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संदेशखाली में चप्पलों से पिटने वाला TMC नेता अजीत मैती गिरफ्तार, भीड़ के डर से 4 घंटे रखा खुद को लॉक: संदेशखाली से शेख शाहजहाँ अब भी फरार

बंगाल के उत्तर 24 परगना के संदेशखाली गाँव में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार मामले में अब तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता अजीत मैती की गिरफ्तारी हुई है। अजीत मैती पर ग्रामीणों की जमीन कब्जाने का आरोप है।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने उसे शेख शाहजहाँ के करीबी के घर से पकड़ा है। यहाँ उसने खुद को 4 घंटे तक बंद किया हुआ था क्योंकि ग्रामीण उसका पीछा कर रहे थे।

मैती को हिरासत में रविवार को ही ले लिया गया था। उस समय पुलिस ने जानकारी दी थी कि उन्होंने ग्रामीणों की जमीन हड़पने की शिकायतों के बाद मैती को हिरासत में लिया। पुलिस ने ये भी कहा था कि वो ग्रामीणों की शिकायतों पर गौर करेंगे और फिर अजीत मैती को गिरफ्तार करने के बारे में फैसला करेंगे।

बता दें कि अजीत मैती का एक वीडियो कुछ दिन पहले सामने आया था जिसमें उनके घर पर भीड़ ने हमला किया था। ये भी खबर आई थी कि अजीत मैती की पिटाई इस दौरान चप्पलों से हुई थी। इसके बाद वह एक साथी के घर जाकर छिपा हुआ था।

पुलिस को जब पूरे हड़कंप की सूचना मिली तो वह फौरन मौके पर पहुँचे और लोगों को शांत कराकर मैती को हिरासत में लिया। अब उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

गौरतलब है कि संदेशखाली मामले का आरोपित और टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख अब भी फरार है। उसके खिलाफ 70 शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने मामले में FIR की है। ज्यादातर शिकायतों में उसपर जबरन जमीन हड़पने और महिलाओं को प्रताड़ित करने का ऐरोप है।

ज्ञानवापी में नहीं रुकेगी पूजा, इलाहाबाद HC से मस्जिद कमिटी की याचिका खारिज, मुलायम सिंह के पूजा रुकवाने को बताया गैर कानूनी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित ज्ञानवापी ढाँचे के भीतर व्यासजी के तहखाने में हो रही पूजा अर्चना पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। उसने जिला कोर्ट के आदेश को जारी रखते हुए इस पर रोक लगाने की माँग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की रोहित रंजन अग्रवाल वाली एक सदस्यीय बेंच ने यह निर्णय सुनाया है। उन्होंने मस्जिद कमिटी की याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने यह निर्णय 15 फरवरी, 2024 को सुरक्षित कर लिया था जिसे आज सुनाया गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस सुनवाई के दौरान कहा कि वर्ष 1993 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में ज्ञानवापी के भीतर पूजा पर रोक लगाया जाना गैर कानूनी था। उसने राज्य सरकार से कानून व्यवस्था नियंत्रित करने को कहा है।

मस्जिद कमिटी ने यह याचिका 31 जनवरी, 2024 को वाराणसी के जिला कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी के भीतर व्यासजी के तहखाने में पूजा की अनुमति देने के विरुद्ध लगाई थी। गौरतलब है कि 31 जनवरी, 2024 को एक आदेश में कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर के भीतर व्यास जी के तहखाने में हिन्दू पूजा अर्चना कर सकते हैं, उन्हें झरोखा दर्शन की अनुमति भी दी गई थी। यह निर्णय आने के बाद प्रशासन ने रात में ही पूजा और आरती चालू करवा दी थी। मस्जिद कमिटी इसके खिलाफ पहले सुप्रीम कोर्ट भी गई थी जहाँ कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया था।

मस्जिद कमिटी का याचिका में कहना था कि व्यासजी का तहखाना विवादित मस्जिद का हिस्सा है इसलिए उसमें कोई मूर्ति नहीं रखी जा सकती। हालाँकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी यह दलील नहीं मानी और पूजा को जारी रखने की अनुमति दी। दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष ने कहा कि यहाँ लगातार पूजा होती आई है इसलिए यहाँ पूजा जारी रहनी चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में ज्ञानवापी में किए गए ASI सर्वे की रिपोर्ट भी सामने आई थी। इसके अंदर सर्वे करने गई टीम को विवादित मस्जिद के तहखानों से कई मूर्तियाँ और शिवलिंग मिले थे। ASI रिपोर्ट में कहा गया था कि यहाँ पहले एक विशाल हिन्दू मंदिर मौजूद था। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इन तहखानों को जानबूझ कर बंद किया गया था। माना जा रहा है कि यह निर्णय आने के बाद अब मस्जिद कमिटी सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी।

10 सालों में गाँवों में आई समृद्धि, अधिक खर्च कर रहे लोग, शहरों के मुकाबले ज्यादा खरीद रहे, गरीबी अब 5% के आसपास

देश में बीते 10-11 वर्षों में गाँव और शहर के बीच की खाई कम हुई है। अब गाँव के लोग भी शहरों की तरह ही खर्च कर रहे हैं। इस दौरान लोगों का खाने पर खर्च कम हुआ है जबकि बाकी चीजों पर बढ़ा है। इस दौरान देश में गरीबी भी कम हुई है। यह सभी जानकारी केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में सामने आई हैं।

केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वन मंत्रालय (MoSPI) ने कल (25 फरवरी, 2024) को देश के परिवारों द्वारा किए जाने खर्चे को लेकर किए गए पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वे के आँकड़े जारी किए हैं। यह सर्वे अगस्त 2022 से जुलाई 2023 के बीच में किया गया था। यह इस सर्वे का 76वाँ संस्करण था। इसमें कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ निकल कर आई हैं। इस रिपोर्ट में एक व्यक्ति के प्रतिमाह खर्च को लेकर जानकारी दी गई है। इसमें गाँवों में रहने वाले और शहरों में रहने वाले लोगों का अलग अलग आँकड़ा दिया गया है।

गाँव में भी बढ़ रहा खर्च, शहर की तुलना में कम हुआ अंतर

सर्वे के अनुसार, देश के गाँवों में बसने वाली आबादी में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च ₹3773 है जबकि शहर में रहने वाला एक आदमी औसतन ₹6459 प्रति माह अपने ऊपर खर्च करता है। यह खर्च 2011-12 में किए गए सर्वे की तुलना में लगभग 2.5 गुना है। 2011-12 में गाँव में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने ऊपर ₹1430 जबकि शहरी व्यक्ति ₹2630 खर्च करता था। गाँवों में रहने वाला व्यक्ति अपने कुल खर्चे का 46% जबकि शहरों में रहने वाला व्यक्ति 39% खर्च खाने-पीने पर करता है।

गाँव शहर खर्च तुलना
खर्चे के विषय में बताती रिपोर्ट (बैकग्राउंड: Bing AI)

नई रिपोर्ट के आँकड़े दर्शाते हैं कि गाँव और शहर के खर्चे के बीच की खाई भी कम हुई है। अब दोनों के खर्चे में 71% का अंतर है जबकि 2011-12 में यह लगभग 84% था। इसका अर्थ यह निकलता है कि अब गाँवों में भी वह सुविधाएँ पहुँच रही है जो पहले मात्र शहरों में उपलब्ध थी और लोग इन पर खर्च भी कर रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि शहरों में 5% सबसे अधिक खर्च करने वाले लोग महीने में ₹20,824 खर्च कर रहे हैं जबकि गाँवों में यह शीर्ष 5% लोग ₹10,501 खर्च कर रहे हैं। सबसे निचले तबके के शहरी 5% महीने में ₹2001 जबकि ग्रामीण 5% लोग ₹1373 खर्च कर रहे हैं। खाने को लेकर खर्च देखा जाए तो गाँवों में एक व्यक्ति महीने में ₹1750 जबकि शहर में ₹2530 खर्च करता है। रिपोर्ट से पता चलता है कि देश लोगों के खर्च में खाने पर किए गए खर्च का हिस्सा सिमट रहा है।

इसके अनुसार, वर्ष 1999-2000 में जहाँ एक ग्रामीण व्यक्ति के कुल खर्चे का 59% खर्च सिर्फ खाने पर ही होता था, सबसे ताजे सर्वे में यह 46% हो चुका है। शहरों में यह इसी दौर में 48% था जो कि 39% हो गया है। इस रिपोर्ट में राज्यवार आँकड़े भी दिए गए हैं।

किस राज्य के लोग अधिक खर्चीले?

रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों में सबसे अधिक खर्च सिक्किम के लोग कर रहे हैं। सिक्किम में एक ग्रामीण व्यक्ति ₹7731 जबकि शहरी व्यक्ति ₹12,105 खर्च करता है। इसके उलट छतीसगढ़ में खर्च सबसे कम है। यहाँ एक ग्रामीण व्यक्ति ₹2466 जबकि शहरी व्यक्ति ₹4483 खर्च करता है। उत्तर प्रदेश में यही खर्च ₹3191 और ₹5040 है। बिहार में यह ₹3384 और ₹4768 है। इन आँकड़ों में अलग अलग रोजगार वाले कितना खर्च करते हैं यह भी बताया गया है।

गाँवों में खेती में लगे लोग महीने में ₹3702 जबकि नौकरीपेशा ₹4533 खर्च करते हैं। दूसरी तरफ शहरों में खुद का रोजगार करने वाले ₹6067 जबकि नौकरीपेशा ₹7146 खर्च करते हैं। सामाँजिक ताने-बाने के हिसाब से देखा जाए तो देश की अनुसूचित जनजातियों के लोग महीने में ग्रामीण क्षेत्र में ₹3016 जबकि शहरी क्षेत्र में ₹5414 खर्च करते हैं। अन्य पिछड़े वर्ग के लिए यही खर्च गाँवों में ₹4392 जबकि शहरों में ₹7333 है।

गाँव-शहर दोनों में अनाज-सब्जियों पर कम हुआ खर्च, कोल्ड ड्रिंक-फलों पर बढ़ा

सर्वे में लोगों के खर्च के तरीके को भी बताया गया है। इसके अनुसार, गाँवों में 2011-12 के दौरान लोग अपने खर्च का 10.6% हिस्सा अनाज पर खर्च कर रहे थे, यह अब घट कर 4.89% हो गया है। इसी तरह दालों पर खर्च 2.76% से घट कर 1.77% हो गया है। सब्जियों का खर्च 6.6% से घटकर 5.38% रह गया है। इसके उलट फलों पर खर्च 2.25 से बढ़ कर 2.54 और पेय पदार्थों, पके हुए खाने के सामानों पर खर्च 7.9% से बढ़ कर 9.62% हो गया है।

शहरों में भी यही चलन देखने को मिला है। शहरों में रहने वाले लोग 2011-12 के दौरान अनाज पर 6.6% खर्च कर रहे थे जो अब 3.62% रह गया है। दालों पर खर्च 1.93% से घट कर 1.21% रह गया है। इसके उलट पके हुए खाने और पेय पदार्थों पर खर्च 8.9% से बढ़ कर 10.6% हो गया है।

देश में गरीबी की हकीकत बता रहा यह आँकड़ा

इस सर्वे में सामने आए आँकड़े देश में गरीबी की असल तस्वीर भी पेश कर रहे हैं। NITI आयोग के सीईओ बी वी आर सुब्रमन्यम ने कहा है कि इन आँकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो देश में गरीबी का स्तर 5% या उससे कम हो सकता है। उनका कहना है कि इस आँकड़े के अनुसार, गाँवों में अब भुखमरी की स्थिति नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज कि गाँवों में खर्च कम हो रहा और उनकी स्थिति नहीं बदली है।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि देश में गरीबी अब ईकाई आँकड़े में आ गई है और इस आँकड़े के हिसाब से जाएँ तो यह 5% है।” उन्होंने कहा कि 2011-12 के मुकाबले लोग 2.5 गुना अधिक खर्च कर रहे हैं और यह भारत की सफलता की कहानी है, यह दिखाती है कि देश की समृद्धि कुछ लोगों तक नहीं बल्कि बड़ी जनसंख्या को फायदा पहुँचा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी एक रिपोर्ट में बीते 9 वर्षों में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर आने की बात कही गई थी।

ED के 7वीं बार बुलाने पर भी नहीं पेश हुए अरविंद केजरीवाल, AAP ने जाँच एजेंसी से कहा- रोजाना हमें समन न भेजें

दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल आज (26 फरवरी 2024) भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश नहीं होंगे। ये सातवीं बार है जो उन्होंने ईडी की पूछताछ में सहयोग देने के साफ मना किया है। खुद आम आदमी पार्टी ने इस बात की जानकारी दी है। उनका कहना है कि मोदी सरकार द्वारा इस मामले में दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन ईडी को कोर्ट का ऑर्डर आने तक इंतजार करना चाहिए।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार आम आदमी पार्टी ने बताया, “दिल्ली के सीएम और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल आज ईडी के पास नहीं जाएँगे। मामला कोर्ट में है और अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। ईडी को रोजाना समन भेजने की बजाय कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए। हम INDI गठबंधन नहीं छोड़ेंगे। मोदी सरकार को इस तरह दबाव नहीं बनाना चाहिए।”

बता दें कि ईडी ने 22 फरवरी को अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाला मामले में सातवाँ समन भेजा था। इसमें उन्हें 26 फरवरी को पेश होने के लिए कहा गया था। लेकिन अरविंद केजरीवाल नहीं गए और कोर्ट के ऑर्डर आने तक इंतजार करने को कहा।

वैसे मालूम हो कि दिल्ली सीएम इससे पहले भी 6 बार अलग-अलग कारण देकर ईडी की पूछताछ से बचते रहे। ED ने 14 फरवरी को समन जारी करके केजरीवाल से 19 फरवरी को पेश होने के लिए कहा था। लेकिन उस दिन केजरीवाल विधानसभा में विश्वास मत ले आए।

इसी तरह ईडी ने नवम्बर 2023 में जब केजरीवाल को समन भेजा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मध्य प्रदेश चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में 90% सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। इसके बाद दिसम्बर में जब उन्हें जाँच एजेंसी ने बुलाया तो उन्होंने कहा कि वे विपश्यना के लिए पंजाब जा रहे हैं। इसलिए वे नहीं आ सकते।

अरबी पोशाक पहनने वाली महिला पर टूटी पाकिस्तान की कट्टरपंथी भीड़, लगाया ईशनिंदा का आरोप: पुलिस ने मुश्किल से बचाई जान, सारे आरोप फर्जी निकले

पाकिस्तान के लाहौर में सरेआम एक महिला का उत्पीड़न हुआ। उसकी गलती यह थी कि वो एक ड्रेस पहनकर किसी रेस्टोरेंट में आ गई थी और उसकी ड्रेस पर अरबी में कुछ लिखा था। इस ड्रेस को देखने के बाद तहरीक-ए-लब्बैक के सदस्य भड़क गए। उन्हें लगा कि उर्दू में जो लिखा है वो कुरान की आयतें हैं और महिला ने इस ड्रेस को पहन ईशनिंदा की है।

घटना लाहौर के इछरा मार्केट की है। महिला वहाँ एक रेस्टोरेंट में बैठी थी तभी लोगों का एक समूह आया और उसे घेरकर अपशब्द कहने लगा। वीडियो में सुन सकते हैं कि पीछे से आवाज आ रही है- ‘इस्लाम का मजाक बना रखा है’ और सामने महिला ये सब देख एकदम सन्न बैठी है। वहाँ कुछ और लोग भी हैं जो भीड़ के गुस्से से महिला बचाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन भीड़ शांत होने का नाम नहीं ले रही। महिला मुँह छिपाकर बैठी है दिख रही है।

विवाद बढ़ने पर महिला को बचाने के लिए पुलिस को बुलाया गया। जहाँ हालात समझते हुए गुलबर्ग की एएसपी सईदा सहरबानो नकवी ने सूझबूझ से फौरन एक्शन लेते हुए पहले महिला को गुस्साई भीड़ से दूर किया। उन्होंने भीड़ से कहा कि वो ऐसे वाकयाओं को 3 बार हैंडल कर चुकी हैं, लोगों को उनपर विश्वास तो करना पड़ेगा। इसके बाद वो ये कहकर रेस्टोरेंट का शटर खोलकर अंदर चली जाती हैं वहाँ महिला को भीड़ के बीच से निकालकर अपने साथ ले जाती हैं। मगर भीड़ शांत नहीं होती वो उनके पीछे भागती रहती है।

बता दें कि पाकिस्तान की इस घटना के बाद जब पड़ताल हुई तो पता चला कि कुर्ते पर कहीं भी कुछ भी कुरान की आयतें नहीं लिखी थीं। वो सिर्फ अरबी की लिखावट में कुछ शब्द थे। कहीं खूबसूरत लिखा था, कहीं प्यारा लिखा था, आदि-आदि।

एएसपी सईदा ने कहा महिला की ड्रेस पर कहीं कोई इस्लामी आयत नहीं थी। भीड़ को शायद कोई गलतफहमी हुई। उन्होंने बताया कि महिला और उसके शौहर शॉपिंग पर गए थे जब भीड़ ने उनकी ड्रेस में लिखी बातों को गलत समझ लिया।

गौरतलब है कि महिला ने जो ड्रेस पहली थी वो सऊदी अरब लेबल शालिक रियाद की है, जिसे 2022 में रमज़ान के दौरान लॉन्च किया गया था। शालिक रियाद ने इंस्टाग्राम पर ड्रेस की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए कैप्शन दिया था, “सबसे अच्छा रमज़ान 2022 कलेक्शन आ गया है।”

वहीं, पीड़ित महिला का कहना है कि उसने ड्रेस का कंटेंट जाने बिना ही ड्रेस पहन ली। उसने कहा कि उसने सोचा था कि पोशाक में सिर्फ डिजाइनर पैटर्न थे, और उसे नहीं पता था कि यह अरबी टेक्स्ट था। उसने ऐसी ड्रेस पहनने के लिए माफी माँफी।

महिला ने कहा- “सुन्नी मुस्लिम होने के नाते मैं ऐसा करने की सोच भी नहीं सकती। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। ये सब सिर्फ गलती से हुआ है। फिर भी मैं माफी माँग रही हूँ कि ऐसा दोबारा नहीं होगा।”

कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में धमाका, मालिक साहिद अली समेत 7 की मौत: फॉरेंसिक टीम जुटा रही विस्फोट का सबूत

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक पटाखा फैक्ट्री में रविवार (25 फरवरी, 2024) को जोरदार धमाका हुआ और आग लग गई। इस अग्निकांड के कारण आसपास का इलाका दहल गया। इस घटना में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है, 8 लोग घायल हैं।

जानकारी के अनुसार, कौशांबी के भरवारी नगर पालिका में कानपुर-प्रयागराज हाइवे पर स्थित न्यू रंगोली फायर विग्रेंट फैक्ट्री में सुबह 11 बजे के आसपास जोरदार धमाका हुआ। इससे पूरा इलाका हिल गया। इस धमाके के बाद फैक्ट्री में आग लग गई। इसकी एक दीवाल गिर गई।

बताया गया कि पटाखों का निर्माण करने वाली यह फैक्ट्री लाइसेंस के अंतर्गत संचालित हो रही थी। इसके अंदर आग लगने के कारण फैक्ट्री मालिक साहिद अली की भी मौत हो गई। जबकि यहाँ काम करने वाले कल्लू, शिव नारायण, शिवाकांत, अशोक कुमार भी इस हादसे में जान गवां बैठे। यह सभी यहाँ मजदूरी करते थे और पास के ही गाँवों के रहने वाले थे। यहीं पास के खेत में काम कर रही रेखा देवी की भी इस हादसे में मौत हो गई। धमाके के कारण एक दीवाल गिर गई, जिसके नीचे दब कर रेखा देवी की मौत हो गई।

इस हादसे में 8 लोग घायल भी हुए जिनका इलाज करवाया जा रहा है। यहाँ धमाके के बाद काफी खौफनाक मंजर बन गया, इसके कारण आसपास का इलाका एक दम नष्ट हो गया। लोगों के घरों में तक दरारें पड़ गई। इस धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनी गई। यहाँ घायलों और मृतकों को निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन लगभग पाँच घंटे तक चलता रहा।

उत्तर प्रदेश दमकल विभाग की पाँच गाड़ियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, इस बीच लगातार आग की लपटें निकलती रहीं। अब इस मामले की जाँच की जा रही है कि आग कैसे लगी। मौके का निरीक्षण करने वाले पुलिस अधिकारियों ने 7 मौतों की पुष्टि की है, उनका कहना है कि अब मलबे के भीतर कोई घायल या मृतक नहीं है।

अभी आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भी भेजी गई है, वह अब सबूत जुटाकर बताएगी कि धमाका कैसे हुआ।

हरियाणा में इनेलो प्रदेश अध्यक्ष नफे सिंह राठी को गोलियों से भूना, हत्यारों ने मारी 40-50 गोलियाँ, मौके पर ही मौत

हरियाणा के बहादुरगढ़ में इंडियन नेशनल लोक दल के प्रदेश अध्यक्ष और दो बार के पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या कर दी गई। उनके साथ ही इनेलो के एक कार्यकर्ता और उनके सुरक्षा में लगे जवान की भी मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, नफे सिंह राठी अपनी फॉर्चूनर कार में सवार थे, तभी उनपर गोलियों की बरसात कर दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नफे सिंह राठी की फॉर्च्यूनर कार को आई-10 सवार बदमाश ट्रैक कर रहे थे। उनकी गाड़ी जब बाराही फाटक के पास पहुँची, तब उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की जाने लगी। हमलावरों ने 40 से 50 राउंड गोलियाँ चलाई, जिसमें उनकी जान चली गई। हमले के बाद उन्हें अस्पताल पहुँचाया गया था, जहाँ डॉक्टर ने बताया कि उनकी मौत गोलीबारी के दौरान खून ज्यादा बह जाने की वजह से हुई। इस हमले के बाद सामने आए वीडियो में उनकी गाड़ी की हालत बता रही है कि उनपर किस तरह से हमला हुआ।

हरियाणा इनेलो प्रमुख नफे सिंह राठी की हत्या पर झज्जर के एसपी अर्पित जैन ने कहा, “हमें फायरिंग की एक घटना की सूचना मिली। सीआईए और एसटीएफ की टीमें काम कर रही हैं। आरोपितों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

अनिल विज बोले, एसटीएफ एक्शन में, जल्द पकड़े जाएँगे अपराधी

इस मामले में हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि एसटीएफ को मामले की जाँच में लगा दिया गया है। हत्यारे छोड़े नहीं जाएँगे। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा ने नफे सिंह की हत्या पर दुख जताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हरियाणा में इनेलो प्रदेश अध्यक्ष श्री नफे सिंह राठी जी की गोली मार कर हत्या करने का समाचार बेहद दुःखद है। यह प्रदेश की कानून व्यवस्था को दर्शाता है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि कानून व्यवस्था का दिवाला पिट चुका है। प्रदेश में आज कोई भी अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा है। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि व परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि परिवारजनों को यह कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें। हमले में घायल हुए सुरक्षाकर्मियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ।”

बताया जा रहा है कि नफे सिंह राठी पर पहले भी छिटपुट हमले हुए थे। उन्होंने सुरक्षा भी माँगी थी, जिसके बाद उन्हें सुरक्षाकर्मी दिए भी गए थे। हालाँकि पुलिस ने कहा है कि उसने अपराधियों की पकड़ के लिए विशेष टीम बनाई है, जल्द ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा।

PM मोदी ने समुद्र में जाकर देखी असली द्वारका, भगवान कृष्ण ने बसाया, सिन्धु घाटी सभ्यता से भी पुरानी है यह नगरी, जानें इसका इतिहास

विश्व के सबसे पुरातन धर्म सनातन में चार धाम और सात नगरों को सबसे पवित्र माना गया है। यह चार धाम बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम हैं। वहीं सात नगरों की बात की जाए तो यह हैं- अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंति (उज्जैन की तत्कालीन मालवनी राजधानी) और द्वारावती (द्वारका नगरी)। इन धामों और नगरों का उल्लेख गरुड़पुराण के प्रेतखण्ड के 34वें और 56वें ​​श्लोक में मिलता है। 

स्कंदपुराण के काशीखंड में भी इन सभी सात नगरों का उल्लेख है। ये सात नगर और चारों धाम मोक्ष देने वाले कहे गए हैं। इन सब नगरों में सबसे पवित्र द्वारका धाम है। द्वारका का जिक्र सातों नगरों और चारों धाम, दोनों में है। द्वारका नगरी का अपना काफी गौरवशाली और रोचक इतिहास है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (25 फरवरी,2024) को धर्मनगरी द्वारका का दौरा किया । यहाँ पीएम मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की और बेट द्वारका नगरी को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले नवनिर्मित ‘सुदर्शन सेतु’ का लोकार्पण भी किया। इसके बाद पीएम मोदी ने समुद्र में डूबे प्राचीन द्वारका शहर के अवशेषों को देखा, इसके लिए पीएम मोदी समुद्र के अंदर गए।

इस अनुभव के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जल के भीतर द्वारका शहर में प्रार्थना करना एक दिव्य अनुभव था। मुझे यहाँ भक्ति और आध्यात्मिक वैभव के प्राचीन युग से जुड़ाव का अनुभव हुआ। भगवान श्रीकृष्ण सभी को आशीर्वाद दें।”

भगवान कृष्ण ने बसाई भारत की सबसे आधुनिक नगरी द्वारका

द्वारका एक प्राचीन और पवित्र शहर के रूप में जाना जाता है। द्वारका का इतिहास गौरवशाली और रोचक है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो द्वारका प्राचीन भारत का सबसे उन्नत एवं आधुनिक नगर था। सबसे बड़ा आश्चर्य ये है उस समय समुद्र के बीचों बीच द्वारका कैसे बसाई गई होगी। हाल ही में समुद्र में भेजे गए अभियानों में समुद्र में डूबी स्वर्ण नगरी द्वारका के अवशेष मिले हैं।

द्वारका नगरी का उल्लेख महाभारत के आसपास लिखे गए ग्रंथों में मिलता है। बताया जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा और मथुरा के अत्याचारी राजा कंस का वध किया, तब कंस के ससुर और तत्कालीन मगध नरेश जरासंध ने श्रीकृष्ण से बदला लेने के लिए यादवों पर लगातार हमले चालू कर दिए।

ब्रजभूमि को लगातार होने वाले आक्रमणों से बचाने के लिए, भगवान श्रीकृष्ण ने एक नए स्थान पर बसने का निर्णय किया। इसके लिए उन्होंने सुराष्ट्र (आधुनिक सौराष्ट्र) में कुशस्थली इलाके को चुना। कुशस्थली आने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने कुशादित्य, कर्णादित्य, सर्वादित्य और गृहादित्य नामक कई राक्षसों से युद्ध करके उनका विनाश कर दिया था और समुद्र तट पर द्वारका का निर्माण किया था।

श्रीमद्भागवत के अनुसार, द्वारका का निर्माण करने से पहले, भगवान श्रीकृष्ण ने समुद्र से भूमि देने और पानी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की विनती की। वरुण देव ने भगवान श्रीकृष्ण की कोमलता को पहचाना और समुद्र के ठीक बीच में एक बड़ा क्षेत्र दिया। इसके बाद विश्वकर्माजी ने द्वारका नगरी का निर्माण किया। 

भगवान कृष्ण ने द्वारका नगरी की स्थापना की और इसे समृद्धि का मुख्य केंद्र बनाया। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की कई महत्वपूर्ण घटनाएँ द्वारका नगरी में ही घटित हुईं, जैसे रुक्मणिहरण और विवाह, जाम्बवती, रोहिणी, सत्यभामा, कालिंदी, मिगविंदा, सत्या, नग्नजीति, सुशीलमाद्रि, लक्ष्मण, दत्त सुशल्या आदि। इसके अलावा अनिरुद्ध का विवाह, महाभारत युद्ध प्रबंधन भी यहीं से सम्बंधित है। इसके अलावा चीरहरण से द्रौपदी की रक्षा और शिशुपाल वध की गवाह द्वारका है।

प्राचीन भारत की समृद्ध नगरी थी द्वारका

भगवान श्रीकृष्ण के समय में द्वारका की भौतिक समृद्धि सफलता के उच्चतम स्तर तक पहुँच चुकी थी। द्वारका प्राचीन भारत का सबसे उन्नत शहर बन गया था। विदेशी व्यापार से लेकर विज्ञान तक क्षेत्रों में प्राचीन द्वारका सबसे अग्रणी थी। भगवान कृष्ण के नेतृत्व में यदुवंश भी समृद्ध हो रहा था।

प्राचीन भारत उस समय की बाक़ी दुनिया से कहीं आगे था और उसमें भी द्वारका शहरी उन्नति के सभी शिखरों को छू रही थी। इसका उदाहरण समुद्र के बीचोंबीच एक पूरा साम्राज्य खड़ा करना है और वो भी बिना आधुनिक मशीनरी के। यहाँ विशाल महल और मकान थे। उत्कृष्ट सड़क व्यवस्था थी और प्रकाश की भी व्यवस्था थी। तब भगवान श्रीकृष्ण के पास प्राचीन विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना थी। इसे नारायणी सेना के नाम से जाना जाता था। इस सेना के समक्ष बड़ी बड़ी सेनाएँ बिना लड़ें ही हार मान लेती थीं।

हालाँकि, समय के साथ परिस्थितियाँ बदलने लगीं और भौतिक सुविधाओं में सुधार के कारण यदु वंश भोग-विलास में लिप्त होने लगा। द्वारका में एक साथ अनेक त्रासदियाँ घटित होने लगीं।इसी दौरान, यादवों ने पिंडतारण क्षेत्र में रहने वाले ऋषियों के लिए बाधाएँ खड़ी की। हालाँकि, ऋषियों ने यादवों को माफ कर दिया। यादवों ने उन ऋषियों की धार्मिक कार्यकलापों में बाधा डालना शुरू कर दिया। अंततः ऋषियों ने यादवों को श्राप दे दिया। यह यदुवंश को मिला पहला श्राप था।

गांधारी का श्राप और द्वारका डूब गयी

ऋषियों द्वारा दिए गए श्राप का प्रभाव दिन प्रतिदिन प्रबल होता जा रहा था। इस बीच भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के महान युद्ध में भाग लिया। वह पांडव योद्धा अर्जुन के सारथी बनकर कुरूक्षेत्र में उतरे। जबकि उनकी नारायणी सेना कौरवों की तरफ से लड़ रही थी। 18 दिनों तक चले इस महान युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने कई अनुष्ठान किये। इस दौरान अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान मिला। दूसरी तरफ ऋषियों के श्राप के प्रकोप से पांडवों के हाथों नारायणी सेना नष्ट होने लगी। इस भीषण युद्ध में अंततः कौरवों की हार हुई।

इस युद्ध में राजा धृतराष्ट्र के सभी 100 पुत्रों के मारे जाने का समाचार सुनकर पत्नी गांधारी अत्यंत दुखी हुईं और रोने लगी। उस समय पांडवों का हस्तिनापुर में राज्याभिषेक हो रहा था। सबसे बड़े पांडव भाई युधिष्ठिर पवित्र सेंगोल धारण कर राजगद्दी पर बैठने जा रहे थे। 

इसी समय राजसभा में कौरवों की माता गांधारी आईं और उन्होंने युद्ध और अपने पुत्रों की मृत्यु के लिए भगवान कृष्ण को दोषी ठहराया और श्राप दिया, “जिस प्रकार पूरे कौरव वंश का नाश हो गया, उसी प्रकार यदु वंश का भी नाश होगा। यहाँ तक ​​कि दुनिया की सबसे सुंदर नगरी द्वारका भी जल में डूब जाएगी”

भगवान श्रीकृष्ण ने उनके श्राप को सहर्ष स्वीकार किया। हालाँकि, इसके बाद गांधारी को अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने भगवान से क्षमा माँगी। उस समय भगवान श्री कृष्ण ने कहा, “तुम तो केवल निमित्त मात्र बनी हो। यदुवंश का विनाश निश्चित था। जो सभ्यता भोग-विलास में सोती है, वह निश्चित ही नष्ट हो जाएगी।”

आखिर में ऐसा भी एक समय आया जब यदुवंशी आपस में ही लड़ने लगे और विद्रोह कर दिया। इसी बीच एक दिन भगवान श्रीकृष्ण प्रभास क्षेत्र के वन में विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान एक शिकारी ने अचानक ने उन पर जानवर समझकर तीर चला दिया, जो भगवान के पैर के तलवे में लगा। जैसे-जैसे शिकारी करीब आया, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह भगवान से क्षमा माँगने लगा। 

इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “जो कुछ होता है वह मेरी इच्छा से ही होता है।” इस प्रकार उन्होंने मानव शरीर को त्याग दिया। भगवान की लीला के समाप्त होते ही होते ही द्वारिका में भीषण सुनामी आई और वह बह गयी और यदुवंश का भी पतन हो गया। उस समय की भव्य एवं दिव्य स्वारका जलमग्न हो गयी। इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण के महान साम्राज्य खत्म हुआ।बताया जाता है कि जब श्रीकृष्ण ने अपने शरीर का त्याग किया, तभी से कलयुग चालू हुआ।

सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुरानी द्वारका

द्वारका के गौरवशाली इतिहास को जानने के लिए कई इतिहासकारों ने काफी प्रयास किया है। इसमें जादुनाथ सरकार के साथ ही कई विदेशी इतिहासकार भी शामिल हैं। लेकिन अभी तक कोई भी इतिहासकार इसकी जड़ों तक नहीं पहुँच पाया है। समुद्र में कई अभियानों में प्राचीन द्वारका के खंडहरों के बारे में पता चला है। प्राचीन द्वारका के खंडहरों में खम्भे, पत्थर, बर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के महल वाली पूरी दिव्य नगरी भी मिली है। इन सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया गया है और पाया गया है कि ये आज से 5000 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।

कई हिंदू धर्मग्रंथों में भी द्वारका के बारे में जानकारी दी गई है। इनमें द्वारका शब्द का अर्थ ‘स्वर्ग का द्वार’ बताया गया है। प्रसिद्ध इतिहासकार ए जे चावड़ा के अनुसार, भगवान कृष्ण का साम्राज्य सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुराना है। सिंधु घाटी की आर्यन सभ्यता को विश्व के इतिहास में सबसे पुरानी सभ्यता के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेकिन द्वारका नगरी के अवशेष भी 5 हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं। सिंधु घाटी सभ्यता लगभग 4,000 साल पहले सिंध क्षेत्र से भारत के विभिन्न राज्यों में फैल गई थी।

इस बारे में एजे चावड़ा ने कहा कि जिसे हम सिंधु घाटी सभ्यता कहते हैं वह असल में द्वारका सभ्यता थी। इतिहासकारों को सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीन मूर्तियाँ मिलीं है। जो अनुमानतः 4000-4500 वर्ष पुरानी है। उन मूर्तियों में शिव-पार्वती की मूर्तियां और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सिंध में बसने वाली यह सभ्यता आर्य सभ्यता थी।

वहीं एजे चावड़ा ने यह भी दावा किया है कि द्वारका आर्य सभ्यता का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने कहा कि लगभग 5500-6000 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका बसाई थी। उस समय उन्होंने आर्य सभ्यता की नींव रखी थी। वह द्वारका सभ्यता सौराष्ट्र, कच्छ, सिंध, गुजरात के कई क्षेत्रों, उत्तर भारत के क्षेत्रों और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों तक फैली हुई थी।

द्वारका थी भारत की सुनियोजित नगरी

कई इतिहासकारों के अनुसार वाराणसी भी द्वारका सभ्यता का हिस्सा था। वाराणसी को विश्व के सबसे प्राचीन शहर के रूप में जाना जाता है। विशेष बात यह है कि सिंधु घाटी सभ्यता के शहर जैसे कि मोहन-जो-दाड़ो, लोथल, हड़प्पा, धोलावीरा आदि विकसित और सुनियोजित शहर माने जाते थे। जिसमें मोहनजो-दाडो को सबसे अधिक विकसित शहर माना जाता था। उनकी नगर रचना बहुत अच्छी थी। 

लेकिन द्वारका की नगर संरचना और मोहनजो-दाड़ो की नगर रचना एकसमान थी। कई मायनों में द्वारका नगरी मोहनजो-दाड़ो से भी अच्छी थी। फिर भी प्राचीन इतिहास में द्वारका को स्थान नहीं दिया गया है। विश्व की सबसे विकसित और सुनियोजित नगरी द्वारका को इतिहास में जगह न मिलने के पीछे कई कारण हो हैं। मुख्य कारणों में से एक यह है कि द्वारका का निर्माण हिंदू धर्म के भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। जबकि मोहनजो-दाड़ो को किसने बसाया इसके बारे में कोई भी स्पष्ट ऐतिहासिक जानकारी नहीं है।

ब्रिटिश काल से लेकर भारत के स्वतंत्र होने के बाद तक इतिहास के क्षेत्र में वामपंथी इतिहासकारों का वर्चस्व रहा है। ऐसे में कई धार्मिक मंदिरों और कस्बों के बारे में देश के करोड़ों लोगों को जानकारी नहीं दी गई है। भारत के इतिहास में द्वारका का नाम न आने के पीछे एक कारण वामपंथी इतिहासकारों के प्रति हिंदू घृणा भी है। 

एक धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात द्वारका का इतिहास संभवतः 6000 वर्ष पुराना है। हाल ही में, भारत सरकार कई मिशनों और अभियानों के माध्यम से जलमग्न द्वारका को दुनिया के सामने पेश करने के लिए प्रयास कर रही है। इन प्रयासों से प्राचीन भारत की आधुनिक नगरी द्वारका का गौरवशाली एवं दिव्य इतिहास धीरे-धीरे सामने आ रहा है।

सिनेमा बनाने वाला जाफ़र सादिक, असली काम ₹2000 करोड़ का ड्रग रैकेट… CM स्टालिन और DMK से कनेक्शन, ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड तक डायरेक्ट सप्लाई

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एक कार्रवाई में दिल्ली में बड़े ड्रग रैकेट का खुलासा हुआ है। इसका सरगना एक तमिल फिल्म निर्माता जाफ़र सादिक बताया जा रहा है। उसकी तलाश जारी है। इस तमिल फिल्म निर्माता की तस्वीरें तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के साथ भी सामने आई थीं। उसकी प्रशंसा में स्टालिन के बेटे उदयानिधि ने पोस्ट लिखा था।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली में पड़े इस छापे से कई बड़े खुलासे हुए हैं। दिल्ली के एक गोदाम में मारे गए इस छापे में 50 किलो ड्रग बरामद हुई है। इसके साथ ही तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस गैंग के तार तमिलनाडु के एक फिल्म जाफ़र सादिक निर्माता से जुड़े हैं, जो इस पूरे खेल का सरगना माना जा रहा है।

इस छापे में स्यूडोफेड्राइन नाम की एक ड्रग बरामद हुई है। सामने आया है कि यह रैकेट इस ड्रग को अलग अलग खाने के सामान में छुपा कर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेज रहा था, जहाँ इसकी कीमत करोड़ों में है। यह सामने आया है कि बीते तीन वर्षों में 3500 किलो से अधिक ड्रग इन देशों को भेजी जा चुकी है। अब तक 45 बार यहाँ ड्रग भेजी गई है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजर में कीमत कम से कम ₹2000 करोड़ बताई जा रही।

CM स्टालिन के साथ जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक इस पूरे ड्रग नेटवर्क का सरगना माना जा रहा है। वह एक तमिल फिल्म निर्माता है। उसने एक फिल्म ‘मंगाई’ बनाई थी। इसका एक गाना उदयानिधि की पत्नी के हाथों लॉन्च किया गया था। इससे पहले वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी मिला था। वह सीएम स्टालिन से 17 दिसम्बर 2023 को मिला था। सादिक ने इस दौरान उन्हें ₹10 लाख चेक सौंपा था। यह चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। यह दान उसने तूफ़ान मिचौन्ग के बाद दिया था।

वह सिर्फ सीएम स्टालिन से ही नहीं बल्कि उनके बेटे और तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन से भी मिला था। उन्हें इसने ₹2 लाख का चेक सौंपा था, जो मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। इस दान को लेकर उदयानिधि ने सादिक की प्रशंसा में एक पोस्ट भी लिखा था, वह अब डिलीट कर दिया गया है।

जाफ़र सादिक तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK से जुड़ा हुआ है और इसकी NRI विंग का मैनेजर है। उसकी कई DMK सांसदों और विधायकों के साथ फोटो हैं।

अन्नामलाई ने उठाए सवाल

सादिक पर हुए इस खुलासे के बाद अब तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सादिक के फोटो मुख्यमंत्री समेत तमाम बड़ी हस्तियों के साथ आए हैं। उन्होंने कहा कि जबसे राज्य में डीएमके की सरकार आई है, ड्रग्स का असर बढ़ गया है। स्कूलों में भी ड्रग उपलब्ध हैं। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से मामले में कार्रवाई की माँग की है।

बताया गया है कि इस मामले के खुलने के बाद सादिक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं पुलिस सलीम और मोईद नाम के अन्य दो व्यक्तियों को इस मामले में ढूँढ रही है। बताया जा रहा है दिल्ली में छापे के दौरान पकड़े गए तीनों व्यक्ति भी तमिलनाडु के हैं।

जहाँ से राहुल गाँधी ने शुरू की यात्रा, वहीं से कॉन्ग्रेस के आधे विधायक BJP में शामिल: जुड़ने के बजाय कट रही इंडी गठबंधन

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी पार्टी को मजबूती देने के लिए भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। ये अलग बात है कि उनकी ‘न्याय’ यात्रा जिस राज्य में पहुँचती है, या जिस राज्य से गुजरती है, वहाँ पर न सिर्फ कॉन्ग्रेस बल्कि पूरे इंडी गठबंधन के लिए दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। राहुल की यात्रा पूर्वोत्तर में जिस अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरी थी, महज एक दिन की यात्रा का असर ऐसा हुआ कि कॉन्ग्रेस पार्टी के आधे विधायक ही टूटकर पार्टी से अलग हो गए और बीजेपी में शामिल हो गए।

खास बात ये है कि अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में 60 सीटें हैं। इनमें से अब कॉन्ग्रेस के पास सिर्फ 2 विधायक ही बचे हैं और विपक्ष में कुल मिलाकर सिर्फ तीन विधायक। बाकी सभी विधायक सत्ता पक्ष में हैं, जिसमें से दो निर्दलीय विधायक भी हैं। नहीं समझे न? दरअसल, अरुणाचल प्रदेश में जब साल 2019 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तो बीजेपी ने 41 सीटें जीती थी और दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाई थी। इसके साथ ही जेडीयू ने 7 सीटें जीती थी। नेशनल पीपल्स पार्टी ने 5 विधानसभा सीटें जीती, तो कॉन्ग्रेस ने चार सीटें। वहीं, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ने भी एक सीट जीती थी। इसके अलावा 2 निर्दलीय विधायक थे।

इसके बाद अरुणाचल में जेडीयू के सभी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। पीपल्स पार्टी का विधायक भी बीजेपी में शामिल हो गया था। एनपीपी वैसे भी एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में कॉन्ग्रेस के चार विधायक ही विपक्ष में बैठे थे। एक निर्दलीय विधायक बाद में टीएमसी में शामिल हो गए थे। कुल 5 विपक्षी विधायकों वाली अरुणाचल प्रदेश में अब कॉग्रेस के दो ही विधायक बचे हैं, तो टीएमसी का एक। बाकी के दो निर्दलीय विधायक सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इस तरह से राहुल गाँधी ने जिस अरुणाचल प्रदेश में अपनी न्याय यात्रा एक दिन निकाली, उस अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के आधे विधायक ही बागी हो गए और वो बीजेपी में शामिल हो गए।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने खुद एक्स पर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री निनॉन्ग एरिंग, जो पासीघाट पश्चिम सीट से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं, वो अब बीजेपी में आ चुके हैं। उनके साथ ही बोरदुनिया-बोगापानी के कॉन्ग्रेस विधायक वांगलिन लोवांगडोंग ने भी बीजेपी की सदस्यता ले ली। इस दौरान एनपीपी के विधायक मुच्चू मीठी जो रोइंग सीट से विधायक हैं, और उनके साथी बसर सीट से विधायक गोकर बसर भी बीजेपी में शामिल हो गए। इस दौरान असम के मंत्री और अरुणाचल में बीजेपी के चुनाव प्रभारी अशोक सिंघल भी मौजूद रहे।

खैर, ये मामला सिर्फ अरुणाचल का ही नहीं है, बल्कि राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जिन राज्यों से गुजरी, या जिन राज्यों में पहुँची या पहुँचने वाली थी। यानी किसी भी तरह का जुड़ाव न्याय यात्रा से अगर था, तो वहाँ पार्टी ही नहीं, बल्कि इंडी गठबंधन को नुकसान ही हुआ है। अरुणाचल से लेकर असम तक विद्रोह हुआ, तो पश्चिम बंगाल में दीदी ममता ने आँखें दिखा दी। बिहार में इंडी गठबंधन के सूत्रधार ने ही इंडी गठबंधन को छोड़ दिया, तो उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी जैसे नेताओं ने भी राहुल गाँधी का हाथ झटक दिया। महाराष्ट्र में अशोक चौहान से लेकर बाबा सिद्दीकी तक ने झटका दिया, तो कॉन्ग्रेस को सहयोगी दलों के सामने भी घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा है।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में उसे सपा की शर्तों पर लोकसभा चुनाव सिर्फ 17 सीटों पर लड़ना पड़ रहा है, तो पंजाब में इंडी गठबंधन में होने के बावजूद उसे आम आदमी पार्टी के खिलाफ अलग ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है। वहीं, दिल्ली की सात में से 4 लोकसभा सीटें भी आप के लिए छोड़नी पड़ गई। ऐसे में समझ सकते हैं कि इंडी गठबंधन में कॉन्ग्रेस पार्टी को लगातार नुकसान पर नुकसान ही झेलना पड़ रहा है।