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‘मुस्लिम मरे तो लिंचिंग, हिंदू मरे तो मौन…’: बिट्टू बजरंगी के भाई की मौत के बाद जुटे सैकड़ों लोगों ने लगाए नारे, दुकानें बंद और हाईवे जाम

आग में झुलसे गौ-रक्षक बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश फैल गया है। दिल्ली के AIIMS से फरीदाबाद शव पहुँचने के बाद बिट्टू के घर पर लोगों का जमावड़ा लगने लगा है। आसपास की दुकानें भी बंद हो गई हैं। इसको देखते हुए हरियाणा पुलिस सतर्क हो गई है। बताते चलें कि बीते साल 13 दिसंबर को फरीदाबाद में कुछ कार सवार बदमाशों ने महेश पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इसके बाद वे 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे।

महेश की मौत की खबर लगते ही फरीदाबाद और आसपास के लोग उनके घर पहुँचने लगे। लोगों के आक्रोश और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को देखते हुए पुलिस सतर्क हो गई और इलाके में गश्त को बढ़ा दिया। इतना ही नहीं, सारन थाना सहित कई थानों की पुलिस को मौके पर भेजा गया है। इसके साथ ही पुलिस ने चाचा चौक के आसपास की दुकानों को बंद करवा दिया है, ताकि कोई अप्रिय घटना ना हो।

आक्रोशित लोगों ने बल्लभगढ़ और सोहना रोड को भी जाम कर दिया और आरोपितों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की। इस दौरान लोगों ने ‘जय श्रीराम’, ‘महेश के हत्यारों को फाँसी दो’, ‘महेश हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं’ के नारे भी लगाए। इस दौरान भीड़ ने ‘मुस्लिम मरे तो लिंचिंग हिंदू मरे तो मौन है, पूछ सको तो पूछ लो ये प्रशासन कौन है’ के नारे लगाए।

वहीं, किसी भी तरह की अप्रिय घटना ना हो, इसको लेकर ACP बिट्टू बजरंगी से मिले। वहीं, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि आरोपितों को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। प्रशासन से मुलाकात के बाद बिट्टू बजरंगी ने भी लोेगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

बताते चलें कि 13 दिसम्बर 2023 को बिट्टू बजरंगी के भाई महेश को जान से मारने का प्रयास किया गया था। हमलावरों ने महेश के ऊपर फरीदाबाद की दाबुआ कॉलोनी में थिनर डाल कर आग लगा दी थी। महेश को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया गया था। महेश का शरीर इस हमले में 60% जल चुका है।

इस हमले के विषय में फरीदाबाद पुलिस के पास मामला दर्ज करवाया गया था, जिसकी जाँच हरियाणा पुलिस की SIT कर रही है। इसी मामले में 22 दिसम्बर 2024 को ‘हिन्दुतान टाइम्स’ में लीना धनखड़ नाम की एक पत्रकार ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

HT में प्रकाशित इस खबर में लिखा था कि फरीदाबाद पुलिस ने कहा है कि बिट्टू बजरंगी के भाई अलाव में गिर जाने के कारण जल गए थे और उनकी हत्या के प्रयास के कोई सबूत नहीं हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल के जलने के मामले में पुलिस में फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई और एक गौतस्कर को इसमें फँसाया गया।

हालाँकि, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की इस खबर को नकार दिया था। फरीदाबाद के ACP ने इस खबर के बारे में बताए जाने पर पूछा कि आखिर पुलिस में किसने इस केस को फेक बता दिया? उन्होंने कहा कि ये बात ठीक है कि अभी इस मामले में आरोपित के खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि केस फर्जी होने की बात कही गई है। उन्होंने इसकी पुष्टि की थी कि बिट्टू बजरंगी के भाई जल गए हैं।

इसके बाद बिट्टू बजरंगी अपने भाई की हत्या के प्रयास को झूठा बताकर फेक न्यूज फैलाने के आऱोप में ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। बिट्टू बजरंगी ने कहा था कि जुबैर ने उनके और उनके भाई के बारे में पहले भी अफवाहें फैलाई हैं। इस बार उनके झूठी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस घिनौनी कार्रवाई को अंजाम दिया, जबकि उनका भाई जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

दिल्ली में फ्लाईओवर पर थी मजार, ढाह दी गई? सोशल मीडिया पर लोग शेयर कर रहे पहले और अब की तस्वीर

सोशल मीडिया पर 9 जनवरी 2024 की सुबह से एक वीडियो वायरल हो रहा है। ये वीडियो आजादपुर फ्लाईओवर का है। इसमें दावा किया जा रहा है कि आज़ादपुर फ्लाईओवर पर बनी अवैध मजार को हटा दिया गया है। इस मजार के खिलाफ लोग दो साल से शिकायत कर रहे थे।

एक्स यूजर अजय चौहान ने इस संबंध में एक वीडियो शेयर की है। वो इसमें दिखा रहे हैं कि जो मजार पहले आजादपुर फ्लाईओवर पर हुआ करती थी वो अब वहाँ नहीं हैं। उसे हटा दिया गया है।

सागर मलिक ने भी ऐसी वीडियो को शेयर करके लिखा है, “काफी लम्बे संघर्ष के बाद साफ हुई आज़ादपुर फ्लाईओवर पर स्थित अवैध मज़ार। धन्यवाद।”

पत्रकार सागर कुमार ने इस संबंध में लिखा, “जब से माँ झंडेवाला देवी मंदिर का ट्रैफिक का बता कर गेट तोड़ा गया। उसके बाद से हमने सवाल उठाया सड़कों और फ्लाईओवर को घेर का मज़ार जो बनी है उसका क्या..? आज आदर्श नगर फ़्लाईओवर पर बनी मज़ार को हटा दिया गया। सीजनल हिंदुओं को ध्यान से देखना चाहिए। उनको लगता है वो आवाज़ नहीं उठाएँगे तो कोई नहीं उठाएगा।”

गौरतलब है कि साल 2021 में, ऑपइंडिया ने दिल्ली के आज़ादपुर फ्लाईओवर पर बनी इस अवैध मजार के बारे में बड़े पैमाने पर रिपोर्ट की थी, जिससे बड़े ट्रैफिक जाम लग रहे थे और यात्रियों के लिए असुविधाएँ हो रही थीं।

2021 में उठा था विवाद

साल 2021 में ये मामला तब उठा था जब ‘O न्यूज’ ने एक वीडियो डाली थी, जिसमें एक हिंदू युवक मजार के प्रबंधक सिकंदर से सवाल कर रहा था। इसी वीडियो में देखा गया था कि पुलिसकर्मियों ने बीच में आकर उस युवक को धमकाना शुरू कर दिया था और सड़क किनारे उसे ऐसे मुद्दे उठाने को मना कर रहे थे। जब इस पर हिंदू युवक ने अपने अधिकार की बात की थी उसे पकड़कर वैन में डाल दिया गया था।

मजार का प्रबंधन देखने वाले सिकंदर ने दावा किया था कि यह मजार 1950 से पहले बनाई गई थी और उनके दादा और पिता भी मजार का मैनेजमेंट देखते थे। सिकंदर ने यह भी कहा था फ्लाईओवर के नीचे पीर बाबा की कब्र के साथ एक मजार है, और जो फ्लाईओवर के ऊपर है उसे बाद में 1982-83 के आसपास बनाया गया था।

जबकि, हकीकत यह है कि जिस फ्लाईओवर पर यह मजार थी वो खोला ही 2009 में गया था। इतना ही नहीं, फ्लाईओवर का निर्माण भी 1982 में शुरू नहीं हुआ था जैसा कि दावा किया गया। इस फ्लाईओवर का निर्माण दिल्ली में 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान यातायात की आवाजाही को आसान बनाने के लिए किया गया था।

ED की चार्जशीट में लालू यादव ‘सपरिवार’ मौजूद, बेटी हेमा की भी एंट्री: 4800 पन्नों में ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले का कच्चा चिट्ठा, UPA काल में रेलवे बना था भ्रष्टाचार का अड्डा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘नौकरी के बदले जमीन‘ घोटाले में नई चार्जशीट दाखिल की है। लगभग 4800 पन्नो की इस चार्जशीट में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और हेमा यादव का नाम शामिल है। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं। चार्जशीट में अमित कात्याल का नाम शामिल है जो एजेंसी के गिरफ्त में है। हेमा यादव विवाहित हैं। उनके पत्नी विनीत यादव रेवाड़ी में रहते हैं। वह भी एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

इस घोटाले की सीबीआई जाँच कर रही है लेकिन इसमें जुड़े पैसे के लेनदेन में गडबडी गड़बड़ी की जाँच ED को मिली है। ED ने मार्च 2023 में इस मामले में छापेमारी भी की थी। ED की जाँच में सामने आया है कि नौकरी के बदले लिए गए पैसे से कई जमीनें औने पौने दामों पर खरीदीं गईं। इनमें से कुछ जमीनें पटना और एक मकान दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में भी खरीदा गया। दिल्ली के इस बंगले की कीमत ₹150 करोड़ है, सामने आया था कि यह मकान एक ऐसी कम्पनी के नाम पर था जिसे तेजस्वी यादव ने मात्र ₹4 लाख में खरीदा था।

ED का यह भी कहना है कि लालू यादव के परिवार ने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी के गरीब आवेदकों से सिर्फ 7.5 लाख रुपए में चार पार्सल जमीन ली थी। इसे राबड़ी देवी द्वारा 3.5 करोड़ रुपए के भारी लाभ के साथ आरजेडी के पूर्व विधायक सैयद अबू दोजाना को बेचा गया था।

क्या था ‘लैंड फॉर जॉब्स स्कैम?

बात कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए-1 के शासनकाल सन 2004-2009 के बीच की है। बिहार में 15 साल तक लगातार सत्ता के सिरमौर रहे लालू प्रसाद यादव उस समय केंद्रीय रेल मंत्री थे। सन 2008 में रेलवे में नौकरी देने के बदले अभ्यर्थियों से रिश्वत के रूप में जमीन ली गई। ये जमीन पटना सहित अन्य जगहों पर ली गई।

अभ्यर्थियों को रेलवे के ग्रुप-डी में नौकरी देने के लिए रेलवे की तरह से कोई नोटिफिकेशन नहीं निकाला गया। जिन लोगों ने जमीनें दीं, उन्हें तीन दिन के अंदर रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नौकरी दे दी गई। जिन लोगों को नौकरी दी गई, उनमें से कुछ लोगों ने फर्जी प्रमाण-पत्र का भी उपयोग किया।

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया कि लालू यादव को पटना को 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन दी गई। इन जमीनों का सौदा नकद में और बेहद कम कीमत पर किया गया। लालू यादव और उनके परिजनों को 7 उम्मीदवारों ने नौकरी के बदले में जमीनें दी थीं। इनमें से 5 जमीनों की बिक्री हुई थी, जबकि दो गिफ्ट के तौर पर दिए गए थे।

केवल प्रधानमंत्री को ही नहीं मिला है राम मंदिर का न्योता, आपके घर तक भी पहुँचेगा निमंत्रण का ‘अक्षत’: 5 लाख गाँव में लाइव देख सकेंगे प्राण-प्रतिष्ठा

देश भर में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए ‘अक्षत निमंत्रण महा अभियान’ चल रहा है। इसके तहत RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) और VHP (विश्व हिन्दू परिषद) के कार्यकर्ता घर-घर जाकर राम मंदिर से जुड़ा पर्चा और अक्षत दे रहे हैं। निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। ये अक्षत ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट द्वारा भेजे गए हैं। नए साल के साथ ही ये महा अभियान शुरू हो गया था।

भगवान राम 500 वर्षों के वनवास के बाद अपने घर में लौट रहे हैं। ऐसे में घर-घर जाकर हिन्दुओं से कहा जा रहा है कि वो प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन अपने आसपास के मंदिर में पहुँचें और वहीं से इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। अक्षत के साथ ट्रस्ट द्वारा भेजा गया सन्देश भी लोगों को दिया जा रहा है। साथ ही राम मंदिर की तस्वीर है, जिसे घर में लगाने के लिए कहा गया है। राम मंदिर में पूजित अक्षत के साथ लोगों को कहा जा रहा है कि आप मानसिक रूप से प्राण कार्यक्रम से जुड़िए।

5 नवंबर, 2023 को ही ट्रस्ट द्वारा श्री राम जन्मभूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह हेतु जनमानस को आमंत्रित करने के लिए आज जन्मभूमि परिसर में अक्षत पूजन कर कार्यकर्ताओं में वितरित किया गया। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें भी डाली गई थीं। उसके बाद अक्षत को पैकेट्स में डाल कर देश भर में घर-घर पहुँचाने की जिम्मेदारी RSS एवं VHP ने उठाई। 5 लाख गाँवों तक अक्षत पहुँचाने के लिए 50 प्रमुख केंद्रों से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था।

महामंडलेश्वर स्वामी रामगोपाल दास ने भी समझाया है कि ये ‘अक्षत निमंत्रण’ क्या होता है। उन्होंने बताया कि अक्षत का शाब्दिक अर्थ है – जिसका क्षय न हो। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन में मृत्यु के पश्चात ‘राम नाम सत्य है’ कहा जाता है, श्रीराम के रूप में मरने के बाद भी हम बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि अक्षत आत्मा का ध्यान कराता है। उन्होंने समझाया कि ट्रस्ट ने इसका प्रतिनिधित्व दर्शाया है कि ऐसा मंदिर बने जो कभी नष्ट न हो। निर्माण में भी इसका ध्यान रखा गया है।

महामंडलेश्वर स्वामी रामगोपाल दास ने समझाया कि हमारा संबंध भगवान से अक्षत का है, जीव का ईश्वर से नित्य संबंध होता है यानी ऐसा संबंध जो कभी नष्ट नहीं होता। उन्होंने कहा कि भगवान के साथ हमारे अनंत संबंध होने, मंदिर के सनातन होने का प्रतीक ये अक्षत है। धान के ऊपरी हिस्से के निकल जाने के बाद जो चावल बचता है, अक्षत में उसका उपयोग किया जाता है। कहीं-कहीं हल्दी, सुपारी और तुलसी दल का प्रयोग भी किया जाता है।

उन्होंने समझाया कि गोस्वामी तुलसीदास ने भगवान श्रीराम को दही-भात खाते हुए देखा था, इसीलिए इसे महाप्रसाद भी कहा गया। उन्होंने कहा कि अक्षत के माध्यम से जो न्योता दिया जा रहा है, वो ईश्वर की अंतरात्मा का प्रतिनिधित्व कर रहा है, धान का ये हिस्सा धन्यता की ओर ले जाए इसकी कामना की जाती है। शादी-विवाह में भी धान का इस्तेमाल होता है, ताकि धन्यता बनी रहे। इसीलिए, अक्षत के माध्यम से निमंत्रण दिया जा रहा है।

इस तरह राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का न्योता सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही नहीं गया है, बल्कि आम श्रद्धालु भी ‘अक्षत निमंत्रण’ के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े रहेंगे। अपने आसपास के देवस्थानों में पूजा-पाठ एवं आरती में हिस्सा लेंगे। पुराने काल में भी अक्षत के माध्यम से ही लोगों को शादी-ब्याह या अन्य कार्यक्रमों का निमंत्रण दिया जाता था। कार्ड के साथ भी अक्षत भेजे जाते थे। अक्षत के चावल पर्व-त्योहारों में पूजा-पाठ के दौरान भी इस्तेमाल में लाए जाते हैं।

जिस अडानी का नाम लेकर PM मोदी को घेरता है बेटा, निवेश के लिए उन्हीं के आगे बिछे पिता स्टालिन: Adani करेगा ₹42700 करोड़ इन्वेस्ट

अडानी समूह तमिलनाडु में 42,700 करोड़ रुपए निवेश करेगा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, राज्य के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा और अडानी पोर्ट्स एवं विशेष आर्थिक क्षेत्र के एमडी करण अडानी के बीच हुई। बता दें कि DMK सरकार में मंत्री एवं मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन अडानी का नाम लेकर अक्सर केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करते रहते हैं।

दरअसल, तमिलनाडु की स्टालिन सरकार राज्य में निवेश के लिए उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए तमिलनाडु ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट 2024 का आयोजन किया है। इस आयोजन में उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी को भी आमंत्रित किया गया था। इसी दौरान अडानी समूह की विभिन्न कंपनियों ने तमिलनाडु में 42,700 करोड़ रुपए निवेश करने के लिए सरकार के साथ समझौता किया।

इसमें अडानी टोटल गैस कंपनी 180 करोड़ रुपए निवेश करके राज्य के कुड्डालोर और तिरुप्पुर जिलों में 100 पाइपलाइन बिछाकर 5,000 से अधिक घरों में पाइप के जरिए गैस उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा, अडानी समूह की ACC और अंबुजा सीमेंट भी यहाँ 550 करोड़ रुपए निवेश करेंगे। इससे 5 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

इतना ही नहीं, अडानी पोर्ट्स वर्तमान में राज्य के कट्टुपल्ली और एन्नोर बंदरगाह का संचालन करती है। कंपनी तिरुवल्लूर जिले में अब तक 3,733 करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी है। अडानी समूह की यह कंपनी भी स्वच्छ ऊर्जा परियोजना के लिए 25,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इससे लगभग 4,500 लोगों को रोजगार मिलेगा।

बता दें कि तमिलनाडु के युवा एवं खेल मामलों के मंत्री उदयनिधि स्टालिन भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए अक्सर अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी का नाम लेते रहते हैं। उन्होंने पिछले साल दिसंबर के शुरुआत में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को अपने दोस्त अडानी के हाथों में सौंप दिया है।

एक तरफ अडानी के हाथों देश को बेचने का आरोप लगाने और दूसरी तरफ राज्य में निवेश के लिए अडानी समूह को बुलाने पर तमिलनाडु भाजपा के नेता ने DMK सरकार पर हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार ने अपने X हैंडल पर लिखा, “विडंबना ये है कि द्रमुक के नेता क्रोनी कैपिटलिज्म और पक्षपात की बात करते हैं!”

सीने में गोली दागी, ज़िंदा थे तभी लाशों के साथ गाड़ी में ठूँसा, विधवा से बदसलूकी: भजन गा रहे थे कारसेवक महावीर अग्रवाल, परिवार ने याद किया – लाल हो गई थी सरयू

दुनिया भर के हिन्दुओं के आराध्य भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण प्रगति पर है। 22 जनवरी, 2024 को इस मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। ऐसे में लोग उन तमाम बलिदानियों को याद कर रहे हैं जिन्होंने लगभग 5 सदियों तक चले संघर्ष में राम के नाम पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन तमाम ज्ञात-अज्ञात बलिदानी कारसेवकों में से एक हैं महावीर प्रसाद अग्रवाल। महावीर प्रसाद का परिवार फ़िलहाल अयोध्या में रहता है। ऑपइंडिया ने उनके घर पहुँच कर परिजनों से बात की और उनके वर्तमान हालात को जाना।

महावीर प्रसाद अग्रवाल अगरबत्ती बनाने का काम करते थे। वो इन अगरबत्तियों को गोंडा और अयोध्या में बेचते थे। महावीर का पुराना घर अयोध्या शहर (पूर्व फैज़ाबाद) के वजीरगंज जप्ती इलाके में है। यह घर मुस्लिम बहुल मोहल्ले में है। फिलहाल उनके बेटों ने देवकाली बाईपास के पास नया मकान बनवा लिया है। जब ऑपइंडिया की टीम उनके नए मकान पर पहुँची तो बलिदानी कारसेवक के छोटे बेटे अभिषेक अग्रवाल घर पर ही मिल गए।

कपड़े सिल कर माँ ने पाला परिवार

अभिषेक ने ऑपइंडिया को बताया कि जब वो महज 9 साल के थे तब उनके पिता 2 नवंबर, 1990 में अयोध्या में रामकाज करते हुए बलिदान हो गए थे। महावीर प्रसाद अपने पीछे 1 विधवा और 2 बेटे छोड़ गए थे। पति की मौत के बाद उनकी पत्नी शारदा देवी अग्रवाल ने अपने 2 नाबालिग बेटों को पाला। इनकी पढ़ाई से ले कर अन्य खर्चे उठाने के लिए उन्होंने अपने घर में सिलाई का काम शुरू किया। जब उनके बेटे बड़े हो गए तब उन्होंने छोटे-मोटे काम-धंधे कर के अपनी माँ का हाथ बँटाना शुरू किया।

अभिषेक बताते हैं कि पति की मौत के बाद उनकी माँ शारदा देवी मानसिक तौर पर टूट चुकी थीं लेकिन बच्चों का चेहरा देख कर उन्होंने खुद को सँभाला। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने दोनों बेटों को कभी निराश नहीं होने दिया। पढ़ाई करवाने के बाद उन्होंने दोनों बेटों की शादियाँ करवाईं। आखिरकार साल 2012 में लम्बी बीमारी के बाद शारदा देवी का देहांत हो गया। फ़िलहाल अभिषेक अग्रवाल प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं।

उनके बड़े भाई अखिलेश अग्रवाल लखनऊ में होटल के कारोबार से जुड़े हैं। बीच-बीच में विभिन्न मौकों पर बलिदानी महावीर प्रसाद अग्रवाल के परिजन हिन्दू संगठनों द्वारा सम्मानित भी किए जाते रहे।

हिन्दू संगठनों द्वारा महावीर प्रसाद अग्रवाल के परिजनों का सम्मान

राम का भजन गाने के चलते मार दी गई गोली

अभिषेक अग्रवाल भावुक हो कर 2 नवंबर, 1990 की घटना को याद करते हैं। उन्होंने बताया कि वो शुक्रवार का दिन था। मुलायम के आदेश पर अयोध्या को चारों तरफ से पुलिस से घेर दिया गया था। तब महावीर प्रसाद अग्रवाल ने अपने साथियों के साथ सरयू नदी को तैर कर पार किया। वो अयोध्या के कारसेवकपुरम तक पहुँचने में सफल रहे। अभिषेक का कहना है कि उनके पिता जी और बाकी अन्य कारसेवक निहत्थे थे और कारसेवकपुरम के पास एक जगह जमा हो कर भगवान का भजन गा रहे थे। इसी दौरान रामभक्तों को चारों तरफ से घेर लिया गया और गोलियों की बौछार कर दी गई।

लाश को नदी में फेंकने की थी तैयारी

अभिषेक ने हमें आगे बताया कि अचानक हुई गोलीबारी में उनके पिता को सीने में 2 गोलियाँ लगीं। गोलियाँ लगने पर वो जमीन में गिर कर छटपटाने लगे। जब उनको बचाने के लिए अन्य कारसवेक आगे बढ़े तभी लाठीचार्ज कर दिया गया। इस से भगदड़ मच गई। फिर भी कुछ रामभक्तों ने महावीर को भीड़ में से निकाला और एक चबूतरे पर रखा। बताया गया कि तब तक महावीर की साँसें चल रहीं थीं। इसी बीच पुलिस का एक ट्रक आया। वो गोलीबारी में बलिदान हुए कारसेवकों की लाशों को उसमें भरने लगा।

अभिषेक ने बताया कि उन्हें जीवित कारसेवकों से पता चला था कि उस गोलीबारी में दर्जनों कारसेवक बलिदान हुए थे। उनकी लाशों को समेटने के चक्कर में पुलिस वालों ने कई घायल कारसेवकों को भी वाहनों में लाद लिया था और जिन्दा ही सरयू नदी में फेंक दिया था। बकौल अभिषेक, उनके पिता को भी गंभीर अवस्था में घायल हालत में ही कई लाशों के बीच ट्रक में भर लिया गया था। इसके बाद तड़प-तड़प कर पुलिस के वाहन में महावीर अग्रवाल के प्राण निकले थे। घटना की सूचना मिलने पर महावीर अग्रवाल की पत्नी शारदा अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पहुँचीं थीं।

कई जगह भटकने के बाद एक पुलिस के वाहन में महावीर अग्रवाल का शव कई अन्य रामभक्तों की लाशों के बीच पड़ा मिला। शारदा देवी ने अपने पति का शव लेना चाहा तो मौके पर मौजूद पुलिस वालों ने उनके साथ अभद्रता की। हालाँकि, काफी मिन्नतों के बाद आखिरकार महावीर अग्रवाल का शव उनकी पत्नी को सौंपा गया। अभिषेक अग्रवाल का दावा है कि अगर उनके परिजन थोड़ी और देर से पहुँचे होते तो उनके पिता का शव भी कई अन्य जीवित या बलिदान हुए कारसेवकों की तरह सरयू नदी में फेंक दिया जाता।

इस हालत में मिला था महावीर प्रसाद अग्रवाल का शव

तब की घटना याद करते हुए अभिषेक ने दावा किया कि सरयू का जल रामभक्तों के खून से लाल हो गया था। आखिरकार महावीर का अंतिम संस्कार उनके परिवार की मौजूदगी में अयोध्या के सरयू तट पर हुआ। अंतिम संस्कार के दौरान भी पुलिस मुस्तैद थी।

पिता के बलिदान पर गर्व

राम मंदिर निर्माण को अपना और हिन्दुओं का सौभाग्य बताते हुए अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि उनको इस बात का गर्व है कि उनके पिता महावीर का बलिदान इस पुनीत कार्य में हमेशा गिना जाएगा। अभिषेक के मुताबिक, पिता की वीरगति से पहले उनके पूर्वज और वर्तमान वंशज सभी भगवान राम के भक्त थे, हैं और आगे भी रहेंगे। अभिषेक अग्रवाल अक्सर दुनिया भर के आए रामभक्तों के सेवा भाव से जन्मभूमि भी जाते रहते हैं। उनके घर के पूजा वाले कमरे में राम दरबार है। अन्य बलिदानियों के परिवार की तरह उनकी भी इच्छा है कि उनके बलिदानी पिता का स्मारक अयोध्या में बने।

महावीर प्रसाद अग्रवाल के बेटे अभिषेक

मुस्लिमों की ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकते थे मुलायम

अपने पिता के बलिदान का जिम्मेदार अभिषेक अग्रवाल सीधे तौर पर मुलायम सिंह यादव को मानते हैं। उन्होंने हमें बताया कि मुलायम के ‘जरूरत पड़ती तो और भी कारसेवक मारते’ वाले बयान से उन सभी को आत्मिक पीड़ा पहुँची और वो पुराने घावों को कुरेद गया गया था। अभिषेक का यह भी मानना है कि कारसेवकों का नरसंहार मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिमों खुश करने के लिए करवाया था क्योंकि वो तुष्टिकरण में कुछ भी कर सकते थे। अभिषेक ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में किसी घोषित राम विरोधी को भी न बुलाने की अपील की।

‘ये मुस्लिम इलाका, यहाँ नहीं निकलेगी श्रीराम की फेरी’: राम मंदिर का अक्षत बाँट रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर भीड़ ने तलवार लेकर किया हमला, महिलाओं ने छत पर से बरसाए पत्थर

मध्य प्रदेश के शाजापुर में राम जन्मभूमि पर बन रहे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए अक्षत बाँट रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। मस्जिद के पास अक्षत बाँटने जैसे ही हिन्दू कार्यकर्ता पहुँचे, उन पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव किया।

जानकारी के अनुसार, 8 जनवरी, 2024 की शाम को शाजापुर शहर के सोमवारिया क्षेत्र में अक्षत वितरण कार्यक्रम चल रहा था। इसके लिए सांध्यकालीन श्रीराम फेरी निकाली जा रही थी। इसमें बड़ी संख्या में हिन्दू कार्यकर्ता शामिल थे। यात्रा में श्रीराम के भजन बजाए जा रहे थे। यहाँ पर जब यात्रा हररायपुर क्षेत्र में एक मस्जिद के पास पहुँची तो इस पर हमला हो गया।

हिन्दू कार्यकर्ता यात्रा लेकर जैसे ही मस्जिद के पास पहुँचे, यहाँ पर मौजूद मुस्लिम भीड़ ने इस पर एकाएक हमला बोल दिया और पथराव करने लगे। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू कार्यकर्ताओं पर हमला किया और उनपर पत्थर बरसाए। इस हमले में कुछ हिन्दू कार्यकर्ता घायल हो गए। मुस्लिम भीड़ के हमले के कारण श्रीराम यात्रा में खलल पड़ गया।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मुस्लिम भीड़ का उनसे कहना था कि यह शहर का मुस्लिम इलाका है इसलिए यहाँ श्रीराम की फेरी नहीं निकल सकती। उनके धमकाने के बाद जब हिन्दू कार्यकर्ता आगे बढे तो इन्होने भीड़ इकट्ठा करके हमला कर दिया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस हमले में घरों की छतों के ऊपर से पत्थर फेंके गए। पत्थर फेंकने में मुस्लिम परिवारों की महिलाएँ भी शामिल थीं। कुछ मुस्लिम युवक हिन्दू कार्यकर्ताओं पर तलवार लेकर भी दौड़े और हमला किया।

ऑपइंडिया ने इस मामले में शाजापुर के शहर कोतवाल बृजेश मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया कि अभी शहर में शान्ति व्याप्त है और मामले की सूचना लेकर मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है। इसमें मुस्लिम भीड़ में शामिल 24 लोगों के विरुद्ध नामजद मुकदमा हुआ है। अधिकाँश आरोपित अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

वहीं जिले के हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता इस हमले के बाद से गुस्से में हैं। उन्होंने 8 जनवरी, 2024 की रात को हमले के बाद प्रदर्शन भी किया। हिन्दू कार्यकर्ता उन घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं जहाँ से उन पर पथराव हुआ।

महिला CEO ने होटल में की 4 साल के बेटे की हत्या, शव को बैग में भरकर टैक्सी से हुई फरार: कमरे में खून बिखरा देख पुलिस ने पकड़ा

गोवा में एक महिला ने अपने 4 वर्षीय बेटे को मार दिया और उसका शव एक बैग में भर कर गोवा से कर्नाटक तक एक टैक्सी में आ गई। जिस महिला ने हत्या की वह एक स्टार्टअप की को फाउंडर और CEO है और खुद को AI और हैकिंग का एक्सपर्ट बताती है। उसे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, 39 वर्षीय सुचाना सेठ नाम की एक टेक स्टार्टअप फाउंडर और माइंडफुल नाम की कम्पनी की CEO 6 जनवरी, 2024 को शाम को अपने 4 वर्ष के बेटे के साथ गोवा के एक होटल पहुँची थी। उसने 7 जनवरी, 2024 को जल्दी-जल्दी में अपना होटल छोड़ दिया। जब वह वापस निकली तो उसके साथ उसका बेटा नहीं था।

उसने 7 जनवरी, 2024 को सुबह होटल जल्दी खाली करने की अर्जी की थी और साथ ही होटल में रिसेप्शनिस्ट से कहा कि उसे बेंगलुरु के लिए एक निजी टैक्सी चाहिए। होटल के कर्मचारियों ने कहा कि सुचाना को फ्लाइट लेना चाहिए लेकिन वह टैक्सी लेने पर अड़ी रही। इसके बाद जब उसे टैक्सी मिली तो वह वहाँ से एक बैग के साथ निकल गई, इस दौरान उसका बेटा नहीं दिखा। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

सुचाना के कमरा छोड़ने के बाद जब वहाँ होटल के कर्मचारी साफ़ सफाई के लिए पहुँचे तो वहाँ उन्होंने खून बिखरा दिखा। उसने होटल के प्रबन्धन को सूचित किया जिन्होंने यहाँ पुलिस बुलाई। इसके बाद उन्होंने पुलिस को बताया कि उसका बेटा साथ में वापस जाते नहीं दिखा।

पुलिस ने जब सुचाना को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसका बेटा गोवा के फट्रोडा में है जहाँ उसके दोस्त हैं। उसने पुलिस को फर्जी पता भी दिया। पुलिस ने जब इसकी जाँच की तो उसे शक हुआ। पुलिस ने सुचाना को लेकर जा रही टैक्सी के ड्राईवर को फ़ोन किया और उसे नजदीकी पुलिस थाने जाने को कहा। ड्राईवर उस समय कर्नाटक के चित्रदुर्ग में था जहाँ वह पुलिस थाने पहुँचा। यहाँ महिला की जाँच करने पर उसके बैग में उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश मिली।

इसके बाद पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उससे आगे की पूछताछ की। गोवा पुलिस कर्नाटक उसे गिरफ्तार करने पहुँच चुकी है। हत्या करने वाली महिला सुचाना सेठ के बारे में भी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। हत्या करने वाली सुचाना सेठ की लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखा है कि वह माइंडफुल AI लैब की CEO, AI और डाटा साइंस एक्सपर्ट है जिसे इस मामले में 12 वर्षों का अनुभव है। यह भी लिखा है कि AI एक्सपर्ट 100 महिलाओं की लिस्ट में शामिल रही है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की जाएगी कुर्सी? अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू: एक्शन में डेमोक्रेट नेता, टूरिस्ट यूनियन ने भी घेरा

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Maldives President Mohamed Muizzu) की कुर्सी जा सकती है, उनकी सरकार गिर सकती है। मालदीव में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मालदीव की डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अली अजीम ने राष्ट्रपति मुइज्जू को पद से हटाने और उनकी सरकार को गिराने के लिए अन्य नेताओं से अपील की है।

मालदीव में संसदीय अल्पसंख्यक नेता अली अजीम ने सोमवार (8 जनवरी 2024) को राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आह्वान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से बेदखल करने में मदद करने की अपील की। अली अजीम ने लिखा:

“डेमोक्रेट पार्टी से जुड़े हम लोग देश की विदेश नीति की स्थिरता को बनाए रखने और किसी भी पड़ोसी देश को अलग-थलग होने से रोकने के लिए समर्पित हैं। क्या आप राष्ट्रपति मुइज्जू को सत्ता से हटाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं? क्या मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति मुइज्जू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की शुरुआत करेगी?”

सांसदों, कई बड़े नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों के अपने ही सरकार के खिलाफ बयान के बाद मालदीव की टूरिस्ट यूनियन (MATI: Maldives Association of Tourism Industry) ने मुइज़्ज़ू सरकार के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। उधर मालदीव को जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी कमी आ गई है। भारत की सबसे बड़ी व्यापार संस्था CAIT ने भी भारतीय व्यापारियों से मालदीव से व्यापार ना करने की अपील की है। यह भी सामने आया है कि वर्तमान में चीन की यात्रा पर गए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा को लेकर भी मालदीव ने प्रस्ताव रखा है।

मालदीव की टूरिस्ट यूनियन ने की आलोचना

मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की है। इसने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया है। MATI ने कहा है, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”

MATI ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के समय भारत ने उनकी काफी सहायता की थी। उसके कारण भारत और मालदीव के रिश्ते बढ़ते रहे। MATI ने लोगों को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी, जिनका रिश्तों पर बुरा असर हो।

सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था ने किया मालदीव का बहिष्कार

भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था कन्फेडरेशन ऑफ़ इंडियन ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने देश के सभी कारोबारियों से अपील की है कि वह मालदीव के साथ कोई भी व्यापार ना करें। खंडेलवाल ने कहा है कि मालदीव के साथ व्यापार ना करके भारत के व्यापारी उसे एक कड़ा सन्देश भेजें कि दोनों देशों के रिश्ते एक दूसरे के प्रति सम्मान दिखाने से ही चल सकते हैं।

मालदीव जाने वाली उड़ानों की बुकिंग में भी आई कमी

मालदीव के बहिष्कार की माँग के चलते अब भारतीय यहाँ जाने की अपेक्षा देश में ही घूमने को तरजीह दे रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव को भारत से जोड़ने वाली उड़ानों को ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स ने कहा है कि बीते कुछ दिन में यहाँ की उड़ान की बुकिंग में कमी आई है। वहीं भारत में टूर ऑपरेटर की संस्था इंडियन एसोशिएसन ऑफ़ टूर ऑपरेटर्स ने कहा है कि बीते दो दिनों से उनके पास मालदीव जाने के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है।

भारत आना चाहते हैं मालदीव के मुखिया मुइज़्ज़ू

मालदीव के मंत्रियों के भारत और पीएम मोदी को लेकर दिए गए बयान के बाद उपजे विवाद के बीच मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू भारत आना चाहते हैं। मालदीव की सरकार ने यह प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। वह अभी चीन की यात्रा पर हैं। इससे पहले वह तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की यात्रा कर चुके हैं। मालदीव के राष्ट्रपतियों का चुने जाने के बाद पहली विदेश यात्रा में भारत आना एक परम्परा रही है। हालाँकि, भारत विरोधी भावनाओं को हवा देकर चुनाव जीते मुइज्जू ने इससे किनारा किया।

मीडिया पोर्टल WION के अनुसार इस यात्रा के लिए प्रस्ताव यह विवाद चालू होने से पहले रखा गया था। हालाँकि, अब इसको लेकर भारत का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। मुइज्जू, मालदीव में भारत विरोधी कैम्पेन ‘India Out’ को हवा देते रहे हैं।

भारत-मालदीव विवाद में अब तक क्या हुआ?

गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी, 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। उन्हें यहाँ कुछ ही मिनटों के लिए बुलाया गया था।

चीन की मिसाइलों में भरा है पानी, सही से ढक्कन तक नहीं खुलते: US की रिपोर्ट में खुलासा, सैन्य अधिकारियों ने किया गोला-बारूद में घोटाला

चीन की मिसाइलों में गोला बारूद की जगह पर पानी भरा हुआ है। इनको लॉन्च नहीं किया जा सकता क्योंकि इनके कवर के ढक्कन तक सही से नहीं खुलते। इसी चक्कर में चीन ने ताइवान को आँख दिखाना बंद कर दिया है। आगे भी चीन की सेना किसी पर हमला करने की अपनी रणनीतियों पर सोच विचार कर रही है क्योंकि उसके अन्दर सैकड़ों खामियाँ निकली हैं। यह सारे खुलासे एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में हुए हैं।

ब्लूमबर्ग द्वारा सूत्रों के हवाले जुटाई गई जानकारी के अनुसार, सेना और इसके साजोसामान खरीदने में भ्रष्टाचार इस कदर पैठ बना चुका है कि अब उसके हथियारों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इसी कारण से चीन के राष्ट्रपति ने हाल ही में कुछ सैन्य अधिकारियों को सेना से निकाल फेंका था।

रिपोर्ट में बताया गया है 2021 में भी एक खुफिया जानकारी सामने आई थी कि शिनजियांग के मरुस्थल में सैकड़ों परमाणु मिसाइल बना रहा है। इनका उपयोग चीन के पड़ोसियों को डराने धमकाने में किया जाना था। इसके बाद 2022 और 2023 में चीन ने पड़ोसी ताइवान को काफी परेशान भी किया और इसकी तरफ रॉकेट भी तान दिए।

हालाँकि, अब सामने आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इन मिसाइल को जिन कनस्तरों में रखा जाता है, उनके ढक्कन (Lids) ही सही से काम नहीं करते और समय पर नहीं खुलते। इससे मिसाइल सही से लॉन्च नहीं हो पाती। ऐसे में किसी दुश्मन देश के हमले का जवाब देना मुश्किल होगा। खुफिया रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि कुछ मिसाइलों में गोला बारूद भरा ही नहीं गया है। इनमें इसकी जगह पर पानी भरा हुआ है, ऐसे में यह काम ही नहीं करेंगी।

ख़ुफ़िया रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सारे घोटाले सेना के रॉकेट फ़ोर्स यूनिट में हुए हैं। इन सभी घोटालों के पीछे सेना में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार को जड़ बताया जा रहा है। इसी के चलते चीन अब दूसरे देशों को आँख दिखाने की अपनी रणनीति पर भी दोबारा विचार कर रहा है।

चीन की सेना में इस भ्रष्टाचार के कारण ही हाल ही में रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी उनके पद से हटा दिया गया था। इसके अलावा हाल ही में चीन की सेना के 9 बड़े अधिकारियों को शी जिनपिंग ने बाहर का रास्ता दिखाया था। यह भी चीन की सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार से ही जुड़ा मामला था। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह अधिकारी फ़ोर्स से जुड़े हुए थे और इनमें से 4 इन खराब मिसाइलों के लिए जिम्मेदार थे, जिसके लिए इन्हें सजा दी गई।

चीन की सेना में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। दरअसल, चीन की सेना देश को समर्पित ना हो कर यहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी की फ़ौज है। यह पार्टी के हितों को पूरा करने के लिए काम करती है। इसकी निष्ठा चीन देश के प्रति ना हो कर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति है। ऐसे में यहाँ भ्रष्टाचार भी काफी बड़ी बात है क्योंकि अधिकांश समय चीन की सेना में पार्टी से ही बड़े कार्यकारी अधिकारी भर्ती किए जाते हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सत्ता में आने के बाद से ही भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कर रहे हैं लेकिन इसमें उन्हें कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली है।