प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सात समन का जवाब नहीं देने वाले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के अधिकारियों को जाँच से बचाने के लिए नई जुगत भिड़ाई है। हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल ने एक कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया है कि राज्य के अधिकारियों को बाहर से आने वाले समन का जवाब देने के लिए झारखंड सरकार की अनुमति लेनी होगी।
इसके पीछे झारखंड सरकार ने तर्क दिया है कि बाहरी एजेंसियों (ED, CBI) के समन अधिकारियों को सीधे भेजे जाते हैं, जिससे सरकार का काम प्रभावित होता है। झारखंड सरकार का कहना है कि अधिकारियों को सीधे जाँच एजेंसियों के समन आने से भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है।
एजेंसियों से बचने के लिए हेमंत सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि कभी कभार एजेंसियाँ, जो कागज माँगती हैं वह अपूर्ण होते हैं। इससे जाँच एजेंसियों को भी परेशानी होती है। इस सम्बन्ध में पहले से कोई नियम नहीं है। इसलिए अब यह नियम लाया गया है। अब कानूनी सलाह लेकर इसका जवाब दाखिल किया जाएगा।
इस निर्णय के अनुसार, जब भी राज्य के किसी भी अधिकारी को किसी बाहरी जाँच एजेंसी पेश होने के लिए समन करेगी तो उसे इसका जवाब सीधे ना देकर अपने विभागाध्यक्ष को बताना होगा। इसके बाद विभागाध्यक्ष इस जानकारी को आगे कैबिनेट सचिवालय को देगा। कैबिनेट सचिवालय इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।
कैबिनेट सचिवालय अधिकारी को भेजे गए समन पर कानूनी सलाह लेगा और आगे की कार्यवाही का संचालन करेगा। इसमें अधिकारी को पेश होने की अनुमति देने से लेकर एजेंसी को कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे, इस सम्बन्ध में निर्णय लेगा। सरकार का कहना है कि इससे उसके काम में भी बाधा नहीं पड़ेगी और साथ ही एजेंसियों को भी जाँच करने में आसानी होगी।
हालाँकि, झारखंड सरकार कुछ भी कहे लेकिन इसे दूसरे तरीके से देखा जा रहा है। बीते कुछ समय में झारखंड के कुछ अधिकारियों पर केन्द्रीय जाँच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसा है। साल 2022 में झारखंड में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और साल 2023 में आईएएस अधिकारी छवि रंजन को गिरफ्तार किया गया था।
कई बार ऐसा भी होता है कि एक अधिकारी की गिरफ्तारी से बड़ा घोटाला खुलता है, जिसमें कई राजनीतिक चेहरे भी शामिल पाए जाते हैं। अब झारखंड सरकार ने नए नियम निकाल कर जाँच एजेंसियों से अधिकारियों को बचाने का इंतजाम किया है।
गौरतलब है कि ED ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अब तक 7 बार पूछताछ के लिए समन भेजा है। हालाँकि, वह एक बार भी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं। उनको एक जमीन की खरीद फरोख्त के बारे में पूछताछ करने के लिए बुलाया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में उनके अपनी कुर्सी खाली करके पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर चर्चाएँ भी तेज हुई हैं।
समाजवादी पार्टी के नेता और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक बयान देते रहते हैं। अब वो कारसेवकों को लेकर दिए विवादित बयान के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने कारसेवकों को ‘अराजक तत्व’ कहा, तो तत्कालीन मुलायम सरकार के कदम को जायज ठहराया।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश को क्लीन चिट देते हुए कहा, “जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी। वहाँ पर बिना किसी न्यायपालिका के निर्देश के, बिना किसी प्रशासनिक आदेश के बड़े पैमाने पर अराजत तत्वों ने तोड़फोड़ की थी।”
उन्होंने आगे कहा, “तत्कालीन सरकार ने संविधान की रक्षा के लिए, कानून की रक्षा के लिए, अमन चैन कायम करने के लिए उस समय जो गोली चलवाई थी वो सरकार का अपना कर्तव्य था। सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था।”
#WATCH | Kasganj (UP): On Ram temple, Samajwadi Party leader Swami Prasad Maurya says, "…To safeguard the constitution and the law and to protect peace, the then government gave shoot at sight orders. The government merely did its duty…" pic.twitter.com/tpYf8wdMnJ
बता दें, कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री और आगरा से सांसद एसपी सिंह बघेल ने कहा था, “कारसेवकों पर सपा सरकार में गोली चलाई गई थी लेकिन सपा से कोई श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आना चाहे तो उसका स्वागत है।”
इसी बयान पर जब मौर्या से प्रतिक्रिया माँगी गई तो उन्होंने कहा, “एसपी सिंह बघेल हमारे बहुत अच्छे साथी रहे हैं। उस समय वह समाजवादी पार्टी में थे। जिस समय की वो बात कर रहे हैं वो भी समाजवादी पार्टी में थे। जिस समय अयोध्या वाला प्रकरण चला था। इसलिए उनको तो नहीं बोलना चाहिए।”
ये पहली बार नहीं है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ऐसा विवादित बयान दे रहे हैं। इससे पहले बीते साल ही रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया था। वो ये भी कह चुके है कि हिंदू मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं।
बताते चलें कि आज से 33 साल पहले 1990 में तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने हनुमान गढ़ी कूच कर रहे कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई थी। उन दिनों राममंदिर निर्माण के लिए देशभर से लोग और साधु-संत अयोध्या जा रहे थे।
इसे देखते हुए प्रशासन ने वहाँ कर्फ्यू लगाया था। बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर कर बैरिकेडिंग की गई थी। कारसेवकों की बेकाबू भीड़ पर 30 अक्टूबर 1990 को अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गई थीं। साल 2013 में मुलायम सिंह यादव ने इन मौतों पर अफसोस जताते हुए कहा था कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने कारसेवा के नाम पर 11 लाख की भीड़ अयोध्या में इकट्ठा कर ली थी। देश की एकता के लिए गोलियाँ चलानी पड़ी।
मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपमान को लेकर भारत में आए उबाल से कॉन्ग्रेस नेताओं को परेशानी है। मालदीवियन नेताओं द्वारा भारत के अपमान का जिम्मेदार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भारतीयों को ही बता डाला है। हालाँकि, प्रियांक खड़गे ने यह सच्चाई छुपा दी कि मालदीव की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा लगभग 3 वर्षों से भारत विरोधी अभियान ‘इंडिया आउट’ में जुटा हुआ है।
India used to be the friendly big brother for our Asian and Indian Ocean neighbors. But strong arming smaller nations doesn’t help India in anyway. We are losing all the goodwill that has been built over decades.
— Priyank Kharge / ಪ್ರಿಯಾಂಕ್ ಖರ್ಗೆ (@PriyankKharge) January 10, 2024
प्रियांक खड़गे का कहना है कि मालदीव जैसे छोटे देश के लोगों द्वारा प्रधानमंत्री और देश का अपमान किए जाने की आलोचना करना हमारी विदेश नीति के लिए सही नहीं है। प्रियांक खड़गे ने यह भी तथ्य नकार दिया कि भारतीयों ने मालदीव के किसी भी नेता की निजी तौर पर बुराई नहीं की थी और ना ही मालदीव के लोगों को लेकर कोई टिप्पणियाँ की थी। हालाँकि, मालदीवियन अकाउंट्स ने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीयों के लिए अभद्र शब्दों का उपयोग किया।
प्रियांक खड़गे ने लिखा, “एशिया और हिन्द महासागर में स्थित देशों के लिए भारत मित्रतापूर्ण व्यवहार वाला एक बड़ा भाई हुआ करता था, लेकिन छोटे देशों को दबाना भारत को किसी भी रूप में मदद नहीं करने जा रहा है। हम दशकों से बनाई गई सद्भावना को खो रहे हैं। जब सरकार पार्टी के आईटी सेल को देश के विदेश मामले चलाने के लिए दे देती है तो ऐसा ही होता है।”
3 साल से चल रहा ‘इंडिया आउट’ अभियान
भले ही प्रियांक खड़गे का कहना हो कि भारत के सोशल मीडिया यूजर मालदीव का बिना किसी बात के विरोध कर रहे हैं लेकिन मालदीव में भारत विरोधी भावनाएँ आज से नहीं हैं। वर्ष 2013 से 2018 तक मालदीव के राष्ट्रपति रहे अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव का रुख चीन की तरफ मोड़ा और इसे चीन की कठपुतली बना दिया।
यामीन ने सत्ता में आने के लिए भारत विरोधी भावनाओं को को खूब हवा दी थी। उन्होंने 2013 से पहले मालदीव के राष्ट्रपति रहे मोहम्मद नशीद को भारत के प्रति समर्पित बताया था। यामीन के शासन में चीन ने मालदीव में अपनी खूब घुसपैठ बढ़ाई और इसे उलटे-सीधे शर्तों पर कर्ज दिए। इसी दौरान चीन ने यहाँ भारत विरोधी भावनाओं को और भी भड़काया।
इसके बाद जब 2018 में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति बने और उन्होंने भारत की मोदी सरकार से रिश्ते सही करना चालू किए तो यामीन और उनके भारत विरोधी शागिर्दों ने फिर से दुष्प्रचार चालू कर दिया। अक्टूबर 2020 में यामीन और मालदीव की अन्य विपक्षी पार्टियों ने ‘भारत को बाहर करो’ (India Out) अभियान चलाया।
इसके आधार पर उनका कहना था कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को, जो कि यहाँ राहत बचाव के कामों में लगे थे, उन्हें निकाला जाए। साथ ही में मालदीव में काम करने वाले भारतीयों तथा भारत के अन्य हितों के खिलाफ भी इन्होंने प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शन के जरिए यामीन 2023 में दोबारा मालदीव का राष्ट्रपति बनना चाहते थे।
यामीन के इस ‘इंडिया आउट’ अभियान के पीछे चीन का भी हाथ था। पहले मालदीव की मीडिया में भारत विरोधी इन स्वरों को इतना कवर नहीं किया जा रहा था लेकिन बाद में यामीन के कुछ करीबियों ने कुछ मीडिया पोर्टलों का इस्तेमाल कर भारत की आलोचना चालू कर दी। ये पोर्टल यामीन के करीबियों के हैं। यामीन के कई विश्वस्तों ने चीन के साथ बड़ी बिजनेस डील की हैं।
मुइज्जू की एंट्री
इस पूरे भारत विरोधी अभियान को यामीन ने अपने फायदे के लिए चलाया था लेकिन जनवरी 2023 में उन्हें कोर्ट ने भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया कर जेल भेज दिया। ऐसे में वह रेस से बाहर हो गए। इसके साथ ही राष्ट्रपति पद की दौड़ में मोहम्मद मुइज्जू का नाम भी आ गया। मुइज्जू यामीन के शागिर्द हैं और राष्ट्रपति बनने से पहले मालदीव की राजधानी के मेयर थे।
मुइज्जू ने विकास, टूरिज्म को बढ़ावा या अन्य कोई मुद्दा ना उठाकर इंडिया आउट को ही अपना चुनावी अभियान बना लिया। वह इसमें पहले से ही शामिल थे। राष्ट्रपति के चुनाव के लिए उन्होंने भारत की आलोचना चालू कर दी और भारत के विरोध में रैलियाँ निकाली।
उनकी कुछ तस्वीरें ऐसी भी सामने आई हैं जिनमें वह ‘इंडिया आउट’ लिखी हुई टीशर्ट पहनी हुई हैं। मुइज्जू के पूरे चुनाव अभियान का आधार यही था कि वह राष्ट्रपति बने तो मालदीव से भारतीय सैनिकों को निकाल देंगे और भारत का समर्थन नहीं करेंगे। हालाँकि, उनके इस भारत विरोधी रवैये पर भी भारत एकदम शांत रहा।
लेकिन उनकी सरकार के मंत्रियों द्वारा भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपमान के बाद भारत के लोगों को का गुस्सा फूट गया और उन्होंने मालदीव का बहिष्कार करने की अपील की। ऐसे में यहाँ पर इस पूरे विवाद की जड़ मालदीव में है ना कि भारत में और सबसे पहले भड़काने का काम मालदीव के लोगों ने ही किया।
अब तक क्या हुआ?
गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत सत्ताधारी पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।
भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।
इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।
भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।
मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की थी। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया था। संस्था ने कहा था, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”
लगभग 5 सदी तक चले जमीनी और कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा उनकी जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने जा रही है। मुगल काल से मुलायम काल तक हुए अनगिनत बलिदान के बाद बन रहे निर्माणाधीन भव्य मंदिर के दिसंबर 2025 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।
ऑपइंडिया की टीम ने निर्माणाधीन राम मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया। हमने पाया कि निर्माणाधीन मंदिर के अंदर यज्ञशाला और वेदशाला का भी निर्माण किया जा रहा है। साथ ही यहाँ अरबपति व्यापारी और उच्च अधिकारी भी वॉलेंटियर के तौर पर काम करते दिखे।
24 घंटे चल रहा है काम
ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में पाया कि मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाउंड्री तक को बनाने के लिए श्रमिक 24 घंटे काम कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक वाली बड़ी-बड़ी आधुनिक मशीनों की घरघराहट हरदम सुनाई देती है। काम कर रहे श्रमिक कई शिफ्टों में अदला-बदली करते हैं। ये श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं।
ऑपइंडिया की टीम से बात वहाँ श्रमदान कर रहे कुछ लोगों से भी बात की। उन्होंने कहा कि वो धन्य हैं, क्योंकि उनको भगवान राम का मंदिर बनाने जैसे पावन काम के लिए चुना गया है। उन श्रमिकों ने बताया कि उनके रहने और खाने के लिए अच्छे प्रबंध किए गए हैं।
बारी खत्म कर के शिविर में जाते श्रमिक
अरबपति उद्योगपति भी कर रहे श्रमदान
इस दौरान हमने पाया कि कई प्रतिष्ठित परिवारों के सदस्य, बड़े उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी हस्तियाँ और प्राइवेट कंपनियों के बड़े अधिकारी भी वहाँ वॉलेंटियर के तौर पर काम कर रहे हैं। इनमें से कई ऐसे भी वॉलेंटियर हैं, जो जगुआर और BMW जैसी कारों में अयोध्या आए हैं और स्टार कैटेगरी के होटलों में रुके हैं।
इन लोगों ने हमें ऑफ़ कैमरा बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी श्रमदान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमदान से मिली मजदूरी भी वो श्रीराम मंदिर में दान करेंगे और उसकी रसीद को प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जा रहे हैं।
चल रहा मंदिर निर्माण कार्य जिसमें श्रमदान करते कई उद्योगपति और अधिकारी
महिला सुरक्षाकर्मी कर रही हैं गर्भगृह की रखवाली
निर्माणाधीन राममंदिर की सुरक्षा पूरी तरह से चाक चौबंद हैं। प्रथम चरण UP पुलिस से शुरू होता है। उसके बाद PAC और SSF जवानों से होते हुए अंत में गर्भगृह के आसपास सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय रिजर्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) दिया गया है। वर्तमान में यहाँ CRPF की बटालियन नंबर 233 तैनात है।
रामलला के दर्शन करने के मुख्य स्थान की सुरक्षा CRPF की महिला बटालियन के जिम्मे है। यहाँ महिला कमांडो को स्वचलित हथियारों से हरदम चौकन्ना देखा जा सकता है। हालाँकि, उनके साथ सहयोग करने के लिए यूपी पुलिस के सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं।
राम मंदिर की सुरक्षा अभेद्य बनाने के लिए योगी सरकार द्वारा अयोध्या में UP पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की यूनिटें भी स्थापित की गई हैं। इन यूनिटों में तैनात उच्च प्रशिक्षित पुलिसकर्मी न सिर्फ मंदिर परिसर, बल्कि आसपास के इलाकों में भी सादी वर्दी में गश्त करते रहते हैं।
मंदिर परिसर में म्यूजियम, वेद पाठशाला, गौशाला और भी बहुत कुछ
भगवान राम के निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में उनकी मूर्ति के अलावा परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निर्माण करवाया जा रहा है। इन स्थलों में हवन और पूजापाठ के लिए यज्ञशाला, विद्यार्थियों के लिए वेद पाठशाला और गौ संरक्षण के लिए गौशाला शामिल हैं। इसके अलावा कैम्पस में अनुष्ठान मंडप, सत्संग भवन, म्यूजिम और 360 डिग्री का एक थिएटर भी बनाया जा रहा है।
यहाँ आने वाले श्रद्धालु पुस्तकालय, म्यूजियम और थिएटर के माध्यम से भगवान राम के साथ-साथ उनके जीवन चरित के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। संत निवास और यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग भवन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, यहाँ एक गेस्ट हाउस भी होगा। इन्हीं भवनों के पास पुस्तकालय और रिसर्च सेंटर भी मौजूद होगा।
इसके अतिरिक्त मंदिर परिवार में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ऑफिस और उसका प्रशासनिक भवन मौजूद होगा। एक कोने में शौचालय आदि की भी व्यवस्था होगी। मंदिर परिसर के कई हिस्सों में सुरक्षा चेक पोस्ट बनाए जाएँगे, जहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। इन सुरक्षाकर्मियों में पुरुष और महिला दोनों शामिल रहेंगे। मंदिर परिसर में ही अग्निशमन की टीम भी मौजूद होगी।
परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर
सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर परिसर को 5 जोन में बाँटा गया है। इनके नाम आइसोलेशन, रेड, येलो, ब्लू और ग्रीन जोन हैं। हर जोन में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात रहेंगे। ये सुरक्षा बल राज्य व केंद्र के मिलाकर होंगे। मंदिर की नदी से सटी बॉउंड्री के पास भी स्टीमरों और नावों पर सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएँगे। निगरानी के लिए सभी संवेदनशील जगहों पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं।
मंदिर से सटे पूरे इलाके की CCTV से निगरानी की जाएगी। यहाँ आने-जाने वाहनों के नंबर लगातार स्कैन किए जाएँगे। सुरक्षाबलों के अलावा पूरे क्षेत्र को आर्म फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि यहाँ तैनात सुरक्षाबलों के जवानों के अलावा किसी भी व्यक्ति को कोई भी हथियार लेकर आने की इजाजत नहीं होगी।
खुदाई से मिले अवशेष आज भी परिसर में मौजूद
बाहरी चरमपंथी आक्रमणों के अलावा भगवान राम की जन्मभूमि को लम्बे समय तक अदालती आदेशों के अधीन रहना पड़ा था। अदालत के ही आदेश पर मंदिर परिसर की कई बार खुदाई करवाई गई। इस खुदाई में मिले साक्ष्यों ने रामजन्मभूमि का फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसके साथ ही उन सबूतों ने उस जगह को मस्जिद बताने वालों को दुनिया के आगे झूठा भी साबित किया था। आज भी खुदाई से मिले तमाम अवशेषों में से कई मंदिर के उस स्थान पर रखे गए हैं, जहाँ वर्तमान में हिन्दू समाज के लोग एक अस्थाई जगह पर भगवान राम का दर्शन कर रहे हैं।
खुदाई में मिला शिवलिंग,शिलाएँ और अन्य वस्तुएँ
मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच एक लोहे के पिंजरे में सहेज कर रखे गए इन अवशेषों में लगभग 5 फ़ीट लम्बा शिवलिंग सबसे बड़ा आकर्षण है। इस शिवलिंग पर जल गिराने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा खुदाई में मिले खंभों पर हिन्दू संस्कृति की कलाकृतियाँ साफ़ देखी जा सकती हैं। वहाँ कुछ मूर्तियाँ भी रखी गई हैं, जो देवी-देवताओं के प्रतीक मानी जा रही हैं। इन कलाकृतियों से अनुमान लगाया जा सकता है कि प्राचीन समय में हिन्दू संस्कृति काफी उन्नत थी।
लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस अपने मुताबिक माहौल बनाने में लगी हुई है। राहुल गाँधी एक नई यात्रा पर निकल रहे हैं। लेकिन उनके नेताओं के बयानों के कारण उनकी अभी से फजीहत होनी शुरू हो चुकी है। सैम पित्रौदा को ही सुन लीजिए। एक चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी की तरह राजीव गाँधी भी बहुत लोगों से मिलते थे। वह तो एक दिन में 5-5 हजार लोगों के साथ हाथ मिलाते थे जिसकी वजह से उनके हाथ से खून भी निकलने लगता था।
उन्होंने खुद को राजीव गाँधी का दोस्त बताते हुए इस वाकये की चर्चा 4pm नाम के चैनल पर संजय शर्मा के साथ की। यहाँ 10 मिनट के बाद सुन सकते हैं सजय उनसे पूछ रहे थे- “क्या आप राहुल गाँधी के पिता (राजीव गाँधी) के दोस्त रहे थे? इस पर सैम ने ‘हाँ’ में जवाब दिया और जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी इस तरह की यात्रा की थी, क्या उन्हें भी लोगों से मिलने का शौक था?
इस पर सैम बोले- “बिल्कुल, मैं आपको एक बार की बात बताता हूँ। एक रात, मैं और मेरी पत्नी राजीव गाँधी से मिले। उस समय उनके हाथ से खून निकल रहा था। मुझे बड़ा अचरज लगा। मैंने पूछा कि ये क्या हुआ। तो उन्होंने कहा- सैम, आज हमने करीबन 5000 लोगों से हाथ मिलाया। जहाँ भी मैं गया लोगों ने हाथ मिलाए। वो लोग खेतीबाड़ी करते हैं उनके हाथ बहुत रफ होते हैं।”
सैम कहते हैं, “हमारे हाथ कभी भी इतने रफ नहीं हो सकते क्योंकि हम लिखते हैं, कुल्हाड़ी लेकर काम नहीं करते। हमारे पूर्वजों के हाथ रफ थे। मेरे चाचा तो लुहार का काम करते थे। वो पूड़ियाँ बनाते थे तो गर्म तेल में ऊंगली डालकर उसे निकालते थे। उनके काम के कारण उनका हाथ रफ हो गया था।”
सैम जब दावा करते रहते हैं कि राजीव गाँधी बहुत लोगों को मिलते थे, तो ये वाकया सुन संजय शर्मा पूछते हैं कि क्या उन्होंने सच में इतने लोगों से हाथ मिला लिया कि उनका हाथ कड़ा हो गया और खून आ गया?
इसपर सैम फिर दोहराते हैं कि राजीव गाँधी इतने के बाद रुकते नहीं थे। ये सिलिसला चलता रहता था। वह आनंद से रहते थे और बोलते थे कि ये उनकी ड्यूटी है। सैम ने दावा किया कि ये सब राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए किया था। वह पीएम होते हुए भी इतने लोगों से मिलते थे।
राजीव गाँधी का सैम पित्रौदा ने उड़वा दिया मजाक
बता दें कि सैम पित्रौदा की इस बात का सोर्स वह स्वयं हैं। उन्होंने वीडियो में ये नहीं बताया कि कौन सी रैली में, कौन से गाँव में, किस जगह राजीव गाँधी ने 5 हजार से ज्यादा लोगों से इतनी बार हाथ मिलाए कि उनका हाथ ही कट गया और उससे खून निकलने लगा। केवल गाँधी परिवार का बखान करने में ऐसा लगता है वो कुछ भी बोलते चले गए। यही वजह है कि उनकी ये बातें सुनकर राहुल गाँधी के साथ-साथ अब राजीव गाँधी का भी मजाक उड़ने लगा है।
वहीं सैम पित्रौदा को तो लोग ‘चाटुकार’ बता रहे हैं, बड़े स्तर का चमचा कह रहे हैं। कुछ लोग ‘कॉन्ग्रेस की नैया डुबाने’ के पीछे सैम पित्रौदा को जिम्मेदार बता रहे हैं। कुछ ऐसे बयान सुनकर कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस को भगवान ही बचा सकती है। कुछ लोग तो सैम पित्रौदा की बड़ी-बड़ी बात को गणित के साथ भी काट रहे हैं कि अगर एक व्यक्ति से हाथ मिलाने में 6-7 सेंकेड लगते हैं तो 5000 लोगों से हाथ मिलाने में तो 8 घंटे के करीब लग जाएँगे। क्या सवाल नहीं उठता कि एक दिन में एक प्रधानमंत्री सिर्फ 8 घंटे तक लोगों से हाथ ही मिला रहा है।
एक व्यक्ति से हाथ मिलाया फिर दूसरे से, इसमें 6 से 7 सेकंड्स लगेंगे! अगर सिर्फ 5000 लोगों से भी हाथ मिलाया मतलब कम से कम 8 घंटे 20 मिनट तक हाथ मिलाते रहे! यहां तो कम से कम 5000 बोला!
— देवेंद्र शर्मा ???????? ?????? ?? (@theDevSh) January 10, 2024
गोवा में 4 वर्षीय बेटे की उसकी माँ के द्वारा हत्या में और भी खुलासे हुए हैं। सामने आया है कि टेक स्टार्टअप फाउंडर सूचना सेठ ने अपने 4 वर्षीय बेटे को इसलिए मार दिया क्योंकि वह यह नहीं चाहती थी कि उसका पिता उससे मिल पाए।
जानकारी के अनुसार, हत्यारोपी सूचना सेठ कोलकाता की मूल निवासी हैं, जो वर्ष 2008 में कोलकाता से बेंगलुरु आई थीं। यहाँ उनकी मुलाक़ात वेंकट रमण से हुई। वेंकट केरल के रहने वाले हैं। सूचना और वेंकट ने 2010 में विवाह करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2019 में उनके बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम चिन्मय था।
पुलिस ने बताया है कि बाद में दोनों के बीच तल्खियाँ बढ़ गई थीं। इस कारण से सूचना और वेंकट रमण के बीच तलाक की प्रक्रिया 2022 में चालू हुई थी। अभी तलाक को अंतिम रूप दिया जाना बाकी था। हालाँकि, कोर्ट ने बच्चे को माँ के साथ रखे जाने का निर्णय दिया था। साथ ही यह भी निर्देश था कि उसका पिता उससे रविवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक मिल सकता है।
#WATCH | Panaji: On the murder of a four-year-old boy in Goa, North Goa SP Nidhin Valsan says, "…Goa court remands to six-day police custody to the mother. The father identified the boy & he said that they got married in 2012 and their divorce proceedings started in 2022.… pic.twitter.com/2UHartBiO5
सूचना सेठ नहीं चाहती थीं कि वेंकट उनके बच्चे चिन्मय से एक भी दिन मिल पाएँ। वह कोर्ट के इस निर्णय से गुस्से में थीं। इसीलिए उसने बच्चे को गोवा ले जाकर मार दिया। बच्चे के शव का भी पोस्टमॉर्टम हो गया है और मौत के कारण भी सामने आ गए हैं।
बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया है कि उसकी हत्या तकिए या ऐसी ही किसी चीज से दबा कर की गई है। उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। यह भी सामने आया है कि बच्चे के शव के पोस्टमॉर्टम से 36 घंटे पहले उसकी मौत हो चुकी थी।
बच्चे की हत्या के समय उसका पिता वेंकट रमण इंडोनेशिया में था। उसे भी हत्या की जानकारी देकर भारत बुलाया गया। गोवा में बच्चे का पोस्टमॉर्टम होने के बाद शव को उसके पिता को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर बेंगलुरु लौट गया। वहीं हत्या की आरोपित सूचना को 6 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है।
सूचना पुलिस की शुरूआती जाँच में कुछ भी बोलने से इंकार कर रही हैं और लगातार वकील दिए जाने की माँग कर रही हैं। यह भी सामने आया है कि होटल के कमरे में जिन खून के धब्बों के कारण वह पकड़ी गईं, वह चोट उसकी ही थी। उसने बच्चे को मारने के बाद अपने हाथ पर चोट लगाई थी।
गोवा में हत्या की, बेंगलुरु निकल गई सूचना
39 वर्षीय सूचना सेठ एक टेक स्टार्टअप फाउंडर और माइंडफुल नाम की कम्पनी की CEO हैं। वो 6 जनवरी, 2024 को शाम को अपने 4 वर्ष के बेटे के साथ गोवा के एक होटल पहुँची थीं। उसने 7 जनवरी, 2024 को जल्दी-जल्दी में अपना होटल छोड़ दिया। जब वह वापस निकली तो उसके साथ उसका बेटा नहीं था।
उसने 7 जनवरी, 2024 को सुबह होटल जल्दी खाली करने की अर्जी की थी और साथ ही होटल में रिसेप्शनिस्ट से कहा कि उसे बेंगलुरु के लिए एक निजी टैक्सी चाहिए। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि सूचना को फ्लाइट लेना चाहिए लेकिन वह टैक्सी लेने पर अड़ी रही। इसके बाद जब उसे टैक्सी मिली तो वह वहाँ से एक बैग के साथ निकल गई, इस दौरान उसका बेटा नहीं दिखा। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
सूचना के कमरा छोड़ने के बाद जब वहाँ होटल के कर्मचारी साफ़ सफाई के लिए पहुँचे तो वहाँ उन्होंने खून बिखरा देखा। उसने होटल के प्रबन्धन को सूचित किया, जिन्होंने पुलिस बुलाई। इसके बाद उन्होंने पुलिस को बताया कि उसका बेटा साथ में वापस जाते नहीं दिखा।
पुलिस ने जब सूचना को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसका बेटा गोवा के फट्रोडा में है, जहाँ उसके दोस्त हैं। उसने पुलिस को फर्जी पता भी दिया। पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो उसे शक हुआ। पुलिस ने सूचना को लेकर जा रही टैक्सी के ड्राईवर को फ़ोन किया और उसे नजदीकी पुलिस थाने जाने को कहा। ड्राईवर उस समय कर्नाटक के चित्रदुर्ग में था, जहाँ वह पुलिस थाने पहुँचा। यहाँ महिला की जाँच करने पर उसके बैग में उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश मिली।
इसके बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उससे आगे की पूछताछ की। गोवा पुलिस कर्नाटक से उसे गिरफ्तार कर लाई। हत्या करने वाली महिला सूचना सेठ के बारे में भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। हत्या करने वाली सुचाना सेठ की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखा है कि वह माइंडफुल AI लैब की CEO, AI और डाटा साइंस एक्सपर्ट है, जिसे इस मामले में 12 वर्षों का अनुभव है। यह भी लिखा है कि AI एक्सपर्ट 100 महिलाओं की लिस्ट में शामिल रही है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में बलिदानी कारसेवक संजय कुमार की बेटी के घर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता गया है। कारसेवक संजय के परिजन ये निमंत्रण मिलने से बेहद खुश हैं। पिछले 32 सालों से परिवार ने ने राम मंदिर का संपना संजोया था। उनकी पत्नी तो राम मंदिर की आस में 2019 में राम नवमी के दिन देह त्याग गईं, लेकिन उनकी बेटियों को इस पल का खास इंतजार था।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में अन्य कारसेवकों की तरह संजय कुमार सिंह भी बहुत उत्साह के साथ राम मंदिर निर्माण का सपने लिए अपने घर से निकले थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था वो वापस नहीं लौट पाएँगे। कारसेवकों पर जब गोली चलाई गई तो वो गोलियाँ संजय कुमार सिंह को भी लगी, जिससे उनकी मौत हो गई।
परिवार बताता है कि अंतिम संस्कार तक के लिए संजय सिंह का शव उन्हें घर पर नहीं पहुँचाया गया था। बेटियाँ उस समय मात्र 2 साल और 45 दिन की थीं। संजय सिंह के जाने के बाद उनकी पत्नी ने ही बेटियों का लालन पालन कड़े संघर्ष के साथ किया। आज संजय सिंह की बेटी कृति को जब निमंत्रण मिला तो वह काफी खुश हुईं। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कृति ने रोते हुए कहा कि पिता का सपना पूरा हो रहा है इसलिए उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है।
कृति ने कहा, “पिताजी ने मंदिर के लिए अपनी जान दे दी थी। उस समय मेरी उम्र सिर्फ 45 दिन की थी और मेरी बड़ी बहन दो साल थी। माँ ने बड़ी कठिनाइयों के साथ हमें पाला। मुझे तो पता भी नहीं कि हमारे पापा इस दुनिया में नहीं है। बड़े होने पर माँ ने बताया कि उनके पिता ने राम मंदिर के लिए जान दी थी। मुझे उस समय जानकर बहुत दुख हुआ था। लेकिन माँ कहती रहती थी कि उनका सपना जरूर पूरा होगा। आज माँ नहीं है। उनका देहांत साल 2019 में रामनवमी के दिन हुआ था।”
बता दें कि अयोध्या राम जन्मभूमि के लिए मर मिटने वाले कारसेवकों पर ऑपइंडिया लगातार ग्राउंड रिपोर्ट अपने पाठकों के लिए ला रहा है। हाल में हमने आपको कारसेवक महावीर अग्रवाल के बारे में बताया था जिनके सीने में गोली दागी गई थी और जिंदा हालत में ही उन्हें मृतकों के साथ गाड़ी में ठूँस दिया गया था। इसी तरह कारसेवक राम बहादुर वर्मा, भगवान सिंह जाट, अचल गुप्ता जैसे कारसेवकों के साथ क्या ज्यादती हुई थी उनके परिवार पर क्या गुजरी ये भी हमने इस सीरिज में बताया है। आप लिंक पर क्लिक करके उसे पढ़ सकते हैं।
भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी (IPS) संजीव भट्ट को गुजरात हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। ‘पुलिस हिरासत में मौत’ मामले में जामनगर सत्र अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराए जाने और आजीवन कारावास की सजा को बरकार रखा है। हाईकोर्ट ने मंगलवार (9 जनवरी 2024) को इस मामले में सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ की गई अपील को खारिज कर दिया है।
इस मामले में न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री और न्यायमूर्ति संदीप भट्ट की खंडपीठ ने कहा, “ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को तर्क के आधार पर दोषी ठहराया है। इसलिए सजा के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। हम उक्त फैसले को बरकरार रखते हैं और अपील खारिज करते हैं।” दरअसल, यह मामला 1990 में हुई एक घटना से संबंधित है।
दरअसल, रथ यात्रा के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद 30 अक्टूबर 1990 को भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने भारत बंद का आह्वान किया था। उसी दौरान जामनगर जिले के एक शहर में सांप्रदायिक दंगा भड़क गया था। उस समय संजीव भट्ट जामनगर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) थे।
इस मामले में संजीव भट्ट ने 133 लोगों को आतंकवादी एवं विघटनकारी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (TADA) के तहत हिरासत में लिया था। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में से एक प्रभुदास माधवजी वैश्नानी भी थे। हिरासत से रिहा होने के बाद वैश्नानी की मृत्यु हो गई। उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि भट्ट और उनके सहयोगियों ने वैश्नानी को हिरासत में खूब यातनाएँ दी थीं।
परिवार ने आरोप लगाया था कि हिरासत में लिए गए लोगों को लाठियों से पीटा गया था और उन्हें कोहनी के बल रेंगने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें पानी तक पीने की इजाजत नहीं दी गई थी। इसके कारण प्रभुदास वैश्नानी की किडनी खराब हो गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई। वैश्नानी नौ दिनों तक पुलिस हिरासत में थे।
वैश्नानी की मौत के लिए परिजनों ने संजीव भट्ट और अन्य अधिकारियों जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में IPS संजीव कुमार भट्ट, सब इंस्पेक्टर दीपक कुमार भगवानदास शाह, सब इंस्पेक्टर शैलेश कुमार लाभशंकर पंड्या, कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह बवुभा झाला, कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह जोरूभा जाडेजा, कॉन्स्टेबल अनूप सिंह मोहब्बतसिंह जेठवा और कॉन्स्टेबल केसुभा दोलुभा जाडेजा को आरोपित बनाया गया।
मामले का संज्ञान 1995 में मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया। हालाँकि, गुजरात हाईकोर्ट की रोक के कारण मुकदमा 2011 तक रुका रहा। बाद में रोक हटा ली गई और मुकदमा पर सुनवाई शुरू हुई। इसके बाद जून 2019 में जामनगर सत्र अदालत ने भट्ट और कॉन्स्टेबल प्रवीण झाला को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 323 और 506(1) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।
इनके अलावा, अदालत ने पुलिस कॉन्स्टेबल प्रवीण सिंह जाडेजा, अनोप सिंह जेठवा, केसुभा दोलुभा जाडेजा और पुलिस उप-निरीक्षक शैलेश पांड्या एवं दीपककुमार भगवानदास शाह को भी हिरासत में यातना का दोषी पाया। इन सभी को भारतीय दंड संहित (IPC) की धारा 323 और 506 (1) के तहत दोषी ठहराया गया।
जामनगर सत्र न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ IPS संजीव भट्ट, पुलिस सब-इंस्पेक्टर शैलेश पांड्या और कॉन्स्टेबल प्रवीण झाला साल 2019 में गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया। हालाँकि, हाईकोर्ट में भी इन्हें कोई राहत नहीं मिली। अब इनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।
बताते चलें कि संजीव भट्ट एक विवादास्पद पुलिस अधिकारी रहे हैं। साल 1996 में उन्हें एक वकील को ड्रग्स से संबंधित एक फर्जी मामले में फँसाने का आरोप लगा था। उस समय वे बनासकांठा जिले के एसपी थे। इसके बाद साल 1998 में भी संजीव भट्ट पर हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति को टॉर्चर करने का आरोप लगा था।
जून 2011 में गुजरात सरकार ने ड्यूटी से गैर हाजिर रहने, ड्यूटी पर नहीं रहते हुए भी आधिकारिक कार का इस्तेमाल करने और जाँच कमिटी के सामने पेश नहीं होने पर संजीव भट्ट को सस्पेंड कर दिया। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे और वहाँ भाजपा की सरकार थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद में UAE (संयुक्त अरब अमीरात) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ रोडशो किया। दोनों नेता ‘वाइब्रेंट गुजरात’ समिट में हिस्सा लेने के लिए पहुँचे हैं। इससे पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुँचे UAE के राष्ट्रपति एवं अबुधाबी के प्रशासक का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले मिल कर स्वागत किया। फिर वहाँ से 3 किलोमीटर लंबा मेगा रोडशो हुआ। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने लिखा कि दोनों देशों के मजबूत संबंधों को और पुष्ट किया जा रहा है।
बता दें कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए होने वाले सालाना कार्यक्रम ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के 10वें संस्करण में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान मुख्य अतिथि हैं। गाँधीनगर और अहमदाबाद को जोड़ने वाले इंदिरा ब्रिज पर इस रोडशो का समापन हुआ। कार्यक्रम के लिए पूरे शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है। ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट (VGGS)’ का बुधवार को उद्घाटन होना है। वो ‘ग्लोबल फिनटेक लीडरशिप फोरम’ में भी हिस्सा लेंगे।
पीएम मोदी गाँधीनगर में तकनीकी रूप से समृद्ध ‘गिफ्ट सिटी’ का भी दौरा करेंगे। साथ ही कई बड़ी कंपनियों के CEOs के साथ उनकी मुलाकात होनी है। भारत और UAE के बीच इस दौरान कई समझौतों (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने हाथ हिला कर वहाँ इकट्ठा लोगों का अभिवादन भी स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने लगभग 15 मिनट का रोडशो किया।
पूरे शहर में उनका स्वागत करते हुए कई बैनर-पोस्टर लगाए गए थे। आज ही पीएम मोदी ने तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्टा और मोजाम्बिक के राष्ट्रपति फिलिप जैसिंटो न्यूसी के साथ भी बैठक की है। उन्होंने ‘वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल ट्रेड शो’ का उद्घाटन कर के उसका मुआयना भी किया। इस साल VGGS के लिए 34 पार्टनर देश हैं और 16 पार्टनर संस्थाएँ हैं। गुजरात में निवेश लाने में इस कार्यक्रम का बड़ा योगदान रहा है और इससे पूरे भारत की छवि को फायदा पहुँचा है।
पिछले 7 महीनों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शेख की ये चौथी मुलाकात है। रिन्यूवेबल एनर्जी के क्षेत्र में निवेश साझेदारी के लिए दोनों देशों में करार हुए। साथ ही भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने UAE के निवेश मंत्रालय के साथ नई परिवर्तनात्मक परियोजनाओं को लेकर करार किया। फ़ूड पार्क के विकास को लेकर भारत के खाद्य मंत्रालय ने भी एक करार किया। UAE के ‘DP वर्ल्ड’ के साथ गुजरात सरकार ने टिकाऊ, ग्रीन और कुशल पोर्ट्स के विकास के लिए करार किया है।
खुद को ‘Mythologist’ बताने वाले हिन्दू विरोधी देवदत्त पटनायक को एक सरकारी संस्था द्वारा चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोग आक्रोशित हो गए। ‘इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)’ ने मंगलवार (9 जनवरी, 2024) को सोशल मीडिया पर बताया कि उसके वडोदरा स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने ‘प्रख्यात मिथोलॉजिस्ट, लेखक एवं वक्ता’ देवदत्त पटनायक से चर्चा वाले कार्यक्रम के लिए आमजनों को आमंत्रित किया जाता है।
बताया गया कि ये कार्यक्रम बुधवार (17 जनवरी, 2024) को शाम 5 बजे लक्ष्मी विलास पैलेस प्रसार स्थित रवि वर्मा स्टूडियो में आयोजित होगा। साथ ही इसके लिए एक वेब लिंक जारी किया गया, जिस पर क्लिक कर वहाँ आने के इच्छुक लोग रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। बताया गया कि पंजीकरण अनिवार्य है, क्योंकि सीटों की संख्या सीमित है। हालाँकि, जब हमने गूगल डॉक वाला फॉर्म खोला तो ‘बताया गया कि ‘टॉक बाय देवदत्त पटनायक’ शीर्षक के साथ बताया गया कि अब पंजीकरण बंद हो चुका है।
IGNCA ने इसमें लिखा, “हम आप सब से गंभीरता से माफ़ी माँगना चाहते हैं, साथ ही हमें ये सूचित करते हुए दुःख हो रहा है कि हमारे आने वाले कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन बंद किया जा चुका है। लोगों द्वारा अत्यधिक रुचि लेने और कार्यक्रम के लिए अप्रत्याशित संख्या में पंजीकरण के कारण हम अपनी अधिकतम क्षमता तक अपनी उम्मीद से पहले ही पहुँच चुके हैं (सीटें भर चुकी हैं)।” साथ ही किसी भी प्रकार के सवालों या सहायता को लेकर [email protected] पर संपर्क करने को कहा गया।
सीटों की संख्या भर जाने के कारण ‘इंदिरा गाँधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स’ ने बंद कर दिया रजिस्ट्रेशन
अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने इस कार्यक्रम को लेकर हैरानी जताते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री G किशन रेड्डी से इस मामले में संज्ञान लेने का निवेदन किया। हालाँकि, विरोध होने के बाद IGNCA ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है, लेकिन इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है कि कार्यक्रम रद्द किया गया है या नहीं।
Shocking to see that this anti-Hindu Devdutt Pattanaik has been invited to speak on Shri Ram by @ignca_delhi in collab with @MinOfCultureGoI.
देवदत्त पटनायक के बारे में बता दें कि वो अक्सर हिन्दू विरोधी बातें करता रहता है। इसीलिए, उसे देवदत्त ‘नालायक’ भी लोग कहते हैं। ऊपर से वो अव्वल दर्जा का गालीबाज भी है। उसने खुद लिखा था कि वो ‘बलात्कार के बदले बलात्कार’ वाली थ्योरी में विश्वास रखता था। उसने झूठ फैलाई थी कि जो भी राम मंदिर के लिए दान देने से इनकार कर देता है, उसके घर को चिह्नित कर लिया जाता है और सरकारी प्रशासन को इसकी सूचना दे दी जाती है।
इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस’ के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम में भी गालीबाज देवदत्त पटनायक को आमंत्रित किया गया था, लेकिन विरोध के बाद फैसला लिया गया कि उसके वाले सत्र का प्रसारण नहीं किया जाएगा। उसे ‘ग्रेट माइंड डिस्कस आइडियास’ कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। देवदत्त पटनायक सोशल मीडिया पर भी माँ-बहन की गालियाँ बक चुका है। ओडिशा के भुवनेश्वर में भी उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी, क्योंकि उसने जगन्नाथ मंदिर को लेकर समाज को विभाजित करने वाली बातें कही थीं।