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‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठमलट्ठा’: कॉन्ग्रेस-सपा में अभी से शुरू हो गया पोस्टर वार, राहुल गाँधी और अखिलेश यादव में कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के जवाब में बना I.N.D.I. गठबंधन लोकसभा चुनाव से पहले मिलकर जोर-आजमाइश कर कर रहा था, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी को धकिया दिया। कॉन्ग्रेस ने सीधे कह दिया कि यहाँ तुम्हारी जरूरत नहीं है, जब यूपी में होगी तो देख लेंगे।

गुस्साए अखिलेश यादव खूब तमतमाए और बोले- अगर पहले पता होता कि ये गठबंधन सिर्फ पीएम मोदी को लोकसभा चुनाव में रोकने के लिए बना है तो हम मध्य प्रदेश में कदम भी नहीं रखते। अब तो हम लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने एमपी में 6 सीटें देने पर हामी भरी थी, लेकिन दी एक भी नहीं। ऐसे में वो जितनी सीटों पर हो सकेगा, वो चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद करीब 3 दर्जन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतार दिए।

ये तो बात हुई मध्य प्रदेश की, लेकिन मध्य प्रदेश की लड़ाई उत्तर प्रदेश में दिखनी शुरू हो गई। कमलनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के ‘अरे छोड़ो यार अखिलेश-वखिलेश’ कहा था, लेकिन उससे पहले ही उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश यादव को उनकी हैसियत दिखानी शुरू कर दी थी।

उन्होंने कह दिया कि समाजवादी पार्टी का मध्य प्रदेश में कोई जनाधार ही नहीं है, तो काहे का गठबंधन? ये बात सपाइयों को बुरी लग गई। बुरी लगी तो लगी, सपाइयों ने सीधे लखनऊ में ही पोस्टर लगा दिया कि 2024 में मोदी तो छोड़ो, राहुल गाँधी क्या चीज हैं। और काहे का गठबंधन? अखिलेश भईया बनेंगे प्रधानमंत्री…

पोस्टर साभार: X_journalistspsc

ये पोस्टर अभी लगे ही थे कि राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट की शुरुआत हो ही रही थी कि कॉन्ग्रेस ने नहले पर दहला मार दिया। कॉन्ग्रेस की ओर से और करारे और भयंकर पोस्टर लगाए गए। कॉन्ग्रेस ने तो 2024 में राहुल गाँधी के लिए प्रधानमंत्री पद का दावा तो ठोका ही, 2027 में यूपी के मुख्यमंत्री पद पर भी दावा ठोक दिया।

नाम भी किसका लिया, अजय राय का, जो पिछले कई चुनाव खुद हार चुके हैं। अजय राय लोकसभा का चुनाव भी हारे कई बार और विधानसभा का तो खैर कहना ही क्या… बाकी मुख्यमंत्री बनना है, किसी का मन है तो दूसरा कैसे रोके। यही बात राहुल गाँधी पर भी लागू होती है। वो खुद अपनी अमेठी की लोकसभा सीट हार गए। वो तो भला हो वायनाड की जनता का, जिसने राहुल गाँधी को लोकसभा भेज दिया।

पोस्टर साभार: X_journalistspsc

अरे, वायनाड का जिक्र आया तो ये भी बता दें कि राहुल गाँधी को वायनाड से शायद कोई लगाव नहीं रहा, क्योंकि वायनाड की जनता को कई महीनों तक बिना एमपी के ही रहना पड़ा। कारण तो सब जानते हैं कि राहुल गाँधी सजायाफ्ता हो गए थे। खैर, वो मामला दूसरा है।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश से दो अन्य नेताओं के प्रधानमंत्री बनने के दावों की। अब देखिए, उत्तर प्रदेश से ही नरेंद्र मोदी सांसद हैं। उनकी पार्टी के पास अब 64 सांसद (तीनों सीटों पर उप चुनाव हुए, जो सपा के कब्जे में थी, उसमें से एक पर सपा जीत पाई, बाकी दो सीटों को भाजपा ने जीत लिया। कन्नौज-सपा जीती, रामपुर और आजमगढ़ भाजपा)।

बात उत्तर प्रदेश की हो रही है तो आँकड़े भी बता ही देते हैं

इस समय उत्तर प्रदेश की कथित तौर पर सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी (भाजपा को छोड़कर) समाजवादी पार्टी है। अखिलेश यादव इसी पार्टी के मुखिया हैं। उनकी पार्टी के पास विधानसभा में 109 सीटें हैं। इससे पहले साल 2017 के चुनाव में पार्टी के विधायकों की संख्या 47 ही थी, जबकि 2012 में इनकी सरकार थी।

खैर, अभी लोकसभा में समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें बची हैं। क्योंकि पार्टी उप-चुनाव में दो पारिवारिक सीटें गँवा चुकी है। खुद अखिलेश यादव ने जो आजमगढ़ की सीट खाली की थी, वो भी समाजवादी पार्टी नहीं बचा पाई। आजम खान की रामपुर लोकसभा सीट भी भाजपा ने जीत ली। लोकसभा छोड़िए, विधानसभा सीट भी सपा नहीं बचा पाई थी। लेकिन अखिलेश भैया को बनना प्रधानमंत्री है और 2027 में फिर से विधायकी का चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनना है?

खैर, क्या सोच रहे हैं अखिलेश और अखिलेश के करीबी, ये वही जानें… लेकिन लोकसभा में 3 सांसदों वाली पार्टी के पास 3 ही सांसद राज्यसभा में भी हैं। जया बच्चन उनमें से हैं, तो प्रोफेसर राम गोपाल साहब के लिए एक सीट मानो हमेशा रिजर्व ही रहती है। बाकी तीन लोकसभा सांसदों में उनकी पत्नी डिंपल मैनपुरी की अपनी घरेलू सीट से उप-चुनाव जीतकर लोकसभा पहुँची हैं तो दो सीटें मुस्लिम बाहुल्य वाली मुरादाबाद और संभल उनके पास बची हैं। संभव वाले बर्क साहब किसी को खाक कुछ नहीं समझते, वो शरिया के आगे अखिलेश की क्या ही सुनेंगे। तो भईया, 3 लोकसभा सांसद लेकर प्रधानमंत्री पद का सपना तो देख ही सकते हैं।

अब बात कॉन्ग्रेस की कर लेते हैं। वैसे कॉन्ग्रेस की बात करने के लिए बचा ही क्या है? कॉन्ग्रेस के पास उत्तर प्रदेश से कोई राज्यसभा सांसद नहीं है। लोकसभा सांसद सिर्फ सोनिया गाँधी ही हैं। वह भी साल 2024 में चुनाव लड़ेंगी भी या नहीं, ये अभी तय नहीं है। बाकी प्रधानमंत्री पद के दावेदार राहुल भईया की बात तो निराली है ही। अपनी ही लोकसभा सीट अमेठी को वो गँवा चुके हैं। 2024 में अमेठी से वो खड़े भी होंगे या नहीं, ये भी किसी को पता नहीं है।

अगर बात विधानसभा की करें तो अखिलेश की पार्टी के कुल 2 ही विधायक 2022 में चुने गए थे। कितने अब भी पार्टी का झंडा थामे हुए हैं, ये बात मैं पक्के से नहीं कह सकता। भाई, इंसान हूँ, सब कुछ याद कैसे रखूँगा? बाकी रही बात अखिलेश यादव और राहुल गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की तो दोनों ही कोशिश तो कर रहे हैं। ये अलग बात है कि न दोनों के पास ही ना सूत है और न ही कपास है, लेकिन लट्ठम-लट्ठा भयंकर मचाए हुए हैं।

कहाँ तो दोनों मिलकर चुनाव लड़ने वाले थे मोदी को हराने के लिए, कहाँ अब दोनों आपस में ही लड़ रहे हैं। वह भी सिर्फ उम्मीदवारी पाने के लिए। दोनों ही पार्टियों का उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में सिर्फ 4 सीटों पर कब्जा है। ये गिनती उन्हें प्रधानमंत्री कैसे बनाएगी, अभी यही नहीं समझ आ रहा। बाकी राहुल गाँधी अगले लोकसभा चुनाव में कहाँ से चुनाव लड़ेंगे ये भी बड़ा सवाल है।

‘मोदी सरकार और सीएम योगी की वजह से हिंदुओं का सपना पूरा हुआ’: फिल्म तेजस की रिलीज से पहले कंगना पहुँचीं अयोध्या, रामलला का दर्शन किया

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangna Ranaut) गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को अयोध्या पहुँचीं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने रामलला के दर्शन किए। इस दौरान कंगना रनौत ने मंदिर बनाने में लगे श्रमिकों को भगवान विश्वकर्मा का अवतार बताया। इसके साथ ही उन्होंने ‘जय श्रीराम’ का उदघोष भी किया।

कंगना रनौत ने मजदूरों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ‘आप सब हमारे लिए हनुमान जी की सेना हैं, जो ये काम परिपूर्ण कर रही है’। इसके साथ ही उन्होंने आने वाली अपनी फिल्म ‘तेजस’ का भी प्रमोशन भी किया। उन्होंने इसे हिंदुओं का सदियों पुराना संघर्ष बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी इसे साकार होते देख पा रही है।

कंगना ने कहा कि आखिरकार रामलला का मंदिर बन गया। उन्होंने कहा, “मैंने अयोध्या पर एक स्क्रिप्ट लिखी है। इस पर रिसर्च भी की है। इस सौभाग्यशाली दिन को देखने के लिए कितने हिंदुओं… कारसेवकों ने अपनी जान दे दी। ये हिंदुओं का 600 साल का लंबा संघर्ष है। ये दिन मोदी सरकार और सीएम योगी आदित्यनाथ की वजह से संभव हो पा रहा है।”

कंगना ने अयोध्या को ईसाइयों के वेटिकन के बराबर बताया। कंगना ने कहा, “ये हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा तीर्थस्थल होगा, जैसे ईसाइयों के लिए वेटिकन है। ये दुनिया के सामने देश और सनातन संस्कृति का भव्य प्रतीक बनेगा। हमारी फिल्म ‘तेजस’ में भी राम मंदिर की अहम भूमिका है।”

फिल्म तेजस का प्रमोशन करते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारतीय वायुसेना पर आधारित है और इसके रिलीज होने से पहले वह आशीर्वाद लेने के लिए यहाँ आई हैं। कंगना ने इस विजिट की फोटो अपने इंस्टा अकाउंट पर शेयर पर साझा किया है। साथ ही भगवान का गुणगान किया है।

उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, “आओ मेरे राम। वाह! मैं श्री हरि विष्णु की कृपापात्र हूँ, उनकी भक्त हूँ और आज मुझपे उनकी इतनी कृपा हुई कि मुझे श्री हरि विष्णु अवतार परम पूजनीय, महान धनुर्धार, तेजस्वी योद्धा, तपस्वी राजा, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि के दर्शन करने को मिला। मेरी फ़िल्म तेजस में रामजन्मभूमि की विशेष भूमिका है तो ऐसा मन हुआ की रामलला के दर्शन करूँ। धन्य भाग मेरे राम…।”

अयोध्या आने से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में कंगना ने दशहरा के दिन रावण दहन किया था। इसके लिए वामपंथियों ने उन्हें ट्रोल भी किया था। कंगना के अभिनय से सजी फिल्म ‘तेजस’ शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को रिलीज होने जा रही है। ये एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है। इसे सर्वेश मेवाड़ ने लिखा और डयरेक्ट किया है। रोनी स्क्रूवाला इसके निर्माता हैं।

इस फिल्म में कंगना रनौत लीड रोल में हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना की अधिकारी ‘तेजस गिल’ का किरदार अदा किया है। वो खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाली एक सिख महिला अधिकारी हैं, जो आतंकवादियों का खात्मा करती हैं।

सूरत में हिंदू व्यापारी की बच्ची से लव जिहाद: ऑटो चालक मुसीब जमशेद अगवा कर ले गया अजमेर, इंस्टाग्राम पर ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से है ID

गुजरात के सूरत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ‘लव जेहादियों’ के मंसूबों को खोलकर रख दे रहा है। सूरत के वेसू इलाके के एक हिंदू व्यापारी की 15 साल की बेटी को मुसेब जमशेद मनियार नाम का ‘कट्टर मुस्लिम’ लव जेहाद में फाँसने में सफल हो गया। वो महाराष्ट्र के औरंगाबाद का रहने वाला है और वहाँ पर ऑटोरिक्शा चलाता है। गुजरात पुलिस ने जमशेद को गिरफ्तार कर लिया है।

जमशेद ने ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से इंस्टाग्राम पर आईडी बना रखी है। उसने सोशल मीडिया के जरिए 15 साल की नाबालिग हिंदू लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। इसके बाद वह औरंगाबाद से सूरत पहुँचकर एक होटल में रूका और वहाँ उसने लड़की को अपने जन्मदिन मनाने के लिए बुलाया। इसके बाद वह लड़की को लेकर फरार हो गया।

वहाँ से वह लड़की को लेकर मुंबई चला गया। इसके बाद वह राजस्थान के अजमेर चला गया। अजमेर से वह महाराष्ट्र लौटने के दौरान सूरत पुलिस ने दोनों को गुजरात के अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया। ताया जा रहा है कि मुसेब जमशेद मनियार ने लड़की को अपने पास 15 दिन से रखा था।

जानकारी के मुताबिक, लड़की 9वीं कक्षा की छात्रा है। वहीं, आरोपित मुसेब की उम्र 22 साल है। औरंगाबाद से आकर वह सूरत के एक होटल रूका और यहाँ उसने अपना जन्मदिन भी लड़की के साथ मिलकर मनाया। इसके बाद उसका अपहरण कर लिया लड़की के परिजनों ने वेसू थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया है।

नाबालिग के परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस 2 टीमें बनाकर सक्रिय हो गई और आखिरकार आरोपित को पकड़ लिया। छात्रा को बरामद करने के उसे मेडिकल के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि जाँच में रेप की पुष्टि होती है तो आरोपित मुसेब के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) का मामला भी जोड़ा जाएगा।

सबसे बड़ी बात ये है कि मुसेब जमशेद ने हिंदू लड़की को जिस आईडी से अपने जाल में फाँसा, वो ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से बना हुआ था। गुजरात मित्र ने अपनी रिपोर्ट में उसकी प्रोफाइल की पुष्टि की है। इस घटना को लेकर स्थानीय हिंदू संगठनों में गुस्सा देखा जा रहा है।

कतर में भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा, इजरायल के लिए जासूसी का है झूठा आरोप: विदेश मंत्रालय बोला- हम इसे चुनौती देंगे

कतर (Qatar) की एक अदालत ने गुरुवार (26 अक्टूूबर, 2023) को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। इस पर विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे। कतर सरकार ने इन भारतीयों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इन अधिकारियों का साफ कहना है कि इस्लामी सरकार द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह मनगढंत है।

कतर की अदालत के इस फैसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर के इस फैसले से भारत हैरान है और वो पीड़ितों को हरसंभव कानूनी मदद देने के साथ इस फैसले को चुनौती देंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा, “मौत की सजा के फैसले से हम गहरे सदमे में हैं और विस्तृत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।”

मंत्रालय ने आगे कहा गया है, “हम इस मामले को बहुत महत्व देते हैं और इस पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम सभी को कांसुलर और कानूनी मदद देना जारी रखेंगे। हम फैसले को कतर के अधिकारियों के सामने भी उठाएँगे। हम परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के संपर्क में हैं। हम सभी कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।”

गौरतलब है कि कतर में आठ महीने पहले भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2022 से पनडुब्बी कार्यक्रम को लेकर कथित जासूसी के आरोप में ये सभी कतर की जेल में है। हालाँकि, कतर की तरफ से इन लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्हें जेल में भी अकेला रखा गया है।

इन लोगों को कांसुलर पहुँच दी गई है। भारत सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। इन का पहला ट्रायल मार्च में शुरू हुआ था। हिरासत में लिए गए पूर्व अधिकारियों में से एक की बहन मीतू भार्गव ने अपने भाई को वापस लाने के लिए सरकार से मदद माँगी थी।

8 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था, “ये पूर्व नौसेना अधिकारी देश का गौरव हैं और मैं फिर से हमारे माननीय प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूँ कि अब वक्त आ गया है कि उन सभी को बगैर किसी देरी के तुरंत भारत वापस लाया जाए।”

इसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी टैग किया गया था। गौरतलब है कि नौसेना में अहम भारतीय युद्धपोतों की कमान संभाल चुके ये सभी सम्मानित आठ पूर्व अधिकारी कतर निजी फर्म ADGTCS काम करते थे। यह कंपनी कतर के सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों को ट्रेनिंग और उससे जुड़ी सेवाएँ देती है।

कतर में इन पूर्व अधिकारियों की जमानत याचिकाएँ कई बार खारिज कर दी गईं। सजा पाने वालों में नौसेना के पूर्व अधिकारियों में कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश शामिल हैं।

हिरासत में लिए में लिए गए रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी अल दहरा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। उन्होंने भारतीय नौसेना में सर्विस करते हुए कई युद्धपोतों की कमान संभाली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में एक भारतीय पत्रकार और उसकी पत्नी को इस मामले में रिपोर्टिंग करने के कारण कतर छोड़ने का आदेश दिया गया था।

इस देश की प्रधानमंत्री गईं हड़ताल पर, कामकाज किया बंद: लैंगिक समानता की माँग और घरेलू हिंसा के विरोध में आईं महिलाएँ

उत्तर-पश्चिम यूरोप का एक छोटा-सा देश है आइसलैंड। इस देश की जनसंख्या महज 3.80 लाख है। मंगलवार (24 अक्टूबर 2023) को इस देश में कामकाज ठप हो गया। दरअसल, हजारों औरतों के साथ देश की प्रधानमंत्री कैतरीना कोस्तोत्रई (Katrín Jakobsdóttir) भी हड़ताल पर चली गईं।

इस मुल्क की नारी शक्ति का ये विरोध यहाँ मर्दों और औरतों के वेतन में असमानता और लैंगिक हिंसा को लेकर था। कोस्तोत्रई दुनिया में हड़ताल पर जाने वाली किसी देश की पहली प्रधानमंत्री कही जा सकती हैं।

पीएम कोस्तोत्रई ने पहले ही आइसलैंड की मीडिया को बताया था कि उन्होंने ‘क्या आप इसे समानता कहते हैं?’ स्लोगन वाली हड़ताल के तहत काम पर नहीं जाने का प्लान बनाया था। इसके साथ ही मंगलवार को ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन देश की हजारों महिलाओं के साथ पीएम भी इस हड़ताल में शामिल हो गईं।

इसे लेकर पीएम कोस्तोत्रई ने कहा, “मैं इस दिन काम नहीं करूँगी और मुझे उम्मीद है कि सभी महिलाएँ (कैबिनेट में) भी ऐसा ही करेंगी। मैंने कल कैबिनेट की बैठक नहीं करने का फैसला किया है। आइसलैंड की संसद में केवल पुरुष मंत्री सवालों का जवाब देंगे। हम इस तरह से एकजुटता दिखाते हैं।”

हड़ताल के आयोजकों ने अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा है, “24 अक्टूबर को आइसलैंड में आप्रवासी सहित सभी महिलाओं को भुगतान और अवैतनिक (घरेलू कामों सहित) दोनों तरह के काम बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पूरे दिन महिलाएँ समाज में अपने योगदान के अहमियत को दिखाने के लिए हड़ताल करेंगी।”

दरअसल, इस देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को वेतन में असमानता को लेकर रोष है। इस वजह से महिलाओं ने ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन केवल बाहर का ही नहीं, बल्कि घर का काम भी नहीं किया। स्टाफ की कमी के कारण आइसलैंड के स्कूल-अस्पताल, ट्रांसपोर्ट आदि बुरी तरह प्रभावित रहे।

ये तब है, जब यह देश लैंगिक समानता के मामले में बीते 14 सालों से टॉप पर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक, वेतन सहित अन्य कारकों में आइसलैंड के मुकाबले अन्य किसी भी देश ने समानता हासिल नहीं की है। फोरम ने इस देश को 91.2 फीसदी का स्कोर दिया है। इस देश को ‘फैमिनिस्ट हेवन’ के नाम से भी जाना जाता है।

पीएम कोस्तोत्रई ने 19 अक्टूबर 2023 के एक ट्वीट में कहा था, “हमें लैंगिक वेतन के अंतर को कम करने और लैंगिक समानता तक पहुँचने के लिए महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत है। हमें ऐसी परिस्थितियों वाले समाज की जरूरत है, जहाँ बेहतरीन खुशहाली, माता-पिता की छुट्टी, डे-केयर और एक संस्कृति में बदलाव संभव हो।”

गौरतलब है कि इस देश में ये पहली बार नहीं है, जब ‘वीमेन्स डे ऑफ’ मनाया गया। यहाँ ये दिन लगभग 50 साल पहले यानी 1975 में हुई पहली बार हड़ताल के बाद आया है। तब आइसलैंड की 90 फीसदी महिलाओं ने केवेनफ्री यानी वीमेन्स डे ऑफ के हिस्से के तौर पर काम करने से इनकार कर दिया था। इस हड़ताल के कारण आइसलैंड में अहम बदलाव हुए।

आइसलैंड में जो प्रमुख बदलाव हुए, उनमें दुनिया के किसी देश की पहली महिला राष्ट्रपति का चुनाव भी शामिल है। साल 1975 के बाद इस हड़ताल को 1985, 2005, 2010, 2016 और 2018 में दोहराया गया है। 1975 की हड़ताल में भाग लेने वालों में से कुछ ने इस हड़ताल को आयोजित करने में मदद की। उनका मानना है कि मकसद पूरा नहीं हुआ है।

इसे लेकर आइसलैंडिक फेडरेशन फॉर पब्लिक वर्कर्स के हड़ताल आयोजक फ़्रीजा ने कहा, “हम इस बात की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि हमें समानता का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन अभी भी लैंगिक असमानताएँ हैं। कार्रवाई की तत्काल जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की देखभाल जैसी महिलाओँ के नेतृत्व वाले काम को अभी भी कम अहमियत दी जाती है और बहुत कम भुगतान किया जाता है।”

आइसलैंड के सांख्यिकी विभाग ने कहा है कि वहाँ कुछ नौकरियों में औरतें अभी भी अपने पुरुष सहकर्मियों के मुकाबले कम-से-कम 20 फीसदी कम कमाती हैं। वहीं आइसलैंड विश्वविद्यालय की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि यहाँ की 40 फीसदी औरतों को अपने जीवनकाल में लिंग-आधारित और यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

महुआ मोइत्रा की बढ़ी मुश्किलें, लोकसभा की आचार समिति ने 31 अक्टूबर को पेश होने को कहा

लोकसभा की आचार समिति ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) को 31 अक्टूबर 2023 को पेश होने के लिए कहा है। महुआ पर पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर संसद में प्रश्न पूछने के आरोप हैं। इस सम्बन्ध में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत भेजी थी।

लोकसभा की आचार समिति ने मौखिक साक्ष्य के लिए 26 अक्टूबर 2023 को सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई को बुलाया था। निशिकांत दुबे ने देहाद्राई के पत्र के आधार पर ही लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। उन्होंने महुआ को संसद से निलम्बित करने की माँग करते हुए एक जाँच समिति गठित करने की माँग की थी।

महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर अडानी समूह के विरुद्ध संसद में प्रश्न पूछे थे। इतना ही नहीं, महुआ ने अपने संसद पोर्टल का लॉगिन दर्शन हीरानंदानी को दे दिया था। यह मामला तब सामने आया, जब महुआ के पूर्व पार्टनर देहाद्राई ने कु्त्ता हेनरी को लेकर विवाद बढ़ने पर महुआ के खिलाफ सीबीआई को पत्र लिखा था।

महुआ को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का कहना था कि टीएमसी सांसद ने हाल में संसद में 61 प्रश्न पूछे थे, जिनमें से लगभग 50 अडानी समूह से जुड़े हुए हैं। दर्शन हीरानंदानी ने भी एक पत्र लिखकर यह खुलासा किया था कि महुआ ने उनसे लम्बे खर्चे करवाए। वहीं, देहाद्राई का कहना है कि महुआ ने उनका कुत्ता ‘हेनरी’ चोरी कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में संसद की वेबसाइट को ऑपरेट करने वाले नेशनल इन्फोर्मेशन सेंटर (NIC) ने भी अपनी जाँच पूरी कर ली है और उसने दुबई से 100 से अधिक बार लॉगइन पाया है। लॉगइन का समय भी महुआ द्वारा सदन में अडानी के संबंध में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाता है।

दर्शन हीरानंदानी दुबई में बैठकर संसद में पूछे जाने वाले सवाल लिखते थे और उसे महुआ पूछती थीं। आचार समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद विनोद सोनकर ने कहा है कि आज दो लोगों को समिति के सामने बुलाया गया था। अब यह निर्णय लिया गया है कि 31 अक्टूबर 2023 को महुआ मोइत्रा को बुलाया जाए।

समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि वह गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय से भी इस विषय में जानकारी माँगी जाएगी। वहीं, सांसद निशिकांत दूबे और एडवोकेट देहाद्राई ने कहा कि समिति ने उनसे जो भी सवाल किए, उसका उन्होंने जवाब दिया है। इसके साथ ही आगे भी जानकारी साझा करने की बात कही। वहीं, सांसद दूबे ने कहा कि असली सवाल यह है कि महुआ चोर हैं या नहीं।

रोहिंग्या ने 99 हिंदुओं का किया था नरसंहार, 8 महिलाओं ने मुस्लिम बनने की शर्त कबूल कर बचाई थी जान: UN जाँचकर्ता ने माना ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध’

संयुक्त राष्ट्र के एक जाँचकर्ता ने कहा है कि वर्ष 2017 में म्यांमार में हुए 99 हिन्दुओं के नरसंहार को अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जा सकता है। यह नरसंहार रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने किया था। आतंकियों ने हिंदू बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को मारकर जमीन में दबा दिया था।

म्यांमार में मानवाधिकारों की जाँच करने वाले अधिकारी निकोलस कोमजियान से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस विषय में प्रश्न पूछा गया। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर अपराध है और इसे अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जा सकता है।

गौरतलब है कि अगस्त 2017 में रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने अलगाववादी से त्रस्त रखाईन प्रांत के एक गाँव में घुसकर हिन्दुओं का नरसंहार कर दिया था। यह नरसंहार अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) ने किया था। इसका मुखिया कराची में जन्मा अताउल्लाह अबू उमर जुनूनी है।

मारे गए इन हिन्दुओं की लाशें बाद में एक सामूहिक कब्र में पाई गई थीं। इस दौरान रोहिंग्या मुस्लिमों ने कुछ महिलाओं को छोड़ दिया था और उन्हें डरा-धमकाकर इस्लाम में परिवर्तित करा दिया था। बाकी सभी को मारकर इस कब्र में दफना दिया था।

इस मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा था कि म्यांमार में हिन्दुओं का नरसंहार हुआ है। एमनेस्टी ने अपनी पड़ताल के बाद बताया था कि नकाबपोश मुस्लिम आतंकियों ने रोहिंग्या मुस्लिमों के साथ मिलकर सुबह-सुबह गाँव में घुसकर हिन्दू महिलाओं, बच्चों और पुरुषों को घेर लिया था।

इसके बाद उनके घरों में लूटपाट की गई। हिंदुओं के हाथ-पैर बाँध दिए गए। इसके बाद पुरुषों को अलग करके सबसे पहले उनका नरसंहार कर दिया गया। इनमें से आठ हिन्दू महिलाओं और उनके बच्चों को इस शर्त पर छोड़ दिया गया कि वे इस्लाम स्वीकार कर लेंगी।

एमनेस्टी ने बताया कि रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों ने तलवारों से महिलाओं और बच्चों के भी गले काटे। इस मानवाधिकार संस्था ने बताया कि दो गाँवों में कुल 99 हिन्दुओं की हत्या की गई थी। एक गाँव में 53 मारे गए थे। इनकी लाशें मिल गई थीं। वहीं, दूसरे गाँव में 46 लोगों की हत्या की गई थी, लेकिन उनकी लाशें कभी नहीं मिलीं।

रोहिंग्या आतंकियों ने इसके अतिरिक्त भी अन्य कई मौकों पर हिन्दुओं को निशाना बनाया था। रोहिंग्या आतंकी ने रखाईन प्रांत के हिंदुओं पर आरोप लगाया था कि वे म्यांमार की बौद्ध सरकार का समर्थन कर रहे हैं और उनके अलगाववादी विचारधारा के खिलाफ सरकार की सहायता कर रहे हैं।

अब एमनेस्टी समेत अन्य जाँच को मानते हुए संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि म्यांमार में रोहिंग्या आतंकियों की गतिविधियों के कारण ही वहा नकी सेना लगातार कार्रवाई करती आई है।

साँप को हाथों में उठाया, कान से सटाया, मुँह पकड़कर देने लगा साँस… मध्य प्रदेश के कॉन्स्टेबल का देखिए Video, दावा- कीटनाशक से बेहोश था, CPR देकर बचाई जान

मध्य प्रदेश के एक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पुलिसकर्मी को साँप को अपने हाथ में उठाकर कान से सटाते और मुँह पकड़कर साँस देते देखा जा सकता है। पुलिसकर्मी का दावा है कि साँप कीटनाशक वाले पानी से बेहोश हो गया था। उसने सीपीआर देकर उसकी जान बचा दी।

वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी की पहचान अतुल शर्मा के तौर पर बताई जा रही है। वह नर्मदापुरम के हरचंद सेमरी चौकी में बतौर कॉन्स्टेबल तैनात हैं। बताया जाता है कि उन्हें तवा कॉलोनी में एक साँप के मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुँचकर पाया कि साँप बेसुध था। वह चलने फिरने में भी अक्षम था। अतुल शर्मा ने बताया कि साँप के शरीर में गन्दा पानी चला गया था, जिसमें कीटनाशक मिला हुआ था।

अतुल शर्मा लम्बे समय से वन्यजीवन संरक्षक का काम कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि वे 2008 से लेकर अब तक 500 से ज्यादा साँपों का जीवन बचा चुके हैं। लेकिन यह पहला मौका था जब उन्होंने साँप को सीपीआर दी है। वायरल वीडियो में दिखता है कि सीपीआर देने के कुछ समय बाद साँप हरकत करने लगता है। साँप के सही होने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने ‘राधे-राधे’ का उद्घोष भी किया।

बताया गया कि लोगों ने साँप को निकालने के लिए घर में कीटनाशक मिला हुआ पानी भर दिया था जो कि साँप ने पी लिया। अतुल शर्मा ने साँप के पेट से पानी भी निकाला और उसे साफ़ पानी दिया। साँप के सही हालत में आने के बाद उन्होंने उसे जंगल में छोड़ दिया।

हालाँकि, पशु चिकित्सकों का कहना है कि साँप को इस तरीके से सीपीआर देना संभव नहीं है। साँप ने वातावरण के अनुसार अपने आप को ढाल लिया होगा, इसलिए वह वापस सही हालत में आ गया होगा।

अतुल शर्मा ने मीडिया को बताया है कि जिस साँप को उन्होंने सीपीआर दी है, वह धामन प्रजाति का था और इसमें जहर नहीं होता। इसे रैट स्नेक भी कहा जाता है। अतुल साँप की प्रजाति पहचान गए थे इसलिए उन्होंने उसे बिना डरे सीपीआर दिया।

अतुल शर्मा मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के रहने वाले हैं। उन्हें साँप पकड़ने में दक्षता हासिल है, वह यह काम 12वीं कक्षा से करते आ रहे हैं। पुलिस में भर्ती होने के बाद भी वह रेस्क्यू करते हैं।

UP की महिला पुलिस टीम ने गौ-तस्कर इनामुल का किया एनकाउंटर, पैर में लगी गोली: नारी शक्ति का किया गया सम्मान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस-प्रशासन को अपराधियों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। इसके बाद कई अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिए। पकड़ने के क्रम में जिन्होंने पलटवार किया, उन्हें पुलिस ने ढेर भी कर दिया। इस बीच, कुशीनगर में ऐसा पहली बार हुआ, जो अब तक नहीं हुआ था। यहाँ महिला पुलिस की टीम ने एक गौ-तस्कर का एनकाउंटर कर उसे पकड़ लिया। गौ-तस्कर का नाम इनामुल उर्फ बिहारी है। उस पर 25 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित था।

मामला कुशीनगर के रामकोला थाना इलाके का है। बरवापट्टी थाने की महिला SHO सुमन सिंह के नेतृत्व में टीम ने एनकाउंटर को अंजाम दिया। यह एनकाउंटर बीते गुरुवार (19 अक्टूबर 2023) की रात को हुआ, जब पूरा देश नारी शक्ति की पूजा का त्योहार नवरात्रि मना रहा था। अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत मेहदीगंज अमडरिया नगर के पास चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसमें थाना कोतवाली, पडरौना, रामकोला, बरवापट्टी, खड्डा, कप्तानगंज और स्वाट की टीमें संयुक्त रूप से शामिल थीं।

इस दौरान एक व्यक्ति बाइक से आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन उस व्यक्ति ने पुलिस पर ही गोली चला दी। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने मोर्चा संभाल लिया और इनामुल को एनकाउंटर में घायल कर गिरफ्तार कर लिया। जाँच में पता चला कि इनामुल 25 हजार रुपए का ईनामी बदमाश है और उस पर कई मामले दर्ज हैं। वो गौ-तस्करी के मामले में वांछित था। इनामुल के पास से कट्टा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुए हैं।

एडीजी ने किया महिला शक्ति को सम्मानित

इस अभियान में पुरुष पुलिसकर्मियों से भी आगे महिला शक्ति रहीं। इस अभियान की अगुवाई बरवापट्टी की एसएचओ सुमन सिंह कर रही थीं। वहीं, बदमाश का एनकाउंटर करने वाली टीम में एसआई चंदा यादव के अलावा एसआई प्रिंसी पाण्डेय, आरक्षी संगीता यादव और आरक्षी प्रियंका सिंह की अहम भूमिका रही। इस एनकाउंटर को अंजाम देने वाली टीम को मिशन शक्ति के तहत एडीजी ने सम्मानित भी किया।

केवल प्रधानमंत्री को ही नहीं मिला है राम मंदिर का न्योता, आपके घर तक भी पहुँचेगा निमंत्रण का ‘अक्षत’: 5 लाख गाँव में लाइव देख सकेंगे प्राण-प्रतिष्ठा

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब रामजन्मभूमि पर रामलला के अधिकार को खारिज करने वाले तंज किया करते थे कि मंदिर वही बनाएँगे पर तारीख नहीं बताएँगे। अब जब अयोध्या राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की तिथि 22 जनवरी 2024 सामने आ गई है तो उनके पेट में मरोड़ उठ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण क्यों दिया। पर लिबरल सेकुलर जमात का अंग विशेष तो इस खबर से झुलसने वाला है कि प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग के 7 नंबर बंगले (प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास) की परिधि में ही सिमटा नहीं रहेगा। यह देश के 5 लाख गाँव में घर-घर तक पहुँचने वाला है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने ऑपइंडिया को बताया है कि राम मंदिर के अनुष्ठान का कार्यक्रम अयोध्या में 16 जनवरी 2024 से शुरू हो जाएगा। 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा होगी। इस दौरान करीब 5 हजार संत-महात्मा और कला, शिक्षा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले करीब 5 हजार लोग भी उपस्थित होंगे। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अगले दो दिनों तक उत्सव मनाया जाएगा।

अक्षत के रूप में भेजा जाएगा प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण

चौपाल के अनुसार प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण देश के 5 लाख गाँवों तक जाना है। इसके लिए देश के 50 प्रमुख केंद्रों से नवंबर में लोगों को अयोध्या बुलाया गया है। ये लोग अयोध्या से ‘अक्षत’ लेकर इन केंद्रों तक जाएँगे। इन्हीं केंद्रों से प्राण-प्रतिष्ठा के लिए निमंत्रण के रूप में अक्षत 5 लाख गाँवों में वितरित किया जाएगा। 22 जनवरी को इन गाँवों में लोगों को अपने देवस्थल में एकत्र होने को कहा जाएगा। वहाँ वे एक साथ प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके कामेश्वर चौपाल विश्व हिंदू परिषद (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर 1989 को रखी थी। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन किया गया था तो उन्हें भी इसमें जगह दी गई थी।

प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण पाकर धन्य हुआ: पीएम मोदी

25 अक्टूबर 2023 को ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने का निमंत्रण मिला था। प्रधानमंत्री ने इसके बारे में जानकारी देते हुए एक्स ट्विटर पर पोस्ट कर बताया था, “जय सियाराम! आज (25 अक्टूबर) का दिन बहुत भावनाओं से भरा हुआ है। अभी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी मुझसे मेरे निवास स्थान पर मिलने आए थे। उन्होंने मुझे श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या आने के लिए निमंत्रित किया है। मैं खुद को बहुत धन्य महसूस कर रहा हूँ। ये मेरा सौभाग्य है कि अपने जीवनकाल में, मैं इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनूँगा।”

22 जनवरी 2024 को ही प्राण-प्रतिष्ठा क्यों

कामेश्वर चौपाल ने बताया कि हिंदू परंपरा में गृह प्रवेश उत्तम योग में ही होता है। राम मंदिर के लिए हिंदुओं ने काफी लंबा संघर्ष किया। 22 जनवरी को उत्तम योग होने के कारण इसे नवनिर्मित राम मंदिर के गर्भगृह में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए चुना गया है। उल्लेखनीय है कि प्रभु श्रीराम का जन्म अभिजीत योग में हुआ था। अन्य तिथियों के मुकाबले यह योग 22 जनवरी को लंबे समय तक रहेगा। यही कारण है कि प्राण-प्रतिष्ठा के लिए इस तिथि को सबसे उपयुक्त माना गया है।

क्या होता है अभिजीत योग

अभिजीत योग प्रतिदिन आता है। हालाँकि इसकी अवधि अलग-अलग होती है। कभी क्षणिक तो कभी काफी देर तक यह योग बना रहता है। इसे दिन का सर्वोत्तम या अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किसी कार्य को शुरू करने से उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।

भव्य राम मंदिर में कब से कर सकेंगे दर्शन?

ऑपइंडिया को कामेश्वर चौपाल ने बताया है कि 25 जनवरी 2024 से आम लोग भी भव्य राम मंदिर में प्रभु का दर्शन कर पाएँगे। हालाँकि गर्भगृह में कौन सी मूर्ति स्थापित की जाएगी, यह निर्णय अभी नहीं हुआ है। तीन अलग-अलग मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह प्राण-प्रतिष्ठा किनके निर्देशन में होगा और यजमान कौन होंगे, इस बारे में भी अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

देश भर के कार सेवकों को कराया जाएगा विशेष दर्शन

चौपाल ने बताया कि 1984 में राम जन्मभूमि पर मंदिर के लिए आंदोलन का शंखनाद होने के बाद से 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक, देश भर के जिन-जिन लोगों ने इस संघर्ष में भाग लिया है, उनको विशेष तौर पर मंदिर में दर्शन कराया जाएगा। देश के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग तिथि पर कारसेवकों को निमंत्रित कर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उन्हें दर्शन कराएगा। इसी कड़ी में नेपाल और उत्तर बिहार के कारसेवकों को 2 फरवरी तो दक्षिण बिहार और झारखंड के कारसेवकों को 3 फरवरी 2024 को दर्शन करवाया जाएगा।