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‘6 महीने में पूरी करें ज्ञानवापी की सुनवाई’: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ख़ारिज की मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाएँ, कहा – जरूरत पड़ी तो दोबारा होगा ASI सर्वे

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (19 दिसंबर, 2023) को ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने की हिंदुओं की याचिका को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की सभी याचिकाएँ खारिज कर दी हैं। दरअसल, इन याचिकाओं में मस्जिद की जगह पर मंदिर बनाने की माँग को चुनौती दी गई थी। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ मंदिर के बीच स्वामित्व को लेकर ‘सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड’ और ‘अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी’ ने ये याचिकाएँ दायर की थीं। याचिकाएँ खारिज करने का ये फैसला जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनाया।

खारिज की गई 5 में से 2 याचिकाएँ 1991 में हिन्दू श्रद्धालुओं द्वारा दायर किए गए सिविल सूट पर सुनवाई जारी रखने के खिलाफ थीं। ये फ़िलहाल वाराणसी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेंडिंग हैं। वहीं बाकी की 3 याचिकाएँ ASI के सर्वे वाले आदेश के खिलाफ थीं। इन्हें भी खारिज कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 3 याचिकाएँ ज्ञानवापी मस्जिद का प्रबंधन करने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की तरफ से और दो उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से दायर की गई थीं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रोहित रंजन अग्रवाल ने निचली अदालत से कहा है कि वो 6 महीने के भीतर इस मामले पर सुनवाई पूरी करें। हिन्दू पक्ष की याचिकाओं को चुनौती दिए जाने के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही सुनवाई पूरी हो चुकी थी। इस केस में कोर्ट ने 8 दिसंबर, 2023 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि अगर ASI के सर्वे में कुछ बचा रह गया है तो सर्वे फिर से कराया जा सकता है।

ये केस वाराणसी में प्रतिष्ठित काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में मौजूद ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा है। इसमें देवता आदि ‘विश्वेश्वर विराजमान’ की तरफ से वाराणसी अदालत में 1991 में दायर केस में विवादित परिसर को हिंदुओं को सौंपने और वहाँ उन्हें पूजा करने अनुमति माँगी गई थी।

इस मुकदमे को चुनौती देते हुए, ‘अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी’ और ‘यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड’ ने तर्क दिया था कि इस जगह का रखरखाव पूजा स्थल अधिनियम (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के तहत आता है और इसकी सुनवाई अदालत नहीं कर सकती है।

दरअसल ये अधिनियम देश में पूजा स्थलों को सुरक्षा देता है। ये कहता है कि 15 अगस्त 1947 को मौजूद जो धार्मिक स्थल जिस हालात में था जिस समुदाय का था वो भविष्य में उसी का और वैसा ही रहेगा। इसे लेकर हिंदू पक्ष का तर्क है कि यह विवाद आजादी से पहले का है इस वजह से यहाँ ये अधिनियम लागू नहीं होगा।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता लेकर आडवाणी-जोशी के द्वार पर VHP, कहा – अयोध्या आने का प्रयास करेंगे: चंपत राय ने उम्र का दिया था तकाजा

राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को VHP (विश्व हिन्दू परिषद) के नेताओं ने उनके आवास पर पहुँच कर न्योता दिया है। इसकी तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें संगठन के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार वयोवृद्ध भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को निमंत्रण पत्र सौंप रहे हैं। आडवाणी और जोशी राम मंदिर आंदोलन में दशकों तक सक्रिय रहे हैं और मुखर होकर इस आंदोलन का नेतृत्व किया है।

VHP ने जानकारी दी है कि दोनों वयोवृद्ध नेताओं ने आश्वासन दिया है कि वो 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में आयोजित राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आने का पूरा प्रयास करेंगे। इससे पहले ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चंपत राय ने कहा था कि आडवाणी जी का होना अनिवार्य है और वो ये भी कहेंगे कि वो कृपया न आएँ। उन्होंने पत्रकारों से पूछा था कि आपने आडवाणी जी को देखा है या नहीं, उनकी उम्र तक आप पहुँच भी पाएँगे या नहीं।

बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी 96 वर्ष के हो चले हैं। नब्बे के दशक में रथ यात्रा निकाल कर उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन को नई दिशा दी थी और बिहार में लालू यादव सरकार द्वारा उनकी गिरफ़्तारी कराना देश भर में चर्चा का विषय बना था। चंपत राय ने कहा था कि मुरली मनोहर जोशी से उनकी बात हुई है और वो फोन पर उन्हें यही कहते रहे कि आप मत आइए, लेकिन वो लगातार ज़िद करते रहे – मैं आऊँगा। बकौल चंपत राय, डॉ जोशी के साथ उनसे अच्छे संबंध शायद ही किसी के होंगे।

हालाँकि, अब VHP ने साफ़ कर दिया है कि लालकृष्ण आडवाणी और डॉ मुरली मनोहर जोशी को निमंत्रण पत्र दिया गया है और दोनों कार्यक्रम में आने का प्रयास भी करेंगे। जबकि चंपत राय ने कहा कि उन्होंने बार-बार डॉ जोशी से निवेदन किया कि वो न आएँ, क्योंकि उनकी उम्र हो गई है, ठंड बहुत होगी और उनके घुटने की सर्जरी हुई है। उन्होंने राम मंदिर के भूमिपूजन का उदाहरण दिया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम कल्याण सिंह कार्यक्रम में आने की ज़िद करने लगे थे, उन्हें हाँ-हाँ कर के भरोसे में रखा गया, फिर अंतिम दिन मना कर दिया गया उनके स्वास्थ्य को देखते हुए।

मुनव्वर फारूकी चला रहा था कई लड़कियों से चक्कर, आयशा खान के बाद एक्स-GF नाजिला ने खोली पोल: कहा- उसकी बातें झूठ का पुलिंदा

हिन्दू देवी देवताओं पर अभद्र टिप्पणियाँ करके सस्ती लोकप्रियता बटोरने वाले कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की पोल उनकी एक्स गर्लफ्रेंड ने खोल दी है। उनकी एक्स गर्लफ्रेंड नाजिला सीताशी ने मुनव्वर पर कई लड़कियों से चक्कर चलाने और उन्हें धोखा देने के आरोप लगाए हैं। इससे पहले बिग बॉस में जाने वाली इन्स्टाग्राम इन्फ़्लुएंन्सर आयशा खान ने मुनव्वर पर यही आरोप जड़े थे। अब नाजिला ने लाइव आकर अपनी कहानी सुनाई है।

नाजिला ने कहा है, “मुझे नहीं पता था कि आयशा और मुनव्वर साथ में हैं, मुझे एकदम अलग कहानी सुनाई गई थी। मुनव्वर ने मुझे विश्वास दिलाया कि उसकी जिन्दगी में मैं ही अकेली लड़की हूँ जिससे वो प्यार करता है। लेकिन यह सच नहीं था और वह अन्य कई लड़कियों के साथ भी था जिनके बारे में मैं बात नहीं करना चाहती।” मुनव्वर पर नाजिला के वीडियो के बाद उनके नाबालिग रहते उन्हें बहलाने फुसलाने के आरोप भी लगे हैं।

उन्होंने कहा, “मुनव्वर केवल आयशा के साथ होता तो माफ़ी की बात भी थी लेकिन इसमें और भी लड़कियाँ थीं। मेरी इच्छा है कि लोग जानें कि कैमरे के पीछे क्या हुआ, लेकिन वो नहीं जानते हैं और मैं चाहती हूँ कि लोग इस पर ध्यान देना बंद कर दें। मुनव्वर के साथ अब इस एपिसोड के बाद मेरा कोई रिश्ता नहीं है।”

नाजिला ने अन्य कई सनसनीखेज आरोप मुनव्वर पर लगाए। उन्होंने कहा, “मैं चुप रही क्योंकि मुझे देखना था कि वह अपनी सफाई में क्या कहता है। यह सब केवल झूठ का पुलिंदा था और मैं इससे संतुष्ट नहीं हूँ। मैं ना किसी को सफाई पेश करना चाहती हूँ ना ही चाहती हूँ कि लोग इस बारे में बात करें। लेकिन चीजें इतनी बढ़ गई हैं कि मुझे लाइव आना पड़ा। यही मेरा सच है और मैं आखिरी बार इस बारे में बात कर रही हूँ। मेरा अब इस आदमी (मुनव्वर फारूकी) के साथ कोई लेना देना नहीं है।”

इससे पहले आयशा ने बिग बॉस में जाने के बाद मुनव्वर को आड़े हाथों लिया था और उनसे उनकी कई रिलेशनशिप के बारे में पूछा था। मुनव्वर ने इस पर सफाई पेश करने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि नाजिला और वह एक दूसरे के लिए अब भी भावनाएँ रखते हैं और दोनों पुनः एक साथ होना चाहते हैं। हालाँकि, मुनव्वर के इन दावों को नाजिला ने नकार दिया है और उन पर धोखा देने के साथ ही सारे रिश्ते खत्म कर लेने की बात कही है। आयशा से मुनव्वर ने माफ़ी भी माँगी।

दरअसल, सारा मामला चालू हुआ जब इन्स्टाग्राम इन्फ़्लुएन्सर आयशा खान ने एक पॉडकास्ट के दौरान मुनव्वर के बारे में कई खुलासे किए। आयशा ने कहा कि मुनव्वर उनके और नाजिला सीताशी के साथ एक ही समय में बातचीत कर रहे थे। इसके बाद उनके बिग बॉस शो में जाने को लेकर चर्चाएँ शुरू हुईं। आयशा खान को बिग बॉस में वाइल्ड कार्ड एंट्री दिए जाने से पहले उनका एक वीडियो भी सामने आया जहाँ उन्होंने मुनव्वर फारूकी के बारे में कई बातें की।

उन्होंने कहा था, “मेरा नाम आयशा खान है। एक कंटेस्टेंट हैं मुनव्वर फारूकी। मेरी उनके साथ हिस्ट्री है (मेरा उनके साथ अतीत में रिश्ता रहा है) जैसा वो दिखाते हैं वैसा कहीं से भी नहीं है। शो पर आप कह रहे हैं कि आप कमिटेडेड हैं। मुझसे कह रहे थे आई लव यू, आप जैसी लड़की से तो शादी करनी चाहिए।” आयशा अपनी बात जारी रखते हुए कहती हैं, “गलतियों की माफी होती है गुनाहों की नहीं। जो उन्होंने किया है वो गुनाह है, जब मैं शो में जाऊँगी तो मैं उनकी माफी चाहती हूँ।”

मुनव्वर पर कई लड़कियों से सम्बन्ध रखने का आरोप लाने वाली आयशा और नाजिला, दोनों ही इन्स्टाग्राम इन्फ़्लुएन्सर हैं। आयशा के इन्स्टाग्राम पर 23 लाख जबकि नाजिला के 9 लाख से ज्यादा फॉलोवर हैं। मुनव्वर पर इन दोनों के साथ अन्य कई लड़कियों के साथ रिश्ते रखने के आरोप हैं।

विवादों से मुनव्वर फारूकी का नाता

मुनव्वर का विवादों से पुराना नाता है। दरअसल मुनव्वर फारूकी अपने अटपटे और अभद्र बयानों और कामों से हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। कभी वो देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हैं तो कभी दुर्गा पूजा में गरबा खेलने जा पहुँचते हैं।बताते चलें कि विवादित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी ने साल 2022 में रियलिटी शो लॉक अप के पहले भाग में जीत हासिल की थी। इस शो में मुनव्वर फारूकी ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई खुलासे किए थे।

इस शो में उन्होंने बचपन में खुद के साथ यौन शोषण होने और अपनी माँ के तेजाब पीने जैसे खुलासे किए। मुनव्वर फारूकी अपनी असल जिंदगी में अपनी बीवी और बच्चों से अलग रहते हैं।बिग बॉस-17 में उन्होंने अपनी एक्स वाइफ मिखाइल को लेकर कहा था कि उनकी पत्नी ने उन्हें बगैर बताए दूसरी शादी कर ली। उन्होंने कहा था, “उसने शादी कर ली थी और मुझे इस बारे में पता तक नहीं था।”

संसद में घुसपैठ से भी खतरनाक इनका रवैया, ये लोकसभा में लौटकर नहीं आएँगे: PM मोदी ने बता दिया 2024 में विपक्ष की कैसी होगी दुर्गति

संसद भवन में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को 2 लोग लोकसभा के सदन में कार्यवाही के दौरान घुस गए और कनस्तर से रंगीन धुएँ छोड़ने लगे। इस मामले में 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कस्टडी में उनसे पूछताछ चल रही है और प्लानिंग की पूरी तह खुल रही है। इस प्रकरण के बाद विपक्षी दलों ने संसद में हंगामा शुरू कर दिया और अभद्र तरीके से प्रदर्शन करने लगे। इस मामले में अब तक 138 सांसदों को संसद से निलंबित किया जा चुका है।

अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष के इस व्यवहार पर आपत्ति जताई है। संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में मंगलवार (19 दिसंबर, 2023) को उनकी अध्यक्षता में भाजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक हुई। इसे संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ऐसा लगता है कि इन सांसदों ने तय कर लिया है कि उन्हें लोकसभा में वापस नहीं आना है। उन्होंने कहा कि अगर इन सांसदों का ऐसा ही रवैया रहा तो समझिए ये तय है कि इन्हें इस ताकत के साथ भी लोकसभा में वापस नहीं आना है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि कुछ रचनात्मक और अच्छे काम किए जाएँ, लेकिन कुछ लोग इससे अलग ही सोचते हैं। ‘हिंदुस्तान’ ने बैठक में मौजूद एक नेता के हवाले से बताया है कि पीएम मोदी ने क्या-क्या कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के हिसाब से विपक्षी दलों को मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन हंगामा नहीं करना चाहिए। उन्होंने संविधान और संसदीय व्यवस्था के अपमान को विपक्ष का एजेंडा बताते हुए इस पर दुःख जताया।

इस दौरान वो अपनी पार्टी के सांसदों को भी नसीहत देने से नहीं चूके और उनसे कहा कि विरोध के जवाब में वो भी मर्यादा में ही रहें। संविधान का सम्मान और संसदीय नियमों के पालन की सलाह देते हुए उन्होंने भाजपा सांसदों से कहा कि वो जनादेश का सम्मान करें। संसदीय मामलों और कोयला एवं खदान विभाग के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, पीएम मोदी ने बैठक में संसद में हुई घुसपैठ का भी जिक्र करते हुए कहा कि हर वो शख्स इसकी निंदा करेगा जो लोकतंत्र में भरोसा रखता हो।

प्रह्लाद जोशी ने बताया कि ये साल की अंतिम बैठक थी भाजपा के संसदीय दल की और पीएम ने इस दौरान याद दिलाया कि वो दिल्ली में रहे हैं तो इस बैठक में हमेशा शामिल हुए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान की बात की। विचारधारा के लिए जीने-मरने की बात की। I.N.D.I. गठबंधन की बैठक पर भी उन्होंने तंस कसा। ‘भारत का भविष्य उज्जवल बनाना’ – इसे उन्होंने भाजपा की सोच बताई। बकौल प्रह्लाद जोशी, पीएम मोदी ने कहा ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’ में सहभागिता का अनुभव साझा करते हुए कहा कि लोगों का विश्वास सरकार में बढ़ गया है।

बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हाल के चुनाव में हार चुके कुछ दल ऐसी भाषा बोल रहे हैं जिससे लगता है कि वो इस घटना का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के इस रवैये को इस घटना से भी खतरनाक करार दिया। पीएम मोदी के संबोधन का सार ये था कि विपक्ष ने विपक्ष में रहने का मन बना लिया है और ऐसा लगता है कि संसद में घुसपैठ करने वालों को उनका समर्थन है। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 पर कहा कि ऐसा लगता है कि इस मीटिंग हॉल में जो कुर्सियाँ खाली हैं वो भी अगली बार भर जाएँगी।

पीएम मोदी ने कहा, “विपक्ष हताशा और निराशा में आकर ये सब कर रहा है। हमारा उद्देश्य है देश का विकास करना, जबकि विपक्ष चाहता है हमारी सरकार को उखाड़ फेंकना। हमारी और उनकी सोच में यही अंतर है। अब छुट्टियों का समय नज़दीक आ गया है। आपलोग दूर गाँव के इलाकों में जाकर वहाँ का हालचाल लें, विकास का पता लगाएँ। मैं काशी गया था और देखा कि वहाँ के युवाओं में उम्मीदें हैं। नए मतदाताओं ने वो दौर नहीं देखा है जब आए दिन घोटाले होते थे। उन्हें विपक्ष के कारनामों के बारे में जागरूक करने की ज़रूरत है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों की भी बात की। वो अक्सर सीमा पर स्थित गाँवों में ‘आखिरी’ की जगह ‘पहला’ कह कर संबोधित करते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया ि सीमावर्ती क्षेत्रों में अभी उत्सव चल रहा है। इसके लिए गुजरात के कच्छ में स्थित एक गाँव को पर्यटन के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ गाँव का सम्मान मिला है। ‘रण उत्सव’ में भाग लेने की उन्होंने अपील की। साथ ही उन्होंने ‘काशी तमिल संगमम’ का भी जिक्र किया।

महुआ मोइत्रा सरकारी आवास वापस नहीं देना चाहती: हाई कोर्ट में होगी सुनवाई, छीछालेदर के बाद लौटाना पड़ा था ‘दोस्त’ वकील का कुत्ता

हाल ही में लोकसभा से निष्कासित की गईं तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता महुआ मोइत्रा अपने सरकारी आवास का आवंटन रद्द होने से खासी परेशान हैं। बकायदा उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डाली है कि उनके पास सरकारी आवास को खाली करने के बाद दिल्ली में रहने के लिए घर नहीं है।

दरअसल, उनके निष्कासन के बाद उन्हें डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स का आदेश लोकसभा से जारी किया गया। इसके तहत उन्हें 7 जनवरी, 2024 तक सरकारी आवास खाली करने का आदेश मिला है। इसे चुनौती देते हुए उन्होंने सोमवार (18 दिसंबर,2023) को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

दिल्ली HC में डाली गई याचिका में कहा गया, ”उन्हें (महुआ को) सरकारी घर खाली करने आदेश वक्त से पहले दिया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता के निष्कासन की वैधता अभी देश के सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।” दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई याचिका में महुआ ने डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के 11 दिसंबर के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो कम से कम उन्हें उनके सरकारी आवास में वैकल्पिक तौर पर 2024 लोकसभा के नतीजे आने तक रहने की मंजूरी दी जाए।

इस याचिका पर मंगलवार (19 दिसंबर,2023) को कोर्ट ने गौर किया। आगे दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले पर 4 जनवरी को सुनवाई करेगी। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने नोट किया कि निष्कासन के विरुद्ध मोइत्रा की याचिका पर तीन जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई है। साथ ही यह भी देखा कि उन्हें भवन सात जनवरी तक खाली करने का आदेश दिया गया है। ऐसे में पीठ ने मामले की सुनवाई चार जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।

बताते चलें कि लोकसभा में टीएमसी नेता मोइत्रा को अनैतिक आचरण का दोषी पाया गया था। इसे लेकर उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से कथित तौर पर तोहफे लेने और उन्हें अपनी संसद वेबसाइट की यूजर आईडी और पासवर्ड शेयर करने पर लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था।

हालाँकि मोइत्रा ने लोकसभा के उन्हें बाहर करने की सिफारिश करने वाली आचार समिति की रिपोर्ट को अपनाने के बाद अपने निष्कासन का आदेश जारी होने से पहले सुप्रीम कोर्ट (SC) का रुख किया था। SC में इस केस की सुनवाई 3 जनवरी 2024 के बाद होने वाली है।

हाईकोर्ट के सामने में याचिका में मोइत्रा ने कहा है कि डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स का आदेश लोकसभा से उनके निष्कासन के बाद जारी किया गया है, जबकि याचिकाकर्ता यानी उनके निष्कासन की वैधता पर अभी देश के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

हाई कोर्ट को दी गई याचिका में टीएमसी नेता महुआ ने ये तक कह डाला, “मुझे 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर पहली बार लोकसभा भेजा गया था। टीएमसी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहाँ से अपना उम्मीदवार बनाया है।”

उनकी याचिका में आगे कहा गया है कि लोकसभा से निष्कासन होने के बाद भी वो चुनाव लड़ने के योग्य हैं। वो फिर से चुनाव लड़ेंगी। इसके लिए उन्हें अपना वक्त और ऊर्जा मतदाताओं पर फोकस करने की जरूरत होगी।

उन्होंने याचिका में कहा है कि वो दिल्ली में अकेली रहती हैं। उनके पास यहाँ रहने के लिए कोई अन्य जगह या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सरकारी आवास से उन्हें निकाले जाने पर वो अपने चुनावी जिम्मेदारियों को पूरा करना और रहने के लिए नई जगह खोजना भी मुश्किल होगा।

मोइत्रा ने कहा इससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, इसलिए वह आग्रह करती हैं कि उनसे 2024 के आम चुनावों के नतीजे आने तक उनके मौजूदा सरकरी घर में रहने की मंजूरी दी जाए। रहने की मंजूरी मिलने पर वो इस दौरान सरकारी आवास में रहने पर लागू होने वाले किसी भी तरह के शुल्क का भुगतान करेंगी।

बता दें कि पिछले दिनों महुआ मोइत्रा कई कारणों से चर्चा में रह चुकी हैं। उनके ऊपर ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में आरोप लगे, फिर जाँच हुई और लोकसभा से उनका निष्कासन हुआ। इसके अलावा उनके पूर्व मित्र ने उनपर ये भी इल्जाम लगाए थे कि महुआ उनका कुत्ता वापस नहीं दे रही हैं। हालाँकि तमाम फजीहत के बाद उन्होंने ये कुत्ता जय अनंत को लौटा दिया था, जिसके बारे में जानकारी देते हुए जय ने लिखा भी था- वेलकम बैक हेनरी।

4000 साधु-संत, 2200 विशिष्ट जन… रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा में होंगे शामिल, आडवाणी-मुरली मनोहर की उम्र बनी बाधा: गुजरात से अयोध्या तक रथ यात्रा भी

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मं​दिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होंगे। श्रीराम जन्मभूमितीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस कार्यक्रम के लिए 6000 से अधिक साधु-संतों और विशिष्ट जनों को आमंत्रण भेजा है। हालाँकि राम मंदिर आंदोलन के सूत्रधारों में रहे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के उपस्थित रहने पर संशय है। इसके अलावा अहमदाबाद की रामचरित मानस ट्रस्ट-न्यूराणिप, गुजरात से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकालेगी।

राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए अनुष्ठान 16 जनवरी 2024 से ही चालू हो जाएँगे। 1990 के दशक की तरह एक और रामरथ यात्रा गुजरात से अयोध्या के लिए निकलेगी। यह यात्रा प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम से 2 दिन पहले अयोध्या पहुँचेगी। इस यात्रा की प्रेरणा 1990 की आडवाणी की रामरथ यात्रा से ली गई है जो कि सोमनाथ से अयोध्या के लिए निकाली गई थी।

क्यों आएँगे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी

1980 और 1990 के दशक में राम मंदिर आन्दोलन को जनता तक पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भाजपा नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उपस्थित रहने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसका कारण उनकी उम्र को बताया जा रहा है। आडवाणी 96 साल के हैं। जोशी जनवरी में 90 साल के हो जाएँगे।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि उम्र को देखते हुए आडवाणी और जोशी से अनुरोध किया गया है। राय ने बताया कि जोशी ने घुटने बदलवाए हैं। इसलिए उन्हें आने से मना किया जा रहा है। लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल होने की लगातार जिद कर रहे हैं।

वहीं आडवाणी अब पूरे समय दिल्ली स्थित घर पर ही रहते हैं। उनको हाल में किन्हीं सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी नहीं देखा गया है। उनके जन्मदिन के दिन पिछले माह प्रधानमंत्री ने उनके घर पहुँच कर बधाई दी थी।

प्राण प्रतिष्ठा में कौन-कौन आएगा?

22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा अन्य कई बड़ी हस्तियाँ शामिल होंगी। चम्पत राय ने बताया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 6200 लोगों को आमन्त्रण भेजा गया है। इनमें से 4000 साधु-संत हैं, जबकि 2200 से अधिक विशिष्टजन हैं। राय ने बताया है कि कार्यक्रम में रामभद्राचार्य, रामानंदाचार्य, सभी 6 दर्शनों के शंकराचार्य और रामानंद समुदाय के अन्य संत भी आएँगे।

उन्होंने बताया है कि बौद्ध गुरु दलाई लामा, जैन मुनि रवीन्द्राचार्य, सिखों के प्रमुख गुरुद्वारों के संत-महात्मा और बाबा रामदेव तथा माता आनंदमयी जैसे साधु-संत भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में स्वामीनारायण सम्प्रदाय और आर्ट ऑफ़ लिविंग के लोगों को भी बुलाया गया है।

इसके अलावा उन पत्रकारों को भी न्योता भेजा गया है जो 1984 से बाबरी के गिरने तक इस मामले की रिपोर्टिंग कर रहे थे। साथ ही समाज के अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों, कारोबारियों और वैज्ञानिकों आदि को भी बुलावा भेजा गया है। बाबरी के गिराए जाने के समय अयोध्या में मौजूद रहे पुलिस अधिकारियों को भी बुलाया गया है। राम मंदिर आंदोलन में बलिदान हुए लोगों के परिजनों को भी आमंत्रण भेजा गया है।

चम्पत राय ने बताया है कि प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पूजा 16 जनवरी, 2024 से चालू होगी और प्राण-प्रतिष्ठा का शुभ मूहूर्त 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे होगा। यह पूजा अगले 48 दिनों तक चलती रहेगी। यहाँ आने वाले विशिष्ट मेहमानों के लिए कारसेवकपुरम में रुकने की व्यवस्था की गई है।

एक बार फिर राम मंदिर के लिए निकलेगी रामरथ यात्रा

अयोध्या के लिए गुजरात से एक बार फिर रामरथ यात्रा निकलेगी। समाचार वेबसाइट दैनिक भास्कर के अनुसार, यह यात्रा गुजरात के अहमदाबाद से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी। यात्रा की शुरुआत 8 जनवरी 2024 को होगी। इसका समापन अयोध्या में जाकर 20 जनवरी यानी प्राण-प्रतिष्ठा से दो दिन पहले होगा। इस दौरान यह यात्रा राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गुजरेगी। यात्रा के समापन पर अयोध्या में ₹51 लाख का चढ़ावा चढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि यह यात्रा 1990 की रामरथ यात्रा के जैसे ही निकाली जा रही है। देश में राम मंदिर आन्दोलन को घर-घर तक पहुँचाने के लिए 25 सितम्बर, 1990 को रामरथ यात्रा लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में निकली थी। यह यात्रा गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से चालू होकर अयोध्या में रामजन्मभूमि तक जानी थी। लेकिन अक्टूबर 1990 में बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने आडवाणी को गिरफ्तार करवा दिया था।

मैं हिंदू, वह मुस्लिम… पायल घोष ने बताया क्यों टूटा इरफान पठान से ‘रिश्ता’, कहा- वो मेरे घर पर रहता था, उसके भाई-बंधु भी आते थे

अभिनेत्री पायल घोष ने अपने ट्विटर पर 18 दिसंबर 2023 को एक ट्वीट में अपनी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कभी काम के लिए किसी तरह का समझौता नहीं किया। वो न तो कभी किसी के संग काम माँगने के लिए सोईं और न कभी जूटे चाटे। उनके इस ट्वीट को देखने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर इरफान पठान के साथ उनका रिश्ता कैसा था। इसपर उन्होंने जवाब दिया कि वो रिश्ते में थीं लेकिन कभी उनके छुप-छुपकर नहीं मिलती थीं।

पायल घोष ने अपने 18 दिसंबर के ट्वीट में लिखा था- “मैं एक अच्छे चरित्र की महिला हूँ। न मैं काम के लिए किसी संग सोई और न किसी के जूते चाटे। टाइम आने पर सबको सबकी औकात दिखा देते हूँ। मुझे मुझपर गर्व है। फिल्म इंडस्ट्री में होने के बावजूद मैंने हमेशा आत्मसम्मान बचाए रखा। मुझे खुशी हैं कि मुझे कोई वित्तीय समस्या नहीं आई जिससे मैं और मजबूत बनी रही।”

उनकी इसी पोस्ट पर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठा दिया कि इरफान पठान के साथ तुम क्या खो-खो खेलती थीं। इसके बाद पायल घोष ने इस ट्वीट को रीट्वीट किया। उन्होंने कहा- “मैं मेरे एक्स के साथ खो-खो खेलूँ, फुट बॉल खेलूँ वो हमारी मर्जी।”

अगले ट्वीट में उन्होंने कहा, “हाँ मैं और इरफान कोई चुप-चुपकर नहीं मिलते थे। मैं उसके घर पर जाती थी, रहती थी, वो मेरे घर पर रहता था। उसके भाई-बंधु मेरे घर आते थे। मैं उसके फैमिली के साथ शॉपिंग में भी गई थी। बस हमारे बीच हुआ क्या… मेरे पापा ने बोला कि वो मुस्लिम को कभी एक्सेप्ट नहीं करेंगे। और ऐसे ही उनके घरवालों ने भी कहा। दोनों में से एक की फैमिली ने भी हमें स्वीकार नहीं किया और रिश्ता वहीं खत्म हो गया।”

बता दें कि कुछ समय पहले पायल ने इरफान पठान के साथ पुरानी तस्वीर डालते हुए कहा था, “जब से हमारा ब्रेकअप हुआ, मैं बीमार पड़ गई थी। मैं सालों तक काम नहीं कर सकी थी। लेकिन ये इकलौता लड़का था जिसे मैंने प्यार किया था। इसके बाद मैंने किसी को भी प्यार नहीं किया।”

गौरतलब है कि इससे पहले पायल घोष ने कहा था कि क्रिकेटर गौतम गंभीर उन्हें मिस्ड कॉल देते थे। वहीं मोहम्मद शमी को वो खुद शादी के लिए प्रपोज कर चुकी हैं। इससे पहले वो अनुराग कश्यप पर यौन शोषण का इल्जाम लगाने के बाद चर्चा में आई थीं।

5 साल बाद कश्मीर में एक व्यक्ति खोल सकेगा अपने घर की खिड़कियाँ, हाई कोर्ट ने दी इजाजत: प्राइवेसी का उल्लंघन बता अब्दुल गनी कर रहा था विरोध

जम्मू-कश्मीर में एक व्यक्ति को 5 साल से अधिक समय के बाद अपने घर की खिड़कियाँ खोलने की इजाजत मिली है। बडगाम निवासी इस व्यक्ति के घर की खिड़कियों को उसका पड़ोसी अब्दुल गनी शेख ‘प्राइवेसी का उल्लंघन’ बताकर इसे खोलने का विरोध कर रहा था। ​सिविल कोर्ट ने शेख की दलीलों को स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया है।

हाई कोर्ट ने माना कि शेख की दलीलों में कोई दम नहीं है और इस मामले में तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट हैं। इसके साथ ही अदालत ने बडगाम निवासी गुलाम नबी शाह को घर की खिड़कियों को खोलने की अनुमति दे दी।

हाई कोर्ट के जज अतुल श्रीधरन ने कहा कि सिविल कोर्ट के फैसले से यह पता नहीं चल पाता कि खिड़की खुलने से कैसे पड़ोसी की निजता का उल्लंघन होता है। हाई कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता को अपनी खिड़की खोलने का पूरा अधिकार है। भले ही उसकी खिड़की किसी भी दिशा में खुल रही हो। इससे जिसे दिक्कत हो रही है, वह पर्दे लगाकर या अन्य कोई उपाय करके अपनी निजता की सुरक्षा कर सकता है।

शेख के निजता उल्लंघन के दावों पर हाई कोर्ट ने कहा कि इस दलील में दम नहीं है। वह अपनी निजता की सुरक्षा के लिए दीवार खड़ी करने या फिर पर्दा लगाने जैसे अन्य उपाय आजमा सकता है।

सिविल कोर्ट ने इस मामले में 2018 में फैसला सुनाते हुए शाह के घर की उन खिड़कियों को खोलने पर रोक लगा दी थी, ​जो शेख के घर की ओर खुलती थीं। इसे शाह ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनके पड़ोसी ने इस मामले में तीन मुख्य दलीलें दी थीं, जो इस प्रकार हैं;

  • गुलाम नबी शाह के निर्माणाधीन घर की छत की ढलान उनके घर की ओर है जिसके कारण बर्फ उनकी प्रॉपर्टी में गिरती है।
  • अब्दुल गनी शेख का कहना था कि बर्फ उसकी जमीन में गिरने से मिट्टी कमजोर होती है और कटाव का डर होता है।
  • गुलाम नबी शाह के घर की खिड़कियाँ खुलने से उसकी निजता का हनन हो रहा है।

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, इस मामले में नोटिस दिए जाने के बावजूद शाह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद कोर्ट ने एकपक्षीय फैसला सुनाया।

‘1000% फिट है भाई, उसके मरने की खबर अफवाह’: बोला दाऊद इब्राहिम का गुर्गा छोटा शकील, आतंकी को जहर दिए जाने की आई थी खबरें

इस्लामी आतंकी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम जिंदा है। पूरी तरह स्वस्थ है। यह दावा उसके गुर्गे छोटा शकील के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में की गई है। दाऊद को जहर दिए जाने के दावे सोशल मीडिया में किए जा रहे हैं।

छोटा शकील ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया है, “भाई की मौत की खबर अफवाह हैं। वह 1000 फीसदी फिट हैं।” छोटा शकील का यह भी कहना है कि दाऊद के मरने की अफवाह समय-समय पर गलत इरादे से उड़ाई जाती है। उसका दावा है कि पाकिस्तान में उसकी ‘भाई’से मुलाकात हुई है और वह बिल्कुल फिट है।

उल्लेखनीय है कि छोटा शकील को दाऊद का बेहद खास गुर्गा माना जाता है। वह उसके ग्लोबल ऑपरेशंस को देखता है। वहीं NEWS18 से बातचीत में भी छोटा शकील ने दाऊद को जहर दिए जाने की खबरों का खंडन किया। उसने कहा है, “दाऊद जीवित और स्वस्थ है। मैं भी यह न्यूज देख कर चकित था। मैं दाऊद से कल कई बार मिला।”

इससे पहले दाऊद के एक रिश्तेदार ने टीवी चैनल रिपब्लिक से बातचीत में कहा था कि दाऊद स्वस्थ है और उसके मरने की खबरें झूठी हैं। हालाँकि, उसने यह नहीं बताया था कि दाऊद इस समय कहाँ है।

गौरतलब है कि 17 दिसम्बर, 2023 की शाम से ही भारत और पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर यह दावे किए गए थे कि दाऊद इब्राहिम को कराची में किसी अज्ञात आदमी ने जहर दे दिया है, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सोशल मीडिया पर यह भी दावे किए गए कि उसकी मौत हो चुकी है।

इसके साथ ही यह भी दावे किए गए कि पाकिस्तान में इसी कारण से इन्टरनेट सेवाओं को बाधित कर दिया गया है। पाकितान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नाम से दाऊद को श्रद्धांजलि देता हुआ एक ट्वीट भी वायरल किया गया, जो ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में फर्जी निकला।

इसी के साथ यह भी खबर वायरल की गई कि दाऊद के समधी और पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर जावेद मियाँदाद के परिवार को भी नजरबन्द किया गया है। इन सब खबरों को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं अब तक सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद 1993 में मुंबई से भाग कर दुबई चला गया था। इससे पहले उसने मुंबई में हिन्दुओं से बदला लेने के लिए धमाके करवाए थे। कुछ वर्षों बाद वह पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए काम करने लगा।

ISI की सुरक्षा में दाऊद कराची के क्लिफ्टन इलाके में रहता है। उसके लिए पाकिस्तान की सेना और ISI मिल कर बड़ा इंतजाम करते हैं। दाऊद के घर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य शहरों में भी है।

केरल में सामने आया कोविड का नया वैरिएंट, केंद्र ने किया अलर्ट: जानिए क्या है JN.1, कितना बड़ा है खतरा

केरल में कोविड के नए वैरिएंट JN.1 का मामला सामने आया है। वहाँ इस वैरिएंट को लेकर काफी चर्चा है। केंद्र ने भी इस पर एजवाइडरी जारी की है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इस संबंध में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भी भेजा है। इसमें उन्होंने बताया कि वो लोग कोविड के मामलों पर नियंत्रण पा रहे हैं। पहले 300 मामले आते थे हालाँकि 18 दिसंबर को 235 मामले आए हैं।

उन्होंने बताया कि भारत में कोविड-19 के उप स्वरूप जेएन.1 का पहला मामला आठ दिसंबर को केरल में सामने आया था। हालाँकि, पीड़ित महिला रोगी अब पूरी तरह से ठीक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बीमारी के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए अपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और अन्य व्यवस्थाएँ करनी चाहिए। आरटी-पीसीआर टेस्ट और एंटीजन टेस्ट लगातार होने चाहिए।

इससे पहले आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ राजीव बहल ने 8 दिसंबर,2023 को इस नए वैरिएंट के बारे में बताया था। इसके बाद केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के काराकुलम की 79 साल की एक बुजुर्ग महिला के आरटी-पीसीआर पॉजीटिव सैंपल में कोविड का सब वैरिएंट JN.1 पाया गया था। इस बुजुर्ग महिला में पहले इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के हल्के लक्षण थे। बाद में ये पूरी तरह ठीक हो गईं।

बता दें कि दुनिया भर में JN.1 कोविड-19 वैरिएंट के मामले बढ़ रहे हैं। हालाँकि, केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि राज्य में पाया गया कोविड-19 सब वैरिएंट जेएन.1 चिंता की वजह नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मेडिकली देखा जाए तो इनमें से अधिकांश केस हल्के लक्षण के होते हैं और उनमें से अधिकतर किसी बड़ी दवा के बगैर ही ठीक हो जाते हैं, हालाँकि इसे लेकर सतर्कता बरतनी जरूरत है।

जानकारी के मुताबिक भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) ने कोविड केसों की निगरानी के तहत केरल में कोविड के इस नए सब वैरिएंट JN.1 का पता लगाया था। भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) जीनोमिक प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है। ये जीनोमिक तरीके से देश में कोरोनो वायरस केसों पर नजर रख रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इस कॉन्सॉर्टियम का एक हिस्सा है।

जानिए, ये JN.1 कोविड-19 वैरिएंट है क्या और ये कैसे इंसान पर अपना असर डालता है यहाँ आपको इन सब सवालों का जवाब देते हैं।

कहाँ से आया सब वैरिएंट जेएन.1

कोविड-19 का JN.1 सब वैरिएंट पहली बार लक्ज़मबर्ग में पहचाना गया था और तब से यह कई देशों में फैल गया है। यह पिरोला वेरिएंट (BA.2.86) का ही अगला रूप है। इसका पहला केस पहली बार सितंबर 2023 में अमेरिका में सामने आया था।

चीन में 15 दिसंबर,2023 को इस खास सबवैरिएंट के 7 मामले मिले थे। इस JN.1 वैरिएंट के केस अब तक संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों में मिले हैं। भारत की बात करें तो सिंगापुर हवाई अड्डे पर हुई जाँच में कुछ भारतीयों में JN.1 सब वैरिएंट पाया गया था।

वैरिएंट और सब वैरिएंट क्या है

अमेरिकी के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कहा, जेएन.1 और बीए.2.86 के स्पाइक प्रोटीन में केवल एक ही बदलाव है। इस वजह से सीडीसी का मानना है कि वायरस के स्पाइक प्रोटीन को टारगेट करने वाली वैक्सीन को JN.1 और BA.2.86 के खिलाफ भी असर करना चाहिए।

लक्षण

मेडिकली देखा जाए JN.1 सब वैरिएंट के अधिकाँश मामले हल्के होते हैं और मरीज बिना किसी इलाज के अपने घर पर ही ठीक हो रहे हैं। जेएन.1 वैरिएंट के कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, गले में खराश, सिरदर्द और छोटी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएँ शामिल हैं।

स्पाइक प्रोटीन क्या होता है…

वायरोलॉजी में स्पाइक प्रोटीन या पेप्लोमर प्रोटीन एक ऐसा प्रोटीन होता है जो एक बड़ी संरचना बनाता है। इसे स्पाइक या पेप्लोमर के तौर पर भी जाना जाता है जो छुपे हुए वायरस की सतह पर पलता है। ये प्रोटीन आमतौर पर कार्बोहाइड्रेट वाला ग्लाइकोप्रोटीन होता हैं।

मालूम हो कि इंसानी शरीर की कोशिकाएँ प्रोटीन की बनी होती हैं। ये स्पाइक प्रोटीन स्वस्थ कोशिकाओं पर एंजियोटेंसिन-परिवर्तित एंजाइम 2 (एसीई2) के तौर पर पहचाने जाने वाले रिसेप्टर्स को पकड़कर काम करता है, इसलिए यह उनमें आसानी घुस सकता है। वहीं एंजियोटेंसिन एक पेप्टाइड हार्मोन है। ये इंसान में ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखता है।

स्पाइक प्रोटीन गंभीर सांस की बीमारी वाले सिंड्रोम कोरोनावायरस को बनाने वाले प्रोटीनों में से एक है। SARS-CoV-2 कोरोना वायरस में तेज़ी से उत्परिवर्तन होने और नए वैरिएंट और सब वैरिएंट बनाने की क्षमता है। इस वजह से तेजी से फैलता है। वैरिएंट के बाद फिर उसमें बदलाव आने पर वो सब वैरिएंट बनता है।

खासकर जेएन.1 में स्पाइक प्रोटीन में अहम संख्या में उत्परिवर्तन या बदलाव शामिल हैं। (जब किसी वायरस के वैरिएंट में एक या एक से अधिक उत्परिवर्तन (Mutations) होते हैं। वो उसने अन्य पहले से मौजूद वैरिएंट से अलग बना देते हैं।)

हालाँकि इनमें से अधिकाँश उत्परिवर्तन वायरस का असर कम करते हैं तो कुछ उत्परिवर्तन वायरस को और मजबूत बना देते हैं।

कोविड का मूल यानी फाउंडर वैरिएंट Wu.Hu.1 चीन के वुहान से फैला था। इसके कुछ ही महीनों में D614G वैरिएंट सामने आया था और पूरी दुनिया में फैल गया था।

देश में कोराना संक्रमण के केस

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की देश में कोविड टेली पर नजर डालें तो सोमवार (18 दिसंबर,2023) को एक्टिव केस बढ़कर 1,828 हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कोविड संक्रमण से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4.46 करोड़ (4,44,69,931) हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय रिकवरी दर 98.81 फीसदी आँकी गई है।

कोविड-19 से अब तक 5,33,317 लोगों की मौत हो चुकी है और मृत्यु दर 1.19 फीसदी है। मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, देश में अब तक कोविड-19 वैक्सीन की 220.67 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में रविवार (17 दिसंबर,2023) को कोविड संक्रमण से पाँच मौतें हुईं। इनमें चार मौत अकेले केरल में तो एक उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई।