भारत के कट्टरपंथी मुस्लिम इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमले के बाद से खुलकर इजरायल का विरोध कर रहे हैं। वो फिलिस्तीन के नाम पर हमास का समर्थन कर रहे हैं। कई तो इजरायल के सर्वनाश की कामना भी कर रहे हैं। इस तरह की कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें फिलिस्तीन का समर्थन किया जा रहा है।
कुछ दिनों पहले भारतीय मुस्लिम और वामपंथी सांसदों का एक दल फिलिस्तीनी दूतावास पहुँचा था और उसे समर्थन दिया था। इसके बाद अब अमीना शेख नाम की एक महिला फिलिस्तीनी दूतावास पहुँची और वीजा की माँग करने लगी। महिला का कहना है कि वो फिलिस्तीन जाकर अपने ‘धर्म वालों के लिए’ इजरायल के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी। अगर उसकी जान भी चली जाए तो कोई परवाह नहीं।
खोल दी जाएँ फिलिस्तीन-इजरायल की सरहदें
अमीना शेख नाम की महिला ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं अपॉइंटमेंट लेने आई थी सर से। मुझे फिलिस्तीन जाना है तो मैं वीजा के लिए अप्लाई करने आई थी। कुछ इश्यू की वजह से वीजा नहीं हो पा रहा है। मैं आप लोगों (मीडिया) के माध्यम से सरकार से कहना चाहती हूँ कि फिलिस्तीन की सरहदें हिंदुस्तानी मुस्लिमों के लिए खोल दी जाएँ।”
जब अमीना से पूछा गया कि वह फिलिस्तीन क्यों जाना चाहती हैं तो उसने कहा, ”मैं क्यों जाना चाहती हूँ? क्या आप लोग नहीं देख रहे कि वहाँ फ़िलिस्तीन में क्या हो रहा है? आप लोग तो न्यूज वाले लोग हैं? क्या आप नहीं देख पा रहे हैं कि वहाँ किस तरह से बच्चों को मारा जा रहा है और फ़िलिस्तीन की स्थिति कितनी गंभीर है?”
इस्लाम में जान की कोई कीमत नहीं
जब पूछा गया कि क्या उसे अपनी जान का डर है तो उसने कहा, “भाई, मैं जिस मजहब से आती हूँ न, उसमें जान की कोई कीमत नहीं है। जान की कीमत से वो डरे, जो एक ही बार में खत्म हो सकता है। हम नहीं डरते। तो जान जो है न… देखिए, मौत जो है न बिस्तर पे भी आती है। जो ऐसी जंग लड़ते हैं न, उसे तारीख और इस्लाम याद रखता है।”
गाजा के लिए अपनी तैयारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए महिला ने कहा, ”मैं यहाँ पूरी तैयारी के साथ आई हूँ। मैं अपने पासपोर्ट सहित अपने सभी दस्तावेज़ साथ लाई हूँ। मैं प्रधानमंत्री से भारत के लोगों के लिए दोनों देशों की सीमाएँ खोलने का आग्रह करती हूँ।”
गाजा के लिए इंडिया में क्राउड फंडिंग!
जब अमीन से पूछा गया कि क्या उसे इज़रायल में भारी बमबारी और युद्ध की स्थिति का डर है तो उसने कहा, “अगर मेरी किस्मत में वहाँ मरना लिखा है तो मैं निश्चित रूप से मरूँगी। और इसका मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वहाँ पर लोगों की जितनी हेल्प हो सकती है हम उतना करेंगे। जो मुहिम हमने चालू किया है इंडिया के अंदर, मैं हिंदुस्तान के अंदर गाजा के लिए फंड इकट्ठा कर रहे हैं, हमारे माइनोरिटी कम्युनिटी के लोग।”
अमीना शेख ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दिए अपने संदेश में कहा, “उस लड़ाई के बारे में मत सोचो, जो तुम जीत नहीं सकते। मैं ऐसे शैतानों को यही कहूँगी कि उस जंग के बारे में कभी अपने दिल के अंदर ख्याल भी न लाओ, जिसे तुम जीतने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इससे सिर्फ तुम्हारी ही बदनामी होगी।”
A muslim woman approaches Government of India with appeal to allow people of her community to go to Gaza and fight against Israel, Says we don't value death.
बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर बर्बरतापूर्ण हमला करते हुए करीब 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, दो सौ से अधिक इजरायलियों को बंधक बनाकर अपने साथ गाजा पट्टी ले गए। इसके बाद से इजरायल ने गाजा पट्टी की घेरेबंदी करते हुए उसपर हमला बोल दिया है।
इजरायल सीधी जमीनी लड़ाई के लिए तैयार है और उसके फाइटर जेट गाजा पर बम बरसा रहे हैं। अभी तक 5 हजार से अधिक लोग इजरायली पलटवार में मारे जा चुके हैं। इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के हमले के बाद उसके भी ठिकानों को निशाना बनाया है तो गाजा के अंदर वो हमास और इस्लामिक जेहाद की कमर तोड़ रहा है।
दानिश कनेरिया कभी क्रिकेट के मैदान पर अपनी घूमती गेंदों से दुनियाभर के बल्लेबाजों का शिकार करते थे। आजकल वे एक्स/ट्विटर की पिच पर भारत के लिबरल गैंग की गिल्ली उड़ा रहे हैं। ‘द वायर’ की एजेंडाबाज पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, प्रोपेगेंडाबाज वकील प्रशांत भूषण के बाद अब उन्होंने उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे यासर शाह का शिकार किया है।
दरअसल, पूर्व विधायक यासर शाह ने ‘उम्माह प्रेम’ में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी का बचाव करते हुए कनेरिया पर निशाना साधा था। इसका जवाब देते हुए कनेरिया ने कहा, “मैं बच गया क्योंकि मेरे साथ भगवान श्री राम का आशीर्वाद है। आप अपना ख्याल रखना क्योंकि यूपी में आपके अब्बू योगी आदित्यनाथ हैं।”
यासर शाह और दानिश कनेरिया के बीच सोशल मीडिया में भिड़ंत शाहिद अफरीदी के एक इंटरव्यू का वीडियो शेयर करने से शुरू हुआ। इस वीडियो को शेयर करते हुए कनेरिया ने लिखा कि शाहिद अफरीदी ने टीवी इसलिए तोड़ दिया, क्योंकि उनकी बेटी पूजा कर रही थी। कल्पना कीजिए जब वे अपनी मासूम बेटी के साथ इस तरह कर सकता है तो मेरे साथ कैसा व्यवहार करता होगा।
I escaped because I have the blessings of Lord Ram. You take care of yourself because your Abbu Yogi Adityanath is there in UP. https://t.co/7IjbcaRhv0
यासर शाह ने कनेरिया के इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, “तुम बच गए क्योंकि तुमने उसे उसकी बेटी की तरह ‘अब्बू’ नहीं कहा। या आपने किया?” शाह के इस जवाब को रिट्वीट करते हुए कनेरिया ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए जवाब दिया।
कनेरिया ने अफरीदी का जो वीडियो शेयर किया था वह एक चैट शो का है। इसमें महिला एंकर अफरीदी से पूछती हैं कि क्या उन्होंने कभी टीवी तोड़ा है? जिसका जवाब ‘हाँ’ में देते हुए अफरीदी ने बताया था कि एक बार वे अपने घर में आए, तो अक्शा या अंशा (उनकी बेटियाँ) में से कोई एक टीवी के आगे हाथ घुमाकर कुछ ‘यूँ-यूँ’ कर रही थीं और टीवी पर स्टार प्लस चल रहा था। अफरीदी जिसे ‘यूँ-यूँ’ बता रहे थे, उसे हिंदू परंपराओं में ‘आरती’ कहा जाता है।
अफरीदी के इस वीडियो को शेयर करने से पहले आज तक को दिए इंटरव्यू में कनेरिया ने बताया था कि उन पर पाकिस्तान की टीम में रहते हुए धर्मांतरण का दबाव डाला गया था। कनेरिया ने कहा था कि पाकिस्तान टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने उन पर कई बार इस्लाम कबूलने के लिए दबाव डाला था। उनसे कहा जाता था कि ऐसा करने पर वे लंबे वक्त तक पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में खेल पाएँगे।
कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘युवराज’ राहुल गाँधी भारत लौट आए हैं। अपनी सीक्रेट यात्रा पर वो इस बार उज्बेकिस्तान पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने क्या कुछ किया, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट करके बताया है कि राहुल गाँधी भारत लौट आए हैं। आज (27 अक्टूबर 2023) को वो उज्बेकिस्तान से दिल्ली पहुँचे। बता दें कि उज्बेकिस्तान एक पूर्व सोवियत देश है, जिसके उनकी नानी इंदिरा गाँधी के समय से ही भारत से मजबूत संबंध रहे हैं।
सोवियत संघ और भारत के बीच के संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। हालाँकि, इतने सालों बाद राहुल गाँधी का उज्बेकिस्तान दौरा चौंकाने वाला जरूर है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राहुल गाँधी ने इस बार अपने सीक्रेट दौरे के लिए उज्बेकिस्तान को ही क्यों चुना? वैसे, कॉन्ग्रेस के युवराज का चुनावी मौसम के दौरान या ऐसे समय जब उनकी पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, जनता को बताए बिना छुट्टियों पर जाने का इतिहास रहा है।
कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर ‘गुप्त’ विदेश यात्राएँ करते हैं। इन यात्राओं के बारे में अक्सर बहुत कम या ना के बराबर जानकारी उपलब्ध होती है। उनकी यात्राओं के उद्देश्यों के बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जाती हैं। साल 2019 से उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की कई यात्राएँ की थीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक नेताओं, थिंक टैंक और मीडिया संस्थानों से मुलाकात की।
राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं के बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जाती हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वे अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी हस्तक्षेप की तलाश कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को बढ़ावा दे रहे हैं।
राहुल गाँधी ने विदेश यात्राओं के दौरान कई बार भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की है। उदाहरण के लिए साल 2023 में ही उन्होंने अमेरिका की यात्रा के दौरान हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ से मुलाकात की। HfHR एक इस्लामवादी वकालत समूह है, जो भारत में हिंदुओं पर भेदभाव करने का आरोप लगाता है।
Hudson was honored to host @RahulGandhi to discuss the state of US-India relations and further cooperation between both nations. ???? pic.twitter.com/fIUJhS4ooX
— Hudson Institute (@HudsonInstitute) June 1, 2023
इन्फो-वॉरफेयर और साइ-वॉर की OSINT डिसइन्फो लैब ने एक जाँच की थी, जिसमें खुलासा हुआ था कि ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR)’ ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ की भ्रामक कहानी को बढ़ावा दे रहा था। इसी संगठन को ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ कार्यक्रम का समर्थन करते हुए भी देखा गया था।
डिसइन्फो लैब के मुताबिक, हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ‘वीमेन फॉर अफगान वुमेन’ नाम से एक संगठन भी चलाती हैं, जिसे सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा पैसे दिए जाते हैं। ऑपइंडिया ने विस्तार से बताया था कि कैसे जॉर्ज सोरोस मीडिया और ‘सिविल सोसाइटी’ के माध्यम से एक खतरनाक भारत-विरोधी कहानी को हवा देने में शामिल हैं।
Prominent Indian politician Shri Rahul Gandhi, during his proposed #RahulInUSA tour,would attend several public events. He may not know, but some ‘coordinators’ who are claiming to be associated with events are Pak Jamaat-e-Islami & Muslim Brotherhood-linked fronts
राहुल गाँधी ने इटली और ब्रुसेल्स की अपनी यात्राओं के दौरान भी भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की। इटली में उन्होंने भारत विरोधी इतालवी वामपंथी राजनेता फैबियो मास्सिमो कास्टाल्डो से मुलाकात की। फैबियो मास्सिमो कास्टाल्डो यूरोपीय संसद के पूर्व सदस्य हैं। इतालवी वामपंथी नेता कास्टाल्डो की इटली में आईएसआई के लिए काम करने वाले परवेज इकबाल लॉसर के साथ दोस्ती है और वो यूरोप में आईएसआई का महत्वपूर्ण हैंडलर है।
राहुल गांधी के साथ फैबियो कास्टाल्डो
यही नहीं, ब्रुसेल्स में उन्होंने भारत विरोधी यूरोपीय सांसदों से मुलाकात की, जिनमें अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौटुरो शामिल थे। पियरे लारौटुरो बाद में मणिपुर के मुद्दे पर यूरोपीय संघ की संसद में सवाल उठाने वाला व्यक्ति निकला। यानि राहुल गाँधी की ये मुलाकात मणिपुर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में मददगार साबित हुई।
Very honored to welcome @RahulGandhi to the European Parliament today ??
He is one of the great figures of Indian democracy and has been fighting for years against the ultra-nationalism of the Modi government.
साल 2022 के अप्रैल माह में प्रशांत किशोर को कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल करने की रिपोर्ट्स आ रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने से मना कर दिया था। इस घटना के तुरंत बाद राहुल गाँधी 10 दिनों के लिए ‘लापता‘ हो गए थे। उनके बारे में किसी को कोई खबर नहीं थी और कॉन्ग्रेस पार्टी बिना किसी नेता के ही काम करने को मजबूर हो गई थी, जबकि उस समय उनकी पार्टी संकट में थी।
राहुल गाँधी दिसंबर 2021 में अपनी निजी यात्रा के लिए इटली रवाना हो गए थे, वो भी जब पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे थे। उनकी यात्रा की वजह से पंजाब के चुनावी मौसम में पार्टी की तैयारियों को झटका लगा, क्योंकि उनकी यात्रा की वजह से कई चुनावी रैलियाँ काफी समय बाद हो पाईं। तब तक पार्टी को पंजाब में बुरी तरह से पिछड़ जाना पड़ा। अंतत: आम आदमी पार्टी ने पंजाब में कॉन्ग्रेस का सफाया कर दिया।
यही नहीं, उसी समय एक बार फिर से वो गायब हो गए थे। बताया जाता है कि वो कथित तौर पर लंदन चले गए थे। पार्टी ने 5 नवंबर को बताया था कि राहुल गाँधी ‘छुट्टी’ पर गए हैं। वो संसद में शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले वह करीब एक महीने बाद लौटे। उस वक्त बीजेपी ने गाँधी पर कटाक्ष किया था और उनकी लंदन यात्रा पर सवाल उठाए थे। सितंबर 2021 में जब पंजाब में कॉन्ग्रेस पार्टी अमरिंदर सिंह के इस्तीफे से संकट का सामना कर रही थी, गाँधी परिवार शिमला में छुट्टियाँ मना रहा था ।
उससे पहले साल 2020 के दिसंबर में जब कॉन्ग्रेस पार्टी का 136वाँ स्थापना दिवस मनाया जा रहा था, तब भी वो इटली रवाना हो गए थे। अगर उससे भी पहले की बात करें तो अक्टूबर 2019 में हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक 15 दिन पहले वो कथित तौर पर बैंकॉक चल गए थे। यही नहीं, उसी साल लोकसभा चुनाव होने के तुरंत बाद बिना नतीजो को जाने वो लंदन चले गए और छुट्टियाँ मनाने लगे। यहाँ तक कि वो सोनिया गाँधी की ओर से बुलाई बैठक में भी शामिल नहीं हुए।
यही नहीं, वो अपने साथ एसपीजी की सुरक्षा को लेकर विदेश नहीं जाते और बार-बार एसपीजी सुरक्षा को तोड़ते रहे। इसके बाद सरकार ने उनकी एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी। इस मामले में राजनाथ सिंह ने संसद में उनसे सवाल भी पूछे थे।
विदेशी मदद के लिए परेशान हैं राहुल गाँधी?
भारत में अपने राजनीतिक लाभ के लिए राहुल गाँधी द्वारा ‘विदेशी मदद’ माँगने के कई उदाहरण हैं। एक के बाद एक चुनाव हारने के बाद लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता का विश्वास जीतने में नाकाम रहने के बाद उन्होंने वैश्विक वामपंथियों के सामने यह घोषणा करना शुरू कर दिया है कि भारत अराजकता में डूबा हुआ देश है, जहाँ लोकतंत्र का पतन हो रहा है और केवल वह ही इसे बहाल कर सकते हैं। अप्रैल 2021 में हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में बोलते हुए राहुल ने कहा कि अमेरिकी सरकारी प्रतिष्ठान को ‘भारत में क्या हो रहा है’ के बारे में ‘और अधिक बोलना’ चाहिए।
साल 2022 में यूनाइटेड किंगडम में ‘आइडियाज फॉर इंडिया’ सम्मेलन में राहुल गाँधी ने फिर से विदेशी हस्तक्षेप की माँग की थी। अपने विवादास्पद भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने दो बार विदेशी हस्तक्षेप की अपनी इच्छा का संकेत दिया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर भारत पर दबाव डालने के लिए कहा और भारतीय राजनयिकों की बुराई की। यही नहीं, लद्दाख की तुलना उन्होंने यूक्रेन से करते हुए अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की।
राहुल गाँधी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भी भाषण दिया है। हंगेरियन-अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) 2013 से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गिल्ड ऑफ बेनिफैक्टर्स का सदस्य है। उसी जॉर्ज सोरोस ने भारत में सत्ता परिवर्तन (मोदी को सत्ता से बाहर करने के लिए) के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया। सोरोस ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी ग्रुप पर खुलकर निशाना साधा है।
इसका लिंक कॉन्ग्रेस के साथ देखें तो कॉन्ग्रेस अडानी विवाद को खूब उछाल रही है। ऐसे ऐसे सारे मुद्दे हैं, जिन्हें जोड़ने पर ये बात साफ तौर पर समझ में आती है कि कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए बेहद बेचैन हैं और इसके लिए वो किसी भी विदेशी मदद के लिए तैयार हैं। राहुल गाँधी की उज्बेकिस्तान यात्रा भी उसी कड़ी से जुड़ी हो सकती है। वैसे, ये बात जनता को भी सोचनी है कि अगले साल लोकसभा का चुनाव है और राहुल गाँधी सीक्रेट ‘मिशन्स’ पर विदेश यात्राएं कर रहे हैं।
इस्लामी मुल्क कतर (Qatar) की एक अदालत ने जासूसी के झूठे आरोप में भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा सुना दी है। कतर ने भारत से स्पष्ट नहीं बताया है कि इन लोगों पर क्या आरोप हैं। वहीं, कतर की इस हरकत पर भारत के विदेश मंत्रालय ने हैरानी जताई है और इस फैसले को चुनौैती देने की बात कही है।
अब सवाल है कि एक देश की अदालत द्वारा दिए गए फैसले को कोई दूसरा देश कैसे चुनौती दे सकता है। इसको लेकर भारत सरकार के पास क्या विकल्प हैं। इसका एक उदाहरण पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव का है। जाधव को पाकिस्तान ने ईरान से अपहरण कर लिया था और उन पर जासूसी का आरोप लगाकर जेल में बंद कर रखा है।
कुलभूषण जाधव को भी पाकिस्तान की अदालत ने फाँसी की सजा दी थी, लेकिन भारत इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पहुँच गया था। इसके बाद पाकिस्तान को फाँसी की सजा टालनी पड़ी थी। हालाँकि, कुलभूषण जाधव को अभी भी पाकिस्तान ने रिहा नहीं किया और वे पाकिस्तानी जेल में बंद हैं। उन्हें प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है।
इस मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाने का विकल्प भारत के मौजूद है। दूसरी तरफ, सजा पाए इन 8 अधिकारियों के परिजनों ने कतर के अमीर के पास दया याचिका लगा रखी है। कतर के अमीर चाहें तो अदालत द्वारा दी गई सजा को माफ कर सकते हैं। वे अक्सर रमजान और ईद पर माफी की घोषणा करते हैं।
हालाँकि, भारत सरकार कतर के लगातार संपर्क में है। कतर ने भारत के इन पूर्व अधिकारियों को पहले सिंगल सेल में अकेले में रखा था। भारत के कहने पर कतर ने अभी एक महीना पहले ही उन्हें एकांतवास से बाहर निकाला है। इसके साथ ही इन्हें काउंसर पहुँच भी दी गई है।
इंडिया टुडे को एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने बताया कि सरकार के पास एक तरीका यह है कि वह कतर की ऊपरी अदालत में फाँसी की सजा के खिलाफ अपील करे। अगर अपील नहीं सुनी जाती है तो भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख कर सकती है।
एडवोकेट ग्रोवर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और इंटरनेशनल कॉन्वेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) के प्रावधान कहते हैं कि कुछ मामलों को छोड़कर फाँसी की सजा नहीं दी जा सकती है। फाँसी रूक सकती है, लेकिन उन्हें छोड़ने का निर्णय कतर पर होगा।
इसके अलावा, कतर पर राजकीय अथवा अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर नागरिकों को मौत की सजा से बचाया जा सकता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की मदद का भी एक विकल्प है। कुलभूषण जाधव के मामले में एडवोकेट हरीश साल्वे ने सिर्फ एक रुपए की फीस लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ाई लड़ी थी।
इस मसले को कूटनीतिक तरीके से भी सुलझाया जा सकता है। इसके लिए भारत सरकार कतर या उसके मित्र देशों से बातचीत करे। साल 2017 में भारत ने कतर की मदद की थी। बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर कतर से राजनयिक संबंध खत्म कर लिए थे।
इसके कारण कतर को गंभीर संकट से गुजरना पड़ा था। आयात-निर्यात के लिए उसे सुदूर बंदरगाहों का इस्तेमाल करना पड़ा था। वहाँ गंभीर खाद्य संकट खड़ा हो गया था। उस समय भारत सरकार ने भारत-कतर एक्सप्रेस सेवा नामक समुद्री आपूर्ति लाइन के जरिए कतर की मदद की थी। कतर खाने-पीने के सामानों के लिए भारत पर निर्भर है। इतना ही नहीं, भारत यहाँ से सबसे अधिक LNG आयात करता है।
दरअसल, मई 2022 में पैगंबर मुहम्मद पर नुपूर शर्मा के बयान के बाद कतर पहला मुस्लिम देश था, जिसने प्रतिक्रिया जाहिर की थी। उसने भारतीय राजनयिक को तलब कर लिया था। इसको लेकर दोनों देशों के बीच रिश्तों में थोड़ी तल्खी आ गई थी। इसके तीन महीने बाद बिना किसी सूचना के कतर के अधिकारियों ने इन सभी भारतीयों को गिरफ्तार कर लिया था।
इनकी गिरफ्तारी को लेकर कतर के अधिकारियों ने औपचारिक तौर पर भारत को किसी तरह जानकारी नहीं दी। ये आज तक भारत को नहीं बताया गया है कि इन लोगों पर किस तरह के आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अधिकारियों पर इजरायल के साथ जासूसी करने का आरोप है।
भारतीय अधिकारियों पर आरोप
दरअसल, भारतीय नौैसेना के पूर्व अधिकारी कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश कतर की एक निजी फर्म दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम करते थे।
डिफेंस सर्विस प्रोवाइडर ऑर्गनाइजेशन दाहरा का स्वामित्व रॉयल ओमानी एयरफोर्स के एक रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खामिस अल-अजमी के पास है। यह प्राइवेट फर्म कतर के सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण और संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराती थी। अजमी को भी भारतीयों के साथ 30 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें फीफा वर्ल्ड कप के पहले नवंबर 2022 में रिहा कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक इन भारतीयों को इजरायल के लिए एक सबमरीन प्रोग्राम की जासूसी करने का दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर ने साल 2020 में इटली में बनी हाईटेक सबमरीन खरीदने के लिए एक समझौता किया था। ट्राइस्टे स्थित जहाज बनाने वाली कंपनी ‘फिनकेंटियरी एसपीए’ के साथ यह समझौता हुआ था।
कतर ने समझौते के तहत चार कॉर्वेट (जहाज़ का एक प्रकार) और एक हेलीकॉप्टर का ऑर्डर भी दिया था। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को कतर में नौसेना का एक बेस बनाना था। इसके साथ ही नौसैनिक बेड़े की देखरेख भी करनी थी। इसके लिए कतर ने जिस दाहरा कंपनी को यह काम दिया, उसमें ये सभी भारतीय काम कर रहे थे।
कतर के अधिकारियों का आरोप है कि ये 8 भारतीय अधिकारी इस प्रोग्राम की गोपनीय जानकारी इज़रायल से साझा कर रहे थे। कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘कतर स्टेट सिक्योरिटी’ ने दावा किया था कि उसने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के उस सिस्टम को इंटरसेप्ट कर लिया था, जिससे वो कथित रूप से जासूसी कर रहे थे। हालाँकि, कतर ने भारत के साथ कोई भी सबूत साझा नहीं किया है।
पत्नी या पति के जीवित रहते असम के कर्मचारी अब दूसरी शादी नहीं कर पाएँगे। यह सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। मजहब के हिसाब से छूट नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि असम सरकार दूसरी शादी की इजाजत किसी भी कर्मचारी को नहीं देगी, भले ही उनका मजहब इसकी इजाजत देता हो। विशेष परिस्थितियों में दूसरी शादी के लिए कर्मचारियों को सरकार से अनुमति लेनी होगी।
सीएम सरमा ने बताया कि ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जब मुस्लिम कर्मचारी दो शादी कर लेते हैं। बाद में उनकी दोनों बीवी पेंशन के लिए लड़ती रहती हैं। इसे देखते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कानून पहले से ही था। अब इसे लागू करने का फैसला किया गया है।
HCM Dr @himantabiswa speaks on the circular pertaining to restrictions on more than one marriage for government employees in Assam. pic.twitter.com/syalHBpbqG
बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का यह आदेश असम के चार लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए 58 साल पहले बनाए गए एक सेवा नियम के तहत आया है। इसके अनुसार सरकार की सहमति के बगैर कर्मचारी तब तक दूसरी शादी नहीं कर सकते जब तक पहला पति या पत्नी जीवित है।
असम सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 26 के तहत सरकार की मंजूरी के बगैर दूसरी शादी प्रतिबंधित है। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करता है तो उसे कदाचार माना जाता है।
फोटो साभार: news18.com
मुस्लिमों का जिक्र किए बगैर इस परिपत्र में कहा गया है कि यह नियम उन पुरुषों पर भी लागू है, जिन्हें पर्सनल लॉ के तहत दूसरी शादी करने की इजाजत है। इस ‘ऑफिस मेमोरेंडम’ में कहा गया है कि इसी तरह, कोई भी महिला सरकारी कर्मचारी जिसका पति जीवित हो वो सरकार की मँजूरी लिए बगैर किसी भी शख्स से शादी नहीं कर सकेंगी।
ये अधिसूचना कार्मिक अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज वर्मा ने शुक्रवार (20 अक्टूबर,2023) को जारी की थी, लेकिन यह गुरुवार (26 सितंबर,2023) को सामने आई। इसमें कहा गया है कि दिशा-निर्देश असम सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 26 के प्रावधानों के तहत जारी किए गए हैं।
इस आदेश में कहा गया है, “इन प्रावधानों के संदर्भ में, अनुशासनात्मक प्राधिकारी इस नियम को न मानने वाले कर्मचारियों पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति सहित बड़ा जुर्माना लगाने के लिए तत्काल विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।”
65 साल के एक बुजुर्ग को एक सप्ताह में 100 बार मिनी स्ट्रोक आए। दिल्ली के एक अस्पताल में सर्जरी के बाद अब उनकी सेहत में सुधार आया है। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग को करीब छह महीने से हाथ-पैर में कमजोरी महसूस हो रही थी। साथ ही बोलने और समझने में भी दिक्कत आ रही थी।
BLK मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए आने से पहले बुजुर्ग ने कई डॉक्टरों से परामर्श किया था। लेकिन उनकी बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। दरअसल स्मोकिंग की वजह से बुजुर्ग के दिमाग की एक नस में ब्लॉकेज हो गया था। जिसके कारण रक्त के प्रवाह में रुकावट आ रही थी। इसके कारण उन्हें बार-बार ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक झेलना पड़ा।
दरअसल, स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। इस्केमिक और हेमोरेजिक। इस्केमिक स्ट्रोक दिमाग में खून के प्रवाह में रुकावट की वजह से होता है और हेमोरेजिक या रक्तस्रावी स्ट्रोक दिमाग में धमनियों में ब्लीडिंग से होता है। डॉक्टरों ने बुजुर्ग के दिमाग की दाहिनी आंतरिक कैरोटिड धमनी में रुकावट को दूर करने के लिए इंट्राक्रैनियल स्टेंटिंग का इस्तेमाल कर उनकी जिंदगी को नया रूख दिया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हापुड़ के निवास जौहार (Niwash Johar) नाम के बुजुर्ग को एक हफ्ते में 100 से अधिक बार मिनी स्ट्रोक पड़े थे। बीएलके मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक एंजियोग्राफी (डीएसए) में पता चला कि स्मोकिंग की वजह से जौहर के दिमाग की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ गई थीं। दाहिनी ओर खून की आपूर्ति केवल 90 फीसदी थी और बाईं ओर से बंद थी। इसलिए, दिमाग में रक्त और ऑक्सीजन की कमी की वजह से बार-बार स्ट्रोक आ रहा था।
कमजोरी महसूस होने पर बुजुर्ग ने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई भी उनकी परेशानी का पता नहीं लगा सका। BLK मैक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर न्यूरोलॉजी और हेड न्यूरोवास्कुलर इंटरवेंशन डॉ विनित बंगा ने बताया कि बीते छह महीनों से निवाश जौहर को दाहिने हाथ और पैर में कमजोरी के साथ-साथ बोलने और समझने में मुश्किल हो रही थी।
डॉ बंगा बताया, “शुरुआत में, उन्हें हर हफ्ते 1-2 बार मिनी हार्ट स्ट्रोक आते थे और ये पाँच मिनट से भी कम वक्त का होता था। लेकिन धीरे-धीरे इन अटैक की संख्या हर दिन बढ़ने के साथ शरीर पर उनके असर का वक्त भी बढ़ता गया। जो अटैक पहले 5 मिनट तक रहते थे वो 10-15 मिनट तक होने लगे थे।”
डॉ बंगा ने बताया कि रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, खराब जीवनशैली के साथ-साथ हाई कोलेस्ट्रॉल के वजह से भी हो सकती है। उनका कहना था कि इस तरह अटैक का इलाज दवाओं और बेहतर जीवनशैली अपनाकर इसके खतरों को कम किया जा सकता है। हालाँकि उन केसों में स्टेंटिंग की जरूरत होती है, जब रक्त वाहिकाएँ बहुत सिकुड़ गई होती हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने कई करोड़ रुपए के राशन वितरण घोटाले में गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) की देर रात को पश्चिम बंगाल के वन राज्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ज्योतिप्रिय मलिक को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जाँच के लिए ईएसआई अस्पताल जोका ले जाया गया।
साल्ट लेक के अपने घर से ईडी की गिरफ्तारी के दौरान मीडियाकर्मियों से मंत्री मलिक ने कहा, “मैं एक गंभीर साजिश का शिकार हूँ।” वहीं, ईडी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है, “पश्चिम बंगाल के मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक को राशन वितरण में भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है।”
गौरतलब है कि राशन घोटाले की जाँच के सिलसिले में मंत्री ज्योतिप्रिय मलिक के आवास समेत कई जगहों पर ईडी ने गुरुवार तड़के छापेमारी की। ईडी के मुताबिक, निदेशालय के अधिकारियों ने मंत्री मलिक के कोलकाता साल्ट लेक इलाके के दो फ्लैट में केंद्रीय बलों की एक टीम की मदद से छापेमारी की।
इसके साथ ही मंत्री के पूर्व निजी सहायक के आवास सहित आठ अन्य फ्लैट पर भी छापेमारी को अंजाम दिया गया। अधिकारी ने कहा, ‘‘छापेमारी के दौरान मंत्री वहाँ नहीं थे। वह बाद में आए और उनका फोन ले लिया गया है। (फ्लैट के) अंदर आठ अधिकारी हैं। हम उनके पूर्व निजी सहायक के दमदम स्थित आवास और कुछ अन्य स्थानों पर भी तलाशी ले रहे हैं।’’
ED मलिक के एक करीबी को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। बता दें कि वर्तमान में वन मामलों के राज्य मंत्री मलिक इससे पहले टीएमसी की सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग का प्रभार संभाल चुके हैं। हालाँकि, अपने मंत्री की इस गिरफ्तारी पर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने अभी कोई बयान नहीं जारी किया है।
टीएमसी के नेता घोटाले के लिए लगातार ईडी की जाँच के दायरे में हैं। इस साल की शुरुआत में ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के आवास से भारी नकदी की बरामदगी के बाद शिक्षक भर्ती घोटाले के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया था।
ईडी के मुताबिक, दोनों पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) भर्ती घोटाले की जाँच का सामना कर रहे हैं। टीएमसी के बीरभूम (Burbhum) जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल को भी पशु तस्करी मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को भी कोयला घोटाले में ईडी के रडार पर हैं।
VIDEO | ED arrested West Bengal minister Jyotipriya Mallick earlier today in connection with the alleged ration distribution scam. pic.twitter.com/QncoOdk82J
वहीं, पीडीएस राशन वितरण में भ्रष्टाचार के कथित मामले में मंत्री मलिक की गिरफ्तारी पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉक्टर सुकांत मजूमदार का कहना है, “उनकी गिरफ्तारी निश्चित थी। ये सबको पता था कि PDS का राशन लेकर कैसे उसकी तस्करी हुई है। ममता बनर्जी को चोरों से सहानुभूति है।”
भगवान श्री राम का बुलावा आएगा तो दानिश कनेरिया अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु के दर्शन करने आएँगे… पूरे परिवार के साथ! पाकिस्तान में रह कर, इस्लाम कबूलने का प्रेशर झेल कर, क्रिकेटिंग करियर तबाह कर दिए जाने के बाद भी दानिश कनेरिया हिंदू बने रहे, तो उसके पीछे प्रभु श्री राम में उनकी अटूट आस्था ही है। टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कनेरिया ने दिल खोल कर बातें कीं – क्रिकेट पर, हिंदू होने पर, पाकिस्तान में भेदभाव पर, भारत-पाकिस्तान रिश्ते पर।
टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने राम मंदिर को लेकर अपनी आस्था के बारे में बताया। उनके अनुसार वो बचपन से भगवान राम और बजरंगबली के भक्त रहे हैं। राम मंदिर निर्माण और 22 जनवरी 2024 को उसके प्रांगण में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भावुक होते हुए कनेरिया ने कहा कि अगर भगवान ने मौका दिया तो वो अपने पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आएँगे।
हिंदू पैदा हुआ, हिंदू ही मरूँगा
इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने बताया कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व है। वो पैदा हिंदू धर्म में हुए और मरेंगे भी हिंदू के ही रूप में। भगवान राम के जीवन से सीख लेते हुए कनेरिया ने कहा कि हर परिस्थिति में संघर्ष करना चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने सीख दी है कि बुरी से बुरी परिस्थितियाँ भी बदल जाती हैं अगर आपका विश्वास पक्का है।
‘जय श्रीराम’ नारे को लेकर कट्टर मुस्लिम और वामपंथी-कॉन्ग्रेसी जैसा माहौल बना रहे हैं, उनको जवाब देते हुए कनेरिया ने कहा कि यह एक वेलकम या स्वागत करने जैसा है। इस पर जो बवाल कर रहे हैं, कनेरिया की नजर में वो दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के स्टेडियमों के आप-पास बनी मस्जिदों और उसमें से आने वाली अजान/नमाज की आवाज पर कभी किसी ने आपत्ति नहीं जताई, पाकिस्तान गए सभी खिलाड़ियों ने इसको इज्जत दी। इस पर आगे उन्होंने कहा:
“आप भारतभूमि में हैं… तो क्या होगा, जय श्रीराम ही होगा!”
आरफा को पाकिस्तान में बुलावा
पत्रकारिता के नाम पर प्रोपेगेंडा करने वाली आरफा खानम शेरवानी को दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान आ जाने का बुलावा दिया था। इस पर टाइम्स नाउ के एंकर ने जब सवाल किया तो कनेरिया ने बहुत ही स्पष्ट जवाब दिया। कनेरिया के अनुसार किसी भारतीय को अगर भारत में रहने पर शर्म महसूस होती है तो फिर वहाँ रहना ही क्यों? छोड़ कर कहीं और रहने चले जाइए।
Pakistan Cricket Board lodging a complaint with the ICC over the 'Jai Shri Ram' slogans makes no sense… Zaka Ashraf should not have called India an enemy nation. It spoils relations between countries: Fmr Pak Cricketer @DanishKaneria61 tells @madhavgk@TheNewsHour AGENDA pic.twitter.com/yPiY17ajCC
बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने आरफा खानम शेरवानी के समर्थन में ट्वीट किया था। दानिश कनेरिया को आड़े हाथों लिया था। इस सवाल के जवाब में कनेरिया ने कहा कि वो हिंदू धर्म को लेकर बात कर रहे थे, सनातन पर हो रहे अटैक को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। ऐसे में गौरव भाटिया या किसी को भी सोच-समझ कर बोलना चाहिए, पूरी बात सुननी-पढ़नी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब कुछ जानती है, और उसी जनता ने गौरव भाटिया को जवाब भी दे दिया।
पाकिस्तान, जय श्रीराम, दर्शक और खिलाड़ी
भारत-पाकिस्तान के विश्व कप मुकाबले में अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा था। इसको लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी में शिकायत दर्ज की। इस सवाल पर कनेरिया ने कहा कि यह नॉर्मल चीज है। उन्होंने कहा कि वो हिंदू हैं लेकिन खेलते पाकिस्तान की ओर से थे। ऐसे में बाउंड्री पर खड़ा दर्शक आपको कुछ-न-कुछ कहेगा ही, इसे प्रोफेशनल खिलाड़ी को नॉर्मल ढंग से लेना चाहिए न कि बात का बतंगड़ बनाना चाहिए।
आपको बता दें कि ‘जय श्री राम’ नारे पर भारत में रहने वाले भी वामपंथी भी पाकिस्तान प्रेम में रोने लगे थे। जिनके पिता खुद इंटरनेशनल क्रिकेटर रह चुके थे, उनके बेटे राजदीप सरदेसाई ने भी इस पर बवाल काटा था। लेकिन राजदीप को करारा जवाब मिला था एक पूर्व खिलाड़ी से ही। पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कहा था कि यह सब नॉर्मल है क्योंकि उन्हें भी पाकिस्तान में गालियाँ मिलीं थी। उनके धर्म से लेकर देश और संस्कृति तक को गाली दी गई थी।
हिंदू होने की सजा मिली
दानिश कनेरिया ने बताया कि एक हिंदू होने के कारण पाकिस्तान में उनका करियर बर्बाद कर दिया गया। क्रिकेटिंग करियर के बाद भी उनको इतना परेशान किया गया कि एक जॉब तक उनको करने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि इतनी विषम परिस्थिति में लेकिन वो भगवान श्री राम के सहारे रहे।
Shahid Afridi used to taunt me because I am a Hindu. If I had converted, I might have become the captain of the Pakistan cricket team… It (CAA) is a good law, and I support it: Fmr Pak Cricketer @DanishKaneria61 tells @madhavgk@TheNewsHour AGENDA pic.twitter.com/pL8o1FXyFr
पाकिस्तान में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वहाँ भेदभाव नहीं है तो कनेरिया के अवाले कोई अन्य खिलाड़ी (जो गैर-मुस्लिम हो) क्यों नहीं इंटरनेशनल स्टेज तक आ पाया?
आपको बता दें कि शाहिद अफरीदी को लेकर ‘आजतक’ के इंटरव्यू में कनेरिया ने कहा था कि वो हमेशा इन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहता था, सुबह की नमाज पढ़ने के लिए उठा देता था।
इससे पहले 24 अक्टूबर 2023 को दानिश कनेरिया ने एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा कि मंदिर (अयोध्या का राम मंदिर) बन जाए… फिर दर्शन करने आएँगे। यह ट्वीट एक सवाल के जवाब में लिखा गया था। इस ट्वीट के रिप्लाई में कनेरिया को कट्टर मुस्लिम और वामपंथी टाइप के लोग गालियाँ और धमकी तक दे रहे हैं।
नाम श्रीकृष्ण सिंह का। मंच कॉन्ग्रेस का। स्तुतिगान बिहार के सजायाफ्ता पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का। बिहार कॉन्ग्रेस के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में 27 अक्टूबर 2023 को हुए कार्यक्रम की खबर इन तीन लाइनों में भी सिमट सकती थी, यदि इस स्क्रिप्ट में सोने का मुकुट और जेल में फोन का इस्तेमाल करने का कबूलनामा नहीं आता।
सदाकत आश्रम में कार्यक्रम का आयोजन कॉन्ग्रेस ने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री ‘बिहार केसरी’ श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती पर किया था। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू यादव थे। जगजाहिर है कि वर्षों से कॉन्ग्रेस बिहार में लालू यादव की पिछलग्गू बनी हुई है। उसके खुद के पास राज्य में ऐसे नेता भी नहीं हैं जिनके नाम से वह अपने पार्टी कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं का जुटान कर ले।
इसलिए लालू जरूरी थे। कॉन्ग्रेस ने भी इस जरूरत का मान रखा और जमकर उस नेता का स्तुतिगान किया जो स्वास्थ्य के आधार पर चिरौरी कर जेल से बाहर आया है। उसे सोने का मुकुट पहनाया। सोने का मुकुट बेगूसराय के बड़े कारोबारी रतन सिंह ने पहनाया। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि यह मुकुट पूरी तरह से सोने का है। इसमें चाँदी की मिलावट नहीं है। हालाँकि रतन सिंह ने मुकुट का वजन बताने से इनकार कर दिया। यह भी कहा कि इसके पीछे उनकी कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। पर जानकार बताते हैं कि वे राजद से टिकट की ख्वाहिश रखते हैं।
दिलचस्प यह भी रहा कि खुद को गरीब-गुरबों का नेता बताने वाले लालू ने सोने के मुकुट को पहनने में संकोच भी नहीं किया। रतन सिंह का यह भी कहना है कि उनके लिए कॉन्ग्रेस और राजद में अंतर नहीं है। इससे पता चलता है कि इस कारोबारी को यह बखूबी पता है कि भले राजनीति कॉन्ग्रेस से करनी हो, होगा वही जो लालू यादव चाहेंगे।
आज सदाक़त आश्रम, पटना में आयोजित महान स्वतंत्रता सेनानी, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, बिहार केसरी स्वर्गीय डॉ. श्रीकृष्ण जी की 136वीं जयंती समारोह का राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री @laluprasadrjd ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। pic.twitter.com/B7xmjL5BsY
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लालू यादव ने कॉन्ग्रेसियों को अपनी इस ताकत के बारे में बकायदा बताया भी। राजद सुप्रीमो ने बताया कि जेल में रहकर भी वे सोनिया गाँधी को कॉल करते थे। कॉन्ग्रेस नेताओं की तकदीर लिखते थे।
लालू यादव ने कहा, “अखिलेश (अखिलेश प्रसाद सिंह) माँगकर नहीं बने हैं एमपी। इनको जबर्दस्ती हम बनाए हैं। हम राँची जेल में थे और ये मिलने आए थे। दूसरे के लिए आए थे कि इनको एमपी बना दीजिए कॉन्ग्रेस पार्टी से। हम कहे तुम ही बन जाओ। माननीय सोनिया गाँधी जी को वहीं से हमने टेलीफोन किया। कॉन्ग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं को फोन किया। अहमद भाई (अहमद पटेल) को फोन किया कि इनको डिक्लियर करिए, हम इनको बनाते हैं। वही राज्यसभा के एमपी के रूप में ये अभी भी कंटीन्यू कर रहे हैं।” नीचे वीडियो में आप 13 मिनट से यह बात सुन सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि अखिलेश प्रसाद सिंह फिलहाल बिहार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। लालू यादव जब मंच से कॉन्ग्रेसियों को राज्य के उनके सबसे बड़े नेता की ‘हैसियत’ बता रहे थे, तब ताली भी बज रही थी। लालू जिंदाबाद के नारे भी लग रहे थे। वैसे लालू के इस बयान के बाद से बीजेपी हमलावर है। कहा कि जेल से कॉल कर उन्होंने नियम तोड़े हैं और सुप्रीम कोर्ट को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
उत्तराखंड में अब मस्जिद, दरगाह, मदरसों को भी अपनी आय और संपत्तियों की जानकारी देनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली बीजेपी शासित राज्य में वक्फ बोर्ड भी अब सूचना के अधिकार कानून (RTI) के दायरे में आ गया है। यह फैसला वक्फ बोर्ड के स्वामित्व वाली संपत्तियों और उनसे संबंधित फंडिंग के बारे में कम जानकारी होने की वजह से किया गया है।
दरअसल जुलाई 2022 में वकील दानिश सिद्दीकी ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से आरटीआई के तहत कलियर दरगाह के बारे में सूचना माँगी थी। उन्हें यह कहकर सूचना देने से मना कर दिया गया कि पिरान कलियर में कोई लोक सूचना प्राधिकारी नहीं है। जब उन्हें प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी से भी सूचना नहीं मिली तो वे राज्य सूचना आयोग पहुँच गए। सिद्दीकी की अपील पर राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ की। उनसे वक्फ अधिनियम और वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर साफ और सही जानकारी देने को कहा गया।
इसके बाद यह बात सामने आई कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अधीन होने के बावजूद कलियर शरीफ दरगाह सहित अन्य वक्फ संपत्तियों को सूचना के अधिकार से बाहर रखा गया था। केवल बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ही वक्फ संपत्ति के दस्तावेजों आदि की जाँच-परख कर या करवा सकते हैं। इसके बाद सूचना आयुक्त ने इस मामले में पूर्व और मौजूदा मुख्य कार्यपालक अधिकारी से भी जवाब-तलब किया। इसके तहत पिरान कलियर दरगाह के प्रबंधन को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाने के आदेश दिए गए। साथ ही यहाँ लोक सूचना अधिकारी को भी तैनात करने को कहा गया।
इस केस का निपटारा करते हुए राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने अन्य सभी वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियों को भी आरटीआई एक्ट के दायरे में लाने का आदेश दिया। छह महीने के अंदर आरटीआई एक्ट की धारा-4 के तहत मैनुअल बनाने का निर्देश दिया। आयोग के कड़े रवैये के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने वक्फ संपत्तियों को आरटीआइ एक्ट में दायरे में लाने के आदेश दिया है। राज्य में लगभग 2200 वक्फ संपत्तियाँ वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड हैं।
इस फैसले को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद के मौलाना काब रशीदी का कहना है कि धर्म के आधार पर कानून में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। अगर मस्जिद, दरगाह और मदरसों को इसके तहत लाया गया है तो फिर गुरुकुल और मंदिरों समेत सभी धर्म के धार्मिक स्थलों को भी इस कानून के तहत लाना चाहिए। केवल किसी एक धर्म के लिए कानून लाया जाना गलत है और यह संविधान के खिलाफ है।