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‘मुझे एक बार भी कॉल नहीं किया’: वर्ल्ड कप में शमी ने चटकाए धुआँधार विकेट्स तो छलका बीवी का दर्द, बोलीं – उसे फादर होने का ही एहसास नहीं

ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 में मोहम्मद शमी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। न्यूजलैंड के खिलाफ 15 नवंबर 2023 को हुए सेमीफाइनल मैच में 7 विकेट लेकर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके बाद देश भर में मोहम्मद शमी की वाहवाही हो रही है। पूरा देश उन्हें शुभकामनाएँ दे रहा है। इसी बीच उनकी बीवी हसीन जहाँ ने भी शमी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

यूपी तक से बातचीत में हसीन जहाँ ने कहा, “मेरे मालिक मेरे रब ही हैं। अब जो मेरी किस्मत में होगा, वो देखा जाएगा। तो फ्यूचर को लेकर मैं इतना भी चिंतित नहीं रहती हूँ।” हसीन जहाँ ने कहा कि क्रिकेटर मोहम्मद शमी का उनके पास कभी फोन नहीं आता है।”

हसीन जहाँ ने कहा, “एक फादर होने का अहसास होना चाहिए… उसने मेरे साथ जो भी दुश्मनी क्रिएट करके रखा है, लेकिन फिर उसे ये अहसास होता कि वह एक फादर है…. ये चीजें मैंने कभी अहसास नहीं किया है और ना उसने (शमी) ने करवाया है। मेरी बच्ची ने तो कभी अहसास किया ही नहीं कि हाँ मेरे फादर हैं या फादर की रिस्पॉन्सिब्लिटी वो उठाए। काश वो एक अच्छा प्लेयर होने के साथ-साथ एक अच्छा हसबैंड, एक अच्छा फादर और एक अच्छा इंसान भी होता।”

बताते चलें कि वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल्स में मोहम्मद शमी के धुआँधार प्रदर्शन के बाद जहां पूरा देश उनकी गेंदबाजी की तारीफ करते नहीं थक रहा, वहीं उनकी बीवी हसीन जहां का भी एक वीडियो इंस्टाग्राम पर सामने आया है। इस वीडियो में वो एक गाने पर लिप्सिंग करते और शर्माते हुए नजर आ रही हैं।

इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है- “प्योर लव।” जिस गाने पर शमी की बीवी ने वीडियो बनाया है। उसके लिरिक्स हैं- “तेरे नाम से ही मुझको दुनिया वाले जानेंगे। तेरी सूरत देखकर ही लोग मुझे पहचानेंगे।” हसीन जहां की रील देखने के बाद अब मोहम्मद शमी के फैंस ताबड़तोड़ कमेंट कर रहे हैं। 

शौहर-बीवी के बीच है विवाद

दरअसल, मोहम्मद शमी और उनकी बीवी हसीन जहाँ के बीच साल 2018 से ही विवाद है। हसीन जहाँ ने शमी पर न सिर्फ अपनी प्रताड़ना, बल्कि मैच फिक्सिंग का भी आरोप लगाया था। उस समय शमी ने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि उनकी बीवी को कौन भड़का रहा है। मैच फिक्सिंग के आरोपों पर शमी ने कहा था कि वे देश से गद्दारी के बजाए मरना पसंद करेंगे।

बाद में शमी और हसीन जहाँ अलग-अलग हो गए थे। कोलकाता की अलीपुर जिला अदालत ने 23 जनवरी 2023 को अपने निर्णय में मोहम्मद शमी को आदेश दिया था कि वो हर महीने हसीन जहाँ को 50 हजार रुपए गुजारा भत्ता के तौर पर दें। इसके बाद हसीन ने दोबारा शमी की गिरफ्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया कि भारतीय गेंदबाज मोहम्मद शमी वेश्याओं के साथ संबंध बनाते हैं। विदेशी दौरों पर होटल रूम में वेश्याओं को लेकर आते हैं। हसीन जहाँ के अनुसार, शमी ने वेश्याओं के संपर्क में रहने और उनसे अवैध संबंध बनाने के लिए अपने दूसरे मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। उस फोन को कोलकाता की लाल बाजार पुलिस ने जब्त कर लिया है।

हसीन जहाँ ने अपनी याचिका में यह भी कहा था, “शमी अभी भी वेश्याओं के साथ यौन गतिविधियों में शामिल हैं। पिछले 4 साल से इस मामले में सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है। शमी निचली अदालत में पेश नहीं हुए और जमानत के लिए आवेदन भी नहीं किया।”

जिसने महिला की लाश को नग्न कर निकाली थी परेड, उस आतंकी को अब इजरायल ने मार गिराया: शव पर थूक रहे थे हमास के आततायी, वीडियो हुआ था वायरल

हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला करके 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। उस दौरान एक महिला का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें हमास के आतंकी महिला को निर्वस्त्र करके पिकअप गाड़ी में लादकर ले जा रहे थे और उसके शरीर पर थूक रहे थे। अब महिला के साथ तरह का क्रूर व्यवहार करने वाले आतंकी को इजरायल की सेना ने मार गिराया है। इतना ही नहीं, हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्लाइल हनियेह के आवास पर भी हमला किया है।

इजरायल पर हमले के दिन एक महिला को मारकर उसे गाजा की गलियों में घुमाया गया था। इस महिला की पहचान इजराइली मूल की जर्मन नागरिक शानी लूक के रूप में हुई थी। वीडियो में महिला का चेहरा नहीं दिख रहा था, लेकिन उसके शरीर पर बने टैटू से शानी की माँ ने उसकी पहचान की थी। दो सप्ताह पहले शानी की खोपड़ी बरामद की गई थी।

दरअसल, 22 साल की शानी लूक इजराइल के नोवा म्यूजिक फेस्टिवल में शामिल हुई थी। उस दौरान हमास के आतंकियों ने शानी को पकड़ लिया था। इजरायल से गाजा ले जाने के बाद शानी का यौन उत्पीड़न किया गया था। इसके बाद उसके पैर तोड़ दिए गए। फिर हत्या करके उसके शव का जुलूस निकाला गया था, जिस पर गाजा सैकड़ों मुस्लिमों ने थूका था।

इजरायल की डिफेंस फोर्सेस को 30 अक्टूबर को गाजा में शानी की खोपड़ी मिली थी। इसको लेकर इजरायली राष्ट्रपति ने कहा था, “इसका मतलब यह है कि हमास के जानवरों ने शानी का सिर कलम कर दिया था।” शानी के अलावा गाजा से कई इजरायली महिलाओं के साथ उत्पीड़न के सबूत मिले थे।

बेटी की मौत की जानकारी मिलने पर शानी की माँ ने कहा था, “ये सोचकर मैं खुश हूँ कि उसने अपने साथ हुई ज्यादती नहीं देखी। उसने नहीं देखा कि हमास उसके शरीर के साथ क्या कर रहा है।” शानी की माँ रिकार्डा लूक ने बताया कि उनकी बेटी के शव को अपने पैरों से दबाकर जुलूस निकालने वाले हमास आतंकी को इजरायल की सेना ने मार गिराया है।

उधर, गाजा में इजरायल का ऑपरेशन जारी है। इज़रायली सेना ने हमास के आतंकवादियों की मौजूदगी का दावा करते हुए अल शिफ़ा अस्पताल में एक “लक्षित ऑपरेशन” चलाया। इस कदम की संयुक्त राष्ट्र और अरब देशों ने निंदा की है, जिससे इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ गया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने ऑपरेशन का बचाव किया है।

जो बाइडेन ने कहा कि हमास ने अस्पताल के नीचे सैन्य मुख्यालय बना रखा है। यहाँ पर हमास के सीनियर लीडर मुलाकातें करते हैं। वहीं, इजरायल के वायुसेना और थलसेना ने आपसी समन्वय बनाकर हमास के नेता इस्माइल हनीयेह के गाजा स्थित घर को निशाना बनाया है।

दरअसल, इस्माइल ने नवंबर के शुरू में मुलाकात करके ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनाई से समर्थन माँगा था और इजरायल के साथ युद्ध में हमास की ओर से आने का आग्रह किया था। हालाँकि, खामनेई ने युद्ध में भाग लेने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे हमास को नौतिक और राजनीतिक समर्थन देते रहेंगे।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई ने मिलने आए हमास के नेता से कहा था कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर किए गए हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए हमास की ओर से ईरान युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा। वहीं, हमास के ठिकाने से बरामद हुए दस्तावेजों से पता चला है कि हमले से पहले ईरान आतंकी संगठन हमास को हथियार बनाने में मदद देना चाहता था।

कैमरे के सामने कपड़े बदलती बॉलीवुड अभिनेत्री: रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर के बाद काजोल बनीं डीपफेक का शिकार, वीडियो वायरल

आजतक बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ से लेकर कई हस्तियाँ तक डीपफेक (DeepFake) का शिकार हो रही हैं। रश्मिका मंदाना, सारा तेंदुलकर के बाद काजोल इसकी शिकार बनी हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। हालाँकि, बाद में इसे डिलीट कर दिया है। इस वीडियो को AI डीपफेक तकनीक से एडिट किया गया था, जिसमें असली और नकली का भेद कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है। इस वीडियो पर काजोल के फैंस ने गहरी नाराजगी जताई है।

हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि जिस महिला का वीडियो शेयर करके उसे काजोल का बताया जा रहा है वह एक सोशल मीडिया एंफ्लुएंसर है। इसका नाम रोजी ब्रीन है। रोजी टीक-टॉक के जरिए फेमस हुई थीं। काजोल से जुड़ा हुआ वीडियो रोजी ने जून में शेयर था। उस वीडियो में रोजी के चेहरे से छेड़छाड़ करके अब काजोल का चेहरा लगा दिया गया है और वायरल कर दिया गया है।

बताते चलें कि काजोल से पहले रश्मिका मंदाना, सारा तेंदुलकर, कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय जैसी कई अभिनेत्रियों की तस्वीरें एवं वीडियो को एडिट कर वायरल किया जा चुका है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर खूब हंगामा भी होता है।

अपनी डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है। दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक यूनिट ने इसे लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यहीं नहीं पुलिस टीम बनाकर ने आनन-फानन में इस केस की जाँच भी शुरू कर दी है।

अपने इस वीडियो को लेकर रश्मिका मंदाना ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा था, “मुझे अपने ऑनलाइन फैलाए जा रहे डीप फेक वीडियो पर बात करते और इसे शेयर करते हुए बेहद दुख हो रहा है। ईमानदारी से कहूँ तो ऐसा कुछ, न केवल मेरे लिए, बल्कि हममें से हर एक के लिए बेहद डरावना है, जो आज तकनीकी के बेजा इस्तेमाल की वजह से खतरे में हैं।”

रश्मिका ने आगे लिखा था, “मैं आज एक महिला और एक अभिनेत्री के नाते अपने परिवार, मित्रों और शुभेच्छुकों का धन्यवाद करती हूँ क्योंकि वह मेरे सपोर्ट सिस्टम हैं। हालाँकि, अगर ऐसा कुछ मेरे साथ स्कूल या कॉलेज में हुआ होता तो मुझे नहीं मालूम मैंने इसका सामना कैसे किया होता। हमें इससे एक समाज के तौर उससे पहले लड़ना होगा जब तक यह और लोगों की पहचान चुराए।”

जो वीडियो वायरल हुआ है, Deepfake नामक AI (आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस) तकनीक का इस्तेमाल कर के इसे हूबहू रश्मिका मंदाना की तरह बना दिया गया है। दरअसल, यह जारा पटेल की वीडियो में छेड़छाड़ करके बनाई गई थी। जारा एक ब्रिटिश-इंडियन इन्फ्लुएंसर हैं, जो अक्सर अंतरंग वस्त्रों में तस्वीरें और वीडियो अपलोड करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 4.32 लाख फॉलोवर्स हैं।

वहाँ उन्हें बिकनी में कई तस्वीरें अपलोड कर रखी हैं। लेकिन, किसी ने उनके एक वीडियो का गलत इस्तेमाल किया और इसमें उनकी जगह रश्मिका मंदाना को दिखा दिया। अमिताभ बच्चन तक ने इस वीडियो का संज्ञान लिया था और कहा कि इस पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी कहा था कि इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा एवं भरोसे को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कॉर्पोरेट और विदेशी हस्तक्षेप का कारण बनते चुनावी बॉन्ड: राजनीतिक दलों के लेनदेन में जनता ही गौण, जानिए क्यों गड़बड़ है अनियंत्रित, असीमित और अपारदर्शी दान वाली ये व्यवस्था

लोकतांत्रिक शासन-प्रणाली में वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता एक अपरिहार्य आवश्यकता है। सबसे अधिक आबादी वाले लोकतंत्र भारत में चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 2017 में तथाकथित साफ-सुथरे वित्तपोषण की शुरुआत की गई। लेकिन, प्रारम्भ से ही इस व्यवस्था ने एक तीखी बहस छेड़ दी है। यह बहस चुनावी बॉन्डों की गोपनीयता बनाम लोकतांत्रिक पारदर्शिता की है। चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के अपारदर्शी और संदिग्ध लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए चुनावी बॉन्ड योजना का सूत्रपात किया गया था।

लेकिन, अब यह व्यवस्था संदेह के घेरे में आ गई है और भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा उसकी समीक्षा की जा रही है। भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित संविधान पीठ के समक्ष प्रस्तुत याचिकाएँ चुनावी बॉन्ड योजना (EBS) द्वारा अनुमत ‘चयनात्मक गोपनीयता’ पर प्रश्न उठाती हैं। यह एक गंभीर मुद्दे को सामने लाती हैं कि क्या विशिष्ट व्यक्तियों या कंपनियों की गोपनीयता को अनुच्छेद 19(1) द्वारा प्रदत्त सामान्य आबादी के सूचना के संवैधानिक अधिकार से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ ने 2 नवंबर, 2023 को चुनावी बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही, इस संविधान पीठ ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए भारत के चुनाव आयोग को 30 सितंबर, 2023 तक भारत के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त चंदे का समग्र और विस्तृत विवरण प्रकाशित करने को कहा है। साथ ही, अदालत ने टिप्पणी की है कि प्रथम दृष्टया यह योजना ‘गंभीर त्रुटियों’ और ‘अपारदर्शिता’ से ग्रस्त है।

इस पृष्ठभूमि में इस व्यवस्था की समीक्षा करना समीचीन है। भारत में चुनावी बॉन्ड योजना की घोषणा 2017 के बजट के दौरान तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य राजनीतिक चंदे के लेन-देन में पारदर्शिता लाना और देश के राजनीतिक वित्तपोषण परिदृश्य को स्वच्छ बनाना था। यह सुधार कॉर्पोरेट चंदे को व्यवस्थित करने और राजनीतिक क्षेत्र में प्रचलित अघोषित, अपारदर्शी वित्तपोषण की समाप्ति पर केंद्रित था।

चुनावी बॉन्ड व्यक्तियों और कंपनियों को यह सुविधा देते हैं कि वे गोपनीय ढंग से भारतीय राजनीतिक दलों को आर्थिक सहायता प्रदान कर सकते हैं। नियंत्रण और विनियमन सुनिश्चित करने के लिए केवल वे राजनीतिक दल, जिन्होंने हालिया संपन्न राष्ट्रीय चुनावों में कम से कम 1 प्रतिशत मत हासिल किए हैं, इस प्रकार के बॉन्ड्स की प्राप्ति और नकदीकरण के पात्र हैं। 1000 रुपए से लेकर 100 करोड़ रुपए तक के इन बॉन्डों को केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की निर्धारित शाखाओं से ही खरीदा जा सकता है।

इन्हें खरीदने के लिए बैंक हस्तांतरण या इलेक्ट्रॉनिक भुगतान जैसी पहचान योग्य लेन-देन पद्धतियों का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। इसमें दानकर्ताओं की पहचान गुप्त रखी जाती है। राजनीतिक दल 15 दिनों की निश्चित अवधि में बॉन्ड को गोपनीय ढंग से भुना सकते हैं और इस राशि का उपयोग चुनावी प्रचार अभियान आदि में कर सकते हैं। इन चुनावी बॉन्डों की खरीद पर कोई संख्यात्मक सीमा निर्धारित नहीं है तथा इनका व्यक्ति अथवा कम्पनी की आय और अर्जित लाभ से भी कोई समानुपातिक संबंध नहीं है।

पहले ₹20,000 से अधिक के राजनीतिक चंदे के लिए चुनाव आयोग को सूचित करना अनिवार्य था, जो दानदाताओं के लिए आयकर कटौती प्राप्त करने का भी आधार था। हालाँकि, चुनावी बॉन्ड की शुरुआत के बाद दानकर्ता अब पिछली प्रकटीकरण आवश्यकताओं से बचते हुए गुमनाम और गोपनीय ढंग से ₹20 करोड़ से लेकर ₹200 करोड़ तक की बड़ी राशि का योगदान कर सकते हैं। इस विधायी संशोधन ने राजनीतिक दलों को तीन महत्वपूर्ण स्वतंत्रताएँ प्रदान की हैं।

पहली, आयकर अधिनियम- 1961 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम- 1951 के तहत चुनावी बॉन्ड से प्राप्त योगदान की सूचना देने या प्रकाशित करने की अनिवार्यता से मुक्ति। इससे पारदर्शिता न्यूनतम हो गयी है। दूसरी, कंपनी अधिनियम- 2013 के तहत कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले दान की ऊपरी सीमा की समाप्ति। इससे अनियंत्रित और असीमित वित्तीय सहयोग का मार्ग प्रशस्त हो गया है। तीसरी, विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम- 2010 के तहत विदेश से धन प्राप्ति के मामले में राजनीतिक दलों के लिए विशेष छूट का प्रावधान। इससे राजनीतिक दलों के नीति-निर्माण और निर्णय-प्रक्रिया में बाहरी प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आशंका बढ़ गई है।

चुनावी बॉन्ड का इरादा राजनीतिक वित्त पोषण को स्वच्छ बनाने का था, लेकिन इसने अनेक आशंकाओं को जन्म दिया है। इस व्यवस्था के आलोचकों के अनुसार गोपनीयता का प्रावधान मुख्यरूप से सत्तारूढ़ दल का हितसाधन करता है। चुनावी बॉन्ड का जारीकर्ता भारतीय स्टेट बैंक है, जो कि एक सरकारी बैंक है। इससे सरकार द्वारा विपक्षी दलों को चंदा देने वाले दानकर्ता की पहचान की ट्रैकिंग की आशंका बनी रहती है और उसके संभावित उत्पीड़न या बदले की कार्रवाई की चिंताएँ करती है। इससे सत्तारूढ़ दल को चुनावी बॉन्डों की प्राप्ति में अवांछित वरीयता, बढ़त और लाभ मिलती है। 

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (एडीआर) नामक याचिकाकर्ता ने तीन बुनियादी आधारों पर चुनावी बॉन्ड योजना की संवैधानिकता को चुनौती दी है:

पहला, जानकारी का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भाषण के अधिकार के अंतर्गत आता है, जोकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में वर्णित है। हालाँकि, यह योजना चयनात्मक गोपनीयता को प्रश्रय देती है, जिसमें दान प्राप्तकर्ताओं को तो दानकर्ता की जानकारी होती है, लेकिन उसकी पहचान जनता से अप्रकट रहती है। दूसरा, यह भेदभावपूर्ण है क्योंकि इससे राजनीतिक दल आसानी से विदेशी अनुदान प्राप्त कर सकते हैं, जबकि मीडिया और गैर-सरकारी संगठनों आदि के लिए सख्त नियमावली और पाबंदियां हैं।

तीसरा, यह व्यवस्था अनुचित प्रभाव, पक्षपात और प्रताड़ना की संभावना को बल देती है, क्योंकि कॉर्पोरेट संगठन बड़े चंदे के जरिए सत्तारूढ़ दलों के साथ अनुकूलता बनाते हुए अपने पक्ष में नीति-निर्माण करा सकते हैं। यह चुनावी बॉन्ड व्यवस्था में अंतर्निहित गोपनीयता की आड़ में सहज संभव है। भारत के महाधिवक्ता तुषार मेहता द्वारा अदालत में यह कहना कि राजनीतिक वित्तपोषण में दानदाताओं और प्राप्तकर्ताओं के खुलासे को जनता या मतदाता के जानने के अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता, चिंताजनक और गैर-जिम्मेदाराना है।

इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राजनीतिक दानों की गोपनीयता बनाए रखने के प्रावधान को अनुच्छेद 19(2) में निर्दिष्ट उचित प्रतिबंधों के तहत मूल्यांकित किया जाना चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण उन पारदर्शिता मानकों के सर्वथा प्रतिकूल है जो कि एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित राष्ट्र से अपेक्षित हैं। विडंबनापूर्ण है कि इन्हीं मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए चुनावी बॉन्ड व्यवस्था का सूत्रपात किया गया।

इस व्यवस्था में धनी-मानी लोग निगरानी व्यवस्था से बचते हुए बिचौलियों के माध्यम से अनेक चुनावी बॉन्ड खरीद सकते हैं, और कंपनियाँ इसी उद्देश्य के लिए अपने सहायक उपक्रमों की स्थापना कर सकती हैं। अनियंत्रित, असीमित और अपारदर्शी दान की अनुमति देने वाली यह व्यवस्था प्रत्यक्षतः ताकतवर लोगों को राजनीतिक दलों को प्रभावित करने की सहूलियत देती है। निश्चय ही, यह प्रभाव जनहित की कीमत पर व्यक्तिगत हितसाधन के लिए होगा।

लोकतंत्र के रंगमंच पर, चुनावी बॉन्ड (अज्ञात) दानदाताओं और प्राप्तकर्ताओं के लिए एक मुखौटा बन गए हैं, जिससे मुख्य पात्र – जनता पर्दे के पीछे की हकीकत से वंचित रह जाती है। इस बहस के पटाक्षेप और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनावी बॉन्डों के माध्यम से प्राप्त समस्त दान राशि की सूचना चुनाव आयोग और जनता को अनिवार्यता देने का प्रावधान किया जाना चाहिए। इसके अलावा, व्यक्तियों या कंपनियों द्वारा चुनावी बॉन्डों की खरीद की एक सीमा तय की जानी चाहिए ताकि किसी भी एक दानदाता के अत्यधिक प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके।

बॉन्डों की राशि को व्यक्ति अथवा कंपनी द्वारा अर्जित लाभ के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता को और बढ़ावा देने के लिए, बॉन्ड की खरीद और नकदीकरण की निगरानी और तत्काल घोषणा हेतु एक स्वतंत्र नियामक संस्था का गठन भी किया जा सकता है। दानराशि के उचित उपयोग की जाँच के लिए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक जैसी संस्था द्वारा राजनीतिक दलों की नियमित लेखा-परीक्षा की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

चुनावी चक्रों के अनुसार चुनावी बांडों की प्रतिपूर्ति अवधि को सीमित करना भी अबाध और अपारदर्शी धन प्रवाह को रोक सकता है। चुनावी बांडों के माध्यम से विदेशी फंडिंग को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाना चाहिए ताकि आंतरिक नीति-निर्माण को बाह्य/विदेशी प्रभाव/दबाव से मुक्त रखा जा सके। निश्चित रूप से चुनावी प्रक्रिया की स्वच्छता और राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता का आपस में गहरा संबंध है। चुनाव में लगने वाला काला धन भ्रष्टाचार की जननी है। चुनाव, भ्रष्टाचार और कालेधन का विषैला चक्र है। इसे तोड़ना अति आवश्यक है। इसलिए चुनावों के लिए सार्वजनिक/सरकारी वित्तपोषण के  विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।

बिहार में मिला सोने का अकूत भंडार! पहुँच गई वैज्ञानिकों की टीम, गाँव के ऊपर मँडराने लगे हेलीकॉप्टर

उद्योग-धंधों की कमी के कारण गरीबी की मार झेल रहे बिहार के लोगों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है। बिहार के बांका में सोने का भंडार का पता चला है। इसको लेकर वैज्ञानिक सर्वेक्षण का काम कर रहे हैं। यह पिछले कुछ दिनों में यह दूसरी बार है, जब जिले के किसी अन्य गाँव में सोने का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण का काम शुरू किया गया है।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम ने जिले के कटोरिया प्रखंड के अंतर्गत लकरामा पंचायत के करवाव गाँव में खुदाई की थी।  इस खुदाई में सोने समेत कई अन्य खनिजों के मौजूद होने के बारे में जानकारी मिली थी। अब GSI द्वारा यहाँ लगातार सर्वे, खनन और अध्ययन किया जा रहा है।

अब बांका जिले के जयपुर थाना क्षेत्र के चंदे पट्टी गाँव में सुनहरे पत्थर के बारे में GSI को जानकारी मिली है। यहाँ सोने की खदान होने का अनुमान है। इसके बारे में GSI की टीम यहाँ पहुँचकर खुदाई का काम कर रही है। इसके साथ ही वैज्ञानिक यहाँ की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है।

गाँव के लोगों का कहना है कि GSI की टीम गाँव के अलग-अलग 6 स्थानों पर गड्ढे करके उसके नमूने ली है और उसकी टेस्टिंग के लिए लैब लेकर गई है। इसके बाद बोरिंग प्वाइंट से लगभग 2 किलोमीटर रेडियस के जमीन को प्रत्येक 20 फीट पर मशीन से जाँच की गई और छोटे-छोट खूंटे गाड़ कर मार्किंग की गई है। 

कहा जा रहा है कि इसी जगह पर ब्रिटिश काल में भी खजिन का भंडार मिलने की संभावना जताई गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंग्रेजी हुकूमत ने उस समय भी यहाँ खुदाई कराई थी। यहाँ मौजूद 8-9 बड़े-बड़े गड्ढे अंग्रेजी सरकार द्वारा खुदाई कराने की पुष्टि कर रहे हैं।

लगभग 6 महीने बाद GSI की टीम द्वारा एक बार फिर सक्रिय होने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से तीन हेलीकॉप्टर एक साथ जमीन से काफी करीब गांव के आसपास कई चक्कर काट रहे थे। करवार गाँव के बाद चंदे पट्टी गाँव में यह खुदाई शुरू की गई है।

बताते चलें कि इस साल मई में लकरामा पंचायत अंतर्गत करवार गाँव में जीएसआई ने 320 फीट तक खुदाई की थी। अत्याधुनिक मशीनों से खुदाई के बाद 30 बॉक्स पत्थर निकालकर जाँच के लिए भेजे गए थे। खुदाई में निकले पत्थरों के सैंपल में काला और सुनहरा पत्थर भी शामिल था। इतना ही नहीं, उससे सटे इलाकों से भी सैंपल लिए गए थे।

माना जा रहा है कि जिन जमीनों में खनिज संपदा निकालने का अनुमान है, उसे चिह्नित किया जा रहा है। एक अन्य अधिकारी ने बस इतना बताया कि अभी सिर्फ ऊपरी सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है, लेकिन यह इलाका भारत का गौरव बनने वाला है।

जम्मू कश्मीर के पूँछ में हिन्दू मंदिर के पास बम ब्लास्ट: सरकारी शिक्षक समेत 3 आतंकियों को पुलिस ने किया है गिरफ्तार, बड़ी मात्रा में हथियार और कैश बरामद

जम्मू कश्मीर के पूँछ में एक हिन्दू मंदिर में बम ब्लास्ट की खबर है। इस रहस्यमयी धमाके के बाद इलाके में दहशत का माहौल पैदा हो गया। सुरक्षा बलों के जवान घटनास्थल पर पहुँचे और उन्होंने जाँच-पड़ताल शुरू कर दी। मंदिर की दीवार पर बम के धरे दिखाई दे रहे हैं, साथ ही कई जगह सुराख भी बन गया है। राहत की बात ये है कि इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ। अभी तक पता नहीं चल पाया है कि इस बम धमाके के पीछे किसका हाथ है।

उक्त मंदिर पूँछ के सुरनकोट क्षेत्र में स्थित है। सुरनकोट के SHO ने इस बम ब्लास्ट की पुष्टि की है। फॉरेंसिक की टीम ने भी घटनास्थल पर पहुँच कर जाँच की है। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके की घरबंदी कर दी है और तलाशी अभियान भी चलाया है। ANI द्वारा प्रकाशित किए गए वीडियो में मंदिर के भीतर बंदूकधारी सुरक्षाकर्मियों को जायजा लेते हुए देखा जा सकता है। वहीं दीवारों पर कई जगह सुराख और निशान भी दिखाई दे रहे हैं।

मंदिर के पुजारी अतुल शर्मा ने इस घटना के संबंध में बातचीत करते हुए बताया कि बुधवार (15 नवंबर, 2023) को रात के समय 8:50 बजे ये धमाका हुआ। उन्होंने कहा कि वो लोग उस समय दरवाजे पर थे, तभी जोर की आवाज़ सुनाई दी। उन्होंने बताया कि उसी दौरान संतरी ने उन्हें अंदर जाने के लिए कहा और बताया कि यहाँ ब्लास्ट हुआ है। इसके बाद पुजारी ने अधिकारियों को फोन कॉल किया। इसके बाद SHO और DSP मौके पर पहुँचे।

पुजारी अतुल शर्मा ने जानकारी दी कि भारतीय सेना के मेजर भी वहाँ पहुँचे थे और मामले की जानकारी ली। पुजारी ने कहा कि धमाके में कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि धमाका काफी शक्तिशाली था, और सभी लोग डर कर भाग के अंदर चले गए थे। उक्त मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जिस दिन धमाका हुआ, उस दिन पूँछ जिले में कई ड्रग्स पेडलरों के घर पुलिस ने नोटिस चस्पाया था। इसी दिन पूँछ जिले में एक सरकारी शिक्षक समेत 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया था, साथ ही गोला-बारूद भी मिले थे।

बहराम गाला गाँव में हुई इस कार्रवाई में बंदूकें और 2.5 लाख रुपए कैश भी बरामद किए गए हैं। दक्षिण कश्मीर में सीमा पार से एक ऑटो की मदद से हथियार मँगाए गए थे, जिन्हें ये कहीं लेकर जाने वाले थे। एजाज अहमद शेख (सरकारी शिक्षक), अब्दुल रशीद सालियान और मेहराज अहमद को गिरफ्तार किया गया है। शिक्षक को एक सफारी गाड़ी से गिरफ्तार किया गया। इसे और ऑटो को जब्त कर लिया गया है। ये टेरर मॉड्यूल लश्कर-ए-तैय्यबा से ताल्लुक रखता था।

हेरोइन से 50 गुना ज़्यादा खतरनाक है ‘चाइना गर्ल’: USA में 1 साल में 70000 मौतों के बाद बायडेन-जिनपिंग की बैठक, सप्लाई रोकने के लिए करार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को कहा कि चीन ने Fentanyl (फ़ेंटानिल) का प्रवाह रोकने के लिए पुनः प्रतिबद्धता जताई है। इसके बारे में बता दें कि ये ओपियम पर आधारित एक ड्रग है, जो अमेरिका में पिछले साल 70,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है। ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट’ के दौरान सैन फ्रांसिस्को में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इस संबंध में करार फाइनल किया गया।

इसे अमेरिका के लिए सफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पहले बीजिंग ने पहले कहा था कि वो फ़ेंटानिल के संबंध में कोई बातचीत तब तक नहीं करेगा, जब तक अमेरिका उसके ‘इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन साइंस’ पर लगा हुआ प्रतिबंध नहीं हटाता। अमेरिका की विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी भी लगातार आरोप लगा रही थी कि जो बायडेन फ़ेंटानिल की सप्लाई रोकने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। इस करार से ड्रग्स विरोधी एजेंसियों को राहत मिलेगी।

अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी फ़ेंटानिल एक मुद्दा रहने वाला है। चीन ने 5-6 वर्ष पहले ही इस ड्रग्स की सप्लाई करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन अब ये इसे बनाने वालों पर भी कार्रवाई करेगा। व्हाइट हाउस ने कहा है कि न सिर्फ ड्रग्स को बनाने और इसकी सप्लाई किए जाने को रोका जाएगा, बल्कि इससे आगे आने वाले ड्रग्स को लेकर भी कार्टेल पर दबाव पड़ेगा। बायडेन ने कहा कि चीन ने अमेरिकी के लोगों के ऊपर फ़ेंटानिल थोपे जाने को लेकर सहानुभूति जताई है।

साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर उस पर विश्वास करेगा, लेकिन साथ ही इसकी पुष्टि भी करेगा। पिछले महीने अमेरिका के 6 सीनेटर चीन पहुँचे थे। इनमें अमेरिका के दोनों दलों से आधे-आधे सदस्य थे। इससे पहले चीन ने कहा था कि अमेरिका अपनी नीतियों की विफलता के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहा है। सीनेटरों के दौरे से पहले अमेरिका ने चीन की 9 कंपनियों और कई अधिकारियों को फ़ेंटानिल की सप्लाई के लिए आरोपित बनाया था।

अमेरिका में आने वाली फ़ेंटानिल की अधिकतर सप्लाई चीन और मेक्सिको से आती है। चीन से आने वाले ड्रग्स को ऐसे पैक किया जाता है कि पता ही नहीं चलता कि ये कहाँ से आया है। कार्रवाई के बाद ड्रग्स सप्लाई करने वालों को थोड़े-बहुत बदलाव कर के अन्य रूपों में फ़ेंटानिल को बेचना शुरू कर दिया था। फ़ेंटानिल के बारे में बता दें कि ये मॉर्फिन से 100 गुना ज़्यादा और हेरोइन से 50 गुना ज़्यादा प्रभावशाली हैं। इसे अमेरिका में आम बातचीत की भाषा में ‘चाइना गर्ल’ और ‘चाइना टाउन’ भी कहा जाता है।

फ़ेंटानिल काफी खतरनाक भी है। इससे बेचैनी, हैरानी, पाचन तंत्र संबंधित गड़बड़ियाँ, उलटी और पेशाब संबंधित रोग भी हो सकते हैं। अमेरिकी की एजेंसियों ने इसे काफी खतरनाक करार दिया है। इसके ओवरडोज के कारण आँख की पुतलियाँ सिकुड़ने लगती हैं और साँस लेने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। बायडेन-जिनपिंग के बीच ताइवान को लेकर भी चर्चा हुई और अमेरिका ने वहाँ यथास्थिति बनाए रखने की वकालत की। अमेरिका ने कहा कि वो ताइवान को चीन में शांति से मिलाए जाने के पक्ष में है और वहाँ हथियार भेजे जाने की निंदा करता है।

निकाह के बाद भी अब्दुल रज्जाक ने 5-6 औरतों से बनाए संबंध, शेखी बघारने में अपनी ही पोल खोली: ऐश्वर्या पर कमेंट से पहले भी दिखा चुके हैं ओछी सोच

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर अब्दुल रज्जाक ने भले अभिनेत्री ऐश्वर्या राय पर भद्दी टिप्पणी के लिए माफी माँग ली हो। कहा हो कि गलती से उनका नाम निकल गया। लेकिन इस घटना के बाद वायरल हो रहे उनके कुछ पुराने वीडियोज से लगता है कि महिलाओं को लेकर उनकी सोच ही दूषित है।

‘हाथ लगाओ ये लड़के की तरह लगती हैं’

वायरल हो रहे एक वीडियो में वे पाकिस्तान की महिला क्रिकेटर निदा डार के साथ एक शो में बैठे हैं। जहाँ शो में निदा से पूछा जाता है- लड़कियाँ शादी के बाद खेलना छोड़ देती हैं? जवाब में निदा कहती हैं- कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा खेलें।

इसपर रज्जाक बात को बीच में काटते हुए कहते- शादी नहीं होती इनकी, प्रोफेशन ऐसा है कि मर्दों के बराबर आने के लिए ये ऐसी ही हो जाती हैं। इनको हाथ लगाकर देखिए तो लड़के की तरह लगती है। इस पर वहाँ मौजूद ठहाके मार कर हँसते हैं और निदा के चेहरे से साफ पता चलता है कि वो इन बातों से सहज नहीं हैं।

निदा कहती हैं- “जब प्रोफेशन ऐसा है जो जिम करेंगे ही और जिम करेंगे तो बॉडी हार्ड होगी ही।” फिर रज्जाक कहते हैं- इनके बालों की कटिंग ही देख लें आप।”

निकाह के बाद थे 5-6 रिश्ते

इसी तरह एक और वीडियो भी वायरल है। इसमें रज्जाक से कहा जा रहा है कि कभी ऐसा हुआ कि आपको किसी पर क्रश हो और वो आप पर ध्यान न दे रही है। इसके जवाब में रज्जाक कहते हैं- “सहीं बताऊँ, मेरा रिलेशन हुआ है किसी के साथ तो दोनों तरफ से हुआ है।”

एंकर पूछती है कितनी बार तो वो जवाब देते हैं-5-6 बार। ऐसे रिश्ते 1-1.5 साल बाद एस्पायर हो जाते हैं। इस पर एंकर पूछती है शादी से पहले या शादी के बाद तब भी रज्जाक जवाब देते हैं- शादी के बाद।

बता दें कि अब्दुल रज्जाक की बेहूदी बातें भारतीय अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन पर टिप्पणी करने के बाद चर्चा में आई हैं। रज्जाक ने कराची के मैरियट होटल में रविवार (12 नवंबर, 2023) को एक कार्यक्रम में शिरकत करते हुए ऐश्वर्या राय पर भद्दी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि ऐश्वर्या से शादी करने से बच्चे नेक और अच्छे पैदा नहीं हो जाएँगे। मंच पर उनके साथ अफरीदी और उमर गुल भी थे। जिन्हें इस बात पर हँसते देखा गया था।

टिप्पणी पर गाली पड़ने के बाद रज्जाक ने वीडियो जारी कर माफी माँगी थी। माफी वाले वीडियो में रज्जाक ने कहा है, “प्रेस क्रॉन्फ्रेस में क्रिकेट, कोचिंग और इरादों की बात हो रही थी। मेरी जबान फिसल गई। मैंने उदाहरण कोई और देना था पर ऐश्वर्या जी का नाम मुँह से निकल गया। मैं वास्तव में माफी माँगता हूँ। उनसे सॉरी बोलता हूँ। ये मेरा इरादा नहीं था। मैंने मिसाल कोई और देनी थी पर ये निकल गया। मैं दिल से माफी माँगता हूँ।”

चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल का एक हिस्सा हुआ अनियंत्रित, पृथ्वी की कक्षा में फिर हुआ दाखिल: ISRO बोला- उत्तर प्रशांत महासागर में गिरेगा

भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-3 के लॉन्च व्हीकल LVM3 M4 का एक हिस्सा नियंत्रण से बाहर हो और पृथ्वी के वातावरण में फिर से प्रवेश कर गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार (15 नवंबर 2023) को इसकी जानकारी दी। वहीं, सितंबर 2023 में स्लीप मोड में गए लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान अब तक सक्रिय नहीं हो पाए हैं।

ISRO ने बताया कि अनियंत्रित होने वाला हिस्सा लॉन्च व्हीकल के क्रायोजेनिक का ऊपरी हिस्सा था। इसे चंद्रयान-3 को 14 जुलाई 2023 को कक्षा में स्थापित किया था। यही हिस्सा 15 नवंबर 2023 को दोपहर 2:42 बजे पृथ्वी के वातावरण में फिर से दाखिल हो गया है। आशंका है कि यह उत्तर प्रशांत महासागर में गिरेगा।

LVM3 M4 का हिस्सा किस वजह से अनियंत्रित हुआ है, इसके बारे में अभी ISRO ने जानकारी नहीं दी है। इसका फाइनल ग्राउंड ट्रैक भारत के ऊपर से होकर नहीं गुजरा है। इसको देखते हुए माना जा रहा है कि यह उत्तर प्रशांत महासागर में गिरेगा।

ISRO ने अपने बयान में कहा है कि चंद्रयान-3 को लॉन्च किए जाने के 124 दिन बाद NORAD 57321 नाम की यह रॉकेट बॉडी पृथ्वी में फिर से प्रवेश कर गई। चंद्रयान-3 के ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद अपर स्टेज को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया से भी गुजारा गया था। रॉकेट में मौजूद प्रोपेलैंट और एनर्जी सोर्स को हटाया गया, ताकि अंतरिक्ष में विस्फोट के खतरे को कम किया जा सके।

बता दें कि 14 जुलाई 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोट्टा से प्रक्षेपित किया गया था। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंड कर गया था। इस तरह वह चंद्रमा के दक्षिणी छोर पर लैंडिंग कराने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया था। इसके बाद वहाँ से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ भेजी गई थीं।

इसके बाद 2 सितंबर को लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान स्लीप मोड में चला गया था। ISRO की लगातार कोशिश के बावजूद भी इन्हें सक्रिय नहीं किया जा सका है। दरअसल, रोवर और विक्रम को पृथ्वी के 14 दिनों के हिसाब से तैयार किया गया था। वैज्ञानिकों ने कहा था कि अगर ये दोबारा सक्रिय होते हैं तो यह बोनस होगा।

‘द गार्जियन’ ने हटाई ओसामा बिन लादेन की लिखी चिट्ठी, कारण – TikTok रील्स: 9/11 हमले के बाद अमेरिका को दिया था जवाब – बंद करो बिना शादी के सेक्स

ब्रिटिश मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को ओसामा बिन लादेन द्वारा लिखित ‘अमेरिका को पत्र’ को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। इस पत्र के प्रकाशित होने के 21 वर्ष बाद ये कदम उठाया गया है। 24 नवंबर, 2002 को ‘द गार्जियन’ के ‘ऑब्जर्वर’ में इसे मूल रूप से प्रकाशित किया गया था। इस पत्र में इस्लामी आतंकी ने बताया था कि उसने 9/11 हमले को क्यों अंजाम दिया और साथ ही उसने अमेरिका के खिलाफ जिहाद छेड़ने का ऐलान किया था।

एक अधिसूचना में ‘द गार्जियन’ ने इस पत्र को हटाने का ऐलान किया। इससे हटाए जाने का कारण है कि इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कई TikTok रील्स वायरल हो रहे थे। कई पाठकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। इन लोगों का कहना था कि इस पत्र को पढ़ने के बाद उनका आतंकवाद को लेकर उनका पुराना नजरिया ही बदल गया। आइए, अब आपको बताते हैं कि ओसामा बिन लादेन द्वारा लिखे गए इस पत्र में क्या-क्या था।

इसमें उसने लिखा है, “कुछ अमेरिकी लेखकों ने इस पर लेख प्रकाशित किया है कि आखिर हम किस चीज के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इसकी प्रतिक्रिया में कइयों ने कारण गिनाए हैं, जिनमें से कुछ शरिया के हिसाब से हैं तो कुछ नहीं। यहाँ हम अल्लाह के समर्थन के लिए उसका कारण बता रहे हैं। यहाँ 2 सवाल हैं – हम आपसे क्यों लड़ रहे हैं? हम आपसे क्या चाहते हैं? पहले सवाल का जवाब है, क्योंकि तुमने हम पर हमला किया और लगातार हमला कर रहे हो। तुमने फिलिस्तीन में हम पर हमला किया, जो 80 वर्षों से सैन्य शासन में है।”

उसने दावा किया था कि अंग्रेजों ने अमेरिका की मदद से फिलिस्तीन को यहूदियों को सौंप दिया। उसने अमेरिका पर नरसंहार का आरोप भी मढ़ा था। उसने इजरायल के गठन को ही सबसे बड़ा अपराध करार दिया था। फिर उसने सोमालिया में मुस्लिमों पर हमले का जिक्र किया था। इतना ही नहीं, उसने कश्मीर में भी भारत द्वारा अत्याचार के आरोप लगाए थे। ओसामा बिन लादेन का कहना है कि अमेरिका अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर के अरब मुल्कों से तेल चुरा रहा है।

साथ ही उसने कहा था कई वो कुरान की अनुमति से जिहाद कर रहा है। उसने लिखा था कि उसके इस्लाम मजहब में ये कहा गया है कि पीड़ितों को आक्रामकता से अत्याचारियों को जवाब देने का अधिकार है। उसने आरोप लगाया था कि अमेरिका मुस्लिमों पर 50 वर्षों से हमला कर रहा है। उसने लिखा था कि अमेरिका के नागरिक भी कोई मासूम नहीं हैं और अपने सरकार के हर एक कृत्य में साथ देते हैं। दूसरे सवाल के जवाब में ओसामा बिन लादेन कहा था कि इस्लाम को स्वीकार करने से सारी समस्याएँ खत्म हो जाएँगी।

उसने लिखा था कि हम माँग करते हैं कि तुम अविवाहितों के बीच होने वाला सेक्स, समलैंगिकता, मादक मदार्थों का सेवन, जुआ, और ट्रेडिंग बंद कर दो। उसने कहा था कि तुमने अल्लाह के शरिया की बजाव अपने अलग नियम-कानून बना लिए। उसने लिखा कि हमें अकेला छोड़ दो और हमें अपने हिसाब से चलने दो। साथ ही उसने कुरान की कई आयतें भी गिनाई थीं। उसने कहा था कि दुनिया में सभी मुल्क ऐसे होने चाहिए जहाँ अल्लाह का कानून चले, केवल अल्लाह की इबादत की जाए।