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साथ खाई-पीई-सोई, शौहर को 14 साल बाद पता चला कि बीवी है बांग्लादेशी: खुद को UP का बताकर की थी निकाह, कनाडा रिटर्न भी निकली

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के एक व्यापारी ने अपनी पत्नी पर बांग्लादेशी होने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कहा कि उसकी पत्नी ने अपनी पहचान छुपाई है। ताबिश एहसान ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि जिस नाजिया से 14 साल पहले उसका निकाह हुआ था, वह बांग्लादेशी निकली।

37 वर्षीय ताबिश बंगाल के आसनसोल से संबंध रखते हैं। ताबिश का निकाह वर्ष 2009 में नाजिया अम्बरीन कुरैशी से हुआ था। नाजिया ने खुद को विवाह से पहले उत्तर प्रदेश का बताया था। दोनों परिवारों की रजामंदी से बाद में ताबिश और नाजिया का निकाह हो गया। निकाह के बाद 2022 तक दोनों के बीच सब कुछ सही सही चला।

ताबिश ने बताया, “मैं नाजिया से एक शादी समारोह के दौरान मिला और बाद में परिवारजनों की सहमति से हमने निकाह कर लिया। यह ‘अरेंज्ड मैरिज’ थी। निकाह के समय नाजिया ने बताया था कि वह उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। उसकी नागरिकता के बारे में निकाह से पहले कोई शक ही नहीं था।”

ताबिश ने यह भी बताया कि उनके दूसरे बच्चे के पैदा होने के बाद दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। नाजिया बच्चे को जन्म देने से कुछ ही समय पूर्व अपनी माँ के घर चली गई और ताबिश से सारे समबन्ध खत्म कर लिए। इसके अलावा वह ताबिश को धमकाने लगी।

नाजिया के परिवार वालों ने ताबिश को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देना शुरू कर दिया। महिला के परिजन कहते कि नाजिया कभी भी उसके पास वापस दुबारा नहीं आएगी। नाजिया के परिवार ने ताबिश पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (दहेज़ प्रताड़ना) के तहत मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।

ताबिश ने इस मुकदमे के पश्चात नाजिया के बारे में जानकारी जुटानी चालू की। ताबिश को नाजिया के एक रिश्तेदार ने बताया कि असल में वह बांग्लादेशी नागरिक है। नाजिया ने बांग्लादेश में भी एक स्कूल शिक्षक के साथ निकाह किया था और झूठे आरोप लगाकर उससे तलाक़ ले लिया था।

नाजिया और उसका परिवार इसके पश्चात अवैध तरीके से भारत आ गए और ताबिश को भारतीय पहचान पाने के लिए उपयोग किया। ताबिश ने बताया कि उसका निकाह बस एक साजिश भर था। ताबिश ने अब कोलकाता के तिलजला थाने में सभी सबूतों के साथ नाजिया और उसके रिश्तेदारों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करवाया है।

नाजिया और उसके परिवारीजनों पर धारा 120बी, 465, 471, 363 और पासपोर्ट अधिनियम तथा विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ताबिश का आरोप है कि पुलिस से नाजिया की शिकायत होने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।

ताबिश ने यह भी बताया है कि नाजिया 2007 से 2009 के बीच कनाडा भी पढ़ने गई थी, जबकि उसके पास इस दौरान वैध कागज भी नहीं थे। उन्होंने कहा कि नाजिया का भारतीय पासपोर्ट पहली बार वर्ष 2020 में बना था तो फिर वह 2007 से 2009 के बीच कनाडा कैसे गई? कनाडा ने उसका वीजा बिना पासपोर्ट के कैसे बना दिया?

नाजिया पर कार्रवाई के लिए पीड़ित ताबिश ने राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार के अलग अलग विभागों को पत्र लिखे हैं। ताबिश ने पासपोर्ट आफिस, पश्चिम बंगाल सरकार, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर कार्रवाई की माँग की है।

पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन वाले जुलूस में 52 लोगों की मौत, 50+ घायल: बलूचिस्तान में मस्जिद के पास बम से उड़ाया, बढ़ सकता है आँकड़ा

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 52 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 50 से अधिक घायल हैं। ये लोग पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के बाद जुलूस में शामिल थे। पुलिस के अनुसार यह आत्मघाती हमले के कारण हुआ। शुक्रवार (29 सितंबर 2023) को बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले में एक मस्जिद के पास बम विस्फोट किया गया।

ईद-ए-मिलादुन नबी की जुलूस में शामिल भीड़ को आत्मघाती बम विस्फोट से निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी मीडिया डाउन की रिपोर्ट के अनुसार मरने वाले 52 लोगों का आँकड़ा बढ़ सकता है। मरने वाले में DSP रैंक का एक पुलिस अधिकारी भी है।

बलूचिस्तान के मस्तुंग जिले के स्थानीय अस्पताल के डॉक्टर ने पाकिस्तानी मीडिया को जानकारी दी है कि दर्जनों लोगों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि 20 से अधिक घायल गंभीर थे, जिन्हें चिकित्सा सहायता के लिए क्वेटा के अस्पताल में रेफर किया गया है। अस्पताल के सीईओ ने कहा, “शवों और घायलों को लाने-ले जाने का सिलसिला अब भी जारी है।”

वहाँ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मुनीर अहमद ने मीडिया को बताया, “हमलावर ने डीएसपी की गाड़ी के पास विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया।” मारे गए डीएसपी का नाम नवाज गिश्कोरी है। इन्हें जुलूस के किनारे रहना था, लेकिन आत्मघाती विस्फोट के शिकार हो गए।

पैंट की जिप खोलकर प्राइवेट पार्ट दिखा रहा था पूर्व कॉन्स्टेबल, पकड़ने को दौड़ी महिला… पीछे से आ रही कार से लगी टक्कर, अस्पताल में तोड़ा दम

गाजियाबाद में मसूरी के पास 9 सितंबर 2023 को एक्सप्रेस-वे पर एक महिला को एक कार ने रौंद दिया था। हालाँकि, उस कार सवार ने महिला को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका था। चार दिन बाद उस महिला की मौत हो गई थी।

इस मामले की जाँच में पता चला है कि ये कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी। महिला एक शोहदे को पकड़ने के लिए हाईवे पर पहुँची थी। इसी दौरान धक्का लगने से वो गिर गई और वह कार की चपेट में आ गई। पुलिस ने इस संबंध में 26 सितंबर 2023 को मामला दर्ज किया था और 28 सितंबर को एक शख्स को गिरफ्तार भी कर लिया है।

ये था पूरा घटनाक्रम

इस घटना में सामने आए तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। घटनास्थल पर दो महिलाएँ थीं, जो नाहल गाँव की रहने वाली थीं। मृतक महिला के साथ मौजूद रही महिला ने बताया कि घटना वाले दिन वह मृतक के साथ हाईवे के किनारे स्थित खेत में घास काट रही थी। तभी गलत दिशा से एक बाइक सवार आया और वहाँ बाइक खड़ी कर दी। इसके बाद बदतमीजी करने लगा।

महिला ने बताया कि उस शख्स ने ट्राउजर से अपना प्राइवेट पार्ट दिखाने लगा और दोनों में से किसी को अपने साथ चलने को कहा। दोनों महिलाओं ने इसका विरोध किया। आरोपित जब नहीं माना तो एक महिला ने उसे दरांती फेंककर मारा भी। तभी दूसरी महिला हाइवे पर आ गई और उसे पकड़ने की कोशिश की।

इनमें से 32 साल उस महिला ने आरोपित को पकड़ भी लिया, लेकिन वह महिला को धक्का देकर फरार हो गया। आरोपित के धक्का देने से महिला सड़क पर गिर गई। इसी बीच पीछे से आ रही कार ने सड़क पर गिरी महिला को रौंद दिया। हालाँकि, कार सवार लोगों ने उस महिला को अस्पताल भी पहुँचाया। यहाँ से उस महिला को जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहाँ 4 दिन बाद उसकी मौत हो गई।

आरोपित पूर्व CRPF कॉन्स्टेबल, 15 दिनों तक नहीं दर्ज हुआ FIR

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने 15 दिनों तक मामला ही दर्ज नहीं किया और जब 26 सितंबर को मामला दर्ज किया, तब जाकर आरोपित की पहचान हुई। इसके दो दिन बाद यानी 28 सितंबर 2023 को उसे गिरफ्तार किया गया।

गाजियाबाद के डीसीपी (ग्रामीण) विवेकचंद्र यादव ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने 26 सितंबर 23 को केस दर्ज कर जाँच शुरू की और महज 2 दिनों के भीतर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इसके लिए सीसीटीवी सर्विलांस कैमरों की मदद ली गई।

डीसीपी यादव ने बताया कि आरोपित का नाम अंकित चौधरी है और वह सीआरपीएफ का पूर्व कॉन्स्टेबल है। उसकी उम्र 34 साल है। पुलिस के मुताबिक, वह उत्तर प्रदेश के मुरादनगर स्थित जलालाबाद गाँव का रहने वाला है। वह साल 2012 से 2020 तक CRPF में था। अब खेती-बाड़ी करता है।

अब बांग्लादेश ने कनाडा को लताड़ा, कहा- अपराधियों को देता है शरण, वहाँ जाकर ऐश की जिंदगी जीते हैं हत्यारे: श्रीलंका भी कर चुका है नंगा

श्रीलंका के बाद अब बांग्लादेश ने कनाडा के दोहरे चरित्र को उजागर किया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने कहा है कि कनाडा हत्यारों का गढ़ है। वह अपराधियों को शरण देता है। उनके लिए सुरक्षा कवच की तरह है। हत्यारे वहाँ जाकर ऐश की जिंदगी रहे हैं।

दरअसल, बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान के हत्यारे नूर चौधरी के प्रत्यपर्ण से कनाडा इनकार करता रहा है। इसका जिक्र करते हुए मोमन ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि हत्यारा नूर चौधरी कनाडा में ऐश की जिंदगी जी रहा है। बांग्लादेश ने कनाडा सरकार से नूर चौधरी को वापस भेजने की माँग की। लेकिन कनाडा जिद पकड़े बैठा है और बात सुनने की जगह कई तरह के बहाने बना रहा है।

अब्दुल मोमन ने कहा कि नूर चौधरी का प्रत्यपर्ण न करने की असली वजह जानने के लिए उन्होंने कनाडाई अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था। साथ ही यह भी जानने की कोशिश की थी कि नूर चौधरी को कनाडा सरकार ने नागरिकता दी है या नहीं। इस पर कोर्ट ने फैसला भी दिया था। लेकिन वहाँ की सरकार न तो कुछ बता रही और न ही नूर चौधरी को वापस बांग्लादेश भेज रही है।

उन्होंने आगे कि कनाडाई सरकार सिर्फ अपने कानून का हवाला देकर कहती है कि यदि किसी व्यक्ति को उसके देश में वापस भेजने पर, मृत्युदंड दिया जा सकता है तो कनाडा उसका प्रत्यर्पण नहीं कर सकता। बेशक कनाडा का अपना कानून है, लेकिन उन्हें किसी हत्यारे का सुरक्षा कवच नहीं बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि शेख मुजीबुर्रहमान रहमान का एक हत्यारा राशिद चौधरी अमेरिका में रह रहा है। उम्मीद है कि अमेरिका उसका प्रत्यर्पण कर देगा। वह पहले भी एक हत्यारे को बांग्लादेश भेज चुका है।

अब्दुल मोमन ने कनाडा पर मानवाधिकार की अवधारणा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों और हत्यारों को बचाने के लिए मानवाधिकार एक बहाना बन गया है।

बात दें कि इससे पहले श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने कहा था कि कनाडा आतंकियों को पनाह देता है। उसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए कहा था कि वे बिना सबूत आरोप लगाने में माहिर हैं। खालिस्तानी राग अलापने पर कनाडा को भारत से मिली लताड़ को भी उन्होंने सही बताया था।

साबरी ने कहा था, “कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई है। कनाडाई पीएम का यह तरीका है कि बगैर किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाए जाएँ।” उन्होंने कहा था कि ट्रूडो ने कहा था कि श्रीलंका में एक भयानक नरसंहार हुआ था। यह सरासर झूठ है। हर कोई जानता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था।

ओडिशा के सूर्यवंशी गजपति राजा, जिन्होंने तेलंगाना तक इस्लामी शासन को उखाड़ फेंका: सरदार पटेल से 575 साल पहले राजा कपिलेंद्र देव ने चटाई थी धूल

सरदार वल्लभभाई पटेल की रणनीतिक प्रतिभा को श्रद्धांजलि देते हुए कुछ दिन पहले हमने ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ मनाया था। वो लौह पुरुष पटेल ही थे, जिन्होंने रजाकारों के उत्पीड़न को खत्म किया था और बहुसंख्यक हिंदुओं इनके उत्पीड़न से बचाया था। रजाकार एक निजी सेना थी, जो हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली ख़ान के शासन को बनाए रखने और हैदराबाद स्टेट को हाल ही में स्वतंत्र हुए भारत में विलय का विरोध करने के लिए बनाई थी।

यह सेना कासिम रिजवी ने बनाई थी। रजाकारों ने हैदराबाद में हिंदुओं पर अवर्णनीय क्रूरता की थी। लौह पुरुष ने भारतीय सेना की समन्वित एवं निर्णायक कार्रवाई के जरिए बर्बर रजाकारों के उत्पाद को खत्म किया था। इसके साथ ही उस क्षेत्र के बहुसंख्यक हिंदुओं के मन में लंबे वक्त से निज़ाम के शासन से मुक्ति का पल रहा सपना सच हो गया था।

आश्चर्य की बात है कि इसी क्षेत्र में लगभग 575 साल भी ऐसी ही ऐतिहासिक समानता वाली एक घटना सामने आई थी। तब यहाँ अलाउद्दीन अहमद शाह द्वारा शासित दुर्जेय बहमनी सल्तनत हुआ करती थी। ये बहमनी सल्तनत दक्कन का इस्लामी राज्य था। उसके शासनकाल के दौरान सन 1448 तक तेलंगाना का लगभग पूरा क्षेत्र उसके कब्जे में आ गया था। उसकी ये जीत स्थानीय हिंदू प्रमुखों के वहाँ से जबरन खदेड़ने के बाद हुई, जबकि ये लोग इस क्षेत्र के खासे प्रभावशाली लोग थे।

इस दौरान अहमद शाह ने अधिकांश तेलंगाना को अपने कब्जे में रखते हुए संजर खान को इस क्षेत्र का गवर्नर नियुक्त किया। खान स्थानीय हिंदुओं से गहरी नफरत रखता था और उनके लिए एक क्रूर तानाशाह साबित हुआ। उसने हिंदुओं को पकड़ा और उन्हें गुलामी शुरू कर दिया (मुखर्जी प्रभात, उड़ीसा के गजपति राजाओं का इतिहास, पेज 29)। उसकी क्रूरता का खामियाजा अधिकतर औरतों और बच्चों को भुगतना पड़ा। उसके शासनकाल के दौरान हिंदू लगातार गुलामी के डर में जीते थे।

इस बीच ओडिशा साम्राज्य में महत्वपूर्ण घटनाएँ घट रही थीं। यहाँ गजपति राजवंश के सूर्यवंशी क्षत्रिय कपिलेंद्र देव के रूप में एक शक्तिशाली और दूरदर्शी शासक का उदय हुआ। इस्लामी राज्यों के खिलाफ रक्षात्मक रवैया अपनाने वाले अपने कई समकालीनों के उलट कपिलेंद्र देव दुश्मन के इलाके में लड़ने यानी हमला करने में विश्वास करते थे।

ओडिशा में अपनी राजधानी कटक और उसके आसपास के 5-6 जिलों को मिलाकर अपेक्षाकृत मामूली राज्य की स्थापना की थी। लेकिन, सन 1448 ईस्वी तक उन्होंने आज के आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी तक अपने राज्य का विस्तार कर लिया। अपने साम्राज्य का दायरा बढ़ाने के रास्ते में कपिलेंद्र देव ने बंगाल और मालवा की सल्तनत को कुचल डाला और उन्हें अपने क्षेत्र में मिला लिया।

महाराजा कपिलेंद्र देव बहमनियों की सीमा से सटे होने के कारण उनके प्रभुत्व से अनजान नहीं थे और जानते थे कि तेलंगाना में क्या हो रहा है। इसलिए, बहमनियों के साथ संघर्ष केवल समय की बात थी। सुल्तान अहमद शाह दुर्जेय गजपति सेना की सैन्य ताकत से अच्छी तरह परिचित था। उसे पता था की कि इसमें 2 लाख हाथियों को शामिल किया जाता था। (मोहपात्रा आर पी, उड़ीसा का सैन्य इतिहास, पेज 122)।

हालाँकि यह अतिशयोक्ति लग सकती है, लेकिन उड़िया सेना में वास्तव में हाथियों की काफी संख्या थी। यही वजह रही कि इसके राजाओं को “गजपति” उपनाम मिला। सुल्तान अहमद शाह जानता था कि उसका गजपति सेना से कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए उसने जिद्दी संजर खान को सलाह दी की कि वह “हाथियों के स्वामी” (इंडियन एंटीक्वेरी वॉल्यूम XXVIII पेज 237) के साथ उलझने से बचे। शाह जानता था कि खान इसके काबिल नहीं है।

घमंडी संजर खान ने सुल्तान की यह सलाह अनसुनी कर दी। उसने गजपति सेना के साथ युद्ध का बिगुल बजा डाला। गजपति सेना तो पहले से ही तैयार थी और बहमनियों पर हमला करने के मौके का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। तेलंगाना के आज के खम्मम में भयंकर युद्ध का मंच तैयार हुआ। इस निर्णायक लड़ाई का नेतृत्व राजा कपिलेंद्र देव के बेटे हमवीरा देव ने किया और आखिरकार तानाशाह संजर खान मारा गया (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवंशी गजपति ऑफ उड़ीसा, पेज 49) और अतत: इस क्षेत्र के हिंदुओं ने राहत की साँस ली।

इस जीत ने बहमनी सल्तनत पर राजा कपिलेंद्र के आक्रमणों की एक श्रृंखला की शुरुआत कर दी। राजा कपिलेंद्र देव ने न केवल पूरे तेलंगाना को बहमनियों से मुक्त कराया, बल्कि महाराष्ट्र के आज के नांदेड़ जिले में स्थित माहुर किले को भी उनसे छीन लिया। अन्य महत्वपूर्ण राकाकोंडा, देवरकोंडा, वारंगल (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवंशी गजपति ऑफ उड़ीसा, पेज 54) जैसे और कई किले भी गजपति वंश के कब्जे में आ गए। आखिरकार गजपति सेना ने आज के कर्नाटक में बहमनी साम्राज्य की राजधानी बीदर की घेराबंदी कर दी।

संजर खान के क्रूर शासनकाल को राजा कपिलेंद्र देव के साहसी जवाबी हमलों का सामना करना पड़ा। इसका नतीजा ये हुआ की कि बहमनी राजधानी पर सूर्यवंशी गजपति वंश का कब्ज़ा हो गया (सुब्रमण्यम आर, द सूर्यवम्सी गजपतिस ऑफ़ उड़ीसा, पृष्ठ 58)। यह ऐतिहासिक घटना नव स्वतंत्र भारत की घटनाओं से अद्भुत समानता रखती है। इसी क्षेत्र में रजाकारों ने हिंदू आबादी के खिलाफ जघन्य अत्याचार किए थे। तब सरदार पटेल सामने आए थे और हमने देखा कि कैसे सरदार पटेल की सूझ-बूझ ने रजाकारों का खात्मा कर डाला।

ऐसी ऐतिहासिक घटनाएँ मौजूदा भू-राजनीतिक हालात की गहरी समझ और देश हित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता वाले नेताओं की अहमियत की तरफ ध्यान खींचती हैं। हालाँकि, यह याद रखना भी जरूरी है कि ऐसे जवाबी हमलों के लिए सावधानीपूर्वक दीर्घकालिक योजना और वर्षों की तैयारी की जरूरत होती है। हमारा इतिहास अतीत और संभावित रूप से भविष्य में भी ऐसी रणनीतियों को सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने की हमारी काबीलियत का सबूत है।

बदकिस्मती से एक वक्त में पूर्वी तट से उत्तर में पश्चिम बंगाल की हुगली नदी से लेकर दक्षिण में तमिलनाडु के रामेश्वरम तक शासन करने वाले इस महान क्षत्रिय राजा की अहम उपलब्धियों और कामों पर कई वजहों से विद्वानों ने ज्यादा खोजबीन नहीं की। लेखक ने कपिलेंद्र देव की उपलब्धियों को “गजपति कपिलेंद्र देव, 15वीं शताब्दी के भारत के महानतम हिंदू विजेता का इतिहास” नाम की किताब के तौर पर पेश करने की कोशिश की है।

(यह लेख अंग्रेजी में निहार रंजन नंदा ने लिखा है। मूल लेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। इसका हिंदी अनुवाद रचना वर्मा ने किया है)

‘G-20 वाले विमान में कोकीन, नशे के कारण भोज से रहे नदारद’: कनाडा का इनकार, जस्टिन ट्रूडो बोले- भारत से बनाना चाहता हूँ अच्छे संबंध

खालिस्तानियों को संरक्षण देने के कारण अलग-थलग पड़ गए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का अब कहना है कि वे भारत से अच्छे संबंध चाहते हैं। साथ ही उनके कार्यालय ने उन खबरों को भी नकार दिया है जिनमें उनके विमान में कोकीन मिलने की चर्चा थी। ट्रूडो इसी विमान से G20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे।

बीते दिनों भारत के एक पूर्व राजनयिक ने एक टीवी चैनल पर कहा था इस बात की ‘विश्वसनीय अफवाह’ है कि ट्रूडो के विमान में कोकीन पाया गया था। लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है, “यह खबर एकदम निराधार है और दर्शाती है कि कैसे गलत जानकारी मीडिया तंत्र तक अपना रास्ता बना लेती है।” कनाडा के अखबार टोरंटो सन ने इस बात की जानकारी दी है।

जस्टिन ट्रूडो के विमान में कोकीन होने को लेकर भारत के पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा ने पत्रकार दीपक चौरसिया को दिए गए साक्षात्कार में कहा था कि इस बात की ‘विश्वसनीय अफवाह’ है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के स्निफ़र डॉग्स ने ट्रूडो के विमान में ड्रग्स पाई थी। दीपक ने यह भी कहा था कि जस्टिन ट्रूडो भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा G20 के सभी मेहमानों के सम्मान में आयोजित किए गए रात्रिभोज में भी नशे में होने के कारण नहीं गए थे।

दीपक वोहरा के इस दावे की भाषा जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर आरोप लगाने के दौरान उपयोग की गई भाषा से मेल खाती है। जस्टिन ट्रूडो ने जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत का जिम्मेदार भारत को बताया था। इस दौरान उन्होंने कनाडाई संसद में कहा था इस बात के ‘विश्वसनीय सबूत’ हैं कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंसिया शामिल थीं। ट्रूडो के इस बयान के पश्चात दोनों देशों के राजनयिक रिश्ते रसातल में जा चुके हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत पर आरोप लगाने के पश्चात ‘एक कदम आगे-दो कदम पीछे’ की रणनीति अपनाते हुए भी नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह बयान देने के पश्चात कहा था कि हम भारत को उकसाना नहीं चाहते हैं। अब ट्रूडो ने कहा है कि वह भारत के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने के लिए तत्पर हैं। हालाँकि उन्होंने निज्जर की हत्या को लेकर अपना पुराना राग फिर दोहराया है। ट्रूडो ने कहा कि भारत के साथ मिलकर हम निज्जर की हत्या के सभी तथ्य सामने लाए।

ट्रूडो ने कहा, “भारत एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है। साथ ही महत्वपूर्ण वैश्विक ताकत भी है। हमने पिछले वर्ष ही अपनी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति तैयार की है और हम भारत के साथ गहरे संबंध बनाने के लिए भी तत्पर हैं।”

Asian Games 2023: चीन में दनादन मेडल पर निशाना साध रहे भारतीय शूटर्स; 2 और गोल्ड जीते; शूटिंग से अब तक आ चुके हैं 17 पदक

एशियन गेम्स 2023 (Asian Games) में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। गेम्स के छठवें दिन यानी 29 सितंबर की सुबह भारत को 2 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल मिले। इसमें से 4 मेडल शूटर्स के खाते में गए। अब तक भारत 8 गोल्ड, 11 सिल्वर, 11 ब्रॉन्ज सहित 30 मेडल चुका है।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में 17 वर्षीय भारतीय शूटर पलक ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इससे पहले 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, स्वप्निल सुरेश कुसाले और अखिल श्योराण की तिकड़ी ने भी विश्व रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा 10 मीटर एयर पिस्टल में पलक, ईशा सिंह और दिव्या सुब्बाराजू की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

वहीं 10 मीटर एयर पिस्टल में ईशा सिंह ने सिल्वर मेडल पर अपना कब्जा जमाया। इसके अलावा टेनिस में रामकुमार रामनाथन और साकेत माइनेनी की जोड़ी ने भी सिल्वर मेडल जीतने में कायमाबी हासिल की। टेनिस जोड़ी को गोल्ड का दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्हें चीन की सू-जुंग की जोड़ी ने 6-4, 6-4 से मात दी।

एशियन गेम्स में 8 गोल्ड भारत के नाम

एशियन गेम्स 2023 में भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 30 मेडल जीते हैं। इसमें से 8 गोल्ड, 11 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज मेडल हैं। भारत को शूटिंग में सबसे अधिक 17 मेडल मिले हैं। इसमें 6 गोल्ड, 6 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही मेडल टैली में भी बदलाव हुआ है और भारत 2 रैंकिंग आगे बढ़कर चौथे नंबर पर आ गया है। वहीं 93 गोल्ड के साथ चीन पहले, 24 गोल्ड के साथ कोरिया दूसरे और 19 गोल्ड के साथ जापान तीसरे नंबर पर है।

700 CCTV खँगालने के बाद पकड़ा गया उज्जैन का दरिंदा, भागने की कोशिश में हाथ-पैर फ्रैक्चर: एक ऑटो ड्राइवर ने रेप किया, दूसरे ने दी थी लिफ्ट

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 15 साल की लड़की से दरिंदगी करने वाला ऑटो ड्राइवर भरत सोनी पकड़ा गया है। उसने 28 सितंबर 2023 को पुलिस की गिरफ्त से भागने की भी कोशिश। इस दौरान हाथ-पैर में फ्रैक्चर के कारण वह घायल हो गया।

इस केस में दूसरे ऑटो ड्राइवर राकेश मालवीय की भूमिका भी सामने आ गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसने पीड़ित लड़की को लिफ्ट दी थी। इसके कारण उसके ऑटो में खून के धब्बे मिले थे। उसे मामले की जानकारी पुलिस को नहीं देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले की जाँच कर रह महाकाल थाने के टीआई ने पीड़िता को गोद लेने की बात कही है। पीड़िता मानसिक रूप से कमजोर है और मध्य प्रदेश के ही सतना जिले के जैतवारा थाना क्षेत्र की रहने वाली है। वह घर से स्कूल के लिए निकली थी। लेकिन फिर ट्रेन से उज्जैन पहुँच गई। स्टेशन से भरत सोनी उसे ऑटो में बैठाकर जीवनखेड़ी इलाके में ले गया और सुनसान जगह पर उससे रेप किया।

700 से अधिक सीसीटीवी खँगालने के बाद पुलिस भरत सोनी तक पहुँचने में कामयाब हुई। पुलिस ने सोनी के खिलाफ IPC की धारा 376, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) व अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

आईजी संतोष सिंह ने कहा कि भरत सोनी ने 25 सितंबर की सुबह पीड़िता के साथ बलात्कार किया था। इसके बाद वह उसे वहीं छोड़कर भाग गया था। बाद में राकेश मालवीय ने अपनी ऑटो में बैठाकर उसे दूसरी जगह छोड़ दिया था। उसकी ऑटो में खून के निशान मिले थे। इसके बाद उससे पूछताछ की गई थी। उसने पुलिस को सूचना नहीं दी। इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया है।

एसपी सचिन शर्मा ने कहा कि पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने के लिए पुलिस आरोपित को लेकर जा रही थी। इसी दौरान उसने भागने की कोशिश की। वह चोटिल हो गया। कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एसपी ने यह भी कहा कि इस घटना के बाद पुलिस अब ऑटो-रिक्शा चालकों के चरित्र का वेरिफिकेशन कर जानकारी इकट्ठा करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि महाकाल थाने के टीआई अजय वर्मा ने बच्ची को गोद लेने का फैसला किया है। वह बच्ची के लिखाई-पढ़ाई समेत जो भी खर्च होगा वहन करेंगे।

जैतवारा पुलिस का कहना है कि पीड़ित लड़की की माँ उसे बचपन में ही छोड़कर चली गई थी। पिता की भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह अपने दादा और बड़े भाई के साथ गाँव में रहती है। स्कूल से घर लौटकर न आने पर उसके दादा ने ही 24 सितंबर को शिकायत दर्ज कराई थी।

वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है, “आरोपित को कठोरतम दंड दिया जाएगा। अपराधी को कड़ी सजा दिलाने में कसर नहीं छोड़ेंगे। मैं लगातार हर घंटे स्थिति पता कर रहा था। इस तरह के अपराधी समाज में रहने के लायक नहीं हैं। उसने मध्य प्रदेश की आत्मा को घायल किया है। वह मेरी बेटी है, मध्य प्रदेश की बेटी है। हम हर तरह से उसकी चिंता करेंगे।”

गौरतलब है कि पीड़ित लड़की अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ होकर उज्जैन में कई किलोमीटर तक भटकती रही थी। गुरुकुल के आचार्य राहुल शर्मा ने उसके शरीर को ढका था और पुलिस को मामले की जानकारी दी थी।

क्या ओवैसी के शहर के मुस्लिम देंगे पाकिस्तानी क्रिकेटरों का साथ? मुश्ताक अहमद ने कहा – ‘हैदराबाद, अहमदाबाद में मुस्लिम आबादी ज्यादा, इसलिए वहाँ Pak को समर्थन’

“हैदराबाद और अहमदाबाद में मुस्लिम आबादी बहुत ज्यादा है, इसलिए वहाँ की भीड़ पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का समर्थन करेगी।” – यह कहना है पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मुश्ताक अहमद का। पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात 28 सितंबर 2023 को कही। वहाँ की मीडिया में यह चर्चा इसलिए हुई क्योंकि जब पाकिस्तान की टीम क्रिकेट वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने हैदराबाद पहुँची तो उनका भव्य स्वागत किया गया, इससे पाकिस्तानियों को लगा कि मैच के दौरान भी उन्हें समर्थन मिलेगा।

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम भारत आ चुकी है। क्रिकेट के सबसे बड़े इवेंट में हिस्सा लेने – क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 (Cricket World Cup 2023)! हैदराबाद में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का भव्य स्वागत किया गया। कप्तान बाबर आजम को तो स्पेशल भगवा गमछा से सम्मानित किया गया।

6 अक्टूबर 2023 से क्रिकेट वर्ल्ड कप (Cricket World Cup) शुरू होने वाला है। इसके लिए भाग ले रही सभी टीम तो तैयार है ही, प्रशंसक और मीडिया में भी क्रेज छाने लगा है। पाकिस्तानी टीम की ही बात करें तो इनके भारत पहुँचते ही हैदराबाद एयरपोर्ट पर अच्छी संख्या में इनके समर्थक चीयर करते दिखे। पाकिस्तानी मीडिया भी इस स्वागत से खुश दिख रही, पैनल डिस्कशन किया जा रहा… क्रिकेट के बजाय बस एंगल इस्लाम का रखते हुए। अफसोस यह कि इसमें बात करने वाले भी क्रिकेटर ही हैं।

समा टीवी नाम का एक पाकिस्तानी मीडिया चैनल है। इस पर एक चर्चा की गई पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के हैदराबाद लैंड करने और एयरपोर्ट पर उनके स्वागत की। इस चर्चा का शीर्षक रखा गया – Zor ka Jor | World Cup 2023 | Pakistan Zindabad Slogans in India’s Hyderabad (ज़ोर का जोर | वर्ल्ड कप 2023 | भारत के हैदराबाद में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे)। इस चर्चा में भाग लेने वालों के नाम हैं – मुश्ताक अहमद (पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर), इरम जावेद (पाकिस्तानी महिला क्रिकेटर) और एक पत्रकार।

चर्चा में क्रिकेट की बात कम हुई। भारत-पाकिस्तान के मैच ज्यादा से ज्यादा राजनीति से परे रखते हुए खेले जाएँ, इस पर ज्यादा बात की गई। देश के साथ-साथ खिलाड़ियों की भी आर्थिक स्थिति पस्त है, इसलिए शायद यह उनके लिए लाजिमी रहा होगा। आश्चर्य यह कि इसके बाद सारे लोग पाकिस्तान किन-किन जगहों पर खेलेगी और उन शहरों में मुस्लिम आबादी कितनी है, इस पर चर्चा करने लगे।

पाकिस्तान के शुरू के दो मैच हैदराबाद में नीदरलैंड और श्रीलंका के खिलाफ होने हैं। इसके बाद तीसरा मैच अहमदाबाद में भारत के खिलाफ होगा। चर्चा में जब एंकर ने पाकिस्तानी टीम को मिलने वाले समर्थन पर बात की तो मुश्ताक अहमद ने हैदराबाद और अहमदाबाद में बहुत ज्यादा मुस्लिम आबादी की बात की। लगभग 27 मिनट के वीडियो में मुश्ताक की यह बातचीत 7 मिनट के बाद से सुनी जा सकती है।

पाकिस्तानी टीम को सपोर्ट करते हैं भारत के कट्टर इस्लामी?

पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर और वहाँ की मीडिया अगर चर्चा कर रही है कि हैदराबाद और अहमदाबाद के इंडियन मुस्लिम पाकिस्तान का समर्थन करेंगे तो यह सिर्फ कयास नहीं है। कई ऐसी खबरें आती रही हैं, जब भारत-पाकिस्तान के मैच के समय या मैच में हार-जीत के बाद हिंदू-मुस्लिम भीड़ में हिंसक झड़पें हुई हैं। भारत में कुछ मीडिया हाउस भी ऐसे हैं, जो पाकिस्तानी टीम से खुलेआम प्यार जता चुके हैं। बात अगर पाकिस्तानी मुस्लिमों की करें तो वो कट्टर होते हैं कि अपनी टीम की हार के बाद हिंदू लड़कियों को उठा कर ले जाते हैं।

टीचर शाइस्ता ने हिंदू छात्र को मुस्लिम साथी से पिटवाया, डर और शर्मिंदगी से स्कूल नहीं जा रहा था पीड़ित: परिजनों की FIR के बाद टीचर गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल में मुस्लिम टीचर पर अपने ही समुदाय के छात्र से एक हिंदू छात्र को पिटवाने का आरोप लगा है। ये मामला सेंट एंथनी स्कूल का है। छात्र के माता-पिता ने आरोप लगाया कि टीचर शाइस्ता ने उनके बेटे को स्कूल के अंदर मुस्लिम छात्र से पिटवाया। उन्होंने कहा कि टीचर ने उनके बेटे को यह कहते हुए पिटवाया कि वह हिंदू है।

जानकारी के मुताबिक, सेंट एंथनी सीनियर सेकेंडरी स्कूल संभल जिले के असमोली थाना इलाके के ग्राम दुगावर में स्थित है। यहाँ सिरोली गाँव के निवासी और सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले एक व्यक्ति का बेटा पाँचवीं कक्षा में पढ़ता है। छात्र के पिता ने बताया कि उनका बेटा बीते 26 सितंबर को स्कूल पढ़ने गया था, जहाँ वह कुछ सवाल का जवाब नहीं दे पाया।

इस पर उसकी टीचर शाइस्ता भड़क गई। लड़के के पिता ने आरोप लगाया कि शाइस्ता ने उसी क्लास के एक मुस्लिम बच्चे से उसके बेटे की पिटाई करा दी। शिक्षिका के कहने पर मुस्लिम छात्र ने पीड़ित के गाल पर कई थप्पड़ जड़े। इसके बाद से पाँचवीं क्लास में पढ़ने वाला पीड़ित बच्चा उदास रहने लगा था।

पिता का कहना है कि उनका बच्चा डर और शर्मिंदगी के कारण स्कूल नहीं जा रहा था। जब उन्होंने बच्चे से पूछा कि क्या हुआ तो उसने पूरी घटना बताई। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत स्कूल प्रशासन और पुलिस से की। पुलिस ने इस मामले में महिला शिक्षिका को गिरफ्तार कर जाँच शुरू कर दी है।

एएसपी श्रीशचंद्र ने बताया कि मामले में आरोपित टीचर के खिलाफ पुलिस ने एक्शन लिया है। बच्चे के पिता के आरोप काफी गंभीर हैं। पुलिस ने एसपी कुलदीप सिंह गुनावत का निर्देश मिलते ही आरोपित टीचर को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही स्कूल की प्रिंसिपल सेमिना ने आरोपित टीचर को स्कूल से सस्पेंड कर दिया।