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सीएम चला रहे नशा मुक्ति अभियान, मंत्री दे रहे बीड़ी पीने और नाक से धुआँ निकालने की ट्रेनिंग: वीडियो आने के बाद बोली BJP – नशे को दे रहे बढ़ावा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं। वहीं, उनके मंत्री कवासी लखमा नशे को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं। दरअसल, लखमा का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में वह लोगों को बीड़ी पीने और धुआँ निकालने की सीख देते दिखाई दे रहे हैं।

कवासी लखमा छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं। वह इस समय विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस दौरान वह वह अपने विधानसभा क्षेत्र कोंटा का दौरा कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह वीडियो उसी क्षेत्र के एक गाँव का है। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति वीडियो पीता नजर आ रहा है। लखमा उसकी बीड़ी में अपनी बीड़ी लगाकर उसे जलाते नजर आ रहे हैं।

इसके बाद कवासी लखमा कैमरे की ओर मुँह कर बीड़ी फूँकते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में आगे उन्हें गाँव के व्यक्ति का हाथ पकड़कर चलते देखा जा सकता है। फिर वह कभी मुँह से तो कभी नाक से धुआँ निकलाते हुए ग्रामीण व्यक्ति को भी धुआँ निकालने के लिए कहते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो को लेकर भाजपा कॉन्ग्रेस और उसके मंत्री कवासी लखमा पर हमलावर है। छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास का कहना है कि कॉन्ग्रेस के मंत्री का वीडियो वायरल हो रहा है। लेकिन पार्टी ने चुप्पी साध रखी है। महात्मा गाँधी जीवन भर नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे। कॉन्ग्रेस उनके विचारों की हत्या कर रही है। भूपेश बघेल के मंत्री लखमा खुलेआम नशे को बढ़ावा दे रहे हैं। इससे युवाओं में गलत संदेश जा रहा है।

भाजपा प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव और नलिनीश ठोकने ने इस मुद्दे पर भूपेश बघेल सरकार पर हमला बोला। साथ ही बघेल पर आँख मूँदने और नशीले पदार्थों के उपयोग के माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य में पड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों का उपयोग हो सकता है।

‘भारत न कभी हिन्दू राष्ट्र था और न बनेगा’: स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम वाले बाबा पर साधा निशाना, पूछा – खालिस्तान की माँग क्यों नहीं कर सकते?

रामचरितमानस का अपमान करने वाले स्वामी प्रसाद प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। दरअसल सपा नेता मौर्य से बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर के ‘भारत को अब हिंदू राष्ट्र हो जाना चाहिए’ बयान पर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में वो बोलना शुरू हुए तो संविधान से लेकर धर्मनिरपेक्षता पर बहुत कुछ बोल गए।

उन्होंने पंडित धीरेंद्र शास्त्री की बात पर कहा, “आज तक भारत कभी हिंदू राष्ट्र था ही नहीं। जब आज तक भारत हिंदू राष्ट्र था ही नहीं तो अब हो भी नहीं सकता, क्योंकि भारत का संविधान पंथ निरपेक्ष विचारधारा पर आधारित है, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई सब भाई-भाई हैं। इसे हम स्वीकार भी करते हैं।” वो यहाँ बीपी मण्डल जयंती समारोह के दौरान आयोजित जातीय जनगणना गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। ये गोष्ठी डॉ लोहिया और ‘डॉ अम्बेडकर विचार मंच’, रायबरेली ने आयोजित की थी।

‘देश को बाँटने की साजिश करने वालों से रहे सावधान’

वो यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई हिंदू राष्ट्र की बात करेगा तो कल को कोई खलिस्तान की माँग क्यों नहीं कर सकता? कल कोई और बँटवारे की बात क्यों नहीं कर सकता? धर्म के आधार पर बँटवारे की बात क्यों नहीं कर सकता? भारत लंबे समय के बाद गुलामी से आजाद हुआ है। सालों साल-हजारों साल तक यह दौर चलता रहे इसलिए देश को बाँटने की साजिश करने वालों से हम लोगों को सावधान रहना चाहिए।”

स्वामी प्रसाद मौर्य जुलाई 2023 में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं के माथे पर सिंदूर नहीं होने पर प्लॉट खाली वाले बयान पर उन्हें ‘लंपटाचार्य’ कह चुके हैं। वहीं मई 2023 में गाजीपुर बौद्ध जयंती समारोह में भी संतों को लेकर उन्होंने कहा था कि साधु के भेष में सारे आतंकवादी हैं। फरवरी 2023 में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को ढोंगी और पाखंडी कहा था।

‘सनातन धर्म बुद्ध का दिया हुआ है’

मौर्य ने कहा, “मैं सनातन धर्म में यकीन करता हूँ। बुद्ध ने जो उपदेश दिया था उसमें उन्होंने कहा था एष धम्मो सनंतनो। भगवान बुद्ध की कही हुई बात ही सनातन है और अगर कोई दूसरा उसे मानता है तो मैं उसका विरोध नहीं करता हूँ, क्योंकि सनातन धर्म, सनातन बात और उपदेश सब भगवान बुद्ध के दिए हुए हैं।”

‘स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे विरोधी हैं’

जातीय जनगणना गोष्ठी में सपा नेता मौर्य ने कहा, “आजादी के 76 साल बाद भी जातियाँ आज सबके सर पर चढ़कर बोल रही हैं और वह जातियां जिन्होंने पूरे समाज को बांटा, अपने वर्चस्व को सर्वोच्च बनाए रखने के लिए जिन्होंने कहा “ढोल, गंवार, शूद्र, पशु, नारी, सकल, ताड़ना के अधिकारी” जिन्होंने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा “जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा।”

उन्होंने आगे कहा, “जिन्होंने कहा “पूजहि विप्र सकल गुण हीना। शुद्र न पूजहु गुण ज्ञान प्रवीणा।।” आखिर जातिवाद कौन कर रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवाद के ठेकेदारों ने हमें विभिन्न जातियों में बाँट कर हमारा शोषण किया, हमें अधम कहा, पढ़ने-लिखने से रोका, और अगर हम अपनी पीड़ा बोलते हैं तो कहते हैं स्वामी प्रसाद मौर्य हमारे विरोधी हैं।

बच्ची का यौन उत्पीड़न कर फरार हो गया था मदरसे का मौलवी मोहम्मद सरताज शेख, अब कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

महाराष्ट्र के ठाणे में नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न करने के आरोप में एक मदरसा टीचर को 5 साल की सज़ा सुनाई गई। दोषी मौलवी की पहचान मोहम्मद सरताज शेख के रूप में हुई है। कोर्ट ने जेल की सजा के साथ ही 5000 रुपए का जुर्माना लगाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठाणे की विशेष पॉक्सो कोर्ट के जज वीवी विरकर ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने मोहम्मद सरताज शेख को दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई। इसके अलावा दोषी ठहराए गए मौलवी को 5 हजार रुपए का जुर्माना भी भरना होगा।

मोहम्मद सरताज शेख को कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (F) (2) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत दोषी ठहराया।

इस मामले में एक अधिकारी ने कहा है कि मोहम्मद सरताज शेख मदरसे में अरबी पढ़ाता था। 16 नवंबर, 2017 की सुबह पीड़िता का यौन उत्पीड़न कर वह मौके से भाग गया था। इसके बाद लड़की ने परिजनों को आपबीती सुनाते हुए पेट में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले

बता दें कि इससे पहले जुलाई 2023 में पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में मदरसा शिक्षक की हैवानियत का मामला सामने आया था। आरोप है कि मदरसा शिक्षक फैजुद्दीन मुल्ला ने 8वीं क्लास की छात्रा का रेप किया। इसके बाद मारपीट कर उसे बाथरूम में बंद कर दिया। इस मामले में पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपित मुल्ला को गिरफ्तार किया था।

वहीं, जून 2023 में उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मदरसे के मौलवी को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पीड़िता नाबालिग छात्रा है। कारी मोहम्मद अहमद पर नशीला पदार्थ खिलाकर छात्रा से रेप और अश्लील वीडियो बनाने का आरोप लगा था। रेप के बाद वह पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा था। मुँह खोलने पर जादू-टोने से उसके परिवार को खत्म करने की धमकी दी थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपित मदरसा टीचर को गिरफ्तार किया था। उक्त दोनों ही मामले कोर्ट में लंबित हैं। जल्द ही सजा होने की उम्मीद है।

बिहार में अब कोर्ट भी सुरक्षित नहीं, अदालत परिसर में 2 को मार दी गई गोली: पुलिस की पहुँच से दूर हैं हमलावर, BJP ने माँगा CM नीतीश कुमार का इस्तीफा

बिहार के जिला समस्तीपुर की अदालत में पेशी पर आए 2 कैदियों को गोली मारे जाने की खबर है। गोलीबारी में दोनों कैदी घायल हो गए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हमले के बाद हमलावर कोर्ट परिसर से भागने में सफल रहे। घटना शनिवार (26 अगस्त, 2023) की है। पुलिस हमलावरों की तलाश कर रही है। घटना के पीछे शराब तस्कर गैंग होने की आशंका जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना समस्तीपुर जिला व्यवहार न्यायालय का है। यहाँ शनिवार को शराब मामले में जेल में बंद प्रभात चौधरी को उसके साथी प्रभात तिवारी के साथ पेशी पर लाया गया था। पेशी हो जाने के बाद दोनों को पुलिस कस्टडी में लॉकअप की तरफ ले जाया जा रहा था। इस बीच लॉकअप के पास 4 संदिग्धों ने दोनों पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। गोली लगने से दोनों कैदी घायल हो गए। इस हमले से मची अफरातफरी का फायदा उठा कर सभी हमलावर कोर्ट परिसर से पैदल ही भाग निकले।

हमले में घायल दोनों कैदियों को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया है। हमलावरों को पकड़ने के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है। CCTV फुटेज से संदिग्धों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। दोनों कैदियों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। पुलिस का दावा है कि जवाबी फायरिंग में एक हमलावर को भी गोली लगी है। समस्तीपुर जिले के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के मुताबिक, हमला शराब के कारोबार में संलिप्त गैंग से जुड़े लोगों ने किया है। साथ ही SP ने सप्ताह भर में हमलावरों को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया।

इस घटना के बाद भाजपा ने बिहार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने समस्तीपुर कोर्ट परिसर में हुई फायरिंग पर बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस्तीफा माँगा। उन्होंने कहा कि जहाँ अदालतों के अंदर गोलीबारी हो रही हो उस राज्य में कानून-व्यवस्था की हालत क्या होगी। भाजपा ने नीतीश कुमार को बिहार का कलंक बताते हुए कहा कि वो अब राज्य को नहीं सँभाल पा रहे हैं।

सम्राट चौधरी ने अपने बयान में कहा कि बिहार में न कोर्ट, न पुलिस और न ही मीडिया सुरक्षित है। सम्राट चौधरी के मुताबिक नीतीश कुमार को 1 भी घंटे मुख्यमंत्री नहीं रहना चाहिए। सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें हिम्मत है तो 24 घंटे में जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक करें।

‘हिजड़ों की रुकावट हो, कुत्तों का जुलुम जब हो – इस्लामी फराइज में…’: कॉलेज में बुर्कानशीं लड़कियों का तालिबानी प्रदर्शन, कट्टरपंथी कृत्य का प्रिंसिपल रफत ने किया बचाव

मऊ के कॉलेज का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बुर्का पहनी छात्राएँ कट्टर मजहबी गाने पर डांस कर रही है। ये गाना भी आपत्तिजनक है। इस गाने में इस्लाम की दुहाई देकर पर्दे में रहने की अपील की जा रही है। साथ ही इसमें ‘गैर मुस्लिमों’ की तुलना ‘हिजड़ों’ और ‘कुत्तों’ से की गई है। खास बात ये है कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित पहाड़पुरा के तालीमुद्दीन निस्वा गर्ल्स डिग्री कॉलेज का है।

हिंदू संगठनों ने की प्रशासन से शिकायत

जानकारी के मुताबिक, ये वीडियो 15 अगस्त के दिन आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान का है, जिसमें समुदाय विशेष की छात्राओं ने धर्म आधारित एक गीत पर डांस किया। इस मामले में ‘हिंदू जागरण मंच‘ के जिला अध्यक्ष अतुल राय ने लिखित शिकायत की है, जिसके बाद पुलिस ने कॉलेज के प्रबंधक और प्राचार्य समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

‘गैर मजहबी लोग कुत्ते-हिजड़े’

इस वीडियो को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है, “ब्रेन वॉशिंग और कट्टरपंथ का छोटा सा नमूना, जिसमें अल्पसंख्यक मजहबी संस्थान में सिर से पैर तक ढँकी और बुर्का पहनी लड़कियाँ अपने धर्म का बखान कर रही हैं। गाने में गैर-मुस्लिमों के लिए ‘हिजड़ा’ और कुत्ता जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें दुश्मन घोषित किया गया है। कोई भी पर्दा प्रथा को बंद करने की कोशिश करता है, तो उसे ‘इस्लाम के खात्मे की कोशिश’ घोषित कर दिया जाता है।

ये वीडियो तालीमुद्दीन निसवान महिला डिग्री कॉलेज का है, जो यूपी के मऊ जिले में है। इस गाने के बोल कैटरीना कैफ पर फिल्माए ‘कमली’ गाने से मिलता जुलता है। वीडियो का स्रोत अज्ञात है।

ये वीडियो वायरल होने के बाद मऊ पुलिस ने कहा है कि उसने मामला दर्ज कर लिया है और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

वहीं मामला सामने आने के बाद डिग्री कॉलेज प्रशासन ने सफाई भी दी है। ‘दैनिक भास्कर’ ने इस मामले में कॉलेज की प्रधानाध्यापिका डॉ. रफत परवीन ने बातचीत में स्वीकारा कि वीडियो उन्हीं के कॉलेज का है। उनका कहना है कि ये धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की जगह फातिमा पर हुए अत्याचारों की कहानी बताता है। उन्होंने दावा किया कि 15 अगस्त को वो डिग्री कॉलेज में थी ही नहीं, क्योंकि वो बीमार थी। उन्होंने वीडियो और गाने पर सवाल उठाने वालों की समझ पर ही सवाल उठा दिए।

घर में घुस गर्भवती कवियित्री की हत्या से हिल गया था देश, मायावती के मंत्री से मैच हुआ अजन्मे बच्चे का DNA: 16 साल बाद अमरमणि त्रिपाठी रिहा

 बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को रिहा कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार (24 अगस्त, 2023) को ही रिहा करने का आदेश दे दिया। गोरखपुर के जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) को इसकी पुष्टि की थी। 

हालाँकि, इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई लेकिन कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस भी जारी किया है। बता दें की कवियित्री मधुमिता शुक्ला की 2003 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा 2007 में सजा हुई थी और तब से अब तक 16 साल अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमणि ने सजा काटी।

अमरमणि त्रिपाठी की रिहाई पर एक बार फिर मधुमिता शुक्ला हत्याकांड चर्चा में है। वहीं समय से पहले रिहा होने बाद उनके बेटे अमनमणि त्रिपाठी का बयान भी आया है। उन्होंने कहा, “यह ऊपरवाले का आशीर्वाद है। 20 साल से हम अपने माता-पिता के लिए इसका इंतजार कर रहे थे। आज वह घड़ी आ गई है। मैं और मेरा परिवार सभी बहुत खुश हैं। हर कोई खुश है, इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है।”

बीआरडी में एडमिट हैं अमरमणि-मधुमणि

कारागार प्रशासन और सुधार अनुभाग ने गुरुवार को राज्य की 2018 की रिहाई नीति का जिक्र करते हुए अमरमणि त्रिपाठी की समय से पहले रिहाई संबंधी एक आदेश जारी किया था। अधिकारी मदन मोहन ने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि विभाग ने उनकी वृद्धावस्था और जेल में अच्छे आचरण को देखते हुए रिहा करने का निर्णय लिया है। बता दें कि इस समय पूर्व बसपा नेता अमरमणि की उम्र 66 साल और मधुमणि 61 साल की हैं। दोनों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की वजह से गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था। 

कैसे हुई थी मधुमिता की अमरमणि से मुलाकात 

मधुमिता बहुत ही कम उम्र में अपनी कविताओं के दम पर प्रसिद्द हो चुकी थीं। मंचों पर अपनी कविताओं से मधुमिता ने खूब नाम कमाया। इसी बीच, साल 2000-2001 के बीच मंच पर ही उसकी मुलाकात तत्कालीन बसपा सरकार में प्रभावशाली मंत्री और पूर्वांचल के बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी से हुई। इसके बाद शुरू हुआ मुलाकातों का दौर। मधुमिता और अमरमणि के बीच सम्बन्ध इतने अंतरंग थे कि मधुमिता तीन बार गर्भवती हुईं। 

2003 में हुई थी मधुमिता शुक्ला की हत्या

कवयित्री मधुमिता शुक्ला की 9  मई 2003 को पेपर मिल कॉलोनी, लखनऊ में गोली मारकर हुई थी। घटना के वक्त वह तीसरी बार गर्भवती थीं। कवयित्री की गोली मारकर हुई हत्या से तत्कालीन बसपा सरकार में हड़कंप मच गया था। दरअसल अमरमणि बसपा सरकार के कद्दावर मंत्रियों में शुमार थे। इसी हत्या के सिलसिले में अमरमणि त्रिपाठी को सितंबर 2003 में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस मामले की जाँच मुख्यमंत्री मायावती ने सीबीआई को दी थी। बाद में देहरादून की एक अदालत ने अक्टूबर 2007 में मधुमिता की हत्या के लिए अमरमणि और उनकी पत्नी मधुमणि को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, बाद में नैनीताल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी दंपति की सजा को बरकरार रखा था। 

बसपा सरकार में मच गया था हड़कंप 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ में निषादगंज थाने से कंट्रोल रूम में जब हत्या की रात फोन की घंटी बजी कि पेपर मिल कालोनी में किसी महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। तो पहले पुलिस किसी सामान्य मामले की तरह लिया, लेकिन जैसे ही तहकीकात आगे बढ़ी, एक से बढ़कर एक खुलासे होने लगे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया।

क्योंकि, हत्या जिस महिला की हुई थी वह थीं मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला थीं। राजनीतिक महकमे में भी मधुमिता की अच्छी पकड़ थी। वहीं इस हत्या में जिस व्यक्ति का नाम आरोपित के रूम में आया वह कोई और नहीं बल्कि बसपा सरकार में गहरी पैठ रखने वाले बाहुबली अमरमणि त्रिपाठी थे। अमरमणि त्रिपाठी का उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा दबदबा रहा है कि सरकार किसी भी पार्टी की हो, कैबिनेट में उनकी जगह पक्की रहती थी।

डीएनए रिपोर्ट से बदली जाँच की दिशा 

हालाँकि, हत्या के बाद हुई किरकिरी के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस हत्याकांड की जाँच सीबीसीआईडी को सौंपी थी। मधुमिता के शव को पोस्टमार्टम के बाद गृह जनपद लखीमपुर भेजा गया। अचानक एक पुलिस अधिकारी की नजर रिपोर्ट पर लिखी एक टिप्पणी पर पड़ी, जिसमें मधुमिता के गर्भवती होने का जिक्र था। और यहीं से मामले ने एक अलग मोड़ ले लिया। मधुमिता के शव का दोबारा पोस्टमार्टम हुआ। डीएनए जाँच में इस बात की पुष्टि हुई कि बच्चा अमरमणि का था। बाद में बसपा सरकार ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी।

मधुमणि ने रची थी हत्या की साजिश 

सीबीआई की जाँच में अमरमणि और उनकी पत्नी की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले। इसके बाद अमरमणि को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। जबकि मधुमणि गिरफ़्तारी से बचने के लिए नेपाल भाग गईं। सीबीआई कई दिनों तक उनकी तलाश करती रही। इसी तरह मधुमिता का नौकर देशराज भी कई दिन तक फरार रहा। बाद में सीबीआई ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। देशराज ने जब अमरमणि और मधुमिता के रिश्ते का खुलासा किया तो पूरे मामले की पर्तें उधड़ती चली गई। सीबीआई जाँच में सामने आया कि अमरमणि से मधुमिता के रिश्तों से नाराज होकर हत्या की साजिश मधुमणि ने रची थी।

सीबीआई जाँच के दौरान गवाहों को धमकाने का आरोप लगा तो मुकदमा देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया। कोर्ट ने मामले में 24 अक्तूबर 2007 को अमरमणि, उनकी पत्नी मधुमणि, भतीजा रोहित चतुर्वेदी और शूटर संतोष राय को उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि एक अन्य शूटर प्रकाश पांडेय को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालाँकि, बाद में नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रकाश पांडेय को भी दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

‘हनुमान जी को सब पता था, लेकिन उन्हें किसी ने याद दिलाई’: ISRO के वैज्ञानिकों ने PM को बताया प्रेरणास्रोत, कहा- देश को ऐसे ही नेता की जरूरत

ग्रीस यात्रा से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (26 अगस्त 2023) को बेंगलुरु पहुँचे। यहाँ उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री से बातचीत को लेकर इसरो के वैज्ञानिक काफी उत्साहित नजर आए। वैज्ञानिकों ने PM को प्रेरणादायक बताते हुए कहा है कि देश को इसी तरह के लीडर की जरूरत है, जो उन्हें मोटिवेट कर सके।

वैज्ञानिक और प्रज्ञान रोवर टीम की सदस्य रीमा घोष ने कहा है, “हम बहुत खुश हैं। प्रधानमंत्री जी ने हमारे सभी प्रयासों की सराहना की है। मैं प्रज्ञान टीम में थी। यह मेरे लिए एक बच्चे की तरह है। वह चंद्रमा पर छोटे-छोटे कदम बढ़ा रहा है। पहली बार चंद्रमा पर रोवर को उतरते हुए देखना अद्भुत अनुभव है।”

उन्होंने आगे कहा है, “उन्होंने इतना समय निकाला, यह बड़ी बात है। हम आगे कुछ और बेहतर करने वाले हैं। जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि आकाश की कोई सीमा नहीं है। इसलिए हम जल्द ही कुछ और महत्वपूर्ण मिशन लॉन्च करेंगे। इसरो की योजना में मंगल लैंडिंग मिशन, आदित्य-एल1 मिशन सहित कई अन्य मिशन हैं।”

चंद्रयान-3 की आयोजन समिति के सदस्य और वैज्ञानिक एफबी सिंह ने कहा है, “प्रधानमंत्री जी बेहद प्रेरणादायी हैं। 12-13 घण्टे की यात्रा करने के बाद वे यहाँ पहुँचे और इसरो के वैज्ञानिकों को प्रेरणा दी। हम लोगों ने बहुत मेहनत की थी। हमें उनके जैसे नेता की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने हमें दूरदर्शिता दी है। जहाँ तक प्रतिभा की बात है तो इसरो के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन हमें एक ऐसे नेता की जरूरत है जो हमें प्रेरित करें।”

उन्होंने आगे कहा, “यदि आप हमारे हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं को देखें तो हनुमान जी को सब पता था। वह सब जानते थे, लेकिन किसी ने उन्हें याद दिलाया। इसलिए यहाँ जो कुछ भी हुआ है, वह ठीक उसी प्रकार याद दिलाने की तरह है। प्रधानमंत्री बता रहे हैं कि आप में प्रतिभा है। आगे बढ़िए। चिंता नहीं करनी है। मैं आपके साथ हूँ। वह आउट ऑफ द बॉक्स वाली सोच के साथ समझाते हैं। चंद्रयान-2 की असफलता के बाद लोग निराश हो गए थे, लेकिन उन्होंने कहा था कि असफलता से ही सफलता के लिए सीख मिलती है।”

इसरो के एक अन्य वैज्ञानिक सुधीर कुमार एन ने कहा, “मैं निःशब्द हूँ। भारत पहुँचते ही प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से यहाँ आए। उन्होंने कहा कि वह हमें जल्द से जल्द मिलना चाहते थे। इससे अधिक हम क्या उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने चंद्रयान-3 बिंदु के लैंडिंग पॉइंट को ‘शिवशक्ति’ पॉइंट और चंद्रयान-2 के पॉइंट को ‘तिरंगा’ पॉइंट का नाम दिया है। उन्होंने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है। यह सफलता का जश्न मनाने के लिए है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ यह याद रखें कि हमने इस दिन बड़ा कारनामा किया था।”

इसरो की वैज्ञानिक और चंद्रयान-3 की सदस्य डैफिनी ने कहा है, “प्रधानमंत्री से बातचीत करना हमारे लिए सुखद अनुभव है। उन्होंने सभी वैज्ञानिकों से खासतौर से बात की। महिला वैज्ञानिक इस पूरे सिस्टम का हिस्सा हैं। हालाँकि, सिर्फ महिलाएँ ही नहीं, बल्कि पुरुषों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। इसलिए सफलता मिली।”

पीएम मोदी ने इसरो पहुँचकर ऐलान किया कि ‘चंद्रयान-3’ की कामयाबी का जश्न मनाने के लिए 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पीएम मोदी ने शनिवार की सुबह इसरो में घोषणा की कि जिस बिंदु पर चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम उतरा है, उसका नाम ‘शिवशक्ति’ रखा जाएगा। वहीं, चंद्रयान-2 का लैंडर जिस बिंदु के पास पहुँचा था, उसे ‘तिरंगा’ कहा जाएगा।

रोवर चला 12 मीटर

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 रोवर प्रज्ञान ने 26 अगस्त की सुबह तक 12 मीटर की दूरी तय की थी। उन्होंने चंद्रमा से कई तस्वीरें पीएम के साथ साझा कीं। दरअसल 23 अगस्त 2023 को ‘चंद्रयान-3’ चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरकर इतिहास रच दिया था। वहाँ लैंडर विक्रम ने साउथ पोल पर रोवर प्रज्ञान को उतारा था। 

लैंडर मॉड्यूल पर दो खंडों के फोल्डेबल रैंप ने रोवर को एक तार के साथ साउथ पोल की सतह पर नीचे लुढ़कने में मदद की। रोवर के चंद्रमा की सतह को छूने के बाद ये तार हटा दिया गया था। जैसे ही यह चला, एक सौर पैनल भी खुल गया, जिससे रोवर को अपने 500 मीटर के सफर के लिए 50W बिजली पैदा करने सुविधा मिल गई। इसी लैंडर को लेकर शुक्रवार इसरो ने ताजा अपडेट एक्स हैंडल पर डाला है।

‘भेदभाव नहीं करतीं तृप्ता त्यागी, बच्चों की फीस भी करती हैं माफ़’: वीडियो वायरल होने के बाद गाँव के ही मुस्लिम ने बताया – मैं भी उनसे पढ़ा हूँ, अब मेरी बेटी पढ़ती है

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो के आधार पर एक स्कूल की शिक्षिका पर छात्र को अन्य बच्चों से पिटवाने का आरोप लगा था। मोहम्मद जुबैर, संजय सिंह, सदफ अमीन जैसे कइयों ने अपने सोशल मीडिया हैंडलों के जरिए इस मामले को सांप्रदायिक एंगल देने का प्रयास किया। इस्लामी मुल्क क़तर के मीडिया संस्थान ‘अल जजीरा’ ने भी विदेश से बैठ कर इस मामले में हिन्दू-मुस्लिम की हवा देनी शुरू की।

हालाँकि, पहले पुलिस और बाद में खुद छात्र के अब्बा ने मामले में किसी भी सांप्रदायिक एंगल से इनकार कर दिया। अब उसी स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने वाले एक अन्य मुस्लिम व्यक्ति ने ऑपइंडिया से बात करते हुए स्कूल की शिक्षिका को सांप्रदायिक बताने वालों की आलोचना की है।

यह घटना मुजफ्फरनगर जिले के थाना क्षेत्र मंसूरपुर की है। यहाँ के गाँव खुब्बापुर में ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ है। तृप्ता त्यागी नाम की महिला टीचर का वीडियो वायरल होने के बाद ऑपइंडिया ने खुब्बापुर गाँव के ही मुस्लिम ग्रामीण आरिब से बात की। आरिफ ने इस घटना को सांप्रदायिक एंगल दे रहे लोगों से नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि न सिर्फ उनकी बेटी बल्कि 2 भांजे भी ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ में पढ़ते हैं और आज तक कभी भी उनके बच्चों के साथ मजहब के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया गया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए 32 वर्षीय आरिब ने कहा कि पहले उन्होंने खुद बचपन में तृप्ता त्यागी से ट्यूशन पढ़ा। तृप्ता ने आरिब को अंग्रेजी पढ़ाई थी। आरिब का दावा है कि तृप्ता ने उनके साथ कभी भी हिन्दू या मुस्लिम समझ कर भेदभाव नहीं किया। हमसे बात करते हुए अरिब ने आगे बताया कि अब उनकी एक 2 साल की बेटी है जिसे वो ‘नेहा पब्लिक स्कूल’ में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी बच्ची बहुत अच्छे से स्कूल में पढ़ रही है और कभी भी उनके साथ कोई मजहब के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ।

बकौल आरिब, स्कूल में अच्छी और बिना भेदभाव की पढ़ाई के चलते ही उन्होंने अपने 2 भाँजों का भी एडमिशन नेहा पब्लिक स्कूल में करवाया है। अब आरिब के दोनों भाँजे भी उसी स्कूल में आराम से बिना किसी समस्या के पढ़ रहे हैं। आरिब ने हमसे बातचीत के दौरान साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उतने तनावपूर्ण हालात में भी खुब्बापुर में कोई सांप्रदायिक घटना नहीं हुई। आरिब ने यह भी बताया कि जिस परिवार ने महिला टीचर पर आरोप लगाए हैं वो मूल रूप से उनके गाँव के नहीं हैं और कहीं बाहर से आ कर रिश्तेदारी में बसे हैं।

हमसे बातचीत के दौरान मोहम्मद आरिब ने यह भी कहा कि जिन मैडन तृप्ता त्यागी को इतना बदनाम किया जा रहा है कई बार वो बच्चों को बिना पैसे के पढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि वो खुद टीचर त्यागी की दरियादिली के गवाह हैं। साथ ही आरिब ने दावा किया कि जिस वीडियो को वायरल किया जा रहा उसमें तमाम काट-छाँट है जबकि असल वीडियो में टीचर में एक भी बात गलत नहीं बोली है।

ऑपइंडिया ने तृप्ता त्यागी के परिजनों से भी बात की। उन्होंने बताया कि स्कूल क्लास 1 से 5 तक है। कुल छात्रों की सँख्या लगभग 55 है। इन 55 छात्रों-छात्राओं में उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लगभग 25 छात्र बताए। साथ ही उन्होंने कहा कि आज तक कभी भी ऐसा मामला सामने नहीं आया था और न ही उनकी सोच किसी मजहब आदि के खिलाफ है।

कैसे भगवान शिव के मस्तक का आभूषण बन गया चन्द्रमा: पौराणिक कथा में झलकता है हमारे मनीषियों का ज्ञान, ‘चंद्रयान 3’ का लैंडिंग पॉइंट भी अब कहलाएगा ‘शिव शक्ति’

बेंगलुरु स्थित ‘इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) को लेकर शनिवार (26 अगस्त, 2023) को एक ऐतिहासिक ऐलान किया। उन्होंने चंद्रयान-3 के टचडाउन (लैंडिंग) प्वाइंट को ‘शिवशक्ति’ नाम दिया है। वहीं चंद्रयान-2 के मून लैंडर की क्रैश लैंडिंग साइट का नाम ‘तिरंगा प्वाइंट’ रख दिया है।

चंद्रयान-3 के मिशन को ‘शिवशक्ति’ के पीछे एक अहम वजह है और वो इस मून मिशन पर एक नजर डालने पर साफ हो जाती है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने की चंद्रयान 2 मिशन की विफलता के बाद चंद्रयान-3 मून मिशन अस्तित्व में आया था। इसरो (ISRO) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर 14 जुलाई, 2023 चंद्रयान-3 को एलवीएम-3 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा था।

अंतरिक्ष में 40 दिनों के सफर के बाद, चंद्रयान -3 लैंडर ‘विक्रम’ अपने साथ रोवर ‘प्रज्ञान’ को लेकर बुधवार (23 अगस्त 2023) की शाम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। इसके साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला देश बन गया।

वहीं अमेरिका, रूस और चीन के बाद देश चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश भी बना। यहाँ विक्रम लैंडर की लैंडिंग के बाद चंद्रमा की सतह से आँकड़े जुटाने के लिए रोवर प्रज्ञान उतरा। वो ये सारे आँकड़े इकट्ठा कर विक्रम लैंडर को देगा और वो इसे धरती पर इसरो के पास भेजेगा।

ये भी ध्यान देने की ज़रूरत है कि चंद्रमा का हिंदू धर्म में बहुत अहम स्थान है। एक तरह से देखा जाए तो इससे जुड़े चंद्रयान मिशन में भी चंद्रमा जैसा धैर्य और तपस्या रही तभी जाकर कहीं भारत इस गौरवपूर्ण पल का साक्षी बना। वो चंद्रमा जैसी धैर्य, तपस्या और अपने लक्ष्य की निरंतरता ही थी जो उन्हें भगवान शिव के मस्तक पर आभूषण के रूप में सजने का सौभाग्य मिला।

सनातन धर्म में प्रकृति की पूजा का विशेष महत्व है। नदियों से लेकर पर्वतों तक को यहाँ देवी-देवताओं के रूप में पूजा जाता है। उन्हें लेकर कई कथाएँ हैं। ठीक उसी तरह सूर्य से लेकर चंद्रमा तक भी अलग-अलग लोकों के देवता बताए गए हैं। आपने अक्सर भगवान शिव की तस्वीरों और प्रतिमाओं में उनकी जटा के ऊपर अर्धचंद्र को देखा होगा। अब जब चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के ‘चंद्रयान 3’ की लैंडिंग पॉइंट का नाम ‘शिवशक्ति’ रखा गया है, आइए जानते हैं कि पौराणिक कथाओं के हिसाब से शिव और चंद्र का ये साथ कैसे बना।

भगवान शिव की अर्द्धांगिनी पार्वती यानी शक्ति चंद्रमा की पत्नी की बहन थी तो ‘चंद्रयान-3’ के टचडाउन प्वाइंट को ‘शिवशक्ति’ नाम मिला। यहाँ पर चंद्रमा के धार्मिक महत्व और भगवान शिव के साथ चंद्र देव (चंद्र) के संबंध के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है।

हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव के सिर पर अर्धचंद्राकार चंद्रमा उनकी गहन आध्यात्मिकता को बढ़ाता है। भगवान शिव से जुड़ी हर चीज का अपना अलग महत्व है। वैदिक साहित्य में कई कथाएँ ब्रह्मा-विष्णु-शिव और अन्य देवताओं को लेकर है। कुछ ऐसा ही कथाएँ भगवान शिव और चंद्रमा को लेकर भी है।

ससुर दक्ष से चंद्रमा को मिला था श्राप

भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक प्रजापति दक्ष थे। उनकी प्रसूति और वीरणी नामक 2 पत्नियाँ थीं। दक्ष की प्रसूति से 24 और वीरणी से 60 पुत्रियाँ थीं। प्रसूति की पुत्रियों में से एक सती ने दक्ष की इच्छा के विरुद्ध भगवान शिव से विवाह किया था।

वीरणी की 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से किया गया। माना जाता है कि 27 नक्षत्र ही प्रजापति दक्ष की पुत्रियाँ हैं। इनमें से रोहिणी को चंद्रमा सबसे अधिक प्रेम करते थे। इससे दुखी होकर चंद्र की अन्य 26 पुत्रियों ने राजा दक्ष से उनकी शिकायत कर दी थी। अपनी अन्य पुत्रियों के दुखी देख राजा दक्ष नाराज हो गए और उन्होंने चंद्रमा को क्षय हो जाने का श्राप दे दिया। इस श्राप से उनकी चमक कम होने लगी और वो धीरे-धीरे अपनी मृत्यु की तरफ बढ़ने लगे। हैरान-परेशान चंद्रमा को ऐसे में अपनी परेशानी दूर करने के लिए ब्रह्मा जी याद आए।

‘भगवान शिव के पास जाएँ आप’

श्राप के डर से चंद्र तुरंत भगवान ब्रह्मा के पास सलाह माँगने पहुँचे। ब्रह्मा ने उन्हें भगवान शिव के पास जाने की सलाह दी। चंद्रमा भगवान ब्रह्मा की शरण में पहुँचे। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, चंद्रमा ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए ऋषिकेश में गंगा के किनारे 14,500 देव सालों तक भगवान शिव की घोर तपस्या की थी।

इससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चंद्रमा को एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में दर्शन दिया था और श्राप मुक्त करवाया था। शिव के दर्शन पर चंद्रमा ने अपनी पूरी परेशानी उन्हें कह डाली। चंद्रमा की बात सुनने के बाद भगवान शिव ने उनसे कहा कि श्राप को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि दक्ष को एक प्रजापति होने के नाते चंद्रमा सहित अपनी प्रजा के भाग्य का फैसला करने का पूरा अधिकार था।

वहीं दूसरी तरफ, चंद्रमा की अनुपस्थिति ने प्रकृति के संतुलन बिगाड़ दिया, क्योंकि ब्रह्माण्ड के अनगिनत जीवन उनकी कोमल चाँदनी पर निर्भर थे। ऐसे में भगवान शिव को रास्ता निकालना पड़ा, जिससे की चंद्रमा की जान भी बच जाए और दक्ष का श्राप भी बरकरार रहे। तब भगवान शिव ने चंद्र को श्राप से मुक्त करते हुए अपना आशीर्वाद देते हुए कहा कृष्णपक्ष के दौरान आपकी रोशनी कम हो जाएगी और शुक्लपक्ष के दौरान आपकी चमक ज़्यादा रहेगी। इससे सभी का कल्याण होगा।

इसके बाद, शिव ने एक पखवाड़े के लिए चंद्रमा की महिमा को बढ़ाने के लिए उन्हें अर्धचंद्र को अपने सिर पर सजाया। इससे चंद्रमा के बढ़ने और घटने का चक्र शुरू हुआ। भगवान शिव महाकाल है वो समय की बाधाओं से परे हैं। चंद्रमा का घटना-बढ़ना भगवान शिव की समय पर नियंत्रण की शक्ति का दिखाता है।

हिंदू धर्मग्रंथों के मुताबिक, इस घटना से पता चलता है कि चंद्रमा कृष्ण पक्ष यानी पूर्णिमा से अमावस्या के दौरान घटते हुए दिखाई देते हैं। वहीं अमावस्या से पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ते है। चंद्रमा की यही गति हिंदू कैलेंडर का आधार बनती है। शुक्ल का अर्थ है उज्ज्वल। कृष्ण का अर्थ है अंधेरा। पक्ष का अर्थ है पखवाड़ा यानी 15 दिन। इससे ये भी साफ़ है कि चन्द्रमा के घटने-बढ़ने को लेकर हमारे मनीषियों को अधिकतर चीजें पता थीं। उन्हें नक्षत्रों के बारे में भी पता था।

माना जाता है कि चंद्र देव मन के क्षेत्र पर प्रभुत्व रखते हैं। भगवान शिव चंद्र देवता पर भी शासन करते हैं। शिव सभी ध्यान संबंधी ऊर्जाओं के स्रोत हैं। यह प्रभाव शिव के स्वयं के ध्यान और भौतिक जगत से वैराग्य से पैदा होता है। हालाँकि, उनका यह स्वभाव उदासीनता का संकेत नहीं देता है। वह उन लोगों को तुरंत आशीर्वाद देते हैं जो अपने दिमाग को विकसित करने और नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।

शीतलता के लिए भगवान शिव ने चंद्र को किया धारण

एक दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए विष पिया था। शिवपुराण में बताया गया है कि जगत की रक्षा के लिए समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का शिव ने पान किया था। माता पार्वती यानी शक्ति ने उनके गले पर हाथ रखकर इस विष को उनके शरीर में जाने से रोका था। इससे ये विष उनके कंठ में जमा हो गया। इससे उनका पूरा कंठ नीला पड़ गया।

इस वजह से भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। विषपान के असर से उनका शरीर बेहद गर्म होने लगा। तब देवताओं ने उनसे चंद्रमा को शीश पर धारण करने की प्रार्थना की, ताकि उनके शरीर में शीतलता हो। श्वेत चंद्रमा से सृष्टि को शीतलता मिलती है, इसलिए भगवान शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया।

भगवान शिव के संबंध में चंद्रमा का यही महत्व रहा है। चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के लैंडिंग बिंदु को ‘शिव शक्ति पॉइंट’ नाम देकर भारत सरकार ने भारत की सभ्यता, धर्म और संस्कृति जैसी धारणाओं का सही अर्थों में सम्मान किया है।

स्कूल पर बम से हमला, 13 माँ-बच्चों समेत 18 मौतें, 19 साल बाद हाईकोर्ट ने 6 आरोपितों को बरी किया… मुख्य आरोपित राशिद अब तक फरार

असम के धेमाजी स्कूल पर 2004 में बम से हमला हुआ था, जिसमें 13 माँ-बच्चों समेत 18 लोगों की जान चली गई थी। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 6 आरोपितों को बरी कर दिया है। इससे पहले साल 2019 में 8 आरोपितों को बरी कर दिया गया था। जिन 6 आरोपितों को हाईकोर्ट ने बरी किया है, उनमें चार को उम्रकैद की और दो लोगों को चार साल की सजा सुनाई गई थी। वहीं, इस केस का मुख्य आरोपित राशिद भराली अभी भी लापता है।

पीड़ितों ने पूछा-आरोपित गुनाहगार नहीं, तो किसने किया धमाका?

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ितों में गुस्सा है। उन्होंने सरकार से इस धमाके के असली दोषियों के बारे में पूछा है। पीड़ितों का कहना है कि उनके लोगों की जान गई, उनका नुकसान हुआ और आरोपित बरी हो गए तो फिर इस धमाके कैसे हुआ था? इस धमाके के पीड़ितों में से एक नित्यानंद सैकिया ने अपनी दो बहनें खो दी थीं। उनका कहना है कि जब आरोपितों ने धमाका किया ही नहीं तो इसे किसने अंजाम दिया? उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला।

राज्य सरकार करेगी सुप्रीम कोर्ट में अपील

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 24 अगस्त को दिए अपने फैसले में निचली अदालत से दोषी करार दिये गए दीपांजलि गोहैन, मुही हैंडिक, जतिन दुवारी और लीला गोगोई के साथ ही प्रशांत भुयान, हेमेन गोगोई को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आरोपितों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले हैं। अब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि उन्होंने डीजीपी को निर्देश का अध्ययन करें और इसमें कुछ गलत निकलता है तो सुप्रीम कोर्ट में अपील किया जाए।

10 बच्चों और तीन महिलाओं की हुई थी मौत

धेमाजी के इस स्कूल में साल 2004 में सुबह 9 बजे स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम चल रहा था। उसी समय स्कूल परिसर को आरडीएक्स से धमाका कर निशाना बनाया गया था। इस हमले में छोटे-छोटे मासूमों के चीथड़े उड़ गए थे। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बच्चों के परिजन भी पहुँचे थे। इसमें बच्चों के साथ आईं तीन महिलाओं की भी मौत हो गई थी। कई परिवारों की जड़ें खत्म गई थी। इस हमले के बाद असम में उल्फा का तीखा विरोध हुआ था।

उल्फा ने पांच साल बाद ली थी जिम्मेदारी, मांगी थी माफी

बता दें कि धेमाजी स्कूल पर हमला स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इस हमले का आरोप उल्फा पर लगा था, लेकिन उल्फा ने अपनी संलिप्तता से इन्कार कर दिया था। हालाँकि, साल 2009 में उल्फा ने इस हमले की जिम्मेदारी ले ली और पीड़ितों से माफी माँगी ली थी।

उल्फा चीफ अरबिंदा राजखोवा ने पीड़ितों से मुलाकात कर कहा था कि उनके कैडर ने उन्हें गलत जानकारियाँ दी थीं, इसलिए उन्होंने अब तक इसकी जिम्मेदारी नहीं ली थी। उस समय राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे तरुन गोगोई। उनकी कैबिनेट के मंत्री पर इस मामले को दबाने के आरोप लगे थे। हालाँकि, उन्हें कभी आरोपित नहीं बनाया गया। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में 15 लोगों को आरोपित बनाया था।