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‘पाकिस्तान जिंदाबाद, इंडियन आर्मी बचा लो अपना सैनिक’: रेलवे पटरी पर मिला जवान का शव, पत्नी को मैसेज- आपके पति को खुदा के पास भेज दिया

हरियाणा के अंबाला कैंट में तैनात सेना के जवान पवन शंकर का शव बरामद हुआ है। वे 6 सितंबर 2023 से लापता थे। मूल रूप से यूपी के कानपुर के रहने वाले पवन घर से ड्यूटी ज्वाइन करने निकले थे। लेकिन ड्यूटी पर नहीं पहुँचे। इसी दौरान उनकी पत्नी को व्हाट्सएप पर एक मैसेज मिला। इसमें लिखा था, “आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है, पाकिस्तान जिंदाबाद।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पवन शंकर अंबाला कैंट में बतौर हवलदार तैनात थे। वह छुट्टी मनाने कानपुर स्थित अपने घर गए हुए थे। छुट्टी पूरी होने पर वह ड्यूटी ज्वाइन करने वापस अंबाला जा रहे थे। लेकिन न तो वह ड्यूटी में पहुँचे और न ही घरवालों को उनके बारे में कुछ पता चल पा रहा था। लगातार उनकी तलाश की जा रही थी।

इस मामले में अंबाला कैंट में पवन शंकर की यूनिट के सूबेदार की शिकायत पर स्थानीय पड़ाव थाने में गुमशुदगी का केस भी दर्ज हुआ था। इसी बीच 6 सितंबर की रात 11:39 पर पवन के नंबर से उनकी पत्नी को एक व्हाट्सएप मैसेज मिला था। इस मैसेज में लिखा था, “मैंने आपके पति को खुदा के पास भेज दिया है। पाकिस्तान जिंदाबाद। इंडियन आर्मी को जो करना है वो कर ले। बचा लो अपने सैनिक को।” इसके बाद उनके व्हाट्सएप पर रात 11:42 बजकर पर लास्ट सीन दिखाई दिया।

मैसेज मिलने के बाद से पुलिस और इंटेलिजेंस जाँच कर रही थी। इसके बाद 7 सितंबर की शाम पवन शंकर का शव कैंट रेलवे स्टेशन से मोहड़ा के बीच पटरी से बरामद हुआ है। पहले रेलवे पुलिस इस शव को अज्ञात मानकर चल रही थी। लेकिन सेना के जवानों ने रेलवे पुलिस से संपर्क कर शव की पहचान की।

इस मामले में अंबाला के SHO जीआरपी धर्मवीर भारती ने कहा है कि शव मिलने की सूचना पवन के परिजनों को दी गई है। अब तक उनका मोबाइल नहीं मिल सका है। रेलवे पुलिस के अलावा सेना भी इस मामले में जाँच कर रही है। कहा जा रहा है कि जवान के सिर और गर्दन के पास गहरा घाव मिला है। मामले में कार्रवाई की जा रही है।

G20 शिखर सम्मलेन से पहले पूर्व PM मनमोहन सिंह भी हुए मोदी सरकार के मुरीद, कहा- भारत के लिए आशा अधिक, चिंता कम: आर्थिक महाशक्ति बनने का भी भरोसा

UPA सरकार में प्रधानमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के नेता डॉक्टर मनमोहन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में आज घरेलू राजनीति के लिए विदेश नीति और अधिक प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हो गई है। इसके अलावा, उन्होंने कई मुद्दों पर वर्तमान भाजपा सरकार की तारीफ की।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर नई विश्व व्यवस्था बदल-सी गई है। इस व्यवस्था को संचालित करने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों से शांति की अपील करते हुए भारत ने अपने संप्रभु और आर्थिक हितों को पहले स्थान पर रखकर सही काम किया है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत के भविष्य के बारे में चिंतित होने की तुलना में आशावादी अधिक हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से निर्मित संवैधानिक मूल्यों के साथ एक शांतिपूर्ण बड़े लोकतंत्र और एक बड़ी बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को अब विश्व स्तर पर बहुत अधिक सम्मान मिल रहा है।

ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भूमिका पर बोलते हुए देश के पहले अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वर्तमान में डी-ग्लोबलाइजेशन और नए प्रकार के व्यापार प्रतिबंधों की बात हो रही है। ये मौजूदा ऑर्डर को बाधित कर सकते हैं, लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत के लिए नए अवसर भी खोल सकते हैं।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत बदलती विश्व व्यवस्था में एक अद्वितीय आर्थिक अवसर के मुहाने पर खड़ा है। एक बड़े बाजार और प्रचुर मानव और प्राकृतिक संसाधनों के साथ एक शांतिपूर्ण लोकतंत्र के रूप में भारत आने वाले दशकों में सेवाओं, विनिर्माण और उत्पादन पर जोर देकर दुनिया की एक आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।

बताते चलें कि भारत को विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सरकार पहले से ही प्रयासरत है। इसके कारण चीन की नींद उड़ी हुई है। विश्व की कई दिग्गज क्षेत्र की कंपनियाँ भारत में उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। वहीं, विश्व स्तर पर भारत जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन आदि में कटौती को लेकर भारत का स्टैंड साफ कर चुका है।

इस तरह एक दशक तक (2004-2014) तक देश के प्रधानमंत्री रहे एक विख्यात अर्थशास्त्री का यह बयान उस वक्त में बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, जब विश्व के 20 शक्तिशाली देशों के नेता जी-20 में शामिल होने के लिए दिल्ली में पहुँचना शुरू हो चुके हैं। इसे वर्तमान सरकार की नीतियों की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

अपने ही पैंट में लटक कर जेल में आत्महत्या: चाकू दिखा एयर होस्टेस का कर रहा था रेप, काट दिया था गला

एयर होस्टेस रुपल ओग्रे की हत्या के आरोप में जेल में बंद विक्रम अटवाल ने गुरुवार (7 सितंबर 2023) को मुंबई की जेल में आत्महत्या कर ली। मुंबई पुलिस ने जानकारी दी कि अटवाल जेल की जिस कोठरी में बंद था, उसमें उसने अपनी पैंट को फंदा बनाकर आत्महत्या की है।

सफाई कर्मचारी विक्रम अटवाल को मुंबई के मरोल इलाके में रहने वाली 23 साल की एयर होस्टेस की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसने रुपल के फ्लैट में जाकर उसका गला काट दिया था। इसके बाद उसे मुंबई की अंधेरी स्थित जेल में बंद रखा गया था।

रुपल ओग्रे छत्तीसगढ़ की रहने वाली थी। एयर इंडिया में प्रशिक्षण के लिए वह अप्रैल 2023 में मुंबई आई थी। मुंबई के मरोल में कृष्णलाल मारवाह मार्ग पर एनजी कॉम्प्लेक्स में उसने किराए पर फ्लैट ले रखा था। उसमें वह अपनी बहन और उसके प्रेमी के साथ रह रही थी। घटना से 8 दिन पहले दोनों छत्तीसगढ़ चले गए थे।

रविवार (3 सितंबर 2023) को रात रुपल का शव मिला था। उसका गला कटा हुआ था और शव बाथरूम में पड़ा हुआ था। इसके साथ ही चारों तरफ खून फैला हुआ था। इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ऐक्टिव हो गई और घटना के 12 घंटे के भीतर 40 साल के विक्रम अटवाल को गिरफ्तार कर लिया।

रूपल ओग्रेे जिस सोसायटी में रहती थी, उसी में विक्रम अटवाल कचरा बटोरने और हाउस कीपिंग का काम करता था। वह पिछले एक साल से यह काम कर रहा था। पुलिस ने उसे सोमवार (4 सितंबर 2023) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना अपराध भी कबूल कर लिया।

पूछताछ में अटवाल ने पुलिस को बताया कि वह रूम की सफाई करने का बहाना बनाकर रूपल के कमरे में घुसा था। कहा जा रहा है कि कमरे में घुसने के बाद उसने रुपल को अकेली देखा और चाकू दिखाकर उससे बलात्कार करने की कोशिश की। रुपल ने इसका विरोध किया और खुद को उसके चुंगल से बचाने की कोशिश की।

इसके बाद विक्रम अटवाल ने रुपल का गला काट दिया और शव को बाथरूम में डाल दिया। इस दौरान उसके हाथ में चोट भी आई। अटवाल 11:30 से 1:30 बजे के बीच करीब दो घंटे तक रुपल के फ्लैट में था। इसके बाद उसने अपने कपड़े बदले और फर्श पर खून को साफ करके वहाँ से भाग निकला। उसकी करतूत CCTV कैमरे में कैद हो गई।

जब उसकी पत्नी ने चोट के बारे में पूछा तो उसने अपनी पत्नी से झूठ बोला। इसके बाद वह अपने घाव को दिखाने के लिए डॉक्टर के पास भी गया। शाम तक यह घटना सामने आई और अगले दिन उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ 8 सितंबर तक कोर्ट ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया। रिमांड खत्म होने के एक दिन पहले ही अटवाल ने आत्महत्या कर ली।

पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अटवाल ने 2 घंटे तक कमरे में क्या किया और हत्या से पहले वास्तव में क्या हुआ था। जिस चाकू से अटवाल ने रुपल की हत्या की थी, उस नौ इंच के चाकू और अपराध के समय आरोपित द्वारा पहने गए कपड़े को सोसाइटी के पास झाड़ियों से बरामद कर लिया गया है।

दरअसल, घटना का खुलासा परिवार के एक कॉल से हुआ। रुपल के परिजन उसे लगातार कॉल कर रहे थे, लेकिन वह फोन पिक नहीं कर रही थी। इसके बाद रुपल की चचेरी बहन ने अपने एक दोस्त को रुपल के फ्लैट पर देखने के लिए भेजा। जब वह दोस्त वहाँ पहुँचा तो देखा कि फ्लैट अंदर से लॉक है और डोरबेल का कोई जवाब नहीं दे रहा है।

इसके बाद घटना के बारे में पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने डुप्लिकेट चाबी से फ्लैट को खोला गया तो रुपल का गला कटा हुआ और चारों तरफ खून फैला हुआ मिला। इसके बाद पुलिस ने इस घटना के बारे में रुपल के परिजनों को जानकारी दी और घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम बुलाकर जाँच शुरू की।

अटवाल पवई तुंगा गाँव में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहता था। वह मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था और 12 साल पहले मुंबई आया था। वह सोसायटी में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। उनकी पत्नी भी सफाई कर्मचारी के रूप में काम करती थी।

पुलिस अटवाल की मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए अंधेरी की हवालात में उनके साथ मौजूद अन्य आरोपियों का बयान दर्ज करेगी। इसके साथ ही अटवाल की पत्नी का भी बयान दर्ज करेगी कि यह कदम उठाने से पहले उसे कुछ बताया तो नहीं था।

कंगना रनौत के ‘साहस’ से पाकिस्तानी हिरोइन हैरान, कहा- मिलकर उसे दो थप्पड़ माारना चाहती हूँ: खुद साथी हीरो का ‘ब्याह बर्बाद’ करने को लेकर बदनाम रही है नौशीन शाह

पाकिस्तानी अभिनेत्री नौशीन शाह हाल ही में एक इंटरव्यू में भारतीय अभिनेत्री कंगना रनौत को न सिर्फ ‘चरमपंथी’ कहा बल्कि थप्पड़ मारने जैसी बात भी कह दी। दरअसल, वह कंगना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ दिए बयानों से आहत नजर आ रहीं हैं। हालाँकि इसे लोग नौशीन द्वारा कंगना पर कीचड़ उछालकर या उनके खिलाफ विवादित बयान देकर मशहूर होने की कोशिश मान रहे हैं।

नौशीन इंटरव्यू में 29 मिनट के बाद करीना की खूबसूरती और भारत के कलाकारों पर बात करते बोल रहीं थीं कि दोनों देशों के अभिनेताओं को एक-दूसरे का सम्मान कैसे करना चाहिए और फिर उन्होंने बीच में यह भी स्वीकार किया कि वह अभी तक किसी भी भारतीय अभिनेता या अभिनेत्री से नहीं मिली हैं, लेकिन वह कंगना से मिलना चाहती हैं और उन्हें दो थप्पड़ मारना चाहती हैं। ‘हद कर दी विद मोमिन साकिब’ वीडियो के यूट्यूब संस्करण में ‘थप्पड़’ शब्द को म्यूट कर दिया गया है, लेकिन नौशीन शाह के हाथ के इशारे से यह साफ़ जाहिर है।

क्या कहा नौशीन शाह ने

पाकिस्तानी अभिनेत्री नौशीन ने कहा, “जिस तरह से वह मेरे देश के बारे में बकवास कहती है, जिस तरह से वह पाकिस्तानी सेना के बारे में बहुत बकवास कहती है, मैं उसके साहस को सलाम करती हूँ। उन्हें ज्ञान नहीं है लेकिन वो देश की बात करती हैं, वो भी किसी और के देश की। अपने देश पर ध्यान केंद्रित करें, अपने अभिनय, अपने निर्देशन पर ध्यान केंद्रित करें, अपने विवादों और पूर्व-प्रेमियों और न जाने क्या-क्या पर ध्यान दें।”

नौशीन ने कहा कि वह जानना चाहेंगी कि कंगना को पाकिस्तानी सेना और उनकी खुफिया एजेंसियों के बारे में इतनी जानकारी कैसे है, जबकि पाकिस्तान में भी लोगों को उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

वहीं अपने इंटरव्यू में उन्होंने सवाल किया, “आप कैसे जानते हैं कि पाकिस्तान में लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है? आप पाकिस्तानी सेना के बारे में कैसे जानते हैं? आप हमारी एजेंसियों के बारे में कैसे जानते हैं? हम खुद नहीं जानते, एजेंसियाँ ​​हमारे देश में हैं, सेना हमारे देश की है, वो ये बातें हमसे साझा नहीं करते। वे रहस्य हैं, क्या वे नहीं हैं? 

हालाँकि, इसी इंटरव्यू में नौशीन ने कंगना की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा कि कंगना एक बेहतरीन और खूबसूरत अभिनेत्री हैं लेकिन जब दूसरों और दूसरे देश (पकिस्तान) का सम्मान करने की बात आती है तो मुझे खेद है, वह बहुत बुरी है।”

कंगना के प्रशंसकों ने बताया मशहूर होने की कोशिश

वहीं इस मौके पर कंगना के प्रशंसकों ने यूट्यूब वीडियो के कॉमेंट में लिखा, “वह कौन है? वह कंगना की वजह से मशहूर हो रही हैं। एक और टिप्पणी में तो लिखा था, “कंगना के नाम ने इस महिला को सुर्खियों में ला दिया। यह इसके करियर का मुख्य आकर्षण है।”

पब्लिसिटी के लिए सेलिब्रिटी के पीछे पड़ने की पुरानी लत

बता दें कि नौशीन शाह पहले भी विवादों में रहीं हैं। मामला नौशीन और उनके साथी यासिर हुसैन के बीच 2019 का है। जब यासिर ने नौशीन पर उनकी शादी में ‘बिन बुलाए मेहमान’ होने का आरोप लगाया था। बाद में नौशीन इस विवाद को भी भुनाने के लिए कहा, “मैं निमंत्रण के बिना भी सेलिब्रिटी शादियों में जाती हूँ, मैं शादियाँ ख़राब करती हूँ और मुझे यह पसंद है।”

हालाँकि, इस बयान के बाद यासिर नौशीन की टिप्पणी से नाराज हो गए और अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर नौशीन  चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह लोकप्रियता हासिल करने के लिए फिर से ऐसी घटिया रणनीति अपनाने की कोशिश करेंगी तो वह उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने नौशीन पर शादी की पार्टी ख़राब करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि जहाँ नौशीन को पाकिस्तान के बाहर कोई नहीं जानता वहीं कंगना अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए वैश्विक राजनीति और मामलों पर भी बोलने में काफी मुखर रही हैं। फिल्मों की बात करें तो वह जल्द ही चंद्रमुखी-2 में नजर आएँगी, जो अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। वह अपने निर्देशन में बनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की रिलीज का भी इंतजार कर रही हैं, जिसमें वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की भूमिका में नजर आएँगी। उनके पास आने वाली फिल्मों में तेजस भी है जिसमें वह वायुसेना पायलट की भूमिका में हैं।

कनाडा में अब दुर्गा मंदिर पर हमला, दीवारों पर लिखा- पंजाब इज नॉट इंडिया: पहले भी हिंदुओं के पूजा स्थलों को निशाना बना चुके हैं खालिस्तानी

खालिस्तानियों ने कनाडा में फिर से एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया है। अब ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिख दिए गए थे। इन नारों में प्रधानमंत्री मोदी को ‘आतंकी’ बताते हुए पंजाब को भारत से अलग बताया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खालिस्तानी आतंकियों ने गुरुवार (7 सितंबर, 2023) तड़के मंदिर को निशाना बनाया। स्थानीय निवासी जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने के फोटो, वीडियो सामने आए हैं। दीवारों पर ‘मोदी इज टेररिस्ट’ यानी ‘मोदी आतंकी है’ और ‘पंजाब इज नॉट इंडिया’ यानी ‘पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है’ लिखा देखा जा सकता है।

हिंदुस्तान टाइम्स ने मंदिर समिति के सदस्य रोहित के हवाले से कहा है कि अब इन नारों को हटा दिया गया है। खालिस्तानी आतंकियों की इस गतिविधि पर मंदिर समिति का कहना है कि मंदिर पूजा करने के स्थान होते हैं न कि राजनीतिक गुटों और विचारधाराओं की लड़ाई का मैदान। किसी भी प्रकार की नफरत स्वीकार करने योग्य नहीं है। कनाडा के सरे में रहने वाले फ्रेंड्स ऑफ कनाडा एन्ड इंडिया फाउंडेशन के सदस्य मनिंदर सिंह गिल ने इस घटना को कायराना हरकत करार दिया है।

गौरतलब है कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकी लगातार पैर पसारते जा रहे हैं। 8 सितंबर को खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने वैंकूवर शहर में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी दी है। इस धमकी के बाद भारतीय उच्चायोग ने कनाडाई विदेश मंत्रालय को खालिस्तानी आतंकियों के चलते उत्पन्न खतरे के बारे में सूचित किया था।

कनाडा में मंदिर पर पहले भी हो चुके हैं हमले

बता दें कि कनाडा में हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने और तोड़फोड़ की इस साल हुई यह चौथी घटना है। इससे पहले सरे शहर में ही 12 अगस्त, 2023 को खालिस्तानियों ने लक्ष्मी नारायण मंदिर में तोड़फोड़ की थी। मंदिर के गेट पर खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के पोस्टर चिपका दिए थे। इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था।

इससे पहले इसी साल 31 जनवरी को ही कनाडा के ब्रैम्पटन में एक प्रमुख हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। इसके ऊपर भारत-विरोधी भड़काऊ बातें लिखी गई थीं। इसके बाद अप्रैल में भी कनाडा के ओंटारियो में एक और हिंदू मंदिर को खालिस्तानियों ने निशाना बनाया था। भारत-विरोधी नारे लिखे गए थे। इस मामले में कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया था, जिसमें दो लोगों को मंदिर की दीवार पर स्प्रे पेंट के जरिए भारत विरोधी नारा लिखते हुए देखा गया था।

हज हाउस बनाना सेकुलर काम: बॉम्बे हाईकोर्ट, हिंदूवादी नेता ने पुणे में सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण को की थी गिराने की माँग

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (7 सितंबर) को समस्त हिंदू अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे की पुणे में निर्माणाधीन हज हाउस को गिराने की माँग वाली याचिका खारिज कर दी। इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि हज हाउस का निर्माण एक ‘धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है, धार्मिक नहीं’।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर वाली कोर्ट की बेंच ने एकबोटे से कहा, “आपको धार्मिक गतिविधि और धर्मनिरपेक्ष गतिविधि में राज्य की संलिप्तता के बीच अंतर करना चाहिए। हज हाउस का निर्माण एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। यह कोई धार्मिक गतिविधि नहीं है। आप खुद को भ्रमित न करें।”

बेंच ने देखा कि इस मामले में मिलिंद एकबोटे की कोई व्यक्तिगत हित नहीं है तो उसने रिट याचिका को जनहित याचिका (पीआईएल) में बदल दिया। दरअसल, कोर्ट में हिंदू नेता एकबोटे के वकील ने दलील थी कि केवल एक समुदाय को ही फायदा कैसे मिलता है? पंढरपुर में लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया जाता है।

हज हाउस का निर्माण धार्मिक गतिविधि नहीं

समस्त हिंदू अघाड़ी के नेता मिलिंद एकबोटे के वकील कपिल राठौड़ ने अपने मुवक्किल के पक्ष में दलील दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में ‘जमीन के इस्तेमाल में बदलाव’ हुआ है, क्योंकि यह जगह पुणे के कोंढवा क्षेत्र के और उसके आसपास के लोगों को बुनियादी सुविधाएँ देने के लिए आरक्षित था। उन्होंने तर्क दिया कि हज हाउस के निर्माण के लिए जमीन का इस्तेमाल बदल दिया गया।

एडवोकेट कपिल राठौड़ ने कहा कि हज हाउस का निर्माण ‘धार्मिक गतिविधि’ के तहत आता है और यह वर्तमान परिदृश्य में स्वीकार्य नहीं है। एडवोकेट राठौड़ ने कोर्ट से कहा, “केवल एक समुदाय को फायदा क्यों मिले, जबकि पंढरपुर में लाखों श्रद्धालु आते है। इन श्रद्धालुओं के लिए कुछ नहीं किया गया।”

वहीं, पुणे नगर निगम की ओर से पेश वकील अभिजीत कुलकर्णी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा कि जमीन का इस्तेमाल नहीं बदला गया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदाय के लोगों को उनकी सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए यहाँ जगह मिलती है।

इस दौरान वकील कुलकर्णी ने कोर्ट का ध्यान हिंदू नेता के वकील राठौड़ की इस दलील पर दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा कि हज हाउस की इमारत की दो मंजिलों का निर्माण पहले ही किया जा चुका था। इसके बाद कोर्ट ने उनसे याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने को कहा।

बेंच ने वकील कपिल राठौड़ से कहा कि वह सिर्फ हज हाउस मामले पर ध्यान केंद्रित करें। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने उनसे सवाल किया, “जमीन के इस्तेमाल में बदलाव कहाँ हुआ है? यदि आप मंदिर बनाएँगे तो क्या इसका इस्तेमाल हर कोई करेगा? कृपया पहले एक मामला बनाएँ और फिर बताएँ कि हज हाउस का निर्माण नहीं किया जा सकता है।”

बेंच ने कहा, “आपने कहा कि जमीन के इस्तेमाल में बदलाव हुआ है। अपनी दलीलों में से कोई एक पैराग्राफ ऐसा बताएँ। इसमें कहा गया है कि यह ‘कानून की स्थापित स्थिति’ थी कि धार्मिक गतिविधियों में राज्य की संलिप्तता की अनुमति नहीं है।”

G20 के लिए वायुसेना ने रोका ‘त्रिशूल’, राफेल-सुखोई करेंगे दिल्ली के आसमान की पहरेदारी: भारत ने अमेरिका से माँगे ‘हंटर किलर’ ड्रोन

दिल्ली में 9 और 10 सितंबर 2023 को G-20 शिखर सम्मेलन होना है। इसकी सुरक्षा में राफेल, सुखोई समेत अन्य फाइटर विमान तैनात किए गए हैं। वहीं भारत ने अमेरिका से 31 हंटर किलर ड्रोन के लिए औपचारिक अनुरोध भी किया है।

TOI की रिपोर्ट अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने कुछ दिन पहले रिमोटली पॉयलेटेड एयरक्रॉफ्ट सिस्टम वाले 31 ‘हंटर किलर’ की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार को एलओआर (Letter of Request) यानी अनुरोध पत्र भेजा है। इस पत्र में MQ9B रीपर या प्रीडेटर-B के हथियार पैकेज, मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य उपकरणों का जिक्र किया गया है।

इस पत्र को लेकर अब बायडेन सरकार विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कॉन्ग्रेस को एक-दो महीने के भीतर जवाब देगा। इसके बाद भारत और अमेरिका आपस में बातचीत कर ‘हंटर किलर’ ड्रोन के दाम करेंगे। भारत सरकार ने जिन ड्रोन की खरीदी का प्रस्ताव दिया है, उसमें 15 सी गार्डियन नौसेना को और 16 स्काई गार्डियन थल सेना और वायुसेना को दिए जाएँगे। रक्षा मंत्रालय ने 15 जून को कहा था कि इस सौदे में करीब 3.1 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा।

G-20 की सुरक्षा में तैनात फाइटर जेट

भारत सरकार G-20 शिखर सम्मेलन की सुरक्षा में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतना चाहती। ऐसे में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान-चीन सीमा पर चल रहे ‘त्रिशूल’ अभ्यास को फिलहाल रोक दिया है। साथ ही इस अभ्यास में शामिल राफेल, मिराज, चिनूक, अपाचे, गरुण समेत अन्य फाइटर जेट्स को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

मोदी-बायडेन करेंगे बैठक

G-20 में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन शुक्रवार (8 सितंबर, 2023) शाम करीब 6:55 पर भारत पहुँचेगे। इसके बाद वह शाम 7:30 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसके बाद बायडेन और मोदी साथ में डिनर करेंगे।

भारत आएगा छत्रपति शिवाजी का ‘वाघ नख’, इसी से अफजल खान को मौत के घाट उतारा था: गिफ्ट में लेकर चले गए थे अंग्रेज

छत्रपति शिवाजी महाराज के खंजर वाघ नख (Wagh Nakh) की घर वापसी होने वाली है। उन्होंने इसका ही उपयोग कर 1659 में बीजापुर सल्तनत के सेनापति अफजल खान को मौत के घाट उतारा था। बाद में अंग्रेज गिफ्ट के तौर पर इसे ब्रिटेन लेकर चले गए। लेकिन अब खबर आ रही है कि ब्रिटेन इसे भारत को लौटाने के लिए तैयार हो गया है।

महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार सितंबर 2023 के आखिर में इसे वापस भारत लाने की आधिकारिक प्रक्रिया के लिए लंदन जाएँगे। वहाँ वे विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। इसी संग्रहालय में ये नख रखा हुआ है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो ‘वाघ नख’ इसी साल देश में आ जाएगा।

जगदंबा तलवार के भी वापस आने के आसार

रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने बताया, “हमें ब्रिटेन के अधिकारियों से एक पत्र मिला है। इसमें कहा गया है कि वे हमें छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख वापस देने पर राजी हो गए हैं। हिंदू कैलेंडर के आधार पर हम इसे उस दिन वापस पा सकते हैं, जिस तिथि को शिवाजी ने अफ़ज़ल खान को मार डाला था। कुछ अन्य तारीखों पर भी विचार किया जा रहा है और वाघ नख को वापस लाने के तौर-तरीकों पर भी काम किया जा रहा है।”

मंत्री मुनगंटीवार ने आगे कहा, “एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा, हम अन्य वस्तुओं जैसे कि शिवाजी की जगदंबा तलवार को भी देखेंगे, जो यूके में प्रदर्शित है और इन्हें वापस लाने के लिए भी कदम उठाएँगे। तथ्य यह है कि वाघ पंजा वापस आ रहा है। यह महाराष्ट्र और उसके लोगों के लिए एक बड़ा कदम है। अफजल खान की हत्या की तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के आधार पर 10 नवंबर है, लेकिन हम हिंदू तिथि कैलेंडर के आधार पर तारीखें तय कर रहे हैं।” उन्होंने ये भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख इतिहास का अमूल्य खजाना है और इनसे राज्य के लोगों की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं।

वाघ नख लेने कौन जाएगा लंदन

सांस्कृतिक मंत्रालय ने बताया है कि मंत्री मुनगंटीवार के साथ संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख सचिव डॉ. विकास खड़गे और राज्य के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के निदेशक डॉ. तेजस गर्गे लंदन का दौरा करेंगे। यह तीन सदस्यीय टीम की 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक छह दिनों की यात्रा के लिए ब्रिटेन जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि स्टील से बने वाघ नख में चार पंजे होते हैं जो एक पट्टी पर लगे होते हैं और पहली तथा चौथी ऊँगलियों के लिए दो छल्ले होते हैं।

साभार टाइम्स ऑफ इंडिया

कैसे भारत से ब्रिटेन पहुँचा वाघ नख

महाराष्ट्र के अधिकरियों के मुताबिक, वाघ नख मुट्ठी में पहने जाने वाला अपनी तरह का पहला पंजा खंजर है। ये बड़ी बिल्लियों यानी शेर, बाघ, चीते के पंजों से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। ये अंगुली के जोड़ों पर पहना जाता है। ये हथेली के नीचे छुपा कर पहना जा सकता है। इसमें चार ब्लेड होते हैं जो दस्तानों या क्रॉस बार में फिक्स होते हैं।

ये दुश्मन की स्किन और माँसपेशियों को चीर देने के लिए डिजाइन किया गया होता है। ये वाघ नख सतारा कोर्ट में शिवाजी के वंशजों के पास था। 1818 में अंग्रेज अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ को यह उपहार के तौर पर मिला था। डफ को उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी ने सतारा स्टेट का रेजिडेंट राजनीतिक एजेंट बनाकर भेजा था। उसने सतारा की कोर्ट में 1818 से लेकर 1824 तक अपनी सेवाएँ दी थी। इसके बाद वो वाघ नख अपने साथ ब्रिटेन ले गया। वहाँ उसके वंशजों ने इस हथियार को विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय को दान कर दिया।

बाइबल बाँटना, गाँव वालों (SC/ST) को एक जगह जमा करना, ‘भंडारा’ कराना… यह सब धर्म परिवर्तन के लिए लालच नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

  • अगर आप बाइबल बाँटते हैं
  • अगर आप गाँव में लोगों (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय) को जमा कर सभा करते हैं
  • अगर आप बच्चों को पढ़ने के लिए कहते हैं
  • अगर आप लोगों को आपस में झगड़ने से मना करते हैं
  • अगर आप लोगों को शराब पीना से मना करते हैं

…अगर आप ऊपर लिखे गए काम करते हैं, तो इलाहाबाद हाई कोर्ट के अनुसार यह सब धर्म परिवर्तन के लिए लालच देने की श्रेणी में नहीं आता है। जज शमीम अहमद का यह मानना है। धर्म परिवर्तन के 2 आरोपित जोस पापाचेन और शीजा को जज ने जमानत भी इसी आधार पर दी है।

धर्म परिवर्तन के दोनों आरोपितों को जमानत देते हुए जज शमीम अहमद ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में केवल पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार का सदस्य ही एफआईआर दर्ज करवा सकता है। जबकि इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री ने शिकायत दर्ज की थी।

उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 का उल्लेख करते हुए जज ने बताया:

“शिकायतकर्ता सत्ताधारी पार्टी का जिला मंत्री है। वो न तो पीड़ित व्यक्ति है, न ही उसका माता-पिता, भाई, बहन या कोई ऐसा व्यक्ति है, जो पीड़ित के साथ खून के रिश्ते में है, या विवाह अथवा गोद लिए हुए रिश्ते में है, इसलिए उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 की धारा 4 के तहत वो (शिकायतकर्ता) इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए भी सक्षम नहीं है।”

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में 24 जनवरी 2023 को इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने इसके बाद 2 आरोपितों जोस पापाचेन और शीजा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर आरोप था कि ये गाँव में जाकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लिए लालच देते थे।

जेल में बंद दोनों आरोपित इससे पहले भी जमानत के लिए अदालत गए थे। इस साल मार्च में इन दोनों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत विशेष न्यायाधीश ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ये लोग इलाहाबाद हाई कोर्ट गए, जहाँ जज शमीम अहमद ने दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुन जमानत दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में आरोपितों के वकील ने तर्क दिया कि ये दोनों केवल अच्छी शिक्षा के लिए प्रेरणा दे रहे थे, लोगों में बाइबल बाँट रहे थे, गाँव के लोगों को जमा कर सभा आयोजित कर रहे थे और ‘भंडारा’ करा रहे थे। वकील के अनुसार इन सारे कामों को धर्म परिवर्तन के लिए लालच नहीं कहा जा सकता है।

इस मामले में सरकारी पक्ष के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपित उत्तर प्रदेश में ईसाई राज्य स्थापित करना चाहते थे। ये अन्य धर्मों के लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए अनुचित प्रभाव से लोगों को लुभा रहे थे, गाँव वालों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहे थे।

शिक्षा के नाम पर ईसाई बनाने का खेल नया नहीं

2-3 महीने पहले की ही घटना है। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में शिक्षा की आड़ में ईसाई धर्मांतरण हो रहा था। धर्म-परिवर्तन की साजिश वहाँ भी बच्चों को फ्री शिक्षा के बहाने की जा रही थी। फ्री में किताबें और पेंसिल के साथ-साथ ईसाई मत की किताबें भी बाँटी गई थी।

स्कूलों में ईसाई धर्मांतरण का खेल कैसे खेला जाता है, इस जाल में कैसे बच्चे और उनके परिवार वाले फँसते हैं, कैसे छात्र-छात्राओं को यौन शोषण के दलदल में फँसाया जाता है, ऐसे 15 मामलों की लिस्ट हमने पिछले साल बनाई थी। इस लिस्ट में भी सिर्फ वही मामले हैं, जो मीडिया में आ पाए। सच्चाई यह है कि न जाने कितने बच्चे-परिवार ऐसे हैं, जो लालच में आकर ईसाई बन भी गए और खो भी गए।

विवेकानन्द केंद्र की उपाध्यक्ष निवेदिता भिडे को झेलना पड़ा वामपंथियों और इस्लामवादियों के दुष्प्रचार का वार, विश्व धर्म संसद ने उनका भाषण रद्द किया

कभी अमेरिका के शिकागो शहर के धर्म संसद में आज से 130 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म के झंडे गाड़े थे। अब वहीं आयोजित होने वाली विश्व धर्म संसद के आयोजकों ने वक्ता के तौर पर भारत की तरफ से वहाँ जाने वाली स्वामी विवेकानन्द केंद्र की उपाध्यक्ष निवेदिता रघुराम भिडे का पत्ता काट दिया।

दरअसल शिकागो, इलिनॉय में विश्व धर्म संसद के आयोजकों ने सोमवार (14 अगस्त 2023) को अचानक निवेदिता भिडे को एक सूचना दी। ये सूचना धर्म संसद में उनके भाषण से जुड़ी थी। दरअसल, भिडे को 16 अगस्त 2023 को इस धर्म संसद में पूरे एक सत्र के लिए बोलना था।

दरअसल, भिडे का भाषण यूँ ही रद्द नहीं हुआ, बल्कि धर्म संसद के इस बहिष्कार की वजह एक लक्षित अभियान रहा है। इसके पीछे वामपंथी मीडिया, शिक्षा जगत और इस्लामी समूहों का वो सहयोग रहा, जिसने इस आयोजन में हिंदू प्रतिनिधित्व को दबाने का काम किया। अब आपको भी जानने की उत्सुकता हो रही होगी कि आखिर ये निवेदिता भिडे कौन हैं, जो वामपंथी और इस्लामवादियों का निशाना बनीं।

कौन हैं निवेदिता भिडे?

निवेदिता भिडे को साल 2017 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वो कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द केंद्र की ‘जीवनव्रती’ हैं। ‘जीवनव्रती’ से मतलब संगठन के काम में आजीवन समर्पित कार्यकर्ता से है। इस संगठन के लिए वह 1977 से काम कर रही हैं। वर्तमान में वो इस केंद्र में उपाध्यक्ष हैं।

उनके नाम 15 से अधिक प्रकाशित पुस्तकों के साथ एक प्रभावशाली साहित्यिक रिकॉर्ड है। अपना ज्ञान दूसरे में बाँटने के लिए वो दुनिया भर में नियमित तौर पर दैनिक योग और आध्यात्मिक शिक्षा (Spiritual Retreat) देती हैं। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में कई पेपर दिए हैं।

निवेदिता भिडे ने दुनिया भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में व्याख्यान दिए हैं। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना के बाद से उसके ट्रस्टी के तौर पर वो सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने में सक्रिय तौर से शामिल रही हैं। वो जुलाई 2020 से भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की सदस्य हैं।

विवेकानन्द केंद्र क्या है?

विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी को अक्सर विवेकानन्द केन्द्र कहा जाता है। ये भारत का एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगठन है। इसकी स्थापना 1972 में भारत के महान दार्शनिक और आध्यात्मिक नेता स्वामी विवेकानन्द के सम्मान में तमिलनाडु के कन्याकुमारी में की गई थी।

यह संगठन स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं से प्रेरणा लेता है। इसका उद्देश्य आध्यात्मिक रूप से जागृत और सांस्कृतिक रूप से जीवंत भारत के उनके दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है। इस केंद्र की स्थापना एकनाथ रानाडे ने 1972 में की थी। एकनाथ रानाडे (1914-1982) स्कूल के दौरान ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हो गए थे।

धीरे-धीरे वह संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजक और नेता बन गए। संगठन के कई रैंक पर काम करते हुए उन्होंने 1956-62 तक संगठन के महासचिव के तौर पर अपनी सेवाएँ दीं। एकनाथ रानाडे एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता, आध्यात्मिक नेता और स्वामी विवेकानन्द की शिक्षाओं के अनुयायी थे।

उन्होंने विवेकानन्द केंद्र कन्याकुमारी की स्थापना और उसके फलने-फूलने में अहम भूमिका निभाई। उनकी दिखाई राह पर चलते हुए ये केंद्र आज भी स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों और मूल्यों को बढ़ावा दे रहा है। संगठन ने 2014-2015 में उनका जन्म शताब्दी वर्ष मनाया गया था और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहे थे।

विवेकानंद केंद्र की मुख्य विशेषताओं और गतिविधियों में योग एवं ध्यान सहित कन्याकुमारी में विवेकानन्द रॉक मेमोरियल, देश के कई जगहों पर सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियाँ कराना, ग्रामीण विकास, युवा सशक्तिकरण, आध्यात्मिक पुनर्जागरण, विवेकानन्द केंद्र विद्यालयों का संचालन और स्वामी जी के जीवन, कामों और संगठन से जुड़े कई तरह के साहित्य का प्रकाशन करना शामिल हैं।

विश्व धर्म संसद क्या है?

विश्व धर्म संसद एक अंतरराष्ट्रीय सभा है जो अंतरधार्मिक संवाद, सहयोग और समझ को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं के व्यक्तियों, संगठनों और नेताओं को एक साथ लाती है। ऐसा माना जाता है कि यह वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने, उन पर बात रखने, शांति और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के तौर पर काम करता है।

पहली बार विश्व धर्म संसद 1893 में संयुक्त राज्य अमेरिका के इलिनॉस राज्य के शिकागो शहर आयोजित की गई थी। इसे विश्व के कोलंबियाई प्रदर्शनी के तौर पर आयोजित किया गया था। इसे शिकागो विश्व मेले के तौर पर भी जाना जाता है। ये 1492 में क्रिस्टोफर कोलंबस के नई दुनिया अमेरिका में आगमन की 400वीं वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित किया गया था।

1893 की इस संसद को एक ऐतिहासिक घटना माना जाता है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर अंतरधार्मिक संवाद की शुरुआती कोशिशों में से एक थी। इसमें ईसाई, हिंदू ,बौद्ध, इस्लाम सहित अन्य कई धार्मिक परंपराओं के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

विश्व धर्म संसद में आम तौर पर गतिविधियों और कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होती है। इनमें पूर्ण सत्र, कार्यशाला, पैनल चर्चा, अंतरधार्मिक संवाद, सांस्कृतिक आयोजन, प्रदर्शनी, युवा कार्यक्रम और सामुदायिक सेवाओं जैसी गतिविधियाँ और कार्यक्रम शामिल होते हैं।

विश्व धर्म संसद 2023

विश्व धर्म संसद अपनी स्थापना के बाद से अनियमित अंतरालों पर आयोजित की जाती रही है। इसके बाद दुनिया भर के विभिन्न शहरों में सभाएँ होती रही हैं। साल 2023 में ये 14 अगस्त से 18 अगस्त 2023 तक शिकागो में आयोजित की गई। इस वर्ष की सभा का विषय था ‘विवेक के लिए एक आह्वान: स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा’।

बदकिस्मती से इस साल सम्मेलन के आयोजकों ने वामपंथियों और इस्लामवादियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आयोजकों ने पूर्ण सत्र में बोलने के लिए आमंत्रित लोगों में से एक की स्वतंत्रता और मानवाधिकार को नकार कर मंच पर बोलने से रोक दिया। आयोजकों ने 16 अगस्त 2023 को होने वाली निवेदिता भिडे की वार्ता रद्द कर दी।

वामपंथियों और इस्लामवादियों ने कैसे निवेदिता भिडे को शैतान बनाया?

बौद्धिक असहिष्णुता का बढ़ना संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों दोनों में गौर करने वाली प्रवृत्ति है। शैक्षणिक संस्थान, थिंक टैंक और यहाँ तक कि निगम भी असहमति की आवाजों और अलग तरह के नजरिए से निपटने के पसंदीदा साधनों के तौर पर कैंसिल कल्चर, सेंसरशिप, डी-प्लेटफॉर्मिंग, अनुशासनात्मक उपाय, वित्तीय दंड और कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाईयों जैसी प्रथाओं को धड़ल्ले से अपना रहे हैं।

दरअसल शिकागो के लिए रवाना होने से पहले पहले भिडे को रटगर्स विश्वविद्यालय में वामपंथी-इस्लामवादी संकाय के सदस्य ऑड्रे ट्रुश्के की एक सोशल मीडिया पोस्ट मिली थी। इस ट्वीट में ट्रुश्के ने भिडे को ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ करार दिया।

ट्रुश्के ने अपनी ट्वीट में लिखा, “भिडे हाल के वर्षों में गलत सूचना फैलाने में व्यक्तिगत तौर पर लगी हुई हैं, जो भारतीय मुस्लिमों को शैतान के तौर पर पेश करती है। इस दौरान हिंदू राष्ट्रवादी नेतृत्व में भारत में मुस्लिम विरोधी हिंसा तेजी से बढ़ी है। भिडे के हिंदू राष्ट्रवाद का समर्थन करने वाले घोर दक्षिणपंथी राजनीतिक संगठनों के साथ गहरे रिश्ते हैं। ये एक गहरी इस्लामोफोबिक राजनीतिक विचारधारा है।”

दिलचस्प बात ये है कि ऑड्रे ट्रुश्के स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व आइडियोलॉजी (SAHI) की सलाहकार बोर्ड में भी हैं। यह संस्था संयुक्त राज्य अमेरिका की दक्षिणपंथी विचारधारा विरोधी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ गहरे रिश्ते रखती है। ये संस्था 2020 में हिंदूफोबिक ‘होली अगेंस्ट हिंदुत्व’ अभियान चलाने के लिए कुख्यात है। तब इसे केवल ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व’ कहा जाता था।

SAHI के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य अजीत साही हैं, जो भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद के एडवोकेसी निदेशक हैं। अजीत साही बदनाम तहलका पत्रिका के पूर्व कार्यकारी निदेशक हैं। वह कई मौकों पर अमेरिका के प्रमुख मंचों से भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करते नजर आ चुके हैं।

कार्यक्रम के स्पॉन्सर्स में से एक भारतीय अमेरिकी मुस्लिम संगठन (आईएएमसी) ने भी भिडे को विश्व धर्म संसद के मंच से हटाने के लिए सक्रिय कदम उठाए। उसने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आलोचना की आड़ में प्रचार वाले पर्चे बाँटे।

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल एक कट्टरपंथी इस्लामी समूह है। इसका स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के साथ संबंध रहे हैं और भारत के खिलाफ लॉबी करने का उसका एक लंबा इतिहास रहा है।

आईएएमसी के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद ने कहा था, “विश्व धर्म संसद में प्रतिभागियों को ‘विवेक का आह्वान: स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा’ सम्मेलन में हिंदू राष्ट्रवादी निवेदिता भिडे को शामिल करने का मुखर विरोध करना चाहिए।”

रशीद ने आगे कहा था, ” भिडे विवेकानंद केंद्र की नेता है और यह संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एक सहयोगी संगठन है। भिडे भारत की मौलिक रूप से बहिष्कारवादी नजरिए को आगे बढ़ाने में मदद कर रही हैं ये ‘स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा’ के बिल्कुल उलट है।”

यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि आईएएमसी जमात-ए-इस्लामी समर्थित एक लॉबिस्ट संगठन है, जो खुद को अधिकारों की वकालत करने वाली संस्था होने का दावा करता है। अतीत में इसने भारत को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर बने संयुक्त राज्य आयोग (यूएससीआईआरएफ) की ब्लैक लिस्ट में डालने के लिए अमेरिका में कई समूहों के साथ सहयोग किया था। यहाँ तक कि उन्हें पैसे भी दिए थे।

डिसइन्फो लैब की एक विस्तृत रिपोर्ट में आतंकी संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ आईएएमसी के रिश्तों का खुलासा हुआ है। वहीं, मिडिल ईस्ट आई ने 7 अगस्त 2023 को एक लेख प्रकाशित किया था। इसका शीर्षक ‘कार्यकर्ताओं ने विश्व धर्म संसद में हिंदू राष्ट्रवादी मौजूदगी पर फिक्र जताई’ था। यह लेख इस्लामवादी प्रचारक आज़ाद एस्सा (Azad Essa) ने लिखा था।

उन्होंने लिखा, “निवेदिता भिडे ने नियमित तौर पर दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादियों की बयानबाजी को साझा किया है, जो अहम भारतीय एक्टिविस्ट को बदनाम करते हैं और उन्हें शैतान बताते हैं। इन लोगों ने शोधकर्ता और एक्टिविस्ट आफरीन फातिमा, वाशिंगटन पोस्ट के कॉलमनिस्ट राना अय्यूब, दिवंगत ईसाई फादर स्टेन स्वामी को अपना निशाना बनाया है।”

आजाद एस्सा खुद को पत्रकार बताकर निवेदिता भिडे के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करते हैं। इस्लामोफोबिया की आड़ में वो मुस्लिमों को पीड़ित और अन्य को हमलावर के तौर पर दिखाने के लिए अपने लेखन का इस्तेमाल करते हैं। ऑड्रे ट्रुश्के उनके इस नजरिए को बढ़ावा देने वाली एक कड़ी हैं।

आजाद एस्सा ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए निवेदिता भिडे के बारे में उनकी टिप्पणियों को जिक्र किया है। जिन अन्य दोषियों का पत्रकार आजाद एस्सा ने अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल किया वे IAMC के रशीद अहमद जैसे शख्स हैं। उन्हें एस्सा से समर्थन मिला था। रशीद अहमद भी एक विवादास्पद पृष्ठभूमि वाला स्वयंभू पत्रकार है, जो पहले मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े नेटवर्क अल जज़ीरा इंग्लिश से जुड़ा था।

आजाद एस्सा मिडिल ईस्ट आई (एमईई) के लिए काम करते हैं। इसके मालिक जमाल अवन जमाल बेसासो हैं, जो पहले कतर में अल जज़ीरा और लेबनान में हमास से जुड़े अल-कुद्स टीवी के पूर्व अधिकारी रहे हैं। हमास फिलिस्तीनी इस्लामी आतंकवादी संगठन है।

हमास का मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक लंबा इतिहास रहा है। हमास को यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, इज़राइल, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों ने एक आतंकवादी संगठन के तौर पर नामित किया है।

जमाल बेसासो मिडिल ईस्ट आई को एमईई लिमिटेड के जरिए चलाता है। अतीत में वो अल जज़ीरा के लिए योजना और मानव संसाधन के निदेशक और लेबनान में समालिंक टेलीविजन प्रोडक्शन कंपनी के लिए मानव संसाधन के निदेशक के तौर पर काम कर चुका है।

समालिंक टेलीविजन प्रोडक्शन कंपनी अल कुद्स (Al Quds) टीवी की वेबसाइट के लिए पंजीकृत एजेंट के तौर पर काम करती है। इससे साबित होता है कि ये एमईई और अन्य वामपंथी और इस्लामवादी ही थे, जिन्होंने निवेदिता भिडे को निशाना बनाया। इसी वजह से विश्व धर्म संसद के पूर्ण सत्र में उनका भाषण रद्द कर दिया गया।

कर्म लौटकर आता है

कहते हैं न कि कर्म लौटकर आता है और ऐसा ही शुक्रवार 18 अगस्त 2023 को हिंदू विरोधी नैरेटिव के लिए कुख्यात इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के के साथ हुआ। उन्हें शिकागो की विश्व धर्म संसद में अपने निर्धारित भाषण के दौरान अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करना पड़ा।

उन्हें वहाँ भारत विरोधी समर्थकों सुनीता विश्वनाथ और रशीद अहमद के साथ ‘सेंसरशिप,’ ‘स्वतंत्र भाषण,’ ‘दुष्प्रचार’ और कथित ‘दक्षिणपंथी समूहों से खतरे और उत्पीड़न’ जैसे विषयों पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया था। ‘मानव अधिकारों की रक्षा के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व’ शीर्षक वाले कार्यक्रम के दौरान ट्रुश्के ने खुद को खाली कुर्सियों और खाली हॉल को संबोधित करते हुए पाया।

धार्मिक सम्मेलन से निवेदिता भिडे को बाहर करने की वकालत करने इन लोगों को इनके कर्म का फल मिला और विश्व धर्म संसद में इन्हें सुनने के लिए लोग ही नहीं पहुँचे। इस सत्र को वर्चुअली आयोजित कर दिया गया था। इस तरह हिंदू धर्मग्रंथों में कर्म के सिद्धांत की व्याख्याएँ फिर से सही साबित हुईं।

इस सिद्धांत का सार यह है कि व्यक्ति आखिरकार अपने कर्मों का फल भोगता है। ऑड्रे ट्रुश्के का उद्देश्य निवेदिता भिडे को उनके विचारों को दबाने के लिए सम्मेलन में संबोधित करने से रोकना था, लेकिन विडंबना यह है कि उन्होंने खुद को उसी कार्यक्रम में अपनी बारी के दौरान बिना दर्शकों को संबोधित करते हुए पाया।

विश्व धर्म संसद और स्वामी विवेकानन्द

उल्लेखनीय है कि 1893 में शिकागो में आयोजित पहले विश्व धर्म संसद को हिंदू संन्यासी स्वामी विवेकानन्द की खास मौजूदगी और भाषण के लिए याद किया जाता है। कन्याकुमारी में विवेकानन्द केंद्र को प्रेरित करने वाले एक धार्मिक व्यक्तित्व भी वहीं हैं।

स्वामी विवेकानन्द ने 1893 में विश्व धर्म संसद की सभा में अपना शानदार भाषण दिया था। इसमें उन्होंने संप्रदायवाद, कट्टरता और इसके भयानक वंशजों पर बात की थी, जिन्होंने पृथ्वी को हिंसा से भर दिया, सभ्यताओं को नष्ट कर दिया और पूरे राष्ट्र को निराशा में डाल दिया।

उन्होंने हिंदू धर्म पर भी प्रकाश डाला, जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाई है, लेकिन इसी स्वामी विवेकानन्द की समर्पित अनुयायी निवेदिता भिडे को 130 साल बाद विश्व धर्म संसद में बोलने के अवसर से वंचित कर दिया गया।