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जर्मन हथियार-गोली, 5kg सोना, ₹5 करोड़ नगद, देश-विदेशी में संपत्ति: INLD नेता दिलबाग सिंह के घर छापा, अवैध खनन मामले में कॉन्ग्रेस विधायक भी

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार (4जनवरी 2024) को हरियाणा में अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में छापेमारी की। ये छापेमारी कॉन्ग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार और इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के पूर्व MLA दिलबाग सिंह के ठिकानों पर की गई। इसके तहत दोनों नेताओं और उनसे जुड़े यमुनानगर, सोनीपत, मोहाली, फरीदाबाद, चंडीगढ़ के 20 ठिकानों में छापेमारी की गई। इसमें INLD नेता के घर से करोड़ों रुपए की नगदी और विदेशी हथियार मिले हैं।

ईडी की छापेमारी में INLD के पूर्व MLA दिलबाग सिंह और उसके सहयोगियों के ठिकानों से लगभग 5 करोड़ रुपए की नगदी बरामद की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बरामद की गई नगदी की गिनती अभी भी जारी है।

यहीं नहीं अवैध जर्मनी मेड हथियार, 300 कारतूस, 100 से अधिक शराब की बोतलें भी छापेमारी में मिलीं हैं। INLD नेता दिलबाग सिंह के घर से ईडी को जाँच के दौरान 4-5 किलो सोना के साथ-साथ भारत और विदेशों में चल-अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

ईडी के मुताबिक, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत ये कार्रवाई की गई है। बताते चलें कि सुरेंद्र पंवार सोनीपत से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं। जबकि दिलबाग सिंह यमुनानगर सीट से INLD के विधायक रह चुके हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का ये केस हरियाणा पुलिस में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

खनन की लीज खत्म होने और अदालत के आदेशों को दरकिनार कर यमुनानगर और आसपास के जिलों में बोल्डर, बजरी और रेत के कथित अवैध खनन की जाँच के लिए FIR दर्ज की गई थी। इसी को लेकर अब ईडी की कार्रवाई की गई।

इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ईडी ‘ई-रावण’ योजना में कथित धोखाधड़ी की भी जाँच कर रही है। दरअसल ये एक ऑनलाइन पोर्टल है, जिसे रॉयल्टी और करों के संग्रह को आसान बनाने और खनन क्षेत्रों में कर चोरी को रोकने के लिए 2020 में हरियाणा सरकार लेकर आई थी।

लक्षद्वीप में PM मोदी और टूरिज्म vs युद्धपोत से राजीव गाँधी का ‘फैमिली टूर’ और अंग्रेज की बीवी के लिए नेहरू का फूल भेजना: 36 साल में ऐसे बदला सरकारी तंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा खबरों में है। तस्वीरों में दिख रहा है कि पीएम ने इस ट्रिप का काफी आनंद लिया। उन्होंने समुद्र की गहराइयों में जाकर ‘Snorkelling’ का अनुभव किया, तो किनारे बैठ वहाँ की खूबसूरती को भी निहारा। इसके अलावा उन्होंने लक्षद्वीप के स्थानीयों से भी मुलाकात की और कहा कि उनका मकसद लक्षद्वीप के लोकल कल्चर को संरक्षित रखते हुए वहाँ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, इंटरनेट और पेयजल की सुविधा देना है।

उन्होंने बताया कि जितना वह लक्षद्वीप की खूबसूरती देख खुश हुए उतना ही वहाँ के लोगों के स्वागत से भी। उन्होंने इस दौरे के वक्त अगत्ती, बंगारम और कवरत्ती में लोगों से मुलाकात की। लौटकर सारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं।

उनकी यह तस्वीरें देखने के बाद लोगों ने लक्षद्वीप जाने की तो इच्छा जताई ही। साथ ही एक और चर्चा भी शुरू हो गई। ये चर्चा है पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के लक्षद्वीप ट्रिप की, जिन्होंने मीडिया की नजरों से छिपछिपाकर अपनी फैमिली ट्रिप के लिए देश के युद्धपोत INS विराट का दुरुपयोग पर्सनल वाहन की तरह किया था और बड़े लैविश ढंग से छुट्टियाँ मनाई थीं।

राजीव गाँधी की लक्षद्वीप में फैमिली ट्रिप

उनकी इस ट्रिप पर इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे ने स्टोरी की थी, जिसका खामियाजा मीडिया संस्थानों को भुगतना पड़ा। इंडियन एक्सप्रेस के दफ्तर तो कई बार रेड पड़ी। वहीं संस्थान पर कस्टम ड्यूटी से बचने जैसे फर्जी आरोप लगाए गए। दफ्तर के बाहर दिल्ली पुलिस सीआरपीएफ के सिपाही तैनात किए गए।

इस प्रताड़ना का कारण बस ये था कि इंडियन एक्सप्रेस ने उनकी इन छुट्टियों पर कार्टून के जरिए सवाल किया था। कार्टून में राजीव गाँधी नारियल के पेड़ के नीचे बैठकर नारियल पी रहे थे और कह रहे थे,“Ah! To get away from it all!” और देश उनसे पूछ रहा था “कब?”

इसी तरह इंडिया टुडे की अनिता प्रताप ने भी राजीव गाँधी की इस ट्रिप पर स्टोरी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि गाँधी परिवार की इस ट्रिप के लिए भरकर शराब ट्वीप की राजधानी में पहुँचाई गई थी। इसके अलावा 100 चिकन से भरा एक पोल्ट्री फार्म सेट हुआ था। मछलियों के साथ वहाँ द्वीप के ताजे फल जैसे पपीता, छोटे पीले केला, अमरूद भेजे गए थे। मक्खन और ब्रेड गई थी। कोल्डड्रिंप की 40 क्रेट, 300 मिनरल वाटर की बोतल, अमूल चीज, नींबू पानी आदि चीजें गई थीं।

राजीव गाँधी की यह ट्रिप 26 दिसंबर 1987 से 6 जनवरी 1988 तक की थी। मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके बच्चे अभिषेक और श्वेता भी मौजूद थे। अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी, जिनकी विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के संदिग्ध उल्लंघन के लिए जाँच की जा रही थी, वह भी साथ में गई थी। इसके आलावा अन्य भारतीय मेहमानों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी थीं। और दो अन्य विदेशी भी थे।

1998 और 2024 की हो रही तुलना

यही कारण है कि सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के फोटोज डालने के बाद कहा जा रहा है कि एक नरेंद्र मोदी हैं जो लक्षद्वीप की तस्वीरें साझा करके यहाँ के टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहते हैं और एक राजीव गाँधी थे जिन्होंने इसे पर्सनल पिकनिक स्पॉट की जगह बना दी थी।

मालूम हो कि 1950 में ही भारतीय नौसेना की संपत्ति का दुरुपयोग करने की परंपरा जवाहरलाल नेहरू के साथ शुरू हुई थी। जब एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो सरकारी खर्चे पर नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में भेजा। जब उनका शोक संतप्त परिवार हट गया, तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और नेहरू के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर दिया गया।

पाकिस्तान जाकर हथियारों की ट्रेनिंग केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने दे दी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला, कहा – तुरंत हिरासत में लो

एक शख्स हथियारों के प्रशिक्षण के लिए सीमा पार कर पाकिस्तान जाने की योजना बना रहा था। उस पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपित शख्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट दिया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आंतक संबंधित केसों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को अदालतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले हैं।

SC की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट टाडा मामले में शीर्ष अदालत के 1994 के फैसले पर गलत तरीके से निर्भर रहा और उसने यूएपीए मामले में उसके 2019 के फैसले को नजरअंदाज किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के इस फैसले में कहा था कि यूएपीए मामलों में जाँच के लिए अधिकतम 180 दिनों तक का वक्त लिया जा सकता है। दरअसल जिस आरोपित को दिल्ली हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत दी गई थी, उस पर आईपीसी, यूएपीए और शस्त्र अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस में जाँच पूरी करने में हो रही देरी के आधार पर आरोपित को डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “एक और पहलू पर विचार किया जाना चाहिए कि अपराध आतंकवादी गतिविधियों की प्रकृति का है। इससे न केवल पूरे भारत पर असर पड़ता है बल्कि ये अन्य दुश्मन देशों के असर से भी जुड़ा है। मामले को इतने हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए था।”

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिफॉल्ट जमानत पर रिहा आरोपित को तुरंत हिरासत में लेने का निर्देश दिया। बताते चलें कि दिल्ली पुलिस ने खालिस्तान समर्थन के आरोप में लवप्रीत के खिलाफ यूएपीए की धारा 13, 18, 20 के साथ ही आईपीसी की धारा 201/120 बी और अन्य कानूनों के तहत केस दर्ज किया था। इसी के तहत उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 90 दिन की हिरासत में भेजा गया था और इस हिरासत का वक्त खत्म होने के बाद जाँच अधिकारी ने विशेष अदालत में जाँच का वक्त बढ़ाने की अर्जी दी थी, जिसे मंजूर कर ली गई थी।

जब बढ़ाए गए वक्त के दौरान भी जाँच पूरी नहीं हुई तो लोक अभियोजक ने यूएपीए की धारा 43डी(2)(बी) के तहत अदालत में जाँच के वक्त को और बढ़ाने को लेकर फिर से अर्जी दी थी। इस अर्जी को भी विशेष अदालत ने मान लिया और जाँच के लिए वक्त बढ़ा दिया।

इसके बाद जाँच पूरी हुई और बढ़ा हुआ वक्त खत्म होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने सीआरपीसी की धारा (173)(2) के तहत रिपोर्ट पेश कर दी थी। लेकिन इस रिपोर्ट के पेश किए जाने से पहले ही आरोपित ने विशेष अदालत में डिफॉल्ट जमानत की याचिका दे दी थी। हालाँकि विशेष अदालत ने उसे डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया था।

इसके खिलाफ आरोपित ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दी थी। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की दलीलों को नजरअंदाज कर आरोपित को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर फिर से खालिस्तानी हमला, 14 दिन में दूसरी घटना: कालिख पोत बोर्ड पर लिखा- ‘मोदी आतंकवादी, खालिस्तान जिंदाबाद’

अमेरिका के कैलिफोर्निया में दूसरी बार हिंदू मंदिर पर हमला हुआ है। इस बार घटना हेवर्ड के शेरावाली मंदिर की है। 14 दिन में यह दूसरा अटैक है। इससे पहले नेवार्क के मंदिर पर हमला हुआ था।

इस हमले में खालिस्तानियों ने शेरावाली माँ के मंदिर के बोर्ड पर कालिख पोती और वहाँ खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द लिखा। इसकी तस्वीर अमेरिका में हिंदुओं के लिए काम करने वाली संस्था हिंदू अमेरिका फाउंडेशन ने अपने एक्स अकॉउंट पर साझा की है।

फोटो में देख सकते हैं लिखा है मोदी आतंकवादी है। खालिस्तान जिंदाबाद।

बता दें कि इससे पहले शिव दुर्गा मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी जिसके बाद शेरावाली मंदिर को निशाना बनाया गया। 22 दिसंबर 2023 को नेवार्क के स्वामीनारायण मंदिर पर हमला हुआ था। उस समय मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधाी नारे लिखे गए थे। साथ ही दीवारों पर बने चित्रों को भी खराब किया गया था। घटना देखने के बाद हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन इस बात पर जोर दे रही थी कि घटना की जाँच पुलिस हेट क्राइम मानकर करे।

गौरतलब है कि सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि कनाडा में भी बहुत बार खालिस्तानी हिंदू मंदिरों को निशाना बना चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने सरे में एक मंदिर मं तोड़फोड़ की थी और बाद में उसी मंदिर के चीफ के बड़े बेटे के घर गोलियाँ चलाई थीं।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में भी हिंदू मंदिर पर हमला करते हुए वहाँ के स्वामीनारायण मंदिर में पिछले साल तोड़फोड़ हुई थी। इस दौरान मंदिर के दरवाजे पर खालिस्तानी झंडे लटके मिले थे और पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक बातें।

न घर आई अस्थियाँ, न अपनों को मिला अंतिम दर्शन: कहानी उस कारसेवक की जो राम मंदिर के लिए दूधमुँही बेटियों को छोड़कर गए थे अयोध्या

इस समय हर तरफ अयोध्या के रामलला मंदिर की चर्चा है। 22 जनवरी 2024 को हिंदुओं के आराध्य भगवान राम अपने मंदिर में विराजमान होंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री समेत कई गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है। उनमें उन हजारों कारसेवकों के परिवारों को भी आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने भगवान राम के मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हीं में से एक नाम है संजय कुमार सिंह का।

संजय कुमार सिंह ने 2 नवंबर 1990 को मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा किए गए नरसंहार में स्वयं का बलिदान दे दिया था। संजय सिंह का अंतिम दर्शन तक परिवार नहीं कर पाया था। उन्हें उसी सरयू के तट पर मुखाग्नि दे दी गई थी, जिसके किनारे वो भगवान राम के मंदिर के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनके साथी कारसेवकों ने उनकी अस्थियों को पवित्र सरयू में विसर्जित कर दिया था। अयोध्या से लौटा तो सिर्फ संजय सिंह की यादें।

राजस्थान के बाँसवाड़ा के दाहोद रोड पर रहने वाली उनकी 35 साल की बेटी स्मृति को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। वो उन्हीं संजय सिंह की बेटी हैं, जो 2 नवंबर 1990 को 5 अन्य कारसेवकों के साथ अमर हो गए थे। स्मृति कभी अपने पिता के साथ बिहार के काँटी साइन यानी मुजफ्फरपुर में रहती थी। उनके पिता बीजेपी के मंडल उपाध्यक्ष थे।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय कुमार सिंह 30 अक्टूबर 1990 को घर में दो दुधमुँही बच्चियों और अपनी पत्नी को छोड़कर चुपचाप घर से निकल गए थे। वो अपनी दुधमुँही बेटियों- स्मृति और कृति को पत्नी के पास छोड़कर चले आए थे। सरकार का पहरा था कि कोई कारसेवक अयोध्या न पहुँच सके। ऐसे में वो गोंडा पहुँचें और अन्य कारसेवकों के साथ खेत-खलिहानों से होते हुए अयोध्या पहुँचे थे।

अयोध्या में उनके दोस्त नरेश कुमार भी साथ थे। दोनों उमा भारती के नेतृत्व में अयोध्या पहुँचे कारसेवकों के जत्थे में शामिल हो गए। कारसेवकों ने हनुमानगढ़ी की ओर कूच किया। उधर, मुलायम सिंह यादव की सरकार ने गोली चलाने का आदेश दिया। कारसेवकों पर पीठ के पीछे से चलाई गई गोलियों से 5 कारसेवक वीरगति को प्राप्त हुए थे।

उस दिन जिन पाँच लोगों ने वीरगति प्राप्त की थी, उनमें से एक संजय कुमार सिंह भी थे। संजय कुमार सिंह का शव कभी उनके घर नहीं आया। उन्हें सरयू नदी के किनारे ही ससम्मान विदाई दे दी गई। उनकी अस्थियों का विसर्जन कर दिया गया। राम मंदिर के लिए आंदोलन चलता रहा। आखिरकार 6 दिसंबर 1992 को बाबरी को ढहा दिया गया।

अब संजय सिंह की पत्नी भी दुनिया में नहीं हैं। उनकी बड़ी बेटी स्मृति को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में बुलावा आया है। वो पूरे परिवार के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। वो कहती हैं कि छोटी बहन को भी अगर बुलावा आता तो वो भी सपरिवार शामिल होती। अभी संजय सिंह के पैतृक गाँव काँटी साइन में उनकी स्मृति में ट्रस्ट बनाया गया है।

संजय सिंह के गाँव में उनकी प्रतिमा लगी है। पार्क का भी निर्माण किया जा रहा है। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद इस पार्क का भी लोकार्पण किया जाएगा। संजय सिंह स्मृति ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह का कहना है, “मेरे साथी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।” खुद अरविंद सिंह भी संजय सिंह के साथ राम मंदिर के कारसेवक रहे हैं।

हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव के घर पर UP पुलिस का बुलडोजर, 1 घंटे में मिट्टी में मिला दी तीन मंजिला इमारत: कॉन्स्टेबल की कर दी थी हत्या

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या करने वाले ईनामी हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुन्ना यादव के घर पर बुलडोजर चल गया है। गुरुवार (4 जनवरी 2024) को गिराए गए इस घर को लेकर प्रशासन ने कहा कि यह अवैध रूप से बनाया गया था। किलेनुमा बनाए गए इस घर का नक्शा पास नहीं कराया गया था।

इससे एक दिन पहले राजस्व विभाग की टीम ने धरनीधीरपुर नगरिया गाँव में स्थित अशोक यादव के बंकरनुमा घर से सारा सामान निकलवाकर बटाईदार को सौंप दिया गया था। बता दें कि 25 दिसंबर 2023 को एक नोटिस की तामील कराने गए पुलिस कॉन्स्टेबल सचिन राठी पर अशोक यादव और उसके बेटे ने फायरिंग कर दी थी। इसमें राठी की मौत हो गई थी।

इस मामले में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव, उसकी पत्नी और नाबालिग बेटे को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। अशोक यादव ने अपने घर के चारों तरफ कई सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे। वह इन्हीं सीसीटीवी कैमरों में देखकर ही उसने पुलिस बल पर गोलियाँ चला दी थी।

जिस दिन सचिन राठी पर फायरिंग की गई थी, उसी दिन कुछ देर बाद ही पुलिस ने मुन्ना यादव और उसके बेटे के पैर में गोली मारकर दोनों को पकड़ लिया था। इसके साथ ही उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अशोक यादव और उसके बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बेटे को बाल सुधार गृह भेज दिया गया था।

अशोक यादव के घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई सिपाही सचिन राठी हत्याकांड के 11वें दिन की गई है। तीन मंजिल के इस घर को एक घंटे में गिरा दिया गया। बताते चलें कि सचिन राठी की दो महीने बाद ही शादी होने वाली थी। उनकी मंगेतर भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात हैं। घटना के बाद से मंगेतर और सचिन राठी के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।

कश्मीर के टॉप 10 आतंकियों में से एक, ₹10 लाख का इनाम: 26 जनवरी से पहले दिल्ली से पकड़ा गया जावेद अहमद मट्टू

26 जनवरी से ठीक पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी जावेद अहमद मट्टू को पकड़ा है। हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन से जुड़े मट्टू पर 10 लाख का इनाम है। वह A++ केटेगरी का आतंकी है। वह कश्मीर घाटी के 10 सबसे दुर्दांत आतंकियों में से एक है।

जावेद अहमद मट्टू कई आतंकवादी हमलों में शामिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सके पास से पिस्टल और मैगजीन भी बरामद हुई है। वह दिल्ली में अपने हैंडलर से हथियार की डिलीवरी लेने आया था। वह नेपाल के रास्ते दिल्ली पहुँचा था। मुखबिर की सूचना पर स्पेशल सेल ने उसे निजामुद्दीन फ्लाईओवर से धर दबोचा।

जावेद अहमद मट्टू 14 साल से फरार था। वह सोपोर जिले का रहने वाला है। कई बार पाकिस्तान जा चुका है। पाकिस्तान को बेस बनाकर वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया करता था। हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन में वह युवाओं की भर्ती भी कराता था। दिल्ली पुलिस के स्पेशल ने बताया कि मट्टू मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक है और उसकी तलाश एनआईए भी कर रही थी। उसके पास से चोरी की कार और अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं।

बता दें कि बीते साल स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले जावेद अहमद मट्टू के भाई रईस ने अपने घर पर तिरंगा लहराया था, जिसे सोशल मीडिया समेत मेनस्ट्रीम मीडिया में भी काफी जगह मिली थी। रईस ने कहा था कि उसने ऐसा अपनी मर्जी से किया है। उस पर इसके लिए किसी तरह का दबाव नहीं था। साथ ही उसने पूरे देश से लोगों से कश्मीर घाटी आने की अपील की थी।

मट्टू ने उस समय कहा था, “मैं दिल से तिरंगा फहरा रहा हूँ। मेरे ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है। यहाँ विकास हो रहा है। मैं पहली बार 14 अगस्त को अपनी दुकान पर बैठा हूँ, लेकिन पहले 2-3 दिनों तक सब कुछ बंद रहता था। पहले सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ सिर्फ खेल खेलतीं थी। मेरा भाई 2009 में उनमें से एक (आतंकी) बन गया। हमें नहीं पता उसके बाद से कि वो कैसा है, कहाँ है। अगर वो जिंदा है, मैं उससे अपील करता हूँ कि वह वापस आ जाए। अब हालात बदल चुके हैं। पाकिस्तान कुछ नहीं कर सकता है। हम हिंदुस्तानी थे, हैं और रहेंगे।”

नाबालिग हिंदू लड़की को ले भागा आदिल, गुमराह करने के लिए नहर किनारे छोड़े कपड़े-मोबाइल: जेसीबी-गोताखोर करते रहे तलाश, फिर सामने आई सच्चाई

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक नाबालिग हिन्दू लड़की को आदिल नाम का मुस्लिम युवक बहला-फुसला कर भगा ले गया है। लड़की बेहद गरीब परिवार की है और अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती थी। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और आरोपित की तलाश जारी है। जिस नाबालिग को आदिल भगा ले गया है, वह ब्राह्मण समुदाय की है।

जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत ओयल के मोहल्ला जगतिया की रहने वाली 17 साल की हिन्दू नाबालिग मंगलवार (2 जनवरी 2023) को सुबह घर से गायब हो गई। जब बहुत देर तक वह वापस नहीं लौटी तो घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। परिजनों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। परिजनों को पता चला कि लड़की शहर के ही एक मुस्लिम युवक आदिल पुत्र मैनुद्दीन के साथ नहर की तरफ गई।

परिजन जब नहर के पास पहुँचे वहाँ नाबालिग के कपड़े, जूते, फोन, इयरफोन पड़ा मिला। इसके अलावा इसी जगह पर युवक आदिल के भी कपड़े, जूते और फ़ोन भी यहीं पर मिले। इससे पुलिस को आशंका हुई कि कहीं नाबालिग युवक के साथ नहर में तो नहीं कूद गई। दोनों के आधार कार्ड भी यहीं पर मिले। आधार कार्ड में युवती की उम्र 17 वर्ष और युवक की उम्र 18 लिखी हुई पाई गई।

पुलिस ने इसी आशंका के तहत यहाँ पर जेसीबी बुलाकर नहर में दोनों की तलाश शुरू करवाई। गोताखोरों को भी तलाश में लगवाया गया। हालाँकि, जब काफी तलाश के बाद भी दोनों नहीं मिले तो यह माना गया कि आदिल ने परिजनों और पुलिस को गुमराह करने के लिए कपड़े और फ़ोन नहर के किनारे छोड़ा होगा।

बच्ची की तलाश करते गोताखोर
बच्ची की तलाश करते गोताखोर

नाबालिग की माँ ने आदिल के खिलाफ लखीमपुर के खीरी थाना में मामला दर्ज करवाया है। FIR की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़िता की माँ ने कहा है कि आदिल उसकी बच्ची को बहला-फुसला कर ले गया है। पुलिस ने युवक आदिल के विरुद्ध अपहरण का मामला दर्ज किया है।

मामले की जाँच कर रहे ओयल चौकी प्रभारी विनोद सिंह का कहना है कि मामले की जाँच जारी है। अभी तक युवक और नाबालिग बालिका की तलाश जारी है। CCTV जाँच में आदिल नाबालिग को ले जाते हुए दिखा है। जिस नाबालिग बच्ची को लेकर आदिल भागा है, वह काफी गरीब है। बच्ची की माँ और दादी, घरों में काम करके अपना गुजारा करती हैं। बच्ची खुद भी काम करती थी। उसके पिता की कुछ वर्षों पहले ही मौत हो चुकी है।

महिला दोस्त की डॉगी को बचाने में डूब गया UPSC की तैयारी कर रहा इंजीनियर, दो लड़कियों के साथ डैम में गिरा था: पीड़ित पिता बोले- तैराक था मेरा बेटा

संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी कर रहे एक इंजीनियर की मध्य प्रदेश के भोपाल में डूबने से मौत हो गई। वो दो साथी छात्राओं के साथ चूनाभट्टी इलाके में लेक के किनारे टहल रहा था। इसी दौरान साथ आई लड़कियों में से एक का पालतू डैम में गिर गया। कुत्ते को बचाने के लिए तीनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर उसे निकालने की कोशिश की। लेकिन संतुलन बिगड़ने से तीनों डैम में ही गिर गए। लड़कियाँ तो तैर कर बाहर आ गई, लेकिन अच्छा तैराक होने के बावजूद यूपीएससी एस्पिरेंट डूब गया। करीब एक घंटे के बाद उसका शव बरामद हो सका।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक युवक का नाम सरल निगम (23 वर्ष) है। वह अपनी माता-पिता की इकलौती संतान था। उसके पिता निजी आईटी कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके थे। वो एमटेक कर चुका था और भोपाल में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा था। बुधवार (03 दिसंबर 2024) की सुबह वह अपनी दो साथी छात्राओं के साथ केरवा डैम के इलाके में मॉर्निंग वॉक के लिए गया था, जब ये हादसा हुआ।

इस मामले की जाँच कर रहे एएसआई अंतराम यादव ने बताया कि घटनास्थल वाली जगह केरवा डैम क्षेत्र में है। छात्र-छात्रा मॉर्निंग वॉक के लिए जंगल कैंप गए थे। सुबह करीब 7.30 बजे वे लोग कैंप पहुँचे, जहाँ शहर के लोग अक्सर मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं। मीडिया से बातचीत में एएसआई अंतराम यादव ने बताया कि सुबह करीब 8.30 बजे तीनों लोग डैम के किनारे टहल रहे थे। तभी उनके साथ चल रहा पालतू कुत्ता पानी में गिर गया। उसे निकालने की कोशिश के दौरान तीनों ही पानी में गिर गए। बाद में लड़कियाँ तो बाहर आ गईं, लेकिन सरल निगम की डूबने से मौत हो गई।

हादसे के दौरान लड़कियों ने चिल्लाकर लोगों से मदद माँगी और चौकीदार को भी बुलाया। रातीबड़ पुलिस ने गोताखोरों और एसडीईआरएफ के साथ करीब एक घंटे की कोशिश के बाद सरल के शरीर को पानी से बाहर निकाला। वह करीब 10-15 फ़ीट नीचे पानी में ही फँस गया था। बताया जा रहा है कि उसके चेहरे पर कुछ चोटों के निशान भी मिले हैं। माना जा रहा है कि जब वह नीचे पानी में गिरा होगा तो किसी पत्थर से उसे चोट लगी होगी और वह नीचे झाड़ियों में फँस गया होगा।

पीड़ित पिता सुधीर निगम के अनुसार उनके बेटे ने एमटेक किया था। वह पायलट का एग्जाम निकाल चुका था। वह अच्छा था और उसे पैरा ग्लाइडिंग का भी शौक था। पालतू कुत्ता भी इस हादसे में जीवित बच गया। वह खुद तैर कर बाहर आ गया।

केजरीवाल की अगवानी और एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं सीएम भगवंत मान, पंजाब पर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा कर्ज

पंजाब की आर्थिक हालत बेहद खराब है। हालात ऐसे हैं कि राज्य की आम आदमी पार्टी की सरकार लोन को पाँच साल माफ़ करने की गुहार लगा रही है। हालाँकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान इस दौरान AAP मुखिया केजरीवाल के स्वागत और नया एयरक्राफ्ट लेने में व्यस्त हैं। पंजाब के बजट का एक बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज के ब्याज को चुकाने में जा रहा है।

पंजाब की वर्तमान में खस्ता आर्थिक हालत के पीछे कॉन्ग्रेस और AAP बराबर रूप से सहयोगी हैं। अगर 2017 में पंजाब की सत्ता में आई कॉन्ग्रेस सरकार ने इसकी अर्थव्यस्था को ICU में पहुँचाया तो AAP उसे अपनी नीतियों द्वारा इसे वेंटिलेटर पर पहुँचा रही है। पंजाब देश का अकेला ऐसा बड़ा राज्य है, जिस पर उसकी अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक कर्ज है।

हालाँकि, पंजाब पर भले इतना अधिक कर्ज है कि सरकार के रोजाना के कामधाम भी अटक रहे हों, लेकिन AAP ने अपनी नीतियाँ नहीं बदली हैं। वह राज्य की अर्थव्यवस्था को रेवड़ियाँ बाँटकर और गर्त में ले जा रही हैं। चाहे वह मुफ्त बिजली की योजना हो या बसों में मुफ्त सवारी करवाना।

पंजाब की अर्थव्यवस्था का हाल-बेहाल?

कभी देश के सबसे समृद्ध राज्य माने जाने वाले पंजाब पर आई एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राज्य के लगभग ₹3.40 लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज पंजाब की कुल अर्थव्यवस्था का 50% से अधिक है। पंजाब की अर्थव्यवस्था का कुल आकार 2022-23 में लगभग ₹6.29 लाख करोड़ था। पंजाब में 2022 में सत्ता परिवर्तन हुआ था और आम आदमी पार्टी की सरकार आई थी।

साल 2017 से 2022 तक पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस सरकार ने पाँच वर्षों (2017-22) में लगभग ₹1 लाख करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया था। इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2022 के मार्च महीने से लेकर 2023 के अंत तक लगभग ₹50,000 करोड़ का नया कर्ज पंजाब पर लाद दिया। पंजाब के कर्ज में बढ़ोतरी इसलिए नहीं हुई कि राज्य में कोई बड़ा विकास कार्य हुआ हो।

पंजाब की GSDP (राज्य की कुल अर्थव्यवस्था) का 50% से अधिक उस पर कर्ज होना बड़ी समस्या वाली बात है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य का राजकोषीय घाटा (सरकार की आमदनी और कमाई में अंतर) उसकी GSDP का 5.2% था। सरकार जितना कमा रही है, उससे कहीं अधिक खर्च कर रही है।

एक हाथ कर्ज चुकाया, दूसरे हाथ से बढ़ाया

पंजाब सरकार को पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़ रहा है। इससे कर्ज का पहाड़ और भी बढ़ता जा रहा है। एक रिपोर्ट बताती है कि पंजाब की AAP सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ₹47,000 करोड़ का जो कर्ज लिया, उसमें से ₹27,000 करोड़ तो पुराने कर्जों के ब्याज और मूलधन को चुकाने में चला गया।

पंजाब की सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में ₹20,100 करोड़ पुराने कर्ज के ब्याज के रूप में दिया था। इसके अलावा ₹15,146 करोड़ पुराने कर्ज के मूलधन के रूप में चुकाए। यानि AAP सरकार ने 2022-23 में जितना असल कर्ज चुकाया, उससे अधिक तो उसे ब्याज चुकाना पड़ा। आगे भी यह स्थिति बदलती नहीं दिख रही है।

वित्त वर्ष 2023-24 में पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार को लगभग ₹22,000 करोड़ पुराने कर्जों के ब्याज में और लगभग ₹16,000 करोड़ ब्याज को असल चुकाने में देने पड़ेंगे। पंजाब में अगर आर्थिक सुधारों और फिजूलखर्ची पर ध्यान नहीं दिया गया तो जल्द ही इसका कर्ज ₹4 लाख करोड़ को पार कर जाएगा।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया, फिर भी मुफ्त हम तो बाँटेंगे भैया

AAP सरकार पंजाब की आर्थिक हालत सुधारने के बजाय उसे और गर्त में ले जा रही है। AAP सरकार की नीतियाँ ऐसी हैं कि राज्य पर दबाव और बढ़ रहा है। AAP की सरकार राज्य में 2022 में हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। AAP ने महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का वादा भी किया था।

पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग के अनुसार, पंजाब की AAP सरकार 2022-23 में राज्य में मुफ्त बिजली देने में ₹18,714 करोड़ खर्च करने पड़ेंगे। इसमें से ₹8,809 किसानों को मुफ्त बिजली देने में ₹5,886 करोड़ रूपए परिवारों को 300 यूनिट बिजली देने में और ₹1,427 करोड़ का खर्चा हुआ। इसके अलावा, बसों में महिलाओं को मुफ्त सवारी करवाने का भी सरकार पर बड़ा बोझ पड़ रहा है।

राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा देने में AAP सरकार को ₹550 करोड़ खर्च करने पड़े हैं। इसके अलावा भी राज्य सरकार कई ऐसी स्कीम लाने के विचार कर रही हैं, जिसमें और खर्चा होगा। ऐसे में जिस राज्य को लगातार कर्ज चुकाने के लिए ही कर्ज लेना पड़ रहा हो, वह मुफ्त रेवड़ियाँ बाँटने में खर्चा करे, आर्थिक रूप से यह कहीं से बुद्धिमान नहीं सिद्ध होते।

पंजाब कर्ज के बोझ तले, मुख्यमंत्री एयरक्राफ्ट लेने चले

भले ही पंजाब कर्जे के बोझ तले दबा है और उसकी आर्थिक हालत खस्ता है लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री की शौकीनियों में कोई कमी नहीं आई है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अगस्त 2023 में एक 10 सीटर विमान लेने के लिए निविदा निकाली थी।

यह निविदा तब निकाली गई जब राज्य के पास पहले से एक हेलिकॉप्टर है जिसका उपयोग लगातार मुख्यमंत्री भगवंत मान करते हैं। इस निविदा के आने के बाद आरोप लगाया गया था कि इस लीज पर लिए गए एयरक्राफ्ट का उपयोग अरविन्द केजरीवाल करेंगे। ट्विटर पर जब भगवंत मान की सरकार की आलोचना हुई तो यह निविदा हटा दी गई। पंजाब पुलिस ने भी निविदा डालने वाले RTI एक्टिविस्ट को धमकाया भी।

पंजाब की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुख्यमंत्री भगवंत मान ज्यादातर समय अपनी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल के स्वागत सत्कार में लगे रहते हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल दिसम्बर 2023 में पंजाब में विपश्यना के लिए पहुँचे तो भी वहाँ भगवंत मान भी पहुँचे थे। इसके पहले केजरीवाल का लगभग हर माह एक पंजाब दौरा होता रहा है।

जो पैसा मिला उसे खर्च नहीं किया, उलटे कर्ज माफ़ी की लगाई गुहार

पंजाब सरकार केंद्र सरकार पर लगातार आरोप लगा रही है कि उसे अधिक कर्ज नहीं लेने दिया जा रहा है। कहीं वह आरोप लगाती है कि केंद्र ने उसके फंड रोक कर दिया है। हालाँकि, पंजाब को जो पैसा अभी केंद्र सरकार ने दिया भी है, वह उसे भी सही से खर्च नहीं कर पा रही है।

भीषण आर्थिक संकट का सामना करने वाली पंजाब की ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) सरकार केंद्र से मिले ₹11,000 करोड़ रुपए में से ₹8,000 करोड़ रुपए को खर्च नहीं कर पाई है। फंड का रोना रोने वाली AAP सरकार वित्त वर्ष 2023-24 के 9 महीने बीतने के बाद इसमें से मात्र ₹3,000 करोड़ ही खर्च सकी है। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने सचिवों से ऐसे जुगाड़ सोचने को कहा है, जिससे यह पैसा केंद्र को लौटाना ना पड़े।

एक तरफ खुद को मिला पैसा नहीं खर्च कर पा रही तो दूसरी तरफ इस बात के लिए जोर लगा रही है कि उसे पाँच सालों तक कर्ज ना चुकाना पड़े। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को अक्टूबर 2023 में लिखे एक पत्र में कहा है कि वो केंद्र की मोदी सरकार को इस बात के लिए मनाएँ कि पंजाब से पाँच साल तक किसी भी प्रकार के कर्जे की वसूली ना हो।

क्या होनी चाहिए आदर्श स्थिति?

पंजाब पर जितना वर्तमान में कर्ज है, वह कहीं से भी जायज नहीं है। ना ही उसका राजकोषीय घाटा नियमों के अनुसार है। दरअसल, देश में राज्यों के वित्तीय प्रबन्धन के विषय में बनाए गए कानून राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत किसी भी राज्य का कर्ज उसकी कुल GSDP से 20% से अधिक नहीं होना चाहिए।

कुछ मामलों में छूट के साथ भी इसे अधिकतम 25% रखने की हिदायत दी गई है। पंजाब पर GSDP का 50% कर्ज है और इसके घटने के कोई आसार नहीं हैं। वहीं, अगर राजकोषीय घाटे की बात की जाए तो यह भी FRBM एक्ट के तहत GSDP का 3% होना चाहिए। पंजाब में यह भी 5.2% है। हालाँकि पंजाब सरकार इसे कम करने का कोई प्रयास नहीं करती दिखती।