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मोदी सरकार ने बुलाया 5 दिनों का संसद का विशेष सत्र, एजेंडा और टाइमिंग को लेकर लग रहे कयास: क्या कुछ बड़ा होने जा रहा

"संसद के इतिहास में, किसी उत्सव के दौरान कोई सत्र नहीं हुआ है। जिन दिनों गणपति उत्सव मनाया जाता है, उन दिनों उन्होंने सत्र रखा है। यह उनका हिंदुत्व है।" 

केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। यह सत्र 18 से 22 सितंबर के बीच होगा। इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि इस सत्र में 5 बैठकें होंगी। पहली बैठक 18 सितंबर को होगी, जबकि आखिरी बैठक 22 सितंबर को होगी।

इस सत्र में क्या एजेंडा होगा, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालाँकि, माना जा रहा है कि इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण बिल पेश कर सकती है। इनमें आर्थिक सर्वेक्षण, 2023-24, बजट संशोधन विधेयक, 2023, और कुछ अन्य विधेयक शामिल हो सकते हैं।

वहीं विपक्ष ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह सरकार की मनमानी है। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को चलाने में असफल है इसलिए यह विशेष सत्र बुला रही है।

वहीं इस मामले में शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत का बयान भी सामने आया है, “संसद के इतिहास में, किसी उत्सव के दौरान कोई सत्र नहीं हुआ है। जिन दिनों गणपति उत्सव मनाया जाता है, उन दिनों उन्होंने सत्र रखा है। यह उनका हिंदुत्व है।” 

बता दें कि संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से 12 अगस्त तक चला था। इस सत्र में विपक्षी दलों ने सरकार के कई बिलों का विरोध किया था। मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन इंडिया केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लेकर आया था।

इस पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर हमला बोला था। सरकार की ओर से इस मामले को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने विस्तार से जवाब दिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्ष पर चुन-चुन कर हमला बोला था।

विशेष परिस्थितियों में बुलाए जाते हैं विशेष सत्र

आमतौर पर संसद के तीन सत्र होते हैं। इसमें बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र शामिल हैं। विशेष परिस्थितियों में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने का प्रावधान किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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