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‘जुए में पत्नी को हार गया पति, धनतेरस पर महाभारत’: जिस घटना का जिक्र कर हिन्दू त्योहार को किया जा रहा बदनाम, उसे अंजाम देने वाला निकला सुहैल अहमद

किस तरह हिन्दू पर्व-त्योहारों को बदनाम करने के लिए साजिश रची जाती है, उसकी एक ताज़ा बानगी सामने आई है। मीडिया ने खबर चलाई कि उत्तर प्रदेश के अमरोहा में धनतेरस के मौके पर एक व्यक्ति ने जुए में न सिर्फ अपनी को दाँव पर लगा दिया, बल्कि हार भी गया। इसके बाद आनन-फानन में उसका भाई मौके से वहाँ पहुँचा और रुपए देकर अपनी बहन को छुड़ाया। फिर इसके बाद हिन्दुओं को तंज कसा जाने लगा और धनतेरस त्योहार पर गंदी टिप्पणियाँ की जाने लगीं।

सबसे पहले तो मीडिया ने ही इसे भ्रामक तरीके से चलाया। जैसा कि होता आया है, मीडिया ने इस मामले में आरोपितों का नाम छिपा। ‘Zee News’ ने ‘अमरोहा में एक और महाभारत’ शीर्षक के साथ इसे प्रकाशित कर के एक हिन्दू धर्मग्रंथ को भी बदनाम किया। वहीं ‘न्यूज़ 24’ ने साड़ी और गहने पहनी हुई महिला की प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई। जबकि सच्चाई ये है कि ये मामला किसी हिन्दू नहीं बल्कि मुस्लिम परिवार का है, आरोपित सभी मुस्लिम हैं।

इस्लामी कट्टरपंथी अली सोहराब ने इस खबर को शेयर करते हुए ‘संस्कृति’ लिख कर हिन्दुओं पर तंज कसा। वहीं दीपा सम्राट नामक हैंडल ने ‘संस्कारी समाज’ लिख कर हिन्दुओं पर निशाना साधा। मुस्ताक अहमद ने इसी बहाने अपने मजहब का गुणगान करते हुए लिखा कि इस्लाम में जुआ-शराब हराम है। उसने एक तरह से हिन्दुओं को जुआरी-शराबी बता दिया। वहीं साजिद अली ने हिंदुओं को गाली देते हुए पूरे सनातन धर्म को निशाना बनाया।

आइए, अब आपको सच्चाई बताते हैं। असल में जुए में अपनी बीवी को हारने वाला कोई धनतेरस मनाने वाला हिन्दू नहीं बल्कि सुहैल अहमद है। डिडौली थाना क्षेत्र के जलालाबाद की रहने वाली महिला ने अपने शौहर और उसके परिवार पर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि उसके शौहर ने उसे ही गिरवी रख दिया। 3 वर्ष पूर्व दोनों का निकाह हुआ था। महिला ने बताया है कि निकाह के बाद से ही शौहर सुहैल अहमद, सास सलमा, ससुर रईस अहमद, देवर फूजैल, दूसरा देवर सुहैब, ननद कहकशा, महका और दरकशा – ये सब मिल कर उसे प्रताड़ित करते थे।

पीड़िता की 2 बेटियाँ भी हैं। उसने बताया है कि उसका शौहर सुहैल अहमद जुआरी है, यानी जुए का आदी है। वो जुआ पहले भी खेलता था, धनतेरस को इसमें लाना उचित नहीं है। आए दिन 15 लाख रुपए की माँग करता था। 6 महीने पहले शौहर ने उसे धक्के मार कर घर से बाहर भी निकाल दिया था। बीवी को हारने के बाद सुहैल अहमद उसे एक अनजान शहर में छोड़ कर आ गया था और जिनसे अपनी बीवी को हारा था उसे ये कह कर लौट आया था कि पैसे चुका कर बीवी को ले जाएगा। महिला के देवर ने भी उसके साथ छेड़खानी की है।

‘मेरे पास खेती के लिए खाद-बीज खरीदने के भी पैसे नहीं’: बैंकों का चक्कर लगाकर थके किसान ने कर ली आत्महत्या, सुसाइड नोट में केरल सरकार को ठहराया जिम्मेदार

केरल में एक किसान ने शुक्रवार (10 नवंबर 2023) को मौत को गले लगा लिया। अल्लापुझा में वामपंथी सरकार की सिस्टम का शिकार होकर लगभग 55 साल के किसान केजी प्रसाद ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, खेती करने के लिए पैसे नहीं होने और बैंकों द्वारा लोन देने से मना करने के बाद प्रसाद परेशान हो गए थे।

पैसे नहीं होने के कारण केजी प्रसाद पिछले चार साल से धान की खेती नहीं कर पाए थे। उनके पास आखिरी उम्मीद बैंक थे। उन्होंने बैंकों से लोन लेने की कोशिश की, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए कई योजनाएँ चलाने के बाद भी बैंकों ने उनकी उम्मीद तोड़ दी। मरने से पहले प्रसाद ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है।

गौरतलब है कि अलाप्पुझा के कुट्टनाड क्षेत्र में किसानों के आत्महत्या करने का ये पहला मामला नहीं है। ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। वहीं, केरल की पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार गरीबों-किसानों की मददगार होने का दावा करती है। हालाँकि, इस तरह की घटनाओं को देखकर सच्चाई इससे अलग नजर आती है।

मौत को गले लगाने से पहले प्रसाद ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, “कोई भी बैंक मुझे खेती के लिए लोन नहीं दे रहा है। अब मेरे पास जीने का कोई साधन नहीं है।” उन्होंने राज्य सरकार और कुछ बैंकों पर ‘उन्हें गंभीर वित्तीय संकट में धकेलने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कि इस वजह से उन्हें अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सामने आए एक फोन रिकॉर्डिंग में अवसाद में शराब का सहारा लेते नजर आते हैं। मौत को गले लगाने से पहले प्रसाद ने अपने दोस्त से कहा था, “मैं अपने जीवन में असफल हो गया हूँ। मैंने 20 साल पहले शराब पीना छोड़ दिया था, लेकिन अब मुझे अपनी दयनीय हालात की वजह से यह आदत शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”

अपने सुसाइड नोट उन्होंने लिखा है कि साल 2011 में उन्होंने एक बड़े बैंक से कर्ज लिया था। अपनी खराब आर्थिक हालात के चलते वो बैंक का पूरा पैसा नहीं लौटा पाए। हालाँकि, इस दौरान बैंक को उन्होंने 20,000 रुपए लौटाए थे। इसके बाद उन्होंने 2020 में बैंक की जारी की गई ‘एकमुश्त भुगतान योजना’ के तहत लोन खत्म कर दिया था।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि वो थाकाज़ी में चार एकड़ भूमि में धान की खेती जारी रखने के लिए वे दर-दर भटक रहे थे, लेकिन ‘कम सिबिल स्कोर’ की वजह से कोई भी बैंक उन्हें लोन देने के लिए तैयार नहीं था। दरअसल, CIBIL स्कोर एक उधारकर्ता के क्रेडिट इतिहास होता। इसके स्कोर को आधार बनाकर कर्जदाता ऋण देते हैं।

मृतक किसान ने सुसाइड नोट में आगे लिखा है कि राज्य सरकार बैंक से लिए गए ‘पीआरएस लोन’ और उसके ब्याज का भुगतान करने में नाकाम रही। यही वजह है कि उनका सिबिल स्कोर और भी कम हो गया। सरकार द्वारा धान खरीद के बाद दी गई पैडी रिसिप्ट शीट (पीआरएस) के आधार पर किसानों को पीआरएस लोन दिया जाता है। इस सीज़न में खरीदे गए धान के लिए बैंक ने 5 लाख रुपए दिए थे।

इस पीआरएस लोन को धान बेचने वाले किसान के नाम से सरकार बैंकों को लौटा देती है, लेकिन 2022-23 के धान खरीद सीजन के लिए सरकार ने बैंकों को पीआरएस राशि का भुगतान नहीं किया। पीआरएस लोन और ब्याज को तुरंत चुकाना राज्य सरकार का कर्तव्य है, क्योंकि इसके बदले सरकार ने किसान से धान ले लिया होता है।

केरल की वामपंथी सरकार को न तो किसानों की आत्महत्या से मतलब है और न ही जनता की परेशानियों से वो तो बस केरल मॉडल की बात कर उछलते रहते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रसाद भाजपा कार्यकर्ता थे और उन्होंने भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया था।

महिलाओं के साथ हमास आतंकियों की हैवानियत देख मुस्कान सिद्दीकी ने छोड़ा इस्लाम, की घर-वापसी: हिन्दू लड़के से शादी कर बनीं ‘मुस्कान मौर्या’

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में मुस्कान सिद्दीकी नामक महिला ने न सिर्फ हिन्दू धर्म में घर-वापसी की, बल्कि हिन्दू लड़के से शादी भी रचाई। मुस्कान सिद्दीकी इसके साथ ही अब ‘मुस्कान मौर्या’ बन गई हैं। उन्होंने बताया है कि हमास आतंकियों द्वारा इजरायल की महिलाओं के साथ की गई क्रूरता को देखने के बाद उन्होंने घर-वापसी करने का निर्णय लिया है। उन्होंने शिशुपाल मौर्या के साथ शादी रचाई। ‘राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना’ के अध्यक्ष विकास हिन्दू ने इस विवाह की प्रक्रिया को अपनी निगरानी में संपन्न कराया।

23 वर्षीय मुस्कान सिद्दीकी के अब्बा का नाम इल्फात है। वो शाहजहाँपुर स्थित कटरा की रहने वाली हैं। वहीं शिशुपाल मौर्या के पिता का नाम विष्णुदयाल है और उनका परिवार सीतापुर के महोली थाना क्षेत्र अंतर्गत महोली चढ़िया गाँव में रहता है। उत्तराखंड के हरिद्वार में एक फैक्ट्री में काम करने के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए थे। लड़की ने एफिडेविट दायर कर स्वतः शादी की बात कही है और कहा है कि उसे किसी ने भी बहलाया-फुसलाया नहीं है।

मुस्कान ने कहा है कि हमास आतंकियों द्वारा गाजा पट्टी में इजरायली महिलाओं के साथ जो हैवानियत की गई, उससे त्रस्त होकर उन्होंने हिन्दू धर्म में घर-वापसी का निर्णय लिया। शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को दोनों ने वैवाहिक अनुबंध पर हस्ताक्षर किया। मुस्कान ने शिशुपाल को अपना पति स्वीकार करते हुए शेष जीवन उसके साथ रहने का संकल्प लिया। साथ ही शिशुपाल ने उसके भरण-पोषण का संकल्प लिया। दोनों ने कहा कि उनके बच्चे शिशुपाल की संपत्ति के अधिकारी बनेंगे।

मुस्कान सिद्दीकी बनीं मुस्कान मौर्या

रामकोट थाना क्षेत्र स्थित काली मंदिर में इन दोनों के विवाह की प्रक्रिया आर्य समाज द्वारा संपन्न कराई गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें महिला कहती हुई दिख रही हैं कि हमास द्वारा इजरायली महिलाओं के साथ की गई क्रूरता के कारण वो हिन्दू बन रहीं। उन्होंने कहा कि इस्लाम मजहब में काफी अश्लीलता होती है, इसीलिए उन्होंने इसे छोड़ने का निर्णय लिया। ‘राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना’ अब तक ऐसी कई मुस्लिम लड़कियों की मदद कर चुका है।

मुगलों को हराने वाले असम के लाचित बोरफुकान पर आधारित फिल्म को मिला पुरस्कार: इंडो-फ्रेंच फिल्म फेस्टिवल में ‘लाचित द वॉरियर’ बेस्ट एनिमेटेड लघु फिल्म

असम के महाराजा चक्रध्वज सिंह के सेनापति लाचित बोरफुकन पर आधारित एनीमेटेड फिल्म ‘लाचित द वॉरियर’ को सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड लघु फिल्म का पुरस्कार दिया गया है। यह पुरस्कार पांडिचेरी में इंडो-फ्रेंच इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मिला। इसमें मुगल सेना को हराने वाले अहोम साम्राज्य के सेनापति लाचित के जीवन चरित को दिखाया गया है।

बता दें कि इंडो-फ्रेंच इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं के लिए भारत सरकार और फ्रांस सरकार का एक संयुक्त फिल्म महोत्सव है। इस इस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन भारत के पांडिचेरी में आयोजित किया जा रहा है। इस फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर से फिल्में शामिल होती हैं।

इस लघु फिल्म को पार्थसारथी महंत ने लिखा और निर्देशित किया है, जबकि मीना महंत और इंद्राणी बरुआ ने इसे प्रोड्यूस किया है। इस फिल्म को नैरेट किया है डॉक्टर अमरज्योति चौधरी ने, जबकि संगीत दिया है रूपम तालुकदार ने। क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में अनुपम महंत, स्टोरीबोर्डिंग और चित्रण का प्रबंधन हृषिकेश बोरा और वीएफएक्स रतुल दत्ता की देखरेख में हुआ है।

‘लाचित द वॉरियर’ को दिल्ली, कोलकाता, जयपुर और मुंबई नॉर्थ-ईस्ट फिल्म फेस्टिवल सहित आठ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में दिखाया और सम्मानित किया गया है। इस फिल्म को गोवा में आगामी भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारतीय पैनोरमा के लिए भी चुना गया है।

कौन है लाचित बोरफुकन

24 नवंबर 1622 को पैदा हुए लाचित बरपुखान को उनके युद्ध लड़ने की अद्भुत क्षमता के लिए ‘पूर्वोत्तर का शिवाजी’ भी कहा जाता है। उन्होंने 1671 में हुए सराईघाट के युद्ध (Battle of Saraighat) में मुगलों की विशाल सेना को अपनी रणनीति और जलीय युद्ध लड़ने की क्षमता की वजह से घुटनों पर ला दिया।

मुगल जब पराजित हुए थे तब लाचित पूरी तरह से स्वस्थ भी नहीं थे, पर राष्ट्रभक्ति का जज्बा ऐसा था कि बीमार होते हुए भी मातृभूमि की रक्षा के प्रण से नहीं डिगे। मुस्लिम आक्रांताओं से लड़े और अपनी सेना को विजय दिलाई। 50,000 से भी अधिक संख्या में आई मुगल फौज को घेरने के लिए बरपुखान ने जलयुद्ध की रणनीति अपनाई।

ब्रह्मपुत्र नदी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र को अपनी मजबूती बना कर मुगलों को नाकों चने चबवा दिए। उन्हें पता था कि जमीन पर मुगलिया फौज चाहे कितनी भी मजबूत हो, लेकिन पानी में वे घुटने टेकने को मजबूर होंगे। इस युद्ध में जीत के एक साल बाद वीर योद्धा बरपुखान का निधन हो गया।

लाचित बरपुखान का पराक्रम ऐसा था कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy) के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को उन्हीं के नाम पर स्वर्ण पदक (The Lachit Borphukan Gold Medal) प्रदान किया जाता है। असम सरकार ने भी 2000 में लाचित बरपुखान अवॉर्ड की शुरुआत की थी।

पार्टी के लिए परिवार फर्स्ट, नेशन लास्ट: 5 राज्यों में चुनावों के बीच असम यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, त्रिपुरा में पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन की माँग

देश के पाँच राज्यों में जारी चुनावों के बीच भी कॉन्ग्रेस में उठा-पटक जारी है। असम प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने पार्टी में परिवारवाद का आरोप लगाते हुए 11 नवंबर 2023 को अपना इस्तीफा दे दिया। वहीं, त्रिपुरा कॉन्ग्रेस ने AICC को पत्र लिखकर अपने विधायक बिराजित सिन्हा के खिलाफ ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के लिए कार्रवाई की माँग की है।

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस ने बिराजित सिन्हा पर ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल होने और पार्टी नेताओं के भीतर ‘गुटबाजी के लिए उकसाने’ का आरोप लगाया है। बता दें कि बिराजित सिन्हा ने त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही AICC त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अनुरोध पर प्रतिक्रिया देगी।

इस साल की शुरुआत में बिराजित सिन्हा को त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उनके करीबी सहयोगी सम्राट रॉय को भी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ के त्रिपुरा अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। इसके बाद ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेना बंद कर दिया था।

वहीं, असम में प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय द्वारा इस्तीफा देने का मामला नागांव जिला कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुरेश बोरा द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने के बाद आया है। रॉय ने अपने त्याग-पत्र में पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाया और पार्टी के कामकाज से असंतोष व्यक्त किया।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखे पत्र में रॉय ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं इस संगठन में बने नहीं रह पाऊँगा, क्योंकि यह केवल एलीट वर्ग के लोगों का पक्ष लेता है। अब यह महसूस होने लगा है कि इस संगठन में हम जैसे समाज के निचले तबके से आने वाले लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती है।”

असम प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष प्रत्युष रॉय ने अपने त्याग-पत्र में आगे लिखा, “इस संगठन (युवा कॉन्ग्रेस) में काम करते हुए मुझे एहसास हुआ कि दिसपुर से लेकर दिल्ली तक यह संगठन फैमिली फर्स्ट को तरजीह देता है और राष्ट्र को अंतिम रखता है।” माना जा रहा है कि ये नेता जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि सुरेश बोरा के साथ-साथ प्रत्युश रॉय ने भी भाजपा में शामिल होने की उत्सुकता व्यक्त की है। इससे पहले बोरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद थे। असम भाजपा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ इन नेताओं की तस्वीरें भी साझा की है।

ख़त्म हुआ इंतज़ार, उत्तराखंड में UCC लेकर आ रही सरकार: दीपावली बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी, महिलाओं को मिलेगा अधिकार

उत्तराखंड में ‘समान नागरिक संहिता (UCC)’ के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार विधानसभा का विशेष सत्र में UCC का बिल पारित कराएगी। अगर ये पास हो गया तो उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जहाँ UCC लागू होगा। लोगों की सलाह लेकर और इस पर विचार-विमर्श कर के ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में ये समिति बनाई गई थी।

शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के मामलों में क्या नियम-कानून होंगे, ये सब इसी कानून के हिसाब से तय होगा। इस ड्राफ्ट में इस संबंध में सुझाव दिए गए हैं। कहा जा रहा है कि दीपावली के बाद ये विशेष सत्र बुलाया जाएगा। रिपोर्ट के अध्ययन के लिए समय लेने के बाद ये विशेष सत्र बुलाया जाएगा। सदन में इस पर चर्चा के बाद इसे पारित कराया जाएगा, फिर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ये कानून बन जाएगा। हाल ही में उत्तराखंड के 23वें स्थापना दिवस पर भी सीएम धामी ने इस तरफ इशारा किया था।

उन्होंने जानकारी दी थी कि UCC का ड्राफ्ट लगभग तैयार है। उत्तराखंड की तरह ही गुजरात में भी समान नागरिक संहिता लाए जाने की तैयारी चल रही है। इधर 2022 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने UCC लाए जाने का वादा किया था। एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आम जनता के भी सुझाव माँगे गए थे। अन्य देशों के ऐसे कानूनों का भी अध्ययन किया गया। उत्तराखंड के नए कानूनों में पारिवारिक संपत्ति में महिलाओं के हिस्से से लेकर लैंगिक समानता पर भी जोर होगा।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर की मानें तो इस ड्राफ्ट में लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने का प्रावधान नहीं है। समिति ने 18 की उम्र रखने की ही वकालत की है। संपत्ति अधिकार से लेकर बच्चों तक के मामले में सभी धर्मों/मजहबों के लिए समान कानून लागू होगा। हालाँकि, ये विवाह के रस्मों या फिर अन्य रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उत्तराखंड के इस कानून के आधार पर देश में भी UCC को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

राजस्थान में पुलिस वाले ने ही किया 4 साल की बच्ची से रेप, वसुंधरा राजे ने गहलोत सरकार को घेरा, कहा- ‘कॉन्ग्रेस की निष्क्रिय सरकार की विदाई जरूरी’

राजस्थान के दौसा जिले में एक बार फिर खाकी शर्मसार हुई है। जिस वर्दी पर सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, वही भक्षक के रूप में नजर आई है। दरअसल, दौसा जिले में शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को एक पुलिस उप-निरीक्षकर द्वारा 4 साल की मासूम बच्ची के साथ रेप किए जाने की घटना सामने आई है। 

नाबालिग से बलात्कार के इस मामले के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया है। यह पूरा मामला लालसोट विधानसभा क्षेत्र के राहुवास गाँव का है। एएसपी दौसा बजरंग सिंह के अनुसार, आरोपित की पहचान भूपेन्द्र के रूप में हुई है।

वसुंधरा राजे ने कॉन्ग्रेस को घेरा

वहीं इस घटना पर अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान की गहलोत सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। वसुंधरा राजे ने इस शर्मसार करने वाली घटना को लेकर सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, “बीते पाँच वर्षों में कॉन्ग्रेस ने राजस्थान को जो कुशासन दिया है, उसी का नतीजा है कि बेटियों से दरिंदगी की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दौसा में चार वर्ष की मासूम के साथ रेप की वारदात ने राजस्थान को एक बार फिर शर्मसार किया है। इस बेटी की चीखें तब तक प्रदेशवासियों के कानों में गूँजती रहेगी, जब तक कि अपराधियों को सजा नहीं मिल जाती और जब तक इस निष्क्रिय सरकार की विदाई नहीं हो जाती।”

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट के अनुसार, एसपी वन्दिता राणा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह को राहुवास थाने में ड्यूटी के लिए भेजा था। जहाँ सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह एक दूसरे पुलिसकर्मी के किराए के कमरे में रह रहा था। वहीं इस मामले में यह आरोप है कि एक चार साल की मासूम बच्ची जब उस किराए के रूम के पास खेलते-खेलते आई तो सब इंस्पेक्टर की बुरी नजर उस मासूम बच्ची पर पड़ी और इसके बाद वह उस मासूम बच्ची को अपने रूम में ले गया और उसके साथ दरिंदगी की। 

घटना के बाद जैसे ही बच्ची के परिजनों को घटना की जानकारी हुई तो पूरे राहुवास क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने आरोपित इंस्पेक्टर पर कार्रवाई के लिए थाने पहुँचकर घेराव किया। ग्रामीणों ने आरोपित सब इंस्पेक्टर को गिरफ्तार करने और राहुवास थाने के पूरी स्टाफ को हटाने की माँग करते हुए नारेबाजी करने लगे। वहीं आरोपित के जमकर पिटाई की बात भी सामने आई है।

इस मामले में बीजेपी नेता किरोड़ी लाल मीणा भी पुलिस थाने पहुँचे जहाँ सैकड़ों की संख्या में गुस्साए प्रदर्शनकारी पुलिस और गहलोत सरकार के खिलाफ नारे लगाते दिखे। उन्होंने भी पुलिस से कार्रवाई की माँग की। 

उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा, ”लालसोट में एक पुलिसकर्मी द्वारा दलित बच्ची के साथ बलात्कार की घटना को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है। पीड़ित मासूम बच्ची को न्याय दिलाने में मदद के लिए मैं मौके पर पहुँचा हूँ। अशोक गहलोत सरकार की अक्षमता के कारण निरंकुश हो चुकी पुलिस चुनाव जैसे संवेदनशील मौके पर भी अत्याचार करने से बाज नहीं आ रही है।”

वहीं इस मामले पर गुस्सा जाहिर करते हुए बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “राजस्थान के दौसा में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है, जहाँ हाल ही में प्रियंका गाँधी वाड्रा गई थीं। राजस्थान पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने चार साल की बच्ची से रेप किया है। जब पिता थाने में केस दर्ज कराने जाता है तो उसे पीटा जाता है…आज ‘रक्षक’ भी ‘भक्षक’ बन गया है।”

आरोपित पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार

मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता और हंगामे में तब्दील होता देख बच्ची के परिजनों के द्वारा दी गई शिकायत के बाद FIR दर्ज कर सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस पूरे मामले में राजस्थान पुलिस पर जहाँ सवाल उठ रहे हैं वहीं पुलिस ने परिजनों को जाँच के बाद आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 

‘हिम्मत है तो आ जा’: चुनौती देकर डर गया विराट कोहली का फैन, जहाँ बुलाया वहाँ सचमुच पहुँच गया गांगुली का फैन – सड़क पर पहुँची ऑनलाइन फाइट

क्या आपने सोशल मीडिया के किसी झगड़े को सड़क पर जाते देखा है? खासकर तब, जब दोनों ही पक्ष एक-दूसरे से अपरिचित हों। और हाँ, किसी व्यक्तिगत मुद्दे नहीं बल्कि क्रिकेट को लेकर। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। ये सब शुरू होता है क्रिकेट की खबरें ट्विटर पर शेयर करने वाले जॉन्स की ट्वीट से। उन्होंने रोहित शर्मा की तस्वीर लगा कर सौरभ गांगुली का एक बयान शेयर किया। इस ट्वीट के नीचे ऐसा कुछ हुआ कि सभी की नज़रें इसी पर टिक गईं।

BCCI के अध्यक्ष रहे सौरभ गांगुली ने अपने बयान में कहा था, “रोहित शर्मा टीम इंडिया की कप्तानी नहीं चाहते थे क्योंकि इससे उन पर सभ फॉर्मेट खेलने का बहुत दबाव था। बात वहाँ तक पहुँच गई थी जहाँ मैंने कहा कि अगर आप हाँ नहीं कहेंगे तो मैं आपके नाम की घोषणा कर दूँगा। मैं खुश हूँ कि वो आज आगे बढ़ कर टीम का नेतृत्व कर रहे हैं और इसके परिणाम आप देख ही सकते हैं।” इसके बाद इसमें 2 किरदारों की एंट्री होती है, जिसमें से एक है अमृत प्रधान और एक ने अपना नाम सिर्फ ‘A’ लिख रखा है।

हाँ, ‘A’ विराट कोहली का फैन था और उसने अपनी डीपी भी उनकी ही लगा रखी थी। सौरभ गांगुली और विराट कोहली के बीच काफी विवाद भी हो चुका है और कोहली फैंस ने गांगुली पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कोहली को कप्तानी से हटने के लिए विवश किया। ‘A’ ने गांगुली को गाली देते हुए एक मीम शेयर किया, जिसमें तंज कसा गया था कि 40 की उम्र में जहाँ MS धोनी ने आईपीएल जीत लिया, वहीं 38 की उम्र में गांगुली को अपने ख़राब फॉर्म की वजह से टीम से हटना पड़ा था।

इस पर अमृत प्रधान ने उसे चुनौती दी कि हिम्मत है तो कहीं मिल कर ये बात बोलो। ‘A’ ने गाली का इस्तेमाल करते हुए लोकेशन भेजने के लिए कहा। अमृत प्रधान ने बताया – नई दिल्ली। फिर ‘A’ ने पूरा लोकेशन भेजने के लिए कहा, अमृत प्रधान ने बताया – ब्लॉक D, साकेत। फिर ‘A’ ने अपने दोस्त शाहनवाज़ को टैग करते हुए लिखा कि वो अपने ग्रुप के साथ वहाँ पहुँचेगा, लेकिन अमृत प्रधान ने इसे उसके डर जाने की निशानी बताते हुए कहा कि वो अकेले वहाँ पर आएँगे।

फिर ‘A’ ने दावा किया कि वो अकेले वहाँ पर पहुँचेगा। लैंडमार्क माँगने पर अमृत प्रधान ने बताया ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’। ‘A’ ने समय भी दे दिया कि वो साढ़े 7 तक वहाँ पहुँच जाएगा। इसी बीच शाहनवाज़ भी अमृत प्रधान को ट्रॉल करने आ गया और पूछने लगा कि क्या वो ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ में वॉचमैन है? अमृत ने उसे भी ललकारा और कहा कि दोस्त के साथ तुम भी आ जाओ। ‘A’ ने 7:28 तक, यानी दिए गए समय से 2 मिनट पहले ही वहाँ पहुँचने की बात कही।

फिर श्रेयांश नामक एक व्यक्ति ने बीच में आकर पूछा कि वो कहाँ तक पहुँचा? इस पर अमृत प्रधान ने लिखा कि उनका तो घर ही यहीं है। ‘A’ ने रिलाई किया, “सीधा-सीधा बोल तू डर गया।” अमृत प्रधान ने जवाब दिया कि वो तैयार हैं और सुबह-सुबह उन्होंने बारबेल भी मारा है। इस पर ‘A’ ने जवाब दिया कि उसने अभी इंक्लाइन प्रेस मारा है। अमृत प्रधान ने लिखा कि अगर वो नहीं आया तो वो वफ़ल खाने चला जाएगा। उसने बताया कि उनकी कल फ्लाइट भी है दिल्ली से कोलकाता। साथ ही टिकट की तस्वीर भी शेयर की।

फिर विराट कोहली का फैन ‘A’ कहने लगा कि अमृत प्रधान डर गए हैं। उसने लिखा, “चल इस बार तुझे माफ़ किया। दोबारा ऐसा मत करना।” इसके बाद जो हुआ वो चौंकाने वाला था। अमृत प्रधान सचमुच उस जगह पर पहुँच चुके थे। फिर उन्होंने उस जगह से अपना वीडियो बना कर भी शेयर किया। शाम का समय था और दिवाली की लड़ियाँ भी उसमें आसपास दिख रही हैं। वीडियो में अमृत प्रधान अंगूठे के इशारे से और सिर हिला कर बताते हैं कि वहाँ उनके अलावा कोई नहीं आया।

इसके बाद निर्भीक अमृत प्रधान की तारीफ होने लगी। यहाँ तक कि फ़ूड एग्रीगेटर प्लैटफॉर्म Swiggy ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “जब अमृत प्रधान माउंटेन ड्यू पीते हैं तो माउंटेन ड्यू भी निर्भीक हो जाता है।” इसके बाद लोग भी हैरान होकर कहने लगे कि अरे ये तो सचमुच पहुँच गया, ‘ई-लफड़ा’ ऑनलाइन से ऑफलाइन चला गया। अमृत प्रधान के बारे में बता दें कि बायो में उन्होंने खुद को सुप्रीम कोर्ट का वकील बताया है। इस प्रकरण के बाद ‘A’ को इनबॉक्स में इतनी गालियाँ पड़ी कि उसने अपने नोटिफिकेशन को फ़िल्टर कर दिया।

जिस शख्स को जिंदा खाने के लिए मगरमच्छ ने दबोचा, उसने मगरमच्छ की ही आँख खा ली: कहा – मोटी चमड़ी जैसा लगा, जान बचा के भागा मगरमच्छ

ऑस्ट्रेलिया में एक अजीबोगरीब घटना घटी है। यहाँ कॉलिन डेवारॉक्स नाम के एक किसान ने मगरमच्छ के चंगुल से खुद को छुड़ाने के लिए उसकी ही पलक को अपने दाँत से काट दिया। मामला पिछले महीने का है। पशु पालने वाले कॉलिन डेवरॉक्स फिनिस नदी के पास बाड़ लगाने के लिए जा रहे थे, तभी मगरमच्छ ने उनपर हमला किया। हमले के बाद कॉलिन के पाँव की हालत गंभीर है। उनका अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नदी के पास बाड़ लगाने के लिए जाते वक्त कॉलिन बिल्लाबोंग नामक झील के पास रुककर मछलियाँ देख रहे थे कि तभी अचानक उनके दाहिने पैर को 10फीट लंबे मगरमच्छ ने पकड़ लिया। उन्होंने सबसे पहले अपने बाएँ पैर से मगरमच्छ की पसलियों में लात मारने की कोशिश की। लेकिन मगरमच्छ ने उनका पाँव नहीं छोड़ा बल्कि पकड़ मजबूत करके उन्हें पानी में खींचता ले गया। ऐसे में कॉलिन ने बिन कुछ सोचे खुद को बचाने के लिए मगरमच्छ की आँखों पर अपने दाँत गड़ाए और उसकी चंगुल से छूटने में सफल हुए।

डेवरॉक्स बताते हैं, “वो बहुत अजीब स्थिति थी, लेकिन तभी मेरे दाँत उसकी पलक पर लगे, वो बहुत मोटी थी, जैसे चपड़ा। लेकिन मैंने दोबारा झटका दिया तो उसने मुझे छोड़ दिया और कुछ देर मेरा पीछा करके वहाँ से चला गया।”

इसके बाद कॉलिन खुद एक तौलिया और कुछ रस्सियों के सहारे झील से निकलकर बाहर आए। फिर उनका भाई उन्हें 130 किलोमीटर दूर रॉयल डार्विन अस्पताल लेकर गया। घटना को याद करते हुए कॉलिन कहते हैं कि बाड़ बाँधने का काम उन्होंने जिंदगी पर किया लेकिन इस घटना ने उनकी आँख खोल दी।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कि डेवेरॉक्स के पैर में मगरमच्छ के पकड़ने से गंभीर घाव हो गए हैं। घटना को एक माह बीत जाने के बाद भी वह अब तक अपना इलाज करा रहे हैं। नवंबर में उनके पैर में स्किन ग्राफ्ट लगाया गया था। डॉक्टरों को उम्मीद है कि डेवेराक्स को इस सप्ताह अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस मगरमच्छ ने उन पर हमला किया वह किसी और को नुकसान नहीं पहुँचाएगा क्योंकि उसे वहाँ से हटा दिया गया।

‘मेरी हत्या की साजिश रच रहा है कॉन्ग्रेसी मेयर एजाज ढेबर’: BJP विधायक की शिकायत पर साजिद खान गिरफ्तार, छत्तीसगढ़ में ₹2000 करोड़ के शराब घोटाले में आरोपित है ढेबर ब्रदर्स

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भाजपा के नेता और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के साथ मारपीट करने के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद साजिद खान उर्फ चिंटू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित को कोतवाली पुलिस ने नूरजहाँ होटल के बाहर से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मोहम्मद साजिद के खिलाफ मारपीट और धमकी आरोप लगाते हुए FIR दर्ज की है।

दरअसल, विधानसभा चुनाव के दौर से गुजर रहे छत्तीसगढ़ के बैजनाथ पारा में गुरुवार (9 नवंबर 2023) को भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल चुनाव प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान विधायक के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की। विधायक ने कॉलर पकड़कर मारने की कोशिश करने का आरोप था। इस दौरान मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने विधायक को घेर लिया।

भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बताया, “मुझे बचाने के लिए मेरे पीएसओ मुझे घसीट कर पीछे मदरसा ले गए तो मैं बचा। मुझे लगता है कि उनकी कोशिश मेरी हत्या करने की थी। कॉन्ग्रेस के नेता शासन-प्रशासन के संरक्षण में हमारे चुनाव प्रचार को रोकने और मेरी हत्या करने की कोशिश कर रहे हैं। वे गुंडागर्दी कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “मैंने अपने दौरे के बारे में जानकारी पुलिस को दे दी थी। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था रखने के लिए भी कहा था। मुझे लगता है ये अनवर ढेबर और ऐजाज ढेबर के लोग थे, जो महंत रामसुंदर दास के पीछे रहकर पूरे चुनाव का संचालन कर रहे हैं। ये लोग चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से नहीं होने देना चाहते हैं।”

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “हमने पहले भी इस मामले में शिकायत की है। हमारे सैकड़ों कार्यकर्ताओं को धमकाने की कोशिश की जा रही है। उनसे कहा जा रहा है कि कॉन्ग्रेस का काम करो नहीं तो हम तुम्हारा घर तुड़वा देंगे। हम तुम्हारा धंधा बंद कर देंगे और नौकरी से निकलवा देंगे।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता एजाज ढेबर शहर के मेयर हैं। अनवर ढेबर उनका बड़ा भाई और होटल का कारोबार करता है। छत्तीसगढ़ में लगभग 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोनों ED की रडार पर हैं। यह सिंडिकेट शराब की हर बोतल पर अवैध रूप से पैसा लेता था। अनवर ये पूरा सिंडिकेट कॉन्ग्रेस के नेताओं और नौकरशाहों की मदद से चलाता है।

इस घटना के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कोतवाली थाने का घेराव करके प्रदर्शन किया। उसके बाद शाम भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी कोतवाली थाने पहुँचे। इसके बाद पुलिस ने कई धाराओं में साजिद खान और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।

भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल रायपुर दक्षिण विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी हैं। वे सात बार के विधायक हैं। वे मुस्लिम बहुल इलाके बैजनाथ पारा में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान उन पर ये हमला किया गया। पुलिस ने साजिद खान को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन उसके अन्य साथी अभी भी फरार है। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।