Home Blog Page 1254

छोटे से पोस्टकार्ड पर 21 हजार बार ‘राम-राम-राम…’ रघुवीर सिंह प्राण-प्रतिष्ठा से पहले भेजेंगे इसे अयोध्याधाम, 5 महीने से लगातार कर रहे मेहनत

अयोध्या में नवनिर्मित भव्य श्रीराम मंदिर में भगवान रामलला 22 जनवरी 2024 को विराजने जा रहे हैं। ऐसे में प्रभु की सेवा में श्रद्धालुओं से जो कुछ हो पा रहा है वो वह सब कर रहे हैं। जैसे आगरा के सिख रघुवीर सिंह, जो एक पोस्टकार्ड में 21 हजार बार राम नाम लिखकर उसे रामलला के पास भेजने की तैयारी में लगे हुए हैं। उन्होंने 16 साल पहले एक ही पोस्टकार्ड में 31480 बार राम नाम लिखकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा था।

बकौल रघुवीर उन्होंने 2007 में फिरोजाबाद के कैला देवी मंदिर में हनुमान भक्तों को कागज पर राम का नाम लिखते देखा था। इसके बाद से ही उनके मन में कुछ अलग करने की इच्छा बलवती होती गई। बस फिर क्या था शुरुआत की पोस्टकार्ड पर 21 हजार बार गुरु नाम लिखकर। इसके बाद राम का नाम 30 हजार से अधिक बार लिखा।

मूल रूप से फिरोजाबाद के रहने वाले रघुबीर अभी आगरा के महर्षि पुरम में रहते हैं। पेशे से एक दवा कंपनी में एरिया मैनेजर रघुवीर ने राम मंदिर उद्घाटन के लिए पाँच महीने पहले उपहार स्वरूप 21 हजार राम नाम लिखा पोस्टकार्ड भेजने का फैसला लिया था। तब से वो रोजाना एक घंटे एक जगह बैठकर पोस्टकार्ड पर रामनाम लिखने का नियम बनाया।

वो पोस्टकार्ड में एक लाइन में लगभग 70 बार राम का नाम लिखते हैं। ये राम नाम इतना अधिक बारीकी से लिखा गया है कि बेहद पास से देखने पर ही राम नाम नजर में आता है। पोस्टकार्ड पर उनके लिखे राम नाम लेंस की मदद लेकर ही सहूलियत से पढ़े जा सकते हैं।

दैनिक जागरण के मुताबिक, रघुबीर को हर बार पाँच बार राम लिखने के बाद पेंसिल की नोंक को नुकीला करना पड़ता है। पहली बार उन्होंने 16 साल पहले पोस्टकार्ड पर राम नाम लिखा था। इसके बाद वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के लिए एक बार फिर पोस्टकार्ड पर राम नाम लिख रहे हैं।

रघुबीर बताते हैं कि 20 जनवरी,2024 तक वो पोस्टकार्ड पर राम नाम लिखने का काम पूरा कर लेंगे। इसके बाद पोस्टकार्ड को राममंदिर के लिए पोस्ट कर रवाना कर देंगे।

बताते चलें कि रघुवीर 86 बार रक्तदान कर चुके हैं। इस काम को वो बीते 19 साल से बिना नागा कर रहे हैं। यही नहीं उन्होंने लोगों को रक्तदान में मदद देने के लिए जीवन रक्षक ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में देश भर के रक्तदाता जुड़े। इस वजह से ये लोगों के बीच जीवन रक्षक नाम से भी जाने जाते हैं।

जहाँ से चाहती थी कॉन्ग्रेस, वहाँ से नहीं शुरू होगी राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’: सुरक्षा कारणों से मणिपुर सरकार ने नहीं दी अनुमति

मणिपुर सरकार ने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा‘ को राजधानी इम्फाल से शुरू करने की अनुमति देने से मना कर दिया है। कॉन्ग्रेस ने राज्य सरकार से 14 जनवरी 2024 को शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए अनुमति माँगी थी। इस संबंध में कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह से मुलाकात भी की थी।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने मणिपुर की राजधानी इम्फाल के हप्ता कांजेईबंग मैदान से यात्रा शुरू करने की अनुमति माँगी थी। इस मैदान का काफी ऐतिहासिक महत्व है और यह दुनिया के सबसे ऊँचे पोलो ग्राउंड में से एक है। यात्रा चालू करने को लेकर जब मणिपुर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया तो कॉन्ग्रेस का एक प्रतिनधिमंडल राज्य के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह से मिला जिन्होंने यह अनुमति देने से मना कर दिया।

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने अनुमति नहीं देने के पीछे राज्य की क़ानून व्यवस्था का हवाला दिया है। इससे पहले मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह ने कहा था कि कॉन्ग्रेस के इस आवेदन पर विचार सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद किया जाएगा। उधर कॉन्ग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल उन राज्यों में तैयारियाँ देख रहे हैं, जहाँ से यह यात्रा निकलनी है।

मणिपुर के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष केशम मेघचन्द्र सिंह ने बताया, “आज एक टीम माननीय मुख्यमंत्री से मिली, जिन्होंने इस यात्रा को हप्ता कांजेईबंग मैदान से निकालने को लेकर अनुमति देने से मना कर दिया। हमने इसको लेकर 2 जनवरी को आवेदन दिया था। यह यात्रा 14 जनवरी को चालू होनी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्टतया अनुमति देने से मना कर दिया।” अब कॉन्ग्रेस यात्रा थोबल जिले के खोंगजम स्थित एक निजी स्थल से निकालेगी।

यह यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में होगी। इन राज्यों के 85 जिलों से यात्रा गुजरेगी। इस यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा की अगली कड़ी बताया जा रहा है, लेकिन इस बार कई बदलाव भी दिखेंगे।

मसलन यह पूरी तरह पद यात्रा नहीं होगी। इस यात्रा में राहुल गाँधी एक विशेष बस से सफर करेंगे। इसमें वह कहीं-कहीं पैदल भी चलेंगे और लोगों से मुलाक़ात करेंगे। भारत न्याय यात्रा को हरी झंडी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे दिखाएँगे और 66 दिवसीय इस यात्रा का समापन 20 मार्च 2024 को मुंबई में होगा।

21 हजार मदरसा टीचरों को अब यूपी में नहीं मिलेगा ‘₹8000 और ₹15000’ का मानदेय: योगी सरकार ने रोका बजट, केंद्र भी बंद कर चुका है स्कीम

योगी सरकार ने प्रदेश के मदरसों में काम कर रहे शिक्षकों को दिए जाने वाला मानदेय बंद करने का निर्णय लिया है। इन्हें अब उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कोई भी मानदेय नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय से 21,000 मदरसा शिक्षक प्रभावित होंगे।

इन मदरसा शिक्षकों को वर्ष 1993-94 में केंद्र सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई ‘मदरसा आधुनिकीकरण योजना’ के तहत मदरसों में रखा गया था। यह शिक्षक यहाँ मदरसे में दीनी तालीम लेने वाले बच्चों को सामजिक, विज्ञान, गणित और अन्य व्यावहारिक विषय पढ़ाते थे। इसके जरिए लक्ष्य था कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे सिर्फ दीन की बातें ना जानकर व्यावहारिक विषयों को भी जानें। इसके तहत मदरसों में स्नातक और परास्नातक शिक्षक रखे गए थे।

इस योजना को वर्ष 2008 में बदल कर ‘स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसा’ कर दिया गया था। योजना के तहत मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों में स्नातक शिक्षकों को ₹6000 और परास्नातक शिक्षकों को ₹12,000 दिए जाते थे। यह मानदेय केंद्र सरकार की तरफ से दिया जाता था। वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने इसमें बदलाव करके मदरसे में पढ़ाने वाले शिक्षकों के मानदेय बढ़ा दिया था।

अखिलेश यादव की सरकार ने 2016 में मदरसे में पढ़ाने वाले इन शिक्षकों के मानदेय में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से ₹2000 स्नातक स्तर पर और ₹3000 परास्नातक के स्तर पर बढ़ाया था। ऐसे में 2016 से स्नातक शिक्षकों को कुल ₹8000 और परास्नातक शिक्षकों को कुल ₹15000 मिलते थे।

हालाँकि, बाद में केंद्र की तरफ से दिया जाने वाला बड़ा हिस्सा वर्ष 2021-22 में बंद कर दिया गया था। केंद्र सरकार की यह योजना ही बंद कर दी गई थी। इसके बाद इन शिक्षकों को वही पैसा मिल रहा था जो कि उत्तर प्रदेश सरकार देती थी। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना हिस्सा बंद करने का निर्णय भी लिया है।

अब उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इस मानदेय के लिए दिए जाने वाले बजट को रोकने के आदेश दिए हैं। अब बजट में इस मद में कोई भी व्यवस्था ना करने की बात की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके पीछे तकनीकी कारण बताए हैं। योगी सरकार इससे पहले भी मदरसे पर एक्शन ले चुकी है।

बांग्लादेश में एक और हिंदू की सरेआम हत्या, हमलावरों ने तेज हथियार से पैर काट डाला: PM की पार्टी के थे कार्यकर्ता, उनके क्षेत्र में आवामी लीग के उम्मीदवार की हुई है हार

बांग्लादेश में एक बार फिर एक हिंदू को सरेआम काट डाला गया है। मृतक का नाम बोरुन घोष है और वो बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी आवामी लीग के स्थानीय कार्यकर्ता थे। जिस जगह बोरुन की हत्या हुई, उस सीट पर हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में आवामी लीग के प्रत्याशी को हार झेलनी पड़ी है।

घटना 9 जनवरी 2024 की शाम 7 बजे के आसपास हुई। हत्यारों ने बोरुन घोष के जेनैदाह जिले के घोषपारा इलाके स्थित उनके घर से बाहर खींच लिया और फिर उनका पैर काट दिया। इसके बाद उनकी हत्या कर दिया। हत्या करने के बाद सभी हत्यारे फरार हो गए। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इससे एक दिन पहले ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को संसदीय चुनावों में एक बार फिर से जीत मिली थी। हालाँकि, जेनैदाह-2 सीट पर अवामी लीग के प्रत्याशी तहजीब आलम सिद्दीकी सामी को हार का सामना करना पड़ा। तहजीब को निर्दलीय प्रत्याशी नासिर शहरयार ज़ाहेदी ने हराया है।

बीडी न्यूज24 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 42 साल के बोरुन घोष को घर से निकाल कर उनका पैर काट दिया गया। उन्हें आसपास के लोग अस्पताल लेकर पहुँचे, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सदर पुलिस स्टेशन के प्रभारी शाहीनुद्दीन ने बताया कि आवामी लीग के कार्यकर्ता की उपद्रवियों ने हत्या कर दी है।

पुलिस ने कहा कि हत्या का मकसद अभी साफ नहीं है। हालाँकि, माना जा रहा है कि बोरुन की हत्या चुनावी रंजिश में की गई है। अवामी लीग (एएल) पार्टी के उम्मीदवार रहे तहज़ीब आलम सिद्दीकी सामी ने बताया कि बोरुन उनकी पार्टी के जिम्मेदार कार्यकर्ता थे। उन्हें राजनीतिक वजहों से निशाना बनाया गया।

वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मीर आबिदुर ने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता कि बरुन राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल थे या नहीं। हमने जाँच शुरू कर दी है।” हालाँकि, अवामी लीग के नेताओं ने पुष्टि की कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय थे। 

जिला अवामी लीग के उपाध्यक्ष अब्दुल खालेक ने कहा कि बोरुन तहज़ीब आलम सिद्दीकी सामी के समर्थक थे। सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी इकाई के संयुक्त महासचिव कनक कांति दास के अनुसार, बोरुन के बड़े भाई अरुण कुमार घोष विपक्षी वर्कर्स पार्टी के स्थानीय नेता हैं।

धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हमले मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में आम हैं। वहाँ इस्लामी समूह ग्रामीण इलाकों में मंदिरों और हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। हालाँकि, शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ने चरमपंथी ताकतों पर कार्रवाई की है। इसके बावजूद अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जारी है।

‘जिस हाथ से इस्लाम का अपमान किया, वो अब किसी काम का नहीं रहेगा’: केरल के प्रोफेसर जोसेफ का हाथ काटने वाले सवाद को NIA ने दबोचा, 13 साल से था फरार

इस्लाम के कथित अपमान के नाम पर केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ का हाथ काटने के मास्टरमाइंड सवाद को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने धर दबोचा है। जाँच एजेंसी ने 13 साल बाद मंगलवार (9 जनवरी 2024) की रात को आरोपित को हिरासत में लेने में कामयाबी मिली। सवाद के सिर पर 10 लाख रुपए का इनाम था।

सवाद को बुधवार (10 जनवरी 2024) की सुबह कोच्चि स्थित एनआईए के कार्यालय लाया गया। आज से 13 साल पहले 4 जुलाई 2010 को केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर इस्लाम के अपमान का आरोप लगाकर उनका हाथ काट दिया गया था। इसके बाद से ही मुख्य आरोपित सवाद फरार चल रहा था।

एनआईए की भगोड़ा ट्रैकिंग विंग को एक गुप्त सूचना मिली कि 37 साल का सवाद कन्नूर के पास मट्टनूर में है। इसके बाद NIA ने बेराम के एक किराए के मकान में छापा मारा और उसे हिरासत में ले लिया।सवाद यहाँ पिछले पाँच महीने से अपनी बीवी और दो बच्चों के साथ रह रहा था और बढ़ई का काम कर रहा था।

सवाद ने बेराम में अपने आसपास के लोगों को अपना नाम शाहजहाँ बताया था। एर्नाकुलम के असमन्नूर के नूलेली में मुदस्सेरी हाउस का रहने वाला है। वहीं, उसकी बीवी कासरगोड़ की रहने वाली है। बेराम आने से पहले वह कन्नूर में कई जगहों पर छिपकर रहता था। कहा जाता है कि बीच में वह खाड़ी देशों में नौकरी के लिए भी गया था।

सवाद उन 7 लोगों के समूह में शामिल था, जिन्हें प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने प्रोफेसर जोसेफ पर हमले के लिए चुना था। प्रोफेसर टीजे जोसेफ थोडुपुझा में स्थित न्यूमैन कॉलेज में मलयालम भाषा के प्रोफेसर थे। सावद ने प्रोफेसर पर यह हमला एर्नाकुलम के मुवत्तुपुझा में उनके घर के पास किया था।

साल 2013 में दायर एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, सवाद ने प्रोफेसर के कार के शीशे तोड़ दिए और प्रोफेसर को जबरदस्ती बाहर खींच लिया और उन पर चाकू और एक छोटी कुल्हाड़ी से हमला किया। परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों को जोसेफ को बचाने से रोकने के लिए देशी बम फेंका था।

सवाद ने जोसेफ की दाहिनी हथेली काटते हुए कहा था, “जिस हाथ ने इस्लाम का अपमान किया है, वह भविष्य में किसी काम का नहीं रहेगा।” इस वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सवाद बेंगलुरु भाग गया और वहाँ लगभग 13 साल तक अंडरग्राउंड रहा था। उसके सिर पर NIA ने 10 लाख रुपए का इनाम रखा था।

इतना ही नहीं, सवाद के खिलाफ इंटरपोल रेड-कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। इस मामले में कम से कम 54 आरोपित थे। सवाद ही अकेला आरोपित था, जो फरार था। इस केस की सुनवाई एनआईए अदालत में दो चरणों में हुई थी। इसमें से 19 लोगों को दोषी ठहराया गया था। सुनवाई के पहले चरण में 31 आरोपितों के खिलाफ ट्रायल चला था।

इसमें 10 आरोपितों को अप्रैल 2015 में UAPA के साथ-साथ विस्फोटक अधिनियम के तहत भी दोषी पाया गया था। 3 अन्य आरोपितों को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया गया था। वहीं, 3 अन्य को अपराधियों को शरण देने का दोषी पाया गया था। वहीं, 18 अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया था।

दूसरे चरण में 11 जुलाई 2023 को NIA की विशेष अदालत ने इस मामले में 6 आरोपितों को दोषी ठहराया था और 5 लोगों को दोषमुक्त कर दिया था। जिन्हें दोषी साबित किया गया है, उनके नाम हैं – नस्सर, साजिल, नजीब, नौशाद, कुंजू और अयूब। वहीं शफीक, अजीज, रफ़ी, ज़ुबैर और मंसूर को दोषमुक्त करार दिया गया। 

नाइट आउट पर ले गया, जन्मदिन मनाया, फिर मार डाला… शोएब शेख ने 11 साल बड़ी गर्लफ्रेंड की कर दी हत्या, बैंक में मैनेजर थी अमित कौर

महाराष्ट्र के नवी मुंबई में शोएब शेख नामक एक शख्स ने अपनी गर्लफ्रेंड अमित कौर का गला दबा कर उन्हें मार डाला। मृतका एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर थी। वो जुई नगर ब्रांच में पदस्थापित थी। 3 महीने पहले ही दोनों की मुलाकात हुई थी। शोएब शेख 24 साल का है, जबकि उसकी गर्लफ्रेंड उससे 11 साल बड़ी थी। सितंबर 2023 से दोनों एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमित कौर का अपने पति से तलाक हो चुका था और उसकी एक किशोर बेटी भी है।

सोमवार (8 जनवरी, 2024) को महिला का जन्मदिन भी था। शोएब शेख ने प्लान बनाया कि जन्मदिन का जश्न खत्म होने के बाद वो उसे मार डालेगा। उसे शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड का किसी अन्य मर्द से अफेयर है। साकी-नाका के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर वाल्मीकि कोरे ने आरोपित को धर-दबोचने में सफलता पाई है। DCP दत्ता नलावडे ने बताया कि शोएब शेख ने गर्लफ्रेंड अमित कौर की मुंबई के एक लॉज में हत्या किए जाने का आरोप कबूल कर लिया है।

सोमवार को जब अमित कौर दफ्तर से आ गई, तब शेख उससे मिला। लॉज में चेक-इन करने के बाद दोनों ने साथ मिल कर महिला का जन्मदिन मनाया। दोनों ने रूम बुक करने के लिए अपने-अपने आइकार्ड्स का इस्तेमाल किया था। आधी रात को शोएब को लॉज के कर्मचारियों ने बहार निकलते देखा, लेकिन उन्हें उसे लेकर कुछ संदेहास्पद नहीं लगा। पुलिस ने जब दरवाजा खोला, तभी वहाँ अमित कौर की लाश पड़ी हुई मिली। गला दबा कर उनकी हत्या की गई थी।

तुर्भे के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर रवींद्र दौंडकर ने ये जानकारी दी है। शोएब शेख स्कूल ड्रॉपआउट है। वो हत्या के बाद साकी-नाका स्थित अपने घर लौट आया। वो अपने एक रिश्तेदार के गैराज में काम करता था। रात के करीब 2 बजे किसी शख्स ने पुलिस को फोन कॉल कर सूचना दी कि उसके पड़ोसी ने कुछ गड़बड़ किया है। शेख को पकड़ कर थाने लाया गया, जहाँ पूछताछ में उसने हत्या का आरोप कबूला। साकी-नाका पुलिस ने फिर तुर्भे थाने से संपर्क किया और लॉज में पहुँच कर लाश को बरामद किया।

शोएब शेख को तुर्भे पुलिस थाने को सौंप दिया गया है। पीड़िता GTB नगर में अपनी माँ के साथ रहती थी। जबकि उसकी किशोर बेटी उसके पूर्व पति के साथ रहती है। अमित रवींद्र कौर को ‘एमी’ नाम से भी जाना जाता है। वो IDFC बैंक में काम करती थी। पुलिस ने धारा-302 (हत्या) सहित IPC की अन्य धाराएँ लगा कर शोएब शेख को जेल भेज दिया है। पुलिस से भी उसने बताया है कि उसकी गर्लफ्रेंड उसे धोखा दे रही थी, इसीलिए उसने उसकी हत्या कर दी।

मोदी है तो मुमकिन है का मतलब क्या… मुकेश अंबानी ने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ में बताया, बोले- देश बनेगा 35 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था

वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे का मतलब समझाया है। उन्होंने बताया कि कैसे पूरी दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है और कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने पूरी दुनिया को चौंकाया है। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 में बोलते हुए मुकेश अंबानी ने खुद को गुजराती और गुजरात को अपनी मातृभूमि, कर्मभूमि बताते हुए कहा कि वो पिछले 20 साल से वाइब्रेंट गुजरात समिट का हिस्सा बनते रहे हैं।

गुजरात की राजधानी गाँधी नगर में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 का आयोजन हो रहा है। 12 जनवरी तक चलनी वाली इस ग्लोबल समिट का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। इस मौके पर 10 जनवरी को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा, ‘मोदी है तो मुमकिन है’ पर भरोसा बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “मेरे विदेश के मित्र पूछते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का क्या मतलब होता है? जब मैंने उन्हें बताया कि इसका मतलब नामुमकिन को मुमकिन बना देने से है, तब से वो भी अब ‘मोदी है तो मुमकिन है’ कहने लगे हैं। मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौजूदा समय का सबसे बड़ा और सबसे सफल प्रधानमंत्री करार दिया। मुकेश अंबानी की स्पीच में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ वाला हिस्सा 2 मिनट के बाद देखा जा सकता है।”

मुकेश अंबानी ने कहा, “भारत को 2047 तक 35 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। रिलायंस इंडस्ट्रीज हजीरा में कार्बन फाइबर यूनिट लगाएगी। रिलायंस रिटेल लाखों किसानों को सशक्त करेगा… साल 2030 तक हम रिन्यूएबल एनर्जी के टारगेट को पूरा कर लेंगे। इसी साल की दूसरी छमाही तक जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन कॉम्प्लेस की भी शुरुआत होती जाएगी।”

उन्होंने कहा, “मुझे गुजराती होने पर गर्व है। रिलायंस गुजराती कंपनी थी और आगे भी गुजराती कंपनी ही रहेगी।” मुकेश अंबानी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में रिलायंस ने देश में करीब 12 लाख करोड़ का निवेश किया है और इसमें से एक तिहाई से ज्यादा अकेले गुजरात में किया गया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र की अगुवाई में ही वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की शुरुआत साल 2003 में हुई थी, तब से लेकर हर साल गुजरात में विदेशी निवेशकों और सरकारों का मेला लगता है। इन ग्लोबल समिट्स के माध्यम से गुजरात में अब तक भारी मात्रा में निवेश आया है। इस समिट को पीएम मोदी का ब्रेन चाइल्ड भी कहा जाता है। इससे प्रेरित होकर देश के अन्य राज्य भी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट जैसे आयोजन करने लगी हैं। हालाँकि अब भी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित करने वाला प्लेटफॉर्म है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी को समिट में शामिल होने आए यूएई के राष्ट्रपति का स्वागत कर एक रोड शो भी किया था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए होने वाले सालाना कार्यक्रम ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के 10वें संस्करण में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ही मुख्य अतिथि हैं। इस बार समिट का विषय गेटवे टू द फ्यूचर है। इसमें 34 देश और 16 संगठन शामिल हुए हैं। चेक गणराज्य के प्रधान मंत्री पेट्र फियाला, मोजाम्बिक के राष्ट्रपति फिलिप जैसिंटो न्युसी, तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्टा समेत कई अन्य वर्ल्ड लीडर्स और गौतम अडानी, मुकेश अंबानी, लक्ष्मी मित्तल समेत कई उद्योगपति इस कार्यक्रम में शामिल हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने उकसाया, हिन्दू विरोधियों ने रामचरितमानस जलाया: हाईकोर्ट बोला – सबके हाथ में मोबाइल फोन, NSA लगाने का फैसला सही

इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के खिलाफ दायर दो लोगों की याचिका को खारिज कर दिया है। दोनों ने ये याचिका NSA के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ दायर की थी। दोनों पर हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस की प्रतियों का अनादर करने और उन्हें जलाने के आरोप हैं।

न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी और संगीता जौहरी की बेंच ने दो अलग-अलग याचिकाओं में ये आदेश दिया। दरअसल देवेेंद्र यादव और सुरेश यादव नाम के दोनों आरोपितों ने अलग-अलग शख्स के जरिए अपने याचिकाएँ दायर करवाई थीं। आरोपित देवेंद्र यादव के पिता के माध्यम और सुरेश यादव ने अपनी पत्नी के माध्यम से याचिकाएँ दायर की थीं।

इलाहबाद हाईकोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा जिस तरह से याचिकाकर्ताओं ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े सार्वजनिक जगह पर बहुसंख्यक समुदाय के पूजे जाने वाले धार्मिक ग्रंथ का अपमान किया, उसके लिए समाज में आक्रोश और गुस्सा स्वाभाविक था।

बेंच ने आगे कहा कि मौजूदा हालात में समाज का लगभग हर शख्स मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है। इस आधार पर बेंच ने माना कि सिर पर मंडराते इस खतरे को देखते हुए हिरासत में लिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी हिरासत को याचिकाकर्ताओं की निजी आजादी पर गलत और अवैध प्रतिबंध नहीं माना जा सकता है।

बताते चलें कि बीते साल 29 जनवरी 2023 में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की फोटोकॉपी किए पेज जलाए गए थे। मौर्य ने 22 जनवरी 2023 को दावा किया था कि इस ग्रंथ की कुछ चौपाइयों में कथित तौर पर महिलाओं और दलितों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ हैं, जो सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं।

इस आरोप में लखनऊ पुलिस ने 10 नामजद और कई अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया था। बीजेपी नेता सतनाम सिंह लवी की शिकायत पर ये FIR पर दर्ज की गई थी। इसके तहत पुलिस ने आरोपित देवेन्द्र यादव, यशपाल सिंह लोधी, सत्येन्द्र कुशवाहा, मोहम्मद सलीम और सुरेश यादव के खिलाफ NSA लगाकर गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस ने आरोपितों को 8 फरवरी 2023 को हिरासत में ले लिया गया था। वहीं, समाजवादी पार्टी से एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य पर भी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया गया था।

सेना के लिए अडानी के स्वदेशी कारखाने में बना अत्याधुनिक ड्रोन: 36 घंटे उड़ान से लेकर 450 kg गोला-बारूद तक, जानें खासियत

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरिकुमार ने अडानी समूह की कम्पनी ‘अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस’ द्वारा निर्मित दृष्टि 10 स्टारलाइनर ड्रोन को पेश किया है। इसे हैदराबाद में स्थित अडानी के ड्रोन निर्माण कारखाने में भारतीय तकनीक के साथ बनाया गया है।

यह अपनी तरह का पहला भारत में निर्मित ड्रोन है। यह ‘मीडियम एल्टिट्यूड लॉन्ग इन्ड्युरेन्स (MALE)’ वाला ड्रोन है। इसका मतलब है कि यह आकाश में मध्यम ऊँचाई पर काफी ज्यादा देर तक उड़ सकता है। यह ड्रोन विशेष तकनीक से लैस है। यह एक बार में 36 घंटे की उड़ान भर सकता है। यह सभी प्रकार के मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। ये आकाश में ऐसी परिस्थिति में उड़ान भरने में भी सक्षम है जहाँ और भी विमान उड़ रहे हों।

इस ड्रोन को विशेष रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में गश्त लगाने जैसे कामों में लगाया जाएगा। यह 450 किलो तक पेलोड ले जा सकता है। इस पेलोड में हथियार भी भेजे जा सकते हैं। इस ड्रोन को नौसना और थल सेना, दोनों के उपयोग के लिए बनाया गया है।

नौसेना तथा थल सेना ने इन ड्रोन का ऑर्डर भी दिया है। यह जल्द ही भारतीय सेनाओं में शामिल हो कर अपनी सेवाएँ देंगे। अडानी डिफेन्स एंड एयरोस्पेस का कहना है कि उनका पहला ड्रोन हैदराबाद से गुजरात तक उड़ा कर भेजा जाएगा जहाँ इसे नौसेना में शामिल किया जाएगा।

नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर कहा है कि भारत का पहला आत्मनिर्भर MALE ड्रोन मात्र 10 महीनों में ही बन कर तैयार हो गया है। यहाँ आकर इसकी प्रगति के बारे में जानकारी लेना मेरे लिए काफी गर्व और ख़ुशी की बात है। वहीँ अडानी परिवार के सदस्य और अडानी एयरपोर्ट्स को देखने वाले जीत अडानी ने कहा है जल्द ही वह भारत में निर्मित इन रक्षा उत्पादों को बाहर देशों को निर्यात करना चालू करेंगे।

गौरतलब है कि भारत अब तक ड्रोन तकनीक को दूसरे देशों से लेता आया है। भारतीय सेनाओं में शामिल अधिकांश ड्रोन इजरायली कम्पनियों द्वारा निर्मित हैं। हालाँकि, बीते कुछ सालों में भारत में भी ड्रोन निर्माण में तेजी आई है और कई कम्पनियाँ इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

रन लेने के लिए दौड़ रहा था इंजीनियर, क्रिकेट की पिच पर ही गिर कर मौत: सामने आया वीडियो

नोएडा में क्रिकेट खेलने के दौरान 36 साल के विकास नेगी की अचानक जमीन पर गिरकर मौत हो गई। साथी खिलाड़ी उन्हें लेकर अस्पताल गए लेकिन वहाँ उनको मृत घोषित कर दिया गया। मौत का कारण हार्ट अटैक को बताया गया है। पिच पर उनके गिरकर बेहोश होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना नोएडा के एक्सप्रेस वे के सेक्टर-135 की है। 6 जनवरी, 2024 को नोएडा में कॉर्पोरेट लीग के दौरान मैवरिक्स इलेवन और ब्लैजिंग बुल्स का मैच था। इस मैच में विकास मैवरिक्स के लिए बैटिंग कर रहे थे। मैच के दौरान 14वें ओवर उनके साथ बैटिंग कर रहे उमेश कुमार ने शॉट मारा। गेंद देखते हुए दोनों बैट्समैन रन लेने के लिए दौड़े, लेकिन आधी पिच तक पहुँचते बॉल बाउंड्री के पार चली गई और चार रन मिल गए।

इसके बाद विकास आधी पिच से वापस नॉन स्ट्राइक एंड पर लौटे और फिर अपने साथी को बधाई देने आगे बढ़े। मगर, दोनों खिलाड़ियों के बैट टकराने से पहले ही वो अचानक मैदान पर गिर पड़े। उनके गिरते ही उनके साथ खेल रहे अन्य लोग तुरंत उनके पास पहुँचे।

इस दौरान उन्हें सीपीआर दी भी गई, लेकिन सुधार न देख विकास को बेहोशी की हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टर्स ने उनके मृत घोषित कर दिया।

नोएडा पुलिस एसएचओ सरिता मलिक के मुताबिक, मृतक विकास मूलरूप से उत्तराखंड निवासी थे। मौजूदा वक्त में वो दिल्ली के रोहिणी में रह रहे थे। विकास नेगी नोएडा की ही एक कंपनी में इंजीनियर थे। कहा जा रहा है विकास कोविड संक्रमण भी हुआ था।

बताते चलें कि बीते साल नोएडा सेक्टर-21-A स्टेडियम में 52 साल के बैडमिंटन खिलाड़ी महेंद्र के खेलते वक्त अचानक सीने में दर्द हुआ था और वो गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया था। जहाँ डॉक्टर्स उन्हें मृत घोषित कर दिया था।