य बाराती और घराती दोनों की भूमिका निभाते दिखे।

शादी के बाद मंदिर में जय श्रीराम के नारे लगे। शाहीना ने अपनी शादी से खुद को खुश और संतुष्ट बताया। पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में उन्होंने अपनी और अपने पति की सुरक्षा की माँग की। दीपक मलिक ने ऑपइंडिया से बताया कि फिलहाल सब सही है। पति-पत्नी को पूरी सुरक्षा दी जाएगी। दीपक ने कहा कि अगर किसी ने शिवम और शाहीना को धमकाने की कोशिश की उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा।

पीएम मोदी ने तवाँग-तेजपुर के बीच सेला टनल का किया उद्घाटन, LAC पर ड्रैगन की टेंशन बढ़ी: पूर्वोत्तर को ₹55,600 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वोत्तर भारत में हैं। यहाँ उन्होंने दिन की शुरुआत काजीरंगा नेशनल पार्क से की, तो उसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर को 55,600 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात दी। पीएम मोदी ने इस दौना दुनिया की सबसे ऊंचाई पर बनी सबसे लंबी सेला सुरंग देश को समर्पित किया। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह टनल 13,000 फुट ऊँचाई पर बनी सबसे लंबी सुरंग है, डबल लेन वाला यह ऑल वेदर टनल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामिंग और तवांग जिले को जोड़ता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “आज मुझे ‘विकसित पूर्वोत्तर के इस उत्सव’ में सभी पूर्वोत्तर राज्यों के साथ शामिल होने का अवसर मिला। पूरे देश में ‘विकसित राज्य से विकसित भारत’ का राष्ट्रीय उत्सव तेज गति से जारी है। आज मुझे विकसित पूर्वोत्तर के इस उत्सव में, पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के साथ एक साथ हिस्सेदार बनने का अवसर मिला है।”

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आपका सपना मोदी का संकल्प है। पीएम मोदी ने कहा, “आज यहाँ मिजाज़ कुछ अलग ही है। जहाँ-जहाँ तक मेरी नजर जा रही है, वहाँ-वहाँ तक लोग दिख रहे हैं। मोदी की गारंटी, मोदी की गारंटी… ये तो सुन ही रहे हैं आपलोग। पूरा नार्थ ईस्ट देख रहा है की मोदी की गारंटी कैसे काम कर रहा है।” पीएम मोदी ने कहा कि साल 2019 में यही से मैंने टनल का सिलान्यास करने का काम किया था, जो आज बन कर गया। पीएम मोदी ने कहा कि एयरपोर्ट का शिलान्यास मैंने किया, वो बनकर तैयार हो गया। लोगों का कहना है कि मैंने ये काम चुनाव के लिए किया था, लेकिन मेरा काम जनता जनार्दन के लिए होता है दुनिया कुछ भी बोले।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि आज यहाँ एक साथ 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण या शिलान्यास हुआ है। आज अरुणाचल प्रदेश के 35 हजार गरीब परिवारों को अपने पक्के घर मिले हैं। अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के हजारों परिवारों को नल कनेक्शन मिले हैं, नॉर्थ ईस्ट के अलग अलग राज्यों में कनेक्टिविटी से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है।

सेला सुरंग परिजोजना बेहद खास

पीएम मोदी ने जिस सेला सुरंग परियोजना का उद्घाटन किया, उसे लगभग 825 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसे सुरंग परियोजना को इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जा रहा है। यह अरुणाचल प्रदेश में बालीपारा-चारिदुआर-तवांग रोड पर सेला दर्रे के पार तवांग तक सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसका निर्माण नई ऑस्ट्रियाई टनलिंग पद्धति का उपयोग करके किया गया है और इसमें उच्चतम मानकों की सुरक्षा विशेषताएँ शामिल हैं। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में तेज़ और अधिक कुशल परिवहन मार्ग प्रदान करेगी बल्कि देश के लिए रणनीतिक महत्व की है। प्रधानमंत्री ने सेला सुरंग की आधारशिला फरवरी 2019 में रखी थी।

काजीरंगा नेशनल पार्क में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (09 मार्च 2024) को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के लिए पहुँचे। यहाँ उन्होंने जीप से काजीरंगा की प्राकृतिक खूबसूरती को देखा। इसके बाद पीएम ने हाथी की सवारी भी की। प्रधानमंत्री ने नेशनल पार्क की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से भी मुलाकात की। पीएम मोदी ने काजीरंगा नेशनल पार्क की खूबसूरती को अपने कैमरे में भी कैद किया।

बता दें कि काजीरंगा नेशनल पार्क में अलग-अलग प्रजातियों के 1000 से ज्यादा जानवर रहते हैं। इस रिजर्व की खासियत एक सींग वाला गेंडा है। यह राष्ट्रीय उद्यान गैंडों के सबसे बड़े निवास स्थानों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ शनिवार को हाथी की सवारी करने के साथ उन्हें गन्ना भी खिलाया।

नमाज पढ़ने से पहले SI मनोज तोमर ने समझाया, फिर भी जबरन सड़क पर बैठी मुस्लिम भीड़: नेटीजंस बोले- दिल्ली पुलिस को उकसाया गया, निलंबन वापस हो

दिल्ली के इंद्रलोक इलाके का एक वीडियो शुक्रवार (8 मार्च 2024) को सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इस वीडियो में सड़क पर कई लोग नमाज़ पढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्हें हटाने के दौरान एक सब-इंस्पेक्टर ने बल प्रयोग किया। इसी बल प्रयोग में दारोगा का पैर भी चला। वीडियो वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित तमाम इस्लामी समूहों ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

वहीं, मुस्लिम तबके के लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे। आख़िरकार सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर को सस्पेंड कर दिया गया। अब उस दौरान के तमाम अन्य भी वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में साफ दिख रहा है कि सड़क पर जबरन नमाज़ पढ़ने पर आमादा भीड़ को सब इंस्पेक्टर तोमर ने समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं थे।

सोशल मीडिया X के एक हैंडल @Cyber_Huntss ने 8 मार्च की घटना को लेकर डेढ़ मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। यूजर ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा, “जब कम थे तब बोला गया कि हटो, लेकिन झुंड मे आना और फिर पुलिस को ही मारने की धमकी देना। सोशल मीडिया पर आधी वीडियो डालकर लोगों को उकसाना और पुलिस को गलत साबित करना।”

वीडियो की शुरुआत में दिख रहा है कि एक कॉन्स्टेबल बीच सड़क पर नमाज पढ़ने की कोशिश कर रहे लोगों से हटने की अपील कर रहा है, लेकिन कोई भी उसकी गुजारिश पर ध्यान नहीं दे रहा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के विपरीत, पीछे से माइक पर जोर की आवाज आ रही है। कुछ लोग पहले से ही कैमरा लेकर रेडी हैं और वीडियो बनाने के लिए कह रहे है। इस बीच एक भीड़ पुलिसकर्मी से भिड़ती दिख रही है।

हालाँकि पुलिसकर्मी भीड़ के हंगामे से विचलित हुए मौके पर डटा रहे। इस हंगामे के चलते पीछे से कई वाहनों की आवाज आ रही थी जो सम्भवतः जाम जैसी स्थिति से परेशान लग रहे थे। एक अन्य X यूजर @MrSinha_ ने भी इसी घटना से जुड़ा 47 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सड़क पर बाकायदा दरी बिछा दी गई है।

एक दिव्यांग को आगे कर दिया गया था। सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर अपने साथियों सहित बार-बार भीड़ को उठाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन भीड़ उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थी। एक व्यक्ति को उठाकर आगे बढ़ने पर पीछे के 2 लोग उसी जगह पर बैठ जाते थे। काफी देर तक सब इंस्पेक्टर लोगों को समझाते दिखे, लेकिन उन्हें उकसाने की कोशिश की जाती रही।

इन वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इंद्रलोक थाने के चौकी प्रभारी मनोज तोमर के समर्थन में नेटीजेंस ने मुहिम शुरू कर दी। इसमें मनोज तोमर का निलंबन वापस लेने के साथ उनको सम्मानित करने की माँग भी उठ रही है। X प्लेटफार्म पर #IStandWithManojTomar हैशटैग ट्रेंड करता रहा। चंदन शर्मा नाम के एक यूजर ने कहा कि सब-इंस्पेक्टर मनोज को भीड़ बार-बार उकसा रही है।

श्रवण विश्नोई नाम के एक अन्य यूजर ने भी #IStandWithManojTomar हैशटैग लगाते हुए भीड़ पर पहले पुलिस को उकसाने और बाद में विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगाया है।

क्या था पूरा मामला

दरअसल 8 मार्च को जुमे के दिन दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में एक भीड़ ने सड़क पर ही नमाज़ पढ़नी शुरू कर दी। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात सब इंस्पेक्टर मनोज तोमर ने भीड़ को समझाने की काफी कोशिश की। हालाँकि, भीड़ पर उनकी गुजारिश का कोई असर नहीं पड़ा। अंत में उन्होंने ट्रैफिक जाम होता देखकर हल्का बल प्रयोग किया।

इसका एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। इस वीडियो को आधार बनाकर कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी, AIMIM आदि के नेताओं ने पुलिस पर कार्रवाई की माँग उठाई। आखिरकार दबाव में दिल्ली पुलिस ने दारोगा मनोज तोमर को सस्पेंड कर दिया। अब अन्य वीडियो सामने आने के बाद नेटीजेंस दरोगा पर हुई इस विभागीय कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या का फुटेज आया सामने: कनाडा पुलिस ने हत्यारों के नाम के खुलासे पर साध रखी है चुप्पी, अभी तक गिरफ्तारी भी नहीं

भारत द्वारा आतंकी घोषित किए गए खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या का एक वीडियो फुटेज सामने आया है। इस वीडियो में निज्जर को हथियारबंद लोगों द्वारा गोली मारते हुए दिखाया गया है। कहा जा रहा है कि यह ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ है। निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था, जिसके बाद दोनों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया था।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने साल 2020 में आतंकवादी के रूप में चिह्नित किया था। वह कनाडा में रहते हुए भारत के खिलाफ खालिस्थानी भावना को भड़काते हुए आतंकी गतिविधियों को उभारने का काम करता था। हालाँकि, 18 जून 2023 की शाम को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित एक गुरुद्वारे से बाहर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी।

स्थानीय सीबीसी न्यूज के अनुसार, वीडियो ‘द फिफ्थ एस्टेट’ द्वारा प्राप्त किया गया है और इसे एक से अधिक स्रोतों द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया गया है। इस हमले को बेहद समन्वित बताया गया है। इस हमले में छह लोग शामिल थे, जो दो वाहनों पर आए थे। हालाँकि, खालिस्तानी वोटबैंक के दबाव में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसका आरोप भारत पर लगाया था, लेकिन भारत ने इससे इनकार कर दिया था।

वीडियो में निज्जर को अपने ग्रे डॉज राम पिकअप ट्रक में गुरुद्वारे की पार्किंग से निकलते हुए दिखाया गया है। जैसे ही वह बाहर निकलने के करीब पहुँचता है, एक सफेद सेडान उसके सामने आ जाती है। इसके कारण उसका ट्रक रुक जाता है। सीबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक रुकते ही दो लोग दौड़ते आते हैं टोयोटा गाड़ी में भागने से पहले निज्जर को गोली मार देते हैं।

घटना के वक्त पास के एक मैदान में फुटबॉल खेल रहे लोगों में से दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वे गोली की आवाज सुनने के बाद उस तरफ दौड़े। साथ ही उन्होंने हमलावरों का पीछा करने की भी कोशिश की। एक प्रत्यक्षदर्शी भूपिंदरजीत सिंह सिद्धू ने ‘द फिफ्थ एस्टेट’ को बताया, “हमने उन दो लोगों को भागते हुए देखा। हम उस ओर दौड़े, जहाँ से गोलियों की आवाज आई थी।”

सिद्धू ने अपने दोस्त मलकीत सिंह से कहा कि वह पैदल चल रहे दो लोगों का पीछा करे, जबकि वह निज्जर की मदद करने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने बताया, “मैंने उसकी छाती को दबाने की कोशिश की और उसे हिलाकर देखने की कोशिश की कि क्या वह साँस ले रहा है। हालाँकि, वह पूरी तरह बेहोश था। वह साँस नहीं ले रहा था।”

मलकीत सिंह ने कहा कि उन्होंने उन दोनों लोगों का तब तक पीछा किया जब तक वे टोयोटा कैमरी में चढ़कर भाग नहीं गए। उन्होंने कहा, “सड़क के आसपास से एक कार आई और वे उसमें सवार हो गए। उस कार में तीन अन्य लोग बैठे थे। हम बंदूकों से निकलने वाले धुएँ को सूँघ सकते थे। बारूद का गंध हर जगह फैला हुआ था।”

बता दें कि इस घटना को 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन मामले की जाँच कर रही रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने अभी तक निज्जर की हत्या के संबंध में संदिग्धों का नाम नहीं लिया है और ना ही उनकी गिरफ्तारी की है। बताते चलें कि निज्जर की मृत्यु ने भारत और कनाडा के बीच एक बड़े राजनयिक विवाद को भी जन्म दिया।

कॉन्ग्रेस में भगदड़: पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत कई सांसद-विधायकों ने छोड़ी पार्टी, शिवराज सिंह चौहान बोले – ‘देर आए, दुरुस्त आए’

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका लगा है। यहाँ पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद और कई पूर्व विधायकों ने कॉन्ग्रेस को छोड़कर बीजेपी ज्वॉइन कर लिया है। इसकी अगुवाई पूर्व केंद्रीय मंत्री और चार बार राज्यसभा सांसद रहे सुरेश पचौरी ने की, जिनके साथ पूर्व सांसद गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी और कई विधायक भी बीजेपी में शामिल हुए।

इन नेताओं ने मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामा। सुरेश पचौरी मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं और ब्राह्मणों में उनकी खूब पैठ है। भोपाल स्थित बीजेपी दफ्तर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुरेश पचौरी का स्वागत किया और कहा, ‘देर आए, दुरुस्त आए।’

सुरेश पचौरी का राजनैतिक सफर

सुरेश पचौरी ने 1972 में एक युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। 1984 में राज्य युवा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने। वो कॉन्ग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष भी रहे। लगातार चार बार राज्यसभा सांसद रहे। पचौरी सबसे पहले 1984 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे, इसके बाद वो साल 1990, 1996 और 2002 में फिर से राज्यसभा सांसद बने। पचौरी कॉन्ग्रेस की सरकार में कई मंत्रालयों के केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं।

बीजेपी से जुड़ने वाले कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी 1998 से 2004 तक सांसद रहे थे, इसके बाद वो फिर से 2009 से 2014 तक सांसद रहे। लेकिन कॉन्ग्रेस ने उनका टिकट काट दिया, जिसके बाद से वो नाराज चल रहे थे, यही नहीं, उन्होंने राहुल गाँधी की न्याय यात्रा से भी दूरी बनाए रखी थी।

बीजेपी ज्वॉइन करने वाले नेताओं में इंदौर-1 के पूर्व विधायक संजय शुक्ला भी हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय के सामने कड़ी चुनौती पेश की थी। वो वरिष्ठ नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला के बेटे हैं। उनके चचेरे भाई गोलू शुक्ला भी बीजेपी से विधायक हैं। संजय शुक्ला को कमलनाथ का करीबी माना जाता है। ऐसे में जब जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष बने, तो उन्हें किनारे लगा दिया गया। तभी से चर्चाएं चल रही थी कि वो बीजेपी का दामन थाम सकते हैं।

सुरेश पचौरी ने दो दिन पहले दिया था कॉन्ग्रेस से इस्तीफा

दो दिन पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी ने इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि मैंने पूरी ईमानदारी से सरकार और पार्टी की सेवा की, लेकिन आज जिस तरह से पार्टी द्वारा सार्वजनिक और धार्मिक महत्व के मामलों में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे मुझे बहुत दुख पहुँचा है। मैं समझता हूँ कि आज कॉन्ग्रेस पार्टी उन सिद्धांतों से भटक गई है जिनके लिए वह चली थी। इसलिए मैं प्राथमिक सदस्यता के साथ-साथ सभी सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।

इन नेताओं को बीजेपी ज्वॉइन कराने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। हम लोगों को पता था कि जहाँ-जहाँ राहुल गाँधी जाते हैं, वहाँ लोग पार्टी छोड़ देते हैं। हर पार्टी में अच्छे लोग होते है। कोई स्वाभिमानी व्यक्ति ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहता है। राहुल गाँधी अपने बड़े नेताओं का सम्मान नहीं करते हैं।

मुंबई से जियारत करने किछौछा दरगाह आई थी 24 साल की महिला, हाजिरी देने के नाम पर 50 साल के मौलाना अशरफ ने किया रेप: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर स्थित दरगाह पर जियारत करने गई महाराष्ट्र के मुंबई की 24 वर्षीया महिला से रेप की खबर है। रेप का आरोप किछौछा के 50 साल के मौलाना पर लगा है, जिसका नाम सैयद मोहम्मद अशरफ है। आरोप है कि मोहम्मद अशरफ ने पीड़िता को रूहानी ताकतों का डर दिखाया और फिर रेप किया। इसके बाद पीड़िता को मुँह खोलने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी।

पुलिस ने केस दर्ज करके 50 वर्षीय आरोपित मौलाना सैयद मोहम्मद अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (7 मार्च 2024) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अम्बेडकरनगर के बसखारी थाना क्षेत्र का है। यहाँ किछौछा शरीफ नाम की एक दरगाह है, जहाँ देश-विदेश से जायरीन आते हैं। इन्हीं लोगों में एक पीड़िता भी है, जो महाराष्ट्र की है।

पीड़िता अपने परिवार के साथ अंबेडकरनगर में स्थित किछौछा शरीफ दरगाह पर जियारत करने के लिए आई थी। यहाँ महिला को दरगाह का मौलाना मोहम्मद अशरफ मिला। उसे दरगाह में शमशाद नाम से भी जाना जाता है। आरोप है कि अशरफ ने पीड़िता पर बुरी रूहों का डर दिखाया और रूहानी ताकत से उसके इलाज का दावा किया। महिला मौलाना की बातों में आ गई।

गुरुवार (7 मार्च 2024) को रूहानी इलाज के नाम पर मौलाना ने पीड़िता के परिजनों को दुआ-ताबीज (हाजिरी) प्रक्रिया की बात कहकर बाहर खड़ा रहने के लिए कहा। महिला को अपने कमरे में ले जाकर उसने रेप किया। जब पीड़िता ने विरोध किया तो मौलाना अशरफ ने उसे पूरे परिवार सहित खत्म करने की धमकी दी।

जब लगभग 1 घंटे बीत जाने पर भी दरवाजा नहीं खुला तो पीड़िता के परिजनों ने जबरन दरवाजा खुलवाया। दरवाजा खुलते ही पीड़िता ने रो-रो कर अपने घर वालों को अपने साथ हुए कुकृत्य की जानकारी दी। हालाँकि इसके बावजूद मोहम्मद अशरफ ने माफ़ी माँगने के बजाय कहीं भी शिकायत करने पर भी गंभीर परिणाम भुगतने की भी चेतावनी दे डाली।

आखिरकार महिला ने हिम्मत करके स्थानीय थाना बसखारी में मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने FIR दर्ज करके मौलाना मोहम्मद अशरफ को गिरफ्तार कर लिया है। मौलाना पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 342 और 506 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मौलाना अशरफ को शुक्रवार (8 मार्च 2024) की सुबह 9 बजे जलालपुर रोड से दबोच लिया।

वहीं, पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस ने जल्द से जल्द केस की जाँच पूरी कर के चार्जशीट लगाने और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का आश्वासन दिया है। पुलिस का दावा है कि ऐसे लोगों को चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।

पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में एक छात्र को फाँसी, दूसरे को उम्रकैद: पैगंबर और उनकी बीवी पर कंटेंट बनाकर शेयर करने का आरोप

पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में एक 22 साल के छात्र को फाँसी की सजा से दी गई, तो दूसरे 17 साल के नाबालिग छात्र को उम्रकैद की। आरोप है कि दोनों छात्रों ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद और उनकी पत्नियों के बारे में आपत्तिजनक बातें कही और उनसे जुड़ा वीडियो भी बनाया। दोनों ने ईशनिंदा संबंधित सामग्री को वॉट्सऐप पर शेयर भी किया। ये मामला पाकिस्तान के कब्जे वाले पंजाब का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 में ये मामला गुजराँवाला में दर्ज हुआ था। जहाँ इन दोनों छात्रों को ईशनिंदा के मामले में गिरफ्तार किया गया था। ये कार्रवाई साल 2022 में लाहौर में पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी की साइबर अपराध इकाई द्वारा दर्ज की गई शिकायत के बाद की गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे तीन अलग-अलग मोबाइल फोन नंबरों से वीडियो और तस्वीरें मिलीं।

एफआईए ने कहा कि उसने शिकायतकर्ता के फोन की जाँच की और पाया कि उसे “अश्लील सामग्री” भेजी गई थी। इस मामले में 22 साल के छात्र को फाँसी की सजा सुनाई गई, तो दूसरे को नाबालिग होने के चलते उम्रकैद की सजा दी गई। वहीं, बचाव पक्ष ने कहा कि दोनों छात्रों को साजिशन फंसाया गया है और इस फैसले के खिलाफ छात्रों के पिता लाहौर हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि छात्र बेगुनाह साबित होंगे।

भारत में भी कानून, लेकिन सजा सख्त नहीं

पाकिस्तान में साल 1980 से पहले ईशनिंदा को लेकर कोई कड़ा कानून नहीं था, लेकिन साल 1980 में पाकिस्तान की सैन्य तानाशाही के दौरान इसे पूरे पाकिस्तान में लागू कर दिया गया। वहीं, भारत की बात करें तो भारत में ईशनिंदा पर कोई अलग कानून नहीं है, बल्कि आईपीसी की धारा 295 के तहत अगर कोई किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसे दो साल तक की जेल या जुर्माना भरना पड़ सकता है। भारत में संविधान के अनुच्छेद 19ए के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, जिसके तहत हम आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं, जब तक कि इससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।