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मुस्लिम युवती आयशा से बनी अक्षता, वैदिक रीति-रिवाजों से की बजरंग दल के कार्यकर्ता से शादी: कर्नाटक का मामला

कर्नाटक के सुरकथल में एक मुस्लिम युवती ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू युवक से विवाह कर लिया। युवक हिन्दू संगठन बजरंग दल का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। दोनों की विवाह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं। यह मामला कर्नाटक के दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसे कुछ मीडिया पोर्टल ने ‘रिवर्स लव जिहाद’ कह दिया है। लेकिन ये मालूम हो कि लव जिहाद उसे कहा जाता है जहाँ व्यक्ति मजहब और पहचान छिपाकर किसी को प्रेम में फँसाए। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक के सुरकथल के रहने वाले आयशा और प्रशांत भंडारी लम्बे समय से प्रेम सम्बन्ध में थे। दोनों विवाह करना चाहते थे। इसके लिए युवक प्रशांत भंडारी आयशा की माँ से बात भी करने गया था। हालाँकि, आयशा की माँ ने दोनों के धर्म अलग-अलग होने के कारण इस शादी के लिए हामी नहीं भरी।

प्रशांत भंडारी ने आयशा की माँ से 30 नवम्बर, 2023 को बातचीत की थी। आयशा की माँ के ना मानने पर आयशा अगले दिन 1 दिसम्बर, 2023 को प्रशांत भंडारी के साथ चली गई। इसके पश्चात दोनों ने वैदिक रीति से विवाह कर लिया। आयशा ने अपना इस्लामिक नाम छोड़ कर हिन्दू नाम ‘अक्षता’ अपना लिया।

दोनों के विवाह की कई फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। आयशा के परिजनों ने इस मामलें में पुलिस के पास शिकायत भी दर्ज करवाई थी लेकिन अक्षता (पहले आयशा) और प्रशांत भंडारी हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ थाने में पहुँच कर अपनी शादी के बारे में जानकारी दे चुके हैं।

अक्षता (पहले आयशा) और प्रशांत भंडारी ने पुलिस को बताया है कि वह दोनों पिछले तीन वर्ष से प्रेम सम्बन्ध में हैं। अक्षता के परिवार के विवाह को लेकर राजी ना होने को लेकर उन दोनों ने यह कदम उठाया है।

लव जिहाद और रिवर्स लव जिहाद

कुछ मीडिया पोर्टल्स का दावा है कि हिन्दू संगठनों ने इस मामले को ‘रिवर्स लव जिहाद’ के तौर पर पेश किया है। गौरतलब है कि ‘लव जिहाद‘ आमतौर पर ऐसे मामलो को कहा जाता हैं जहाँ मुस्लिम लड़के हिन्दू या अन्य धर्मों की लड़कियों को अपने प्रेम जाल में अपनी पहचान छुपा कर फँसाते हैं और फिर उनका इस्लाम में धर्मांतरण करवा देते हैं। उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक समेत पूरे भारत से आए दिन लव जिहाद के ऐसे मामले सामने आते रहते हैं।

मायावती की BSP में रहकर कॉन्ग्रेस से नजदीकी… बसपा ने सांसद दानिश अली को तत्काल किया सस्पेंड: पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का लगा आरोप

मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने अमरोहा से अपने सांसद दानिश अली को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस के साथ बढ़ती दानिश अली की करीबियों से बसपा नाराज हो गई और उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया। दानिश साल 2019 में बसपा में शामिल हुए थे जिसके बाद उन्होंने अमरोहा से चुनाव लड़ा और कॉन्ग्रेस के सचिन चौधरी और बीजेपी के कंवर सिंह को हराकर सांसद बने।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी ने सांसद दानिश अली को पार्टी से निकालने की जानकारी देते हुए उन्हें पत्र में कहा-

“आपको (दानिश अली) अनेकों बार मौखिक रूप से से कहा गया कि आप पार्टी की नीतियों विचारधारा एवं अनुशासन के विरुद्ध जाकर कोई भी बयानबाजी व कृत्य आदि न करें परंतु इसके बाद भी आप लगातार पार्टी के विरुद्ध जाकर कार्य करते आ रहे हैं।”

बसपा ने दानिश अली को याद दिलाया कि कैसे बसपा में एंट्री देकर उन्हें लोकसभा तक पहुँचाया गया, लेकिन फिर भी वह पार्टी विरोधी बातें करते रहे। पत्र में लिखा गया,

“यहाँ आपको यह भी बताना जरूरी है कि सन 2018 तक आप देवगौड़ा की जनता पार्टी के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे तथा कर्नाटक में सन् 2018 के आम चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा गया था। इस गठबंधन में देवगौड़ा के अनुरोध पर आपको अमरोहा से बसपा प्रत्याशी के रूप में टिकट दिया गया और इस टिकट के दिए जाने के पहले देवगौड़ा ने यह आश्वासन दिया था कि बसपा को टिकट न मिलने के बाद बसपा की सभी नीतियों व निर्देशों का सदैव पालन करेंगे और पार्टी के हित में ही कार्य करेंगे। इस आश्वासन को आपने भी उनके समक्ष दोहराया था।

इसी आश्वासन के बाद ही आपको बसपा की सदस्यता ग्रहण कराई गई थी और अमरोहा से चुनाव लड़ाकर तथा जिताकर लोकसभा में भेजा गया था। लेकिन आप अपने दिए गए वादों को भूलकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। अत: अब पार्टी के हित में आपको बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।”

बता दें कि दानिश अली को पार्टी से निकालने के पीछे बड़ा कारण उनकी कॉन्ग्रेस से बढ़ रही नजदीकियों को बताया जा रहा है। पिछले दिनों राम बिधूड़ी स उनसे मिलने राहुल गाँधी भी उनके आवास पर गए थे। वहीं कॉन्ग्रेस के ही अजय राय ने भी उनके मुलाकात की थी

‘पहला शौहर छोड़कर मैंने कर लिया दूसरा निकाह… मुसलमान बनकर खुश हूँ’: केरल की हादिया चर्चा में लौटी, मुस्लिम सहेलियों की संगत में अपनाया था इस्लाम

मुस्लिम सहेलियों की संगत में रहकर अखिला से हादिया बनी केरल की एक युवती फिर चर्चा में है। हादिया ने साल 2017 में बताया था कि उसने शफीन जहाँ से निकाह कर लिया है। हालाँकि जब कोर्ट में इस संबंध पर सवाल उठे तो वो सुप्रीम कोर्ट तक गई और अपना निकाह जायज मनवाया। लेकिन अब खबर आ रही है कि हादिया ने अपने पहले शौहर को छोड़ एक दूसरे मुस्लिम व्यक्ति से निकाह कर लिया है। उसने इस बाबत एक वीडियो भी जारी किया है और कहा है कि मैं मुसलमान की तरह रह कर खुश हूँ।

हादिया का मामला मीडिया में साल 2017 में देश में चर्चा में आया था जब उसके पिता के एम अशोकन ने जनवरी 2016 में केरल हाई कोर्ट के सामने उसकी गुमशुदगी को लेकर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत याचिका लगाई थी। अशोकन का कहना था कि उनकी बेटी अखिला, जो कि तमिलनाडु के सालेम में रह कर मेडिकल की पढ़ाई करती थी, बीते कुछ दिनों से गायब हो गई है।

इस मामले में 19 जनवरी 2019 को अखिला हाई कोर्ट के सामने खुद पेश हो गई थी और बताया था कि उसने इस्लाम अपना लिया है। उसने इस्लाम अपनाने के पीछे अपने साथ रहने वाली दो बालिकाओं की जीवन शैली को आदर्श बताया था। यह दोनों मुस्लिम थीं। अखिला का कहना था कि उसने बिना किसी दबाव के इस्लाम अपनाया है। इस कारण से अखिला के पिता की याचिका को रद्द कर दिया गया था।

इसके बाद वह एक इस्लामिक संगठन सत्य सारणी के साथ रहने लगी थी। इसके 6 महीने पश्चात उसके पिता ने एक और याचिका लगाई थी कि उनकी बेटी को विदेश ले जाने के प्रयास हो रहे हैं। हालाँकि उसने कोर्ट में आकर बताया कि वह शफी जहाँ नाम के एक आदमी से निकाह कर चुकी है।

इस निकाह के मामले में अखिला के परिवार के किसी व्यक्ति को नहीं पता था। अखिला ने इस निकाह का प्रमाण पत्र पेश किया था उसे केरल हाईकोर्ट ने मानने से इंकार करते हुए निकाह को अप्रभावी घोषित कर दिया था। उसका पति शफी जहाँ कट्टरपंथी विचारों वाला था।

बाद में इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया था जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया था कि अखिला शफीन जहाँ के साथ रह सकती है। उन्होंने इस निकाह को वैध बता दिया था। NIA ने भी इस मामले की जाँच यह पता लगाने के लिए की थी कि अखिला पर इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया था।

अब इस मामले में नया मोड़ आया गया है। 8 दिसम्बर, 2023 को अखिला के पिता अशोकन ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका केरल हाईकोर्ट के सामने लगाई। इसके बाद हादिया, जो कि एक होम्योपैथी डॉक्टर है, उसने एक वीडियो 9 दिसम्बर, 2023 को जारी किया है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस वीडियो में हादिया ने कहा है, “संविधान ने हर व्यक्ति को यह अधिकार दिया है कि वह शादी करे और तलाक ले सके। यह सामान्य बात है। मुझे समझ नहीं आता कि मेरे मामले में समाज इतना परेशान क्यों है? मैं एक वयस्क हूँ जो कि निर्णय लेने में सक्षम हूँ। मैं जब शफी जहाँ के साथ निकाह में नहीं रह सकी तो उससे बाहर निकल आई। अब मैंने अपने पसंद के एक आदमी से विवाह कर लिया है। मैं खुश हूँ और एक मुस्लिम के रूप में रह रही हूँ। मेरे माता-पिता भी मेरे दूसरे निकाह के बारे में जानते हैं।”

पैगंबर मोहम्मद के नाम पर काटा था टीचर का सर: एक लड़की सहित 6 स्टूडेंट दोषी करार… लेकिन एक भी नहीं जाएगा जेल

साल 2020 में एक झूठे ईशनिंदा के मामले में पेरिस के टीचर सैमुअल पैटी का दिनदहाड़े सिर कलम करके हत्या की गई थ। अब उसी मामले में फ्रांस कोर्ट ने 6 किशोरों को दोषी माना है। इनमें एक वो नाबालिग लड़की भी शामिल है जिसने इस्लामी कट्टरपंथियों के बीच यह अफवाह फैलाई थी कि सैमुअल पैटी ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया।

फ्रांस कोर्ट ने 3 साल तक इस केस में जाँच पड़ताल के बाद इन छह किशोरों को दोषी करार दिया। इनमें फर्जी जानकारी फैलाने वाली लड़की तो शामिल है ही, साथ में वो छात्र भी हैं जिन्होंने हमलावरों को सैमुअल पैटी की पहचान कराई थी। घटना के वक्त ये सब 14-15 साल के थे, तो अदालत ने इन्हें दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई, लेकिन फिर ये भी बताया कि इनमें से किसी को जेल नहीं जाना होगा। खबरों में कहा गया है कि शायद सजा को बदल दिया गया है या सस्पेंड कर दिया गया है।

गौरतलब है कि पेरिस में अक्टूबर 16, 2020 को पैगंबर मोहम्मद के नाम पर सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी हत्या के बाद उस स्कूल को भी धमकी मिली थी, जहाँ वह पढ़ाया करते थे।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने स्कूल में लिखा था “तुम सभी मारे जाओगे। सैमुअल पैटी.. अल्लाहु अकबर”। इसके अलावा सैमुअल के पिता को भी धमकाया गया था कि जिस तरह सैमुअल को मारा है उन्हें भी मारा जाएगा।

कट्टरपंथियों ने इस कृत्य को ईशनिंदा की सजा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की थी। मगर हकीकत में सैमुअल ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया ही नहीं था। इस संबंध में खबर घटना के एक साल बाद आई थी।

7 मार्च 2021 को 13 साल की उस लड़की ने इस बात को स्वीकार किया था कि उसने अपने अब्बा के गुस्से से बचने के लिए अपने शिक्षक पर तोहमत लगाई थी जबकि हकीकत यह थी कि वह उस दिन क्लास में ही नहीं थी। फ्रांसीसी अखबर Le Parisien में बताया गया था कि लड़की ने न्यायाधीश के सामने घटना को लेकर कहा कि उसने अपने अब्बा से झूठ बोला था कि उसे क्लास से बाहर भेजा गया जबकि वास्तविकता में वह उस दिन कक्षा में भी मौजूद नहीं थी।

दरअसल, बच्ची नहीं चाहती थी कि उसके घर में ये बात पता चले कि उसे क्लास में अनुपस्थित होने के कारण निलंबित कर दिया गया था। इसलिए उसने अपने टीचर को लेकर कहानी गढ़ी। लड़की ने अपने अब्बा को बताया कि पैटी ने मुस्लिम छात्रों को कक्षा छोड़ कर जाने को कहा क्योंकि वह एक पाठ पढ़ाते हुए शार्ली एब्दो न्यूजपेपर में छपे पैगंबर मोहम्मद के व्यंगात्मक चित्र को दिखा रहे थे।

लड़की के कोर्ट में दिए इस बयान के बाद स्पष्ट हुआ था कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक मौका पाते ही एक टीचर को मौत के घाट उतारा। इस पूरे हमले में उस बच्ची का अब्बू भी शामिल था जिसने झूठी जानकारी फैलाई थी। कोर्ट में अभियोजन पक्ष का ये भी दावा है कि दोनों के बीच सीधा संपर्क था। हत्यारे ने पैटी को मारने से पूर्व लड़की के पिता को एक मैसेज किया था कि वह पैटी को किचन वाले चाकू से मारने वाला है।

‘हो गई गलती… अब क्या मर जाऊँ?’ – श्रृद्धा के 35 टुकड़े करने वाले आफताब को कोई पछतावा नहीं, माँगता है बिसलेरी का पानी और नए कपड़े

पालघर की रहने वाली श्रद्धा वाकर को मार कर 35 टुकड़ों में फेंक देने वाले आफताब अमीन पूनावाला को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। वह जेल में आज कल श्रद्धा की हत्या में दाखिल की गई 6 हजार से अधिक पन्नों की चार्जशीट को पढ़ कर अपना समय निकाल रहा है।

जेल अधिकारियों का कहना है कि आफताब को गिरफ्तार हुए लगभग एक वर्ष हो गया है लेकिन उसने कभी भी श्रद्धा की हत्या पर कोई पछतावा नहीं जताया। उससे जेल में उसके परिवार से भी कोई मिलने नहीं आता। इस मामले में जाँच अधिकारी रहे राम सिंह ने भास्कर को बताया कि आफताब मुंबई पुलिस को भी पूछताछ में गुमराह करता रहा था।

जाँच अधिकारी सिंह का कहना है कि आफताब गुस्सैल भी है। उसने आज तक इस बात पर दुख नहीं जताया कि उसने श्रद्धा की हत्या करके जान ले ली। उसने जाँच के दौरान एक दिन कहा था:

“हाँ, मुझसे गलती हुई, हो गई मुझसे गलती। अब क्या मर जाऊँ?”

आफताब ने 18 मई 2022 को श्रद्धा को मार दिया था और उसकी लाश के 35 अलग-अलग टुकड़े करके फ्रिज में स्टोर किया था। बाद में इन्हें उसने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में फेंके थे। उसने श्रद्धा की हड्डियों तक को पीस दिया था और रोड पर फेंक दिया था। उसे दिल्ली पुलिस ने 14 नवम्बर को श्रद्धा के पिता की शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया था।

इतने खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले आफताब को अपने इस घिनौने काम पर कोई पछतावा नहीं है। हिंदी समाचार वेबसाइट दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि वह तिहाड़ की जेल नम्बर 4 की 15 नम्बर सेल में चुपचाप रहता है। वह यहाँ चार्जशीट पढ़ता रहता है। वह कभी-कभार बोतलबंद पानी भी माँगता है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से सामने आया है कि आफताब को 5 दिसम्बर 2023 को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट वर्तमान में इस मामले की सुनवाई करते हुए 3 गवाहों के बयान दर्ज कर रहा था। इसमें वह डॉक्टर भी शामिल है, जिन्होंने श्रद्धा के शरीर के हिस्सों का पोस्टमॉर्टम किया था।

बताया जा रहा है कि आफ़ताब जब से जेल पहुँचा है, तब से उसका 15 किलोग्राम वजन घट गया है। साकेत कोर्ट में बनाए गए लॉकअप में वह कुछ खाता भी नहीं है। वह केवल अपने साथ ले गए बिस्किट खाकर ही काम चलाता है। उसे डर है कि उसके खाने में जहर मिला दिया जाएगा। यह जानकारी आफताब पर नजर बनाए रखने वाले एक अधिकारी ने दी है।

वह जेल के अंदर बोतलबंद पानी और नए कपड़े माँगता रहता है। हालाँकि, जेल के नियमों के अनुसार उसे इनमें से कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जाती है। जेल में उसे वही चीजें उपलब्ध करवाई जाती हैं, जो अन्य कैदियों को दी जाती हैं।

आफताब इसलिए अपने खाने में जहर मिलाए जाने की आशंका जताता है क्योंकि जब उसे पहली बार कोर्ट लाया गया था, तब वकीलों ने उसकी पिटाई कर दी थी। उसे जेल में भी अन्य कैदियों ने मारा था। इसीलिए वह तब से डरा हुआ है।

जेल में आने के बाद आफ़ताब ने एक बार टेलीफोन के माध्यम से केवल अपने पिता से बात की है। इसके अलावा ना ही उसने किसी से फ़ोन पर बात की है, ना उससे कोई मिलने आया है। इस मामले में वकील सीमा कुशवाहा का कहना है कि आफ़ताब सुनवाई को लटकाने का प्रयास भी कर रहा है।

उसने अब तक तीन वकील बदले हैं। वर्तमान में अक्षय भंडारी नाम का एक वकील आफताब का केस लड़ रहा है। जब भी नया वकील आता है तो वह सुनवाई में यह कहता है कि उसे चार्जशीट पढ़ने और केस को समझने के लिए थोड़ा समय चाहिए, इसी कारण से सुनवाई में देर हो रही है।

गाय के गोबर से चला रॉकेट इंजन: आग की लपटें 30 से 50 फीट तक, जापान की कंपनी अन्तरिक्ष कार्यक्रम की दिशा बदलने की तैयारी में

जापान की एक कम्पनी ने गाय के गोबर से बने ईंधन से रॉकेट इंजन को चलाने में सफलता पाई है। गोबर से बने ईंधन से चलाया जा रहा रॉकेट टेस्टिंग के दौरान ना केवल चालू हुआ बल्कि इसने जमीन के समानांतर लगभग 15 मीटर की दूरी तक आग की लपटें भी फेंकी। अब इसे विकसित करने वाली कम्पनी और भी बड़ा रॉकेट बनाने जा रही है।

एक वेबसाईट बैरन के अनुसार, जापान के एक अन्तरिक्ष स्टार्टअप इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस (Interstellar Technologies) कम्पनी ने यह रॉकेट बनाया है। इसकी प्रायोगिक टेस्टिंग जापान के ताईकी शहर में की गई। इस दौरान रॉकेट के इंजन से तेज नीली-ऑरेंज आग निकली। आग की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जमीन के समानांतर लगभग 10-15 मीटर (30 से 50 फीट) की दूरी तक इसकी लपटें निकलीं।

रॉकेट की प्रायोगिक टेस्टिंग में जो ईंधन इसमें डाला गया था, वह बायोमीथेन था। इसे पूरी तरह से गाय के गोबर से बनाया गया था। इस गोबर को स्थानीय गायपालकों के पास से खरीदा गया था और फिर उस से गैस बनाई गई, जिससे यह ईंधन विकसित किया गया।

इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीस के सीईओ ताकाहिरो इनागावा ने इस मामले पर कहा, “हम यह मात्र इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि यह पर्यावरण को फायदा पहुँचाता है बल्कि इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि यह स्थानीय स्तर पर बनाया जा सकता है और सस्ता है तथा शुद्ध और साफ़ है। हम यह तो नहीं कह सकते कि यह विधि पूरी दुनिया में बड़े स्तर पर अपनाई जाएगी लेकिन हम पहली ऐसी निजी कम्पनी हैं, जो इस ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।”

इंटरस्टेलर ने एक अन्य कम्पनी एयरवाटर के साथ एक समझौता किया है। एयरवाटर कम्पनी उन किसानों से बायोगैस एकत्रित करती है, जिनके पास डेयरी फ़ार्म हैं और वह इनमें पली हुई गायों के गोबर से बायोगैस बनाती है।

इस प्रयोग से जुड़े एक इंजिनियर तोमोहीरो निशिकावा ने कहा, “संसाधन के मामले में कमजोर जापान को पानी ऊर्जा जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित कार्बन न्यूट्रल ईंधन अपनाने होंगे। इस क्षेत्र की गायों में काफी पोटेंशियल है। जापान के पास एक ईंधन स्रोत ऐसा होना चाहिए, जिसके लिए वह बाहर के देशों पर निर्भर ना हो।”

रॉकेट तकनीक में गोबर का उपयोग होने से वह किसान भी प्रसन्न हैं, जिनके पशुफ़ार्म से यह गोबरगैस ली गई थी। उनका कहना है कि उनसे ली गई गोबर गैस से रॉकेट को उड़ता देखना सुखद होगा। उन्होंने जापान सरकार से इस विषय में कदम उठाने की अपील की है।

कॉन्ग्रेस सांसद के ठिकाने से अब तक ₹300 करोड़ बरामद: अब 12 मशीनों से हो रही गिनती, 2 दिन और लगेंगे… आखिर क्यों नहीं मिला ₹2000 का नोट?

झारखंड से कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकानों पर बुधवार से चल रही आयकर विभाग की छापेमारी में अब तक ₹300 करोड़ की नकद बरामदगी हो चुकी है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अभी नोटों की गिनती चल रही है और यह आँकड़ा ₹500 करोड़ के पार भी जा सकता है। नोटों की गिनती पूरी होने में 2 दिन और लग सकते हैं।

बताया जा रहा है कि धीरज साहू के ओडिसा, झारखंड और पश्चिम बंगाल स्थित ठिकानों से इतना नकद पैसा मिला है कि उसकी गिनती करना आयकर विभाग को मुश्किल हो रहा है। इन नोटों की गिनती के लिए आयकर विभाग को हैदराबाद और भुवनेश्वर से अतिरिक्त मशीने मँगानी पड़ी हैं। 6 छोटी और 6 बड़ी मशीनों की मदद से इन नोटों को गिना जा रहा है।

नोटों की मात्रा इतनी ज्यादा है कि इसे गिनते-गिनते अब तक कई मशीनें खराब हो चुकी हैं। बाकी मशीनें भी लगातार गिनती के कारण गर्म हो जा रही हैं। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि अब तक की गिनती से मात्र 35% नोट ही गिने जा सके हैं और जब तक यह गिनती 100% होगी, तब तक आँकड़ा कहीं ऊपर पहुँच चुका होगा।

धीरज साहू की ओडिशा के बोलांगीर में स्थित बौध डिस्टलरीज में आयकर विभाग ने यह नकद बरामदगी की है। ओडिशा के संबलपुर, बोकारो और रांची तथा कोलकाता से भी बड़ी मात्रा में पैसा मिला है। हालाँकि इस मामले में अब प्रश्न भी उठने लगे हैं। धीरज साहू के ठिकानों से बरामद यह धनराशि ₹500, ₹200 और इससे छोटे नोटों में है। इस पूरी बरामदगी में एक भी ₹2,000 का नोट नहीं निकला है।

इसी कारण से प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या रिजर्व बैंक के ₹2,000 के नोट को चलन से बाहर करने के निर्णय के आते ही यहाँ पहले से मौजूद नकद को बदलना चालू कर दिया गया था या फिर यह सारा नकद पैसा बीते कुछ ही माह में एकत्रित किया गया है, जब बाजार में ₹2,000 के नोट आरबीआई ने भेजने बंद कर दिए थे?

भारतीय रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को एक आदेश जारी करके कहा था कि वह ₹2,000 के नोट को चलन से बाहर कर रहे हैं। इसके बाद पूरे देश में जिन लोगों के पास ₹2,000 के नोट थे, वह बैंकों में इन्हें जमा करवाते दिखे थे। 30 नवम्बर 2023 तक चलन में शामिल 97% नोट मतलब ₹2,000 के नोट वापस आ चुके थे।

इसके अलावा यदि नोट बदले भी गए तो इतनी बड़ी धनराशि को किस स्रोत से बदला गया और क्या इसमें बैंकिंग क्षेत्र के लोग भी शामिल थे? इसके अलावा जो भी धनराशि बरामद की गई है वह किस स्रोत से अर्जित की गई है? चूंकि यह धनराशि उनकी उनके शराब कारोबार की फैक्ट्री पर मिली है, ऐसे में प्रश्न उठ रहे हैं कि कहीं फैक्ट्री से ही तो अवैध तरीके से शराब बड़ी मात्रा नहीं बेची जा रही थी, जिससे यह अर्जित की गई?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बोलांगीर से बरामद यह धनराशि 157 बैग में मिली है। इस धनराशि को लोहे की अलमारियों में भर कर रखा गया था। इसे गिनने के लिए ट्रक पर लादकर पहले जिले के स्टेट बैंक ले जाया गया और फिर गिनती चालू हुई। अभी तक बड़ी मात्रा में बैग नहीं गिने जा सके हैं।

धीरज साहू कौन? घोषित सम्पत्ति कितनी उनकी?

शराब समेत कई धंधों में लिप्त कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू झारखंड के लोहरदगा के मूल निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरते समय जो शपथपत्र दिया था, उसमें उन्होंने, अपनी सम्पत्ति ₹34 करोड़ बताई थी। इसके अलावा उन्होंने खुद पर ₹2 करोड़ के कर्ज का दावा किया था।

धीरज साहू लम्बे समय से कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे हैं। वह 2009, 2010 और 2018 में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा की सदस्यता पा चुके हैं। उन्होंने झारखंड के चतरा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन इसमें उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था। धीरज साहू झारखंड के प्रभावशाली परिवार से आते हैं।

उनके भाई शिव प्रसाद साहू झारखंड की राजधानी राँची से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। धीरज साहू की जिन कम्पनियों पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है वह शराब, ईंट, चावल और अन्य धंधों से जुड़ी हुई हैं।

महुआ मोइत्रा बैंक में VP थी, करोड़ रुपए सैलरी वाली? – जानिए क्या होता है यह पोस्ट, झूठ परोस क्यों बटोरी जा रही सहानुभूति

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता जाने के बाद अब इमोशनल एंगल देकर उनके लिए सहानुभूति इकट्ठा की जा रही है। सोशल मीडिया पर कई उनके समर्थक ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि महुआ किस तरह से बैंक में वाइस प्रेसिडेंट की पोस्ट पर थीं और सिर्फ सामाजिक कार्यों के लिए सबकुछ छोड़कर राजनीति में आ गईं।

उदाहरण के लिए अपूर्व नाम के पत्रकार का पोस्ट पढ़िए। बताने की कोशिश हुई है कि कैसे महुआ ने करोड़ों रुपए की नौकरी को समाज सेवा के लिए लात मारी और समाज सेवा में लग गई। महुआ की तस्वीर लगाकर अपूर्व ने उन्हें सुंदर, सलोनी और सौम्य महिला बताया और साथ ही लिखा कि चूँकि यह महिला सत्ता के कड़े सवाल पूछती हैं इसलिए साहसी और समझदार है। लेकिन महिला विरोधी लोग उनके चरित्र पर भद्दी फब्तियाँ कस रहे हैं।

अब महुआ मोइत्रा को लेकर किए जा रहे दावों की सच्चाई क्या है। आइए समझाते हैं।

दरअसल, ये जो कहा जा रहा है कि वो बैंकर थीं और उन्होंने करोड़ों की नौकरी छोड़ी…उसके पीछे की सच्चाई ये है कि नो न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन कंपनी में इंवेस्टमेंट बैंकर की लाइन में थी। उन्हें वह वाइस प्रेसीडेंट के रोल में थीं। ध्यान रहे महुआ बैंकर नहीं थी। वो जेपी मॉर्गन में जिस वाइस प्रेसिडेंट की पोस्ट पर थीं, वैसे वीपी बैंकिंग सेक्टर में कई सारे लोगों को बनाया जाता है।

इन्वेस्टोपीडिया साइट के अनुसार, वरिष्ठ बैंकरों में सबसे कनिष्ठ होता है। वहीं बैंक में ये पद किसी एक पर हो ये बिलकुल जरूरी नहीं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि गोल्डमैन सैश बैंक में 12000 वीपी थे। इसी तरह बैंकिंग सेक्टर की कई कंपनियाँ जहाँ वीपी की भरमार होती है इसलिए उन्होंने खबर के टाइटल में भी कहा है कि आखिर क्यों बैंक के वीपी का पद देखकर अचंभित नहीं होना चाहिए।

साभार: Investopedia

सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया बैंकिंग में VP क्या

बता दें कि बैंक में वीपी पोस्ट का क्या महत्व होता है इसके बारे में सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जवाब दिया। जैसे रौशन राय के पोस्ट, जिसमें वो दावा कर रहे हैं कि महुआ मोइत्रा वो बैंकर थीं जो 100 लग्जरी बैग, 100 जूते ले लेती…उसपर साकेत नाम के एक्टिव यूजर ने कहा,

“बेवकूफ वो बैंकर नहीं थीं, वो सैंकड़ों वाइस प्रेसिडेंट्स में से एक वीपी थी जहाँ काम एंट्री लेवल का होता है। वो जेपी मॉर्गन में काम करती थी, खुद महुआ मॉर्गन नहीं थी।”

इसी तरह शुभेंदु ने लिखा- जब महुआ ने जेपी मॉर्गन की नौकरी छोड़ी वो वीपी ही थी, जिनका काम बैंक में एंट्री करने आदि का होता है। उनके पास डबल डिजिट में PQE भी नहीं था। ऐसे कर्मचारियों की सैलरी इतनी भी नहीं होती कि वो लंदन के जोन 1,2,3 में घर रेंट पर ले सकें। बड़े आए करोड़ों रुपए की बैंक की नौकरी करने वाले।

गब्बर नाम के एक्टिव यूजर ने भी तंज कसके हुए कहा, “पाँच एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट्स को ठेले पर पानी पुरी खाते देखा है।”

महुआ मोइत्रा की सदस्या गई

बता दें कि संसद में प्रश्न पूछने के बदले नकदी और महँगे-महँगे तोहफे लेने के आरोप में दोषी पाए जाने के बाद महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता चली गई है। जाँच के बाद एथिक्स कमिटी ने उनके खिलाफ रिपोर्ट लोकसभा की टेबल पर पेश की थी। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने उन्हें संसद से निकालने का फैसला सुनाया। महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से 2019 में TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के टिकट पर सांसद बनी थीं।

भारत में ISIS की तोड़ी जा रही कमर: 13 गिरफ्तार, 44 ठिकानों पर चल रही छापेमारी, बनाते थे काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में 44 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (ISIS) के आतंकियों की जाँच के सम्बन्ध में चल रही है। यह मामला ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है।

NIA ने यह छापेमारी ठाणे ग्रामीण में 31 स्थानों पर, ठाणे शहर में 9 जगह पर और पुणे में 2 जगह तथा मुंबई और कर्नाटक में 1-1 जगह पर की है। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, इस छापेमारी में NIA ने ISIS से संबंधित 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह 13 लोग पुणे से गिरफ्तार किए गए हैं।

गौरतलब है कि बीते दिनों NIA ने ISIS के पुणे मॉड्यूल का खुलासा किया था। NIA द्वारा इस मामले में लगाई गई चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए गए थे। इस पुणे मॉड्यूल में सात सदस्यों के होने की जानकारी दी गई थी। यह सभी सदस्य दिन में नामी कम्पनियों में काम करते थे और रात में देश-विरोधी साजिश रचते थे।

आतंक के इस पुणे मॉड्यूल के खिलाफ राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 4 नवंबर 2023 को कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी थी। इस चार्जशीट से पता चला था कि आतंकियों ने काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या का प्लान बनाया था और वे भारतीय संविधान को ‘हराम’ (गैर-इस्लामी) मानते थे।

चार्जशीट के हवाले से बताया गया था कि आरोपित विस्फोटक बनाने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे। हमलों के लिए महाराष्ट्र के कुछ स्थानों की रेकी भी की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक नामी कंपनियों में काम करने वाले ये सभी आतंकी IED बनाने और उसका परीक्षण करने के काम पर जुटे थे।

IED बनाने के लिए ये सभी कोडवर्ड में बात किया करते थे। सल्फ्यूरिक एसिड के लिए सिरका, हाइड्रोजन परॉक्साइड के लिए शर्बत और एसीटोन के लिए गुलाब जल जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा था। बताते चलें कि IED बनाने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड, एसीटोन और हाइड्रोजन परॉक्साइड जरूरी घटक हैं।

चार्जशीट में बताया गया था कि आतंकी IED बनाने के लिए आसानी से मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल करते थे। इसमें वाशिंग मशीन टाइमर, थर्मामीटर, स्पीकर वायर, 12 वॉट का बल्ब, 9 वॉट की बैटरी, फिल्टर पेपर, माचिस की तीलियाँ और बेकिंग सोडा शामिल हैं।

विस्फोटक बनाने के बाद आरोपितों ने इसे ब्लास्ट करने के लिए महाराष्ट्र, गोवा, केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में रेकी भी की थी। रेकी में फोटो और वीडियो बनाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। इस मॉड्यूल का दिल्ली दंगों और शरजील इमाम से भी सम्बन्ध सामने आया था।

इस मामले में पकड़ा गया एक आरोपित जुल्फिकार मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर 31 लाख के सालाना पैकेज पर काम कर रहा था। दूसरा आरोपित शाहनवाज माइनिंग इंजिनियर था। उसे विस्फोटकों की अच्छी जानकारी थी। तीसरा आरोपित कादिर पठान ग्राफिक्स डिजाइनर था।

जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे।

एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी थी कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा था कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।

इसी मामले में उत्तर प्रदेश से UP ATS ने इस पुणे मॉड्यूल और दिल्ली मॉड्यूल के स्वघोषित खलीफा वजीहुद्दीन को गिरफ्तार किया था। वजीहुद्दीन इन दोनों मॉड्यूल का सरगना था। उसके गुर्गों ने उसके आदेश पर गाजियाबाद के यति नरसिम्हा सरस्वती जैसे ‘निशानों’ की पहचान की थी।

इतना ही नहीं, आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल के सदस्य शहनवाज के साथ मिलकर वो धमाकों की ट्रेनिंग भी शुरू कर चुका था। वजीहुद्दीन उत्तर प्रदेश के रामपुर, संभल, अलीगढ़ से लेकर प्रयागराज तक अलग-अलग गुर्गों के माध्यम से भारत के खिलाफ ‘जेहाद’ के लिए ‘इस्लामिक फौज’ तैयार कर रहा था।

इससे पहले इस मामले पर ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया था कि कैसे वजीहुद्दीन सामू (SAMU) से लेकर एएमयू (AMU) तक, दिल्ली से लेकर प्रयागराज तक आईएसआईएस से जुड़े लोगों के लिए ‘अमीर’ की तरह था। उसके गुर्गे सोशल मीडिया पर भी उसका गुणगान करते थे और उसे ‘अमीर’ कहकर संबोधित करते थे। मुस्लिम देशों में ‘अमीर’ का मतलब शासक होता है।

वजीहुद्दीन ने शुरुआत में आईएसआईएस के ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) के तौर पर काम शुरू किया और फिर सामू (SAMU- Students of AMU) जैसे संगठनों में खुद को ‘अमीर’ के तौर पर स्थापित कर लिया। वो ‘हया’ कार्यक्रम के जरिए बाकायदा मजलिसों का आयोजन करता था और इस्लामिक भाषण देता था।

वजीहुद्दीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। वो एएमयू में पीएचडी करने के साथ ही जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान विषय (इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र) पढ़ाता था। उसके छात्रों में हिंदू छात्र भी शामिल हैं।

BJP को क्यों वोट दिया था तूने : MP में मुस्लिम महिला को देवर जावेद ने डंडे से पीटा, हिंदू पड़ोसी ने आकर जान बचाई

मध्य प्रदेश के सीहोर में भाजपा को वोट देने पर एक मुस्लिम महिला को उसके देवर ने बुरी तरह पीट दिया। महिला ने अहमदपुर पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दी है। मामला बरखेड़ा हसन गाँव में 4 दिसंबर 2023 है। पीड़िता का नाम समीना है जिनके साथ देवर ने बदसलूकी चुनावी नतीजे आने के बाद की।

बताया जा रहा है कि शिवराज सरकार की ‘लाडली बहना योजना’ से खुश होकर समीना ने भाजपा को वोट दिया था और 4 दिसंबर को प्रदेश में दोबारा भाजपा आती देख वह और उनके बच्चे उसी की खुशी मनाने लगे। ऐसे में उनका देवर जावेद खां आया और उनसे गाली-गलौच करने लगा।

जब पीड़िता के परिवार ने जावेद का विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी हुई। समीना के मुताबिक उन्हें थप्पड़ मारे गए, घूँसे मारे गए और डंडों से पीटा गया। पीड़िता का कहना है कि घटना के वक्त जावेद के साथ उसकी बीवी भी थी जो बाँस का डंडा देकर कह रही थी- मारो इनको।

दोनों लोग उनके परिवार से मारपीट कर रहे थे। ऐसे में जब वो चीखने चिल्लाने लगे तो पड़ोसी पंडित विद्या सागर ने आकर उनकी मदद की। बाद में समीना ने इस संबंध में थाने में जाकर शिकायत दी, लेकिन अब तक देवर को गिरफ्तार नहीं किया गया है। उन्होंने अब जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। वह जल्द से जल्द इस मामले में कार्रवाई चाहती हैं।

वहीं पुलिस का कहना है कि उन्होंने इस केस में आईपीसी की धारा 294, 323,506 और 32 के तहत एफआईआर कर ली है और इस मामले में जाँच भी चल रही है। जावेद अभी फरार है। जल्द ही उसे पकड़ा जाएगा। मामले की जानकारी होने पर राष्ट्रीय पंससमदा मुस्लिम महासंघ के अध्यक्ष (मध्य प्रदेश इकाई) नौशाद खान ने घटना की निंदा की।

बता दें कि ये पहली घटना नहीं है जहाँ मुस्लिम महिला द्वारा भाजपा को वोट देने पर उसके घरवालों ने उससे मारपीट की। बरेली की एक महिला ने भी शिकायत दी थी कि उसने भाजपा को वोट दिया था जिसके कारण उसके साथ मारपीट हुई, उसे घर से निकाला गया और तीन तलाक की धमकी दी गई।