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‘मुझे प्यार हुआ पिया हौले हौले’: बोधगया मंदिर में महिला पुलिसकर्मियों ने कर दिया ‘रील कांड’, ठुमकों के बाद हुईं सस्पेंड

बिहार के गया जिले में 2 महिला पुलिसकर्मियों का रील (Reel) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह रील बोधगया मंदिर परिसर में बनाया गया है। वीडियो में महिला पुलिसकर्मी ‘ओ मेरी जान…’ गाने पर ठुमके लगा रही हैं। पुलिस ने बताया है कि यह रील कई दिनों पुराना है और शनिवार (16 दिसंबर 2023) से वायरल हो रहा है। जाँच के बाद दोनों महिला सिपाहियों को सस्पेंड कर के उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।

वायरल हो रही रील लगभग 44 सेकेण्ड की है। इसमें वर्दी में 2 महिला पुलिसकर्मी को एक-दूसरे के साथ रोमांटिक अंदाज में वीडियो शूट करवाते देखा जा सकता है। बोधगया मंदिर में की गई इस शूटिंग में पीछे बैकग्राउंड में कई गाने डाले गए हैं। इनमें से ‘ओ मेरी जान, बोल मेरी जान’, ‘मेरा दिल अब पास है तेरे, तेरा दिल अब पास है मेरे’ और ‘मुझे प्यार हुआ पिया हौले हौले हौले’ आदि गाने प्रमुख हैं। शूटिंग में मंदिर में लगे घंटे भी दिखाए जा रहे हैं। इसमें एक महिला सिपाही पुरुष हीरो के किरदार में है, जबकि दूसरी हीरोइन के।

वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर नेटिजंस ने अलग-अलग राय दी है। कुछ लोगों ने इसे गलत बताकर दोनों पर कार्रवाई की माँग की है। वहीं, कुछ लोगों ने ‘पुलिस के अंदर भी दिल होता है’ जैसे कमेंट करके दोनों महिला पुलिसकर्मियों पर एक्शन ना लेने की अपील की है। सिद्धांत कुमार वर्मा ने कहा, “पुलिस विभाग मे 50% महिला का परिणाम। चोर-डकैत तो इनसे पकड़ा जाएगा नहीं, मुजरा ही करें।”

चित्र साभार- @firstbiharnews पर आए कमेंट

वायरल हुए इस वीडियो का संज्ञान बिहार पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने भी लिया है। गया पुलिस ने रविवार (17 दिसंबर 2023) को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से जानकारी दी है कि यह वीडियो काफी पुराना है। रील बना रहीं दोनों महिला पुलिसकर्मी बिहार विशेष सशस्त्र बल महिला बटालियन सासाराम की हैं। इन दोनों को सस्पेंड कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।

चित्र साभार- गया पुलिस

पुलिस अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया अपनी जाँच में दोनों महिला पुलिसकर्मियों द्वारा अपने कर्तव्य में लापरवाही पाया है।

‘मेरी 1 महीने की सैलरी चली गई…’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खुद नहीं देना चाहते अपनी पार्टी को पैसा? वीडियो हो गया वायरल

कॉन्ग्रेस ने 4 राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब चंदा इकट्ठा करने का अभियान चलाया है। इसे पार्टी ने ‘डोनेट फॉर देश’ का नाम दिया है। कॉन्ग्रेस इसके जरिए अपने समर्थकों से ₹138 के गुणक में पैसे माँग रही है। हालाँकि, पार्टी के अध्यक्ष ही चंदा देने पर ‘दुःखी’ हो रहे हैं।

दिल्ली की अकबर रोड स्थित कॉन्ग्रेस दफ्तर में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, महासचिव KC वेणुगोपाल और कोषाध्यक्ष अजय माकन ने यह अभियान चालू किया। अभियान के चालू किए जाने पर सबसे पहला चंदा कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ही दिया।

खड़गे ने इस दौरान ₹1.38 लाख चंदे में कॉन्ग्रेस को दिए। चंदा देते वक्त कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खुश नहीं दिखे और जब पैसा उनके फ़ोन से कॉन्ग्रेस को चंदे के लिए ट्रांसफर किया गया तो उन्होंने कहा, “एक महीने की पगार चली गई।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के एक महीने वाले बयान पर अब सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे हैं। हालाँकि, मल्लिकार्जुन खड़गे की संपत्ति को देखते हुए उनके लिए ₹1.38 लाख कोई बड़ी धनराशि नहीं है। उनके बेटे प्रियांक खड़गे कर्नाटक में मंत्री हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा राज्यसभा चुनाव में भरे गए पर्चे के अनुसार, उनके पास ₹9.80 करोड़ की चल-अचल सम्पत्ति थी। इसके अलावा उनकी पत्नी के पास भी ₹9.28 करोड़ की सम्पत्ति थी। उन्होंने वर्ष 2018-19 में अपनी वार्षिक आय ₹27,84,530 बताई थी। कॉन्ग्रेस ने यह अभियान लोकसभा चुनाव के खर्चे के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए चालू किया है। इसके अंतर्गत उसके कार्यकर्ता पहले 28 दिसम्बर, 2023 तक ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करेंगे जबकि 28 दिसम्बर, 2023 के बाद वह घर घर जाकर चंदे की माँग करेंगे। ADR द्वारा दी गई एक जानकारी के अनुसार, कॉन्ग्रेस के पास 2021-22 ₹805 करोड़ की संपत्तियाँ थी।

कॉन्ग्रेस के साथ इस अभियान को शुरू करने पर एक खेल भी हो गया। दरअसल, कॉन्ग्रेस ने इस अभियान का नाम ‘डोनेट फॉर देश’ (Donate For Desh) रखा है लेकिन इस नाम से वेबसाइट खोलने पर भाजपा को चंदा देने का पेज खुल रहा है।

कॉन्ग्रेस चंदा भाजपा

यदि कोई भी व्यक्ति Donatefordesh.Org वेबसाइट को खोलता है तो इस पर भाजपा को चंदा देने का पेज खुलता है। यहाँ नाम, मोबाइल नम्बर और ईमेल आईडी देकर भाजपा को चंदा देने का फॉर्म खुलता है। वहीं Donatefordesh.Com और Donatefordesh.in भी कॉन्ग्रेस नहीं ले पाई।

हमास को आतंकी संगठन कहने पर भड़की बुर्के वाली छात्राएँ, स्कूल में इजरायल के साथ जंग पर चल रहा था डिबेट: टीचर पर डाला माफी माँगने का दबाव

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित एक स्कूल में इजरायल और हमास को लेकर बहस के दौरान मुस्लिम छात्राओं ने हंगामा कर दिया। इजरायल के समर्थन में बोलने वाली छात्रा और स्कूल के टीचरों पर माफ़ी माँगने का दबाव डाला जा रहा है। वायरल वीडियो में हिजाब पहनी हुईं कुछ छात्राएँ स्कूल में खुद को पाकिस्तानी और आतंकी कहे जाने का भी आरोप लगा रहीं हैं।

घटना शनिवार (9 दिसंबर 2023) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। इस हंगामे के चलते स्कूल में क्रिसमस के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। ख़ुफ़िया एजेंसियाँ हमास समर्थक छात्राओं के परिवारों के बारे में भी जानकारियाँ जुटा रही हैं। वहीं, इस इस वीडियो को वामपंथी और इस्लामी विचारधारा के समर्थकों द्वारा खूब वायरल किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कानपुर के सिविल लाइंस इलाके की है। यहाँ हडर्ड हाईस्कूल में शनिवार को विद्यार्थियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। परिचर्चा में क्लास 11 में पढ़ने वाली छात्राओं को दिए गए टॉपिक का नाम ‘युद्ध समाधान नहीं बल्कि समस्याएँ पैदा करता है’ था। श्रोता के तौर पर कक्षा 6 से 12 तक की छात्राएँ थीं।

एक छात्रा ने चर्चा की शुरुआत की और दिए गए टॉपिक में इजरायल-हमास युद्ध का उदाहरण दिया। छात्रा ने कहा कि हमास ने इजरायल पर हमला किया और छोटे-छोटे बच्चों को भी मारा। हमलावर बताया। उसने हमास को आतंकी संगठन बताया और कहा कि इजरायल को जवाबी हमला करने का पूरा अधिकार है।

इस वाद-विवाद के दौरान वहाँ मौजूद कुछ मुस्लिम छात्राएँ भड़क उठीं। उन्होंने कहा कि हमास को बुरा बताने के चलते उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। विरोध कर रही छात्राएँ इजरायल का समर्थन कर रही छात्रा से माफ़ी माँगने की जिद करने लगीं। प्रिंसिपल ने मुस्लिम छात्राओं को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे नहीं मानीं और हंगामा जारी रहा।

इसके बाद यह हंगामा अगले एक सप्ताह तक जारी रहा। दरअसल, छात्राओं ने सोशल मीडिया पर स्कूल में हमास के विरोध का मैसेज भी वायरल कर दिया। हंगामे में न सिर्फ इजरायल समर्थक छात्रा को, बल्कि स्कूल की प्रिंसिपल और टीचरों को भी निशाने पर ले लिया गया। स्कूल के गेट से हिजाब पहनीं कुछ छात्राओं के वीडियो भी वायरल किए गए।

कुछ छात्राओं ने ये भी आरोप लगाया कि उन्हें क्लास में लंच भी खाने नहीं दिया जा रहा। एक छात्रा का आरोप है कि बहस के दौरान दोनों पक्षों ने हमास का पक्ष लिया। बकौल छात्रा, ऐसा संवेदनशील मुद्दा बहस के लिए चुनना ही नहीं था। इस दौरान छात्राओं ने खुद को फेल भी किए जाने की धमकी का भी जिक्र किया। मास्क लगाई एक छात्रा ने तो यहाँ तक कहा, “हमारी वजह से स्कूल चल रहा है।” हरे रंग की ब्लेजर पहनीं कुछ छात्राओं ने स्कूल के गेट पर ‘वी वांट जस्टिस’ की नारेबाजी भी की।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि वाद-विवाद के दौरान कुछ बिंदुओं पर कुछ छात्राओं के परिजनों ने स्कूल में आकर एतराज जताया था। सभी को समझा-बुझा कर भेज दिया गया। साथ ही पुलिस मामले में सबूत जुटाकर न्यायोचित कार्रवाई भी कर रही है। वहीं स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि टॉपिक युद्ध का दिया गया था न कि किसी मजहब का। प्रिंसिपल ने कहा कि सभी उनकी छात्राएँ हैं, लेकिन हमास के नाम पर इतना गुस्सा उनकी समझ से बाहर की बात है।

हंगामे के बाद स्कूल ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर होने वाले आयोजनों को निरस्त कर दिया गया है। यहाँ 21 दिसंबर से ही सर्दियों की छुट्टियाँ कर दी जाएँगी। इजरायल का समर्थन करने वाली और वाद-विवाद प्रतियोगिता की विजेता छात्रा डर से स्कूल भी नहीं आ रही है। हमास का समर्थन करने वाली छात्राओं के पीछे कौन है, इसकी जानकारी ख़ुफ़िया एजेंसियाँ जुटा रही है।

एजेंसियाँ उन तमाम सोशल मीडिया हैंडल को भी खँगाल रही हैं, जिसके जरिए छात्राओं को स्कूल के बाहर प्रदर्शन के लिए उकसाया गया था। वीडियो फुटेज में छात्राओं के अलावा दिख रहे अन्य लोगों की भी पहचान करवाई जा रही है।

गुजरात हाई कोर्ट में पति-पत्नी का झगड़ा: पुरुष बोला – महीने में 2 दिन ही पास आती है, महिला बोली – इतना काफी नहीं है क्या

गुजरात हाईकोर्ट के सामने शादीशुदा जोड़े का एक ऐसा मामला पेश आया है, जिसमें पति कह रहा है पत्नी महज 2 बार ही उसके पास आती है तो वहीं पत्नी पूछ रही है कि 2 दिन काफी नहीं हैं क्या। इस केस में हाईकोर्ट के सामने अब वैवाहिक अधिकारों और जिम्मेदारियों की पेचीदगियों को सुलझाने का काम आ पड़ा है।

दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट में पत्नी ने अपनी पति की याचिका को चुनौती दी है। पत्नी ने कोर्ट में मुद्दा उठाया है कि महीने में 2 बार अपने पति के घर जाना उसके वैवाहिक दायित्वों को पूरा करने के बराबर है या नहीं? उसके पति ने फैमिली कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा था कि उसकी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है।

ये पूरी कहानी तब शुरू हुई जब महिला के पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 का हवाला देते हुए हुए सूरत की एक पारिवारिक अदालत में याचिका दायर की। इसमें उसने माँग की थी पत्नी को रोज उसके साथ रहने का आदेश दे और उसके शादीशुदा जिंदगी के अधिकारों को बहाल किया जाए। इसके पीछे पति ने तर्क दिया था कि जिस घर में वो एक साथ रह रहे हैं, वहाँ से पत्नी का गैर-मौजूद रहना वैवाहिक जिंदगी के कर्तव्यों का उल्लंघन है। पति का कहना था कि बेटे के पैदा होने के बाद पत्नी काम के बहाने से अपने माता-पिता के पास रहने चली गई।

हालाँकि, इसे लेकर उसकी पत्नी का नजरिया दूसरा था। पत्नी का कहना है कि वह हफ्ते में में 2 बार अपने पति से मुलाकात करके अपने दायित्वों को सही तरीके से निभा रही है। अपनी नौकरी की वजह से उसे अपने माता-पिता के साथ रहना पड़ रहा है। उसका मानना था कि यह व्यवस्था सही और निष्पक्ष थी।

दरअसल, पारिवारिक अदालत का नोटिस मिलते ही पत्नी ने तुरंत सिविल प्रक्रिया संहिता के नियम 7 एवं आदेश 11 के तहत एतराज दर्ज कराया था। पत्नी का तर्क था कि पति का ये दावा निराधार है कि वो उसे नजरअंदाज कर रही है। उसका तर्क है कि वो अपने वैवाहिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन कर रही थी। इस पर पारिवारिक अदालत ने यह कहते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी कि मामले की पूरी सुनवाई होने तक कोई फैसला नहीं दिया जा सकता। इस पर बगैर देरी किए पत्नी गुजरात हाईकोर्ट पहुँच गई।

पत्नी ने दिसंबर महीने की शुरुआत में अपने पति की याचिका को हाईकोर्ट में चुनौती दी। पत्नी ने इस याचिका में चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह एक महीने में 2 बार अपने पति के साथ रह रही है तो यह बात वैवाहिक दायित्वों को पूरा करने के बराबर है या नहीं। पत्नी ने अपनी याचिका में कहा था कि औपचारिक तौर पर अलगाव के बाद ही वैवाहिक जिम्मेदारियों में दखलअंदाजी को मंजूरी दी जाती है।

इसके बाद अब हाईकोर्ट ही इस बुनियादी सवाल से जूझ रहा है कि क्या पति को पत्नी के रोजाना नज़दीक रहने की माँग करने का हक है? केस की कार्यवाही के दौरान जस्टिस VD नानावती ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर पति अपनी पत्नी को अपने साथ आने और रहने के लिए कहता है तो इसमें गलत क्या है? क्या उसे मुकदमा करने का हक नहीं है?” इस मामले में हाईकोर्ट ने पति को जवाब 25 जनवरी, 2024 को अपना जवाब दाखिल करने की तारीख दी है।

शरीर के चक्रों पर आधारित 7 मंजिला भवन, कमल की पंखुड़ियों वाला शीर्ष: जानिए स्वर्वेद मंदिर को, जिसका उद्धाटन PM मोदी ने किया, दीवारों पर रामायण-महाभारत अंकित

भारत की धार्मिक-आध्यात्मिक राजधानी वाराणसी में दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘स्वर्वेद महामंदिर’ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (18 दिसंबर 2023) को उद्घाटन किया। 3 लगभग 3 लाख वर्गफुट में बने स्वर्वेद महामंदिर में एक साथ 20 हजार लोग योग कर सकते हैं। इस महामंदिर के उद्धाटन के समय 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ भी किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन 17-18 दिसंबर 2023 को विहंगम योग संत समाज के 100वें वार्षिकोत्सव ‘शताब्दी समारंभ महोत्सव’ के अवसर पर किया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और विहंगम योग किया। जिस स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन किया गया है, उसे 35 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन किया, उसका निर्माण विहंगम योग का प्रसार करने वाले विहंगम योग संस्थान ने कराया है। इस विशाल परिसर का निर्माण साल 2004 से चल रहा था, जिसकी दीवारों पर स्वर्वेद के 3137 दोहे भी लिखे हुए हैं। पीएम मोदी ने स्वर्वेद महामंदिर को योगतीर्थ और ज्ञानतीर्थ बताया।

प्रधानमंत्री मोदी बोले-योगतीर्थ और ज्ञानतीर्थ भी है ये महामंदिर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आप संतों के सानिध्य में काशी के लोगों ने मिलकर विकास और नवनिर्माण के कितने ही नए कीर्तिमान गढ़े हैं। सरकार, समाज और संतगण, सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं। आज स्वर्वेद मंदिर का बनकर तैयार होना इसी ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है। ये महामंदिर, महर्षि सदाफल देव जी की शिक्षाओं का, उनके उपदेशों का प्रतीक है। इस मंदिर की दिव्यता जितना आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमें उतना ही अचंभित भी करती है। इसलिए मंदिर का भ्रमण करते हुए मैं खुद भी मंत्रमुग्ध हो गया था।”

पीएम मोदी ने कहा, “स्वर्वेद मंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है। मैं देख रहा था, इसकी दीवारों पर स्वर्वेद को बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किया गया है। वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रन्थों के दिव्य सन्देश भी इसमें चित्रों के जरिए उकेरे गए हैं। इसलिए, ये मंदिर एक तरह से आध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यहाँ हजारों साधक एक साथ विहंगम योग की साधना कर सकते हैं। इसलिए, ये महामंदिर एक योगतीर्थ भी है, और साथ-साथ ये ज्ञानतीर्थ भी है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “आजादी के 7 दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है। देश अब लाल किले से ‘गुलामी की मानसिकता से मुक्ति’ और अपनी ‘विरासत पर गर्व’ की घोषणा कर रहा है। जो काम सोमनाथ से शुरू हुआ था, वो अब एक अभियान बन गया है। आज काशी में विश्वनाथ धाम की भव्यता भारत के अविनाशी वैभव की गाथा गा रही है।”

उन्होंने कहा, “आज महाकाल महालोक हमारी अमरता का प्रमाण दे रहा है। आज केदारनाथ धाम भी विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। बुद्ध सर्किट का विकास करके भारत एक बार फिर दुनिया को बुद्ध की तपोभूमि पर आमंत्रित कर रहा है। देश में राम सर्किट के विकास के लिए भी तेजी से काम हो रहा है। अगले कुछ सप्ताह में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी पूरा होने जा रहा है।”

क्या है स्वर्वेद महामंदिर?

स्वर्वेद का शाब्दिक अर्थ है- स्व: और वेद। स्व: का अर्थ है आत्मा और वेद का अर्थ है ज्ञान। इसलिए स्वर्वेद का अर्थ है -आत्मा का ज्ञान। अर्थात योग के जिस माध्यम से स्वयं का ज्ञान प्राप्त किया जाता है, वो स्वर्वेद है। इस मंदिर की दीवारों पर स्वर्वेद के 3137 दोहे उकेरे गए हैं। स्वर्वेद में विहंगम योग से जुड़ी सूक्तियाँ, दोहे लिखे हैं, जिसके रचयिता सद्गुरु सदाफल देव थे।

उन्होंने साल 1924 में विहंगम योग को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान बनाया था। इस योग को 50 से अधिक देशों में प्रैक्टिस किया जाता है। इस स्वर्वेद मंदिर में रामायण, महाभारत, गीता, वेद और उपनिषद को चित्रित किया गया है। स्वर्वेद महामंदिर को 7 मंजिला बनाया गया है, जो मानव शरीर में स्थित 7 चक्रों को निरूपित करता है।

मकराना मार्बल से बने इस महामंदिर की ऊँचाई 180 फीट है, जिसका शीर्ष कमल के आकार का है। इसके मुख्य गुंबद में कमल पुष्प के आकृति की 125 पंखुड़ियाँ बनाई गई हैं। एक साथ 20 हजार से अधिक लोगों के योग करने की जगह प्रदान करने वाला स्वर्वेद महामंदिर दुनिया का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र है।

‘अपना मुँह बंद करो आरिफ मोहम्मद खान…’: केरल के गवर्नर को CM के मंत्री दामाद ने धमकाया, काफिले पर भी वामपंथी गुंडों ने किया था हमला

केरल के CM पिनाराई विजयन के दामाद PA मोहम्मद रियास ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को लेकर रविवार (17 दिसंबर, 2023) को तीखा बयान दिया है। राज्य के पयर्टन मंत्री रियास का कहना है कि CPM राज्यपाल खान को उनकी बकवास को बंद करने के लिए नहीं कह रही, क्योंकि वे आपके पद का सम्मान करती है।

उन्होंने राज्यपाल पर RSS की शैली में काम करते हुए कन्नूर और केरल के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने और मुख्यमंत्री और उनके गृह जिले का अपमान करने का आरोप लगाया है। दरअसल, मोहम्मद रियास राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा मुख्यमंत्री विजयन के गृह जिले पर ‘कन्नूर के खूनी इतिहास’ वाले तंज का जवाब दे रहे थे।

पथानामथिट्टा जिले के कोन्नी में नव केरल सदास के दौरान रियास ने कहा, “ऐसा मत सोचिए कि हम यह नहीं कह सकते – ‘अपना मुँह बंद करो, मिस्टर आरिफ मोहम्मद खान’, लेकिन हम आपकी स्थिति का सम्मान करते हैं और इसीलिए हम ऐसा नहीं कहते हैं।”

इससे पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी रविवार को राज्यपाल खान पर जानबूझकर भड़काऊ बयान देकर दक्षिणी राज्य के अमन-चैन में खलल डालने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राज्यपाल अपने संवेदनहीन बयानों से SFI प्रदर्शनकारियों को भड़का रहे थे।

दरअसल, CPI(M) की छात्र शाखा ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ को राज्यपाल ने ‘अपराधी’ और ‘गुंडा’ कहा था। इसे लेकर सीएम विजयन के दामाद राज्यपाल को तंज कसने में एक कदम आगे निकल गए। आईटी पेशेवर रहे रियास की शादी सीएम विजयन की बेटी वीणा से 2020 हुई थी।

47 साल के मंत्री रियास ने राज्यपाल को कन्नूर के इतिहास के बारे में नसीहत देनी की कोशिश करते हुए कहा, “कन्नूर का इतिहास क्या है? क्या यह बुरा है? कन्नूर की जमीन पर, औपनिवेशिक ताकतों से लड़ते हुए कई लोग शहीद हुए हैं। कन्नूर ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। आरिफ मोहम्मद खान को कन्नूर और केरल के लिए इतनी नाराजगी क्यों है?” रियास ने दावा किया कि थालास्सेरी में कन्नूर जिले के कम्युनिस्टों की अगुवाई में 1970 के दशक में सांप्रदायिक नफरत के बीज बोने के आरएसएस की कोशिशों का विरोध किया गया था।

उन्होंने कहा, “दिसंबर 1970 में RSS ने सांप्रदायिक हिंसा फैलाने के लिए कन्नूर में थालास्सेरी को चुना। आरिफ मोहम्मद खान को यह जरूर ये पता होगा। उस वक्त जब एक मस्जिद पर हमला करने की कोशिश की गई थी। तब मंगट्टीदम के एक स्थानीय समिति के सदस्य, कॉमरेड यू के कुन्हिरमन अन्य कम्युनिस्टों के साथ मस्जिद की रक्षा के लिए खड़े थे। आरएसएस ने उन पर हमला करते हुए कहा कि वह मप्पिला (मलयाली भाषा के मुस्लिम) का बच्चा हैं।”

रियास ने आगे कहा, “क्षेत्र में दंगा रोकने के लिए लाल झंडे वाली एक काली जीप यह ऐलान करते हुए घूम रही थी कि हमें शांति बनाए रखनी चाहिए। उस ऐलान करने वाली गाड़ी ने सांप्रदायिक सद्भाव की जरूरत लोगों को बताई थी। ऐलान करने वालों ने ऐलान किया कि वे अपनी जिंदगी की कीमत पर भी थालास्सेरी में शांति और सद्भाव बनाए रखेंगे। उस दिन जीप के आगे बैठा एक युवक आज केरल का मुख्यमंत्री है। आरिफ मोहम्मद खान को समझना चाहिए कि वह व्यक्ति कॉमरेड पिनाराई विजयन थे।”

मंत्री रियास ने लगे हाथ राज्यपाल को कन्नूर में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए छेड़े गए संघर्षों के वास्तविक इतिहास के बारे में जानने की सलाह भी दे डाली। रियास ने कहा, “आरिफ मोहम्मद खान नफरत फैलाने की आरएसएस शैली के तहत काम कर रहे हैं। वो कन्नूर और केरल के इतिहास को तोड़-मरोड़कर इस जमीन पर शांति के लिए किए गए संघर्षों को यहाँ लड़ी गई उपनिवेशवाद विरोधी लड़ाइयों को नजरअंदाज कर मुख्यमंत्री और उनके जिले का अपमान कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि हाल ही में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में जानलेवा हमला किया गया था। यह हमला कम्युनिस्ट छात्र संगठन SFI के गुंडों ने किया था। इसके बाद राज्य खुफिया विभाग ने खुलासा किया था उसने SFI के राज्यपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना के बारे में चेतावनियाँ जारी की थीं।

राज्यपाल खान ने भी इस हमले में सीएम पिनाराई विजयन का हाथ होने का आरोप लगाया था। इसके बावजूद उनका ट्रैवल रूट SFI को लीक किया गया था। खुफिया विभाग ने दावा किया था कि पुलिस एसोसिएशन के लीडर ने इसे सोमवार 11 दिसंबर, 2023 सुबह SFI को लीक कर दिया गया था।

किशोर कुमार बनकर भारत में रह रहा था बांग्लादेश का महमूद आलम, इलाज कराने अस्पताल आया तो पकड़ा गया: राजस्थान पुलिस ने IB को सौंपा

राजस्थान के जोधपुर से एक बांग्लादेशी गिरफ्तार किया गया है। उसकी पहचान महमूद आलम के तौर पर हुई है। हिंदू नाम से वह करीब 7 महीने से भारत में रह रहा था। राजस्थान पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद उसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को सौंप दिया है।

महमूद आलम को रविवार (17 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से फर्जी पहचान पत्र भी मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जोधपुर के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ MDM (मथुरा दास माथुर) हॉस्पिटल में एक युवक इलाज करवाने पहुँचा। युवक ने अपना नाम किशोर कुमार और पिता का नाम किरण कुमार बताया। उसने इसी नाम का आधार कार्ड भी दिखाया।

लेकिन आरोपित के हावभाव से डॉक्टरों को शक हुआ। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर युवक को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में युवक ने खुद को बांग्लादेश का रहने वाला बताया है। महमूद के अब्बा का नाम शमशुल आलम है जो बांग्लादेश के मदिरापुरा के गाँव दुर्गावोरदी का रहने वाला है। महमूद आलम का पासपोर्ट भी इसी नाम और पते से बना है।

पूछताछ में महमूद आलम ने बताया है कि वह सबसे पहले कोलकाता गया। वहाँ से दिल्ली होते हुए वह राजस्थान के जैसलमेर पहुँचा। दिल्ली में रहने के दौरान महमूद को एक वाहन ने ठोकर मार दी थी। इसी चोट की वजह से महमूद के पैर में कीड़े पड़ गए थे।

दिल्ली में उसके एक साथी ने उसे जैसलमेर में काम दिलवाया था। जैसलमेर से महमूद जोधपुर इलाज के लिए MDM अस्पताल आया था। महमूद ने यह भी बताया कि वो काम के लिए वीजा लेकर भारत आया था। लेकिन मई 2023 में ही उसका वीजा खत्म हो गया। इसके बाद वह वापस बांग्लादेश नहीं गया। फ़िलहाल मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण IB पकड़े गए आरोपित से पूछताछ कर रही है। पुलिस महमूद के पास मिले कागजातों की भी जाँच कर रही है।

अभियान कॉन्ग्रेस का, पैसे जा रहे BJP को: चंदा लेने के चक्कर में कॉन्ग्रेस के साथ हुआ ‘मोये-मोये’

कॉन्ग्रेस ने तीन राज्यों में हार के बाद चंदा जुटाने के लिए ‘डोनेट फॉर देश’ नाम से एक अभियान चालू किया है। हालाँकि, यह अभियान अब कॉन्ग्रेस की जगह भाजपा के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा है। इस पर लोग सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस के मजे ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि कॉन्ग्रेस के साथ ‘मोये-मोये’ हो गया है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने इस अभियान का नाम ‘डोनेट फॉर देश’ (Donate For Desh) रखा है लेकिन इस नाम से वेबसाइट खोलने पर भाजपा को चंदा देने का पेज खुल रहा है। यदि कोई भी व्यक्ति Donatefordesh.Org वेबसाइट को खोलता है तो इस पर भाजपा को चंदा देने का पेज खुलता है। यहाँ नाम, मोबाइल नम्बर और ईमेल आईडी देकर भाजपा को चंदा देने का फॉर्म खुलता है। वहीं Donatefordesh.Com और Donatefordesh.in भी कॉन्ग्रेस नहीं ले पाई।

सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस से मजा लिया जा रहा है कि वह जिस नाम से अभियान चला रहे हैं उस नाम की सारी वेबसाइट पहले ही किसी ने खरीद ली। एक वेबसाइट तो भाजपा ने ही खरीद ली और कॉन्ग्रेस के चंदा एकत्रीकरण अभियान से अपने लिए चंदा लेना चालू कर दिया है। लोगों ने इसे कॉन्ग्रेस के आईटी विभाग की विफलता बताया है। लोगों ने यह भी कहा है कि कॉन्ग्रेस पैसा तो देश के नाम पर माँग रही है लेकिन तिजोरियाँ अपनी भर रही है।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि कॉन्ग्रेस को बीते कुछ सालों में चंदा नहीं मिला है। कॉन्ग्रेस को 2021-22 में ₹95 करोड़ इलेक्टोरल बांड के जरिए चंदा मिला था। इसके बाद अलावा कॉन्ग्रेस ने यह सितम्बर 2023 में घोषणा की थी कि उसके पास लगभग ₹700 करोड़ की सम्पत्ति है।

कॉन्ग्रेस ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीके से चंदा इकट्ठा करेगी। कॉन्ग्रेस 28 दिसम्बर, 2023 को स्थापना के 138 साल पूरे कर रही है। इसीलिए कॉन्ग्रेस ने अपने समर्थकों ₹138 के गुणक में पैसा देने की अपील की है। कॉन्ग्रेस ने अपने जिला और प्रदेश स्तर के कार्यकर्ताओं से ₹1380 देने की अपील की है।

अभियान की शुरुआत इसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने की है और पार्टी को ₹1.38 लाख चंदा दिया है। कॉन्ग्रेस 28 दिसम्बर, 2023 तक यह अभियान ऑनलाइन चलाएगी, इसके बाद इसके कार्यकर्ता घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा करेंगे। हालाँकि, ऑनलाइन अभियान के पहले ही उनके नाम का डोमेन (वेबसाइट का नाम) किसी और ने खरीद लिया।

जिस रास्ते से गुजरते हैं CM योगी, वहाँ ड्राईफ्रूट्स बेच रहे थे कश्मीरी, अतिक्रमण हटाने गई टीम के साथ मारपीट: पुलिस प्रताड़ना बता इस्लामी कर रहे दुष्प्रचार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को वामपंथी और इस्लामी विचारधारा वाले हैंडलों द्वारा शेयर किया जा रहा है। इन हैंडलों द्वारा ये बताने का प्रयास किया जा रहा है कि लखनऊ नगर निगम के कर्मी स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ड्राई फ्रूट बेचने आए कश्मीरी लोगों को परेशान कर रहे हैं।

इन तमाम X हैंडलों से यह भी बताने का प्रयास किया जा रहा है कि पुलिस ने इस दौरान कश्मीरी ड्राई फ्रूट विक्रेताओं की ना सिर्फ पिटाई की, बल्कि उनका सामान भी बिखेर दिया। मोहम्मद आसिफ खान ने अपने X हैंडल @imMAK02 से एक साथ 3 वीडियो शेयर किए।

मोहम्मद आसिफ खान ने अपने वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है, “गरीब कश्मीरी ड्राई फ्रूट विक्रेता लखनऊ नगर निगम प्राधिकरण की टीम द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं। ये इन गरीब लोगों को क्यों परेशान कर रहे हैं?”

कथित फैक्ट चेकिंग के नाम पर अपना मज़हबी एजेंडा चलाने वाले AltNews के मोहम्मद ज़ुबैर ने भी इसी घटना का वीडियो Quote किया है। जुबैर ने उत्तर प्रदेश पुलिस को टैग कर के कश्मीर के व्यापारियों को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया।

वहीं, किसी ने इसे कश्मीर की धारा 370 से जोड़ा तो किसी ने इसे कश्मीरियों से घृणा वाली सोच बताया। मोहम्मद उजैर खान ने तो लोगों से पीड़ा महसूस करने की भी अपील कर डाली। एक यूजर ने तो इसमें महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला तक को टैग कर दिया।

लखनऊ पुलिस ने बताया सच

इस मामले में फ़ैल रही अफवाहों और भ्रामक खबरों को लेकर लखनऊ पुलिस ने अपने आधिकारिक X हैंडल से सफाई पेश की है। लखनऊ पुलिस ने बताया कि गोमती नगर थाना क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी।

DCP पूर्वी IPS आशीष श्रीवास्तव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि घटना एक VIP मार्ग की है, जहाँ अक्सर अतिक्रमण की समस्या रहती है। यहाँ लगातार VIP मूवमेंट होता रहता है। इसीलिए समय-समय पर नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने का काम करती है, जिसमें लखनऊ पुलिस भी सहयोग करती है।

DCP ने बताया, “पिछले कुछ दिनों से कुछ लोग वहाँ ड्राई फ्रूट बेच रहे हैं। इस संबंध में नगर निगम की टीम ने पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। पुलिस ने भी इन विक्रेताओं को समझाने की कोशिश की है। घटना के दिन 17 दिसंबर की सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उसी रास्ते से दौरा था।”

DCP श्रीवास्तव ने आगे कहा, “इस दौरे को ध्यान में रखते हुए जब नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने पहुँची तो ड्राई फ्रूट बेचने वालों ने उनसे अभद्रता की। जब पुलिस को इसकी जानकारी मिली तो अभद्रता करने वालों को थाने लाया गया, जहाँ आरोपितों का 151 (शांति भंग की धारा) में चालान किया गया।”

DCP ने बताया कि 1090 चौराहे से समतामूलक चौराहे के बीच का मार्ग VIP मूवमेंट में अक्सर प्रयोग होता है। उन्होंने अपील की है कि भविष्य में भी उस मार्ग पर अतिक्रमण न किया जाए और जब भी नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाए तो उसका हर कोई सहयोग करे।

एक ट्विटर यूजर के मुताबिक, पुलिस द्वारा टोके जाने के बाद कश्मीरी ड्राई फ्रूट विक्रेताओं ने खुद ही अपने सूखे मेवे सड़कों पर बिखरे दिए थे। हालाँकि, पुलिस के बयान से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन ने यह कार्रवाई किसी की कश्मीरी पहचान के कारण नहीं, बल्कि अवैध अतिक्रमण को लेकर है।

‘यूरोप की संस्कृति के अनुकूल नहीं है इस्लाम’: इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी का 5 साल पुराना बयान, ताज़ा बता कर चला रहा मीडिया

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें वो कह रही हैं कि इस्लाम यूरोपियन मूल्यों और संस्कृति के अनुकूल नहीं है। वो कह रही हैं कि इटली में इस्लाम को सऊदी अरब की फंडिंग के जरिए फैलाया जा रहा है और सऊदी अरब में शरिया कानून लागू है।

यही बयान मीडिया द्वारा भी रिपोर्ट किया गया, रिपोर्ट करने वालों में अधिकांश मीडिया संस्थान भारतीय हैं।

मीडिया चैनल ने यह दावा किया कि जॉर्जिया मेलोनी का यह बयान उनकी ‘द ब्रदर्स ऑफ़ इटली’ पार्टी द्वारा इटली में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद आया है। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और कारोबारी एलन मस्क भी शामिल हुए थे।

भारतीय मीडिया में WION, हिंदुस्तान टाइम्स, मिंट, NDTV और टाइम्स नाउ जैसे संस्थानों ने इसी दावे के साथ रिपोर्ट छापी। NDTV ने एक्स (पहले ट्विटर) पर किए गए एक ट्वीट के आधार पर मेलोनी के बयान को रिपोर्ट में लिखा और दावा किया कि यह बयान उन्होंने हाल ही में अपनी पार्टी के आयोजन में दिया था।

जॉर्जिया मेलोनी का बयान
जॉर्जिया मेलोनी का बयान

हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया के किसी संस्थान में यह बयान बीते 24 घंटों में नहीं मिला। खोजबीन पर पता चला कि यह वीडियो सबसे पहले एक्स पर रेडियो जेनेवा नाम के एक हैंडल द्वारा डाला गया हो सकता है। हालाँकि, इसने भी यह दावा नहीं किया कि यह बयान अभी का है और उसने बयान की तारीख भी नहीं बताई।

हालाँकि, इस बयान से सम्बंधित शब्दों को सर्च करने पर जॉर्जिया का एक पाँच साल पुराना वीडियो मिला। इसका असली वीडियो जुलाई 2018 में यूट्यूब पर डाला गया था। इसे यूट्यूब पर एक न्यूज चैनल Alanews पर डाला गया था।

जॉर्जिया मेलोनी का बयान

असली वीडियो में मेलोनी कहते हुए दिखती हैं, “साल्विनी कहते हैं कि इस्लाम संविधान के प्रतिकूल है। उनसे इस पर सफाई देने को कहिए। लेकिन मुझे लगता है इस्लाम हमारे मूल्यों और संस्कृति के अनुकूल नहीं है और इस्लामिक केन्द्रों में क्या होता है, इसका गवाह है। मैं इसका सामान्यीकरण नहीं कर रही, लेकिन हाँ प्रतिकूलता तो है।”

मेलोनी इस वीडियो में एक अन्य कंजर्वेटिव नेता मैटियो साल्विनी के बयान के बारे में बात कर रहीं थी। साल्विनी ने यह बयान कोलोन शहर में हुई यौन हिंसा और बर्लिन में हुए आतंकी हमलों के विषय में दिया था।