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जानिए क्यों ‘गब्बर सिंह’ ने ‘शोले’ के बाद सलीम-जावेद के साथ कभी नहीं किया काम, अमजद खान को फिल्म से हटाने के लिए दोनों ने रची थी साजिश?

‘गब्बर सिंह’ भारतीय फिल्म जगत का कालजयी पात्र है। साल 1975 में आई फिल्म शोले के इस पात्र से शायद ही ऐसा कोई होगा, जो वाकिफ नहीं होगा। इस पात्र को पर्दे पर जीवंत किया था, मंझे हुए अदाकार अमजद खान। गब्बर सिंह के पात्र की सफलता ने अमजद खान को रातों-रात प्रसिद्धी दिला दी थी। हालाँकि, इस फिल्म के बाद इसके संवाद लेखक सलीम-जावेद के साथ उन्होंने फिर कभी काम नहीं किया।

इस फिल्म में कुख्यात डकैत का किरदार निभा रहे अमजद खान को बेहद क्रूर दिखाया गया है। उनके नाम का इस्तेमाल रोने वाले बच्चों को चुप कराने के लिए माएँ अकसर करती हैं। गब्बर सिंह के डायलॉग भी खूब प्रसिद्ध हुए हैं। ‘अरे ओ सांबा… कितने आदमी थे’, ‘जो डर गया सो मर गया’ जैसे डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। हालाँकि, इस किरदार के विपरीत वास्तविक जिंदगी में अमजद खान बेहद नरम दिल इंसान थे।

जिस दिन फिल्म शोले को अमजद खान ने साइन किया था, 1973 में उसी दिन उनके बड़े बेटे शादाब खान का जन्म हुआ था। सलीम-जावेद की सलाह पर फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी ने उन्हें गब्बर सिंह का किरदार ऑफर किया था। ये वो दौर था, जब उनका परिवार भी बढ़ चुका था और उनके पिता जयंत का कैंसर का ईलाज चल रहा था। अमजद खान के लिए ये मुश्किल भरा दौर था।

फिल्म की जब शूटिंग शुरू हुई तो अमजद खान स्थापित अभिनेताओं के बीच नर्वस हो जाते। इस छाप उनकी किरदार पर भी साफ झलकती है। फिल्म की शूटिंग के पहली शेड्यूल में अमजद खान एक भी शॉट नहीं दे पाए। फिल्म के अन्य कलाकारों को लगता था कि अमजद खान अपने किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएँगे। सलीम-जावेद को चिंता होने लगी कि अब इसका दोष उन पर मढ़ा जाएगा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरकार सलीम-जावेद ने निर्देशक रमेश सिप्पी से संपर्क किया और कहा, “अगर आप अमजद से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें बदल दीजिए।” हालाँकि, निर्देशक रमेश सिप्पी ने अमजद खान के साथ ही फिल्म को जारी रखने का निर्णय लिया। फिल्म जब रिलीज हुई तो इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। हालाँकि, बाद में अमजद और सलीम-जावेद के बीच मनमुटाव हो गया।

अमजद खान को जब रमेश सिप्पी से उनको लेकर सलीम-जावेद द्वारा की गई बातचीत के बारे में पता चला तो उन्हें गलतफहमी हो गई। इस गलतफहमी को और मजबूत बनाने में अफवाहों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उन्हें लगा कि जिन लोगों ने उन्हें फिल्म दिलवाई, उन्होंने ही उन्हें फिल्म से हटाने की कोशिश भी की। इसके बाद उन्होंने सलीम-जावेद के साथ फिर कभी साथ काम नहीं किया।

बॉलीवुड इंडस्ट्री में दूसरों के मददगार के रूप में अपनी विशेष पहचान रखने वाले अमजद खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। साल 1992 में कार्डियक अरेस्ट से उनका देहांत हो गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 48 साल थी। हालाँकि, इस छोटी सी उम्र में भी उन्होंने इंडस्ट्री के स्थापित लोगों को भी पीछे छोड़ दिया था। आज यानी 12 नवंबर को अमजद खान की बर्थ एनावर्सरी है।

मक्सिदुल इस्लाम और मुशीदा खातून ने 10 दिन की मासूम को गला घोंटकर मार डाला, प्लास्टिक बैग में पैक कर नदी किनारे फेंका: केरल की घटना

महज 10 दिन की मासूम का दमघोट कर हत्या के मामले में केरल पुलिस ने असम से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान मक्सिदुल इस्लाम (Maksidul Islam) और मुशीदा खातून के रूप में हुई है। दोनों ने बच्ची को गला दबाकर मार दिया था और उसके बाद से ही फरार थे।

मनोरमा की रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 10 दिन की बच्ची का शव 8 अक्टूबर, 2023  को मुदिक्कल में एक नदी के पास एक निर्जन स्थान पर एक प्लास्टिक बैग से बरामद किया गया था। वहीं अब केरल की पेरुंबवूर पुलिस ने बेटी की हत्या करने और शव को केरल के मुदिक्कल में नदी के पास फेंकने के आरोप में असम से लिव-इन पार्टनर्स को गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले आरोपित दम्पति ने मासूम बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी क्योंकि वे माता-पिता बनने के लिए तैयार नहीं थे। इतना ही नहीं बच्ची की बेरहमी से गला घोट कर हत्या करने के बाद, उन्होंने शव को प्लास्टिक की थैली में पैक कर दिया और नदी के पास खली जगह पर लावारिश रूप में फेंक दिया।

वहीं इस मामले का पता लगाते हुए पुलिस इलाके में हाल ही में गर्भवती हुई महिलाओं की तलाश करते हुए असम के इस परिवार तक पहुँची। जो एक प्लाइवुड फैक्ट्री में काम करते थे। लेकिन पुलिस मुशीदा को पकड़ने में असफल रही क्योंकि वह अपराध के तुरंत बाद मक्सिदुल के साथ असम भाग गई थी। 

वहीं पुलिस ने इस मामले में जाँच तेज कर दोनों को ढूँढ निकाला। पेरुंबवूर पुलिस के मुताबिक, गर्भधारण को लेकर आपस में झगड़ने के बाद पुरुष और महिला ने अपने बच्चे की हत्या की साजिश रची थी। वहीं गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब आगे की कार्रवाई कर रही है। 

अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के 4 और आतंकी गिरफ्तार, 3 पहले से पुलिस के शिकंजे में: भारत में जिहाद के लिए खड़ी की जा रही थी टीम, चालू थी ट्रेनिंग

उत्तर प्रदेश पुलिस की आतंकवाद निरोधक शाखा (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़े 4 अन्य आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम राकिब इमाम अंसारी, नावेद अंसारी, मोहम्मद नोमान और मोहम्मद नाज़िम हैं। ये सभी मुस्लिम युवाओं को इस्लामिक स्टेट से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा चारों आरोपित अन्य युवाओं को जिहाद के लिए मानसिक और शारीरिक ट्रेनिंग भी देते थे। पुलिस ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि शनिवार (11 नवम्बर 2023) को की है।

मिली जानकारी के मुताबिक ATS को पूर्व में गिरफ्तार अब्दुल्ला अर्शलान, तारिक और वाज़ीउद्दीन से पूछताछ में अहम सुराग मिले थे। इन सुरागों के आधार पर 10-11 नवम्बर की रात को ATS ने अलीगढ़, संभल और आसपास के कुछ जिलों में दबिश दी थी। यह दबिश ISIS के अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों की तलाश में दी गई थी। इस दौरान लगभग आधे दर्जन संदिग्ध उठाए गए थे। इनसे हुई पूछताछ में आखिरकार राकिब, नावेद, नोमान और नाज़िम को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आतंकी ISIS आतंकी अपनी सोच के अन्य लोगों को जिहादी साहित्य बाँटते थे। ये सभी अलीगढ़ और आसपास ISIS का मॉड्यूल खड़ा करना चाहते थे। इन आतंकियों ने गुपचुप तौर पर खुद से जुड़े लोगों को आतंकवाद की ट्रेनिंग भी देनी शुरू कर दी थी। यह ट्रेनिंग सोशल प्लेटफार्म पर ऑनलाइन के साथ कुछ ख़ुफ़िया ठिकानों पर शारीरिक तौर भी होती थी। इन सभी का मकसद भारत में जिहाद के लिए टीम खड़ी करना था। साथ ही ATS कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रही है।

आतंकियों के पास से जेहादी साहित्य बरामद हुए हैं। इन सभी के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं जिसकी फॉरेंसिक जाँच करवाई जा रही है।

बताते चलें कि नवम्बर 2023 महीने में ही ATS अलीगढ़ ISIS मॉड्यूल के अब तक 7 आतंकी गिरफ्तार कर चुकी है। ये सभी उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों के रहने वाले हैं।

जीशान, जावेद, दाऊद… ED ने वक्फ बोर्ड घोटाले में AAP विधायक के 3 करीबियों को गिरफ्तार किया, अमानतुल्लाह खान के ठिकानों से मिला था हथियार-कैश

दिल्ली वक्फ बोर्ड में भर्ती में अनियमितता को लेकर राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान समेत 10 अन्‍य आरोपितों पर फैसला सुना दिया है। मामले में जाँच एजेंसी ईडी ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। तीनों के नाम जिशान हैदर, जावेद इमाम, दाऊद नसीर हैं। अदालत ने तीनो को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया है, जहाँ जाँच एजेंसी इनसे पूछताछ करेगी। ये सभी आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के करीबी बताए जा रहे हैं।

बता दें कि अमानतुल्ला खान दिल्ली वक्फ बोर्ड में चेयरमैन हैं। वहीं वफ्फ बोर्ड मामला से जुड़े भ्रष्ट्राचार मामले में जाँच एजेंसी ED अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भी केस दर्ज कर चुकी है। इससे पहले  ED ने 10 अक्टूबर, 2023 को दिल्ली के पाँच ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस मामले में ED ने अमानतुल्ला खान के घर पर भी छापा मारा था। ED ने ये कार्रवाई दिल्ली एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की तरफ से दाखिल दो FIR के तहत की थी। ये FIR दिल्ली वक्फ बोर्ड में नौकरियों में अनियमितताओं से जुड़ी है। 

AAP नेता अमानतुल्लाह खान पर 32 लोगों की अवैध नियुक्ति का आरोप

आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के रूप में 32 लोगों को अवैध रूप से भर्ती किया था। इसके साथ ही आप विधायक ने अवैध रूप से दिल्ली वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों को किराए पर दिया है। साथ ही अमानतुल्लाह खान पर ये भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने दिल्ली वक्फ बोर्ड के धन का दुरुपयोग किया है। इस मामले में दिल्ली वक्फ बोर्ड के तत्कालीन सीईओ ने इस तरह की अवैध भर्ती के खिलाफ बयान जारी किया था।

अमानतुल्लाह के करीबियों के ठिकानों पर मिला था कैश 

गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और अनियमितता के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सबसे पहले सितंबर, 2022 में अमानतुल्लाह से पूछताछ की थी। इसी के आधार पर ACB ने चार जगहों पर छापे मारे। करीब 24 लाख रुपए कैश बरामद किया था।

इसके अलावा इस छापेमारी में दो अवैध और बिना लाइसेंस की पिस्टल मिली थीं। कारतूस और गोला-बारूद भी बरामद किया था। बाद में अमानतुल्लाह को इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। यह गिरफ्तारी आप विधायक के खिलाफ सुबूतों और आपत्तिजनक सामग्री के आधार पर की गई थी।

इसमें कहा गया था कि सीबीआई की एक प्राथमिकी और दिल्ली पुलिस की तीन शिकायतें आप विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का आधार बनीं। खान ने उक्त आपराधिक गतिविधियों से अपराध की बड़ी रकम नकदी में अर्जित की थी और इस नकद राशि को अपने सहयोगियों के नाम पर दिल्ली में विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में निवेश किया था। हालाँकि, बाद में उन्हें उन्हें 28 दिसंबर 2022 को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

बर्खास्त किया गया 4 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाला राजस्थान का दरोगा, लगाया गया पॉक्सो और SC-ST एक्ट: गहलोत सरकार में थम नहीं रहा अपराध

राजस्थान के दौसा जिले में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले दारोगा को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे पुलिस सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपित उप-निरीक्षक भूपेंद्र की बर्खास्तगी का आदेश राजस्थान के पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने दिया है। आरोपित के खिलाफ POCSO और ST-SC में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, भूपेंद्र ने शुक्रवार (10 नवंबर 2023) को बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने कमरे में ले गया और वहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और उसे उसी दिन हिरासत में लिया गया। भाजपा ने इस घटना को सिर्फ राजस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए कलंक बताया था।

इस घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सवाल खड़े किए थे। वसुंधरा ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा था कि कॉन्ग्रेस ने राजस्थान को जो कुशासन दिया है, उसी का नतीजा है कि बेटियों से दरिंदगी की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एसपी वन्दिता राणा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए सब इंस्पेक्टर भूपेंद्र को राहुवास थाने में ड्यूटी के लिए भेजा था। वहाँ आरोपित एक दूसरे पुलिसकर्मी के किराए के कमरे में रह रहा था। कहा जा रहा है कि जब बच्ची वहाँ खेलने के लिए आई तो उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर कमरे में ले गया और उसके साथ दरिंदगी की।

घटना की जानकारी बच्ची के परिजनों को हुई तो पूरे राहुवास क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। लोगों ने आरोपित सब-इंस्पेक्टर पर कार्रवाई के लिए थाने पहुँचकर घेराव किया। ग्रामीणों ने आरोपित को गिरफ्तार करने और राहुवास थाने के पूरी स्टाफ को हटाने की माँग करते हुए नारेबाजी करने लगे। 

दिवाली-छठ की छुट्टियाँ, फिर भी बिहार में खुले रहेंगे स्कूल: हिन्दू त्योहारों पर जारी किया गया फरमान, पटना के DM बोले – पटाखे न उड़ाएँ

जहाँ एक तरफ पूरे देश में दिवाली की छुट्टियाँ हैं और ख़ुशी का माहौल है, वहीं बिहार की राजधानी पटना में दिवाली के दौरान भी स्कूलों को खुला रखने का फरमान जारी हुआ है। खास बात ये है कि छठ, जो बिहार का सबसे बड़ा पर्व है और जिसे लोक आस्था का महापर्व कहा जाता है – उस दौरान भी ये स्कूल खुले रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार ईद-बकरीद जैसे मौकों पर भी इस तरह के फरमान जारी कर सकती है? अगर ऐसा हो तो कितना ज़्यादा विरोध होगा?

पटना के DM चंद्रशेखर सिंह ने आदेश दिया है कि स्कूल खुले रखे जाएँ। सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को पत्र लिख कर कहा गया है कि 11 नवंबर से 21 नवंबर तक सभी नव नियुक्त शिक्षकों का इन विद्यालयों में पदस्थापन किया जाना है। वहीं 13 नवंबर से लेकर 21 नवंबर तक छठ की छुट्टियों की घोषणा की गई थी। इसके बावजूद इन स्कूलों को नव नियुक्त शिक्षकों की पदस्थापना के लिए खुला रखने का आदेश जारी किया गया है।

प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वो इस दौरान स्कूलों में खुद मौजूद रहें और प्रक्रिया को पूरा कराएँ। नए शिक्षकों का योगदान प्रधानाध्यापक द्वारा ही स्वीकृत किया जाता है। प्रिंसिपलों को कहा गया है कि ज़रूरत पड़ने पर वो अपने किसी सहयोगी शिक्षक की सहायता ले सकते हैं। पहले जाँच की जाएगी कि क्या ये शिक्षक वही हैं जिन्होंने BPSC की परीक्षा पास की थी, जिनकी काउंसिलिंग हुई, जिन्हें औपबंधिक पत्र दिया गया।

पटना के जिला पदाधिकारी ने एक वीडियो जारी कर के दिवाली पर पटाखा ने उड़ाने की भी अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोगों को ग्रीन दिवाली मनानी चाहिए। वहीं दिवाली-छठ के दौरान ही नए शिक्षकों का स्कूलों में प्रशिक्षण भी होगा। कक्षा संचालन, मध्याह्न भोजन योजना और पाठ्यक्रम को लेकर उन्हें जानकारी दी जाएगी। इनमें प्रखंड स्तर के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। सुबह साढ़े 9 से साढ़े 12 तक और दोपहर डेढ़ बजे से 4 बजे तक प्रशिक्षण चलेगा। नए शिक्षकों को किसी संघ का हिस्सा न बनने की सलाह भी दी गई है।

पहले सिर्फ 4.5% मुस्लिम पाते थे उच्च शिक्षा, मोदी सरकार में दोगुनी हुई संख्या: रिपोर्ट में खुलासा- अब भी अपनी लड़कियों को नहीं पढ़ा रहे मुस्लिम

एक रिपोर्ट ने बताया है कि शिक्षा के मामले में मुस्लिम छात्राएँ, मुस्लिम छात्रों से पिछड़ रही हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वह उच्च शिक्षा तक भी कम संख्या में पहुँच रही हैं। यह सारी जानकारी सरकारी वेबसाइट UDISEPLUS के आँकड़ों का विश्लेषण कर के निकाली गई है।

मुस्लिम एजुकेशन इन इंडिया नाम की एक वेबसाईट ने इन सारे आँकड़ों का विश्लेषण किया है। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शिक्षा पाने वाले मुस्लिम बच्चों में सर्वाधिक संख्या ऐसे बच्चों की है जो कि प्राथमिक शिक्षा (कक्षा एक से पाँच) प्राप्त कर रहे हैं। कुल मुस्लिम छात्र/छात्राओं का 52% प्राथमिक स्तर पर ही है।

इसके विपरीत उच्च प्राथमिक (कक्षा छः से आठ), सेकेंडरी (कक्षा नौ और दस) तथा हायर सेकेंडरी (कक्षा ग्यारह और बारह) में जाते-जाते इन मुस्लिम छात्रों की संख्या कम होती रहती है। रिपोट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जितने मुस्लिम बच्चे प्राथमिक शिक्षा पाते हैं, उनमे से बड़ी संख्या में आगे नहीं बढ़ पाते और किन्हीं कारणों से पढ़ाई छोड़ देते है।

रिपोर्ट में सामने आई जानकारी के अनुसार, कुल मुस्लिम छात्र/छात्राओं में से 52% प्राथमिक स्तर पर, 26.3% उच्च प्राथमिक, 13.2% सेकेंडरी और 8.4% हायर सेकेंडरी स्तर पर शिक्षा पा रहे हैं।

इन सबमें मुस्लिम छात्राओं की स्थिति और भी खराब है। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि मुस्लिम छात्रों के मुकाबले मुस्लिम छात्राएँ प्राथमिक स्तर पर कम भेजी जा रही हैं। रिपोर्ट का एक विश्लेषण दिखाता है कि 1000 मुस्लिम छात्रों के मुकाबले केवल 950 मुस्लिम छात्राएँ ही प्राथमिक शिक्षा पा रही हैं।

हालाँकि, उच्च शिक्षा के मामले में मामला उलट है जहाँ पर छात्रों के मुकाबले छात्राएँ अधिक हैं। प्राथमिक स्तर पर आई इस कमी का एक बड़ा कारण रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश में बीते वर्षों में लिंगानुपात भी कम रहा है। देश में अभी अभी 1,000 लड़कों के मुकाबले 907 बालिकाएँ ही हैं। ऐसे में इसका फर्क पढ़ाई में दिखता है।

इस रिपोर्ट से एक अच्छी बात यह भी सामने आई है कि मोदी सरकार के आने के बाद मुस्लिम छात्र और छात्राएँ अब लगभग दोगुने संख्या में उच्च शिक्षा तक पहुँच रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि जहाँ 2012-13 में पढ़ने लिखने वाले मुस्लिमों का केवल 4.5% ही उच्च शिक्षा (कक्षा 10-12) प्राप्त कर रहे थे, अब यह संख्या बढ़ कर 8.4% हो गई है।

जेल में बंद शराब घोटाला के आरोपित बनाए गए AAP के स्टार प्रचारक, राजस्थान चुनाव वाली लिस्ट में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह का भी नाम: I.N.D.I. गठबंधन फुस्स

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) राजस्थान के चुनावी मैदान में उतर गई है और उसने अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी जारी कर दी है। इस लिस्ट में जेल में बंद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह का भी नाम है। इसके साथ ही I.N.D.I. गठबंधन की एकता की कलई भी खुल गई है। पटना, बेंगलुरु और मुंबई में बैठकों के दौरान नेताओं ने साथ में तस्वीरें तो क्लिक करवा ली, लेकिन चुनाव लड़ने का समय आया तो सब एक-दूसरे के खिलाफ ही लड़ने लगे।

AAP ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में जिन 40 स्टार प्रचारकों की सूची साझा की है, उनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का नाम प्रमुख है। गुरुवार (16 नवंबर, 2023) को दोनों एक साथ कई जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। लेकिन, सबसे ज़्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि शराब घोटाले के ऐसे आरोपित जो जेल में बंद हैं उन्हें भी इस लिस्ट में जगह दी गई है। AAP नेताओं को उम्मीद है कि इन्हें जल्द जमानत मिलेगी।

पार्टी मान कर चल रही है कि जमानत मिलते ही इन्हें फिर चुनावी मैदान में प्रचार के लिए उतार दिया जाएगा। प्रदेश प्रभारी विजय मिश्रा और राजस्थान के आधा दर्जन स्थानीय नेताओं को भी स्टार प्रचारकों में जगह दी गई है। पंजाब से AAP के नेताओं को चुनाव प्रचार के लिए राजस्थान लाया गया है। राजस्थान की 200 में से 86 सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि यहाँ कॉन्ग्रेस सत्ता में है। दोनों पार्टियाँ I.N.D.I. गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन आपस में लड़ रही है।

हाल ही में मनीष सिसोदिया को अदालत ने उनकी पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी, जिसके बाद पुलिस उन्हें लेकर उनके घर गई थी। वहीं संजय सिंह को भी कोर्ट में पेश किए जाने का वीडियो सामने आया था। पार्टी दिल्ली और पंजाब में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुँचने और पराली जलाए जाने को कंट्रोल न कर पाने के कारण भी विवादों में है। शराब घोटाले के बाद प्रदूषण के मुद्दे पर उसे अपने ही गठबंधन के साथियों का सहयोग नहीं मिल रहा है।

‘चमड़े और मैला’ वाले मडिगा समुदाय के साथ PM मोदी, आरक्षण की बात सुन रो पड़े कृष्णा मडिगा: पैनल की घोषणा, न्यायालय में भी मिलेगा न्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मडिगा समुदाय द्वारा लंबे समय से की जा रही आरक्षण संबंधी माँग को मान लिया है। प्रधानमंत्री ने शनिवार (11 नवंबर 2023) को कहा कि केंद्र जल्द ही एक समिति गठित करेगा, जो मडिगा समुदाय की सशक्तिकरण के लिए जरूरी उपाय करेगी। मडिगा समुदाय अनुसूचित जाति (एससी) का उप-वर्गीकरण करने की माँग करती आ रही है।

पीएम मोदी ने मडिगा आरक्षण पूरता समिति (एमआरपीएस) द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा पिछले तीन दशक से हर संघर्ष में मडिगा समुदाय के साथ खड़ी रही है। उन्होंने कहा, “हम जल्दी ही इस अन्याय को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं… यह हमारा चुनावी वादा है कि हम जल्दी एक समिति गठित करेंगे जो आपको सशक्त करने के लिए हरसंभव तरीके अपनाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “आप और हम यह भी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी कानूनी प्रक्रिया जारी है। हम न्याय को सुनिश्चित करेंगे। यह देखना भारत सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है कि आपको न्यायालय में भी न्याय मिले। भारत सरकार आपके सहयोगियों की तरह न्याय के पक्ष में पूरी ताकत के साथ खड़ी रहेगी।” बता दें कि भाजपा ने अपने साल 2014 के घोषणापत्र में आंतरिक आरक्षण का वादा किया था।

इस दौरान मंच पर पीएम मोदी के साथ बैठे मडिगा आरक्षण पूरता समिति के नेता मंदा कृष्णा मडिगा भावुक हो गए और पीएम मोदी के कंधे पर सिर रखकर रो पड़े। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मडिगा का हाथ पकड़कर और कंधे को थपथपाकर उन्हें सांत्वना दी। दरअसल, मडिगा समुदाय SC कैटेगरी के भीतर ही अपने लिए अलग से आंतरिक आरक्षण की माँग कर रहा है।

मडिगा समुदाय का कहना है कि SC में आरक्षण होने के बावजूद उनके समुदाय के लोगों को इसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। वे काफी पिछड़े हैं और उनके हिस्से का भी लाभ दूसरे समुदाय के लोग ले जाते हैं। इसलिए वे SC के लिए दी गई आरक्षण में ही मडिगा समुदाय के लिए अलग से आरक्षण की माँग कर रहे हैं।

तेलुगु भाषी राज्यों में अनुसूचित जातियों में मडिगा समुदाय की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। यह समुदाय अनुसूचित जातियों को श्रेणीबद्ध करने की लड़ाई लड़ रहा है। इसका नेतृत्व कृष्णा मडिगा कर रहे हैं। जुलाई 1994 में आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के एडुमुडी गाँव में MRPS की स्थापना करके कृष्णा मडिगा ने इस लड़ाई को जारी रखा। आज MRPS मडिगा समुदाय में बहुत बड़ा प्रभाव रखता है।

दरअसल, मडिगा समुदाय में अधिकतर लोग चमड़े का काम और मैला ढोने का काम करते हैं। ये समाज का वंचित वर्ग माना जाता है। तेलंगाना की कुल अनुसूचित जाति की आबादी में आधा या उससे अधिक यानी 50 से 60 प्रतिशत आबादी मडिगा समुदाय की मानी जाती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इनकी बड़ी आबादी निवास करती है।

तेलंगाना के 20 से 25 सीटों पर उम्मीदवारों का भविष्य मडिगा समुदाय के लोग तय करते हैं। इसके अलावा, 4-5 सीटें ऐसी हैं, जहाँ मडिगा समुदाय दूसरे नंबर पर है। MRPS के तेलंगाना अध्यक्ष गोविंद नरेश का दावा है कि अकेले तेलंगाना में मडिगा समुदाय के लोगों की जनसंख्या 46 लाख है। वहीं, इससे जुड़े माला समुदाय की संख्या 21 लाख है। लगभग इतनी ही संख्या आंध्र प्रदेश में भी मानी जाती है। इस समुदाय की कुछ आबादी कर्नाटक और तमिलनाडु में भी है।

मोहम्मद शमी ने कहा- हैप्पी दीवाली, तड़प गए पाकिस्तान के कट्टरपंथी: बोले- ह₹मी सजदा कर लेता

भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी ने दीवाली के मौके पर आज एक तस्वीर पोस्ट की। तस्वीर में वह कुर्ता पजामा पहने खड़े दिखाई दिए और साथ में लिखा है- हैप्पी दीवाली। पीछे बैकग्राउंड भी दीवाली वाला है। अब शमी के पोस्ट पर जहाँ भारतीय यूजर्स उन्हें दीवाली की शुभकामनाएँ देने में जुटे तो वहीं पाकिस्तानी कट्टरपंथी उन्हें इस तरह देख बिदक गए।

कई कट्टरपंथियों ने उन्हें उलटा सीधा बोला। महरीन नाम की यूजर उनसे पूछने लगी- तुम मुस्लिम ही हो न? इसके बाद उसी महरीन ने कहा- ये सिर्फ नाम के मुस्लिम हैं। फॉलो तो ये भारतीय धर्म को ही करते हैं।

हुजैफाह भट्टी ने कहा- “इन्हें उतनी आजादी नहीं है जितनी हमें पाकिस्तान में है।”

एक यूजर्स ने सलमान खान के रोने वाली फोटो लगाकर लिखा- “शमी बिलकुल इसी तरह भारत के आगे अपनी लॉयलटी को साबित करने में लगा हुआ है।”

मियाँ लरैब अहमद ने भी कहा- “एक और दिन जब शमी अपनी ईमानदारी भारत के आगे साबित करने में लगा है।”

आसिफ गफूर ने लिखा- “दीवाली विश कर देता हूँ भारत के साथ लॉयल लगूँगा।”

शेरलॉक ओम्स नाम की आईडी से कहा- “भाई सजदा तो कर नहीं पाए तुम, दीवाली अच्छे से मना लो।”

उमर लालामूसा ने कहा- ह₹मी सजदा कर लेना था। सेमी में काम आता लेकिन नहीं।

बता दें कि मोहम्मद शमी इन दिन वैसे तो वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन के कारण चर्चा में हैं लेकिन आम दिनों में वह अक्सर इन कट्टरपंथियों के निशाने की वजह से खबरों में रहते हैं। वो चाहे कोई भी त्योहार की शुभकामना दे दें या उस दिन अपने या परिवार की तस्वीर डाल दें। ये लोग उन्हें कोसने से पीछे नहीं हटते। पिछले साल शमी ने जब दशहरा की बधाई दी थी तब भी इस्लामी कट्टरपंथियों को उनकी यह बात रास नहीं आई थी और फिर उनको क्रिसमस मनाता देख भी कई इस्लामी नाराज हुए थे। उनकी बेटी को सरस्वती पूजा करते देख को इन्हीं लोगों ने कहा था तुम जहन्नुम में जाओगे।