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कॉलेज में दो गुटों के बीच झड़प को फेक न्यूज पेडलर्स ने दिया धार्मिक एंगल, जुबैर-सायमा के फर्जीवाड़े की हवा मेरठ पुलिस ने निकाली

मेरठ का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि मुस्लिम होने के कारण साहिल नाम के एक लड़के को कुछ युवकों ने कॉलेज में पीट दिया। इस वीडियो को कई समाचार संस्थानों ने गलत जानकारी के साथ फैलाया है।

वहीं, सोशल मीडिया के फेक न्यूज पेडलरों के लिए मानो ये एक बड़ा मौका मिल गया हो हिंदुओं पर हमला बोलने का, उन्हें निशाना बनाने का। हालाँकि, कुछ ही देर में उनकी फेक न्यूज फैक्ट्री का गुब्बारा फूट गया, क्योंकि मैदान में खुद मेरठ पुलिस ही उतर आई।

कहाँ का है ये पूरा मामला

यह मामला मेरठ के एनएसए डिग्री कॉलेज का है। यहाँ साहिल नाम के मुस्लिम लड़के को कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों ने किसी बात को लेकर पीट दिया। छात्रों ने उसे वीडियो फिल्माते हुए पकड़ा था। इस वीडियो को अगर आप खुद देखेंगे तो मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा। दरअसल, साहिल कॉलेज में वीडियो बना रहा था।

इसी दौरान कुछ लड़कों ने साहिल को देखा तो रोका। वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि लड़कों द्वारा वीडियो बनाने से रोकने पर साहिल की बहन उनसे कहती है- ‘तुम्हारा वीडियो नहीं बना रहा था ना?’। वहीं, सोशल मीडिया पर ये फैलाया जा रहा है कि साहिल को मुस्लिम होने की वजह से पीटा गया।

भ्रामक जानकारी के साथ फेक न्यूज पेडलर्स ने वायरल किया वीडियो

कई लोगों ने दावा किया कि लड़कों ने साहिल की पहले टोपी उतरवाई गई, फिर उसके साथ मारपीट की गई। वीडियो में ऐसा भी कुछ नहीं दिख रहा है। इसके बावजूद फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर से लेकर RJ सायमा, मुस्लिम स्पेसेज और खुद को क्विंट का पत्रकार बताने वाले अतुल राय जैसे लोग इस वीडियो को गलत जानकारियों के साथ शेयर करने लगे।

ऑल्ट न्यूज के फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद जुबैर ने अपनी जिहादी मानसिकता को प्रदर्शित करते हुए इस कंटेंट को सोशल मीडिया पर साझा किया। जुबैर ने भारत समाचार द्वारा किए गए ट्वीट को रीट्वीट किया और उसकी सत्यता की जाँच भी नहीं की, जब यह खुद को फैक्ट चेकर बताता फिरता है।

सायमा ने भी इसे फर्जी दावे के साथ शेयर किया। इसके साथ ही उसने वीडियो के कैप्शन में लिखा, “एक भ्रष्ट समाज! दयनीय।”

जिहादी हैंडलों ने तेजी से बढ़ाया वीडियो

मुस्लिम स्पेसेस नाम का एक्स हैंडल लिखता है, “यूपी: कॉलेज की फीस जमा करने गए मुस्लिम युवक को उसकी बहन के सामने छात्रों ने मॉब लिंचिंग की कोशिश की! मेरठ के सिविल लाइन्स स्थित एनएएस डिग्री कॉलेज में टोपी पहनकर जाने पर एक मुस्लिम की पिटाई कर दी गई! धार्मिक गालियाँ दी गईं! उसे ईंटों से पीटा गया!’

मुस्लिम स्पेसेस ने ये वीडियो पीयूष राय से उठाया था। उसने लिखा था, “यूपी के मेरठ स्थित एक कॉलेज में अपनी छोटी बहन की फीस जमा करने गए युवक साहिल पर बदमाशों ने हमला कर दिया। आरोप लगाया जा रहा है कि उन्हें धार्मिक अपशब्द कहकर निशाना बनाया गया।”

यूपी कॉन्ग्रेस भी फेक न्यूज पेडलिंग में शामिल

इस वीडियो को यूपी कॉन्ग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी भ्रामक जानकारियों के साथ शेयर किया गया है। हालाँकि, मेरठ पुलिस ने इस पर अपना आधिकारिक बयान दिया है, लेकिन यूपी कॉन्ग्रेस ने अभी तक ये ट्वीट न तो हटाया है और न ही भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए माफी ही माँगी है।

मेरठ पुलिस ने बताई सच्चाई

मेरठ पुलिस ने इस तरह के ट्वीट और शेयर किए जा रहे वीडियो को पूरी तरह भ्रामक बताया। मेरठ पुलिस ने बताया कि इस मामले में हिंदू-मुस्लिम जैसा धार्मिक एंगल है ही नहीं, बल्कि ये दो समूहों के झड़प से जुड़ा वीडियो है। इसे गलत संदर्भ के साथ पेश किया जा रहा है। पुलिस इस मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई कर रही है।

फेक न्यूज पेडलर गैंग के काम करने का असली तरीका

सोशल मीडिया पर झूठ फैला रहा ये वही गैंग है, जो कर्नाटक-तमिलनाडु जैसे राज्यों की खबरों के लिए पुलिस के बयान को ही आखिरी सत्य मानते हैं। हालाँकि, जब ऐसा ही कोई मामला उत्तर प्रदेश जैसे भाजपा शासित राज्य का होता है तो ये अपनी गैंग की बातों को ही अंतिम सच मानते हैं।

यह गैंग पुलिस के बयान को जान बूझकर या तो अनदेखा कर देता है या न देख पाने का नाटक करता है। हालाँकि, इस मामले में मेरठ पुलिस ने इनकी असलियत को उधेड़कर रख दिया है। इसके बाद भी इस गैंग ने कोई सफाई नहीं दी है और न ही अपने फर्जी दावों वाले ट्वीट्स को डिलीट किए है। यही इनके काम करने का असली तरीका है।

42 कुत्तों से रेप, सेक्स के दौरान 39 मर गए: टॉर्चर करने के लिए बना रखा था रूम, वीडियो बनाकर शेयर करता था मगरमच्छ एक्सपर्ट

ऑस्ट्रेलिया में एडम ब्रिटन नाम के एक मगरमच्छ विशेषज्ञ को कुत्तों से रेप करने सहित 60 से अधिक आरोपों में दोषी पाया गया है। वह कुत्तों का तब तक रेप करता था, जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती थी। इसके अलावा, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो शेयर का भी दोषी पाया गया है। एडम ने खुद पर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एडम ने 42 कुत्तों को टॉर्चर कर उनके साथ रेप किया था। इसमें से 39 कुत्तों की मौत हो गई थी। कुत्तों के साथ रेप करने के दौरान वह उन्हें बुरी तरह से यातनाएँ देता था। इस दौरान वह उनका वीडियो भी बनाता था। एडम ने जिन कुत्तों को अपनी हवस का शिकार बनाया था, उनमें उसके पालतू कुत्ते भी शामिल थे।

आसपास के इलाकों से कुत्तों को पकड़ने के लिए एडम सोशल साइट्स की मदद लेता था। वह ऐसे लोगों की तलाश करता था, जो किसी कारण से अपने पालतू जानवरों को हटाना चाहते थे। एडम कुत्तों के मालिकों से कहता था कि वह उनका अच्छी तरह से खयाल रखेगा। यही नहीं, वह आसपास के अन्य लोगों से संपर्क कर उनके कुत्तों को ले लेता था। इसके बाद उनका रेप करता और वीडियो बनाता था।

यह सब करने के लिए एडम ब्रिटन ने अपने घर पर एक शिपिंग कंटेनर रखा हुआ था। इस कंटेनर में उसने चारों तरफ कैमरे लगा रखे थे। इसे वह ‘टॉर्चर रूम’ कहता था। यहाँ से बनाए हुए वीडियोज को वह अलग-अलग नामों से इंटरनेट पर शेयर करता था। इसके अलावा, कुत्तों से रेप के वीडियो टेलीग्राम के जरिए वह अपने जैसी सोच वालों को भी शेयर करता था।

अप्रैल 2022 में ब्रिटन के एक घर में छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके लैपटॉप से कुत्तों के रेप के वीडियो समेत बच्चों के यौन शोषण से संबंधित वीडियो भी जब्त किए थे। इसके बाद पुलिस ने 51 वर्षीय एडम को गिरफ्तार कर लिया था। अब कोर्ट ने उसे कुत्तों से रेप, हत्या और उनके वीडियो बनाने तथा बच्चों के यौन शोषण के वीडियो शेयर करने के अपराध में दोषी ठहराया है।

इस मामले में कोर्ट दिसंबर 2023 में एडम ब्रिटन की सजा का ऐलान करेगा। बता दें कि एडम ब्रिटन मशहूर जूलॉजिस्ट और मगरमच्छ विशेषज्ञ है। वह बीबीसी और प्रतिष्ठित नेशनल ज्योग्राफिक चैनल के लिए कई शो कर चुका है। वह 2014 से इस घटना को अंजाम दे रहा था और अप्रैल 2022 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह हिरासत में था।

जानवरों के साथ सेक्स एक मनोरोग है, जिसे जूफिलिया या बेस्टिएलिटी (Zoophilia or Bestiality) कहते हैं। यह यौन विकृति (पैराफ़िलिया) का एक रूप है, जिसमें जानवरों के साथ यौन कल्पनाएँ की जाती हैं। यह एक तरह की यौन कुंठा होती है या फिर सेक्शुअल फ़ैंटिसी के लिए ऐसा किया जाता है। एनसीबीआई के मुताबिक, कुछ समुदायों में बेस्टिएलिटी को यौन संक्रमित बीमारियों के इलाज के तौर पर देखा जाता है।

जस्टिन ट्रूडो को आखिरकार माँगनी पड़ी माफी, कहा- यह बड़ी गलती थी, इसने कनाडा को बहुत शर्मिंदा किया

खालिस्तानी आतंकियों का हमदर्द बन भारत के साथ रिश्तों में तल्खी लाने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को नाजी सैनिक को सम्मानित करने के लिए माफी माँगनी पड़ी है। इस विवाद के बाद कनाडा की संसद के अध्यक्ष एंथनी रोटा को भी इस्तीफा देना पड़ा था। विवाद का ठीकरा रोटा पर फोड़ते हुए ट्रूडो ने कहा कि यह एक भारी गलती थी। इसने संसद और कनाडा को बहुत शर्मिंदा किया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रूडो ने बुधवार (27 सितंबर 2023) को हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रवेश करने से पहले कहा, “हम सभी जो शुक्रवार को सदन में थे, हमें खड़े होकर तालियाँ बजाने पर गहरा अफसोस है, भले ही हम इसके बारे (नाजी सैनिक यारोस्लाव हुंका) में अनजान थे।” उन्होंने कहा, “यह यहूदी नरसंहार (होलोकॉस्ट) में मारे गए लाखों लोगों की यादों का एक भयानक अपमान था और यहूदी लोगों के लिए बेहद दर्दनाक था।”

उन्होंने ये भी कहा, “यह सोचना बेहद परेशान करने वाला है कि यूक्रेन जिस मकसद से जंग लड़ रहा है, उसका गलत तरह से प्रचार किया जा रहा है। रूस और उसके समर्थक इस गंभीर गलती (यारोस्लाव हुंका को सम्मान देना) का राजनीतिकरण कर रहे हैं।”

दरअसल यूक्रेन के राष्ट्रपति ने शुक्रवार (22 सितंबर) को कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में भाषण दिया था। इसके बाद स्पीकर एंथनी रोटा ने वहाँ मौजूद यारोस्लाव हुंका की तरफ सब का ध्यान दिलाया था। इस पर कनाडाई सांसदों ने 98 साल के यारोस्लाव हुंका का खड़े होकर दो बार अभिनंदन किया।

इस दौरान हुंका को द्वितीय विश्वयुद्ध में फर्स्ट यूक्रेनी डिवीजन के लिए लड़ने वाले एक युद्ध नायक के तौर पर पेश किया गया था। वे फर्स्ट यूक्रेनी डिवीजन को वेफेन-एसएस गैलिसिया डिवीजन या एसएस 14वें वेफेन डिवीजन में तैनात थे। ये एक स्वैच्छिक इकाई थी जो नाजियों की कमान के अधीन थी।

हुंका के सम्मान पर रूस की गंभीर प्रतिक्रिया के बाद हाउस ऑफ कॉमन्स के पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद सदन के स्पीकर एंथनी रोटा ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। हाउस में सरकार की नेता करीना गोल्ड ने कहा कि रोटा ने सरकार या यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल को सूचना दिए बगैर हुंका को आमंत्रित किया और मान्यता दी। इस मामले में पूरी तरह से तत्परता न बरत कर रोटा ने सांसदों का विश्वास तोड़ दिया है।

इससे पहले रविवार (24 सितंबर) को रोटा ने कहा कि हुंका को आमंत्रित करने और पहचानने के लिए वह अकेले जिम्मेदार थे। दरअसल हुंका उसी जिले से हैं, जिसका प्रतिनिधित्व रोटा करते हैं। स्पीकर कार्यालय के मुताबिक, हुंका के बेटे ने रोटा के स्थानीय कार्यालय में यह पता करने के लिए संपर्क किया था कि क्या यह संभव है कि उनके पिता यूक्रेनी राष्ट्रपति के भाषण में शामिल हो सके।

सलमान और उसके अब्बा रहीश ने घर पर लगाया पाकिस्तानी झंडा, मुरादाबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक घर के ऊपर पाकिस्तानी झंडा फहराने का मामला सामने आया है। पाकिस्तान का यह झंडा रहीश नाम के व्यक्ति की छत पर लगाया गया है। इस मामले में रहीश के बेटे सलमान को भी आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने दोनों आरोपित बाप-बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना बुधवार (27 सितंबर 2023) की है।

मामला मुरादाबाद जिले के भरतपुर थाना क्षेत्र के बुरहानपुर गाँव का है। मामले में शिकायतकर्ता खुद पुलिस है। वादी सब-इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने अपनी तहरीर में कहा है कि वह 27 सितंबर 2023 को साथी सिपाही के साथ गश्त कर रहे थे। इस दौरान वे बुढ़ानपुर अलीगंज गाँव के सरकारी स्कूल पहुँचे। वहाँ उन्हें गाँव का चौकीदार सूरजपाल मिला।

सूरजपाल ने पुलिस को बताया कि उनके गाँव के रहीश ने अपनी छत पर पाकिस्तान का झंडा लगा रखा है। चौकीदार ने इस घटना में रहीश के बेटे सलमान की भी संलिप्तता बताई। सब इंस्पेक्टर कुलदीप के मुताबिक, इस सूचना की तस्दीक करने वो बुधवार की शाम लगभग 5:15 बजे गाँव बुढ़ानपुर अलीगंज पहुँचे। पुलिस अधिकारी का कहना है कि सूचना सही पाई गई और रहीश के घर पर पाकिस्तान का झंडा फहराता मिला।

पुलिस ने बाकायदा उस झंडे की वीडियोग्राफ़ी करवाई और नीचे उतरवाया। बाद में 45 वर्षीय रहीश और 25 साल के सलमान को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर IPC की धारा 153A और 153B के तहत FIR दर्ज की गई है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया है।

रहीश और सलमान की करतूत का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सब इंस्पेक्टर कुलदीप के मुताबिक, रहीश और सलमान की इस हरकत के चलते 2 समुदायों के बीच सौहार्द्र पर नकारात्मक असर पड़ा और वैमनस्यता की भावना पैदा हुई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपितों ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि जिस झंडे को वो फहरा रहे हैं, वो पाकिस्तान का है। हालाँकि पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि झंडे को फहराने के पीछे उनका मूल मकसद किया था। जाँच में यह पहलू भी देखा जा रहा है कि दोनों ने पाकिस्तानी झंडा अपनी मर्जी से लगाया था या किसी और के कहने पर।

उज्जैन में खून से लथपथ जिस बच्ची को भटकते सबने देखा, उसके शरीर को गुरुकुल के आचार्य ने अपने वस्त्र से था ढका: पर हिंदू घृणा पर उतारू हो गया गिरोह

12 साल की वह बच्ची मध्य प्रदेश के उज्जैन में अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ कई किलोमीटर तक भटकती रही। सबने उसे देखा पर मदद एक गुरुकुल के आचार्य राहुल शर्मा ने की। अपने वस्त्र से उसके तन को ढका। लेकिन लिबरल-सेकुलर गैंग ने इस हृदयविदारक घटना का इस्तेमाल भी अपनी हिंदू घृणा को दिखाने के लिए किया।

नीचे देखिए सोशल मीडिया में उज्जैन हैशटैग के साथ टाइम्स ऑफ इंडिया के कार्टूनिस्ट संदीप द्वारा शेयर किया गया कार्टून देखिए;

टीओआई के कार्टूनिस्ट द्वारा शेयर किया गया हिंदूफोबिक कार्टून

मध्य प्रदेश पुलिस इस बच्ची से दरिंदगी करने वालों की पहचान करने की कोशिश में लगी है। हिरासत में 4 संदिग्ध लिए गए हैं। इनमें से एक ऑटो ड्राइवर है। उसके DNA परीक्षण की तैयारी चल रही है। CCTV फुटेज सहित अन्य सबूत जुटाए जा रहे हैं। बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है।

इस बच्ची को पुलिस के पास राहुल शर्मा ने पहुँचाया था। वे दंडी सेवा आश्रम, बड़ा नगर उज्जैन स्थित एक गुरुकुल में आचार्य हैं। बच्चों को वेद और शास्त्रों की शिक्षा देते हैं।

आचार्य शर्मा ने बताया कि 25 सितंबर 2023 की सुबह करीब 9:30 बजे वे काम से गुरुकुल से बाहर निकले थे। इसी दौरान उन्होंने इस लड़की को बदहवास हालत में पैदल जाते हुए देखा। वह अर्धनग्न थी। उसकी कमर के नीचे वस्त्र नहीं थे। आचार्य राहुल शर्मा ने सबसे पहले अपने अंग वस्त्र (पुजारियों की पोशाक का ऊपरी भाग) से उसका शरीर ढका। उसे हिम्मत बँधाई।

उन्होंने बताया, “मैंने एक लड़की को दर्द से कराहते देखा। वह फटे हुए कपड़े से अपने निजी अंगों को ढकने की कोशिश कर रही थी। पहले तो मैं कुछ समझ नहीं सका। फिर मैंने अपना अंग वस्त्र उतारकर उसके शरीर को ढका।” उन्होंने कहा कि उसके पैर खून से लथपथ थे, मैं उसे देखकर बर्दाश्त नहीं कर सका।

आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि जब बच्ची खुद को सुरक्षित महसूस करने लगी तब उन्हें उसे आश्रम में खाना खिलाया। इस दौरान उन्होंने पीड़िता से कई बार उसके निवास, माता-पिता आदि के बारे में जानना चाहा। लेकिन बच्ची ठीक से कुछ बता नहीं पा रही थी। उन्होंने एक पेन-डायरी ले कर बच्ची से सब कुछ लिखने के लिए कहा। बच्ची यह भी नहीं कर पाई। आखिरकार आचार्य शर्मा ने पुलिस को बुलाने के लिए 100 नंबर पर कॉल किया पर फोन काट दिया गया। इसके बाद उन्होंने महाकाल मंदिर के प्रशासनिक अधिकारीयों से सम्पर्क किया जहाँ से घटना की सूचना स्थानीय थाने को दी गई। पुलिस ने पहुँच कर बच्ची को अपने कब्ज़े में लिया।

DNA सैम्पल के होंगे परीक्षण

इस बीच इंदौर के अस्पताल से आ रही खबरों के मुताबिक बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है। हिरासत में लिए गए ऑटो ड्राइवर का नाम राकेश बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पहले पुलिस कस्टडी में उसने दुष्कर्म की बात कबूली थी। हालाँकि बाद में वो इस बयान से मुकर गया और घटना में अपनी संलिप्तता से साफ़ इनकार कर रहा है। पुलिस अब राकेश के DNA सैम्पल की जाँच करवा सकती है। पुलिस के मुताबिक उसके ऑटो में खून के छींटे भी मिले हैं, जिनका परीक्षण करवाया जा रहा है।

घटना के ही दिन भोर में 3 बजे पीड़िता का एक और CCTV फुटेज हाथ लगा है। इस फुटेज में वह सड़क के किनारे स्कूल की ड्रेस पहने खड़ी है। बाद में 5:52 बजे सुबह के एक अन्य फुटेज में पीड़िता अर्धनग्न हालत में दिखाई पड़ी। ऐसा माना जा रहा है कि पीड़िता के साथ भोर के 3 बजे से 5:52 के बीच दुष्कर्म हुआ। उधर अन्य संदिग्धों की तलाश में पुलिस लगातर जाँच जारी रखे हुए है। CCTV फुटेज खँगालने के साथ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर भी काम चल रहा है। बच्ची द्वारा अपनी माँ के साथ भी किए गए दुष्कर्म के दावों की जाँच पुलिस कर रही है।

अब तक कुल 4 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। इन सभी से पूछताछ की जा रही है। ये सभी घटना के दौरान पीड़िता के आसपास दिखाई दिए थे।

कपड़े फाड़ कर, दौड़ा-दौड़ा कर, झोंटा खींचते हुए लड़की को मारते रहा मोहसिन: वीडियो वायरल होने के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

एक वीडियो वायरल है। इसमें एक लड़की को जान बचाकर भागने की कोशिश करते और एक युवक को दौड़ा-दौड़ाकर उसे पीटते देखा जा सकता है। युवक लड़की के कपड़े फाड़ देता है। बाल खींचता है। उसे थप्पड़ मारता है। यह वीडियो गुजरात के अहमदाबाद का है। इसमें दिख रहे युवक की पहचान मोहसिन के तौर पर हुई है।

मोहसिन एक स्पा का संचालक है। जिस लड़की को वह पीट रहा है, वह उसकी बिजनेस पाटर्नर है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़िता से संपर्क किया। इसके बाद मोहसिन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अहमदाबाद के सिंधु भवन रोड पर स्थित गैलेक्सी स्पा का है। 25 सितंबर, 2023 को पीड़िता ने स्पा में ही काम करने वाली लड़की को डाँट दिया था। इसी बीच मोहसिन वहाँ आ गया और पीड़िता से बहस करने लगा। बहस इतनी बढ़ गई कि मोहसिन ने बेरहमी से उसकी पिटाई कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में लड़की खड़ी दिखाई दे रही है। इसके बाद मोहसिन उसके पास आता है। लड़की कुछ बोलने की कोशिश करती है, लेकिन इससे पहले ही मोहसिन उसे थप्पड़ मार देता है। इसके बाद लड़की मोहसिन को धक्का देकर वहाँ से भागने की कोशिश करती है। लेकिन मोहसिन उसका पीछा करते हुए उसके पास जाता है। जहाँ लड़की एक बार फिर उसे धक्का देकर वहाँ से जाने की कोशिश करती है।  

वीडियो में आगे बढ़ने पर लड़की मोहसिन से दूर जाती हुई नजर आ रही है। वहीं मोहसिन भी लौटता हुआ दिखाई देता है। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती है। इस बार मोहसिन दौड़ता हुआ पीड़िता के पास जाता है और उसका हाथ पकड़कर घसीटता हुआ वापस ले आता है। इस बीच एक अन्य युवक बीच-बचाव की कोशिश करते हुए लड़की को मोहसिन से छुड़वा देता है।

लेकिन मोहसिन एक बार फिर पीड़िता के पास जाता है। इस बार वह लड़की का बाल पकड़कर उसे खींचता हुआ दिखाई देता है। फिर वह लड़की पर लगातार थप्पड़ बरसाता हुआ नजर आता है। वीडियो वायरल होने के बाद लोग पुलिस से कार्रवाई की माँग रहे थे। इस पर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए लड़की की तलाश शुरू कर उससे संपर्क किया। लेकिन उसका कहना था कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहती।

पुलिस की काउंसिलिंग के बाद पीड़िता आरोपित मोहसिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को तैयार हुई। इस मामले में पुलिस ने मोहसिन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A, 294B, 323 के तहत एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित लड़की का बयान भी सामने आया है। पीड़िता का कहना है कि वह और मोहसिन बिजनेस पार्टनर हैं। स्पा में चार-पाँच हजार रुपए का नुकसान होने के बाद उसने वहाँ काम करने वाली एक लड़की को डाँट दिया था।

पीड़िता ने आगे कहा कि इसी दौरान मोहसिन वहाँ आ गया और उस पर गुस्सा करने लगा। इसके बाद दोनों के बीच बहस हुई और मोहसिन मारपीट पर उतर गया। उसने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना देने की कोशिश की थी। लेकिन मोहसिन ने उसका मोबाइल छीन लिया था। इसके बाद उसने भागकर खुद को बचा लिया था। पीड़िता किसी भी प्रकार की शिकायत करती इससे पहले ही मोहसिन ने उससे माफी माँग ली थी। इसलिए वह FIR नहीं कराना चाहती थी। लेकिन पुलिस के समझाने के बाद उसने FIR दर्ज कराई है। पीड़िता ने सपोर्ट करने के लिए मीडिया को धन्यवाद दिया है।

‘विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता’: भगत सिंह ने लिखा था, समझाया भी था… काश उनकी टीशर्ट पहने लोग, ‘लाल-सलाम’ वाली भीड़ इसे पढ़ लेते!

“सम्पदि यस्य न हर्षो विपदि विषादो रणे न भीरुत्वम्।
तं भुवन त्रयतिलकं जनयति जननी सुतं विरलम्।।”
-हितोपदेश-सुभाषित-श्लोकाः- १.३४

अर्थात: जिसको सुख सम्पत्ति में प्रसन्नता न हो, संकट विपत्ति में दु:ख न हो, युद्ध में भय अथवा कायरता न हो, तीनों लोकों में महान ऐसे किसी पुत्र को माता कभी-कभी ही जन्म देती है।

उक्त श्लोक को चरितार्थ करते हुए 28 सितंबर 1907, पंजाब के जिला लायलपुर, बंगा गाँव (वर्तमान पाकिस्तान) में एक राष्ट्रभक्त सिख परिवार में उत्कृष्ट देशभक्त सरदार भगत सिंह के रूप में वीर बालक का जन्म हुआ। उन्होंने न केवल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई अपितु मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर 23 मार्च 1931 को मात्र 23 वर्ष 6 माह की अल्पायु में ही शहीद होकर सदा सर्वदा के लिए अमर हो गए।

युवता के योग्यतम प्रतीक सरदार भगत सिंह के इस महान बलिदान और त्याग ने देश के जन मानस में आजादी की ऐसी तड़प पैदा कर दी, एक ऐसी क्रांति की अलख जगा दी कि परिणाम स्वरूप देश का हर व्यक्ति आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए, बलिदान होने के लिए स्वेच्छा से आगे आने लगा। भगत सिंह केवल एक नाम ही नहीं अपितु एक श्रेष्ठ विचारधारा हैं, जिसने विभिन्नता वाले इस विशाल भारत देश को संगठित कर डाला। भारत माँ के इस सच्चे सपूत को ‘भारत रत्न’ पुरस्कार भले न मिला हो परन्तु वे अपने आप में ही किसी अनमोल रत्न से कम भी नहीं। उनकी क्रांति की ज्वाला की तपिश आज भी हर भारतवासी के हृदय में कायम है।

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी भगत सिंह एक अप्रतिम लेखक, पत्रकार, वक्ता, दार्शनिक, कुशल रणनीतिकार और भारतीय क्रांति के दार्शनिक भी थे। ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ रूपी ऊर्जावान उद्घोष के जनक ने अपने एक पत्र में क्रांति के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था:

“क्रांति का अर्थ अनिवार्य रूप से स्वतंत्र आंदोलन नहीं होता है, विद्रोह को क्रांति नहीं कहा जा सकता यद्यपि यह हो सकता है कि विद्रोह का अंतिम परिणाम क्रांति हो।”

22 अक्टूबर 1929 को बटुकेश्वर दत्त के साथ भगत सिंह संयुक्त रूप से लाहौर के विद्यार्थियों के नाम लिखते हैं, “इस समय हम नौजवानों से यह नहीं कह सकते कि वे बम और पिस्तौल उठाएँ। आज विद्यार्थियों के सामने सर्व-महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी राष्ट्र सेवा एवं समर्पण है, राष्ट्रीय त्याग के अंतिम क्षणों में नौजवानों को क्रांति का यह संदेश, देश के कोने-कोने में पहुँचाना है।”

उनके इस पत्र के माध्यम से देश भर में चल रहे जन आंदोलनों के प्रति उनके विचार स्पष्ट हो जाते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य था कि कल-कारखानों से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों तक क्रांति की ज्वाला भड़क उठे, जिससे अंग्रेज़ी हुकूमत की जड़ें हिल जाएँ और कोई भी अंग्रेज किसी भी रूप में भारतीयों का शोषण ना कर पाए।

मनुष्य स्वयं ही अपना भाग्य निर्माता

“मानवः स्वयस्य भाग्यस्य विधाता स्वयमेव हि। तथ्यमेतद् विजानन्ति ये ते तु निज चिंतनम्।”
प्रज्ञा पुराण २/४०

अर्थात: मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं ही होता है, जो इस तथ्य को समझते हैं, वे अपने चिंतन और प्रयास को श्रेष्ठ उद्देश्यों में ही नियोजित करते हैं।

यदि सरदार भगत सिंह चाह लेते तो कभी भी अंग्रेजों के हाथ न आते। परन्तु आजादी के मतवाले ने पूर्व नियोजित योजना के प्रतिकूल, राष्ट्रहित में स्वयं को उत्सर्ग करना ही श्रेयस्कर समझा। भारत को दासता की बेड़ियों से मुक्त करवाना ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य था। उन्होंने अंग्रेजों के अमानुषिक अत्याचार सहे, अनगिनत यंत्रणाएं झेली! किन्तु न धन का लोभ, न परिवार का मोह ही उन्हें कभी अपने लक्ष्य से डिगा पाया।

भारतवर्ष की आज़ादी का उनका दृढ़ संकल्प अटूट था और यही कारण था कि जिनका आधिपत्य दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर था, एक ऐसा साम्राज्य, जिसके बारे में कहा जाता था कि उनके शासन में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, इतनी शक्तिशाली हुकूमत, मात्र 23 वर्ष के एक नौजवान से भयभीत हो गई थी। आज का आधुनिक युवा वर्ग जो छोटी से छोटी समस्याओं में भी हताश हो जाता है, मनोविकार से घिर जाता, जिसे थोड़े से संघर्ष से डिप्रेशन होने लगता है, उस युवा वर्ग को भगत सिंह के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने एक पत्र में लिखा था:

“जो नौजवान दुनिया में तरक्की करना चाहते हैं, उन्हें वर्तमान युग में महान और उच्च विचारों का अध्ययन करना चाहिए।” (भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज, अराजकतावाद-1)

साम्राज्यवाद का विरोध

तत्कालीन भारतीय समाज तमाम अंध-विश्वास, कुरीतियों, छूत-अछूत, ऊँच-नीच जैसे संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित था। ऐसी सामाजिक व्यवस्था उत्पन्न कर दी गई थी कि समाज में अकारण ही असमानता व्याप्त हो गई थी। धनिक वर्ग मासूमों का शोषण कर रहा था। अंग्रेजों के पश्चात इन काले अंग्रेजों से मुक्ति दिलवाना ही भगत सिंह का दूसरा मुख्य उद्देश्य था।

उनके सिद्धांतों के अनुसार क्रान्ति का अर्थ अंततोगत्वा एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है, जिसमें सर्वहारा वर्ग का आधिपत्य सर्वमान्य होगा। जब तक मनुष्य द्वारा मनुष्य का तथा एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण, जिसे साम्राज्यवाद कहते हैं, समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक मानवता शर्मसार होती ही रहेगी। वे कहते थे, “क्रांति से हमारा अभिप्राय अन्याय पर आधारित मौजूदा समाज-व्यवस्था में आमूल परिवर्तन है।”

63 दिनों का अनशन

यह जेल के दौरान एक अभूतपूर्व घटना है। यद्यपि अनशन पर गाँधीजी की सत्ता स्वीकारी जाती है तथापि भगत सिंह ने भी जेल में निरंतर 63 दिनों तक अनशन किया था। उन्हें असेंबली बम कांड में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। इधर जतीन्द्रनाथ दास सहित कई और क्रांतिकारियों को भी हिरासत में लिया गया! जेल में उन्हें बहुत खराब (सड़ा) भोजन दिया जाता था। जेलों में राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार, साफ़ जगह, अच्छे भोजन, पढ़ने के लिए अखबार एवं किताबों के लिए यह भूख हड़ताल आरम्भ हुई। जेल के अधिकारियों ने सबके अनशन तुड़वाने के लिए तरह-तरह के पशुवत व्यवहार किए और अशोभनीय हथकंडे अपनाए।

क्रांतिकारी जतीन्द्रनाथ के शरीर में जबरन रबड़ की नली से दूध डालने का प्रयास किया गया, इस प्रयास में दूध उनके फेफड़ों में चला गया! वह पीड़ा से भर उठे! मगर उन्होंने हार नहीं मानी! अनशन के 63वें दिन वे शहीद हो गए और अंग्रेज़ी सरकार ने जन आक्रोश से बचने के लिए क्रान्तिकारी दल की सभी माँगे मान ली और इस घटना के पश्चात राजनीतिक कैदियों के साथ भविष्य में उचित व्यवहार किए गए। अपने व्यक्तिगत सुख की परवाह न कर साथियों के हित के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देने की तीव्र समर्पण भावना वास्तव में किसी महान नायक के व्यक्तित्व में ही समाहित हो सकती है।

प्रखर लेखक और पत्रकार

भगत सिंह हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, पंजाबी, बांग्ला और आयरिश भाषा के मर्मज्ञ चिंतक और विचारक थे। उन्होंने ‘अकाली’ और ‘कीर्ति’ दो अखबारों का संपादन भी किया। अपने ज्वलंत विचारों को लेखनी के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया। उनके लिए पत्रकारिता एक मिशन थी, वे लेख लिखते थे, ताकि लोगों को जागृत किया जा सके, उन्हें यह बताया जा सके कि अंग्रेजों के खिलाफ यदि संगठित नहीं हुए तो ताउम्र कुचले जाते रहेंगे।

भगत सिंह ने आखिरी सांस तक अपने अंदर के पत्रकार और लेखक को मरने नहीं दिया। जेल में बैठकर भी वे लगातार लिखते और पढ़ते रहे थे। शहीद-ए-आजम ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से आजादी की लड़ाई में भाग लिया। एक तरफ जहाँ वे क्रांतिकारी भावना से ओतप्रोत अपने भाषणों से नौजवानों की रगो में दौड़ रहे खून को खौलने पर विवश किया करते थे। वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग नामों से लेख लिखकर अपनी बातों को क्षेत्रीय सीमाओं के बंधन से मुक्त रखते थे।

परतंत्रता के उस अत्यंत ही पीड़ादायक और घोर यातनाओं के दौर में, भगत सिंह के अलावा भी अनगिनत देशभक्तों ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दे दी। उन पूज्य हुतात्माओं के अथक परिश्रम, निरंतर प्रयास, त्याग, तपस्या और बलिदान का ही परिणाम है कि हम स्वतंत्र संवैधानिक राष्ट्र में स्वाँस ले पा रहे हैं। परन्तु आज के आधुनिक दौर में हम कहीं न कहीं उनके महत्वपूर्ण बलिदानों का मोल समझ पाने में असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं। आज जब हमारी वाणी और चेतना, सबकुछ स्वतंत्र है तो हम राष्ट्र को अधिक से अधिक देने की भावना से कोसों दूर बस ‘मैं और मेरा’ के प्रपंच में उलझ कर, अपने मूल कर्त्तव्यों से विमुख होते चले जा रहे हैं।

आज का आधुनिक समाज परिवर्तनशील है। परिवर्तन की इस बेला में आज प्राचीन विचारों एवं आदर्शों के समन्वय की महती आवश्यकता है ताकि भारत का पुनरुत्थान हो सके। हमारे समाज को न सिर्फ एक शहीद भगत सिंह अपितु ऐसे अनेक ऐतिहासिक एवं प्रेरणात्मक व्यक्तित्व से शिक्षा ग्रहण कर, नवीन एवं प्राणवान प्रतिभाओं को एकत्र कर सर्वसामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए नए भारत के निर्माण की अत्यन्त आवश्यकता है।

अंत में इस महान युवा क्रांतिकारी का संदेश आज के युवाओं के नाम:

“किसी ने सच ही कहा है, सुधार वृद्ध नहीं कर सकते। वे तो बहुत ही बुद्धिमान और समझदार होते हैं, वे हमारा उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। सुधार तो होते हैं युवाओं के परिश्रम, साहस, बलिदान और निष्ठा से, जिनको भयभीत होना आता ही नहीं और जो विचार कम और अनुभव अधिक करते हैं।”

90% भिखारी पाकिस्तानी: बोला सऊदी अरब- जायरीन के नाम पर जेबकतरों को भेजना बंद करो, हमारी जेल तुम्हारे कैदियों से भर गईं

विदेशों में पकड़े जाने वाले 90 प्रतिशत भिखारी पाकिस्तान (Pakistani Beggars) से हैं। दिलचस्प यह है कि इनमें से अधिकतर पाकिस्तानी जायरीन बनकर अरब देश में आते हैं और वहाँ पॉकेटमारी करने लगते हैं। सऊदी अरब ने कहा है कि इन पाकिस्तानी जेबकतरों की व​जह से उसकी जेलें भर गई हैं।

सऊदी अरब ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में पाकिस्तान को अपने हज कोटा से जायरीनों का चयन करने में सावधानी बरतने को कहा है। प्रवासी पाकिस्तानियों पर सीनेट की स्थायी समिति को बुधवार (27 सितंबर 2023) को सूचित किया गया कि पाकिस्तान से बड़ी संख्या में भिखारी विदेश जा रहे हैं, जिससे ‘मानव तस्करी’ को बढ़ावा मिला है।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के प्रवासी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव जुल्फिकार हैदर ने कुशल और अकुशल श्रमिकों के पाकिस्तान छोड़ने के मुद्दे पर सीनेट पैनल में एक चर्चा के दौरान यह खुलासा किया। इस दौरान हैदर ने समिति को सूचित किया कि अन्य देशों में गिरफ्तार किए गए ’90 फीसदी भिखारी’ पाकिस्तानी मूल के थे। उन्होंने बताया कि कई भिखारियों ने सऊदी अरब, ईरान और इराक की यात्रा के लिए उमराह वीजा का फायदा उठाया था।

उन्होंने ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि मक्का में मस्जिद अल-हरम जैसे पाक स्थलों पर पकड़े गए जेबकतरों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भी थे। इस दौरान सीनेट पैनल में मध्य-पूर्व को ‘जेबकतरों’ का मुख्य ठिकाना बताया गया।

सऊदी अरब इस बात से खासा नाराज है कि पाकिस्तान से भिखारी और जेबकतरे उमराह वीजा पर पहुँचते हैं। इसके पीछे की वजह ये है कि उन्हें इस देश की तरफ से रोजगार के लिए वहाँ नहीं बुलाया जाता, क्योंकि कुशल कामगारों के तौर पर अरबियों को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं होता है।

इसके लिए ये देश भारतीय और बांग्लादेशी कामगारों पर अधिक निर्भर रहते हैं। इस बात की तस्दीक खुद पाकिस्तान सीनेट पैनल में चर्चा के दौरान पाकिस्तान के प्रवासी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव जुल्फिकार हैदर ने की है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अब अकुशल लोगों की जगह कुशल कामगारों को तरजीह देता है।

सीनेट पैनल में चर्चा के के दौरान सीनेटर राणा महमूद-उल-हसन ने जापान जैसे देशों में कुशल श्रमिकों के बीच पाकिस्तान के तुलनात्मक रूप से कम प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि विदेशों में पकड़े गए भिखारियों में से अधिकांश पाकिस्तान से थे। उन्होंने बताया कि इराक और सऊदी अरब के राजदूतों ने सूचित किया था कि इनकी गिरफ्तारियों से उनके यहाँ बदमाशों को कैद में रखने तक की जगह नहीं बची है। इस वजह से मानव तस्करी का खतरा पैदा हो गया है।

एशियाड में अब तक 24 मेडल: भारतीय शूटर्स ने जीता गोल्ड, मणिपुर की रोशिबिना देवी की वुशु में चाँदी; पदक उनको किया स​मर्पित जिन्हें चीन ने नहीं दिया वीजा

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स (Asian Games) में भारतीय शूटर्स ने एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। यह मेडल 10 मीटर मेंस एयर पिस्टल में मिला है। भारतीय शूटर सरबजोत सिंह, अर्जुन सिंह चीमा और शिवा नरवाल ने यह कारनामा किया। इसके अलावा मणिपुर की रोशिबिना देवी नाओरेम ने वुशु में सिल्वर मेडल जीता है। भारत के नाम अब तक 6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज मेडल सहित कुल 24 पदक हो गए हैं।

एशियन गेम्स में भारतीय शूटर्स का लाजवाब प्रदर्शन जारी है। पाँचवे दिन गुरुवार (28 सितंबर, 2023) को मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल में भारतीय शूटर्स की तिकड़ी ने 1734 प्वाइंट के साथ गोल्ड पर निशाना साधा। गेम में चीनी शूटर्स 1733 प्वाइंट के साथ दूसरे नंबर पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। वहीं वियतनाम के शूटर्स ने 1730 प्वाइंट के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। एशियन गेम्स में भारतीय शूटर्स अब तक 4 गोल्ड मेडल समेत 13 पदक जीत चुके हैं।


वुशु में मिला सिल्वर

भारतीय वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी नाओरेम ने महिलाओं की 60 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता। एशियन गेम्स के इतिहास में इस खेल में यह भारत का दूसरा सिल्वर मेडल है। नाओरेम को फाइनल में चीन की जियाओवेई वू के हाथों हार का सामना करना पड़ा। नाओरेम ने अपना यह मेडल अरुणाचल प्रदेश के वुशु खिलाड़ियों न्येमन वांगसू, ओनिलु तेगा, मेपुंग लामगु को समर्पित किया। बता दें कि इन तीनों खिलाड़ियों को चीन ने वीजा देने से इनकार कर दिया था।

इससे पहले एशियन गेम्स के चौथे दिन यानी 27 सितंबर को भारतीय शूटर सिफ्ट कौर सामरा ने 50 मीटर एयर राइफल 3 पोजिशन में गोल्ड मेडल अपने किया था। वहीं, मनु भाकर, ईशा सिंह और रिदम सांगवान की तिकड़ी ने 25 मीटर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता था। इसके अलावा मेंस स्कीट में भारतीय शूटर अनंतजीत सिंह नरुका ने सिल्वर मेडल जीता था। वहीं वीर सिंह बाजवा और गुरजोत खांगुरा और अनंतजीत सिंह नरुका की तिकड़ी ने भी शूटिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके अलावा, 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन के टीम इवेंट में आशी, माणिनी और सिफ्ट की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता।

एशियन गेम्स में भारत ने जीते 24 मेडल

भारत को एशियन गेम्स में अब तक 6 गोल्ड सहित 24 मेडल मिल चुके हैं। भारतीय शूटर्स ने 4, घुड़सवारी में 1, और महिला क्रिकेट टीम ने 1 गोल्ड मेडल जीता है। इसके अलावा भारत को अब तक 8 सिल्वर मेडल मिले हैं। शूटिंग में 4, रोइंग में 2, सेलिंग में 1 और वुशु में 1 सिल्वर मिला है। ब्रॉन्ज की बात करें तो भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 10 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। रोइंग में 3, शूटिंग में 5 और सेलिंग में 2 ब्रॉन्ज मेडल मिले हैं।

बॉयफ्रेंड के लिए सड़क पर बुर्का वाली लड़कियों के बीच झोटा-झोटी, बिहार के सीवान का Video वायरल: इस्लामिया कॉलेज की बताई जा रही छात्राएँ

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बुर्का पहने कुछ लड़कियों को सड़क पर आपस में लड़ाई करते देखा जा सकता है। पीछे दूर खड़ी कुछ अन्य लड़कियाँ हँसते हुए वीडियो बना रही हैं। यह वीडियो बिहार के सीवान का बताया जा रहा है। लड़कियों के आपसी झगड़े के पीछे बॉयफ्रेंड का विवाद बताया जा रहा है। वीडियो रविवार (24 सितंबर 2023) का बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना सीवान के सिसवन ढला इलाके की है। वायरल वीडियो में दिख रहीं लड़कियाँ सीवान के इस्लामिया कॉलेज की छात्राएँ बताई जा रहीं हैं। माना जा रहा है कि रविवार को क्लास में पढ़ाई के दौरान दोनों का झगड़ा बॉयफ्रेंड के मुद्दे पर हुआ था। थोड़ी तनातनी के बाद क्लास में अस्थायी तौर पर दोनों खामोश हो गईं। बाद में कॉलेज बंद होने पर दोनों सड़क पर फिर से उसी बात पर झगड़ने लगी। इस दौरान दोनों के बीच लात-घूँसे चलने लगे। वायरल वीडियो में लाल रंग का बुर्का पहने लड़की ने काले बुर्के वाली छात्रा को खूब पीटा।

सीवान न्यूज़ के मुताबिक वीडियो में हमलावर की भूमिका में दिख रही लाल रंग के बुर्के वाली लड़की का एक लड़के से अफेयर चल रहा था। इस दौरान दोनों के बीच एक अन्य लड़की की इंट्री हो जाती है। वह अन्य लड़की वीडियो में काले रंग के बुर्के में दिख रही है जो पिटाई का शिकार हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच क्लासरूम में हुए विवाद का भी वीडियो बनाया गया है। यह वीडियो 8 सेकेंड का है, जबकि सड़क पर हो रही मारपीट का वीडियो 14 सेकेंड का है।

इस वीडियो को बनाने वाली भी इस्लामिया कॉलेज की छात्राएँ बताई जा रही हैं। झगड़े के दौरान वो हँस रही हैं। एक ने कहा, “ओ तेरे की।” आसपास कई दुकानें आदि दिख रहीं हैं जहाँ मौजूद दुकानदार और ग्राहक सिर्फ दर्शक की भूमिका में खड़े दिख रहे। हालाँकि ऑपइंडिया की वीडियो की पुष्टि नहीं करता।

इस वायरल वीडियो पर नेटिज़ेंस भी तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। फर्स्ट बिहार द्वारा 25 सितंबर 2023 को शेयर किए गए इस वीडियो पर सत्येंद्र सिंह नाम के यूजर ने इस लड़ाई को ‘इश्क में बौराई हसीनाओं की जंग’ बताया। मोहम्मद रेहान कुरैशी ने लिखा, “बुर्का पहिनी हैं। कमर अलग दिख रहा। इसी को बोलते हैं WWE बुर्का वाली।” शाश्वत ने सवाल किया कि जब सब एक जैसी दिख रहीं हैं तो लड़ते समय कन्फ्यूजन नहीं होता क्या ? वहीं अशोक कांत का दावा है कि एक बार उनके लिए भी 3 लड़कियाँ आपस में भिड़ गईं थी तब वो बाइक से भाग निकले थे।

चित्र साभार- @firstbiharnews ट्विटर पोस्ट पर आए कमेंट

फ़िलहाल इस मामले में अभी तक किसी भी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।