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जो था ‘दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी’, उसकी कब्र पर इज्जत देने जुटी भीड़… बम ब्लास्ट में मारे गए 103, गंभीर घायलों से बढ़ सकता है मौत का आँकड़ा

ईरान के केरमन शहर में बुधवार (3 जनवरी 2024) को जनरल कासिम सुलेमानी की कब्र के पास दो जोरदार बम धमाके हुए। इसमें 103 लोगों की मौत हो गई। वहीं 171 लोग घायल हो गए। ये धमाके जनरल सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर आयोजित एक समारोह के दौरान हुए। ईरान में जनरल कासिम सुलेमानी को अयातुल्लाह ख़ोमैनी के बाद मुल्क का सबसे प्रभावी नेता माना जाता था।

103 लोगों की मौत से ईरान में डर और शोक का माहौल है। ईरान के डिप्टी गर्वनर ने इस घटना को आतंकवादी हमला कहा है। ईरान के राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा संगठन के प्रवक्ता बाबाक येक्टा परास्ट के मुताबिक, इन विस्फोटों में लोगों की मौतों की संख्या में इजाफा होने की आशंका है।

मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जानकारी मिली है कि कई घायलों की हालत बेहद गंभीर है। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी सर्विस के जरिए हेलीकॉप्टर से मरीजों को करमान से राजधानी तेहरान के अस्पतालों में ले जाने की पूरी तैयारी है।

अधिकारियों के मुताबिक ये विस्फोट बैगों में रिमोट कंट्रोल के जरिए किए गए। ये विस्फोट इतने खतरनाक थे कि लोगों की लाशें तक जमीन पर टुकड़ों में बिखर गई। ईरान के सरकारी मीडिया में विस्फोटों के बाद के वीडियो और तस्वीरों से यह स्पष्ट है कि धमाका बहुत जोर का था।

इन वीडियो में सायरन बजते हुए दिख रहे हैं। घायलों की चीख-पुकार के दृश्य हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। जमीन पर गिरते हुए खून से लथपथ कई लोग चिल्लाते दिख रहे, “हमारी मदद करो। हर कोई मारा गया है।”

बताते चलें कि ईरान का पूर्व जनरल रहा कासिम सुलेमानी 3 जनवरी 2020 के दिन बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया था। 3 जनवरी 2024 को उसकी मौत के चार साल हुए। उसी की याद में जब उसकी कब्र के पास लोग जमा थे, तो ये दोनों धमाके किए गए।

जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद तब अमेरिका के राष्ट्रपति रहे डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सबसे बड़ी जीत करार देते हुए उसे दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी कहा था।

आतंकी हिलाल और नफीकुल को फाँसी की सजा: श्रमजीवी में कैसे हुआ था ब्लास्ट, उस पत्रकार से जानिए जो इसी ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म पर खड़ा था

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की कोर्ट ने दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने ये सजा साल 2005 में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन को आरडीएक्स से उड़ाने के मामले में सुनाई है। उस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी, तो 62 लोग घायल हो गए थे। श्रमजीवी एक्सप्रेस में धमाका 28 जुलाई की शाम को सवा 5 बजे के आसपास हुआ था। इस मामले में साल 2016 में ही कोर्ट ने अभी फाँसी की सजा सुनाए गए आतंकियों के अलावे दो अन्य आतंकियों को दोषी पाते हुए फाँसी की सजा दी थी, जिसकी सुनवाई हाई कोर्ट में लंबित है। अभी जिन दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई गई है, उसमें हरकत-उल-जेहाद-उल इस्लामी उर्फ हूजी से जुड़ा बांग्लादेशी आतंकी हिलाल उर्फ हेलालुद्दीन और पश्चिम बंगाल का नफीकुल विश्वास है। इन दोनों के मामले पर करीब छह साल से बहस चल रही थी, जिस पर फैसला अब सुनाया गया है।

श्रमजीवी एक्सप्रेस को बम से उड़ाने वाली ये वारदात 28 जुलाई 2005 को हुई थी, जब राजगीर से नई दिल्ली के बीच चलने वाली श्रमजीवी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल बोगी के परखच्चे उड़ गए थे। ये धमाका हरपालगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास हुआ था। जाँच में ये बात सामने आई थी कि दो आतंकियों ने आरडीएक्स से भरे सूटकेस को ट्रेन में रखा और चलती ट्रेन से उतर गए थे। दोनों के उतरने के कुछ समय बाद ही ये धमाका हो गया। जब ये घटना हुई, तब इस खबर का लेखक महज 14 का साल हुआ था और एक शाम पहले ही 15वें साल में उसने प्रवेश किया था। ये घटना जब घटी, तो उस समय सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर क्या माहौल था, पढ़ें…

दिनांक- 28 जुलाई 2005, समय 5.00 बजे

श्रमजीवी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से कुछ समय देरी से आने वाली थी। ट्रेन थोड़ी लेट थी, लेकिन मौसम अच्छा था। चूँकि मैं खुद बामुश्किल 10 मिनट पहले ही सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुँचा था, तो मुझे ट्रेन के लेट होने से ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी। हालाँकि अगले 15 मिनट में बेचैनी बढ़ रही थी। उस समय उसके सुल्तानपुर पहुँचने का समय करीब यही होता था, सवा 5 बजे के आसपास। श्रमजीवी एक्सप्रेस सर्दियों को छोड़ दें तो अपनी पंक्चुअलिटी के लिए मशहूर है। हालाँकि उस दिन ट्रेन समय पर नहीं पहुँची, लगा कि थोड़े समय पर आ जाएगी। पर अगले आधे घंटे तक ट्रेन के बारे में कोई अपडेट नहीं मिल पा रही थी।

समय 5.30 बजे

श्रमजीवी एक्सप्रेस के लेट होने से लोग झल्ला ही रहे थे कि खुसर-पुसर शुरू हो गई कि ट्रेन के साथ कुछ हादसा हो गया है। तब आज की तरह हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन नहीं होते थे, होते थे, लेकिन अभी की तरह नहीं। फिर इंटरनेट का जमाना नहीं था। हाँ, टेक्स्ट मैसेज का दौर था। किसी को टेक्स्ट मैसेज से ही सूचना मिली कि ट्रेन के साथ हादसा हो गया है। लेकिन क्या हादसा हुआ था, इसकी पूरी जानकारी लोगों के पास नहीं थी।

5.45 बजे शाम तक स्थिति ऐसी हो चुकी थी कि प्लेटफॉर्म पर कोई दिख नहीं रहा था। मेरे जीवन के इन 30 मिनट में मैंने उन तनावों को जिया, और लोगों के चेहरों पर दहशत देखी, जो मौत के मुँह से निकल कर आने के बाद होती है।

और पहुँची धमाके की खबर…

श्रमजीवी एक्सप्रेस में धमाके की पुष्टि होते ही हर तरफ लोग भागने लगे। इस बीच, ये अफवाह भी तेजी से फैली कि ये धमाका सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन को उड़ाने के लिए किया गया है। चूँकि सुल्तानपुर हमेशा से ही एक हाई प्रोफाइल इलाका रहा है, जहाँ एक माह पहले ही अयोध्या के पास आरडीएक्स हमला हो चुका था। ऐसे में यह अफवाह कि सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन को उड़ाने के लिए ही इस बम का धमाका किया गया था। अफवाहें तेजी से फैली कि श्रमजीवी एक्सप्रेस की जनरल बोगी, जिसमें सबसे ज्यादा भीड़ होती है, उसमें एक टाइम बम रखा हुआ था। उसका टाइम वही था, जिस समय वो आम तौर पर सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर होती थी। लोगों की जुबान पर एक ही बात थी कि सुल्तानपुर अब आतंकियों की नजर में आ चुका है।

ये सब बातें मेरे लिए इसलिए भी कभी न भुलाने वाली रही, क्योंकि तब मैं सिर्फ 14 साल का था, इसलिए जनरल टिकट से ही दिल्ली आने का सोचा था। पैसे नहीं होते थे, तो कई बार बेटिकट यात्रा भी करता था, और धमाका भी जनरल बोगी में ही हुआ। उस बोगी में, जो ट्रेन के समय से होने की सूरत में मेरे सामने खड़ी होती, या फिर उन्हीं टॉयलेट्स के पास से होकर मैं उस बोगी में जा रहा होता, जो धमाके से उड़ा दी गई थी। सोचिए, इस बात से मैं कितना हिल गया होऊँगा कि ट्रेन अगर समय से होती, तो शायद मैं भी किसी लावारिश की तरह उड़ गया होता।

मैं शाम 6 बजे के आसपास स्टेशन से निकला और जिला अस्पताल के पास से ही गुजर रहा था। हर तरफ पुलिस पहुँच चुकी थी, और सुरक्षित कॉरिडोर भी बनाए जा रहे थे। चूँकि हरपाल गंज से जौनपुर और सुल्तानपुर दोनों ही नजदीकी शहर थे, इसलिए घायलों को जौनपुर, गंभीर घायलों को वाराणसी भेजा जा रहा था। कुछ लोगों को स्थानीय लोग अपने दम पर सुल्तानपुर जिला अस्पताल भी ला रहे थे। धीरे-धीरे शहर में दहशत फैल गई थी। लोग घरों में कैद हो गए। मैं किसी तरह से सुल्तानपुर बस अड्डे से अपने गाँव के लिए मिनी बस पकड़ कर निकल गया। 28 जुलाई 2005 दिन गुरुवार… ये ऐसी तारीख है, जो हमेशा याद रहती है।

दूसरे दिन विस्तार से अखबार में मिली जानकारी

शुक्रवार की सुबह हुई। अखबार गिनती के घरों में आते थे, वो भी 8-9 बजे तक। गाँव में अक्सर देरी हो ही जाती है। सुबह विस्तार से खबर मिली कि श्रमजीवी एक्सप्रेस को आरडीएक्स से उड़ाया गया है। इस धमाके में जनरल बोगी के परखच्चे उड़ गए। 5 दर्जन से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हुए, तो एक दर्जन लोग मारे गए। अगर ये हादसा सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन पर होता, जहाँ मेरे जैसे दर्जनों लोग और भी उस बोगी में चढ़ने के लिए तैयार थे, जो उड़ा दी गई। ऐसे में मृतकों और घायलों का सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

इस आतंकी हमले में उसी आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था, जो पिछले कुछ सालों से लगातार आतंकियों द्वारा इस्तेमाल होते रहे थे। अभी से पिछले 10 सालों में जागरुक हुई पीढ़ी आरडीएक्स के खौफ को नहीं समझ सकती। लेकिन तब ऐसा नहीं था। उन दिनों अक्सर देश भर में धमाकों की सूचना आती थी। अगले साल ही मुंबई में ट्रेनों में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। अब पहले की तुलना में ऐसे धमाकों की संख्या बेहद कम हो गई है। साल 2005 में हुआ वो आतंकी हमला मुझे हर उसी आतंकी हमले की सूचना में अंदर से हिला देता है, जिसे मैंने 18 साल पहले महसूस किया था।

अब जबकि इस आतंकी हमले से जुड़े बाकी दो आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई गई है, तो मन में थोड़ा सुकून सा हुआ है। हालाँकि न्याय मिलने में बहुत समय लग गया। इन आतंकियों को फाँसी कब होगी, ये भी नहीं मालूम। लेकिन उस धमाके में जो लोग मारे गए, या जो लोग बुरी तरह से घायल हुए, वो और उनके परिजन किस हाल में होंगे, ये भी मुझे नहीं पता। शायद वो भी इस खबर को सुनकर उस दहशत को महसूस कर काँप ही उठे होंगे।

फिल्मों की फेक रिव्यू करण जौहर ने कबूली, कहा- तारीफ करने के लिए नकली लोगों को भेजती है उनकी पीआर टीम

निर्माता-निर्देशक करण जौहर पर बॉलीवुड में नेपोटिज्म को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहते हैं। अब उन्होंने यह बात कबूली है कि फिल्मों को फ्लॉप होने से बचाने के लिए वे फेक रिव्यू भी करवाते हैं। उन्होंने कहा कि एक औसत फिल्म को हिट कराने के लिए तमाम तिकड़में अपनानी पड़ती हैं। इसके लिए फर्जी तरीके से रिव्यू और पब्लिसिटी स्टंट का रास्ता भी चुनना पड़ता है। साथ ही करण जौहर ने ये भी कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं है।

उन्होंने फिल्मों का फेक रिव्यू कराने का खुलासा गलाटा प्लस की राउंड टेबल कन्वर्सेशन के दौरान किया। इस बातचीत में रानी मुखर्जी, तापसी पन्नू, संदीप वेंगा रेड्डी स​हित बॉलीवुड से जुड़े कई लोग शामिल थे। करण जौहर ने कहा कि कई बार उन्हें लोग ऑनलाइन गलत तरीके से परेशान करते हैं। कई बार फिल्मों के बारे में निगेटिव बातें फैलाई जाती हैं, तो गुस्सा आता है। कई बार लोग वायरल होने के लिए बकवास बातें फिल्म के बारे में करते हैं। ऐसी चीजें वाकई परेशान करने वाली होती है।

उन्होंने कहा कि इसलिए कभी-कभी अगर उनकी कोई फिल्म औसत होती है, तो उसका बिजनेस बढ़ाने के लिए, उसके बारे में अच्छी बातें कहने के लिए मैं भी लोगों की सेवाएँ लेता हूँ। अच्छी बातों को कहने के लिए पैसे भी देता हूँ। करण जौहर ने कहा, “कभी-कभी हमारी पीआर टीम नकली लोगों को को फिल्म की तारीफ करने के लिए भेजते हैं।” उनकी ये बात सुनने के बाद बातचीत में शामिल रहे अन्य सितारों ने हैरानी भी जताई।

इसके बाद जौहर ने कहा, “देखिए, कभी-कभी आप भी अपनी छाप छोड़ने के लिए संघर्ष कर रहे होते हैं। एक निर्माता के रूप में आप अपनी फिल्म हर किसी को दिखाना चाहते हैं। कई बार लोग तारीफ करते हैं, तो मैं खुश भी होता हूँ।” उन्होंने कहा कि मैं तो हरेक रिव्यू को सुनता हूँ। हर बात पर मेरी नजर होती है। जब फिल्म अच्छा कर रही होती है, तो मैं चुपचाप अपने घर में बैठता हूँ। किसी को इंटरव्यू नहीं देता। उन फिल्मों को प्रचार की जरूरत नहीं रहती है। ऐसे में मैं शांत बैठ सकता हूँ। पर कोई फिल्म अगर औसत है, तो उसके बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए आपको कुछ उपाय भी करने पड़ते हैं।

नीचे लगे वीडियो में आप 1 घंटा 25 मिनट के बाद करण जौहर की ये बातें सुन सकते हैं।

राउंडटेबल बातचीत में करण जौहर ने कहा, “अगर आप ध्यान दें, जो लोग सिनेमाघरों के बाहर वोक्स पॉप करते हैं, जो मीडिया से बात करते हैं, वो चाहते हैं कि वो ऐसी बातें कहें कि उनकी बातें सोशल मीडिया पर वायरल हों। उन्हें पब्लिसिटी मिले। इसलिए वे जोर-शोर से रिएक्शन देते हैं। उन्हें वायरल होने के लिए ये सब बकवास करनी होती है।”

अयोध्या के निषाद परिवार को PM मोदी ने लिखी चिट्ठी, भेजा उपहार: घर जाकर पी थी चाय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर 2023 को अयोध्या में कई परियोजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन किया था। इससे पहले उन्होंने मीरा माँझी नाम की एक महिला के घर जाकर चाय भी पी थी। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ काफी बातचीत की थी। अब पीएम मोदी ने मंगलवार (2 जनवरी 2024) को इस परिवार को पत्र लिखकर नए साल की बधाई दी है। इसके साथ ही गिफ्ट भी भेजा है।

प्रधानमंत्री ने मीरा माँझी को चिट्ठी भेजा है। इसके साथ ही परिवार को उपहार भी भेजा है। उपहार में प्रधानमंत्री ने चाय का एक सेट, रंगों वाली ड्राइंग बुक भेजी है। इसके साथ ही और भी बहुत कुछ भेजा गया है। इसकी तस्वीर भी शामने आई है, जिसमें परिवार के बच्चे गिफ्ट पैक को लिए हुए हैं।

मीरा माँझी को लिखी गई चिट्ठी में पीएम ने कहा है, “आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को नव वर्ष 2024 की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में आप और आपके परिवार के सदस्यों के साथ मुलाकात और आपके द्वारा बनाई गई चाय पीकर बहुत प्रसन्नता हुई। अयोध्या से आने के बाद मैंने कई टीवी चैनलों पर आपका इंटरव्यू देखा।”

पीएम मोदी ने पत्र में आगे लिखा, “उनमें आपका व परिवार के अन्य सदस्यों का आत्मविश्वास और जितने सरल व सहज ढंग से आप लोगों ने अपने अनुभवों को साझा किया, वह देखकर अच्छा लगा। आप जैसे मेरे करोड़ों परिवारजनों के चेहरों की यह मुस्कान ही मेरी पूँजी है, सबसे बड़ा संतोष है, जो मुझे देश के लिए जी-जान से कार्य करने की नई ऊर्जा देता है।”

उज्ज्वला लाभार्थी के रूप में मीरा का जिक्र करते हुए पीएम ने लिखा, “आपका उज्ज्वला योजना का 10 करोड़वीं लाभार्थी बनना एक आँकड़ा भर नहीं है, बल्कि मैं इसे करोड़ों देशवासियों के बड़े-बड़े सपनों व संकल्पों के पूर्ण होने की एक कड़ी के रूप में देखता हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अमृतकाल में आप जैसे आकांक्षा से परिपूर्ण करोड़ों देशवासियों की जीवटता और उत्साह एक भव्य व विकसित भारत के निर्माण के हमारे लक्ष्य को सिद्ध करने में अहम भूमिका निभाएगा।”

बता दें कि अयोध्या की रहने वाली मीरा माँझी पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ की 10 करोड़वीं लाभार्थी हैं। भाजपा सरकार ने 10 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य प्राप्ति की अंतिम लाभार्थी मीरा माँझी हैं। यही कारण है कि पीएम मोदी उनके घर पहुँचे थे।

मीरा के घर पर प्रधानमंत्री ने काफी देर तक गपशप की थी। इस दौरान परिवार के साथ उन्होंने फोटो भी खिंचवाए थे। परिवार के बच्चों के साथ पीएम मोदी ने सेल्फी भी ली थी। ये करने के बाद पीएम मोदी ने मीरा माँझी के परिवार को 22 जनवरी 2024 को राममंदिर में रामलला की होने वाली प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में आमंत्रित भी किया था।

मुलायम सरकार में ‘राम भक्ति’ था अपराध? जिन्होंने भोगी सजा उन्होंने दिखाया जेल वाला ‘कागज’, OpIndia को सुनाई पीड़ा

राम मंदिर आंदोलन के दौरान ना जाने कितने कारसेवकों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इससे पूरा देश परिचित है। अब इन बलिदानियों का सपना साकार हो रहा है। अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयार है। इन तमाम कहानियों के इतर, हम आज आपके सामने ला रहे हैं उस जिंदा कारसेवक की कहानी, जिसकी रामभक्ति उसके लिए अपराध बन गई।

बात सन 1990 की है। पूरे देश से लोग कारसेवा के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या जा रहे थे। देश के तमाम हिस्सों की तरह ही अलीगढ़ के लोगों में भी रामभक्ति का संचार था। उन दिनों उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। ये वो सरकार थी, जो रामभक्तों को रोकने के लिए हरेक तिकड़म इस्तेमाल कर रही थी। इन्हीं में से एक थी, ‘रामभक्ति चालान’। शायद इसका नाम आपने पहले ना सुना हो, लेकिन ऐसा हुआ था।

क्या था रामभक्ति चालान?

कारसेवा करने की इच्छा रखने वाले हजारों-लाखों लोग अयोध्या की ओर कूच कर रहे थे। उन्हें प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रोका जा रहा था, ताकि वे अयोध्या ना पहुँच सकें। उसी समय अलीगढ़ में कारसेवकों को गिरफ्तार कर जेल में डाला जा रहा था। इन्हीं कारसेवकों में से एक हैं मनोज कुमार अग्रवाल। मनोज कुमार अग्रवाल तब महज 23 साल के थे। वे जब अयोध्या कूच कर रहे थे, तब उन्हें अलीगढ़ रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था।

मनोज अग्रवाल को जेल भेजे जाते समय एक प्रमाण पत्र दिया गया था, जिसमें लिखा था कि उनका अपराध क्या है और किस धारा के तहत उन्हें जेल भेजा जा रहा है। उस प्रमाण पत्र पर साफ तौर पर लिखा है, उनका चालान रामभक्ति के कारण हुआ। जी हाँ, उनके ऊपर धारा तो 107/116 लगी है, लेकिन आगे उसमें लिखा है ‘रामभक्त चालानी’।

ऑपइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में रामभक्त मनोज कुमार अग्रवाल बताते हैं कि उनके जैसे सैकड़ों लोगों को अलीगढ़ ही नहीं, आसपास के जिलों में भी रोक लिया गया था। हालाँकि, अलीगढ़ ही ऐसी जगह थी, जहाँ लोगों को ‘रामभक्ति चालानी’ वाले कागज पकड़ाए गए थे। मनोज बताते हैं, “हम जैसे जिंदा कारसेवकों का अपराध ये था कि हम रामभक्ति में लीन थे। हमारे कागज भी यही बताते हैं।”

मनोज जेल के दिनों को याद करते हुए कहते हैं, “अलीगढ़ जेल में भजन होता था। शाखा लगती थी। उस समय अलीगढ़ के जेलर एसडी अवस्थी थे। उन्हीं की मुहर भी रामभक्ति चालानी वाले सर्टिफिकेट में लगी है। वो रामभक्तों के प्रति नरम भाव रखते थे। जेल में शांति थी। सैकड़ों लोग बंद थे। रोज सैकड़ों लोगों से मिलने उनके सैकड़ों परिवार वाले आते थे, लेकिन बाहर मुलायम की सरकार का आतंक था।”

मुलायम की सरकार में मुगल काल जैसा माहौल

मनोज अग्रवाल का कहना है कि उस समय पूरे उत्तर प्रदेश में रामभक्तों का दमन किया गया था। उनका कहना है, “हमें रामभक्ति को अपराध बनाने वाला सर्टिफिकेट दे दिया गया था। सर्टिफिकेट बनाने वालों ने तो दूर तक नहीं सोचा, लेकिन सच तो यही था कि उस समय केसरिया पटका लगाकर कोई बाहर निकल जाता था तो गिरफ्तार हो जाता था।”

मुलायम यादव की सरकार में रामभक्ति में लीन हिंदुओं को किस तरह प्रताड़ित किया गया था, उसे मनोज अग्रवाल ने बताया। उन्होंने आगे बताया, “अगर कोई व्यक्ति तिलक लगाकर निकलता था तो उसे पुलिस गिरफ्तार कर लेती थी। लोग पुलिस वाले के सामने राम-राम कहने से भी डरते थे। उस समय बिल्कुल मुगल काल जैसा माहौल था।”

अलीगढ़ का माहौल कैसा था?

मनोज अग्रवाल के अनुसार, “अलीगढ़ मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र था। यह दंगों का शहर था। उस दौरान दंगे खूब हुए और प्रशासन तो दमन की नीति अपना ही रहा था। जेल से आने के बाद एक और आंदोलन चल रहा था रामशिला पूजन का। तब भी खूब गिरफ्तारियाँ हुई थीं। अलीगढ़ कोतवानी में घुटनों पर इतनी लाठियाँ मारी गई थी, आज भी पुरवाई हवा चलती है तो दर्द होता है।”

रामभक्ति के नाम चालान व्यक्तिगत निर्णय

‘रामनामी चालानी’ को लेकर ऑपइंडिया ने उत्तर प्रदेश पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी अविनाश गौतम से बातचीत की। अविनाश गौतम ने हमें बताया, “पुलिस की नियमावली में रामभक्ति के नाम पर चालान करने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर फिर भी किसी अधिकारी द्वारा ये किया गया तो संभवतः उसका व्यक्तिगत निर्णय भी हो सकता है।”

उन्होंने आगे कहा, “संभव यह भी है कि साल 1990 के कारसेवा के दौरान कई अस्थाई जेलें भी बनाई गई थीं। अन्य कैदियों से कारसेवकों को अलग रखने या पहचान दिखाने के लिए शायद उनकी अलग सेल बनाई गई रही हो और कुछ जगहों पर ‘रामभक्ति चालानी’ शब्द प्रयोग किया गया हो।”

कार्रवाई को किया जा सकता है चैलेंज

वहीं, मुरादाबाद सेशन कोर्ट के एडवोकेट अनुज विश्नोई ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “ये नियमतः कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकारी जबरदस्ती है। इसे मिसयूज ऑफ पॉवर कहा जाएगा, क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान है ही नहीं। इस एक्शन को अभी भी कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है, अगर पीड़ित की इच्छा हो तो।”

तब के और अब के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर

मनोज अग्रवाल ने तब के और अब के माहौल को लेकर कहा कि तब हर तरफ रामभक्तों में आतंक था। उस समय की सरकार दमन करती थी और अब तो एक रामभक्त ही उत्तर प्रदेश चला रहा है। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि आज (03 दिसंबर 2023) को अलीगढ़ के डीआईजी ऑफिस से दो पुलिसकर्मी आए थे, उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें किसी तरह की सुरक्षा की जरूरत तो नहीं है?

मनोज अग्रवाल ने कहा कि इसी बात समझा जा सकता है कि तब के माहौल में और अब के माहौल में क्या अंतर है। वैसे, ये पूरा मामला बताता है कि वर्तमान में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री समय मुलायम यादव की सरकार और उनकी मशीनरी रामभक्तों से कितना नफरत करती थी।

सद्दाम ने लिखा- जिहाद मेरे खून में… UP एटीएस पहुँच गई महाराष्ट्र: रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ISIS साजिश का पर्दाफाश, 11 के घर पर रेड

अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले यूपी एटीएस ने बड़ा ऐक्शन लिया है। खूँखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) द्वारा भारत में अपना बेस बनाने की पुरजोर कोशिशों के बीच सोशल मीडिया पर भड़काऊ, उकसाने वाले और बरगलाने वाले पोस्ट को इंटरसेप्ट किया। इसके बाद महाराष्ट्र में 11 जगहों पर छापेमारी कर कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।

इस मामले की छानबीन के लिए यूपी एसटीएफ महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) पहुँची। वहाँ आईएसआईएस से जुड़े संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान संदिग्धों के ठिकानों से फोन और लैपटॉप, जेहादी साहित्य आदि जब्त किए। इसके बाद उनके घरों में लखनऊ स्थित यूपी एटीएस के दफ्तर में आने का नोटिस थमाकर वापस लौट आई।

दरअसल, यूपी एटीएस ने सोशल मीडिया पर सद्दाम नाम के एक आईएसआईएस समर्थक की पोस्ट देखी। उसने पोस्ट में लिखा था, “संविधान में परिवर्तन होने पर मुस्लिमों को जागना होगा। जिहाद मेरे खून में है। कुर्बानी से नहीं डरेंगे। चुनी हुई सरकार मुस्लिमों पर ज्यादती करती है। बाबरी मस्जिद के फैसले से नाराज हूँ। बदले की चाहत। ओसामा बिन लादेन और बुरहान वानी मेरे आदर्श हैं।”

सद्दाम के इस पोस्ट की जाँच की गई तो संभाजीनगर में कम-से-कम से ऐसे 11 संदिग्धों की पहचान हुई। ये वैचारिक तौर पर आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े मिले। इसके बाद यूपी एटीएस ने 30 दिसंबर 2023 को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में छापेमारी कर दी। इन सभी आरोपितों के परिजनों को 15 से 18 जनवरी के बीच लखनऊ स्थित यूपी एटीएस के कार्यालय में बुलाया है।

एटीएस ने इस साजिश में शामिल मिर्जा सैफ बेग, अब्दुल वाहिद, यासिर, जियाउद्दीन सिद्दीकी, थोर भान, एसके खालिद, ताहिर उर्फ सर, सादिक हबीब समेत 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इन संदिग्धों के अचानक उनके घरों से गायब होने की सूचना मिलने पर एटीएस वहाँ जाकर रेड डाला। हालाँकि, किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। कुछ संदिग्धों के मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

यूपी एटीएस की छापेमारी से महाराष्ट्र की सुरक्षा एजेंसियाँ भी चौकन्नी हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी एटीएस का दावा है कि छत्रपति संभाजीनगर में इन दहशतगर्दों की 17 सितंबर 2023 को एक बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने यूपी और देश के प्रमुख स्थानों पर हमले की रणनीति पर चर्चा की थी। इस बैठक के बाद भड़काऊ बातों का सोशल मीडिया पर प्रसार करना शुरू कर दिया गया।

यूपी एटीएस के सीओ कुलदीप तिवारी ने इसको लेकर पिछले साल अक्टूबर माह में एफआईआर दर्ज कराई थी। एएटीएस ने अपनी शिकायत में लिखा था कि फॉर्मेसी स्टोर पर काम करने वाले एक व्यक्ति की अगुवाई में यूपी में दहशत फैलाने की योजना बनाई जा रही है। UP एटीएस के चीफ मोहित अग्रवाल ने कहा कि देश विरोधी कामों में जुटे कुछ लोगों के बारे में सूचना मिली थी, इसके बाद कार्रवाई की गई।

अराधना में थे लीन, गोलियों से भूना, शव को कुल्हाड़ी से काटा: स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या पर हाई कोर्ट ने ओडिशा सरकार से माँगा जवाब

23 अगस्त 2008 को ओडिशा के कंधमाल में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके शिष्यों की हत्या कर दी गई थी। ओडिशा हाई कोर्ट ने अब इस मामले में राज्य सरकार से जवाब माँगा है। 5 मार्च 2024 तक यह बताने को कहा है कि क्यों नहीं इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी जाए।

देवाशीष होता की याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि क्राइम ब्रांच ने मामले की जाँच में कई पहलुओं की अनदेखी की है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयनारायण मिश्रा ने भी जाँच पर सवाल उठाए हैं। बीजेपी नेता ने कहा है कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने फुलबनी इलाके में जनजातीय समाज के कल्याण के लिए बड़े पैमाने पर काम किया था। इसके कारण वह कई लोगों के निशाने पर थे।

मिश्रा ने कहा कि हैरानी की बात है स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के साथ सीआरपीएफ और ओडिशा पुलिस के जिस दल को होना चाहिए था वह घटना के वक्त मौजूद नहीं था। हत्या की जाँच के लिए तीन आयोग बनाए गए। उन्होंने जो रिपोर्ट दी वो कभी भी सार्वजनिक नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई जाँच के लिए उनकी पार्टी ओडिशा सरकार पर दबाव बनाएगी।

कौन थे स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती

स्वामी लक्ष्मणानंद ओडिशा के वनवासी बहुल फुलबनी (कन्धमाल) जिले के गाँव गुरुजंग के रहने वाले थे। बचपन में ही उन्होंने दुखी-पीड़ितों की सेवा में जीवन समर्पित कर देने का संकल्प ले लिया। हिमालय से साधना साधना कर लौटने के बाद वे गोरक्षा आंदोलन से जुड़ गए। प्रारंभ में उन्होंने वनवासी बहुल फुलबनी के चकापाद गाँव को अपनी कर्मस्थली बनाया था।

धर्मांतरण कर ईसाई बनाए गए लोगों की हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए उन्होंने अभियान शुरू किया। उनकी प्रेरणा से 1984 में चकापाद से करीब 50 किलोमीटर दूर जलेसपट्टा नामक वनवासी क्षेत्र में कन्या आश्रम, छात्रावास तथा विद्यालय की स्थापना हुई। आज भी उस कन्या आश्रम छात्रावास में सैकड़ों बालिकाएँ शिक्षा ग्रहण करती हैं।

1970 से दिसंबर 2007 के बीच स्वामी लक्ष्मणानंद पर 8 बार जानलेवा हमले हुए। आखिरकार 23 अगस्त 2008 जब वे जन्माष्टमी समारोह में भगवान् श्रीकृष्ण की आराधना में लीन थे माओवादियों ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। जलेसपट्टा स्थित उनके आश्रम में हत्यारे घुसे और उन्हें गोलियों से भून डाला। उनके मृत शरीर को कुल्हाड़ी से काट डाला। चार अन्य साधुओं की भी हत्या कर दी गई थी।

WiFi काम नहीं किया तो IAS अफसर ने दूरसंचार कंपनी के कर्मचारी का तोड़ दिया अँगूठा: सीने पर बैठकर करने लगा पैसों की माँग, मामला दर्ज

मुंबई में एक आईएएस अफसर ने एयरटेल कम्पनी के दो कर्मचारियों को बुरी तरह पीटा और गालियाँ दीं। साल 2015 बैच के IAS अफसर और उसके भाई ने एयरटेल के कर्मचारी को इतना मारा कि उसके पैर के अँगूठा में फ्रैक्चर हो गया, जबकि दूसरे कर्मचारी के सीने पर बैठकर उसे प्रताड़ित किया गया। यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है और इसकी कॉपी पुलिस थाने में मौजूद है।

जानकारी के अनुसार, मामला मुंबई के घंसोली जिले की है। यहाँ महाराष्ट्र के जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत IAS अधिकारी अमन मित्तल ने घर में वाईफाई कनेक्शन लगाने के लिए एयरटेल कंपनी में फ़ोन किया था। उनकी माँग पर एक इंजीनियर अमृतेश सिंह को उनके घर पर कनेक्शन लगाने के लिए भेजा गया था।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, जब अमृतेश सिंह वहाँ से कनेक्शन लगाकर निकल गए, तब अमन मित्तल दुबारा एयरटेल में फोन करने लगे। उनका कहना था कि वाईफाई सही काम नहीं कर रहा है। इस पर अमन के घर एक अन्य इंजीनियर सागर मंधेरे को भेजा गया। सागर के वहाँ पहुँचने पर अमन मित्तल और उसका भाई देवेश उन्हें गालियाँ देने लगे।

इस दौरान उनकी सहायता के लिए कॉल पर रहने वाले एयरटेल के कर्मचारी भूषण गूज्जर ने वहाँ खुद पहुँच गया। भूषण ने बताया कि वहाँ पहुँचकर देखा कि देवेश उनके साथी सागर की छाती पर बैठा है। इस पर जब भूषण और उसके साथ पहुँचे एक और कर्मचारी ने मामला सुलझाने की। इसके बाद दोनों उन पर झपट पड़े और पीटने लगे। बकौल भूषण, पिटाई के कारण उसके पैर के अंगूठे की हड्डी टूट गई है।

एयरटेल के कर्मचारियों का कहना है कि जब वे वहाँ पहुँचे थे तो वाईफाई सही काम कर रहा था। यह बताने पर आईएएस अफसर और उसका भाई खीझ गए। सागर ने कहा है कि इसी पर दोनों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। उन्होंने सागर का हाथ मरोड़ा और उसकी छाती पर बैठ गए। उससे फ़ोन भी छीन लिया और वाईफाई का पैसा देने के लिए कहने लगे।

सागर का कहना है कि उसकी और भूषण की रॉड और पाइप से पिटाई की गई। उनका कहना है कि आईएएस अफसर ने पास के पुलिस थाने से पुलिस भी बुलाई। उन्होंने भी उन्हें पीटा। कर्मचारियों का कहना है कि इस पिटाई के निशान उनकी पीठ पर बने हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में दबाव में काम कर रही है और उसने काफी कहने सुनने के बाद शिकायत दर्ज की।

हालाँकि, IAS अधिकारी ने भी क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले में किसी भी पक्ष की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। 2015 बैच के AIS अधिकारी अमन मित्तल जलगाँव के कलेक्टर और लातूर नगर निगम के आयुक्त रह चुके हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र सरकार के जलापूर्ति और स्वच्छता विभाग में उपसचिव के पद पर तैनात हैं।

गौरतलब है कि आज (3 जनवरी 2023) को मध्य प्रदेश के शाजापुर से एक आईएएस अफसर का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह एक ड्राईवर को उसकी ‘औकात’ बता रहे थे। उनकी वीडियो पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्रवाई करते हुए अफसर को हटा दिया और आईएएस अफसर को हदों को जानने की अपील की थी।

सुप्रीम कोर्ट से भी महुआ मोइत्रा को नहीं मिली राहत, लोकसभा से निष्कासन पर रोक लगाने से इनकार: पैसे लेकर सवाल पूछने पर गई थी सांसदी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जनवरी 2024) को तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता महुआ मोइत्रा की लोकसभा से निष्कासन के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने की। बेंच ने इस मामले में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

दरअसल, टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने लोकसभा से अपने निष्कासन पर रोक लगाने और संसदीय कार्यवाही में हिस्सा लेने की इजाजत देने की माँग वाली अपील सुप्रीम कोर्ट से की थी। हालाँकि, कोर्ट ने उनकी अपील ठुकरा दी। हालाँकि, कोर्ट ने निष्कासन के खिलाफ मोइत्रा की याचिका पर लोकसभा सचिवालय से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच के मुताबिक, इस मामले पर अगली सुनवाई 11 मार्च 2024 से शुरू की जाएगी। बताते चलें कि महुआ मोइत्रा निष्कासन से पहले पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से लोकसभा सांसद थीं।

महुआ की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट से कहा, “मुझे अंतरिम राहत पर बहस करने दीजिए। मुझे कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है।” इस पर कोर्ट ने कहा, “नहीं, नहीं। मामले की सुनवाई होने के दिन हम इस पर विचार करेंगे।” कोर्ट ने कहा कि लोकसभा सचिवालय के जवाब की जाँच के बाद इस पर विचार किया जाएगा।

जब सिंघवी ने कोर्ट से महुआ मोइत्रा की अंतरिम राहत पर नोटिस जारी करने की बात की तो कोर्ट ने जवाब दिया, “हम खारिज नहीं कर रहे हैं। यह कोई लंबी तारीख नहीं है, जो हमने दी है।” इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की फरवरी में सुनवाई करने के सिंघवी के अनुरोध को भी ठुकरा दिया।

बताते चलें कि 8 दिसंबर 2023 को लोकसभा की आचार समिति ने महुआ मोइत्रा के सांसद के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद संसद से उनके निष्कासित का एक प्रस्ताव पास किया था। आचार समिति के पास ये सिफारिश बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील और मोइत्रा के एक्स ब्वॉयफ्रैंड जय अनंत देहाद्राई की शिकायत के बाद की गई थी।

टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के बदले में एक उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट सहित कई तरह के फायदे लिए थे। हीरानंदानी अडानी समूह के प्रतिद्वंद्वी कारोबारी हैं और उनके इशारे पर महुआ ने संसद में कई सवाल पूछे। महुआ ने लोकसभा के अपने लॉग-इन क्रेडेंशियल भी हीरानंदानी से शेयर किए थे।

शीर्ष अदालत के सामने सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील सिंघवी ने दलील दी कि उन्हें केवल इस आधार पर निष्कासित किया गया था कि उन्होंने अपने लोकसभा पोर्टल का लॉगिन पासवर्ड हीरानंदानी के साथ साझा किया था, लेकिन रिश्वतखोरी के आरोपों की जाँच नहीं की गई। मोइत्रा को गवाहों से जिरह करने की इजाजत नहीं दी गई।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 को इस केस सुनवाई की थी। तब जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा था कि कोर्ट को महुआ की अर्जी की फाइल पढ़ने का मौका नहीं मिला और इस केस की सुनवाई 3 जनवरी 2024 तक टल गई थी।

बताते चलें कि संसद से निष्कासन के बाद महुआ मोइत्रा को 7 जनवरी 2024 तक राजधानी दिल्ली में मिले सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी हुआ था। इस नोटिस को चुनौती देने के लिए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले हाईकोर्ट ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और वकील जयअनंत देहाद्राई के खिलाफ मोइत्रा द्वारा दायर मानहानि केस में अंतरिम राहत पर भी फैसला सुरक्षित रख लिया था।

उधर सुप्रीम कोर्ट से टीएमसी नेता महुआ को राहत से इंकार पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने चुटकी ली है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अगली तिथि निर्धारित कर दी। चंद पैसों के लिए देश की सुरक्षा को बेचने वाली पूर्व सांसद की परेशानी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है।”

विराट कोहली ने धनुष पर तीर का किया संधान, DJ बजाता रहा ‘राम सिया राम’: ‘ॐ’ वाले बैट के साथ मैदान में आए केशव महाराज तो कुछ ऐसा रहा नज़ारा

न्यूलैंड्स स्थित केपटाउन में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मौजूदा सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा है, जिसमें दक्षिण अफ़्रीकी टीम मात्र 55 रनों पर ही ऑलआउट हो गई। भारत की तरफ से ‘मियाँ भाई’ मोहम्मद सिराज का जादू चला, जिन्होंने 9 ओवर में मात्र 15 रन देकर 6 विकेट झटक डाले। हालाँकि, इस दौरान कुछ हलके-फुल्के मोमेंट्स भी मैदान में देखने को मिले। इनमें से एक था जब विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज का स्वागत किया।

केशव महाराज दक्षिण अफ्रीका की तरफ से आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। उस समय तक मात्र 45 रनों पर टीम के 7 विकेट गिर चुके थे। हालाँकि, केशव महाराज भी अपनी टीम की नैया को पार नहीं लगा सके और 13 गेंदों पर मात्र 3 रन बना कर मुकेश कुमार की गेंद जसप्रीत बुमराह को कैच थमा कर चलते बने। बता दें कि केशव महाराज के बल्ले पर ‘ॐ’ अंकित है और वो आस्थावान हिन्दू हैं। एक बार विकेट के पीछे से विकेटकीपर KL राहुल ने कहा भी था कि वो जब भी खेलने आते हैं तब ‘राम सिया राम’ वाला गाना बजता है।

बुधवार (3 जनवरी, 2024) को भी ऐसा ही हुआ और वो जैसे ही बल्लेबाजी करने आए, DJ ने ‘आदिपुरुष’ फिल्म का यही गाना बजाया। इस दौरान विराट कोहली का उत्साह देखने लायक था। उन्होंने धनुष पर तीर का संधान करने की मुद्रा का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और फिर हाथ जोड़ कर प्रणाम किया। इस दौरान वो मुस्कुराते भी रहे। वनडे सीरीज के दौरान भी तीसरे मैच में यही गाना बजा था और KL राहुल की इस बात से केशव महाराज ने सहमति भी जताई थी कि वो आते हैं तो ये गाना बजाया जाता है।

विराट कोहली का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने भी उनकी तारीफ़ की। जहाँ भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच T20 सीरीज एक मैच के बारिश से धुल जाने के कारण ड्रॉ हुआ, वहीं वनडे सीरीज भारत ने 2-1 से जीत ली। हालाँकि, पहला टेस्ट मैच हारने के बाद भारत दूसरे टेस्ट मैच में अच्छी स्थिति में है। जहाँ यशस्वी जायसवाल शून्य रन बना कर आउट हुए वहीं कप्तान रोहित शर्मा ने 50 गेंदों पर 39 रनों की पारी खेली। इसके बाद शुभमन गिल और विराट कोहली ने पारी को सँभाला।