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नाबालिग हिंदू लड़की को ले भागा आदिल, गुमराह करने के लिए नहर किनारे छोड़े कपड़े-मोबाइल: जेसीबी-गोताखोर करते रहे तलाश, फिर सामने आई सच्चाई

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक नाबालिग हिन्दू लड़की को आदिल नाम का मुस्लिम युवक बहला-फुसला कर भगा ले गया है। लड़की बेहद गरीब परिवार की है और अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती थी। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और आरोपित की तलाश जारी है। जिस नाबालिग को आदिल भगा ले गया है, वह ब्राह्मण समुदाय की है।

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत ओयल के मोहल्ला जगतिया की रहने वाली 17 साल की हिन्दू नाबालिग मंगलवार (2 जनवरी 2023) को सुबह घर से गायब हो गई। जब बहुत देर तक वह वापस नहीं लौटी तो घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। परिजनों को पता चला कि लड़की शहर के ही एक मुस्लिम युवक आदिल पुत्र मैनुद्दीन के साथ नहर की तरफ गई।

परिजन जब नहर के पास पहुँचे वहाँ नाबालिग के कपड़े, जूते, फोन, इयरफोन पड़ा मिला। इसके अलावा इसी जगह पर युवक आदिल के भी कपड़े, जूते और फ़ोन भी यहीं पर मिले। इससे पुलिस को आशंका हुई कि कहीं नाबालिग युवक के साथ नहर में तो नहीं कूद गई। दोनों के आधार कार्ड भी यहीं पर मिले। आधार कार्ड में युवती की उम्र 17 वर्ष और युवक की उम्र 18 लिखी हुई पाई गई।

पुलिस ने इसी आशंका के तहत यहाँ पर जेसीबी बुलाकर नहर में दोनों की तलाश शुरू करवाई। गोताखोरों को भी तलाश में लगवाया गया। हालाँकि, जब काफी तलाश के बाद भी दोनों नहीं मिले तो यह माना गया कि आदिल ने परिजनों और पुलिस को गुमराह करने के लिए कपड़े और फ़ोन नहर के किनारे छोड़ा होगा।

बच्ची की तलाश करते गोताखोर
बच्ची की तलाश करते गोताखोर

नाबालिग की माँ ने आदिल के खिलाफ लखीमपुर के खीरी थाना में मामला दर्ज करवाया है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़िता की माँ ने कहा है कि आदिल उसकी बच्ची को बहला-फुसला कर ले गया है। पुलिस ने युवक आदिल के विरुद्ध अपहरण का मामला दर्ज किया है।

मामले की जाँच कर रहे ओयल चौकी प्रभारी विनोद सिंह का कहना है कि मामले की जाँच जारी है। अभी तक युवक और नाबालिग बालिका की तलाश जारी है। CCTV जाँच में आदिल नाबालिग को ले जाते हुए दिखा है। जिस नाबालिग बच्ची को लेकर आदिल भागा है, वह काफी गरीब है। बच्ची की माँ और दादी, घरों में काम करके अपना गुजारा करती हैं। बच्ची खुद भी काम करती थी। उसके पिता की कुछ वर्षों पहले ही मौत हो चुकी है।

महिला दोस्त की डॉगी को बचाने में डूब गया UPSC की तैयारी कर रहा इंजीनियर, दो लड़कियों के साथ डैम में गिरा था: पीड़ित पिता बोले- तैराक था मेरा बेटा

संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी कर रहे एक इंजीनियर की मध्य प्रदेश के भोपाल में डूबने से मौत हो गई। वो दो साथी छात्राओं के साथ चूनाभट्टी इलाके में लेक के किनारे टहल रहा था। इसी दौरान साथ आई लड़कियों में से एक का पालतू डैम में गिर गया। कुत्ते को बचाने के लिए तीनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर उसे निकालने की कोशिश की। लेकिन संतुलन बिगड़ने से तीनों डैम में ही गिर गए। लड़कियाँ तो तैर कर बाहर आ गई, लेकिन अच्छा तैराक होने के बावजूद यूपीएससी एस्पिरेंट डूब गया। करीब एक घंटे के बाद उसका शव बरामद हो सका।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक युवक का नाम सरल निगम (23 वर्ष) है। वह अपनी माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके पिता निजी आईटी कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके थे। वो एमटेक कर चुका था और भोपाल में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। बुधवार (03 दिसंबर 2024) की सुबह वह अपनी दो साथी छात्राओं के साथ केरवा डैम के इलाके में मॉर्निंग वॉक के लिए गया था, जब ये हादसा हुआ।

इस मामले की जाँच कर रहे एएसआई अंतराम यादव ने बताया कि घटनास्थल वाली जगह केरवा डैम क्षेत्र में है। छात्र-छात्रा मॉर्निंग वॉक के लिए जंगल कैंप गए थे। सुबह करीब 7.30 बजे वे लोग कैंप पहुँचे, जहाँ शहर के लोग अक्सर मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। मीडिया से बातचीत में एएसआई अंतराम यादव ने बताया कि सुबह करीब 8.30 बजे तीनों लोग डैम के किनारे टहल रहे थे। तभी उनके साथ चल रहा पालतू कुत्ता पानी में गिर गया। उसे निकालने की कोशिश के दौरान तीनों ही पानी में गिर गए। बाद में लड़कियाँ तो बाहर आ गईं, लेकिन सरल निगम की डूबने से मौत हो गई।

हादसे के दौरान लड़कियों ने चिल्लाकर लोगों से मदद माँगी और चौकीदार को भी बुलाया। रातीबड़ पुलिस ने गोताखोरों और एसडीईआरएफ के साथ करीब एक घंटे की कोशिश के बाद सरल के शरीर को पानी से बाहर निकाला। वह करीब 10-15 फ़ीट नीचे पानी में ही फँस गया था। बताया जा रहा है कि उसके चेहरे पर कुछ चोटों के निशान भी मिले हैं। माना जा रहा है कि जब वह नीचे पानी में गिरा होगा तो किसी पत्थर से उसे चोट लगी होगी और वह नीचे झाड़ियों में फँस गया होगा।

पीड़ित पिता सुधीर निगम के अनुसार उनके बेटे ने एमटेक किया था। वह पायलट का एग्जाम निकाल चुका था। वह अच्छा था और उसे पैरा ग्लाइडिंग का भी शौक था। पालतू कुत्ता भी इस हादसे में जीवित बच गया। वह खुद तैर कर बाहर आ गया।

केजरीवाल की अगवानी और एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं सीएम भगवंत मान, पंजाब पर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा कर्ज

पंजाब की आर्थिक हालत बेहद खराब है। हालात ऐसे हैं कि राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार लोन को पाँच साल माफ़ करने की गुहार लगा रही है। हालाँकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान इस दौरान AAP मुखिया केजरीवाल के स्वागत और नया एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं। पंजाब के बजट का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने में जा रहा है।

पंजाब की वर्तमान में खस्ता आर्थिक हालत के पीछे कॉन्ग्रेस और AAP बराबर रूप से सहयोगी हैं। अगर 2017 में पंजाब की सत्ता में आई कॉन्ग्रेस सरकार ने इसकी अर्थव्यस्था को ICU में पहुँचाया तो AAP उसे अपनी नीतियों द्वारा इसे वेंटिलेटर पर पहुँचा रही है। पंजाब देश का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जिस पर उसकी अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक कर्ज है।

हालाँकि, पंजाब पर भले इतना अधिक कर्ज है कि सरकार के रोजाना के कामधाम भी अटक रहे हों, लेकिन AAP ने अपनी नीतियाँ नहीं बदली हैं। वह राज्य की अर्थव्यवस्था को रेवड़ियाँ बाँटकर और गर्त में ले जा रही हैं। चाहे वह मुफ्त बिजली की योजना हो या बसों में मुफ्त सवारी करवाना।

पंजाब की अर्थव्यवस्था का हाल-बेहाल?

कभी देश के सबसे समृद्ध राज्य माने जाने वाले पंजाब पर आई एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राज्य के लगभग ₹3.40 लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज पंजाब की कुल अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक है। पंजाब की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 2022-23 में लगभग ₹6.29 लाख करोड़ था। पंजाब में 2022 में सत्ता परिवर्तन हुआ था और आम आदमी पार्टी की सरकार आई थी।

साल 2017 से 2022 तक पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस सरकार ने पाँच वर्षों (2017-22) में लगभग ₹1 लाख करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2022 के मार्च महीने से लेकर 2023 के अंत तक लगभग ₹50,000 करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया। पंजाब के कर्ज में बढ़ोतरी इसलिए नहीं हुई कि राज्य में कोई बड़ा विकास कार्य हुआ हो।

पंजाब की GSDP (राज्य की कुल अर्थव्यवस्था) का 50% से अधिक उस पर कर्ज होना बड़ी समस्या वाली बात है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य का राजकोषीय घाटा (सरकार की आमदनी और कमाई में अंतर) उसकी GSDP का 5.2% था। सरकार जितना कमा रही है, उससे कहीं अधिक खर्च कर रही है।

एक हाथ कर्ज चुकाया, दूसरे हाथ से बढ़ाया

पंजाब सरकार को पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है। इससे कर्ज का पहाड़ और भी बढ़ता जा रहा है। एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब की AAP सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ₹47,000 करोड़ का जो कर्ज लिया, उसमें से ₹27,000 करोड़ तो पुराने कर्जों के ब्याज और मूलधन को चुकाने में चला गया।

पंजाब की सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में ₹20,100 करोड़ पुराने कर्ज के ब्याज के रूप में दिया था। इसके अलावा ₹15,146 करोड़ पुराने कर्ज के मूलधन के रूप में चुकाए। यानि AAP सरकार ने 2022-23 में जितना असल कर्ज चुकाया, उससे अधिक तो उसे ब्याज चुकाना पड़ा। आगे भी यह स्थिति बदलती नहीं दिख रही है।

वित्त वर्ष 2023-24 में पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को लगभग ₹22,000 करोड़ पुराने कर्जों के ब्याज में और लगभग ₹16,000 करोड़ ब्याज को असल चुकाने में देने पड़ेंगे। पंजाब में अगर आर्थिक सुधारों और फिजूलखर्ची पर ध्यान नहीं दिया गया तो जल्द ही इसका कर्ज ₹4 लाख करोड़ को पार कर जाएगा।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया, फिर भी मुफ्त हम तो बाँटेंगे भैया

AAP सरकार पंजाब की आर्थिक हालत सुधारने के बजाय उसे और गर्त में ले जा रही है। AAP सरकार की नीतियाँ ऐसी हैं कि राज्य पर दबाव और बढ़ रहा है। AAP की सरकार राज्य में 2022 में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। AAP ने महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का वादा भी किया था।

पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग के अनुसार, पंजाब की AAP सरकार 2022-23 में राज्य में मुफ्त बिजली देने में ₹18,714 करोड़ खर्च करने पड़ेंगे। इसमें से ₹8,809 किसानों को मुफ्त बिजली देने में ₹5,886 करोड़ रूपए परिवारों को 300 यूनिट बिजली देने में और ₹1,427 करोड़ का खर्चा हुआ। इसके अलावा, बसों में महिलाओं को मुफ्त सवारी करवाने का भी सरकार पर बड़ा बोझ पड़ रहा है।

राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा देने में AAP सरकार को ₹550 करोड़ खर्च करने पड़े हैं। इसके अलावा भी राज्य सरकार कई ऐसी स्कीम लाने के विचार कर रही हैं, जिसमें और खर्चा होगा। ऐसे में जिस राज्य को लगातार कर्ज चुकाने के लिए ही कर्ज लेना पड़ रहा हो, वह मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने में खर्चा करे, आर्थिक रूप से यह कहीं से बुद्धिमान नहीं सिद्ध होते।

पंजाब कर्ज के बोझ तले, मुख्यमंत्री एयरक्राफ्ट लेने चले

भले ही पंजाब कर्जे के बोझ तले दबा है और उसकी आर्थिक हालत खस्ता है लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री की शौकीनियों में कोई कमी नहीं आई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अगस्त 2023 में एक 10 सीटर विमान लेने के लिए निविदा निकाली थी।

यह निविदा तब निकाली गई जब राज्य के पास पहले से एक हेलिकॉप्टर है जिसका उपयोग लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान करते हैं। इस निविदा के आने के बाद आरोप लगाया गया था कि इस लीज पर लिए गए एयरक्राफ्ट का उपयोग अरविन्द केजरीवाल करेंगे। ट्विटर पर जब भगवंत मान की सरकार की आलोचना हुई तो यह निविदा हटा दी गई। पंजाब पुलिस ने भी निविदा डालने वाले RTI एक्टिविस्ट को धमकाया भी।

पंजाब की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुख्यमंत्री भगवंत मान ज्यादातर समय अपनी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल के स्वागत सत्कार में लगे रहते हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल दिसम्बर 2023 में पंजाब में विपश्यना के लिए पहुँचे तो भी वहाँ भगवंत मान भी पहुँचे थे। इसके पहले केजरीवाल का लगभग हर माह एक पंजाब दौरा होता रहा है।

जो पैसा मिला उसे खर्च नहीं किया, उलटे कर्ज माफ़ी की लगाई गुहार

पंजाब सरकार केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगा रही है कि उसे अधिक कर्ज नहीं लेने दिया जा रहा है। कहीं वह आरोप लगाती है कि केंद्र ने उसके फंड रोक कर दिया है। हालाँकि, पंजाब को जो पैसा अभी केंद्र सरकार ने दिया भी है, वह उसे भी सही से खर्च नहीं कर पा रही है।

भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) सरकार केंद्र से मिले ₹11,000 करोड़ रुपए में से ₹8,000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। फंड का रोना रोने वाली AAP सरकार वित्त वर्ष 2023-24 के 9 महीने बीतने के बाद इसमें से मात्र ₹3,000 करोड़ ही खर्च सकी है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है, जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

एक तरफ खुद को मिला पैसा नहीं खर्च कर पा रही तो दूसरी तरफ इस बात के लिए जोर लगा रही है कि उसे पाँच सालों तक कर्ज ना चुकाना पड़े। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को अक्टूबर 2023 में लिखे एक पत्र में कहा है कि वो केंद्र की मोदी सरकार को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच साल तक किसी भी प्रकार के कर्जे की वसूली ना हो।

क्या होनी चाहिए आदर्श स्थिति?

पंजाब पर जितना वर्तमान में कर्ज है, वह कहीं से भी जायज नहीं है। ना ही उसका राजकोषीय घाटा नियमों के अनुसार है। दरअसल, देश में राज्यों के वित्तीय प्रबन्धन के विषय में बनाए गए कानून राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत किसी भी राज्य का कर्ज उसकी कुल GSDP से 20% से अधिक नहीं होना चाहिए।

कुछ मामलों में छूट के साथ भी इसे अधिकतम 25% रखने की हिदायत दी गई है। पंजाब पर GSDP का 50% कर्ज है और इसके घटने के कोई आसार नहीं हैं। वहीं, अगर राजकोषीय घाटे की बात की जाए तो यह भी FRBM एक्ट के तहत GSDP का 3% होना चाहिए। पंजाब में यह भी 5.2% है। हालाँकि पंजाब सरकार इसे कम करने का कोई प्रयास नहीं करती दिखती।

0 रन में भारत ने खो दिए आखिर के 6 विकेट, स्पिनरों ने नहीं डाली एक भी गेंद; फिर भी 642 गेंद में ही जीत लिया दक्षिण अफ्रीका

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 विकेट से हराकर दूसरा टेस्ट मैच जीत लिया है। केपटाउन में खेला गया यह मैच टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे छोटा मैच रहा। महज डेढ़ दिन में ही इस मैच का फैसला हो गया। पूरा मैच केवल 642 गेंदों में समाप्त हो गया। इस जीत के साथ भारत ने टेस्ट सीरिज को बराबरी पर खत्म कर लिया है। पहले मैच में उसे पारी और 32 रनों से हार झेलनी पड़ी।

केपटाउन टेस्ट मैच में जीत के बावजूद एक शर्मनाक रिकॉर्ड भारत के नाम भी दर्ज हुआ है। पहली बारी के आखिरी 6 विकेट भारत ने बिना कोई रन बनाए खो दिए। ऐसा करने वाली वह पहली टीम है। भारत के सामने दक्षिण अफ्रीकी टीम ने 79 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे टीम इंडिया ने महज 12 ओवरों में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। दिलचस्प यह है कि इस मैच में किसी भी स्पिनर ने एक भी गेंद नहीं डाली। दक्षिण अफ्रीकी टीम में केशव महाराज और भारतीय टीम रवींद्र जडेजा बतौर स्पिनर खेल रहे थे।

भारतीम टीम ने तेजी से हासिल किया लक्ष्य

भारतीय टीम ने पहली पारी में अपने आखिरी 6 विकेट बिना रन बनाए ही खो दिए थे। इसलिए भारतीय टीम को पता था कि दक्षिण अफ्रीका की तरफ से रखा गया 79 रनों का लक्ष्य भी मुश्किल खड़ा कर सकता है। ऐसे में भारतीय टीम ने तेज-तर्रार अंदाज में लक्ष्य का पीछा किया और महज 12 ओवरों में ही तीन विकेट खोकर 80 रन बना डाले। टीम इंडिया के लिए ओपनर यशस्वी जायसवाल ने 23 गेंदों पर 6 चौकों की मदद से 28 रन बना डाले।

टीम इंडिया को पहला झटका 44 रन के स्कोर पर लगा। इसके बाद आते ही शुबमन गिल ने हाथ दिखाने शुरू कर दिए। हालाँकि उन्हें 10 रनों के कुल योग पर ही रबाडा ने क्लीन बोल्ड करके पवैलियन लौटा दिया। इसके बाद विराट कोहली 11 गेंदों पर 12 रन तीन चौकों की मदद से बनाए। वे तब आउट हुए जब टीम को जीत के लिए महज 4 रनों की जरूरत थी। श्रेयस अय्यर ने विजयी चौका लगाया। वहीं कप्तान रोहित शर्मा 22 गेंदों पर 16 रन बनाकर नाबाद रहे। कगिसो रबाडा, नांद्रे बर्गर और मैक्रो जेन्सन ने एक-एक विकेट लिए।

दक्षिण अफ्रीकी टीम को मार्करम का सहारा, बचाई लाज

इस टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीकी टीम पहली पारी में महज 55 रनों के कुल स्कोर पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में 153 रन बनाए थे। भारतीय टीम ने आखिरी 6 विकेट बिना कोई रन जोड़े गवाँ दिए थे। इसके बावजूद भारतीय टीम को 98 रनों की बढ़त मिली थी। दक्षिण अफ्रीका की टीम ने अपनी दूसरी पारी में सभी विकेट खोकर 176 रन बनाए और इस तरह से कुल 78 रनों की बढ़त हासिल कर टीम इंडिया के सामने 79 रनों का लक्ष्य रखा था। दक्षिण अफ्रीकी टीम की तरफ से अकेले एडेन मार्करम ने शानदार बल्लेबाजी की और महज 103 गेंदों पर 106 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी की बदौलत ही दक्षिण अफ्रीकी टीम भारत के सामने 79 रनों का लक्ष्य रख सकी थी।

सिराज मैन ऑफ द मैच, बुमराह-डीन एल्गर बने मैन ऑफ द सिरीज

इस टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले मोहम्मद सिराज को मैन ऑफ द मैच दिया गया। सिराज ने पहली पारी में महज 15 रन देकर 6 विकेट लिए थे। उन्होंने दूसरी पारी में एक विकेट लिया, वो भी शतक लगाने वाले एडेन मार्करम का। इस मैच में सिराज से एक विकेट ज्यादा यानी 8 विकेट लेने वाले बुमराह को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। उन्हें अपना आखिरी टेस्ट मैच खेलने वाले डीन एल्गर के साथ संयुक्त रूप से इस पुरस्कार के लिए चुना गया। बुमराह ने पहले टेस्ट में 5 विकेट लिए थे। इस तरह उन्होंने सीरीज में सर्वाधिक 13 विकेट लिए। वहीं, डीन एल्गर ने पहले मैच में शतक लगाया था और सीरीज में कुल 201 रन बनाकर मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। एल्गर ने पहले ही इस टेस्ट सीरीज के बाद संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था।

अब तक का सबसे छोटा टेस्ट मैच

ये टेस्ट मैच कई मायने में बेहद अलग रहा। इस टेस्ट मैच को क्रिकेट के इतिहास का सबसे छोटे टेस्ट मैच के तौर पर याद रखा जाएगा। सिर्फ 642 गेंदों का खेल हुआ। इससे पहले साल 1932 में ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया सबसे छोटा मैच 656 गेंदों का था। वेस्ट इंडीज-इंग्लैंड के बीच 1935 में महज 672 गेंदों का मैच खेला गया था। ये टेस्ट मैच भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया रनों के लिहाज से सबसे छोटा मैच भी रहा। इस टेस्ट मैच में 33 विकेट के बदले महज 464 रन बने।

5 मंडप, 392 खंभे, 44 द्वार… नागर शैली से बना है 1000 साल तक टिकने वाला राम दरबार: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले जान लें अयोध्या मंदिर की हर एक बात

अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है। राम मंदिर का पहला तल बनकर तैयार हो चुका है। अब मंदिर से जुड़ी ऐसी बातें सामने आई हैं, जो भगवान राम की जन्मस्थली पर बन रहे मंदिर की दिव्यता, भव्यता और नव्यता का परिचय करा रही हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण भारत की परंपरागत नागर शैली में हो रहा है, जो अगले 1000 वर्षों तक दुनिया में बदलाव का साक्षी रहेगा।

गर्भगृह में रामलला की 51 इंच लंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसमें रामलला 5 साल के बाल स्वरूप में होंगे। प्रतिमा में रामलला को खड़े हुए दिखाया गया है। प्रतिमा ऐसी है जो राजा का पुत्र और विष्णु का अवतार लगे। गर्भगृह में रामलला कमल के फूल पर विराजमान होंगे। कमल के फूल के साथ उनकी लंबाई करीब 8 फुट होगी।

भगवान राम को समर्पित रामलला का यह मंदिर तीन मंजिला होगा। इसमें 5 मंडप होंगे। खास बात ये है कि भगवान राम के बाल स्वरूप यानि रामलला भूतल पर विराजमान रहेंगे। वहीं, दूसरे तल पर रामदरबार रहेगा। इस राम दरबार में भगवान राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ-साथ भक्त बजरंग बली भी रहेंगे।

रामलला के भव्य मंदिर की खासियत:

रामलला का भव्य मंदिर परंपरागत नागर शैली में बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई (पूर्व से पश्चिम तक) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊँचाई 161 फीट रहेगी। रामलला का मंदिर तीन मंजिला का होगा। प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई 20 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 392 खंभे और 44 द्वार होंगे।

रामलला मंदिर निर्माण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रामलला के मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालस्वरुप रामलला (श्रीरामलला का विग्रह) तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा। रामलला के मंदिर में 5 मंडप होंगे। इन मंडपों के नाम- नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप हैं।

भव्य राममंदिर का निर्माण लगातार जारी (फोटो साभार : X_ShriRamTeerth)

मंदिर की खंभों और दीवारों में देवी-देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियाँ उकेरी जा रही हैं। रामलला के मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियाँ चढ़कर सिंहद्वार से होगा। दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी। मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी।

परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, माँ भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा। उत्तरी भुजा में माँ अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा। रामलला के मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा। रामलला के मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी।

रामलला के मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे। दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णो‌द्धार किया गया है एवं तथा वहाँ जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।

रामलला के मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है। रामलला के मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है। इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है। रामलला के मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊँची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है।

मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे। 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

रामलला के मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा।

भक्तों के स्वागत के लिए तीर्थ क्षेत्र पुरम बनकर तैयार

रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी 2024 को होगा। उससे एक सप्ताह पूर्व से तमाम तरह की पूजा अर्चना शुरू हो जाएगी। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का साक्षी बनने के लिए हजारों गणमान्य हस्तियों को बुलाया गया है। वहीं, इन भक्तों को ठहराने के लिए 15 हजार लोगों की क्षमता वाले टेंट सिटी ‘तीर्थ क्षेत्र पुरम’ को तैयार किया गया है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 लोगों को निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं, जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि लगभग 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा।

बॉयफ्रेंड, सलाहकार, वकील, इलेक्शन एजेंट… कौन हैं सुहान मुखर्जी, उनकी ‘जासूसी’ क्यों करवा रहीं थी महुआ मोइत्रा: सब कुछ एक साथ

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ उनके पूर्व पाटर्नर जय अनंत देहाद्राई ने पिछले दिनों सीबीआई से शिकायत की थी। सुप्रीम कोर्ट के वकील देहाद्राई ने इसमें लोकसभा की निष्कासित सांसद मोइत्रा पर खुद की जासूसी का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि अपने प्रभाव और पश्चिम बंगाल पुलिस का दुरुपयोग करते हुए मोइत्रा ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड सुहान मुखर्जी और उनकी जर्मन महिला मित्र हेलेना लेर्श (Helena Lersch) की भी जासूसी करवाई थी।

देहाद्राई का दावा है कि इस जासूसी के किस्से सुनाकर महुआ मोइत्रा उन्हें भी धमकाती रहती थी। इस शिकायत में देहाद्राई ने तीन लोगों का जिक्र किया है। इनमें से एक कारवाँ पत्रिका के संपादक और एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष अनंत नाथ, दूसरे कथित तौर पर महुआ मोइत्रा के बॉयफ्रेंड रह चुके वकील सुहान मुखर्जी और जर्मन महिला हेलेना लेर्श हैं। हेलेना चीनी कंपनी बाइटडांस (ByteDance) से जुड़ी थीं। टिकटॉक ‘TikTok’ एप इसी कंपनी का है।

कौन हैं महुआ मोइत्रा के बॉयफ्रेंड रहे सुहान मुखर्जी

वकील देहाद्राई ने अपनी शिकायत में बताया है कि टीएमसी नेता 2019 में सुहान मुखर्जी की निगरानी करवा रहीं थी। उन्होंने कहा है, “मोइत्रा ने मुझे कई मौकों पर मौखिक रूप से और 26 सितंबर 2019 को व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिए बताया था कि वह अपने एक्स ब्वॉय फ्रेंड सुहान मुखर्जी पर सक्रिय तौर से नजर रख रही थी। उसे जर्मन महिला हेलेना लेर्शके साथ सुहान का रिश्ता होने का शक था।”

फोटो साभार: Zaubacorp

जय अनंत देहाद्राई का कहना है कि मोइत्रा ने बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मदद से सुहान मुखर्जी के फोन के पूरे कॉल रिकॉर्ड हासिल कर लिए थे। उन्हें उन लोगों के बारे में सटीक जानकारी थी जो सुहान मुखर्जी के संपर्क में थे। साथ ही मुखर्जी की हर गतिविधि के बारे में भी उन्हें पता रहता था।

महुआ मोइत्रा पर जिस सुहान मुखर्जी की निगरानी करवाने का आरोप लगा है वे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। वे पीएलआर चैंबर्स के फाउंडर पाटर्नर हैं। यह फर्म जो भारत की सार्वजनिक नीति और नियामक मामलों में महारत रखती है। बकौल लॉ एशिया सुहान के पास संकट प्रबंधन, नीति निर्माण, विधायी एजेंडा का मसौदा तैयार करने का अच्छा-खासा अनुभव है।

उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर नीति और विधायी सुधारों पर सरकार के सलाहकार तौर पर भी काम किया है। मुखर्जी की केंद्र और राज्य स्तरीय पॉलिटिकल सर्कल में अच्छा खासा संपर्क है। उनके साथ महुआ के संपर्क का खुलासा मई 2023 में हुआ था। तब श्रवण कुमार यादव ने महुआ के खिलाफ चुनाव आयोग को शिकायत दी थी। उन्होंने इसमें महुआ के 2019 के चुनावी हलफनामे में विलेरविले फाइनेंशियल एडवाइजर्स लिमिटेड में अपने 4,900 शेयरों का खुलासा न करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत से ही सामने आया कि महुआ जनवरी 2010 से मार्च 2016 तक इसकी निदेशक थीं।

सुहान मुखर्जी 14 जुलाई 2009 से विलेरविले फाइनेंशियल एडवाइजर्स लिमिटेड के निदेशक रहे थे। यही नहीं सुहान के पिता मशहूर चित्रकार स्वरूप मुखर्जी भी इस कंपनी में निदेशक हैं। यही नहीं सुहान 2002 से अमरचंद और मंगलदास और सुरेश ए श्रॉफ एंड कंपनी (एएमएसएस) से भी जुड़े हुए हैं। इससे पहले वो विश्व बैंक में विश्लेषक रहे थे।

महुआ मोइत्रा ने 2010 में कॉन्ग्रेस को अलविदा कह टीएमसी का दामन थामा लिया और इसी साल वह विलेरविले निदेशक बनी। वहीं मई 2012 में सुहान को सार्वजनिक सूचना अवसंरचना और नवाचार (PIII) में भारत के प्रधानमंत्री के सलाहकार कार्यालय में सैम पित्रोदा के सलाहकार के तौर पर नियुक्ति मिली।

यही वजह रही कि जून 2013 में सुहान ने पीएमओ में अपने सलाहकार के पद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एएमएसएस की जॉब छोड़ दी। इसके कुछ महीने बाद ही नवंबर 2013 में उन्होंने नीति, कानून और विनियमन चैंबर्स (पीएलआर) की स्थापना की। इस दौरान वो पीएमओ में पित्रोदा के कार्यालय के विशेषज्ञ सलाहकार बने रहे।

लीगली इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएलआर चैंबर्स की स्थापना ग्राहकों और गैर सरकारी संगठनों को कानूनी, सार्वजनिक नीति और वैध लॉबिंग सेवाएँ देने के लिए की गई थी। ये सब पीएमओ में रहते ही सुहान ने शुरू किया। मोइत्रा ने मार्च 2016 तक सुहान की कंपनी के निदेशक के तौर पर काम किया था। मई 2016 में मोइत्रा ने अपने चुनाव खर्चों की जानकारी में सुहान का उनके चुनाव एजेंट के तौर पर जिक्र किया था।

भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक हर उम्मीदवार एक चुनाव एजेंट नियुक्त करने का हकदार है। ये चुनाव एजेंट उम्मीदवारों के चुनाव खर्च का खाता बनाने जैसे कई अहम काम करते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो मोइत्रा के लिए सुहान एक भरोसेमंद शख्स थे।

हालाँकि देहाद्राई की शिकायत में मोइत्रा और सुहान के बीच मतभेद की बात भी है। इसके बाद भी सुहान ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार के लिए काम करना जारी रखा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में कार्य किया और कोयला घोटाले में अभिषेक बनर्जी की पैरवी की।

कैसे हुई हेलेना लेर्श की एंट्री

हेलेना लेर्श जुलाई 2021 से चीनी कंपनी बाइट डांस में पब्लिक पॉलिसी इमर्जिंग मार्केट्स की उपाध्यक्ष और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की ग्लोबल हेड हैं। इससे पहले वह अक्टूबर 2018 से अगस्त 2021 तक बाइटडांस में ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी की निदेशक थीं। लेर्श इंस्टाग्राम और गूगल जैसे तकनीकी दिग्गजों के साथ काम भी कर चुकी हैं। इसी वक्त मोइत्रा ने कथित तौर पर लेर्श और सुहान की निगरानी कर उनके बीच अफेयर का दावा किया था।

(य​ह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर आप विस्तार से इसे पढ़ सकते हैं। इसका हिंदी में भावानुवाद रचना वर्मा ने किया है)

कारसेवकों संग आए अयोध्या, पुलिस ने पहले मारी गोली फिर जबरन जलवाया शव: रामलला के बलिदानी ‘पोस्टमैन’ को जानते हैं आप?

अयोध्या के रामजन्मभूमि पर निर्माणाधीन मंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा, जिसके लिए तैयारियाँ युद्ध स्तर पर चल रही हैं। इस मौके पर देश और दुनिया भर के रामभक्त उन कारसेवकों को याद कर रहे हैं, जिन्होंने मुगल काल से मुलायम काल तक राम के नाम पर खुद को बलिदान कर दिया।

उन्हीं ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में से एक हैं उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी रमेश चंद्र मिश्रा। ऑपइंडिया ने रमेश चंद्र के घर जा कर वर्तमान हालातों की जानकारी ली। मिश्रा के परिजनों ने राममंदिर आंदोलन के दौरान की घटनाओं और उनके परिजनों को याद किया।

प्राण गए पर भक्ति बरकरार

रमेश चंद्र मिश्रा मूलतः गोंडा जिले के टिकरी क्षेत्र के निवासी थे। उनका गाँव बैरीसालपुर है, जो कि अयोध्या से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। जब हम उनके घर पहुँचे तो वह बंद मिला। घर के बाहर शिवलिंग स्थापित है और रोशनदानों में भगवान कृष्ण के चित्र उकेरे गए हैं। ॐ और स्वास्तिक निशान जैसे वैदिक चिन्ह घर की दीवालों पर दिखे।

उनके परिवार के बारे में हमने ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि रमेश मिश्रा के बलिदान के बाद उनका परिवार बैरीसालपुर छोड़कर अयोध्या में जाकर बस गया है। हमने पाया कि रामजन्मभूमि के लिए 3 दशक पहले खुद को न्योछावर करने वाले रमेश मिश्रा का नाम अभी तक गोंडा के ग्रामीणों के जेहन में ताजा है।

घर की दीवाल पर लगा रामजन्मभूमि प्रतीकत्मक मंदिर का चित्र

भाजपा विधायक ने सड़क पर लगवाया स्मृति गेट

गाँव से निकलते हुए हमने पाया कि भोगचंद से टिकरी को जोड़ने वाले लिंक मार्ग पर स्थानीय विधायक द्वारा रमेश चंद्र मिश्रा का स्मृति द्वारा लगवाया गया है। लोगों की यात्रा सुखद और सुरक्षित होने की प्रार्थना के साथ बने इस गेट को भाजपा विधायक रमापति शास्त्री द्वारा लगवाया गया है।

इस गेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोंडा के स्थानीय सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के नाम और चित्र छपे हुए हैं। इस गेट का नाम ‘स्वर्गीय श्री रमेश चंद्र मिश्रा स्मृति द्वार’ रखा गया है। रमेश मिश्रा के परिजनों के मुताबिक, यह गेट लगभग 3-4 माह पहले लगावाया गया है।

रमेश चंद्र मिश्रा के गाँव के पास मुख्य सड़क पर लगा स्मृति गेट

रामजन्मभूमि के बगल आकर बसा परिवार

रमेश चंद्र मिश्रा का परिवार अब अयोध्या शहर में रामजन्मभूमि से महज 3 किलोमीटर दूरी पर आकर बस गया है। हालाँकि, गाँव में भी उनका आना-जाना लगा रहता है। रमेश चंद्र मिश्रा के 4 बेटे हैं। उनकी पत्नी का नाम सुशीला देवी था, जो अब दुनिया में नहीं हैं। रमेश चंद्र के बेटे फ़िलहाल सरकारी व प्राइवेट नौकरियों के साथ खेती-बाड़ी कर के परिवार का गुजारा चलाते हैं।

रमेश मिश्रा के बेटे प्रभाकर मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि पिता की मौत के बाद उनकी माता मानसिक तौर पर टूट चुकी थीं। हालाँकि, अपनी संतानों का मुँह देखकर उन्होंने हिम्मत बाँधी और अपने बाल-बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा किया। हालाँकि, लगभग 8 साल पहले सुशीला देवी का भी देहांत हो गया।

करते थे सरकारी नौकरी, फिर भी निकले बलिदान देने

रमेश चंद्र मिश्रा के एक अन्य बेटे दिवाकर नाथ मिश्रा ने ऑपइंडिया को 30 अक्टूबर 1990 की घटना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि उनके गाँव बैरीसालपुर में दिल्ली, पंजाब सहित कई अन्य प्रदेशों के कारसेवक जमा थे। वो सभी किसी भी हाल में अयोध्या पहुँचना चाहते थे, लेकिन रास्ते में पुलिस फ़ोर्स उन्हें पकड़ रही थी।

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने उनके रहने-खाने आदि का इंतजाम किया था। तब रमेश चंद्र डाक विभाग में पोस्टमैन की नौकरी करते थे। उनको गाँव के कई ऐसे रास्ते पता थे, जो पुलिस की जानकारी में नहीं थे। रमेश मिश्रा ने अपने गाँव और आसपास के निवासियों का एक जत्था बनाया और बाहरी कारसेवकों के साथ रामजन्मभूमि की तरफ कूच कर गए।

रामजन्मभूमि के पास हुए बलिदान

दिवाकर नाथ मिश्रा ने हमें बताया कि उनके पिता घर से सबको बताकर निकले थे। वो तमाम रास्तों से सड़क पर तैनात पुलिस वालों से बचते-बचाते अयोध्या शहर में पहुँच गए। यहाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोलियाँ चलाई गईं। ये गोलियाँ रमेश चंद्र के पेट में लगीं और वो बलिदान हो गए। उनका शव अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में रखा गया था।

दिवाकर मिश्रा ने बताया कि जब उनके पिता रमेश चंद्र मिश्रा लौटकर घर नहीं पहुँचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। साथ गए जत्थे से पूछा गया और आखिरकार जानकारी मिली कि रमेश चंद्र मिश्रा वीरगति को प्राप्त हो गए। बताया जा रहा है कि रामजन्मभूमि के थोड़ी ही दूर पहले वो गोलियों का शिकार हुए थे। गोली उनके पेट को छेद कर आर-पार हो गई थी।

नहीं करने दिया सनातन परम्परा से अंतिम विधि-विधान

रमेश मिश्रा के बेटे दिवाकर ने हमें आगे बताया कि वो अपनी माँ के साथ अयोध्या के लिए निकले, लेकिन अयोध्या की सीमा पर तैनात पुलिस ने उन्हें शहर में घुसने नहीं दिया। बहुत रोने और मिन्नत के बाद आखिरकार कुछ लोग अयोध्या में प्रवेश कर पाए। यहाँ वो श्रीराम अस्पताल पहुँचे। वहाँ कई लाशें रखी हुईं थीं, जिनमें से काफी खोजबीन के एक कोने में रमेश चंद्र का निर्जीव शव पड़ा हुआ था।

पति का पर्थिव शव लेकर सुशीला देवी अपने बेटे के साथ गाँव के लिए निकलीं तो उनको अयोध्या की सीमा पर फिर रोक लिया गया। तब दिवाकर मिश्रा की उम्र लगभग 20 साल की रही होगी। दिवार ने हमें आगे बताया कि वो अपनी माँ के साथ पुलिस वालों से मिन्नत करते रहे कि उन्हें लाश गाँव ले जाने दी जाए। हालाँकि इस मिन्नत का तैनात पुलिसकर्मियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

दिवाकर ने बताया, “एक पुलिस अधिकारी ने मेरी माँ को धमकाते हुए कहा कि या तो लाश अभी और यहीं जलाओ, वरना इसे छीन कर नदी में फेंक देंगे।” रमेश के परिजनों ने वैदिक विधान में रात में दाह संस्कार न होने की दुहाई दी, लेकिन पुलिस वालों पर फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार रमेश चंद्र की विधवा और उनके बेटे ने ही हार मान ली और प्रशासन के कहे के मुताबिक शव ले कर पास के श्मशान गए।

लाश ले जाने के दौरान भी उनके साथ पुलिस बल चलता रहा। आखिरकार सनातन पद्धति के विपरीत आधी रात को बिना धुलने आदि की प्रक्रियाओं को पूरा किए ही रमेश चंद्र मिश्रा का अंतिम संस्कार अयोध्या के श्मशान में कर दिया गया। हमसे बात करते हुए दिवाकर मिश्रा भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वो समझ सकते हैं कि इस दौरान वहाँ मौजूद उनकी माँ पर क्या बीती रही होगी।

बलिदानी रमेश के बेटे दिवाकर और प्रभाकर (बाएँ से)

पिता का बने स्मारक

रमेश चंद्र मिश्रा के बेटों को इस बात का दुःख है कि उनको पिछले 3 दशकों में भुला दिया गया। दुखी होकर दिवाकर ने कहा, “हमें पूछने वाला कोई नहीं है।” राम मंदिर बनने से बेहद खुश इस परिवार ने इसे अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी होने जैसा माना। हालाँकि यह परिवार उम्मीद कर रहा है कि उनके बलिदानी पिता का भी एक स्मारक अयोध्या में सरकार द्वारा बनाया जाएगा, जो भविष्य के रामभक्तों को धर्म के लिए मरने-मिटने की प्रेरणा देगा।

जिस कॉन्ग्रेस नेता ने कहा ‘नरेंद्र गौतमदास मोदी’, उस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: FIR रद्द करने से इनकार, कहा- माफी से नहीं बच सकते

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता का नाम बिगाड़ कर फरवरी 2023 में उनका अपमान करने वाले कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत देने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की शिकायतों को रद्द करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार माफी माँग करके कार्रवाई से नहीं बच सकते।

दरअसल, पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका लगाई थी कि उत्तर प्रदेश और असम में उनके खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक मामलों को रद्द करके उन्हें राहत दी जाए। पवन खेड़ा के खिलाफ ये मामले प्रधानमंत्री मोदी का नाम ‘नरेन्द्र गौतम दास मोदी’ कहने पर लिखवाई गईं थी।

दरअसल, खेड़ा ने भारतीय कारोबारी अडानी समूह के खिलाफ आए हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए यह बात कही थी। उन्होंने पीएम मोदी के दिवंगत पिता दामोदर दास की जगह पर कारोबारी गौतम अडानी का नाम लगाया था।

इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने असम और उत्तर प्रदेश में कई जगह पर FIR दर्ज करवाई थी। इसके बाद 23 फरवरी 2023 को उन्हें गुवाहाटी पुलिस ने दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से एक विमान से उतार कर गिरफ्तार कर लिया था। उन्होंने इससे राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर 23 फरवरी 2023 को ही सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों को एक साथ करके उन्हें लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अगस्त 2023 में उन्हें लखनऊ के स्थाने कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई थी।

पवन खेड़ा ने इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने भी यही याचिका रखी थी कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया जाए। हालाँकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। इस निर्णय को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 4 जनवरी 2024 को सुनवाई हुई है।

गर्भवती गाय की हत्या से उबला तेलंगाना: घर के बाहर बँधी थी, काटकर खाल और पैर फेंक दिया, सद्दाम सहित तीन हिरासत में

तेलंगाना के करीमनगर जिले में एक गर्भवती गाय को चुरा लिया गया। गाय को गाँव के बाहर ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई। ग्रामीणों को जब चोरी की खबर मिली तो उन्होंने गाय की खोजबीन शुरू की। उन्हें गाय की जगह उसकी खाल और कुछ हड्डियाँ मिलीं। इसके बाद वो आक्रोशित हो गए। खबर है कि गाय की हत्या करने के बाद हत्यारों ने मांस को बेच दिया और हड्डी एवं खाल को वहीं छोड़ दिया।

ये वारदात तेलंगाना के करीमनगर जिले के शंकरपट्टनम मंडल स्थित मोलंगुर गाँव की है। यहाँ गजुला कुमार नाम के ग्रामीण की गाय को 31 दिसंबर 2023 की आधी रात के आसपास सद्दाम, शेख ताज और मनोज मोरे ने चुरा लिया। उनकी गाय गर्भवती थी। नए साल के पहले दिन ग्रामीणों ने सूचना दी कि गाँव के बाहर गाय के अवशेष मिले हैं, जिसमें उसकी खाल और हड्डियाँ शामिल हैं।

इस सूचना के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इस घटना के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने करीमनगर और वारंगल के बीच एनएच 563 पर विरोध प्रदर्शन किया। इस मामले में बीजेपी सांसद बंदी संजय कुमार ने आक्रोश जताया। उन्होंने गौहत्या से जुड़े विजुअल्स शेयर किया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि ग्रामीण गाय के पैर की हड्डियों को छूकर रो रहे हैं।

बंदी संजय कुमार ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “यह देखकर मेरा खून खौल रहा है कि कैसे शंकरपट्टनम मंडल के मोलंगुर गाँव में एक गर्भवती गौमाता को काटकर मार डाला गया। यह भयावह और हृदयविदारक है। तेलंगाना सीएमओ, तेलंगाना डीजीपी और करीमनगर सीपी से हम माँग करते हैं कि दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए कि दोबारा कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत भी करे।”

हुजूराबाद के एसीपी एल जीवन रेड्डी ने बुधवार (03 जनवरी 2023) को बताया कि इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ तेलंगाना गोहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम 1977 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से दोपहिया गाड़ी, गाय की खाल, हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार भी बरामद हुए हैं।

बनियान-हाफ पैंट में 8 किमी दौड़े, फिर आमिर खान की बेटी को किया कबूल: Video देख बोले नेटिजन्स- काफी Casual शादी है

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की बेटी आयरा खान और फिटनेस कोच नुपुर शिखारे की शादी इस समय चर्चा में बनी हुई है। 3 जनवरी 2024 को दोनों ने कोर्ट मैरिज की। नुपुर जिस तरीके से शादी करने मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल पहुँचे उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

नुपुर जॉगिंग करते हुए आयरा से शादी करने आए थे। उन्होंने पूरे 8 किलोमीटर की दौड़ लगाई। इस दौरान वे जिम वाले हुलिए में ही थे। उन्होंने शॉर्ट्स और बनियान पहन रखा था। वीडियो में वे ढोल बजाते, ढोल पर बैठते और नाचते भी नजर आ रहे हैं।

इसी हुलिए में होटल पहुँचने पर आमिर खान गले लगाकर उनका स्वागत करते दिखे। इसके बाद आयरा और नुपुर ने परिवारजनों की उपस्थिति में दोनों ने शादी के कागजों पर दस्तखत किए।

शादी के कागजों पर दस्तखत करते समय आयरा ने लहँगा पहन रखा था। वहीं नुपुर शिखारे एक शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स बनियान में थे। यहाँ उन्होंने और कुछ नहीं पहन रखा था। इन्हीं कपड़ो में शादी की स्टेज पर उन्होंने फोटो भी खिंचवाई।

नुपुर और आयरा की इस अनोखी शादी की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। नुपुर शिखारे के लुक और उनके जॉगिंग करके बारात लेकर जाने को लेकर भी सोशल मीडिया पर यूजर्स में बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे उनका निजी मामला बताया तो वहीं कुछ लोगों ने उन पर मीम बनाए। नम्रता दुबे नाम की यूजर ने लिखा, “काफी Casual शादी है। आमिर खान के दामाद बनियान में आए नजर।”

गौरव यादव ने लिखा, “ये शादी हो रहा है या तमाशा। आमिर खान के दामाद नुपुर शिखरे अपनी बारात में अपने दोस्तों के साथ 8 किमी रनिंग करके पहुँचे।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “ब्रो सीधा जॉगिंग से ही शादी करने चला गया।”

एक अन्य यूजर ने एक दूसरी शादी की फोटो की तुलना नुपुर शिखारे से की।

एक अन्य यूजर ने पुष्पा फिल्म के एक सीन से इसकी तुलना करते हुए एक मीम डाला।

एक यूजर ने आमिर की ही फिल्म 3 इडियट्स के एक सीन की याद दिलाई, जिसमें आमिर खान ने करीना के दूल्हे के कोट पर चटनी लगा दी थी।

नुपुर शिखारे शादी में शॉर्ट्स में क्यों पहुँचे

नुपुर शिखारे एक फिटनेस कोच हैं। वह कोविड काल के दौरान आमिर को फिटनेस सम्बन्धी ट्रेनिंग देते थे। इसी दौरान उनकी आयरा से नजदीकियाँ बढ़ी। नुपुर ने अपनी शादी में शॉर्ट्स पहनना और जॉगिंग से बरात लेकर पहुँचना इसलिए चुना कि वह लोगों को फिटनेस सम्बन्धी सन्देश देना चाहते थे। वह वैसे भी अपने इन्स्टाग्राम पर फिटनेस सम्बन्धी वीडियो डालते हैं।

हालाँकि, शादी के बाद जब नुपुर और आयरा मीडिया के सामने फोटो खिंचाने के लिए आए तो इस दौरान नुपुर ने नीले रंग की शेरवानी पहन रखी थी। यहाँ उन्होंने आमिर और अपनी पत्नी आयरा के साथ मीडिया के सामने फोटो खिंचवाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अब दोनों की शादी का एक बड़ा कार्यक्रम राजस्थान के उदयपुर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियाँ शामिल होंगी।