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हिमाचल में कॉन्ग्रेस के 6 विधायकों की सदस्यता रद्द, राज्यसभा चुनावों में BJP को किया था वोट: शह-मात का खेल जारी, विक्रमादित्य सिंह ने CM के ब्रेकफास्ट में नहीं पहुँचे

हिमाचल प्रदेश में एक सीट पर हुए राज्यसभा चुनावों में विपक्षी दल भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष मतदान करने वाले कॉन्ग्रेस के 6 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को इस मामले में अपना फैसला सुनाया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया का कहना है, “कॉन्ग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ने वाले छह विधायकों ने अपने खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। मैं घोषणा करता हूँ कि छह लोग तत्काल प्रभाव से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य नहीं रहेंगे।”

जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई है, उनमें धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, गगरेट के विधायक चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ के विधायक देवेंद्र भुट्टो, बड़सर के विधायक इंद्र दत्त लखनपाल, सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा और लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर शामिल हैं। इन विधायकों के पास अब हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के तौर पर पिटीशन की सुनवाई की और 30 पन्नों का फैसला दिया। बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने छह बागी विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की थी। व्हिप के मुताबिक बजट पास करने के वक्त बागी विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे। 

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के 48 घंटे के भीतर ही विधानसभा अध्यक्ष ने 6 बागी विधायकों के खिलाफ एक्शन लिया है। स्पीकर द्वारा इन विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के बाद सदन की कुल संख्या 68 से घटकर 62 हो गई है। इसके साथ ही बहुमत का आँकड़ा 32 पर आ गया है।

वहीं, 6 विधायकों को निलंबित करने के बाद कॉन्ग्रेस के पास अब कुल 34 विधायक बचे हैं। प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को दो निर्दलीय और एक अन्य विधायक। समर्थन दे रहे हैं। इस तरह सरकार को कुल 37 विधायकों का समर्थन है। वहीं, विधानसभा में भाजपा के कुल 25 विधायक हैं।

इधर, कॉन्ग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भले इस्तीफा वापस ले लिया हो, लेकिन माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी कम नहीं हुई है। सरकार को बचाने के लिए सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार की सुबह सभी विधायकों को ब्रेकफास्ट के लिए सीएम हाउस बुलाया। हालाँकि, इससे विक्रमादित्य समेत चार विधायकों ने किनारा कर लिया है।

बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस के चार विधायक- विक्रमादित्य सिंह, मोहन लाल, नंद लाल और धनीराम ने सीएम हाउस में आयोजित नाश्ते में नहीं पहुँचे। वहीं, कॉन्ग्रेस सरकार में कई ऐसे विधायक हैं, जिनकी निष्ठा वीरभद्र सिंह राजपरिवार की ओर है। भले ही इन लोगों ने क्रॉस वोटिंग ना की हो। इस तरह सुक्खू सरकार को लेकर असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है।

₹100 की गोली, 30% घटाएगी कैंसर का खतरा: TATA इंस्टीट्यूट का दावा, बताया- 10 साल से चला शोध, चूहों पर खरा उतरा-इंसानों पर परीक्षण बाकी

देश में कैंसर के इलाज में अगुवा मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर ने इस बीमारी के लिए एक दवा विकसित की है। यह दवा ₹100/टैबलेट होगी और रेडियोलॉजी अथवा कीमोथैरेपी से सही हुए रोगियों में कैंसर का खतरा कम करेगी। इसके लिए बीते 10 वर्षों से शोध चल रहा था।

NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने दस वर्षों की मेहनत के बाद यह दवा बनाने में सफलता पाई है। इससे कैंसर का इलाज करवा चुके रोगियों में दोबारा कैंसर की संभावना भी कम करेगी और कीमोथैरेपी या रेडियोथैरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट भी 50% कम करेगी।

इस विषय में NDTV से बात करते हुए वरिष्ठ सर्जन राजेन्द्र बडवे ने इस दवा के विकास के विषय में बताया, ” इसशोध के लिए चूहों में मानवों कैंसर कोशिकाएँ डाली गईं, जिससे उन्हें कैंसर हुआ। इसके बाद चूहों का रेडियोलॉजी, कीमोथेरेपी और सर्जरी के द्वारा गया। इसमें यह सामने आया कि मरने के बाद कैंसर की कोशिकाएँ टूट जाती हैं, जिन्हें क्रोमैटिन कण कहा जाता है। ये कण खून के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में जा सकते हैं और जब वे सामान्य कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें कैंसर से संक्रमित कर सकते हैं।”

इस समस्या के निदान के लिए शोधकर्ताओं ने इलाज से सही चूहों को रेस्वेराट्रोल और कॉपर (तांबा) मिश्रित दवा की गोलियाँ दी। यह दवा जल्दी ऑक्सीजन रिलीज करती हैं। इससे क्रोमैटीन कण मर जाते हैं। यह दवा दोबारा कैंसर होने से 50% और पहली बार कैंसर होने से 30% तक बचाव करेगी। इससे मुँह और गले के कैंसर के इलाज भी हो सकेगा।

डॉक्टर बडवे ने बताया, “टाटा संस्थान के डॉक्टर लगभग एक दशक से इस दवा पर काम कर रहे थे। इस दवा के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से अनुमतिली जा रही है। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के वैज्ञानिकों ने इसके लिए आवेदन किया है। अनुमति मिलने के बाद यह जून-जुलाई से बाजार में उपलब्ध हो सकती है। यह दवा कैंसर के इलाज आसान करने में काफी हद तक मदद करेगी।”

उन्होंने बताया है कि जहाँ आज के समय में कैंसर के इलाज में लाखों-करोड़ों रुपए लगते हैं, इस दवा का मूल्य मात्र ₹100/टैबलेट होगा। उन्होंने कहा है कि इसे अभी चूहों पर आजमाया गया है और मानवों पर इसका असर अगले पाँच सालों तक देखा जाएगा।

आगे-आगे शाहजहाँ शेख, पीछे-पीछे बंगाल पुलिस: ED पर हमले मामले में गिरफ्तारी के बाद भी टशन में दिखा TMC नेता, 10 दिन की रिमांड पर भेजा गया

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी के बाद उसे 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। यह जानकारी टीएमसी नेता के वकील राजा भौमिक ने खुद दी। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन हिरासत की माँग की थी लेकिन कोर्ट ने 10 दिन कस्टडी में रखने की मंजूरी दी। अब 10 मार्च को शेख शाहजहाँ को कोर्ट में फिर से पेश किया जाएगा।

बता दें कि शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न मामले में नहीं हुई, बल्कि जनवरी महीने में जो उसके समर्थकों ने जो प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला किया था, उस मामले में हुई है।

साउथ बंगाल के एडीजी सुप्रतीम सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 5 जनवरी को जब ईडी संदेशखाली में रेड मारने आई थी, तो उन पर हमला हुआ था। इसी मामले में शेख शाहजहाँ मुख्य आरोपित था जिसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है। ये गिरफ्तारी आईपीसी की धारा 354 के तहत दर्ज शिकायतों के बाद हुई है।

उनसे जब पूछा गया कि यौन उत्पीड़न के मामलों का क्या हुआ तो इस पर एडीजी ने कहा कि इस मामले में कई केस दर्ज हुए है। कई दो-दो साल पुराने हैं। उनकी जाँच में समय लगेगा। इस बीच उसे बशीरहाट कोर्ट में पेश किए जाने का एक वीडियो सामने आया है।

इस वीडियो में शेख शाहजहाँ को दबंगों की तरह कोर्ट में एंट्री लेते देखा गया। वहीं पुलिस उसके पीछे चलती दिखी। इस वीडियो को देख लोग कह रहे हैं कि बिलकुल नहीं लग रहा है कि ये गिरफ्तार हुआ है उलटा ऐसा लग रहा है कि अपनी दबंगई दिखाने को सामने आया है।

शेख शाहजहाँ तो गिरफ्तार हो गया पर इस मरी हुई व्यवस्था का इलाज कौन करेगा, क्योंकि जंगलराज से भी गया गुजरा है ममता बनर्जी का बंगाल

शेख शाहजहाँ (Sheikh Shahjahan) को पश्चिम बंगाल की पुलिस ने 29 फरवरी 2024 की सुबह गिरफ्तार कर लिया। वह 55 दिनों से फरार था। इस बीच पश्चिम बंगाल के संदेशखाली से जो कुछ बाहर निकल कर आया वह बताता है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के शासनकाल में इस प्रदेश ने जंगलराज से बर्बर-वहशी युग तक जाने की यात्रा पूरी कर ली है।

जंगलराज ऐसे शासनकाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जब हद दर्जे की अव्यवस्था और अराजकता दिखे। कानून का भय अपराधियों में न हो। आम आदमी खौफ के साये में लिपटा रहे। मसलन, मेरी उम्र के लोग जिस बिहार में बड़े हुए उसे जंगलराज कहा जाता है। उस दौर में एक तरफ आधारभूत संरचनाएँ ध्वस्त होती जा रहीं थी, दूसरी तरफ कोई शहाबुद्दीन किसी चंदा बाबू के बेटों को तेजाब से नहलाकर मार डालता था। अपह​रण का उद्योग जड़ें जमा रहा था और जातीय नरसंहार फल फूल रहा था… लेकिन संदेशखाली से प्रताड़ना की जो भयावह कहानियाँ सामने आई हैं वह बताती हैं कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल जंगलराज से भी बदतर स्थिति में साँसें ले रहा है।

संदेशखाली बताता है कि वामपंथियों ने अपने शासनकाल में पश्चिम बंगाल में जिस राजनीतिक हिंसा को ‘सामान्य’ बनाया, वह टीएमसी के शासनकाल में घर से महिलाओं को उठाकर, उन्हें रातभर भोगकर, सुबह छोड़ देने की स्थिति तक जा चुका है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा किस कदर बैठी हुई है कि यह देश ने तब भी देखा था, जब विधानसभा चुनावों में टीएमसी की जीत सुनिश्चित होते ही विपक्षी दलों को वोट देने वालों को लक्षित कर हिंसा हुई थी। हत्याएँ और लूटपाट हुई थी। बड़े पैमाने पर लोगों को पलायन कर दूसरे राज्यों में शरण लेनी पड़ी थी।

ऐसी घटनाएँ बंगाल में जंगलराज होने के लेकर देश को लगातार अलर्ट करती रहीं, लेकिन उसके बर्बर-वहशी युग में जीने की खबर देश को तब खबर लगी, जब शाहजहाँ शेख राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। शेख को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियाँ 5 जनवरी 2024 को मिली, जब पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर हमला हुआ। पत्थरों से लैस 250-300 लोगों की भीड़ ने सीआरपीएफ जवानों और पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा। ईडी की टीम राशन घोटाला में छापेमारी के लिए गई थी।

शाहजहाँ शेख टीएमसी का कोई हैवीवेट नेता नहीं है। वह जिस भूमिका में है, उस भूमिका वाले नेता हर दल में सैकड़ों होते हैं। वह कभी विधायक-सांसद नहीं रहा। यह जरूर है कि वह हजारों करोड़ के राशन घोटाले में आरोपित ममता सरकार के मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का ‘खास’ बताया जाता है। पर किसी मंत्री का खास होकर ही कोई खुद को इतना ताकतवर समझने की भूल शायद ही करे कि वह राष्ट्रीय एजेंसी पर हमला करवा दे।

शाहजहाँ शेख के संदेशखाली का बेताज बादशाह होने, खुद को ताकतवर समझने की वजहों और बंगाल के जंगलराज से बर्बर युग में जाने की यात्रा पूरी करने का पता तब चला जब संदेशखाली की महिलाओं ने उसके खिलाफ मुँह खोलने का साहस दिखाया। जब इन महिलाओं को ‘बाहरी’ बताकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीड़िताओं को झुठलाने की कोशिश की तो पता चला कि शाहजहाँ शेख जैसों को बंगाल में ताकत कहाँ से मिलती है।

ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने तो शेख की गिरफ्तारी को लेकर ऐसा भ्रम का माहौल बनाया कि कलकत्ता हाई कोर्ट को स्वत: संज्ञान लेकर यह कहना पड़ा कि उसने गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई। इस फटकार के बाद टीएमसी ने कहा कि शाहजहाँ शेख सात दिनों में गिरफ्तार कर लिया जाएगा और आखिरकार 29 फरवरी को उसको गिरफ्तार करने की खबर आ गई। इससे ठीक पहले बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी एक चौंकाने वाला दावा करते हुए बताया था कि शाहजहाँ शेख बंगाल पुलिस की ‘सेफ कस्टडी’ में है। हाई कोर्ट ने कहा कि बंगाल पुलिस ही नहीं, उसे ईडी और सीबीआई भी गिरफ्तार करने को स्वतंत्र है।

इसके ठीक बाद जिस तरह से उसकी गिरफ्तारी की खबर आई है, उसके बाद कहा जा रहा है कि बढ़ते दबाव के बीच बंगाल पुलिस उसकी गिरफ्तारी दिखाने को ‘मजबूर’ हुई है ताकि शेख केंद्रीय एजेंसियों के हाथ न लगे। हाई कोर्ट की फटकारों और सुवेंदु अधिकारी के दावे से काफी पहले दैनिक भास्कर को शाहजहाँ शेख के भाई ने बताया था कि वह फरार नहीं है। वह बंगाल में ही है।

पर बंगाल की असली चुनौती शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी नहीं है। उसे इस हाल में ले जाने के लिए जिम्मेदार वह व्यवस्था है जो एक ट्रक ड्राइवर को संदेशखाली में अपनी सल्तनत चलाने की इजाजत देता है। जो सत्ता बदलते ही माकपा से टीएमसी में घुसपैठ कर किसी को ऐसी व्यवस्था कायम कर लेने की ताकत दे देता है, जिसमें उसके गुर्गे घर-घर जाकर सुंदर महिलाओं का चुन सकें और उनका ‘भोग’ कर सकें।

ऐसे में सवाल उठता है कि इस व्यवस्था का इलाज कौन करेगा? ध्यान रहे कि संदेशखाली मामले को सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था। शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार करने के बाद बंगाल पुलिस कह रही है कि उसे ईडी पर हमले के मामले में पकड़ा गया है। इसका संदेशखाली के यौन शोषण के मामलों से कोई वास्ता नहीं है।

एक मशहूर कहावत है कि सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का। संदेशखाली की पीड़िताओं को न्याय और पश्चिम बंगाल को इस नरक से मुक्ति ‘कोतवाल’ को बदले बिना शायद ही मिले। वैसे भी हमें इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही अपने लिए बेहतरी की तलाश करनी है। बिहार ने 2005 में किया था। क्या बंगाल 2024 में कर पाएगा? सनद रहे कि संदेशखाली की महिलाओं के बर्बर और घिनौने आरोपों को ममता बनर्जी ‘मामूली घटना’ बता चुकी हैं।

गोसेवक का रेत दिया था गला, NIA से जाँच करवाएगी छत्तीसगढ़ सरकार: पीड़ित परिजनों से मिलने के बाद CM का ऐलान, राम मंदिर के विरोध में की थी हत्या

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर दहशत फैलाने के लिए 6 मुस्लिमों ने बीते माह एक गोसेवक साधराम यादव की छत्तीसगढ़ के कवर्धा में हत्या कर दी थी। अब इस हत्या की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपी जाएगी, इसका ऐलान छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया है।

मीडिया से बात करते हुए CM साय ने कहा, “पिछले दिनों साधराम यादव की निर्दयता से हत्या कर दी गई। उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी, फिर भी उनकी गला रेत कर हत्या कर दी गई, इस घटना की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। हमारे पास उनके भाई और पत्नी समेत परिजन न्याय माँग करने आए हैं। दोषियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, लेकिन जिस निर्दयता के साथ हत्या हुई है, उसको देखते हुए परिजनों की माँग है कि उच्च स्तर की जाँच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।”

CM साय ने जाँच को लेकर कहा, “हम इस जाँच को NIA को सौंपेंगे ताकि इसकी तह तक जाया जा सके। इसमें यदि और भी कोई पहलू है तो वह भी सामने आए क्योंकि ऐसी घटनाएँ दुश्मनी के कारण होती हैं। इस मामले में कोई दुश्मनी के बिना हत्या की गई, ऐसे में यह व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा की हत्या है। इसलिए हम NIA जाँच की संस्तुति करेंगे।”

गौरतलब है कि 20 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के कवर्धा में लालपुर गाँव में अयाज, इदरीश, मेहताब और शेख रफीक समेत 6 ने मिलकर गोसेवक साधराम यादव (50) की ISIS आतंकियो की तरह गला रेत कर हत्या कर दी थी। बताया गया था कि हत्यारे 22 जनवरी, 2024 को होने वाली राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर दहशत फैलाना चाहते थे।

आरोपितों ने साधराम यादव से पहले भी जान-बूझकर विवाद किया था और ‘सर तन से जुदा’ करके हत्या कर दी। उनकी हत्या के बाद कवर्धा में लोगों का गुस्सा भड़क उठा था। प्रशासन ने आरोपितों को पकड़ने के साथ ही इनके घरों पर बुलडोजर भी चलाया था।

पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों पर UAPA की धारा 16 लगाई थी। छत्तीसगढ़ में पहली बार नक्सलियों के लावा ऐसे मामले में UAPA का इस्तेमाल किया गया था। हत्या करने वाले अयाज और इदरीश का आतंकी कनेक्शन भी सामने आया था। अयाज के कश्मीर जाने और इदरीश के संदिग्ध के लोगों से मिलने की जानकारी भी मिली थी।

अयाज खान को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल की जाँच की गई तो उसके लगातार कई बार जम्मू-कश्मीर जाने की जानकारी सामने आई। जब छत्तीसगढ़ से टीम जम्मू-कश्मीर भेजी गई तो आतंकवादियों से कनेक्शन सामने आए। एक अन्य आरोपित इदरीश खान के संदिग्धों से बात करने सम्बंधित जानकारी मिली थी। अब साधराम यादव की हत्या के मामले में राज्य सरकार और भी सख्त है और इसकी जाँच NIA से करवाएगी।

वन चाय प्लीज… कौन है डॉली चायवाला, जिसका ‘इनोवेशन’ देखने नागपुर की फुटपाथ पर पहुँच गए बिल गेट्स: नेटिजन्स बोले- ये सज्जन कौन हैं

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने हाल में नागपुर के वायरल डॉली चाय वाला से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने न केवल फुटपाथ पर खड़े होकर डॉली के हाथ की चाय पी, बल्कि उनके साथ रील भी बनाई। ये रील अब जगह-जगह वायरल है। इसे 24 घंटे से भी कम समय में 1 मिलियन लाइक मिल चुके हैं।

वीडियो में बिल गेट्स मजेदार अंदाज में ‘वन चाय प्लीज’ कहते दिखते हैं। उसके बाद डॉली अपनी स्पेशल चाय बनाते है। उनके अंदाज को वीडियो में बारीकी से रिकॉर्ड किया गया है। इसके बाद वो जो काँच के ग्लास में बिल गेट्स को चाय देते हैं, वीडियो में उसे भी दिखाया गया है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए बिल गेस्ट ने लिखा, “भारत में हर जगह इनोवेशन खोजी जा सकती है। आप जहाँ जाते हैं। वहीं इनोवेशन मिलता है। यहाँ तक कि एक सिंपल सी चाय भी यहाँ बेहतरीन है।”

बिल गेट्स ने ये भी कहा कि वे दोबारा भारत आने के लिए उत्सुक हैं। भारत जो कि अद्भुत इनोवेशन का घर है, यहाँ जिंदगी जीने के नए सरीखे हैं। उनकी वीडियो के अंत में है कि वो आगे भी और चाय पर चर्चा करना चाहेंगे।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं। स्विगी इंडिया ने इस वीडियो पर कमेंट करके पूछा है कि आखिर इस चाय का बिल कितना बना। यूजर्स कह रहे हैं कि हर भारतीय इस वीडियो को देखने के बाद शॉक में है।

बिल गेट्स की वीडियो पर आए कॉमेंट (फोटो साभार: बिल गेट्स की वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)

बता दें कि डॉली चायवाला एक फेमस सोशल मीडिया पर्सनेलिटी हैं। उनकी महाराष्ट्र के नागपुर में एक अलग पहचान है। मौजूदा जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से रविंद्र टेगौर सिविल लाइन नागपुर के पास चाय बेचते हैं। वो अपने स्टाइल से ग्राहकों का ध्यान इतना आकर्षित करते हैं कि हर कोई इनकी वीडियो बनाने को बेताब रहता है।

बिल गेट्स की वीडियो पर आए कॉमेंट (फोटो साभार: बिल गेट्स की वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)

आपको सोशल मीडिया पर इनकी तमाम वीडियोज देखने को मिल जाएँगी जिसमें इनके दूध के पैकेट को फाड़ने के ढंग से लेकर पानी में चायपत्ती डालने तक को लोगों ने हाईलाइट करके दिखाया हुआ है।

बिल गेट्स की वीडियो पर आए कॉमेंट (फोटो साभार: बिल गेट्स की वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट)

डॉली चायवाला की वीडियो बनाकर तो कई लोग बहुत बहुत फेमस भी हुए हैं। उनके इतने फेमस होने का ही कारण है कि लोग दुनिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक बिल गेट्स की वीडियो देखने के बाद मजाकिया अंदाज में यहाँ तक कह रहे हैं कि डॉली चायवाले के साथ ये सज्जन कौन है।

किसानों के ‘भेष’ में हिंसा करने वालों का पासपोर्ट-वीजा रद्द करवाने की तैयारी, CCTV कैमरों-ड्रोन से हरियाणा पुलिस ने की उपद्रवियों की पहचान

किसान आंदोलन के नाम पर हरियाणा पुलिस पर पथराव करने और बैरिकेड तोड़ने वालों के वीजा और पासपोर्ट अब रद्द किए जाएँगे। हरियाणा और पंजाब की सीमा पर उत्पात मचाने वालों पर पुलिस बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। ऐसे उपद्रवियों की पहचान भी कर ली गई है।

हरियाणा पुलिस के अधिकारी DSP जोगिन्दर शर्मा ने बताया है, “मैं यह मीडिया के माध्यम से बताना चाह रहा हूँ कि किसान आंदोलन में पंजाब से हरियाणा की तरफ आने वाले जो भी उपद्रवी हैं, जो बैरिकेड तोड़ रहे हैं या उत्पात मचा रहे हैं, उनको हमने चिन्हित किया है। इनकी पहचान हमारे ड्रोन और CCTV कैमरों में कैद हो गई है। इन लोगों के खिलाफ हम हमारे पासपोर्ट ऑफिस, दूतावास में पहचान भेज कर वीजा और पासपोर्ट, दोनों रद्द करने की माँग करेंगे।”

उपद्रवियों की पहचान करने के विषय में उन्होंने बताया, “हमने बहुत सारी फोटोग्राफ ऐसी ली हैं जिनमें कुछ लोग तोड़फोड़ कर रहे हैं और उपद्रव मचा रहे हैं। उनका नाम और पता निकाल कर पासपोर्ट और वीजा ऑफिस भेज रहे हैं और इन्हें रद्द करने करवाएँगे।”

गौरतलब है कि हरियाणा और पंजाब की सीमा पर खन्नौरी तथा संभू में बीते कई दिनों पंजाब से आए किसान डेरा डाले हुए हैं। यह किसान दिल्ली जाने की माँग कर रहे हैं। इनको हरियाणा पुलिस ने यहाँ रोका हुआ है। पुलिस ने इसके लिए बैरिकेड लगाए हुए हैं और ड्रोन से इनकी निगरानी कर रहे हैं।

इस किसान आंदोलन में कुछ उपद्रवी भी शामिल हैं। यह हरियाणा पुलिस के ड्रोन को पत्थर फेंक कर गिरा रहे हैं। उपद्रवी हरियाणा पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड भी तोड़ रहे हैं। इन उपद्रवियों के चलते अब तक हरियाणा पुलिस के 30 से अधिक जवान घायल हो चुके हैं। दो पुलिसकर्मियों की यहाँ मौत भी हो चुकी है।

यह किसान आंदोलन संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) द्वारा किया जा रहा है। इसकी माँग है कि इन्हें दिल्ली जा कर प्रदर्शन करने दिया जाए। यह दिल्ली जाकर MSP पर गारंटी समेत अन्य कई माँग कर रहे हैं।

इनकी कई बार केंद्र सरकार से बातचीत भी हो चुकी है लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका है। हालाँकि, इस किसान आंदोलन के नेताओं में भी आपसी मतभेद सामे आए हैं। किसानों का एक धड़ा सीधे केंद्र से भिड़ना चाहता है जबकि दूसरा धड़ा व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शन करना चाहता है।

मुकेश अंबानी, अनंत, राधिका… ने खुद परोसा खाना, 51 हजार लोगों की ‘अन्न सेवा’: प्री वेडिंग सेरेमनी के लिए आए जोड़े को जामनगर के ग्रामीणों ने दिया आशीर्वाद, देखें Video

मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी का प्री-वेडिंग फंक्शन ‘अन्न सेवा’ के साथ आरंभ हुआ। इस दौरान गुजरात के जामनगर के रिलायंस टाउनशिप के जोगवाड गाँव में पूरे अंबानी परिवार ने स्थानीय लोगों को बैठाकर खाना खिलाया।

समाचार एएनआई के अवुसार, राधिका मर्चेंट की नानी और उनके माता पिता वीरेन और शैला मर्चेंट भी इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुँचे। बताया जा रहा है कि इस अन्न सेवा के लिए 51 हजार लोग आमंत्रित किए गए थे। इन 51 हजार लोगों को आगामी कुछ दिनों तक यूँ ही खाना खिलाया जाएगा।

इस दौरान अनंत अंबानी ने भी ग्रामीणों को शालीनता से ‘जय श्री कृष्णा’ कहते हुए अपने हाथ से अन्न परोसा। वीडियो में देख सकते हैं मुकेश अंबानी और अनंत अंबानी कैसे चेहरे पर मुस्कान के साथ ग्रामीणों को खाना खिला रहे हैं।

एक अन्य वीडियो में राधिका और अनंत अंबानी को ग्रामीण अपना आशीर्वाद देकर जाते भी दिख रहे हैं। वहीं अंबानी परिवार अन्न सेवा के बाद बेहद खुश दिख रहा है।

उनका ये अंदाज देख भारतीय अभिभूत हैं। पूरे परिवार को लोग शुभकामनाएँ दे रहे हैं कि लोग थोड़े से अमीर होते हैं तो उनके कदम जमीन पर नहीं रहते लेकिन ये परिवार को दुनिया के अमीरों में से है फिर भी इतना सादा व्यवहार है।

बता दें कि अनंत अंबानी की शादी के लिए अंबानी परिवार की अन्य तैयारियाँ भी लोगों का दिल जीत रही हैं। अभी हाल में उन्होंने शादी की तैयारियों से पूर्व जामनगर में ही 14 मंदिरों का निर्माण करवाया है। इसकी वीडियो रिलायंस फाउंडेशन ने अपने एक्स पर शेयर भी की।

वीडियो में मूर्तिकार बता रहे थे कि कैसे उन्हें ये काम करके सम्मानित महसूस हो रहा है। उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे अंबानी परिवार ने उन्हें भी शादी में बुलाया हो।

इसी तरह अनंत अंबानी का ‘वनतारा’ प्रोजेक्ट भी अभी हाल में लॉन्च किया गया। जिसे लॉन्च करते हुए वह बोले थे कि उनके माता पिता ने हमेशा से पशुओं से प्यार करना सिखाया है, इसलिए वह उन्होंने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी।

‘उनके लिए पाकिस्तान दुश्मन देश, हमारे लिए पड़ोसी’: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस MLC के विवादित बोल, बीजेपी ने कहा- आज भी निभाई जा रही नेहरू-जिन्ना की दोस्ती

कर्नाटक कॉन्ग्रेस के बड़े नेता और विधान परिषद सदस्य बीके हरिप्रसाद ने पाकिस्तान को दुश्मन राष्ट्र मानने से इंकार कर दिया। हरिप्रसाद ने कहा कि भाजपा के लिए पाकिस्तान दुश्मन राष्ट्र हो सकता है लेकिन हमारे लिए तो पड़ोसी राष्ट्र है। उनके इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीके हरिप्रसाद ने कर्नाटक विधान परिषद में कहा, “वे (भाजपा) लोग एक दुश्मन देश के साथ हमारे संबंधों के विषय में बात करते हैं। उनके अनुसार पाकिस्तान एक दुश्मन देश है। हमारे लिए, पाकिस्तान दुश्मन देश नहीं है बल्कि यह हमारा पड़ोसी देश है।”

आगे उन्होंने कहा, ” वे कहते हैं कि पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है, हाल ही में, उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया। वह लाहौर में जिन्ना की मजार पर गए थे और कहा था कि वह एक धर्मनिरपेक्ष नेता थे। क्या तब पाकिस्तान दुश्मन देश नहीं था?”

बीके हरिप्रसाद ने यह बयान तब दिया जब भाजपा नेताओं ने सदन में आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की जीत के बाद ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। उनका एक वीडियो भी इस सम्बन्ध सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बीके हरिप्रसाद इस बयान पर अब घिर गए हैं। भाजपा ने उन पर हमला बोला है।

कर्नाटक भाजपा के एक्स हैंडल ने बीके हरिप्रसाद की यह वीडियो डालते हुए लिखा, “बीके हरिप्रसाद ने आज सदन में स्पष्ट कर दिया कि कॉन्ग्रेस का पाकिस्तान के प्रति रवैया और सोच क्या है। कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को भाजपा के लिए एक शत्रु और अपने लिए पड़ोसी बताकर यह स्पष्ट कर दिया है कि पीढ़ियों से चली आ रही जिन्ना और जवाहर लाल नेहरु की दोस्ती अब भी मौजूद है।”

भाजपा ने कहा कि कॉन्ग्रेस विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों के साथ खड़ी है और भारत पर 4 बार युद्ध का ऐलान करने वाले पाकिस्तान को पड़ोसी राष्ट्र बताती है। भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष बी वाई विजयेन्द्र ने भी इस मामले में कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का कॉन्ग्रेस को दुश्मन ना मानना लम्बे समय से मुद्दा रहा है लेकिन सच को छुपाया नहीं जा सकता है और राहुल गाँधी के सिपाहसालार हरिप्रसाद ने विधान परिषद में इसे स्पष्ट कर दिया। विजयेन्द्र ने कह़ा कि यही कारण है जिससे पाकिस्तान पीएम मोदी की बजाय कॉन्ग्रेस सरकार चाहता है।

गौरलतब है कि बीके हरिप्रसाद का बयान ऐसे समय में आया है जब मंगलवार (27 फरवरी, 2024) को सम्पन्न हुए राज्यसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों के विजयी होने के बाद पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की बात उठी थी। इस मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज कर ली थी।

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद पकड़ा गया TMC नेता शेख शाहजहाँ, संदेशखाली में ED की टीम पर हमले के बाद से ही था फरार

संदेशखाली मामले के मुख्य आरोपित व तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ को पश्चिम बंगाल पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसे 29 फरवरी की सुबह गिरफ्तार किया। वह पिछले 55 दिन से फरार चल रहा था। इस बीच उसके कई करीबी गिरफ्तार हुए लेकिन शाहजहाँ का पता नहीं चल पा रहा था। गुरुवार को उसे बंगाल पुलिस ने मिनाखान इलाके से पकड़ा।

मिनाखान के एसडीपीओ अमीनुल इस्लाम खान ने बताया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने उत्तर 24 परगना के मिनाखान इलाके से शाहजहाँ शेख को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे बशीरहाट सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया जाना है। फिलहाल वह कोर्ट लॉकअप में बंद है।

बता दें कि संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ 70 से ज्यादा शिकायतें पुलिस में दर्ज हुई थी जिसके बाद पुलिस ने इस केस में 2 दिन पहले ही एफआईआर की थी। वहीं कोलकाता हाईकोर्ट ने तो साफ कहा था कि शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। उसे गिरफ्तार करना जरूरी है।

कोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया था कि महिलाओं पर यौन अत्याचार और संदेशखाली में जमीन हड़पने के मुख्य आरोपी तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख को सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या पश्चिम बंगाल पुलिस में से कोई भी गिरफ्तार कर सकती है। हाई कोर्ट की फटकार के बाद बंगाल की टीएमसी पार्टी ने कहा था कि वह शेख शाहजहाँ को एक हफ्ते के भीतर पकड़ लेंगे।

गौरतलब है कि पिछले महीने राशन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय शेख शाहजहाँ के घर छापा मारने आई थी। हालाँकि उसके समर्थकों ने ईडी पर ही उलटा हमला कर दिया और शेख शाहजहाँ फरार हो गया। उसके बाद से टीएमसी नेता कहाँ था ये किसी को नहीं पता था। हाल में उसके भाई ने मीडिया को बताया था कि वो बंगाल में ही है, लेकिन उसकी बात नहीं हुई है।