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अंग्रेजों के जमाने की 420 अब नहीं चलेगी, मोदी राज में पुलिस होगी फ्रेंड: जानिए दंड संहिता की जगह अमित शाह क्यों लेकर आए न्याय संहिता

भारतीय संसद से अंग्रेजों के जमाने के तीन महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया। इसके बाद यह कानून लागू हो गया और अंग्रेजों के जमाने के कानून निरस्त हो गया। अंग्रेजों के जमाने के कानून भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) अब भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS), दंड प्रक्रिया संहिता 1898 (CrPC) अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 (IEA) अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 (BSA) कहलाएगा।

अपराध से जुड़े इन तीनों कानूनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें अपराध से जुड़ी कई धाराओं के क्रम बदल गए हैं। वहीं, कई धाराओं में बदलाव और कई धाराओं को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, कई अपराधियों ने शब्दों को नए सिरे से परिभाषित की गई है। इसके अलावा, ‘सामाजिक सेवा’ (Community Work) को दंड के रूप में स्थान दिया गया है।

भारतीय दंड संहिता (IPC) में पहले कुल 511 धाराएँ थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता (BNS) में सिर्फ 358 धाराएँ रह गई हैं। संशोधित कानून में 20 नए अपराधों को शामिल किया गया है। वहीं, 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ा दी गई है। 83 अपराधों में जुर्माने की रकम भी बढ़ाई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान है। 6 अपराधों में ‘सामुदायिक सेवा’ की सजा का प्रावधान किया गया है।

बता दें कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लोकसभा ने 20 दिसंबर 2023 को और राज्यसभा ने 21 दिसंबर 2023 को मंजूरी दी थी। इसके बाद 25 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन कानूनों को मंजूरी दे दी। संसद में तीनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि इनमें सजा देने के बजाय न्याय देने पर फोकस किया गया है।

मुख्य बिंदु

भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) के अधिकांश अपराधों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) में अलग रखा गया है। इसमें ‘सामुदायिक सेवा’ को सजा के रूप में जोड़ा गया है। आत्महत्या जैसे अपराधों में व्यक्ति को सामाजिक सेवा की सजा दी जा सकती है। हालाँकि, इस दौरान उसे किसी तरह का मेहनताना नहीं दिया जाएगा।

राजद्रोह को अब अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। राजद्रोह के बजाय अब भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए एक नया अपराध के रूप में जोड़ा गया है।

BNS में आतंकवाद को एक अपराध माना गया है। इसे एक ऐसे कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालना, आम जनता को डराना या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना है। स्थानीय स्तर पर शांति भंग करना भी आतंकवाद की श्रेणी में शामिल है। फेक करेंसी की तस्करी आतंकवादी कृत्य होगा।

संगठित अपराध को अपराध के रूप में जोड़ा गया है। इसमें अपराध सिंडिकेट की ओर से किए गए अपहरण, जबरन वसूली और साइबर अपराध जैसे अपराध शामिल हैं। छोटे-मोटे संगठित अपराध भी अब अपराध हैं।

जाति-नस्ल, भाषा, समुदाय या व्यक्तिगत विश्वास जैसे कुछ पहचान चिह्नों के आधार पर पाँच या अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा की गई हत्या में सात साल से लेकर आजीवन कारावास या मौत तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

नए कानून में सात वर्ष से अधिक और 12 साल से कम उम्र के किसी बच्चे के अपराध को अपराध नहीं माना जा सकता है, जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई कि उस अवसर पर वह अपने आचरण की प्रकृति और उसके परिणामों के बारे में निर्णय कर सके।

पहले किसी ऐसे व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान नहीं था, जो अपराध करने के उद्देश्य से किसी बच्चे को नियोजित या संलग्न करता था। नए कानून में इसके लिए एक खंड 95 जोड़ा गया है। इसमें यौन शोषण या पोर्नोग्राफी अपराध सहित अपराध करने के लिए किसी बच्चे को काम रखना या उसमें शामिल करना अपराध है। बच्चे द्वारा किए गए अपराध को उसे कराने वाले को भुगतना होगा।

भारतीय दंड संहिता विकृत दिमाग वाले व्यक्ति को अभियोजन (Prosecution) से सुरक्षा प्रदान करता है। BNS में इसे मानसिक बीमारी वाला व्यक्ति कहा गया है। मानसिक बीमारी की परिभाषा में मानसिक मंदता शामिल नहीं है और इसमें शराब एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग को शामिल किया गया है। अब मानसिक मंदता से पीड़ित व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

इसमें हिट एंड रन मामले पर भी फोकस किया गया है। यदि किसी व्यक्ति सड़क पर एक्सिडेंट करता है और घायल व्यक्ति को छोड़कर भाग जाता है तो दस साल की सजा का प्रावधान किया है। वहीं, दुर्घटना के बाद वह घायल या घायलों को अस्पताल लेकर जाता है तो सजा कम हो सकती है।

पुलिस, FIR और हिरासत

पीड़ित व्यक्ति अब किसी भी थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद शिकायत को 24 घंटे के बाद संबंधित थाने में स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, कोई भी महिला ई-एफआईआर दर्ज करा सकती और इस पर तुरंत संज्ञान लेने की व्यवस्था है। इसको लेकर दो दिनों के भीतर जवाब देने की व्यवस्था की गई है।

पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है तो इसके बारे में उसके परिवार को सूचित करना जरूरी है। इसके बाद इस केस में क्या हुआ, इसके बारे में पुलिस को 90 दिनों में संबंधित परिवार को बताना होगा। पहले यह व्यवस्था नहीं थी।

किसी मामले में आरोपित अगर 90 दिनों में कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होता है तो कोर्ट उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल शुरू कर सकता है। इस कानून के बाद अब उन अपराधियों के खिलाफ भी ट्रायल शुरू हो जाएगा, जो विदेशों में छिपकर बैठे हैं।

नए कानून में दया याचिका को लेकर भी प्रावधान किया गया है। दया याचिका अब पीड़ित ही दायर कर सकता है। पहले एनजीओ एवं अन्य संस्थान भी ये काम कर लेते थे। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के 30 दिन के बाद ही याचिका दाखिल किया जा सकेगा।

रेप और हत्या के आरोपितों को पुलिस हथकड़ी लगा सकती है। यह हथकड़ी गिरफ्तारी के समय और कोर्ट ले जाने के दौरान लगा सकती है। हालांकि, आर्थिक अपराध करने वाले आरोपित इससे बचे रहेंगे।

भारतीय न्याय संहिता के अनुसार, पुलिस अपराधियों को अपनी हिरासत में 15 दिन से लेकर 60 दिन या फिर 90 दिन तक रख सकती है। पहले यह अवधि सिर्फ 15 दिन तक थी। हिरासत की अवधि अपराध की प्रवृति पर निर्भर करेगी।

पुलिस को मिली शिकायत के 3 दिनों में ही दर्ज करना और बिना देरी किए बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जाँच कराना, रिपोर्ट को 7 दिनों के अंदर पुलिस थाने और न्यायालय में सीधे भेजना अनिवार्य होगा।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किसी भी मामले में पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय गई है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को 14 दिनों में मामले का संज्ञान लेना होगा।

किन धाराओं में बदलाव

धारा 124: IPC की धारा 124 में राजद्रोह से जुड़े मामलों के सजा का प्रावधान था। नए कानून में ‘राजद्रोह’ को ‘देशद्रोह’ कर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 7 में राज्य के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में ‘देशद्रोह’ को रखा गया है। वहीं, BNS में 124 में अब गलत तरीके से रोकने का प्रावधान किया गया है।

धारा 144: IPC की धारा 144 घातक हथियार से लैस होकर गैरकानूनी सभा में शामिल होने से संबंधित थी। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 11 में सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 187 गैरकानूनी सभा के बारे में है। वहीं, BNS में धारा 144 में गैरकानूनी रूप से अनिवार्य श्रम को जोड़ा गया है।

धारा 302: IPC में हत्या करने वाले लोगों पर धारा 302 लगाया जाता था। अब ऐसे अपराधियों पर धारा 101 लगेगी। नए कानून के अनुसार, हत्या की धारा को अध्याय 6 में मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध कहा जाएगा। BNS में धारा 302 छिना-झपटी के लिए प्रयोग किया जाएगा।

धारा 307: भारतीय दंड संहिता में हत्या करने के प्रयास के लिए धारा 307 के तहत सजा मिलती थी। अब ऐसे दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत सजा सुनाई जाएगी। इस धारा को भी अध्याय 6 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 307 का प्रयोग लूटपाट से संबंधित होगा।

धारा 376: IPC में दुष्कर्म से संबंधित अपराध को धारा 376 में परिभाषित किया गया था। भारतीय न्याय संहिता में इसे अध्याय 5 में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में जगह दी गई है। नए कानून में दुष्कर्म से जुड़े अपराध में सजा को धारा 63 में परिभाषित किया गया है। वहीं, सामूहिक दुष्कर्म को आईपीसी की धारा 376D था, जो अब नए कानून में धारा 70 में शामिल किया गया है।

धारा 399: मानहानि के मामले में पहले IPC की धारा 399 का प्रयोग होता था। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 19 के तहत आपराधिक धमकी, अपमान, मानहानि आदि में इसे जगह दी गई है। मानहानि को भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 399 का प्रावधान नहीं है।

धारा 420: भारतीय दंड संहिता में धारा 420 में धोखाधड़ी या ठगी से संबंधित अपराध था। यह अपराध अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत आएगा। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 17 में संपत्ति की चोरी के विरूद्ध अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।

दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता में बदलाव

दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू हो गई है। सीआरपीसी में कुल 484 धाराओं का प्रावधान था। वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराओं का प्रावधान है। नए कानून में 177 प्रावधानों को बदला गया है। इनमें 9 नई धाराएँ और 39 उपधाराएँ जोड़ी गई हैं। इसके अलावा, 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है।

वहीं, नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 धाराओं का प्रावधान हैं। इससे पहले वाले साक्ष्य कानून में 167 धाराएँ थीं। नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं।

पति को सेक्स के लिए लुभाया, हाथ-पाँव बाँधे और लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया… पत्नी की भतीजी से बनाए थे संबंध, काटकर फोटो भी खींचा

ब्राजील में एक महिला ने अपने पति का लिंग काट कर टॉयलेट में बहा दिया। महिला अपने पति से नाराज चल रही थी। महिला के पति ने उसकी 15 साल की भतीजी के साथ सेक्स कर लिया था जिसके कारण महिला नाराज थी। यह घटना दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की है।

जानकारी के अनुसार, ब्राजील की राजधानी साओ पाउलो के नजदीक अतिबाया में हुआ। यहाँ 34 वर्षीय इस महिला ने अपने 39 वर्षीय पति से बदला लेने के लिए इस घटना को अंजाम दिया। इसके लिए उसने पहले पति को रिझा कर बेड पर बुलाया और उसके हाथ पैर एक कपड़े से बाँध दिए। इसके बाद उसके लिंग को एक ब्लेड से काट दिया और इसकी तस्वीरें भी ली।

इसके बाद उसने कटे हुए लिंग को टॉयलेट में बहा दिया क्योंकि उसने सुन रखा था कि कटे हुए अंग दुबारा जुड़ सकते हैं। महिला का दावा है कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसका पति महिला की 14 वर्षीय भतीजी के साथ सेक्स कर चुका था। इसी का बदला लेने के लिए महिला ने यह कदम उठाया।

महिला इसके बाद खुद ही पुलिस थाने अपने-आप को सौंपने पहुँच गई। यहाँ पहुँच कर महिला ने कहा, “गुड इवनिंग सर, मैं यहाँ आत्मसमर्पण करने आई हूँ क्योंकि मैंने अपने पति का लिंग काट दिया है।” यह सुनकर पुलिस वाले भी सकते में आ गए। पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया है। महिला के पति को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अभी उसके पति की हालत के विषय जानकारी सामने नहीं आई है।

इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। वर्ष 2021 में ब्राजील में ही एक महिला ने अपने बॉयफ्रेंड का लिंग काट कर कढ़ाई में तल दिया था। महिला ने अपने बॉयफ्रेंड की हत्या भी कर दी थी। जुलाई 2023 में भारत में ही आंध्र प्रदेश में एक महिला ने अपने पति का लिंग इसलिए काट दिया था क्योंकि वह अपनी पूर्व पत्नी की रील्स देखता था।

‘PM मोदी मंदिर जाते हैं तो मैं परेशान हो जाता हूँ’: विदेशी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने बताया 2024 का एजेंडा, बोले – लोग फैसला करें हिन्दू राष्ट्र चाहिए या सेक्युलर देश

कॉन्ग्रेस हिंदुओं से किस कदर घृणा करती है और किस तरह से अपने नेताओं द्वारा हिंदुओं के खिलाफ हवा बनाने का प्रयास करती है, उसका एक उदाहरण मात्र हैं सैम पित्रोदा। ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ (IOC) के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने ANI से बातचीत में कहा कि पीएम मोदी का बार-बार मंदिर में जाना उन्हें परेशान करता है। उन्होंने कहा कि ये अच्छी बात नहीं है। सैम पित्रोदा का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, ऐसे में पीएम मोदी को देश के बारे में सोचना चाहिए।

सैम पित्रोदा का कहना है कि पूरा देश इस समय राम मंदिर पर लटका हुआ है। यह वास्तव में परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को भगवान राम से जो दिक्कत होती थी, उसका प्रदर्शन खुलेआम होने लगा है।

सैम पित्रोदा ने कहा, “मुझे किसी भी धर्म से कोई दिक्कत नहीं है। कभी-कभार मंदिर के दर्शन के लिए जाना ठीक है, लेकिन आप उसे मुख्य मंच नहीं बना सकते। सिर्फ 40 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट देते हैं, 60 प्रतिशत लोग भाजपा को वोट नहीं देते हैं। वह (नरेंद्र मोदी) हर किसी के प्रधानमंत्री हैं, किसी पार्टी के प्रधानमंत्री नहीं हैं और यही संदेश भारत के लोग प्रधानमंत्री से चाहते हैं। रोजगार के बारे में बात करें, मुद्रास्फीति के बारे में बात करें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और चुनौतियों के बारे में बात करें। उन्हें (लोगों को) तय करना होगा कि असली मुद्दे क्या हैं – क्या राम मंदिर असली मुद्दा है? या बेरोजगारी एक असली मुद्दा है? क्या राम मंदिर ही असली मुद्दा है? या महँगाई असली मुद्दा है। क्या राम मंदिर असली मुद्दा है या दिल्ली में वायु प्रदूषण असली मुद्दा है?”

‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा, “2024 का चुनाव भारत के भविष्य के लिए अहम है। भारतीयों को अब तय करना है कि वह कैसा राष्ट्र बनाना चाहते हैं। क्या उन्हें हिंदू राष्ट्र चाहिए या फिर समावेशी और स्थिर धर्मनिरपेक्ष देश चाहिए। लोगों को तय करना होगा कि उन्हें तानाशाह चाहिए या फिर लोकसेवक। लोगों को अब तय करना होगा कि उन्हें धर्म के आधार पर बँटवारा चाहिए या एक लोकसेवक, जो सभी को साथ लेकर चले। क्या लोगों को डर फैलाने वाली सरकार चाहिए या फिर सुरक्षा प्रदान करने वाली सरकार, यह उन्हें ही तय करना होगा। 2024 का चुनाव देश के भविष्य के लिए होने जा रहा है न कि किसी व्यक्ति विशेष के भविष्य के बारे में।”

बता दें कि सैम पित्रोदा को कॉन्ग्रेस समर्थकों द्वारा आईटी क्रांति के अगुवा लोगों में से एक माना जाता है। उन्हें कॉन्ग्रेस की UPA सरकार ने साल 2009 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया था, इसके बाद से वो कॉन्ग्रेस पार्टी की गुलामी करते हैं। जो कॉन्ग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक भगवान राम को काल्पनिक बताती रही है और हिंदुओं के हृदय में बसे भगवान राम को लेकर अपनी कुंठा का प्रदर्शन करती रहती है, वो अयोध्या में लगभग तैयार हो चुके भगवान राम के भव्य मंदिर के लोकार्पण से पहले राजनीतिक-धार्मिक विद्वेष फैलाने की कोशिश में लगी है। इसी क्रम में सैम पित्रोदा उसके हथियार बने हैं।

गौरतलब है कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उस समय अयोध्या में होंगे। इस कार्यक्रम के लिए विपक्ष नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है, जिसमें सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी के भी नाम भी हैं। वहीं, हजारों की संख्या में अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित होंगे। ऐसे में एक तरफ राम मंदिर कार्यक्रम में शामिल होकर हिंदू वोटबैंक को हथियार की कोशिश तो कॉन्ग्रेस कर ही रही है, साथ ही वो गैर-हिंदू वोटरों को अपनी ओर लाने के लिए सैम पित्रोदा जैसे लोगों का इस्तेमाल भी कर रही है।

दिशा बदली, एजेंडा बदला, वाहन बदला, पर नहीं बदली कॉन्ग्रेस की नीयत का ‘चीनी खोट’: राहुल गाँधी की पूर्व से पश्चिम की ‘भारत न्याय यात्रा’ में अरुणाचल नहीं

2024 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी एक और यात्रा पर निकलेंगे। इसका नाम ‘भारत न्याय यात्रा’ रखा गया है। 67 दिनों की यह यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी। उत्तर पूर्व के मणिपुर से शुरू होकर पश्चिम के मुंबई में खत्म होगी।

पूर्व से पश्चिम की दूरी नापने के इस क्रम में कॉन्ग्रेस की यह यात्रा अरुणाचल प्रदेश से नहीं गुजरेगी। अरुणाचल वह राज्य है जिसके हिस्सों पर चीन दावा ठोकता रहा है। यह भी दिलचस्प है कि कॉन्ग्रेस पर चीन के सुर में देश विरोधी प्रलाप करने के आरोप लगते रहे हैं।

27 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने मीडिया को भारत न्याय यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मणिपुर से मुंबई तक की करीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी 2024 को शुरू होगी। इसका समापन 20 मार्च को होगा। इस दौरान यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी।

वेणुगोपाल ने बताया कि यह यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में होगी। इन राज्यों के 85 जिलों से यात्रा गुजरेगी। इस यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा की अगली कड़ी बताया जा रहा है। लेकिन इस बार कई बदलाव भी दिखेंगे। मसलन यह पूरी तरह पद यात्रा नहीं होगी। राहुल गाँधी एक विशेष बस के जरिए सफर करेंगे। इसमें वह कहीं कहीं पैदल भी चलेंगे और लोगों से मुलाक़ात करेंगे।

इसी तरह इस यात्रा का एजेंडा भी भारत जोड़ो यात्रा से अलग होगा। जयराम रमेश ने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने 3 मुद्दे उठाए थे। ये थे- आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तानशाही। लेकिन भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय होगा।

भारत न्याय यात्रा को हरी झंडी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे दिखाएँगे। इस यात्रा का निर्णय 21 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में लिया गया था। राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की इच्छा के चलते यह यात्रा करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ सितम्बर 2022 में तमिलनाडु से शुरू होकर 30 जनवरी 2023 को कश्मीर में खत्म हुई थी। 4500 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के काफी हिस्सा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे चुनावी राज्यों से होकर गुजरा था। लेकिन हाल में इन राज्यों के जब चुनावी नतीजे आए तो पता चला कि यात्रा कॉन्ग्रेस की स्थिति में सुधार लाने में कामयाब नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे सत्ता खोनी पड़ी है तो मध्य प्रदेश में उसका सूपड़ा साफ हो गया है।

‘लाल तिलक भड़काऊ है’: टीका लगा कर स्कूल पहुँचे छात्र तो शिक्षक ने धुलवाया माथा, अभिभावकों और हिन्दू कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक प्राइवेट स्कूल के शिक्षक पर छात्रों के माथे से तिलक हटवाने का आरोप लगा है। इस पर स्थानीय ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने एतराज जताया और विरोध किया। तब कहीं जाकर स्कूल प्रबंधन ने माना कि स्टाफ से गलती हुई है और उसे समझाया जाएगा। स्कूल के माफी माँगने के बाद फिलहाल विवाद शांत हो गया है।

मामला मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र में भूनी चौराहे के कदम पब्लिक स्कूल का है। छात्रों के परिवारवालों के मुताबिक, शनिवार (23 दिसंबर, 2023) को छात्र माथे पर तिलक लगाकर स्कूल गए थे। परिवारवालों का आरोप है कि वहाँ स्कूल के पीटी शिक्षक ने छात्रों से माथा में लगे तिलक को धो कर आने को कहा। इस बात का विरोध करने पर शिक्षक ने छात्रों को धमकी दी।

ये सारी बातें घर आकर छात्रों ने अपने परिवार वालों को बता दी। छात्रों के परिवार ने इस घटना की सूचना ‘बजरंग दल’ के प्रान्त विद्यार्थी प्रमुख अभिषेक चौहान को दी। इस घटना के विरोध में वो क्रिसमस के दूसरे दिन मंगलवार (26 दिसंबर, 2023) को ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं के साथ कदम पब्लिक स्कूल पहुँच गए।

अभिषेक चौहान की अगुवाई में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने छात्रों के माथे से तिलक हटाने को लेकर विरोध जताते हुए प्रिंसिपल का घेराव किया और नारेबाजी की। स्कूल प्रबंधन के साथ ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी बहस हो गई। स्कूल की प्रिंसिपल पारुल चौधरी के माफी माँगने के बाद मामला शांत हुआ। उन्होंने माना कि उनके स्टाफ से गलती हुई है और बातचीत कर समस्या सुलझाई जाएगी।

अभिषेक का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया था कि इस स्कूल के हिंदू छात्रों के तिलक लगाकर जाने पर शिक्षक इसका विरोध किया करते हैं। उन्होंने कहा कि ये गलत है क्योंकि जो हिंदू धर्म को मानता है वो तिलक लगाकर जाएगा। ये हमारी संस्कृति है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक ने छात्रों के माथे से तिलक धुलवा कर हिंदू धर्म का अपमान किया है।

अभिषेक ने ऑपइंडिया से कहा कि स्कूल वाले लाल तिलक को भड़काऊ बताते हैं। आरोप उस खेल टीचर पर डाला जा रहा है जो घटना के दिन आया ही नहीं था। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 3 हिन्दू छात्रों के साथ अब तक ऐसा हो चुका है। स्कूल ने इन छात्रों पर मामले को तूल न देने का भी दबाव बनाया था।

उन्होंने आगे कहा कि स्कूल प्रशासन का कहना है कि रोकटोक इसलिए की गई क्योंकि छात्रों के बीच तिलक लगाने का मुकाबला शुरू हो गया था। विरोध बढ़ने पर स्कूल ने माफी माँगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हिन्दू संगठनों का ज्ञापन तैयार है। चेताया गया है कि अब किसी के भी छात्र के साथ ऐसा हुआ तो DM ऑफिस पर सीधे धरना होगा।

वहीं दूसरी तरफ स्कूल के प्रबंधक संजीव चौधरी का कहना है कि तिलक हटाने जैसी कोई बात नहीं है। छात्रों को स्कूल में लिपस्टिक और सिंदूर लेकर आने से रोका गया था। छात्रों के बैग से सिंदूर और लिपस्टिक मिली थी। उनका कहना है कि छात्रों ने अपने अभिभावकों गलत जानकारी दी। इस बारे में उन्हें बता दिया गया है।

सियासत की तरह अखाड़े में भी चित हुए राहुल गाँधी, जिन पहलवानों से मिलने पहुँचे उनके सामने ही बजरंग पुनिया ने पटक दिया: गन्ना-मूली लेकर लौटे

नेहरू-गाँधी परिवार की विरासत के बावजूद राहुल गाँधी अब तक की अपनी राजनीतिक यात्रा में कॉन्ग्रेस के लिए बोझ ही साबित हुए हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अब तक जितने भी सियासी प्रयोग किए हैं, उनमें उनको पटखनी मिली है। 2024 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस अखाड़े से राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन अखाड़े से भी तस्वीरें राहुल गाँधी के चित होने की ही आ रही है।

राहुल गाँधी बुधवार (27 दिसंबर 2023) की सुबह हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गाँव पहुँचे। अखाड़े में पहलवानों से मुलाकात की। ये वही अखाड़ा है, जिससे दीपक और बजरंग पुनिया ने कुश्ती की शुरुआत की थी।

इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने पहलवानों के साथ बातचीत की। एक्सरसाइज किया। कुश्ती के दांव-पेंच सीखे। मैट पर बजरंग पुनिया के साथ कुश्ती कर चित हुए। राहुल गाँधी ने पहलवानों के साथ बाजरे की रोटी और सरसों का साग भी खाया। रिपोर्ट के अनुसार लौटते समय गन्ने और मूली भी साथ ले गए।

छारा गाँव के इस अखाड़े को वीरेन्द्र आचार्य अखाड़ा कहते हैं। यह अखाड़ा पहलवान दीपक पूनिया का प्रशिक्षण केन्द्र रहा है। दीपक पूनिया कॉमनवेल्थ में स्वर्ण और एशियाई खेलों में रजत पदक भी जीत चुके हैं। राहुल गाँधी का आज रोहतक में भी एक अखाड़े में जाने का कार्यक्रम है।

बजरंग पूनिया ने इस मुलाक़ात के बाद बताया, “राहुल गाँधी हमारा जो रूटीन होता है रेसलिंग का वह देखने आए थे। उन्होंने कुश्ती और व्यायाम भी किया। वह यह देखने आए थे कि एक खिलाड़ी का जीवन कैसा होता है।” राहुल गाँधी ने इस दौरान कोच वीरेन्द्र आचार्य से भी मुलाक़ात की। वीरेन्द्र आचार्य का कहना था कि राहुल गाँधी सुबह 6:15 बजे बिना किसी को बताए पहुँचे थे।

गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव सम्पन्न हुए थे, जिसमें संजय सिंह की जीत हुई थी। वह कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाते हैं। इसके बाद पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास लेने का निर्णय लिया था। बजरंग पुनिया ने पद्मश्री लौटा दिया था। इसके बाद साक्षी मालिक और बजरंग पूनिया ने कॉन्ग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा और प्रियंका गाँधी से मुलाकात भी की थी।

वैसे केंद्र सरकार ने कुश्ती महासंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह और उनकी पूरी टीम को काम करने से रोक दिया है। कुश्ती फेडरेशन का कामकाज एडहॉक कमेटी देखेगी। लेकिन कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पहलवान इससे संतुष्ट नहीं हैं। 26 दिसंबर को इस कड़ी में विनेश फोगाट ने अपना खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार वापस कर दिया था।

गोवर्धन गिरिराज, 21 किमी की परिक्रमा: दंड प्रणाम कर आगे बढ़ रहे हैं राजस्थान के CM की पत्नी और बेटे, Video वायरल

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का परिवार गोवर्धन गिरिराज जी महाराज का अनन्य भक्त है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उन्होंने पूरे परिवार के साथ गिरिराज जी का दर्शन किया था। अब सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भजनलाल शर्मा की पत्नी गीता और बेटे गिरिराज जी की दंडवत परिक्रमा करते नजर आ रहे हैं।

गिरिराज जी की यह परिक्रमा करीब 21 किमी की है। 5 दिनों में मुख्यमंत्री की पत्नी और बेटे इसे पूरा करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार (26 दिसंबर 2023) को तलहटी से विधि-विधान के साथ इन्होंने दण्डवती परिक्रमा शुरू की।

वायरल वीडियो में कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान के सीएम की जीवनसंगिनी दंडवत परिक्रमा करती नजर आ रही हैं। बेटा कुणाल भी उनके साथ दिखाई पड़ रहा है। माँ-बेटा सड़क परिक्रमा पथ पर पर अन्य श्रद्धालुओं के साथ परिक्रमा करते दिख रहे हैं।

बताते चलें कि गिरिराज महाराज सीएम भजनलाल के इष्ट देव हैं। वे खुद भी करीब डेढ़ दशक से परिवार के साथ गिरिराज जी महाराज की परिक्रमा करते रहे हैं। लेकिन इस बार व्यस्तताओं के चलते मुख्यमंत्री खुद परिक्रमा नहीं कर रहे हैं। गिरिराज जी महाराज का मंदिर गोवर्धन में है।

राजस्थान के सीएम की पत्नी-बेटे की परिक्रमा की वजह से परिक्रमा पथ पर पहले से ही चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्थाओं को और बढ़ा दिया गया है। भरतपुर नदबई क्षेत्र के रहने वाले सीएम शर्मा का अपने इष्ट देव गिरिराज जी के ऊपर अटूट विश्वास और अनुराग है। उनका परिवार काफी धार्मिक है। वे अक्सर परिवार के साथ बंदरों, गायों की सेवा करते रहते हैं। भंडारा करवाते रहते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में 3 वर्ष बढ़ाई गई आयु सीमा: CM योगी ने लिया निर्णय, सोशल मीडिया पर उठी थी आवाज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं की माँग को मानते हुए पुलिस भर्ती में आयु सीमा को लेकर 3 वर्ष की छूट प्रदान की है। पहले इस भर्ती में आयु सीमा 22 वर्ष थी, जिसे अब बढ़ा कर 25 वर्ष कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के युवाओं ने इस काम के लिए मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “युवाओं के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आपकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर भर्ती हेतु जारी प्रक्रिया में सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए उच्चतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया गया है।”

दरअसल, 22 दिसम्बर 2023 को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल पदों के लिए 60,244 भर्तियाँ निकाली थीं। इसमें पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयु की उच्चतम सीमा 22 वर्ष जबकि महिला अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 25 वर्ष रखी गई थी।

इस भर्ती में आयु सीमा के कारण सामान्य वर्ग के युवाओं में काफी रोष था। दरअसल, सामान्य वर्ग के युवाओं को 22 वर्ष की ही आयु सीमा का पालन करना था जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति/जनजाति को इसमें 5 वर्षों तक की छूट थी।

सामान्य वर्ग के युवाओं का कहना था कि 22 वर्ष से ऊपर हो चुके युवाओं को एक भी मौका उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती का नहीं मिला है क्योंकि पिछली बार 2018 में पुलिस भर्ती लाई गई थी तब वह अंडरएज (वांछित आयु से कम) थे और अब उन्हें ओवरएज (वांछित आयु से अधिक) घोषित कर दिया गया है।

इस भर्ती में पहले 2 जुलाई 2001 के बाद जन्मे सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी ही हिस्सा ले सकते थे। अब यह तिथि 2 जुलाई 1998 हो गई है। इससे अब 2018 वाली भर्ती से वंचित युवाओं को भी इसमें हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। सामान्य वर्ग के युवाओं का कहना था कि यह भर्ती 2021 में ही आनी थी, जिससे इन्हें मौका मिल जाता लेकिन कोविड और अन्य कारणों से देर हुई, जिसके कारण यह बाहर हो गए। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश में युवाओं ने ट्विटर समेत ज्ञापन अभियान चला कर सरकार से भर्ती में आयु सीमा में छूट देने की माँग की थी।

युवाओं ने इसको लेकर सत्तापक्ष के विधायकों से भी अपनी माँग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचाई थी। इसी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 दिसम्बर 2023 को इसमें 3 वर्षों की छूट सभी वर्ग के युवाओं को देने का निर्णय लिया है।

आयु सीमा में छूट को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी है। इस भर्ती के लिए आवेदन 27 दिसम्बर 2023 से चालू होकर 16 जनवरी 2024 तक लिए जाएँगे। फरवरी 2024 में इसके लिए परीक्षा करवाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास धमाके का ‘अल्लाह हू अकबर’ कनेक्शन, जिहाद जारी रखने की धमकी

देश की राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित इजरायली दूतावास के पास 26 दिसम्बर 2023 की शाम को एक धमाका हुआ। धमाके के बाद मौके पर पहुँची दिल्ली पुलिस को यहाँ से एक पत्र बरामद हुआ है। इसमें जिहाद और अल्लाह हू अकबर जैसे नारों और गाजा में चल रहे युद्ध का जिक्र है।

जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित इजरायली दूतावास के पास खाली पड़े एक प्लॉट में शाम 26 दिसम्बर 2023 की शाम 5 बजे एक धमाका हुआ। धमाके की सूचना के बाद दिल्ली पुलिस बम स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुँची।

दिल्ली पुलिस ने इलाके को सील करके आसपास जाँच की और पाया कि यह धमाका कम आवृत्ति वाला था। दिल्ली पुलिस की जाँच टीम ने इसी प्लॉट से एक पत्र भी बरामद किया है। पत्र इजरायल के राजदूत को संबोधित करके लिखा गया है। पत्र की भाषा काफी अभद्र है और इसमें गालियों का भी उपयोग किया गया है।

यह पत्र एक पन्ने का है और इसे टाइप करके लिखा गया है। यह पत्र इजरायल के झंडे में लपेट कर यहाँ छोड़ा गया था। पत्र में गाजा पट्टी में हो रही इस्लामी आतंक विरोधी कार्यवाही रोकने की धमकी दी गई है। इसमें इस्लामी नारों जैसे कि ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘जिहाद’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।

इस पत्र में इजरायल के खिलाफ जिहाद जारी रखने की धमकी दी गई है। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इसके बाद इजरायल गाजा में लगातार आतंक विरोधी अभियान चला रहा है। यह धमाका इसी की प्रतिक्रिया में बताया जा रहा है।

इजरायली दूतावास ने इस बम धमाके की पुष्टि की है। भारत में इजरायल के उपराजदूत ओहाद नकश कायनार ने कहा, “आज शाम (26 दिसम्बर 2023) को शाम पाँच बजे के कुछ मिनटों के बाद दूतावास के पास में एक धमाका हुआ। हमारे सारे कर्मचारी और राजनयिक सुरक्षित हैं। हमारी सुरक्षा एजेंसियाँ दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग कर रही हैं और मामले की आगे जाँच की जा रही है।” इजरायल के भारत में राजदूत नाओर गिलोन ने स्पष्ट किया है कि धमाके के समय वह दूतावास में नहीं थे।

दिल्ली पुलिस के अलावा धमाके वाली जगह की जाँच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने भी की है। जाँच में धमाके वाली जगह पर कोई अवशेष नहीं मिले हैं, इसलिए अभी शुरूआती तौर पर इसे एक रासायनिक धमाका माना जा रहा है। हालाँकि, पूरी जानकारी जाँच के बाद ही सामने आएगी।

धमाका करने वालों की तलाश के क्रम में आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जा रही है। दिल्ली पुलिस को अभी सीसीटीवी में दो लोग दिखे हैं, जिन पर धमाके का शक जताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस सीसीटीवी के सहारे इन्हें पहचान कर इनकी तलाश में जुटी है।

उधर इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इजरायली दूतावास के बाहर हुए इस हमले के बाद अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह जारी की है। सुरक्षा परिषद इसे एक संभावित आतंकी हमला मान कर चल रही है। इसने अपने नागरिकों से भारत और विशेष कर दिल्ली में भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी है। साथ ही ऐसे जगहों पर जाने से बचने को कहा है जो कि इजरायली और यहूदी समुदाय के आने जाने वाली जगहें मानी जाती हैं। सुरक्षा परिषद ने अपनी सलाह में इजरायली नागरिकों ने भारत में सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब नई दिल्ली में स्थित इजरायली दूतावास को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में भी इजरायली दूतावास के बाहर एक धमाका हुआ था। इस धमाके में जान माल की कोई क्षति नहीं हुई थी लेकिन कुछ गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं थी। दिल्ली पुलिस ने इजरायली दूतावास और यहूदियों के धार्मिक स्थलों समेत अन्य जगह पर सुरक्षा को धमाके के बाद बढ़ा दिया है।

‘मुझे पुरस्कारों से अब घिन आती है…’: बजरंग पुनिया के बाद महिला पहलवान विनेश फोगाट ने अवॉर्ड लौटाने की घोषणा की, PM मोदी को चिट्ठी भी लिखी

बजरंग पुनिया के बाद अब महिला पहलवान विनेश फोगाट ने अपने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है। विनेश ने कहा, “मैं अपना मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड वापस कर रही हूँ। इस हालत में पहुंचाने के लिए ताकतवर का बहुत बहुत धन्यवाद।” बता दें कि बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया है।

सोशल मीडिया X (ट्विटर) पर इस घोषणा के साथ ही उन्होंने एक पत्र भी साझा किया है। इस पत्र को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है। विनेश से पहले बजरंग पूनिया ने इसी तरह अपना पद्मश्री पुरस्कार वापस लौटाया था। वहीं, साक्षी मलिक भी कुश्ती से संन्यास का एलान कर चुकी हैं। 

पीएम मोदी को लिखे इस पत्र में उन्होंने कहा है, “माननीय प्रधानमंत्री जी, साक्षी मलिक ने कुश्ती छोड़ दी है और बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री लौटा दिया है। देश के लिए ओलंपिक पदक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को यह सब करने के लिए किस लिए मजबूर होना पड़ा, यह सब सारे देश को पता है। आप देश के मुखिया हैं तो आप तक भी यह मामला पहुँचा होगा।”

पत्र में उन्होंने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री जी, मैं आपके घर की बेटी विनेश फोगाट हूँ और पिछले एक साल से जिस हाल में हूँ यह बताने के लिए आपको यह पत्र लिख रही हूँ। मुझे याद है साल 2016, जब साक्षी मलिक ओलंपिक में पदक जीतकर आई थी तो आपकी सरकार ने उन्हें ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था। आज जब साक्षी को कुश्ती छोड़नी पड़ी तबसे मुझे वह साल 2016 बार बार याद आ रहा है। क्या हम महिला खिलाड़ी सरकार के विज्ञापनों पर छपने के लिए ही बनी हैं। “

विनेश ने पत्र में बृजभूषण सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “कुश्ती की महिला पहलवानों ने पिछले कुछ सालों में जो कुछ भोगा है उससे समझ आता ही होगा कि हम कितना घुट घुट कर जी रही हैं। आपके वो फैंसी विज्ञापनों के फ्लेक्स बोर्ड भी पुराने पड़ चुके होंगे और अब साक्षी ने भी संन्यास ले लिया है। जो शोषणकर्ता है, उसने भी अपना दबदबा रहने की मुनादी कर दी है, बल्कि बहुत भौंडे तरीके से नारे भी लगवाए हैं। आप अपनी जिंदगी के सिर्फ पांच मिनट निकालकर उस आदमी के मीडिया में दिए गए बयानों को सुन लीजिए, आपको पता लग जाएगा कि उसने क्या क्या किया है।”

विनेश फोगाट द्वारा X पर शेयर किया गया पत्र

पत्र में आगे है, “उसने (बृजभूषण सिंह ने) महिला पहलवानों को मंथरा बताया है, महिला पहलवानों को असहज कर देने की बात सरेआम टीवी पर कबूली है और हम महिला खिलाड़ियों को जलील करने का एक मौका भी नहीं छोड़ा है। उससे ज्यादा गंभीर यह है कि उसने कितनी ही महिला पहलवानों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। यह बहुत भयावह है। कई बार इस सारे घटनाक्रम को भूल जाने का प्रयास भी किया लेकिन इतना आसान नहीं है।”

विनेश ने आगे कहा, “बजरंग ने किस हालत में अपना पद्मश्री वापस लौटाने का फैसला लिया होगा मुझे नहीं पता, पर मैं उसकी वह फोटो देखकर अंदर ही अंदर घुट रही हूँ। अब मुझे भी अपने पुरस्कारों से घिन आने लगी है। मुझे मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड दिया गया था, जिनका अब मेरी जिंदगी में कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए प्रधानमंत्री सर, मैं अपना मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड आपको वापस करना चाहती हूँ, ताकि सम्मान से जीने की राह में ये पुरस्कार हमारे ऊपर बोझ न बन सकें।”

भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव 21 दिसंबर को हुए थे। इसमें संजय सिंह को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद साक्षी मलिक ने यह कहते हुए कुश्ती से संन्यास ले लिया कि फिर से बृजभूषण जैसा ही चुना गया है तो क्या करें? इसके बाद बजरंग ने पद्म श्री लौटाया और अब विनेश ने अपना खेल रत्न लौटा दिया है। पैरा एथलीट वीरेंद्र सिंह भी अपना पद्म श्री लौटाने की बात कह चुके हैं।