Home Blog Page 1269

0 रन में भारत ने खो दिए आखिर के 6 विकेट, स्पिनरों ने नहीं डाली एक भी गेंद; फिर भी 642 गेंद में ही जीत लिया दक्षिण अफ्रीका

भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 विकेट से हराकर दूसरा टेस्ट मैच जीत लिया है। केपटाउन में खेला गया यह मैच टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे छोटा मैच रहा। महज डेढ़ दिन में ही इस मैच का फैसला हो गया। पूरा मैच केवल 642 गेंदों में समाप्त हो गया। इस जीत के साथ भारत ने टेस्ट सीरिज को बराबरी पर खत्म कर लिया है। पहले मैच में उसे पारी और 32 रनों से हार झेलनी पड़ी।

केपटाउन टेस्ट मैच में जीत के बावजूद एक शर्मनाक रिकॉर्ड भारत के नाम भी दर्ज हुआ है। पहली बारी के आखिरी 6 विकेट भारत ने बिना कोई रन बनाए खो दिए। ऐसा करने वाली वह पहली टीम है। भारत के सामने दक्षिण अफ्रीकी टीम ने 79 रनों का लक्ष्य रखा था, जिसे टीम इंडिया ने महज 12 ओवरों में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। दिलचस्प यह है कि इस मैच में किसी भी स्पिनर ने एक भी गेंद नहीं डाली। दक्षिण अफ्रीकी टीम में केशव महाराज और भारतीय टीम रवींद्र जडेजा बतौर स्पिनर खेल रहे थे।

भारतीम टीम ने तेजी से हासिल किया लक्ष्य

भारतीय टीम ने पहली पारी में अपने आखिरी 6 विकेट बिना रन बनाए ही खो दिए थे। इसलिए भारतीय टीम को पता था कि दक्षिण अफ्रीका की तरफ से रखा गया 79 रनों का लक्ष्य भी मुश्किल खड़ा कर सकता है। ऐसे में भारतीय टीम ने तेज-तर्रार अंदाज में लक्ष्य का पीछा किया और महज 12 ओवरों में ही तीन विकेट खोकर 80 रन बना डाले। टीम इंडिया के लिए ओपनर यशस्वी जायसवाल ने 23 गेंदों पर 6 चौकों की मदद से 28 रन बना डाले।

टीम इंडिया को पहला झटका 44 रन के स्कोर पर लगा। इसके बाद आते ही शुबमन गिल ने हाथ दिखाने शुरू कर दिए। हालाँकि उन्हें 10 रनों के कुल योग पर ही रबाडा ने क्लीन बोल्ड करके पवैलियन लौटा दिया। इसके बाद विराट कोहली 11 गेंदों पर 12 रन तीन चौकों की मदद से बनाए। वे तब आउट हुए जब टीम को जीत के लिए महज 4 रनों की जरूरत थी। श्रेयस अय्यर ने विजयी चौका लगाया। वहीं कप्तान रोहित शर्मा 22 गेंदों पर 16 रन बनाकर नाबाद रहे। कगिसो रबाडा, नांद्रे बर्गर और मैक्रो जेन्सन ने एक-एक विकेट लिए।

दक्षिण अफ्रीकी टीम को मार्करम का सहारा, बचाई लाज

इस टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीकी टीम पहली पारी में महज 55 रनों के कुल स्कोर पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में 153 रन बनाए थे। भारतीय टीम ने आखिरी 6 विकेट बिना कोई रन जोड़े गवाँ दिए थे। इसके बावजूद भारतीय टीम को 98 रनों की बढ़त मिली थी। दक्षिण अफ्रीका की टीम ने अपनी दूसरी पारी में सभी विकेट खोकर 176 रन बनाए और इस तरह से कुल 78 रनों की बढ़त हासिल कर टीम इंडिया के सामने 79 रनों का लक्ष्य रखा था। दक्षिण अफ्रीकी टीम की तरफ से अकेले एडेन मार्करम ने शानदार बल्लेबाजी की और महज 103 गेंदों पर 106 रन बनाए। उनकी आक्रामक पारी की बदौलत ही दक्षिण अफ्रीकी टीम भारत के सामने 79 रनों का लक्ष्य रख सकी थी।

सिराज मैन ऑफ द मैच, बुमराह-डीन एल्गर बने मैन ऑफ द सिरीज

इस टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करने वाले मोहम्मद सिराज को मैन ऑफ द मैच दिया गया। सिराज ने पहली पारी में महज 15 रन देकर 6 विकेट लिए थे। उन्होंने दूसरी पारी में एक विकेट लिया, वो भी शतक लगाने वाले एडेन मार्करम का। इस मैच में सिराज से एक विकेट ज्यादा यानी 8 विकेट लेने वाले बुमराह को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया। उन्हें अपना आखिरी टेस्ट मैच खेलने वाले डीन एल्गर के साथ संयुक्त रूप से इस पुरस्कार के लिए चुना गया। बुमराह ने पहले टेस्ट में 5 विकेट लिए थे। इस तरह उन्होंने सीरीज में सर्वाधिक 13 विकेट लिए। वहीं, डीन एल्गर ने पहले मैच में शतक लगाया था और सीरीज में कुल 201 रन बनाकर मैन ऑफ द सीरीज चुने गए। एल्गर ने पहले ही इस टेस्ट सीरीज के बाद संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था।

अब तक का सबसे छोटा टेस्ट मैच

ये टेस्ट मैच कई मायने में बेहद अलग रहा। इस टेस्ट मैच को क्रिकेट के इतिहास का सबसे छोटे टेस्ट मैच के तौर पर याद रखा जाएगा। सिर्फ 642 गेंदों का खेल हुआ। इससे पहले साल 1932 में ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया सबसे छोटा मैच 656 गेंदों का था। वेस्ट इंडीज-इंग्लैंड के बीच 1935 में महज 672 गेंदों का मैच खेला गया था। ये टेस्ट मैच भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया रनों के लिहाज से सबसे छोटा मैच भी रहा। इस टेस्ट मैच में 33 विकेट के बदले महज 464 रन बने।

5 मंडप, 392 खंभे, 44 द्वार… नागर शैली से बना है 1000 साल तक टिकने वाला राम दरबार: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले जान लें अयोध्या मंदिर की हर एक बात

अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बन रहा है। राम मंदिर का पहला तल बनकर तैयार हो चुका है। अब मंदिर से जुड़ी ऐसी बातें सामने आई हैं, जो भगवान राम की जन्मस्थली पर बन रहे मंदिर की दिव्यता, भव्यता और नव्यता का परिचय करा रही हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण भारत की परंपरागत नागर शैली में हो रहा है, जो अगले 1000 वर्षों तक दुनिया में बदलाव का साक्षी रहेगा।

गर्भगृह में रामलला की 51 इंच लंबी प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसमें रामलला 5 साल के बाल स्वरूप में होंगे। प्रतिमा में रामलला को खड़े हुए दिखाया गया है। प्रतिमा ऐसी है जो राजा का पुत्र और विष्णु का अवतार लगे। गर्भगृह में रामलला कमल के फूल पर विराजमान होंगे। कमल के फूल के साथ उनकी लंबाई करीब 8 फुट होगी।

भगवान राम को समर्पित रामलला का यह मंदिर तीन मंजिला होगा। इसमें 5 मंडप होंगे। खास बात ये है कि भगवान राम के बाल स्वरूप यानि रामलला भूतल पर विराजमान रहेंगे। वहीं, दूसरे तल पर रामदरबार रहेगा। इस राम दरबार में भगवान राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ-साथ भक्त बजरंग बली भी रहेंगे।

रामलला के भव्य मंदिर की खासियत:

रामलला का भव्य मंदिर परंपरागत नागर शैली में बनाया जा रहा है। इसकी लंबाई (पूर्व से पश्चिम तक) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊँचाई 161 फीट रहेगी। रामलला का मंदिर तीन मंजिला का होगा। प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई 20 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 392 खंभे और 44 द्वार होंगे।

रामलला मंदिर निर्माण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रामलला के मंदिर के मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालस्वरुप रामलला (श्रीरामलला का विग्रह) तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा। रामलला के मंदिर में 5 मंडप होंगे। इन मंडपों के नाम- नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप हैं।

भव्य राममंदिर का निर्माण लगातार जारी (फोटो साभार : X_ShriRamTeerth)

मंदिर की खंभों और दीवारों में देवी-देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियाँ उकेरी जा रही हैं। रामलला के मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियाँ चढ़कर सिंहद्वार से होगा। दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी। मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी।

परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, माँ भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा। उत्तरी भुजा में माँ अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा। रामलला के मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा। रामलला के मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी।

रामलला के मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे। दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णो‌द्धार किया गया है एवं तथा वहाँ जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।

रामलला के मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है। रामलला के मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है। इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है। रामलला के मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊँची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है।

मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे। 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी।

रामलला के मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा।

भक्तों के स्वागत के लिए तीर्थ क्षेत्र पुरम बनकर तैयार

रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी 2024 को होगा। उससे एक सप्ताह पूर्व से तमाम तरह की पूजा अर्चना शुरू हो जाएगी। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का साक्षी बनने के लिए हजारों गणमान्य हस्तियों को बुलाया गया है। वहीं, इन भक्तों को ठहराने के लिए 15 हजार लोगों की क्षमता वाले टेंट सिटी ‘तीर्थ क्षेत्र पुरम’ को तैयार किया गया है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 लोगों को निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें कारसेवकों का परिवार भी हैं, जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपनी जान गवा दी। ट्रस्ट का कहना है कि लगभग 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा।

बॉयफ्रेंड, सलाहकार, वकील, इलेक्शन एजेंट… कौन हैं सुहान मुखर्जी, उनकी ‘जासूसी’ क्यों करवा रहीं थी महुआ मोइत्रा: सब कुछ एक साथ

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा के खिलाफ उनके पूर्व पाटर्नर जय अनंत देहाद्राई ने पिछले दिनों सीबीआई से शिकायत की थी। सुप्रीम कोर्ट के वकील देहाद्राई ने इसमें लोकसभा की निष्कासित सांसद मोइत्रा पर खुद की जासूसी का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि अपने प्रभाव और पश्चिम बंगाल पुलिस का दुरुपयोग करते हुए मोइत्रा ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड सुहान मुखर्जी और उनकी जर्मन महिला मित्र हेलेना लेर्श (Helena Lersch) की भी जासूसी करवाई थी।

देहाद्राई का दावा है कि इस जासूसी के किस्से सुनाकर महुआ मोइत्रा उन्हें भी धमकाती रहती थी। इस शिकायत में देहाद्राई ने तीन लोगों का जिक्र किया है। इनमें से एक कारवाँ पत्रिका के संपादक और एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष अनंत नाथ, दूसरे कथित तौर पर महुआ मोइत्रा के बॉयफ्रेंड रह चुके वकील सुहान मुखर्जी और जर्मन महिला हेलेना लेर्श हैं। हेलेना चीनी कंपनी बाइटडांस (ByteDance) से जुड़ी थीं। टिकटॉक ‘TikTok’ एप इसी कंपनी का है।

कौन हैं महुआ मोइत्रा के बॉयफ्रेंड रहे सुहान मुखर्जी

वकील देहाद्राई ने अपनी शिकायत में बताया है कि टीएमसी नेता 2019 में सुहान मुखर्जी की निगरानी करवा रहीं थी। उन्होंने कहा है, “मोइत्रा ने मुझे कई मौकों पर मौखिक रूप से और 26 सितंबर 2019 को व्हाट्सएप्प मैसेज के जरिए बताया था कि वह अपने एक्स ब्वॉय फ्रेंड सुहान मुखर्जी पर सक्रिय तौर से नजर रख रही थी। उसे जर्मन महिला हेलेना लेर्शके साथ सुहान का रिश्ता होने का शक था।”

फोटो साभार: Zaubacorp

जय अनंत देहाद्राई का कहना है कि मोइत्रा ने बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मदद से सुहान मुखर्जी के फोन के पूरे कॉल रिकॉर्ड हासिल कर लिए थे। उन्हें उन लोगों के बारे में सटीक जानकारी थी जो सुहान मुखर्जी के संपर्क में थे। साथ ही मुखर्जी की हर गतिविधि के बारे में भी उन्हें पता रहता था।

महुआ मोइत्रा पर जिस सुहान मुखर्जी की निगरानी करवाने का आरोप लगा है वे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं। वे पीएलआर चैंबर्स के फाउंडर पाटर्नर हैं। यह फर्म जो भारत की सार्वजनिक नीति और नियामक मामलों में महारत रखती है। बकौल लॉ एशिया सुहान के पास संकट प्रबंधन, नीति निर्माण, विधायी एजेंडा का मसौदा तैयार करने का अच्छा-खासा अनुभव है।

उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर पर नीति और विधायी सुधारों पर सरकार के सलाहकार तौर पर भी काम किया है। मुखर्जी की केंद्र और राज्य स्तरीय पॉलिटिकल सर्कल में अच्छा खासा संपर्क है। उनके साथ महुआ के संपर्क का खुलासा मई 2023 में हुआ था। तब श्रवण कुमार यादव ने महुआ के खिलाफ चुनाव आयोग को शिकायत दी थी। उन्होंने इसमें महुआ के 2019 के चुनावी हलफनामे में विलेरविले फाइनेंशियल एडवाइजर्स लिमिटेड में अपने 4,900 शेयरों का खुलासा न करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत से ही सामने आया कि महुआ जनवरी 2010 से मार्च 2016 तक इसकी निदेशक थीं।

सुहान मुखर्जी 14 जुलाई 2009 से विलेरविले फाइनेंशियल एडवाइजर्स लिमिटेड के निदेशक रहे थे। यही नहीं सुहान के पिता मशहूर चित्रकार स्वरूप मुखर्जी भी इस कंपनी में निदेशक हैं। यही नहीं सुहान 2002 से अमरचंद और मंगलदास और सुरेश ए श्रॉफ एंड कंपनी (एएमएसएस) से भी जुड़े हुए हैं। इससे पहले वो विश्व बैंक में विश्लेषक रहे थे।

महुआ मोइत्रा ने 2010 में कॉन्ग्रेस को अलविदा कह टीएमसी का दामन थामा लिया और इसी साल वह विलेरविले निदेशक बनी। वहीं मई 2012 में सुहान को सार्वजनिक सूचना अवसंरचना और नवाचार (PIII) में भारत के प्रधानमंत्री के सलाहकार कार्यालय में सैम पित्रोदा के सलाहकार के तौर पर नियुक्ति मिली।

यही वजह रही कि जून 2013 में सुहान ने पीएमओ में अपने सलाहकार के पद पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एएमएसएस की जॉब छोड़ दी। इसके कुछ महीने बाद ही नवंबर 2013 में उन्होंने नीति, कानून और विनियमन चैंबर्स (पीएलआर) की स्थापना की। इस दौरान वो पीएमओ में पित्रोदा के कार्यालय के विशेषज्ञ सलाहकार बने रहे।

लीगली इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएलआर चैंबर्स की स्थापना ग्राहकों और गैर सरकारी संगठनों को कानूनी, सार्वजनिक नीति और वैध लॉबिंग सेवाएँ देने के लिए की गई थी। ये सब पीएमओ में रहते ही सुहान ने शुरू किया। मोइत्रा ने मार्च 2016 तक सुहान की कंपनी के निदेशक के तौर पर काम किया था। मई 2016 में मोइत्रा ने अपने चुनाव खर्चों की जानकारी में सुहान का उनके चुनाव एजेंट के तौर पर जिक्र किया था।

भारत निर्वाचन आयोग के मुताबिक हर उम्मीदवार एक चुनाव एजेंट नियुक्त करने का हकदार है। ये चुनाव एजेंट उम्मीदवारों के चुनाव खर्च का खाता बनाने जैसे कई अहम काम करते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो मोइत्रा के लिए सुहान एक भरोसेमंद शख्स थे।

हालाँकि देहाद्राई की शिकायत में मोइत्रा और सुहान के बीच मतभेद की बात भी है। इसके बाद भी सुहान ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार के लिए काम करना जारी रखा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में कार्य किया और कोयला घोटाले में अभिषेक बनर्जी की पैरवी की।

कैसे हुई हेलेना लेर्श की एंट्री

हेलेना लेर्श जुलाई 2021 से चीनी कंपनी बाइट डांस में पब्लिक पॉलिसी इमर्जिंग मार्केट्स की उपाध्यक्ष और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की ग्लोबल हेड हैं। इससे पहले वह अक्टूबर 2018 से अगस्त 2021 तक बाइटडांस में ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी की निदेशक थीं। लेर्श इंस्टाग्राम और गूगल जैसे तकनीकी दिग्गजों के साथ काम भी कर चुकी हैं। इसी वक्त मोइत्रा ने कथित तौर पर लेर्श और सुहान की निगरानी कर उनके बीच अफेयर का दावा किया था।

(य​ह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर आप विस्तार से इसे पढ़ सकते हैं। इसका हिंदी में भावानुवाद रचना वर्मा ने किया है)

कारसेवकों संग आए अयोध्या, पुलिस ने पहले मारी गोली फिर जबरन जलवाया शव: रामलला के बलिदानी ‘पोस्टमैन’ को जानते हैं आप?

अयोध्या के रामजन्मभूमि पर निर्माणाधीन मंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में होगा, जिसके लिए तैयारियाँ युद्ध स्तर पर चल रही हैं। इस मौके पर देश और दुनिया भर के रामभक्त उन कारसेवकों को याद कर रहे हैं, जिन्होंने मुगल काल से मुलायम काल तक राम के नाम पर खुद को बलिदान कर दिया।

उन्हीं ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों में से एक हैं उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी रमेश चंद्र मिश्रा। ऑपइंडिया ने रमेश चंद्र के घर जा कर वर्तमान हालातों की जानकारी ली। मिश्रा के परिजनों ने राममंदिर आंदोलन के दौरान की घटनाओं और उनके परिजनों को याद किया।

प्राण गए पर भक्ति बरकरार

रमेश चंद्र मिश्रा मूलतः गोंडा जिले के टिकरी क्षेत्र के निवासी थे। उनका गाँव बैरीसालपुर है, जो कि अयोध्या से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। जब हम उनके घर पहुँचे तो वह बंद मिला। घर के बाहर शिवलिंग स्थापित है और रोशनदानों में भगवान कृष्ण के चित्र उकेरे गए हैं। ॐ और स्वास्तिक निशान जैसे वैदिक चिन्ह घर की दीवालों पर दिखे।

उनके परिवार के बारे में हमने ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि रमेश मिश्रा के बलिदान के बाद उनका परिवार बैरीसालपुर छोड़कर अयोध्या में जाकर बस गया है। हमने पाया कि रामजन्मभूमि के लिए 3 दशक पहले खुद को न्योछावर करने वाले रमेश मिश्रा का नाम अभी तक गोंडा के ग्रामीणों के जेहन में ताजा है।

घर की दीवाल पर लगा रामजन्मभूमि प्रतीकत्मक मंदिर का चित्र

भाजपा विधायक ने सड़क पर लगवाया स्मृति गेट

गाँव से निकलते हुए हमने पाया कि भोगचंद से टिकरी को जोड़ने वाले लिंक मार्ग पर स्थानीय विधायक द्वारा रमेश चंद्र मिश्रा का स्मृति द्वारा लगवाया गया है। लोगों की यात्रा सुखद और सुरक्षित होने की प्रार्थना के साथ बने इस गेट को भाजपा विधायक रमापति शास्त्री द्वारा लगवाया गया है।

इस गेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गोंडा के स्थानीय सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के नाम और चित्र छपे हुए हैं। इस गेट का नाम ‘स्वर्गीय श्री रमेश चंद्र मिश्रा स्मृति द्वार’ रखा गया है। रमेश मिश्रा के परिजनों के मुताबिक, यह गेट लगभग 3-4 माह पहले लगावाया गया है।

रमेश चंद्र मिश्रा के गाँव के पास मुख्य सड़क पर लगा स्मृति गेट

रामजन्मभूमि के बगल आकर बसा परिवार

रमेश चंद्र मिश्रा का परिवार अब अयोध्या शहर में रामजन्मभूमि से महज 3 किलोमीटर दूरी पर आकर बस गया है। हालाँकि, गाँव में भी उनका आना-जाना लगा रहता है। रमेश चंद्र मिश्रा के 4 बेटे हैं। उनकी पत्नी का नाम सुशीला देवी था, जो अब दुनिया में नहीं हैं। रमेश चंद्र के बेटे फ़िलहाल सरकारी व प्राइवेट नौकरियों के साथ खेती-बाड़ी कर के परिवार का गुजारा चलाते हैं।

रमेश मिश्रा के बेटे प्रभाकर मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि पिता की मौत के बाद उनकी माता मानसिक तौर पर टूट चुकी थीं। हालाँकि, अपनी संतानों का मुँह देखकर उन्होंने हिम्मत बाँधी और अपने बाल-बच्चों को पाल-पोस कर बड़ा किया। हालाँकि, लगभग 8 साल पहले सुशीला देवी का भी देहांत हो गया।

करते थे सरकारी नौकरी, फिर भी निकले बलिदान देने

रमेश चंद्र मिश्रा के एक अन्य बेटे दिवाकर नाथ मिश्रा ने ऑपइंडिया को 30 अक्टूबर 1990 की घटना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि उनके गाँव बैरीसालपुर में दिल्ली, पंजाब सहित कई अन्य प्रदेशों के कारसेवक जमा थे। वो सभी किसी भी हाल में अयोध्या पहुँचना चाहते थे, लेकिन रास्ते में पुलिस फ़ोर्स उन्हें पकड़ रही थी।

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने उनके रहने-खाने आदि का इंतजाम किया था। तब रमेश चंद्र डाक विभाग में पोस्टमैन की नौकरी करते थे। उनको गाँव के कई ऐसे रास्ते पता थे, जो पुलिस की जानकारी में नहीं थे। रमेश मिश्रा ने अपने गाँव और आसपास के निवासियों का एक जत्था बनाया और बाहरी कारसेवकों के साथ रामजन्मभूमि की तरफ कूच कर गए।

रामजन्मभूमि के पास हुए बलिदान

दिवाकर नाथ मिश्रा ने हमें बताया कि उनके पिता घर से सबको बताकर निकले थे। वो तमाम रास्तों से सड़क पर तैनात पुलिस वालों से बचते-बचाते अयोध्या शहर में पहुँच गए। यहाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोलियाँ चलाई गईं। ये गोलियाँ रमेश चंद्र के पेट में लगीं और वो बलिदान हो गए। उनका शव अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में रखा गया था।

दिवाकर मिश्रा ने बताया कि जब उनके पिता रमेश चंद्र मिश्रा लौटकर घर नहीं पहुँचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। साथ गए जत्थे से पूछा गया और आखिरकार जानकारी मिली कि रमेश चंद्र मिश्रा वीरगति को प्राप्त हो गए। बताया जा रहा है कि रामजन्मभूमि के थोड़ी ही दूर पहले वो गोलियों का शिकार हुए थे। गोली उनके पेट को छेद कर आर-पार हो गई थी।

नहीं करने दिया सनातन परम्परा से अंतिम विधि-विधान

रमेश मिश्रा के बेटे दिवाकर ने हमें आगे बताया कि वो अपनी माँ के साथ अयोध्या के लिए निकले, लेकिन अयोध्या की सीमा पर तैनात पुलिस ने उन्हें शहर में घुसने नहीं दिया। बहुत रोने और मिन्नत के बाद आखिरकार कुछ लोग अयोध्या में प्रवेश कर पाए। यहाँ वो श्रीराम अस्पताल पहुँचे। वहाँ कई लाशें रखी हुईं थीं, जिनमें से काफी खोजबीन के एक कोने में रमेश चंद्र का निर्जीव शव पड़ा हुआ था।

पति का पर्थिव शव लेकर सुशीला देवी अपने बेटे के साथ गाँव के लिए निकलीं तो उनको अयोध्या की सीमा पर फिर रोक लिया गया। तब दिवाकर मिश्रा की उम्र लगभग 20 साल की रही होगी। दिवार ने हमें आगे बताया कि वो अपनी माँ के साथ पुलिस वालों से मिन्नत करते रहे कि उन्हें लाश गाँव ले जाने दी जाए। हालाँकि इस मिन्नत का तैनात पुलिसकर्मियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

दिवाकर ने बताया, “एक पुलिस अधिकारी ने मेरी माँ को धमकाते हुए कहा कि या तो लाश अभी और यहीं जलाओ, वरना इसे छीन कर नदी में फेंक देंगे।” रमेश के परिजनों ने वैदिक विधान में रात में दाह संस्कार न होने की दुहाई दी, लेकिन पुलिस वालों पर फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार रमेश चंद्र की विधवा और उनके बेटे ने ही हार मान ली और प्रशासन के कहे के मुताबिक शव ले कर पास के श्मशान गए।

लाश ले जाने के दौरान भी उनके साथ पुलिस बल चलता रहा। आखिरकार सनातन पद्धति के विपरीत आधी रात को बिना धुलने आदि की प्रक्रियाओं को पूरा किए ही रमेश चंद्र मिश्रा का अंतिम संस्कार अयोध्या के श्मशान में कर दिया गया। हमसे बात करते हुए दिवाकर मिश्रा भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वो समझ सकते हैं कि इस दौरान वहाँ मौजूद उनकी माँ पर क्या बीती रही होगी।

बलिदानी रमेश के बेटे दिवाकर और प्रभाकर (बाएँ से)

पिता का बने स्मारक

रमेश चंद्र मिश्रा के बेटों को इस बात का दुःख है कि उनको पिछले 3 दशकों में भुला दिया गया। दुखी होकर दिवाकर ने कहा, “हमें पूछने वाला कोई नहीं है।” राम मंदिर बनने से बेहद खुश इस परिवार ने इसे अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी होने जैसा माना। हालाँकि यह परिवार उम्मीद कर रहा है कि उनके बलिदानी पिता का भी एक स्मारक अयोध्या में सरकार द्वारा बनाया जाएगा, जो भविष्य के रामभक्तों को धर्म के लिए मरने-मिटने की प्रेरणा देगा।

जिस कॉन्ग्रेस नेता ने कहा ‘नरेंद्र गौतमदास मोदी’, उस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: FIR रद्द करने से इनकार, कहा- माफी से नहीं बच सकते

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता का नाम बिगाड़ कर फरवरी 2023 में उनका अपमान करने वाले कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत देने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की शिकायतों को रद्द करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार माफी माँग करके कार्रवाई से नहीं बच सकते।

दरअसल, पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका लगाई थी कि उत्तर प्रदेश और असम में उनके खिलाफ दर्ज किए गए आपराधिक मामलों को रद्द करके उन्हें राहत दी जाए। पवन खेड़ा के खिलाफ ये मामले प्रधानमंत्री मोदी का नाम ‘नरेन्द्र गौतम दास मोदी’ कहने पर लिखवाई गईं थी।

दरअसल, खेड़ा ने भारतीय कारोबारी अडानी समूह के खिलाफ आए हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए यह बात कही थी। उन्होंने पीएम मोदी के दिवंगत पिता दामोदर दास की जगह पर कारोबारी गौतम अडानी का नाम लगाया था।

इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने असम और उत्तर प्रदेश में कई जगह पर FIR दर्ज करवाई थी। इसके बाद 23 फरवरी 2023 को उन्हें गुवाहाटी पुलिस ने दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से एक विमान से उतार कर गिरफ्तार कर लिया था। उन्होंने इससे राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर 23 फरवरी 2023 को ही सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों को एक साथ करके उन्हें लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अगस्त 2023 में उन्हें लखनऊ के स्थाने कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई थी।

पवन खेड़ा ने इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने भी यही याचिका रखी थी कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया जाए। हालाँकि, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। इस निर्णय को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 4 जनवरी 2024 को सुनवाई हुई है।

गर्भवती गाय की हत्या से उबला तेलंगाना: घर के बाहर बँधी थी, काटकर खाल और पैर फेंक दिया, सद्दाम सहित तीन हिरासत में

तेलंगाना के करीमनगर जिले में एक गर्भवती गाय को चुरा लिया गया। गाय को गाँव के बाहर ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई। ग्रामीणों को जब चोरी की खबर मिली तो उन्होंने गाय की खोजबीन शुरू की। उन्हें गाय की जगह उसकी खाल और कुछ हड्डियाँ मिलीं। इसके बाद वो आक्रोशित हो गए। खबर है कि गाय की हत्या करने के बाद हत्यारों ने मांस को बेच दिया और हड्डी एवं खाल को वहीं छोड़ दिया।

ये वारदात तेलंगाना के करीमनगर जिले के शंकरपट्टनम मंडल स्थित मोलंगुर गाँव की है। यहाँ गजुला कुमार नाम के ग्रामीण की गाय को 31 दिसंबर 2023 की आधी रात के आसपास सद्दाम, शेख ताज और मनोज मोरे ने चुरा लिया। उनकी गाय गर्भवती थी। नए साल के पहले दिन ग्रामीणों ने सूचना दी कि गाँव के बाहर गाय के अवशेष मिले हैं, जिसमें उसकी खाल और हड्डियाँ शामिल हैं।

इस सूचना के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इस घटना के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने करीमनगर और वारंगल के बीच एनएच 563 पर विरोध प्रदर्शन किया। इस मामले में बीजेपी सांसद बंदी संजय कुमार ने आक्रोश जताया। उन्होंने गौहत्या से जुड़े विजुअल्स शेयर किया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि ग्रामीण गाय के पैर की हड्डियों को छूकर रो रहे हैं।

बंदी संजय कुमार ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “यह देखकर मेरा खून खौल रहा है कि कैसे शंकरपट्टनम मंडल के मोलंगुर गाँव में एक गर्भवती गौमाता को काटकर मार डाला गया। यह भयावह और हृदयविदारक है। तेलंगाना सीएमओ, तेलंगाना डीजीपी और करीमनगर सीपी से हम माँग करते हैं कि दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए कि दोबारा कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत भी करे।”

हुजूराबाद के एसीपी एल जीवन रेड्डी ने बुधवार (03 जनवरी 2023) को बताया कि इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ तेलंगाना गोहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम 1977 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से दोपहिया गाड़ी, गाय की खाल, हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार भी बरामद हुए हैं।

बनियान-हाफ पैंट में 8 किमी दौड़े, फिर आमिर खान की बेटी को किया कबूल: Video देख बोले नेटिजन्स- काफी Casual शादी है

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की बेटी आयरा खान और फिटनेस कोच नुपुर शिखारे की शादी इस समय चर्चा में बनी हुई है। 3 जनवरी 2024 को दोनों ने कोर्ट मैरिज की। नुपुर जिस तरीके से शादी करने मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल पहुँचे उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

नुपुर जॉगिंग करते हुए आयरा से शादी करने आए थे। उन्होंने पूरे 8 किलोमीटर की दौड़ लगाई। इस दौरान वे जिम वाले हुलिए में ही थे। उन्होंने शॉर्ट्स और बनियान पहन रखा था। वीडियो में वे ढोल बजाते, ढोल पर बैठते और नाचते भी नजर आ रहे हैं।

इसी हुलिए में होटल पहुँचने पर आमिर खान गले लगाकर उनका स्वागत करते दिखे। इसके बाद आयरा और नुपुर ने परिवारजनों की उपस्थिति में दोनों ने शादी के कागजों पर दस्तखत किए।

शादी के कागजों पर दस्तखत करते समय आयरा ने लहँगा पहन रखा था। वहीं नुपुर शिखारे एक शॉर्ट्स और स्पोर्ट्स बनियान में थे। यहाँ उन्होंने और कुछ नहीं पहन रखा था। इन्हीं कपड़ो में शादी की स्टेज पर उन्होंने फोटो भी खिंचवाई।

नुपुर और आयरा की इस अनोखी शादी की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। नुपुर शिखारे के लुक और उनके जॉगिंग करके बारात लेकर जाने को लेकर भी सोशल मीडिया पर यूजर्स में बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे उनका निजी मामला बताया तो वहीं कुछ लोगों ने उन पर मीम बनाए। नम्रता दुबे नाम की यूजर ने लिखा, “काफी Casual शादी है। आमिर खान के दामाद बनियान में आए नजर।”

गौरव यादव ने लिखा, “ये शादी हो रहा है या तमाशा। आमिर खान के दामाद नुपुर शिखरे अपनी बारात में अपने दोस्तों के साथ 8 किमी रनिंग करके पहुँचे।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “ब्रो सीधा जॉगिंग से ही शादी करने चला गया।”

एक अन्य यूजर ने एक दूसरी शादी की फोटो की तुलना नुपुर शिखारे से की।

एक अन्य यूजर ने पुष्पा फिल्म के एक सीन से इसकी तुलना करते हुए एक मीम डाला।

एक यूजर ने आमिर की ही फिल्म 3 इडियट्स के एक सीन की याद दिलाई, जिसमें आमिर खान ने करीना के दूल्हे के कोट पर चटनी लगा दी थी।

नुपुर शिखारे शादी में शॉर्ट्स में क्यों पहुँचे

नुपुर शिखारे एक फिटनेस कोच हैं। वह कोविड काल के दौरान आमिर को फिटनेस सम्बन्धी ट्रेनिंग देते थे। इसी दौरान उनकी आयरा से नजदीकियाँ बढ़ी। नुपुर ने अपनी शादी में शॉर्ट्स पहनना और जॉगिंग से बरात लेकर पहुँचना इसलिए चुना कि वह लोगों को फिटनेस सम्बन्धी सन्देश देना चाहते थे। वह वैसे भी अपने इन्स्टाग्राम पर फिटनेस सम्बन्धी वीडियो डालते हैं।

हालाँकि, शादी के बाद जब नुपुर और आयरा मीडिया के सामने फोटो खिंचाने के लिए आए तो इस दौरान नुपुर ने नीले रंग की शेरवानी पहन रखी थी। यहाँ उन्होंने आमिर और अपनी पत्नी आयरा के साथ मीडिया के सामने फोटो खिंचवाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अब दोनों की शादी का एक बड़ा कार्यक्रम राजस्थान के उदयपुर में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कई बड़ी हस्तियाँ शामिल होंगी।

दावा- मैं कट्टर ईमानदार, हकीकत- दारू से लेकर दवा तक घोटाला: मोहल्ला क्लीनिक में फर्जी अटेंडेंस से फेक लैब टेस्ट तक, जाँच CBI के हवाले

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो उसने मोहल्ला क्लीनिक शुरू किया और इसे आम जनता के लिए बेहद फायदेमंद के तौर पर खूब प्रचार-प्रसार किया गया। हालाँकि, मोहल्ला क्लिनिक के शुरुआत से विवादों का नाता रहा है। सबसे पहला विवाद सामने आया कि मोहल्ला क्लीनिक के माध्यम से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को फायदा पहुँचाया जा रहा है। हालाँकि, दवा से लेकर दारू तक घोटाले करने वाली AAP सरकार के मुखिया अरविंद केजरीवाल अभी भी खुद को कट्टर ईमानदार बता रहे हैं।

फर्जी दवाओं के खुलासे के बाद अब डॉक्टरों की अटेंडेंस के लेकर सवाल उठे तो बवाल हो गया। अब इस मामले की जाँच सीबीआई ने शुरू की है। इस जाँच में मोहल्ला क्लीनिक से जुड़े सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला भी सामने आता दिख रहा है। इसमें पाया गया है कि मोहल्ला क्लिनिकों में फर्जी तरीके से लैब टेस्ट कराए गए और निजी कंपनियों को सैकड़ों करोड़ रुपए का फायदा पहुँचाया गया।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने फर्जी लैब टेस्ट के मामले की भी सीबीआई जाँच की सिफारिश की है। ये मामला कुछ ऐसे मोहल्ला क्लिनिक से जुड़ा पाया गया है, जहाँ डॉक्टर फर्जी तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। इन क्लिनिक से सैकड़ों करोड़ रुपए के लैब टेस्ट हुए हैं। हैरानी की बात है कि जब डॉक्टर ही मोहल्ला क्लीनिक में नहीं बैठते थे तो इन लैब टेस्ट को लिखता कौन था?

सूत्रों के मुताबिक, इन लैब टेस्ट में फर्जी नंबरों का इस्तेमाल किया गया है। एक-एक मोबाइल नंबर से 15-24 लैब टेस्ट किए गए हैं। ऐसी तमाम शिकायतों की जाँच विजिलेंस विभाग कर रहा था, जिसने इसकी रिपोर्ट एलजी को सौंपी। एलजी ने इन घोटालों की जाँच सीबीआई को सौंप दी है। इसमें निजी लैब को उन टेस्ट के लिए भुगतान किया गया, जो केवल कागजों पर किए गए थे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार के अस्पतालों में नकली दवाओं की आपूर्ति के बाद आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक में नकली लैब टेस्ट किए गए हैं। इस मामले में एलजी की जाँच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनमें कुछ आँकड़े प्रमोद कुमार सिंह नाम के एक्स यूजर ने साझा किए हैं। इसमें कहा गया है कि जाफर कलां, उजवा, शिकारपुर, गोपाल नगर, ढाँसा, जगजीत नगर और बिहारी कॉलोनी में डॉक्टर फर्जी तरीके से अपना अटेंडेंट दर्ज करा रहे थे।

इन मोहल्ला क्लिनिक से खूब लैब टेस्ट भी कराए गए। पूरी दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक की जाँच में पता चला कि 11,657 ऐसे लैब टेस्ट किए गए, जिसमें मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ 0 लिखा है। इसके अलावा 8251 लैब टेस्ट में मोबाइल नंबर की जगह खाली छोड़ी गई। 3092 टेस्ट ऐसे रहे, जिसमें मोबाइल नंबर-9999999999 का इस्तेमाल किया।

इतना ही नहीं। मोहल्ला क्लिनिक द्वारा कराए गए लगभग 400 टेस्ट में मोबाइल नंबरों की शुरुआत 1,2,3,4,5 से हुई है। ऐसे नंबर भारत में इस्तेमाल नहीं होते हैं। इसके अलावा 999 ऐसे नंबरों की पहचान की गई, जिनका इस्तेमाल 15 या अधिक बार टेस्ट के लिए किया गया है।

बता दें कि मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत दिल्ली के हर मोहल्ले में एक निःशुल्क स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है। इन क्लीनिकों में प्राथमिक चिकित्सा, दवाएँ और कुछ जाँच की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। पिछले कुछ सालों से इन क्लीनिकों में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।

इन आरोपों में कहा गया है कि डॉक्टर और स्टाफ फर्जी अटेंडेंस बनाते हैं और मरीजों को नकली दवाएँ देते हैं। जाँच में भी दवाओं का फर्जी होना पाया गया है। सीबीआई जाँच में यह पता लगाया जाएगा कि मोहल्ला क्लीनिकों में भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं। यदि भ्रष्टाचार हुआ है, तो उसके जिम्मेदार कौन हैं।

इस घोटाले से दिल्ली सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा है। सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। दिल्ली सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ये आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। अरविंद केजरीवाल ने AAP सरकार को कट्टर ईमानदार बताया है।

जिसे कहते हैं हाजी मलंग की दरगाह, वो है गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर: हिंदू समूहों का दावा, बोले महाराष्ट्र के CM- मैं इसे मुक्त कराऊँगा

महाराष्ट्र के ठाणे जिला में स्थित हाजी अब्दुल रहमान उर्फ़ मलंग शाह की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। हिन्दू संगठनों का दावा है कि इस दरगाह के नीचे हिन्दू मंदिर हैं। उन्होंने इसकी जाँच की माँग को तेज कर दिया है। हिंदू संगठनों की इस कोशिश में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ मिला है।

क्या है इस हाजी मलंग शाह की दरगाह को लेकर विवाद?

मलंग शाह दरगाह ठाणे की माथेरान पहाड़ियों पर स्थित एक दुर्ग (किला) में स्थित है। दुर्ग का नाम मलंगगढ़ है। यहीं पर हाजी मलंग शाह नाम की यह दरगाह स्थित है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह दरगाह 12वीं शताब्दी में यमन से भारत आए सूफी फकीर अब्द उल रहमान या अब्दुल रहमान की है।

दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष इस तर्क से सहमत नहीं है। हिंदू पक्ष का कहना है कि मुस्लिमों का दरगाह नहीं, बल्कि गुरु गोरखनाथ के गुरु और नवनाथों में से एक गुरु मछिंद्रनाथ का मंदिर है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि नाथ परम्परा को समर्पित यह हिंदू मंदिर इस दरगाह के नीचे स्थित है।

कहाँ से शुरू हुआ विवाद?

इस दरगाह को लेकर सदियों से विवाद चला आ रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 18वीं शताब्दी में यहाँ मराठाओं ने इस धार्मिक स्थल का प्रबन्धन करने के लिए काशीनाथ पन्त केतकर को भेजा था। तब से आज तक काशीनाथ पंत केतकर नाम के ब्राह्मण का परिवार ही इस दरगाह का प्रबंधन देखता है।

हालाँकि, स्थानीय मुस्लिमों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यहाँ दरगाह है और इसका प्रबन्धन एक हिंदू नहीं कर सकता। हालाँकि, बाद में इसका निर्णय एक लॉटरी के जरिए किया गया, जिसमें निर्णय केतकर के पक्ष में गया। इसके बाद इस दरगाह पर 1980 के दशक में दोबारा विवाद हुआ।

दरगाह के साथ में मंदिर होने का दावा लेकर शिवसेना के नेता आनंद दीघे ने आवाज उठाई और मछिन्द्रनाथ के मंदिर को लेकर शिवसैनिकों को यहाँ 1996 में पूजा की। इस पूजा में महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी भी शामिल हुए थे। यहाँ पर हिन्दू मछिन्द्रनाथ की पूजा, आरती और रोज भोग लगाते हैं। हर पूर्णिमा को यहाँ विशेष पूजा होती है।

हिंदुओँ के साथ-साथ यहाँ मलंग शाह के अनुयायी भी पहुँचते हैं। कई बार हिन्दू श्रद्धालुओं के साथ यहाँ बदसलूकी और पूजा में व्यवधान डालने के मामले में भी सामने आए हैं। मार्च 2021 में ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब आरती कर रहे हिन्दू श्रद्धालुओं के सामने 50-60 मुस्लिमों ने ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए थे। इसके अलावा भी समय-समय पर यहाँ इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हिन्दू भक्तों से कहा है, “मलंगगढ़ को लेकर आपकी भावनाओं को मैं समझता हूँ। आनंद दीघे ने इस मंदिर को मुक्त करवाने को लेकर अभियान शुरू किया था। उन्होंने हमें ‘जय मलंग, श्री मलंग’ के नारे लगवाये थे। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि कुछ मामले ऐसे होते हैं, जो जनता में बात करने के लिए नहीं होते। मैं मलंगगढ़ के विषय में आपकी भावनाएँ जानता हूँ और कहना चाहता हूँ कि एकनाथ शिंदे आपकी इच्छाओं को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आनंद दीघे के राजनीतिक शिष्य हैं। आनंद दीघे महाराष्ट्र में शिवसेना के बड़े नेता थे और जहाँ बाल ठाकरे पार्टी का करिश्माई चेहरा थे तो वहीँ आनंद दीघे का संगठन बनाने में बड़ा हाथ माना जाता है।

अधिकारियों को बुलाने पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची रेखा, कहा- उन पर अपमानजनक टिप्पणी न करें: रिटायर जजों को नौकर नहीं मिलने से खफा हो गया था HC

सुप्रीम कोर्ट ने नौकरशाहों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से बुलाने पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालयों के लिए एक गाइडलाइन जारी की है। इसके साथ ही अवमानना कार्यवाही में यूपी के वित्त सचिव को हिरासत में लेने और मुख्य सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। दरअसल, सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश को घरेलू नौकर नहीं उपलब्ध कराने पर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यूपी सरकार ने उसके आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण को ध्यान में रखते हुए इस पर सुनवाई की।

फैसला देते हुए CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास संविधान के अनुच्छेद 229 के तहत हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों से संबंधित नियम बनाने की शक्ति नहीं है। इसलिए, इलाहाबाद हाईकोर्ट सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के लिए घरेलू मदद का प्रावधान करने वाले नियम नहीं बना सकते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जनवरी 2024) को एक मामले की सुनवाई में कहा कि बेहद जरूरी होने पर ही अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन इसके लिए पहला विकल्प वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का देना होगा। शीर्ष न्यायालय ने यह भी कहा कि इसके लिए संबंधित अधिकारी को पूर्व सूचना भी देनी होगी।

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि अधिकारियों को नियमित तौर पर तलब करके न्यायाधीश ‘बादशाहों’ की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। कोर्ट ने आगे कहा था कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों का पृथक्करण बनाए रखा जाना चाहिए और सुशासन आपसी सम्मान पर निर्भर करता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालतों को अवमानना कार्यवाही में भी अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की माँग करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले हाईकोर्ट को नोटिस जारी करके उनके कृत्य का स्पष्टीकरण माँगा जाना चाहिए।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायाधीशों को उन अधिकारियों को अपमानित नहीं करना चाहिए, जो समन के कारण अदालत में उपस्थित हुए हैं। अधिकारियों की शारीरिक बनावट, शैक्षिक पृष्ठभूमि या सामाजिक स्थिति के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पूरी कार्यवाही के दौरान खड़े रहने की भी जरूरत नहीं है। वे तब खड़े हों, जब कोर्ट को संबोधित कर रहे हों।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी अधिकारी को केवल इसलिए नहीं बुलाया जाना चाहिए, क्योंकि सरकारी हलफनामे में दी गई दलीलों से न्यायाधीश के विचार नहीं मिलते हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई है या तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है या दबाया गया है तो अदालत अधिकारियों को तलब कर सकती है। इसके लिए कारण भी बताना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे, “अधिकारियों के कार्य और निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं, लेकिन उन्हें बिना उचित कारण के बार-बार तलब करना स्वीकार्य नहीं है। संयम बरतना, सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ अनुचित टिप्पणियों से बचना और कानून अधिकारियों के कार्यों को पहचानना एक निष्पक्ष और संतुलित न्यायिक प्रणाली में योगदान देता है।”