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बिहार में वोटों की गिनती शुरू होते ही रुझानों में आगे निकली NDA, नीतीश का दिख रहा है जलवा: जानिए अब तक महागठबंधन का क्या है हाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना शुरू हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने सभी 243 सीटों पर मतगणना 08:00 बजे से प्रारंभ करने की जानकारी दी। शुरुआती रुझानों में मीडिया लगातार एनडीए की बढ़त दिखा रहा है।

सबसे अच्छा प्रदर्शन अब तक जेडीयू का है। 182 सीटों पर रुझान दिख रहे हैं तो जेडीयू के पास 51-52 सीट बताई जा रही हैं। वहीं महागठबंधन फिलहाल के लिए रेस में आधे से ज्यादा मार्जिन से पीछे है। उनके हिस्से करीबन 61+ सीटें आ रही है। किसी भी दल को राज्य में जीतने के लिए 122 सीट जीतनी जरूरी होगी। इसके करीब अभी एनडीए ही है।

बता दें कि ECI की प्रक्रिया के अनुसार, मतगणना के क्रम में पहले डाक मत-पत्रों की गिनती हो रही है, उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के मतों की गिनती की जाएगी।

राज्य के 40+ मतगणना केंद्रों में कुल 4,372 गिनती टेबल लगाई गई हैं और लगभग 18,000 एजेंट्स तथा रिटर्निंग अधिकारियों को नियुक्त किया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से हो सके। मतगणना के दौरान पूरे राज्य में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी की गई है। सीआरपीएफ और राज्य पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की व्यवधान की स्थिति न बने।

किसी का उठा मीडिया से विश्वास, कोई ‘फर्जी’ बताने पर तुला: जानिए कैसे बिहार नतीजों से पहले एग्जिट पोल देख विपक्षी बौखलाए, अभी से रो रहे EVM-वोटचोरी का रोना

बिहार में दोनों चरणों में हुई रिकॉर्डतोड़ वोटिंग के बाद लोगों की दिलचस्पी एग्जिट पोल में थी, क्योंकि सब जानना चाहते हैं कि वोटरों का उत्साह वर्तमान नीतीश सरकार के पक्ष में है या 20 साल सत्ता में रहने के बाद एंटी इनकम्बैंसी फैक्टर का असर चुनाव पर पड़ा है। एग्जिट पोल के नतीजों ने ‘एक बार फिर नीतीशे कुमार’ पर मुहर लगा दी है। यही वजह है कि अभी से पटना में पोस्टर लग गए हैं- ‘टाइगर जिंदा है’

इससे पहले हम के प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, ”मैं पहले दिन से ही कह रहा हूँ कि एनडीए 160 सीटें जीतेगा और सरकार बनाएगा. एग्ज़िट पोल भी बता रहे हैं कि एनडीए को कम से कम 40 सीटें मिलेंगी।” बीजेपी और जेडीयू के नेता भी मान रहे हैं कि एग्जिट पोल से साबित हो गया है कि जनता ने एनडीए के पक्ष में वोट किया है। जनता को ‘जंगलराज-2’ नहीं चाहिए।

एग्जिट पोल पचा नहीं पा रहा महागठबंधन

विपक्ष एग्जिट पोल को पचा नहीं पा रहा है। महागठबंधन के सीएम चेहरा तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल को फर्जी करार देते हुए कहा है कि 18 नवंबर को महागठबंधन की सरकार बनेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मतगणना में किसी तरह की ‘गड़बड़ी’ की गई, तो जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि एग्जिट पोल गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के निर्देश के मुताबिक बनाया गया है।

तेजस्वी यादव ने कहा है कि एग्जिट पोल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की है, ताकि रिजल्ट अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया बिहार चुनाव में बगैर उम्मीदवार उतारे जोर-शोर से महागठबंधन का प्रचार कर रहे एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी है।

अखिलेश यादव ने एग्जिट पोल को ‘झूठा’ करार देते हुए इसे ‘भ्रमित’ करने वाला बताया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, जब चुनाव आयोग मतदान के कई दिनों तक वोटों का आँकड़ा नहीं दे पाता है तो ये चैनल कैसे एक घंटे में सब बता देते हैं।”

उन्होंने कहा, “इनके झूठ के ग्राफ़िक्स कई दिनों पहले से तैयार हो जाते हैं, जहाँ से भोजन-पानी का इंतज़ाम होता है ये झूठे चैनल उसकी पंगत में जा बैठते हैं। जिनको लगता भी है कि ये एग्जिट पोल सही हैं वो उप्र के लोकसभा के चुनाव का एग्जिट पोल देख लें जहाँ बड़े-बड़े भाजपाई सूरमाओं की हार हुई और फेक एग्जिट पोलों की भी।”

आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “एग्जिट पोल पहले भी गलत साबित हुए हैं और आगे भी गलत साबित होंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि 14 नवंबर को महागठबंधन और तेजस्वी यादव भारी मतों से जीतेंगे। बिहार की जनता ने एनडीए सरकार के खिलाफ वोट दिया है और तेजस्वी को सरकार बनाने के लिए वोट दिया है। एग्जिट पोल देखकर जो लोग भ्रम में हैं, उन्हें भ्रम में रहने दें। सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”

आरजेडी नेता और बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि हाई मतदान का ज्यादा होना, हमेशा सत्ताधारी दल के खिलाफ जनता का जनादेश माना जाता है। हमें अंतिम परिणाम का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बिहार में ‘महागठबंधन’ आराम से सरकार बनाएगा। एग्जिट पोल हकीकत से कोसों दूर हैं।

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने एग्जिट पोल पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिहार की जनता तेजस्वी यादव को सीएम बनाना चाहती है। जनता ने नीतीश सरकार को हटाने का फैसला कर लिया है।”

महागठबंधन की घटक कॉन्ग्रेस का भी यही हाल है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने (12 नवंबर 2025) बुधवार को कहा, “मैं एग्जिट पोल पर कुछ नहीं कहूँगी। जब नतीजे आएँगे, तब इस पर बात करूँगी। उन्होंने कहा कि यहाँ लोगों के मताधिकार के साथ हेराफेरी की गई है इसलिए बिहार सबक सिखाएगा और मुझे पूरा विश्वास है कि महागठबंधन की सरकार बनेगी।”

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने तो यहाँ तक दावा कर दिया है कि बिहार में दोनों गठबंधन के बीच मुकाबला बराबरी का था। यदि एनडीए को 140 से अधिक सीटें मिलती है तो ये ‘वोटर लिस्ट और ईवीएम में हेरफेर’ का कमाल होगा।

एग्जिट पोल पर दिग्विजय सिंह ने अविश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें एग्जिट पोल पर कभी भरोसा ही नहीं रहा। ये चुनाव एकतरफा नहीं बल्कि दोनों गठबंधन के बीच बराबरी का था। वहीं सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल के नतीजो को खारिज करते हुए कहा कि एग्जिट पोल कब सही था? अगर वोट बढ़ा है तो कहाँ बढ़ा है। जाहिर है बिहार की जनता ने महागठबंधन को वोट दिया है।

कॉन्ग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि एग्जिट पोल कभी सटीक नहीं होते। ये सिर्फ एक अनुमान होते हैं कि क्या हो सकता है। इन्हें अंतिम नतीजा मान लेना सही नहीं होगा। वहीं आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े करते हुए अभी से कहना शुरू कर दिया है कि वोट चोरी हुई है उसका बहुत व्यापक असर इस चुनाव पर पड़ेगा।

बिहार में महागठबंधन के नेता जहाँ एग्जिट पोल को नकारने में लगे हैं और इसे भ्रम फैलाने वाला कह रहे हैं। अधिकारियों पर दबाव बनाने का तरीका बताने में लगे हैं, वहीं एनडीए के घटक दल के नेता इससे काफी उत्साहित दिख रहे हैं।

एग्जिट पोल में एनडीए की बन रही सरकार

अगर ‘पोल ऑफ पोल्स’ की बात करें तो एनडीए को 148 सीटें, महागठबंधन को 88 सीटें और अन्य के खाते में 7 सीटें आ रही हैं। किसी एग्जिट पोल में जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती हुई दिख रही है, तो किसी एग्जिट पोल में बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलती दिखाई दे रही है। लेकिन हर एग्जिट पोल एनडीए की सरकार बनवा रहा है।

MATRIZE एग्जिट पोल के अनुसार, बिहार चुनाव 2025 में NDA जीत हासिल करेगी। चुनाव में NDA को 147-167 सीटें मिलने वाली हैं। वहीं महागठबंधन को 70-90 सीटों पर सिमटकर रह जाएगा। उधर अन्य पार्टियों को 3-6 सीटें मिलने की संभावना है।

People’s Insight के एग्जिट पोल के हिसाब से बिहार चुनाव में NDA 133-148 सीटें हासिल करेगी। वही महागठबंधन को 87-102 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि जनसुराज पार्टी केवल 0-2 सीटों पर सिमटकर रह जाएगी। उधर अन्य पार्टियों की झोली में 3-6 सीटें जाने की संभावना है।

दैनिक भास्कर के एग्जिट पोल में भी NDA को बढ़त मिल रही है। इसमें NDA 145-160 सीटें, महागठबंधन को 73-91 सीटें मिलने का अनुमान है। जनसुराज का खाता भी खुल सकता है, पार्टी को 0-3 सीटें मिल सकती हैं। वहीं अन्य दल 5-10 सीटों पर जीत हासिल कर सकते हैं।

Chanakya Strategies के एग्जिट पोल में NDA को 130-138 सीटें, महागठबंधन को 100 से 108 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

‘वोट चोरी’ और EVM के मत्थे फोड़ना चाहते हैं हार का ठीकरा

हालाँकि बिहार विधानसभा चुनाव में 2020 में एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। उस वक्त राज्य में महागठबंधन की जीत का दावा ज्यादातर एग्जिट पोल में किया गया था। लेकिन नतीजों ने महागठबंधन को फिर निराश किया था। यहाँ नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। ऐसा ही 2015 के विधानसभा चुनाव के वक्त भी हुआ था।

फिलहाल एग्जिट पोल में मिल रही हार को लेकर महागठबंधन अभी से EVM और SIR पर ठीकरा फोड़ने की कोशिश में जुट गया है। एक तरफ ये कहा जा रहा है कि जनता बदलाव लाने जा रही है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार 18 नवंबर को शपथ लेगी। वहीं वोट चोरी, ईवीएम में गड़बड़ी जैसे बहाने तैयार कर चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया में ‘गड़बड़ी’ को निशाना बनाने की पूरी तैयारी है।

तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि अगर काउंटिग धीमा हुआ तो इसका मतलब ‘हेराफेरी’ है, वहीं अखिलेश यादव कह रहे हैं कि भ्रम फैला कर चुनावी गिनती में गड़बड़ी करने की तैयारी है। यानी चुनाव में हार हुई तो मोदी सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर हराया दिया और जीत हुई तो जनता ने जिताया। आखिर विपक्ष कब अपनी हार को स्वीकार करेगा। ताकि नतीजों का विश्लेषण कर अपनी पकड़ जनता में बनाने के लिए खून-पसीना बहा सके।

‘यह जानते हुए भी कि गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है’: गोहत्या केस में कासिम-इस्माइल-अकरम हाजी को उम्रकैद की सजा, पढ़ें- कोर्ट ने क्या-क्या कहा

गुजरात के अमरेली सत्र न्यायालय ने गोहत्या मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों की पहचान कासिम हाजी सोलंकी, सतार इस्माइल सोलंकी और अकरम हाजी सोलंकी के रूप में हुई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह जानते हुए भी कि गाय हिंदू धर्म का एक पवित्र प्रतीक है, इन तीनों ने गाय का वध करके समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाई।

क्या है पूरा मामला?

मामला नवंबर 2023 का है, जब अमरेली सिटी पुलिस ने एक गुप्त सूचना पर बहारपाड़ा गाँव के मोटा खटकीवाड़ में एक घर पर छापा मारा था। यहाँ से पुलिस को 40 किलो गोमांस बरामद हुआ था। यह घर कासिम हाजी सोलंकी नाम के एक व्यक्ति का था, जो मौके पर ही मिला था।

बाद में जब इसे एफएसएल को भेजा गया, तो पता चला कि वह गोमांस ही था। इसके साथ ही उसके पास से तराजू समेत कई चीजें बरामद हुईं, जिससे पता चला कि वह गोमांस भी बेचता था। पूछताछ के दौरान उसके दो अन्य साथियों के नाम उजागर हुए, लेकिन छापेमारी के बाद वे मौके से भाग गए, जिन्हें बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद, तीनों के खिलाफ अमरेली सिटी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद मामला सिविल कोर्ट में पहुँचा, जहाँ से इसे 2024 में अमरेली सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। सत्र न्यायालय में सुनवाई के बाद मंगलवार (11 नवंबर 2025) को प्रधान जिला न्यायाधीश रिजवाना बुखारी की कोर्ट ने तीनों आरोपितों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

कोर्ट ने क्या कहा?

फैसले में कोर्ट ने माना कि दोषियों ने यह जानते हुए भी कि गाय हिंदू धर्म का एक पवित्र प्रतीक है, गाय का वध किया और उनके पास से गोमांस भी बरामद हुआ। इसलिए आईपीसी की धारा 295 (किसी अन्य धर्म का अपमान करने के इरादे से समुदाय द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तुओं को नष्ट करना) और 429 (गोवंश की हत्या) के तहत अपराध बनता है।

इसके अलावा कोर्ट ने सभी को गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 1954 की धारा 5, 6 (सी), 8 (2), 8 (4) और 10 के तहत भी दोषी ठहराया है। कोर्ट ने पशु संरक्षण अधिनियम, 1954 की धारा 8(2) और 10 का उल्लंघन करने पर सभी को आजीवन कारावास और 5 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

इसके अलावा, आईपीसी की धारा 295 और 114 के तहत अपराध के लिए तीन साल की कैद और 3 हजार रुपए का जुर्माना, गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम, 1954 की धारा 5 और 8(4) का उल्लंघन करने पर पाँच साल की कैद और 5 हजार रुपए का जुर्माना और सात साल की कैद और 1 लाख रुपए का जुर्माना शामिल है।

ये सभी सजाएँ एक साथ काटनी होंगी। इसके अलावा ये सभी फिलहाल जमानत पर बाहर थे, इसलिए इन्हें वापस जेल भेजने का आदेश दिया गया है।

यह तर्क कि पुलिस ने उन्हें फँसाया, निराधार

कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपितों ने दावा किया कि वे निर्दोष हैं और पुलिस ने उन्हें झूठा फँसाया है। इसके लिए तर्क दिया गया कि पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह से पंचनामा नहीं कराया था और वे लोग पुलिस के ही थे। पुलिस पर एकतरफा जाँच करने का भी आरोप लगाया गया।

लेकिन कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कानून के अनुसार, पुलिस के गवाहों का साक्ष्य अन्य गवाहों के साक्ष्य जितना ही महत्वपूर्ण है और ऐसा कोई नियम नहीं है कि इसकी पुष्टि अन्य स्वतंत्र गवाहों से भी की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में पुलिस पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है और आरोपित ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकता।

इसके अलावा कोर्ट ने पशु चिकित्सक और एफएसएल के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा, जिन्होंने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि पशु का मांस गोमांस था। दूसरी ओर आरोपित इस बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए कि गोमांस कहाँ से आया था।

जबकि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और अन्य गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हो गया कि इन तीनों ने मिलकर गोहत्या की थी और यह कृत्य गोमांस बेचने के इरादे से किया गया था।

यदि कोर्ट उदार रुख अपनाएगा तो इसका समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा

आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सजा की मात्रा तय करते समय कोर्ट को सख्त रवैया नहीं दिखाना चाहिए, लेकिन साथ ही अगर उदार रवैया अपनाया जाता है, तो इसका समाज और आरोपितों की आपराधिक मानसिकता पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है, इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बाद सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

(यह रिपोर्ट मूल रुप से गुजराती में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जहाँ गिरा माँ सती का कंधा, वहाँ हर साल अपने आप बढ़ती है भैरव बाबा की मूर्ति: जानिए 51 शक्तिपीठों में से एक ‘महामाया मंदिर’ की कहानी, CM विष्णुदेव साय ने ‘कायाकल्प’ का लिया संकल्प

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार (12 नवंबर 2025) को रतनपुर में कलचुरी कलार समाज के वार्षिक महोत्सव में हिस्सा लिया। सबसे पहले, मुख्यमंत्री ने माँ महामाया देवी के दरबार में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख, समृद्धि और विकास के लिए आशीर्वाद माँगा।

मुख्यमंत्री साय ने माँगा छत्तीसगढ़ के लिए आशीर्वाद

सीएम विष्णुदेव साय ने इस मौके पर कहा कि माँ महामाया की कृपा से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। सीएम विष्णुदेव ने याद दिलाया कि कलचुरी राजवंश ने रतनपुर समेत देश में लगभग 1200 वर्षों तक शासन किया और उनका राज खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक था।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि माँ महामाया मंदिर के विकास के लिए ‘भारत दर्शन योजना‘ में एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके बाद रतनपुर का पूरी तरह कायाकल्प हो जाएगा। उन्होंने कहा कि खनिज, वन और जल जैसे संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ को हम सब मिलकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेंगे।

जनता को सौगात देते हुए सीएम साय ने ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में 100 बिस्तर वाला अस्पताल खोलने का ऐलान किया। साथ ही, उन्होंने कलचुरी समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपए देने की भी घोषणा की।

माँ महामाया मंदिर: जहाँ गिरा था देवी सती का दाहिना कँधा

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद रतनपुर का माँ महामाया देवी मंदिर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। यह मंदिर न सिर्फ प्राचीन कलचुरी राजवंश की राजधानी रहा है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान भी है।

यह पवित्र स्थान 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसे ‘कौमारी शक्तिपीठ‘ के नाम से भी जाना जाता है। सदियों से यहाँ देवी महामाया की पूजा कोसलेश्वरी देवी यानी दक्षिण कोसल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में की जाती है।

पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव जब देवी सती के शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में भटक रहे थे। उस वक्त भगवान विष्णु ने उनको वियोग मुक्त करने के लिए सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के टुकड़े कर दिये थे। माता सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे वहीं शक्तिपीठ स्थापित हुए।

मंदिर का निर्माण कलचुरी राजा रत्नदेव प्रथम ने लगभग 1050 ईस्वी में करवाया था। मंदिर की वास्तुकला 12वीं से 13वीं शताब्दी की अद्भुत कला को दर्शाती है। मंदिर मूल रूप से महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों देवियों को समर्पित था, लेकिन वर्तमान मंदिर में महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा होती है। इसी परिसर में भगवान शिव और हनुमान जी के प्राचीन मंदिर भी मौजूद हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

भैरव बाबा का रहस्य और नवरात्रों की आस्था

यहाँ आने वाले भक्तों के लिए एक खास नियम है। वे माँ महामाया के दर्शन से पहले थोड़ी दूरी पर स्थित भैरव बाबा के मंदिर पर रुककर दर्शन करते हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास प्रचलित है कि भैरव बाबा की यह प्राचीन प्रतिमा की ऊँचाई हर साल अपने आप बढ़ती जा रही है, जो इसे रहस्य और आस्था का केंद्र बनाती है।

साल में दो बार आने वाले नवरात्रों के दौरान यहाँ विशेष उत्सव होता है। भक्त नौ दिनों तक उपवास रखते हैं और अपनी इच्छाएँ पूरी करने के लिए अखंड मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करते हैं, क्योंकि यहाँ की मान्यता है कि सच्चे मन से माँगी गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। रतनपुर का यह पवित्र धाम आस्था, संस्कृति और गौरव का एक अनूठा संगम है।

कैसे पहुँचे माँ महामाया के पवित्र दरबार तक?

रतनपुर स्थित माँ महामाया का यह पवित्र धाम छत्तीसगढ़ की धार्मिक पहचान और गौरव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आगमन ने भी इस पवित्र नगरी के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को मजबूत किया है। यदि आप इस शक्तिपीठ के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं, तो यहाँ तक पहुँचना बहुत ही आसान है।

हवाई यात्रा- अगर आप हवाई जहाज से आ रहे हैं, तो रतनपुर से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट रायपुर एयरपोर्ट है, जो यहाँ से लगभग 156 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से उतरने के बाद, भक्त टैक्सी या कैब किराए पर लेकर सीधे मंदिर तक पहुँच सकते हैं। यह रास्ता आरामदायक और सुगम है।

रेल यात्रा- रतनपुर का सबसे नजदीकी और प्रमुख रेलवे स्टेशन बिलासपुर जंक्शन है, जो यहाँ से सिर्फ 33 किलोमीटर की दूरी पर है। बिलासपुर जंक्शन पहुँचने के बाद, मंदिर तक जाने के लिए आपको नियमित रूप से टैक्सी और बस सेवाएँ आसानी से मिल जाएँगी।

सड़क यात्रा- सड़क मार्ग से रतनपुर की कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है। छत्तीसगढ़ के सभी बड़े शहरों से रतनपुर के लिए नियमित राज्य परिवहन बसें और निजी वाहन (टैक्सी) सेवाएँ हर समय उपलब्ध रहती हैं। सड़क का सफर आरामदायक और सुविधाजनक है। यह पवित्र धाम अपनी आस्था और भव्यता के कारण दूर-दूर से भक्तों को खींच लाता है।

आतंकियों की छवि सुधारने में लगी वामपंथी मीडिया, Al Jazeera-Guardian-CNN ने भी साधी इस्लामी टेरर पर चुप्पी: जानिए ‘भगवा’ को बदनाम करने वालों ने क्यों बदला दिल्ली ब्लास्ट पर अपना चश्मा

दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी कार ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। वहीं दूसरी ओर इस निंदनीय आतंकी घटना पर वामपंथी मीडिया अपना नैरेटिव चला रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया, द वायर जैसे मीडिया पोर्टल दिल्ली बम धमाके में संदिग्ध मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति दिखाकर उनकी छवि सुधारने में लगी हुई है।

उधर, CNN, अल जजीरा(Al Jazeera), द गार्जियन( The Guardian), डॉन (Dawn) जैसे विदेशी मीडिया संस्थानों ने दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट को ‘घातक’ नाम देने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाए। लेकिन यही विदेशी मीडिया संस्थानों ने धड़ल्ले से रिपोर्ट्स छापी कि कैसे भारत की सरकार दिल्ली ब्लास्ट के पीछे ‘साजिश’ तलाश रही है। इन रिपोर्ट्स में तीन एजेंडे साफ नजर आए-

  1. भारत सरकार जबरन मुस्लिमों को दिल्ली ब्लास्ट का आरोपित साबित करने में लगी है।
  2. दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट जैसे ‘घातक’ हमले से पूरा भारत ‘डर’ गया है, यहाँ मोदी सरकार की नाकामी को दर्शाया गया।
  3. सवाल उठाए गए कि क्या भारत अप्रैल में हुए पहलगाम हमले के बाद तय की गई दुश्मन को सीधा जवाब देने वाली नीति पर कायम रहेगा?

इन सवाल और आरोपों के माध्यम से विदेशी मीडिया ने भारत सरकार को जमकर घेरा। यह विदेशी मीडिया का आम तरीका है भारत में मुस्लिम-पीड़ित को साबित करने का और वही घिसा-पीटा मोदी सरकार को ‘भगवा राजनीतिवाद’ दिखाने को और यह दर्शाने का कि मोदी सरकार ने जिन्हें बम धमाके का संदिग्ध बनाया है, इसका कारण केवल उनकी मुस्लिम पहचान है।

वामपंथी मीडिया का आतंकियों की छवि सुधारने का प्रोपेगेंडा

देश की वामपंथी मीडिया ने दिल्ली में आतंकी ब्लास्ट के संदिग्ध डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी की छवि को सुधारने के मिशन पर उतर गई। जैसे उमर नबी एक सीधा व्यक्ति है और उसने अनजाने में दिल्ली में इतना बड़ा ब्लास्ट कर दिया हो।

द वायर ने अपने लेख में पुलवामा में रहने वाले उमर नबी के परिवार की पीड़ा प्रस्तुत की। यह लेख इस तरह लिखा गया है कि पढ़ने पर यह एहसास होता है मानो लेखक आतंक के आरोपों में शामिल लोगों को ‘पीड़ित’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हो।

The Wire का लेख

उमर नबी के परिवार में उसके अब्बू के कथनों को प्रमुखता देकर यह दिखाया गया है कि वे अन्याय और दुख झेल रहे हैं, जबकि यह तथ्य नजरअंदाज कर दिया गया है कि इन्हीं का बेटा दिल्ली धमाके का संदिग्ध है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के इस रिपोर्ट की लेखन शैली का अंदाज साफतौर पर दिखाता है कि दिल्ली धमाके का संदिग्ध डॉक्टर मुजम्मिल अहमद ‘पीड़ित’ है। रिपोर्ट में डॉ. मुजम्मिल की कॉलेज सीनियर डॉ. मोनिका लांघेह की प्रतिक्रिया दिखाई गई, वह मुजम्मिल के बारे में जानकर स्तब्ध हुईं हैं और कहती हैं, “एक श्रेष्ठ पद के व्यक्ति को गिरते देखा।” यह रिपोर्ट एक तरह से पाठक में मुजम्मिल के प्रति सहानुभूति जगाती है।

टाइम्स ऑफ इंडिया का लेख

उधर, भारत की मीडिया में दिल्ली ब्लास्ट में शामिल आतंकी उमर नबी की भाभी और आतंकी मुजम्मिल की अम्मी की ‘विक्टिम कार्ड’ वीडियो भी खूब प्रसारित की।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट

जहाँ उमर नबी की भाभी मुजमिल ने उमर नबी के बचपन और पढाई पर बात करते हुए उसे एक बेहतर बेटे और इंसान के रूप में पेश किया। यह माहौल बनाती है कि लोग सोच सकें- “ऐसा शांत-स्वभाव का व्यक्ति कैसे इतने बड़े आतंक जगत में शामिल हो गया?”

वहीं फरीदाबाद में 360 किलो विस्फोटक और हथियार के साथ पकड़े गए डॉ. मुजम्मिल, जो दिल्ली ब्लास्त का संदिग्ध भी है, उसकी अम्मी ने बेटे को बेगुनाह होने की बाते कहीं और आतंक के आरोपों को पूरी तरह नकारा। इस बयान के हवाले से Mint ने अपनी रिपोर्ट में आंतकी के परिवार को ‘बेबस’ और ‘अन्याय’ झेलने रूप में दर्शाया।

LiveMint की रिपोर्ट

आतंकी की अम्मी के दुख और भरोसे को, “मेरा बेटा ऐसा नहीं कर सकता, हमें तो किसी ने बताया कि उसे पकड़ लिया गया” जैसे बातें लिखकर पाठक के सामने आतंकी की छवि को साफ सुथरी प्रदर्शित करने की कोशिश की गई।

दिल्ली ब्लास्ट पर विदेशी मीडिया का प्रोपेगेंडा

दिल्ली ब्लास्ट पर विदेशी मीडिया ने भी अपने नैरेटिव को आगे बढ़ाया। तमाम तरीके के प्रोपेगेंडा चलाकर ब्लास्ट के दिल्ली धमाके को भारत की नाकामी दर्शाया गया। लेकिन मुस्लिम पहचान वाले संदिग्ध आरोपितों की बात तक नहीं की गई। यहाँ विदेशी मीडिया का इस्लामी कट्टरपंथी सोच सामने आती है। Dawn से लेकर अल जजीरा और द गार्जियन ने धड़ल्ले से दिल्ली ब्लास्ट को कवर करते हुए ऐसी रिपोर्ट्स छापी हैं।

द गार्जियन की इस रिपोर्ट में दिल्ली ब्लास्ट को एक बेहद घातक और डरावना हमला बताया गया है, जिससे पूरे भारत में दहशत फैल गई। लेख की शुरुआत ही इस तरह की भाषा से होती है कि यह घटना भारत की राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

द गार्जियन की रिपोर्ट

अल जजीरा की इस रिपोर्ट में सवाल उठाए गए कि कैसे भारत की मोदी सरकार दिल्ली ब्लास्ट पर इतने आनन-फानन में आरोप लगाने में जुटी हुई है। रिपोर्ट में पीएम मोदी का पहलगाम हमले के बाद दिए गए बयान- आतंकी हमले को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा का हवाला देते हुए सवाल किया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष शुरू किए बिना कथित अपराधियों को दोषी ठहरा दिया है।

अल जजीरा की रिपोर्ट

इस रिपोर्ट में दिल्ली ब्लास्ट को लेकर डर और असुरक्षा का माहौल उभारने की कोशिश की गई है। लेख में कहा गया, “दिल्ली धमाका ने पूरे देश को सतर्क कर दिया है।” यानी इस विस्पोट से पूरा देश सतर्क और डर गया है। इस तरह का वाक्य भारत को एक डर से घिरे देश के रूप में दिखाने की कोशिश है और भारत की सुरक्षा व्यवस्था को नाकाम बताने जैसा दावा है।

अल जजीरा की रिपोर्ट

अमेरिकन मीडिया CNN ने अपनी इस रिपोर्ट में दिल्ली में आतंकी ब्लास्ट और अगले ही दिन पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुए ब्लास्ट को समान बताने की कोशिश की गई। जबकि असलियत यह है कि दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार संदिग्धों के सीधे संबंध पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से पाए गए हैं। इसके बावजूद भारत ने अब तक पाकिस्तान को बिना ठोस सबूत के दोषी नहीं ठहराया है।

CNN की रिपोर्ट

उधर, आतंक को पनाह देने वाले पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जो ब्लास्ट हुआ वह एक सुसाइड बॉम्बिंग है। जिसके तार अब तक भारत से दूर-दूर तक जुड़ने के कोई सबूत नहीं है। तब भी पाकिस्तान ने बिना तथ्यों के सीधा भारत पर हमले के आरोप लगा डाले।

दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल

फिर बात करें दिल्ली ब्लास्ट के तारों की और फरीदाबाद में सामने आए आतंकी मॉड्यूल की तो इस ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार, विस्फोट और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जाँच में यह साफ हुआ है कि यह एक बड़ा आतंकी नेटवर्क था। जाँच एजेंसियों को फरीदाबाद, सहारनपुर, लखनऊ समेत कुछ जिलों से 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जो सीधे दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ रही है।

इसके अलावा जिस i20 कार से ब्लास्ट हुआ, उसमें बैठा डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी के तार भी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े। उसके दोस्त सज्जाद अहमद और परिवार वालों से पूछताछ की गई तो सामने आया कि वह संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में शामिल था। जाँच एजेंसियों को यह भी शक है कि फरीदाबाद से गिरफ्तार आतंकी मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड डॉ. शाहीना का भी दिल्ली ब्लास्ट में बड़ा रोल हो सकता है। डॉ. शाहीना पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की महिला ट्रेनर थी, उसके पास से एके-47 और हथियार बरामद हुए।

यहाँ तक कि भारत सरकार ने दिल्ली ब्लास्ट की घटना को आतंकी हमला बताने में कोई संकोच नहीं किया। सरकार ने कहा कि यह हमला निंदनीय था और पीएम मोदी ने भूटान के मंच से चेतावनी दी कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

दिल्ली ब्लास्ट पर सरकार की कार्रवाई और इस्लामी कट्टरपंथ सोच

दिल्ली ब्लास्ट पर भारत की मोदी सरकार की कार्यवाही जारी है। जाँच एजेंसिया अब तक दोषियों के काफी करीब पहुँच चुकी है। यहाँ तक कि दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी और उसके परिवार पर भी जाँच एजेंसियों ने शिकंजा कसा है। हमले की जाँच में रोजाना नई परते खुल रही हैं। लखनऊ के सहारनपुर से गिरफ्तार डॉ. शाहीन को लेकर भी जाँच एजेंसियाँ बड़ा शक जता रही हैं क्योंकि वह जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर है।

इन सब सबूतों और जाँच से साफ स्पष्ट होता है कि भारत सरकार आतंक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कितनी सक्रिय है। वहीं अब तक कि जाँच से यह भी साफ है कि संदिग्ध आरोपितों की कौम एक ही है। सभी पकड़े गए लोगों की पहचान मुस्लिम ही है। वैसे ये कोई चौंकने वाली बात नहीं है क्योंकि भारत में अब तक जो भी आतंकी हमले या ब्लास्ट हुए हैं उसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथी की विचारधारा ही है। फर्क सिर्फ यह है कि इस बार हमला देश के भीतर बैठे इस्लामी कट्टरपंथों के जरिए किया गया है।

विदेशी मीडिया की इस्लामी कट्टरपंथ पर चुप्पी

अब वापस आते हैं विदेशी मीडिया की दिल्ली ब्लास्ट को लेकर छापी गई रिपोर्ट्स पर। यहाँ बड़े-बड़े विदेशी मीडिया संस्थानों ने दिल्ली ब्लास्ट को लेकर बेहतर तरीके से खबरें छापीं और पाठकों को हर मिनट अपडेट किया लेकिन यह सब अपना नैरेटिव ध्यान में रखते हुए किया गया। कहीं दिल्ली ब्लास्ट को ‘घातक’ हमला करार दिया गया तो कहीं भारत की मोदी सरकार पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए गए। लेकिन संदिग्धा आरोपितों पर कोई खबरें नहीं छापी गईं, क्योंकि उनकी पहचान ‘मुस्लिम’ थी।

ये बिल्कुल वैसा ही है, जैसे विदेशी मीडिया हमेशा से करती आई है। एक बार फिर विदेशी मीडिया की इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा उजागर हुई है। ये मीडिया CAA, NRC और आर्टिकल 370 को मुस्लिमों के खिलाफ कार्यवाही बताने में नहीं हिचकिचाती है। तब भारत में मोदी सरकार की ‘भगवा राजनीति’ पर बड़े-बड़े लेख लिखे जाते हैं। लेकिन अब जब भारत की राजधानी में आतंकी हमला हुआ और आरोपित मुस्लिम हैं तो वे चुप्पी साधे बैठे हैं।

आरोप लगाए गए कि मोदी सरकार पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अपनी नई नीति को साबित करने के लिए पाकिस्तान पर आरोप लगाने में जल्दबाजी कर रहा है। बता दें जिस नीति की बात हुई वह भारत की आतंकी हमले पर ‘युद्ध की कार्रवाई’ के कड़े संदेश हैं। तो विदेशी मीडिया को जान लेना चाहिए कि भारत अब चुप नहीं बैठता है, यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिया जा चुका है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की बात आएगी तो भारत सबसे आगे रहेगा। इसका उदाहरण भारत की मोदी सरकार URI स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर और अन्य ऑपरेशन चलाकर दे चुकी है और आगे भी देती रहेगी।

भारत की वामपंथी मीडिया का दोहरा रवैया

यहाँ सिर्फ विदेशी मीडिया तक बात सीमित नहीं हो जाती है। बल्कि भारत के कुछ वामपंथी मीडिया संस्थान भी अपना नैरेटिव गढ़ने के लिए दिल्ली में हुए निंदनीय आतंकी धमाके पर प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर देते हैं। इन मीडिया संस्थानों ने दिल्ली ब्लास्ट के संदिग्ध आरोपितों की छवि सुधारने को लेकर खबरें छापी। लोगों को इस भ्रम में डाला गया कि डॉ. मुजम्मिल और डॉ. उमर नबी जैसे आतंकी है तो आम इंसान ही लेकिन पता नहीं कैसे उन्होंने दिल्ली में ब्लास्ट कर दिया।

आतंकियों की छवि बदलने के लिए छापी गई खबरों का उद्देश्य साफतौर पर पारदर्शी था। वामपंथी मीडिया केवल यह साबित करने में लगी हुई थी कि इस्लामी कट्टरपंथी जैसा कुछ नहीं होता है और मुस्लिम को आतंकी बताना गलत है। इन मीडिया संस्थानों ने यहाँ जाँच एजेंसियों के उन पुख्ता सबूतों को नजरअंदाज किया, जिसमें साफ कहा गया है कि दिल्ली ब्लास्ट एक आतंकी महला था और इतना ही नहीं पकड़े गए आतंकियों ने भी कबूला कि वे इससे भी बड़ी साजिश रच रहे थे।

अब इतना तो साफ हो गया है कि चाहे भारत पर आतंकी हमला हो या युद्ध की स्थिति क्यों न आ जाए। देश का वामपंथी मीडिया अपना मुस्लिम पीड़ित वाला नैरेटिव गढ़ने के लिए आतंकियों को भी सफेद चोला पहनाने में नहीं कतराएगा। वहीं विदेशी मीडिया भी लगातार तथ्यों को जाँचे बिना भारत पर हमलावर रहेगा और इस्लामी कट्टरपंथी की विचारधारा को आगे बढ़ाता रहेगा।

30 दिन में खुफिया एजेंसियों ने आतंक के 8 बड़े मंसूबों पर पानी फेरा, देश भर से पकड़े गए आतंकी: 3000+ किलो बारूद-RDX-IED जब्त, बड़ी तबाही की थी तैयारी

भारतीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे देश में 8 बड़े आतंकी साजिशों को बीते 30 दिनों में नाकाम किया है। इसके बावजूद दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके ने यह सबक दिया कि एक छोटी सी चूक भी आतंकियों के लिए विनाश लाने का मौका साबित हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीते एक महीने में लगभग 3000 किलो से अधिक मात्रा के विस्फोटक, 20 लाख रुपए आईईडी बनाए जाने वाले सामान, बंदूकें, पिस्तौल, कारतूस, कई लीटर अरंडी का तेल- जिससे राइसिन जहर बनाया जाता है और आतंकियों के काम आने वाली कई अन्य चीजें जब्त की हैं।

खुफिया एजेंसियों के लगातार धर पकड़ के चलते ऐसा अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोफ्त में आकर आतंकियों ने लाल किला धमाका अंजाम दिया। आईए जानते हैं देश के किन हिस्सों से सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों को पड़कर देश को सुरक्षित करने में अपनी भूमिका निभाई।

दिल्ली NCR से मिला 2,900 किलो विस्फोटक

10 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस ने फरीदाबाद से 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की। इसमें अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर (गंधक) शामिल थे।

इस मामले में डॉ. मुज़म्मिल गनई और डॉ. आदिल को गिरफ्तार किया गया। बरामद सामग्री से सैकड़ों IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाए जा सकते थे। इनसे कई जगहों पर बड़े पैमाने पर धमाके किए जा सकते थे। यह बरामदगी सीधे तौर पर दिल्ली के लाल किला धमाके से जुड़ी बताई जा रही है।

गांधीनगर में ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़

ब्लास्ट से ठीक दो दिन पहले, 8 नवंबर 2025 को गुजरात एटीएस ने गांधीनगर में एक बड़े ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इसमें तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक एमबीबीएस डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सैयद भी शामिल है।

इन लोगों के पास से सुरक्षा एजेंसियों को 2 Glock पिस्तौल, 1 Beretta पिस्तौल, 30 कारतूस और 4 लीटर कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) मिला। अरंडी के तेल से ISIS समेत दुनिया भर के कई आतंकी संगठन घातक राइसिन जहर बनाने पर प्रयोग कर रहे हैं।

राइसिन जहर सायनाइड से भी ज्यादा खतरनाक है। इसे खाने और इंजेक्शन के साथ साथ हवा के जरिए भी फैलाया जा सकता है। राइसिन की बेहद छोटी सी मात्रा बड़े पैमाने पर लोगों को मारकर तबाही मचा सकती है।

यह मॉड्यूल ISI के समर्थन से काम कर रहा था और और ISIS-खुरासान प्रांत (ISKP) से इसे अलग-अलग निर्देश मिल रहे थे। हथियारों की सप्लाई ड्रोन के जरिए सीमा पार से की जा रही थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन आतंकियों ने दिल्ली व अहमदाबाद सहित कई शहरों में हमलों की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद में RSS कार्यालय और भीड़भाड़ वाले बाजारों की रेकी तक की थी।

राजस्थान ATS ने पकड़ा TTP का आतंकी

7 नवंबर 2025 को राजस्थान एटीएस ने सांचोर, जालौर से मौलवी ओसामा उमर को गिरफ्तार किया। वह पिछले 4 वर्षों से अफगानिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के शीर्ष कमांडरों से संपर्क में था।

ओसामा युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था और दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भागने की फिराक में था। इसी दौरान खुफिया एजेंसियों ने जालौर, बाड़मेर, जोधपुर और करौली में छापेमारी कर चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।

स्पेशल सेल ने किया ISIS- आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश

24 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक ISIS-प्रेरित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। इसमें दिल्ली और भोपाल के रहने वाले अदनाना नाम के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया गया।

वे IED धमाका और फिदायीन (आत्मघाती) हमला करने की तैयारी में थे और राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बना रहे थे। जाँच के दौरान हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए। अदनान खान चार्टर्ड अकाउंटेंसी ( CA) की पढ़ाई कर रहा था।

साथ ही वह गुपचुप तरीके से ऑनलाइन आतंकी गतिविधियों में शामिल था। रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि वह ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप चलाता था।जाँच में पता चला कि वे सीरिया-आधारित ISIS हैंडलर अबू इब्राहिम अल-कुरैशी से सोशल मीडिया (Instagram) के जरिए जुड़े हुए थे।

आंध्र प्रदेश पुलिस ने किया स्लीपर सेल्स नेटवर्क को ध्वस्त

17 अक्टूबर 2025 को आंध्र प्रदेश पुलिस ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा से सज्जाद हुसैन और महाराष्ट्र के मालेगाँव से तौफीक आलम शेख को आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया।

पुलिस की ये कार्रवाई एक व्यापक अभियान का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य ISIS-प्रेरित नेटवर्क और पैन-इंडिया स्लीपर सेल्स को ध्वस्त करना था। जाँच में सामने आया कि दोनों आरोपित पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े व्हाट्सऐप ग्रुप्स और चैनलों के सक्रिय सदस्य थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ये दोनों आतंकी युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहे थे। दोनों पाकिस्तान जाकर सैन्य प्रशिक्षण लेने और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की योजना बना रहे थे। इससे पहले पुलिस ने धर्मवरम से JeM नेटवर्क से जुड़े कोटवाल नूर मोहम्मद को भी गिरफ्तार किया था।

पंजाब से हथियारों के साथ धरे गए अपराधी

15 अक्टूबर को पंजाब पुलिस ने एक क्रॉस-बॉर्डर हथियार और नशा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इस दौरान अमृतसर से 28 साल के रजन उर्फ सागर, फाजिल्का से 24 साल के सुरिंदर सिंह उर्फ पाली और तरन तारन जिले से 25 साल के जगजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस को बरामदगी में 10 आधुनिक पिस्तौलें मिलीं। इनमें 4 ग्लॉक 9mm और 6 .30 बोर पिस्तौल के साथ 500 ग्राम अफीम शामिल थी। यह गिरोह पाकिस्तान-आधारित हैंडलरों से जुड़ा था और पंजाब में अपराधियों व गैंगस्टरों को हथियार सप्लाई कर रहा था।

महाराष्ट्र ATS ने युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा आतंकी गिरफ्तार

28 अक्टूबर को महाराष्ट्र एटीएस ने पुणे के कोंढवा क्षेत्र से 33 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जुबेर हांगरगेकर को गिरफ्तार किया। वह अल-कायदा से जुड़ा प्रचार साहित्य रखता था और युवाओं को कट्टरपंथी बना रहा था।

उसके लैपटॉप से अल-कायदा से जुड़े प्रचार के सामान और फॉरेंसिक जाँच में कई कट्टरपंथी सामग्री मिली। जुबेर का संबंध उन आरोपितों से भी था जिन्हें 2023 में मुंबई, पुणे और गुजरात में बम धमाकों की साजिश के आरोप में पकड़ा गया था। उसे UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत बुक किया गया।

2.5 किलो RDX के साथ पंजाब पुलिस ने पकड़े 2 आतंकी

9 अक्टूबर 2025 को पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने जालंधर से दो आतंकियों गुरजिंदर सिंह और दीवान सिंह को गिरफ्तार कर 2.5 किलो RDX से लैस IED और रिमोट कंट्रोल बरामद किया।

यह मॉड्यूल यूके-आधारित हैंडलर निशान जौरियन और अदेश जमराई संचालित कर रहे थे। इसके बारे में हर जानकारी BKI मास्टरमाइंड हरविंदर सिंह रिंदा दे रहा था। बरामद IED का इस्तेमाल बड़े आतंकी हमले के लिए किया जाना था।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने बचाई लाखों जिंदगियाँ

कुल मिलाकर कहा जा सकता है की सुरक्षा एजेंसियों की सफल कोशिशों ने आतंकियों के दिलों दिमाग पर इस कदर हमला किया है कि उनके हर मंसूबे लगभग पस्त हो रहे हैं। इसके चलते उनके बौखलाहट दिल्ली धमाकों की तरह बाहर आई है।

आतंकवादियों का उद्देश्य होता है- विनाश। इसके लिए वे कभी किसी माल को निशाना बनाते हैं तो कभी किसी बाजार वाली जगह पर, या फिर किसी सार्वजनिक जगह पर जहाँ परिवार एक साथ खुशियाँ मानने और यादें संजोने आते हैं।

यह सुरक्षा एजेंसियों की ही सतर्कता और तेजी थी जिसके चलते देश भर के अलग-अलग हिस्सों में छुपकर बैठे आतंकियों और स्लीपर सेल्स को न केवल पकड़ा जा सका पर साथ ही विनाशकारी धमाके करने वाले सामग्रियों को भी जब्त किया गया।

आतंकियों का सिर्फ एक ही मकसद है- किसी भी हाल में देश के लोगों को आहत करना और इसके लिए उन भीड़भाड़ वाले इलाकों में वे नाम, जाति, धर्म या रंग को नहीं देखते, बस अपने मकसद को जहन में रखते हैं।

अगर यह सुरक्षा एजेंसियां समय पर अपना काम नहीं कर रही होतीं तो दिल्ली धमाके से भी बहुत बड़ा कुछ हो चुका होता और हम उसे पर आंसू बहा रहे होते।

डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन निकला रिसिन जहर का मास्टरमाइंड, गुजरात ATS ने हैदराबाद से पकड़ा: केमिकल के साथ ISKP हैंडलर गिरफ्तार

गुजरात एटीएस (Anti-Terrorist Squad) ने 11 और 12 नवंबर को हैदराबाद के डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद के घर पर छापा मारा। यह कार्रवाई ‘रिसिन टेरर साजिश’ की जाँच के तहत की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटीएस टीम ने डॉक्टर के राजेंद्रनगर स्थित फ्लैट से कुछ अज्ञात केमिकल और कच्चा माल बॉक्सों में भरकर जब्त किया। इस दौरान साइबराबाद पुलिस दूर से नजर रखे हुए थी।

डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद इस जैविक (बायो) टेरर साजिश का मुख्य आरोपित है। जाँच में सामने आया है कि उसका घर एक तरह का वर्कशॉप बन चुका था, जहाँ वह रिसिन नामक घातक केमिकल पर काम कर रहा था। जब्त की गई सामग्री को अब फॉरेंसिक साइंस लैब में जाँच के लिए भेजा गया है।

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह अभी तक अरंडी के बीजों (Castor beans) से रिसिन टॉक्सिन को पूरी तरह निकाल नहीं पाया था और न ही उसने हमले का तरीका तय किया था।

जाँच एजेंसियाँ अब 2018 में जर्मनी के कोलोन शहर में हुई रिसिन बम साजिश का भी अध्ययन कर रही हैं, जिसमें एक कट्टरपंथी दंपती ने रिसिन तैयार किया था, लेकिन हमले से पहले ही पकड़े गए थे। वहीं, राजेंद्रनगर पुलिस का कहना है कि उन्हें इस गिरफ्तारी की जानकारी तभी मिली जब गुजरात पुलिस ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की।

कौन हैं डॉ अहमद मोहिउद्दीन सैयद?

जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद एक जनरल फिजिशियन हैं। इसका निकाह नहीं हुआ हैं और हैदराबाद के राजेंद्रनगर स्थित फोर्ट व्यू कॉलोनी में असद मंजिल अपार्टमेंट की एक फ्लैट में अकेले रहता था। सैयद ने अपनी MBBS की पढ़ाई चीन से की थी और मरीजों को इंटरनेट पर मुफ्त परामर्श देता था। वह किसी अस्पताल या क्लिनिक से जुड़ा नहीं था। इसके अलावा, वह एक ऑनलाइन फूड बिजनेस का पार्टनर भी था।

सैयद छह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उसका परिवार तेलंगाना के खम्मम का रहने वाला है। उसे अपनी इंटरमीडिएट (कक्षा 11-12) की पढ़ाई हनमकोंडा में पूरी की जो वारंगल के पास है।

वह 2007 में चीन MBBS की डिग्री लेने गया था और 2012–13 में भारत लौटने के बाद कुछ समय खम्मम में रहा। इसके बाद वो राजेंद्रनगर के फ्लैट में रहने लगे। बताया जाता है कि वहाँ उसकी एक होटल मालिक से दोस्ती हुई और दोनों ने मिलकर एक ऑनलाइन फूड जॉइंट शुरू किया, जो ऐप्स के जरिए सैंडविच और शावरमा बेचता था।

हालाँकि, जब स्थानीय पुलिस ने उसके पार्टनर से पूछताछ की, तो उसने सैयद की हिस्सेदारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। गुजरात ATS के अनुसार, जब सैयद के भाई उमर फारूकी से संपर्क किया गया, तो उसने बताया कि सैयद एक बिजनेस डील फाइनल करने के लिए गुजरात गया था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, परिवार ने सैयद से उन पार्सलों के बारे में सवाल भी किए थे जो अक्सर उसके पास आते थे और जिनमें जहरीले पदार्थ होते थे। इस पर सैयद ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह एक ऐसी दवा बना रहा हैं जिससे परिवार अमीर हो जाएगा।

राजेंद्रनगर पुलिस अधिकारी ने बताया कि फारूकी के अनुसार, यह परिवार लगभग 20 साल पहले हैदराबाद आया था। पहले वे मेहदीपट्टनम में रहे, फिर टोलिचौकी चले गए। करीब चार साल पहले परिवार ने अपरपल्ली इलाके में भाइयों और अन्य सदस्यों के लिए अलग-अलग फ्लैट खरीदे।

आतंकी साजिश की जड़ तक पहुँच रही गुजरात ATS

गुजरात ATS की जाँच में पता चला है कि डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद के पास से कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल) बरामद हुआ है। इसके अलावा उसने जो सामग्री खरीदी थी, उनके स्रोत और उनके ChatGPT व सर्च इंजन पर की गई खोजों के सबूत भी ATS को मिले हैं। यही दो प्रमुख कारण हैं, जिनसे अधिकारियों को यह शक हुआ कि सैयद किसी बायोटेरर (जैविक आतंकी) साजिश में शामिल था।

रविवार (9 नवंबर 2025) को गुजरात ATS ने बताया कि सैयद एक संदिग्ध आतंकी गिरोह का हिस्सा था और रिसिन नामक घातक रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर हमला करने की योजना बना रहा था। ATS के अनुसार, उसका हैंडलर अबू खालिदा, जो अफगानिस्तान में स्थित इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) से जुड़ा है, उसे निर्देश दे रहा था।

ATS ने इस मामले में दो और युवकों को गिरफ्तार किया है, शामली के 20 साल का दर्जी आजाद सुलेमान शेख और लखीमपुर खीरी का 23 साल का छात्र मोहम्मद सुहैल मोहम्मद सलीम खान को बनासकांठा से हिरासत में लिया गया। इन तीनों पर आर्म्स एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) और UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत केस दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, ATS की टीमें अब आरोपितों के घरों और उन सभी स्थानों पर जाएँगी जहाँ उन्होंने हमले की साजिश के दौरान आना-जाना किया था। इसके लिए अधिकारी लखीमपुर खीरी और शामली भी जाएँगे।

एक अधिकारी के अनुसार, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे अभी तक रिसिन को पूरी तरह अलग  नहीं कर पाए थे और हमले का तरीका तय नहीं किया था। उनका कहना था कि जब रिसिन तैयार हो जाता, तब ही हमले की विधि तय की जाती। गुजरात ATS अब इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश में जुटी है।

रिसिन के जरिए हिंदुओं को निशाना बनाने की आतंकी साजिश

गुजरात ATS ने अहमदाबाद–मेहसाणा रोड पर स्थित अडालज टोल प्लाजा के पास एक सिल्वर फोर्ड फिगो कार को रोककर डॉक्टर अहमद मोहिउद्दीन सैयद को गिरफ्तार किया, जिससे रिसिन टेरर साजिश का भंडाफोड़ हुआ। SP के सिद्धार्थ की ATS टीम ने कार से दो ग्लॉक पिस्तौल, एक बेरेटा हैंडगन, 30 जिंदा कारतूस और 10 लीटर के कंटेनर में रखे लगभग 4 लीटर कैस्टर ऑयल बरामद किया।

सैयद से मिले डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जाँच के आधार पर ATS ने दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया कि ये दोनों युवक राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक डेड ड्रॉप स्थान से हथियार और कारतूस उठाकर सैयद तक पहुँचाते थे।

ATS को यह भी पता चला है कि आरोपित पाकिस्तान के कई लोगों से संपर्क में था और उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दफ्तरों समेत कई धार्मिक और संगठनात्मक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ के पैटर्न का निरीक्षण किया था। पिछले छह महीनों में उसने अहमदाबाद के नारोदा फल मंडी और दिल्ली के आज़ादपुर कृषि उपज मंडी (APMC) जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की भी रेकी की थी।

पाँच वक्त का नमाजी था आतंकी मुजम्मिल, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मस्जिद जाता था: इमाम इश्तियाक ने अपने घर में दी थी पनाह

दिल्ली लाल किले के सामने 10 अक्टूबर 2025 की शाम को हुए i-20 कार धमाके की घटना को केन्द्र सरकार ने आतंकी साजिश माना है। घटना के बाद से ही फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी जाँच के घेरे में है, क्योंकि इसी यूनिवर्सिटी से तीन आतंकी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। इतना ही नहीं बीते दिन 800 पुलिस कर्मियों ने यूनिवर्सिटी और इसके आस-पास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाकर करीब 12 लोगों को हिरासत में लिया है।

लाल किले के सामने हुए कार धमाके के बाद ऑपइंडिया की टीम फरीदाबाद के उस धौज गाँव पहुँची, जहाँ अल-फलाह यूनिवर्सिटी मौजूद है। शाम का समय था हम धौज गाँव की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर खड़े थे। इस दौरान हमने आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल और अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर गाँव के लोगों से बात की तो अधिकाँश लोगों ने हमारे कैमरे के सामने बोलने से बचने या फिर घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं कहकर दूरी बना ली।

कुछ लोगों ने हमसे बात की। इनमें मस्जिद के सामने अल्लाह की माला जपते हुए हाजी कासिम ने कहा, “मुझे घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है, मैं मस्जिद में रहता हूँ। हमें नहीं पता कहाँ कितने लोग मारे गए। हम सिर्फ मस्जिद में अल्लाह-अल्लाह करते हैं।”

आमीन ने कहा, “ये बहुत ही गलत हुआ है जिसने भी किया है उसे सजा मिलनी चाहिए।” आगे मस्जिद से नमाज पढ़कर निकले मोहम्मद इकबाल ने कहा, “मुझे घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। मैं तो पासपोर्ट का वेरिफिकेशन कराने के लिए आया हूँ। पुलिस ने सही काम किया है। कानून अपना काम करे।”

इरफान ने कहा, “ये मामला बाहर का है हमारे यहाँ तो वह (आतंकी) डॉक्टर की नौकरी करते थे अल-फलाह यूनिवर्सिटी में। यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर को नौकर डिग्री देखकर दी थी न कि आतंकी देखकर। इस घटना से हमारा गाँव बदनाम हुआ, हम इसके लिए शर्मिंदा हैं।”

आतंकी के नमाज पढ़ने के सवाल पर बीच में टोकते हुए एक अन्य युवक ने कहा, “धर्म अलग चीज है और आतंकवाद एक अलग चीज है। नमाज का और आतंकवाद का कोई संबंध नहीं है। इस अल-फलाह यूनिवर्सिटी से लाखों बच्चे पढ़कर निकले हैं, कभी किसी ने कोई गंदा काम नहीं किया। ये पहली घटना हुई है। इमाम साहब का कोई संबंध नहीं है वह सिर्फ मस्जिद में लोगों को नमाज पढ़ाते थे।”

पास में ही खड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “डॉक्टर साहब काम तो अच्छा करते थे मरीजों को देखने का और नमाज पढ़ने का, लेकिन ये जो हादसा हुआ है इसका हमें कुछ नहीं पता।”

अगर पढ़ाई करके ही बम फोड़ना है तो पढ़ाई क्यों करना? इस सवाल पर इरफान ने कहा ,”कोई माँ-बाप आतंकी बनाने के लिए अपने बच्चों को नहीं पढ़ाता, लेकिन अब हम आगे से जम्मू-कश्मीर के लोगों पर भरोसा नहीं कर पाएँगे।”

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “डॉक्टर (आतंकी) को पूरा इलाका जानता था। वह बढ़िया से हमारा इलाज करते थे। हमने आज तक उसके बारे में कोई बात नहीं सुनी।”

मस्जिद के सामने खडे एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “हम डॉक्टर साहब से दवा लेने के लिए जाते थे। बहुत बार मिले हैं, वो अच्छे इंसान थे। पाँच वक्त के नमाजी थे।” आपको बता दें कि धौज की इस बड़ी मस्जिद में हर रोज एक हजार से 1500 लोग नमाज के लिए आते हैं।

जिस मस्जिद में आतंकी पढ़ता था नमाज वहाँ पहुँची ऑपइंडिया की टीम

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मस्जिद में ही आतंकी मुजम्मिल पाँच वक्त की नमाज अदा करता था। कैंपस के पिछले हिस्से में मौजूद मस्जिद पर हम पहुँचे, तो मस्जिद के पास वाले मकान मालिक रहीमुद्दीन ने कहा, “वो (आतंकी मुजम्मिल) इमरजेंसी में डॉक्टर थे। यहीं नमाज पढ़ते आते थे। हम भी यहीं पढ़ते हैं। कभी ऐसा शक नहीं हुआ। हमारी सिर्फ दुआ सलाम होती थी। हमें सिर्फ इतना पता था कि वह कश्मीर के हैं।”

रहीमुद्दीन ने आगे कहा, “हम यहाँ 4 साल से रहते हैं और मस्जिद के इमाम मो. इश्तियाज यहाँ करीब 20 साल से इमाम है। ये बहुत गलत हुआ है। हमारा गाँव डॉक्टर के कारण बदनाम हो गया है। अब हम कश्मीर के किसी व्यक्ति पर भरोसा नहीं कर पाएँगे।” रहीमुद्दीन ने कहा कि इस तरह के लोगों को यूनिवर्सिटी को पनाह नहीं देनी चाहिए।

इसके बाद हमने इमाम के घर और मस्जिद को भी देखा। जानकारी मिली कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी द्वारा ही यूनिवर्सिटी स्थापना के समय ही एक एकड़ जमीन में करोड़ों की लागत से मस्जिद का निर्माण कराया गया था।

मस्जिद में इमाम मो. इश्तियाज आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल के साथ लोगों को पाँच वक्त की नमाज अदा कराता था। इस इमाम को अल-फलाह यूनिवर्सिटी द्वारा ही सैलरी दी जाती थी। इस मस्जिद में रहने वाले इमाम मो. इश्तियाज ने ही आतंकी मुजम्मिल को गाँव फतेहपुर तगा में किराए पर घर दिया था, जहाँ से पुलिस को 2563 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी।

1942 में गुजरात के जिन ‘महाराज’ ने बचाई थी यहूदी-पोलिश बच्चों की जान, 83 साल बाद उन्हें इजरायल ने दिया सम्मान: अपने शहर में मूर्ति लगाई; जानिए कौन थे जाम साहब दिग्विजय सिंह जडेजा

दक्षिणी इजरायल के नेवातिम में हाल ही में नवानगर (अब जामनगर) के पूर्व महाराजा जामसाहेब दिग्विजय सिंह जडेजा की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा उस करुणा और मानवता की याद में बनाई गई है, जब जामसाहेब ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के सैकड़ों बच्चों, जिनमें कई यहूदी बच्चे भी शामिल थे, उनको भारत में शरण और सुरक्षा दी थी।

जाम साहब की प्रतिमा नीचे लिखा गया है:

‘होलोकॉस्ट के दौरान, उन्होंने अपने खर्च पर कई यहूदी बच्चों को बचाया और उन्हें

अपने घर में आश्रय दिया तथा उन्हें देखभाल और प्यार प्रदान किया।’

कार्यक्रम में यहूदी धर्मग्रंथ से एक वाक्य भी लिया गया- ‘जो एक जीवन बचाता है, वह पूरी दुनिया को बचाता है।’

यह कार्यक्रम भारतीय यहूदी विरासत केंद्र (IJHC) और कोच्चि यहूदी विरासत केंद्र (CJHC) ने महाराजा जामसाहेब की याद में और उनकी प्रतिमा के अनावरण के लिए आयोजित किया था। यह प्रतिमा सितंबर 2024 में तैयार हो गई थी, लेकिन हमास के साथ जारी युद्ध के कारण इसके अनावरण में कई बार देरी हुई।

जाम दिग्विजय सिंह कौन थे?

महाराजा दिग्विजय सिंह रणजीत सिंह नवानगर के अंतिम शासक थे। उन्हें और उस समय के कई राजाओं को लोग स्नेह से बापूसाहेब कहते थे। यह उपाधि किसी पद या सम्मान के रूप में नहीं दी जाती थी, बल्कि जनता के प्यार और विश्वास का प्रतीक थी। ऐसे राजाओं का मंत्र था, “मेरी प्रजा का कल्याण मेरे साथ हो।”

भावनगर के नरेश कृष्णकुमार सिंह जी और जामसाहेब दिग्विजयसिंह जडेजा जैसे राजा सचमुच बापूसाहेब कहलाने योग्य थे, जिन्होंने अपनी प्रजा की देखभाल पिता की तरह की। दिग्विजयसिंहजी ने सिर्फ अपने राज्य के लोगों की ही नहीं, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर पोलैंड के नागरिकों की भी मदद की।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय उन्होंने वहाँ के बच्चों को भारत में शरण दी, बिना किसी स्वार्थ के मानवता का उदाहरण पेश किया। आज भी पोलैंड और इजरायल जैसे देश उन्हें सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।

जामसाहेब दिग्विजयसिंह जडेजा

जाम साहब दिग्विजय सिंह जडेजा का जन्म 1895 में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई राजकुमार कॉलेज में की और आगे की शिक्षा यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन से प्राप्त की। 1919 में वे ब्रिटिश सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट बने और करीब बीस साल की सेवा के बाद 1931 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद भी वे 1947 तक भारतीय सेना में मानद पद पर जुड़े रहे।

1933 में अपने चाचा रणजीत सिंह जडेजा के निधन के बाद वे नवानगर के महाराजा बने। वे 1966 में अपनी मृत्यु तक नवानगर (अब जामनगर) के शासक रहे। 1947 में भारत की आजादी के बाद उन्होंने अन्य राजाओं के साथ अपने राज्य का भारत में विलय कर दिया। इस तरह वे जामनगर के अंतिम महाराजा माने जाते हैं।

उनके पुत्र शत्रुशल्य सिंह जडेजा वर्तमान में जामनगर के राजा हैं। भले ही अब राज्याभिषेक जैसी परंपराओं का राजनैतिक महत्व खत्म हो गया है, लेकिन जामनगर की जनता आज भी अपने राजपरिवार को वही आदर और सम्मान देती है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश बच्चों को आश्रय दिया गया था, जिनमें से कई यहूदी थे

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1939 में सोवियत संघ और जर्मनी ने मिलकर पोलैंड पर हमला किया। इसके बाद पोलैंड की सरकार गिर गई और उसके शासक लंदन भाग गए। हजारों पोलिश नागरिकों, जिनमें महिलाएँ, बच्चे, विकलांग और अनाथ शामिल थे, उनको सोवियत संघ भेज दिया गया। उन्हें शरणार्थी शिविरों और अनाथालयों में रखा गया, जहाँ वे भूख और बीमारियों से जूझते रहे।

लगभग दो साल तक यह स्थिति बनी रही। 1941 में सोवियत सरकार ने इन लोगों को रिहा कर दिया और देश छोड़ने की अनुमति दी। तब हजारों पोलिश नागरिकों ने दूसरे देशों में शरण ली कुछ मेक्सिको गए, कुछ न्यूजीलैंड और अन्य देशों में बस गए।

उसी समय महाराजा दिग्विजय सिंह जडेजा ब्रिटिश युद्ध मंत्रिमंडल में हिंदू प्रतिनिधि के रूप में जुड़े हुए थे। उन्हें जब इन पोलिश बच्चों की दुर्दशा का पता चला, तो उन्होंने तुरंत उनकी मदद का निर्णय लिया। बातचीत के बाद यह तय हुआ कि इन बच्चों को भारत लाया जाएगा और उन्हें सुरक्षित आश्रय दिया जाएगा।

भले ही तुमने अपने माता-पिता को खो दिया है , लेकिन आज से मैं तुम्हारा पिता हूँ 

पोलैंड के बच्चों का पहला समूह 1942 में नवानगर पहुँचा। महाराजा दिग्विजय सिंह जडेजा स्वयं उनका स्वागत करने पहुँचे और बच्चों से कहा, “अब तुम अनाथ नहीं हो। मैं तुम्हारा पिता हूँ और नवानगर अब तुम्हारा घर है।”

महाराजा ने बच्चों के रहने, खाने और पढ़ाई की पूरी व्यवस्था की। बालाचडी के पास उनके लिए एक शिविर बनाया गया, जहाँ उन्हें सुरक्षित माहौल, चिकित्सा सुविधा और शिक्षा मिली। बच्चों के लिए पोलिश भाषा की किताबों वाला एक पुस्तकालय भी बनाया गया ताकि वे अपनी मातृभाषा से जुड़े रहें।

जाम साहब हर व्यवस्था का खुद ध्यान रखते थे और नियमित रूप से शिविर का दौरा करते थे। जब बच्चों ने भारतीय भोजन को बहुत मसालेदार बताया, तो उन्होंने उनके लिए सात पोलिश रसोइए रखे और पढ़ाई के लिए पोलिश शिक्षक भी नियुक्त किए।

बाद में एक और कैंप खोला गया, जहाँ और बच्चे लाए गए। इस कार्य में पटियाला और बड़ौदा के राजाओं ने आर्थिक मदद दी, जबकि टाटा समूह ने भी धनराशि दी। इन बच्चों की देखभाल के लिए लाखों रुपए  जुटाए गए।

पोलिश बच्चे द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति तक नवानगर में रहे। युद्ध खत्म होने के बाद जब ब्रिटेन ने पोलिश सरकार को मान्यता दी, तो कई बच्चे अपने देश लौट गए, जबकि कुछ ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में बस गए। जाम साहब स्वयं उन्हें विदा करने पहुँचे, वह क्षण बच्चों और उनके बापूसाहेब दोनों के लिए बेहद भावुक था।

जाम साहब को पोलैंड में ‘अच्छे महाराजा’ के नाम से जाना जाता है

जाम साहब ने अपने धर्म और मानवता के पालन में बिना किसी स्वार्थ के काम किया। उन्होंने कठिन समय में हजारों पोलिश बच्चों को आश्रय दिया और उनके लिए पिता समान बने रहे। पोलैंड आज भी इस भारतीय महाराजा को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद करता है। वहाँ उन्हें ‘अच्छे महाराजा’ के नाम से जाना जाता है।

पोलैंड की राजधानी वारसॉ में उनके सम्मान में ‘नवानगर के जाम साहब स्मारक’ बनाया गया है। इस स्मारक पर लिखा है, ‘दयालु महाराजा को श्रद्धांजलि, पोलैंड के कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से।’

इसके अलावा, वारसॉ में जाम साहब के नाम पर एक स्कूल है जो भारतीय शैली में बना है और एक ‘महाराजा स्क्वायर’ नाम का चौक भी है। इसी स्थान पर स्मारक स्थित है। साल 2022 में पोलैंड में जाम साहब के नाम पर एक ट्रेन भी शुरू की गई। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पोलैंड यात्रा के दौरान इस स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि दी थी।

इजरायल ने यहूदी बच्चों को बचाने के लिए उन्हें सम्मानित किया

पोलैंड ही नहीं, इजरायल भी महाराजा दिग्विजय सिंह जडेजा को नहीं भूला है। नवानगर में जिन पोलिश बच्चों को शरण दी गई थी, उनमें कई यहूदी बच्चे भी शामिल थे। यहूदी समुदाय आज भी मानता है कि उस हिंदू राजा ने जब मदद की तो उन्होंने धर्म या जाति नहीं देखी सब बच्चों को समान रूप से अपनाया।

यहूदी-अमेरिकी ऐतिहासिक संरक्षण सोसायटी के अध्यक्ष जेरी क्लिंगर ने अपने एक लेख में लिखा कि जब वे एक अन्य परियोजना पर काम कर रहे थे, तो उनके एक सहकर्मी ने उन्हें जाम साहब की इस मानवता की कहानी बताई। वह सहकर्मी उन लोगों में से कुछ को जानता था, जिन्हें बचपन में जाम साहब ने शरण दी थी।

क्लिंगर ने कहा, “ऐसे बहुत से लोग होंगे जिनकी जिंदगी जाम साहब ने बदली, भले ही कुछ अब जीवित न हों। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि उन्होंने यहूदी बच्चों को भी शरण दी थी। पोलैंड ने तो उनका सम्मान किया है, अब इजरायल में भी उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए।” इसी सोच से नेवातिम में उनकी प्रतिमा लगाने की पहल शुरू हुई।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती टीम के मेघल सिंह परमार ने लिखी है जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)

दिल्ली ब्लास्ट से जाँच के घेरे में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी, जानिए कौन है इसका चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी

दिल्ली में लाल किले के सामने मंगलवार (10 नवंबर 2025) को बड़ा धमाका हुआ, जिससे पूरा देश दहल गया। मिनटों में जाँच एजेंसियाँ मौके पर पहुँचीं और उस ब्लास्ट की जाँच शुरू की जिसमें कम से कम 13 लोगों की जान गई।

जल्दी ही दिल्ली लाल किला ब्लास्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का लिंक सामने आया, क्योंकि धमाका करने वाला आतंकवादी उन तीन मेडिकल डॉक्टर्स का साथी था जो यूनिवर्सिटी से जुड़े थे और हरियाणा पुलिस व जम्मू-कश्मीर पुलिस के जॉइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार हुए थे। पुलिस ने दिल्ली ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले गिरफ्तार डॉक्टर्स से जुड़े ठिकानों से 2,900 किलो से ज्यादा विस्फोटक बरामद किए थे।

यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो (डॉ) भूपिंदर कौर ने आखिरकार बयान दिया कि यूनिवर्सिटी का पकड़े गए टेरर मॉड्यूल से कोई लिंक नहीं है, लेकिन यूनिवर्सिटी के चांसलर और फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी चुप रहे। हैरानी की बात है कि सिद्दीकी का डिजिटल फुटप्रिंट लगभग नहीं है।

ऑपइंडिया ने चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी पर उपलब्ध जानकारी खँगाली और कुछ परेशान करने वाला इतिहास मिला। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल पर ज्यादा जानकारी नहीं है। ‘अबाउट’ सेक्शन में लिखा है, ‘मैनेजिंग ट्रस्टी: अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट 1995 से अब तक, चांसलर: अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद 2014 से अब तक, मैनेजिंग डायरेक्टर: अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड 1996 से अब तक।’

सोर्स: लिंक्डइन

ऑपइंडिया को मिल्ली गजट की जुलाई 2000 की रिपोर्ट में लिखा मिला कि जवाद अहमद सिद्दीकी नाम का शख्स अपने दो भाइयों के साथ तिहाड़ जेल में था क्योंकि अल-फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड में निवेशकों को ठगा था। कंपनी की जानकारी देखी तो पता चला कि वो 1992 में रजिस्टर्ड हुई और स्टेटस ‘स्ट्राइक ऑफ’ है, यानी कंपनी बंद हो चुकी है।

सोर्स: जौबाकॉर्प

जौबाकॉर्प पर उपलब्ध जानकारी से पता चला कि कंपनी का सिर्फ एक डायरेक्टर था, जवाद अहमद सिद्दीकी।

सोर्स: जौबाकॉर्प

सिद्दीकी के पुराने डायरेक्टोरियल एसोसिएशन से अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का लिंक मिला। सिद्दीकी मार्च 2019 तक इस कंपनी के डायरेक्टर थे।

सोर्स: जौबाकॉर्प

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड की और जानकारी देखी तो दो पुराने डायरेक्टर मिले, जवाद अहमद सिद्दीकी और सऊद अहमद सिद्दीकी।

सोर्स: जौबाकॉर्प

ये जानकारी जरूरी थी क्योंकि जब ऑपइंडिया ने मिली गजट में बताए केस को देखा, तो दो नाम थे- जवाद और सऊद। इस केस पर बाद में आएँगे।

अल-फलाह एजुकेशन सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन जोड़ने के लिए कंपनी का पता चेक किया। वो था ‘अल-फलाह हाउस, 274-ए, जामिया नगर, ओखला, नई दिल्ली।’

सोर्स: जौबाकॉर्प

ये वही पता है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर है।

सोर्स: अल फलाह यूनिवर्सिटी

हमने ‘[email protected]’ ईमेल से भी कनेक्शन जोड़ा, जो यूनिवर्सिटी प्रोफाइल वाली कई वेबसाइट्स पर ऑफिशियल ईमेल के तौर पर लिस्टेड है।

सोर्स: गूगल सर्च

यूनिवर्सिटी के भारत एजुकेशन पेज पर सिद्दीकी और फरदीन दोनों के ईमेल हैं।

सोर्स: भारत एजुकेशन

ये ईमेल आईडी अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के जौबाकॉर्प पेज पर भी है, वही कंपनी जो फ्रॉड में शामिल थी।

सोर्स: जौबाकॉर्प

साफ है कि जो शख्स गिरफ्तार हुआ और लंबे समय तिहाड़ जेल में रहा, वही जवाद अहमद सिद्दीकी है जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी चला रहा है।

कंपनी के मौजूदा डायरेक्टर हैं सुफयान अहमद सिद्दीकी और फरदीन बेग। सुफयान अहमद सिद्दीकी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, फरदीन बेग अल-फलाह यूनिवर्सिटी में टीचर हैं और एंटी-रैगिंग कमिटी के मेंबर भी।

सोर्स: लिंक्डइन

हमारी रिसर्च में पता चला कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी 2 मई 2014 को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी (अमेंडमेंट) एक्ट, 2014 से स्थापित की गई, जो हरियाणा विधानसभा ने पास किया। यूजीसी से 5 जनवरी 2015 को सेक्शन 2(एफ) और 12(बी) के तहत मान्यता मिली। एक्सपर्ट कमिटी बनी और इंस्पेक्शन विजिट 29-30 मई 2015 को हुई। बाद में कमियों को पूरा करने पर यूजीसी ने मान लिया।

जवाद अहमद सिद्दीकी 2 साल से ज्यादा जेल में रहा

अब उस केस पर आते हैं, जिसके लिए उसे तिहाड़ भेजा गया था। ऑपइंडिया को दिल्ली हाई कोर्ट का 27 मार्च 2003 का जजमेंट मिला, जो जस्टिस आरसी चोपड़ा ने सुनाया था। कोर्ट डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, 2000 में न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली में एफआईआर दर्ज हुई थी आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 468, 471 और 120(बी) के तहत। केस इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, क्राइम ब्रांच, नई दिल्ली को भेजा गया।

केस डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, जवाद सिद्दीकी अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर थे, और सऊद सिद्दीकी (अल-फलाह एजुकेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर में से एक) उसका डायरेक्टर था। पिटिशनर्स और उनके साथी आरोपियों ने ढेर सारे निवेशकों को अपनी कंपनीज में डिपॉजिट करवाया। कोर्ट ने नोट किया कि उन्होंने 7.5 करोड़ रुपये की रकम गबन की। शिकायत केआर सिंह ने की थी, जिन्हें 95 लाख रुपए का चूना लगाया गया था।

जजमेंट में लिखा था, “आरोप है कि पिटिशनर्स ने ढेर सारे लोगों को अपनी ग्रुप कंपनीज में डिपॉजिट करवाया लेकिन बाद में उनके सिग्नेचर फर्जी करके और डॉक्यूमेंट्स बनाकर उन डिपॉजिट्स को अपनी कंपनीज के शेयर्स में बदल दिया।”

जाँच और एफएसएल रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि निवेशकों के सिग्नेचर फर्जी थे। डिपॉजिट कुछ ऐसी कंपनीज के नाम पर लिए गए जो कभी थीं ही नहीं। फिर पैसा आरोपितों के पर्सनल अकाउंट्स में ट्रांसफर हो गया। जब कोर्ट ने ये जजमेंट पास किया, तब तक जवाद 37 महीने और सऊद 38 महीने जेल में थे।

ट्रिब्यून की जून 2004 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1995 में अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज ने अल-फलाह सहकारी आवास समिति बनाई। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 1996 में समिति को 10,000 स्क्वायर मीटर अलॉट किए, जहाँ मेंबर्स और शेयरहोल्डर्स के लिए 100 फ्लैट्स बनाने थे। लेकिन कुछ फाइनेंशियल दिक्कतों की वजह से कंस्ट्रक्शन नहीं हुआ और जवाद वगैरह गिरफ्तार हो गए।

जवाद जेल में थे, तब उनके कुछ साथियों ने उन्हें ठगा और उनके सिग्नेचर फर्जी करके 13 करोड़ में कुछ फ्लैट्स बेच दिए। ट्रिब्यून रिपोर्ट में उनकी गिरफ्तारी की खबर छपी थी, जिसमें आरोपित थे एसपी यादव, मंजूर हसन जैदी और संजीव श्रीवास्तव।

जवाद अहमद सिद्दीकी को लेकर ये खुलासे अल-फलाह यूनिवर्सिटी चलाने वालों की विश्वसनीयता और बैकग्राउंड पर गंभीर सवाल उठाते हैं। फ्रॉड और फॉर्जरी के पुराने आरोपों से लेकर टेरर मॉड्यूल से जुड़ा विवाद तक, पैटर्न ऐसा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खुद को चल रही जाँच से अलग कर लिया है, लेकिन अल-फलाह की लीडरशिप को संदिग्ध फाइनेंशियल और क्रिमिनल गतिविधियों से जोड़ने वाले सबूत बताते हैं कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके मैनेजमेंट की तेजी से गहरी जाँच जरूरी है।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल कॉपी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)