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जिस ‘द आर्चीज’ से शाहरुख खान की बेटी ने किया डेब्यू, वह मनोज वाजपेयी को नहीं आई पसंद; खुद की बेटी बोली- आपकी परेशानी क्या है पापा

बॉलीवुड ऐक्टर मनोज बाजपेयी एक उम्दा अभिनेता होने के साथ ही एक फैमिली मैन भी हैं। एक इंटरव्यू के दौरान जोराम फेम एक्टर ने खुलासा किया कि हाल ही में उन्होंने 11 साल की बेटी अवा के साथ जोया अख्तर की नई फिल्म ‘द आर्चीज़’ देखी। हालाँकि, कुछ ही देर में पापा-बेटी का ये मज़ेदार मूवी सेशन नोक-झोंक में बदल गया और इसकी वजह भी शाहरुख की लाडली की ये फिल्म ही रही।

जूम के इस इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पेशे की मसरूफियत की वजह से वो अक्सर परिवार को वक्त नहीं दे पाते हैं। इस पर अवा उनकी अच्छी क्लास लगाती है। बेटी की इसी डाँट की डोज पर उन्होंने उसके साथ वक्त बिताने के बारे में सोचा। इस दौरान अवा ‘द आर्चीज़’ फिल्म देख रही थी। नीचे दिए वीडियो में आप मनोज बाजपेयी के इस बयान को टाइम स्लॉट 1:15:00 से देख सकते हैं।

बाजपेयी ने कहा, “मेरी बेटी एक फिल्म देख रही थी, ‘द आर्चीज़’। ज्यादा बच्चे तो आजकल अँग्रेजी बोलते हैं। मैं उसको डाँट रहा था कि तुम हिंदी बोला करो। तब तक मैं 45 मिनट तक ये फिल्म देख चुका था। ये फिल्म मेरे बड़े होने का हिस्सा नहीं है। मेरे बचपन का हिस्सा ‘मोटू-पतलू’, ‘राम बलराम’ हैं। हमारे वक्त में ये सब कुछ हुआ करते थे। मैंने आर्चीज़ का महज एक कॉमिक पढ़ा होगा, मुझे बेट्टी, वेरोनिका याद होगा, जो उसने (अवा) नहीं पढ़ी हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी भी वक्त में मुझे आर्चीज़ देखने का मन नहीं था। मैं अपनी बेटी के वजह से इसे देख रहा था। मैंने कहा कि देखो इसके किरदार हिंदी में बोल रहे हैं। तुमको भी इनकी तरह हिंदी बोलनी पड़ेगी।” हालाँकि, मनोज इस मौके इस्तेमाल अवा को हिंदी भाषा बोलने की अहमियत सिखाने के लिए कर रहे थे, लेकिन उनका बेटी को ये नसीहत देना उन पर भारी पड़ गया।

बाजपेयी ने खुलासा किया कि इस पर उनकी बेटी पलट कर उन्हें डाँटने लगी। इसके बदले अवा ने उनकी ये कहकर क्लास लगा दी कि वो परिवार के साथ पर्याप्त वक्त नहीं बिताते। अवा ने उन्हें जवाब दिया, “आपकी परेशानी क्या है पापा? प्लीज मुझे मूवी देखने दीजिए।” इस पर अभिनेता ने यह कहकर चुटकी ली कि जब भी वह अपनी बेटी को डाँटने की कोशिश करते हैं तो उनकी बेटी भी उन्हें डाँट देती है।

उन्होंने आगे कहा, “आर्चीज मेरे मेंटल सेटअप का कभी नहीं रहा, लेकिन अब मैं आर्ची कॉमिक्स पढ़ना चाहता हूँ पहले तो।” बता दें कि ‘द आर्चीज़’ मशहूर आर्ची कॉमिक्स का भारतीय रूपांतरण है। यह फिल्म 7 दिसंबर 2023 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई। इसे जोया अख्तर ने निर्देशित किया है। फिल्म को टाइगर बेबी प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी है। इस फिल्म में सुहाना खान, ख़ुशी कपूर और अगस्त्य नंदा जैसे स्टार किड्स हैं।

‘देश की अखंडता के खिलाफ काम करने वाले एक व्यक्ति को भी नहीं बख्शेंगे’: बैन किया गया ‘मुस्लिम लीग JK’, अमित शाह बोले – इस्लामी शासन चाहता था मसरत आलम का गुट

भारत सरकार ने ‘मुस्लिम लीग जम्मू कश्मीर’ (मसरत आलम गुट/MLJK-MA) को विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA), 1967 की धारा 3(1) के तहत गैर-कानूनी संगठन घोषित कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ये गुट जम्मू कश्मीर में राष्ट्रविरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल है, ऐसे में सरकार इस पर बैन लगा रही है। उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

अमित शाह ने इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी जानकारी दी। उन्होंने लिखा है कि ‘मुस्लिम लीग जम्मू कश्मीर’ (मसरत आलम गुट) संगठन और इसके सदस्य जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रविरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल हैं और जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और लोगों को भड़काकर वहाँ इस्लामी शासन स्थापित करने को समर्थन देने में लिप्त हैं। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार का संदेश एकदम स्पष्ट है कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उसे कानून के तहत कठोरतम सज़ा दी जाएगी।

केंद्र सरकार ने बताया है कि इस संगठन के खिलाफ विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीए), 1967, भारतीय दंड संहिता, 1860, आर्म्स एक्ट, 1959 और रनबीर दंड संहिता, 1932 की विभिन्न धाराओं के तहत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। बता दें कि मुस्लिम लीग मसरत आलम ग्रुप की अध्यक्षता मसरत आलम भट करता है। वो पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाता है। मसरत आलम अलगाववादी गुट ‘हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’ का अध्यक्ष भी है। पहले हुर्रियत का अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी हुआ करता था, जिसकी मौत हो चुकी है।

गौरतलब है कि भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में सिर्फ इसी साल 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय 4 संगठनों को आतंकी संगठन, 6 व्यक्तियों को आतंकवादी और 2 संगठनों को देश विरोधी संगठन घोषित कर चुका है।

‘इंशाअल्लाह, जल्द एक और पुलवामा होगा’: देवबंद के मदरसे के छात्र ने आतंकी हमले की दी धमकी, यूपी पुलिस और ATS ने उठाया

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद कस्बे में स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र ने 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले को दोहराने की धमकी दे डाली है। पुलिस ने मदरसे के इस छात्र को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, देवबंद के एक मदरसे में पढ़ने वाले तल्हा मजहर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “बहुत जल्द ही इंशाअल्लाह दूसरा पुलवामा भी होगा।” उसका यह ट्वीट वायरल हो गया और पुलिस प्रशासन हरक़त में आ गया।

उत्तर प्रदेश पुलिस और यूपी ATS ने इस छात्र को देवबंद से हिरासत में ले लिया। इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे अब गहराई से पूछताछ की जा रही है। जानकारी सामने आई है कि दूसरे पुलवामा की धमकी देने वाला तल्हा मजहर झारखंड के जमेशदपुर का रहने वाला है और देवबंद में इस्लाम की तालीम लेता है।

तल्हा मजहर की इस पोस्ट के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस और ATS उसके अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को भी खँगाल रही है। यहाँ पता लगाया जा रहा है कि उसने धमकी किस आधार पर दी है। सहारनपुर पुलिस ने इस मामले में बयान भी जारी किया है।

सहारनपुर के पुलिस अधीक्षक ने कहा, “देवबंद में पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि एक युवक ने आपत्तिजनक ट्वीट किया है। जिस पर प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है और पूछताछ के लिए एक संयुक्त टीम बनाई गई है। पूछताछ से जो तथ्य सामने आएँगे उनके आधार कार्रवाई होगी।”

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के एक काफिले पर इस्लामी आतंकियों ने हमला कर दिया था। काफिले की गाड़ी से विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी टकरा दी थी, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही इसमें कई जवान घायल भी हो गए थे। यह बहुत बड़ा आतंकी हमला था।

जो सोमनाथ गिराने की करता था बात, अब अपने ही मुल्क में कुत्तों की तरह घसीटा जा रहा: वीडियो में देखिए कैसे Pak पुलिस ने शाह महमूद कुरैशी को जेल में ठूँसा

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को पाकिस्तान की पुलिस ने घसीट कर जेल के अंदर डाल दिया। यह पूरा वाकया कैमरों में रिकॉर्ड हो गया। शाह महमूद कुरैशी इमरान खान की सरकार में पाकिस्तान के विदेश मंत्री थे। उसने सोमनाथ मंदिर को गिराने की कसम खाई थी।

शाह महमूद कुरैशी, इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इन्साफ के उपाध्यक्ष भी हैं। इस समय पाकिस्तान की फ़ौज इमरान खान की पार्टी और नेताओं पर दमनचक्र चला रही है। शाह महमूद कुरैशी को जेल में फेंकने का वीडियो भी सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, पूर्व पाकिस्तानी विदेशी मंत्री रावलपिंडी की अडियाला जेल में साइफर केस में बंद हैं। इस साइफर का सम्बन्ध अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत और पाकिस्तानी सरकार के बीच बातचीत से है जिसे कथित तौर पर शाह महमूद कुरैशी ने लीक किया था।

शाह महमूद कुरैशी 27 दिसम्बर, 2023 को अडियाला जेल के बाहर इसी मामले में जमानत पा कर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी बीच जेल के पुलिसवालों ने उन्हें बोलने से रोक दिया और जब शाह महमूद नहीं माने तो उन्हें पुलिसवाले पकड़ कर उठा ले गए। इस दौरान शाह महमूद कुरैशी चिल्लाते रहे। कुरैशी को जमानत मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर दुबारा जेल में बंद कर दिया गया। शाह महमूद को घसीटा भी गया। कुरैशी को किस मामले में दुबारा गिरफ्तार किया गया यह भी नहीं बताया गया। कुरैशी ने खुद पर राजनीति के कारण एक्शन लिए जाने का आरोप लगाया है।

शाह महमूद कुरैशी 2018 से 2022 के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री थे और भारत तथा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर काफी उलटे सीधे बयान देते रहते थे। अगस्त 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर भी उन्होंने काफी अनाप-शनाप बयान दिए थे।

शाह महमूद ने एक बार हिंदुत्व को खतरा बता दिया था तो वहीं एक दिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस नहीं देने का ऐलान किया था। उनके बयानों की वजह से ही सऊदी अरब और अन्य अरब देश पाकिस्तान से दूर हो गए थे। कुरैशी ने तालिबान को भी शांतिपूर्ण संगठन बता दिया था।

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक वीडियो वायरल हो चुका है, जिसमें वह महमूद गजनवी की तरह सोमनाथ मंदिर को गिराने की बात करते हैं। वीडियो में कुरैशी ने खुद को महमूद गजनवी का वंशज बताते हुए गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर (somnath temple) को गिराने की बात कर रहे हैं।

इमरान खान की सरकार अप्रैल 2022 में सेना ने पाकिस्तान से बाहर कर दी थी और अब इमरान खान समेत उनकी तहरीक-ए-इन्साफ पार्टी (PTI) के नेताओं को पकड़ पकड़ कर जेल में डाला जा रहा है। शाह महमूद कुरैशी PTI के बड़े नेताओं में से एक थे इसलिए उन्हें भी जेल में डाला गया है।

मुस्लिम लड़की के चक्कर में युसूफ बन गए नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता, पत्नी-बच्चों को छोड़कर कर लिया निकाह: पहली पत्नी की शिकायत पर मौलवी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में नायाब तहसीलदार आशीष गुप्ता नमाज मौदहा क्षेत्र में तैनाती के दौरान वो एक मस्जिद में चुपके-चुपके नमाज पढ़ने लगे। नमाजी टोपी में उनकी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। जाँच में पता चला कि आशीष गुप्ता अब मोहम्मद यूसुफ बन गए हैं। पहले से शादीशुदा आशीष गुप्ता के दो बच्चे हैं, लेकिन रुखसार के चक्कर में उन्होंने घर बार छोड़ दिया।

अब लोगों में ‘लड़की का चक्कर…. बाबू भईया’ टाइप चर्चाएँ हो रही हैं। आशीष उर्फ यूसुफ की पहली पत्नी आरती ने अब आशीष के साथ ही रुखसार, उसके अब्बू, मौसा और निकाह कराने वाले मौलवी को भी लपेटे में ले लिया है और इन सबके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। इस मामले में मौलवी और उसके मौका को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, मौदहा तहसील में तैनात नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता ने पहली पत्नी को बिना तलाक दिए ही रुखसार से निकाह किया है। निकाह के लिए उन्हें इस्लाम भी अपनाना पड़ा। आशीष की पत्नी आरती की शिकायत के बाद हमीरपुर की एसपी दीक्षा शर्मा के आदेश पर इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौदहा क्षेत्र में तैनात नायब तहसीलदार आशीष गुप्ता कई दिनों से मस्जिद में नमाज पढ़ रहे थे। नमाजी टोपी में उनकी तस्वीरें कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी। वो काचरिया बाबा मस्जिद में जाते था। इस बात की जानकारी प्रशासन को हुई तो तहसीलदार बलराम गुप्ता की अगुवाई में जाँच की गई।

उन्होंने बताया कि आशीष उर्दू सीखने के लिए मस्जिद में जाते थे, लेकिन जब गहन जाँच हुई तो पता चला कि लड़की का चक्कर है। आशीष धर्म परिवर्तन करके मोहम्मद यूसुफ बन चुके हैं और रुखसार नाम की लड़की से निकाह भी कर लिया है। अब इस मामले में आरती की शिकायत पर मामला दर्ज हो गया है और गिरफ्तारियाँ शुरू हो गई हैं।

एसपी दीक्षा शर्मा ने बताया कि मंगलवार को सदर कोतवाली में एक महिला द्वारा शिकायत दी गई थी। इसमें कहा गया था कि उनके पति नायब तहसीलदार के पद पर तैनात हैं और उन्होंने तलाक दिए बिना दूसरी शादी कर ली है। शादी के लिए मौलवी द्वारा उनका धर्म परिवर्तन कराया है। सभी के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

धर्म परिवर्तन कर मोहम्मद यूसुफ बने आशीष गुप्ता कानपुर के रहने वाले हैं। वो 2 सितंबर 2023 को ही मौदहा तहसील में आए हैं। अब पता चल रहा है कि इन्हीं तीन माह में उन्होंने निकाह भी कर लिया है। इस पूरे मामले में हिंदूवादी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। बजरंग दल ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

गाजा का समर्थन करने वाले उस्मान ख्वाजा को केशव महाराज से दिक्कत, कारण – बैट पर लिखा है ‘ॐ’: इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिख ICC पर निकाला गुस्सा

पाकिस्तान में जन्मे ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंस्टाग्राम से 25 दिसंबर ‘क्रिसमस की शुभकामनाएँ’ तो दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल काउंसिल (ICC) पर अपना गुबार निकालने से खुद को नहीं रोक पाएँ। इंस्टाग्राम पर उन्होंने ICC पर तंज कसा ही, साथ ही दक्षिण अफ़्रीकी हिंदू क्रिकेटर केशव महाराज को भी बीच में घसीटने से बाज नहीं आए।

दरअसल ‘गाजा मेरे दिल के करीब है’ कहने वाले उस्मान ख्वाजा ICC ने पाकिस्तान के साथ हुए प्रैक्टिस और टेस्ट मैच में फिलिस्तीन के समर्थन में उतरने पर कड़ी फटकार लगाई थी। उस्मान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर क्रिसमस डे को अपने दबे गुस्से के इजहार करने के लिए चुना। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर आईसीसी पर तंज कसते हुए हैशटैग ‘इंकॉन्सटिटेंट’ और ‘डबल स्टैंडर्ड’ हैशटैग का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने ICC पर दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाते हुए संस्था को गलत साबित करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं, इस पोस्ट के लिए उन्होंने गाना भी छाँटकर चुना है। उनकी इस पोस्ट के बैकग्राउंड में कान्ये वेस्ट (Kanye West) का ‘कैन नॉट टेल मी नथिंग’ गाना बज रहा था तो कैप्शन में लिखा था, “सभी को मेरी क्रिसमस। कभी-कभी आपको बस हँसना ही पड़ता है। बॉक्सिंग डे पर मिलते हैं! असंगत, दोहरा मापदंड।”

एक तरह से उस्मान ख्वाजा ने ICC पर आरोप लगाया कि इसी तरह की चीजों पर दूसरे खिलाड़ियों को छोड़ दिया गया, जबकि उन पर कार्रवाई की गई। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने 2 अन्य क्रिकेटरों के साथ दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर केशव महाराज को भी बीच में घसीट लिया है। इस पोस्ट में उन्होंने हिंदू धर्म से आने वाले केशव की बल्ले पर ‘ॐ’ स्टिकर लिखी फोटो डाली है।

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथी मार्नस लाबुशेन और वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन के बल्ले पर ईगल, बाइबिल की वर्सेज और ‘क्रॉस’ स्टिकर लगी फोटो डालते हुए उन्होंने ICC पर हमला बोला है। इस पोस्ट के जरिए ख्वाजा ने तर्क देने की कोशिश की कि या तो उन्हें फिलिस्तीनियों का ‘गैर-राजनीतिक’ तौर पर समर्थन करने दिया जाना चाहिए था या फिर आईसीसी को मैच के दौरान खिलाड़ियों के निजी संदेश देने के मामले पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

इस पोस्ट में ख्वाजा ने साफ इशारा किया है कि आईसीसी को अपने फैसलों को एक शख्स पर सीमित न रखते हुए इसे बड़े पैमाने पर लागू करना चाहिए। उनकी पोस्ट में डाली गई केशव महाराज की बल्ले पर ‘ॐ’ वाली, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मार्नस लाबुशेन और वेस्टइंडीज निकोलस पूरन की बल्ले पर बाइबिल की वर्सेज वाले स्टिकर फोटो डालने से साफ है कि वो उन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहे हैं।

बताते चलें कि क्रिकेट विश्व कप 2023 के दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने पाकिस्तान को 1 विकेट से हरा दिया था। इस मैच में भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी केशव महाराज ने खूब वाहवाही लूटी थी। वो धैर्य के साथ खेले ही नहीं बल्कि मैच के दौरान ही केशव महाराज ने बजरंग बली को याद भी किया। इस पर उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने ‘ॐ’ लिखे बैट से चौका भी लगाया।

बताते चलें कि 36 साल के उस्मान ख्वाजा मूल रूप से पाकिस्तानी मूल के हैं। वो 1986 में पाकिस्तान में पैदा हुए थे। जबकि यहाँ इस बात पर गौर करना जरूरी है कि ‘ॐ’ को आईसीसी नियमों के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है क्योंकि इसका प्रदर्शन किसी राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय वजह को बढ़ावा देने के लिए नहीं है।

ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने पोस्ट में आईसीसी के उस नियम को भी शेयर किया जो क्रिकेटरों को अपने कपड़ों या अन्य साजोसामान पर निजी संदेश लिखने या उनके प्रदर्शन करने से रोकता है। ख्वाजा की हालिया पोस्ट पर डाले गए आईसीसी के इस नियम के मुताबिक, “खिलाड़ियों और टीम के अधिकारियों को निजी संदेश देने और दिखाने वाली किसी भी तरह की सामग्री को अपने कपड़े और अन्य सामानों पर इस्तेमाल करने की मंज़ूरी नहीं दी जाएगी। फिर भले ही ऐसे संदेश कपड़ों पर चिपकाए गए ही क्यों न हों।”

इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह के संदेशों को खास तरह के कपड़ों या अन्य वस्तुओं (उदाहरण के लिए आर्मबैंड) के इस्तेमाल के जरिए शब्दों, प्रतीक, ग्राफिक मैसेज, फोटोज और निजी संदेशों के जरिए भी नहीं प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए पहले से ही टीम अधिकारी बोर्ड और ICC क्रिकेट संचालन विभाग दोनों से मंजूरी लेना जरूरी होगा। उन संदेशों के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी जो राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय गतिविधियों या कारणों से जुड़े हैं।

दरअसल ‘गाजा मेरे दिल के करीब है’ कहने वाले उस्मान ख्वाजा ने पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए टेस्ट मैच से पहले प्रैक्टिस मैच में फिलिस्तीन के समर्थन वाले जूते पहने थे। ICC ने उनके इन जूतों को पहन प्रैक्टिस या फिर आगामी टेस्ट मैच में जाने को लेकर प्रतिबंध लगा दिया। वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट मैच के वक्त काली पट्टी बाँधकर क्रिकेट खेलने मैदान में उतर आए।

उन पर आईसीसी के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया गया था। उनकी इस हरकत पर आईसीसी ने उन्हें कसकर फटकार लगाई थी। दरअसल, ऐसा कर के ख्वाजा का इरादा इज़रायल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनियों को समर्थन देने का था। बताते चलें कि पूर्व खिलाड़ियों, परिवार के सदस्यों या अन्य शख्सियतों की मौत पर शोक जताने के लिए खिलाड़ी काली पट्टी पहनते हैं, लेकिन इसे पहनने से पहले उन्हें राष्ट्रीय बोर्ड और आईसीसी से मंजूरी की जरूरत नहीं होती है।

उस्मान ख्वाजा ने बाद में अपनी सफाई में कहा था, “मेरा कोई एजेंडा नहीं था। मैं धर्म को भी इससे बाहर रखता हूँ। मैं ऐसा इसलिए करता हूँ क्योंकि ये मेरे दिल के अंदर जाकर लगा है। मैं जब इंस्टाग्राम पर देखता हूँ कि छोटे-छोटे बच्चों की मौत हो रही है। यह सब मेरे दिल को गमजदा करता है।”

अंग्रेजों के जमाने की 420 अब नहीं चलेगी, मोदी राज में पुलिस होगी फ्रेंड: जानिए दंड संहिता की जगह अमित शाह क्यों लेकर आए न्याय संहिता

भारतीय संसद से अंग्रेजों के जमाने के तीन महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया। इसके बाद यह कानून लागू हो गया और अंग्रेजों के जमाने के कानून निरस्त हो गया। अंग्रेजों के जमाने के कानून भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) अब भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS), दंड प्रक्रिया संहिता 1898 (CrPC) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 (IEA) अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (BSA) कहलाएगा।

अपराध से जुड़े इन तीनों कानूनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें अपराध से जुड़ी कई धाराओं के क्रम बदल गए हैं। वहीं, कई धाराओं में बदलाव और कई धाराओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, कई अपराधियों ने शब्दों को नए सिरे से परिभाषित की गई है। इसके अलावा, ‘सामाजिक सेवा’ (Community Work) को दंड के रूप में स्थान दिया गया है।

भारतीय दंड संहिता (IPC) में पहले कुल 511 धाराएँ थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता (BNS) में सिर्फ 358 धाराएँ रह गई हैं। संशोधित कानून में 20 नए अपराधों को शामिल किया गया है। वहीं, 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ा दी गई है। 83 अपराधों में जुर्माने की रकम भी बढ़ाई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान है। 6 अपराधों में ‘सामुदायिक सेवा’ की सजा का प्रावधान किया गया है।

बता दें कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लोकसभा ने 20 दिसंबर 2023 को और राज्यसभा ने 21 दिसंबर 2023 को मंजूरी दी थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन कानूनों को मंजूरी दे दी। संसद में तीनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि इनमें सजा देने के बजाय न्याय देने पर फोकस किया गया है।

मुख्य बिंदु

भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) के अधिकांश अपराधों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) में अलग रखा गया है। इसमें ‘सामुदायिक सेवा’ को सजा के रूप में जोड़ा गया है। आत्महत्या जैसे अपराधों में व्यक्ति को सामाजिक सेवा की सजा दी जा सकती है। हालाँकि, इस दौरान उसे किसी तरह का मेहनताना नहीं दिया जाएगा।

राजद्रोह को अब अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। राजद्रोह के बजाय अब भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए एक नया अपराध के रूप में जोड़ा गया है।

BNS में आतंकवाद को एक अपराध माना गया है। इसे एक ऐसे कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालना, आम जनता को डराना या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना है। स्थानीय स्तर पर शांति भंग करना भी आतंकवाद की श्रेणी में शामिल है। फेक करेंसी की तस्करी आतंकवादी कृत्य होगा।

संगठित अपराध को अपराध के रूप में जोड़ा गया है। इसमें अपराध सिंडिकेट की ओर से किए गए अपहरण, जबरन वसूली और साइबर अपराध जैसे अपराध शामिल हैं। छोटे-मोटे संगठित अपराध भी अब अपराध हैं।

जाति-नस्ल, भाषा, समुदाय या व्यक्तिगत विश्वास जैसे कुछ पहचान चिह्नों के आधार पर पाँच या अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा की गई हत्या में सात साल से लेकर आजीवन कारावास या मौत तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

नए कानून में सात वर्ष से अधिक और 12 साल से कम उम्र के किसी बच्चे के अपराध को अपराध नहीं माना जा सकता है, जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई कि उस अवसर पर वह अपने आचरण की प्रकृति और उसके परिणामों के बारे में निर्णय कर सके।

पहले किसी ऐसे व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान नहीं था, जो अपराध करने के उद्देश्य से किसी बच्चे को नियोजित या संलग्न करता था। नए कानून में इसके लिए एक खंड 95 जोड़ा गया है। इसमें यौन शोषण या पोर्नोग्राफी अपराध सहित अपराध करने के लिए किसी बच्चे को काम रखना या उसमें शामिल करना अपराध है। बच्चे द्वारा किए गए अपराध को उसे कराने वाले को भुगतना होगा।

भारतीय दंड संहिता विकृत दिमाग वाले व्यक्ति को अभियोजन (Prosecution) से सुरक्षा प्रदान करता है। BNS में इसे मानसिक बीमारी वाला व्यक्ति कहा गया है। मानसिक बीमारी की परिभाषा में मानसिक मंदता शामिल नहीं है और इसमें शराब एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग को शामिल किया गया है। अब मानसिक मंदता से पीड़ित व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

इसमें हिट एंड रन मामले पर भी फोकस किया गया है। यदि किसी व्यक्ति सड़क पर एक्सिडेंट करता है और घायल व्यक्ति को छोड़कर भाग जाता है तो दस साल की सजा का प्रावधान किया है। वहीं, दुर्घटना के बाद वह घायल या घायलों को अस्पताल लेकर जाता है तो सजा कम हो सकती है।

पुलिस, FIR और हिरासत

पीड़ित व्यक्ति अब किसी भी थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद शिकायत को 24 घंटे के बाद संबंधित थाने में स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, कोई भी महिला ई-एफआईआर दर्ज करा सकती और इस पर तुरंत संज्ञान लेने की व्यवस्था है। इसको लेकर दो दिनों के भीतर जवाब देने की व्यवस्था की गई है।

पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है तो इसके बारे में उसके परिवार को सूचित करना जरूरी है। इसके बाद इस केस में क्या हुआ, इसके बारे में पुलिस को 90 दिनों में संबंधित परिवार को बताना होगा। पहले यह व्यवस्था नहीं थी।

किसी मामले में आरोपित अगर 90 दिनों में कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होता है तो कोर्ट उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल शुरू कर सकता है। इस कानून के बाद अब उन अपराधियों के खिलाफ भी ट्रायल शुरू हो जाएगा, जो विदेशों में छिपकर बैठे हैं।

नए कानून में दया याचिका को लेकर भी प्रावधान किया गया है। दया याचिका अब पीड़ित ही दायर कर सकता है। पहले एनजीओ एवं अन्य संस्थान भी ये काम कर लेते थे। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के 30 दिन के बाद ही याचिका दाखिल किया जा सकेगा।

रेप और हत्या के आरोपितों को पुलिस हथकड़ी लगा सकती है। यह हथकड़ी गिरफ्तारी के समय और कोर्ट ले जाने के दौरान लगा सकती है। हालांकि, आर्थिक अपराध करने वाले आरोपित इससे बचे रहेंगे।

भारतीय न्याय संहिता के अनुसार, पुलिस अपराधियों को अपनी हिरासत में 15 दिन से लेकर 60 दिन या फिर 90 दिन तक रख सकती है। पहले यह अवधि सिर्फ 15 दिन तक थी। हिरासत की अवधि अपराध की प्रवृति पर निर्भर करेगी।

पुलिस को मिली शिकायत के 3 दिनों में ही दर्ज करना और बिना देरी किए बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जाँच कराना, रिपोर्ट को 7 दिनों के अंदर पुलिस थाने और न्यायालय में सीधे भेजना अनिवार्य होगा।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किसी भी मामले में पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय गई है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को 14 दिनों में मामले का संज्ञान लेना होगा।

किन धाराओं में बदलाव

धारा 124: IPC की धारा 124 में राजद्रोह से जुड़े मामलों के सजा का प्रावधान था। नए कानून में ‘राजद्रोह’ को ‘देशद्रोह’ कर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 7 में राज्य के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में ‘देशद्रोह’ को रखा गया है। वहीं, BNS में 124 में अब गलत तरीके से रोकने का प्रावधान किया गया है।

धारा 144: IPC की धारा 144 घातक हथियार से लैस होकर गैरकानूनी सभा में शामिल होने से संबंधित थी। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 11 में सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 187 गैरकानूनी सभा के बारे में है। वहीं, BNS में धारा 144 में गैरकानूनी रूप से अनिवार्य श्रम को जोड़ा गया है।

धारा 302: IPC में हत्या करने वाले लोगों पर धारा 302 लगाया जाता था। अब ऐसे अपराधियों पर धारा 101 लगेगी। नए कानून के अनुसार, हत्या की धारा को अध्याय 6 में मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध कहा जाएगा। BNS में धारा 302 छिना-झपटी के लिए प्रयोग किया जाएगा।

धारा 307: भारतीय दंड संहिता में हत्या करने के प्रयास के लिए धारा 307 के तहत सजा मिलती थी। अब ऐसे दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत सजा सुनाई जाएगी। इस धारा को भी अध्याय 6 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 307 का प्रयोग लूटपाट से संबंधित होगा।

धारा 376: IPC में दुष्कर्म से संबंधित अपराध को धारा 376 में परिभाषित किया गया था। भारतीय न्याय संहिता में इसे अध्याय 5 में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में जगह दी गई है। नए कानून में दुष्कर्म से जुड़े अपराध में सजा को धारा 63 में परिभाषित किया गया है। वहीं, सामूहिक दुष्कर्म को आईपीसी की धारा 376D था, जो अब नए कानून में धारा 70 में शामिल किया गया है।

धारा 399: मानहानि के मामले में पहले IPC की धारा 399 का प्रयोग होता था। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 19 के तहत आपराधिक धमकी, अपमान, मानहानि आदि में इसे जगह दी गई है। मानहानि को भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 399 का प्रावधान नहीं है।

धारा 420: भारतीय दंड संहिता में धारा 420 में धोखाधड़ी या ठगी से संबंधित अपराध था। यह अपराध अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत आएगा। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 17 में संपत्ति की चोरी के विरूद्ध अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।

दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता में बदलाव

दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू हो गई है। सीआरपीसी में कुल 484 धाराओं का प्रावधान था। वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराओं का प्रावधान है। नए कानून में 177 प्रावधानों को बदला गया है। इनमें 9 नई धाराएँ और 39 उपधाराएँ जोड़ी गई हैं। इसके अलावा, 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है।

वहीं, नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 धाराओं का प्रावधान हैं। इससे पहले वाले साक्ष्य कानून में 167 धाराएँ थीं। नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं।

पति को सेक्स के लिए लुभाया, हाथ-पाँव बाँधे और लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया… पत्नी की भतीजी से बनाए थे संबंध, काटकर फोटो भी खींचा

ब्राजील में एक महिला ने अपने पति का लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया। महिला अपने पति से नाराज चल रही थी। महिला के पति ने उसकी 15 साल की भतीजी के साथ सेक्स कर लिया था जिसके कारण महिला नाराज थी। यह घटना दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की है।

जानकारी के अनुसार, ब्राजील की राजधानी साओ पाउलो के नजदीक अतिबाया में हुआ। यहाँ 34 वर्षीय इस महिला ने अपने 39 वर्षीय पति से बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। इसके लिए उसने पहले पति को रिझा कर बेड पर बुलाया और उसके हाथ पैर एक कपड़े से बाँध दिए। इसके बाद उसके लिंग को एक ब्लेड से काट दिया और इसकी तस्वीरें भी ली।

इसके बाद उसने कटे हुए लिंग को टॉयलेट में बहा दिया क्योंकि उसने सुन रखा था कि कटे हुए अंग दुबारा जुड़ सकते हैं। महिला का दावा है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसका पति महिला की 14 वर्षीय भतीजी के साथ सेक्स कर चुका था। इसी का बदला लेने के लिए महिला ने यह कदम उठाया।

महिला इसके बाद खुद ही पुलिस थाने अपने-आप को सौंपने पहुँच गई। यहाँ पहुँच कर महिला ने कहा, “गुड इवनिंग सर, मैं यहाँ आत्मसमर्पण करने आई हूँ क्योंकि मैंने अपने पति का लिंग काट दिया है।” यह सुनकर पुलिस वाले भी सकते में आ गए। पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अभी उसके पति की हालत के विषय जानकारी सामने नहीं आई है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। वर्ष 2021 में ब्राजील में ही एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड का लिंग काट कर कढ़ाई में तल दिया था। महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की हत्या भी कर दी थी। जुलाई 2023 में भारत में ही आंध्र प्रदेश में एक महिला ने अपने पति का लिंग इसलिए काट दिया था क्योंकि वह अपनी पूर्व पत्नी की रील्स देखता था।

‘PM मोदी मंदिर जाते हैं तो मैं परेशान हो जाता हूँ’: विदेशी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने बताया 2024 का एजेंडा, बोले – लोग फैसला करें हिन्दू राष्ट्र चाहिए या सेक्युलर देश

कॉन्ग्रेस हिंदुओं से किस कदर घृणा करती है और किस तरह से अपने नेताओं द्वारा हिंदुओं के खिलाफ हवा बनाने का प्रयास करती है, उसका एक उदाहरण मात्र हैं सैम पित्रोदा। ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने ANI से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी का बार-बार मंदिर में जाना उन्हें परेशान करता है। उन्होंने कहा कि ये अच्छी बात नहीं है। सैम पित्रोदा का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, ऐसे में पीएम मोदी को देश के बारे में सोचना चाहिए।

सैम पित्रोदा का कहना है कि पूरा देश इस समय राम मंदिर पर लटका हुआ है। यह वास्तव में परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को भगवान राम से जो दिक्कत होती थी, उसका प्रदर्शन खुलेआम होने लगा है।

सैम पित्रोदा ने कहा, “मुझे किसी भी धर्म से कोई दिक्कत नहीं है। कभी-कभार मंदिर के दर्शन के लिए जाना ठीक है, लेकिन आप उसे मुख्य मंच नहीं बना सकते। सिर्फ 40 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट देते हैं, 60 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट नहीं देते हैं। वह (नरेंद्र मोदी) हर किसी के प्रधानमंत्री हैं, किसी पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं हैं और यही संदेश भारत के लोग प्रधानमंत्री से चाहते हैं। रोजगार के बारे में बात करें, मुद्रास्फीति के बारे में बात करें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और चुनौतियों के बारे में बात करें। उन्हें (लोगों को) तय करना होगा कि असली मुद्दे क्या हैं – क्या राम मंदिर असली मुद्दा है? या बेरोजगारी एक असली मुद्दा है? क्या राम मंदिर ही असली मुद्दा है? या महँगाई असली मुद्दा है। क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या दिल्ली में वायु प्रदूषण असली मुद्दा है?”

‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा, “2024 का चुनाव भारत के भविष्य के लिए अहम है। भारतीयों को अब तय करना है कि वह कैसा राष्ट्र बनाना चाहते हैं। क्या उन्हें हिंदू राष्ट्र चाहिए या फिर समावेशी और स्थिर धर्मनिरपेक्ष देश चाहिए। लोगों को तय करना होगा कि उन्हें तानाशाह चाहिए या फिर लोकसेवक। लोगों को अब तय करना होगा कि उन्हें धर्म के आधार पर बँटवारा चाहिए या एक लोकसेवक, जो सभी को साथ लेकर चले। क्या लोगों को डर फैलाने वाली सरकार चाहिए या फिर सुरक्षा प्रदान करने वाली सरकार, यह उन्हें ही तय करना होगा। 2024 का चुनाव देश के भविष्य के लिए होने जा रहा है न कि किसी व्यक्ति विशेष के भविष्य के बारे में।”

बता दें कि सैम पित्रोदा को कॉन्ग्रेस समर्थकों द्वारा आईटी क्रांति के अगुवा लोगों में से एक माना जाता है। उन्हें कॉन्ग्रेस की UPA सरकार ने साल 2009 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया था, इसके बाद से वो कॉन्ग्रेस पार्टी की गुलामी करते हैं। जो कॉन्ग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक भगवान राम को काल्पनिक बताती रही है और हिंदुओं के हृदय में बसे भगवान राम को लेकर अपनी कुंठा का प्रदर्शन करती रहती है, वो अयोध्या में लगभग तैयार हो चुके भगवान राम के भव्य मंदिर के लोकार्पण से पहले राजनीतिक-धार्मिक विद्वेष फैलाने की कोशिश में लगी है। इसी क्रम में सैम पित्रोदा उसके हथियार बने हैं।

गौरतलब है कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उस समय अयोध्या में होंगे। इस कार्यक्रम के लिए विपक्ष नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है, जिसमें सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी के भी नाम भी हैं। वहीं, हजारों की संख्या में अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित होंगे। ऐसे में एक तरफ राम मंदिर कार्यक्रम में शामिल होकर हिंदू वोटबैंक को हथियार की कोशिश तो कॉन्ग्रेस कर ही रही है, साथ ही वो गैर-हिंदू वोटरों को अपनी ओर लाने के लिए सैम पित्रोदा जैसे लोगों का इस्तेमाल भी कर रही है।

दिशा बदली, एजेंडा बदला, वाहन बदला, पर नहीं बदली कॉन्ग्रेस की नीयत का ‘चीनी खोट’: राहुल गाँधी की पूर्व से पश्चिम की ‘भारत न्याय यात्रा’ में अरुणाचल नहीं

2024 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी एक और यात्रा पर निकलेंगे। इसका नाम ‘भारत न्याय यात्रा’ रखा गया है। 67 दिनों की यह यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी। उत्तर पूर्व के मणिपुर से शुरू होकर पश्चिम के मुंबई में खत्म होगी।

पूर्व से पश्चिम की दूरी नापने के इस क्रम में कॉन्ग्रेस की यह यात्रा अरुणाचल प्रदेश से नहीं गुजरेगी। अरुणाचल वह राज्य है जिसके हिस्सों पर चीन दावा ठोकता रहा है। यह भी दिलचस्प है कि कॉन्ग्रेस पर चीन के सुर में देश विरोधी प्रलाप करने के आरोप लगते रहे हैं।

27 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने मीडिया को भारत न्याय यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मणिपुर से मुंबई तक की करीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी 2024 को शुरू होगी। इसका समापन 20 मार्च को होगा। इस दौरान यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी।

वेणुगोपाल ने बताया कि यह यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में होगी। इन राज्यों के 85 जिलों से यात्रा गुजरेगी। इस यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा की अगली कड़ी बताया जा रहा है। लेकिन इस बार कई बदलाव भी दिखेंगे। मसलन यह पूरी तरह पद यात्रा नहीं होगी। राहुल गाँधी एक विशेष बस के जरिए सफर करेंगे। इसमें वह कहीं कहीं पैदल भी चलेंगे और लोगों से मुलाक़ात करेंगे।

इसी तरह इस यात्रा का एजेंडा भी भारत जोड़ो यात्रा से अलग होगा। जयराम रमेश ने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने 3 मुद्दे उठाए थे। ये थे- आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तानशाही। लेकिन भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय होगा।

भारत न्याय यात्रा को हरी झंडी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे दिखाएँगे। इस यात्रा का निर्णय 21 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में लिया गया था। राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की इच्छा के चलते यह यात्रा करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ सितम्बर 2022 में तमिलनाडु से शुरू होकर 30 जनवरी 2023 को कश्मीर में खत्म हुई थी। 4500 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के काफी हिस्सा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे चुनावी राज्यों से होकर गुजरा था। लेकिन हाल में इन राज्यों के जब चुनावी नतीजे आए तो पता चला कि यात्रा कॉन्ग्रेस की स्थिति में सुधार लाने में कामयाब नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे सत्ता खोनी पड़ी है तो मध्य प्रदेश में उसका सूपड़ा साफ हो गया है।