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ईसाई लड़की से शादी के लिए हिंदू ने किया धर्मांतरण, मंदिर प्रशासन ने नौकरी से निकाला; आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट बोला- कानूनन सही: रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिंदू धर्म से ईसाई बनने के बाद श्री ब्रम्हारंभ मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के एक कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद वह शख्स हिंदू नहीं रह गया था और यह धार्मिक संस्थान अधिनियम के खिलाफ था।

न्यायालय ने कहा कि सेवा की समाप्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (5) और आंध्र प्रदेश धर्मार्थ एवं हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती अधिनियम के नियम 3 द्वारा दी गई वैधानिक शक्ति के अनुसार थी। सेवक सेवा नियम, 2000 (एपी नियम, 2000) के नियम 3 के अनुसार, किसी धार्मिक संस्थान या बंदोबस्ती का प्रत्येक पदाधिकारी और सेवक हिंदू धर्म मानने वाला व्यक्ति होना चाहिए।

मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हरिनाथ एन की पीठ ने कहा, “यदि न्यायालय याचिकाकर्ता के इस तर्क पर विचार करता है कि उसने खुद को ईसाई बनाए बिना एक ईसाई लड़की से शादी की है तो यह शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रावधानों के तहत संपन्न किया जाना चाहिए। विवाह प्रमाण पत्र विशेष विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत जारी किया जाना चाहिए।”

न्यायाधीश ने आगे कहा, “याचिकाकर्ता के मामले में अब तक धारा 13 के तहत कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। जहाँ तक विवाह का संबंध है तो यह इंगित करता है कि याचिकाकर्ता ने एपी चैरिटेबल और हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती कार्यालय धारकों और सेवक सेवा नियम, 2000 के नियम 3 से छुटकारा पाने के लिए यह याचिका दायर की है।”

पीठ ने आगे कहा, “जैसा कि उत्तरदाताओं द्वारा दायर होली क्रॉस कैथेड्रल, नांदयाल में विवाह के रजिस्टर में याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी का नाम और धर्म ईसाई लिखा हुआ है। याचिकाकर्ता ने उक्त रजिस्ट्रार में अपना हस्ताक्षर भी किया है।”

Verdictum की रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल याचिकाकर्ता को साल 2002 में अनुकंपा के आधार पर श्री ब्रह्मरांभ मल्लिकार्जुन स्वामी वरला देवस्थानम के कार्यालय में रिकॉर्ड सहायक के रूप में नियुक्त किया गया था। साल 2010 में उसने अपने पसंद की लड़की से शादी की और यह शादी कुरनूल जिले के नांदयाल में एक कैथेड्रल पास्टरेट चर्च में संपन्न हुई।

इसको लेकर लोकायुक्त के समक्ष एक शिकायत दायर की गई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एपी चैरिटेबल और हिंदू धार्मिक संस्थानों और बंदोबस्ती कार्यालय धारकों और सेवक सेवा नियम, 2000 के नियम 3 का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता ने अनुकंपा के आधार पर रोजगार पाने के समय अपना धर्म छुपाया था।

इसके बाद याचिकाकर्ता को रिकॉर्ड सहायक की सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसने अपना धर्म नहीं छिपाया था और सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी किए गए उसके जाति और स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र में उसकी जाति हिंदू के अनुसूचित जाति में आने वाले माला समुदाय बताई गई है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा कि ईसाई धर्म की लड़की से शादी करने पर यह नहीं माना जाना चाहिए कि याचिकाकर्ता ने ईसाई धर्म अपना लिया है। वह अभी भी हिंदू धर्म को मानता है। हालाँकि, पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए किसी भी आधार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

प्राइवेट सेक्टर में स्थानीय लोगों को नहीं मिलेगा 75% आरक्षण, हाई कोर्ट ने रद्द किया हरियाणा सरकार का कानून: कहा- दूसरे प्रदेश से होने के कारण नहीं कर सकते भेदभाव

हरियाणा की खट्टर सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के निवासियों को 75 प्रतिशत आरक्षण के कानून को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। दरअसल, खट्टर सरकार ने स्टेट एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट एक्ट 2020 बनाया था, जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि हरियाणा के मूल निवासियों को निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

वहीं इस कानून के खिलाफ फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि प्राइवेट सेक्टर में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। अगर नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ सकेंगे। जिसका निजी क्षेत्र की कार्यकुशलता पर बुरा असर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने दिया रद्द करने का आदेश 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में आज शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) को हाई कोर्ट ने इस कानून के खिलाफ दाखिल इन सभी याचिकाओं को सही करार देते हुए हरियाणा की खट्टर सरकार के इस कानून को सिरे से खारिज करते हुए इसे रद्द किए जाने के आदेश दे दिया। 

अपने आदेश में न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति हरप्रीत कौर जीवन की खंडपीठ ने 2021 में हरियाणा राज्य द्वारा बनाए गए कानून को असंवैधानिक और भारत के संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन घोषित कर दिया है।

हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य विधायिका की शक्तियाँ राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक नहीं हो सकती हैं और वे सीधे तौर पर केंद्र सरकार की शक्ति का अतिक्रमण नहीं कर सकती हैं।

वहीं कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की है कि राज्य किसी निजी नियोक्ता को स्थानीय उम्मीदवारों को नियुक्त करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती क्योंकि इससे ऐसे और भी राज्य अधिनियम बन सकते हैं जो पूरे देश में “कृत्रिम दीवारें” खड़ी कर सकते हैं।

इस मामले में कोर्ट ने अपनी बात रखते हुए यह दलील दी गई कि हरियाणा सरकार का प्राइवेट सेक्टर में 75% आरक्षण देने का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं। याची ने कहा कि यह कानून योग्यता के बदले रिहायश के आधार पर निजी क्षेत्र में नौकरी पाने की पद्धति को शुरू करने का प्रयास है। ऐसा हुआ तो हरियाणा में निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी।  

कोर्ट में कहा गया कि प्राइवेट सेक्टर में 75% जॉब्स आरक्षित करने के लिए 2 मार्च, 2021 को लागू अधिनियम और 6 नवंबर, 2021 की अधिसूचना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। याचिका में रोजगार अधिनियम 2020 को सिरे से खारिज करने की याचिका में माँग की गई थी। जिस पर आज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए रद्द कर दिया। 

2020 में बना था यह कानून

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने स्टेट एंप्लॉयमेंट ऑफ लोकल कैंडिडेट एक्ट 2020 बनाया था। इसमें 75% आरक्षण का प्रावधान था। इससे पहले हाईकोर्ट ने इस कानून पर अब तक रोक लगा रखी थी।

मोहम्मद शमी के गाँव में स्टेडियम बनाएगी योगी सरकार, अधिकारियों ने किया जमीन का चयन: क्रिकेट वर्ल्ड कप में मचा रखी है धूम

क्रिकेट विश्वकप 2023 के सेमीफाइनल में मोहम्मद शमी के शानदार प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अमरोहा जिले में स्थित उनके गाँव सहसपुर में एक क्रिकेट स्टेडियम बनाने का फैसला किया है। नौकरशाहों ने इसके लिए भूमि का सर्वेक्षण पहले ही शुरू कर दिया है। बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम के महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक शमी ने सेमीफाइनल में 7 विकेट लेकर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया था। वो विश्वकप में अभी तक के सबसे सफल गेंदबाज हैं।

मोहम्मद शमी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हैं, लेकिन वो प्रथम श्रेणी क्रिकेट पश्चिम बंगाल की टीम की तरफ से खेलते हैं। वो गुजरात की टीम की ओर से आईपीएल में खेल रहे हैं। मोहम्मद शमी ने इस विश्वकप में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने अब तक महज 5 मैचों में ही 23 विकेट लिए हैं और वो विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में शीर्ष पर हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्र व अन्य अधिकारियों ने जोया विकासखंड स्थित शमी के गाँव का भ्रमण किया। स्टेडियम के लिए जमीन की तलाश की। उनका घर जोया विकासखंड के सहसपुर नवाब में पड़ता है। अब इस गाँव में भव्य क्रिकेट स्टेडियम बनाया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से उस इलाके में खेल के बुनियादी ढाँचे का निर्माण होगा, युवाओं के बीच एक जीवंत क्रिकेट संस्कृति को बढ़ावा देगा और उभरती प्रतिभाओं को अपने क्रिकेट के आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

इसके अलावा, स्टेडियम के एक ऐतिहासिक स्थल के रूप में कार्य करने की संभावना है, जो गाँव के भारतीय क्रिकेट में योगदान और मोहम्मद शमी जैसे प्रसिद्ध क्रिकेटिंग आइकन के साथ इसके जुड़ाव का प्रतीक है। ज़िले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह गंगवार भी उनके गाँव को विकसित करने की बात कह चुके हैं। प्रशासन ने युवा कल्याण विभाग की तरफ से गाँव में मिनी स्टेडियम बनवाने का निर्णय लिया है। 

शानदार रहा है मोहम्मद शमी का क्रिकेट करियर

बता दें कि मोहम्मद शमी ने अब तक भारतीय क्रिकेट टीम के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वो विश्वकप में अपने 17 मैचों के करियर में 54 विकेट ले चुके हैं। ओवर आल उनके प्रदर्शन की बात करें तो मोहम्मद शमी ने अब तक 64 मैचों में 229 विकेट लिए हैं, जिसमें उन्होंने 12 बार पारी में 4 विकेट और 6 बार पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा किया है। टेस्ट मैचों में 118 रन देकर 9 विकेट मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 56 रन पर 6 विकेट का रहा है। उन्होंने टेस्ट मैचों में 2 अर्धशतक भी लगाए हैं।

वनडे क्रिकेट की बात करें तो शमी ने 100 मैचों में 194 विकेट हासिल किए हैं। 57 रन देकर 7 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। शमी ने भारत के लिए 23 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में 24 विकेट लिए हैं। शमी साल 2015 के विश्वकप में भी भारत की ओर से सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेदबाज रहे थे।

योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल खेलों को बढ़ावा देने और राज्य में खेल प्रतिभा को पोषित करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह शमी के प्रति व्यापक सम्मान और प्रशंसा का भी प्रमाण है, न केवल उनके साथी क्रिकेटरों के बीच, बल्कि व्यापक जनता के बीच भी। स्टेडियम क्षेत्र में क्रिकेट गतिविधियों का केंद्र बनने की क्षमता रखता है, भविष्य की पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित करेगा।

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मतदान संपन्न: MP में 71 तो छग में 68% वोटिंग, 3 दिसंबर को आएँगे नतीजे

आज छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का कार्य संपन्न हो गया। मध्य प्रदेश में जहाँ सभी 230 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, वहीं छत्तीसगढ़ में दूसरे दौर की 70 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ। शाम के पाँच बजे तक के मतदान के आँकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 71.16 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 68.15 प्रतिशत मतदान हुआ।

मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के लिए 2,533 उम्मीदवार मैदान में थे। वहीं, छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण में 70 सीटों के लिए 958 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई। अब सभी के भविष्य का फैसला 3 दिसंबर 2023 को मतगणना के साथ हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम रंजन ने बताया कि रतलाम के सैलाना विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 85.49 प्रतिशत वोट पड़े। उन्होंने बताया कि खिलचीपुर राजगढ़ में मतदान 84.17 प्रतिशत रहा। वहीं, सिवनी के बरघाट विधानसभा क्षेत्र में 84.16 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। वहीं, भिंड में सबसे कम 50.41 प्रतिशत और ग्वालियर दक्षिण में 51.05 प्रतिशत मतदान हुआ

छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत से ज्यादा मतदान

चुनाव आयोग के आँकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 70 सीटों पर मतदान का प्रतिशत 68 से ज्यादा रहा। यहाँ की गरियाबंद की नक्सल प्रभावित बिंद्रानवागढ़ सीट के नौ मतदान केंद्रों पर मतदान का काम 3 बजे ही समाप्त हो गया था। वहीं, बाकी की 69 सीटों पर मतदान शाम 5 बजे तक हुआ।

शाम पाँच बजे तक आधिकारिक तौर पर 67.48 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है। ये आँकड़ा थोड़ा बढ़ सकता है, क्योंकि कुछ लोग मतदान के लिए लाइनों में 5 बजे के बाद भी लगे थे। छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के लिए 18,833 मतदान केंद्र बनाए गए थे।

31000 फीट की ऊँचाई पर उड़ रहा था विमान, घोड़े ने कर दिया परेशान… एयरपोर्ट पर कराई पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

“हमारे प्लेन में एक घोडा है, हमें इमरजेंसी लैंडिंग की जरुरत है…” जी बिलकुल सही पढ़ा आपने। 31000 फ़ीट की ऊँचाई पर उड़ रहे विमान के पायलट ने जब एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल को यह ऑडियो सन्देश भेजकर मदद माँगी तो उन्हें भी यकीन नहीं हुआ। मामला गुरुवार 16 नवंबर, 2023 का है।

दरअसल, यह वाकया है बेल्जियम जा रहे एक मालवाहक विमान का, जिसे उस समय आपात लैंडिंग के लिए वापस न्यूयॉर्क लौटना पड़ा जब एक घोड़ा अपने स्टॉल से खुल गया और बेलगाम हो गया। जिसे क्रू नियंत्रित नहीं कर पाया तो पायलट को ATC से मदद माँगनी पड़ी। 

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, हवाई यातायात नियंत्रण (ATC) के ऑडियो क्लिप के अनुसार, विमान के शुरुआती उड़ान भरने के 30 मिनट के बाद ही बोइंग 747 कार्गो विमान पर घोड़ा स्टाल से आजाद हो गया अर्थात जहाँ बँधा था वहाँ से खुल गया। 

फ्लाइटराडार24 के अनुसार, बोइंग 747 बमुश्किल 31,000 फीट की ऊँचाई पर था जब एक पायलट ने वापस जान ऍफ़ कैनेडी हवाई अड्डे पर लौटने की बात की। हालाँकि, मदद की अपील का यह ऑडियो वायरल हो गया था जिसके बाद लोग अलग-अलग कयास लगाते हुए नजर आए। 

ATC के ऑडियो में पायलट को यह कहते हुए सुना जाता है, “हम एक मालवाहक विमान हैं, जिसमें एक जीवित जानवर, एक घोड़ा, सवार है। घोड़ा अपनी जगह से फ्री हो गया है। हालाँकि, उड़ान भरने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन हमें न्यूयॉर्क वापस जाने की जरूरत है क्योंकि हम घोड़े को संभाल नहीं सकते।”

हालाँकि, लैंडिंग इतना आसान न थी क्योंकि विमान में ईंधन ज़्यादा था। ऑडियो के अनुसार, उड़ान के वजन के कारण उड़ान को बोस्टन के तट से यू-टर्न लेने और मार्था वाइनयार्ड के 10 मील पश्चिम में अटलांटिक के ऊपर लगभग 20 टन ईंधन डंप करना पड़ा। इसके साथ ही पायलट ने एक पशुचिकित्सक को विमान के आने पर जेएफके में उपस्थित रहने का अनुरोध किया।

गौरतलब है कि पूरी बातचीत में यह क्लियर नहीं है कि घोड़ा भागने में कैसे कामयाब रहा, लेकिन विमान के जेएफके में उतरने तक वह अनियंत्रित ही रहा। हालाँकि, विमान सफलतापूर्वक हवाई अड्डे पर लैंड कर गई।

बेहोशी का इंजेक्शन लगाने पर यमन के नागरिक की हो गई मौत, भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को सजा-ए-मौत: बेटी को बचाने कोर्ट पहुँची माँ

इस्लामी हिंसा से ग्रस्त यमन में मौत की सजा भुगत रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के लिए उनकी माँ वहाँ जाना चाहती है, ताकि वो अपनी बेटी की जिंदगी के बदले ‘ब्लड मनी’ पर बातचीत करके उसका भुगतान कर सकें। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार से कहा कि निमिषा की माँ को वहाँ जाने के मामले में फैसला एक सप्ताह के भीतर करे।

चूँकि यमन की यात्रा पर अभी प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में निमिषा की माँ को यमन की यात्रा की अनुमति नहीं मिल पा रही है। इसके बाद पीड़ित नर्स की माँ ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और न्यायालय से गुहार लगाई कि उन्हें यमन जाने की अनुमति दी जाए और इसके लिए वह सरकार को निर्देश दे। इसको देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत सरकार से इस संबंध में त्वरित फैसला लेने के लिए कहा है।

निमिषा प्रिया की माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस्लामी मुल्कों में प्रचलित ‘ब्लड मनी’ से संबंधित कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार निमिषा प्रिया की माँ को यमन भेजने के बारे में कोई रास्ता जल्द-से-जल्द निकाले। निमिषा की माँ अपनी बेटी यमन जाकर अपनी बेटी की जान के बदले मृतक के परिवार को मुआवजा देना चाहती हैं।

दरअसल, निमिषा प्रिया ने यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के कब्जे से अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए उसे नशीला इंजेक्शन लगा दिया था। इंजेक्शन के ओवरडोज के कारण उसकी मौत हो गई थी। मौैत होने के बाद महदी के शव को टुकड़े-टुकड़े करके पानी की टंकी में डाल दिया गया था। इस काम में निमिषा की सहकर्मी और यमन की ही नागरिक हनान ने मदद की थी।

जानकारी के मुताबिक, निमिषा की माँ महदी के परिजनों से उसकी बेटी को माफ करने की अपील करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को बचाने का फिलहाल यही एक तरीका है कि वह ब्लड मनी दे। इससे पहले 13 नवंबर को यमन के सुप्रीम कोर्ट ने फाँसी की सजा के खिलाफ निमिषा की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद अब यमन के राष्ट्रपति के पास दया याचिका पड़ी है।

निमिषा शादीशुदा हैं। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा अपने पति और बेटी के साथ पिछले लगभग एक दशक से यमन में काम कर रही थीं। इस बीच यमन में गृहयुद्ध शुरु हो गया तो उनका परिवार भारत आ गया था। हालाँकि, यमनी नागरिक द्वारा पासपोर्ट ले लेने के कारण निमिषा वापस नहीं लौट पाईं।

निमिषा प्रिया पर यमनी व्यक्ति की हत्या का आरोप

निमिषा प्रिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2017 में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, निमिषा ने अपने बचाव में कहा था कि मृतक ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था, जिसे वो वापस पाना चाहती थी। निमिषा ने दावा किया था कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा दी थी। उसकी हत्या करने का इरादा नहीं था।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में दावा किया गया महदी नर्स निमिषा को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करता था। इसको लेकर निमिषा ने पुलिस में शिकायत की। जेल से छुटने के बाद महदी ने निमिषा का पासपोर्ट अपने पास रख लिया। उसे पाने के लिए ही उसने महदी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, लेकिन उसकी मौत हो गई।

इस मामले में निमिषा प्रिया को मौत की सजा सुनाई गई थी। जानकारी के मुताबिक, 16 नवंबर 2023 को केंद्र के वकील ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि हाल ही में जारी अधिसूचना के तहत यमन के लिए यात्रा प्रतिबंध में ढील दी जा सकती है। इससे भारतीय नागरिकों को विशिष्ट कारणों और सीमित अवधि के लिए देश की यात्रा करने की अनुमति मिल सकती है।

क्या है ब्लड मनी

ब्लड मनी इस्लामी देशों में प्रचलित एक प्रथा है, जिसमें हत्या करने वाले व्यक्ति या उसके परिवार या रिश्तेदार को मृतक परिवार को क्षतिपूर्ति देकर झगड़े को खत्म किया जाता है। क्षतिपूर्ति की राशि पीड़ित परिवार के माँग पर निर्भर करती है। हालाँकि, दोनों परिवार इसके लिए नेगोशिएट कर सकते हैं। यह प्रथा कई और कबायली समूहों में भी पाई जाती है।

ब्लड मनी का उपयोग अक्सर हत्या, घायल होने या अन्य प्रकार के नुकसान के लिए भी किया जाता है। यमन में ब्लड मनी एक आम प्रथा है। यमन के कानून के तहत हत्या के लिए मृत्युदंड का प्रावधान है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार आरोपित परिवार से ब्लड मनी का लेने पर सहमत हो जाता है तो मौत की सजा को कम किया जा सकता है या रद्द किया जा सकता है।

निमिषा प्रिया के मामले में उनके परिवार का मानना है कि ब्लड मनी का भुगतान करके उन्हें मौत की सजा से बचाया जा सकता है। हालाँकि, ब्लड मनी का भुगतान करना हमेशा संभव नहीं होता है और यह हमेशा पीड़ित परिवार द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता है। कई बार पीड़ित परिवार इतनी राशि माँग लेता है कि आरोपित परिवार के लिए देना संभव नहीं होता है।

ब्लड मनी की प्रथा के कई समर्थक हैं, जो तर्क देते हैं कि यह पीड़ित परिवारों को क्षतिपूर्ति प्रदान करने और अपराध को कम करने का एक तरीका है। हालाँकि, इस प्रथा के कई विरोधी भी हैं, जो तर्क देते हैं कि यह न्याय का एक रूप नहीं है और यह अपराधियों को दंड से बचने की अनुमति देता है।

शेहला रशीद ने कबूला देश विरोधी ताकतों ने किया उनका इस्तेमाल, कहा- अमित शाह की आभारी रहेंगी कश्मीरी माताएँ

जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष रहीं शेहला रशीद को कभी मोदी विरोधी चेहरे के तौर पर जाना जाता था। अब वो पिछले काफी समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ कर रही हैं। अचानक वो क्यों बदलीं और कश्मीर में ऐसा क्या देखा कि शेहला राशिद मोदी विरोधी की जगह मोदी समर्थक हो गई? ऐसे कई सारे सवालों के जवाब उन्होंने एक पॉडकास्ट में दिया है। उन्होंने बताया है कि कश्मीर में अगर शांति वापस लौटी है तो पीएम मोदी के फैसले और अमित शाह की इच्छाशक्ति की वजह से। इसके लिए कश्मीर की माताएँ हमेशा दोनों की आभारी रहेंगी।

शेहला रशीद ने ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के साथ पॉडकास्ट में चर्चा के दौरान कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जमकर तारीफ की। उन्होंने पीएम मोदी को सेल्फलेस मैन (स्वार्थहीन व्यक्ति) कहा। राशिद ने कहा, “अभी हम सबने देखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता के हित में तमाम बेहतरीन फैसले किए। उन्होंने कभी खुद को ऊपर नहीं रखा। उन्होंने जो भी काम किया, उसमें उन्होंने सिर्फ जनता के हित को ध्यान में रखा। वो सिर्फ राष्ट्र हित में काम करते हैं। उन्होंने कश्मीर को हमेशा के लिए बदलने का काम किया।”

रशीद ने मुक्तकंठ से की गृहमंत्री अमित शाह की प्रशंसा

शेहला राशिद ने पॉडकास्ट में कहा, “कश्मीर को बदलने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ करनी होगी। उन्होंने बाकी चीजों की परवाह न करते हुए कश्मीर की बेहतरी के लिए काम किया। कश्मीरी माताएँ राज्य में शांति स्थापना के लिए अमित शाह को हमेशा आशीर्वाद देंगी। जिन माताओं ने अपने बच्चों को आतंकवाद में खोया है, वो अमित शाह की हमेशा तारीफ करेंगी। उन्होंने कश्मीर में शांति लौटाई है। पीढ़ियों तक उनकी तारीफ होगी।” शेहला ने कहा कि जिस तरह की वादियों में शांति लौटी है, वो हमेशा बनी रहे।

भारत विरोधी तत्वों ने किया इस्तेमाल, मैं नहीं चाहती कि कोई और युवा फँसे: रशीद

शेहला रशीद ने बताया कि उन्हें किस तरह इस्तेमाल किया गया। कैसे देश विरोधी ताकतों ने उनसे वो बातें कहलवाईं, जो सच थी ही नहीं। शेहला ने कहा, “मैंने जो बातें कभी गलती से कही थी, उसका इस्तेमाल एंटी-इंडिया एलिमेंट्स ने चुनिंदा तरीके से किया। इसीलिए जब मुझे उसकी सच्चाई का पता चला तो मैंने उन बातों को हटा दिया और सही बातें सामने रखी।”

शेहला रशीद ने आगे कहा, “मैंने कभी आर्मी की तरफ से परेशानी नहीं झेली। हालाँकि, आर्मी के खिलाफ एक नैरेटिव बनाया जा चुका है कि आर्मी ऐसी है, आर्मी वैसी है। कुछ ऐसी घटनाएँ भी हुईं तो आतंकवाद के समय की थीं। ये नैरेटिव बनाया गया था। ऐसे में मैंने सच्चाई सामने रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाई।”

पूर्व छात्र नेता ने आगे कहा, “मेरे ऊपर सेकंड हैंड इन्फॉरमेशन थोपा गया। मैंने अब सभी चीजों से दूरी बना ली। आज भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैं नहीं चाहती हूँ कि युवा उन चीजों में फँसे, जिनमें मैं फँसी थी। आज मेरे साथ पढ़ने वाले लोग कॉरपोरेट वर्ल्ड में सीनियर पदों पर हैं, लेकिन मैं क्रांति करती रही। हालाँकि, अब मैं सही रास्ते पर लौट आई हूँ।”

शेहला रशीद से जब सवाल किया गया कि क्या उनके ऊपर किसी तरह का कोई दबाव है? इस साल के जवाब में उन्होंने कहा, “मैं किसी के दबाव में नहीं हूँ। मैं जो कुछ भी कर पा रही हूँ, इस देश में मिली आजादी की वजह से कर पा रही हूँ। हालाँकि, इस देश में मेरे साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं हुआ। हाँ, मैं फिर से कहूँगी कि पहले मैं भी गुमराह की गई थी, मुझ तक आधी-अधूरी जानकारियाँ पहुँचती थी, उसके लिए मैं माफी भी चाहूँगी।

वर्ल्ड कप के लिए नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भिड़ेंगे भारत और ऑस्ट्रेलिया, जानिए अहमदाबाद के स्टेडियम में जब पहली बार टकराई दोनों टीम तो क्या हुआ

भारत और ऑस्ट्रेलिया वनडे विश्व कप-2023 के फाइनल में अहमदाबाद के मोटेरा के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक-दूसरे का सामना करने वाले हैं। दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम जो अब नरेंद्र मोदी स्टेडियम के नाम से लोकप्रिय है, उसे कभी सरदार पटेल स्टेडियम के नाम से जाना जाता था। इसे पहले मोटेरा स्टेडियम और गुजरात स्टेडियम भी कहा जाता था।

दरअसल, स्टेडियम का निर्माण पहली बार 1982 में पूरा हुआ था। इस मैदान पर पहला एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच 1984 में खेला गया था, इसके निर्माण के ठीक दो साल बाद और भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच महत्वपूर्ण मुकाबला हुआ था। यह 92 ओवर का मैच था और प्रत्येक टीम ने क्रमशः 46 ओवर तक बल्लेबाजी की थी।

पहली बार भारतीय टीम ने 1983 क्रिकेट विश्व कप जीता था और उसे उस समय प्रबल दावेदार माना गया था। उनका हौसला बुलंद था और उन्हें घरेलू मैदान के साथ-साथ बड़ी संख्या में भारतीय दर्शकों के समर्थन का भी फायदा मिला, हालाँकि, आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने मैच में शानदार जीत हासिल करके सभी को गलत साबित कर दिया।

उस समय ऑस्ट्रेलियाई टीम का नेतृत्व किम ह्यूज ने जबकि गावस्कर ने टीम इंडिया का नेतृत्व किया। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता था और भारत को पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन उनके कप्तान द्वारा लिया गया निर्णय अच्छा नहीं रहा क्योंकि भारतीय सलामी जोड़ी ने पहले विकेट के लिए ही शतकीय साझेदारी की। रवि शास्त्री और रोजर बिन्नी ने 104 रनों की मजबूत साझेदारी की, लेकिन बाद में टॉम होगन का शिकार बन गए और 57 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उस पहले विकेट के बाद भारतीय टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई।

रवि शास्त्री भी 45 रन बनाकर वापस लौटे जिसके बाद दिलीप वेंगसरकर को 14 रन बनाकर पवेलियन लौटना पड़ा। संदीप पाटिल और सुनील गावस्कर ने क्रमश: 3 और 4 रन बनाए। भारत ने 145 रन पर पाँच विकेट खो दिए थे। एक छोर पर कपिल देव तेजी से बल्लेबाजी कर रहे थे लेकिन वह भी 28 रन बनाकर आउट हो गए. 161 रनों पर भारतीयों के छह विकेट गिर गए थे। हालाँकि, इसके बाद कीर्ति आज़ाद ने 39 रन बनाए और मदनलाल ने 6 रन और जोड़कर 45 रनों की नाबाद साझेदारी करके अपनी टीम को छह विकेट के नुकसान पर 206 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुँचा दिया था।

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी उतनी ही शानदार शुरुआत की. पहले विकेट के लिए 67 रन बनाने के बाद ग्रीम वुड 32 के स्कोर पर रन आउट हो गए। उनके बल्लेबाजी साथी केपलर वेसल्स ने 89 के कुल स्कोर पर पवेलियन लौटने से पहले 42 रन बनाए। इसके बाद एलन बॉर्डर ने जिम्मेदारी संभाली और किम ह्यूजेस के साथ 73 रनों की साझेदारी करके अपनी टीम की स्थिति मजबूत की, जिन्होंने 29 रन बनाए।

बाद में, उन्होंने ग्राहम येलोप के साथ साझेदारी करते हुए स्कोरबोर्ड पर 32 रन जोड़े और अपनी टीम को अभूतपूर्व जीत दिलाई। एलन बॉर्डर ने 90 गेंदों पर 62 रनों की नाबाद पारी खेली और ऑस्ट्रेलियाई टीम 44वें ओवर में 7 विकेट से जीत गई। 25 रन देकर तीन विकेट लेने वाले ज्योफ लॉसन को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ घोषित किया गया।

वहीं भारत अब 19 नवंबर को विश्व कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से भिड़ने पर उसी पिच पर नया इतिहास बनाकर जीत हासिल करना चाहेगा। भारत ने अब तक अच्छा खेला है, सभी मैच जीते हैं और 15 नवंबर को पहले सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार ऑल-राउंड प्रदर्शन करते हुए 70 रनों की जोरदार जीत दर्ज की है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने भी 16 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका को तीन विकेट के अंतर से हरा कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। 

गौरतलब है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया आखिरी बार 2003 में विश्व कप के फाइनल में भिड़े थे। ऑस्ट्रेलिया ने उस मैच को 125 रनों के अंतर से जीतकर तीसरी बार विश्व कप की ट्रॉफी पर कब्जा किया था। इसने 2007 में भी जीत दर्ज की थी।

भारत नरेंद्र मोदी स्टेडियम में तीसरी बार विश्व कप विजेता बनने को बेताब है। भारत ने इससे पहले 2011 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर वर्ल्डकप चैंपियनशिप जीती थी। टीम इंडिया ने अपना पहला विश्व कप 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जीता था।

बता दें कि भारत ने 2013 के बाद से कोई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ट्रॉफी नहीं जीती है। इससे पहले एमएस धोनी की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी। उम्मीद है कि 1.4 अरब लोगों का एक दशक का इंतजार खत्म होगा और भारत फाइनल में ट्रॉफी जीतकर चैंपियनशिप का शानदार अंत करेगा।

‘बंगालियों के साथ मत करो बहस, वे आपके ऊपर चिपका देंगे कुछ’: KBC के मंच से अमिताभ बच्चन ने बताया क्यों वे पत्नी जया के सामने रहते हैं ‘चुप’

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन इन दिनों कौन बनेगा करोड़पति 15 को होस्ट कर रहे हैं। वह शो में अक्सर अपनी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी से जुड़े किस्सों को शेयर करते रहते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने बताया था कि उन्होंने किचन के बर्तन-बेसिन भी साफ किया है। इस बार उन्होंने बताया है कि वो अपनी पत्नी से बहस ही नहीं करते। ये बात उन्होंने बंगालियों पर टिप्पणी करते हुए अप्रत्यक्ष ढंग से कही।

दरअसल, ये सब शुरू होता है ‘कौन बनेगा करोड़पति 15’ के सेट पर जहाँ अमिताभ बच्चन के सामने कंटेस्टेंट होती हैं, जिनसे वह 1 लाख 60 हजार का सवाल पूछते हैं। इसका भी जवाब वह लाइफलाइन के जरिए देती हैं। फिर अमिताभ बताते हैं कि अब उनका नया पड़ाव शुरू होगा। इस पर कंटेस्टेंट कहती हैं कि उसके बाद वह घर जाएंगी। आगे नहीं खेलेंगी।

अमिताभ ऐसी बात सुन कहते हैं, ” मैं दर्शकों से पूछूँगा कि आज की तारीख में आपने किसी ऐसे कंटेस्टेंट को देखा है जो गेम को छोड़ना चाहता है? आप अविश्वसनीय हैं। लोग यहाँ आने के लिए संघर्ष करते हैं और ज्यादा से ज्यादा कमाकर जाने की कोशिश करते हैं लेकिन आप घर जाना चाहती हैं।”

इस पर कंटेस्टेंट अलोलिका जवाब देती हैं, “मुझे ऐसा लगता है कि आपके सामने जो भी कंटेस्टेंट बैठते हैं, वो सभी करोड़पति होते हैं। आप करोड़ों में एक हैं तो सभी करोड़पति हैं।”

फिर अमिताभ कहते हैं, “मैं आपके अपने पर्सनल एक्सपीरियंस से कुछ बताना चाहूँगा। बंगालियों के साथ कभी बहस नहीं करना चाहिए। हमारे घर की अवस्था हमको मालूम है। ऐसे ही है बिल्कुल। आप कभी बंगाली से बहस कर ही नहीं सकते। उनसे पास फट से कुछ न कुछ उत्तर होता है। उल्टा आपके ऊपर चिपका देंगे कुछ। आज ऐसे ही किसी से पाला पड़ गया है हमारा।”

बता दें कि अभिताभ बच्चन अपनी इस बात के जरिए अपनी पत्नी जया बच्चन की ओर इशारा कर रहे थे। दोनों की शादी 1973 में हुई थी। इसके बाद से अक्सर अमिताभ बच्चन सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी जया बच्चन के आगे शांत ही नजर आते हैं।

सरकार नहीं, पुजारी ही चलाएँगे कामाख्या मंदिर: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, असम की BJP सरकार ने भी पुरानी परंपरा का किया था समर्थन

असम के कामाख्या मंदिर में दान को लेकर दिए गए गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। साल 2017 में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस मंदिर में भक्तों से प्राप्त दान को डिप्टी कमिश्नर को देने और दान की राशि के लिए अलग खाता खोलने का निर्देश दिया था। इस फैसले से मंदिर के विकास कार्यों की देखरेख मंदिर के मुख्य पुजारी, जिसे डोलोई कहा जाता है, के हाथों से प्रशासन के हाथ में आ गई थी।

इसके बाद पुजारी समाज ने गुवाहटी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने 10 नवंबर 2023 के आदेश में कहा कि कामाख्या मंदिर के प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर गुवाहाटी HC का आदेश लागू नहीं होगा। इस मामले में असम सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी रखी थी।

अपने हलफनामे में असम सरकार ने कहा, “डोलोई (पुजारी समाज) स्थानीय प्रशासन के साथ गहरे तालमेल के साथ मंदिर प्रशासन के मामलों को संतोषजनक ढंग देख रहा है और ये व्यवस्था जारी रह सकती है।” असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री डिवाइन योजना के तहत माँ कामाख्या मंदिर के विकास के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने साल 2015 में डिप्टी कमिश्नर को मंदिर में जनता और भक्तों से मिले दान को लेने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही इस तरह के दान के लिए अलग बैंक खाता खोलकर इस पैसे को मंदिर के विकास के कामों में खर्च करने के लिए कहा था। बाद में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दाखिल की गई।

इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने एक समीक्षा याचिका दाखिल की और कहा कि मंदिर के प्रशासन और धार्मिक गतिविधियों पर उसका अधिकार है। इसके बाद साल 2017 में गुवाहटी हाईकोर्ट ने उस समीक्षा याचिका का निस्तारण कर दिया। उस निस्तारण याचिका के फैसले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा था श्रद्धालुओं से प्राप्त दान केवल मंदिर की विकास के लिए होगा। आदेश के मुताबिक यह पैसा पूजा अर्चना पर खर्च नहीं किया जा सकता था।

पुजारी समाज हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार से भी राय माँगी। सुप्रीम कोर्ट में 3 सितंबर 2023 को दायर अपने हलफनामे में असम सरकार ने बताया कि माँ कामाख्या कॉरिडोर से संबंधित मामलों पर चर्चा के लिए असम के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 13 अगस्त 2023 को एक बैठक हुई थी। इसके बाद असम सरकार ने 8 नवंबर 2023 को एक और हलफनामा दायर किया था।

दरअसल, माँ कामख्या देवी के मुख्य मंदिर के पुजारियों के परिवार को बोर्डेउरिस और सहायक मंदिरों के पुजारियों के परिवारों को देउरिस कहा जाता है। ये नौ सहायक मंदिर उसी नीलांचल पहाड़ी पर स्थित हैं, जहाँ माँ कामाख्या का मंदिर है। कामाख्या मंदिर के मुख्य पुजारी को डोलोई कहा जाता है। डोलोई का चुनाव बोर्डेउरी और देउरिस द्वारा किया जाता है। साल 2021 में हुए चुनाव के बाद से कबींद्र प्रसाद सरमा कामाख्या देवी मंदिर के मुख्य पुजारी (डोलोई) हैं।

मंदिर पर कब्जे को लेकर सत्ता संघर्ष

कामाख्या मंदिर के प्रबंधन के अधिकार को लेकर 1990 के दशक में एक लंबा सत्ता संघर्ष देखा गया था। ये संघर्ष पुजारियों के परिवार के व्यक्तियों के साथ-साथ उन वर्गों के प्रतिनिधियों के बीच था, जिनका मंदिर चलाने में कोई भूमिका नहीं थी। विरोधियों ने कामाख्या डेब्यूटर बोर्ड का गठन किया था।

इस बोर्ड ने पुजारी समाज के अधिकारों और विशेषाधिकारों को अपने अधिकार में ले लिया। वहीं, पुजारी समाज ने आरोप लगाया कि डेबटर बोर्ड ने 1998 में सत्ता में आने के लिए हेरफेर किया था। बोर्ड ने कहा था कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि पुजारी समाज मंदिर को ‘अलोकतांत्रिक’ तरीके से चला रहा था।

साल 2012 में एक अंतरिम आदेश द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने कामाख्या देवी मंदिर में जिम्मेदारियों को विभाजित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने डेबुटर बोर्ड को मंदिर का प्रशासन चलाने के लिए कहा, जबकि डोलोई (पुजारियों) की भूमिका को धार्मिक गतिविधियों तक सीमित कर दिया। हालाँकि, जुलाई 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य पुजारी समाज के पारंपरिक अधिकारों को बहाल कर दिया। साथ ही यह भी कह दिया कि डोलोई एवं अन्य पदों के लिए चुनाव होना चाहिए।

अक्टूबर 2022 में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि मंदिर का रखरखाव ठीक से नहीं किया जा रहा है। पूजा स्थल में स्वच्छता मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उस समय, राज्य सरकार के साथ-साथ डोलोई समाज ने अदालत को आश्वासन दिया था कि मंदिर परिसर के आसपास स्वच्छता के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता पर लिया जा रहा है।