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रामलीला मैदान में नहीं होगी मुस्लिम महापंचायत, हाई कोर्ट का इजाजत देने से इनकार: माना पोस्टर ‘सांप्रदायिक’, पुरानी दिल्ली में बढ़ सकता तनाव

दिल्ली के रामलीला मैदान में 29 अक्टूबर 2023 को ‘ऑल इंडिया मुस्लिम महापंचायत’ नहीं होगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने आयोजन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। माना है कि आयोजन के जो पोस्टर हैं, उसे देखकर यह ‘सांप्रदायिक’ लगता है। साथ ही इससे पुरानी दिल्ली में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस और दिल्ली नगर निगम ने भी इसकी इजाजत देने से इनकार किया था। इसके खिलाफ ‘मिशन सेव कॉन्स्टीट्यूशन’ नाम की संस्था ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस संस्था का राष्ट्रीय संयोजक वकील महमूद प्राचा है। इस संस्था का दावा है कि वह जनता खासकर दलितों के बीच संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए काम करती है।

लेकिन प्राचा की पहचान उसके हिंदू विरोधी बयानों से है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदुवादी संगठनों के खिलाफ जहर उगलता रहता है। कुछ महीने पहले ही उसने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मिलने वालों को गद्दार बताया था।

हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि दिल्ली पुलिस ने ‘मनमाने तरीके से कार्यक्रम को सांप्रदायिक’ बताते हुए अनुमति रद्द कर ही। लेकिन 25 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस के फैसले को बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के पोस्टर को देखकर दिल्ली पुलिस के फैसले को मनमाना नहीं माना जा सकता।

हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की आपत्तियों को नजरअंदाज कर कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि श्राद्ध के अंत से लेकर दिवाली तक का समय हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण होता है और यह पोस्टर दिखाते हैं कि इनसे मजहबी तनाव हो सकता है।

हालाँकि, हाई कोर्ट ने कहा है कि त्योहारों के बाद वह फिर से एक नई याचिका पर सुनवाई कर सकती है। इसके लिए आयोजकों को कार्यक्रम में बोलने वाले लोगों के विषय में बताना होगा। इसके पश्चात ही अनुमति देने पर विचार किया जाएगा।

गोवा में ध्वस्त किए गए थे 1000+ मंदिर, पुर्तगालियों के विध्वंस पर पुरातत्व विभाग ने सौंपी रिपोर्ट: कहा- फिर से सारे बनाना संभव नहीं, एक स्मारक बना दे सरकार

पुर्तगाली शासन के दौरान गोवा में 1000 से अधिक मंदिर ध्वस्त किए गए थे। पुरातत्व विभाग के एक्सपर्ट पैनल ने इन मंदिरों के बारे में जानकारी इकट्ठा की है। यह जानकारी राज्य के पुरालेख एवं पुरातत्व मंत्री सुभाष पाल देसाई ने दी है। उन्होंने बताया है कि पैनल ने ध्वस्त किए गए इन मंदिरों की जगह एक स्मारक बनाने की सिफारिश सरकार से की है। उनका मानना है कि इन सारे मंदिरों को फिर से बनाना संभव नहीं है।

पुर्तगाली शासन के दौरान नष्ट किए गए मंदिरों की पहचान और पुनर्निर्माण के लिए संभावित स्थलों की पहचान के लिए आवेदनों और दावों का आकलन करने के लिए इसी साल जनवरी में राज्य सरकार समिति बनाई गई थी। गोवा सरकार ने इसके लिए 20 करोड़ रुपए का बजट रखा था। इस बजट का प्रावधान गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही प्रमोद सावंत (Pramod Sawant) ने नष्ट किए गए हिंदू मंदिरों और विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण के लिए किया था।

गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने 6 जून 2023 में कहा था कि पुर्तगालियों ने अपने शासनकाल के दौरान राज्य में कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था। पुर्तगालियों ने 1510 से 1961 तक गोवा पर शासन किया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरातत्व विभाग के एक्सपर्ट पैनल ने 10 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। इससे पता चला है कि अधिकतर मंदिर गोवा के तिसवाड़ी, बारदेज और सैलसेट तालुका में ध्वस्त किए गए थे। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “समिति का काम इन साइटों की पहचान करना है। समिति को अब तक 19 आवेदन मिले हैं। कई मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था। समिति ने पाया कि इतने सारे मंदिरों का पुनर्निर्माण करना संभव या व्यावहारिक नहीं है। भूमि अधिग्रहण भी एक चुनौती होगी। इसलिए पैनल ने सिफारिश की है कि सरकार एक स्मारक मंदिर का निर्माण करे।”

गोवा के पुरातत्व विभाग की गठित इस समिति ने अन्य स्थलों पर भी आगे की खोज और खुदाई का सुझाव दिया है। दिवेर द्वीप पर सप्तकोटेश्वर मंदिर के पुनर्निर्माण की सिफारिश की है। यह मंदिर कदंब राजवंश के दौरान द्वीप पर बनाया गया था और 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने इसे ध्वस्त कर दिया था।

अधिकारी ने आगे बताया, “दिवेर द्वीप में भूमि पहले से ही सरकार के अधीन है। यह एक संरक्षित स्थल है। इसलिए समिति को वहाँ मंदिर का पुनर्निर्माण करने की संभावना दिखती है। अन्य स्थलों पर, जहाँ यह पाया गया कि मंदिर की नींव या स्तंभ के अवशेष हैं, पैनल ने ऐसे स्थलों की सुरक्षा करने और आगे की जाँच करने की सिफारिश की है।”

उन्होंने आगे कहा, “राज्य के अन्य हिस्से जैसे पोंडा और क्वेपेम उस वक्त मराठा शासन के अधीन थे और कई देवताओं और मूर्तियों को तिसवाड़ी से बिचोलिम तालुका और सैलसेट से पोंडा स्थानांतरित कर दिया गया था।” अधिकारी ने बताया, “समिति (तोड़े गए मंदिरों की) किसी निश्चित संख्या तक नहीं पहुँची है। यह (एक हजार) के करीब है।”

जैसे वीडियो गेम में हिट करते हैं टारगेट, वैसे ही अमेरिका में आम लोगों को किया टारगेट: 3 जगहों पर फायरिंग, 22 की मौत

वीडियो गेम में जिस तरह से बच्चे टारगेट को हिट करते हैं, ठीक उसी अंदाज में अमेरिका में एक व्यक्ति ने तीन जगहों पर फायरिंग की है। इसमें 22 लोगों के मरने की खबर है। करीब 50 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

फायरिंग की इन घटनाओं को मेन राज्य के ल्यूइस्टन में 25 अक्टूबर 2023 की रात अंजाम दिया गया। स्पेयरटाइम रिक्रिएशन, स्कीमेंजीस बार एंड ग्रिल रेस्तरां और एक वॉलमार्ट सेंटर में फायरिंग की गई। ल्यूइस्टन शहर की आबादी मात्र 37,000 है। पुलिस ने फायरिंग की घटना के बाद लोगों से घरों में ही रहने की अपील की है। वहीं शहर के मेयर ने बताया है कि इस तरह की आपात स्थितियों से निपटने में वे सक्षम नहीं है, लेकिन जो भी संभव है वह किया जा रहा है।

फायरिंग करने वाले की पहचान 40 साल के रॉबर्ट कार्ड के तौर पर बताई गई है। उसकी तलाश की जा रही है। रॉबर्ट की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। घटना की सीसीटीवी फुटेज पुलिस ने जारी की है। यह गोलीबारी वर्ष 2019 के बाद सबसे बड़ी घटना है।

अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, रॉबर्ट अपनी सफेद रंग की सुबारू आउटबैक गाड़ी में ल्यूइस्टन के अलग-अलग जगहों पर पहुँचा और लोगों पर AR-15 असाल्ट राइफल से गोलियाँ बरसाने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह नशे में लग रहा था।

रॉबर्ट के बारे में कई जानकारियाँ सामने आई हैं। उसका आपराधिक इतिहास भी रहा है। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि उसका दो बार तलाक हो चुका है और वह वर्तमान में अकेला रहता है। उसे ‘चाइल्ड पोर्न’ रखने के लिए भी गिरफ्तार किया जा चुका है। वह घरेलू हिंसा के मामलों में भी जेल जा चुका है। दो शादियों से उसके तीन बच्चे हैं।

अमेरिका में सार्वजनिक जगहों पर गोलीबारी की यह कोई नई घटना नहीं है। अमेरिका के भीतर ऐसी घटनाओं का रिकॉर्ड रखने वाली संस्था ‘गन वायलेंस आर्काइव’ के अनुसार, अमेरिका में वर्ष 2023 में 565 मास शूटिंग (आम जनता पर गोलीबारी) की घटनाएँ हो चुकी हैं।

गोलीबारी की ताजा घटना के बाद ल्यूइस्टन शहर के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दे दिया गया है। अन्य प्रतिष्ठान मालिकों से भी यह अपील की गई है कि वह बंद रखें। पुलिस ने कहा है कि इससे उन्हें जाँच में आसानी होगी।

गोलीबारी की इस घटना पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन ने मेन प्रांत के गवर्नर जेनेट मिल्स और अन्य पदाधिकारियों से बात की है और सभी प्रकार की सहायता का भरोसा दिया है।

अपने रक्त से अयोध्या की सड़क पर लिखा सीताराम, खोपड़ी में मारी 7 गोली… याद रखिएगा रामभक्तों के बलिदान से ही संभव हुआ है 22 जनवरी 2024

जय सियाराम! आज (25 अक्टूबर 2023) का दिन बहुत भावनाओं से भरा हुआ है। अभी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मुझसे मेरे निवास स्थान पर मिलने आए थे। उन्होंने मुझे श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने के लिए निमंत्रित किया है। मैं खुद को बहुत धन्य महसूस कर रहा हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि अपने जीवनकाल में, मैं इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनूँगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर राष्ट्र को उस क्षण के बारे में जानकारी दी, जिसकी प्रतीक्षा वह करीब 500 साल से कर रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

आज हम रामजन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर को आकार लेते देख रहे हैं, प्राण-प्रतिष्ठा का दिनांक सुनिश्चित हो गया है। लेकिन यह यात्रा उतनी भी सहज नहीं रही है जितनी आज दिखती है। यह संघर्ष 1528 से ही शुरू हो गया था जब इस्लामी आक्रांता बाबर के सेनापति मीर बाकी ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान पर ​मस्जिद का निर्माण करवाया। 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि पूरी जमीन रामलला की। मंदिर वहीं बनेगा।

लेकिन इस मोड़ तक पहुँचने के क्रम में न जाने कितने रामभक्तों ने खुद को बलिदान कर लिया। कितनी बार अयोध्या की गलियों के रामभक्तों के रक्त से लाल कर दिया गया। ऐसी ही एक तारीख 2 नवंबर 1990 की है।

2 नवंबर 1990 को तत्कालीन आईजी एसएमपी सिन्हा ने अपने मातहतों से कहा कि लखनऊ से साफ निर्देश है कि भीड़ किसी भी कीमत पर सड़कों पर नहीं बैठेगी। आइए जानते हैं कि अयोध्या में 1990 की 2 नवंबर को क्या हुआ था?

सुबह के नौ बजे थे। कार्तिक पूर्णिमा पर सरयू में स्नान कर साधु और रामभक्त कारसेवा के लिए रामजन्मभूमि की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने घेरा बनाकर रोक दिया। वे जहाँ थे, वहीं सत्याग्रह पर बैठ गए। रामधुनी में रम गए।

फिर आईजी ने ऑर्डर दिया और सुरक्षा बल एक्शन में आ गए। आँसू गैस के गोले दागे गए। लाठियाँ बरसाई गईं। लेकिन रामधुन की आवाज बुलंद रही। रामभक्त न उत्तेजित हुए, न डरे और न घबराए। अचानक बिना चेतावनी के उन पर फायरिंग शुरू कर दी गई। गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया।

3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया था,

“राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

इस घटना का उस समय की मीडिया रिपोर्टिंग से लिए गए कुछ और विवरण पर गौर करिए:

  • पुलिस और सुरक्षा बल न खुद घायलों को उठा रहे थे और न किसी दूसरे को उनकी मदद करने दे रहे थे।
  • फायरिंग का लिखित आदेश नहीं था। फायरिंग के बाद जिला मजिस्ट्रेट से ऑर्डर पर साइन कराया गया।
  • किसी भी रामभक्त के पैर में गोली नहीं मारी गई। सबके सिर और सीने में गोली लगी।
  • तुलसी चौराहा खून से रंग गया। दिगंबर अखाड़े के बाहर कोठारी बंधुओं को खींचकर गोली मारी गई।
  • राम अचल गुप्ता का अखंड रामधुन बंद नहीं हो रहा था, उन्हें पीछे से गोली मारी गई।
  • रामनंदी दिगंबर अखाड़े में घुसकर साधुओं पर फायरिंग की गई।
  • कोतवाली के सामने वाले मंदिर के पुजारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया।
  • रामबाग के ऊपर से एक साधु आँसू गैस से परेशान लोगों के लिए बाल्टी से पानी फेंक रहे थे। उन्हें गोली मारी गई और वह छत से नीचे आ गिरे।
  • फायरिंग के बाद सड़कों और गलियों में पड़े रामभक्तों के शव बोरियों में भरकर ले जाए गए।

कोठारी बंधु भी इसी दिन बलिदान हुए

2 नवंबर 1990 को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर जो कारसेवक बढ़ रहे थे, उनमें 22 साल के रामकुमार कोठारी और 20 साल के शरद कोठारी भी शामिल थे। सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू की तो दोनों पीछे हटकर एक घर में जा छिपे।

सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर ने शरद को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया और सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई।

कितने रामभक्त बलिदान हुए?

जनसत्ता में अगले दिन छपी खबर में बलिदानियों की संख्या 40 बताई गई थी। साथ ही लिखा गया था कि 60 बुरी तरह जख्मी हैं और घायलों का कोई हिसाब नहीं है। मौके पर रहे एक पत्रकार ने मृतकों की संख्या 45 बताई थी।

दैनिक जागरण ने 100 की मौत की बात कही थी। दैनिक आज ने यह संख्या 400 बताई थी। आधिकारिक तौर पर बाद में मृतकों की संख्या 17 बताई गई। हालाँकि घटना के चश्मदीदों ने कभी भी इस संख्या को सही नहीं माना।

दिलचस्प यह है कि घटना के फौरन बाद प्रशासन ने अपनी ओर से कोई आँकड़े तो नहीं दिए थे, लेकिन मीडिया के आँकड़ों का खंडन भी नहीं किया था। यहाँ तक कि फैजाबाद के तत्कालीन आयुक्त मधुकर गुप्ता तो फायरिंग के घंटों बाद तक यह नहीं बता पाए थे कि कितने राउंड गोली चलाई गई थी। उनके पास मृतकों और जख्मी लोगों का आँकड़ा भी नहीं था।

जनसत्ता ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा था, “निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाकर प्रशासन ने जलियांवाले से भी जघन्य कांड किया है।” यहाँ तक कि 30 अक्टूबर 1990 के दिन भी कारसेवकों पर गोलियाँ बरसाई गई थी। आधिकारिक आँकड़े 30 अक्टूबर को 5 रामभक्तों के बलिदान की पुष्टि करते हैं।

30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या जय सियाराम और हर-हर महादेव के जयकारे से गूँजायमान था। 22 जनवरी 2024 यह सुनिश्चित करेगा कि अयोध्या में बस राम का नाम हो। 2024 के इस 22 जनवरी का महत्व हिंदू होकर ही जाना जा सकता है। कभी विहिप के नेता एससी दीक्षित ने कहा भी था;

“राम हमारे खून में हैं। उनके जन्मस्थान के क्या मायने हैं, यह हिंदू होकर ही जाना जा सकता है।”

(रामभक्तों के बलिदान पर यह आर्टिकल पहली बार 4 अगस्त 2020 को प्रकाशित हुआ था। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की तिथि तय होने के बाद संपादकीय आवश्यकताओं के अनुसार जरूरी बदलाव कर इसे 26 अक्टूबर 2023 को पुनः प्रकाशित किया गया है)

धीमे-धीमे मत बोलिए… गुजरात हाईकोर्ट के जज ने अपनी जूनियर जज से माँगी माफ़ी, सुनवाई के दौरान फ़ाइल छोड़-छाड़ कर निकल गए थे

गुजरात हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों के बीच विवाद को लेकर मामला मामला सामने आया है। बीरेन वैष्णव ने साथी न्यायाधीश मौना भट्ट से माफी माँगी है। बीरेन वैष्णव ने बुधवार (25 अक्टूबर, 2023) को कोर्ट की कार्रवाई चालू होने से पहले सार्वजनिक रूप से अपनी जूनियर मौना भट्ट से माफ़ी माँगी और कहा कि 2 दिन पहले जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था।

दरअसल, सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को गुजरात हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश बीरेन वैष्णव और कनिष्ठ न्यायाधीश मौना भट्ट कर रहे थे। इसी दौरान जब बीरेन वैष्णव फैसला सुनाने वाले थे तभी मौन भट्ट ने धीमे से कुछ कहा।

इस पर वैष्णव भड़क गए। उन्होंने कहा कि तब आप अपना अलग मत रखिए ना, आप पहले भी एक मामले में अपने मतभेद जाहिर कर चुकी हैं इसमें भी करिए। यदि आपको अपनी अलग राय रखनी है तो अलग से आदेश पारित कर दीजिए, धीमे-धीमे मत बोलिए। वहीं मौना भट्ट ने बीच में कहा कि मामला मतभेद जाहिर करने से जुड़ा हुआ नहीं है।

इसके पश्चात वीरेन बैष्णव फाइलें छोड़ कर कोर्ट से बाहर चले गए और आदेश दिया कि अब वह किसी केस की सुनवाई नहीं करेंगे। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों न्यायाधीश इसके पश्चात अलग-अलग मामलों की सुनवाई करने लगे। इस पूरे विवाद की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

बुधवार को दोबारा न्यायाधीश बीरेन वैष्णव और मौना भट्ट वाली बेंच साथ में बैठी। कोर्ट की कार्रवाई शुरू होने से पहले न्यायाधीश बीरेन वैष्णव ने कहा, “इससे पहले कि हम आज शुरू करें, मैं कहना चाहता हूँ कि जो भी सोमवार को हुआ वह नहीं होना चाहिए था। मैं गलत था, मैं उसके लिए माफ़ी माँगता हूँ और ये नहीं होना चाहिए था।”

इस दौरान कोर्ट में कई वकील और अन्य लोग मौजूद थे। न्यायाधीश बीरेन वैष्णव के कोर्ट के भीतर माफ़ी माँगने की यह वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। बीरेन वैष्णव वही जज हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री की डिग्री के मामले को जबरदस्ती उछालने के कर्ण दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया था।

‘धन्य महसूस कर रहा हूँ’: PM मोदी के हाथों होगी रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, 22 जनवरी 2024 को मंदिर में विराजेंगे भगवान

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर के उन्हें राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल होने का न्योता दिया। पीएम मोदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया, “जय सियाराम! आज का दिन बहुत भावनाओं से भरा हुआ है। अभी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मुझसे मेरे निवास स्थान पर मिलने आए थे। उन्होंने मुझे श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने के लिए निमंत्रित किया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी बताया कि वो खुद को बहुत धन्य महसूस कर रहे हैं। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य बताया कि अपने जीवनकाल में वो इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनेंगे। वहीं ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने भी घोषणा की है कि भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा दिनांक 22 जनवरी, 2024 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर कमलों द्वारा की जाएगी। इस तरह मंदिर निर्माण की पक्की तारीख भी आ गई है।

साथ ही वो तस्वीर भी जारी की गई है, जिसमें ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित हैं। फ़िलहाल मंदिर निर्माण का कार्य बहुत तेज़ी से चल रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मंदिर के निर्माण कार्य की समीक्षा करने के लिए पहुँचे थे। मंदिर के उद्घाटन के साथ ही इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा और दुनिया भर के श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचेंगे।

ट्रस्ट के सदस्य राजधानी नई दिल्ली में पहुँचे और पीएम मोदी से मुलाकात कर के उन्हें निमंत्रण-पत्र सौंपा। RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के प्रमुख मोहन भागवत ने पहले ही जानकारी दे दी थी कि 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। इस अवसर पर उत्सव मनाने के लिए देश भर में कई गाँवों में, कई अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रमों के आयोजन का प्रावधान है। सरयू तट पर संग्रहालय की भी स्थापना की जानी है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से मिली मूर्तियों और अवशेषों को दर्शाया जाएगा।

‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के न्यासी स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज पेजावर मठ, उडुपी, कर्नाटक, स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज पुणे (जो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष भी हैं ), मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष आदरणीय नृपेंद्र मिश्रा जी के साथ में चंपत राय प्रधानमंत्री से मिले थे, प्रधानमंत्री को अयोध्या पधारने का औपचारिक निमंत्रण पत्र प्रस्तुत किया गया, प्रधानमंत्री जी ने सहज स्वीकृति प्रदान की। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) ने भी बयान जारी कर के ये जानकारी दी है।

‘माता-पता की सेवा संतानों का नैतिक ही नहीं, बल्कि कानूनी कर्तव्य भी’: बुजुर्ग की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- श्रवण कुमार का है ये देश

इलाहबाद हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में भारत को श्रवण कुमार की भूमि बताया है। अदालत ने आशा जताई है कि आजकल के बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करेंगे और उनका ध्यान रखेंगे। अदालत ने यह टिप्पणी 85 वर्षीय छविनाथ की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इस याचिका में छविनाथ ने अपने बच्चों पर दुर्व्यवहार के साथ गैर-कानूनी ढंग से सम्पत्ति से बेदखल करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने टिप्पणी की है कि भारत सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिकता की धरती रही है। बुजुर्गों की देखभाल को उच्च न्यायालय ने इसी संस्कृति का एक हिस्सा बताया। बताया गया कि बुढ़ापे में बच्चों द्वारा माता-पिता की सेवा को पितृ ऋण के तौर पर माना जाता है।

अदालत ने यह भी बताया कि माता-पिता की सेवा सिर्फ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर ही आधारित नहीं है, बल्कि इसके लिए कानूनी बाध्यता भी है। अदालत ने संसद में पारित सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 का उल्लेख किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में भावनात्मक पहलुओं का भी जिक्र किया।

टिप्पणी में कहा गया कि बुढ़ापे में परिजन न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक चुनौतियों से भी जूझते हैं। साथ ही अदालत ने यह भी माना कि अक्सर ये देखा जाता है कि सम्पत्ति पा जाने के बाद अक्सर संतानें अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं। इसे एक गलत परिपाटी बताते हुए कोर्ट ने इतिहास में माता-पिता के प्रति समर्पण सीखने के लिए श्रवण कुमार की याद दिलाई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रयागराज के 85 वर्षीय छविनाथ ने इलाहबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल करके बताया था कि उनके बेटे उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। साथ ही छविनाथ ने बताया था कि उनकी संतानों ने गैर-कानूनी ढंग से उन्हें सम्पत्ति से बेदखल कर दिया है। छविनाथ ने खुद को वृद्ध और कमजोर बताते हुए सम्पत्ति से गैर-कानूनी बेदखली की शिकायत की थी।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस महेशचंद्र त्रिपाठी और प्रशांत कुमार की बेंच में हुई थी। इस केस की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हंडिया क्षेत्र के SDM को 6 हफ्तों अंदर सभी पक्षों से बात करके मामले का समाधान निकलने का आदेश दिया।

किसानों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, खाद पर बढ़ाई गई सब्सिडी: कैबिनेट ने ₹22300 करोड़ के प्रस्ताव को दी मंजूरी, रबी फसल उपजाने वालों को बड़ी राहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। उनकी अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बुधवार (25 अक्टूबर, 2023) को हुई। इसमें 22,300 करोड़ की सब्सिडी किसानों के लिए जारी की गई। ठंड के मौसम में रबी फसल के लिए विभिन्न प्रकार के खाद पर किसानों को सब्सिडी मिलेगी, जिससे उन्हें बड़ी बचत होगी। इससे खाद के दाम भी स्थित रहेंगे। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर में इस फैसले की जानकारी दी।

केंद्र सरकार एक न्यूट्रिएंट पर आधारित सब्सिडी व्यवस्था भी चलाती है। इसे NBS स्कीम कहा जाता है। ठण्ड के दिनों में किसान कई तरह के फसल उपजाते हैं। भारत की वार्षिक फ़ूड सप्लाई का आधा ठण्ड के दिनों में ही उपजाया जाता है। इनमें गेहूँ, मसूर की दाल, कई अन्य तरह के दाल, मोटे अनाज, सब्जियाँ, तेल बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सब्जियाँ जैसे कि सरसो इत्यादि शामिल हैं। NBS पॉलिसी के तहत वार्षिक आधार पर सरकार सब्सिडी देती है।

इन फसलों को पैदा करने के लिए नुट्रिएंट्स की ज़रूरत होती है। इन नुट्रिएंट्स पर प्रति किलो के हिसाब से सरकार सब्सिडी देती है। इनमें ऐसे फसल शामिल हैं, जिनमें नाइट्रोजन, फॉस्फेट, पोटाश और सल्फर शामिल हैं। कई गाँवों में प्राइवेट कंपनियों की दुकानें हैं, जो इंटरनेट से भी जुड़े हुए हैं। सरकार की सब्सिडी के हिसाब से ये प्राइवेट कंपनियाँ डिस्काउंट पर खाद उपलब्ध कराते हैं। इन कंपनियों को फिर सरकार रुपए देती है, मार्किट में दाम और डिस्काउंट के दाम के बीच जो घाटा होता है वो सरकार भरती है।

2023-24 के लिए मोदी सरकार ने फरवरी में जारी किए गए बजट में 1.75 लाख रुपए का प्रावधान खाद पर सब्सिडी के लिए किया है। लेकिन, अगर वैश्विक स्तर पर क्रॉप नुट्रिएंट्स के दाम बढ़ते हैं तो ये बजट बढ़ाया भी जा सकता है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दर घटने-बढ़ने की स्थिति में किसानों पर कोई भार नहीं आने दिया जाएगा। नए दर के हिसाब से नाइट्रोजन पर 47.02 रुपए, फॉस्फोरस पर 20.82 रुपए, पोटाश पर 2.38 रुपए और सल्फेट पर 1.89 रुपए प्रति किलो के हिसाब से सब्सिडी दी जाती है।

जानकारी के लिए बता दें कि 2022-23 में भारत में कुल 3.254 लाख टन खाद खर्च हुए थे। वहीं इसके पहले वाले वर्ष में 2.937 करोड़ टन खाद खर्च हुए थे।

देवी जागरण के मंच पर चढ़कर मूर्ति पर फेंका काला कपड़ा; लगाए पाकिस्तान जिंदाबाद और हिंदुस्तान मुर्दाबाद के नारे… बस्ती में 2 मुस्लिम लड़कियों सहित कुल 9 पर FIR

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में देवी जागरण कार्यक्रम के दौरान कुछ मुस्लिमों ने हंगामा कर दिया। दरअसल, 2 मुस्लिम लड़कियों ने मंच पर भगवान का भजन गा रहे गायक पर काले कपड़े फेंक दिए। गायक से माइक छीन कर ‘इस्लाम जिंदाबाद’ तथा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। इस घटना पर हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। घटना सोमवार (23 अक्टूबर 2023) की है।

मामला बस्ती जिले के परशुरामपुर थाना क्षेत्र का है। यहाँ चौरी क्षेत्र के ग्राम प्रधान आशीष ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि 23 अक्टूबर 2023 (सोमवार) को उनके गाँव चौरी में माता रानी का जागरण चल रहा था। वहाँ रात लगभग 11 बजे के करीब मंच पर 2 मुस्लिम लड़कियाँ चढ़ गईं। इनमें से एक लड़की के नाबालिग होने की भी आशंका जताई जा रही है। इन दोनों ने काले रंग का कपड़ा माता की मूर्ति पर फेंका और इस्लाम के साथ पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।

शिकायत में आगे बताया गया है कि दोनों लड़कियों ने ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए। इसी हंगामे के बीच अरमान अली, अरबाज़, मिराज, सुग्गन अली, शहाबुद्दीन, मोहम्मद शमी और मोहम्मद ज़ाकिर भी मंच पर चढ़ गए। ये सभी मिलकर जागरण में मौजूद लोगों को ललकारने लगे। शिकायतकर्ता ने इन आरोपितों साथ कुछ अन्य लोगों की भी संलिप्तता बताते हुए आरोप लगाया है कि वहाँ हिन्दुओं को जान से मारने और दंगा करवाने की भी धमकियाँ दी गईं थी।

इन सभी 9 आरोपितों को देश विरोधी बताते हुए ग्राम प्रधान ने कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के 9 आरोपितों पर IPC की धारा 153-B और 506 के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, पाँच लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पटाखों और चूड़ी-बिंदी के कारोबारी हैं आरोपित

ऑपइंडिया ने इस घटना के बारे में चश्मदीद रहे आशीष द्विवेदी से बात की। आशीष ने हमें बताया कि जिन आरोपितों पर केस दर्ज हुआ है वो दीपावली पर पटाखे आदि के साथ चूड़ी-बिंदी बेचने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जब लड़कियों ने जागरण में कपड़े फेंकने की हरकत की तब विरोधस्वरूप हजारों हिन्दू जमा हो गए थे और पुलिस से ही कार्रवाई की माँग की।

अब दानिश कनेरिया ने प्रशांत भूषण की उड़ाई गिल्ली, कंगना रनौत को ट्रोल कर रहे थे वामपंथी वकील: अरफा को भी दिखाया था आइना

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने राहुल गाँधी समर्थक एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण को जबरदस्त तरीके से ट्रोल किया है। प्रशांत भूषण को यह जवाब बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को लेकर किए गए उनके ट्वीट के कारण मिला है।

दरअसल, अभिनेत्री कंगना रनौत विजयादशमी के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला में शामिल हुई थीं। इस दौरान उन्होंने रावण दहन के कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। उन्होंने रावण पर तीर चलाकर दहन प्रक्रिया की सांकेतिक शुरुआत की।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। झूठ फैलाने के लिए मशहूर कॉन्ग्रेस समर्थक प्रशांत भूषण ने कंगना का यही वीडियो एक्स (पहले ट्विटर) पर डालते हुए उन्हें ‘झाँसे की रानी’ बताया। प्रशांत भूषण का इशारा कंगना की फिल्म मणिकर्णिका की तरफ था। उन्होंने इस फिल्म में ‘झाँसी की रानी’ का किरदार निभाया था।

प्रशांत भूषण के इस ट्वीट पर लोगों ने उन्हें काफी ट्रोल किया। उनकी कुछ वर्षों पूर्व हुई पिटाई की बात भी याद दिलाई। इसके पश्चात पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू और पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने भी एक्स पर उन्हें लताड़ा।

दानिश कनेरिया ने लिखा, “किसी का मजाक बनाना बहुत आसान है। कम-से-कम कंगना ने अपनी रील लाइफ में अपने देश के लिए कुछ अच्छा किया है, आप तो असल जिन्दगी में कुछ अच्छा नहीं कर रहे।” कनेरिया ने कंगना की फिल्म मणिकर्णिका की प्रशंसा की और कहा कि इसे सभी को एक बार जरूर देखना चाहिए।

लोगों ने कनेरिया के हाथों हुई प्रशांत भूषण की इस डिजिटल कुटाई की काफी तारीफ की। एक प्रशंसक ने उन्हें भारत में आकर चुनाव लड़ने का ऑफर दे दिया। एक यूजर ने कहा कि ‘आप इन लोगों की इसी तरह से बैंड बजाते रहिए’।

इससे पहले दानिश कनेरिया ने इस्लामी पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को ट्विटर पर करारा जवाब दिया था। आरफा ने भारतीय फैन्स की पाकिस्तान का समर्थन ना करने के लिए आलोचना की थी। इसके जवाब में कनेरिया ने उन्हें पाकिस्तान आने का ऑफर दिया था।

इसके पश्चात आरफा ने जब दानिश कनेरिया से बहस करने का प्रयास किया तो उन्होंने आरफा से पूछ लिया कि वह एक ऐसा ट्वीट दिखा दें जिसमें उन्होंने भारत या उसकी संस्कृति की प्रशंसा की हो। उन्होंने आरफा का एक पुराना ट्वीट भी सामने रखा था जिसमें वह भारत माता की जय के नारे को धार्मिक बता रही हैं।

आरफा के बाद अब कनेरिया ने प्रशांत भूषण को आड़े हाथों लिया है। प्रशांत भूषण ने इसका अभी कोई जवाब नहीं दिया है।