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CM पर जूता फेंका तो मर्डर का केस, अब केरल के उसी मुख्यमंत्री ने वामपंथी गुंडे भेज करवाया राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान पर जानलेवा हमला?

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के काफिले पर राजधानी तिरुवनंतपुरम में हमला किया गया। यह हमला कम्युनिस्ट छात्र संगठन SFI के गुंडों ने किया। हमले के बाद राज्यपाल खान ने केरल के मुख्यमंत्री पर हमला करवाने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, 11 दिसम्बर, 2023 की शाम को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान अपने काफिले के साथ एयरपोर्ट के लिए जा रहे थे। इसी दौरान SFI के गुंडों ने उनकी आधिकारिक गाड़ी को रोक लिया और उस पर हमला किया

SFI के गुंडों ने राज्यपाल की गाड़ियों को रोक काले झंडे दिखाए। इससे काफी देर तक राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को रुकना पड़ा। SFI गुंडों के इस हिंसक प्रदर्शन से राज्यपाल गुस्सा हो गए और हमलावरों का सामना करने के लिए खुद ही सड़क पर उतर गए। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने SFI के गुंडों से कहा:

“मारो मुझे।”

राज्यपाल की सुरक्षा में लगी केरल पुलिस भी इस हमले के दौरान उनकी सुरक्षा करने में विफल दिखाई दी। हमलावर लगातार राज्यपाल को परेशान करते रहे। राज्यपाल को काले झंडे दिखाने वाले SFI के गुंडों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

राज्यपाल ने इसके बाद हमला करवाने का आरोप राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन उन्हें शारीरिक चोट पहुँचाने के लिए गुंडे भेज रहे हैं। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए।

राज्यपाल ने कहा, “इन गुंडों ने मेरी गाड़ी पर हमला किया। पुलिस को मेरी सुरक्षा के बारे पता होना चाहिए था। यह शर्म की बात है कि ये गुंडे मेरी गाड़ी को बीच सड़क में रोक रहे हैं और वो भी प्रदेश की राजधानी में। क्या ऐसा मुख्यमंत्री के साथ होता? क्या उनकी सुरक्षा में ऐसी गड़बड़ी होती?”

आगे राज्यपाल ने मुख्यमंत्री विजयन पर कहा, “पुलिस के अलावा मुख्यमंत्री विजयन ने पार्टी के बाउंसर भी अपनी सुरक्षा में लगाए हुए हैं। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन मुझे शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाने की साजिश कर रहे हैं, जैसा उन्होंने कन्नूर में किया था। लेकिन मैं बता दूँ कि जब तक मैं यहाँ राज्यपाल की गद्दी पर हूँ, ऐसा कुछ नहीं होने दूँगा।”

जानकारी के अनुसार, यह हमला करने वाले SFI गुंडों की संख्या 20 थी। इन सबको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि SFI के गुंडे राज्यपाल के विरुद्ध आरोप लगा रहे थे कि वह राज्य की शिक्षा व्यवस्था का भगवाकरण कर रहे हैं। SFI के गुंडों का कहना था कि राज्यपाल, प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में RSS के लोगों को नियुक्त कर रहे हैं।

राज्यपाल के काफिले पर हमला करने वाले SFI गुंडों पर अभी तक क्या कार्रवाई हुई है, यह स्पष्ट नहीं है। राज्य में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इसे एक काला दिन और कानून व्यवस्था की बहुत बड़ी नाकामी बताई है।

गौरतलब है कि राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ भी हाल ही में एक ऐसा ही प्रदर्शन हुआ था। इसमें केरल छात्र संगठन (KSY) और कॉन्ग्रेस के युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम ‘नव केरल सदस’ के दौरान हंगामा किया था।

इसके बाद इन कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने ‘हत्या के प्रयास’ का मुकदमा दर्ज कर लिया था। आरोप था कि इन कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पर जूता फेंका। प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं को कम्युनिस्ट छात्र संगठन के गुंडों ने मारा भी था।

हर दिन काटी गाय, मंदिर में फैलाया खून… मंदिर में ही खाते थे गोमांस: अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती और उसके शागिर्दों का सच

अजमेर अभी चर्चा में है। कट्टर इस्लामी लोग मोइनुद्दीन चिश्ती (Moinuddin Chishti) को लेकर कही गई एक बात से नाराज हैं। ये लोग कभी इसे ‘सूफी संत’ बोलते हैं, कभी हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से पुकारते हैं। पैगंबर मोहम्मद पर लिखे-पढ़े-बोले गए बातों से ‘सर तन से जुदा’ करने वाली भीड़ अब ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती या हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के लिए भी लोगों की गर्दन काटने पर आमादा हैं। आखिर कौन था यह शख्स? कहाँ से आया था? क्या करता था?

जिस शख्स के नाम पर किसी का गला काट दिया जाए, ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी जाए, उस ख्वाजा गरीब नवाज़ (Khwaja Garib Nawaz) या मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा इतिहास हिंदू-विरोधी है, मंदिर/मूर्ति-भंजक है, गौहत्या के पाप से सना हुआ है। ये सिर्फ आरोप नहीं हैं, ऐतिहासिक तथ्य हैं, वो भी सबूतों के साथ। इतिहासकार एमए खान की पुस्तक से लेकर मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में लिखी गई बातों में इसकी कट्टरता का उल्लेख है। शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार ( Akhbar-Ul-Akhyar) से भी सचित्र उदाहरण लिया गया है।

‘सूफी संत’ का लिबास ओढ़ कर जो भारत आए, उन मकसद क्लियर था। इतिहास ने आपसे उनके मकसद को छिपाया, इसलिए वो ‘सूफी संत’ कहे जाते हैं, आप जाने-अनजाने जाकर चादर चढ़ा आते हैं। हकीकत में अधिकांश सूफी संत या तो इस्लामिक आक्रांताओं की आक्रमणकारी सेनाओं के साथ भारत आए थे, या इस्लाम के सैनिकों द्वारा की गई कुछ व्यापक विजय के बाद। लेकिन इन सबके भारत आने के पीछे सिर्फ एक ही लक्ष्य था और वह था इस्लाम का प्रचार। इसके लिए उलेमाओं के क्रूरतम आदेशों के साथ गाने-बजाने की आड़ में हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने वाले ‘संतों’ से बेहतर और क्या हो सकता था?

‘शांतिपूर्ण सूफीवाद’ का मिथक, कई सदियों तक इस्लामिक ‘विचारकों’ और वामपंथी इतिहासकारों द्वारा खूब फैलाया गया है। वास्तविकता इन दावों से कहीं अलग और विपरीत है। वास्तविकता यह है कि इन सूफी संतों को भारत में इस्लामिक जिहाद को बढ़ावा देने, ‘काफिरों’ के धर्मांतरण और इस्लाम को स्थापित करने के उद्देश्य से लाया गया था।

इसी में एक सबसे प्रसिद्ध नाम आता है ‘सूफी संत’ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (Khwaja Moinuddin Chishti) का, जिसे हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के नाम से भी पुकारा जाता है। सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ईरान में हुआ था, लेकिन वो राजस्थान के अजमेर में दफनाया गया था।

एमए खान की पुस्तक का अंश

इतिहासकार एमए खान ने अपनी पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ (Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery) में इस बारे में विस्तार से लिखा है। उदाहरण के लिए औलिया इस्लाम ने अपने शिष्य शाह जलाल को बंगाल के हिंदू राजा के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए 360 अन्य शागिर्दों के साथ बंगाल भेजा था।

पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया।

गौरी के साथ भारत आकर अजमेर में लगाया था डेरा

यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि चिश्ती, शाह जलाल और औलिया जैसे सूफी ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए भारत आए थे। उदाहरण के लिए- मोइनुद्दीन चिश्ती, मुइज़-दीन मुहम्मद ग़ोरी की सेना के साथ भारत आए और गोरी द्वारा अजमेर को जीतने से पहले वहाँ गोरी की तरफ से अजमेर के राजा पृथ्वीराज चौहान की जासूसी करने के लिए अजमेर में बस गए थे। यहाँ उन्होंने पुष्कर झील के पास अपने ठिकाने स्थापित किए।

एमए खान की पुस्तक का अंश

प्रतिदिन गाय का वध और मंदिरों को अपवित्र करते थे चिश्ती के शागिर्द

मध्ययुगीन लेख ‘जवाहर-ए-फरीदी’ में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस तरह चिश्ती ने अजमेर की आना सागर झील, जो कि हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, पर बड़ी संख्या में गायों का क़त्ल किया, और इस क्षेत्र में गायों के खून से मंदिरों को अपवित्र करने का काम किया था। मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्द प्रतिदिन एक गाय का वध करते थे और मंदिर परिसर में बैठकर गोमांस खाते थे।

आना सागर झील का निर्माण ‘राजा अरणो रा आनाजी’ ने 1135 से 1150 के बीच करवाया था। ‘राजा अरणो रा आनाजी’ सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता थे। आज इतिहास की किताबों में अजमेर को हिन्दू-मुस्लिम’ समन्वय के पाठ के रूप में तो पढ़ाया जाता है, लेकिन यह जिक्र नहीं किया जाता है कि यह सूफी संत भारत में जिहाद को बढ़ावा देने और इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने हिन्दुओं के साथ हर प्रकार का उत्पीड़न स्वीकार किया।

पृथ्वीराज चौहान की जासूसी और उन्हें पकड़वाने में चिश्ती की भूमिका

खुद मोइनुद्दीन चिश्ती ने तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान को पकड़ लिया था और उन्हें ‘इस्लाम की सेना’ को सौंप दिया। लेख में इस बात का प्रमाण है कि चिश्ती ने चेतावनी भी जारी की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था – “हमने पिथौरा (पृथ्वीराज) को जिंदा पकड़ लिया है और उसे इस्लाम की सेना को सौंप दिया है।”

हिन्दू राजा की बेटी ‘बीबी उमिया’ का अपहरण और निकाह

मोइनुद्दीन चिश्ती का एक शागिर्द था मलिक ख़ितब। उसने एक हिंदू राजा की बेटी का अपहरण कर लिया और उसे चिश्ती को निकाह के लिए ‘उपहार’ के रूप में प्रस्तुत किया।

साभार: शेख अब्दुल हक मुहद्दिस देहलवी की अखबार-उल-अख्यार, अनुवाद – AMU में अब्दोलरेजा अधामी की PhD थीसिस, पेज 19

‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती ने खुशी-खुशी ‘उपहार’ स्वीकार किया और उसे ‘बीबी उमिया’ नाम दिया। मोइनुद्दीन चिश्ती की सोच थी पैगंबर मोहम्मद की राह पर चलना। ऊपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पीएचडी के लिए जमा की गई थीसिस में भी यह बात लिखी गई है। इसके अलावा खुद अजमेर दरगाह की वेबसाइट पर भी इसकी जानकारी पहले उपलब्ध थी। इसका स्क्रीनशॉट आप नीचे देख सकते हैं।

अजमेर दरगाह की वेबसाइट पर पहले दी गई जानकारी

अजमेर दरगाह की वेबसाइट का आर्काइव लिंक यहाँ देखा जा सकता है

सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’

सैय्यद अतहर अब्बास रिज़वी की किताब ‘भारत में सूफीवाद का इतिहास’ अगर आप पढ़ें तो उसमें भी यह जानकारी दी गई है। इस किताब के खंड-1 के 124 पेज नंबर पर आप इसे पढ़ सकते हैं।

दोनों हाथों में तलवारबाजी में महारत रखते हैं डॉ मोहन यादव, उज्जैन में विक्रमोत्सव को दी भव्यता: वकील के साथ-साथ व्यापारी भी हैं मध्य प्रदेश के नए CM

मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव एक दमदार नेता हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। तलवारबाजी में महारत रखने वाले मोहन यादव ने उज्जैन में विक्रमोत्सव को एक भव्य पहचान दी। उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश को नई शिक्षा नीति लागू करने वाला पहला राज्य बनाया। ऐसे कई दमदार कामों की वजह से उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।

मोहन यादव का जन्म 15 मार्च, 1965 को उज्जैन के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। छात्र जीवन से ही वह राजनीति में सक्रिय थे। उन्होंने छात्र संघ के चुनाव में जीत हासिल की और छात्र नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। डॉ मोहन यादव के पास बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए और Ph.D जैसी डिग्रियाँ हैं। वो वकालत भी करते रहे हैं और व्यापार भी।

डॉ मोहन यादव को साल 2013 में पहली बार उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुना गया। उन्होंने लगातार तीन बार इस सीट से जीत हासिल की है। साल 2020 में उन्हें शिवराज सिंह चौहान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी अगुवाई में मध्य प्रदेश नई शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।

मोहन यादव एक कुशल प्रशासक भी हैं। डॉ मोहन यादव उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रहे थे। वे सन 2010 तक उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे थे। उज्जैन विकास प्राधिकरण के उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में उज्जैन में कई अहम काम हुए। इस अवधि में उज्जैन में वेधशाला की स्थापना हुई। उनके कार्यकाल के दौरान उज्जैन में तारामंडल भी बना। डॉ मोहन यादव ने यहां विक्रमादित्य पीठ की भी स्थापना कराई। उन्होंने उज्जैन में विक्रमोत्सव को एक भव्य पहचान दी। यह एक ऐतिहासिक उत्सव है जो हर साल उज्जैन में आयोजित किया जाता है। मोहन यादव ने इस उत्सव को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

सामाजिक तौर पर डॉ मोहन यादव बेहद सक्रिय रहे हैं। उनका तलवारबाजी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वो दोनों हाथों से बिल्कुल सधी हुई तलवारबाजी करते दिख रहे हैं। हालाँकि, ये वीडियो कब का है, ये सामने नहीं आया है।

बता दें कि 3 दिसंबर को घोषित हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। इस चुनाव में मोहन यादव ने भी उज्जैन दक्षिण सीट से जीत हासिल की। इस बार जब नए मुख्यमंत्री को बनाने की बारी आई, तो उनके कामों को देखते हुए भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मत से मान लिया गया। भाजपा ने कहा है कि मोहन यादव एक कर्मठ और ईमानदार नेता हैं। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश एक समृद्ध और खुशहाल राज्य बनने की ओर तेजी से कदम आगे बढ़ाएगा।

कौन हैं ‘बिहार का पुनरुद्धार’ करने निकले IPS विकास वैभव, क्यों उनके जन संवाद में जुटी भीड़ से मची है खलबली

IPS विकास वैभव के आह्वान पर बेगूसराय में 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जुटी। उनके इस जन संवाद कार्यक्रम की काफी चर्चा हो रही है। उन्होंने बिहार में सामाजिक चेतना जागृत करने के लिए बड़ा अभियान चलाया है, जिसके तहत सैकड़ों कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। इसी के तहत बेगुसराय के GD कॉलेज में ‘नमस्ते बिहार’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसको संबोधित करते हुए आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने कहा कि जब सोच बड़ी होती है तो आदमी महान हो जाता है। बिहार में 9 करोड़ के आसपास युवा हैं, जिनकी उम्र 30 वर्ष से कम है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो बिहार को विकसित प्रदेश बनाना ही होगा।

आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने सामाजिक अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ एनजीओ की स्थापना की है। इसका लक्ष्य है बिहार को विकसित बनाना। ‘नमस्ते बिहार’ कार्यक्रम को संबोधित उन्होंने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि लोग हमेशा जाति के संघर्ष में उलझे रहे। हमें इससे निकलना होगा। उन्होंने कहा कि आप चाहते हैं सरकारी नौकरी करें, बिल्कुल करें, मगर सरकारी नौकरी में भ्रष्टाचार करेंगे तो क्या बिहार बदलेगा? बिल्कुल नहीं बदलेगा। इसके लिए जरूरी है कि हम ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। इस कार्यक्रम में 50 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि बिहार को अगर विकसित राज्य बनाना है तो हमें सबसे पहले उद्योग की ओर बढ़ना होगा। हर व्यक्ति को कारोबार की ओर बढ़ना होगा। इस कार्यक्रम में देश भर से बिहार से जुड़े लोग शामिल हुए। अब इसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है।

वरिष्ठ पत्रकार विकास भदौरिया ने एक्स पर लिखा, “आईपीएस विकास वैभव ने Let’s Inspire Bihar नाम का अभियान शुरू किया है, इस अभियान की एक बड़ी रैली बेगूसराय में हुई। इस भीड़ ने इसलिए ध्यान खींचा क्यों कि ये राजनीतिक या धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, इस अभियान से जुड़े हज़ारों सदस्य अब तक देश-विदेशों में कई कार्यक्रमों कर चुके हैं, आज जब ये लोग जुटे तो गरज एक थी कि जाति-संप्रदाय, लघुवादों से ऊपर उठकर, मिलकर बिहार के उज्ज्वलतम और स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करें। और तो और लक्ष्य भी निर्धारित है ऐसा बिहार 2047 पुनर्स्थापित करे, जहाँ ना पलायन हो ना शिक्षा अथवा रोजगार की कमी, वैसे ऐसे आंदोलन गतिशील भारतीय की प्राणवायु हैं और ये प्रसारित होते रहना ज़रूरी भी है।”

खास बात ये है कि हजारों लोगों के इस महाजुटान के पीछे कोई राजनीतिक ताकत नहीं थी। न ही किसी तरह का लोगों को फायदा होने वाला था, फिर भी इतना बड़ा जुटान हो गया, तो लोगों में चर्चा भी होनी स्वाभाविक है। खास बात ये है कि आईपीएस विकास वैभव के साथ ही लोग भी “मैं करूंगा अपने पूर्वजों की भूमि का पुनरुद्धार, मैं बदलूँगा बिहार।” संकल्प ले रहे थे।

क्या है ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’?

‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ एक एनजीओ है, जो सामाजिक चेतना और जन जागरण अभियान चलाती है। इसकी स्थापना आईपीएस विकास वैभव ने ही की है। इस एनजीओ से जुड़े लोगों का लक्ष्य है विकसित और बेहतर बिहार राज्य का निर्माण, जिसमें हजारों लोग जुड़े हैं। इस एनजीओ के माध्यम से बिहार से बाहर रह रहे बिहार के लोग भी जुड़े हैं और तमाम तरह के सहयोग दे रहे हैं। आईपीएस विकास वैभव का मानना है कि बिहार को पुनर्विकसित करने के लिए राजनीतिक से ज्यादा सामाजिक परिवर्तन की जरूरत है। वो इसी परिवर्तन की अलख जगाने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

राजनीति को लेकर क्या है आईपीएस विकास वैभव का विजन?

आईपीएस अधिकारी के तौर पर बिहार में तैनात विकास वैभव ने खुद के कभी राजनीति में शामिल होने की बात सार्वजनिक तौर पर तो नहीं कही है, लेकिन वो हमेशा इस बात को कहते हैं कि राजनीति में सही लोगों को आना ही होगा। अगर ईमानदार लोग राजनीति में आएंगे, तो समाज में परिवर्तन भी तेजी से आएगा।

आईपीएस विकास वैभव का कहना है कि अच्छे, नि:स्वार्थ और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए। इस बीच उनके बारे में लोग अंदाजा लगाने लगे हैं कि कहीं वो राजनीति में तो एंट्री नहीं करना चाहते हैं। हालाँकि मीडिया से बातचीत में विकास वैभव ने कहा है कि अभी लेट्स इंस्पायर के माध्यम से वो बिहार के पुनर्निर्माण में जुटे हैं। मैं लोगों को जागरुक करने में जुटा हूँ। मैं हर शनिवार और रविवार को परिवार के साथ रहने की जगह पूरे बिहार के साथ रहने की कोशिश करता हूँ, ताकि बिहार में सामाजिक परिवर्तन ला सकूँ। उन्होंने कहा कि वो बेगुसराय तक ही नहीं रुकेंगे, बल्कि आगामी 20 दिसंबर को आरा में इसी तरह के बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

पहले नौकरी से बर्खास्त, फिर जेल, अब घर भी हुआ कुर्क: अतीक अहमद की बहन-बहनोई के ठिकाने पर पहुँची यूपी पुलिस, बमबाज गुड्डू मुस्लिम को दी थी पनाह

उमेश पाल की हत्या के बाद शूटरों को पनाह देने के आरोप में उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफिया अतीक अहमद की बहन का घर कुर्क कर लिया है। फरवरी 2023 में हुए इस हत्याकांड में पुलिस ने अतीक की बहन नूरी और उसके शौहर अख़लाक़ को सह-अभियुक्त बनाया है। वायरल हुए एक वीडियो में बमबाज गुड्डू मुस्लिम को अतीक के बहनोई के घर में भी देखा गया था। प्रयागराज पुलिस ने शनिवार (9 दिसंबर, 2023) को मेरठ पहुँच कर कुर्की की यह कार्रवाई की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (9 दिसंबर, 2023) को प्रयागराज के थाना धूमनगंज की पुलिस टीम मेरठ पहुँची। यहाँ से वो नौचंदी थाना क्षेत्र में पड़ने वाले भवानी नगर पहुँची। स्थानीय मेरठ पुलिस भी साथ थी। भवानी नगर में अतीक के जीजा अख़लाक़ का 2 मंजिला मकान है। पुलिस ने यहाँ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि घर में रहने वालों को पहले ही पुलिस कार्रवाई की भनक लग चुकी थी। तलाशी के दौरान पाया गया कि घर से तमाम महँगे सामान पहले ही हटा दिए गए थे।

कुर्की की इस कार्रवाई में पुराना सोफा सेट, फ्रिज, वाशिंग मशीन और कुछ बर्तन मिले हैं। बरामद हुए सामान की कीमत लगभग 80,000 रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इन सामानों को अपनी GD में दर्ज किया है। कुर्क हुए सभी सामान को एक पड़ोसी को सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही पड़ोसी को हिदायत दी गई है कि वो किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना फौरन पुलिस को दें। कुर्की की यह कार्रवाई अतीक की बहन नूरी की उमेश पाल हत्याकांड से अब तक फरारी के चलते हुई है। पुलिस ने कुर्की की इस कार्रवाई के लिए बाकायदा अदालत से अनुमति ली थी।

19 अगस्त, 2023 को ही पुलिस अख़लाक़ अहमद के घर पर नोटिस चस्पा कर चुकी थी। इस नोटिस में नूरी को 20 दिनों के अंदर पुलिस के आगे सरेंडर करने के लिए कहा गया था। हालाँकि नूरी के शौहर अख़लाक़ को पुलिस ने 2 अप्रैल, 2023 में ही गिरफ्तार कर लिया था। अख़लाक़ सरकारी डॉक्टर था। उमेश पाल हत्याकांड में उसका नाम आते ही उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। फिलहाल अख़लाक़ अहमद जेल में है।

उमेश पाल की हत्या के बाद पुलिस के हाथ एक वीडियो फुटेज हाथ लगा था। इस वीडियो में गुड्डू मुस्लिम को अख़लाक़ के घर में देखा गया था। नूरी और उनके शौहर अख़लाक़ पर गुड्डू मुस्लिम को न सिर्फ आर्थिक मदद करने बल्कि पनाह देने का भी आरोप है। गुड्डू मुस्लिम भी फिलहाल फरार चल रहा है। पुलिस के साथ UP STF भी उसकी तलाश में जुटी हुई है।

अरुंधति रॉय और प्रकाश राज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में PIL, भारत को बताया था ‘हिन्दू फासीवादी’: वकील बोलीं – देश की एकता-अखंडता को पहुँचाया नुकसान

वामपंथी एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय और अभिनेता प्रकाश राज के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में PIL दाखिल की गई है, जिसमें उन पर भारत सरकार को फासीवादी कहने का आरोप है। पश्चिम बंगाल की एक वकील मीता बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में ये जनहित याचिका दायर की है, जिसमें अभिनेता प्रकाश राज और लेखिका अरुंधति रॉय के खिलाफ कार्रवाई की माँग की गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि रॉय और राज ने अपने बयानों में भारत को ‘हिंदू फ़ासीवादी उपक्रम’ कहा है। याचिका में कहा गया है कि रॉय और राज के बयान देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुँचाते हैं। याचिका में माँग की गई है कि न्यायालय रॉय और राज के बयानों को सोशल मीडिया से हटाने का निर्देश दे।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश TS शिवगणम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने की, जिसके समक्ष वकील मीता बनर्जी ने रॉय द्वारा जून 2023 में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार पर प्रकाश डाला।

वकील बनर्जी ने अपनी दलील में कहा, “लेखक रॉय ने इस साल जून में ‘अल जज़ीरा’ को एक साक्षात्कार दिया और कहा कि भारत एक हिंदू फासीवादी गया है। वह ऐसी बातें कैसे कह सकती हैं, वह भी ‘अल जज़ीरा’ जैसे चैनल पर, जो आतंकवादी संगठन अलकायदा के मुखपत्र की तरह है, जिसे (अलकायदा को) ओसामा बिन लादेन चलाया करता था।”

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि अभिनेता प्रकाश राज ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब ‘X’) पर इसी तरह के बयान दिए थे। उन्होंने कहा, “ये हमारे देश के जिम्मेदार नागरिक हैं, फिर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणियाँ कीं। इन बयानों से हमारी भावनाएँ आहत हुई हैं। हम हिंदू फासीवादी नहीं हैं। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि अगर हम अपने धर्म की रक्षा करेंगे, तो हमारा धर्म भी रक्षा करेगा, जैसे राम, कृष्ण आदि। इस प्रकार हम ट्विटर सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से उनके बयानों को हटाने के लिए एक निर्देश चाहते हैं।”

वकील मीता बनर्जी ने कहा कि रॉय और प्रकाश दोनों ही भारत सरकार को हिंदू फासीवादी उपक्रम नहीं कह सकते क्योंकि उसे बहुसंख्यक आबादी का जनादेश प्राप्त है। उनकी दलीलों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि वो कुछ बदलावों के साथ नई याचिका दायर करें। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को कुछ बदलाव करने को कहा है और निर्देश दिया है कि वो अपनी याचिका में ट्विटर को एक्स के तौर पर संबोधित करें। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी, 2024 को तय की है।

पहले भी रेड में निकले हैं नोटों के पहाड़, पर कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के ₹500 करोड़ सब पर भारी: अब तक की 8 सबसे बड़ी बरामदगी के बारे में जानिए

झारखंड से कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर पिछले 5 दिनों से चल रही छापेमारी में अब तक लगभग ₹500 करोड़ की बरामदगी की जा चुकी है। यहाँ नोटों के बंडल गिनने में ही कई दिन लग गए हैं। इस छापेमारी में मिली धनराशि को आयकर विभाग की अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी माना जा रहा है।

धीरज साहू के 10 ठिकानों पर की गई छापेमारी में अब तक यह धनराशि बरामद हुई है। इसमें ओडिशा के बोलांगीर से सबसे ज्यादा बरामदगी हुई है जबकि टीटागढ़ और संबलपुर से भी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। बोलांगीर से 60 किलो सोना भी बरामद हुआ है।

हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब आयकर विभाग को नोटों का पहाड़ छापेमारी के दौरान मिला हो। इससे पहले भी अलग-अलग मौकों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी रिकवरी होती आई है। एक नजर इन घटनाओं पर डाल लेते हैं।

कानपुर, दिसम्बर 2021: पीयूष जैन

कानपुर के इतर कारोबारी पीयूष जैन के यहाँ 40 घंटों तक चली दिसम्बर 2021 की एक छापेमारी में ₹196 करोड़ रुपए नकद और 23 किलो सोने की बरामदगी हुई थी। इस धनराशि को गिनने के लिए 19 मशीनें लगानी पड़ी थीं। यहाँ से 250 किलो चाँदी और यहाँ तक कि चंदन के तेल के ड्रम तक यहाँ से बरामद हुए थे। पीयूष जैन के कन्नौज स्थित घर पर भी इस दौरान छापेमारी हुई थी।

झारखंड, मई 2022: IAS पूजा सिंघल

पूजा सिंघल झारखंड की ही IAS हैं, जिनके ऊपर बीते वर्ष 2022 में छापा पड़ा था। पूजा सिंघल के घर से ED को लगभग ₹20 करोड़ बरामद हुए थे। यहाँ से ₹150 करोड़ की सम्पत्ति के कागज भी बरामद हुए थे। ED ने उनकी 82 करोड़ की सम्पत्ति जब्त की थी। पूजा सिंघल झारखंड सरकार में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थीं और मनरेगा घोटाले में आरोपित थीं। उनके ऊपर अब भी जाँच चल रही है।

बंगाल, जुलाई 2022: अर्पिता मुखर्जी & पार्थो चैटर्जी

पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले घोटाले की जाँच कर रही ED ने ममता बनर्जी सरकार में मंत्री पार्थो चैटर्जी और उनकी प्रेमिका अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग ठिकानों से ₹50 करोड़ की बरामदगी की थी। यह 6 किलो सोना और कई महंगी गाड़ियाँ भी बरामद की गई थीं। उनके चार फ्लैट भी सीज किए गए थे।

महाराष्ट्र, जुलाई 2022: रियल स्टेट डेवलपर

अगस्त 2022 में महाराष्ट्र के जालना में हुई छापेमारी में 58 करोड़ रुपए नकद की बरामदगी आयकर विभाग के अधिकारियों को हुई थी। इसके अलावा 32 किलो सोना और साथ ही तमाम बेनामी सम्पत्ति का भी पता अधिकारियों को चला था। यहाँ जब्त की गई कुल सम्पत्ति की वैल्यू ₹390 करोड़ बताई गई थी। यहाँ छापा मारने वाले अधिकारी बारात की गाड़ियों में पहुँचे थे ताकि किसी को शक ना हो।

हैदराबाद, अक्टूबर 2021: हेट्रो फार्मा

अक्टूबर 2021 में हैदराबाद की हेट्रो फार्मा पर हुई छापेमारी आयकर विभाग ने ₹142 करोड़ नकद बरामद किए थे। यह कंपनी भारत से लेकर दुबई, यूरोप और अफ्रीका तक में दवाई का एक्सपोर्ट करती थी। यहाँ आयकर विभाग को इस फार्मा कम्पनी की ₹550 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति का ब्योरा मिला था। यह सारी धनराशि कुछ लॉकर में भर कर रखी गई थी।

कोयम्बतूर, अप्रैल 2019: दुरई मुरुगन

अप्रैल 2019 में डीएमके नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष से जुड़े ठिकानों पर आम चुनावों के दौरान आयकर का छापा पड़ा था। इसमें छापा मारने वाले अधिकारियों को ₹21 करोड़ की बरामदगी हुई थी। यह सारा पैसा बोरे में भर कर रखा गया था। 2019 आम चुनावों के दौरान हुई इस बड़ी छापेमारी के कारण यहाँ मतदान को रद्द करना पड़ा था।

तमिलनाडु, जुलाई 2018: सुश्री SPK & कम्पनी

तमिलनाडु में जुलाई 2018 में पूरे प्रदेश में हुई छापेमारी में रोड बनाने वाली इस कम्पनी के ठिकानों से ₹160 करोड़ से अधिक की बरामदगी हुई थी। इसके अलावा 100 किलोग्राम सोना भी इसके ठिकानों से जब्त किया गया था। इसे तब देश की सबसे बड़ी छापेमारी कहा गया था।

गोगामेड़ी के हत्यारों ने मोहाली से लूटी थी कार, गोल्डी बराड़ जैसी जिंदगी का मिला था लालच: जानिए अपने ही साथी शेखावत को भी क्यों मार डाला

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड को अंजाम देने वाले 2 शूटरों रोहित राठौर और नितिन फौजी को उनके तीसरे सहयोगी उधम के साथ राजस्थान पुलिस ने रविवार (10 दिसंबर, 2023) को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया था। इन सभी ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किए हैं। इन शूटरों को रोहित गोदारा ने कनाडा में बसाने और गोल्डी बराड़ जैस जिंदगी का लालच दिया था। इन्हीं दोनों शूटरों ने ही सुखदेव सिंह की हत्या में शामिल अपने तीसरे साथी नवीन शेखावत को मार डाला था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नितिन फौजी और रोहित राठौर विदेश भागने की फिराक में थे। इन सभी को रोहित गोदारा गैंग से लॉरेंस विश्नोई का समर्थन, कनाडा का पासपोर्ट वीजा, कैश और हथियारों का लालच दिया गया था। सुखदेव सिंह की हत्या के एवज में दोनों शूटरों को गोल्डी बराड़ जैसी जिंदगी के सपने दिखाए गए थे। फ़िलहाल सुखदेव हत्याकांड के मास्टरमाइंड रोहित गोदारा के यूरोप के किसी देश और उसके साथियों के कनाडा में छिपे होने की आशंका है। इन सभी को पासपोर्ट आदि तैयार होने में 15 से 20 दिन का समय बताया गया था।

दोनों शूटरों के साथ पुलिस ने अब तक उनके 2 सहयोगियों को भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है। इनके नाम रामवीर जाट और उधम हैं। इन दोनों को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या से पहले और बाद में शूटरों के रहने-खाने व फरार होने के इंतजाम देखने के लिए कहा गया था। खबर यह भी है कि दोनों सहयोगियों को इसी काम के लिए 50-50 हजार रुपए दिए भी गए थे। पुलिस शूटरों का सहयोग करने वाले रामवीर जाट और उधम से भी सवाल-जवाब में जुटी है।

पूछताछ में यह जानकारी भी निकल कर सामने आई है कि शूटर नितिन फौजी का रोहित गोदारा से परिचय भवानी सिंह नाम के एक व्यक्ति के माध्यम से हुआ। भवानी उर्फ़ रॉनी पहले ही गोदारा और उसके वीरेंद्र चरण जैसे साथियों के सम्पर्क में था। भवानी ने ही नितिन फौजी की बात रोहित गोदारा और उसकी गैंग से करवाई थी। इसी बातचीत के बाद नितिन फौजी सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के लिए तैयार हो गया था।

अपने ही साथी को मार डाला दोनों शूटरों ने

अब तक हुई पूछताछ में यह निकल कर सामने आया है कि 5 दिसंबर को रोहित राठौर और नितिन फौजी की मुलाकात हुई थी। दोनों नवीन शेखावत के वाहन से सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को मारने के लिए निकले। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों ने अपने ही साथी नवीन को भी गोली मार दी। बताया जा रहा है कि नवीन शेखावत को भी मारने का आदेश शूटरों को उनके आकाओं से मिला था। नवीन काफी समय से सम्पत नेहरा और रोहित गोदारा के लिए काम कर रहा था। नवीन ने ही सुखदेव गोगामेड़ी की पूरी रेकी की थी और शूटरों से मीटिंग करवाई थी।

इस बीच नवीन घटनाओं को अंजाम देने की एवज में ज्यादा पैसे माँगने लगा था। पैसे न मिलने पर वह अपने ही आकाओं को गिरफ्तार करवाने की धमकियाँ देता था। शूटरों ने यह भी बताया कि उन्हें लगा कि नवीन शेखावत सुखदेव सिंह को गोलियाँ मारने के दौरान उनको रोकने का प्रयास कर रहा था। हत्यारों ने चंडीगढ़ में एक टैक्सी ड्राइवर जतिंदर सिंह से स्विफ्ट डिजायर कार भी लूटी थी। हरभजन सोसाइटी जाने के लिए इन्होंने टैक्सी बुक की थी। अब तक गाड़ी नहीं मिली है। जतिंदर को शक है कि ये गोगामेड़ी के हत्यारे ही थे, वो चेहरे से पहचान सकता है। पुलिस उसका बयान दर्ज करेगी।

4500 चर्च पर जिसका नियंत्रण उसे अब नहीं मिलेगा विदेशी फंड, ईसाई संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द: ₹10000 करोड़ घोटाले में आया था नाम

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने देश के बड़े ईसाई संगठन ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ (CNI) एनजीओ का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया है। अब यह संगठन विदेशी चंदा नहीं ले सकेगा। यह ईसाई संगठन पिछले पाँच दशक से भारत में ईसाइयत को फैलाने का काम कर रहा है।

इस ईसाई संगठन को अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा समेत यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों से भी बड़ी मात्रा में चंदा मिलता है। अब इस ‘चर्च ऑफ नार्थ इंडिया’ का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है, यह खबर अंग्रेजी समाचार वेबसाइट ‘इकॉनोमिक टाइम्स‘ ने दी है। गृह मंत्रालय विदेशी चंदे के नियमों का उल्लंघन करने पर ये कार्रवाई करता है।

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ को वर्ष 1970 में 6 अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। इसके अंतर्गत चर्च ऑफ़ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा (म्यांमार), सीलोन (श्रीलंका) के तथा कुछ अन्य ईसाई संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। यह उत्तर भारत में चर्च का नियन्त्रण करने वाली संस्था है।

इस संस्था का दावा है कि 22 लाख लोग इसके सदस्य हैं। इसके अलावा यह भारत के 28 क्षेत्रों में अपने बिशप रखता है जो कि वहाँ के चर्च पर नियंत्रण रखते हैं। इसके अलावा ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ का दावा है कि इसके पास 2200 से अधिक पादरी हैं और 4500 से अधिक चर्च इसके नियन्त्रण में हैं।

चर्च ऑफ़ नार्थ इंडिया का एक पोस्टर, जिसके विदेशी चंदा लेने पर रोक लगी है
CNI का एक पोस्टर

‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ के अंतर्गत 564 स्कूल और कॉलेज तथा 60 नर्सिंग एवं मेडिकल कॉलेज चलते हैं। ऐसा इसकी वेबसाइट बताती है। देश में प्रसिद्ध लखनऊ का लॉ मार्टिनियर कॉलेज भी इसी के अंतर्गत है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे प्रदेशों में स्थित कई मिशनरी स्कूल भी इसके अंतर्गत आते हैं।

CNI के कुछ पादरियों पर वर्ष 2019 में ₹10,000 करोड़ के जमीन घोटाले का आरोप लगा था। इस मामले में संगठन के कुछ पादरियों ने अपने ही साथियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कागजों में गड़बड़ी करके सैकड़ों एकड़ जमीन बेच दी। बीते कुछ समय में ऐसे कई NGO के लाइसेंस रद्द किए गए हैं जो कि विदेशों से फंड लेकर यहाँ गड़बड़ियाँ फैला रहे थे। यह NGO विदेशों से लिए गए पैसों का स्पष्ट हिसाब भी नहीं रख रहे थे। इनमें ऑक्सफैम, सेंटर फॉर पालिसी रिसर्च और राजीव गाँधी फाउंडेशन जैसे कुछ NGO शामिल रहे हैं।

राज्यसभा में दिसम्बर 2022 में दी गई एक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2022 के बीच में गृह मंत्रालय ने 6677 NGO के विदेशी चंदा लेने के लाइसेंस खत्म किए हैं। यह सभी विदेशी चंदा लेकर गड़बड़ी करने के दोषी पाए गए थे। ऑपइंडिया ने ‘चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया’ की वेबसाइट पर दिए गए नम्बर पर सम्पर्क किया तो जवाब आया कि उन्हें अभी इस विषय में कोई जानकारी नहीं है। वह मामले की जानकारी ले कर आगे बताएँगे।

बाबा महाकाल का अशीर्वाद लेकर उज्जैन से गए मोहन यादव, भोपाल में चुन लिए गए CM: परिजन बोले- BJP में मुख्यमंत्री भी कार्यकर्ता

भाजपा ने मोहन यादव को मध्य प्रदेश का नया विधायक चुना है, विधायक दल की बैठक में सोमवार (11 दिसंबर, 2023) को इस पर मुहर भी लग गई। वो उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक बने हैं। उनके CM बनने के बाद उनके घर में भी जश्न का माहौल है। उनके पिता, बहन, पत्नी और परिवार के अन्य लोग खुश हैं। उनकी बहन ने कहा कि महाकाल का आशीर्वाद है, पार्टी का आशीर्वाद है, उन्होंने काफी संघर्ष किया है, वो 1984 से ही ABVP-भाजपा के लिए कार्य करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके भाई ने ABVP के कार्यकर्ता के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर काम किया है, और सतत काम किया है। उन्होंने मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे उनकी मेहनत है, बड़ों का आशीर्वाद है, पार्टी का आशीर्वाद है और भगवान महाकाल का आशीर्वाद है। मोहन यादव की बहन ने कहा कि वो जब भी उज्जैन में आते हैं, बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं। मुख्यमंत्री चुने जाने से 1 दिन पहले भी वो महाकाल का आशीर्वाद लेकर गए थे।

उनकी बहन ने कहा कि उन्हें एक जिम्मेदारी दी गई है, भाजपा में बड़ी बात नहीं है बल्कि CM होने का मतलब भी कार्यकर्ता होना ही है। मोहन यादव की पत्नी ने भी अपने पति के मुख्यमंत्री बनने पर कहा कि ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं है, उन्हें पूरी तरह नहीं पता था लेकिन उनका नाम चल रहा है। उनकी पत्नी ने कहा कि भगवान ने मेहनत का फल दिया है। मोहन यादव के परिजनों को वीडियो में फोन कॉल पर भी बात करते हुए देखा जा सकता है।

मोहन यादव के बुजुर्ग पिता भी अपने बेटे के सीएम बनने पर खुश नज़र आए। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत अच्छा लग रहा है। वहीं खुद मोहन यादव भी मीडिया के सामने आए और उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा, अब तक सीएम रहे शिवराज सिंह चौहान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा ही है जो सामान्य और छोटे कार्यकर्ता को भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी देती है, यही पार्टी का चरित्र है।

मध्य प्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री ने कहा कि जो विकास का कारवाँ शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, उसे हम आगे लेकर जाएँगे। इस दौरान उन्होंने चुनाव के दौरान लगा नारा ‘एमपी के मन में मोदी और मोदी के मन में एमपी’ का जिक्र करते हुए कहा कि विकास के सपनों को लेकर हम आगे चलेंगे। वहीं प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा ने कहा कि मोहन यादव के नेतृत्व में हम लगातार राज्य को स्वर्णिम बनाने की दिशा में काम करते रहेंगे।

मोहन यादव ने 1984 में ABVP से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1986 में उन्हें विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई। मोहन यादव ABVP के प्रदेश सह-मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। RSS के वो सह-खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह भी बने। 1997 में वो BJYM में आए। वो ‘उज्जैन विकास प्राधिकरण’ के अध्यक्ष और ‘मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम’ के अध्यक्ष भी रहे हैं। मध्य प्रदेश में राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को डिप्टी CM चुना गया है।