तेलंगाना में 30 नवंबर, 2023 को विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में सत्ताधारी BRS, हैदराबाद में प्रभाव रखने वाली BRS, विपक्षी कॉन्ग्रेस और उभरती हुई भाजपा – सब मैदान में डटे हुए हैं। चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने अपने विधायक T राजा सिंह का निलंबन वापस लेकर उन्हें हैदराबाद के गोशमहल से प्रत्याशी बनाया। वहीं असदुद्दीन ओवैसी अपना हैदराबाद का गढ़ मचाने में लगे हैं। वहाँ उनके 7 विधायक हैं। साथ ही वहाँ की नगरपालिका पर भी उनकी ही पार्टी का कब्ज़ा है।
असदुद्दीन ओवैसी के भाई विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी हिन्दुओं के खिलाफ घृणात्मक बयान देने के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने हिन्दुओं को धमकाते हुए 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की धमकी दी थी। वहीं अब असदुद्दीन ओवैसी का एक नया वीडियो सामने आया है। चुनाव प्रचार के दौरान के इस वीडियो में एक महिला विधायक टी राजा सिंह की हत्या की बात कह रही है। महिला ओवैसी को देख कर बार-बार कहती है, “शेर माँ का बच्चा है ये।”
इसके बाद वो कहती है, “दुश्मनों को खत्म करो। मुसलमानों की दुआ है बेटा आपलोगों को। सारी दुनिया आपलोगों के पीछे है। उस मजलूम कमीने, राजा सिंह के मोहल्ले से मुझे खड़ा करो। मैं उसका मर्डर कर दूँगी।” असल में असदुद्दीन ओवैसी उस महिला के घर पर वोट माँगने पहुँचे थे। खास बात ये है कि इस वीडियो में हत्या की धमकी वाले बयान पर उस महिला को ओवैसी टोकते भी नहीं हैं। महिला उनके कामयाब होने की दुआ भी देती है।
उधर राजा सिंह भी गोशमहल से बतौर विधायक हैट्रिक लगाने के लिए तैयार हैं। उनके खिलाफ BRS ने नंदकिशोर व्यास को उतारा है। राजा सिंह ने तेलंगाना में भाजपा सरकार बनने की बात भी कही है। उन्होंने ओवैसी भाइयों पर केवल अपनी संपत्ति बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इनके कारण पुराने हैदराबाद शहर के मुस्लिम पिछड़े ही रह गए। उन्होंने कहा कि ओवैसी मुस्लिमों के वोट बीआरएस को बेचते हैं। राजा सिंह ने कॉन्ग्रेस पर भी निशाना साधा।
केरल के वामपंथी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि ‘भाजपा के इजरायल के समर्थन’ को ‘भारत के इजरायल को समर्थन’ के तौर पर ना देखा जाए। उनका यह बयान इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा इजरायल पर हमले के बाद भारत द्वारा की गई निंदा लेकर आया है।
विजयन ने कहा कि भारत को इजरायल से रक्षा और सैन्य संबंध नहीं रखने चाहिए। इजरायल नई दिल्ली को फिलिस्तीन के खिलाफ कंधे के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। हालाँकि, उनके इस बयान की आलोचना भी हुई है और उनकी पार्टी के दोहरे मापदंड भी सामने आ गए हैं।
#WATCH | Kozhikode: Kerala CM Pinarayi Vijayan says, "Our solidarity is towards Palestine. Please don't count the BJP's policy of supporting Israel as India's stand. India needs to stop military and defence contracts with Israel. India is used as a weapon against Palestine by… pic.twitter.com/FYxjDsP1Em
सबसे पहली बात तो यह है कि विदेश सम्बन्ध भारत में केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। राज्य सरकारों का यह विषय ही नहीं है। ऐसे में एक मुख्यमंत्री का इस विषय पर बोलना और उस पर भी देश के स्टैंड को लेकर बात करना नैतिक और संवैधानिक रूप से सही नहीं है।
दूसरी बात यह है कि जो विजयन आज इजरायल का विरोध कर रहे हैं उनकी ही पार्टी के इजरायल के समबन्ध रहे हैं। केरल की समाचार वेबसाइट ऑनमनोरमा में छपे एक लेख के अनुसार, उनकी पार्टी की सरकार अपने प्रतिनिधिमंडल को लगातार इजरायल भेजती रही है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण फरवरी 2023 में ही इजरायल गया एक प्रतिनिधिमंडल है। केरल सरकार के एक बड़े अफसर के साथ 27 लोगों का यह प्रतिनधिमंडल इजरायल में खेती की नई तकनीकें सीखने के लिए गया था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पहले केरल के कृषि मंत्री पी प्रसाद करने वाले थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें किन्हीं कारणों से जाने से रोक दिया।
हालाँकि यह कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1997 से 2001 के बीच केरल के ही इके नायनार की सरकार में कृषि मंत्री रहे कृष्णन कनियमपरम्बिल भी इजरायल गए थे। वह इजरायल जाने वाले केरल की वामपंथी सरकार के पहले मंत्री थे।
केरल की वामपंथी सरकार ही नहीं, बल्कि देश के अन्य वामपंथी सरकार के नेता भी इजरायल की यात्रा करते रहे हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु वर्ष 1997 में बंगाल से 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल लेकर इजरायल गए थे। बड़े वामपंथी नेता और लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी भी वर्ष 2000 में इजरायल गए थे।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के इस बयान की निंदा भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी की है। उन्होंने विजयन के इस बयान पर एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है, “राज्य कब से भारत की विदेश नीति तय करने लगे?”
एक अन्य बिंदु यह भी है कि बड़ी संख्या में केरल के लोग काम करते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। एक आँकड़े के अनुसार, केरल में कम से कम 7,000-8,000 मलयाली काम करते हैं। वह वहां से आजीविका कमा कर केरल भेजते हैं। बड़ी संख्या में मलयालियों को रोजगार देने वालों की खुले मंच से आलोचना कहाँ तक सही है, इस पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने हमला करके 1,400 इजरायली नागरिकों को मार दिया था। इसके बाद से इजरायल लगातार गाजा पर हमले कर रहा है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में दिवाली के दिन बड़ा हादसा हो गया है। उत्तरकाशी में सिलक्यारा से डंडालगाँव तक निर्माणाधीन टनल का एक हिस्सा ढह गया है। टनल के अंदर 30 से 35 मजदूरों के फँसने की खबर सामने आ रही है। इसको लेकर एनडीआरफ और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुँच चुकी है और राहत और बचाव कार्य जारी है। टनल के अंदर पाइप से ऑक्सीजन पहुँचाई जा रही है। साथ ही जल्द से जल्द टनल को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सुबह काम करते वक्त टनल धँसने लगा था। टनल के धँसने से उसके अंदर काम कर रहे 30 से 35 मजदूर और अन्य कर्मचारी अंदर ही फँस गए। वहीं हादसे की जानकारी मिलते ही उत्तरकाशी के एसपी भी मौके पर पहुँच चुके हैं और पूरी घटना पर नजर बनाए हुए हैं।
टनल में 36 लोग फंसे हैं। टनल का करीब 30 मीटर हिस्सा मलबे से पटा हुआ है। इसके आगे सुरंग सही स्थिति में है। जहां मजदूर फंसे है, अभी वहां ऑक्सीजन उपलब्ध है, बाहर से पाइप डालकर ऑक्सीजन की आपूर्ति के प्रयास किये जा रहे हैं।#Uttarakhand#SilkyaraToDandaTunnelpic.twitter.com/NRy6Jm0m0X
एसपी अर्पण यदुवंशी ने भी घटना की पुष्टि करते हुए टनल में 36 लोगों के फँसे होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि टनल का करीब 30 मीटर हिस्सा मलबे से पटा हुआ है। इसके आगे सुरंग सही स्थिति में है। जहाँ मजदूर फँसे है, फ़िलहाल अभी वहाँ ऑक्सीजन उपलब्ध है, साथ ही बाहर से पाइप डालकर भी ऑक्सीजन पहुँचाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक टनल में फँसे श्रमिकों से संपर्क नहीं हो पाया है।
वहीं इस मामले में NHDCL के पूर्व प्रबंधक ने बताया कि ब्रहम्खाल-पोलगाँव में निर्माणाधीन रोड टनल जो सिलक्यारा से लगभग 2340 मीटर निर्माण की गई है। सिलक्यारा की तरफ से टनल के 270 मीटर भाग के पास 30 मीटर क्षेत्र में मलवा आने के कारण टनल के अन्दर की ओर लगभग 35-40 मजदूर फँसे हैं।
फँसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए टनल से मलबा हटाने का तेजी से किया जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में बाधा इससे आ रही है कि जितना मलबा हटाया जा रहा है, उससे अधिक मलबा टनल के ऊपरी तरफ से आ जा रहा है। क्योंकि जिस जगह टनल में मलबा आ रहा है, वहाँ कठोर चट्टान (हार्ड रॉक) नहीं है।
शिफ्ट चेंजिंग के दौरान हुआ हादसा
बता दें कि यह हादसा तब हुआ जब रात्रि शिफ्ट वाले श्रमिक टनल से बाहर आ रहे थे और अगली शिफ्ट वाले भीतर जा रहे थे। टनल के मुख्य द्वार से करीब 300 मीटर दूरी पर ऊपरी हिस्से से मलबा आने से टनल बंद हो गई। यहाँ से करीब 2700 मीटर भीतर 40 से 50 मजदूर काम कर रहे थे।
आलवेदर रोड प्रोजेक्ट के तहत हो रहा टनल का निर्माण
गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट की यह सबसे लंबी सुरंग लगभग साढ़े चार किलोमीटर की है। इसका करीब 4 किलोमीटर निर्माण हो गया है। सुरंग के निर्माण में करीब 1000 मजदूर दिन-रात जुटे रहते हैं। जो अलग-अलग शिफ्ट में काम कर रहे हैं। क्योंकि फरवरी, 2024 तक इसकी खोदाई पूरी करने का लक्ष्य है।
बता दें कि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा और जंगल चट्टी के बीच इस सुरंग के निर्माण से गंगोत्री और यमुनोत्री के बीच की दूरी 26 किमी कम हो जाएगी। यह सुरंग करीब 853 करोड़ की लागत से बन रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (12 नवंबर, 2023) को हिमाचल प्रदेश के लेप्चा में चीन सीमा के पास भारतीय सेना और ITBP के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को इन जवानों की बहदुरी और दृढ़ता की याद दिलाते हुए बताया कि उनके कारण ही हम सुरक्षित हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय सेनाओं और सुरक्षा बल के पराक्रम का ये उद्घोष, ये ऐतिहासिक धरती और दीपावली का ये पवित्र त्योहार – ये अद्भुत संयोग है, ये अद्भुत मिलाप है।
उन्होंने कहा कि संतोष और आनंद से भर देने वाला ये पल, मेरे लिए भी, आपके लिए और देशवासियों के लिए भी दीपावली में नया प्रकाश पहुँचाएगा, ऐसा उनका विश्वास है। दुर्गम परिस्थितियों में भारत की रक्षा कर रहे जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार की याद हर किसी को आती है लेकिन आपके चेहरों पर उदासी नजर नहीं आ रही है। उन्होंने जवानों से कहा कि आपके उत्साह में कमी का नामोनिशान नहीं है। उत्साह से भरे हुए हैं, ऊर्जा से भरे हुए हैं क्योंकि आप जानते हैं कि 140 करोड़ का परिवार भी आपका अपना ही है।
पीएम मोदी ने उन्हें याद दिलाया कि देश इसलिए आपका कृतज्ञ है, ऋणी है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जहाँ उनकी भारतीय सेना है, जहाँ उनके देश के सुरक्षा बल के जवान तैनात हैं, वह स्थान किसी मंदिर से कम नहीं है। उन्होंने जवानों से कहा कि जहाँ आप है, वहीं उनका त्योहार है। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवानों के पास हमेशा इस वीर वसुंधरा की विरासत रही है, सीने में वह आग रही है, जिसने हमेशा पराक्रम के प्रतिमान गढ़े हैं। उन्होंने कहा कि प्राणों को हथेली पर रखकर हमारे जवान हमेशा सबसे आगे चले हैं।
हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले, “हमारे जवानों ने हमेशा साबित किया है कि सीमा पर वह देश की सबसे सशक्त दीवार हैं। दुनिया में कहीं पर भी भारतीय अगर संकट में हैं, तो भारतीय सेना और सुरक्षा बल उन्हें बचाने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। भारत की सेनाएँ और सुरक्षा बल संग्राम से लेकर सेवा तक हर स्वरूप में सबसे आगे रहते हैं। इसलिए हमें गर्व है हमारी सेनाओं पर, हमें गर्व है हमारे सुरक्षा बलों पर। भारत तब तक सुरक्षित है, जब तक इसकी सीमाओं पर हिमालय की तरह अटल और अडिग ये मेरे जांबाज साथी खड़े हैं। आपकी सेवा के कारण ही भारत भूमि सुरक्षित है और समृद्ध के मार्ग पर प्रशस्त भी है।” इस दौरान उन्होंने एक कविता भी पढ़ी, जो कुछ इस प्रकार है:
“अब संकल्प भी हमारे होंगे, संसाधन भी हमारे होंगे। अब हौसले भी हमारे होंगे, हथियार भी हमारे होंगे। दम भी हमारा होगा, कदम भी हमारे होंगे। हर श्वास में हमारे विश्वास भी अपार होगा खिलाड़ी हमारा खेल भी हमारा जय विजय ओर अजेय है प्रण हमारा ऊँचे पर्वत हों या रेगिस्तान समंदर अपार या मैदान विशाल गगन में लहराता ये तिरंगा सदा हमारा अमृतकाल की इस बेला में, वक्त भी हमारा होगा, सपने सिर्फ़ सपने नहीं होंगे, सिद्धि की एक गाथा लिखेंगे पर्वत से भी ऊपर संकल्प होगा। होगा पराक्रम ही होगा विकल्प गति और गरिमा का जग में सम्मान होगा प्रचंड सफलताओं के साथ, भारत का हर तरफ जयगान होगा।”
पीएम मोदी ने आगे कहा कि प्राणों को हथेली पर रखकर हमारे जवान हमेशा सबसे आगे चले हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सेनाएँ और सुरक्षा बल संग्राम से लेकर सेवा तक हर स्वरूप में सबसे आगे रहते हैं। इसलिए हमें गर्व है हमारी सेनाओं पर, हमें गर्व है हमारे सुरक्षा बलों पर। पीएम मोदी के शब्दों से वहाँ मौजूद जवान खासे उत्साहित नज़र आए। लेप्चा चीन सीमा के पास है, ऐसे में वहाँ ITBP (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) भी तैनात हैं। हिमाचल प्रदेश की 260 किलोमीटर की सीमा चीन से लगती है।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक दलित लड़की से रेप का मामला सामने आया है। आरोपित का नाम अरशद है। पुलिस ने शुक्रवार (10 नवम्बर 2023) को दबिश दे कर अरशद को गिरफ्तार कर लिया है। अरशद पिछले 1 साल से पीड़िता से शादी का झाँसा देकर रेप कर रहा था। पीड़िता के परिवार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए खुद को हो रही कार्रवाई से संतुष्ट बताया।
यह मामला अमरोहा जिले के थानाक्षेत्र डिडौली का है। यहाँ की रहने वाली पीड़िता ने गुरुवार (9 नवंबर 2023) को पुलिस में शिकायत दी। शिकायत में पीड़िता ने खुद को जाटव जाति से बताया। पीड़िता स्थानीय कॉलेज में BSC तृतीय सेमेस्टर की छात्रा है। शिकायत के मुताबिक जोया कस्बा इकबाल नगर में यामीन का बेटा अरशद रहता है। वह पिछले 1 साल से पीड़िता से शारीरिक संबंध बना रहा था। अरशद ने पीड़िता को शादी का झाँसा देकर चुप कराए रखा।
शिकायत में आगे 3 अक्टूबर 2023 की घटना का जिक्र किया है। पीड़िता के अनुसार इस दिन आरोपित अरशद उसे ले कर मुबारकपुर इलाके में स्थित एक OYO होटल ले गया था। यहाँ पर अरशद ने लड़की से रेप किया। शिकायत के अंत में पीड़िता ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर FIR दर्ज करते हुए 10 नवम्बर को अरशद को गिरफ्तार कर लिया है।
महोदय, प्रकरण के सम्बन्ध में थाना डिडौली पर प्राप्त तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है । अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है
अरशद पर IPC की धारा 376 के साथ SC/ST एक्ट के सेक्शन 3(2)(v) के तहत कार्रवाई की है। मामले की जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता के परिजनों से बात की। लड़की के परिवार वालों ने हमसे बातचीत के दौरान प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई से खुद को को संतुष्ट बताया। हालाँकि उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो वो लोग मीडिया की मदद लेंगे।
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक यहूदी व्यक्ति को परेशान करने और इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा अपहृत लोगों के पोस्टर उखाड़ने के आरोपितों की पहचान हो गई है। जिन लोगों ने ये काम किया है, वे भारतीय हैं और पति-पत्नी हैं। इनके नाम शैलजा गुप्ता और कुरुष मिस्त्री हैं।
जानकारी के अनुसार, 9 नवम्बर 2023 की शाम को कुरुष मिस्त्री और शैलजा गुप्ता यहाँ पर उन लोगों के पोस्टर से छेड़छाड़ कर रहे थे, जिन्हें 7 अक्टूबर के हमले में हमास ने अपह्रत किया था। इन पोस्टर पर ‘हमास द्वारा अपहृत'(Abducted by Hamas) लिखा हुआ था। ये लोग इनकी जगह ‘कब्ज़ा करने वाले परिणाम भोगते हैं’ (Occupiers Face Consequences) की पट्टियाँ चिपका रहे थे।
"Go live in Israel. Go back to your country!"
The Jewish person who encountered these two covering-up photos of civilians kidnapped by Hamas with "OCCUPIERS FACE CONSEQUENCES" flyers sent me this video. It was recorded on Nov. 9 in Manhattan's Upper West Side at 68th St. and… pic.twitter.com/lum2UoBsA5
जब एक यहूदी व्यक्ति ने उन्हें रोकने की ये दोनों उस शख्स से बदतमीजी करने लगे। शैलजा और उसके पति कुरुष ने यहूदी व्यक्ति से अपने देश ‘इराजयल’ जाने को कहने लगे। शैलजा ने इस दौरान खुद को एक फिलिस्तीनी बता डाला कहा कि वह अमेरिका में इसलिए रह रही है, क्योंकि अब फिलिस्तीन नहीं है। एक पत्रकार एंडी न्गो ने इस पूरी घटना की वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा की है।
Update: I've been able to identify the two people racially harassing a Jewish man in NYC and covering up photos of civilians kidnapped by Hamas with "OCCUPIERS FACE CONSEQUENCES" signs. They are husband and wife Kurush Mistry and Shailja Gupta. The two Indian nationals told the… pic.twitter.com/OGn6Upce0d
इन दोनों भारतीय नागरिकों यहूदी घृणा का उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शैलजा और कुरुष के इस कृत्य से अमेरिका में फैल रही यहूदी घृणा पर भी चर्चा शुरू हो गई है। अभी इस घटना में न्यूयॉर्क पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
एक सोशल मीडिया यूजर ने शैलजा और उसके पति के बारे में कई खुलासे किए हैं। यह भी सामने आया है कि शैलजा केवल यहूदियों से ही नहीं, बल्कि हिन्दुओं से भी घृणा रखती हैं। शैलजा का 2021 का एक पुराना फेसबुक पोस्ट भी सामने आया है जहाँ वह रक्षाबंधन को ‘बाल मजदूरी की खान’ और ‘लिंगभेदी छुट्टी’ बताती हैं।
शैलजा के पति कुरुष के बारे में भी कई खुलासे हुए हैं। कुरुष के फेसबुक पेज से खुलासा हुआ है कि वह चेन्नई का रहने वाला है और फ्रीपॉइंट कमोडिटीस में एक एनालिस्ट है। यह भी पता चला है कि आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ा हुआ है और इससे पहले बड़ी फर्म मॉर्गन स्टैनले में काम कर चुका है।
एक्स (पहले ट्विटर) पर एक अकाउंट @Yearofthekraken ने दावा किया है कि शैलजा ने 2011 में रिलीज हुई बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की फिल्म रा-वन (Ra-One) के लिए भी काम किया था। शैलजा ने इस फिल्म के लिए कई प्रोडक्ट बनाए थे, जिनमें कार्टून और बाकी डिजाइन शामिल थे।
So two Indian nationals were caught racially harassing a Jewish man in New York. I discovered more stuff about the Shailja Gupta, the woman involved in the incident, that's legit gonna blow your mind.
शाहरुख ने ना सिर्फ अपनी फिल्म के प्रोडक्ट शैलजा से बनवाए, बल्कि उसे आर्थिक मदद भी दी। शैलजा शाहरुख के फिल्म प्रोडक्शन हाउस ‘रेड चिलीज इंटरटेनमेंट’ की अमेरिका की प्रमुख थी। शैलजा ने बॉलीवुड की कुछ अन्य फिल्मों जैसे कि बादशाह, फिर भी दिल ही हिंदुस्तानी और कभी ख़ुशी कभी ग़म की वेबसाइट भी बनाई थी।
Shah Rukh Khan had even helped Shailja Gupta complete her Indie-film 'Walkaway' that was released in 2010.
Quite clearly, Shailja Gupta is ax extremely well-to-do person. And yet, look at the hate she harbours in her heart. Truly extraordinary. pic.twitter.com/FSpL20qJmK
यहूदियों से घृणा का यह पहला कोई मामला नहीं है। इससे पहले भी पश्चिमी देशों में इस तरह के पोस्टर फाड़ने की घटनाएँ सामने आई हैं। गौरतलब है कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास के हमले में 1,400 इजरायलियों की मौत हो गई थी। हमास ने 200 से अधिक लोगों को अगवा भी कर लिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 10वीं बार देश के जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए पहुँचे। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रदेश के लेप्चा में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली का त्योहार मना रहे हैं। पीएम मोदी को इस दौरान सुरक्षा बलों के ही यूनिफॉर्म में देखा गया। उन्होंने सैनिकों के साथ बातचीत की। बता दें कि लेप्चा झरना लाहौल-स्पीति जिले में है, जो 13,835 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहाँ की परिस्थितियाँ कठिन हैं।
एक तरह से ये एक ठंडा रेगिस्तान है। सर्दियों के दौरान पारा माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुँच जाता है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि वो बहादुर जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए लेप्चा पहुँचे हैं। पीएम मोदी ने इस दौरान वहाँ की स्थिति का भी निरीक्षण किया। 2014 में देश की सत्ता में आने के साथ ही पीएम मोदी अलग-अलग स्थानों पर देश के बहादुर जवानों की हौसलाअफजाई करने के लिए उनके साथ ही दिवाली की खुशियाँ साझा करते आए हैं।
उन्होंने 2014 में सियाचिन, 2015 में अमृतसर, 2016 में लाहौल-स्पीति, 2017 में गुरेज, 2018 में चमोली, 2019 में राजौरी, 2020 में जैसलमेर, 2021 में नौशेरा, 2022 में कारगिल और अब 2023 में लेप्चा में दिवाली मनाई है। पीएम मोदी ने कहा कि लेप्चा में हमारे वीर जवानों के साथ दिवाली मनाना गर्व और गहरी भावनाओं से भरा अनुभव साबित हुआ। उन्होंने कहा कि अपने परिवार से दूर रहने वाले ये रक्षक अपनी प्रतिबद्धता से हमारे जीवन में प्रकाश भरते हैं।
The courage of our security forces is unwavering. Stationed in the toughest terrains, away from their loved ones, their sacrifice and dedication keep us safe and secure. India will always be grateful to these heroes who are the perfect embodiment of bravery and resilience. pic.twitter.com/Ve1OuQuZXY
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे सुरक्षा बलों का साहस अटल है। अपने परिवार से दूर वो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात हैं। उनके त्याग और प्रतिबद्धता हमें सुरक्षित और आश्वस्त रखती है। भारत इन नायकों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेगा, जो वीरता और संघर्ष की प्रतिमूर्ति हैं।” लेप्चा चीन सीमा के पास है, ऐसे में वहाँ ITBP (इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस) भी तैनात हैं। हिमाचल प्रदेश की 260 किलोमीटर की सीमा चीन से लगती है।
उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) 11 नवंबर 2023 (शनिवार) को अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल से जुड़े 4 आतंकियों को पकड़ा है। महज नवंबर माह में ही अब तक इस मॉड्यूल के 7 लोग पकड़े जा चुके हैं। इनके नाम अब्दुल्ला अर्शलान, माज़ बिन तारिक, वाजीहुद्दीन, राकिब इमाम अंसारी, नावेद सिद्दीकी, मोहम्मद नोमान और मोहम्मद नाज़िम हैं। ये आतंकी सोशल मीडिया के अच्छे जानकार थे। कुछ अभी AMU से पढ़ाई कर रहे थे तो कुछ पढ़ कर नौकरी और धंधों में लग गए थे। इनमें से एक की सास अलिगढ़ मेडिकल कॉलेज में नर्स भी है।
AMU में स्टाफ नर्स है वज़ीउद्दीन की सास
अब तक पकड़े गए सभी आतंकियों में सबसे बड़ा नाम वजीहुद्दीन है। वजीहुद्दीन को अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल में ‘अमीर’ का पद मिला हुआ था। वह मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। लगभग 10 साल पहले वजीहुद्दीन दुर्ग से अलीगढ़ आया था। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में सामाजिक विज्ञान विषय से शोध (PHD) का छात्र था। ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक थोड़े समय के बाद वजीहुद्दीन AMU के कट्टरपंथी तत्वों के सम्पर्क में आ गया। वह SAMU नाम के संगठन से जुड़ गया।
ऑपइंडिया को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वो समय साल 2010 का हुआ करता था। तब हारिश फारुखी नाम का एक कट्टरपंथी अलीगढ़ में आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के प्रयास में था। हारिश फारुखी को तब उसके गुट में ‘अमीर’ की पदवी मिला करती थी। वजीहुद्दीन एक अच्छा उपदेशक था जिसने काफी कम समय में SAMU में अपना ऊँचा मुकाम बना डाला। धीरे-धीरे वजीहुद्दीन न सिर्फ देश बल्कि अन्य मजहब विरोधी बयानबाजी करने लगा। बाद में वजीहुद्दीन CAA-NRC के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों में शामिल हुआ।
वजीहुद्दीन ने अलीगढ़ में ही निकाह कर लिया। उसकी सास अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में तैनात एक नर्स है। बताया जाता है कि वो वजीहुद्दीन के मज़हबी विचारों से काफी प्रभावित थी। वजीहुद्दीन के 2 साले हैं जिसमें एक अभी कक्षा 12 में पढ़ने वाला नाबालिग है जबकि दूसरा अक्सर बीमार रहता है। गिरफ्तारी से लगभग 3 माह पहले तक वजीहुद्दीन अपनी ही सास के घर रहा था। ATS ने वजीहुद्दीन की सास की घर की भी तलाशी ली है। गिरफ्तारी के समय वजीहुद्दीन की बीवी दुर्ग जिले में थी।
वजीहुद्दीन और अब्दुल्ला अर्शलान मिल कर SAMU का यूट्यूब चैनल चलाते थे। इस चैनल पर खुद वजीहुद्दीन ने अपनी तमाम तकरीरें डाल रखीं हैं। बताया जा रहा है कि अपने साथियों की गिरफ्तारी की सूचना पर वजीहुद्दीन ने भागने का अलग तरीका खोजा था। वह सीधे अलीगढ़ से ट्रेन न पकड़ कर पहले मथुरा गया। वहाँ से उसने दुर्ग की ट्रेन पकड़ी थी। हालाँकि आखिरकार उसे ATS ने दुर्ग से दबोच ही लिया।
M.Tech करने के बाद भी राकिब बना आतंकी
वहीं एक आतंकी राकिब ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग से M.Tech किया है। यह कोर्स साल 2020 में पूरा हुआ था। इसके बाद राकिब छात्रों को पढ़ाने लगा। बताया गया है कि राकिब उस इस्लामिक मिशन स्कूल अलीगढ़ में टीचर के तौर पर पढ़ाया भी है। यह वही स्कूल है जहाँ कभी एक अभिभावक ने राष्ट्रगान न होने और हिंदी बोलने पर बच्ची को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। राकिब ने अपनी लिंक्डइन प्रोफ़ाइल में खुद को अवन्ति लर्निंग सेंटर में JEE/NEET का फैकेल्टी बताया है।
राकिब मूलतः उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का रहने वाला है। ऑपइंडिया ने स्कूल के बोर्ड पर लिखे गए नंबरों पर कई कॉल की। हालाँकि फोन किसी के द्वारा नहीं उठाया गया। स्कूल का पक्ष आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।
मछली कारोबारी नोमान
11 नवंबर को राकिब के साथ गिरफ्तार हुआ नोमान सिद्दीकी मूलतः सम्भल जिले का रहने वाला है। उसका उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में मछली पालन का पुश्तैनी कारोबार है।
होती थीं हिन्दू विरोधी तकरीरें
ऑपइंडिया को मिले एक वीडियो में SAMU से जुड़े अबू बक्र फाज़िली को किसी इंसान के नहीं बल्कि खुदा के ही शासन को स्वीकार करने का ऐलान करते हुए सुना जा सकता है। साल 2015 में यह तकरीर AMU के कैनेडी ऑडिटोरियम में दी गई थी। इस तकरीर में इस्लामी हुकूमत की राह आने वालों को कुचल देने का ऐलान किया गया था। इसके अलावा कई अन्य वीडियो में हिन्दू धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं। इन वीडियो में वजीउद्दीन को भी मंचों पर देखा जा सकता है।
कई आतंकी अभी फरार
अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के कई आतंकी अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश में ATS लगी हुई है। इन हारिश फारुखी, रिज़वान, अब्दुल समद मलिक और फैज़ान बख्तियार आदि प्रमुख हैं। हारिश फारुखी का परिवार उत्तराखंड के देहरादून में रहता है। अब्दुल समद मलिक मूलतः संभल और फैज़ान बख्तियार प्रयागराज जिले का रहने वाला है। पकड़े गए आतंकियों से पूछताछ के आधार पर ATS फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है।
दिवाली प्रकाश का पर्व है, इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और हिन्दू आतिशबाजी कर के और दीपक जला कर ख़ुशी मनाते हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए इसके बाद नया साल शुरू हो जाता है। बाजारों में चहल-पहल होती है, अरबों रुपए का कारोबार होता है। हाँ, कुछ सेलेब्रिटीज ज़रूर ‘ज्ञान’ देने आ जाते हैं और हिन्दू त्योहार को बदनाम करते हैं। इन सबके बीच हमें ये भी याद रखना चाहिए कि वो दिवाली का ही मौका था जब शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया था।
चलिए, फिर से उस प्रकरण को याद करते हैं क्योंकि 2014 के पहले भारत में हिन्दुओं की जो दुर्दशा थी उसके जिम्मेदार लोगों को कभी माफ़ नहीं किया जा सकता। हर पीढ़ी को उनके बारे में बताने की ज़रूरत है। जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 मठों में से एक है तमिलनाडु का कांची कामकोटि पीठ। जयेन्द्र सरस्वती वहाँ के मुख्य महंत हुआ करते थे। दिवाली की आधी रात को एक अनुष्ठान के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ऐसा लग रहा था जैसे भारत में मुग़ल शासन चल रहा हो।
याद रखिए, ये वही भारत है जहाँ कश्मीर को अपनी बपौती मानने वाले शेख अब्दुल्ला को नज़रबंद भी किया जाता था तो आलीशान कोठियों में। जब अंग्रेजों का शासन था तो महात्मा गाँधी के लिए भव्य आगा खाँ पैलेस को ही जेल बना दिया गया। उसी देश में एक हिन्दू संत को बीच पूजा से गिरफ्तार करवा लिया जाता है, चोर-उचक्कों की तरह पुलिस की गाड़ी से ले जाया जाता है और रात भर न्यायालय में खुले में बिठा कर रखा जाता है – ये हिन्दुओं से घृणा करने वाले सत्ताधीशों के घमंड नहीं तो और क्या सूचित करता है।
दिवाली पर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की गिरफ़्तारी
तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) स्थित महबूबनगर से जयेन्द्र सरस्वती को तमिलनाडु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामला कुछ यूँ था कि 2004 में चेन्नई के पास स्थित कांचीपुरम के वरदराजस्वामी मंदिर में 3 सितंबर को वहाँ के मैनेजर ए शंकररमण की हत्या कर दी गई थी। तमिलनाडु पुलिस ने शंकराचार्य को ही इसका मुख्य आरोपित बना दिया। ये हत्याकांड मंदिर परिसर में ही हुआ था। उस समय तमिलनाडु में AIADMK की सरकार थी। खुद मुख्यमंत्री जयललिता ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी का आदेश दिया था।
उन्हें गिरफ्तार करने की AIADMK सरकार को इतनी जल्दी थी कि राज्य के तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर-जनरल ऑफ पुलिस KVS मूर्ति को हेलीकॉप्टर से आंध्र प्रदेश भेजा गया। इसके अलावा एक अन्य सरकारी एयरक्राफ्ट भी वहाँ उतरा। तत्कालीन आंध्र प्रदेश की पुलिस को इस संबंध में बताया गया और हैदराबाद से 90 किलोमीटर दूर स्थित महबूबनगर वो सभी गाड़ी से पहुँचे। रात के 11:25 बजे इस गिरफ़्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
एक्स टेक्सटाइल मिल के गेस्ट हाउस में घुस कर शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को हिरासत में लिया गया था। उन्हें गाड़ी से हैदराबाद लाया गया और वहाँ से हवाई मार्ग से चेन्नई ले जाया गया। 12 नवंबर, 2004 को सुबह 6 बजे कांचीपुरम के जुडिशल मजिस्ट्रेट उत्तमराजन ने उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजना का फैसला सुनाया। फिर उन्हें वेल्लोर स्थित केंद्रीय कारगर में ले जाकर बंद कर दिया गया। भारत के इतिहास में किसी दुर्दांत आतंकी के लिए इतनी जल्दबाजी से ऐसी कार्रवाई शायद ही कभी देखने को मिली हो।
14 नवंबर को कांची मठ के वकीलों त्यागराजन और चेलप्पा को जेल में महंत से मिलने की अनुमति दी गई। शंकराचार्य ने बताया कि उन्हें इस मामले में फँसाया गया है और उनके बचाव के लिए सारे कानूनी कदम उठाए जाएँ। उनके खिलाफ IPC की धारा-302 (हत्या), 201 (अपराध की जानकारी छिपाना, सबूत मिटाना), 205 (मुकदमे की कार्यवाही में झूठी पहचान दिखाना), 213 (रिश्वत लेकर आरोपितों को छिपाना), 34 (समान मंशा से कई लोगों द्वारा किसी अपराध को अंजाम देना) और 120B (आपराधिक धमकी) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
मद्रास हाईकोर्ट में दायर की गई जमानत याचिका में शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती ने खुद को निर्दोष बताया। पुलिस ने मठ द्वारा हत्यारों को रुपए दिए जाने का दावा कोर्ट में किया। कहा गया कि शंकररमण ने शंकराचार्य के खिलाफ कई आरोप लगाए थे, इसीलिए उनकी हत्या करा दी गई। जयेन्द्र सरस्वती द्वारा हत्यारों को फोन कॉल किए जाने का दावा भी किया गया। पुलिस मामला साबित होने से पहले ही उन्हें अपराधी बताने लगी। शंकराचार्य की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता राम जेठमलानी ने पुलिस के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी थीं।
मद्रास हाईकोर्ट को उन्होंने बताया कि इस मामले में गिरफ़्तारी के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों तक का पालन नहीं किया गया। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, जो डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, उन्हें रात के समय गिरफ्तार किया गया। 14 नवंबर तक इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। इनमें वो 5 लोग भी शामिल थे जिन्होंने हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण किया था, लेकिन पुलिस ने कहा कि उनकी कोई संलिप्तता है ही नहीं।
बड़ी बात ये है कि एक बुजुर्ग हिन्दू संत को इस तरह से गिरफ्तार किए जाने का तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। वामपंथी दल तो एकदम प्रफुल्लित थे। सिर्फ एक भाजपा ही थी जो इस बर्बरता के विरोध में खड़ी थी। DMK नेता करूणानिधि, जो उस समय विपक्ष में थे, उन्होंने इसे एक ईमानदार कार्रवाई बताते हुए इसकी प्रशंसा की। नागालैंड के वर्तमान राज्यपाल, जो उस समय तमिलनाडु में भाजपा के नेता थे, उन्होंने सवाल उठाया कि जब जयेन्द्र सरस्वती के कहीं भागने की कोई आशंका थी ही नहीं, फिर जल्दबाजी में राजनीतिक दबाव में ये गिरफ़्तारी क्यों अंजाम दी गई?
भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील केंद्र की UPA सरकार से की और उन्हें पूजा के लिए सामग्रियाँ व व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराने की वकालत की। सोचिए, कांचीपुरम का मठ बंद हो गया था, जिस कमरे में आचार्य दर्शन देते थे वो बंद हो गया, कामकोटि अम्मा मंदिर पर काला झंडा लहरा रहा था और मठ के सभी कर्मचारी उस दिन काली पट्टी पहन कर काम करने आए, उस समय DMK क्या कर रही थी?
द्रविड़ पार्टियों ने एक हिन्दू संत की प्रताड़ना का मनाया था जश्न
आज उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को डेंगू-मलेरिया बताते हुए इसे खत्म करने की बातें करते हैं, वो यूँ ही नहीं है। उनकी पार्टी ने हिन्दू विरोधी राजनीति कर के और ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा का माहौल बना कर अपने लिए एक ऐसे वोट बैंक को तैयार किया है जो हिन्दुओं की पीड़ा को देख कर ताली बजाता है। उस समय भी यही हुआ था। DMK के कार्यकर्ता पटाखे उड़ा रहे थे, जश्न मना रहे थे, गाने बजा कर नाच-गान में लगे हुए थे। आज ये विपक्षी दल प्रेस की स्वतंत्रता की बातें करते हैं, लेकिन शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के समय तमिलनाडु पुलिस ने मीडियाकर्मियों से भी धक्का-मुक्की की थी।
शंकराचार्य ने अपने साथ हो रहे इस व्यवहार से क्षुब्ध होकर पुलिस से पूछा था, “क्या मैं वीरप्पन हूँ?” वीरप्पन उस समय का कुछकिता चंदन तस्कर था जिसका खौफ दक्षिण भारत के कई राज्यों में था और जिसे उस साल 19 अक्टूबर को ही एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। खास बात ये है कि सहिष्णु, बेनवॉश्ड और कायर बना दिए गए हिन्दुओं ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के बाद हिन्दुओं ने उस तरह का कोई आंदोलन भी खड़ा नहीं किया।
जबकि ये वो समय था जब दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुरान की प्रति जलाए जाने के अफवाह मात्र से कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में इस्लामी भीड़ ने सड़क पर उतर कर हिंसा की थी। ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ पर पैगंबर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए इसके बेंगलुरु स्थित दफ्तर पर हमला कर दिया गया था और संपादक को माफ़ी माँगने के लिए मजबूर कर दिया था। जबकि भारत के मीडिया संस्थानों ने कोर्ट के फैसले से पहले ही शंकराचार्य को अपराधी बता कर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ा।
पिछड़ों के कल्याण के लिए प्रयासरत थे शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती
जबकि जयेन्द्र सरस्वती के बारे में माना जाता है कि वो एक समाजसेवी भी थे जिन्होंने कांची मठ को कर्मकांड के अलावा जन-कल्याण से भी जोड़ा। कई शिक्षा संस्थान स्थापित किए, अस्पताल बनवाए, वेद दर्शन के प्रचार के लिए भारत भ्रमण किया और उत्तर-पूर्वी में गुवाहाटी में जनसेवा संस्थान स्थापित कर भारत की आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता को पुष्ट किया। क्या उनकी गिरफ़्तारी इसीलिए की गई क्योंकि आध्यात्मिक चेतना के संचार का काम कर रहे जयेन्द्र सरस्वती से वामपंथी ताकतों, मिशनरियों और इस्लामी कट्टरपंथियों को खतरा था?
शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को पूरे एक दशक तक प्रताड़ित किया गया। अंततः 2013 में पुडुचेरी की अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करार दिया। मीडिया ट्रायल और भारत में हिन्दू विरोधियों की सत्ता होने के कारण उन्हें काफी कुछ भुगतना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट को अंदाज़ा था कि इस मामले में ‘खेला’ किया गया है, तभी इस मामले को पुडुचेरी ट्रांसफर किया गया था। 27 फरवरी, 2018 को उनका निधन हो गया। हिन्दू धर्म के प्रसार और सामाजिक कार्यों के कारण उनकी तुलना रामानुजन से भी हुई।
दलितों के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएँ स्थापित करने के लिए उन्होंने जीवन पर्यन्त प्रयास किया। जातिगत भेदभाव के लिए उनके मन या मठ में कोई जगह नहीं थी। वो एक ऐसे संत थे जिन्होंने धारावी की गरीब बस्तियों में भी घुस कर जन-कल्याण के कार्य किए थे। देश की कई दलित बस्तियों में वो घूमे। कई हिन्दू मंदिरों के जीर्णोद्धार में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई। 18 जुलाई, 1935 को जन्मे जयेन्द्र सरस्वती को 1994 में उनके गुरु चंद्रशेखर सरस्वती स्वमिगल के निधन के बाद मठ का दायित्व सौंपा गया था।
उत्तर प्रदेश के मथुरा में पुलिस ने फारुख नाम के एक अपराधी को एनकाउंटर में मार गिराया है। फारुख ने अपने एक और साथी मोहसिन के साथ मिलकर 4 नवम्बर 2023 को मथुरा के ही मुकुट कारोबारी कृष्ण कुमार अग्रवाल की पत्नी की हत्या कर दी थी और उनके सर पर हथौड़े से वार करके घायल कर दिया था।
जानकारी के अनुसार, घटना का दूसरा आरोपित मोहसिन कृष्ण कुमार अग्रवाल का ड्राइवर था। फारुख ने इसी के साथ मिलकर गुरुकृपा विलास में स्थित उनके घर में डकैती की योजना बनाई और 4 नवम्बर को उनके घर में घुस गए।
इस दौरान फारुख ने हथौड़े वार करके कृष्ण कुमार की पत्नी कल्पना अग्रवाल को मार दिया और कृष्ण कुमार पर भी हमले किए। हालाँकि, उनकी जान बच गई और अभी उनका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा है। फारुख और मोहसिन ने कृष्ण कुमार के घर से उनकी इनोवा गाड़ी, बड़ी मात्रा में आभूषण और नकद रुपए लूट लिए थे।
जब घटना की जानकारी सुबह लोगों को हुई पुलिस ने अपनी जाँच चालू की। पुलिस ने इस मामले के खुलासे के लिए आठ टीमों को लगाया था। घटना के बाद आसपास के सीसीटीवी की जाँच से सामने आया कि मोहसिन ही घटना की रात घर आया था।
मोहसिन को जब पुलिस ने पकड़ कर पूछताछ की तो उसने पूरी घटना की सच्चाई बता दी। मोहसिन ने बताया कि उसने अपने पड़ोसी फारुख के साथ मिलकर इस डकैती की योजना बनाई थी। वह घटना के बाद कृष्ण कुमार की इनोवा लेकर भी भाग गया था।
कल रात (11 नवम्बर 2023) की रात को पुलिस को यह सूचना मिली कि गोवर्धन रोड पर फारुख को देखा गया है। चेकिंग के दौरान फारुख ने पुलिस की टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने भी फारुख पर जवाबी कार्रवाई में फायर किया जिसमें उसको गोली लगी। मथुरा पुलिस के इस एनकाउंटर में फारुख की मौत हो गई।
दि0 04.11.2023 को थाना हाईवे क्षेत्र में स्थित गुरूकृपा विलास कालोनी में एक कारोबारी के घर पर लूट के दौरान महिला की हत्या व कारोबारी को गंम्भीर रूप से घायल करने वालें 50 हजार रू के इनामी बदमाश अभियुक्त फारुख पुलिस मुठभेड़ मे ढेर।
फारुख के पास से इनोवा गाड़ी और ₹21.88 लाख नकद और हीरे-सोने के गहने भी बरामद हुए है। उसके पास से बन्दूक और कारतूसें भी बरामद हुई हैं। फारुख पर ₹50,000 का ईनाम घोषित किया गया था।