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पिता ने राम मंदिर के लिए खाई गोली, इंतजार करते-करते माँ का राम नवमी पर हुआ देहांत: प्राण प्रतिष्ठा का न्योता पाकर भावुक हुईं कारसेवक संजय सिंह की बेटी, बोलीं- सपना पूरा हुआ

बिहार के मुजफ्फरपुर में बलिदानी कारसेवक संजय कुमार की बेटी के घर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता गया है। कारसेवक संजय के परिजन ये निमंत्रण मिलने से बेहद खुश हैं। पिछले 32 सालों से परिवार ने ने राम मंदिर का संपना संजोया था। उनकी पत्नी तो राम मंदिर की आस में 2019 में राम नवमी के दिन देह त्याग गईं, लेकिन उनकी बेटियों को इस पल का खास इंतजार था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में अन्य कारसेवकों की तरह संजय कुमार सिंह भी बहुत उत्साह के साथ राम मंदिर निर्माण का सपने लिए अपने घर से निकले थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था वो वापस नहीं लौट पाएँगे। कारसेवकों पर जब गोली चलाई गई तो वो गोलियाँ संजय कुमार सिंह को भी लगी, जिससे उनकी मौत हो गई।

परिवार बताता है कि अंतिम संस्कार तक के लिए संजय सिंह का शव उन्हें घर पर नहीं पहुँचाया गया था। बेटियाँ उस समय मात्र 2 साल और 45 दिन की थीं। संजय सिंह के जाने के बाद उनकी पत्नी ने ही बेटियों का लालन पालन कड़े संघर्ष के साथ किया। आज संजय सिंह की बेटी कृति को जब निमंत्रण मिला तो वह काफी खुश हुईं। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कृति ने रोते हुए कहा कि पिता का सपना पूरा हो रहा है इसलिए उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।

कृति ने कहा, “पिताजी ने मंदिर के लिए अपनी जान दे दी थी। उस समय मेरी उम्र सिर्फ 45 दिन की थी और मेरी बड़ी बहन दो साल थी। माँ ने बड़ी कठिनाइयों के साथ हमें पाला। मुझे तो पता भी नहीं कि हमारे पापा इस दुनिया में नहीं है। बड़े होने पर माँ ने बताया कि उनके पिता ने राम मंदिर के लिए जान दी थी। मुझे उस समय जानकर बहुत दुख हुआ था। लेकिन माँ कहती रहती थी कि उनका सपना जरूर पूरा होगा। आज माँ नहीं है। उनका देहांत साल 2019 में रामनवमी के दिन हुआ था।”

बता दें कि अयोध्या राम जन्मभूमि के लिए मर मिटने वाले कारसेवकों पर ऑपइंडिया लगातार ग्राउंड रिपोर्ट अपने पाठकों के लिए ला रहा है। हाल में हमने आपको कारसेवक महावीर अग्रवाल के बारे में बताया था जिनके सीने में गोली दागी गई थी और जिंदा हालत में ही उन्हें मृतकों के साथ गाड़ी में ठूँस दिया गया था। इसी तरह कारसेवक राम बहादुर वर्मा, भगवान सिंह जाट, अचल गुप्ता जैसे कारसेवकों के साथ क्या ज्यादती हुई थी उनके परिवार पर क्या गुजरी ये भी हमने इस सीरिज में बताया है। आप लिंक पर क्लिक करके उसे पढ़ सकते हैं।

कोहनी के बल रेंगवाया, लाठी से पीटा, पानी तक नहीं दिया, हो गई मौत: आजीवन कारावास भुगतेंगे पूर्व IPS संजीव भट्ट, हाईकोर्ट ने ख़ारिज की अपील

भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी (IPS) संजीव भट्ट को गुजरात हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। ‘पुलिस हिरासत में मौत’ मामले में जामनगर सत्र अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा को बरकार रखा है। हाईकोर्ट ने मंगलवार (9 जनवरी 2024) को इस मामले में सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया है।

इस मामले में न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री और न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की खंडपीठ ने कहा, “ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को तर्क के आधार पर दोषी ठहराया है। इसलिए सजा के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। हम उक्त फैसले को बरकरार रखते हैं और अपील खारिज करते हैं।” दरअसल, यह मामला 1990 में हुई एक घटना से संबंधित है।

दरअसल, रथ यात्रा के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद 30 अक्टूबर 1990 को भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने भारत बंद का आह्वान किया था। उसी दौरान जामनगर जिले के एक शहर में सांप्रदायिक दंगा भड़क गया था। उस समय संजीव भट्ट जामनगर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) थे।

इस मामले में संजीव भट्ट ने 133 लोगों को आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (TADA) के तहत हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में से एक प्रभुदास माधवजी वैश्नानी भी थे। हिरासत से रिहा होने के बाद वैश्नानी की मृत्यु हो गई। उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि भट्ट और उनके सहयोगियों ने वैश्नानी को हिरासत में खूब यातनाएँ दी थीं।

परिवार ने आरोप लगाया था कि हिरासत में लिए गए लोगों को लाठियों से पीटा गया था और उन्हें कोहनी के बल रेंगने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें पानी तक पीने की इजाजत नहीं दी गई थी। इसके कारण प्रभुदास वैश्नानी की किडनी खराब हो गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई। वैश्नानी नौ दिनों तक पुलिस हिरासत में थे।

वैश्नानी की मौत के लिए परिजनों ने संजीव भट्ट और अन्य अधिकारियों जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में IPS संजीव कुमार भट्ट, सब इंस्पेक्टर दीपक कुमार भगवानदास शाह, सब इंस्पेक्टर शैलेश कुमार लाभशंकर पंड्या, कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह बवुभा झाला, कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह जोरूभा जाडेजा, कॉन्स्टेबल अनूप सिंह मोहब्बतसिंह जेठवा और कॉन्स्टेबल केसुभा दोलुभा जाडेजा को आरोपित बनाया गया।

मामले का संज्ञान 1995 में मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया। हालाँकि, गुजरात हाईकोर्ट की रोक के कारण मुकदमा 2011 तक रुका रहा। बाद में रोक हटा ली गई और मुकदमा पर सुनवाई शुरू हुई। इसके बाद जून 2019 में जामनगर सत्र अदालत ने भट्ट और कॉन्स्टेबल प्रवीण झाला को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 323 और 506(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।

इनके अलावा, अदालत ने पुलिस कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह जाडेजा, अनोप सिंह जेठवा, केसुभा दोलुभा जाडेजा और पुलिस उप-निरीक्षक शैलेश पांड्या एवं दीपककुमार भगवानदास शाह को भी हिरासत में यातना का दोषी पाया। इन सभी को भारतीय दंड संहित (IPC) की धारा 323 और 506 (1) के तहत दोषी ठहराया गया।

जामनगर सत्र न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ IPS संजीव भट्ट, पुलिस सब-इंस्पेक्टर शैलेश पांड्या और कॉन्स्टेबल प्रवीण झाला साल 2019 में गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया। हालाँकि, हाईकोर्ट में भी इन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब इनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

बताते चलें कि संजीव भट्ट एक विवादास्पद पुलिस अधिकारी रहे हैं। साल 1996 में उन्हें एक वकील को ड्रग्स से संबंधित एक फर्जी मामले में फँसाने का आरोप लगा था। उस समय वे बनासकांठा जिले के एसपी थे। इसके बाद साल 1998 में भी संजीव भट्ट पर हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति को टॉर्चर करने का आरोप लगा था।

जून 2011 में गुजरात सरकार ने ड्यूटी से गैर हाजिर रहने, ड्यूटी पर नहीं रहते हुए भी आधिकारिक कार का इस्तेमाल करने और जाँच कमिटी के सामने पेश नहीं होने पर संजीव भट्ट को सस्पेंड कर दिया। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे और वहाँ भाजपा की सरकार थी।

गुजरात में UAE के शेख और PM मोदी का रोडशो: फ़ूड पार्क से लेकर पोर्ट्स तक के विकास को लेकर करार, 7 महीने में दोनों नेताओं की चौथी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद में UAE (संयुक्त अरब अमीरात) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ रोडशो किया। दोनों नेता ‘वाइब्रेंट गुजरात’ समिट में हिस्सा लेने के लिए पहुँचे हैं। इससे पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुँचे UAE के राष्ट्रपति एवं अबुधाबी के प्रशासक का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले मिल कर स्वागत किया। फिर वहाँ से 3 किलोमीटर लंबा मेगा रोडशो हुआ। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने लिखा कि दोनों देशों के मजबूत संबंधों को और पुष्ट किया जा रहा है।

बता दें कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए होने वाले सालाना कार्यक्रम ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के 10वें संस्करण में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान मुख्य अतिथि हैं। गाँधीनगर और अहमदाबाद को जोड़ने वाले इंदिरा ब्रिज पर इस रोडशो का समापन हुआ। कार्यक्रम के लिए पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है। ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (VGGS)’ का बुधवार को उद्घाटन होना है। वो ‘ग्लोबल फिनटेक लीडरशिप फोरम’ में भी हिस्सा लेंगे।

पीएम मोदी गाँधीनगर में तकनीकी रूप से समृद्ध ‘गिफ्ट सिटी’ का भी दौरा करेंगे। साथ ही कई बड़ी कंपनियों के CEOs के साथ उनकी मुलाकात होनी है। भारत और UAE के बीच इस दौरान कई समझौतों (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने हाथ हिला कर वहाँ इकट्ठा लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने लगभग 15 मिनट का रोडशो किया।

पूरे शहर में उनका स्वागत करते हुए कई बैनर-पोस्टर लगाए गए थे। आज ही पीएम मोदी ने तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्टा और मोजाम्बिक के राष्ट्रपति फिलिप जैसिंटो न्यूसी के साथ भी बैठक की है। उन्होंने ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल ट्रेड शो’ का उद्घाटन कर के उसका मुआयना भी किया। इस साल VGGS के लिए 34 पार्टनर देश हैं और 16 पार्टनर संस्थाएँ हैं। गुजरात में निवेश लाने में इस कार्यक्रम का बड़ा योगदान रहा है और इससे पूरे भारत की छवि को फायदा पहुँचा है।

पिछले 7 महीनों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख की ये चौथी मुलाकात है। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में निवेश साझेदारी के लिए दोनों देशों में करार हुए। साथ ही भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने UAE के निवेश मंत्रालय के साथ नई परिवर्तनात्मक परियोजनाओं को लेकर करार किया। फ़ूड पार्क के विकास को लेकर भारत के खाद्य मंत्रालय ने भी एक करार किया। UAE के ‘DP वर्ल्ड’ के साथ गुजरात सरकार ने टिकाऊ, ग्रीन और कुशल पोर्ट्स के विकास के लिए करार किया है।

सरकारी संस्था ने ‘गालीबाज’ देवदत्त पटनायक को चर्चा के लिए बुलाया, विरोध के बाद डिलीट किया रजिस्ट्रेशन वाला ट्वीट: राम मंदिर पर फैला चुका है झूठ

खुद को ‘Mythologist’ बताने वाले हिन्दू विरोधी देवदत्त पटनायक को एक सरकारी संस्था द्वारा चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग आक्रोशित हो गए। ‘इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)’ ने मंगलवार (9 जनवरी, 2024) को सोशल मीडिया पर बताया कि उसके वडोदरा स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने ‘प्रख्यात मिथोलॉजिस्ट, लेखक एवं वक्ता’ देवदत्त पटनायक से चर्चा वाले कार्यक्रम के लिए आमजनों को आमंत्रित किया जाता है।

बताया गया कि ये कार्यक्रम बुधवार (17 जनवरी, 2024) को शाम 5 बजे लक्ष्मी विलास पैलेस प्रसार स्थित रवि वर्मा स्टूडियो में आयोजित होगा। साथ ही इसके लिए एक वेब लिंक जारी किया गया, जिस पर क्लिक कर वहाँ आने के इच्छुक लोग रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। बताया गया कि पंजीकरण अनिवार्य है, क्योंकि सीटों की संख्या सीमित है। हालाँकि, जब हमने गूगल डॉक वाला फॉर्म खोला तो ‘बताया गया कि ‘टॉक बाय देवदत्त पटनायक’ शीर्षक के साथ बताया गया कि अब पंजीकरण बंद हो चुका है।

IGNCA ने इसमें लिखा, “हम आप सब से गंभीरता से माफ़ी माँगना चाहते हैं, साथ ही हमें ये सूचित करते हुए दुःख हो रहा है कि हमारे आने वाले कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन बंद किया जा चुका है। लोगों द्वारा अत्यधिक रुचि लेने और कार्यक्रम के लिए अप्रत्याशित संख्या में पंजीकरण के कारण हम अपनी अधिकतम क्षमता तक अपनी उम्मीद से पहले ही पहुँच चुके हैं (सीटें भर चुकी हैं)।” साथ ही किसी भी प्रकार के सवालों या सहायता को लेकर [email protected] पर संपर्क करने को कहा गया।

सीटों की संख्या भर जाने के कारण ‘इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स’ ने बंद कर दिया रजिस्ट्रेशन

अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने इस कार्यक्रम को लेकर हैरानी जताते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री G किशन रेड्डी से इस मामले में संज्ञान लेने का निवेदन किया। हालाँकि, विरोध होने के बाद IGNCA ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है, लेकिन इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है कि कार्यक्रम रद्द किया गया है या नहीं।

देवदत्त पटनायक के बारे में बता दें कि वो अक्सर हिन्दू विरोधी बातें करता रहता है। इसीलिए, उसे देवदत्त ‘नालायक’ भी लोग कहते हैं। ऊपर से वो अव्वल दर्जा का गालीबाज भी है। उसने खुद लिखा था कि वो ‘बलात्कार के बदले बलात्कार’ वाली थ्योरी में विश्वास रखता था। उसने झूठ फैलाई थी कि जो भी राम मंदिर के लिए दान देने से इनकार कर देता है, उसके घर को चिह्नित कर लिया जाता है और सरकारी प्रशासन को इसकी सूचना दे दी जाती है।

इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस’ के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम में भी गालीबाज देवदत्त पटनायक को आमंत्रित किया गया था, लेकिन विरोध के बाद फैसला लिया गया कि उसके वाले सत्र का प्रसारण नहीं किया जाएगा। उसे ‘ग्रेट माइंड डिस्कस आइडियास’ कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। देवदत्त पटनायक सोशल मीडिया पर भी माँ-बहन की गालियाँ बक चुका है। ओडिशा के भुवनेश्वर में भी उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी, क्योंकि उसने जगन्नाथ मंदिर को लेकर समाज को विभाजित करने वाली बातें कही थीं।

‘किसी का कोई भगवान हो, हमारा भगवान तो PDA’: अखिलेश यादव ने ठुकराया राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता, कहा – जो देने आए उन्हें नहीं जानता

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है। भारत की वामपंथी पार्टियों ने तो इस आयोजन का बहिष्कार कर दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनका भगवान तो PDA है। अखिलेश के PDA का मतलब है- पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक।

दरअसल, अखिलेश यादव से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अयोध्या जाएँगे। इस अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण नहीं मिला है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंगलवार (9 जनवरी 2023) को कहा कि अखिलेश यादव को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया, लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

दरअसल, विश्व हिंदू परिषद की ओर से आलोक कुमार अखिलेश यादव को निमंत्रण देने गए थे। अखिलेश ने कहा, “हम इनको (आलोक कुमार को) नहीं जानते हैं। जिन्हें हम जानते नहीं हैं, उन्हें निमंत्रण नहीं देते और न ही उनसे कोई निमंत्रण लेते हैं। जब भगवान बुलाएँगे, तब जाएँगे। किसी का कोई भगवान हो, हमारा भगवान तो पीडीए है।”

इस पर विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, “पहले वो कह रहे थे कि अगर बुलाएँगे तो हम जाएँगे। हमने उनको बुलाया है। अब वो कह रहे हैं कि राम जी बुलाएँगे तो जाएँगे। अब देखते हैं कि राम जी खुद उन्हें बुलाते हैं या नहीं। अगर नहीं बुलाएँगे तो साफ हो जाएगा कि राम जी शायद उन्हें नहीं बुलाना चाहते हैं।”

इसके पहले अखिलेश ने कहा था कि जब भगवान की मर्जी होती है, तभी उनके दर्शन होते हैं। भगवान की मर्जी के बिना कोई उनके दर्शन नहीं कर सकता। क्या पता कब किसको भगवान का बुलावा आ जाए, ये कोई नहीं कह सकता। उन्होंने राम मंदिर के नाम पर भाजपा पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि अगर राम मंदिर ट्रस्ट उन्हें बुलाता है तो वो अयोध्या जाएँगे। इस पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा था कि प्रभु तो सबके हैं। ट्रस्ट बुलाए या न बुलाए, दर्शन तो हर वक्त कर सकते हैं। ट्रस्ट लोगों को आमंत्रित कर रहा है, लेकिन का नाम छूट जाए तो वो आए और दर्शन करे। सबका स्वागत है।

CPI(M) की पोलितब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समरोह में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करती है लेकिन एक धार्मिक कार्यक्रम को राजनीति से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने इसे धार्मिक अनुष्ठान का राजनीतिकरण बताते हुए गलत करार दिया।

बता दें कि वामपंथी नेता वृंदा करात ने राम मंदिर का निमंत्रण स्वीकार करने से मना कर दिया था। वृंदा ने कहा था कि राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में न जाने के पीछे उनकी पार्टी की बुनियादी सोच है। उन्होंने इस कार्यक्रम के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगते हुए कहा कि संविधान के हिसाब से भारत की सत्ता किसी धार्मिक रंग का नहीं होना चाहिए। सीताराम येचुरी ने वृंदा करात का समर्थ किया था।

22 जनवरी को यूपी के सभी स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी, शराब की दुकानें बंद: राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर CM योगी का आदेश, अयोध्या में ‘कुम्भ मॉडल’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 जनवरी, 2024 को राज्य में छुट्टी घोषित की है। उस दिन सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही उत्तर प्रदेश में जितनी भी शराब की दुकानें हैं, वो सब भी बंद रहेंगी। उस दिन निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत भी हिस्सा लेंगे। देश भर से हजारों नेताओं, साधु-संतों और कलाकारों को इसके लिए निमंत्रण पत्र भेजा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी स्कूलों एवं कॉलेजों को आदेश दिया है कि वो 22 जनवरी, 2024 को अवकाश घोषित करें। उन्होंने मंगलवार (9 जनवरी, 2024) को ये आदेश दिया। साथ ही उस दिन को ‘ड्राई डे’ घोषित कर दिया गया है, यानी उस दिन शराब की बिक्री नहीं होगी। इस संबंध में पहले ही आदेश जारी कर दिया गया है, अब इसे दोहराया गया है। यूपी ही नहीं, उस दिन छत्तीसगढ़ में भी दारू की दुकानें नहीं खुलेंगी और इसकी खरीद-बिक्री बंद रहेगी।

अयोध्या में उस दिन दोपहर के समय प्राण-प्रतिष्ठा का मुहूर्त तय किया गया है। 10,000 VIP मेहमानों के पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है। सुरक्षा को लेकर भी सरकार पूरी तरह तैयार है। पूरे देश में इस दौरान अलग-अलग मंदिरों में पूजा-पाठ का आयोजन होना है। अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी खुला है। अयोध्या में तैयारियों पर खुद सीएम योगी नज़र रख रहे हैं और वो हाल ही में जायजा लेने के लिए पहुँचे भी थे।

योगी सरकार की योजना है कि राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को ‘राष्ट्रीय उत्सव’ के रूप में मनाया जाए। अयोध्या में ‘कुम्भ मॉडल’ लागू करने का आदेश देते हुए कहा गया है कि मेहमानों के स्वागत, साज-सज्जा और आतिशबाजी का इंतजाम हो, सभी सरकारी भवनों को निखारा जाए। मेहमानों के लिए विश्राम स्थल पहले से तय रहेंगे। प्रशासन ने लखनऊ के होटलों से भी खाली कमरों की लिस्ट माँगी है। 116 कमरे वाले सेन्ट्रिम होटल में साफ़-सफाई चालू है।

यूपी ATS ने ISIS के 2 और आतंकियों को दबोचा: AMU के पूर्व छात्र हैं फराज अहमद और अब्दुल समद मलिक, बड़ी साजिश का पर्दाफाश

UP ATS को अलीगढ़ आतंकी मॉड्यूल मामले में फिर से एक बड़ी सफलता मिली है। यूपी ATS ने खूंखार आतंकी संगठन ISIS के एक आतंकी को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया है। उस पर 25,000 रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। वहीं, एक अन्य आतंकी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है।

ISIS के जिस आतंकी को गिरफ्तार किया गया है, उसका नाम आमस उर्फ फ़राज़ अहमद है। वह 22 साल का है और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से स्नातक है। उसने AMU से मनोविज्ञान में स्नातक किया है। उसे ATS ने अलीगढ़ से उठाया है। फराज प्रयागराज का रहने वाला है और एक भगोड़े आतंकी फैजान बख्तियार का करीबी है।

इसके अलावा, ISIS के एक अन्य आतंकी अब्दुल समद मलिक ने कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े इन दोनों आतंकियों की यूपी ATS को तलाश थी। इस मॉड्यूल का अक्टूबर 2023 में यूपी ATS ने भंडाफोड़ किया था। उस दौरान यूपी ATS ने कई आतंकी और इसके सरगना को गिरफ्तार किया था।

यूपी ATS ने सबसे पहले नवम्बर 2023 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संगठन स्टूडेंट्स ऑफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनियन (SAMU) से जुड़े अब्दुल्ला अर्सलान और माज बिन तारिक को गिरफ्तार किया था। ये दीपावली पर धमाकों की साजिश रच रहे थे। इनका कनेक्शन दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़े गए शहनवाज और रिजवान जैसे आतंकियों के साथ निकला था। दोनों आतंकियों के पास से कई सामान बरामद हुए थे।

इसके बाद यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आईएसआईएस (ISIS) समूह के एक और आतंकी वजीहुद्दीन अली खान को गिरफ्तार किया था। वजीहुद्दीन अली खान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पीएचडी कर रहा था। वजीहुद्दीन आईएसआईएस के अपने हैंडलर के लगातार संपर्क में था और वो आतंकी हमलों की योजना बना रहा था।

आतंकी वजीहुद्दीन अली खान पर अधिक से अधिक मुस्लिमों को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आईएसआईएस से जोड़ने की जिम्मेदारी थी। यही अलीगढ़ मॉड्यूल को सँभाल रहा था। वजीहुद्दीन छतीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है और इसके चेले चेले इसे अमीर कहते थे। अमीर इस्लामी शासक के लिए आमतौर पर प्रयुक्त होता है।

जिस यूपी को छोड़ने की बात करते थे मुनव्वर राना, वहीं के सरकारी अस्पताल में चल रहा इलाज: अचानक तबीयत बिगड़ने से ICU में भर्ती, ऑक्सीजन सपोर्ट पर

लंबे समय से बीमार चल रहे शायर मुनव्वर राना की तबीयत अचानक से ज़्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें लखनऊ स्थित ‘संजय गाँधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS)’ में भर्ती कराया गया है। वहाँ उन्हें ICU (गहन चिकित्सा इकाई) वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने बताया है कि अगले कुछ दिन मुनव्वर राना के लिए काफी अहम होने वाले हैं। पिछले कई दिनों से 71 वर्षीय शायर का स्वास्थ्य खराब चल रहा है और वो मुशायरों में भी नहीं देखे जा रहे थे। उन्हें अब ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। उनका SPO2 (ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल) घट कर 85 चला गया है। ये 95+ रहना चाहिए।

बता दें कि मुनव्वर राना अपनी कट्टर इस्लामी सोच के लिए भी जाने जाते हैं। मार्च 2022 में उन्होंने योगी आदित्यनाथ के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद बयान दिया था कि मुमकिन है कि वो उत्तर प्रदेश छोड़ दें। मुनव्वर राना की बेटी उरुषा ने पुरुवा विधानसभा सीट से बतौर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी चुनाव भी लड़ा था लेकिन उन्हें बुरी हार मिली थी। चुनाव से पहले मुनव्वर राना ने कहा था, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि अगर योगी आएगा तो मैं पलायन कर दूँगा। इस बात को स्पष्ट तौर पर नोट कर लिया जाए।”

अब उसी उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल में मनव्वर राना का इलाज चल रहा है, जिसे वो छोड़ने की बातें करते थे। मई 2023 में भी उनकी हालत बिगड़ गई थी, जब डायलिसिस के दौरान उनके पेट में तेज़ दर्द उठा था। डॉक्टरों ने उन्हें एडमिट कर के उनका सिटी स्कैन कराया था, जिसमें उन्हें गॉल ब्लैडर की समस्या सामने आई थी। इसके बाद उनकी सर्जरी की गई, लेकिन उनकी तबीयत में सुधर नहीं हुआ। अभी उनकी हालत ज़्यादा ख़राब है और डॉक्टरों की टीम निगरानी कर रही है।

मुनव्वर राना हिंदी, अवधि और उर्दू में शायरी करते रहे हैं। उनके शेर ‘मेरे हिस्से में माँ आई’ ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी। उन्हें साहित्य अकादमी अवॉर्ड भी मिल चुका है, लेकिन मोदी सरकार के खिलाफ ‘अवॉर्ड वापसी’ गैंग का हिस्सा बनते हुए उन्होंने पुरस्कार लौटा दिया था। हर सप्ताह 3 बार मुनव्वर राना की 3 बार डायलिसिस होती है। चेकअप में उनके फेफड़ों में पानी की बहुलता पाई गई थी और उन्हें निमोनिया भी हो गया था। इस कारण उन्हें साँस लेने में भी तकलीफ होती है।

कॉन्ग्रेस नेता ने हिन्दू कार्यकर्ताओं को सोसाइटी से निकाला, राम मंदिर का ‘अक्षत निमंत्रण’ देने आए थे: CCTV में कैद हुई घटना

राजस्थान के जयपुर में रामभक्तों के साथ बदसलूकी का मामला आया है। बताया जा रहा है कि रामभक्तों की टोली, जो घरों में अक्षत पहुँचाने का काम कर रही थी, उन्हीं को कॉन्ग्रेस नेता जगदीश चौधरी द्वारा अपमानित किया गया। ये घटना सीसीटीवी में कैद हो गई।

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठित समारोह के लिए अक्षत का वितरण करने पहुँचे राम भक्तों की टोली के साथ बदसलूकी कृष्णा कुंज विलास वेलफेयर सोसायटी में हुई। ये राम भक्त रामधुन कर रहे थे तभी सोसायटी के अध्यक्ष व कॉन्ग्रेसी नेता जगदीश चौधरी और उपाध्यक्ष राजीव कुमार बाहर निकले और उन लोगों को दुत्कार कर बाहर कर दिया।

इस दौरान रामभक्तों की टोली हाथ में भगवा झंडा लिए जय सियाराम-जय सियाराम का नारा लगाती रही और फिर वहाँ से चली गई। रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद रामभक्तों ने कहा कि जयपुर में वह लोग जहाँ भी गए उन हर जगह ही सम्मान मिला है। सभी लोगों ने उनका सत्कार किया है। लेकिन प्रदेश में भाजपा सरकार के आने के कारण कॉन्ग्रेसी ये सब करके अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

वहीं जगदीश चौधरी का कहना है, “राम हमारे आराध्य हैं। उन्हें हम खुद मानते हैं। किसी खास पार्टी से जुड़े होने का अर्थ राम विरोधी होना नहीं हो सकता। मैं सोसायटी और समाज में होने वाले धार्मिक कामों में पूरा सहयोग करता हूँ। कुछ लोगों ने मेरी छवि खराब करने के लिए निराधार खबर फैलाने का प्रयास किया है जिसका मैं विरोध करता हूँ। ये लोग नौटंकी करते हैं। असली राम को हम मानते हैं। हम सुबह शाम राम की पूजा करते हैं। मेरे घर में आकर देख लीजिए। हम कभी भगवान के खिलाफ जा ही नहीं सकते”

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होने वाला है। इसकी खुशी पूरे देश में है। रामभक्त जगह-जगह से फेरी निकालकर लोगों में उत्साह जगा रहे हैं। इसी क्रम में 1 जनवरी से पूजित अक्षत वितरण का कार्य हो रहा है। ये काम 15 जनवरी तक चलेगा। ये सब देख कुछ लोगों को रामभक्तों का उत्साह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। राजस्थान में जहाँ उनके साथ बदसलूकी हुई है। वहीं मध्यप्रदेश में तो रामभक्तों पर पत्थरबाजी की भी खबर आई है जहाँ मुस्लिम भीड़ ने श्रद्धालुओं को तलवार लेकर भी दौड़ाया

लक्षद्वीप में बनेगा बहुउद्देश्यीय एयरपोर्ट: लड़ाकू विमान करेंगे हिंद और अरब सागर की निगरानी, पर्यटक भी पहुँचेंगे आसानी से

मालदीव के मंत्रियों द्वारा भारत और प्रधानमंत्री मोदी पर की गई टिप्पणी से शुरू हुए विवाद के बीच लक्षद्वीप चर्चा में है। सोशल मीडिया पर यूजर्स लोगों को मालदीव की बजाय लक्षद्वीप जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस बीच भारत सरकार ने लक्षद्वीप में नया एयरपोर्ट बनाने की तैयारी की। इसका उपयोग सामरिक और नागरिक दोनों ही उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह एयरपोर्ट लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप में बनाया जाएगा। पहले भी इसकी योजना बन चुकी है, लेकिन वह सिर्फ वायुसेना अड्डे के रूप में विकसित किया जाना था। हालाँकि, अब नागरिक विमान भी यहाँ से उड़ सकेंगे। इस पर काम जल्द ही चालू होने की आशा है। लक्षद्वीप में इस समय अगत्ती द्वीप पर ही एक एयरपोर्ट है। नया एयरपोर्ट बनने से टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा।

इस एयरपोर्ट का इस्तेमाल वायुसेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड भी कर सकेंगे। इसके कारण हिंद महासागर और अरब सागर में भारत की पैठ भी मजबूत होगी। इसके साथ ही हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सामरिक रूप से यह इलाका भारत के काफी महत्वपूर्ण है।

मिनिकॉय द्वीप लक्षद्वीप का सबसे दक्षिण में स्थित द्वीप है। यह भारत की मुख्य भूमि यानी केरल के तिरुअनंतपुरम के तट से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। मिनिकॉय लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा द्वीप है। इस द्वीप पर लगभग 10,000 की आबादी रहती है।

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मोहम्मद मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के कई सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थीं। मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लक्षद्वीप दौरे की अपनी तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया है। एक बयान में वहाँ की सरकार ने कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

मालदीव सरकार के मंत्रियों की अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के रवैये की आलोचना शुरू कर दी। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं, ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

वर्तमान में मालदीव की सरकार बैकफुट पर है। मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वे मालदीव के साथ व्यापार ना करें।