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मध्य प्रदेश में आज से मोहन की सरकार, राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा ने भी ली शपथ: PM मोदी, CM योगी समेत कई बड़े BJP नेता रहे मौजूद

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रचंड बहुमत से मिली जीत के बाद बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर मोहन यादव ने शपथ ली। राज्यपाल मंगू भाई छगन भाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुए शपथ ग्रहण समारोह में सीएम पद के साथ ही राजेन्द्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित बीजेपी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

बताते चलें कि शिवराज चौहान सरकार में मंत्री रहे मोहन यादव को सोमवार (11 दिसंबर, 2023) को एक बैठक में सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था। मोहन यादव को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी माना जाता है। वो उज्जैन के रहने वाले हैं।

वे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से आते हैं। इनकी संख्या प्रदेश की आबादी में 48 फीसदी से अधिक है।

इजरायल पर बरसेगा अल्लाह का कहर… भरी सभा में यहूदी देश को बद्दुआ दे रहे तुर्किए के मुस्लिम सांसद, आया हार्ट अटैक

तुर्की से तुर्किए हुए मुस्लिम बहुत मुल्क के सांसद हसन बित्मेज को भरी सभा में उस समय हार्ट अटैक आ गया, जब वे यहूदी देश इजरायल को कोस रहे थे। उन्होंने कहा कि गाजा पर हमला करने के कारण इजरायल पर ‘अल्लाह का कहर’ बरपेगा। इसके बाद ही उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। इसके पश्चात सांसद को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

53 वर्षीय हसन बित्मेज तुर्की इस्लामिक फ़ेलिसिटी पार्टी के सांसद हैं। वह इजरायल के हमास पर हमले के बारे में एक भाषण दे रहे थे। उन्होंने अपने भाषण का अंत ‘इजरायल पर अल्लाह का कहर बरपेगा और वह इससे बच नहीं सकेगा, मैं आप सबको सलाम करता हूँ’ कह कर किया।

इसके तुरंत बाद उन्हें हार्ट अटैक आया और वह जमीन पर गिर गए। हसन के गिरने के बाद वहाँ मौजूद अन्य सांसद उन्हें उठाने के लिए दौड़े। यहीं मौजूद एक अन्य सांसद डॉ. तुहान कोमेज ने उन्हें सीपीआर दी। हालाँकि, बित्मेज की हालत में सुधार नहीं आया और उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर बाहर ले जाया गया।

तुर्किए के स्वास्थ्य मंत्री ने एक्स/ट्विटर पर लिखा, “फेलिसिटी पार्टी के डिप्टी मिस्टर हसन बित्मेज, जो कि तुर्की की संसद के सदस्य हैं, उन्हें उनके भाषण के दौरान समस्या हुई। मैं उनके स्वास्थ्य के विषय में लगातार जानकारी ले रहा हूँ। उनका अंकारा के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।”

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हसन बित्मेज को डायबिटीज की बीमारी भी है। अस्पताल में उनकी एंजियोग्राफी भी हुई। जिस भाषण के दौरान वह गिरे, उसमें वह तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप आर्दोआन की आलोचना कर रहे थे। उनका कहना था कि इजरायल और गाजा के मुद्दे पर आर्दोआन कठोर नहीं हो रहे।

गौरतलब है इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था। इसके बाद इजरायल गाजा में सैन्य अभियान चला रहा है। गाजा के भीतर छुपे हमास के आतंकियों को इजरायल ढूंढ कर मार रहा है। कई मुस्लिम देश इजरायल के इस एक्शन की आलोचना कर रहे हैं।

दुबई में पकड़ा गया महादेव ऐप वाला रवि उप्पल, भारत लाने की तैयारी: इंटरपोल ने जारी कर रखा था रेड कॉर्नर नोटिस, ED कर रही है जाँच

रवि उप्पल दुबई में 12 दिसंबर 2023 को पकड़ा गया। वह सौरभ चंद्राकर के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप महादेव का संचालन करता था। 43 साल के उप्पल को जल्द भारत को प्रत्यर्पित किए जाने की संभावना है।

उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच कर रही है। वहीं मुंबई और छत्तीसगढ़ पुलिस भी इस केस की जाँच में जुटी है।

महादेव ऐप का सालाना कारोबार करीब 20 हजार करोड़ रुपए का बताया जाता है। दुबई से इसका संचालन होता था। अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के बताए जाते हैं। लेनदेन के लिए बेनामी खाते का इस्तेमाल किया जाता है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भी इस मामले में गंभीर आरोप हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रवि उप्पल के खिलाफ ED के अनुरोध पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। ED ने इंटरपोल को बताया था कि उप्पल ने बिना भारत की नागरिकता छोड़े ही वनुआतु के पासपोर्ट प्रयोग किया है। उप्पल की गिरफ्तारी के बाद उसे भारत लाने के तैयारियाँ शुरू कर दी गई है। उससे पूछताछ में कई अन्य अहम जानकारियाँ सामने आ सकती हैं।

ED ने अपनी चार्जशीट में रवि उप्पल के अलावा सौरभ चंद्राकर को भी आरोपित किया था। सौरभ महादेव ऐप का प्रमोटर और मामले का मास्टरमाइंड बताया जाता है। सौरभ के खिलाफ भी इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा है और उसकी लोकेशन UAE में बताई जा रही है। रवि उप्पल के बाद अब सौरभ चंद्राकर की भी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। ED ने अदालत से रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी हासिल कर रखे हैं।

बताते चलें कि महादेव सट्टेबाजी ऐप मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा मुद्दा बन गया था। इस केस में गिरफ्तार हुए एक आरोपित ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने ऐप के प्रमोटर से 500 करोड़ रुपए की रिश्वत भी ली थी। मामले के खुलासे के बाद भाजपा ने छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का इस्तीफा माँगा था।

छत्तीसगढ़ CM पद की शपथ लेने से पहले जिनकी तस्वीर को विष्णुदेव साय ने माथे से लगाया, कौन हैं वे दिलीप सिंह जूदेव

10 दिसंबर 2023। बीजेपी ने विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में चुना। उनके नाम की घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें युवा साय के कंधे पर हाथ रखकर एक शख्स खड़ा है और दोनों मुस्कुरा रहे हैं।

13 दिसंबर 2023 को विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। उससे पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह उसी व्यक्ति की तस्वीर अपने माथे से लगाते दिख रहे हैं, जिसने वायरल तस्वीर में उनके कंधों पर हाथ खड़ा कर रखा था।

अपने राजनीतिक जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण में साय जिस व्यक्ति की तस्वीर को अपने माथे से लगा रहे हैं, वे कोई और नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे दिलीप सिंह जूदेव हैं। जूदेव को साय का राजनीतिक गुरु कहा जाता है। कहा जाता है कि वे जूदेव ही थे, जिन्होंने 26 साल की उम्र में साय को विधायक बनवा दिया था। यह भी कहा जाता है कि कभी जूदेव ने युवा साय से यह भी कहा था कि वे एक दिन मुख्यमंत्री भी बनेंगे।

यही कारण है कि साय ने CM पद की शपथ लेने से पहले जशपुर राजपरिवार के सदस्यों से से मुलाकात की और इस दौरान स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की तस्वीर को माथे से लगा लिया। इस दौरान जसपुर राजपरिवार की राजमाता माधवी देवी, स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे।

कौन थे दिलीप सिंह जूदेव?

1949 में जशपुर राजपरिवार में जन्मे दिलीप सिंह जूदेव छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा नाम थे। उनकी पहचान जनजातीय समाज के उन लोगों का चरण पखार घर वापसी करवाने के लिए था जो ईसाई मिशनरियों की साजिशों का शिकार होकर धर्मांतरित हो गए थे। 2013 में अपने निधन से पहले तक दिलीप सिंह जूदेव ‘घर वापसी’ का यह अभियान चलाते रहे।

जूदेव का का मानना था कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई बन जाता है तो उसके मन में भारत माता के लिए वैसा प्रेम नहीं रह जाता। ऐसे में इन लोगों को तोड़ना बहुत आसान हो जाता है। उनका मानना था कि ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की साजिशें भारत को विखंडित करने की साजिशों का हिस्सा है।

दिलीप सिंह जूदेव ने 2009 में एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं दुनिया घूम चूका हूँ। मुझे पता है ईसाई मिशनरियाँ धर्मांतरण के लिए क्या तरीके अपनाती हैं। ये सिर्फ धर्मांतरण नहीं है, ये देश का चरित्र बदल सकता है। यहाँ मंदिरों के बगल में चर्च के ऊपर क्रॉस लगाया गया है। क्या हम वेटिकन में हनुमान मंदिर बना सकते हैं? मैं ईसाइयों के विरुद्ध नहीं हूँ, लेकिन धर्मान्तरण के विरुद्ध हूँ।”

जूदेव का विष्णु देव साय से कैसा रिश्ता?

छत्तीसगढ़ के नए CM विष्णु देव साय कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने हैं। यह क्षेत्र जशपुर से सटा है। विष्णु देव साय और दिलीप सिंह जूदेव का साथ 1990 के दशक से चालू हुआ था। दिलीप सिंह जूदेव तब अविभाजित मध्य प्रदेश में भाजपा का बड़ा नाम हुआ करते थे। विष्णु देव साय 1989 में ग्राम पंचायत बगिया से सरपंच चुने गए थे।

यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी। जूदेव, साय के सरपंच रहते ही उनसे मिले थे और उनके काम से प्रभावित थे। इसके बाद जूदेव ने साय को आगे बढ़ाया। विष्णु देव साय इसके बाद जूदेव के आशीर्वाद से अविभाजित मध्य प्रदेश की तपकरा सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते। इसके बाद 1999 में विष्णु देव साय लोकसभा पहुँचे। वे चार बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। जूदेव और साय साथ मिलकर इस इलाके में ईसाई मिशनरियों के दुष्प्रचार के विरुद्ध काम करते थे।

अब बेटे प्रबल प्रताप बढ़ा रहे दिलीप सिंह जूदेव का अभियान

दिलीप सिंह जूदेव का वर्ष 2013 में निधन हो गया था। उनके तीन बेटे- श्रुतान्जय सिंह जूदेव, युद्धवीर सिंह जूदेव और प्रबल प्रताप सिंह जूदेव हैं। इनमें से श्रुतान्जय और युद्धवीर सिंह की मृत्यु हो चुकी है।

अब उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव घर वापसी के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बार बीजेपी ने उन्हें मुश्किल माने जाने वाली कोटा सीट से विधानसभा चुनाव में उतारा था। लेकिन प्रबल प्रताप यह सीट नहीं जीत पाए। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव अब तक छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में 10,000 से अधिक हिन्दुओं की घर वापसी करवा चुके हैं। वर्ष 2021 में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का ऑपइंडिया से बातचीत की थी।

उन्होंने तब अपने पिता और घर वापसी के विषय में कहा था, “पिता जी के दिवंगत होने के बाद से मैं इस कार्य को आगे बढ़ा रहा हूँ। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में हमलोग 10 हजार से अधिक लोगों की इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए घर वापसी करवा चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण बीच में करीब दो साल हमारा यह अभियान रुक गया था। अब फिर से हम इसे गति दे रहे हैं। यह पवित्र काम है। देश निर्माण का काम है। इसे मेरे पिता ने शुरू किया और इससे जुड़कर मैं बहुत गौरवान्वित हूँ।”

गायों की लाश वाली तस्वीरें देख गुजरात हाई कोर्ट स्तब्ध, कहा- भगवान भी माफ नहीं करेंगे: खुले में फेंक दिए थे अवशेष

गुजरात के खेड़ा जिले के नाडियाद में गायों की मौत को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। गायों की लाश वाली तस्वीरें देख हाई कोर्ट स्तब्ध रह गया। उसने कहा कि इस कृत्य के लिए भगवान भी माफ नहीं करेंगे। मौत के बाद गायों के अवशेष खुले में ही फेंक दिए गए थे।

जस्टिस एजे शास्त्री और जस्टिस हेमंत प्रच्छक की बेंच ने सड़क पर खुले में घूमने वाले मवेशियों से होने वाली परेशानियों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए य​ह टिप्पणी की। नडियाद के रहने वाले मौलिक श्रीमाली ने यह याचिका दायर की थी। उन्होंने इस समस्या की तरफ कोर्ट का ध्यान खींचने के लिए खुले में छोड़ दी गई गायों की लाश की तस्वीरें भी पीठ के सामने रखी।

हाई कोर्ट की बेंच ने इस पर हैरानी जताते हुए अधिकारियों से जाँच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। राज्य सरकार की नीति के तहत आवारा पशुओं की परेशानी से निपटने के लिए गायें बाड़े में रखी गई थी। इनमें 30 गायों की मौत हो गई थी। कोर्ट ने इसे लेकर खेड़ा जिले के कलेक्टर से रिपोर्ट तलब की है।

गायों की लाशों की तस्वीरें देखने के बाद जस्टिस शास्त्री ने कहा, “यह बहुत परेशान करने, चौंकाने वाला और सकते में डालने वाला है। हमें लगता है कि किसी नीति को नियमित करने और लागू करने की आड़ में निर्दोष जानवरों की हत्या नहीं की जा सकती। इंसानी जिंदगी की सहूलियत के लिए हम ऐसी चीज की की मंजूरी नहीं दे सकते।” उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है तो भगवान भी हमें माफ नहीं करेंगे। निर्दोष जानवरों को इस तरह खत्म नहीं किया जा सकता। लोगों की सुविधा के लिए एक भी निर्दोष जानवर की हत्या नहीं की जानी चाहिए।

गुजराज HC ने इसे लेकर महाधिवक्ता कमल त्रिवेद्वी को रिपोर्ट पेश करने को कहा। महाअधिवक्ता ने इस मसले पर गुजराज HC के सख्त रवैए को देखते हुए कार्रवाई करने का वादा किया है। उन्होंने हाईकोर्ट से ये भी कहा कि इस तरह के काम कुछ शरातती तत्वों के इशारों पर होते है। अधिकारी ये पता लगाएँगे कि ये उपद्रवी और शरारती तत्व आखिर कौन हैं।

इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार यानी आज 13 दिसंबर को है। हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे मवेशियों को रखने की जगह की स्थिति और नडियाद की घटना को लेकर कार्रवाई पर विवरण पेश करेंगे। गौरतलब है कि गुजरात में गायों की हत्या पर आजीवन कारावास की सजा है। इसे 2017 में लागू किया गया।

जिस महिला मैनेजर की मौत के बाद आदित्य ठाकरे पर उठे सवाल, जिससे रेप तक के दावे, उसकी फाइल फिर से खुली, SIT करेगी नए सिरे से जाँच

दिशा सालियान की मौत की फाइल फिर से खुल गई है। मुंबई पुलिस की एसआईटी नए सिरे से मामले की जाँच करेगी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर थीं। उनकी मौत को लेकर कई तरह के दावे मीडिया में आ चुके हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे से भी इस मौत को लेकर सवाल पूछे जा चुके हैं।

कथित तौर पर साल 2020 में 8 जून की रात मुंबई के मलाड में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने की वजह से दिशा की मौत हो गई थी। मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। इसके कुछ ही दिन बाद 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे।

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले दिनो दिशा मामले की दोबारा जाँच की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस मामले में पुलिस को नए सबूत मिले हैं। अब आधिकारिक तौर पर जाँच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है।

कौन थी दिशा सालियान

दिशा सालियान सेलिब्रिटी मैनेजर का काम करती थी। सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रही थी। कथित तौर पर मलाड के गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से गिरकर उनकी जान चली गई थी। इस मामले को शुरुआत से ही संदिग्ध बताया जा रहा। दिशा सालियान के साथ गैंगरेप और हत्या के दावे किए गए थे। पोस्टमार्टम में दो दिन की देरी पर भी सवाल उठे थे। अभिनेत्री कंगना रनौत ने तो सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौत के मामले में सीधे-सीधे आदित्य ठाकरे से सवाल पूछे थे।

दिशा सालियान मौत की एसआईटी करेगी जाँच

दिशा सालियान की मौत को शुरुआत में मुंबई पुलिस ने खुदकुशी बता केस बंद कर दिया था। अब महाराष्ट्र सरकार के आदेश के बाद मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर अजय बंसल की निगरानी में इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी इस मामले की जाँच करेंगे। इस जाँच का जिम्मा सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर चिमाजी अधम को सौंपा गया है। वो मालवाणी पुलिस स्टेशन में तैनात हैं।

दिशा सालियान की मौत को लेकर कई दावे

दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।” वहीं, मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया था कि 8 जून की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। इस रात उन्होंने अपने घर पर पार्टी रखी थी। बाद में 14वीं मंजिल से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। चश्मदीद ने बताया था कि उस रात पार्टी में काफी तेज म्यूजिक बज रहा था। इसके कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार दब गई थी।

देवेंद्र फडणवीस ने किया था दोबारा जाँच का ऐलान

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में देश की संसद में भी दिशा सालियान की मौत का मामला उठा था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी बाला साहेब शिवसेना के सांसद राहुल शेवाले ने 21 दिसंबर 2022 को संसद में बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे। इसके बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधायक भरत गोगावले और बीजेपी विधायक नितेश राणे ने महाराष्ट्र विधानसभा में भी सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मुद्दा उठाया और इस मामले की जाँच की माँग की। इसके बाद डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया कि इस मामले की जाँच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम द्वारा करवाई जाएगी।

आदित्य ठाकरे की नार्को टेस्ट की माँग

इस मामले में बीजेपी नेता नितेश राणे ने आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराने की माँग की थी। राणे ने 22 दिसंबर 2022 को मीडियाकर्मियों से कहा, “दिशा सालियान की मौत का सच सामने आने दीजिए। यह मामला अभी भी मुंबई पुलिस के पास है। अभी तक इसकी सीबीआई जाँच नहीं कराई गई है। मैं सीएम से इसकी जाँच कराने का अनुरोध करूँगा। फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूरी किताब के पन्ने अभी मिलने बाकी हैं। आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए।”

जून 2023 में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौतों के मामले में पुलिस अब भी सक्रिय है। इन मामलों पर पुलिस गौर कर रही है और कुछ लोगों से सबूत सौंपने के लिए कहा है। उन्होंने कहा था कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लोगों ने कुछ सबूत पुलिस को सौंपें हैं। फिलहाल उनकी विश्वसनीयता की जाँच की जा रही है। फडणवीस ने दिशा सालियान की मौत मामले पर बोलते हुए कहा था कि जाँच चल रही है और अभी सारा ध्यान सबूतों की प्रमाणिकता जाँचने पर है।

BJP की सोशल इंजीनियरिंग से खिले विष्णु, मोहन और भजन, 2024 से पहले हिंदुओं को जाति में बाँटने की राजनीति मुरझाई

हिंदी बेल्ट के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में जातीय जनगणना के आँकड़े जारी किए गए थे। इसके आसपास ही बीजेपी के खिलाफ लामबंद हुई राजनीतिक पार्टियाँ ‘सामान्य वर्सेज ओबीसी-एससी-एसटी’ के नाम पर जातीय राजनीति को हवा दे रही थी। वो भी उस समय, जब अगले साल लोकसभा चुनाव हैं। उससे पहले देश के सभी हिंदुओं को एकजुट करने वाले भगवान राम के जन्मस्थल पर भव्य राम मंदिर का उद्घाटन होना है।

चूँकि ये जातीय कार्ड इसीलिए उछाले जा रहे थे, ताकि हिंदू एकजुट न हो सकें, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सभी जातिगत पार्टियों की हवा निकाल दी है। भाजपा ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्रियों और उप-मुख्यमंत्रियों के नाम पर उन 9 नामों की घोषणा की है, जिसका अंदाजा किसी को भी नहीं था। इन 9 नामों ने विपक्षी गठबंधन की हिंदुओं की एकता को खंडित करने की साजिश को एक झटके में चकनाचूर कर दिया है।

इन राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले सड़क से लेकर संसद तक कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी खुलेआम ओबीसी-ओबीसी की रट लगाए हुए थे, तो I.N.D.I. गठबंधन की अन्य पार्टियाँ जैसे सपा, आरजेडी, जेडीयू भी ‘जिसकी जितनी संख्या भारी’ के नाम पर जातिगत कार्ड खेल रही थीं। ये सभी राजनीतिक दल पूरे देश के हिंदुओं को जातीय रूप से राजनीतिक तौर पर खंड-खंड करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन 3 दिसंबर, 2023 को जब इन राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो I.N.D.I. गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी और दो राज्यों में सत्ता संभाल रही कॉन्ग्रेस पार्टी की बुरी तरह से हार हुई।

इसके बाद से एक सप्ताह से अधिक समय तक भाजपा ने तीनों ही राज्यों में मुख्यमंत्रियों के नामों की घोषणा नहीं की और जब 10, 11 और 12 दिसंबर को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के नामों की घोषणा हुई, तो विपक्षी गठबंधन के नेताओं के सारे दाँव-पेंच एक झटके में स्वाहा हो गए।

BJP ही सोशल इंजीनियरिंग की असली मास्टर

बीजेपी ही राजनीति में सोशल इंजीनियरिंग लेकर आई थी। गोविंदाचार्य, उमा भारती, राम प्रकाश गुप्ता जैसे नामों को आगे बढ़ाया और अब इस बार तीन राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद सभी राज्यों में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पदों के लिए ऐसे नाम सामने रख दिए हैं, जिनका विरोध करते विपक्षी पार्टियों को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। बीजेपी ने जनजातीय, ओबीसी और ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिए, तो दलित, राजपूत, ब्राह्मण, ओबीसी वर्ग के नेताओं को उप-मुख्यमंत्री बनाकर फिर से अपनी सोशल इंजीनियरिंग वाली छाप छोड़ दी है।

इसका असर सोशल मीडिया पर भी दिख रहा है। राजस्थान में दशकों बाद ब्राह्मण मुख्यमंत्री बनाकर, मध्य प्रदेश में यादव मुख्यमंत्री बनाकर और छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय बहुल राज्य में जनजातीय व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के बाद सोशल मीडिया तक में बीजेपी का समर्थन बढ़ा है। कई ऐसे सोशल मीडिया हैंडल, जो अब तक ओबीसी हितैषी और I.N.D.I. गठबंधन के हितैषी बने नजर आते थे, वो भी बीजेपी के इन मास्टरस्ट्रोक्स के चलते खामोश हो गए हैं। आइए, बताते हैं कि बीजेपी ने तीनों राज्यों में किन-किन लोगों को कमान सौंपी है।

छत्तीसगढ़ : भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में प्रचंड जीत हासिल की। संख्याबल के हिसाब से जनजातीय राज्यों में सबसे बड़े राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने वरिष्ठ जनजातीय नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया। बीजेपी ने 10 दिसंबर को छत्तीसगढ़ में सोशल इंजीनियरिंग का असली पाठ विपक्षी दलों को पढ़ाया। यहाँ जनजातीय मुख्यमंत्री के बाद ब्राह्मण चेहरे विजय शर्मा को उप मुख्यमंत्री बनाया, तो राज्य के सबसे बड़े वोटर वर्ग ओबीसी से अरुण साव को भी उप-मुख्यमंत्री बनाया। यही नहीं, अरुण साव ही इस समय छत्तीसगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं। इससे भी आगे बढ़ते हुए बीजेपी ने तीन बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह को विधानसभा अध्यक्ष बनाया। वो छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ विधायक भी हैं। इस समय से छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने जनजातीय, ओबीसी और सामान्य तीनों ही वर्गों को सम्मान दिया।

मध्य प्रदेश : बीजेपी ने मध्य प्रदेश में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। इस बार बीजेपी ने दो तिहाई से भी अधिक सीटों पर जीत हासिल की। 11 दिसंबर को बीजेपी ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री के नामों की घोषणा की। बीजेपी ने ओबीसी चेहरे शिवराज सिंह चौहान को ओबीसी चेहरे डॉ मोहन यादव से रिप्लेश किया। पार्टी ने दलित नेता जगदीश देवड़ा को उप-मुख्यमंत्री बनाया, तो ब्राह्मण चेहरे राजेंद्र शुक्ला को भी उप-मुख्यमंत्री बनाया। यही नहीं, बीजेपी ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया। इस तरह से एक बार फिर से बीजेपी ने अपने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले से विपक्षियों को चौंका दिया।

खास बात ये है कि डॉ मोहन यादव उस यादव समाज से आते हैं, जो पड़ोस के उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ओबीसी राजनीति की अगुवाई करती है। इन्हीं राज्यों में विपक्ष ओबीसी-ओबीसी का खेल खेलने की कोशिश में थी, लेकिन डॉ मोहन यादव के नाम की घोषणा कर बीजेपी ने सपा, RJD, JDU जैसी पार्टियों की राजनीतिक जमीन ही खिसका दी। खास बात ये है कि डॉ मोहन यादव की ससुराल यूपी के सुल्तानपुर (अवध क्षेत्र) में है। ऐसे में इटावा से पूरे राज्य के यादव वोटबैंक को साध रही अखिलेश की सपा के लिए डॉ मोहन यादव का नाम ही बड़ी चुनौती बन गया है।

चूँकि ओबीसी और खासकर यादव-मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति करने वाली सपा के सामने अब भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग वाला हिंदुत्व खड़ा हो गया है, ऐसे में उनकी बोलती बंद हो गई है।

राजस्थान : बीजेपी ने 12 दिसंबर को तीसरे राज्य राजस्थान में मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद के लिए नामों की घोषणा की। बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया है। वो पहली बार विधानसभा के लिए चुने गए हैं, लेकिन लंबे समय से RSS से जुड़े हुए हैं। भजन लाल के साथ दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को उप-मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया है। दीया कुमारी जहाँ आमेर राजघराने से आती हैं, वहीं प्रेमचंद बैरवा राजस्थान में भाजपा का दलित चेहरा हैं। इस तरह से राजस्थान में भी बीजेपी ने सोशल इंजीनियरिंग का अच्छा उपयोग किया है।

इन 9 नामों में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व तो है ही, साथ ही उन ब्राह्मणों के लिए भी संदेश है कि पार्टी उन्हें अनदेखा नहीं कर रही है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में ब्राह्मणों को उप-मुख्यमंत्री पद मिला है, तो राजस्थान में मुख्यमंत्री पद। कई सालों पर ऐसा हुआ है, जब हिंदी पट्टी में बीजेपी ने किसी ब्राह्मण को मुख्यमंत्री पद सौंपा हो। खास बात ये है कि अगले साल लोकसभा चुनाव है। ऐसे में राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा जागरुक ब्राह्मणों की तरफदारी अब बीजेपी को काफी फायदा देने वाली है। वहीं, डॉ मोहन यादव के दम पर वो यूपी और बिहार की जातीय पार्टियों को खुली चुनौती पेश कर पाएगी। जबकि विष्णुदेव साय के होने का फायदा बीजेपी को झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा जैसे जनजातीय राज्यों में मिलने वाला है।

किन बातों के दम पर मजबूत होती जा रही बीजेपी?

हिंदुत्व विचारधारा: बीजेपी की मूल विचारधारा हिंदुत्व एक एकजुट हिंदू पहचान पर जोर देता है, जो जातिगत अंतरों से ऊपर है। यह कथा कई हिंदुओं के साथ प्रतिध्वनित होती है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को वापस पाने और भारत में अपनी बहुसंख्यक स्थिति का दावा करने का प्रयास करते हैं।

विकास का एजेंडा: बीजेपी का आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण पर ध्यान केंद्रित विभिन्न हिंदू समुदायों से समर्थन आकर्षित किया है, चाहे जाति कुछ भी हो। यह समावेशी दृष्टिकोण समाज के विभिन्न स्तरों से समर्थन प्राप्त कर रहा है।

रणनीतिक गठबंधन: बीजेपी ने विभिन्न जातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्रीय दलों के साथ रणनीतिक गठबंधन किए हैं, जिससे इसकी अपील बढ़ गई है और इसके चुनावी आधार को मजबूत किया गया है।

जाति-आधारित दलों का कमजोर होना: पारंपरिक जाति-आधारित दलों का पतन एक ऐसी शून्यता पैदा कर चुका है जिसे बीजेपी ने प्रभावी ढंग से भर दिया है, खुद को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में पेश कर रही है। बीजेपी ने जाति आधारित पार्टियों के लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग से ऐसी चुनौती पेश की है, जिसकी काट निकाल पाना इन दलों के लिए आसान नहीं रहने वाला।

बीजेपी का दूरदर्शी और सक्षम नेतृत्व, करिश्माई नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी का नेतृत्व बीजेपी के लिए दूरदर्शी और सक्षम रहा है। उन्होंने भारत को दुनिया की एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित करने में मदद की है। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण और सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण प्रगति की है। मोदी एक करिश्माई नेता हैं जो लोगों को प्रेरित करने में सक्षम हैं। उन्होंने भारत को एक अधिक मजबूत और समृद्ध देश बनाने के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रदान की है। उनकी नीतियों ने भारत में विकास और परिवर्तन को प्रेरित किया है।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने भारत में एक नई राजनीतिक युग की शुरुआत की है। उनकी नीतियों ने भारत को एक अधिक मजबूत, समृद्ध और समावेशी देश बनाने में मदद की है। वहीं, दूसरे दलों के पास अब भी नरेंद्र मोदी का कोई तोड़ नहीं दिखता।

इंडी गठबंधन के पास नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई प्लान ही नहीं!

अब लोकसभा चुनाव 2024 में महज कुछ माह का ही समय बचा है। चूँकि अभी तक जातिगत जनगणना और मंडल की राजनीति कर एकजुट होने की कोशिश कर रही राजनीतिक पार्टियों के पास कोई मुद्दा ही नहीं बचा है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए अब इंडी गठबंधन व अन्य राजनीतिक दलों को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ेगी। फिर इन दलों की रणनीति जो अब तक नरेंद्र मोदी को रोकना तो दूर, उनकी चुनावी जीत की रफ्तार तक को धीमा नहीं कर पाई, वो सिर्फ कुछ माह में किस तरह की नई रणनीति बनाएंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

साफ है, भारतीय जनता पार्टी ने इन तीन राज्यों में मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री पदों पर जिन नामों को बैठाया है, उनका असर लंबे समय तक रहने वाला है। वैसे भी, बीजेपी को पसंद करने वाली जनता हर तरफ से बीजेपी के साथ ही खड़ी दिखाई दे रही है, ऐसे में तीन राज्यों के माध्यम से पूरे देश के हिंदुओं को एकजुट करने वाले बीजेपी के इस कदम से उसके लिए लोकसभा चुनाव 2024 में जीत की हैट्रिक और नरेंद्र मोदी का तीसरा बाद प्रधानमंत्री बनना लगभग तय ही हो गया है।

राजस्थान के ‘लाल’ बने भजनलाल तो परिजन बोले- यह बंसी वाले की कृपा, राजस्थान के नए CM ने गणेश मंदिर में की पूजा-अर्चना

राजस्थान में भाजपा विधायक दल के नेता एवं मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद भजनलाल शर्मा ने राजधानी जयपुर स्थित मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहाँ उन्हें पुजारियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना करते हुए देखा गया। इस दौरान वहाँ भगवान गणपति के जयकारे भी लगे। राजस्थान के नए मुख्यमंत्री को इस दौरान गले में भगवा अंगोछा डाले हुए भी देखा गया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री रहे भजनलाल शर्मा अब क्षेत्रफल के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य के CM हैं।

उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद परिजन भी खुश हैं और उनके घर पर जश्न का माहौल है। भजनलाल शर्मा की माँ गोमती देवी ने कहा कि उनके बेटे के सीएम बनने के बाद उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है, ये भगवान की मर्जी है। बुजुर्ग माँ ने कहा कि बालाजी महाराज की कृपा है। माँ ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। उन्होंने बंसी वाले की कृपा को भजनलाल शर्मा के सीएम बनने का कारण बताया। इस दौरान उन्होंने हाथ जोड़ कर ईश्वर को प्रणाम किया।

वहीं भरतपुर में उनके पिता कृष्णलाल शर्मा ने कहा कि ये बहुत बढ़िया है। उन्होंने इस दौरान प्रदेश की जनता को भी धन्यवाद दिया। जयपुर के सांगानेर से पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा 55 वर्ष के हैं। राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। पर्यवेक्षक के रूप में आए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान पार्टी अनुशासन की भी बात की।

भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उनकी पत्नी गीता शर्मा ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस दौरान जनता और सभी नेताओं को धन्यवाद दिया। गीता शर्मा ने जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बंसी वाले की कृपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से उनके पति मुख्यमंत्री बने हैं। भजनलाल शर्मा की पत्नी इस दौरान ख़ुशी के कारण हाथ जोड़ कर रोने भी लगीं। सांगानेर से उन्होंने 48,000 से भी अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।

राजस्थान के पुष्कर सरोवर में भजनलाल शर्मा के सीएम बनने के बाद दुग्धाभिषेक भी किया गया। राज्य में दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा को उप-मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया है। वहीं वासुदेव देवनानी को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने अजमेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की है। भजनलाल शर्मा जहाँ ब्राह्मण समाज से आते हैं, दीया कुमार राजपूत और प्रेमचंद बैरवा दलित समुदाय से आते हैं। इससे पहले भाजपा ने छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साई और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी थी।

40 किलोमीटर की यात्रा, 3 बार बलात्कार, मारपीट… अर्धनग्न स्थिति में प्लेटफॉर्म पर कूद कर महिला ने बचाई जान, स्पेशल ट्रेन में बंद कर लिया था कोच का दरवाजा

मध्य प्रदेश में 30 साल की महिला को ट्रेन से उतरकर रविवार (10 दिसंबर, 2023) शाम को खाली पड़ी स्पेशल ट्रेन के एसी कोच का टॉयलेट इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। इस दौरान एक दरिंदा भी उसका पीछा करते हुए उस ट्रेन में पहुँचा और इस चलती ट्रेन में 40 किलोमीटर तक की दूरी में 3 बार उसका बलात्कार किया।

किसी तरह खुद को बचाते हुए ये पीड़ित महिला इस चलती हुई स्पेशल ट्रेन से सतना रेलवे स्टेशन पर उतरने में कामयाब रही। यहाँ उसने तुरंत ऑन-ड्यूटी पुलिस को अपने साथ हुई वारदात की सूचना दी। सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के एक अधिकारी के मुताबिक, ये घिनौनी वारदात मध्य प्रदेश के कटनी जिले में चलती ट्रेन में हुई।

सतना जीआरपी थाना प्रभारी एलपी कश्यप के मुताबिक, आरोपित की पहचान उत्तर प्रदेश के बांदा के मूल निवासी और मौजूदा वक्त में कटनी में रहने वाले 22 साल के कमलेश कुशवाह के तौर पर हुई है। सतना जीआरपी थाना प्रभारी कश्यप का कहना है कि आरोपित को गिरफ्तार कर सुबह 4 बजे ही सतना लाया गया और इसके बाद उसे कटनी भेजा गया जहाँ उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया। वहीं पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सारिका पांडे ने कहा कि आरोपित के आपराधिक रिकॉर्ड की जाँच की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब महिला रविवार शाम को सतना और कटनी सेक्शन के बीच पकरिया और मैहर रेलवे स्टेशनों के बीच जबलपुर-रीवा मेमू यानी पैसेंजर ट्रेन में चढ़ी थी। सतना जीआरपी पुलिस स्टेशन के प्रभारी कश्यप ने आगे बताया कि पीड़ित महिला सतना जिले के उचेहरा रेलवे स्टेशन की यात्रा करने के इरादे से कटनी रेलवे स्टेशन पर इस पैसेंजर ट्रेन में चढ़ी थी। हालाँकि, पकरिया रेलवे स्टेशन पर जब ये पैसेंजर ट्रेन रुकी तो इसी के साथ रीवा की तरफ जा रही एक खाली विशेष ट्रेन भी रुकी थी।

उन्होंने बताया कि यहाँ पर पीड़ित महिला अपनी ट्रेन से उतरी और टॉयलेट का इस्तेमाल करने के लिए वहाँ खड़ी इस विशेष ट्रेन के वातानुकूलित कोच में चली गई। आरोपित भी महिला के साथ पैसेंजर ट्रेन में ही था। उसने महिला का पीछा किया और वो भी इस विशेष ट्रेन के अंदर पहुँचा और उसने वहाँ कोच का दरवाज़ा बंद कर लिया।

उसने महिला पर पीछे से वार किया और उसे जोर से धक्का दिया। इससे वो ट्रेन के फर्श पर गिर गई। इससे उसके सिर पर गहरी चोट आई। जब विशेष ट्रेन फिर से आगे चल पड़ी तो आरोपित ने पकरिया और मैहर रेलवे स्टेशनों के बीच महिला के साथ मारपीट की और फिर से उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस को दी गई शिकायत में महिला ने कहा कि जब उसने आरोपित का विरोध किया तो उसने उसे जान से मारने की धमकी दी। महिला ने पुलिस को ये भी बताया कि उसने मैहर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन इसमें वो कामयाब नहीं हो पाई।

महिला ने पुलिस को बताया कि उसने सतना रेलवे स्टेशन पर आरोपित से कहा कि उसे बहुत प्यास लगी है। जैसे ही आरोपित पानी लेने के लिए इस विशेष ट्रेन से उतरा, पीड़ित महिला अपनी साड़ी, बैग और सैंडल को वहीं छोड़ अर्धनग्न हालत में प्लेटफॉर्म पर कूद पड़ी।

वो जितना तेज भाग सकती थी भागी। किसी तरह रात के 8 बजे पीड़ित महिला आधे कपड़ों और नंगे पाँव सतना रेलवे स्टेशन पर पहुँची। फिर उसने अपने साथ हुई वारदात की सूचना RPF कॉन्सटेबल को दी।

जबलपुर RPF के कमांडेंट अरुण त्रिपाठी के मुताबिक, जब रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के कॉन्सटेबल ने आरोपित को फिर से उसी ट्रेन में चढ़ते देखा तो वो भी उसमें सवार हो गया, लेकिन आरोपित ने एसी कोच का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहीं सूचना पाते ही जीआरपी मौके पर पहुँची, लेकिन तब-तक स्पेशल ट्रेन वहाँ से रवाना हो चुकी थी।

इसके बाद स्टेशन मास्टर को इस संबंध में सूचित किया गया और उनकी मदद से इस विशेष ट्रेन को सतना के रेलवे स्टेशन के नज़दीक पड़ने वाले कैमा रेलवे स्टेशन पर रुकवा लिया गया। तब तक जीआरपी भी रोड के रास्ते वहाँ पहुँच गई। हालाँकि, आरोपित ने वातानुकूलित डिब्बे के अंदर खुद को बंद कर अपना बचाव किया।

इस एसी कोच का लॉक नहीं खुल पाया, लेकिन इस दौरान जीआरपी की टीम भी ट्रेन में ही रही। इस दौरान ट्रेन जब रीवा पहुँची तब कहीं जाकर तीन घंटे की मशक्कत के बाद रीवा स्टेशन रेलवे मैकेनिकल सेक्शन के कर्मचारियों की मदद से आखिरकार वातानुकूलित डिब्बे का दरवाजा खोला गया। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे रीवा रेलवे स्टेशन पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।

गला रेता, प्राइवेट पार्ट पर चाकू से किए वार, हत्या से पहले फेसबुक पोस्ट में लिखा- हमारी बहन को मुस्लिमों के इलाके में छोड़ आया था…

हरियाणा के अंबाला में अपनी बहन की हत्या का आरोपित करन जायसवाल उर्फ कल्लू पकड़ा गया है। रिपोर्टों के अनुसार वह मंगलवार (12 नवंबर 2023) को राज्य के गृह मंत्री अनिल विज के घर सरेंडर करने पहुँचा था। लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

करण ने सोमवार (11 दिसंबर 2023) को अपनी बहन भावना की गला रेतकर हत्या कर दी थी। उसके प्राइवेट पार्ट पर भी चाकू से वार किए थे। हत्या से पहले उसने फेसबुक पर एक पोस्ट में बहन की हत्या मजबूरी में करने की बात कही थी। ससुराल वालों पर अपनी बहन को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। साथ ही कहा था कि मेरठ में उसकी बहन को मुस्लिमों के इलाके के पास रात में छोड़ दिया गया था। उसकी किस्मत अच्छी थी जो वह घर वापस आ गई। इस पोस्ट में उसने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से भी मदद की गुहार भी लगाई थी।

रिपोर्टों के अनुसार सोमवार देर शाम अंबाला छावनी के कच्चा बाजार में रहने वाले करन की 28 साल की बहन भावना जायसवाल से कहासुनी हुई थी। बहस बढ़ने पर करन ने बहन को चाकुओं से गोद डाला। उसने लगातार 30 वार किए। बहन के प्राइवेट पार्ट पर भी वार किए। इसके बाद वह फरार हो गया। परिवार वाले भावना को लेकर सिविल अस्पताल पहुँचे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और शव को अपने कब्जे में ले लिया। परिवार के मुताबिक, भावना की 2 साल पहले मेरठ के एक युवक से शादी हुई थी। लेकिन पति से अनबन के चलते वह पिछले 6 महीने से अपने मायके में अंबाला कैंट में रह रही थी, जबकि उसकी बेटी अपने पिता के पास मेरठ में रहती है।

फोटो साभार: फेसबुक अकाउंट करन जायसवाल

करन ने फेसबुक पर लिखा, “हमारी बहन का पति अंकुर जैन है। बहन के मांगलिक होने की वजह से उसके 9 दिनों में ही शादी रचाने का फैसला लिया गया था। हमने बगैर सोचे बहन की शादी कर दी। शादी के एक महीने के बाद ही लड़का हमारी बहन को रात 11 बजे के करीब मुस्लिमों के इलाके के नजदीक छोड़ गया।” करन ने ये भी आरोप लगाया कि बहन के ससुरालियों के रसूखदार लोगों से रिश्ते हैं।