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मोदी है तो मुमकिन है का मतलब क्या… मुकेश अंबानी ने ‘वाइब्रेंट गुजरात’ में बताया, बोले- देश बनेगा 35 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था

वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ नारे का मतलब समझाया है। उन्होंने बताया कि कैसे पूरी दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है और कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत ने पूरी दुनिया को चौंकाया है। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 में बोलते हुए मुकेश अंबानी ने खुद को गुजराती और गुजरात को अपनी मातृभूमि, कर्मभूमि बताते हुए कहा कि वो पिछले 20 साल से वाइब्रेंट गुजरात समिट का हिस्सा बनते रहे हैं।

गुजरात की राजधानी गाँधी नगर में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2024 का आयोजन हो रहा है। 12 जनवरी तक चलनी वाली इस ग्लोबल समिट का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। इस मौके पर 10 जनवरी को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा, ‘मोदी है तो मुमकिन है’ पर भरोसा बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “मेरे विदेश के मित्र पूछते हैं कि ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का क्या मतलब होता है? जब मैंने उन्हें बताया कि इसका मतलब नामुमकिन को मुमकिन बना देने से है, तब से वो भी अब ‘मोदी है तो मुमकिन है’ कहने लगे हैं। मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मौजूदा समय का सबसे बड़ा और सबसे सफल प्रधानमंत्री करार दिया। मुकेश अंबानी की स्पीच में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ वाला हिस्सा 2 मिनट के बाद देखा जा सकता है।”

मुकेश अंबानी ने कहा, “भारत को 2047 तक 35 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। रिलायंस इंडस्ट्रीज हजीरा में कार्बन फाइबर यूनिट लगाएगी। रिलायंस रिटेल लाखों किसानों को सशक्त करेगा… साल 2030 तक हम रिन्यूएबल एनर्जी के टारगेट को पूरा कर लेंगे। इसी साल की दूसरी छमाही तक जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन कॉम्प्लेस की भी शुरुआत होती जाएगी।”

उन्होंने कहा, “मुझे गुजराती होने पर गर्व है। रिलायंस गुजराती कंपनी थी और आगे भी गुजराती कंपनी ही रहेगी।” मुकेश अंबानी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में रिलायंस ने देश में करीब 12 लाख करोड़ का निवेश किया है और इसमें से एक तिहाई से ज्यादा अकेले गुजरात में किया गया है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र की अगुवाई में ही वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की शुरुआत साल 2003 में हुई थी, तब से लेकर हर साल गुजरात में विदेशी निवेशकों और सरकारों का मेला लगता है। इन ग्लोबल समिट्स के माध्यम से गुजरात में अब तक भारी मात्रा में निवेश आया है। इस समिट को पीएम मोदी का ब्रेन चाइल्ड भी कहा जाता है। इससे प्रेरित होकर देश के अन्य राज्य भी ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट जैसे आयोजन करने लगी हैं। हालाँकि अब भी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित करने वाला प्लेटफॉर्म है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी को समिट में शामिल होने आए यूएई के राष्ट्रपति का स्वागत कर एक रोड शो भी किया था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए होने वाले सालाना कार्यक्रम ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के 10वें संस्करण में शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ही मुख्य अतिथि हैं। इस बार समिट का विषय गेटवे टू द फ्यूचर है। इसमें 34 देश और 16 संगठन शामिल हुए हैं। चेक गणराज्य के प्रधान मंत्री पेट्र फियाला, मोजाम्बिक के राष्ट्रपति फिलिप जैसिंटो न्युसी, तिमोर-लेस्ते के राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्टा समेत कई अन्य वर्ल्ड लीडर्स और गौतम अडानी, मुकेश अंबानी, लक्ष्मी मित्तल समेत कई उद्योगपति इस कार्यक्रम में शामिल हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने उकसाया, हिन्दू विरोधियों ने रामचरितमानस जलाया: हाईकोर्ट बोला – सबके हाथ में मोबाइल फोन, NSA लगाने का फैसला सही

इलाहबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के खिलाफ दायर दो लोगों की याचिका को खारिज कर दिया है। दोनों ने ये याचिका NSA के तहत हिरासत में रखे जाने के खिलाफ दायर की थी। दोनों पर हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस की प्रतियों का अनादर करने और उन्हें जलाने के आरोप हैं।

न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी और संगीता जौहरी की बेंच ने दो अलग-अलग याचिकाओं में ये आदेश दिया। दरअसल देवेेंद्र यादव और सुरेश यादव नाम के दोनों आरोपितों ने अलग-अलग शख्स के जरिए अपने याचिकाएँ दायर करवाई थीं। आरोपित देवेंद्र यादव के पिता के माध्यम और सुरेश यादव ने अपनी पत्नी के माध्यम से याचिकाएँ दायर की थीं।

इलाहबाद हाईकोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा जिस तरह से याचिकाकर्ताओं ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दिनदहाड़े सार्वजनिक जगह पर बहुसंख्यक समुदाय के पूजे जाने वाले धार्मिक ग्रंथ का अपमान किया, उसके लिए समाज में आक्रोश और गुस्सा स्वाभाविक था।

बेंच ने आगे कहा कि मौजूदा हालात में समाज का लगभग हर शख्स मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है। इस आधार पर बेंच ने माना कि सिर पर मंडराते इस खतरे को देखते हुए हिरासत में लिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि उनकी हिरासत को याचिकाकर्ताओं की निजी आजादी पर गलत और अवैध प्रतिबंध नहीं माना जा सकता है।

बताते चलें कि बीते साल 29 जनवरी 2023 में समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में रामचरितमानस की फोटोकॉपी किए पेज जलाए गए थे। मौर्य ने 22 जनवरी 2023 को दावा किया था कि इस ग्रंथ की कुछ चौपाइयों में कथित तौर पर महिलाओं और दलितों पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ हैं, जो सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं।

इस आरोप में लखनऊ पुलिस ने 10 नामजद और कई अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया था। बीजेपी नेता सतनाम सिंह लवी की शिकायत पर ये FIR पर दर्ज की गई थी। इसके तहत पुलिस ने आरोपित देवेन्द्र यादव, यशपाल सिंह लोधी, सत्येन्द्र कुशवाहा, मोहम्मद सलीम और सुरेश यादव के खिलाफ NSA लगाकर गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस ने आरोपितों को 8 फरवरी 2023 को हिरासत में ले लिया गया था। वहीं, समाजवादी पार्टी से एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य पर भी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज किया गया था।

सेना के लिए अडानी के स्वदेशी कारखाने में बना अत्याधुनिक ड्रोन: 36 घंटे उड़ान से लेकर 450 kg गोला-बारूद तक, जानें खासियत

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरिकुमार ने अडानी समूह की कम्पनी ‘अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस’ द्वारा निर्मित दृष्टि 10 स्टारलाइनर ड्रोन को पेश किया है। इसे हैदराबाद में स्थित अडानी के ड्रोन निर्माण कारखाने में भारतीय तकनीक के साथ बनाया गया है।

यह अपनी तरह का पहला भारत में निर्मित ड्रोन है। यह ‘मीडियम एल्टिट्यूड लॉन्ग इन्ड्युरेन्स (MALE)’ वाला ड्रोन है। इसका मतलब है कि यह आकाश में मध्यम ऊँचाई पर काफी ज्यादा देर तक उड़ सकता है। यह ड्रोन विशेष तकनीक से लैस है। यह एक बार में 36 घंटे की उड़ान भर सकता है। यह सभी प्रकार के मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। ये आकाश में ऐसी परिस्थिति में उड़ान भरने में भी सक्षम है जहाँ और भी विमान उड़ रहे हों।

इस ड्रोन को विशेष रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में गश्त लगाने जैसे कामों में लगाया जाएगा। यह 450 किलो तक पेलोड ले जा सकता है। इस पेलोड में हथियार भी भेजे जा सकते हैं। इस ड्रोन को नौसना और थल सेना, दोनों के उपयोग के लिए बनाया गया है।

नौसेना तथा थल सेना ने इन ड्रोन का ऑर्डर भी दिया है। यह जल्द ही भारतीय सेनाओं में शामिल हो कर अपनी सेवाएँ देंगे। अडानी डिफेन्स एंड एयरोस्पेस का कहना है कि उनका पहला ड्रोन हैदराबाद से गुजरात तक उड़ा कर भेजा जाएगा जहाँ इसे नौसेना में शामिल किया जाएगा।

नौसेना प्रमुख ने इस मौके पर कहा है कि भारत का पहला आत्मनिर्भर MALE ड्रोन मात्र 10 महीनों में ही बन कर तैयार हो गया है। यहाँ आकर इसकी प्रगति के बारे में जानकारी लेना मेरे लिए काफी गर्व और ख़ुशी की बात है। वहीँ अडानी परिवार के सदस्य और अडानी एयरपोर्ट्स को देखने वाले जीत अडानी ने कहा है जल्द ही वह भारत में निर्मित इन रक्षा उत्पादों को बाहर देशों को निर्यात करना चालू करेंगे।

गौरतलब है कि भारत अब तक ड्रोन तकनीक को दूसरे देशों से लेता आया है। भारतीय सेनाओं में शामिल अधिकांश ड्रोन इजरायली कम्पनियों द्वारा निर्मित हैं। हालाँकि, बीते कुछ सालों में भारत में भी ड्रोन निर्माण में तेजी आई है और कई कम्पनियाँ इस क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

रन लेने के लिए दौड़ रहा था इंजीनियर, क्रिकेट की पिच पर ही गिर कर मौत: सामने आया वीडियो

नोएडा में क्रिकेट खेलने के दौरान 36 साल के विकास नेगी की अचानक जमीन पर गिरकर मौत हो गई। साथी खिलाड़ी उन्हें लेकर अस्पताल गए लेकिन वहाँ उनको मृत घोषित कर दिया गया। मौत का कारण हार्ट अटैक को बताया गया है। पिच पर उनके गिरकर बेहोश होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना नोएडा के एक्सप्रेस वे के सेक्टर-135 की है। 6 जनवरी, 2024 को नोएडा में कॉर्पोरेट लीग के दौरान मैवरिक्स इलेवन और ब्लैजिंग बुल्स का मैच था। इस मैच में विकास मैवरिक्स के लिए बैटिंग कर रहे थे। मैच के दौरान 14वें ओवर उनके साथ बैटिंग कर रहे उमेश कुमार ने शॉट मारा। गेंद देखते हुए दोनों बैट्समैन रन लेने के लिए दौड़े, लेकिन आधी पिच तक पहुँचते बॉल बाउंड्री के पार चली गई और चार रन मिल गए।

इसके बाद विकास आधी पिच से वापस नॉन स्ट्राइक एंड पर लौटे और फिर अपने साथी को बधाई देने आगे बढ़े। मगर, दोनों खिलाड़ियों के बैट टकराने से पहले ही वो अचानक मैदान पर गिर पड़े। उनके गिरते ही उनके साथ खेल रहे अन्य लोग तुरंत उनके पास पहुँचे।

इस दौरान उन्हें सीपीआर दी भी गई, लेकिन सुधार न देख विकास को बेहोशी की हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टर्स ने उनके मृत घोषित कर दिया।

नोएडा पुलिस एसएचओ सरिता मलिक के मुताबिक, मृतक विकास मूलरूप से उत्तराखंड निवासी थे। मौजूदा वक्त में वो दिल्ली के रोहिणी में रह रहे थे। विकास नेगी नोएडा की ही एक कंपनी में इंजीनियर थे। कहा जा रहा है विकास कोविड संक्रमण भी हुआ था।

बताते चलें कि बीते साल नोएडा सेक्टर-21-A स्टेडियम में 52 साल के बैडमिंटन खिलाड़ी महेंद्र के खेलते वक्त अचानक सीने में दर्द हुआ था और वो गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया था। जहाँ डॉक्टर्स उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

‘समन का जवाब देना है तो हमारी अनुमति लो’: ED-CBI के लिए झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार का फरमान, अपने अधिकारियों को बचाने के लिए खेला दाँव

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सात समन का जवाब नहीं देने वाले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के अधिकारियों को जाँच से बचाने के लिए नई जुगत भिड़ाई है। हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल ने एक कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया है कि राज्य के अधिकारियों को बाहर से आने वाले समन का जवाब देने के लिए झारखंड सरकार की अनुमति लेनी होगी।

इसके पीछे झारखंड सरकार ने तर्क दिया है कि बाहरी एजेंसियों (ED, CBI) के समन अधिकारियों को सीधे भेजे जाते हैं, जिससे सरकार का काम प्रभावित होता है। झारखंड सरकार का कहना है कि अधिकारियों को सीधे जाँच एजेंसियों के समन आने से भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न होती है।

एजेंसियों से बचने के लिए हेमंत सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि कभी कभार एजेंसियाँ, जो कागज माँगती हैं वह अपूर्ण होते हैं। इससे जाँच एजेंसियों को भी परेशानी होती है। इस सम्बन्ध में पहले से कोई नियम नहीं है। इसलिए अब यह नियम लाया गया है। अब कानूनी सलाह लेकर इसका जवाब दाखिल किया जाएगा।

इस निर्णय के अनुसार, जब भी राज्य के किसी भी अधिकारी को किसी बाहरी जाँच एजेंसी पेश होने के लिए समन करेगी तो उसे इसका जवाब सीधे ना देकर अपने विभागाध्यक्ष को बताना होगा। इसके बाद विभागाध्यक्ष इस जानकारी को आगे कैबिनेट सचिवालय को देगा। कैबिनेट सचिवालय इस पूरी प्रक्रिया के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है।

कैबिनेट सचिवालय अधिकारी को भेजे गए समन पर कानूनी सलाह लेगा और आगे की कार्यवाही का संचालन करेगा। इसमें अधिकारी को पेश होने की अनुमति देने से लेकर एजेंसी को कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे, इस सम्बन्ध में निर्णय लेगा। सरकार का कहना है कि इससे उसके काम में भी बाधा नहीं पड़ेगी और साथ ही एजेंसियों को भी जाँच करने में आसानी होगी।

हालाँकि, झारखंड सरकार कुछ भी कहे लेकिन इसे दूसरे तरीके से देखा जा रहा है। बीते कुछ समय में झारखंड के कुछ अधिकारियों पर केन्द्रीय जाँच एजेंसियों ने अपना शिकंजा कसा है। साल 2022 में झारखंड में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और साल 2023 में आईएएस अधिकारी छवि रंजन को गिरफ्तार किया गया था।

कई बार ऐसा भी होता है कि एक अधिकारी की गिरफ्तारी से बड़ा घोटाला खुलता है, जिसमें कई राजनीतिक चेहरे भी शामिल पाए जाते हैं। अब झारखंड सरकार ने नए नियम निकाल कर जाँच एजेंसियों से अधिकारियों को बचाने का इंतजाम किया है।

गौरतलब है कि ED ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अब तक 7 बार पूछताछ के लिए समन भेजा है। हालाँकि, वह एक बार भी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं। उनको एक जमीन की खरीद फरोख्त के बारे में पूछताछ करने के लिए बुलाया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में उनके अपनी कुर्सी खाली करके पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर चर्चाएँ भी तेज हुई हैं।

कारसेवकों पर गोली चलाना सही फैसला, मुलायम सरकार सिर्फ अपना फर्ज निभा रही थी: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले स्वामी प्रसाद मौर्या ने उगला जहर

समाजवादी पार्टी के नेता और एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक बयान देते रहते हैं। अब वो कारसेवकों को लेकर दिए विवादित बयान के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने कारसेवकों को ‘अराजक तत्व’ कहा, तो तत्कालीन मुलायम सरकार के कदम को जायज ठहराया।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश को क्लीन चिट देते हुए कहा, “जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी। वहाँ पर बिना किसी न्यायपालिका के निर्देश के, बिना किसी प्रशासनिक आदेश के बड़े पैमाने पर अराजत तत्वों ने तोड़फोड़ की थी।”

उन्होंने आगे कहा, “तत्कालीन सरकार ने संविधान की रक्षा के लिए, कानून की रक्षा के लिए, अमन चैन कायम करने के लिए उस समय जो गोली चलवाई थी वो सरकार का अपना कर्तव्य था। सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था।”

बता दें, कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री और आगरा से सांसद एसपी सिंह बघेल ने कहा था, “कारसेवकों पर सपा सरकार में गोली चलाई गई थी लेकिन सपा से कोई श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आना चाहे तो उसका स्वागत है।”

इसी बयान पर जब मौर्या से प्रतिक्रिया माँगी गई तो उन्होंने कहा, “एसपी सिंह बघेल हमारे बहुत अच्छे साथी रहे हैं। उस समय वह समाजवादी पार्टी में थे। जिस समय की वो बात कर रहे हैं वो भी समाजवादी पार्टी में थे। जिस समय अयोध्या वाला प्रकरण चला था। इसलिए उनको तो नहीं बोलना चाहिए।”

ये पहली बार नहीं है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ऐसा विवादित बयान दे रहे हैं। इससे पहले बीते साल ही रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया था। वो ये भी कह चुके है कि हिंदू मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं।

बताते चलें कि आज से 33 साल पहले 1990 में तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने हनुमान गढ़ी कूच कर रहे कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई थी। उन दिनों राममंदिर निर्माण के लिए देशभर से लोग और साधु-संत अयोध्या जा रहे थे।

इसे देखते हुए प्रशासन ने वहाँ कर्फ्यू लगाया था। बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर कर बैरिकेडिंग की गई थी। कारसेवकों की बेकाबू भीड़ पर 30 अक्टूबर 1990 को अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गई थीं। साल 2013 में मुलायम सिंह यादव ने इन मौतों पर अफसोस जताते हुए कहा था कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी ने कारसेवा के नाम पर 11 लाख की भीड़ अयोध्या में इकट्ठा कर ली थी। देश की एकता के लिए गोलियाँ चलानी पड़ी।

‘इंडिया आउट’ वालों का समर्थन, अपने ही देश के लोगों का विरोध: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के मंत्री बेटे की करतूत, ऐसे मालदीव में सत्ता में आया भारत विरोधी गिरोह

मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपमान को लेकर भारत में आए उबाल से कॉन्ग्रेस नेताओं को परेशानी है। मालदीवियन नेताओं द्वारा भारत के अपमान का जिम्मेदार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भारतीयों को ही बता डाला है। हालाँकि, प्रियांक खड़गे ने यह सच्चाई छुपा दी कि मालदीव की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा लगभग 3 वर्षों से भारत विरोधी अभियान ‘इंडिया आउट’ में जुटा हुआ है।

प्रियांक खड़गे का कहना है कि मालदीव जैसे छोटे देश के लोगों द्वारा प्रधानमंत्री और देश का अपमान किए जाने की आलोचना करना हमारी विदेश नीति के लिए सही नहीं है। प्रियांक खड़गे ने यह भी तथ्य नकार दिया कि भारतीयों ने मालदीव के किसी भी नेता की निजी तौर पर बुराई नहीं की थी और ना ही मालदीव के लोगों को लेकर कोई टिप्पणियाँ की थी। हालाँकि, मालदीवियन अकाउंट्स ने प्रधानमंत्री मोदी और भारतीयों के लिए अभद्र शब्दों का उपयोग किया।

प्रियांक खड़गे ने लिखा, “एशिया और हिन्द महासागर में स्थित देशों के लिए भारत मित्रतापूर्ण व्यवहार वाला एक बड़ा भाई हुआ करता था, लेकिन छोटे देशों को दबाना भारत को किसी भी रूप में मदद नहीं करने जा रहा है। हम दशकों से बनाई गई सद्भावना को खो रहे हैं। जब सरकार पार्टी के आईटी सेल को देश के विदेश मामले चलाने के लिए दे देती है तो ऐसा ही होता है।”

3 साल से चल रहा ‘इंडिया आउट’ अभियान

भले ही प्रियांक खड़गे का कहना हो कि भारत के सोशल मीडिया यूजर मालदीव का बिना किसी बात के विरोध कर रहे हैं लेकिन मालदीव में भारत विरोधी भावनाएँ आज से नहीं हैं। वर्ष 2013 से 2018 तक मालदीव के राष्ट्रपति रहे अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव का रुख चीन की तरफ मोड़ा और इसे चीन की कठपुतली बना दिया।

यामीन ने सत्ता में आने के लिए भारत विरोधी भावनाओं को को खूब हवा दी थी। उन्होंने 2013 से पहले मालदीव के राष्ट्रपति रहे मोहम्मद नशीद को भारत के प्रति समर्पित बताया था। यामीन के शासन में चीन ने मालदीव में अपनी खूब घुसपैठ बढ़ाई और इसे उलटे-सीधे शर्तों पर कर्ज दिए। इसी दौरान चीन ने यहाँ भारत विरोधी भावनाओं को और भी भड़काया।

इसके बाद जब 2018 में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह मालदीव के राष्ट्रपति बने और उन्होंने भारत की मोदी सरकार से रिश्ते सही करना चालू किए तो यामीन और उनके भारत विरोधी शागिर्दों ने फिर से दुष्प्रचार चालू कर दिया। अक्टूबर 2020 में यामीन और मालदीव की अन्य विपक्षी पार्टियों ने ‘भारत को बाहर करो’ (India Out) अभियान चलाया।

इसके आधार पर उनका कहना था कि मालदीव से भारतीय सैनिकों को, जो कि यहाँ राहत बचाव के कामों में लगे थे, उन्हें निकाला जाए। साथ ही में मालदीव में काम करने वाले भारतीयों तथा भारत के अन्य हितों के खिलाफ भी इन्होंने प्रदर्शन किए। इन प्रदर्शन के जरिए यामीन 2023 में दोबारा मालदीव का राष्ट्रपति बनना चाहते थे।

यामीन के इस ‘इंडिया आउट’ अभियान के पीछे चीन का भी हाथ था। पहले मालदीव की मीडिया में भारत विरोधी इन स्वरों को इतना कवर नहीं किया जा रहा था लेकिन बाद में यामीन के कुछ करीबियों ने कुछ मीडिया पोर्टलों का इस्तेमाल कर भारत की आलोचना चालू कर दी। ये पोर्टल यामीन के करीबियों के हैं। यामीन के कई विश्वस्तों ने चीन के साथ बड़ी बिजनेस डील की हैं।

मुइज्जू की एंट्री

इस पूरे भारत विरोधी अभियान को यामीन ने अपने फायदे के लिए चलाया था लेकिन जनवरी 2023 में उन्हें कोर्ट ने भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया कर जेल भेज दिया। ऐसे में वह रेस से बाहर हो गए। इसके साथ ही राष्ट्रपति पद की दौड़ में मोहम्मद मुइज्जू का नाम भी आ गया। मुइज्जू यामीन के शागिर्द हैं और राष्ट्रपति बनने से पहले मालदीव की राजधानी के मेयर थे।

मुइज्जू ने विकास, टूरिज्म को बढ़ावा या अन्य कोई मुद्दा ना उठाकर इंडिया आउट को ही अपना चुनावी अभियान बना लिया। वह इसमें पहले से ही शामिल थे। राष्ट्रपति के चुनाव के लिए उन्होंने भारत की आलोचना चालू कर दी और भारत के विरोध में रैलियाँ निकाली।

उनकी कुछ तस्वीरें ऐसी भी सामने आई हैं जिनमें वह ‘इंडिया आउट’ लिखी हुई टीशर्ट पहनी हुई हैं। मुइज्जू के पूरे चुनाव अभियान का आधार यही था कि वह राष्ट्रपति बने तो मालदीव से भारतीय सैनिकों को निकाल देंगे और भारत का समर्थन नहीं करेंगे। हालाँकि, उनके इस भारत विरोधी रवैये पर भी भारत एकदम शांत रहा।

लेकिन उनकी सरकार के मंत्रियों द्वारा भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अपमान के बाद भारत के लोगों को का गुस्सा फूट गया और उन्होंने मालदीव का बहिष्कार करने की अपील की। ऐसे में यहाँ पर इस पूरे विवाद की जड़ मालदीव में है ना कि भारत में और सबसे पहले भड़काने का काम मालदीव के लोगों ने ही किया।

अब तक क्या हुआ?

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत सत्ताधारी पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की थी। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया था। संस्था ने कहा था, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”

श्रीराम मंदिर में गौशाला और वेद पाठशाला भी, गर्भगृह की सुरक्षा CRPF की महिला कमांडो के जिम्मे: अरबपति से लेकर उच्च अधिकारी तक अयोध्या में कर रहे श्रमदान

लगभग 5 सदी तक चले जमीनी और कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा उनकी जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने जा रही है। मुगल काल से मुलायम काल तक हुए अनगिनत बलिदान के बाद बन रहे निर्माणाधीन भव्य मंदिर के दिसंबर 2025 तक पूर्ण होने की उम्मीद है।

ऑपइंडिया की टीम ने निर्माणाधीन राम मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया। हमने पाया कि निर्माणाधीन मंदिर के अंदर यज्ञशाला और वेदशाला का भी निर्माण किया जा रहा है। साथ ही यहाँ अरबपति व्यापारी और उच्च अधिकारी भी वॉलेंटियर के तौर पर काम करते दिखे।

24 घंटे चल रहा है काम

ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में पाया कि मंदिर के गर्भगृह से लेकर बाउंड्री तक को बनाने के लिए श्रमिक 24 घंटे काम कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक वाली बड़ी-बड़ी आधुनिक मशीनों की घरघराहट हरदम सुनाई देती है। काम कर रहे श्रमिक कई शिफ्टों में अदला-बदली करते हैं। ये श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं।

ऑपइंडिया की टीम से बात वहाँ श्रमदान कर रहे कुछ लोगों से भी बात की। उन्होंने कहा कि वो धन्य हैं, क्योंकि उनको भगवान राम का मंदिर बनाने जैसे पावन काम के लिए चुना गया है। उन श्रमिकों ने बताया कि उनके रहने और खाने के लिए अच्छे प्रबंध किए गए हैं।

बारी खत्म कर के शिविर में जाते श्रमिक

अरबपति उद्योगपति भी कर रहे श्रमदान

इस दौरान हमने पाया कि कई प्रतिष्ठित परिवारों के सदस्य, बड़े उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी हस्तियाँ और प्राइवेट कंपनियों के बड़े अधिकारी भी वहाँ वॉलेंटियर के तौर पर काम कर रहे हैं। इनमें से कई ऐसे भी वॉलेंटियर हैं, जो जगुआर और BMW जैसी कारों में अयोध्या आए हैं और स्टार कैटेगरी के होटलों में रुके हैं।

इन लोगों ने हमें ऑफ़ कैमरा बताया कि उनके परिवार के अन्य सदस्य भी श्रमदान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमदान से मिली मजदूरी भी वो श्रीराम मंदिर में दान करेंगे और उसकी रसीद को प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जा रहे हैं।

चल रहा मंदिर निर्माण कार्य जिसमें श्रमदान करते कई उद्योगपति और अधिकारी

महिला सुरक्षाकर्मी कर रही हैं गर्भगृह की रखवाली

निर्माणाधीन राममंदिर की सुरक्षा पूरी तरह से चाक चौबंद हैं। प्रथम चरण UP पुलिस से शुरू होता है। उसके बाद PAC और SSF जवानों से होते हुए अंत में गर्भगृह के आसपास सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय रिजर्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) दिया गया है। वर्तमान में यहाँ CRPF की बटालियन नंबर 233 तैनात है।

रामलला के दर्शन करने के मुख्य स्थान की सुरक्षा CRPF की महिला बटालियन के जिम्मे है। यहाँ महिला कमांडो को स्वचलित हथियारों से हरदम चौकन्ना देखा जा सकता है। हालाँकि, उनके साथ सहयोग करने के लिए यूपी पुलिस के सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं।

राम मंदिर की सुरक्षा अभेद्य बनाने के लिए योगी सरकार द्वारा अयोध्या में UP पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) की यूनिटें भी स्थापित की गई हैं। इन यूनिटों में तैनात उच्च प्रशिक्षित पुलिसकर्मी न सिर्फ मंदिर परिसर, बल्कि आसपास के इलाकों में भी सादी वर्दी में गश्त करते रहते हैं।

मंदिर परिसर में म्यूजियम, वेद पाठशाला, गौशाला और भी बहुत कुछ

भगवान राम के निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में उनकी मूर्ति के अलावा परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का निर्माण करवाया जा रहा है। इन स्थलों में हवन और पूजापाठ के लिए यज्ञशाला, विद्यार्थियों के लिए वेद पाठशाला और गौ संरक्षण के लिए गौशाला शामिल हैं। इसके अलावा कैम्पस में अनुष्ठान मंडप, सत्संग भवन, म्यूजिम और 360 डिग्री का एक थिएटर भी बनाया जा रहा है।

यहाँ आने वाले श्रद्धालु पुस्तकालय, म्यूजियम और थिएटर के माध्यम से भगवान राम के साथ-साथ उनके जीवन चरित के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। संत निवास और यात्रियों की सुविधा के लिए अलग-अलग भवन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, यहाँ एक गेस्ट हाउस भी होगा। इन्हीं भवनों के पास पुस्तकालय और रिसर्च सेंटर भी मौजूद होगा।

इसके अतिरिक्त मंदिर परिवार में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का ऑफिस और उसका प्रशासनिक भवन मौजूद होगा। एक कोने में शौचालय आदि की भी व्यवस्था होगी। मंदिर परिसर के कई हिस्सों में सुरक्षा चेक पोस्ट बनाए जाएँगे, जहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी चप्पे-चप्पे पर नजर रखेंगे। इन सुरक्षाकर्मियों में पुरुष और महिला दोनों शामिल रहेंगे। मंदिर परिसर में ही अग्निशमन की टीम भी मौजूद होगी।

परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर

सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर परिसर को 5 जोन में बाँटा गया है। इनके नाम आइसोलेशन, रेड, येलो, ब्लू और ग्रीन जोन हैं। हर जोन में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात रहेंगे। ये सुरक्षा बल राज्य व केंद्र के मिलाकर होंगे। मंदिर की नदी से सटी बॉउंड्री के पास भी स्टीमरों और नावों पर सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएँगे। निगरानी के लिए सभी संवेदनशील जगहों पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं।

मंदिर से सटे पूरे इलाके की CCTV से निगरानी की जाएगी। यहाँ आने-जाने वाहनों के नंबर लगातार स्कैन किए जाएँगे। सुरक्षाबलों के अलावा पूरे क्षेत्र को आर्म फ्री जोन घोषित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि यहाँ तैनात सुरक्षाबलों के जवानों के अलावा किसी भी व्यक्ति को कोई भी हथियार लेकर आने की इजाजत नहीं होगी।

खुदाई से मिले अवशेष आज भी परिसर में मौजूद

बाहरी चरमपंथी आक्रमणों के अलावा भगवान राम की जन्मभूमि को लम्बे समय तक अदालती आदेशों के अधीन रहना पड़ा था। अदालत के ही आदेश पर मंदिर परिसर की कई बार खुदाई करवाई गई। इस खुदाई में मिले साक्ष्यों ने रामजन्मभूमि का फैसला हिन्दुओं के पक्ष में आने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसके साथ ही उन सबूतों ने उस जगह को मस्जिद बताने वालों को दुनिया के आगे झूठा भी साबित किया था। आज भी खुदाई से मिले तमाम अवशेषों में से कई मंदिर के उस स्थान पर रखे गए हैं, जहाँ वर्तमान में हिन्दू समाज के लोग एक अस्थाई जगह पर भगवान राम का दर्शन कर रहे हैं।

खुदाई में मिला शिवलिंग,शिलाएँ और अन्य वस्तुएँ

मंदिर परिसर में कड़ी सुरक्षा के बीच एक लोहे के पिंजरे में सहेज कर रखे गए इन अवशेषों में लगभग 5 फ़ीट लम्बा शिवलिंग सबसे बड़ा आकर्षण है। इस शिवलिंग पर जल गिराने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा खुदाई में मिले खंभों पर हिन्दू संस्कृति की कलाकृतियाँ साफ़ देखी जा सकती हैं। वहाँ कुछ मूर्तियाँ भी रखी गई हैं, जो देवी-देवताओं के प्रतीक मानी जा रही हैं। इन कलाकृतियों से अनुमान लगाया जा सकता है कि प्राचीन समय में हिन्दू संस्कृति काफी उन्नत थी।

‘राजीव गाँधी 1 दिन में मिलाते थे 5000+ लोगों से हाथ, खून निकलने लगता था’ : सैम पित्रौदा ने चैनल पर की हवा हवाई बात, लोग बोले- कितना बडे़ वाला चाटुकार है

लोकसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस अपने मुताबिक माहौल बनाने में लगी हुई है। राहुल गाँधी एक नई यात्रा पर निकल रहे हैं। लेकिन उनके नेताओं के बयानों के कारण उनकी अभी से फजीहत होनी शुरू हो चुकी है। सैम पित्रौदा को ही सुन लीजिए। एक चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी की तरह राजीव गाँधी भी बहुत लोगों से मिलते थे। वह तो एक दिन में 5-5 हजार लोगों के साथ हाथ मिलाते थे जिसकी वजह से उनके हाथ से खून भी निकलने लगता था।

उन्होंने खुद को राजीव गाँधी का दोस्त बताते हुए इस वाकये की चर्चा 4pm नाम के चैनल पर संजय शर्मा के साथ की। यहाँ 10 मिनट के बाद सुन सकते हैं सजय उनसे पूछ रहे थे- “क्या आप राहुल गाँधी के पिता (राजीव गाँधी) के दोस्त रहे थे? इस पर सैम ने ‘हाँ’ में जवाब दिया और जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी इस तरह की यात्रा की थी, क्या उन्हें भी लोगों से मिलने का शौक था?

इस पर सैम बोले- “बिल्कुल, मैं आपको एक बार की बात बताता हूँ। एक रात, मैं और मेरी पत्नी राजीव गाँधी से मिले। उस समय उनके हाथ से खून निकल रहा था। मुझे बड़ा अचरज लगा। मैंने पूछा कि ये क्या हुआ। तो उन्होंने कहा- सैम, आज हमने करीबन 5000 लोगों से हाथ मिलाया। जहाँ भी मैं गया लोगों ने हाथ मिलाए। वो लोग खेतीबाड़ी करते हैं उनके हाथ बहुत रफ होते हैं।”

सैम कहते हैं, “हमारे हाथ कभी भी इतने रफ नहीं हो सकते क्योंकि हम लिखते हैं, कुल्हाड़ी लेकर काम नहीं करते। हमारे पूर्वजों के हाथ रफ थे। मेरे चाचा तो लुहार का काम करते थे। वो पूड़ियाँ बनाते थे तो गर्म तेल में ऊंगली डालकर उसे निकालते थे। उनके काम के कारण उनका हाथ रफ हो गया था।”

सैम जब दावा करते रहते हैं कि राजीव गाँधी बहुत लोगों को मिलते थे, तो ये वाकया सुन संजय शर्मा पूछते हैं कि क्या उन्होंने सच में इतने लोगों से हाथ मिला लिया कि उनका हाथ कड़ा हो गया और खून आ गया?

इसपर सैम फिर दोहराते हैं कि राजीव गाँधी इतने के बाद रुकते नहीं थे। ये सिलिसला चलता रहता था। वह आनंद से रहते थे और बोलते थे कि ये उनकी ड्यूटी है। सैम ने दावा किया कि ये सब राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए किया था। वह पीएम होते हुए भी इतने लोगों से मिलते थे।

राजीव गाँधी का सैम पित्रौदा ने उड़वा दिया मजाक

बता दें कि सैम पित्रौदा की इस बात का सोर्स वह स्वयं हैं। उन्होंने वीडियो में ये नहीं बताया कि कौन सी रैली में, कौन से गाँव में, किस जगह राजीव गाँधी ने 5 हजार से ज्यादा लोगों से इतनी बार हाथ मिलाए कि उनका हाथ ही कट गया और उससे खून निकलने लगा। केवल गाँधी परिवार का बखान करने में ऐसा लगता है वो कुछ भी बोलते चले गए। यही वजह है कि उनकी ये बातें सुनकर राहुल गाँधी के साथ-साथ अब राजीव गाँधी का भी मजाक उड़ने लगा है।

वहीं सैम पित्रौदा को तो लोग ‘चाटुकार’ बता रहे हैं, बड़े स्तर का चमचा कह रहे हैं। कुछ लोग ‘कॉन्ग्रेस की नैया डुबाने’ के पीछे सैम पित्रौदा को जिम्मेदार बता रहे हैं। कुछ ऐसे बयान सुनकर कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस को भगवान ही बचा सकती है। कुछ लोग तो सैम पित्रौदा की बड़ी-बड़ी बात को गणित के साथ भी काट रहे हैं कि अगर एक व्यक्ति से हाथ मिलाने में 6-7 सेंकेड लगते हैं तो 5000 लोगों से हाथ मिलाने में तो 8 घंटे के करीब लग जाएँगे। क्या सवाल नहीं उठता कि एक दिन में एक प्रधानमंत्री सिर्फ 8 घंटे तक लोगों से हाथ ही मिला रहा है।

बाप नहीं मिल पाए बेटे से एक भी दिन… इसीलिए तकिए से दबा कर मार डाला: कोर्ट ने कहा था जिंदा मिलने को, पिता को मिली 4 साल के मासूम की लाश

गोवा में 4 वर्षीय बेटे की उसकी माँ के द्वारा हत्या में और भी खुलासे हुए हैं। सामने आया है कि टेक स्टार्टअप फाउंडर सूचना सेठ ने अपने 4 वर्षीय बेटे को इसलिए मार दिया क्योंकि वह यह नहीं चाहती थी कि उसका पिता उससे मिल पाए।

जानकारी के अनुसार, हत्यारोपी सूचना सेठ कोलकाता की मूल निवासी हैं, जो वर्ष 2008 में कोलकाता से बेंगलुरु आई थीं। यहाँ उनकी मुलाक़ात वेंकट रमण से हुई। वेंकट केरल के रहने वाले हैं। सूचना और वेंकट ने 2010 में विवाह करने का निर्णय लिया था। वर्ष 2019 में उनके बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम चिन्मय था।

पुलिस ने बताया है कि बाद में दोनों के बीच तल्खियाँ बढ़ गई थीं। इस कारण से सूचना और वेंकट रमण के बीच तलाक की प्रक्रिया 2022 में चालू हुई थी। अभी तलाक को अंतिम रूप दिया जाना बाकी था। हालाँकि, कोर्ट ने बच्चे को माँ के साथ रखे जाने का निर्णय दिया था। साथ ही यह भी निर्देश था कि उसका पिता उससे रविवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक मिल सकता है।

सूचना सेठ नहीं चाहती थीं कि वेंकट उनके बच्चे चिन्मय से एक भी दिन मिल पाएँ। वह कोर्ट के इस निर्णय से गुस्से में थीं। इसीलिए उसने बच्चे को गोवा ले जाकर मार दिया। बच्चे के शव का भी पोस्टमॉर्टम हो गया है और मौत के कारण भी सामने आ गए हैं।

बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने बताया है कि उसकी हत्या तकिए या ऐसी ही किसी चीज से दबा कर की गई है। उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। यह भी सामने आया है कि बच्चे के शव के पोस्टमॉर्टम से 36 घंटे पहले उसकी मौत हो चुकी थी।

बच्चे की हत्या के समय उसका पिता वेंकट रमण इंडोनेशिया में था। उसे भी हत्या की जानकारी देकर भारत बुलाया गया। गोवा में बच्चे का पोस्टमॉर्टम होने के बाद शव को उसके पिता को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर बेंगलुरु लौट गया। वहीं हत्या की आरोपित सूचना को 6 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है।

सूचना पुलिस की शुरूआती जाँच में कुछ भी बोलने से इंकार कर रही हैं और लगातार वकील दिए जाने की माँग कर रही हैं। यह भी सामने आया है कि होटल के कमरे में जिन खून के धब्बों के कारण वह पकड़ी गईं, वह चोट उसकी ही थी। उसने बच्चे को मारने के बाद अपने हाथ पर चोट लगाई थी।

गोवा में हत्या की, बेंगलुरु निकल गई सूचना

39 वर्षीय सूचना सेठ एक टेक स्टार्टअप फाउंडर और माइंडफुल नाम की कम्पनी की CEO हैं। वो 6 जनवरी, 2024 को शाम को अपने 4 वर्ष के बेटे के साथ गोवा के एक होटल पहुँची थीं। उसने 7 जनवरी, 2024 को जल्दी-जल्दी में अपना होटल छोड़ दिया। जब वह वापस निकली तो उसके साथ उसका बेटा नहीं था।

उसने 7 जनवरी, 2024 को सुबह होटल जल्दी खाली करने की अर्जी की थी और साथ ही होटल में रिसेप्शनिस्ट से कहा कि उसे बेंगलुरु के लिए एक निजी टैक्सी चाहिए। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि सूचना को फ्लाइट लेना चाहिए लेकिन वह टैक्सी लेने पर अड़ी रही। इसके बाद जब उसे टैक्सी मिली तो वह वहाँ से एक बैग के साथ निकल गई, इस दौरान उसका बेटा नहीं दिखा। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

सूचना के कमरा छोड़ने के बाद जब वहाँ होटल के कर्मचारी साफ़ सफाई के लिए पहुँचे तो वहाँ उन्होंने खून बिखरा देखा। उसने होटल के प्रबन्धन को सूचित किया, जिन्होंने पुलिस बुलाई। इसके बाद उन्होंने पुलिस को बताया कि उसका बेटा साथ में वापस जाते नहीं दिखा।

पुलिस ने जब सूचना को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसका बेटा गोवा के फट्रोडा में है, जहाँ उसके दोस्त हैं। उसने पुलिस को फर्जी पता भी दिया। पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो उसे शक हुआ। पुलिस ने सूचना को लेकर जा रही टैक्सी के ड्राईवर को फ़ोन किया और उसे नजदीकी पुलिस थाने जाने को कहा। ड्राईवर उस समय कर्नाटक के चित्रदुर्ग में था, जहाँ वह पुलिस थाने पहुँचा। यहाँ महिला की जाँच करने पर उसके बैग में उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश मिली।

इसके बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उससे आगे की पूछताछ की। गोवा पुलिस कर्नाटक से उसे गिरफ्तार कर लाई। हत्या करने वाली महिला सूचना सेठ के बारे में भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। हत्या करने वाली सुचाना सेठ की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखा है कि वह माइंडफुल AI लैब की CEO, AI और डाटा साइंस एक्सपर्ट है, जिसे इस मामले में 12 वर्षों का अनुभव है। यह भी लिखा है कि AI एक्सपर्ट 100 महिलाओं की लिस्ट में शामिल रही है।