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जूनियर आर्टिस्ट की अश्लील तस्वीरें क्लिक की, फिर ब्लैकमेल कर रहा था ‘पुष्पा’ का एक्टर: कबूला आत्महत्या के लिए उकसाने का जुर्म

फिल्म ‘पुष्पा’ में अल्लू अर्जुन के दोस्त केशव का किरदार निभाने वाले एक्टर जगदीश ने अपनी जूनियर आर्टिस्ट को आत्महत्या के लिए उकसाने का जुर्म कबूल कर लिया है। इस जूनियर महिला कलाकार ने 29 नवंबर, 2023 को फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

मृतका के पिता ने एक्टर जगदीश के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसे लेकर आरोपित एक्टर जगदीश को 6 दिसंबर, 2023 को हिरासत में ले लिया था। एक्टर जगदीश पर आरोप लगा था कि उसने अपनी इस जूनियर महिला कलाकार को उसकी प्राइवेट फोटो को लेकर ब्लैकमेल किया था और खुदकुशी के लिए उकसाया था।

पुलिस के सामने पूछताछ के दौरान एक्टर जगदीश के सामने आखिरकार अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा कि जिस जूनियर कलाकार ने उनकी ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर खुदकुशी की थी वो पहले उनकी करीबी रही थीं।

जाँच में भी सामने आया था कि एक्टर जगदीश ने मृतका को ब्लैकमेल किया था और उसी से परेशान होकर उसने अपनी जान दे दी। जाँच में खुलासा हुआ है कि जगदीश ने चोरी से किसी और पुरुष के साथ मृतका जूनियर महिला कलाकार की फोटो खींच ली थी।

इसे लेकर ही वह मृतका को ब्लैकमेल कर रहा था। जगदीश ने पुलिस के सामने कबूला है कि उसने गलत इरादे से इस जूनियर आर्टिस्ट की तस्वीरें ली थी। उसने ये भी स्वीकार किया कि उसने मृतका को इन तस्वीरों को इंटरनेट पर वायरल करने की भी धमकी दी थी।

आरोपित ने पुलिस को ये भी बताया कि उसे मृतका को किसी दूसरे पुरुष के साथ होना बर्दाश्त नहीं होता था। उसे जलन होती थी कि मृतका किसी ओर से प्यार करती थी। जगदीश ने ये भी बताया कि वो मृतका को 5 साल से पहले से जानता था और ‘पुष्पा’ के हिट होने के बाद दोनों अलग हो गए थे।

आरोपित एक्टर ने पुलिस के सामने ये भी कबूला कि वो उसके खुद को पूरी तरह से अलग नहीं कर पाए थे। इस वजह से ही चिढ़ और जलन की वजह से हाल ही में उसने मृतका को ब्लैकमेल करना शुरू किया था।

एक्टर जगदीश पर जूनियर आर्टिस्ट की खुदकुशी का आरोप लगते ही पुंजागुट्टा पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए रिमांड में भेजने के निर्देश जारी किए थे और चंचलगुडा सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। हालाँकि, रिमांड के 14 दिन पूरे होने से पहले ही आरोपित एक्टर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

आरोपित एक्टर ने साल 2018 में फिल्म ‘निरुद्योगा नातुलु’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद साल 2019 में आई फिल्म ‘मल्लेशम’ और 2020 की फिल्म ‘पलासा 1978’ में भी उन्होंने अभिनय किया। आरोपित एक्टर साल 2021 में आई ‘पुष्पा: द राइज’ में केशव के किरदार से मशहूर हुए। खबरें चल रही थीं कि वो ‘पुष्पा: द रूल’ में भी अभिनय करने जा रहे हैं।

2 कंगारू, ₹45.25 करोड़… IPL के सबसे महँगे खिलाड़ी बने मिचेल स्टार्क, साथी पैट कमिंस दूसरे नंबर पर: स्टीवन स्मिथ को नहीं मिला खरीददार

IPL 2024 की नीलामी में कई कीर्तिमान बन गए। ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी मिचेल स्टार्क आईपीएल इतिहास में सबसे महँगे बिकने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उन्हें कोलकाता नाईट राइडर्स (KKR) ने ₹24.75 करोड़ में खरीदा है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के दूसरे खिलाड़ी पैट कमिंस ₹20.50 करोड़ में बिके हैं। कमिंस को सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने खरीदा है।

आईपीएल खिलाड़ियों की नीलामी में आज विश्वकप में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों का दबदबा रहा। विश्वकप फाइनल में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाले कमिंस और मिचेल स्टार्क जहाँ सबसे महंगे खिलाड़ी बने,वहीँ बाकी मैचों में अपना जलवा दिखाने वाले खिलाड़ियों को भी बढ़िया पैसा मिला।

विश्व कप के दौरान न्यूजीलैंड की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय मूल के खिलाड़ी रचिन रवींद्र को चेन्नई सुपर किंग्स ने ₹1.80 करोड़ में खरीदा। इसके अलावा न्यूजीलैंड के ही खिलाड़ी डेरिल मिचेल को चेन्नई सुपर किंग्स ने ₹14 करोड़ में खरीदा।

भारतीय गेंदबाज उमेश यादव को गुजरात टाइटंस ने ₹5.80 करोड़ में खरीदा। वहीं शिवम मावी को लखनऊ ने ₹6.4 करोड़ में खरीदा। वर्ल्ड कप में श्रीलंका ने काफी खराब प्रदर्शन किया लेकिन उसकी तरफ से अच्छा प्रदर्शन करने वाले दिलशान मदुशंका को मुंबई इंडियंस ने ₹4.60 करोड़ में खरीदा।

भारत के खिलाफ 19 नवम्बर 2023 को आयोजित फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के लिए भारत के विरुद्ध शतक लगाने वाले ट्रेविस हेड को राइजर्स हैदराबाद ने ₹6.80 करोड़ में खरीदा है। ट्रेविस हेड के लिए चेन्नई भी जोर लगा रही थी। हालाँकि SRH ने जोर लगा कर उन्हें खरीद लिया।

वहीँ कुछ खिलाड़ियों को इस बार पिछले आईपीएल के मुकाबले कम कमाई से भी संतोष करना पड़ा। इंग्लैंड के क्रिकेटर हैरी ब्रूक जहाँ पिछले वर्ष ₹10 करोड़ में बीके थे वहीं इस बार उन्हें दिल्ली कैपिटल्स को ₹4 करोड़ में खरीदा है। ऑस्ट्रेलिया के बड़े बल्लेबाज स्टीवन स्मिथ को किसी टीम ने नहीं खरीदा।

श्रीलंका के स्टार गेंदबाज वानिंदु हसरंगा बीते वर्ष जहाँ ₹10 करोड़ में बिके थे तो वहीं इस बार मात्र ₹1.5 करोड़ ही पा सके। यही उनका बेस प्राइज (जिस कीमत से नीलामी शुरू होती है) ₹1.5 करोड़ ही था। उन्हें SRH ने खरीदा।

‘हिंदुओं के राजा-मेरे ख्वाजा ‘… मुस्लिम भीड़ की जिस रैली में लहराए गए हमास के झंडे, उसके बचाव में उतरे सपा MLA अबू आजमी: FIR में 11 नामजद

महाराष्ट्र के जलगाँव में 8 नवंबर 2023 को इजरायल विरोधी रैली में हमास और फिलीस्तीन के झंडे लहराए गए थे। इसी रैली में भारत विरोधी नारे भी लगने की बात सामने आई थी। पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम समुदाय के 11 आरोपितों पर FIR दर्ज की थी। अब सोमवार (18 दिसंबर 2023) को समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आज़मी ने सरकार से इस केस को वापस लेने की माँग की है। केस को झूठा बताने वाले आज़मी का दावा है कि रैली के दौरान हमास का कोई झंडा नहीं फहराया गया था।

यह FIR जलगाँव के थाना धरणगाँव में दर्ज हुई है। इस FIR में 16 दिसंबर को 11 आरोपितों को नामजद किया गया था। इनके नाम- शेख रफीक शेख मूसा कुरेशी, इरफान शेख अरमान, मोहम्मद इस्माइल यूसुफ, नागर मोमिन, नदीमोद्दीन इजाजुद्दीन काजी, कालू उस्ताद, मोहम्मद सलीम मोहम्मद इसाक मोमिन, इब्राहिम जनाब उर्फ इट्टू जनाब, अमजद खान गुलाब खान बेलदार, मोहम्मद अयास मोहम्मद सिद्दीकी और जुनैद खान हैं। इन पर IPC की धारा 153(ए)(1)(बी) (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना करना) के तहत कार्रवाई की गई है।

इसी केस पर बोलते हुए अबू आज़मी ने सोमवार (18 दिसंबर) को बताया कि 8 नवंबर को फिलीस्तीन समर्थक मुस्लिमों ने यह रैली पुलिस की बाकायदा अनुमति ले कर की थी। साथ ही उन्होंने इस रैली में हमास का झंडा लहराए जाने की के दावे को झूठा बताया। अबू आज़मी का यह भी दावा है कि मुस्लिमों की इस रैली के खिलाफ बाद में एक अन्य स्थानीय संगठन ने जवाबी रैली की और उसमें उत्तेजक नारेबाजी हुई। आज़मी का दावा है कि जवाबी रैली बिना अनुमति की थी लेकिन पुलिस ने उस पर कोई केस नहीं दर्ज किया।

आजमी की यह प्रतिक्रिया प्रदेश के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वो हमास समर्थन में नारेबाजी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

दरअसल, इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी प्रसाद लाड ने महाराष्ट्र विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था। तब उन्होंने कहा था कि धरणगाँव में हुई रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘सर तन से जुदा’ के साथ ‘हमास जिंदाबाद-भारत मुर्दाबाद’ जैसी नारेबाजी की।

हाथ में थी रॉड, लगाए जा रहे थे सिर तन से जुदा के नारे

आरोप है कि इस दौरान भीड़ में शामिल लोगों के हाथों में स्टील की रॉड थी और कइयों ने हमास के झंडे भी लहराए। बीजेपी MLC ने इस घटना पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। इस माँग पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केस की गहराई से जाँच करवा के आरोपितों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया था।

ऑपइंडिया की पड़ताल में इस केस में 16 दिसंबर 2023 को दर्ज मामले की FIR कॉपी सामने आई। यह FIR राष्ट्रीय सुरक्षा मंच धरणगाँव के एक सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुई थी। FIR के मुताबिक 8 नवंबर को फिलीस्तीन के समर्थन में रैली का नाम ‘जुलूस-ए-गौसिया’ दिया गया था जिसे धरणगाँव में रफीक कुरेशी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था। इस रैली में मुस्लिम समुदाय के लगभग 2500 से 3000 लोग मौजूद थे जिसमें आसपास के मदरसों में पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चे भी शामिल थे।

FIR Copy

FIR में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भीड़ में मौजूद लोगों ने ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा’ ‘हिंदुओं का राजा, मेरा ख्वाजा’ ‘हमास तेरा नाम रोशन होगा, इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह’ ‘हमास जिंदाबाद – भारत मुर्दाबाद’ जैसी नारेबाजी की। इसी रैली में न सिर्फ फिलीस्तीन और हमास बल्कि पाकिस्तान की भी तारीफ हुई थी। प्रदर्शनकरियों द्वारा भारत द्वारा इज़राइल को समर्थन दिए जाने के फैसले की भी निंदा की गई।

शिकायतकर्ता ने अपने पास स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए कुछ वीडियो होने का भी दावा किया। राष्ट्रीय सुरक्षा मंच, धरणगाँव के एक सदस्य ने ऑपइंडिया से बातचीत में FIR में लगाए गए आरोपों के सही होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल कुछ लोगों ने जब इस घटना की वीडियो बनता देखा तब उन्होंने अपने हाथों में लिए गए झंडों को फेंक दिया। FIR में यह भी बताया गया है कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को अपने आरोपों के संबंध में सबूत के तौर पर वीडियो भी दिए हैं।

Palestine flags, Pakistan flags raised in rally organized by Muslims in Dharangaon, Jalgaon from OpIndia Videos on Vimeo.

शिकायतकर्ता ने ऐसी रैलियों को समाज को विभाजन पैदा करने वाली बताया, इसे साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा बताया और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

बताते चलें कि यह रैली उस आतंकी समूह हमास के समर्थन में निकली थी जिसने 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमला किया था। तब हमास ने महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों इजरायली नागरिकों का अपहरण कर के उनकी हत्या कर दी थी। कुछ महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया गया और उन्हें नंगा कर के अपने वाहनों में घुमाया। यहाँ ये भी जानना जरूरी है कि जलगाँव के अलावा भारत के कई अन्य हिस्सों में भी फिलीस्तीन के समर्थन में रैलियाँ हुई हैं।

3 राज्य में 11 हत्या… दूध-तेजाब और पत्थर थे सीरियल किलर के हथियार: खजाना खोजने के नाम पर बनाता था शिकार

एक व्यक्ति के कई चेहरे – ये बात रामति सत्यनारायण पर फिट बैठती है। एक नए सीरियल किलर को लेकर खुलासा हुआ है। अपनी पत्नी के लिए वो अच्छा पति और बेटे के लिए अच्छा पिता था। तेलंगाना के नगरकुर्नूल और वानापर्थी जिलों और उसके आसपास के रियल एस्टेट एजेंट उसे एक ब्रोकर के तौर पर पहचानते थे। कइयों के लिए वो एक अलौकिक चीजों में यकीन रखने वाला, औषधि विशेषज्ञ और एक खजाना खोजने में माहिर आदमी था।

हैदराबाद से करीब 130 किलोमीटर दूर नगरकुर्नूल जिले की पुलिस की जाँच में खुलासा हुआ कि वो एक सीरियल किलर है। पुलिस ने मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को उसे गिरफ्तार किया था। रामति सत्यनारायण ने पुलिस के सामने कबूला है कि उसने 4 साल में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 11 लोगों को मौत के घाट उतार डाला।

इसके लिए वो भोले-भाले लोगों को उनके लिए छिपे हुए खजाने को सामने लाने का झाँसा देकर अपने जाल में फँसाता था। वह लोगों से कहता था कि पूजा कर वो उनका खजाना उनके सामने ले आएगा। वादा कर के वो उनकी नृशंस हत्या कर देता था। पुलिस के अनुसार, उसके क्राइम का तरीका था कि वह लोगों को झाँसा देता था कि पूजा कर वह उनका खजाना सामने ले आएगा और लोग उसके झाँसे में आ जाते थे।

पुलिस भी नहीं कर पाई यकीन कि ये हत्यारा है

पुलिस ने 12 दिसंबर, 2023 को हैदराबाद के खजाना खोजने वाले गोवुला वेंकटेश की हत्या के सिलसिले में सत्यनारायण को गिरफ्तार किया, तो उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी हिरासत में मौजूद छोटे कद का मीठा बोलने वाला ये शख्स 2020 से 11 लोगों की नृशंस हत्या कर चुका है।

नागरकुर्नूल के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) बी मोहन कुमार के मुताबिक, “यह विश्वास करना मुश्किल था कि सत्यनारायण अपने शिकार के चेहरों पर एसिड डालने और उनके सिर को पत्थरों से कुचलने का तरीका अपनाता था।”

इंटरमीडिएट पास सीरियल किलर को खजाने की खोज का जुनून

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “सत्यनारायण ने हमें बताया कि खजाने की खोज एक लत और जुनून है। हालाँकि, वह बहुत अधिक पढ़ा-लिखा नहीं था, फिर भी वह इतना बुद्धिमान था कि उसने इस जुनून का फायदा उठाया।”

वो लोगों को कहता था कि वो उन्हें खजाना दिलवाएगा। इसके बाद उसके एवज में 10 लाख रुपए तक की माँग करता था। वो ये कहकर किसी को न बताने की शपथ दिलाता था कि बताने पर खजाना मिलने की संभावना कम हो जाएगी। इसके बाद उनके पैसे वापस माँगने पर उनको खजाने मिलने का सही वक्त बता कर सुनसान जगह बुलाता। फिर प्रसाद कहकर जहरीला दूध पिलाता। शिकार के बेहोश होने पर चेहरे पर एसिड फेंकता या फिर पत्थर से उनका चेहरा कुचल कर मौत के घाट उतार देता। फिर वो चुपचाप घर चला जाता था।

कैसे आँखों में लंबे समय तक झोंकता रहा धूल

आखिर लगातार हत्याओं को अंजाम देने के बाद भी रामति सत्यनारायण पुलिस के कैसे बचता रहा। इसे लेकर एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “वह अपने शिकार को फँसाने के लिए उनका विश्वास हासिल करता था। इसके लिए वों उनकी दिलचस्पी वाले मुद्दों पर बात करता था। मसलन रियल एस्टेट, अलौकिक, छिपे हुए खजाने, हर्बल इलाज, लगभग हर चीज जिसमें वो दिलचस्पी रखते हों। वह इतना भरोसेमंद लगता था कि कुछ ही हफ्तों में या उनकी पहली मुलाकात के महीनों बाद भी उसके शिकार किसी भी अजीब वक्त पर एकांत जगह पर उनसे मिलने में संकोच नहीं करते थे।”

खजाने का लालच और सब्जी विक्रेता बना पहला शिकार

सत्यनारायण का पहला शिकार 42 साल का सब्जी बेचने वाला खाजा पाशा था। महबूबनगर मंडल के येनुगोंडा गाँव का रहने वाले पाशा को अपनी जमीन पर मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े मिले थे। इसके बाद उसे यकीन हो गया कि उसकी जमीन पर खजाना दबा हुआ है। डीएसपी कुमार ने कहा, “इसे लेकर पाशा ने 2020 के शुरू में सत्यनारायण से मुलाकात की। सत्यनारायण ने आने वाले कुछ महीनों में पाशा का यकीन हासिल किया और उसे भरोसा दिलाया कि खजाने की कीमत 10 लाख रुपए के पाशा के प्लॉट के से कई गुना अधिक होगी।”

इसे लेकर उसने पाशा से फीस की तौर पर उसका प्लॉट अपने नाम पर रजिस्टर करने के लिए कहा। रजिस्ट्री होते ही वो पाशा से कन्नी काटने लगा। पाशा ने उसे पुलिस में जाने की धमकी दी तो सत्यनारायण ने कथित तौर पर 13 अगस्त, 2020 को पाशा को फोन किया।

उसने पाशा से कहा कि खजाने को खोजने के लिए अनुष्ठान करने का सही वक्त आ गया है। अगली सुबह, पाशा के बहनोई सैदु ने उनकी लाश उसकी रसोई में देखी। ये लाश वहाँ ताजा खोदे गए छोटे गड्ढे में कपूर, नींबू, नारियल, गुलाब की पंखुड़ियों और जली हुई अगरबत्तियों के साथ मिली थी।

सैदु को पाशा की 40 साल की बीवी असमा बेगम, उसकी 65 साल की सास हजीराबाई और 11 साल की बेटी असरिन हसीना की लाश भी घर के अलग-अलग कमरों में मिली। सबको लगा कि ये खुदकुशी का मामला है, लेकिन घर में पड़ा अनुष्ठान का सामान कुछ और ही कह रहा था। इन हत्याओं को अंजाम देने के बाद से सत्यनारायण का हौसला बढ़ता गया और वो लोगों को छिपा हुआ खजाना दिलाने के नाम पर उनके प्लॉट की रजिस्ट्री अपने नाम कराता और फिर उनकी हत्याएँ करता जाता था।

गिरफ्तारी के बाद उगला रोंगटे खड़ा कर देने वाला सच

गिरफ्तारी के बाद, सत्यनारायण ने कबूला कि उसने पाशा के घर के अन्य लोगों को पूजा का हवाला देकर आँखें बंद कर अलग कमरे में बैठने को कहा था। देवताओं का प्रसाद बता कर उन्हें जहरीला दूध पिलाया। जब परिवार की साँसें थमीं तो वो चुपचाप पाशा के घर से फरार हो गया।

जोगुलंबा गडवाल रेंज के डीआइजी एलएस चौहान के मुताबिक, वो इतनी हत्याएँ करने के बाद भी इसलिए बचता रहा कि वह अपने शिकारों को कहता था कि अगर उन्होंने उसके बारे में किसी को बताया तो उसके खजाना मिलने की संभावनाएँ कम हो जाएँगी।

सत्यनारायण पहली बार नगरकुर्नूल पुलिस के रडार पर तब आया जब 50 साल के खेती मजदूरी करने वाले वासरला लिंगस्वामी की लाश 18 नवंबर, 2022 को वनपटला गाँव में मिली थी। पुलिस के मुताबिक, 17 नवंबर, 2022 को वह लिंगास्वामी को एक सुनसान जगह पर ले गया और कथित तौर पर एक बड़े पत्थर से उसका सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।

डीएसपी कुमार ने कहा, “सत्यनारायण को पूछताछ के लिए लाया गया था, लेकिन उन्होंने लिंगास्वामी को पहचानने से भी इनकार कर दिया। हालाँकि हमारे पास रिपोर्ट थी कि उन्हें एक साथ देखा गया था, लेकिन सबूतों की कमी की वजह से हमें उसे जाने देना पड़ा।”

कैसे फँसा पुलिस के चंगुल में

उसने पत्थर काटने वाले गोवुला वेंकटेश की हत्या के बाद उसकी पत्नी गोवुला लक्ष्मी ने अपनी पुलिस रिपोर्ट में सत्यनारायण का नाम एक संदिग्ध के रूप में लिखाया था। वेंकटेश ने अपनी पत्नी को बताया था कि उसके 2 दोस्त (बी शिवा और बी देवेंद्र) और वह एक जमीन सौदे के लिए नगरकुर्नूल में एक रियल एस्टेट डीलर, सत्यनारायण से मिलने जा रहे थे। मृतक वेंकटेश की पत्नी ने सत्यनारायण का फोन नंबर उससे लिया था।

वेंकटेश ने ‘खजाना’ खोजने के लिए सत्यनारायण की फीस देने के लिए अगस्त 2023 में 10 लाख रुपए उधार लिए थे। सितंबर में खजाना खोजने की कोशिश का दावा करते हुए आरोपित ने वेंकेटेश को कहा कि तीन गर्भवती महिलाओं की बलि दी जाएगी।

इससे वेंकटेश के मन में डर पैदा हो गया और उसने आरोपित से पैसा वापस लौटाने को कहा। पुलिस के बयान के मुताबिक, आरोपित ने फिर चार दिसंबर 2023 को वेंकटेश को भी खजाना दिलाने के लालच दे बुलाया। वहाँ प्रसाद के नाम पर उसे पर जहरीला दूध पिलाया। फिर एक पहाड़ी पर ले जाकर उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया। वेंकेटेश की पहचान से जुड़ी सभी चीजें अलग-अलग जगहों पर फेंक दी।

जब पति वेंकटेश घर नहीं पहुँचा तो गोवुला लक्ष्मी ने सत्यनारायण को फोन किया, लेकिन वो अनजान बन गया। मृतक वेंकटेश के दोस्तों ने सत्यनारायण के घर का पता लगाया। इसके बाद लक्ष्मी पति के चाचा ई कोंडालैया और उसके 2 दोस्त 26 नवंबर, 2023 को सत्यनारायण से मिलने पहुँच गए।

तब भी वो अनजान बना रहा शक होने पर मृतक वेंकटेश की बीवी गोवुला लक्ष्मी ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। सत्यनारायण ने वेंकटेश और पाशा के परिवार के अलावा बाद 70 साल के बीम राम रेड्डी और उनकी 42 साल बेटी थिरुपथम्मा, 52 साल अरेपल्ली श्रीनिवासुलु, 43 साल संपति श्रीधर रेड्डी को अपना शिकार बनाया।

तीन तलाक देकर भी बीवी से किया सेक्स, फिर भाई से करवाया हलाला: पीड़िता बोली- सास देती थी मुँह बंद रखने की धमकी, हरियाणा में FIR

हरियाणा के यमुनानगर जिले से तीन तलाक और हलाला का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर ने पहले उसे 3 तलाक दिया और बाद में देवर ने हलाला किया। हरियाणा पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली और केस को सहारनपुर जिले में ट्रांसफर कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला यमुनानगर के थाना सिटी कोतवाली का है। यहाँ एक महिला का निकाह 7-8 साल पहले सहारनपुर में हुआ था। इस निकाह से महिला को 2 बच्चे हुए। लेकिन उसके शौहर ने 10 अगस्त 2022 को तीन तलाक दे कर उसे घर से निकाल दिया। आरोपित शौहर सहारनपुर के थानाक्षेत्र नई मंडी का रहने वाला है।

पीड़िता ने इस संबंध में यमुनाननगर पुलिस थाने में शिकायत दी और 22 अप्रैल 2023 को आरोपित शौहर के खिलाफ IPC की धारा 354, 406, 498- A के साथ मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन राइट ऑन मैरिज एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली गई।

पुलिस का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद 4 सितंबर को आरोपित शौहर ने अपनी बीवी से केस वापस लेने की गुहार लगाई। साथ ही उसने फिर से अपनी बीवी को साथ रखने का भरोसा दिया। इसी भरोसा पर पीड़िता के घर वालों ने आरोपित ससुराल वालों से समझौता कर लिया।

2 अक्टूबर को आरोपित शौहर एक बार फिर से पीड़िता के पास यमुनानगर गया। रात को वो अपनी बीवी के साथ रुका और शारीरिक संबंध बनाए। यहाँ वो 2 दिन रुका और 4 अक्टूबर को अपनी बीवी को ले कर सहारनपुर चला गया।

सहारनपुर में आरोपित शौहर अपनी बीवी को घर के आगे उतार कर थोड़ी देर में लौटने की बात कह कर कहीं चला गया। इसी 4 अक्टूबर की ही रात को पीड़िता के देवर ने उसके साथ रेप किया। उसने इस रेप को ‘हलाला’ का नाम दिया और पीड़िता के शौहर के साथ रहने के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया बताया। जब पीड़िता ने अपने देवर की करतूत अपनी सास को बताई तब उसे मुँह बंद रखने की धमकी मिली। साथ ही आरोपित सास ने भी हलाला का समर्थन किया।

मालूम हो कि यमुनानगर पुलिस ने केस में जीरो FIR दर्ज कर के मामले को आगे की जाँच और कार्रवाई के लिए नई मंडी कोतवाली सहारनपुर भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक कुल 5 लोगों को FIR में नामजद किया गया है। इन आरोपितों पर IPC की धारा 376 और 323 के तहत कार्रवाई की गई है।

पाटर्नर माँग रहे थे कन्वेनर, कॉन्ग्रेस ने खुद की कमेटी बना ली: INDI गठबंधन की बैठक से पहले फूँके हुए कारतूसों को जिम्मेदारी

2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने I.N.D.I. गठबंधन बनाई थी। अब इसकी अगली बैठक बैठक मंगलवार (19 दिसम्बर, 2023) को दिल्ली में आयोजित हो रही है। इससे पहले कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनावों के लिए एकला चलो रे की नीति पर अमल चालू कर दिया है।

I.N.D.I. गठबंधन की बैठक से ठीक पहले कॉन्ग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एक कमिटी का गठन किया है। इस कमिटी का नाम ‘नेशनल अलायन्स कमिटी’ (NAC) रखा गया है। इस कमिटी में कॉन्ग्रेस के 5 सदस्यों को शामिल किया गया है। यह अब लोकसभा चुनावों के लिए कॉन्ग्रेस का कामधाम देखेगी।

कॉन्ग्रेस ने इसमें हाल ही में 2 राज्यों में चुनाव हारने वाले नेताओं के नाम शामिल किए हैं। कमिटी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा मुकुल वासनिक, सलमान खुर्शीद और मोहन प्रकाश को शामिल किया गया है।

मुकुल वासनिक को इस कमिटी का संयोजक बनाया गया है। यह कमिटी I.N.D.I. गठबंधन की बैठक से ठीक पहले बनाई गई है, इससे कॉन्ग्रेस ने स्पष्ट किया है वह गठबंधन में तो रहेगी लेकिन इन पार्टियों पर अपनी मर्जी चलाने की कोशिश करेगी।

बैठक में लल्लन सिंह, फारुक अब्दुल्लाह, लालू यादव, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी, आदित्य ठाकरे और संजय जैसे नेता पहुँचे हैं। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस बैठक में शामिल हुए हैं। राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी भी बैठक में पहुँची हैं। हाल के कुछ दिनों में मीडिया की नजरों से गायब रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी इसमें शामिल हुए हैं।

I.N.D.I. गठबंधन की बैठकों में अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि उनका संयोजक कौन होगा। हाल ही में तीन राज्यों में हुई विधानसभा चुनावों में हार के कारण अब कॉन्ग्रेस का दबदबा इसमें कमजोर हो गया है। बैठक से ठीक पहले पटना में नीतीश कुमार के समर्थन वाले पोस्टर देखे गए हैं।

आज बनाई गई कमिटी में अशोक गहलोत को डालकर यह सन्देश भी दिया गया है कि पार्टी अब राजस्थान में नए नेतृत्व को मौक़ा देगी जबकि अशोक गहलोत को केंद्र में लाया जाएगा। भूपेश बघेल को अब केंद्र में ही स्थापित करने की तैयारी है।

चर्च में शादी नहीं कर सकते समलैंगिक, पर अब पादरी दे सकेंगे आशीष: पोप फ्रांसिस का फैसला, कभी वेटिकन ने बताया था पाप

एलजीबीटीक्यू समुदाय को लेकर वेटिकन ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पोप फ्रांसिस ने समलैंगिक जोड़ों को आशीष देने की इजाजत पादरियों को दे दी है। हालाँकि इस तरह की शादी अब भी चर्च में नहीं होंगी। इससे पहले 2021 में वेटिकन इस तरह के संबंधों को ‘पाप’ बताया था।

पोप फ्रांसिस ने नए फैसले में कहा है कि भगवान से प्यार और दया की आस रखने वालों को नैतिकता के पैमाने पर नहीं आँकना चाहिए। यह वेटिकन के दो साल पुराने फैसले के ठीक उलट है। तब कहा गया था कि समलैंगिक जोड़ों को आशीष नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि भगवान ‘पाप’ को आशीष नहीं देते। अब पोप फ्रांसिस ने कहा कि समलैंगिक जोड़ों को कुछ शर्तों के साथ आशीष दिया जा सकता है। इसके तहत ऐसे लोग को आशीष तब ही मिलेगा जब वे चर्च में शादी के मकसद से न आएँ।

इन शर्तों के तहत समलैंगिक जोड़ों को आशीष मजहबी तरीकों के तहत नहीं दिया जाएगा। किसी भी तरह से इसे विवाह समारोह का रूप नहीं दिया जाएगा। साथ ही विवाह कराने वाले वाली पादरियों की पारंपरिक पोशाक वेस्टमेंट में नहीं होंगे। पादरियों को इस तरह की भाषा और भंगिमाओं का इस्तेमाल भी नहीं कर सकेंगे जिससे लगे कि वे शादी करवा रहे हैं। इसके अलावा समलैंगिक जोड़ों को आशीष देते वक्त जो प्रार्थना और शब्द बोले जाएँ वो कहीं लिखे नहीं जाएँगे।

पोप फ्रांसिस ने सोमवार (18 दिसंबर 2023) को यह अनुमति दी। उनके फैसले से जुड़ा दस्तावेज वेटिकन डॉक्ट्रिन ऑफिस (Doctrine Office) ने जारी किया है। बताते चलें की पोप फ्रांसिस ने दो कंजर्रवेटिव कार्डिनलों को इस बारे में विस्तार से बताते हुए एक पत्र लिखा था।

ये पत्र अक्टूबर में पब्लिश हुआ था। इसमें पोप फ्रांसिस ने सुझाव दिया कि कुछ हालातों में ऐसे आशीष दिए जा सकते हैं, लेकिन ये शादी के मजहबी तरीकों की तरह नहीं दिए जाने चाहिए। इन आशीषों को समलैंगिकों के शादी संस्कार समझने का भ्रम नहीं पालना चाहिए।

यही वजह रही कि पोप फ्रांसिस की तरफ से जारी किए गए नए दस्तावेज में समलैंगिक विवाह और एक पुरुष तथा महिला के बीच होने वाली शादी में अंतर साफ कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि विवाह एक पुरुष और महिला के बीच ताउम्र के लिए होने वाला मजहबी संस्कार है जो कभी टूट नहीं सकता है। यही वजह है कि समलैंगिक को दिया जाने वाला आशीष एक महिला या पुरुष के शादी की तरह नहीं लिया जा सकता है। लेकिन ऐसे जोड़ों को आशीष दिया जा सकता है, क्योंकि भगवान की प्रेम और दया पाने के लिए उनका आशीष पाने का सबको हक है।

इससे साफ है कि पोप फ्रांसिस ने समलैंगिक विवाह को सशर्त मंजूरी दी है। ये लोग विवाह तो कर सकते हैं, लेकिन चर्च में धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत इनका विवाह नहीं हो सकता है। चर्च में पादरी इन जोड़ों को केवल आशीष दे सकते हैं। उनका विवाह नहीं करा सकते।

ये पहली बार नहीं है जब पोप फ्रांसिस ने इस तरह का फैसला लिया है। इससे पहले वो महिलाओं को चर्च में अहम भूमिकाएँ सौंपने जैसे फैसले भी ले चुके हैं। उनकी पहल से ही वेटिकन सिटी में उच्च पदों पर महिलाओं की नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है।

कंगना रनौत लड़ेंगी 2024 का चुनाव? अभिनेत्री के पिता बोले- वह लोकसभा के लिए तैयार, सीट का फैसला BJP को करना है

अभिनेत्री कंगना रनौत के लोकसभा चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें लम्बे समय से लग रही हैं। अब उनके पिता ने भी स्पष्ट किया है कि वह अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। हालाँकि वह कहाँ से लड़ेंगी यह स्पष्ट नहीं है। उनके पिता का कहना है कि पार्टी (भाजपा) तय करेगी उनको कहाँ से चुनाव लड़ाना है।

कंगना के पिता अमरदीप रनौत ने मीडिया से बताया है कि अभिनेत्री कंगना 2024 का लोकसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ेंगी। कंगना के पिता का बयान कंगना की भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात के बाद आया है। कंगना 17 दिसम्बर, 2023 को भाजपा अध्यक्ष से कुल्लू स्थित आवास में मिली थीं।

कंगना ने हाल ही में गुजरात के द्वारका में मीडिया से बातचीत में कहा था कि वह लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा था कि भगवान की कृपा रही तो वह चुनाव जरूर लड़ेंगी। हालाँकि, अभी कंगना भाजपा या अन्य किसी पार्टी की आधिकारिक सदस्य नहीं हैं।

कंगना मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के गाँव की रहने वाली हैं। उनके हिमाचल प्रदेश से ही चुनाव लड़ने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। वह जिस मंडी जिले से सम्बन्ध रखती हैं वह राज्य के प्रभावशाली स्वर्गीय वीरभद्र सिंह परिवार का गढ़ है।

मंडी लोकसभा सीट से स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद हैं। वह 2021 के लोकसभा उपचुनाव में सांसद बनी थीं। यह सीट भाजपा सांसद रामस्वरूप शर्मा के निधन के बाद खाली हुई थी। यहाँ से भाजपा ने उपचुनाव में ब्रिगेडियर खुशाल सिंह को टिकट दिया था लेकिन वह हार गए थे।

कंगना रनौत लम्बे समय से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रशंसा करती आई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काम की भी कई बार प्रशंसा की है। वह 12 दिसम्बर, 2023 को हिमाचल के बिलासपुर में आयोजित किए गए आरएसएस के कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा कि संघ की ओर से तैयार लोगों ने जब देश की सत्ता को संभाला तो जो काम 70 साल में नहीं हुए, वह मात्र 8 से 10 साल में हो गए। 

दरभंगा के श्यामा माई मंदिर में बलि प्रदान करने पर लगी रोक हटी, पर प्रशासन ने बदल दी ‘प्रथा’: श्रद्धालु बोले- पुरानी व्यवस्था से कम कुछ स्वीकार नहीं

हाल ही में ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ ने दरभंगा में स्थित श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। तर्क दिया गया कि शाक्त एवं शैव परंपरा में पशु बलि की अनुमति रही है और बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार इस तरह के फैसले हिन्दुओं पर थोक पर धर्म में हस्तक्षेप कर रही है। अब खबर आई है कि बिहार सरकार ने विरोध के आगे झुकते हुए अपने इस फैसले को वापस ले लिया है।

बता दें कि ये मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर स्थित है। रामेश्वर सिंह साधक भी थे, इसीलिए उनकी चिता पर माँ काली का ये मंदिर बना। यही कारण है कि इसे रामेश्वरी माई मंदिर भी कहा गया। उनके बेटे कामेश्वर सिंह ने सन् 1933 में इसका निर्माण करवाया था। मंदिर के गर्भगृह की बात करें तो माँ काली की प्रतिमा के दाहिनी ओर महाकाल और और बाईं ओर गणपति एवं बटुकभैरव स्थापित हैं। मीडिया में कहा था रहा है कि श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर रोक वाले अपने फैसले को वापस ले लिया है।

अब प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के कहा है कि जिसकी जैसी श्रद्धा है वो वैसे करें, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। ‘दरभंगा न्यास बोर्ड’ का कहना है कि इसमें बलि प्रथा के समर्थकों या विरोधियों दोनों को ठेस नहीं पहुँचेगा। न्यास समिति ने बलि प्रथा का न समर्थन और न विरोध किए जाने की बात कही है। न कोई शुल्क लिया जाएगा, न सहयोग के लिए मंदिर की तरफ से किसी को उपलब्ध कराया जाएगा। बता दें कि श्यामा माई मंदिर में मनोकामना पूर्ति के बाद पशु बलि की परंपरा रही है।

बिहार सरकार के नए स्पष्टीकरण से श्रद्धालु खुश नहीं

हालाँकि, श्रद्धालु इससे खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इस मामले में श्यामा माई की मंदिर प्रबंधन समिति और ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद’ दोनों ने सही तरीके से काम नहीं किया। ऑपइंडिया ने इस संबंध में उनलोगों से बातचीत की, जो इस प्रदर्शन में शामिल हैं। ‘मिथिला सांस्कृतिक संरक्षण समिति’ के बैनर तले ये विरोध प्रदर्शन चल रहा है। अब दरभंगा के डीएम ने इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। प्रदर्शनकारी समिति का कहना है कि एक तरह से श्रद्धालुओं पर अलग नियम-कानून सौंपे जा रहे हैं।

समिति ने कहा कि बिहार सरकार के पास कोई अधिकार नहीं है कि वो किसी मंदिर की पूजा पद्धति को बदल दे। साथ ही न्यास बोर्ड पर जिलाधिकारी को लिखे पत्र में By-Laws को छिपाने का आरोप भी लगाया। समिति का कहना है कि तकनीकी रूप से और चतुराई से इस पूरे प्रकरण को खेला गया है। न्यास बोर्ड के अध्यक्ष का कहना है कि मंदिर प्रबंधन ने उन्हें पत्र भेजा कि बलि प्रदान करने के लिए एक पद सृजित किया जाए, यानी एक व्यक्ति की नियुक्ति की जाए।

न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ने इसके जवाब में लिखा कि वो ऐसा कोई पद सृजित नहीं कर सकते। इसके लिए पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला दिया गया। जबकि समिति का आरोप है कि ‘बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड’ ने जब मंदिरों के अधिग्रहण की नीतियाँ बनाईं तो शैव एवं शाक्त मंदिरों के मापदंड नहीं देखे गए। समिति ने कहा कि By-Laws में शैव-शाक्त मंदिरों की ज़रूरतों को नहीं देखा गया। कहा गया कि By-Laws में बलि का जिक्र ही नहीं है और ये पशु क्रूरता अपराध में आता है।

न्यास बोर्ड का कहना है कि बलि प्रदान का कहीं जिक्र ही नहीं किया गया है, बल्कि जीव हत्या पर बात की गई है। इस संबंध में प्रदर्शनकारी श्रद्धालुओं का कहना है कि जीव हत्या और बलि प्रथा अलग-अलग चीज है। इसे समझाने के लिए उदाहरण दिया गया कि संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत सिखों को कृपाण रखने की अनुमति है, अघोरी एवं दिगंबर जैन नग्न रह सकते हैं। न तो सिखों पर हथियारों के प्रदर्शन की धारा लगाई जाती है, न अघोरियों और दिगंबरों पर अश्लीलता फैलाने की।

बलि प्रथा का मतलब समझाते हुए श्रद्धालु कहते हैं कि इसके तहत पशु को पहले मंत्रित किया जाता है, फिर एक विशेष शस्त्र से बलि की प्रक्रिया पूरी की जाती है। लोकाचार का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि इसे मांस नहीं बल्कि ‘महाप्रसाद’ कहा जाता है। जबकि श्यामा माई मंदिर प्रबंधन समिति के 12 में से 9 लोग ‘महाप्रसाद’ नहीं खाते हैं – ऐसा भी आरोप है। बिहार सरकार के फैसले के विरोध में कहा जा रहा है कि हिन्दू धर्म में अलग-अलग पंथ हैं और सबके अलग-अलग नियम-कानून हैं।

पुरानी व्यवस्था बहाल हो: मिथिला संस्कृति संरक्षण समिति

‘मिथिला संस्कृति संरक्षण समिति’ का कहना है कि जब तक एक पूरे समाज पर बात न आए, सरकार का कोई अधिकार नहीं है मंदिरों की पूजा पद्धतियों में हस्तक्षेप करने का। समिति का कहना है कि पुजारी रो रहे हैं, मंदिर प्रबंधन समिति भी अपनी चला रहा है। साथ ही मंदिर की जमीन व्यवसाय को देने के आरोप लगे हैं – वहाँ फूल बेचने और और होटल व विवाह भवन चलाने के अलावा बोटिंग क्लब तक चलाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी तक को इन सबके लिए भरोसे में नहीं लिया गया।

श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा अब कहा जा रहा है कि अपने अस्त्र-शस्त्र खुद लाकर बलि दीजिए, कोई आपत्ति नहीं है। जबकि श्रद्धालु इस ज़िद पर अड़े हैं कि पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए। श्रद्धालु कह रहे हैं कि ये मंदिर प्रबंधन का काम है कि वो बलि प्रथा की प्रक्रिया को पूरा कराए। जब सब कुछ भक्त ही करेंगे तो मंदिर प्रबंधन किसलिए है? साथ ही मंदिर की प्रबंधन समिति में शाक्त संप्रदाय के लोगों को न रखे जाने के आरोप हैं।

बिहार सरकार के स्पष्टीकरण को भी प्रदर्शनकारियों ने नकार दिया है – इसमें कहा गया है कि आप मंदिर में बलि प्रदान कीजिए और किसी को कोई आपत्ति नहीं है। क्योंकि वो पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने पर अड़े हैं। बलि प्रथा के लिए जिस फरसे का इस्तेमाल किया जाता था, आरोप है कि उसे भी फेंक दिया गया। शस्त्र को फिर से स्थापित करने की माँग हो रही है। पुरानी व्यवस्था में 500 रुपए की फीस थी, बलि देने वाला व्यक्ति मंदिर की तरफ से उपलब्ध कराया जाता है, पंडित मन्त्र पढ़ते थे और बलि को मंदिर के पुजारी माँ को अर्पित करते थे।

इसमें बलि का मुंड मंदिर के पास रह जाता था और धड़ को ‘महाप्रसाद’ के रूप में श्रद्धालु ले जाते थे। इस व्यवस्था में किसी प्रकार के बदलाव के पक्ष में श्रद्धालु नहीं हैं। हालाँकि, अब पशु क्रूरता अधिनियम लगाने जैसी कोई धमकी नहीं दी गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मामले में आवाज़ उठाई थी और कहा था कि बकरीद को लेकर सबका मुँह बंद हो जाता है। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम समाज में एकता है, इसीलिए उनके मजहब में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाता।

संसद के बाहर TMC सांसद ने उपराष्ट्रपति का बनाया मजाक, राहुल गाँधी बना रहे थे वीडियो, दाँत चियार रहा था विपक्ष: अब तक 141 MP सस्पेंड

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ का मजाक उड़ाया है। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी उनका वीडियो बनाते रहे जबकि अन्य विपक्षी सांसद इस कारनामे पर हँसते रहे। कल्याण बनर्जी की इस करतूत का वीडियो अब वायरल है।

वीडियो में दिखता है कि कल्याण बनर्जी जगदीप धनखड़ की राज्यसभा में बातचीत करने की शैली और उनके लहजे की नक़ल करते हुए उनका मजाक उड़ा रहे हैं। इस दौरान कल्याण बनर्जी बहुत भद्दे इशारे करते हैं। कल्याण इस वीडियो में जगदीप धनखड़ द्वारा सदन के अंदर कही जाने वाली बातों की नक़ल करते है। वहीं निलंबित सांसद इस पर ठहाके मारते हैं।

इन सबके साथ लोकसभा सांसद राहुल गाँधी खड़े थे। राहुल गाँधी कल्याण बनर्जी का वीडियो बना रहे थे। राहुल गाँधी और अन्य विपक्षी सांसद कल्याण बनर्जी से जगदीप धनखड़ द्वारा कही जाने वाली बातों में से कई की कॉपी करने को भी कह रहे थे। कल्याण बनर्जी इस वीडियो में कहते हुए सुने जा सकते हैं, “मेरी रीढ़ कितनी लम्बी है, मैं कितना लंबा हूँ।”

राहुल गाँधी के अलावा यहाँ राजद सांसद मनोज झा, द्रमुक सांसद ए राजा, कॉन्ग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, दीपेंदर हुड्डा और अन्य कई सांसद मौजूद थे। यह सभी कल्याण बनर्जी की हरकत पर हँस रहे थे। इनमें से किसी ने भी यहाँ कल्याण बनर्जी को रोकने की कोशिश नहीं की।

कल्याण का यह वीडियो नई संसद के मकर द्वार का है। मकर द्वार पर विपक्ष के सांसद बैठ कर हंगामा कर रहे थे। वह यहाँ धरना देने आए थे।

राज्यसभा में 23 दिसम्बर, 2023 को विपक्ष के सांसद हंगामा मचा रहे थे जिसके कारण उपसभापति ने 49 सांसदों को राज्यसभा की इस सत्र की कार्रवाई से निलंबित कर दिया। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी कल्याण बनर्जी की इस हरकत का संज्ञान लिया है।

उन्होंने कल्याण बनर्जी और राहुल गाँधी के इस बर्ताव पर कहा, “मैंने कुछ देर पहले एक टीवी चैनल पर देखा है, गिरावट की कोई हद नहीं है, गिरावट की कोई हद नहीं है।”

उपराष्ट्रप्ति धनखड़ ने कहा, “आपके एक बड़े नेता एक सांसद के असंसदीय व्यवहार को वीडियो कर रहे थे। आपसे भी बहुत बड़े नेता है। मैं तो यही कह सकता हूँ कि सद्बुद्धि आए। कुछ तो सीमा होती होगी। कुछ जगह तो बख्शो। कुछ जगह तो बख्शो।” इस पर वहाँ बैठे अन्य सांसद कहते हैं कि ऐसे लोगों को सद्बुद्धि कभी नहीं आएगी।

उप राष्ट्रपति ने राहुल गाँधी कि हरकत को शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया।

इससे पहले सोमवार (18 दिसंबर 2023) को 78 सांसदों को हंगामा करने के कारण सस्पेंड किया गया था। लोकसभा के 33 और राज्यसभा के 45 सांसदों पर कार्रवाई हुई थी। इस तरह से संसद के शीतकालीन सत्र में सस्पेंड होने वाले सांसदों की संख्या बढ़कर 141 हो गई है। आज की कार्रवाई से पहले भी 92 सांसद सस्पेंड हुए थे।