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‘मैं तो कॉन्ग्रेसी हूँ…’: MP में कार्तिक आर्यन का चेहरा दिखाकर हो रहा था हाथ साफ, बोले बॉलीवुड स्टार- ये सब फर्जी हैं

बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने कॉन्ग्रेस के कई नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा फैलाए जा रहे उनके वीडियो वाले एक विज्ञापन का खंडन किया है। इस एडिटेड वीडियो के जरिए ये कॉन्ग्रेसी दावा कर रहे थे कि कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में उनका समर्थन किया है। कार्तिक आर्यन को इस फर्जी वीडियो में कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं भी तो कॉन्ग्रेसी हूँ।”

ग्वालियर के रहने वाले कार्तिक ने स्पष्ट किया है कि जिस वीडियो को कॉन्ग्रेस के वीडियो के तौर पर प्रसारित किया जा रहा है, वह असल में क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के लिए डिज्नी हॉटस्टार का कैम्पेन था। कार्तिक आर्यन ने इस संबंध में एक्स (पहले ट्विटर) पर असली ऐड डालकर लिखा कि ‘यही असली एड है और बाकी सब फर्जी है’।

वीडियो में डाले गए फर्जी स्लाइड और वॉइसओवर ताकि यह कॉन्ग्रेस का वीडियो लगे

असली वीडियो में डिज्नी हॉटस्टार पर 2023 वर्ल्डकप के फ्री स्ट्रीम किए जाने की बात हो रही थी। हालाँकि, कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे वीडियो में इसे राजनीतिक फायदे के लिए अपने चुनाव प्रचार से जोड़ दिया गया। इस विज्ञापन में बोल रहे अभिनेताओं की आवाज को भी वॉइसओवर से बदल दिया गया है।

वीडियो में जहाँ पर कार्तिक एक महिला से कहते हैं, “फ्रेड्डी मैं ही हूँ”। इसे बदलकर कॉन्ग्रेस समर्थकों ने “अरे मैं भी तो कॉन्ग्रेसी हूँ” कर दिया। इसके अलावा, इस वीडियो में कॉन्ग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश में किए गए वादों की भी जानकारी दी गई है।

कॉन्ग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों ने चला दी फर्जी वीडियो

एक्स पर यूथ कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता और जम्मू-कश्मीर के प्रभारी आबिद मेरे ने लिखा, “बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया है। मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस आ रही है।”

अक्सर फर्जी पोस्ट करने वाले कॉन्ग्रेस समर्थक शान्तनु ने लिखा, “बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस और कमलनाथ जी को समर्थन दिया है।” शांतनु ने ट्विटर यूजर सत्यम इनसाइट्स नाम के एक व्यक्ति की आईडी से डाला गया वीडियो उपयोग किया था, अब यह डिलीट हो चुका है।

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेस समर्थक

कॉन्ग्रेस समर्थक रविंदर कपूर ने लिखा, “आखिरकार बॉलीवुड कॉन्ग्रेस के लिए जाग गया है। बॉलीवुड के दिलों की धड़कन कार्तिक आर्यन ने मध्य प्रदेश इलेक्शन में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया है। यह कॉन्ग्रेस की तरफ से एक और बढ़िया कैम्पेन है।”

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेसी

कपूर के वीडियो को ही कोट करते हुए कॉन्ग्रेस समर्थक नाजिया माजिद ने लिखा, “बिलकुल 100%। कार्तिक आर्यन का यह कदम बॉलीवुड के नई पीढ़ी के शिक्षित अभिनेताओं को इस बात के लिए प्रोत्साहित करेगी कि वह कॉन्ग्रेस का समर्थन करें। कार्तिक आर्यन एक इंजीनियर हैं और कुछ पढ़े-लिखे लोगों में से एक हैं। इसलिए वह समझते हैं कि कॉन्ग्रेस क्या है?”

कार्तिक आर्यन का फर्जी वीडियो डालते कॉन्ग्रेसी

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवम्बर 2023 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 30 नवम्बर 2023 को होगी। भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों पार्टियाँ इस चुनाव के लिए जोर-शोर से प्रचार में जुटी हुई हैं।

Congress supporters peddle fake video of kartik aryan for MP election actor clarifies

फारूक अब्दुल्ला की बेटी को छोड़ चुके हैं सचिन पायलट, चुनाव में दिए एफिडेविट से खुलासा: पत्नी के नाम की जगह लिखा ‘तलाकशुदा’

कॉन्ग्रेस नेता सचिन पायलट अपनी पत्नी सारा से तलाक ले चुके हैं। इसका खुलासा राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल पायलट के हलफनामे से हुआ है। सारा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला की बेटी हैं और उमर अब्दुल्ला की बहन हैं।

सचिन पायलट ने टोंक से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 31 अक्टूबर 2023 को अपना पर्चा दाखिल किया। इसमें पत्नी के नाम वाले कॉलम में उन्होंने तलाकशुदा लिखा है। इससे पहले 2018 में चुनावी हलफनामे में उन्होंने सारा को पत्नी बताया था। वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने तलाक कब लिया।

साल 2004 में हुई थी दोनों की शादी

सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला की शादी 15 जनवरी 2004 को हुई थी। दोनों के आरन और विहान नाम के दो बच्चे हैं। सारा अब्दुल्ला और सचिन पायलट की शादी काफी चर्चित रही थी। इनके अलग होने की चर्चा काफी समय से चल रही थी, लेकिन इसकी पुष्टि हुई है सचिन पायलट द्वारा विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर भले गए हलफनामे से। सचिन पायलट ने इसमें बताया है कि उनके दोनों बच्चे उन्हीं पर आश्रित हैं।

साल 2018 में शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुई थीं सारा

सचिन पायलट ने साल 2018 के चुनावी हलफनामे में सारा अब्दुल्ला की संपत्ति की भी जानकारी दी थी, लेकिन इस बार के हलफनामे में उन्होंने खुद को तलाकशुदा बताया है। इससे पहले भी साल 2014 के लोकसभा चुनाव के समय दोनों के तलाक की अफवाहें उड़ी थी, लेकिन तब सचिन ने इसका खंडन किया था। साल 2018 में जब सचिन पायलट उप-मुख्यमंत्री बने थे, तो शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सारा अपने पिता फारूक अब्दुल्ला और दोनों बेटों आरन-विहान के साथ शामिल हुईं थी।

बता दें कि सचिन पायलट लंबे समय से राजनीति की दुनिया में हैं। साल 2004 में वो दौसा लोकसभा सीट से सांसद बने थे। साल 2009 में उन्होंने अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव जीता था और केंद्रीय मंत्री भी बने थे। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था, लेकिन साल 2018 में उनकी अगुवाई में कॉन्ग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।

हालाँकि शीर्ष नेतृत्व ने उनकी जगह अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री के तौर पर चुना था। पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। लेकिन कुछ समय बाद ही गहलोत और पायलट के बीच की तनातनी सार्वजनिक हो गई। पायलट की कैबिनेट से भी छुट्टी कर दी गई थी। फिलहाल सचिन पायलट एक बार फिर से टोंक विधानसभा सीट से चुनावी समर में उतर चुके हैं।

सेक्स से मना करती है पत्नी, घर जमाई बनाकर रखना चाहती है: दिल्ली हाई कोर्ट ने नहीं माना ‘मा​नसिक क्रूरता’, तलाक देने से इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक माँगने वाले व्यक्ति की अर्जी ठुकरा दी है। इस व्यक्ति का कहना था कि पत्नी साथ नहीं रहना चाहती। सेक्स से मना करती है। उसे घर जमाई बनाना चाहती है।

30 अक्टूबर 2023 को हाई कोर्ट ने तलाक देने से इनकार करते हुए कहा कि शादीशुदा जोड़े के बीच मामूली मनमुटाव, थोड़े से चिड़चिड़ेपन और विश्वास की कमी को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता है। इससे पहले निचली अदालत ने भी इस जोड़े को तलाक देने से मना कर दिया था। इस जोड़े की शादी साल 1996 में हुई थी। 1998 में उनकी एक बेटी पैदा हुई।

पति का आरोप था कि पत्नी को केवल खुद का कोचिंग सेंटर चलाने में दिलचस्पी थी। कोई न कोई बहाना बनाकर वह उसे छोड़ देती थी और सेक्स से इनकार करती थी। इस केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हालाँकि यौन संबंध से इनकार करना एक तरह से मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है, लेकिन तब जब ये लंबे वक्त तक लगातार और जान-बूझकर किया जा रहा हो।

उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट को इस तरह के नाजुक और संवेदनशील मुद्दों का निपटारा करने के लिए खासी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के आरोप केवल उलझन भरे और बगैर स्‍पष्‍टता के बयानों के आधार पर साबित नहीं किए जा सकते हैं। खासकर जब शादी पूरी तरह से रीति-रिवाजों से हुई हो।

तलाक के इस केस में कोर्ट ने देखा कि तलाक माँगने वाला पति याचिका में बताई गई किसी भी तरह की मानसिक क्रूरता की बात को साबित नहीं कर पाया। कोर्ट ने माना कि तलाक का ये केस शादी के रिश्ते में सामान्य मनमुटाव की तरफ इशारा कर रहा था। कोर्ट में सुबूतों से इस बात की पुष्टि भी हुई कि दरअसल कलह सास और बहु के बीच थी।

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस मनोज जैन की बेंच ने कहा, “इस बात का कोई सकारात्मक संकेत नहीं है कि पत्नी का व्यवहार इस तरह का था कि उसका पति के उसके साथ रहना दूभर हो गया हो। मामूली चिड़चिड़ेपन और यकीन न होना मानसिक क्रूरता से नहीं जोड़ा जा सकता है।”

बेंच ने आगे ये भी कहा कि केवल इस आधार पर कि पत्नी ने पति की पुलिस में आपराधिक शिकायत की थी और इस वजह से उस पर एफआईआर दर्ज हुई, इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने आगे कहा, “महज इसलिए कि पत्नी ने अपनी शिकायत दूर करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जैसा कि उसके पति ने भी किया था, क्रूरता को बढ़ावा देना नहीं कहा जा सकता है। पति की ओर से पेश किए गए सबूतों को जब संभावनाओं की प्रबलता के पैमाने पर परखा गया, तो वो पत्नी की क्रूरता साबित करने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं लगे।'”

हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, “इस तरह, जो तस्वीर निकल कर सामने आती है, वह बहुत साफ है। दोनों पक्षों के बीच विश्वास, आस्था और प्रेम की कमी हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी ये शादीशुदा जोड़ा अपनी शादी को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा था।” अदालत ने उनकी शादी के सुधारे न जा सकने वाली हद तक टूटने के हालात की वजह से तलाक देने की पति की याचिका को भी खारिज कर दिया। कोई कोर्ट ने कहा कि ऐसी शक्ति केवल सुप्रीम कोर्ट के पास है और कोई भी पक्ष अधिकार के तौर पर इसकी माँग नहीं कर सकता।

मीडिया संस्थानों पर किया केस महुआ मोइत्रा ने वापस लिया, कारोबारी से पैसे-गिफ्ट लेकर सवाल करने के मामले में घिरी हुई हैं TMC सांसद

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में मीडिया हाउसों के खिलाफ दायर मानहानि याचिका वापस ले ली है। मानहानि का मामला अब सिर्फ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ चलेगा। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपनी याचिका से पक्षकार के रूप में मीडिया घरानों को मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को हटाने का अनुरोध किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोइत्रा के वकील ने कहा कि वह इस चरण में किसी तरह की अंतरिम राहत के लिए दबाव नहीं डाल रहे हैं। उन्होंने न्यायमूर्ति सचिन दत्ता को बताया कि मुकदमा सिर्फ दो प्रतिवादियों- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई के खिलाफ जारी रहेगा।

बता दें कि महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई ने पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के बदले उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से पैसे ली हैं। इस पत्र के आधार पर निशिकांत दुबे ने महुआ की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से की थी। मीडिया हाउसों ने इस खबर की रिपोर्टिंग की थी। इसके बाद महुआ ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मामला दर्ज कराया था।

महुआ मान चुकी हैं संसद की लॉगिन-आईडी शेयर करने की बात

अपनी तीखी ज़ुबान के लिए मशहूर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने दो दिन पहले स्वीकार किया था कि कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के साथ उन्होंने अपना संसद का लॉगिन आईडी और पासवर्ड शेयर किया था। शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) एक टीवी इंटरव्यू में ‘कैश फॉर क्वेरी’ की आरोपित सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि ऐसा करके उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और ये किसी भी तरह से नियमों के खिलाफ नहीं है।

हीरानंदानी ने हलफनामा देकर कहा- दुबई में मिलती थी महुआ

बता दें कि बिजनेस मैन दर्शन हीरानंदानी ने अपने हलफनामे में माना है कि महुआ मोइत्रा उनसे दुबई में आकर मिलती थीं। उन्हें ब्लैकमेल करती थीं। उनका गलत फायदा उठाती थीं। दर्शन हीरानंदानी ने गिफ्ट और पैसा देने की बात भी कही थी। इसी संबंध में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी शिकायत की थी। इसके बाद ओम बिरला ने इस मामले को संसद की आचार समिति को भेज दिया था।

महुआ ने माँगा 5 नवंबर तक का समय

संसद की आचार समिति ने ‘पैसे के बदले संसद में सवाल पूछने’ के मुद्दे की जाँच कर रही है। टीएमसी सांसद मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से नकद और अन्य तरह की मदद लेकर उनके प्रतिद्वंद्वी गौतम अडानी को टारगेट करते हुए और उन्हें फायदा पहुँचाने वाले संसद में सवाल पूछने के आरोप हैं।

महुआ मोइत्रा को संसद की आचार समिति ने 31 अक्टूबर 2023 को पेश होने को कहा था। वहीं, टीएमसी सांसद महुआ ने आचार समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर को दो पन्नों का लेटर लिख आने से इनकार कर दिया और इसके लिए 5 नवंबर 2023 की तारीख माँग ली।

जिससे ट्यूशन पढ़ता था कुशाग्र, उसके ही बॉयफ्रेंड ने किया 10वीं के छात्र का कत्ल: कानपुर में कारोबारी को ‘अल्लाह हू अकबर’ वाला लेटर भेज माँगे थे ₹30 लाख

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कक्षा 10 के एक छात्र की हत्या उसकी ही पूर्व ट्यूटर ने कर दी है। मृतक का नाम कुशाग्र कनोडिया है। इस मामले में पुलिस ने छात्र की पूर्व ट्यूटर रचिता वत्स और उसके मंगेतर/बॉयफ्रेंड प्रभात शुक्ला और अंकित नाम के एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया है। सोमवार (30 अक्टूबर 2023) को छात्र लापता हो गया था। इसके बाद 30 लाख रुपए की फिरौती माँगी गई थी। मंगलवार (31 अक्टूबर 2023) को छात्र का शव फजलगंज इलाके में मुख्य आरोपित प्रभात शुक्ला के पिता के घर से बरामद हुई है। फिरौती की चिट्ठी भी प्रभात ने ही लिखी थी।

पुलिस की पूछताछ में तीनों ने बताया कि फिरौती वाली चिट्ठी पर ‘अल्लाह हु अकबर’ उन्होंने लोगों को गुमराह करने के लिए लिखा था। प्रभात शुक्ला ही मृतक को बुलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस के हाथ लगे CCTV फुटेज से पता चला कि शुक्ला सोमवार को लगभग 4:30 बजे कनोडिया को लेकर एक स्टोरनुमा कमरे में जाता है और आधे घंटे बाद अकेले निकलता है। लेटर भेजने के लिए प्रयोग हुई स्कूटी को सीज कर दिया गया है। हालाँकि, तीनों आरोपितों से पूछताछ करते हुए पुलिस हत्या के असल कारणों की पड़ताल कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला कानपुर के रायपुरवा थाना क्षेत्र का है। यहाँ साड़ी का कारोबार करने वाले मनीष कनोडिया का मकान है। उनके 2 बेटों में से एक 15 साल का कुशाग्र कक्षा 10 का छात्र था। वह हर दिन की तरह सोमवार को भी कोचिंग करने गया था। जब काफी देर तक कुशाग्र लौटकर नहीं आया, तब उसके परिजनों ने खोजबीन शुरू कर दी। कुशाग्र का फोन भी स्विच ऑफ बता रहा था। जान-पहचान के साथ नाते-रिश्तेदारी में खोजने के बाद जब कुशाग्र का कुछ पता नहीं चला तब परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस केस दर्ज करके कुशाग्र की तलाश कर ही रही थी कि पीड़ित परिजनों को एक धमकी भरा पत्र मिला। पत्र के बीच में अल्लाह हु अकबर लिखा हुआ था। इसके अलावा, इसमें धमकी देते हुए कहा गया था कि ‘मैं नहीं चाहता कि आपका त्यौहार बर्बाद हो। आप मेरे हाथ पे पैसे रखो और लड़का 1 घंटे बाद आपके पास होगा।’ पत्र में लड़के की गाड़ी और मोबाइल फोन, दोनों ही पीड़ित परिवार के घर के बगल बने होटल सिटी क्लब के पास रखा बताया गया। न घबराने की नसीहत के साथ इस पत्र में ‘अल्लाह पर भरोसा’ रखने के लिए कहा गया था।

यह पत्र पीड़ित परिवार में एक युवक ने पहुँचाया था। सिक्योरिटी गार्ड के मुताबिक, चिट्ठी पहुँचाने वाला स्कूटी से आया था। संदिग्ध ने अपने चेहरे को ढँक कर के रखा हुआ था। इस स्कूटी के नंबर पर कालिख पुती हुई थी। पुलिस स्कूटी के आधार पर जाँच करते हुए महिला टीचर रचिता वत्स के घर पर पहुँच गई। वह 1 साल पहले तक मृतक को ट्यूशन पढ़ाया करती थी। हिरासत में लेकर महिला से पूछताछ के बाद कुशाग्र की लाश फज़लगंज स्थित प्रभात के पिता के मकान मेंर मिली।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रचिता वत्स और प्रभात शुक्ला का पिछले पाँच-छह सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी बीच रचिता वत्स कुशाग्र को ट्यूशन पढ़ाने लगी। प्रभात शुक्ला को संदेह था कि उसकी मंगेतर रचिता वत्स का अपने नाबालिग छात्र कुशाग्र के साथ अवैध संबंध हैं। इसके बाद प्रभात ने कुशाग्र को घर बुलवाकर उसकी हत्या कर दी और मामले को अपहरण का रंग देने कि लिए फिरौती का नाटक किया। आरोपित प्रभात के पिता सुनील कुमार शुक्ला होमगार्ड हैं और फजलगंज थाने में तैनात हैं। शव उन्हीं के घर से बरामद हुआ है। हालाँकि, अवैध संबंधों के कारण हत्या के सवाल पर पुलिस ने कहा कि इस संबंध में जाँच जारी है।

गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ के पैरोकार सांसद की ब्रिटेन के PM ने की छुट्टी, कहा- उनकी टिप्पणियाँ सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के विपरीत

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपनी ही पार्टी (कंजरवेटिव) के सांसद पॉल ब्रिस्टो को उनके पद से बर्खास्त कर दिया है। पीटरबरो से सांसद ब्रिस्टो विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री के सहयोगी की भूमिका में थे। उन्होंने पिछले सप्ताह पीएम सुनक को लिखे एक पत्र में गाजा में ‘स्थायी युद्धविराम’ का समर्थन किया था। प्रधानमंत्री से इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध पर अपने स्टैंड में बदलाव लाने का आग्रह किया था।

ब्रिटेन की सरकार गाजा में मानवीय सहायता के पक्ष में है। लेकिन वह युद्ध विराम का समर्थन नहीं करती है। उसका कहना है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। हमास के हमलों के बाद पीएम सुनक ने इजरायल की यात्रा भी की थी।

ऐसे में ब्रिस्टो का पत्र सरकार की सोच के ठीक विपरीत था। अब उन्हें उनके पद से मुक्त भी कर दिया गया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 10 डा​उनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता ने कहा है कि ब्रिस्टो की टिप्पणियाँ ‘सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी’।

बर्खास्तगी के बाद ब्रिस्टो ने फैसले पर निराशा जताई है। कहा है कि वे अपनी जिम्मेदारी का आनंद ले रहे थे। निराशा के साथ इसे छोड़ रहे हैं। साथ ही यह भी कहा कि अब वे उस मुद्दे पर खुलकर बात कर पाएँगे जिसकी उनकी मतदाताओं को परवाह है।

ब्रिस्टो ने पीएम सुनक को दो पन्नों का लेटर लिखा था। इसमें कहा था कि स्थायी युद्धविराम से जिंदगियाँ बचाई जा सकेंगी और उन लोगों तक मदद पहुँच सकेगी जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है। गाजा के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने यह भी कहा था कि इससे उनके कुछ मतदाता सीधे ‘प्रभावित’ हुए हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी संगठन हमास के आतंकियों ने इजरायल पर अचानक हमला कर सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी थी। बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बना लिया था। इसके बाद से गाजा में आतंकी ठिकानों पर इजरायल लगातार हमले कर रहा है।

2 नवंबर को अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करेगी ED: अपने ही CM का मंत्री आतिशी ने बाँच दिया ‘भविष्य’, शराब घोटाले में होनी है पूछताछ

दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने दावा किया है कि 2 नवम्बर 2023 को आम आदमी पार्टी के मुखिया एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार कर लेगी। उन्होंने यह दावा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया है। दरअसल, केजरीवाल को ED ने 2 नवम्बर 2023 को घराब घोटालेे में पूछताछ के लिए बुलाया है।

PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ED द्वारा जारी किए गए समन पर आतिशी ने कहा, “2 नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल को समन किया है। हर तरफ से खबर आ रही है कि 2 नवम्बर को जब अरविन्द केजरीवाल को बुलाएँगे, तब ED उन्हें भी गिरफ्तार करके जेल में डाल देगी।”

आतिशी ने आगे कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। यही कारण है कि झूठे आरोप बनाकर और केस लगाकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को एक-एक करके गिरफ्तार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि वो प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलते हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ED अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद I.N.D.I.A गठबंधन के अन्य नेता जैसे कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, केरल के सीएम पिनाराई विजय और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए ED और CBI का दुरुपयोग किया जाएगा।

हालाँकि, अभी आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सूचना नहीं है कि अरविद केजरीवाल को गिरफ्तार किया जाएगा। उनके विरुद्ध कोई वारंट भी नहीं जारी हुआ है। उन्हें ED शराब घोटाला मामले में हुई पैसों की हेराफेरी को लेकर पूछताछ करने के लिए बुला रही है। हालाँकि, आतिशी गिरफ्तार की आशंका को देखते हुए पहले ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

बता दें कि शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को पहले ही ED गिरफ्तार कर चुकी है। मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में 9 मार्च 2023 को लम्बी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में बंद हैं। तब से कोर्ट भी उन्हें जमानत देने से इनकार करता आ रहा है।

‘कब्जा, प्रतिरोध’ – हमास स्टाइल अपना रहे पाकिस्तानी आतंकी, मजदूर मुकेश और SHO अहमद की हत्या को ठहरा रहे जायज, लेटर वायरल

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उत्तर प्रदेश के एक गरीब मजदूर और श्रीनगर में एक पुलिस अफसर मसरूर अहमद पर हमले की जिम्मेदारी इस्लामी आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे समूह ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ ने ली है। सोशल मीडिया पर TRF के बयान की एक फोटो वायरल हो रही है। TRF ने इसमें इस्लामी आतंकी समूह हमास जैसी भाषा अपनाई है।

TRF के आतंकियों ने 30 अक्टूबर 2023 को उत्तर प्रदेश के मजदूर मुकेश को पुलवामा के नौपोरा इलाके में मार दिया था। उस पर आतंकियों ने उस दौरान हमला किया था, जब वह सब्जी लेने जा रहा था। इससे पहले 29 अक्टूबर को श्रीनगर के ईदगाह के पास मैदान में क्रिकेट खेल रहे जम्मू-कश्मीर पुलिस के अफसर मसरूर अहमद पर पिस्टल से फायरिंग की गई थी।

अब इस्लामी आतंकी समूह TRF ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए एक बयान जारी किया है। TRF ने इस बयान में भारत सरकार को कश्मीर पर कब्जा करने वाली फ़ोर्स बताते हुए मसरूर अहमद वानी को उसका प्यादा और मुकेश कुमार को भारत सरकार का मददगार बताया है। TRF ने कहा है कि जो लोग कश्मीर में मजदूर बनकर आते हैं, वे भारत सरकार का कब्जा कश्मीर पर मजबूत करने में मदद करते हैं।

आगे TRF ने कहा है कि वह यह सब नहीं होने देंगे और जम्मू कश्मीर पर कब्ज़ा करने वाली शक्ति की मदद करने वालों के साथ सख्ती से निपटेंगे। यह आग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लेगी। हालाँकि, यह बात अलग है कि आतंकियों ने जिस मुकेश कुमार को मारा वह एक ईंट भट्ठे पर काम करता था और गरीब मजदूर था। वह उत्तर प्रदेश के उन्नाव का रहने वाला था।

गौरतलब है कि TRF ने जिस प्रकार की भाषा अपने बयान में उपयोग की है, ऐसी ही भाषा इस्लामी आतंकी समूह हमास भी इजरायल के विरुद्ध उपयोग करता है। TRF की तरह ही हमास के आतंकी इजरायल को फिलिस्तीन पर कब्जा करने वाला बताते हैं और उसके नागरिकों की हत्या को जायज करार देते हैं।

हमास आतंकियों के अलावा इनके समर्थक (कट्टर इस्लामी और वामपंथी) भी इजरायल के लिए ऐसी ही भाषा गढ़ते हैं। ये पूरे इजरायल को ही अवैध बताते हैं। यहूदियों की हत्या को जायज ठहराते हैं, हमास को आतंकी बताने की जगह आजादी के लड़ाके लिखते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी हमास को आतंकी के बजाय प्रतिरोधी सेना मानती है।

दरअसल, 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हमला करके सैकड़ों नागरिकों की हत्या करने वाले हमास ने भी तर्क दिया था कि वह फिलिस्तीन पर कब्जे के खिलाफ लड़ाई के लिए निर्दोष नागरिकों को मार रहे हैं। इजरायल-फिलिस्तीन से हजारों किलोमीटर दूर इस्लामी आतंकी संगठन TRF भी गरीब मजदूर की हत्या को जायज बता रहा। हालाँकि, उसका भारत सरकार या सेना से किसी तरह का संबंध नहीं था।

गौरतलब है कि बीते कुछ समय में कश्मीर में छोटे-मोटे काम करने वाले गैर-मुस्लिम मजदूरों पर हमले बढ़े हैं। इससे पहले जुलाई 2023 में बिहार के तीन मजदूरों को कश्मीर में मार दिया गया था। अक्टूबर 2022 में भी उत्तर प्रदेश से कश्मीर गए दो मजदूरों को मार दिया गया था।

भारत सरकार और सेना की लश्कर-ए-तैयबा तथा हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों पर सख्ती के बाद अब वे मुखौटे नामों से आतंकी गतिविधियाँ चला रहे हैं। TRF भी इसी तरह का एक इस्लामी आतंकी संगठन है। इसके अलावा PAFF (पीपल्स एंटी फासिस्ट फोर्सेस) नाम का एक इस्लामी आतंकी संगठन भी सामने आया है।

जिस घर में नहीं था राशिद, उसको जलाने में हिंदुओं को फँसाया: कोर्ट से दिल्ली दंगों में संदीप बरी, पुलिस की गवाही में भी झोल

27 अक्टूबर 2023 को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एक हिंदू शख्स को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस केस में संदीप कुमार पर आगजनी, तोड़फोड़ और लूट के आरोप लगाए गए थे। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा है और गवाहों के बयान भरोसेमंद नहीं थे।

अभियोजन पक्ष का दावा था कि हिंदू भीड़ ने करावल नगर के शिव विहार स्थित राशिद के घर को जला दिया था और इसमें संदीप कुमार भी शामिल थे। यह घटना 25 फरवरी 2020 की है। भीड़ पर लूटपाट, तोड़फोड़ और एक दोपहिया वाहन को जलाने का आरोप लगाया गया था।

इस मामले में संदीप कुमार को बरी करते हुए अदालत ने कहा, “अभियोजन पक्ष तोड़फोड़, लूटपाट, घरेलू समानों और मोटरसाइकिल की क्षति को साबित करने में सफल रहा। लेकिन इसका जिम्मेदार भीड़ या आरोपित के इसमें शामिल होने को लेकर कोई ठोस साक्ष्य नहीं रख पाया।”

अदालत ने कहा कि राशिद की गवाही भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि घर में हुई तोड़फोड़ के समय वह मौजूद नहीं था। वह 25 फरवरी की घटना के 3-4 दिन बाद अपने घर लौटा था और उसे अपनी मोटर साइकिल जली हुई मिली थी। घर की पहली मंजिल पर भी सामान क्षतिग्रस्त और जले हुए थे।

कोर्ट ने कहा कि राशिद ने पत्नी के गहने गायब होने के आरोप लगाए हैं। यदि यह भी मान लिया जाए कि उनके घर में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई है, तब भी अभियोजन पक्ष के गवाह तीन (PW3) के साक्ष्य से यह साबित नहीं होता कि इसके लिए भीड़ जिम्मेदार थी। PW3 का भले यह कहना हो कि भीड़ ने ऐसा किया पर यह उसकी व्यक्तिगत जानकारी पर आधारित नहीं है।

अदालत ने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद होने का दावा करने वाले दोनों पुलिसकर्मियों ने कहा था कि उन्होंने भीड़ और उसमें शामिल संदीप संदीप कुमार को भी देखा था। लेकिन उनकी गवाही भरोसे योग्य नहीं है। इनमें से एक पुलिसकर्मी PW5 ने तोड़फोड़ की किसी खास घटना का कोई जिक्र नहीं किया। उसने एक सामान्य बयान दिया था कि उसने शाम करीब 7 बजे गली नंबर में 11 में 30-40 लोगों की भीड़ तोड़फोड़ और आगजनी करते हुए देखा था।

इस पुलिसकर्मी का कहना था कि उसने भीड़ को पुलिस स्टेशन जाते समय देखा था। वहीं, दूसरे पुलिसकर्मी PW6 ने अपनी गवाही में कहा था कि वह भीड़ इकट्ठा होने की सूचना मिलने पर गली नंबर 11 पहुँचा था। उसके मुताबिक जब सूचना मिली थी वह शिव विहार तिराहे पर था और कोई अन्य पुलिस अधिकारी उस समय वहाँ नहीं था। उसने करीब तीन मिनट में गली नंबर 11 में पहुँचने और शाम के करीब 7 बजे 30-40 लोगों की भीड़ देखने की बात गवाही में कही थी।

अदालत ने दोनों पुलिस अधिकारियों के बयानों के विरोधाभास पर गौर किया। PW5 के मुताबिक, नाला रोड पर शाम के करीब 6-6.30 के बीच वह PW6 से मिला था। वहीं PW6 के अनुसार ने वह गली नंबर 11 में पहुँचने के बाद PW5 से मिला था। PW5 का कहना था कि पुलिस स्टेशन जाते समय वह PW6 से मिला। इसका मतलब हुआ कि वह 11 नंबर गली में यदि कोई दंगा हुआ था तो उस समय PW6 से नहीं मिला था।

यह संभावना भी नहीं है कि एक ही पुलिस स्टेशन के दो अधिकारी भीड़ की हिंसा वाली जगह एक साथ मौजूद हों और वहाँ होने वाली घटनाओं को लेकर उनमें भ्रम हो। यह बेतुका है कि एक ही थाने के दो पुलिस अधिकारी, एक ही जगह पर साथ मौजूद रहने के बाद भी कथित हिंसा को लेकर अलग-अलग बातें करें। बयानों की इन विसंगतियों को देखते हुए अदालत ने गली नंबर 11 में दोनों पुलिसकर्मियों के मौजूद होने के दावे को ही संदेहास्पद माना।

इसके अलावा अदालत ने यह भी पाया कि एक पुलिस अधिकारी ने 29 फरवरी को संदीप कुमार की पहचान करते हुए अपना बयान दर्ज करवाया। वहीं दूसरे अधिकारी ने दावा किया कि उसने आरोपित को केवल 1 अगस्त 2020 को देखा था। बयानों में इस तरह के विरोधाभास ने उनकी गवाही की विश्वसनीयता को और कम कर दिया।

आरोपित संदीप कुमार पर आईपीसी की धारा 147/148/427/436/ 380/506/454 के साथ धारा 149 आईपीसी के तहत आरोप लगा गए थे। सबूतों की कमी के आधार पर अदालत में उन्हें इन सभी आरोपों से बरी कर दिया।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे 2020

भारत की राजधानी दिल्ली में बड़े पैमाने पर 24 और 25 फरवरी 2020 को हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। ये शाहीन बाग और अन्य क्षेत्रों में इस्लामवादियों के सीएए विरोधी विरोध प्रदर्शनों से फैलाई गई दुश्मनी, नफरत और क्रोध का चरम था। शाहदरा, मौजपुर, भजनपुरा, ब्रह्मपुरी और पूर्वोत्तर दिल्ली के अन्य हिस्सों में इस्लामवादियों ने हिंसा की। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इन दंगों में संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था। दंगों में दिल्ली पुलिस के एक हेड कॉन्सेटबल के साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक कॉन्सेटबल की भी हत्या कर दी गई थी।

(नुपूर जे शर्मा द्वारा मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

‘तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले मानवता के दुश्मनों संग खड़े हो जाते हैं’: PM मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित कर सरदार पटेल को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लौहपुरुष के नाम से विख्यात सरदार वल्लभभाई पटेल की 148वीं जयंती पर गुजरात में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें याद किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने एकता की शपथ लेते हुए देशवासियों को भी राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा की शपथ दिलाई। दरअसल, सरदार पटेल आजादी के बाद भारत के एकीकरण में अहम भूमिका निभाई थी। इसलिए जन्मदिन को राष्ट्र राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day) के तौर पर मनाया जाता है।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा, “सरदार पटेल की जयंती पर हम उनकी अदम्य भावना, दूरदर्शी राजनेता और असाधारण समर्पण को याद करते हैं, जिसके साथ उन्होंने हमारे देश की नियति को आकार दिया। राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमारा मार्गदर्शन करती रहती है। हम उनकी सेवा के सदैव ऋणी रहेंगे।”

उन्होंने कहा, “आज मेरे सामने लघु भारत का स्वरूप दिख रहा है। राज्य अलग है, भाषा अलग है, परंपरा अलग है, लेकिन यहाँ मौजूद हर व्यक्ति एकता की मजबूत डोर से जुड़ा हुआ है। 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले पर होने वाला आयोजन, 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्यपथ पर परेड और 31 अक्टूबर को Statue Of Unity के सानिध्य में माँ नर्मदा के तट पर राष्ट्रीय एकता दिवस का ये मुख्य कार्यक्रम, राष्ट्र उत्थान की त्रिशक्ति बन गए हैं।”

पीएम ने कहा कि देश की एकता और विकास यात्रा में सबसे बड़ी रुकावट तुष्टिकरण की राजनीति है। भारत ने बीते कई दशकों में देखा कि तुष्टिकरण करने वालों को आतंकवाद, उसकी भयानकता, विकरालता कभी दिखाई नहीं देती। तुष्टिकरण करने वालों को मानवता के दुश्मनों के साथ खड़े होने में संकोच नहीं हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले आतंकी गतिविधियों की जाँच में कोताही करते हैं। वो देश विरोधी तत्वों पर सख्ती करने से बचते हैं। तुष्टिकरण की ये सोच इतनी खतरनाक है कि वो आतंकियों को बचाने के लिए अदालत तक पहुँच जाती है। ऐसी सोच से किसी समाज या देश का भला नहीं हो सकता।”

पीएम ने कहा कि आज ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है, जो भारत पा न सके। ऐसा कोई संकल्प नहीं है, जो हम भारतवासी मिलकर सिद्ध न कर सकें। बीते 9 वर्षों में देश ने देखा है कि जब सबका प्रयास होता है, तो कुछ भी असंभव नहीं रह जाता। उन्होंने कहा, “किसने सोचा था कि कश्मीर कभी धारा 370 से मुक्त भी हो सकता है! लेकिन, आज कश्मीर और देश के बीच ये दीवार गिर चुकी है।”

दुनिया भर में भारत की बढ़ती ताकत को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। आज भारत उपलब्धियों के नए शिखर पर है। G20 के सफल आयोजन को लेकर उन्होने कहा कि भारत के सामर्थ्य को देखकर दुनिया हैरान हो गई है। उन्होंने दुनिया भर में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की साख को नई ऊँचाई पर ले जाने की बात कही।

सरदार की पटेल की जयंती यानी राष्ट्रीय एकता दिवस या नेशनल यूनिटी डे पर देश भर में रैलियाँ निकाली गईं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने एकता की शपथ ली और लोगों को दिलाई । दिल्ली के पटेल चौक पर आयोजित एक खास समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृहमंत्री अमित शाह एवं अन्य नेताओं ने सरदार पटेल की जयंती पर उन्हें याद किया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में Run4Unity को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “सरदार वल्लभभाई पटेल जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम एकता, अखंडता और समावेशिता के मार्ग पर चलें। इन आदर्शों को सरदार साहब बहुत महत्व देते थे।”

वहीं, लखनऊ में आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंड़ी दिखाकर रवाना किया। इसमें भारी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “मेरे युवा साथियों, सरदार पटेल की जयंती एकजुटता के संकल्प का दिन है, एकता के संकल्प का दिन है और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लेने का भी दिन है। इसलिए मैं आप सब लोगों को एकता का संकल्प भी लेने का आग्रह करूँगा।”

गौरतलब है कि गुजरात के भरुच के निकट नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के प्रथम उप प्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित एक स्मारक है। इसे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री रहे नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के जन्मदिन के मौके पर इस मूर्ति के निर्माण शुरू करवाया था। उन्होंने ही पीएम बनने के बाद साल 2018 में ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित किया था

यह विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति है जिसकी लम्बाई 182 मीटर (597 फीट) है। यह स्मारक सरदार सरोवर बाँध से 3.2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक जगह पर नर्मदा नदी पर एक टापू है। भारत सरकार ने 2014 में ऐलान किया था की कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस या राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा।