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‘मुस्लिमों की लाश पर बन रहा है राम मंदिर, 22 जनवरी ब्लूस्टार’: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पन्नू ने उगला जहर, खालिस्तान के बाद अब ‘उर्दूस्तान’ की माँग

भारत में वांछित सिख फॉर जस्टिस के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने अयोध्या में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर को लेकर धमकी दी है। इसके साथ ही उसने मुस्लिमों को भी भड़काने की कोशिश की है। भारतीय मुस्लिमों से राम मंदिर उद्घाटन समारोह का विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि बाबरी ढाँचे की जगह मंदिर बनना मुस्लिमों के लिए ब्लूस्टार ऑपरेशन की तरह है। उन्होंने एक वीडियो जारी है।

अपने वीडियो में खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले भड़काने की कोशिश की है। उसने कहा, “हर मुस्लिम को राम मंदिर का विरोध करना चाहिए। 22 जनवरी मुसलमानों के खिलाफ मोदी का ऑपरेशन ब्लूस्टार है। अमृतसर से अयोध्या तक हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन बंद कर दो।”

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने आगे कहा, “राम मंदिर बाबरी मस्जिद पर बनाया जा रहा है। यह मुस्लिमों को शवों पर बनाया जा रहा है। यह 2 करोड़ मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन है। अब समय आ गया है मुसलमानों, तुम भारत से एक अलग देश उर्दूस्तान बनाओ।” बता दें कि पन्नू इससे पहले भी इसी तरह के वीडियो जारी कर कई बार धमकी दे चुका है।

दरअसल, अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी आतंकवादियों से खाली कराने के लिए इंदिरा गाँधी ने एक ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया था। इस आदेश को ऑपरेशन ब्लूस्टार कहा जाता था। इस ऑपरेशन को 1-8 जून 1984 को चलाया था, जिसमें भारतीय सेना ने खालिस्तानी आतंकी जनरैल सिंह भिंडारवाले को मार गिराया था। पन्नू इस भिंडारवाला को अपना आदर्श बताता है।

बताते चलें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू के पास अमेरिका और कनाडा की दोहरी नागरिकता है। वह खालिस्तान को लेकर भारत के खिलाफ जहर उगलते रहता है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर आऱोप लगाया था कि वह उसके नागरिक पन्नू की हत्या करने की कोशिश कर रहा है। इसको लेकर दोनों देश बीच रिश्ते में खटास भी आ गई थी।

गुरपतवंत सिंह पन्नू को साल 2020 में भारत ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत नामित आतंकवादी घोषित किया था। पन्नू ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में गोली मारकर हुई हत्या पर कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भारतीय वाणिज्य दूतावासों और मिशनों को भी धमकी दी थी।

पिछले साल, उसने कनाडा की राजधानी ओटावा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और टोरंटो में महावाणिज्यदूत अपूर्व श्रीवास्तव की तस्वीरों वाले पोस्टर में प्रसारित की थी। इस पोस्टर में इन भारतीय अधिकारियों को खालिस्तानी निज्जर की हत्या में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। इसको लेकर भारत और कनाडा के संबंध भी खराब हो गए थे।

देश-विदेश में 136 शाखाएँ, करोड़ों की जमा पूँजी, खाता खुलवाने के लिए 10000 लोग लाइन में: साधारण नहीं है अयोध्या का ‘सीताराम बैंक’

सनातन की अति प्राचीन नगरियों में से एक अयोध्या नगरी में ऐसा बैंक है, जिसकी शाखाएँ देश ही नहीं, विदेशों में भी है। खास बात ये है कि यहाँ करोड़ों की जमा-पूँजी भी लोग जमा करते हैं। ये अलग बात है कि इस अनोखे बैंक में ‘धन’ राम नाम का होता है, ‘मुद्रा’ का नहीं। जी हाँ, अयोध्या में स्थित अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक में करोड़ों ‘राम नाम’ का खजाना मौजूद है।

‘राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने सन 1970 में इस अनोखे बैंक की शुरुआत की थी। तब से अयोध्या में ‘मणि राम दास छावनी’ में इस बैंक का संचालन होता है। इस बैंक में लोग ‘सीताराम’ का नाम लिखकर जमा करते हैं। आज इस बैंक की देश-विदेश में 136 शाखाएँ हैं। अयोध्या के वाल्मीकि रामायण भवन में इस बैंक का हेड ऑफिस है।

अंतर्राष्ट्रीय सीताराम नाम बैंक के मैनेजर गोपाल दास जी महाराज ने बताया कि यहाँ 28 हजार से अधिक खातेदार हैं। जिन्होंने ‘सीता राम’ नाम की करोड़ों मुद्राएँ जमा कर रखी हैं। यहाँ आप भी खाता खुलवाना चाहते हैं, तो पहले ढाई लाख ‘सीता राम’ नाम लिखकर जमा करें, और फिर अपनी सदस्यता का इंतजार करना होगा। अभी 10 हजार से अधिक लोग इस बैंक में खाता खुलवाने के लिए लाइन में हैं।

इस बैंक से बाकायदा पासबुक भी जारी किया जाता है। गोपाल दास जी महाराज कहते हैं कि इस बैंक में लोग दुनिया के कोने-कोने से आते हैं। उन करोड़ों मुद्राओं को ससम्मान सरयू जी में हमेशा के लिए जमा भी कर दिया जाता है। इस बैंक में लोग अपनी इच्छा से कुछ दान भी करते हैं, तो राम नाम लिखने के लिए खास कॉपियाँ छपवा ली जाती हैं। वो बताते हैं कि पहले 5 लाख सीताराम नाम लिखने पर खाता खुलता था, लेकिन अभी ढाई लाख सीता राम से शुरुआत कर सकते हैं। कुछ खास संख्याओं तक पहुँचने पर मंदिर की तरफ से रसीद और प्रमाण पत्र भी दिए जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक (फोटो साभार : GNTTV)

खास बात ये है कि अंतर्राष्ट्रीय श्री सीता राम नाम बैंक का मुख्यालय भले ही अयोध्या में है, लेकिन इसकी 136 शाखाएँ भारत के विभिन्न हिस्सों में और दुनिया भर में हैं। बैंक की शाखाएँ अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी कई भाषाओं में सेवाएँ प्रदान करती हैं। बैंक का मानना है कि राम नाम का जप करने से लोगों को शांति, सुख और मोक्ष मिलता है।

टूरिस्ट नहीं, टेररिस्ट के लिए भी ‘जन्नत’ है मालदीव, ISIS में सबसे अधिक भर्ती यहीं से: खुले में त्योहार नहीं मना सकते गैर-मुस्लिम, शरिया लागू

भारतीय उपमहाद्वीप में हिंद महासागर में एक बेहद खूबसूरत द्वीपसमूह देश है, जिसका नाम है मालदीव (Maldives)। करीब 1200 द्वीपों में फैले सुन्नी मुस्लिम बहुल देश मालदीव एशियाई महाद्वीप की मुख्य भूमि से लगभग 750 किलोमीटर की दूरी पर श्रीलंका और भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। हालाँकि, मालदीव जितना खूबसूरती के लिए विख्यात है, उतना ही आतंकवाद के लिए कुख्यात भी है।

एक तरफ प्रकृति की छँटा को निहारने को उत्सुक सैलानी मलादीव में समुद्र के किनारे सुनहरे रेतों पर चलने के लिए मचलते हैं, तो दूसरी तरफ यह आतंकियों के लिए कुछ समय से जन्नत साबित हो रहा है। मालदीव में दुनिया के सबसे बर्बर इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट या आईएसआईस (ISIS या IS) और अल कायदा (Al Qaeda) अपनी जड़े जमा चुके हैं। शरिया संचालित इस मुल्क में कई आतंकी दुनिया की रडार पर हैं।

मालदीव में गैर-मुस्लिमों को आजादी नहीं

एक ऐसा भी समय था, जब यहाँ का शासन बौद्ध क्षत्रियों के हाथों में था। इसकी बानगी यहाँ के द्वीपों पर मिलने वाले बौद्ध स्तूप इसकी कहानी कहते हैं। हालाँकि, कालांतर में इस यहाँ मुस्लिमों की संख्या बढ़ती गई और आज 98 प्रतिशत से अधिक आबादी कट्टर सुन्नी मुस्लिमों की है। अब इस मुस्लिम बहुल देश में ज्यादातर बौद्ध स्तूप या तो तोड़ दिए गए हैं और फिर जर्जर हालात में हैं, जो कभी भी नष्ट हो सकते हैं।

मुस्लिम बहुल आबादी होने के साथ ही इस मुल्क में कट्टरपंथी सुन्नी की व्याख्या अपने हिसाब से करने वाले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और अल कायदा अपना दबदबा बनाने लगे। मालदीव के बारे में अमेरिका तक कह चुका कि ये हद से ज्यादा चरमपंथी देश है। यहाँ सरकार की नीति भी इस्लामी और शरिया समर्थक है। इस देश में रहने वाली 2 प्रतिशत अन्य धर्मों की आबादी भी अपनी इच्छा के अनुसार जी सकती।

मालदीव में रहने वाले 2 प्रतिशत अन्य धर्म के लोगों को अपने धार्मिक प्रतीकों को मानने या सार्वजनिक तौर पर अपने त्योहार मनाने की छूट नहीं है। अगर किसी को मालदीव की नागरिकता चाहिए तो उसे मुस्लिम, वो भी सुन्नी मुस्लिम होना पड़ता है। मालदीव में धार्मिक मामलों को सरकार की इस्लामी मामलों का मंत्रालय (MIA) नियंत्रित करती है। यही कारण है कि आतंकी संगठनों को यहाँ पनपने का मौका मिला।

पिछले साल जुलाई में अमेरिका के गृह मंत्रालय ने मालदीव के कुछ कट्टरपंथियों एवं संगठनों को आतंकियों की सूची में डाला था। आईएसआईएस के 18 समर्थक और अल-कायदा के 2 समर्थकों सहित इन आतंकी संगठनों से संबद्ध 29 कंपनियों को इस लिस्ट में डाला था। ये लोग और संगठन आईएसआईएस-खुरासान के स्थानीय भर्तीकर्ता मोहम्मद अमीन से जुड़े थे।

मालदीव में ISIS और अल कायदा

इतना ही नहीं, यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेजरी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि साल 2014 से लेकर 2018 के शुरुआत तक मालदीव के 250 से ज्यादा लोग ISIS में भर्ती के लिए सीरिया चले गए। ये जनसंख्या के अनुपात में दुनिया में सबसे ज्यादा है। इनमें से काफी आतंकी मारे गए, जबकि मालदीव की ज्यादातर महिलाएँ सीरिया के कैंपों में हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मालदीव का अड्डू शहर इस्लामी चरमपंथियों का गढ़ है। ये शहर साल 2018 के बाद एक्टिव हुआ और ISIS की विचारधारा को फैलाते हुए यहाँ पर लोगों की भर्तियाँ कर रहा है। यहाँ के कई स्थानीय गुट ISIS-K के लिए काम करते हैं। इसके लीडर इस्लामिक स्टेट तक IED और लड़ाके पहुँचाने का काम करते हैं। ये युवाओं के दिमाग में जिहाद का जहर भरकर उन्हें ISIS और अल कायदा से जोड़ते हैं।

साल 2014 के बाद भले ही मालदीव के कट्टरपंथियों का झुकाव ISIS और अल कायदा की ओर बढ़ा हो, लेकिन उससे पहले पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन वहाँ अपनी पैठ बना चुके थे। साल 2004 में मालदीव में आए सुनामी के बाद पाकिस्तान स्थित जमात-उद-दावा (जेयूडी) का एक धर्मार्थ मोर्चा इदारा खिदमत-ए-खल्क (आईकेके) मानवीय सेवा प्रदान करने की आड़ में मालदीव पहुँचा।

ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार, IKK ने मालदीव में लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों का नेतृत्व किया, जिसका ध्यान युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने पर था। आईकेके ने मालदीव में 282,000 डॉलर खर्च करने की बात कही। हालाँकि, मालदीव सरकार का कहना है कि संगठन को कभी भी सुनामी के बाद राहत प्रदान करने वाले धर्मार्थ समूह के रूप में पंजीकृत नहीं किया गया था।

सीरिया और इराक में ISIS में लड़ाके के रूप में जाने से पहले मालदीव के कट्टरपंथी अफगानिस्तान की सरकार को गिराने के लिए तालिबान की भर्ती यहाँ से करते थे। मालदीव के कई नागरिक ना सिर्फ पाकिस्तान में, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में शामिल रहे हैं। सेंटर फॉर ज्वॉइंट वारफेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 5.5 लाख की आबादी वाले इस देश में इस समय लगभग 1400 आतंकी सक्रिय हैं।

मौमून गयूम ने किया मालदीव का इस्लामीकरण

इस देश का इस्लामीकरण मौमून गयूम ने किया। गयूम ने मालदीव में इस्लामीकरण को बढ़ावा दिया, जिसके कारण लोगों में कट्टरपंथ भरता गया। गयूम मालदीव का तानाशाह था, जिसने सन 1978 से लेकर 2008 तक देश पर शासन किया। उसके शासन में धार्मिक एकता संरक्षण अधिनियम 1994 लाया गया, जिसमें मालदीव के लोगों पर सुन्नी इस्लाम को थोपा गया और धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित कर दिया।

इतना ही नहीं, मालदीव में मौमून गयूम ने साल 1997 में वहाँ के संविधान में एक संशोधन किया। इस संशोधन के तहत मालदीव में इस्लाम को एकमात्र राजकीय धर्म घोषित किया गया और बाकी अन्य धर्मों के मानने को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया। आगे चलकर गयूम के सौतेले भाई अब्दुल्ला यामीन ने मालदीव की सत्ता पर कब्जा किया और उसने सऊदी अरब के कट्टर वहाबियों से अपने संबंधों को मजबूत किया।

अब्दुल्ला यामीन की पार्टी के वर्तमान राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हैं। वह भी भारत विरोधी रूख के लिए जाने जाते हैं। इसके विपरीत लोकतांत्रिक तरीके से इसके पहले वाली सरकार में चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद थोड़े नरम स्वभाव के माने जाते हैं और भारत को एक दोस्त की भूमिका में देखते हैं। इन्होंने अपने शासन काल में आतंकियों की नकेल कसने की पूरी कोशिश की थी।

रील बना कर नाचती थी रानी, पति ने मना किया तो मार डाला: मजदूरी कर पालता था परिवार, अब फाँसी पर लटका मिला शव

बिहार के बेगूसराय में एक महिला ने अपने पति की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि वह उसे इंस्टाग्राम पर रील्स बनाने से रोकता था। पति को अपने मायके बुला कर महिला ने अपने परिजनों के साथ मिल कर हत्या कर दी। मृतक समस्तीपुर जिले का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार, बेगूसराय के फफौत गाँव में रहने वाली रानी कुमारी ने अपने पति महेश्वर कुमार को फाँसी पर लटका कर मार दिया। हालाँकि, महिला परिवार कह रहा है कि महेश्वर ने ख़ुदकुशी की है।

जानकारी के अनुसार, उसका पति कोलकाता में काम करता था और उसके रील बनाने से परेशान रहता था। वह दो-तीन दिनों में वापस कोलकाता जाने वाला था। वह कोलकाता में मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता था। महेश्वर का 6 साल पहले रानी कुमारी से विवाह हुआ था। वह पहले सही से व्यवहार करती थी लेकिन बाद में उसे टिकटॉक तथा रील्स बनाने की आदत लग गई।

जब महेश्वर ने उसे मना किया तो वह झगड़ा करने लगी। बताया गया है कि महेश्वर 7 जनवरी, 2024 की शाम को ही अपनी ससुराल गया था। इसके बाद वहाँ उसका अपनी पत्नी से रील्स बनाने को लेकर विवाद हुआ, महेश्वर के घर वालों ने आरोप लगाया है कि इसी कारण से उसकी पत्नी के घर वालों ने उसकी फाँसी पर लटका कर हत्या कर दी।

इस बात की सूचना जब उसके कोलकाता में रहने वाले भाई को मिली तो उसने अपने पिता को यहाँ भेजा जहाँ पहुँचने पर महेश्वर लटका मिला। मामला पुलिस को सूचित किए जाने के बाद उसने शव कब्जे में ले लिया है और इसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने युवक की साली और पत्नी को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है। अभी पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि वह पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ एक्शन लेगी।

3 साल में ₹60 लाख की मदद: इस योजना के जरिए रिसर्च के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ा रही मोदी सरकार, फेलोशिप से लेकर ग्रांट्स तक की है व्यवस्था

वैज्ञानिक रिसर्च की दुनिया में लैंगिक असमानता सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में चुनौती का विषय रहा है। लेकिन भारत सरकार अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के SERB (Science and Engineering Research Board) द्वारा संचालित POWER (Promoting Opportunities For Women in Exploratory Research) स्कीम इस परिस्थिति को बदलने की पुरजोर कोशिश कर रही है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को वैज्ञानिक रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए कई ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा साल 2020 से चलाई जा रही SERB-POWER योजना का उद्देश्य भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इन योजनाओं के तहत महिला वैज्ञानिकों को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए उन्हें इंटरनेशनल सेमिनारों और वर्कशॉप में हिस्सा लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

भारत सरकार के SERB POWER योजनाओं के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिसमें SERB POWER स्कीम के तहत SERB POWER Fellowship और SERB POWER Research Grants शामिल हैं। आइए, अब इनके बारे में विस्तार से जान लीजिए।

SERB-POWER फेलोशिप (SERB-POWER Fellowship) : यह फेलोशिप महिला वैज्ञानिकों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में मदद करती है। इसके तहत साइंस और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में Ph.D धारक महिला वैज्ञानिकों की पहचान कर उन्हें फेलोशिप प्रदान की जाएगी। इसमें महिला वैज्ञानिक का सक्रिय वैज्ञानिक, साथ ही अच्छा शोध रिकॉर्ड होना जरूरी है। ये फेलोशिप फुल टाइम है और इसके साथ किसी अन्य सरकारी फेलोशिप का लाभ नहीं लिया जा सकता।

इसके तहत नियमित आय से इतर 15 हजार रुपए प्रतिमाह का खर्च भी दिया जाएगा। यही नहीं, इस योजना के तहत महिला वैज्ञानिक को 10 लाख रुपए प्रति वर्ष की आर्थिक मदद उसके संस्थान के माध्यम से दी जाएगी। ये फेलोशिप तीन साल के लिए है। ये फेलोशिप सिर्फ उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो भारत में स्थित संस्थानों में रिसर्च वर्क करेंगे। इस ग्रांट से मिले पैसों का इस्तेमाल छोटे-मोटे शोध यंत्र से लेकर घरेलू यात्रा तक में किया जा सकता है।

SERB-POWER रिसर्च ग्रांट्स: इस स्कीम के तहत उभरती और पहले से शोध कार्य में लगीं महिला वैज्ञानिकों को मदद पहुँचाई जा रही है। ये ग्रांट साइंस और इंजीनियरिंग सेक्टर में काम कर रहे अलग-अलग व्यक्ति केंद्रित शोध के लिए दी जा रही है। इसके दो हिस्से हैं, जो संस्थानों के स्तर पर अलग-अलग किए गए हैं। लेवल-1 के तहत शीर्ष संस्थानों जैसे आईआईटी, आईआईएसईआर, एनआईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्र सरकार के संस्थानों के राष्ट्रीय स्तर के लैब्स में शोध कर रही महिला वैज्ञानिकों के लिए है, जिसमें 60 लाख रुपए यानी कि सालाना 20 लाख रुपए की मदद की जा रही है।

वहीं, लेवल-2 में अन्य संस्थानों में शोध कार्य कर रही महिला वैज्ञानिकों को ये सहायता प्रदान की जाएगी, जिसकी कुल राशि तीन वर्षों में 30 लाख और सालान 10 लाख की होगी। इन ग्रांट्स के लिए महिला वैज्ञानिक SERB-CORE RESEARCH GRANT के प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन अप्लाई कर सकती हैं, जिसमें उनका चयन प्रोग्राम एडवायजरी कमेटी (पीएसी) द्वारा किया जाएगा।

इन ग्रांट्स का असर और भविष्य की संभावनाएँ

SERB-POWER योजनाओं को महिला वैज्ञानिकों को एसएंडआर में नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से, महिला वैज्ञानिकों को अनुसंधान परियोजनाओं का नेतृत्व करने, अनुसंधान कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्किंग करने का अवसर मिलेगा। इससे महिला वैज्ञानिकों के लिए एसएंडआर में अपना करियर बनाने और नेतृत्व करने के अवसर बढ़ेंगे।

भारत सरकार की इन पहलों का फायदा सिर्फ धन से मदद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये अकादमिक और रिसर्च संस्थानों में महिलाओं के लिए जगह बनाने और उनकी भागीदारी बढ़ाने में भी मदद करेगा।

मालदीव विवाद में भारत के समर्थन में उतरा इजरायल, दिखाई लक्षद्वीप की खूबसूरती: बताया- यहाँ करेंगे प्रोजेक्ट की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सोशल मीडिया पर लक्षद्वीप की तस्वीरें देख मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार की मंत्रियों ने जो भारत पर अपमानजनक टिप्णियाँ कीं, उसके बाद भारत के साथ समर्थन दिखाने वालों की लिस्ट में इजरायल भी जुड़ गया है। उन्होंने लक्षद्वीप में टूरिज्म को बढ़ावा देने की पहल को सपोर्ट किया है।

भारत में स्थित इजरायली दूतावास ने लक्षद्वीप की कुछ तस्वीरें डाली हैं। इजरायली दूतावास ने लिखा है, “हम पिछले वर्ष केंद्र सरकार के कहने पर लक्षद्वीप में डीसैलिनेशन प्रोग्राम शुरू करने के लिए गए थे। इजरायल अब इस पर काम करने के लिए तैयार है। जिन्होंने अभी लक्षद्वीप के खूबसूरत नजारे नहीं देखे हैं, उनके लिए यहाँ कुछ तस्वीरें हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

क्या पड़ा मालदीव पर असर?

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

वहीं इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स ने मालदीव का बहिष्कार करने की माँग भारतीय एयरलाइन्स से की है। साथ ही इसने खुद से जुड़े ट्रेवल एजेंट से अपील की है कि वह मालदीव को घूमने वाले जाने वालों को लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार जाने की सलाह दें।

जब ‘क़त्ल की रात’ डर से काँप रहे थे इमरान, भारत में उनका गुणगान कर रहे थे ‘गिद्ध पत्रकार’: अभिनंदन पर नए खुलासे के बाद क्या कहेंगे राजदीप-बरखा?

आपको अभिनंदन वर्तमान याद हैं? वही अभिनंदन वर्तमान जो फ़िलहाल भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन के पद पर हैं। जिस समय के वाकये को लेकर वो चर्चा में आए थे, तब वो विंग कमांडर हुआ करते थे। 40 वर्षीय अभिनंदन वर्तमान 2004 से ही भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहे हैं। 14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था। लेथापोरा में सरपफके काफिले को निशाना बनाया गया। इस आत्मघाती बम विस्फोट में हमारे 40 जवान बलिदान हो गए थे।

पुलवामा हमला, एयर स्ट्राइक और अभिनंदन वर्तमान को बंधक बनाया

इसके बाद भारत में आक्रोश का माहौल था। सभी की ज़बान पर एक ही शब्द था – बदला। सरकार भी डॉ मनमोहन सिंह की नहीं, नरेंद्र मोदी की थी। मुंबई में 2008 में हुए 26/11 के हमलों के बाद भारत सरकार डोजियर पर डोजियर सौंपते रह गई थीं लेकिन पाकिस्तान अपनी चाल से बाज नहीं आया, न ही उसका कुछ बिगड़ा। तब UPA की सरकार थी, 2009 में NDA की सरकार 5 वर्ष पूरे करने का रही थी। मोदी सरकार ने एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।

रातोंरात भारतीय वायुसेना पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में घुसी और एयर स्ट्राइक के जरिए बड़ी संख्या में आतंकियों का संहार किया। उनके अड्डे तबाह किए गए और फिर हमारे विमान और सैनिक सुरक्षित वापस लौट भी आएँ। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से पलटवार का भी करारा जवाब दिया गया। इसी क्रम में Mig-21 उड़ा रहे अभिनंदन वर्तमान पाकिस्तानी विमानों का पीछा करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुस गए। उन्हें पैराशूट से लैंड करना पड़ा और उन्हें पाकिस्तानियों ने बंधक बना लिया।

इसके बाद पूरे भारत को इंतजार था अभिनंदन वर्तमान की वापसी का। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाद में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि अगर पाकिस्तान अभिनंदन वर्तमान को नहीं लौटता तो वो उसके लिए ‘क़त्ल की रात’ होती। अब एक नई किताब से खुलासा है कि 9 मिसाइलें पाकिस्तान की तरफ लक्ष्य किए तैनात थीं। उस समय वहाँ PTI की सरकार थी और इमरान खान मुल्क के प्रधानमंत्री थे। भारत का मीडिया गिरोह भी इमरान खान का फैन हुआ करता था।

PM मोदी से बात करना चाहते थे डरे हुए इमरान खान

तब इस्लामाबाद में भारत के राजदूत रहे अजय बिसारिया ने अपनी पुस्तक ‘Anger Management: The Troubled Diplomatic Relationship between India and Pakistan’ में बताया है कि कैसे उस रात इमरान खान ने उनका दरवाजा खटखटाया था क्योंकि वो स्थिति को शांत करने के लिए फोन कॉल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करना चाहते थे। पाकिस्तान के हाई कमिश्नर सोहैल महमूद ने भारत के हाई कमिश्नर अजय बिसारिया को फोन घुमाया था।

वो चाहते थे कि इमरान खान की पीएम मोदी से बात कराई जाए, हालाँकि, ये संभव नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात करने से इनकार कर दिया। आखिरकार पाकिस्तान को अभिनंदन वर्तमान को रिहा करना पड़ा, इसके लिए ‘शांति के लिए प्रयास’ के बहाने बनाए गए। भारत का मीडिया गिरोह भी इमरान खान का महिमामंडन करने लगा। असल में पश्चिमी देशों ने इमरान खान को चेताया था कि अगर अभिनंदन वर्तमान को रिहा नहीं किया गया तो परिणाम भयंकर हो सकते हैं।

अमेरिका और UK के राजनयिकों द्वारा निराश किए जाने के बाद इमरान खान को ये कदम उठाना पड़ा। हालाँकि, इस दौरान भारत का मीडिया गिरोह इमरान खान की जय-जयकार करता रहा। इस गिरोह का नेतित्व कर रहे थे भारत विरोधी प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाने के लिए मशहूर राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्त। आइए, पहले इन पत्रकारों के ट्वीट्स पर एक नज़र डालते हैं देखते हैं कि कैसे जब इमरान खान और उनकी सरकार डर से काँप रही थी, तब उन्हें भारत के मीडिया का एक धड़ा ‘शांति का दूत’ बता कर उनकी तारीफ करने में लगा था।

इमरान खान भारत के पत्रकारों का गिरोह

राजदीप सरदेसाई ने लिखा था, “भारत में हम भले ही इसे पसंद नहीं करें, लेकिन अगर सही दृष्टि से देखें तो फ़िलहाल इमरान खान नैतिक स्तर पर इस दिन जीत रहे हैं। आतंक का मामला रखने के लिए हमारा पक्ष मजबूत था, लेकिन हमारे नेता वोट गिनने में व्यस्त हैं।” देखिए, कैसे राजदीप सरदेसाई ने न सिर्फ भारत सरकार के नेताओं पर सवाल खड़ा कर दिए, बल्कि दुश्मन मुल्क के प्रधानमंत्री में ‘नैतिकता’ खोज ली। जब प्रधानमंत्री खुद अधिकारियों-नेताओं के साथ लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे, राजदीप सरदेसाई जैसे लोग ऐसे दिखा रहे थे जैसे वो सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।

इसी तरह बरखा दत्त ने लिखा था कि हमें इमरान खान के इस कदम का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि प्रोपगैंडा पत्रकार का ये भी मानना था कि स्थिति को ठीक करने के लिए इमरान खान ने दरवाजा खोल दिया है। बरखा दत्त को इससे भी दिक्कत थी कि टीवी एंकर्स क्यों पाकिस्तान के खिलाफ बोल रहे हैं। हरिंदर बवेजा ने इन चैनलों को ‘नॉर्थ कोरियन’ बता दिया था और इमरान खान के कदम को ‘पीस गेस्चर’ बताया था। लेखिका शोभा डे ने तो इमरान खान की तारीफ करते हुए पाकिस्तान के लोगों को धन्यवाद दे दिया था।

इसी तरह ज्योतिमणि, जो कि आगे चल कर कॉन्ग्रेस से लोकसभा सांसद भी बनीं, उन्होंने लिखा था कि अभिनंदन वर्तमान की बिना शर्त रिहाई की गई है। उन्होंने अपनी ही सरकार पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप मढ़ दिया। वहीं सुमंत रमण ने लिखा कि इमरान खान आगे निकल गए हैं और आतंकवाद पर भारत के पक्ष में चीजें होने के बावजूद वोट बैंक ने सब गुड़-गोबर कर दिया। रवि सुब्रमण्यन ने तो इमरान खान को पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा राजनेता करार दिया और कहा कि दबाव में ये उनकी सबसे बड़ी पारी है।

आपने देखा, कैसे पत्रकारों ने इमरान खान के ‘डर’ को उनकी ‘दयालुता’ बता कर पेश कर दिया। पुलवामा का आतंकी हमला पाकिस्तान के समर्थन से हुआ, अभिनंदन वर्तमान को बंधक पाकिस्तान ने बनाया, लेकिन भारत के ही ये पत्रकार पाकिस्तान का गुणगान कर रहे थे। मोदी सरकार ने आतंक के खिलाफ कड़ा रुख क्या अख्तियार किया, ‘अमन की आशा’ की फर्जी बातें कर के भारतीय सैनिकों को केवल बलिदान देते देखने की चाहत रखने वाले इस गिरोह को ये हजम भी नहीं हुआ कि भारतीय सेना पलटवार भी कर सकती है।

आज भी पाकिस्तानपरस्ती में व्यस्त है पत्रकार गिरोह

इमरान खान को आज उनके ही मुल्क में जेल में ठूँस दिया गया है। उनकी सरकार का पाकिस्तानी फौज ने ही तख्तापलट कर दिया। सरकार भी गई, जेल भी मिली। जिस नेता का अपने ही मुल्क में ये हाल है, उसे पत्रकारों के भारतीय गिरोह ने पूरे उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा नेता बता कर पेश कर दिया। आज जब खुलासा हुआ है कि इमरान खान उस समय पीएम मोदी से हाथ मिलाने के लिए बेताब थे ताकि इस तस्वीर से पाकिस्तान का किया-धरा शांत हो जाए।

इमरान खान पाकिस्तान की राजनीति में कितने प्रासंगिक है और कितने नहीं, ये तो वहाँ होने वाले आम चुनावों के बाद पता चलेगा। लेकिन, भारत का मीडिया गिरोह खुद को उसका वफादार बनाए रखेगा जो पाकिस्तान की सत्ता में हो। अभिनंदन वर्तमान को छुड़ाने का क्रेडिट कहीं मोदी सरकार के पास न चला जाए, इसीलिए इस गिरोह ने पूरा प्रयास किया ये दिखाने का कि पाकिस्तान ने भारत पर एहसान किया है। इनका एक ही मकसद होता है – वैश्विक मंच पर किसी तरह भारत की बदनामी हो।

अमेरिका के शहरों में गूँजेगा ‘जय श्रीराम’, न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर होगा प्राण प्रतिष्ठा का टेलिकास्ट: तैयारी शुरू, मंदिरों में भी इंतजाम पूरे

22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर दिखाया जाएगा। इसकी तैयारी चालू हो गई है। इसके अलावा अमेरिका के सभी शहरों में रामजन्मभूमि का यह कार्यक्रम टेलिकास्ट होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में व्यस्त इलाका है। यहाँ पर बड़ी-बड़ी स्क्रीन लगी हैं। यहाँ पर किसी चीज का प्रदर्शन पूरी दुनिया का ध्यान खींचता है। यहाँ पर टाइम्स स्क्वायर में ही 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम लाइव प्रदर्शित किया जाएगा। ना सिर्फ यहीं बल्कि पूरे अमेरिका के अलग अलग शहरों में भी यह प्रसारण होगा ताकि वहाँ भी लोग इस भव्य आयोजन को देख सकें।

अमेरिका में अब बड़ी हिन्दू आबादी रहती है। एक अनुमान के अनुसार, अमेरिका में लगभग 33 लाख हिन्दू रहते हैं जो कि अमेरिका की कुल जनसंख्या का 1% हैं। अमेरिका के मंदिरों में भी राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर इंतजाम किए जाने की सूचना है।

वहीं, राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भारत में आमजनों तक पहुँचाने के लिए भाजपा ने भी तैयारी कर ली है। भाजपा का कहना है कि यह कार्यक्रम वह बूथ स्तर पर दिखाएगी। उसके बूथ स्तर के कार्यकर्ता लोगों को प्राण प्रतिष्ठा अलग-अलग जगह पर बड़ी स्क्रीन पर दिखाएँगे।

इस कार्यक्रम को भाजपा के अलावा विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ता भी दिखाएँगे। विश्व हिन्दू परिषद ने यह भी तय किया है कि वह देश के पाँच लाख मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा के दिन लोगों को इकट्ठा करेगी। वह यहाँ पर साफ़ सफाई करके पूजा अर्चना करेंगे।

यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या से देश को संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री 22 जनवरी को यजमान की भूमिका निभाएँगे। इस दिन वह संतों और धर्मगुरुओं के आदेशों के अनुसार मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में भाग लेंगे।

मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद भाजपा के देश भर से भक्तों को अयोध्या लाने की योजना भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यहाँ 60 दिनों तक ट्रस्ट भंडारा भी चलाया जाएगा और साथ ही में बाहर से आने वाले भक्तों के रहने की व्यवस्था भी की जाएगी।

बिना चुनाव जीते ही BJP ने राजस्थान में बनाया मंत्री, फिर भी श्रीकरणपुर से हार गए सुरेंद्रपाल सिंह: कॉन्ग्रेस के कुन्नर जीते

भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में हाल में राजस्थान में बनी भाजपा की सरकार में मंत्री बनाए गए सुरेंद्रपाल सिंह टीटी विधानसभा चुनाव हार गए हैं। टीटी बिना चुनाव लड़े ही मंत्री बनाए गए थे। भाजपा ने उन्हें श्रीकरणपुर विधानसभा सीट से उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के रुपिंदर सिंह कुन्नर ने उन्हें 11,261 वोटों से हरा दिया है।

टीटी को भाजपा ने राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया था। चुनाव हारने के बाद अब उनके मंत्री पद पर संकट छा गया है। राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है, जब विधायक बनने से पहले कोई नेता मंत्री बना हो और अपना चुनाव हार गया हो। कुन्नर को 94,761 और टीटी को 83,500 वोट मिले है।

बताते चलें कि राजस्थान के कुल 200 सीटों पर कुछ महीने पहले चुनाव की घोषणा की गई थी। हालाँकि, चुनाव प्रचार के दौरान ही श्रीकरणपुर सीट के कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सरदार गुरमीतसिंह कुन्नर का निधन हो गया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने इस सीट का चुनाव कुछ समय के टाल दिया था। इसके बाद इस सीट पर 5 जनवरी 2024 को मतदान हुआ था।

इस सीट पर कॉन्ग्रेस ने अपने दिवंगत प्रत्याशी गुरमीत सिंह के बेटे रुपिंदर सिंह को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव जीतने के बाद रुपिंदर सिंह कुन्नर भावुक हो गए। उन्होंने अपने पिता गुरमीत सिंह की तस्वीर के आगे मत्था टेका तो आँसू आ गए। उन्होंने कहा कि ये चुनाव सरदार गुरमीत सिंह कुन्नर ही लड़ रहे थे। कुन्नर की जीत पर कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत ने उन्हें बधाई दी है।

वहीं, टीटी की हार पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि वे हार की समीक्षा करेंगे। दरअसल, टीटी को विधायक बनने से पहले राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाकर चार अहम विभाग- कृषि विपणन विभाग, कृषि सिंचित क्षेत्र विकास एवं जल उपयोगिता, इंदिरा नहर विभाग और अल्पसंख्यक मामले एवं वक्फ विभाग दिए गए थे। हालाँकि, अभी तक उन्होंने कार्यभार नहीं सँभाला है।

बताते चलें कि श्रीकरणपुर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में पड़ता है। इस जिले में विधानसभा की कुल 6 सीटें हैं। इनमें से 2 सीटें भाजपा के खाते में आई हैं, जबकि कॉन्ग्रेस के खाते में इस जिले की चार सीटें हो गई हैं। गुरमीत सिंह कुन्नर ने 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार पृथ्वीपाल सिंह और भाजपा के सुरेंद्रपाल सिंह को शिकस्त दी थी। उन्होंने 73,092 वोटों से जीत हासिल की थी। 

अब जबकि टीटी चुनाव हार गए हैं तो उनका मंत्री बने रहना मुश्किल है। हालाँकि, नियम ये कहता है कि कोई भी भारतीय नागरिक बिना विधायक बने छह महीने तक मंत्री बने रह सकता है। इस दौरान उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। राजस्थान में विधानसभा तो है, लेकिन विधान परिषद नहीं है। ऐसे में विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें छह महीने में अपना पद छोड़ना होगा।

‘अभिनन्दन को नहीं छोड़ा तो भारत दाग देगा मिसाइल’: बालाकोट एयरस्ट्राइक से खौफ में था पाकिस्तान, PM मोदी से बात करने को गिड़गिड़ाए थे इमरान खान

14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के बाद भारत में माहौल गर्म था। भारत ने इसके जवाब में 26 फरवरी 2019 की रात को एयरस्ट्राइक की। सुबह पाकिस्तान के जेट भारत की तरफ आए, भारत ने उन्हें मार भगाया और एक लड़ाकू विमान गिराया भी। इसी दौरान भारतीय पायलट अभिनन्दन वर्धमान पाकिस्तानी सीमा में चले गए। उनकी रिहाई को लेकर भारत ने पाकिस्तान को ऐसा झटका दिया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात के लिए गिड़गिड़ाते रहे।

यह सारे खुलासे बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान पाकिस्तान में भारत के हाई कमिश्नर रहे अजय बिसारिया ने अपनी आगामी किताब में किए हैं। अजय बिसारिया ने अपनी आगामी किताब ‘एंगर मैनेजमेंट: ट्रबल्ड डिप्लोमैटिक रिलेशनशिप बिटवीन इंडिया एंड पाकिस्तान’ किताब लिखी है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, अजय बिसारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि जब कश्मीर के आकाश में लड़ाकू विमानों की लड़ाई के बाद भारतीय फाइटर पायलट अभिनन्दन वर्धमान पाकिस्तान में गिर गए और उन्हें छुड़ाने को लेकर भारत सरकार दबाव बनाने लगी। इसके जवाब में इमरान खान भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फ़ोन पर बात करने की कोशिश करने लगे।

अजय बिसारिया ने बताया है कि 27 फरवरी 2019 की रात को तब भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर सोहेल महमूद का फ़ोन आया। उन्होंने बिसारिया से कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान प्रधानमंत्री मोदी से बात करना चाहते हैं। बिसारिया ने महमूद से कहा कि अगर उन्हें कुछ बात नई दिल्ली तक पहुँचानी है तो उन्हें बता दें वह इस रास्ते से पहुँचा देंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बाद में एक रैली में ‘क़त्ल की रात’ कहा था।

बिसारिया ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की सेना भी इस दौरान भारत के रुख से डरी हुई थी। पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश सचिव तहमीना जंजुआ को बताया था कि भारत ने उनकी तरफ 9 मिसाइलें तान रखी हैं और अगर अभिनन्दन वर्धमान को नहीं छोड़ा गया तो यह भारत कभी भी छोड़ देगा।

जब पाकिस्तानी विदेश सचिव को यह सूचना मिली तब वह अमेरिका और इंग्लैंड के राजदूतों के साथ बातचीत कर रही थीं। बिसारिया ने अन्य कई खुलासे भी अपनी किताब में किए हैं। बिसारिया ने बताया है कि जून 2019 में इमरान खान किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी से हाथ मिलाना चाहते थे।

इसके अलावा बिसारिया ने बताया है कि भारत के 2019 के रुख के कारण पाकिस्तान सकते में आ गया था। बिसारिया ने बताया है कि पाकिस्तान की सेना इस रुख के चलते आतंकियों पर कार्रवाई करने जा रही थी। इमरान खान ने भारत से रिश्ते खत्म किए जबकि सेना भारत से अच्छे रिश्ते रखना चाहती थी।

इसके अलावा बिसारिया ने एक मामले का जिक्र किया है जिसमें पाकिस्तान के किसी व्यक्ति ने उन्हें एक हमले के बारे में बताया था। उन्हें ISI के एक करीबी ने बताया था पाकिस्तान आतंकी जाकिर मूसा की मौत का बदला लेने के लिए बड़ी साजिश रच रहा है।