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बोले CJI चंद्रचूड़- 35A ने नागरिकों से छीने 3 मौलिक अधिकार, केंद्र ने बताया पुलवामा अटैक के बाद लिया जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का फैसला

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 (Article 370 Case) हटाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुनवाई के 11वें दिन सोमवार (28 अगस्त 2023) को केंद्र ने बताया कि पुलवामा हमले के बाद अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया गया था। वहीं मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 35A (Article 35A) को नागरिकों के मौलिक अधिकारों को हनन करने वाला बताया।

सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। केंद्र सरकार की दलीलों को सुनने के दौरान अनुच्छेद 35A को लेकर मौखिक टिप्पणी की गई।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि अनुच्छेद 35ए नागरिकों के तीन मौलिक अधिकार छीन लेता है। इसने गैर कश्मीरियों को राज्य में बसने, अचल संपत्ति खरीदने और रोजगार में समानता के अधिकार से वंचित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अनुच्छेद 35A हटने के कारण जम्मू-कश्मीर में निवेश आना शुरू हुआ है। केंद्र सरकार के अधीन पुलिस व्यवस्था होने के कारण पर्यटन भी शुरू हो गया है। एसजी मेहता ने बताया कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से 16 लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आ चुके हैं। क्षेत्र में नए होटल खोले गए हैं। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है।

अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने बताया कि पहले जो गलतियाँ हुईं हैं, उनका असर आने वाली पीढ़ियों पर नहीं पड़ना चाहिए। साल 2019 तक जो गलती चली आ रही थी, उसे सुधारना जरूरी था। इस मामले को जम्मू-कश्मीर के लोगों के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। अब तक उन लोगों को समझाने वालों ने उनसे कहा था कि अनुच्छेद 370 नुकसान नहीं, बल्कि उनका विशेषाधिकार है और उन्हें इसके लिए लड़ते रहना चाहिए।

एसजी मेहता ने आगे कि यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि जो अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के लोगों अधिकारों और विकास में बाधा बना हुआ था, उसे लोगों को एक विशेषाधिकार की तरह बताया जा रहा था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने को लेकर सरकार का पक्ष रखते हुए यह भी कहा है कि बहुत सारी चीजें हुईं हैं। साल 2019 की शुरुआत में पुलवामा हमला हुआ था। इसके बाद सरकार ने 370 हटाने का मन बना लिया था। इसके अलावा, देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दों को देखते हुए 370 हटाया गया।

बहन से ‘छेड़खानी’ का विरोध करने पर 16 साल के सत्यम की पीट-पीटकर हत्या, ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ की तलाश: स्कूल विवाद में पिटाई बता रही पुलिस

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के कोरांव तहसील के गाँव खीरी में 16 साल के सत्यम शर्मा की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। वह 10वीं की छात्र था। परिजनों का दावा है कि चचेरी बहन से छेड़खानी का विरोध करने पर उसकी पिटाई की गई।

पुलिस छेड़खानी के आरोपों को गलत बता रही है। दैनिक जागरण ने डीसीपी संतोष मीणा के हवाले से बताया है कि स्कूल में हुए विवाद के बाद छात्र को पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। दैनिक भास्कर ने एसीपी राजीव यादव के हवाले से छेड़खानी के आरोप को गलत बताया है। कहा है कि परिजनों ने नामजद तहरीर दी है। 4 के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनमें ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ भी है, जिसकी तलाश की जा रही है।

घटना 28 अगस्त 2023 की है। परमानंद इंटर कॉलेज का छात्र सत्यम शर्मा स्कूल की छुट्टी के बाद अपनी चचेरी बहन के साथ लौट रहा था। तुर्कपुरवा मोहल्ले में मुस्लिम समुदाय के कुछ छात्रों ने उसकी बहन से कथित तौर पर छेड़खानी की। आरोपित भी इसी स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं।

कथित तौर पर जब सत्यम ने छेड़खानी का विरोध किया तो उस पर पट्टे से वार किया गया। उससे इतना मारा गया कि वह बेसुध होकर गिर पड़ा। इस दौरान उसकी बहन मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई आगे नहीं आया। बाद में उसे प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सत्यम शर्मा पुरादलू गाँव का रहने वाला था। उसकी बहन ने बताया है, “सोमवार को स्कूल बंद होने के बाद हम दोनों घर जा रहे थे। तुर्कपुरवा मोहल्ले में इसी गाँव के और हमारे स्कूल में पढ़ने वाले गैर-समुदाय के छात्रों ने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे खींचने की कोशिश करने लगे। मैं चिल्लाई तो भाई उनसे भिड़ गया। इसके बाद उन्होंने मेरे भाई पर हमला कर दिया। पटरे से उसे तब तक मारा जब तक वह जमीन पर गिर नहीं गया। फिर हमलावर धमकी देते हुए भाग निकले।”

कथित तौर पर यह घटना ग्राम प्रधान मोहम्मद यूसुफ के घर के सामने हुई। गुहार लगाने पर भी उसने सत्यम की बहन की मदद नहीं की। छेड़खानी के आरोपित लड़के भी उसके घर के बताए जा रहे हैं। मोहम्मद यूसुफ पर पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।

दो समुदायों के बीच का मामला होने के कारण इलाके में तनाव पैदा हो गया। नाराज ग्रामीणों ने खीरी चौराहे पर 9 घंटे चक्का जाम कर दिया। हालात पर काबू पाने के लिए आला अधिकारियों को भी मौके पर आना पड़ा। पीड़ित परिजनों के अनुसार सत्यम की बहन के साथ इससे पहले स्कूल में भी छेड़खानी हुई थी। तब उन्होंने स्कूल प्रबंधन से इसकी शिकायत की थी।

वहीं परमानंद इंटर कॉलेज के प्रबंधक मनोज पांडेय ने बताया है, “शिकायत पर उन्होंने युवकों को बुलाकर समझाया था। स्थानीय पुलिस से भी कई बार छुट्‌टी के वक्त पुलिस की तैनाती को लेकर कहा जा चुका है।”

‘मुस्लिमों की तरह दिखो’: अफगानिस्तान में हिंदू-सिख महिलाएँ नकाब पहनने को मजबूर, तालिबानी शासन में त्योहार मनाने पर भी पाबंदी

अफगानिस्तान में गैर मुस्लिम नाममात्र के रह गए हैं। लेकिन इन्हें भी तालिबानी शासन में कठोर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। हिंदू-सिख महिलाओं को बुर्का और नकाब पहनने को मजबूर किया जा रहा है। सार्वजनिक तौर पर वे त्योहार भी नहीं मना सकते हैं।

रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी (RFE/RL) की रिपोर्ट से अफगानिस्तान में गैर मुस्लिमों की दयनीय स्थिति सामने आई है। इसमें बताया गया है कि तालिबानी कब्जे के बाद ही अंतिम यहूदी परिवार को देश छोड़कर भागना पड़ा था। अब हिंदू और सिख परिवार मुट्ठी भर बचे हैं। लेकिन ये भी कठोर प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं।

आरएफई/आरएल की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में अब हिंदू और सिखों की जनसंख्या नाम मात्र ही बची हुई है। वहीं अब तालिबान उनके त्योहार मनाने पर प्रतिबंध और मुस्लिमों की तरह कपड़े पहनने को लेकर मजबूर कर रहा है। ऐसे में लोगों के पास अफगानिस्तान छोड़कर वापस भारत लौटने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है।

हिंदू-सिखों को मुस्लिमों की तरह दिखने, उनकी तरह कपड़े पहनने को मजबूर किया जा रहा है। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में भी सिखों की संख्या बहुत कम रह गई है। काबुल में रहने वाली फरी कौर का कहना है, “मैं अपने मन से कहीं भी बाहर नहीं जा सकती। जब मैं बाहर जाती हूँ तब मुझे मुस्लिमों की तरह पकड़े पहनने के लिए मजबूर किया जाता है। तालिबान नहीं चाहता कि मैं सिख की तरह दिखूँ।” 

साल 2018 में जलालाबाद में हिंदुओं और सिखों को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में फरी के पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी माँ और बहनों समेत करीब 1500 सिखों ने अफगानिस्तान छोड़ दिया था। लेकिन वह अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए अफगानिस्तान में ही रुक गईं। तालिबान के कब्जे के बाद भी सैकड़ों सिख अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं। लेकिन फरी कौर कहीं नहीं गईं। लेकिन अब उनका कहना है कि तालिबानी शासन में हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें अफगानिस्तान छोड़ना पड़ेगा। तालिबान के वापस लौटने के बाद से उन्होंने त्योहार नहीं मनाए हैं।

तालिबान के डर से अफगानिस्तान से भागकर भारत आए चाबुल सिंह और उनका परिवार अब दिल्ली में रह रहा है। चाबुल की तरह कई हिंदू, सिख परिवार अफगानिस्तान से भारत आ गए हैं। उन्हें अब यहाँ गरीबी का सामना करना पड़ रहा है। चाबुल ने बताया कि उन्हें परेशान होकर अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा। वह अपने भाई और बेटे के साथ छोटे-मोटे काम कर जीवनयापन कर रहे हैं।

गौरतलब है कि तालिबान ने जब पहली बार (1996-2001 तक) अफगानिस्तान में कब्जा किया था तब भी उसने इसी तरह के प्रतिबंध लगाए थे। यहाँ तक कि उसने हिंदू और सिखों की पहचान के लिए उन्हें पीले बैज पहनने के लिए कहा था। मंदिर बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। यही नहीं इस्लामिक आक्रांताओं द्वारा गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाने वाला जजिया कर भी उसने हिंदू और सिखों पर थोप दिया था।

साल 2001 में अमेरिका ने अपनी सेना उतारकर तालिबान को उखाड़ फेंका था। तब हिंदुओं और सिखों की जिंदगी काफी हद तक ठीक हो गई थी। उन्हें कई प्रकार के अधिकार दिए गए थे। यहाँ तक कि संसद में सीटें भी मिलीं थीं। लेकिन अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा कब्जे के बाद एक बार भी अल्पसंख्यकों का जीवन दुश्वार हो गया है।

PM मोदी और पुतिन के बीच फोन पर बात: रूसी राष्ट्रपति ने चंद्रयान-3 की सफलता पर दी बधाई, बताया जी-20 बैठक में कौन होंगे उनके प्रतिनिधि

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से लेकर जी-20 की भारत की मेजबानी व अन्य क्षेत्रीय-वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने जी-20 की बैठक में शामिल होने के लिए भारत नहीं आ पाने की जानकारी दी और बताया कि रूस की तरफ से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जी-20 के शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

पीएम मोदी-पुतिन के बीच कई अहम मुद्दों पर बात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी से बातचीत के दौरान चंद्रयान-3 मिशन की सफलता को लेकर बधाई दी। साथ ही उन्होंने भारत द्वारा जी-20 की सफलतापूर्वक मेजबानी की भी तारीफ की। प्रधानमंत्री मोदी से उन्होंने कहा कि वे इस बार शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हो पाएँगे। पीएम मोदी ने कहा कि वे उनके निर्णय का सम्मान करते हैं। इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और रूस के संबंधों को मजबूत करने के लिए रूसी राष्ट्रपति को धन्यवाद भी दिया।

दोनों नेताओं के बीच भारत की ऊर्जा जरूरतों से लेकर रक्षा सहयोग तक पर चर्चा हुई। पीएमओ की तरफ से इस बारे में जानकारी दी गई है कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत काफी सकारात्मक रही।

नई दिल्ली में 9-10 सितंबर को जी-20 का शिखर सम्मेलन

राजधानी दिल्ली में 9-10 सितंबर को जी-20 के शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें दुनिया के 20 अहम देश शामिल होंगे। इस सम्मेलन में अधिकतर देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुँचेंगे। लेकिन पुतिन इसमें शामिल नहीं होंगे। वे ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका भी नहीं गए थे।

‘तुम गणपति की मूर्तियाँ क्यों बनाते हो’: हिंदू कारीगर के परिवार पर अमीन, रफीक और यूसुफ ने किया हमला, गुजरात के राजकोट की घटना

गुजरात के राजकोट में शनिवार (अगस्त 26, 2023) को भगवान गणेश की मूर्ति बनाते समय एक हिंदू परिवार पर मुस्लिम लोगों ने हमला कर दिया। इस मामले में राजकोट तालुका पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई है। तीन आरोपितों अमीन, रफीक और समीर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि राजस्थान के किशन राठौड़ और उनके परिवार पर इन तीन ने हमला किया और गणपति की मूर्तियों को भी तोड़ डाला।

इस संबंध में दर्ज एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पीड़ित किशन राठौड़ ने शिकायत में कहा है कि राजकोट के धोलरा रोड इज शक्तिनगर गुरुकृपा फैक्ट्री के बगल में एक घर किराए पर ले रखा है। यहीं वे मूर्तियाँ बनाते हैं जो उनके जीविका का साधन है। जिस जगह वे काम करते हैं, उसके मालिक का नाम इरफान सिद्दीकी है।

किशन राठौड़ ने बताया है कि वे 26 अगस्त की रात करीब 10 बजे मूर्तियों पर पेंटिंग का काम कर रहे थे, तभी राजकोट के रसूलपुरा इलाके का रहने वाला अमीन हबीब समा नाम का व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ आया और तोड़फोड़ शुरू कर दी। उसने उनसे इस जगह पर रहने और मूर्तियाँ बनाने का कारण पूछा। भद्दी-भद्दी गालियाँ दी और मूर्तियों को खंडित करना शुरू कर दिया। किशन ने बताया है कि उन्होंने और उनके परिवार ने तीनों को रोकने की कोशिश की, तो उन लोगों ने परिवार पर हमला बोल दिया।

पीड़ित राठौड़ के अनुसार अमीन, रफीक और समीर ने उनके साले किशन को लोहे की पाइप से मारा। जब उन्होंने मकान मालिक इरफान सिद्दीकी की भाभी नसीम बेन को बुलाया, तो हमलावरों ने उन्हें भी मारा और उनकी गाड़ी को भी तोड़ दिया। इसके बाद राठौड़ ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस के आते ही आरोपित फरार हो गए।

इस मामले में पुलिस ने किशन राठौड़ की शिकायत पर आईपीसी की धारा 447, 294 (बी), 323, 295, 427 और 114 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 135 के तहत मामला दर्ज कर लिया और तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों लोगों की पहचान अमीन हबीब समा, रफीक इस्माइल मंसूरी और समीर यूसुफ शाहमदार के रूप में की गई है। इस हमले की खबर स्थानीय मीडिया में भी छपी है।

पीड़ित ने ऑपइंडिया से साझा की आपबीती

ऑप इंडिया से बातचीत मे पीड़ित किशन राठौड़ ने बताया कि उनकी हमलावरों से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्हें पता तक नहीं है कि हमला क्यों किया। हालाँकि उन्होंने यह भी बताया कि हमलावरों के समूह ने पहले भी उनके घर पर पथराव किया था। गालियाँ और धमकी दी थी।

26 अगस्त की घटना के बारे में उन्होंने बताया, “रात करीब 9.30 बजे पास की सड़क पर लोगों का एक समूह जोर-जोर से चिल्लाकर गालियां दे रहा था। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे स्टॉल के पास एक खंभे पर पत्थर फेंके और हमें धमकी देते हुए कहा- बाहर निकलो, बाहर निकलो। हमारे स्टॉल पर ताला लगा हुआ था, लेकिन हम दरवाजे के पास ही थे। कुछ ही मिनटों में वे आकर हंगामा करने लगे।”

राठौड़ के अनुसार उनलोगों ने उनके एक कारीगर को पीटकर घायल कर दिया। मेरे बीच बचाव करने पर उसे छोड़ दिया। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की पर वे नहीं माने। वे कह रहे थे- तुम्हें जो करना है करो, हम सब तोड़ देंगे। राठौड़ ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस को घटना की सूचना दी तो हमलावर भाग खड़े हुए।

यह पूछे जाने पर कि क्या हमलावरों के साथ पहले कोई झगड़ा हुआ था, राठौड़ ने बताया, “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और न ही मेरी उनसे कभी किसी तरह की बातचीत हुई है। हम गरीब आदमी हैं, भगवान की मूर्तियाँ बनाकर जीविका चलाते हैं। हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं है। मुझे नहीं पता कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया। हो सकता है कि मकान मालिक के साथ उनका विवाद हो। लेकिल मैं यकीनी तौर पर इसके बारे में नहीं जानता।” उन्होंने यह भी बताया कि हमले के वक्त घर में बच्चे और महिलाएँ भी मौजूद थीं।

‘मैं हिंदू, मेरे भगवान की मूर्तियाँ तोड़ी’

राठौड़ ने कहा, “हमें हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। लेकिन हिंदू होने के नाते हमारे भगवान की मूर्ति तोड़े जाने से हमारी भावनाएँ भी आहत हुई हैं। हम कई दिनों से कड़ी मेहनत कर रहे थे और अब गणेश चतुर्थी आने से बीस दिन पहले यह हो गया।” उन्होंने पुलिस से आरोपितों को सख्त सजा देने की माँग करते हुए कहा है कि ऐसी कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी हरकत कोई दोबारा न कर सके।

‘नूहं हिंसा कॉन्ग्रेस का किया-धरा, मम्मन खान के खिलाफ मिले सबूत’: हरियाणा के गृह मंत्री का खुलासा, बताया – अब तक 500 गिरफ्तार

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई को हुई हिंसा को लेकर राज्य सरकार ने कॉन्ग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया है। बता दें कि मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर हमला किया था। हिंसा में 7 लोगों की मौत हो गई थी। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने अब तक हुई जाँच के निष्कर्षों के आधार पर कहा है कि इस हिंसा के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार लग रही है। उन्होंने बताया कि फिरोजपुर झिरका से कॉन्ग्रेस के विधायक मम्मन खान के खिलाफ सबूत मिले हैं। गिरफ्तार आरोपितों से जो पूछताछ हुई है, उसमें भी हिंसा में कॉन्ग्रेस का हाथ होने की पुष्टि की गई है।

मम्मन खान को हरियाणा पुलिस की नोटिस भी जा चुकी है और उसे पुलिस की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। अनिल विज ने जानकारी दी कि अब तक 500 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही उन्होंने कहा कि जाँच में पता चला है कि ये सब कॉन्ग्रेस पार्टी का किया-धरा है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता अनिल विज के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने इसके बाद आश्वासन दिया कि अनिल विज का ये बयान सदन की कार्यवाही से डिलीट कर दिया जाएगा।

विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन कॉन्ग्रेस ने इस बयान को लेकर जम कर हंगामा किया। स्पीकर ने नूहं में अवैध इमारतों को ध्वस्त किए जाने के संबंध में चर्चा से इनकार करते हुए कहा कि मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा है, ऐसे में जो मामला न्यायिक रूप से विचाराधीन है उस पर चर्चा नहीं हो सकती। दिल्ली से 85 किलोमीटर की दूरी पर नूहं में हुई हिंसा के बाद इलाके के हिन्दुओं में भय व्याप्त है। सोमवार (28 अगस्त, 2023) को पुलिस की भारी तैनाती के बीच कुछ लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से जलाभिषेक की प्रक्रिया पूर्ण की।

हरियाणा में कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने नूहं हिंसा की न्यायिक जाँच की माँग की। हालाँकि, स्पीकर ने कहा कि सरकार से ये सब कहना उनका काम नहीं है। विपक्ष ने जहाँ आरोप लगाया कि भाजपा-JJP सरकार नूहं हिंसा पर चर्चा से भाग रही है, वहीं भाजपा विधायकों ने कॉन्ग्रेस के विरोध में नारे लगाए। अनिल विज ने कहा कि उनके पास सबूतों की पूरी लिस्ट है। इसके बाद स्पीकर ने 2 घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

चंद्रमा पर सामने आ गया बड़ा गड्ढा, कमांड मिलते ही रोवर प्रज्ञान ने बदल ली दिशा: 2 सितंबर को लॉन्च होगा इसरो का सूर्य मिशन ‘आदित्य L-1’

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 का रोवर प्रज्ञान चहलकदमी कर रहा है। इस दौरान वह बाधाओं को भी बखूबी पार कर रहा है। 27 अगस्त 2023 को उसके सामने चार मीटर परिधि का एक क्रेटर (गड्ढा) आ गया था, लेकिन उसने अपना रास्ता बदल लिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

दूसरी तरफ इसरो ने सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 मिशन की लॉन्चिंग डेट की घोषणा कर दी है। आदित्य एल-1 अगले सप्ताह 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा से रवाना होगा।

2 सितंबर को लॉन्च होगा आदित्य

इसरो का बहुप्रतीक्षित आदित्य एल-1 चंद्रयान से भी 4 गुना ज्यादा दूर जाने के लिए तैयार हो चुका है। आदित्य एल-1 धरती से 1.5 मिलियन किमी दूर स्थापित होगा और वहीं से सूर्य से जुड़ी अहम जानकारियाँ साझा करता रहेगा। आदित्य एल-1 मिशन को पीएसएलवी सी-57 रॉकेट के जरिए भेजा जाएगा, जो चंद्रयान 3 की तरह ही धरती के चार चक्कर लगाने के बाद सूर्य की ओर रवाना होगा। ये सूर्य और पृथ्वी के बीच एल-1 प्वाइंट पर जाएगा, जहाँ से वो कम ईंधन में लंबे समय तक कार्य कर सकेगा।

क्या है एल-1 प्वाइंट?

पृथ्वी और सूर्य के बीच 5 ऐसे लेगरेंज प्वाइंट की तलाश की जा चुकी है, जहाँ गुरुत्वाकर्षण का दबाव कम रहेगा और यान को स्थिरता मिलेगी। फिर वो एल-1 के दायरे में रहकर पृथ्वी की तरह ही सूर्य की परिक्रमा करेगा। इस दौरान उसकी पृथ्वी से दूरी 1.5 लाख किमी होगी, जो चाँद की दूरी का चार गुना ज्यादा है। आदित्य का मुख्य काम सौर तूफानों और सूर्य से निकलने वाली उर्जा के अध्ययन का रहेगा। इस मिशन के बारे में इसरो ने ट्वीट कर पूरी जानकारी दी है।

चंद्रयान-3 के रोवर ने गड्ढा देख बदली चाल

एक ट्वीट में इसरो ने बताया है कि चाँद की सतह पर रोवर प्रज्ञान के रास्ते में एक गड्ढा आ गया था, लेकिन उससे कोई समस्या नहीं हुई। रोवर ने अपना रास्ता बदल लिया। इसरो ने इसे बड़ी सफलता बताया है।

इसरो के अनुसार रोवर के रास्ते में 4 मीटर की परिधि का गड्ढा आ गया था। यह उससे केवल 3 मीटर की दूरी पर था। गड्ढे में रोवर के गिरने पर उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा पैदा हो गया था। लेकिन रोवर को कमांड दी गई और उसने रास्ता बदल लिया। इसरो ने बताया है कि मिशन पूरी तरह से सही दिशा में जा रहा है। इसरो ने उस गड्ढे की तस्वीरें भी साझा की हैं, जिसे रोवर पर तैनात कैमरे से खींचा गया है।

चंद्रयान 3 की बेमिसाल सफलता

बता दें कि चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम ने 23 अगस्त को चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी। भारत चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश है। चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘शिव शक्ति प्वाइंट‘ नाम दिया है। इसरो ने बताया है कि चंद्रयान-3 के जो तीन मुख्य लक्ष्य थे, उनमें से 2 को पूरा कर लिया है और आखिरी लक्ष्य पर रोवर अभी आगे बढ़ रहा है।

नूहं में सब-इंस्पेक्टर हकीमुद्दीन की हार्ट अटैक से मौत, जलाभिषेक यात्रा में थी ड्यूटी: 12 पैरा-मिलिट्री कंपनियाँ, पुलिस की 28 टीमें और 8 DSP थे तैनात

हरियाणा के नूँह में सोमवार (28 अगस्त, 2023) को अधूरी जलाभिषेक यात्रा पूरा करने का ऐलान किया गया था। इस दौरान VHP नेताओं ने साधु-संतों के साथ नल्हड़ स्थित मंदिर में जाकर जलाभिषेक किया। हालाँकि, पुलिस ने यात्रा निकालने की अनुमति नहीं दी और कई साधु-संत सड़क पर रोके जाने के बाद अनशन पर ही बैठ गए। वहीं सुरक्षा व्यवस्था में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर की हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई। ‘सर्व जातीय हिन्दू महापंचायत’ को लेकर पुलिस बलों की तैनाती बढ़ा दी गई थी।

मृत पुलिस अधिकारी की पहचान हकीमुद्दीन के रूप में हुई है। 47 वर्षीय हकीमुद्दीन हरियाणा के पलवल जिले के उतावर गाँव के रहने वाले थे। उन्हें मेवात के बड़कली चौक इलाके में तैनात किया गया था। दोपहर के करीब साढ़े 12 बजे उन्हें अचानक से बेचैनी महसूस होने लगी। उन्हें तुरंत एक नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें इलाज के दौरान मृत घोषित कर दिया गया। नगीना पुलिस थाने के इंसेप्क्टर रतन राल ने ये जानकारी दी है।

पुलिस ने इसके बाद शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। नगीना थाने में हकीमुद्दीन को एडिशनल SHO का प्रभार सौंपा गया था। उनके परिवार में उनकी बीवी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी भी है। वो करीब 18 वर्ष की उम्र में ही पुलिस में भर्ती हो गए थे। उन्हें RAF के जवानों के साथ आज तैनात किया गया था। नगीना थाने के पुलिसकर्मियों का कहना है कि वो काम के प्रति सजग रहते थे और मामलों की बारीकी से जाँच कर के पीड़ितों को न्याय दिलाते थे।

उधर दिन खत्म होते ही पुलिस ने राहत की साँस ली है। हालाँकि, हिन्दू नेताओं ने कहा है कि अगर पिछली जलाभिषेक यात्रा के दिन सुरक्षा व्यवस्था इसकी आधी भी होती तो हिन्दुओं पर हमले नहीं होते। सरकारी कार्यालयों में भी सन्नाटा रहा। अड़बर चौक से 3 गाड़ियों का काफिला रवाना हुआ, कुछ लोग बसों से पहुँचे। पहले पटौदी के स्वामी धर्मदेव मंदिर में लोग पहुँचे। इसके बाद नल्हड़ मंदिर, फिरोजपुर झिरका मंदिर और सिंगार शिव मंदिर में जलाभिषेक किया गया।

हालाँकि, पुलिस ने दूर से आए आम लोगों को जलाभिषेक की अनुमति नहीं दी और नूँह का आधार कार्ड जिसके पास था उन्हें ही जाने दिया गया। पुलिस का कहना है कि गाँवों में बनी शांति कमिटियों ने शांति बहाली में योगदान दिया। भाजपा नेता मोतीराम शर्मा सहित 95 हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ दिया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया से अफवाह न फ़ैलाने को कहा है। पैरामिलिट्री की 12 कंपनियाँ और हरियाणा पुलिस की 28 टीमें इस दौरान नूँह में तैनात रहीं। 8 DSP और 3 IPS अधिकारियों को लगाया गया था।

मुस्लिम महिला दोस्त के साथ ऑटो से जा रहा था ज्ञानेश्वर, हिंदू युवक पर टूट पड़ी भीड़: कर्नाटक के बेलगावी का मामला, 6 गिरफ्तार

कर्नाटक के बेलगावी में एक मुस्लिम लड़की के साथ दिखने पर हिंदू युवक की पिटाई का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़ित की पहचान मीडिया रिपोर्टों में ज्ञानेश्वर के तौर पर बताई गई है। वह जूते-चप्पल का कारोबार करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वह ऑटो-रिक्शा में अपने मुस्लिम महिला दोस्त के साथ सफर कर रहे थे। यह देखकर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें खड़े बाजार इलाके में रोका और हमला किया।

इन लोगों ने हिंदू युवक को गालियाँ दी, बेइज्जत किया और मुस्लिम युवती से दूर रहने की धमकी दी। इस संबंध में मार्केट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। बेलगावी के पुलिस कमिश्नर सिदारमप्पा ने कहा कि कानून हाथ में लेने वाले लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। अन्य आरोपितों की तलाश में अभियान चलाने की बात उन्होंने कही है।

बेंगलुरू में बुर्का पहने महिला के साथ मुस्लिम भीड़ ने की बदसलूकी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बुर्का पहनी एक मुस्लिम महिला को इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने घेर लिया। महिला के साथ अभद्रता की गई और उसे इस्लाम का कलंक बताया। भीड़ ने बुर्का पहनी महिला के साथ बदतमीजी की और उसकी स्कूटी की चाबी भी निकाल ली। भीड़ में से कइयों ने महिला पर इस्लाम मजहब को बदनाम करने का आरोप भी लगाया। ये मामला बेंगलुरु के गोविंदपुरा इलाके का है। 

प्लानिंग के साथ किए जाते हैं ऐसे हमले

इस बारे में ऑपइंडिया ने विशेष पड़ताल में बताया था कि कैसे, हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की वाले जोड़ों को टारगेट किया जा रहा है। वो रिपोर्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं।  बेलगावी हो या बेंगलुरु, ये हमले उसी पैटर्न के हिस्सा लग रहे हैं। कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जब हिन्दू मित्र के साथ जा रही मुस्लिम महिलाओं को परेशान किया गया। कई घटनाओं में हिन्दू पुरुषों को पीटा तक गया। बेलगावी का मामला उसी तरह का है।

50 से ज्यादा घटनाओं का डॉक्यूमेंटेशन

ऑपइंडिया ने अपने अंडर कवर ऑपरेशन द्वारा उन घटनाओं को एक्सपोज किया है, जिन्हें व्हाट्सएप्प के माध्यम से पूरी तरह से प्लानिंग करके अंजाम दिया गया। इसके लिए व्हाट्सएप्प ग्रुपों में अंतरधार्मिक कपल्स को निशाना बनाने, उन पर हमले के लिए उकसाने, उनकी खोज करके प्रताड़ित करने की योजनाएँ बनाई गईं और पूरी प्लानिंग करके उन पर हमले किए गए। ऐसी 50 से भी अधिक घटनाएँ सामने आई थीं।

इंडोनेशिया में 14 छात्राओं को कर दिया गंजा, ठीक से हिजाब न पहनने पर स्कूल ने दी सज़ा

इंडोनेशिया के एक स्कूल में 14 लड़कियों के बाल मूँड़ डाले गए। आरोप लगाया गया कि उन्होंने गलत तरीके से हिजाब पहना है। कॉलेज के प्रधानाध्यापक ने खुद सोमवार (28 अगस्त, 2023) को इसकी जानकारी दी। घटना इंडोनेशिया के मेन आइलैंड की ही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इंडोनेशिया में वर्षों से मुस्लिम एवं गैर-मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए विवश किया जाता रहा है। 27 करोड़ की जनसंख्या वाले इस द्वीपसमूह मुल्क में दुनिया में सबसे ज़्यादा मुस्लिम रहते हैं।

लमोगन ने ईस्ट जावा शहर में स्थित सरकारी जूनियन हाईस्कूल में ये घटना हुई है। जिस शिक्षक ने ये किया, उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। इंडोनेशिया में 2021 में ही स्कूलों को अनिवार्य ड्रेस कोड रखने से मना कर दिया गया था। हेडमास्टर हार्तो ने बताया कि ये घटना बुधवार की है। उन्होंने कहा कि स्कूल ने इस संबंध में माफ़ी माँग ली है और साथ ही उक्त शिक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन लड़कियों ने हिजाब के भीतर टोपी नहीं पहनी थी, जिस कारण उनके बाल के कुछ हिस्से दिख रहे थे।

स्कूल का कहना है कि छात्राओं के लिए हिजाब अनिवार्य नहीं रखा गया है, लेकिन ड्रेस कोड में उन्हें बालों के ऊपर एक प्रताप की टोपी पहनने के लिए कहा गया है ताकि वो अच्छी दिखें। उन्होंने अभिभावकों से माफ़ी माँगी और कहा कि बातचीत के माध्यम से एक सर्वसम्मत फैसला लिया गया है। साथ ही स्कूल ने छात्राओं की मानसिक काउंसिलिंग कराए जाने का भी आश्वासन दिया है। सामाजिक समूहों ने शिक्षक को हटाने की माँग की थी। विशेषज्ञों ने इसे दुखद घटना करार दिया है।

इंडोनेशिया कई बार ठीक तरीके से हिजाब न पहनने पर छात्राओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। इंडोनेशिया में मजहबी असहिष्णुता बढ़ने के कारण मुल्क को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। 2021 में एक ईसाई छात्रा को हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया गया था। अब 14 लड़कियों को गंजा करने का मामला सामने आया है। जिस स्कूल की ये घटना है, उसे ‘SMPN 1’ नाम से जाना जाता है। इंडोनेशिया 6 प्रमुख धर्मों/मजहबों को मान्यता देता है, लेकिन हाल के दिनों में इस्लामी कट्टरवाद बढ़ा है।