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दावा- मैं कट्टर ईमानदार, हकीकत- दारू से लेकर दवा तक घोटाला: मोहल्ला क्लीनिक में फर्जी अटेंडेंस से फेक लैब टेस्ट तक, जाँच CBI के हवाले

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो उसने मोहल्ला क्लीनिक शुरू किया और इसे आम जनता के लिए बेहद फायदेमंद के तौर पर खूब प्रचार-प्रसार किया गया। हालाँकि, मोहल्ला क्लिनिक के शुरुआत से विवादों का नाता रहा है। सबसे पहला विवाद सामने आया कि मोहल्ला क्लीनिक के माध्यम से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को फायदा पहुँचाया जा रहा है। हालाँकि, दवा से लेकर दारू तक घोटाले करने वाली AAP सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल अभी भी खुद को कट्टर ईमानदार बता रहे हैं।

फर्जी दवाओं के खुलासे के बाद अब डॉक्टरों की अटेंडेंस के लेकर सवाल उठे तो बवाल हो गया। अब इस मामले की जाँच सीबीआई ने शुरू की है। इस जाँच में मोहल्ला क्लीनिक से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला भी सामने आता दिख रहा है। इसमें पाया गया है कि मोहल्ला क्लिनिकों में फर्जी तरीके से लैब टेस्ट कराए गए और निजी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रुपए का फायदा पहुँचाया गया।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने फर्जी लैब टेस्ट के मामले की भी सीबीआई जाँच की सिफारिश की है। ये मामला कुछ ऐसे मोहल्ला क्लिनिक से जुड़ा पाया गया है, जहाँ डॉक्टर फर्जी तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इन क्लिनिक से सैकड़ों करोड़ रुपए के लैब टेस्ट हुए हैं। हैरानी की बात है कि जब डॉक्टर ही मोहल्ला क्लीनिक में नहीं बैठते थे तो इन लैब टेस्ट को लिखता कौन था?

सूत्रों के मुताबिक, इन लैब टेस्ट में फर्जी नंबरों का इस्तेमाल किया गया है। एक-एक मोबाइल नंबर से 15-24 लैब टेस्ट किए गए हैं। ऐसी तमाम शिकायतों की जाँच विजिलेंस विभाग कर रहा था, जिसने इसकी रिपोर्ट एलजी को सौंपी। एलजी ने इन घोटालों की जाँच सीबीआई को सौंप दी है। इसमें निजी लैब को उन टेस्ट के लिए भुगतान किया गया, जो केवल कागजों पर किए गए थे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के अस्पतालों में नकली दवाओं की आपूर्ति के बाद आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक में नकली लैब टेस्ट किए गए हैं। इस मामले में एलजी की जाँच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें कुछ आँकड़े प्रमोद कुमार सिंह नाम के एक्स यूजर ने साझा किए हैं। इसमें कहा गया है कि जाफर कलां, उजवा, शिकारपुर, गोपाल नगर, ढाँसा, जगजीत नगर और बिहारी कॉलोनी में डॉक्टर फर्जी तरीके से अपना अटेंडेंट दर्ज करा रहे थे।

इन मोहल्ला क्लिनिक से खूब लैब टेस्ट भी कराए गए। पूरी दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की जाँच में पता चला कि 11,657 ऐसे लैब टेस्ट किए गए, जिसमें मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ 0 लिखा है। इसके अलावा 8251 लैब टेस्ट में मोबाइल नंबर की जगह खाली छोड़ी गई। 3092 टेस्ट ऐसे रहे, जिसमें मोबाइल नंबर-9999999999 का इस्तेमाल किया।

इतना ही नहीं। मोहल्ला क्लिनिक द्वारा कराए गए लगभग 400 टेस्ट में मोबाइल नंबरों की शुरुआत 1,2,3,4,5 से हुई है। ऐसे नंबर भारत में इस्तेमाल नहीं होते हैं। इसके अलावा 999 ऐसे नंबरों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल 15 या अधिक बार टेस्ट के लिए किया गया है।

बता दें कि मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत दिल्ली के हर मोहल्ले में एक निःशुल्क स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है। इन क्लीनिकों में प्राथमिक चिकित्सा, दवाएँ और कुछ जाँच की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। पिछले कुछ सालों से इन क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।

इन आरोपों में कहा गया है कि डॉक्टर और स्टाफ फर्जी अटेंडेंस बनाते हैं और मरीजों को नकली दवाएँ देते हैं। जाँच में भी दवाओं का फर्जी होना पाया गया है। सीबीआई जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि मोहल्ला क्लीनिकों में भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं। यदि भ्रष्टाचार हुआ है, तो उसके जिम्मेदार कौन हैं।

इस घोटाले से दिल्ली सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा है। सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। दिल्ली सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। अरविंद केजरीवाल ने AAP सरकार को कट्टर ईमानदार बताया है।

जिसे कहते हैं हाजी मलंग की दरगाह, वो है गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर: हिंदू समूहों का दावा, बोले महाराष्ट्र के CM- मैं इसे मुक्त कराऊँगा

महाराष्ट्र के ठाणे जिला में स्थित हाजी अब्दुल रहमान उर्फ़ मलंग शाह की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि इस दरगाह के नीचे हिन्दू मंदिर हैं। उन्होंने इसकी जाँच की माँग को तेज कर दिया है। हिंदू संगठनों की इस कोशिश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ मिला है।

क्या है इस हाजी मलंग शाह की दरगाह को लेकर विवाद?

मलंग शाह दरगाह ठाणे की माथेरान पहाड़ियों पर स्थित एक दुर्ग (किला) में स्थित है। दुर्ग का नाम मलंगगढ़ है। यहीं पर हाजी मलंग शाह नाम की यह दरगाह स्थित है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह दरगाह 12वीं शताब्दी में यमन से भारत आए सूफी फकीर अब्द उल रहमान या अब्दुल रहमान की है।

दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष इस तर्क से सहमत नहीं है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुस्लिमों का दरगाह नहीं, बल्कि गुरु गोरखनाथ के गुरु और नवनाथों में से एक गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि नाथ परम्परा को समर्पित यह हिंदू मंदिर इस दरगाह के नीचे स्थित है।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?

इस दरगाह को लेकर सदियों से विवाद चला आ रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वीं शताब्दी में यहाँ मराठाओं ने इस धार्मिक स्थल का प्रबन्धन करने के लिए काशीनाथ पन्त केतकर को भेजा था। तब से आज तक काशीनाथ पंत केतकर नाम के ब्राह्मण का परिवार ही इस दरगाह का प्रबंधन देखता है।

हालाँकि, स्थानीय मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यहाँ दरगाह है और इसका प्रबन्धन एक हिंदू नहीं कर सकता। हालाँकि, बाद में इसका निर्णय एक लॉटरी के जरिए किया गया, जिसमें निर्णय केतकर के पक्ष में गया। इसके बाद इस दरगाह पर 1980 के दशक में दोबारा विवाद हुआ।

दरगाह के साथ में मंदिर होने का दावा लेकर शिवसेना के नेता आनंद दीघे ने आवाज उठाई और मछिन्द्रनाथ के मंदिर को लेकर शिवसैनिकों को यहाँ 1996 में पूजा की। इस पूजा में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी भी शामिल हुए थे। यहाँ पर हिन्दू मछिन्द्रनाथ की पूजा, आरती और रोज भोग लगाते हैं। हर पूर्णिमा को यहाँ विशेष पूजा होती है।

हिंदुओँ के साथ-साथ यहाँ मलंग शाह के अनुयायी भी पहुँचते हैं। कई बार हिन्दू श्रद्धालुओं के साथ यहाँ बदसलूकी और पूजा में व्यवधान डालने के मामले में भी सामने आए हैं। मार्च 2021 में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब आरती कर रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के सामने 50-60 मुस्लिमों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए थे। इसके अलावा भी समय-समय पर यहाँ इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिन्दू भक्तों से कहा है, “मलंगगढ़ को लेकर आपकी भावनाओं को मैं समझता हूँ। आनंद दीघे ने इस मंदिर को मुक्त करवाने को लेकर अभियान शुरू किया था। उन्होंने हमें ‘जय मलंग, श्री मलंग’ के नारे लगवाये थे। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जो जनता में बात करने के लिए नहीं होते। मैं मलंगगढ़ के विषय में आपकी भावनाएँ जानता हूँ और कहना चाहता हूँ कि एकनाथ शिंदे आपकी इच्छाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आनंद दीघे के राजनीतिक शिष्य हैं। आनंद दीघे महाराष्ट्र में शिवसेना के बड़े नेता थे और जहाँ बाल ठाकरे पार्टी का करिश्माई चेहरा थे तो वहीँ आनंद दीघे का संगठन बनाने में बड़ा हाथ माना जाता है।

अधिकारियों को बुलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची रेखा, कहा- उन पर अपमानजनक टिप्पणी न करें: रिटायर जजों को नौकर नहीं मिलने से खफा हो गया था HC

सुप्रीम कोर्ट ने नौकरशाहों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से बुलाने पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालयों के लिए एक गाइडलाइन जारी की है। इसके साथ ही अवमानना कार्यवाही में यूपी के वित्त सचिव को हिरासत में लेने और मुख्य सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। दरअसल, सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश को घरेलू नौकर नहीं उपलब्ध कराने पर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यूपी सरकार ने उसके आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण को ध्यान में रखते हुए इस पर सुनवाई की।

फैसला देते हुए CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास संविधान के अनुच्छेद 229 के तहत हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों से संबंधित नियम बनाने की शक्ति नहीं है। इसलिए, इलाहाबाद हाईकोर्ट सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए घरेलू मदद का प्रावधान करने वाले नियम नहीं बना सकते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जनवरी 2024) को एक मामले की सुनवाई में कहा कि बेहद जरूरी होने पर ही अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन इसके लिए पहला विकल्प वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का देना होगा। शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि इसके लिए संबंधित अधिकारी को पूर्व सूचना भी देनी होगी।

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि अधिकारियों को नियमित तौर पर तलब करके न्यायाधीश ‘बादशाहों’ की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। कोर्ट ने आगे कहा था कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों का पृथक्करण बनाए रखा जाना चाहिए और सुशासन आपसी सम्मान पर निर्भर करता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालतों को अवमानना कार्यवाही में भी अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की माँग करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले हाईकोर्ट को नोटिस जारी करके उनके कृत्य का स्पष्टीकरण माँगा जाना चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायाधीशों को उन अधिकारियों को अपमानित नहीं करना चाहिए, जो समन के कारण अदालत में उपस्थित हुए हैं। अधिकारियों की शारीरिक बनावट, शैक्षिक पृष्ठभूमि या सामाजिक स्थिति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पूरी कार्यवाही के दौरान खड़े रहने की भी जरूरत नहीं है। वे तब खड़े हों, जब कोर्ट को संबोधित कर रहे हों।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी अधिकारी को केवल इसलिए नहीं बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि सरकारी हलफनामे में दी गई दलीलों से न्यायाधीश के विचार नहीं मिलते हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है या तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है या दबाया गया है तो अदालत अधिकारियों को तलब कर सकती है। इसके लिए कारण भी बताना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे, “अधिकारियों के कार्य और निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं, लेकिन उन्हें बिना उचित कारण के बार-बार तलब करना स्वीकार्य नहीं है। संयम बरतना, सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ अनुचित टिप्पणियों से बचना और कानून अधिकारियों के कार्यों को पहचानना एक निष्पक्ष और संतुलित न्यायिक प्रणाली में योगदान देता है।”

‘राम मांसाहारी, खाने के लिए करता था शिकार’ – इंडी गठबंधन नेता जितेंद्र आव्हाड, इन्हीं लोगों ने बताया मंदिर मानसिक गुलामी का मार्ग

भगवान राम मांस खाते थे। भगवान राम बहुजन समाज के थे। यह दोनों बातें NCP नेता जितेंद्र आव्हाड (Jitendra Awhad) ने कही हैं। उनके इस बयान पर महाराष्ट्र बीजेपी के नेता राम कदम ने गिरफ्तारी की माँग की है। राम कदम ने कहा कि इंडी गठबंधन के नेताओं द्वारा हिंदुओं को उकसाने का काम किया जा रहा है।

महाराष्ट्र बीजेपी नेता राम कदम ने इस संबंध में पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर जितेंद्र आव्हाड के उस वीडियो को मँगवाया है, जिसमें वो भगवान राम के मांस खाने का जिक्र कर रहे। राम कदम ने कहा कि महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार में हिंदू धर्म का अपमान करने वालों को सजा मिलेगी।

जितेंद्र आव्हाड ने शिरडी में अपनी पार्टी के अध्ययन शिविर में कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए यह कह कर विवाद खड़ा कर दिया, “भगवान राम बहुजनों के राजा थे और मांसाहारी थे।” इसके बाद से ही उनका यह बयान सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इतिहास नहीं पढ़ते और राजनीति में सब कुछ भूल जाते हैं। राम हमारा है। हम बहुजनों का है। जो खाने के लिए शिकार करता था… राम कभी शाकाहारी नहीं था। वह मांसाहारी थे।”

जितेंद्र आव्हाड से जब मीडिया ने उनके बयान को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मीडिया पर ही सवाल दाग दिया कि जो आदमी 14 साल तक जंगल में रहा, वह शाकाहारी कैसे रह सकता है। एनसीपी विधायक की भाषा भी भगवान राम को लेकर तू-तड़ाक वाली रही। उन्होंने कहा,

“खाते क्या थे राजा राम? राम क्षत्रिय था। क्षत्रियों का खाना ही मांसाहारी होता है।”

बवाल को शांत कराने या माफी माँगने के बजाय जितेंद्र आव्हाड ने इस मुद्दे को और तूल दिया। इस कंर्टोवर्सी को लेकर जब उनसे पूछा गया कि तो वो तैश में आकर बोले, “क्या कंर्टोवर्सी? राम का खाना क्या था? कोई बता दे कि राम मैथी की भाजी खाता था?”

जब उनसे मीडिया ने पूछा कि क्या आप अपने कहे पर कायम रहेंगे, तो पूरे जोश से जितेंद्र आव्हाड बोले, “हैं बिल्कुल। अरे बिल्कुल कायम हैं यार। क्या आप भारत को शाकाहारी बनाना चाहते हैं? इस देश के 80 प्रतिशत लोग जो आज भी माँसाहारी हैं, वो राम भक्त ही हैं न।”

आपको बता दें कि NCP नेता जितेंद्र आव्हाड इंडी गठबंधन का हिस्सा है। यह वही गठबंधन है, जिसके नेता आए दिन राम मंदिर, अयोध्या, 370 आदि पर आग उगलते रहते हैं। मंदिर को मानसिक गुलामी का मार्ग बताते हैं लेकिन खुद क्रिसमस मनाते पाए जाते हैं।

जो था ‘दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी’, उसकी कब्र पर इज्जत देने जुटी भीड़… बम ब्लास्ट में मारे गए 103, गंभीर घायलों से बढ़ सकता है मौत का आँकड़ा

ईरान के केरमन शहर में बुधवार (3 जनवरी 2024) को जनरल कासिम सुलेमानी की कब्र के पास दो जोरदार बम धमाके हुए। इसमें 103 लोगों की मौत हो गई। वहीं 171 लोग घायल हो गए। ये धमाके जनरल सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर आयोजित एक समारोह के दौरान हुए। ईरान में जनरल कासिम सुलेमानी को अयातुल्लाह ख़ोमैनी के बाद मुल्क का सबसे प्रभावी नेता माना जाता था।

103 लोगों की मौत से ईरान में डर और शोक का माहौल है। ईरान के डिप्टी गर्वनर ने इस घटना को आतंकवादी हमला कहा है। ईरान के राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा संगठन के प्रवक्ता बाबाक येक्टा परास्ट के मुताबिक, इन विस्फोटों में लोगों की मौतों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है।

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जानकारी मिली है कि कई घायलों की हालत बेहद गंभीर है। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी सर्विस के जरिए हेलीकॉप्टर से मरीजों को करमान से राजधानी तेहरान के अस्पतालों में ले जाने की पूरी तैयारी है।

अधिकारियों के मुताबिक ये विस्फोट बैगों में रिमोट कंट्रोल के जरिए किए गए। ये विस्फोट इतने खतरनाक थे कि लोगों की लाशें तक जमीन पर टुकड़ों में बिखर गई। ईरान के सरकारी मीडिया में विस्फोटों के बाद के वीडियो और तस्वीरों से यह स्पष्ट है कि धमाका बहुत जोर का था।

इन वीडियो में सायरन बजते हुए दिख रहे हैं। घायलों की चीख-पुकार के दृश्य हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। जमीन पर गिरते हुए खून से लथपथ कई लोग चिल्लाते दिख रहे, “हमारी मदद करो। हर कोई मारा गया है।”

बताते चलें कि ईरान का पूर्व जनरल रहा कासिम सुलेमानी 3 जनवरी 2020 के दिन बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। 3 जनवरी 2024 को उसकी मौत के चार साल हुए। उसी की याद में जब उसकी कब्र के पास लोग जमा थे, तो ये दोनों धमाके किए गए।

जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद तब अमेरिका के राष्ट्रपति रहे डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सबसे बड़ी जीत करार देते हुए उसे दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी कहा था।

आतंकी हिलाल और नफीकुल को फाँसी की सजा: श्रमजीवी में कैसे हुआ था ब्लास्ट, उस पत्रकार से जानिए जो इसी ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म पर खड़ा था

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की कोर्ट ने दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने ये सजा साल 2005 में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन को आरडीएक्स से उड़ाने के मामले में सुनाई है। उस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी, तो 62 लोग घायल हो गए थे। श्रमजीवी एक्सप्रेस में धमाका 28 जुलाई की शाम को सवा 5 बजे के आसपास हुआ था। इस मामले में साल 2016 में ही कोर्ट ने अभी फाँसी की सजा सुनाए गए आतंकियों के अलावे दो अन्य आतंकियों को दोषी पाते हुए फाँसी की सजा दी थी, जिसकी सुनवाई हाई कोर्ट में लंबित है। अभी जिन दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई गई है, उसमें हरकत-उल-जेहाद-उल इस्लामी उर्फ हूजी से जुड़ा बांग्लादेशी आतंकी हिलाल उर्फ हेलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल का नफीकुल विश्वास है। इन दोनों के मामले पर करीब छह साल से बहस चल रही थी, जिस पर फैसला अब सुनाया गया है।

श्रमजीवी एक्सप्रेस को बम से उड़ाने वाली ये वारदात 28 जुलाई 2005 को हुई थी, जब राजगीर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल बोगी के परखच्चे उड़ गए थे। ये धमाका हरपालगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ था। जाँच में ये बात सामने आई थी कि दो आतंकियों ने आरडीएक्स से भरे सूटकेस को ट्रेन में रखा और चलती ट्रेन से उतर गए थे। दोनों के उतरने के कुछ समय बाद ही ये धमाका हो गया। जब ये घटना हुई, तब इस खबर का लेखक महज 14 का साल हुआ था और एक शाम पहले ही 15वें साल में उसने प्रवेश किया था। ये घटना जब घटी, तो उस समय सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर क्या माहौल था, पढ़ें…

दिनांक- 28 जुलाई 2005, समय 5.00 बजे

श्रमजीवी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से कुछ समय देरी से आने वाली थी। ट्रेन थोड़ी लेट थी, लेकिन मौसम अच्छा था। चूँकि मैं खुद बामुश्किल 10 मिनट पहले ही सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुँचा था, तो मुझे ट्रेन के लेट होने से ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी। हालाँकि अगले 15 मिनट में बेचैनी बढ़ रही थी। उस समय उसके सुल्तानपुर पहुँचने का समय करीब यही होता था, सवा 5 बजे के आसपास। श्रमजीवी एक्सप्रेस सर्दियों को छोड़ दें तो अपनी पंक्चुअलिटी के लिए मशहूर है। हालाँकि उस दिन ट्रेन समय पर नहीं पहुँची, लगा कि थोड़े समय पर आ जाएगी। पर अगले आधे घंटे तक ट्रेन के बारे में कोई अपडेट नहीं मिल पा रही थी।

समय 5.30 बजे

श्रमजीवी एक्सप्रेस के लेट होने से लोग झल्ला ही रहे थे कि खुसर-पुसर शुरू हो गई कि ट्रेन के साथ कुछ हादसा हो गया है। तब आज की तरह हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन नहीं होते थे, होते थे, लेकिन अभी की तरह नहीं। फिर इंटरनेट का जमाना नहीं था। हाँ, टेक्स्ट मैसेज का दौर था। किसी को टेक्स्ट मैसेज से ही सूचना मिली कि ट्रेन के साथ हादसा हो गया है। लेकिन क्या हादसा हुआ था, इसकी पूरी जानकारी लोगों के पास नहीं थी।

5.45 बजे शाम तक स्थिति ऐसी हो चुकी थी कि प्लेटफॉर्म पर कोई दिख नहीं रहा था। मेरे जीवन के इन 30 मिनट में मैंने उन तनावों को जिया, और लोगों के चेहरों पर दहशत देखी, जो मौत के मुँह से निकल कर आने के बाद होती है।

और पहुँची धमाके की खबर…

श्रमजीवी एक्सप्रेस में धमाके की पुष्टि होते ही हर तरफ लोग भागने लगे। इस बीच, ये अफवाह भी तेजी से फैली कि ये धमाका सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन को उड़ाने के लिए किया गया है। चूँकि सुल्तानपुर हमेशा से ही एक हाई प्रोफाइल इलाका रहा है, जहाँ एक माह पहले ही अयोध्या के पास आरडीएक्स हमला हो चुका था। ऐसे में यह अफवाह कि सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन को उड़ाने के लिए ही इस बम का धमाका किया गया था। अफवाहें तेजी से फैली कि श्रमजीवी एक्सप्रेस की जनरल बोगी, जिसमें सबसे ज्यादा भीड़ होती है, उसमें एक टाइम बम रखा हुआ था। उसका टाइम वही था, जिस समय वो आम तौर पर सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर होती थी। लोगों की जुबान पर एक ही बात थी कि सुल्तानपुर अब आतंकियों की नजर में आ चुका है।

ये सब बातें मेरे लिए इसलिए भी कभी न भुलाने वाली रही, क्योंकि तब मैं सिर्फ 14 साल का था, इसलिए जनरल टिकट से ही दिल्ली आने का सोचा था। पैसे नहीं होते थे, तो कई बार बेटिकट यात्रा भी करता था, और धमाका भी जनरल बोगी में ही हुआ। उस बोगी में, जो ट्रेन के समय से होने की सूरत में मेरे सामने खड़ी होती, या फिर उन्हीं टॉयलेट्स के पास से होकर मैं उस बोगी में जा रहा होता, जो धमाके से उड़ा दी गई थी। सोचिए, इस बात से मैं कितना हिल गया होऊँगा कि ट्रेन अगर समय से होती, तो शायद मैं भी किसी लावारिश की तरह उड़ गया होता।

मैं शाम 6 बजे के आसपास स्टेशन से निकला और जिला अस्पताल के पास से ही गुजर रहा था। हर तरफ पुलिस पहुँच चुकी थी, और सुरक्षित कॉरिडोर भी बनाए जा रहे थे। चूँकि हरपाल गंज से जौनपुर और सुल्तानपुर दोनों ही नजदीकी शहर थे, इसलिए घायलों को जौनपुर, गंभीर घायलों को वाराणसी भेजा जा रहा था। कुछ लोगों को स्थानीय लोग अपने दम पर सुल्तानपुर जिला अस्पताल भी ला रहे थे। धीरे-धीरे शहर में दहशत फैल गई थी। लोग घरों में कैद हो गए। मैं किसी तरह से सुल्तानपुर बस अड्डे से अपने गाँव के लिए मिनी बस पकड़ कर निकल गया। 28 जुलाई 2005 दिन गुरुवार… ये ऐसी तारीख है, जो हमेशा याद रहती है।

दूसरे दिन विस्तार से अखबार में मिली जानकारी

शुक्रवार की सुबह हुई। अखबार गिनती के घरों में आते थे, वो भी 8-9 बजे तक। गाँव में अक्सर देरी हो ही जाती है। सुबह विस्तार से खबर मिली कि श्रमजीवी एक्सप्रेस को आरडीएक्स से उड़ाया गया है। इस धमाके में जनरल बोगी के परखच्चे उड़ गए। 5 दर्जन से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हुए, तो एक दर्जन लोग मारे गए। अगर ये हादसा सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर होता, जहाँ मेरे जैसे दर्जनों लोग और भी उस बोगी में चढ़ने के लिए तैयार थे, जो उड़ा दी गई। ऐसे में मृतकों और घायलों का सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

इस आतंकी हमले में उसी आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था, जो पिछले कुछ सालों से लगातार आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होते रहे थे। अभी से पिछले 10 सालों में जागरुक हुई पीढ़ी आरडीएक्स के खौफ को नहीं समझ सकती। लेकिन तब ऐसा नहीं था। उन दिनों अक्सर देश भर में धमाकों की सूचना आती थी। अगले साल ही मुंबई में ट्रेनों में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। अब पहले की तुलना में ऐसे धमाकों की संख्या बेहद कम हो गई है। साल 2005 में हुआ वो आतंकी हमला मुझे हर उसी आतंकी हमले की सूचना में अंदर से हिला देता है, जिसे मैंने 18 साल पहले महसूस किया था।

अब जबकि इस आतंकी हमले से जुड़े बाकी दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई गई है, तो मन में थोड़ा सुकून सा हुआ है। हालाँकि न्याय मिलने में बहुत समय लग गया। इन आतंकियों को फाँसी कब होगी, ये भी नहीं मालूम। लेकिन उस धमाके में जो लोग मारे गए, या जो लोग बुरी तरह से घायल हुए, वो और उनके परिजन किस हाल में होंगे, ये भी मुझे नहीं पता। शायद वो भी इस खबर को सुनकर उस दहशत को महसूस कर काँप ही उठे होंगे।

फिल्मों की फेक रिव्यू करण जौहर ने कबूली, कहा- तारीफ करने के लिए नकली लोगों को भेजती है उनकी पीआर टीम

निर्माता-निर्देशक करण जौहर पर बॉलीवुड में नेपोटिज्म को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहते हैं। अब उन्होंने यह बात कबूली है कि फिल्मों को फ्लॉप होने से बचाने के लिए वे फेक रिव्यू भी करवाते हैं। उन्होंने कहा कि एक औसत फिल्म को हिट कराने के लिए तमाम तिकड़में अपनानी पड़ती हैं। इसके लिए फर्जी तरीके से रिव्यू और पब्लिसिटी स्टंट का रास्ता भी चुनना पड़ता है। साथ ही करण जौहर ने ये भी कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है।

उन्होंने फिल्मों का फेक रिव्यू कराने का खुलासा गलाटा प्लस की राउंड टेबल कन्वर्सेशन के दौरान किया। इस बातचीत में रानी मुखर्जी, तापसी पन्नू, संदीप वेंगा रेड्डी स​हित बॉलीवुड से जुड़े कई लोग शामिल थे। करण जौहर ने कहा कि कई बार उन्हें लोग ऑनलाइन गलत तरीके से परेशान करते हैं। कई बार फिल्मों के बारे में निगेटिव बातें फैलाई जाती हैं, तो गुस्सा आता है। कई बार लोग वायरल होने के लिए बकवास बातें फिल्म के बारे में करते हैं। ऐसी चीजें वाकई परेशान करने वाली होती है।

उन्होंने कहा कि इसलिए कभी-कभी अगर उनकी कोई फिल्म औसत होती है, तो उसका बिजनेस बढ़ाने के लिए, उसके बारे में अच्छी बातें कहने के लिए मैं भी लोगों की सेवाएँ लेता हूँ। अच्छी बातों को कहने के लिए पैसे भी देता हूँ। करण जौहर ने कहा, “कभी-कभी हमारी पीआर टीम नकली लोगों को को फिल्म की तारीफ करने के लिए भेजते हैं।” उनकी ये बात सुनने के बाद बातचीत में शामिल रहे अन्य सितारों ने हैरानी भी जताई।

इसके बाद जौहर ने कहा, “देखिए, कभी-कभी आप भी अपनी छाप छोड़ने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। एक निर्माता के रूप में आप अपनी फिल्म हर किसी को दिखाना चाहते हैं। कई बार लोग तारीफ करते हैं, तो मैं खुश भी होता हूँ।” उन्होंने कहा कि मैं तो हरेक रिव्यू को सुनता हूँ। हर बात पर मेरी नजर होती है। जब फिल्म अच्छा कर रही होती है, तो मैं चुपचाप अपने घर में बैठता हूँ। किसी को इंटरव्यू नहीं देता। उन फिल्मों को प्रचार की जरूरत नहीं रहती है। ऐसे में मैं शांत बैठ सकता हूँ। पर कोई फिल्म अगर औसत है, तो उसके बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए आपको कुछ उपाय भी करने पड़ते हैं।

नीचे लगे वीडियो में आप 1 घंटा 25 मिनट के बाद करण जौहर की ये बातें सुन सकते हैं।

राउंडटेबल बातचीत में करण जौहर ने कहा, “अगर आप ध्यान दें, जो लोग सिनेमाघरों के बाहर वोक्स पॉप करते हैं, जो मीडिया से बात करते हैं, वो चाहते हैं कि वो ऐसी बातें कहें कि उनकी बातें सोशल मीडिया पर वायरल हों। उन्हें पब्लिसिटी मिले। इसलिए वे जोर-शोर से रिएक्शन देते हैं। उन्हें वायरल होने के लिए ये सब बकवास करनी होती है।”

अयोध्या के निषाद परिवार को PM मोदी ने लिखी चिट्ठी, भेजा उपहार: घर जाकर पी थी चाय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर 2023 को अयोध्या में कई परियोजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन किया था। इससे पहले उन्होंने मीरा माँझी नाम की एक महिला के घर जाकर चाय भी पी थी। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ काफी बातचीत की थी। अब पीएम मोदी ने मंगलवार (2 जनवरी 2024) को इस परिवार को पत्र लिखकर नए साल की बधाई दी है। इसके साथ ही गिफ्ट भी भेजा है।

प्रधानमंत्री ने मीरा माँझी को चिट्ठी भेजा है। इसके साथ ही परिवार को उपहार भी भेजा है। उपहार में प्रधानमंत्री ने चाय का एक सेट, रंगों वाली ड्राइंग बुक भेजी है। इसके साथ ही और भी बहुत कुछ भेजा गया है। इसकी तस्वीर भी शामने आई है, जिसमें परिवार के बच्चे गिफ्ट पैक को लिए हुए हैं।

मीरा माँझी को लिखी गई चिट्ठी में पीएम ने कहा है, “आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को नव वर्ष 2024 की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में आप और आपके परिवार के सदस्यों के साथ मुलाकात और आपके द्वारा बनाई गई चाय पीकर बहुत प्रसन्नता हुई। अयोध्या से आने के बाद मैंने कई टीवी चैनलों पर आपका इंटरव्यू देखा।”

पीएम मोदी ने पत्र में आगे लिखा, “उनमें आपका व परिवार के अन्य सदस्यों का आत्मविश्वास और जितने सरल व सहज ढंग से आप लोगों ने अपने अनुभवों को साझा किया, वह देखकर अच्छा लगा। आप जैसे मेरे करोड़ों परिवारजनों के चेहरों की यह मुस्कान ही मेरी पूँजी है, सबसे बड़ा संतोष है, जो मुझे देश के लिए जी-जान से कार्य करने की नई ऊर्जा देता है।”

उज्ज्वला लाभार्थी के रूप में मीरा का जिक्र करते हुए पीएम ने लिखा, “आपका उज्ज्वला योजना का 10 करोड़वीं लाभार्थी बनना एक आँकड़ा भर नहीं है, बल्कि मैं इसे करोड़ों देशवासियों के बड़े-बड़े सपनों व संकल्पों के पूर्ण होने की एक कड़ी के रूप में देखता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अमृतकाल में आप जैसे आकांक्षा से परिपूर्ण करोड़ों देशवासियों की जीवटता और उत्साह एक भव्य व विकसित भारत के निर्माण के हमारे लक्ष्य को सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाएगा।”

बता दें कि अयोध्या की रहने वाली मीरा माँझी पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की 10 करोड़वीं लाभार्थी हैं। भाजपा सरकार ने 10 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य प्राप्ति की अंतिम लाभार्थी मीरा माँझी हैं। यही कारण है कि पीएम मोदी उनके घर पहुँचे थे।

मीरा के घर पर प्रधानमंत्री ने काफी देर तक गपशप की थी। इस दौरान परिवार के साथ उन्होंने फोटो भी खिंचवाए थे। परिवार के बच्चों के साथ पीएम मोदी ने सेल्फी भी ली थी। ये करने के बाद पीएम मोदी ने मीरा माँझी के परिवार को 22 जनवरी 2024 को राममंदिर में रामलला की होने वाली प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में आमंत्रित भी किया था।

मुलायम सरकार में ‘राम भक्ति’ था अपराध? जिन्होंने भोगी सजा उन्होंने दिखाया जेल वाला ‘कागज’, OpIndia को सुनाई पीड़ा

राम मंदिर आंदोलन के दौरान ना जाने कितने कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इससे पूरा देश परिचित है। अब इन बलिदानियों का सपना साकार हो रहा है। अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयार है। इन तमाम कहानियों के इतर, हम आज आपके सामने ला रहे हैं उस जिंदा कारसेवक की कहानी, जिसकी रामभक्ति उसके लिए अपराध बन गई।

बात सन 1990 की है। पूरे देश से लोग कारसेवा के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या जा रहे थे। देश के तमाम हिस्सों की तरह ही अलीगढ़ के लोगों में भी रामभक्ति का संचार था। उन दिनों उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। ये वो सरकार थी, जो रामभक्तों को रोकने के लिए हरेक तिकड़म इस्तेमाल कर रही थी। इन्हीं में से एक थी, ‘रामभक्ति चालान’। शायद इसका नाम आपने पहले ना सुना हो, लेकिन ऐसा हुआ था।

क्या था रामभक्ति चालान?

कारसेवा करने की इच्छा रखने वाले हजारों-लाखों लोग अयोध्या की ओर कूच कर रहे थे। उन्हें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रोका जा रहा था, ताकि वे अयोध्या ना पहुँच सकें। उसी समय अलीगढ़ में कारसेवकों को गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा था। इन्हीं कारसेवकों में से एक हैं मनोज कुमार अग्रवाल। मनोज कुमार अग्रवाल तब महज 23 साल के थे। वे जब अयोध्या कूच कर रहे थे, तब उन्हें अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था।

मनोज अग्रवाल को जेल भेजे जाते समय एक प्रमाण पत्र दिया गया था, जिसमें लिखा था कि उनका अपराध क्या है और किस धारा के तहत उन्हें जेल भेजा जा रहा है। उस प्रमाण पत्र पर साफ तौर पर लिखा है, उनका चालान रामभक्ति के कारण हुआ। जी हाँ, उनके ऊपर धारा तो 107/116 लगी है, लेकिन आगे उसमें लिखा है ‘रामभक्त चालानी’।

ऑपइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में रामभक्त मनोज कुमार अग्रवाल बताते हैं कि उनके जैसे सैकड़ों लोगों को अलीगढ़ ही नहीं, आसपास के जिलों में भी रोक लिया गया था। हालाँकि, अलीगढ़ ही ऐसी जगह थी, जहाँ लोगों को ‘रामभक्ति चालानी’ वाले कागज पकड़ाए गए थे। मनोज बताते हैं, “हम जैसे जिंदा कारसेवकों का अपराध ये था कि हम रामभक्ति में लीन थे। हमारे कागज भी यही बताते हैं।”

मनोज जेल के दिनों को याद करते हुए कहते हैं, “अलीगढ़ जेल में भजन होता था। शाखा लगती थी। उस समय अलीगढ़ के जेलर एसडी अवस्थी थे। उन्हीं की मुहर भी रामभक्ति चालानी वाले सर्टिफिकेट में लगी है। वो रामभक्तों के प्रति नरम भाव रखते थे। जेल में शांति थी। सैकड़ों लोग बंद थे। रोज सैकड़ों लोगों से मिलने उनके सैकड़ों परिवार वाले आते थे, लेकिन बाहर मुलायम की सरकार का आतंक था।”

मुलायम की सरकार में मुगल काल जैसा माहौल

मनोज अग्रवाल का कहना है कि उस समय पूरे उत्तर प्रदेश में रामभक्तों का दमन किया गया था। उनका कहना है, “हमें रामभक्ति को अपराध बनाने वाला सर्टिफिकेट दे दिया गया था। सर्टिफिकेट बनाने वालों ने तो दूर तक नहीं सोचा, लेकिन सच तो यही था कि उस समय केसरिया पटका लगाकर कोई बाहर निकल जाता था तो गिरफ्तार हो जाता था।”

मुलायम यादव की सरकार में रामभक्ति में लीन हिंदुओं को किस तरह प्रताड़ित किया गया था, उसे मनोज अग्रवाल ने बताया। उन्होंने आगे बताया, “अगर कोई व्यक्ति तिलक लगाकर निकलता था तो उसे पुलिस गिरफ्तार कर लेती थी। लोग पुलिस वाले के सामने राम-राम कहने से भी डरते थे। उस समय बिल्कुल मुगल काल जैसा माहौल था।”

अलीगढ़ का माहौल कैसा था?

मनोज अग्रवाल के अनुसार, “अलीगढ़ मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र था। यह दंगों का शहर था। उस दौरान दंगे खूब हुए और प्रशासन तो दमन की नीति अपना ही रहा था। जेल से आने के बाद एक और आंदोलन चल रहा था रामशिला पूजन का। तब भी खूब गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अलीगढ़ कोतवानी में घुटनों पर इतनी लाठियाँ मारी गई थी, आज भी पुरवाई हवा चलती है तो दर्द होता है।”

रामभक्ति के नाम चालान व्यक्तिगत निर्णय

‘रामनामी चालानी’ को लेकर ऑपइंडिया ने उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी अविनाश गौतम से बातचीत की। अविनाश गौतम ने हमें बताया, “पुलिस की नियमावली में रामभक्ति के नाम पर चालान करने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर फिर भी किसी अधिकारी द्वारा ये किया गया तो संभवतः उसका व्यक्तिगत निर्णय भी हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “संभव यह भी है कि साल 1990 के कारसेवा के दौरान कई अस्थाई जेलें भी बनाई गई थीं। अन्य कैदियों से कारसेवकों को अलग रखने या पहचान दिखाने के लिए शायद उनकी अलग सेल बनाई गई रही हो और कुछ जगहों पर ‘रामभक्ति चालानी’ शब्द प्रयोग किया गया हो।”

कार्रवाई को किया जा सकता है चैलेंज

वहीं, मुरादाबाद सेशन कोर्ट के एडवोकेट अनुज विश्नोई ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “ये नियमतः कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी जबरदस्ती है। इसे मिसयूज ऑफ पॉवर कहा जाएगा, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान है ही नहीं। इस एक्शन को अभी भी कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है, अगर पीड़ित की इच्छा हो तो।”

तब के और अब के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर

मनोज अग्रवाल ने तब के और अब के माहौल को लेकर कहा कि तब हर तरफ रामभक्तों में आतंक था। उस समय की सरकार दमन करती थी और अब तो एक रामभक्त ही उत्तर प्रदेश चला रहा है। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि आज (03 दिसंबर 2023) को अलीगढ़ के डीआईजी ऑफिस से दो पुलिसकर्मी आए थे, उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की जरूरत तो नहीं है?

मनोज अग्रवाल ने कहा कि इसी बात समझा जा सकता है कि तब के माहौल में और अब के माहौल में क्या अंतर है। वैसे, ये पूरा मामला बताता है कि वर्तमान में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री समय मुलायम यादव की सरकार और उनकी मशीनरी रामभक्तों से कितना नफरत करती थी।

सद्दाम ने लिखा- जिहाद मेरे खून में… UP एटीएस पहुँच गई महाराष्ट्र: रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ISIS साजिश का पर्दाफाश, 11 के घर पर रेड

अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले यूपी एटीएस ने बड़ा ऐक्शन लिया है। खूँखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) द्वारा भारत में अपना बेस बनाने की पुरजोर कोशिशों के बीच सोशल मीडिया पर भड़काऊ, उकसाने वाले और बरगलाने वाले पोस्ट को इंटरसेप्ट किया। इसके बाद महाराष्ट्र में 11 जगहों पर छापेमारी कर कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।

इस मामले की छानबीन के लिए यूपी एसटीएफ महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) पहुँची। वहाँ आईएसआईएस से जुड़े संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान संदिग्धों के ठिकानों से फोन और लैपटॉप, जेहादी साहित्य आदि जब्त किए। इसके बाद उनके घरों में लखनऊ स्थित यूपी एटीएस के दफ्तर में आने का नोटिस थमाकर वापस लौट आई।

दरअसल, यूपी एटीएस ने सोशल मीडिया पर सद्दाम नाम के एक आईएसआईएस समर्थक की पोस्ट देखी। उसने पोस्ट में लिखा था, “संविधान में परिवर्तन होने पर मुस्लिमों को जागना होगा। जिहाद मेरे खून में है। कुर्बानी से नहीं डरेंगे। चुनी हुई सरकार मुस्लिमों पर ज्यादती करती है। बाबरी मस्जिद के फैसले से नाराज हूँ। बदले की चाहत। ओसामा बिन लादेन और बुरहान वानी मेरे आदर्श हैं।”

सद्दाम के इस पोस्ट की जाँच की गई तो संभाजीनगर में कम-से-कम से ऐसे 11 संदिग्धों की पहचान हुई। ये वैचारिक तौर पर आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े मिले। इसके बाद यूपी एटीएस ने 30 दिसंबर 2023 को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में छापेमारी कर दी। इन सभी आरोपितों के परिजनों को 15 से 18 जनवरी के बीच लखनऊ स्थित यूपी एटीएस के कार्यालय में बुलाया है।

एटीएस ने इस साजिश में शामिल मिर्जा सैफ बेग, अब्दुल वाहिद, यासिर, जियाउद्दीन सिद्दीकी, थोर भान, एसके खालिद, ताहिर उर्फ सर, सादिक हबीब समेत 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इन संदिग्धों के अचानक उनके घरों से गायब होने की सूचना मिलने पर एटीएस वहाँ जाकर रेड डाला। हालाँकि, किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। कुछ संदिग्धों के मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

यूपी एटीएस की छापेमारी से महाराष्ट्र की सुरक्षा एजेंसियाँ भी चौकन्नी हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी एटीएस का दावा है कि छत्रपति संभाजीनगर में इन दहशतगर्दों की 17 सितंबर 2023 को एक बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने यूपी और देश के प्रमुख स्थानों पर हमले की रणनीति पर चर्चा की थी। इस बैठक के बाद भड़काऊ बातों का सोशल मीडिया पर प्रसार करना शुरू कर दिया गया।

यूपी एटीएस के सीओ कुलदीप तिवारी ने इसको लेकर पिछले साल अक्टूबर माह में एफआईआर दर्ज कराई थी। एएटीएस ने अपनी शिकायत में लिखा था कि फॉर्मेसी स्टोर पर काम करने वाले एक व्यक्ति की अगुवाई में यूपी में दहशत फैलाने की योजना बनाई जा रही है। UP एटीएस के चीफ मोहित अग्रवाल ने कहा कि देश विरोधी कामों में जुटे कुछ लोगों के बारे में सूचना मिली थी, इसके बाद कार्रवाई की गई।