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राखी सावंत उमराह करने जा रही, कहा – ‘मुझे फातिमा कहो, अल्लाह मेरी दुआ कबूल करेगा’: शौहर आदिल पर नंगी तस्वीरें बेचने का लगाया आरोप

राखी सावंत अक्सर विवादों में बने रहना जानती हैं। अभी हाल ही में अपने शौहर आदिल खान दुर्रानी पर अपनी नंगी तस्वीरें बेचने का आरोप लगाने के बाद अब वह एक बार फिर वह चर्चा में हैं। दरअसल, आदिल से निकाह और इस्लाम कबूलने के बाद राखी अपना पहला उमराह करने मक्का-मदीना गई हैं।

वीडियो आया सामने 

सोशल मीडिया पर राखी सावंत का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह बुर्का पहने अपने फैंस से घिरी हुई दिखाई दे रही हैं। वह अपने फैंस के साथ फोटोज भी खिंचवाती नजर आ रही हैं। वहीं एक जगह जब उनके एक फैन ने उन्हें राखी बुलाया तो वह उन्हें कहती दिखीं कि उनका नाम फातिमा है। वह उन्हें फातिमा ही बुलाए। वहीं एक दूसरे वीडियो में वह उमराह करती नजर आ रही हैं।

इससे पहले जैसे ही राखी सावंत का फ्लाइट के अंदर का वीडियो सामने आया, उसके लिए उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है। कई मुस्लिम उन्हें ड्रामा नहीं बल्कि उमराह करने की सलाह दे रहे हैं तो कई उन्हें ड्रामा क्वीन बता रहे हैं। खैर, इस वीडियो में राखी ने हिजाब पहन रखा है और ब्लैक कलर के सनग्लासेस लगाए हुए हैं।

राखी सावंत इस वायरल वीडियो में कह रही हैं, “मैं बहुत खुशनसीब हूँ कि पहली बार मैं आज उमराह करने जा रही हूँ। मेरा बुलावा आया है। मैं बहुत खुश हूँ। आप सब मुझे दुआ में रखें और मैं आप सबके लिए दुआ करुँगी।”

दरबार में चढ़ाई चादर 

उमराह के लिए सऊदी अरब रवाना होने से पहले राखी सावंत ने दरगाह में चादर भी चढ़ाई थी। वहाँ भी राखी सावंत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, “झूठ का पहाड़ इन लोगों ने चारों तरफ से डाला है, अपनी शांति के लिए चादर चढ़ाने आई हूँ। मैं विश्वास करती हूँ कि अल्लाह मेरी दुआ कबूल करेंगे।”

बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया राखी सावंत और उनके पति आदिल खान दुर्रानी सोशल मीडिया पपर विवादों में बने हुए हैं। दरअसल, आदिल खान 6 महीने बाद जमानत पर जेल से बाहर आए हैं और आते ही उन्होंने अपनी बेगम राखी सावंत पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई तरह के आरोप लगाए हैं। वहीं पलटवार करते हुए राखी सावंत ने भी अपने शौहर आदिल पर दुबई में अपनी नंगी तस्वीरें बेचने का आरोप लगाया। राखी ने  प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आदिल के खिलाफ कई सबूत मीडिया को दिखाए। 

गौरतलब है कि राखी सावंत ने पति आदिल खान दुर्रानी से निकाह के चलते इस्लाम धर्म कबूला था। उन्होंने मई 2022 में आदिल से गुपचुप निकाह किया था, जिसकी जानकारी एक्ट्रेस ने जनवरी 2023 में दी थी। हालाँकि, निकाह के कुछ समय बाद ही राखी और आदिल का रिश्ता बिगड़ गया और एक्ट्रेस ने अपने शौहर पर गंभीर आरोप लगाकर उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत करा दी थी। जिसमें आदिल को जेल भी जाना पड़ा था। 

PM आवास के पास ₹40 लाख में आलीशान घर, बूढ़ी महिला से ठगी कर राइडिंग क्लब पर कब्जा: जो कभी बीनता था कूड़ा, अब करोड़ों का साम्राज्य

VVIP तक पहुँच का दावा कर लोगों को ठगने वाले महाठग संजय राय शेरपुरिया ने एक बुजुर्ग महिला को भी ठग लिया। शेरपुरिया ने दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित बुजुर्ग महिला की बेशकीमती जमीन को महज 40 लाख में ले लिया। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चार्जशीट में इसका खुलासा किया है।

शेरपुरिया ने दिल्ली राइडिंग क्लब के मालिक को सिर्फ 40 लाख रुपए देकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। उसने क्लब की मालकिन बुजुर्ग महिला को झाँसा दिया था कि वह बुढ़ापे में उसकी देखभाल करेगा। इसके बाद साल 2017 में इस संपत्ति पर कब्जा कर लिया और बुजुर्ग महिला को गुरुग्राम में एक किराए के घर में ले जाकर रख दिया।

इतना ही नहीं, उसने क्लब को अपना कार्यालय और निवास स्थान बनाया लिया। इस बेशकीमती संपत्ति के आधार पर उसने कई व्यवसायियों के साथ सौदे भी किए। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस क्लब के बारे में शेरपुरिया को जानकारी उसके ड्राइवर ने दी थी। ड्राइवर ने बताया कि सहगल की उम्र काफी अधिक है और वह इसका प्रबंधन नहीं कर पा रही हैं। इसके बाद उसने इस क्लब की बुजुर्ग मालकिन बीरू सहगल को झाँसे में लेने की योजना बनाने लगा।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, “संजय प्रकाश राय उर्फ संजय राय शेरपुरिया खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय और भारत सरकार का करीबी दिखाना चाहता था। उसने महसूस किया कि अगर प्रधानमंत्री आवास के करीब की संपत्ति हाउस नंबर 1, डीआईडी के पास, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली मिल जाए तो उसे खुद को पीएम के करीबी के रूप में दिखाना बहुत आसान हो जाएगा।”

ईडी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का रहने वाला और सिर्फ दसवीं पास इस महागठ ने बीरू सहगल को अपने झाँसे में लेने के लिए उनके साथ कई बैठकें कीं और समझाने में कामयाब रहा कि वह उनके पिता के स्थान पर इस क्लब का प्रबंधन करेगा। शेरपुरिया ने यहाँ तक वादा कर दिया कि वह इस परिसर में उनके लिए एक घर बनवा देगा।

ED के अनुसार, पूछताछ में शेरपुरिया ने बताया, “काफी चर्चा के बाद बीरू सहगल मेरे प्रस्ताव पर सहमत हो गईं। उन्होंने 2018-19 में डीआरसी का पूरा नियंत्रण मेरे हाथों में सौंप दिया। मेरे और बीरू सहगल के बीच एक मौखिक समझौता हुआ था कि जब तक वह जीवित रहेंगी, तब तक मैं उनके दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहायता देता रहूँगा।”

बाद में शेरपुरिया ने अपनी पत्नी कंचन राय के खाते से सितंबर 2017 में सहगल को 20 लाख रुपए दिया। इसके बाद उसने अपनी कंपनी पीबी ब्रॉडकास्ट मीडिया लिमिटेड (जिसे पहले कैंपेन बॉक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के खाते से फरवरी 2020 में और 20 लाख रुपए दिया। इसके बाद उसने अपने भतीजे प्रदीप राय को क्लब का मैनेजर नियुक्त कर दिया।

साल 2017 में वह अपने परिवार को लाकर इस क्लब में रहने लगा और बीरू सहगल को वहाँ से हटाकर गुरुग्राम वाले किराए के फ्लैट में रखने लगा। इसके बाद बीरू सहगल ने इस संपत्ति पर से अपना अधिकार खत्म करते हुए उसकी बागडोर संजय राय शेरपुरिया को दे दिया। ED ने चार्जशीट में कहा है कि इस तरह शेरपुरिया ने एक महिला के खराब स्वास्थ्य का फायदा उठाया और ‘मामूली मुआवजा’ देकर ‘अमूल्य संपत्ति’ पर कब्जा कर लिया।

दिल्ली राइडिंग क्लब दिल्ली के सफदरजंग मकबरे के पीछे तीन एकड़ में फैला है। यहीं पास में ही प्रधानमंत्री का भी आवास है। इसकी स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध के अनुभवी कैप्टन कैप्टन कुंदन सिंह ने सन 1968 में एक अमेरिकी दंपत्ति के साथ मिलकर की थी। कैप्टन सिंह ने बाद में इस संपत्ति को अपनी बेटी बीरू सहगल को दे दिया था। तब से वह इसका प्रबंधन कर रही थीं।

ED के अनुसार, शेरपुरिया की गुजरात और महाराष्ट्र में एक दर्जन से अधिक कंपनियाँ थीं, जिनमें भारी घाटा हुआ था। इस कारण उस पर कर्ज चढ़ गया था। उसने बैंकों से सैकड़ों करोड़ रुपए का लोन ले रखा था। बैंकों ने जब उससे लोन की रिकवरी शुरू की तो शेरपुरिया साल 2016 में दिल्ली आ गया। उसने गुरुग्राम में एक फ्लैट किराए पर ले लिया। उसके बाद उसने बीरू सहगल के बारे में जानकारी मिली और उनकी संपत्ति पर कब्जा कर लिया।

UP STF ने किया था गिरफ्तार

दरअसल, शेरपुरिया के फ्रॉड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को एक गुमनाम चिट्ठी मिली थी। इसमें कहा गया था कि वह भाजपा के बड़े नेताओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों का फाँसता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने व्यक्तिगत लाभ के लिए प्रधानमंत्री के नाम का धोखाधड़ी के लिए दुरुपयोग करने और व्यवसायियों को धोखा देने के लिए इस साल अप्रैल में गिरफ्तार कर लिया था।

कूड़ा बीनने से लेकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने तक का सफर

यूपी के गाजीपुर के मूल निवासी संजय राय शेरपुरिया का जन्म असम में हुआ था। उसके पिता वहीं काम करते थे। उसके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उसके पास स्कूल की फीस देने के भी पैसे तक नहीं थे। स्कूल का फीस देने के लिए वह सप्ताह में 2 दिन कूड़ा बीनता था। इसी पैसे से वह थ अपनी और भाई-बहनों की पढ़ाई पूरी करता था। कहा जाता है कि शेरपुरिया सिर्फ दसवीं तक पढ़ा है।

बाद में वह गुजरात जाकर 15,500 रुपए महीना पर सिक्योरिटी सुपरवाइजर की नौकरी शुरू की। वहाँ मन नहीं लगा तो सबसे पहले शेरपुरिया ने देना बैंक से 7 साल के लिए 90,000 रुपए लोन लिया था। इससे उसने फुटपाथ पर काम शुरू किया। इसके बाद किराए की दुकान ले ली। फिर थोक विक्रेता का काम शुरू किया। धीरे-धीरे हेरफेर करके पेट्रोलियम का धंधा शुरू कर दिया। देखते ही देखते बहुत कम समय में उसने अपनी कंपनी भी खोल ली और करोड़ों का लेन-देन करने लगा।

इस दौरान वह PMO, संघ, भाजपा, प्रसिद्ध कथावाचकों और नामी पत्रकारों के साथ अपनी फोटो दिखाकर व्यापारियों को गुमराह करता था और अपना फायदा लेता था। कुछ समय बाद शेरपुरिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 349 करोड़ 12 लाख रुपए लेकर भाग गया। बैंक ने उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया। इसके अलावा, भी उसने कई बैंकों से कर्ज ले रखा था। उसने फॉर यूथ नाम का एक एनजीओ भी बना रखा है, जिसमें करोड़ों रुपए की विदेशी फंडिंग होती है।

जज के बेटे का जूता चोरी, खोज रही राजस्थान पुलिस: गहन जाँच जारी, खंगाले जा रहे CCTV फुटेज… जाँच अधिकारी भी नियुक्त

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक मंदिर के बाहर से एक जज के बेटे के जूते चोरी हो गए। इस मामले में थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने फ़ौरन ही FIR दर्ज कर के जूतों की तलाश शुरू कर दी है। चोरी हुए जूतों की कीमत 10 हजार रुपए बताई जा रही है। फिलहाल, राजस्थान पुलिस CCTV फुटेज आदि खँगालते हुए जूतों की तलाश में जुट गई है। वहीं एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल को इस केस का जाँच अधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया है। घटना रविवार (20 अगस्त 2023) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जयपुर के माणक चौक थानाक्षेत्र की है और जिनके बेटे के जूते चोरी हुए हैं वह जज जगेंद्र कुमार है। जगेंद्र कुमार अलवर जिले के पॉक्सो कोर्ट में जज हैं। जयपुर के ही महेश नगर इलाके में रहने वाले जज जगेंद्र कुमार अग्रवाल 20 अगस्त की रात करीब 8 बजे परिवार सहित चाँदनी चौक स्थित ब्रजनिधि मंदिर गए थे। मंदिर में उनका एक परिवारिक कार्यक्रम था। लगभग 2 घंटे बाद रात लगभग 10 बजे जगेंद्र कुमार अपने बेटे कृष्णा और पत्नी के साथ मंदिर से बाहर निकले। तब उन्होंने पाया कि मंदिर की सीढ़ियों के नीचे रखे उनके बेटे कृष्णा के जूते गायब थे।

उस समय न्यायाधीश जगेंद्र मंदिर से परिवार सहित चले गए। बाद में उन्होंने अपनी शिकायत डाक के जरिए पुलिस को भेजी। शुक्रवार (25 अगस्त 2023) को यह शिकायत पुलिस को रिसीव हुई। पुलिस ने फ़ौरन ही केस दर्ज करके चोरी हुए जूतों की जाँच शुरू कर दी। हेड कॉन्स्टेबल मनीराम को जाँच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। आस-पास के CCTV फुटेज भी खँगाले जाने लगे। फिलहाल अभी तक जूतों के बारे में कोई सुराग नहीं लगा है।

वहीं इस मामले में जयपुर पुलिस की गहन जाँच जारी है। माणक चौक थाना अधिकारी गुरु भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस घटना की पुष्टि की है। गायब हुए जूते एक मशहूर ब्रांड के बताए जा रहे हैं। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में छिपकर बैठा था पत्नी का हत्यारा पति: 11 साल बाद हरियाणा पुलिस ने किया गिरफ्तार

पत्नी की हत्या करके फरार हुए एक आरोपित को हरियाणा पुलिस ने 11 साल फिर से गिरफ्तार कर लिया है। 54 वर्षीय आरोपित एपी सेल्वन वारदात को अंजाम देने के बाद अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के एक दूरदराज द्वीप में छिपकर बैठा था। सेल्वन एक रसोइया है।

दरअसल, साल 2007 में सेल्वन की पत्नी के शव को छत के पंखे से लटका हुआ पाया गया था। इसके बाद हत्या के आरोप में सेल्वन को हरियाणा पुलिस ने अंबाला में उनके किराए के घर से उठा लिया था। हालाँकि, बाद में सबूतों के अभाव में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

जाँच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि वह अपनी पत्नी की हत्या में शामिल था। इसके बाद साल 2012 में जाँच अधिकारियों ने सेल्वन के खिलाफ कोर्ट में पर्याप्त सबूत रखे। इसके बाद अंबाला कोर्ट ने उसके खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

हालाँकि, अधिकारियों को उसका पता नहीं लग पाया। सेल्वन जमानत मिलने के बाद लापता हो गया। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पिछले 11 वर्षों से वह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में निकोबार जिले के कैंपबेल खाड़ी स्थित एक दूर-दराज के गाँव विजय नगर में छिपकर बैठा था।

कैंपबेल खाड़ी ‘इंदिरा पॉइंट’ के लिए प्रसिद्ध है और यह भारत की मुख्य भूमि से दूर सबसे दक्षिणी बिंदु है। 23 अगस्त 2023 को हरियाणा पुलिस की एक टीम पोर्ट ब्लेयर पहुँची और फिर कैंपबेल खाड़ी गई। वहाँ, स्थानीय पुलिस की मदद से सेल्वन को गिरफ्तार कर लिया गया।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पुलिस महानिदेशक देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा, “उसे कैंपबेल खाड़ी से गिरफ्तार किया गया है। हम हरियाणा में अपने समकक्ष के संपर्क में हैं और आगे की जाँच जारी है।”

देश की मुख्य भूमि से लगभग 1300 किलोमीटर दूर छिपे सेल्वन को 25 अगस्त को पोर्ट ब्लेयर लाया गया और चैथम पुलिस स्टेशन के लॉकअप में रखा गया। इसके बाद 27 अगस्त 2023 दिन रविवार को आरोपित को पहले दिल्ली और फिर वहाँ से हरियाणा ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

मौलवी का हुआ निकाह, बीवी 2 हफ्ते तक रात को कपड़े नहीं उतारने दी… मासिक धर्म का बहाना: ‘मर्द बीवी’ की मीडिया रिपोर्ट वायरल – क्या है सच, जानिए

हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स में एक मौलवी की खबर सुर्खियाँ बनी हुई हैं। मौलवी का नाम शेख मोहम्मद मुटम्बा है, जो युगांडा की मस्जिद के इमाम हैं। खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि निकाह के बाद मौलवी की बीवी मर्द निकली। वायरल वीडियो में खुद मौलवी दावा कर रहे हैं कि उनकी बीवी उन्हें कपड़े नहीं उतारने देती थी। वायरल न्यूज़ के मुताबिक मौलवी ने अपने जीवन को नर्क बताते हुए दावा किया कि उन्होंने दहेज़ में अपनी बीवी के घर वालों को दहेज़ भी दिया था।

न्यूज़ 18 ने गुरुवार (24 अगस्त 2023) को यह खबर प्रकाशित की है।

न्यूज 18 की खबर: फोटो ऑरिजनल निकाल लिए, खबर में चूक गए

खबर के मुताबिक मौलवी शेख मोहम्मद मुटम्बा ने अपने रिश्तेदारों द्वारा बताई लड़की से निकाह किया। तब 27 वर्ष के शेख एक मस्जिद में मौलवी थे। दहेज़ में उन्होंने लड़की के घर वालों को चीनी की 2 बोरियाँ, 2 बकरियाँ, 1 कुरान और 1 पेटी नमक दिया था। निकाह के कई दिनों तक मौलवी की बीवी ने उन्हें कपड़े उतारने नहीं दिया। हालाँकि मौलवी इसे अपनी बीवी द्वारा शर्माना समझते रहे।

2 हफ्ते बाद मौलवी की बीवी एक घर में TV की चोरी करते हुए पकड़ी गई। तब पुलिस ने अरोपिता की तलाशी ली। इसी तलाशी के दौरान यह खुलासा हुआ कि मौलवी की बीवी असल में मर्द है। मौलवी से बात करने के लिए वह औरतों की आवाज निकालती थी।

पुलिस को अरोपिता ने यह भी बताया कि उनका इरादा मौलवी को लूट कर भागने का था। इस खुलासे के बाद मौलवी का निकाह करवाने वाले रिश्तेदार को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

ज़ी न्यूज की खबर का स्क्रीनशॉट

Z न्यूज़ ने भी 24 अगस्त को ही यह खबर प्रकशित की है।

मौलवी की मर्द बीवी: क्या है सच्चाई

ऑपइंडिया ने जब इस मामले की पड़ताल की तो यह घटना 3 साल पुरानी निकली। 15 जनवरी 2020 को इस घटना को डेली मेल ने प्रकाशित किया था। डेली मेल की इसी रिपोर्ट के अनुसार बीवी के मर्द निकलने के बाद मौलवी को भी मस्जिद के इमाम के पद से सस्पेंड कर दिया गया था।

इस खबर के मूल सोर्स के तौर पर डेली मॉनिटर न्यूज़ पेपर को बताया गया था। बताया गया कि निकाह के बाद मौलवी शेख मोहम्मद मुटम्बा की बीवी ने लगातार हिजाब पहना। मौलवी निकाह के बाद 2 हफ्ते तक अपनी बीवी का चेहरा भी नहीं देख पाए। बीवी की पोल खुलने के बाद मौलवी ने उससे तलाक ले लिया था।

ऑपइंडिया ने भी इस खबर को 2020 में प्रकाशित किया था। तब यह बताया गया था कि मौलवी को उसकी बीवी ने निकाह के बाद हमबिस्तरी से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उसने मासिक धर्म के होने का बहाना बनाया था।

ब्लैकबोर्ड पर ‘जय श्री राम’ लिखने के बाद हिन्दू छात्र की पिटाई करने वाला लेक्चरर फारूक गिरफ्तार, प्रिंसिपल मो. हाफिज अब भी फरार

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के एक सरकारी अपर सेकेंडरी स्कूल से ‘जय श्री राम’ लिखने पर पिटाई का नया मामला सामने आया है। कठुआ जिले के बनी इलाके में एक प्रिंसिपल और एक शिक्षक द्वारा 10वीं कक्षा के एक हिन्दू छात्र को ब्लैक बोर्ड पर ‘जय श्री राम’ लिखने पर इस तरह से पीटा गया कि हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा। आरोपितों की पहचान स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद हाफिज और लेक्चरर फारूक अहमद के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के बताया कि घटना शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) की है और एफआईआर दर्ज कर ली गई है। वहीं घटना के बाद, अस्पताल में भर्ती नाबालिग छात्र का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र घटना के बारे में बताता हुआ नजर आ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने का कारण बताते हुए छात्र ने कहा कि ब्लैकबोर्ड पर जय श्री राम लिखने पर उनके शिक्षक फारूक अहमद और स्कूल प्रिंसिपल ने उन्हें बेरहमी से पीटा। बाद में शनिवार (26 अगस्त, 2023) सुबह उनके पिता ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। 

बता दें कि घटना का वीडियो सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है। 

घटना की FIR दर्ज होने के बाद शनिवार को ही पुलिस ने कठुआ के उस शिक्षक फारूक अहमद को गिरफ्तार कर लिया, जिसने गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल (बनी) में जय श्री राम लिखने पर एक हिंदू छात्र की पिटाई की थी। बताया जा रहा है कि स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद हाफिज अभी भी फरार है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित के पिता कुलदीप सिंह ने 25 अगस्त को फारुख अहमद और हाफिज के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की पिटाई करने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत के आधार पर, किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस स्टेशन बनी में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “प्रिंसिपल फरार है और आगे की जाँच करते हुए उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश की जा रही है।” वहीं कठुआ के डिप्टी कमिश्नर राकेश मिन्हास ने मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। उप मंडल मजिस्ट्रेट (बनी), उप मुख्य शिक्षा अधिकारी (कठुआ) और सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय (खरोटे) के प्रधानाचार्य समिति के सदस्य हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में दोनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना), 342 (गलत तरीके से कैद करना), 504 (जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी), और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 (बच्चे के प्रति क्रूरता) के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

अनुच्छेद 370 को खत्म क्यों किया? – सरकारी लेक्चरर जहूर अहमद भट्ट पहुँचे सुप्रीम कोर्ट, कर दिए गए सस्पेंड

जम्मू-कश्मीर के शिक्षा विभाग ने लेक्चरर जहूर अहमद भट्ट को निलंबित कर दिया है। वे हाल ही में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका में पक्षकार के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित हुए थे। कहा जा रहा है कि अनुच्छेद 370 का समर्थन करने के कारण लेक्चरर को निलंबित किया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने राजनीति विज्ञान के सीनियर लेक्चरर जहूर अहमद भट्ट को जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा विनियम, जम्मू-कश्मीर सरकारी कर्मचारी आचरण नियम और जम्मू-कश्मीर अवकाश नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

आधिकारिक आदेश के मुताबिक, भट्ट को तैनाती वाली जगह श्रीनगर से हटाकर निदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय, जम्मू से जोड़ दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि भट्ट के बर्ताव की जाँच करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आलोक कुमार ने एक आदेश में कहा, “व्यवहार के मामले में लंबित जाँच को देखते हुए वर्तमान में श्रीनगर के जवाहर नगर के सरकारी अपर सेकंडरी स्कूल में तैनात सोशल साइंस के सीनियर लेक्चरर जहूर अहमद भट्ट को जम्मू-कश्मीर सीएसआर, जम्मू एवं कश्मीर सरकारी कर्मचारी (आचरण) नियम 1971 आदि के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान वह निदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय जम्मू में जुड़े रहेंगे।”

25 अगस्त 2023 दिन शुक्रवार को जारी आदेश में आगे कहा गया, “यह आदेश दिया जाता है कि सुबह मेहता, संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, जम्मू को जाँच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो अधिकारी के आचरण की गहन जाँच करेंगी।”

बताते चलें कि भट्ट मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के निवासी हैं। उनके पास लॉ की डिग्री है और वे व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। जहूर अहमद भट्ट 23 अगस्त 2023 दिन बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद पेश हुए थे और केंद्र के 5 अगस्त 2019 के फैसलों के खिलाफ दलील दी थी।

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान वाली अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो हिस्सों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाँटकर इसे केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया था।

‘NIA से कराई जाए नूँह हिंसा की जाँच, मृत हिन्दुओं के परिजनों को मिले ₹1 करोड़ का मुआवजा’: सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका

मेवात के नूहं जिले में हिन्दुओं की जलाभिषेक यात्रा के दौरान हुई हिंसा मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) जाँच की माँग की गई है। यह माँग सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर के की गई है। याचिकाकर्ता प्रदीप भंडारी और रतन शारदा ने उच्चतम न्यायालय से इसे हिन्दू विरोधी हिंसा बताया है। याचिका में हिंसा से जुड़े केसों को नूहं के बाहर चलाने, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि दिलाने की माँग की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने केंद्र और हरियाणा सरकार को पार्टी बनाया है। याचिका का आधार संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की आज़ादी, समानता और जीवन का अधिकार बनाया गया है। याचिका के मुताबिक नूहं जिले के साथ उसके आसपास सोहना और गुरुग्राम में हिन्दुओं को टारगेट किया गया जिसमें कुछ की जान भी चली गई। किए गए हमलों को शर्मनाक बताते हुए याचिकाकर्ताओं ने इसे जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया है। इस याचिका को अधिवक्ता मंजू जेटली शर्मा ने दायर किया है।

कुल 6 माँगों वाली इस याचिका की पहली माँग नूहं हिंसा की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा जाँच कराना है। दूसरी माँग के तौर हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों के ट्रायल को नूहं से बाहर चलाना है। तीसरी माँग में हरियाणा सरकार से उन घरों का लेखा-जोखा पेश करने का आवेदन है जिन्हे हिंसा के दौरान नुकसान पहुँचाया गया है। चौथी माँग में नूहं हिंसा के दौरान अपनी जान गँवाने वाले लोगों के परिजनों को हरियाणा सरकार द्वारा 1 करोड़ और घायलों को 20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाना है।

इसी याचिका की वहीं पाँचवीं माँग के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वो धार्मिक त्योहारों के लिए किसी गाइडलाइन को बनाने का निर्देश दे। याचिका के मुताबिक, यह आदेश पूरे देश पर लागू हो जिस से भविष्य में नल्हड जैसी किसी और घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए। साथ ही अंतिम माँग के तौर पर न्यायालय द्वारा स्वयं ही जनहित में कोई आदेश जारी करने की अपील है। इन माँगों का खाका अधिवक्ता शशांक शेखर झा द्वारा खींचा गया है। ऑपइंडिया के पास याचिका की कॉपी मौजूद है।

जेल में स्विमिंग पूल चाहते हैं AAP नेता सत्येंद्र जैन, करनी है पानी वाली एक्सरसाइज: अदालत में ED ने बताया – हम उन्हें फिजियोथेरेपी देने के लिए तैयार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में कहा है आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और दिल्ली के पूर्व कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendar Jain) जेल में ‘स्विमिंग पूल’ चाहते हैं। दरअसल, सत्येंद्र जैन ने अपनी अंतरिम जमानत बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी। इसका विरोध करते हुए ED ने कोर्ट को यह जानकारी दी।

सत्येंद्र जैन की याचिका पर जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस एम एम सुंदरेश की बेंच ने सुनवाई की। इस दौरान जैन के वकील ने कोर्ट के सामने उनकी मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट के साथ बताया गया कि सत्येंद्र जैन ने 21 जुलाई अपनी रीढ़ की हड्डी का ऑपरेशन कराया है। फिलहाल वह इससे उबर रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट में सत्येंद्र जैन को रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी, जलीय व्यायाम जैसी चीजें करने के लिए कहा गया है।

सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी के वकील ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत बढ़ाने की अपील की। हालाँकि, ED की ओर से पेश वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इसका विरोध किया। साथ ही कहा कि अंतरिम जमानत बढ़ाने के लिए मेडिकल एडवाइजरी काफी नहीं है। यही नहीं वकील एसवी राजू ने जोर देकर कहा कि जैन के मेडिकल टेस्ट एम्स द्वारा किए जाने चाहिए। इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ती है तो वह सत्येंद्र जैन को फिजियोथेरेपी के लिए स्विमिंग पूल में ले जा सकते हैं।

एसवी राजू ने कहा, “सत्येंद्र जैन को आज सरेंडर करने दीजिए। हम उन्हें फिजियोथेरेपी देने के लिए तैयार हैं। जलीय व्यायाम के लिए अगर उन्हें स्विमिंग पूल की आवश्यकता होती है, तो हम उन्हें वहाँ भी ले जा सकते हैं। उनके द्वारा दिखाई गई मेडिकल रिपोर्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे जमानत एक दिन भी बढ़ाई जा सके। जैन को सरेंडर करने के लिए कहिए।”

इस पर अदालत ने जेल के अंदर सत्येंद्र जैन को सुविधाएँ मिलने वाली तस्वीरों के वायरल होने को लेकर सवाल किया। कोर्ट ने कहा कि अगर वह फिजियोथेरेपी कराते हैं तो आप उनकी फोटो लेकर पब्लिश करा देते हैं। ऐसे में क्या किया जाए? कोर्ट की इस टिप्पणी पर ED के वकील एसवी राजू ने कहा, “सत्येंद्र जैन ने जेल में दूसरे कैदी से मालिश कराई थी। जैन के साथ किसी भी सामान्य याचिकाकर्ता की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए।” इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सत्येन्द्र जैन को दी गई अंतरिम जमानत 1 सितम्बर तक बढ़ा दी। इसके बाद उनकी नियमित जमानत याचिका पर भी सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री और AAP नेता सत्येंद्र जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मई 2022 में गिरफ्तार किया था। 1 साल से अधिक समय तक रहने के बाद 26 मई, 2023 को उन्हें इलाज कराने के लिए 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई थी। यह जमानत 11 जुलाई को खत्म होनी थी। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट देखते हुए कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत 24 जुलाई तक बढ़ा दी थी। इसके बाद 24 जुलाई को यह जमानत 5 हफ्तों के लिए बढ़ाई गई थी।

‘जिस तालुमुद्दीन कॉलेज में गैर-मुस्लिमों को बताया गया हिजड़ा और कुत्ता, वो तालाब की जमीन कब्जा कर बना है’: FIR में प्रबंधक अनवारुल हक और प्रिंसिपल रफत परवीन का नाम

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक कॉलेज में हिजाब पहनी लड़कियों का आपत्तिजनक गाने पर शो करने का वीडियो वायरल हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस के दिन फिल्माए गए इस वीडियो पर शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) को FIR दर्ज हुई है। शिकायत ‘हिन्दू जागरण मंच’ के पदाधिकारी ने दी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस तालुमुद्दीन निस्वा गर्ल्स डिग्री कॉलेज में यह कार्यक्रम हुआ है वो एक तालाब की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया है। इस मामले में अभी तक प्रिंसिपल रफ़त परवीन और प्रबंधक अनवारुल हक के नाम सामने आए हैं।

यह मामला मऊ जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ 25 अगस्त को हिन्दू संगठन के पदाधिकारी अतुल राय ने पुलिस में शिकायत दी। शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR के मुताबिक पहाड़पुरा क्षेत्र में आने वाले तालीमुद्दीन निस्वा गर्ल्स डिग्री कॉलेज में 15 अगस्त के दिन बुर्का पहनी लड़कियों ने एक गीत प्रस्तुत किया था। इस गीत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने वाली बातों के साथ ‘हिजड़े’ शब्द का भी प्रयोग किया गया था। शिकायतकर्ता ने इसे एक समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है।

अतुल राय ने अपनी शिकायत में कॉलेज में गाये गए गीत को तालिबानी गाना बताया। साथ ही उन्होंने लिखा कि वह गाना तालिबान के विद्रोहियों द्वारा गया जाता है। खासतौर पर इस गीत का मंचन 15 अगस्त को ही करने को शिकायतकर्ता ने साजिश करार दिया है। यह कार्यक्रम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें नेटीजेंस कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। मऊ पुलिस ने इस मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल, प्रबंधक और अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में शिकायतकर्ता अतुल राय से बात की। अतुल ने हमें बताया कि न सिर्फ प्रिंसिपल रफ़त परवीन बल्कि कॉलेज के प्रबंधक अनवारुल हक भी इस मामले में बराबर के भागीदार हैं। खुद को केस के जाँच अधिकारी सब इंस्पेक्टर दल प्रताप सिंह के सम्पर्क में बताते हुए अतुल ने कहा कि पुलिस अभी आरोपितों को चिह्नित करने का प्रयास कर रही है। जिस पहाड़पुरा क्षेत्र में तालुमुद्दीन कॉलेज मौजूद है उसे अमित ने मुस्लिम बाहुल्य बताया और कहा कि कॉलेज से सट कर ही मऊ के चेयरमैन और बसपा नेता अरशद जमाल सिद्दीकी का घर है।

शिकायतकर्ता अतुल राय ने हमसे बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि जिस जमीन पर तालमुद्दीन कॉलेज बना हुआ है वो पहले तालाब हुआ करती थी। उन्होंने आगे बताया कि तालाब को मिट्टी से पाट कर कॉलेज की बुनियाद रखी गई जो सरासर अवैध है। अतुल का कहना है कि वो आने वाले सोमवार को मऊ के जिलाधिकारी (DM) को इस बाबत ज्ञापन देंगे और कार्रवाई की माँग करेंगे। बताते चलें कि कॉलेज की प्रिंसिपल ने इस हरकत का बचाव करते हुए इसे अपनी मज़हबी मान्यताओं से जुड़ा गाना बताया है।

साथ ही उन्होंने 15 अगस्त को कॉलेज में खुद के उपस्थित न होने की जानकारी दी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जाँच कर रही है।