बिग बॉस OTT के दूसरे सीजन में नजर आ चुकीं टीवी अभिनेत्री मनीषा रानी का एक वीडियो ऑन रह गया। अब मनीषा रानी के फैन्स इस पर कह रहे हैं कि वह पैसा बना रही है तो आखिर गलत क्या है? मनीषा का यह वीडियो इंस्टाग्राम से वायरल हो रहा है।
मनीषा रानी के इन्स्टाग्राम पर 1 करोड़ से अधिक फॉलोवर्स हैं। इसी इन्स्टाग्राम पर मनीषा एक लाइव कर रही थीं। इस लाइव के जरिए वह अपने फैन्स के जवाब दे रहीं थीं। फैन्स से बातचीत के बाद उन्होंने एक फ़्लाइंग किस देकर लाइव को खत्म किया और लाइव खत्म करने का बटन फ़ोन पर दबा दिया।
इसके बाद वह फोन से दूसरी तरफ देखने लगीं और बात करने लगी। हालाँकि, लाइव गलती से चालू रह गया। इस दौरान मनीषा पास में खड़े किसी लड़के से बात करने लगती हैं। इस बातचीत में वह अपनी कमाई को लेकर बातचीत करती हैं।
इसमें वह कहती हैं, “ए विशाल! जो एंड किए हैं लाइव उसको शेयर भी कर दे क्या, नहीं ना! उसको तो मेरा फैन्स लोग कर देगा। लेकिन पता है कि यही वाला लाइव जस्टिन यूट्यूब पर डाला था तो उसमें बहुत पैसा आया था।”
इसके बाद वीडियो में पीछे से किसी लड़के के बोलने की आवाज आती है, वो कहता है कि वो अभिषेक आया था उसका वीडियो एड करने को, इसके बाद वह किसी से पूछता है कि लाइव को शेयर करना है क्या करना है। मनीषा की यह क्लिप अब सोशल मीडिया पर वायरल है। यहाँ मनीषा रानी और एक अन्य बिग बॉस कंटेस्टेंट अभिषेक मल्हान के फैन्स आपस में लड़ रहे हैं।
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DIDI END KARNA BHUL GAYI CHALO FANS LOG KARDO FAMOUS DIDI KO
दरअसल, अभिषेक मल्हान के फैन्स का कहना है कि मनीषा उसे पैसे के लिए इस्तेमाल कर रही है। फैन्स का कहना है कि अभिषेक के वीडियो क्लिप को यूट्यूब पर डाल कर मनीषा पैसा कमानी चाहती हैं। इससे अभिषेक और मनीषा के बीच केमिस्ट्री वायरल होगी। इससे और व्यूज आएँगे।
हालाँकि, मनीषा के समर्थकों का कहना है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि कंटेंट से सभी पैसा कमाते हैं। अगर मनीषा भी पैसा कमा रही हैं तो इससे किसी को भी कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।
Manisha Rani talked about earning money in her instagram live and I guess it’s nothing wrong as she is earning from social media.
She is just talking about earning money and we social media creators sometime talks too freely and don’t even realise audience takes it to another…
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के खिलाफ महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में केस दर्ज किया गया है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में 11 दिसंबर 2023 को छपे एक लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप उन पर है। बीजेपी के एक स्थानीय नेता ने एफआईआर दर्ज कराते हुए इस लेख को अपमानजनक बताया है।
यवतमाल जिले के बीजेपी संयोजक नितिन भुटाड़ा ने शिकायत में कहा है, “संजय राउत ने अपने लेख में पीएम मोदी पर आरोप लगाया था कि वे एक ‘तानाशाह’ हैं और वे देश को ‘सांप्रदायिकता और हिंसा की ओर’ ले जा रहे हैं। उन्होंने मोदी को ‘भारत का सबसे खतरनाक प्रधानमंत्री’ भी कहा है।” इस लेख के प्रकाशन के बाद कई लोगों ने राउत के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। इसी के बाद नितिन भुटाड़ा ने थाने में प्रार्थना पत्र दिया और ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राउत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (ए), धारा 505(2) (सार्वजनिक शरारत फैलाने के इरादे से जानबूझकर अपमानजनक या धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल करना) और धारा 153 (ए) (धर्म, जाति, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
संजय राउत ने इस प्राथमिकी को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा है कि वह प्रधानमंत्री के खिलाफ अपने बयान पर कायम हैं। बता दें कि सामना शिवसेना (उद्धव ठाकरे ग्रुप) का मुखपत्र है और उसमें विरोधी नेताओं के प्रति अक्सर विद्वेष भरी बातें फैलाई जाती हैं। ये पहली बार नहीं है जब सामना के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला गया हो।
गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शानदार जीत हासिल की है। इससे विपक्षी खेमे में आम चुनावों से पहले बेचैनी बढ़ गई है। विपक्ष अनर्गल प्रलाप में लग गया है। ‘सामना’ में 11 सितंबर को ‘पाखंड ही पाखंड’ शीर्षक से छपे लेख में भी वह प्रलाप दिखता है।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में कम्युनिस्ट छात्र संगठन ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (SFI) ने हमला किया था। अब इस मामले में राज्य खुफिया विभाग ने कहा है कि उसने SFI की केरल के राज्यपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना के बारे में तीन चेतावनियाँ जारी की थीं।
ये चेतावनियाँ 24 घंटे के अंतराल में जारी की गई थी। इसमें काले झंडे वाले प्रदर्शन और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ संभावित हमले की चेतावनी दी गई। यही नहीं, सोमवार (11 दिसंबर, 2023) दोपहर को जारी आखिरी रिपोर्ट में विरोध प्रदर्शन के संभावित जगहों का भी जिक्र किया गया। स्टेट इंटेलिजेंस ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि राज्यपाल को अतिरिक्त सुरक्षा दी जानी चाहिए, लेकिन पुलिस के आला अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया था।
इसके अलावा, खुफिया विभाग को पता चला कि राज्यपाल का ट्रैवल रूट शहर के पुलिस आयुक्त को गुप्त रखने के निर्देश दिए गए थे। खुफिया विभाग का दावा है कि पुलिस एसोसिएशन के लीडर ने इसे सोमवार सुबह SFI को लीक कर दिया गया था। बीते दिन राज्यपाल के खिलाफ एसएफआई के विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार (10 दिसंबर, 2023) शाम को ही पहली खुफिया रिपोर्ट दी गई थी।
सोमवार को सिफारिश की गई कि राज्यपाल के लिए हवाई अड्डे तक जाने के लिए नियमित रास्ते के इतर एक और रास्ता भी तय किया जाना चाहिए। रविवार शाम को सिटी पुलिस कमिश्नर ने इसे गुप्त रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों को वायरलेस संदेश भेजा था।
सोमवार सुबह दूसरी इंटेलिजेंस रिपोर्ट में विरोध तेज होने की तरफ भी इशारा किया गया था। दोपहर में दी गई तीसरी रिपोर्ट में खुफिया एजेंसी ने यह भी बताया था कि पलायम अंडरपास और पेट्टा सहित तीन जगहों पर विरोध प्रदर्शन की संभावना हैं। इसके साथ ही यह सुझाव दिया गया कि राज्यपाल की सुरक्षा चाक-चौबंद रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाना चाहिए। खुफिया विभाग का कहना है कि पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट के मुताबिक न कोई सावधानी बरती और न ही अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए। सोमवार की सुबह जानकारी मिली कि पुलिस एसोसिएशन के टॉप लीडर ने राज्यपाल के रूट का पूरा ब्यौरा SFI नेतृत्व को लीक कर दिया था। पुलिस एसोसिएशन के ये टॉप लीडर लंबे वक्त से ये राज्य की स्पेशल ब्रांच में काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इस अधिकारी पर पहले भी आरोप लगे थे। आरोप था कि इस अधिकारी के नेतृत्व में सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश से केंद्रीय जाँच एजेंसियों के खिलाफ ऑडियो बयान दर्ज कराया गया था। SFI के विरोध प्रदर्शन पर राज्यपाल की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद केरल सरकार और गृह विभाग असमंजस में फँस गए हैं।
राज्यपाल ने सार्वजनिक तौर से ऐलान किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था के हालात खराब हो गए हैं। ऐसे में अगर वो ये रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपते हैं तो केरल सरकार की मुश्किलों में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि हमले के बाद राज्यपाल खान ने केरल के मुख्यमंत्री पर हमला करवाने का आरोप लगाया था।
राज्यपाल खान जब दिल्ली जाने के लिए तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की तरफ जा रहे थे तो उनकी कार को एसएफआई के गुंडों ने टक्कर मार दी थी। इससे राज्यपाल खासा गुस्सा हुए थे। उन्होंने कार से बाहर निकलकर मीडिया से कहा था, “ये मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की लोगों को भेज उन्हें शारीरिक तौर से चोट पहुँचाने की साजिश थी। जैसा उन्होंने कन्नूर में किया था। लेकिन मैं बता दूँ कि जब तक मैं यहाँ राज्यपाल की गद्दी पर हूँ, ऐसा कुछ नहीं होने दूँगा।”
अयोध्या में बन रहे रामलला के भव्य मंदिर के लिए नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे की झूठी फोटो फैलाने और उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण बातें लिखने समेत हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाने के कारण कॉन्ग्रेस के नेता हितेंद्र पिथाडिया को अहमदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
हितेंद्र पिथाडिया गुजरात कॉन्ग्रेस के अनुसूचित मोर्चा का चेयरमैन है और विधायक जिग्नेश मेवानी का करीबी है। इसने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक फोटो डाली थी जिसमें एक आदमी एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखता है। यह व्यक्ति तिलक-चन्दन लगाए हुए है।
हितेंद्र पिथाडिया का ट्वीट
हितेंद्र पिथाडिया का दावा था कि यह रामलला के नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे हो सकते हैं क्योंकि उनकी जो फोटो सामने आई थी उसमें उन्होंने भी चन्दन और तिलक लगाया हुआ था। पिथाडिया की डाली इस फोटो को कुछ और हैंडल ने भी आगे बढ़ाया था। ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में यह फोटो फर्जी निकली थी।
सोशल मीडिया पर जम कर हुए विरोध के कारण पिथाडिया ने बाद में यह ट्वीट डिलीट कर दिया था। हालाँकि, लोगों ने इसका स्क्रीनशॉट लेकर पुलिस से कार्रवाई की माँग की और कहा कि हितेंद्र ने हिन्दुओं की आस्था को चोट पहुँचाई है।
अब यह सूचना सामने आई है कि अहमदाबाद पुलिस ने हितेंद्र पिथाडिया पर मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। ‘NEWS 18‘ के अनुसार, हितेंद्र पर धारा 469, 509, 295A और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई अहमदाबाद की साइबर पुलिस ने की है।
इस मामले में इससे पहले अयोध्या पुलिस ने भी जाँच करके कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि मामले को अयोध्या पुलिस के संज्ञान में लाया गया है और यहाँ का साइबर विभाग इस की जाँच कर रहा है।
कौन हैं मोहित पांडे?
रामलला के मंदिर के लिए मुख्य पुजारी नियुक्त किए गए मोहित पांडे को कड़ी परीक्षा के बाद यहाँ पुजारी नियुक्त किया गया है। मोहित पांडे ने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ में सात साल तक अध्ययन किया है।
मोहित पांडे ने तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से संबद्ध श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) की उपाधि हासिल की। इसी साल (2023 में ही) उन्होंने सामवेद का अध्ययन करते हुए मास्टर डिग्री हासिल की। वह रामानंदीय परंपरा के विद्वान भी हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता भी प्राप्त है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों से मिले ₹500 करोड़ को सही ठहराया है। उनका कहना है कि चुनाव लड़ने के लिए पैसे चाहिए होते हैं, इसलिए विपक्षी दलों का कालाधन रखना कोई गलत बात नहीं है।
रघुराम राजन ने ये बातें ‘द रेड माइक’ (The Red Mike) नाम के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कही है। रघुराम राजन का कहना है कि सरकार में रहने वाला दल वैध पैसों से चुनाव लड़ सकता है, इसलिए उसे कोई समस्या नहीं होती। विपक्ष को भी चुनाव लड़ने के लिए पैसा चाहिए होता है, इसलिए वह कालाधन रखते हैं जो कि गलत नहीं है।
जब रघुराम राजन से यूट्यूब चैनल के एंकर ने भारत में इलेक्टोरल बांड्स को लेकर प्रश्न पूछा तो उन्होंने कहा, ” इलेक्टोरल बांड राजनीतिक दलों को पैसा देने का सबसे अपारदर्शी तरीका हैं। किसने दिया और क्या मिला उनको देकर, किसी को कुछ नहीं पता इस बारे में। ऐसे में यह पार्टियों को फाइनेंस करने का कैसे पारदर्शी तरीका हो सकता है।”
जब यूट्यूबर ने उनसे पूछा कि क्या यह नकद के जितना ही बुरा है, तो उन्होंने कहा, “यह नकद रखने से भी अधिक बुरा है, क्योंकि इस बारे में केवल स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को पता है।” आगे रघुराम राजन ने सरकार को कठघरे में खड़े करके विपक्षी नेताओं के करोड़ों में नकद इकट्ठा करने को सही ठहराने लगे। आप उनके यह दावे इस वीडियो में 33 मिनट के बाद से सुन सकते हैं।
आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा, “सरकार में रहने वाली पार्टी के पास पैसा इकट्ठा करने के लिए ‘अनफेयर एडवांटेज’ होती है। इसलिए वो हमेशा वैध पैसा पाते हैं। विपक्ष को चुनाव लड़ने के लिए कालेधन का इस्तेमाल करना पड़ता है। चुनाव कैसे लड़े जाते हैं, वो पैसे से लड़े जाते हैं। सरकार वाले चेक बना कर पैसा ले सकते हैं, विपक्ष वालों को नकद नोटों के बण्डल लेने पड़ते हैं।”
रघुराम राजन ने आगे कहा, “आप चुनाव में वैध स्रोतों से पैसा लेकर और कालाधन लेकर चुनाव लड़ने वाले विपक्ष पर ED और CBI की जाँच करवा कर मुकाबला गैर बराबरी का बना रहे हैं। यह स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया नहीं है।”
कुल मिलाकर रघुराम राजन का कहना है कि यदि कोई विपक्षी दल भ्रष्टाचार से कमाए गए पैसे के बल पर चुनाव लड़ता है तो यह गलत नहीं है क्योंकि अधिकांश लोग सत्तारूढ़ दल को ही चंदा देते हैं। उनका यह भी कहना है कि सरकार में बैठे दल को ज्यादा चंदा मिलता है इसलिए विपक्षी दलों को भ्रष्टाचार या फिर अवैध स्रोत से कमाए गए पैसे का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में यदि सरकार अवैध तरीके से जुटाए गए पैसे पर कार्रवाई करें तो यह गलत है और इससे सरकार तथा विपक्ष के बीच चुनावी मुकाबला बराबरी का नहीं रह जाता।
इस प्रकार के कुतर्क देकर रघुराम राजन यह सिद्ध करना चाह रहे हैं कि विपक्षी दल यदि अवैध स्रोतों से पैसा लेते हैं तो यह कहीं से भी गलत नहीं है। हाँ, इस अवैध पैसे पर कार्रवाई जरूर गलत है। कार्रवाई होने से चुनावों में सत्ताधारी दल को इससे बढ़त मिल जाती है।
रघुराम राजन वर्तमान सरकार के अंध विरोधी हैं। इसलिए विपक्ष की चिंता में उनका दुबला होना जायज है। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि वैध तरीकों से सत्तारूढ़ दल हो या विपक्ष पैसा जुटाना गलत नहीं है। लोकतंत्र के हित में भी यही है। लेकिन जब सत्ताधारी दल हो या विपक्ष, वह अवैध तरीके से पैसे इकट्ठा करने लगे तो वह न अर्थव्यवस्था के हित में है और न लोकतंत्र के।
अवैध धन का यह कहकर बचाव नहीं किया जा सकता कि सत्ता में रहने वाले दल के पास बढ़त होती है। ऐसा कह कर रघुराम राजन एक प्रकार से विपक्ष के राजनीतिक भ्रष्टाचार को सही ठहरा रहे हैं।
रघुराम राजन का कहना है कि इलेक्टोरल बांड के जरिए पार्टियों को मिलने वाले पैसे का स्रोत पता नहीं लगता, इसलिए यह अपारदर्शी है। वह इसके बदले नकद लेनदेन को अधिक पारदर्शी बताते हैं। क्या रघुराम राजन यह बता सकते हैं कि कॉन्ग्रेस के सांसद धीरज साहू के यहाँ पकड़े गए पैसे का स्रोत क्या है?
पार्टियों को इलेक्टोरल बांड के जरिए मिलने वाला फंड बैंकिंग सिस्टम से होकर आता है। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम में घुसने से पहले और इसके बाद इसके स्रोत के बारे में कम से कम देश की एजेंसियों की तो पता चलता ही होगा। वहीं नकद पैसे का स्रोत कोई भी एजेंसी आसानी से पता नहीं लगा सकती।
क्या रघुराम राजन चाहते हैं कि इलेक्टोरल बांड जैसी व्यवस्था हटा कर पार्टियों को मिलने वाला सारा पैसा नकद में हो? हालाँकि, ऐसा मूर्खतापूर्ण दावा वो पहली बार नहीं कर रहे हैं, इससे पहले भी उन्होंने ऐसे कई सुझाव दिए हैं। मसलन महँगाई से लड़ने को ₹5,000 और ₹10,000 के नोट चलाना या फिर देश में चीजों को निर्माण बढ़ाने को प्रयास ना करने की सलाह।
इतना ही नहीं राजन अपने अनुमानों में भी गलत हो चुके हैं। उन्होंने दिसम्बर 2022 में राहुल गाँधी के साथ के एक बातचीत में कहा था कि हम 5% जीडीपी वृद्धि दर पाकर भाग्यशाली होंगे। हालाँकि, यह उनका अनुमान हो या मनोकामना, दोनों ही गलत सिद्ध हुए और 2022-23 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.2% रही।
जाहिर है कि पिछले कुछ सालों में रघुराम राजन ने अपनी भूमिका अर्थशास्त्री की जगह पॉलिटिकल एक्टिविस्ट की कर ली है। बावजूद उनसे इस थेथरई की उम्मीद शायद ही किसी ने की हो कि वे कॉन्ग्रेस सांसद के ठिकानों से मिले नोटों के पहाड़ को भी लोकतंत्र के नाम पर सही ठहरा देंगे।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने परिसर के अंदर सभी तरह के विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जेएनयू परिसर में शैक्षणिक भवनों के 100 मीटर के दायरे में धरना देने या पोस्टर लगाने पर छात्रों पर 20,000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा या उनको यूनिवर्सिटी से निकाला जा सकता है।
जेएनयू की ओर से यह आदेश चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (सीपीओ) के नए मैनुअल के तहत जारी किए गए हैं। मैनुअल के मुताबिक, किसी भी तरह के राष्ट्र-विरोधी काम पर 10,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का ये नया मैनुअल अक्टूबर 2023 में जेएनयू के स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज की इमारत पर राष्ट्र-विरोधी नारे लिखे जाने के बाद आया है। दरअसल इस घटना के बाद जेएनयू प्रशासन ने परिसर में ऐसी घटनाओं के दोहराव होने से रोकने के लिए एक समिति बनाने का ऐलान किया था।
जेएनयू में जो नए नियम लागू किए गए हैं, इसके तहत विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी तरह के अपमानजनक धार्मिक, सांप्रदायिक, जातिवादी या राष्ट्र-विरोधी टिप्पणियों वाले पोस्टर या पैम्फलेट को छापने, प्रसारित करने या चिपकाने पर रोक लगा दी गई है।
पोस्टर या पैम्फलेट के अलावा यदि कोई छात्र किसी शैक्षणिक और प्रशासनिक परिसर के 100 मीटर के दायरे में भूख हड़ताल, धरना या किसी अन्य तरह के विरोध-प्रदर्शन में शामिल पाया जाता है या इनमें से किसी भी परिसर के प्रवेश या निकास को बाधित करते हुए पाया जाता है, तो उस पर या तो जुर्माना लगाया जाएगा, या उसे 2 महीने के लिए छात्रावास से बाहर कर दिया जाएगा या उसे दो महीने तक परिसर से बाहर कर दिया जाएगा।
नए नियमों के तहत हर तरह की जबरदस्ती जैसे कि घेराव, धरना या परिसर में कोई भी बदलाव (दीवारों को गंदा करना, परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना) अब प्रतिबंधित सूची में आ गए हैं। मैनुअल में कहा गया है कि जिस छात्र को यूनिवर्सिटी में अपने अध्ययन के दौरान पाँच या उससे अधिक बार सज़ा मिलेगी, उसे हमेशा के लिए निष्कासित कर दिया जाएगा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन दोषी विद्यार्थी से संबंधित सजा की एक प्रति आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करेगी। साथ ही उस छात्र/छात्रा के माता-पिता या अभिभावकों को भी इसकी एक प्रति भेजी जाएगी।
जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) इन नए नियमों के विरोध में उतर आया है। उसने इसे असहमति वाले विचारों को दबाने की कोशिश करार दिया है। छात्र संघ जेएनयूएसयू ने इस नए मैनुअल को वापस लेने की माँग की है।
इससे पहले भी मार्च में जेएनयू ने इस तरह का नियम लागू किया गया था। तब परिसर में धरना देने पर 20,000 रुपए का जुर्माना और हिंसा पर उतारू होने पर दाखिला रद्द और 30,000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया था। तब इसको लेकर छात्र संघ बिफर उठे तो, फिर इसे वापस ले लिया गया था।
दरअसल वामपंथ का गढ़ कहे जाने वाले जेएनयू में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मुद्दा हो या फिर अफजल गुरु की फाँसी का मसला हो, यहाँ ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर छात्र विरोध-प्रदर्शन पर उतरते रहते हैं। अफजल की फाँसी तो एक तरह से जेएनयू के लिए गले की फाँस बन गई थी। तब जेएनयू के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा इस कदर भड़का था कि #ShutDownJNU ट्रेंड करने लगा था।
इससे पहले, हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ब्लॉकों के 100 मीटर के अदंर विरोध-प्रदर्शन करना मना था। इसके दायरे में कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर सहित अन्य के कार्यालय आते थे।
शाहरुख़ खान की बेटी सुहाना खान, अमिताभ बच्चन का नाती अगस्त्य नंदा और श्रीदेवी की बेटी ख़ुशी कपूर जैसे स्टार किड्स से सनी फिल्म ‘The Archies’ की IMDb रेटिंग से हेरफेर किए जाने की खबर है। इस फिल्म की निर्देशक गीतकार जावेद अख्तर की बेटी जोया अख्तर है। वेदांग रैना, अदिति डॉट और मिहिर आहूजा भी इस फिल्म में हैं। इस फिल्म को कॉमिक कैरेक्टर आर्चीज पर बनाया गया है। कई समीक्षकों ने भी इसे अच्छी समीक्षाएँ दी, जबकि फिल्म दर्शकों को पसंद ही नहीं आ रही और इसका मजाक बन रहा है।
IMDb पर फिल्म को पहले तो बहुत ही खराब रेटिंग मिली थी, लेकिन फिर अचानक से इसकी रेटिंग बढ़ गई। आजकल जब बॉलीवुड की फिल्मों पर बॉक्स ऑफिस के आँकड़ों को लेकर हेराफेरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, ऐसे समय में सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर ‘The Archies’ की IMDb रेटिंग अचानक से कैसे बढ़ गई। खबर लिखे जाने तक ‘इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb)’ पर इस फिल्म की रेटिंग 10 में से 6.8 बताई जा रही है।
वहीं लगभग 29,000 लोगों ने फिल्म को रेटिंग दी है। सोशल मीडिया पर इस फिल्म को लेकर मीम्स बन रहे हैं। ‘गली बॉय’ और ‘ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा’ जैसी फिल्म बनाने वाली ज़ोया अख्तर की इसे सबसे खराब फिल्म बताया जा रहा है। पहले तो IMDb पर ‘The Archies’ की रेटिंग मात्र 2.9 ही थी, लेकिन अचानक से ही ये दोगुनी से भी ज़्यादा बढ़ गई। आमतौर पर ऐसा देखा नहीं जाता है। ऐसे में चर्चा है कि क्या बॉक्स ऑफिस के आँकड़ों के साथ-साथ अब IMDb रेटिंग में भी बॉलीवुड हेराफेरी कर रहा है?
फिल्म को अचानक से इतनी ज़्यादा रेटिंग कहाँ से मिल गई और ये बढ़ कैसे गया, ये सवाल जायज है। ऐसा बहुत कम हुआ है जब कोई फिल्म ‘बहुत बेकार’ की श्रेणी में हो और अचानक से ये अच्छी फिल्म की श्रेणी में आ जाए। ये फिल्म 1960 के भारत की कहानी है, जहाँ कुछ किशोर मिल कर एक पार्क को बचाने की लड़ाई लड़ते हैं। सुहाना, अगस्त्य और ख़ुशी का ये एक्टिंग डेब्यू है। बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है, ऐसे में इस फिल्म को भी उसे बढ़ावा देने के क्रम में ही देखा जा रहा है।
अयोध्या में बन रहे रामलला के मंदिर के लिए गाजियाबाद के मोहित पांडे को मंदिर का पुजारी नियुक्त किया गया है। उनके पुजारी नियुक्त किए जाने के बाद से लगातार उनके खिलाफ घृणा अभियान चलाया जा रहा है। कुछ ट्विटर हैंडल्स उनके नाम पर फर्जी फोटो भी वायरल कर रहे हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कुख्यात कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता ने भी हिंदू-घृणा दिखाते हुए पुजारी मोहित पांडे की ‘गंदी’ और फर्जी फोटो शेयर की।
गुजरात कॉन्ग्रेस के अनुसूचित मोर्चा के मुखिया हितेन पिठादिया वो कॉन्ग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने राम मंदिर के नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे को लेकर गंदा और फर्जी ट्वीट किया। इस ट्वीट में एक व्यक्ति एक महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में है। हितेन ने दावा किया कि यह व्यक्ति नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे हैं।
हितेन ने आपत्तिजनक फोटो डालते हुए लिखा, “इसको अयोध्या राम मंदिर का पुजारी बना रहे हैं?” हितेन द्वारा डाले गए फोटो में माथे पर तिलक और चन्दन लगाए हुए एक व्यक्ति एक महिला के साथ आपत्तिजनक हालात में है। एक अन्य फोटो में दोनों एक दूसरे से चिपके हुए दिखाई देते हैं।
हितेन पिठादिया का ट्वीट
दरअसल, अयोध्या के नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे की भी जो फोटो सामने आई है, उसमें भी वह तिलक और चन्दन लगाए हुए दिखते हैं। ऐसे में जो फोटो वायरल किया जा रहा है, उसमें मात्र तिलक-चन्दन लगाने के आधार पर दोनों में समानताएँ बताकर अफवाह फैलाने का प्रयास किया गया कि यह नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे हैं।
इस फोटो को अन्य कई हैंडल भी नवनिर्मित राम मंदिर और हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने के लिए लगातार ट्वीट कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर हिंदू-घृणा से सने अन्य कुछ हैंडल के स्क्रीनशॉट नीचे लगाए गए हैं। सब के सब पुजारी मोहित पांडे के बारे में द्वेषपूर्ण जानकारी फैलाते पाए गए हैं।
राम मंदिर के पुजारी मोहित पांडे और अश्लील फोटो: क्या है सच
दोनों फोटो को देखने पर ही पता चल जाता है कि कॉन्ग्रेस नेता हितेन पिठादिया द्वारा डाले गए फोटो में दिखने वाला व्यक्ति कोई और है। स्पष्ट अंतर के बावजूद हितेन ने केवल श्रीराम मंदिर और नवनियुक्त पुजारी मोहित पांडे के खिलाफ दुर्भावना के चलते ही जानबूझ फर्जी फोटो को शेयर किया। इस तरह के फोटो का फैक्ट चेक करने के लिए खुली आँख और प्रोपेगेंडा-रहित दिमाग होना चाहिए। इसमें नासा-टाइप न तो टेक्नॉलजी की जरूरत है न ही गूगल के रिवर्स-इमेजिंग की।
इस फर्जी फोटो पर कड़े विरोध के बाद कॉन्ग्रेस नेता हितेन पिठादिया ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है। लेकिन जो काम उसे करना था, वो हो गया – राम मंदिर को लेकर अफवाह फैल गई, हिंदू-घृणा के कारण उसके मुख्य पुजारी को टारगेट कर दिया गया। अब अयोध्या पुलिस ने इस मामले में जाँच के आदेश दे दिए हैं। अयोध्या पुलिस ने ट्विटर पर सूचित किया है कि उनका साइबर विभाग इस मामले में जाँच और आवश्यक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
प्रभारी निरीक्षक साइबर सेल को आवश्यक जॉच व नियमानुसार विधिक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया।
रामलला के मंदिर के लिए मुख्य पुजारी नियुक्त किए गए मोहित पांडे को कड़ी परीक्षा के बाद यहाँ पुजारी नियुक्त किया गया है। मोहित पांडे ने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ में सात साल तक अध्ययन किया है।
मोहित पांडे ने तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से संबद्ध श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) की उपाधि हासिल की। इसी साल (2023 में ही) उन्होंने सामवेद का अध्ययन करते हुए मास्टर डिग्री हासिल की। वह रामानंदीय परंपरा के विद्वान भी हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता भी प्राप्त है।
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में हमला किया गया। यह हमला कम्युनिस्ट छात्र संगठन SFI के गुंडों ने किया। हमले के बाद राज्यपाल खान ने केरल के मुख्यमंत्री पर हमला करवाने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार, 11 दिसम्बर, 2023 की शाम को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अपने काफिले के साथ एयरपोर्ट के लिए जा रहे थे। इसी दौरान SFI के गुंडों ने उनकी आधिकारिक गाड़ी को रोक लिया और उस पर हमला किया।
SFI के गुंडों ने राज्यपाल की गाड़ियों को रोक काले झंडे दिखाए। इससे काफी देर तक राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को रुकना पड़ा। SFI गुंडों के इस हिंसक प्रदर्शन से राज्यपाल गुस्सा हो गए और हमलावरों का सामना करने के लिए खुद ही सड़क पर उतर गए। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने SFI के गुंडों से कहा:
“मारो मुझे।”
राज्यपाल की सुरक्षा में लगी केरल पुलिस भी इस हमले के दौरान उनकी सुरक्षा करने में विफल दिखाई दी। हमलावर लगातार राज्यपाल को परेशान करते रहे। राज्यपाल को काले झंडे दिखाने वाले SFI के गुंडों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
राज्यपाल ने इसके बाद हमला करवाने का आरोप राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन उन्हें शारीरिक चोट पहुँचाने के लिए गुंडे भेज रहे हैं। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए।
राज्यपाल ने कहा, “इन गुंडों ने मेरी गाड़ी पर हमला किया। पुलिस को मेरी सुरक्षा के बारे पता होना चाहिए था। यह शर्म की बात है कि ये गुंडे मेरी गाड़ी को बीच सड़क में रोक रहे हैं और वो भी प्रदेश की राजधानी में। क्या ऐसा मुख्यमंत्री के साथ होता? क्या उनकी सुरक्षा में ऐसी गड़बड़ी होती?”
आगे राज्यपाल ने मुख्यमंत्री विजयन पर कहा, “पुलिस के अलावा मुख्यमंत्री विजयन ने पार्टी के बाउंसर भी अपनी सुरक्षा में लगाए हुए हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मुझे शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाने की साजिश कर रहे हैं, जैसा उन्होंने कन्नूर में किया था। लेकिन मैं बता दूँ कि जब तक मैं यहाँ राज्यपाल की गद्दी पर हूँ, ऐसा कुछ नहीं होने दूँगा।”
जानकारी के अनुसार, यह हमला करने वाले SFI गुंडों की संख्या 20 थी। इन सबको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि SFI के गुंडे राज्यपाल के विरुद्ध आरोप लगा रहे थे कि वह राज्य की शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण कर रहे हैं। SFI के गुंडों का कहना था कि राज्यपाल, प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में RSS के लोगों को नियुक्त कर रहे हैं।
राज्यपाल के काफिले पर हमला करने वाले SFI गुंडों पर अभी तक क्या कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट नहीं है। राज्य में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इसे एक काला दिन और कानून व्यवस्था की बहुत बड़ी नाकामी बताई है।
गौरतलब है कि राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ भी हाल ही में एक ऐसा ही प्रदर्शन हुआ था। इसमें केरल छात्र संगठन (KSY) और कॉन्ग्रेस के युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम ‘नव केरल सदस’ के दौरान हंगामा किया था।
इसके बाद इन कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने ‘हत्या के प्रयास’ का मुकदमा दर्ज कर लिया था। आरोप था कि इन कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पर जूता फेंका। प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं को कम्युनिस्ट छात्र संगठन के गुंडों ने मारा भी था।
अजमेर अभी चर्चा में है। कट्टर इस्लामी लोग मोइनुद्दीन चिश्ती (Moinuddin Chishti) को लेकर कही गई एक बात से नाराज हैं। ये लोग कभी इसे ‘सूफी संत’ बोलते हैं, कभी हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से पुकारते हैं। पैगंबर मोहम्मद पर लिखे-पढ़े-बोले गए बातों से ‘सर तन से जुदा’ करने वाली भीड़ अब ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती या हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के लिए भी लोगों की गर्दन काटने पर आमादा हैं। आखिर कौन था यह शख्स? कहाँ से आया था? क्या करता था?
जिस शख्स के नाम पर किसी का गला काट दिया जाए, ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी जाए, उस ख्वाजा गरीब नवाज़ (Khwaja Garib Nawaz) या मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा इतिहास हिंदू-विरोधी है, मंदिर/मूर्ति-भंजक है, गौहत्या के पाप से सना हुआ है। ये सिर्फ आरोप नहीं हैं, ऐतिहासिक तथ्य हैं, वो भी सबूतों के साथ। इतिहासकार एमए खान की पुस्तक से लेकर मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में लिखी गई बातों में इसकी कट्टरता का उल्लेख है। शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार ( Akhbar-Ul-Akhyar) से भी सचित्र उदाहरण लिया गया है।
‘सूफी संत’ का लिबास ओढ़ कर जो भारत आए, उन मकसद क्लियर था। इतिहास ने आपसे उनके मकसद को छिपाया, इसलिए वो ‘सूफी संत’ कहे जाते हैं, आप जाने-अनजाने जाकर चादर चढ़ा आते हैं। हकीकत में अधिकांश सूफी संत या तो इस्लामिक आक्रांताओं की आक्रमणकारी सेनाओं के साथ भारत आए थे, या इस्लाम के सैनिकों द्वारा की गई कुछ व्यापक विजय के बाद। लेकिन इन सबके भारत आने के पीछे सिर्फ एक ही लक्ष्य था और वह था इस्लाम का प्रचार। इसके लिए उलेमाओं के क्रूरतम आदेशों के साथ गाने-बजाने की आड़ में हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने वाले ‘संतों’ से बेहतर और क्या हो सकता था?
‘शांतिपूर्ण सूफीवाद’ का मिथक, कई सदियों तक इस्लामिक ‘विचारकों’ और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा खूब फैलाया गया है। वास्तविकता इन दावों से कहीं अलग और विपरीत है। वास्तविकता यह है कि इन सूफी संतों को भारत में इस्लामिक जिहाद को बढ़ावा देने, ‘काफिरों’ के धर्मांतरण और इस्लाम को स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया था।
इसी में एक सबसे प्रसिद्ध नाम आता है ‘सूफी संत’ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का, जिसे हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी पुकारा जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन वो राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था।
एमए खान की पुस्तक का अंश
इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है। उदाहरण के लिए औलिया इस्लाम ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।
पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।
गौरी के साथ भारत आकर अजमेर में लगाया था डेरा
यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।
एमए खान की पुस्तक का अंश
प्रतिदिन गाय का वध और मंदिरों को अपवित्र करते थे चिश्ती के शागिर्द
मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।
आना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।
पृथ्वीराज चौहान की जासूसी और उन्हें पकड़वाने में चिश्ती की भूमिका
खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”
हिन्दू राजा की बेटी ‘बीबी उमिया’ का अपहरण और निकाह
मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया।
साभार: शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार, अनुवाद – AMU में अब्दोलरेजा अधामी की PhD थीसिस, पेज 19
‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती ने खुशी-खुशी ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया। मोइनुद्दीन चिश्ती की सोच थी पैगंबर मोहम्मद की राह पर चलना। ऊपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए जमा की गई थीसिस में भी यह बात लिखी गई है। इसके अलावा खुद अजमेर दरगाह की वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी पहले उपलब्ध थी। इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।
सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’
सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’ अगर आप पढ़ें तो उसमें भी यह जानकारी दी गई है। इस किताब के खंड-1 के 124 पेज नंबर पर आप इसे पढ़ सकते हैं।