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प्रेम में असफल पुरुष करे आत्महत्या तो महिला नहीं होगी जिम्मेदार: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की दो टूक, सुसाइड नोट छोड़ मरा था युवक

प्रेम संबंध नाकाम रहने पर यदि कोई आत्महत्या करता है तो इसके लिए उसकी प्रेमिका को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 7 दिसंबर 2023 को दिए गए एक फैसले में यह टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने इस मामले में 24 साल की महिला और उसके भाई के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का दर्ज केस रद्द कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू की अदालत में हुई। मामला राजनांदगाँव का है। 23 जनवरी 2023 को एक युवक ने अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। तलाशी के दौरान मृतक के पास से एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें युवक ने लिखा था कि उसका लगभग 8 वर्ष से एक लड़की से प्रेम संबंध था। लेकिन लड़की ने उससे अपने रिश्ते तोड़ कर किसी और लड़के से शादी कर ली।

सुसाइड नोट में युवक ने लिखा था कि उसकी प्रेमिका ने यह कदम अपने भाइयों के कहने पर उठाया। लड़की के 2 भाइयों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपनी बहन पर प्रेमी से संबंध खत्म करने का दबाव बनाया था। इन सभी पर मृतक से पैसे लेने और उसे न लौटाने का भी आरोप था। राजनांदगाँव पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 306 और 34 के तहत केस दर्ज किया था। तीनों आरोपितों को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। 13 अक्टूबर 2023 को जिला अदालत ने लड़की और उसके 2 भाइयों के खिलाफ आरोप तय किए थे।

निचली अदालत में आरोप तय होने के बाद आरोपितों ने इस मामले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू ने कहा कि तीनों आरोपितों के खिलाफ केस चलाने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि जुबानी व सुनी-सुनाई बातें आरोपितों के खिलाफ केस चलाने का पर्याप्त आधार नहीं मानी जा सकती है।

अभियोजन पक्ष ने हाई कोर्ट को बताया कि आरोपितों द्वारा मृतक को गलत केस में फँसाये जाने और गंभीर परिणाम भुगतने जैसी धमकियाँ दी गई थी। हालाँकि जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू ने कहा कि किसी भी धमकी की गंभीरता इतनी नहीं प्रतीत हो रही कि उसके चलते किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़े।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, “यदि कोई प्रेम में असफल या परीक्षा खराब होने पर सुसाइड करता है तो इसके लिए महिला या परीक्षक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसी तरह केस खारिज होने पर कोई आत्महत्या कर ले तो वकील को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति के गलत फैसले को किसी अन्य व्यक्ति को उसे उकसाने का जिम्मेदार कहकर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।”

बाल नोचे, जूते बरसाए, दनादन दिए मुक्के… लोकसभा में घुसे युवक को 11 सांसदों ने मिल कर कूटा, बाहर साथियों ने लगाए ‘जय भीम’ के नारे

संसद भवन में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को लोकसभा सदन में 2 लोग गैलरी से कूद गए। उन्होंने अपने हाथ में रंग-बिरंगे धुएँ छोड़ने वाला कनस्तर रखा हुआ था। इस दौरान पूरे सदन में धुआँ फैल गया। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सदन में कूदे युवक की कई सांसद मिल कर धुनाई कर रहे हैं। सांसदों ने उसे पकड़ लिया और फिर उसकी जम कर पिटाई की। किसी ने बाल नोचे तो, किसी ने मुक्के मारे तो किसी ने जूते बरसाए।

इस दौरान ‘राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक पार्टी’ के हनुमान बेनीवाल और बसपा के मलूक नागर इस दौरान आगे नज़र आए। एक अन्य सांसद को इस दौरान हमलावर के हाथ से कनस्तर का दबा छीनते हुए भी देखा गया। 11 सांसदों ने मिल कर उक्त हमलावर को पीटा। कुछ तो बेंच पर ही खड़े हो गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोपहर के 4 बजे सर्वदलीय बैठक भी की है। विजिटर गैलरी पास पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में खासा वायरल हो रहा है।

इस मामले में 4 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 2 अंदर घुसे थे और 2 बाहर नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शनकारी ‘मणिपुर को इंसाफ दो’ के साथ-साथ ‘जय भीम’ का नारा भी लगा रहे थे। उन्होंने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘संविधान बचाओ’, ‘महिलाओं पर अत्याचार नहीं चलेगा’, ‘भारत माता की जय’, ‘तानाशाही बंद करो’ और ‘जय भीम, जय भारत’ के अलावा ‘वन्दे मातरम्’ के नारे भी लगाए। अंदर घुसे प्रदर्शनकारी कह रहे थे – ‘काला कानून नहीं चलेगा, गुंडागर्दी नहीं चलेगी’।

सदन में घुसे प्रदर्शनकारियों में से एक तो अध्यक्ष की कुर्सी की तरफ बढ़ने लगा था। उसने नीले रंग की जैकेट पहन रखी थी। इस दौरान उसे जूते खोलने की कोशिश करते हुए भी देखा गया। इस दौरान पीले रंग का धुआँ सदन में फैल गया। प्रदर्शनकारी ‘काला कानून वापस लो’ भी कह रहे थे। उनका दावा था कि वो किसी संगठन से नहीं जुड़े हैं, हम छात्र हैं। ये घटना दोपहर के 1 बजे हुई। जैसे ही लोकसभा का पूरा व्यू टेलीकास्ट में आने लगा, ये लोग कूद गए।

जिनकी दादी इंदिरा से लड़ी, जिनके पुरखे भगवान राम के वंशज, जो खुद दो महाराजा की माँ… राजस्थान में अबकी जला वही ​दीया

शेक्सपीयर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है। पर राजनीति में एक नाम कई संदेश दे जाती है। खासकर यदि आपका नाम दीया कुमारी हो। बीजेपी ने बस एक इसी नाम से आधी आबादी के साथ-साथ राजपूत वोटरों को भी साधने का काम कर लिया है।

15 दिसंबर 2023 को शपथ लेने जा रहीं दीया राजस्थान की पहली महिला उप मुख्यमंत्री होंगी। जयपुर की विद्याधर नगर सीट से विधायक चुनी गईं दीया कुमारी का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में भी था। वे राजस्थान की राजसमंद सीट से सांसद भी रह चुकी हैं।

दीया कुमारी का परिवार स्वतंत्र भारत के सबसे चर्चित राजपरिवारों में से एक हैं। वे उन्हीं गायत्री देवी की पोती हैं, जिन्होंने इंदिरा गाँधी से लोहा लिया था। इमरजेंसी में उन्हें जेल में रहना पड़ा था। उनके किले में भी इंदिरा ने सेना भेज दी थी।

दीया कुमारी के पुरखे भगवान राम के वंशज थे। जब रामजन्मभूमि केस पर सुनवाई के दौरान 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भगवान राम के वंशजों के बारे में पूछा था तो दीया कुमारी ने बताया था कि उनका परिवार भगवान राम के पुत्र कुश से संबद्ध है। उन्होंने बताया था कि जयपुर के पूर्व राजा और उनके पिता महाराजा भवानी सिंह कुश की 307वीं पीढ़ी के थे।

इसका सबूत पेश करते हुए उन्होंने एक पत्रावली भी दिखाई थी। इसमें भगवान राम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रम से लिखा हुआ है। इसी पत्रावली में 209वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में दीया के पिता महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ था।

महावीर चक्र विजेता की बेटी, राजघराने के बाहर शादी

52 वर्ष की दीया कुमारी का संबंध जयपुर राजघराने से है। उनका राजघराना कच्छवाहा राजपूतों का है। दीया कुमारी जयपुर के महाराजा ब्रिगेडियर भवानी सिंह और महारानी पद्मिनी देवी की संतान हैं। उनके पिता ब्रिगेडियर भवानी सिंह महावीर चक्र से वर्ष 1971 में सम्मानित किए गए थे। वे ब्रूनेई में भारत के राजदूत भी रहे थे।

दीया कुमारी (सबसे दाएँ), उनकी माँ महारानी पद्मिनी देवी, उनके छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह, राजकुमारी गौरवी देवी और पद्मनाभ सिंह
दीया कुमारी (सबसे दाएँ), उनकी माँ महारानी पद्मिनी देवी, उनके छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह, राजकुमारी गौरवी देवी और पद्मनाभ सिंह

दीया कुमारी की पढ़ाई जयपुर, दिल्ली और लंदन में हुई है। उन्होंने अपनी मर्जी से राजपरिवार से बाहर के नरेन्द्र सिंह से प्रेम विवाह किया था। यह प्रेम विवाह उन्हें पहले आर्य समाज और फिर कोर्ट में करना पड़ा था, क्योंकि इसके लिए नरेन्द्र और दीया, दोनों के ही माता-पिता राजी नहीं थे।

नरेन्द्र सिंह और दीया कुमारी (चित्र साभार: NEWS18)
नरेन्द्र सिंह और दीया कुमारी (चित्र साभार: NEWS18)

उनके और नरेन्द्र सिंह के परिवार का गोत्र एक होने के कारण काफी बवाल हुआ था और ब्रिगेडियर भवानी सिंह को राजपूत महासभा के अध्यक्ष पद को छोड़ना पड़ा था। हालाँकि, उनका और नरेन्द्र सिंह का अब तलाक हो चुका है।

दो महाराजा की माँ

दीया कुमारी के तीन संतान हैं। पद्मनाभ सिंह और लक्ष्यराज सिंह उनके बेटे हैं, जबकि राजकुमारी गौरवी कुमारी उनकी बेटी हैं। उनके बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह जयपुर के वर्तमान महाराजा हैं, जबकि दूसरे छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह सिरमौर के महाराजा हैं।

पद्मनाभ सिंह 2011 सवाई भवानी सिंह की मृत्यु के बाद जयपुर के महाराजा बनाए गए थे। उनके छोटे बेटे लक्ष्यराज सिंह को सिरमौर का महाराजा 2013 में बनाया गया था। दरअसल, लक्ष्यराज की नानी पद्मिनी देवी सिरमौर से सम्बन्ध रखती हैं।

बड़े अंतर से चुनाव जीतती रहीं हैं दीया कुमारी

दीया कुमारी का परिवार पहले से ही राजनीति से जुड़ा रहा रहा है। उनकी दादी गायत्री देवी जयपुर से कई बार सांसद रहीं। दीया कुमारी की राजनीति में एंट्री वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों के समय हुई थी। तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और वसुंधरा राजे की उपस्थिति में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की थी।

उन्हें पहली बार 2013 के विधानसभा चुनावों में सवाई माधोपुर सीट से टिकट दिया गया था। यहाँ उन्होंने कॉन्ग्रेस के दानिश अबरार को हराया था। इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने राजनीति से दूरी बनाई। पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें राजसमन्द सीट से टिकट दिया था।

यहाँ उन्होंने कॉन्ग्रेस के देवकीनंदन काका को 5.51 लाख वोटों के अंतर से हराया था। उन्हें डाले गए कुल वोटों का 70% वोट मिले थे। 2023 के विधानसभा चुनावों में केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें जयपुर की विद्याधरनगर सीट से चुनावों में उतारा था। यहाँ उन्होंने 1.58 लाख वोटों के अंतर से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सीताराम अग्रवाल को हराया है।

दीया कुमारी को सड़क पर उतर कर राजनीति करने वाले नेताओं में गिना जाता है। जयपुर की जनता उन्हें काफी पसंद करती है।

संसद में फेंका गया जो रंगीन धुएँ वाला कनस्तर उसे दिखाने के लिए लड़ बैठे पत्रकार, सबूत पुलिस को देने की बजाय बना दिया तमाशा: लोगों को याद आई राजदीप की ‘गिद्ध पत्रकारिता’

संसद भवन के लोकसभा सदन में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को 2 लोग घुस गए, जिनके हाथों में धुआँ छोड़ने वाला उपकरण था। इस दौरान सांसदों ने उन्हें पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। एक संदिग्ध के जूते में आँसू गैस के कनस्तर पाए गए हैं। वहीं ट्रांसपोर्ट भवन के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे एक पुरुष और एक महिला को भी हिरासत में लिया गया है। 2001 के संसद भवन के हमले की 22वीं बरसी के दिन ये घटना हुई है।

संसद भवन में पत्रकारों की लड़ाई

वहीं इस घटना के बाद रंग-बिरंगे धुएँ वाले उस छोटे से कनस्तर को दिखाने के लिए मीडिया वाले आपस में भिड़ गए, जिसे लेकर हमलावर आए थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि ‘TV9 भारतवर्ष’ के पत्रकार अपने चैनल के लिए इस घटना की जानकारी देते रहते हैं, तभी अचानक एक अन्य पत्रकार आकर उनकी माइक पकड़ कर उन्हें हटाने लगता है। साथ ही वो बार-बार ‘बहुत दिखा लिए’ भी कह रहा होता है। इस प्रकरण के दौरान फ्रेम में ‘न्यूज़ 18’ की पल्लवी घोष भी दिखाई देती हैं। ‘TV9 भारतवर्ष’ के पत्रकार को हटाने के लिए अन्य पत्रकार भी एकजुट हो जाते हैं।

इसके बाद उन पत्रकारों की आपस में धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है। उक्त पत्रकार बार-बार कवरेज फिर से शुरू करने की कोशिश करता है, लेकिन उसे फिर से रोका जाता है। फिर वो स्मोक बम दिखाता है। अंत में वो हाँफते-हाँफते अपनी कवरेज पूरी करता है। अंत में फिर से पल्लवी घोष उसे रोकने की कोशिश करती हैं। ये वीडियो ‘TV9 भारतवर्ष’ पर लाइव चल रहा था। अंत में एंकर ने किसी तरह से इस मामले को सँभाला टीवी स्क्रीन पर अन्य जगह के वीडियो भी दिखने लगे।

इस घटना का एक अन्य वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ लोग अपने फोन से पत्रकारों की इस लड़ाई का वीडियो बना रहे हैं और साथ ही हँस भी रहे होते हैं। इसमें भी देखा जा सकता है कि एक पत्रकार दूसरे पत्रकार की कवरेज के बीच में आकर व्यवधान पैदा कर रहा है। साथ ही वो पीले रंग के एक स्मोक बम को हाथ में लेने के लिए भी आपस में लड़ते हैं। लोग ‘एक्सक्लूसिव’ के लिए पत्रकारों के इस लड़ाई-झगड़े की सोशल मीडिया पर आलोचना कर रहे हैं।

बता दें कि पत्रकारों की ये लड़ाई एक ‘सबूत’ को दिखाने के चक्कर में हुई, स्मोक बम। उस छोटे से स्मोक बम के लिए ये लड़ बैठे। ‘ब्रेकिंग’, ‘एक्सक्लूसिव’ और ‘सबसे पहले’ के चक्कर में इन पत्रकारों ने पत्रकारिता का बड़ा गर्क कर दिया। सबूत तो पुलिस व जाँच एजेंसियों के पास होने चाहिए थे, इसके लिए पत्रकार क्यों लड़ रहे भला? पत्रकारिता अब इतनी गिर गई है कि किसी घटना के बाद सबूत हाथ में लेकर दिखाने के लिए कैमरे के सामने ही लड़ाई हो रही है।

राजदीप सरदेसाई की ‘गिद्ध पत्रकारिता’

क्या यही वो ‘गिद्ध पत्रकारिता’ है, जिसका उदाहरण राजदीप सरदेसाई ने कभी पेश किया था? संयोग देखिए कि वो 2001 में 13 दिसंबर की ही तारीख़ थी। उस दिन संसद भवन पर आतंकियों ने हमला बोल दिया था। राजदीप सरदेसाई ने उस दौरान का एक वाकया शेयर किया था। इसमें संसद भवन के सुरक्षाकर्मी, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग वीरगति को प्राप्त हो गए थे। संसद पर हमले को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था और इस हमले का मास्टरमाइंड था अफजल गुरु।

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने संसद पर हुए हमले को ‘अ ग्रेट डे (एक महान दिन)’ कहा था। सरदेसाई ने देश की संसद पर हुए हमले पर बात करते हुए कहा था कि कैसे वह संसद के बगीचे में पिकनिक मना रहे थे, जब आतंकी पार्लियामेंट पर हमला कर रहे थे। उन्हें कहते हुए सुना गया था कि पत्रकार गिद्धों की तरह व्यवहार करते हैं। सरदेसाई दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले को याद करते हुए बता रहे थे कि वह अपनी टीम के साथ पिकनिक की तैयारी कर रहे थे।

वह और उनकी टीम सुबह करीब 11 बजे संसद में दाखिल हुई। टीम के संसद में प्रवेश करने के कुछ ही मिनटों के भीतर उन्होंने गोलियों की आवाज सुनी। उन्होंने अपने सहयोगी से कहा कि वह गार्ड को गेट बंद करने के लिए कहे। फिर सरदेसाई एक लंबी मुस्कराहट के साथ बताते हैं कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि कोई अन्य चैनल क्रू प्रवेश न कर सके। उन दिनों कम चैनल थे और सरदेसाई एक्सक्लुसिव स्टोरी मिलने को लेकर उत्साहित थे।

हालाँकि, ताज़ा मामले में पुलिस पर भी सवाल उठते हैं कि उसने आखिर मीडिया से सबूत क्यों नहीं लिया? किसी मीडिया वाले के हाथ सबूत लग गया और वो उसे लेकर कैमरे के सामने दिखाने लगा, ये तो सबूतों के साथ छेड़खानी हुई? पुलिस को तो पत्रकारों से वो सबूत ले लेना चाहिए था। फिंगर प्रिंट्स से लेकर तमाम चीजें कोर्ट केस के दौरान काम आती हैं। इसीलिए, यहाँ मीडिया वाले तो मजाक के पात्र बने ही लेकिन पुलिस ने भी सबूत उनसे लेने के लिए कुछ नहीं किया।

अशरफ मंसूरी ने ‘आशू’ बन हिन्दू लड़की को फाँसा, कार में ही किया बलात्कार: अब्बा-भाई ने भी की अश्लील हरकतें, धक्के देकर घर से निकाला

मध्य प्रदेश के इंदौर से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ ‘हेलो’ एप से एक हिन्दू लड़की को अपने जाल में फँसा कर रेप किया गया है। आरोपित का नाम अशरफ मंसूरी है जिसके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। अशरफ ने पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का भी दबाव बनाया। फिलहाल फरार चल रहे अशरफ के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। मामले की शिकायत मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला इंदौर के बिजलपुर का है। यहाँ के रहने वाले अशरफ मंसूरी ने ‘हेलो’ ऐप के जरिए साल 2018 में एक हिन्दू लड़की से दोस्ती की थी। शुरुआती बातचीत में अशरफ ने खुद को हिन्दू और अपना नाम आशु बताया था। दोनों के बीच लगभग 1 माह तक चैटिंग हुई। 1 माह बाद अशरफ ने पीड़िता से मिलने की इच्छा जताई। पीड़िता ने भी हामी भर दी। दोनों की मुलाकात खजराना बाईपास पर हुई जहाँ अशरफ अपनी कार से आया था। यहाँ अशरफ ने कार में ही पीड़िता से रेप किया।

जब पीड़िता ने आशु बने अशरफ की इस हरकत का विरोध किया उसने शादी करने का वादा किया। लगभग 8 माह बाद पीड़िता को आशु के मुस्लिम होने की जानकारी हुई तो वह दूरी बनाने लगी। आरोप है कि तब अशरफ ने हाथ की नस काट कर छत से कूदने और आत्महत्या की धमकी देते हुए पीड़िता को अपने पास बुलाया। यहाँ से वो लड़की को नवलखा इलाके में अपनी परिचित किसी अन्य महिला के घर ले गया। अशरफ आत्महत्या करने की धमकी दे कर पीड़िता को ब्लैकमेल करता रहा और उसके साथ रेप करता रहा।

पीड़िता ने बताया कि पिछले 4 माह से अशरफ उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बना रहा था। 8 दिसंबर, 2023 को पीड़िता अशरफ के घर उसकी करतूतों की शिकायत करने पहुँची। आरोप है कि यहाँ अशरफ के अब्बा उस्मान और भाई बुरक़ान ने पीड़िता के साथ अश्लील हरकतें की। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसे 25-25 हजार रुपयों का लालच दे कर मुँह बंद रखने को कहा गया। पैसे लेने से मना करने पर पीड़िता को उस्मान और बुरक़ान ने धक्के मार कर घर से बाहर कर दिया।

आखिरकार पीड़िता ने हिन्दू संगठन के सदस्यों से मदद माँगी। मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को हिन्दू संगठन पीड़िता के साथ थाने पहुँचे और अशरफ मंसूरी पर कड़ी कार्रवाई की माँग करने लगे। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर अशरफ के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, दुष्कर्म, एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR दर्ज कर लिया है। केस दर्ज होते ही पुलिस ने अशरफ के घर दबिश दी लेकिन वो फरार हो गया। थाना प्रभारी शैलेन्द्र सिंह राठौर ने आरोपित को जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है।

क्या कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू ने जमीन में भी गाड़ रखा है खजाना, रिपोर्ट में दावा- राँची के घर की खुदाई की तैयारी: जानिए बरामद पैसों का क्या होगा

कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू से जुड़े ठिकानों से कैश और गोल्ड का जखीरा मिलने के बाद अब उनका राँची का घर आयकर विभाग की रडार पर है। साथ ही इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री के भी कयास लग रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरे मामले की पड़ताल कर सकती है। वहीं आज तक की रिपोर्ट के अनुसार अब साहू के राँची के रेडियम रोड में स्थित घर की आयकर विभाग तलाशी ले रही है। इस घर की खुदाई भी हो सकती है, क्योंकि इतनी बड़ी बरामदगी के बाद संदेह जताया जा रहा है कि साहू ने इससे भी बड़ा खजाना छिपा रखा हो।

रिपोर्टों के अनुसार साहू के ठिकानों से करीब 350 करोड़ रुपए मिले हैं। कुछ रिपोर्टों में यह रकम 500 करोड़ रुपए के करीब बताई गई है। इसके अलावा 17 किलो सोना मिलने की बात भी कही जा रही है। एजेंसी की कार्रवाई में यह देश में अब तक की सबसे बड़ी नकदी बरामदगी बताई जा रही है।

6 दिसंबर 2023 को आयकर विभाग ने झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर एक साथ यह कार्रवाई शुरू की थी। छापेमारी की कार्रवाई 6 दिनों तक चली।

इतनी बड़ी बरामदगी के बाद सवाल उठता है कि इस पैसे का क्या होगा। आयकर नियमों के मुताबिक, अघोषित आमदनी पकड़े जाने पर टैक्‍स के साथ-साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। ऐसा नहीं है कि घर में कैश रखना गैर कानूनी है या कैश रखने की कोई कानूनी सीमा तय है। लेकिन यह कैश कहाँ से आई इसका सटीक और वैध सोर्स होना चाहिए।

छापेमारी के दौरान घर से बरामद नकदी के सोर्स और कानूनी दस्तावेज मुहैया नहीं करवाने पर यह अवैध धन कहलाता है। इसे काली कमाई से अर्जित संपत्ति माना जाता है। इस तरह की अघोषित आमदनी पर टैक्‍स स्‍लैब के हिसाब से 300 फीसदी तक टैक्‍स और जुर्माना लगाया जा सकता है।

छापेमारी में जब्त नगदी का आकलन करने के बाद इसका पंचनामा फाइल किया जाता है। ऐसे किसी भी मामले की जाँच आईटी विभाग की जाँच यूनिट करती है। ये यूनिट सभी विवरणों और खातों का अध्ययन करती है और 60 दिनों में एक मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करती है।

एक बार मूल्यांकन आदेश तैयार हो जाने के बाद, मामले के आरोपितों और संदिग्धों को अपनी आय का जरिया बताने का मौका भी दिया जाता है। बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में जब्त की गई नगदी की सूची बनाई जाती है। इसके बाद नगदी केंद्र सरकार के बैंक खाते में जमा हो जाती है।

जब्त की गई नगदी पर आयकर विभाग एक फाइनल कुर्की तैयार करता है। इसकी पुष्टि के लिए केस अदालत में जाता है और फिर केस खत्म होने तक जब्त की गई ये नगदी केंद्र सरकार के बैंक खाते में ही रहती है।

जब तक सुनवाई पूरी नहीं होती इस पैसे का कोई भी किसी तरह का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अदालत यदि आरोपित को दोषी ठहरा है तो यह पैसा सरकार का हो जाता है। लेकिन यदि अदालत आरोपित को बरी कर देती है तो सारा पैसा उसे नगदी वापस कर दिया जाता है।

उल्लेखनीय है कॉन्ग्रेस सांसद धीरज प्रसाद साहू और उनके रिश्तेदारों का शराब का बड़ा कारोबार है। बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज मूल रूप देशी शराब बनाने का काम करती है। इस धंधे में कंपनी करीब चार दशक से है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बलदेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी कंपनी में शामिल हैं।

इतनी बड़ी मात्रा में नकद मिलना इसलिए भी चौंकाता है, क्योंकि 2018 के चुनावी हलफनामे में साहू ने अपने ऊपर 2.36 करोड़ रुपए का कर्ज बताया था। कुल संपत्ति 34 करोड़ बताई थी। 2016-17 में जो इनकम टैक्स रिटर्न भरा था, उसमें अपनी आमदनी एक करोड़ रुपए से कुछ ही अधिक बताई थी।

धुआँ उड़ाते लोकसभा में कूद गए 2 लोग, सांसदों ने पकड़ कर पुलिस को सौंपा: संसद पर हमले की 22वीं बरसी पर हुई घटना

संसद पर साल 2001 में हुए हमले की 22वीं बरसी पर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। लोकसभा में कार्यवाही के दौरान दो प्रदर्शनकारी गैलरी से सदन में कूद गए, जिन्हें सांसदों ने ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। ये सुरक्षा चूक का बड़ा मामला है, जिसमें सांसद से जारी पास के आधार पर लोकसभा के दर्शक दीर्घा तक पहुँचे दो लोगों ने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान ही सदन में छलांग लगा दिया। उन्होंने सुरक्षा घेरे को धता बताकर नारेबाजी की।

हालाँकि, उन्हें सांसदों ने ही पकड़ लिया। इन दो लोगों के अलावा संसद के बाहर भी स्मोक केन से धुआँ निकाल कर प्रदर्शन कर रहे दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा में ये घुसपैठ ठीक 1 बजकर 1 मिनट पर हुई। उस समय सदन में पश्चिम बंगाल के मालदा उत्तर सीट से भाजपा के लोकसभा सांसद खरगेन मुर्मू अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने लोकसभा में छलांग लगा दी। अगले ही क्षण पीठाधीन राजेंद्र अग्रवाल ने सदन को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर लिया। इस बीच लोकसभा में मौजूद सांसदों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने वाले दोनों युवकों को पकड़ लिया।

बताया जा रहा है कि लोकसभा में सुरक्षा घेरे को तोड़ने वाले युवकों ने जूते में स्मोक कनस्तर छिपा रखे थे, उन्होंने सदन के भीतर नारेबाजी भी की।

2 अन्य प्रदर्शनकारी संसद के बाहर से गिरफ्तार

इस बीच दिल्ली पुलिस ने ट्रांसपोर्ट भवन के सामने दो प्रदर्शनकारियों, एक पुरुष और एक महिला को हिरासत में लिया है, जो रंग-बिरंगा धुआँ छोड़ने वाली सामग्री के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। घटना संसद के बाहर हुई। उन्हें दिल्ली पुलिस के जवानों ने तुरंत हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए व्यक्तियों में एक महिला भी है, जो नारेबाजी करती दिख रही है।

हिरासत में लिए गए आरोपितों को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन ले जाया गया है। दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर यूनिट स्पेशल सेल पार्लियामेंट के अंदर हंगामा करने वाले लोगों से पूछताछ करने पहुँच गई है।

शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने इस बारे में बताया कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। जब वे नीचे कूदे तो पीछे की बेंचें खाली थीं, वे पकड़े गए। सदन में दो मंत्री भी मौजूद थे।

कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बताया कि अचानक करीब 20 साल के दो युवक दर्शक दीर्घा से सदन में कूद पड़े और उनके हाथ में कनस्तर थे। इन कनस्तरों से पीला धुआँ निकल रहा था। उनमें से एक अध्यक्ष की कुर्सी की ओर भागने की कोशिश कर रहा था। वो लोग नारेबाजी भी कर रहे थे। कार्ति चिदंबरम ने इसे सुरक्षा चूक का गंभीर उल्लंघन बताया है।

बताया जा रहा है कि ये लोग मैसूर के सांसद द्वारा जारी पास के आधार पर लोकसभा की गैलरी तक पहुँचे थे। उन्होंने जूते में रंग-बिरंगा धुआँ फेंकने वाले कनस्तर छिपाए थे। उनके पास किसी तरह का विस्फोटक या घातक हथियार नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक, एक युवक का नाम सागर है और उनका मकसद लोकसभा में हंगामा मचाकर लोकप्रियता हासिल करना था।

सबसे बड़े लड़य्या भी हैं भजनलाल, राम से लेकर कश्मीर पंडितों तक के लिए लड़े: यूँ ही नहीं BJP ने चुना राजस्थान का लाल

राजस्थान के नए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम का जब ऐलान हुआ, तो किसी को एक बार यकीन नहीं हुआ कि राजस्थान की कमान 33 साल बाद किसी ब्राह्मण को सौंपी गई है। भजनलाल शर्मा का सियासी जीवन तीन दशक से भी लंबा रहा है। वो सरपंच भी रहे हैं तो अब मुख्यमंत्री भी बने हैं। उनका संगठन से जुड़ा अनुभव उन्हें खास बनाता है, साथ ही वो भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के भी करीबी माने जाते हैं।

भजनलाल शर्मा 20 साल पहले भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

अयोध्या से कश्मीर तक राजनीतिक सक्रियता

भजनलाल शर्मा भरतपुर जिले के अटारी गाँव के हैं। उन्होंने अटारी गाँव और नदबई कस्बे में पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही भारतीय जनता पार्टी और उसके छात्र संगठन ABVP से जुड़े रहे हैं। वो युवा मोर्चा में भी अहम जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं। महज 20 साल की उम्र में कश्मीरी पंडितों के लिए एबीवीपी द्वारा निकाले गए जम्मू मार्च में शामिल हुए थे। कश्मीरी पंडितों पर हमलों के विरोध में ये मार्च जम्मू से उधमपुर पहुँची थी, जहाँ उन्हें कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।

इसके 2 साल बाद ही 1992 में वो राम मंदिर आंदोलन के दौरान जेल गए थे। वो 27 साल की उम्र में अटारी गाँव के सरपंच भी चुने गए और दो बार सरपंच रहे।

BJP से बागी भी हुए, लेकिन संगठन पर मजबूत पकड़

भजनलाल शर्मा साल 2003 में चुनाव लड़ना चाहते थे। ऐसे में भाजपा से बागी हुए पूर्व मंत्री देवी सिंह, वरिष्ठ नेता सुरेश मिश्रा और करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कल्वी ने सामाजिक न्याय मंच नाम की पार्टी बनाई तो उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया। भजनलाल अपने भरतपुर जिले के नदबई विधानसभा सीट से मैदान में उतरे। उन्हें 5 हजार से अधिक वोट मिले, और वो पाँचवें स्थान पर रहे। इसके बाद वो वापस बीजेपी में लौट आए। उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें कई जिम्मेदारियाँ सौंपी।

बीजेपी में अहम दायित्वों का निर्वहन

भजन लाल शर्मा ने एवीबीपी और भाजयुमो के साथ अहम सांगठनिक कार्य सफलता पूर्वक संभाले थे। ऐसे में बीजेपी ने उन्हें भरतपुर में भाजयुमो का नेतृत्व सौंपा था। भजन लाल शर्मा भारतीय जनता युवा मोर्चा के तीन बार भरतपुर के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। इसके बाद भाजपा के वो जिला सचिव रहे, फिर उन्हें जयपुर बुला लिया गया। भजन लाल शर्मा को बीजेपी के लिए राजस्थान में उपाध्यक्ष और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद दिए गए।

इस चुनाव में वो जयपुर से ही मैदान में उतरना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौजूदा विधायक का टिकट काटकर सुरक्षित सांगनेर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा।

अपने चुनाव के साथ ही देखा पार्टी का भी कामकाज

राजस्थान में बीजेपी जब अपना चुनावी ताना-बाना बुन रही थी, उस समय भजनलाल शर्मा अपने राजनीतिक दायित्वों के साथ पार्टी की रणनीति की कमान भी सँभाल रहे थे। राज्य में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के हर काम को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने राजस्थान की 5 सदस्यीय रणनीतिक टीम की अगुवाई की। एक तरफ वो खुद सांगनेर से चुनाव मैदान में थे, तो दूसरी तरफ उनके ऊपर पूरी पार्टी के चुनावी अभियान का भी जिम्मा था।

भजनलाल शर्मा ने इन दोनों ही चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया। भजनलाल शर्मा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह के भी अच्छे संबंध हैं। अमित शाह उनपर पूरा भरोसा करते हैं। इसीलिए उन्हें राजस्थान में चुनाव को सँभालने का दायित्व दिया गया था।

CM के लिए तमाम दिग्गजों के बीच चुने गए भजनलाल शर्मा

राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में कई बड़े नाम शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, महंत बालकनाथ, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के साथ ही कई नामों की चर्चाएँ चलती रहीं। दीया कुमारी का भी नाम इसमें शामिल था। भाजपा के लिए ये चुनौती थी कि इन दिग्गजों के बीच सीएम किसे बनाया जाए। साथ ही बीजेपी के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को भी बरकरार रखना था। ऐसे में पार्टी ने 33 साल बाद राजस्थान को ब्राह्मण मुख्यमंत्री देने का निर्णय लिया, जिसका असर पूरे उत्तर भारत पर पड़ना तय है।

दरअसल, 3 दिसंबर को चुनावी नतीजों की घोषणा जब हुई, तो मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की लाइन लग गई। इन दावेदारों ने भी अपनी गोलबंदी शुरू कर ली। सौदेबाजी भी चली, लेकिन इन नेताओं में सक्रियता नहीं देखी गई थी, जब चुनाव हो रहे थे। किसी भी नेता ने पूरे राजस्थान की जिम्मेदारी सँभालने की जरूरत नहीं समझी थी। ऐसे में बीजेपी ने भी उसी भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया, जिसने अपने चुनाव के साथ ही पूरे राज्य की चुनावी बागडोर संभाली।

मुस्लिमों ने मुस्लिम पर ही करवाई ईशनिंदा की FIR, जिस पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप वो 12वीं का छात्र: AMU का मामला

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में मुस्लिमों के पैगंबर मोहम्मद की शान में गुस्ताखी के आरोप में FIR दर्ज की गई है। इस बार आरोप कक्षा 12 में पढ़ने वाले एक मुस्लिम छात्र पर लगा है। आरोपित छात्र ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ (AMU) के स्कूल में पढ़ता है जो खुद को नास्तिक बताता है। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच कर रही है। घटना मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) की है। शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया है कि आरोपित छात्र आदतन मुस्लिम विरोधी है।

यह मामला अलीगढ़ के थाना क्षेत्र सिविल लाइंस का है। यहाँ 12 दिसंबर, 2023 को AMU में पढ़ने वाले और मूलतः कासगंज निवासी छात्र ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायतकर्ता भी यहीं 12वीं का छात्र है जो मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला है। शिकायत में बताया गया है कि मंगलवार को शिकायकर्ता अपने कुछ साथियों के साथ AMU के अल्लामा इकबाल हॉस्टल में मौजूद था। तभी वहाँ आरोपित छात्र पहुँचा और इस्लाम के खिलाफ गलत बातें करना लगा। आरोप यह भी है कि छात्र ने मुहम्मद पैगंबर के खिलाफ भी बेहद गलत बातें बोली हैं।

आरोप है कि जब शिकायतकर्ता ने गलत बातें बोल रहे छात्र को रोका तो आरोपित गंदी-गंदी गालियाँ देने लगा। साथ ही उसने धमकी दी, “तुम लोगों से जो हो कर लेना। मैं ऐसा ही बोलूँगा।” शिकायतकर्ता ने छात्र द्वारा बोले गए इन शब्दों को अपनी महज़बी भावनाओं को चोट पहुँचाने वाला बताया है। आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग भी की गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर आरोपित छात्र पर 295A, 504 और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। आरोपित और शिकायतकर्ता दोनों ही AMU के छात्र और मुस्लिम समुदाय से हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

‘हमने नहीं की आरोपित की पिटाई’: शिकायतकर्ता

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आरोप लगा है कि शिकायतकर्ता छात्र ने अपने साथियों के साथ मिल कर ईशनिंदा के नाम पर आरोपित की पिटाई की है। हालाँकि, शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि ये खबरें आधारहीन हैं और किसी ने भी आरोपित छात्र की पिटाई नहीं की है। शिकायतकर्ता ने इसके सबूत के तौर पर हॉस्टल के सभी CCTV रिकॉर्ड मौजूद होने का दावा किया। जब हमने पूछा कि क्या आरोपित छात्र द्वारा की गई ‘नबी के शान में गुस्ताखी’ के कोई सबूत हैं तो शिकायतकर्ता ने ‘नहीं’ में जवाब दिया।

शिकायतकर्ता ने हमें बताया कि जिस छात्र पर ईशनिंदा का आरोप लगा है वो आदतन मुस्लिम विरोधी है। हमें बताया गया कि आरोपित छात्र इस से पहले भी मुस्लिमों और उनकी आस्थाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर चुका है। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि आरोपित अन्य छात्रों से खुद को नास्तिक बताया करता है। FIR दर्ज कराने वाले का कहना है कि इस बारे में कोई भी अन्य बयान उनके प्रिंसिपल अल्वी जारी करेंगे।

पाकिस्तान में 30 फौजियों को उतार दिया मौत के घाट: 100 किलो विस्फोटक लेकर आए थे 6 हमलावर, Pak ने तालिबान पर मढ़ा दोष

पाकिस्तान में हमलावरों ने वहाँ की फ़ौज के 23 जवानों को मौत के घाट उतार दिया है। इस हमले में 30 फौजी घायल भी हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हमलावरों की संख्या 6 बताई जा रही है। ये सभी जवाबी कार्रवाई में मारे गए हैं। मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को हुए इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-जिहाद नाम के संगठन ने ली है। इस घटना से नाराज पाकिस्तान ने अपने देश में मौजूद अफगानिस्तान के तालिबानी राजदूत को तलब कर के हड़काया है।

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, यह हमला पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा सूबे में आने वाले डेराबन इलाके में हुआ है। यहाँ के डेरा इस्माइल खान में बनी एक स्कूल की बिल्डिंग में पाकिस्तान के फौजियों ने चेकिंग पॉइंट बना रखा है। मंगलवार की सुबह लगभग 4 बजे तड़के 6 हमलावर पाकिस्तानी फ़ौज की जाँच चौकी के पास आए। उन्होंने चौकी पर अपने वाहन में ब्लास्ट कर दिया जिस से इमारत ही धराशायी हो गई। इसके बाद हमलावर ऑटोमैटिक हथियारों से अंधाधुंध गोलियाँ बरसाने लगे।

अचानक हुए इस हमले से चेकिंग पॉइंट पर मौजूद पाकिस्तानी फौजियों को सँभलने का मौका ही नहीं मिला। जब तक वो हालात को समझ पाते तब तक 23 फौजियों की मौत हो चुकी थी। बाद में पाकिस्तान के जवानों में मोर्चा सँभाला और जवाबी कार्रवाई की। इस कार्रवाई में हमला करने आए सभी 6 विद्रोही मारे गए। हमले के दौरान कुल 30 फौजी बुरी तरह से घायल भी हुए है जिनका इलाज चल रहा है। कुछ की हालत गंभीर होने की वजह से अभी हताहतों की तादाद बढ़ भी सकती है।

पाकिस्तानी बम निरोधक दस्ते के मुताबिक, हमले में लगभग 100 किलो (1 क्विंटल) विस्फोटक का प्रयोग किया गया था। चश्मदीदों के मुताबिक मुठभेड़ लगभग 1 घंटे तक चली थी। पाकिस्तान में मौजूद तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान नाम के संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने हमले का 2 मिनट का वीडियो भी जारी किया है। TJP का दावा है कि हमलावर स्वात और मर्दान जिलों के थे। हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने TJP द्वारा जारी वीडियो को भ्रामक बताया है।

वहीं एक अन्य घटना में कराची में 2 अन्य पाक फौजियों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया है। वहीं पाकिस्तान सरकार इस घटना के बाद से अफगानिस्तान पर काफी नाराज है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगानिस्तान के तालिबानी राजदूत को तलब किया और खूब खरी-खोटी सुनाई। साथ ही जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।