Home Blog Page 1585

हिंदू बीवी संग हिंदू एरिया में रहना चाहता था तोहिदुल अजीज हक, रोहित शर्मा के नाम से बना लिया आधार कार्ड: दो फर्जी आधार बनाने पर सूरत में गिरफ्तार

सूरत में एक मुस्लिम युवक ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन-तीन आधार कार्ड बनवा डाले। इनमें से एक आधार हिंदू व्यक्ति के नाम पर है। आरोपित व्यक्ति का नाम मोहम्मद तोहिदुल अजीज हक है। वो अब सूरत पुलिस की गिरफ्त में है। खास बात ये है कि इनमें से एक आधार कार्ड उसने ‘रोहित शर्मा’ के नाम से बनवाया था। इनमें तीनों में एक उसका वास्तविक आधार है, जबकि दो फर्जी हैं।

हिंदू लड़की से शादी के बाद बदल डाली अपनी पहचान

तोहिदुल ने सूरत की स्पा में काम करने वाली एक हिंदू लड़की से शादी भी कर ली। उस लड़की ने जब उसके साथ मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहने से मना कर दिया, तब उसने रोहित शर्मा नाम से नया आधार कार्ड बनवा डाला। स्पा में काम करने के लिए वो अहमद खान नाम का इस्तेमाल करता था। वहीं, हिंदू इलाके में के लिए रोहित शर्मा नाम इस्तेमाल करता था।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने हिंदू नाम पर सरकारी दस्तावेज तैयार किया था क्योंकि वह शहर में एक हिंदू इलाके में रहना चाहता था। पुलिस ने बताया कि मोहम्मद तोहिदुल का एक हिंदू महिला से अफेयर था। उससे शादी करने के बाद आरोपी ने रोहित शर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया ताकि वे हिंदू इलाके में रह सकें।

महज 1500 रुपए खर्च करके अहमद खान से बना रोहित

खास बात ये है कि उसने महज 1500 रुपयों में न सिर्फ अपना नाम बदल लिया, बल्कि अपनी धार्मिक पहचान भी बदल ली। इसके पहले उसने अहमद खान के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसके बाद उसने स्पा में नौकरी हासिल की थी। तीनों पर उसकी ही शक्ल है।

पश्चिम बंगाल का निवासी है आरोपित

आरोपित तोहिदुल उर्फ अहमद खान उर्फ रोहित शर्मा मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले का रहने वाला है। यहाँ वो कई तरह के काम कर चुका है। सूरत पुलिस की एसओजी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और कारनामे को अंजाम देने वाले उसके मददगारों की धरपकड़ कर रही है।

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह सात साल पहले सूरत आया था। उसने शहर के विभिन्न स्पा में मैनेजर के रूप में काम किया। सबसे पहले उसने अहमद अरन खान के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनाया। उसके बाद हिंदू लड़की के साथ हिंदू एरिया में रहने के लिए रोहित शर्मा के नाम से आधार बनवाया।

‘योगी सरकार न होती तो मेरा कत्ल हो जाता’: स्याही कांड में जिस BJP नेता का आया नाम, वो बोले- मुख़्तार के खिलाफ बोलने से नाराज अखिलेश यादव ने रची साजिश

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 21 अगस्त 2023 को भाजपा नेता दारा सिंह चौहान पर स्याही फेंकी गई थी। इस मामले में आरोपित अभिमन्यु यादव ने भाजपा नेता प्रिंस यादव पर स्याही फेंकने के लिए खुद को उकसाने का आरोप लगाया था। हालाँकि, बाद में पुलिस ने आरोपित अभिमन्यु के दावों को गलत बताया था।

अब खुद भाजपा नेता प्रिंस यादव ने गुरुवार (24 अगस्त 2023) को वीडियो जारी करके मामले में अपने खिलाफ रची गई साजिश का खुलासा किया है। भाजपा नेता का आरोप है कि ऑपइंडिया को मुख़्तार अंसारी के खिलाफ इंटरव्यू देने के बाद से माफिया और सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिलकर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। प्रिंस यादव ने अपनी जान का खतरा भी बताया है।

भाजपा नेता प्रिंस यादव ने वीडियो की शुरुआत में खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सच्चा सिपाही बताया। स्याही फेंकने वाले आरोपित अभिमन्यु को प्रिंस ने राजनैतिक मोहरा बताया। प्रिंस का दावा है कि स्याही साजिश रचकर फेंकी गई थी, क्योंकि मौके पर कैमरामैन और वीडियो शेयर करने वाले भी मौजूद थे।

प्रिंस यादव ने स्याही वाला वीडियो शेयर कर भाजपा पर आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव को अपराधियों का सबसे बड़ा संरक्षक और दंगाइयों एवं आतंकियों के मुकदमे वापस लेने वाला नेता बताया। प्रिंस ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है। हालाँकि, उन्होंने ऐसे होना देश और धर्म की भलाई के लिए उचित बताया। प्रिंस ने दावा किया है कि झूठा साबित होने के बावजूद अखिलेश यादव को न तो शर्म आएगी और न ही वो माफ़ी माँगेंगे।

प्रिंस यादव ने अपने खिलाफ हुई साजिश की वजह मई 2023 में ऑपइंडिया को दिया गया इंटरव्यू बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से पूर्वांचल में ग्राउंड रिपोर्ट कर रही ऑपइंडिया टीम के एक पत्रकार राहुल पांडेय को उन्होंने मुख़्तार अंसारी के ऐसे पाप गिनाए थे, जो अभी तक किसी भी मीडिया में हाईलाइट नहीं हुए थे।

प्रिंस ने माफिया मुख़्तार अंसारी को कलंक बताते हुए उसे अखिलेश यादव का सिरमौर कहा। भाजपा नेता के मुताबिक, उन्होंने ऑपइंडिया के माध्यम से पूरे देश में अखिलेश यादव और मुख़्तार अंसारी के रिश्तों को बेनकाब कर दिया था। साथ ही इंटरव्यू में यादवों से हिंदुत्व को समर्पित रहने की अपील भी की गई थी।

प्रिंस यादव ने आगे कहा कि खास मज़हब वाले अपराधी, दादा-परदादा के समय के साथी, मुख़्तार अंसारी का विरोध और हिन्दू समाज की एकजुटता की उनकी अपील को अखिलेश यादव बर्दाश्त नहीं कर पाए। प्रिंस के मुताबिक, बैठे-बैठाए सत्ता पाए अखिलेश यादव की राजनीति ही हिन्दू समाज को तोड़ कर चल रही है।

प्रिंस ने यह भी दावा किया कि ऑपइंडिया को दिए इंटरव्यू के बाद अगर अखिलेश यादव का शासन होता तो मुख़्तार अंसारी अब तक उनकी हत्या करवा चुका होता। प्रिंस ने मुख़्तार अंसारी को सम्बोधित करते हुए आगे कहा, “लेकिन, उसे ये भी पता है कि अब सत्ता योगी आदित्यनाथ महाराज की है और उसे पता है कि मिट्टी में मिलना किसे कहते हैं।”

भाजपा नेता ने कहा कि जब सख्त शासन के चलते मुख़्तार के गुर्गे उनकी हत्या नहीं करवा पाए तो साजिशन अभिमन्यु यादव का प्रयोग किया गया। राजनैतिक छवि धूमिल करने का प्रयास करने के लिए उनका नाम लेने वाले अभिमन्यु यादव को प्रिंस ने मुख़्तार का राजनैतिक शूटर कहा। उन्होंने स्याही कांड को भी अखिलेश यादव के इशारे पर हुआ बताया। प्रिंस ने कहा कि कभी पुलिस कस्टडी में लोगों को गोली मरवाने वाले माफिया अगर आज पुलिस कस्टडी में लोगों पर स्याही फिंकवाने के स्तर पर आ गए तो ये योगी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस की मेहनत है।

प्रिंस यादव ने स्याही फेंकने की घटना में उनका नाम लेने को अखिलेश यादव द्वारा मुख़्तार अंसारी का कर्ज चुकाने जैसा बताया। भाजपा नेता ने मुख़्तार अंसारी को मऊ दंगों में पुलिस की खुली जिप्सी से घूमकर हिन्दुओं का कत्ल करवाने वाला बताया। साथ ही उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार पर दंगाई मुख़्तार को ‘शांति का मसीहा घोषित’ करने का भी आरोप लगाया। प्रिंस ने यह भी कहा कि भाजपा शासन में मुख़्तार पहले की तरह न तो अपराध कर सकता है और न ही सफल साजिश। प्रिंस ने जनता को भी आगाह किया कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों तक ऐसी साजिशें लगातार आती रहेंगी।

प्रिंस ने अपने वीडियो में मुख़्तार, अतीक, अबू आज़मी की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि सपा के पास आतंकवाद, अपराध और दंगों के अलावा कुछ भी नहीं। इसी वीडियो में मुजफ्फरनगर में अखिलेश शासन के दौरान साल 2013 में मुस्लिम भीड़ द्वारा कत्ल हुए सचिन और गौरव भी दिखे। प्रिंस ने बताया कि अखिलेश भी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी 2024 में पिछली बार से अधिक सीटों के साथ प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, इसलिए अब सपा के पास सिर्फ अफवाहों का ही सहारा है।

अंत में प्रिंस ने कहा, “अखिलेश यादव, शायद कभी आप मुख़्तार जैसे माफिया को इशारा करके मेरी हस्ती को मिटा दो, लेकिन अब प्रिंस यादव जैसे अनगिनत भगवान कृष्ण के कुल के यदुवंशी इस देश और धर्म के लिए स्वयं को बलिदान करने के लिए तैयार हैं।”

बताते चलें कि ऑपइंडिया की टीम ने मई 2023 में पूर्वांचल के उन जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट की थी, जहाँ मुख़्तार अंसारी पर आपराधिक घटनाओं और साजिशों को अंजाम देने का आरोप लगा था। इस दौरान कई राजनेता, पुलिस अधिकारी सहित आम लोगों ने भी मुख़्तार अंसारी के खौफ की तमाम घटनाओं के बारे में बताया था। प्रिंस यादव ने भी तब मुख़्तार अंसारी पर हिन्दू को हिन्दू से लड़वाने, छोटे-छोटे बच्चों को भी अपना दुश्मन मानने और मऊ दंगों में यादवों का नरसंहार करवाने का आरोप लगाया था।

‘राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर देंगे’: पंजाब के राज्यपाल पुरोहित ने CM भगवंत मान को दी चेतावनी, ड्रग्स सहित कई मामलों का माँगा है ब्यौरा

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने आप सरकार पर संविधान के खिलाफ काम करने और उनके पत्रों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है। राज्यपाल और भगवंत मान के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि बात राष्ट्रपति शासन लगाने की आ गई है। राज्यपाल ने सीएम भगवंत मान को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि, अगर उन्होंने उनके पत्रों का जवाब नहीं दिया तो वे राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। 

क्या है पूरा मामला

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) को भगवंत मान को चेतावनी दी कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। राज्यपाल ने कहा है कि अगर उन्हें उनके पत्रों का जवाब नहीं मिला तो वह फौजदारी प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। 

राज्यपाल ने भगवंत मान को भेजे गए पत्र में कहा, “मैं आपसे माँगी गई सूचनाएँ उपलब्ध कराने और राज्य में मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए आपके द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा। ऐसा नहीं होने पर मेरे पास कानून और संविधान के अनुसार कार्रवाई करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं होगा।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि राज्यपाल द्वारा माँगी गई जानकारी न देना स्पष्ट रूप से संवैधानिक कर्तव्य का अपमान है, जोकि सीएम भगवंत मान पर लगाया गया है। दरअसल, भगवंत मान राज्यपाल के पत्रों का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस पर राज्यपाल ने कहा कि ऐसा न करने पर उनके पास कानून और संविधान के अनुसार कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में भी उन्हें इस संवैधानिक प्रावधान का सम्मान करने की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को 10-15 पत्र लिखे लेकिन उनमें से कई का जवाब नहीं मिला या अधूरा जवाब मिला। उन्होंने कहा कि मैं कोई भी जानकारी माँगता हूँ तो सीएम मान नाराज हो जाते हैं।”

पुरोहित ने सीएम मान के बयान का विरोध करते हुए कहा कि वो कहते है कि वो केवल तीन करोड़ पंजाबियों के प्रति जवाबदेह हैं, राजभवन के प्रति नहीं, लेकिन उन्हें राज्य को संविधान के अनुसार चलाना है उनकी सनक के अनुसार नहीं, आप बादशाह थोड़े हो।

इससे पहले राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने सीएम भगवंत मान पर जून में हुए विधानसभा सत्र के दौरान उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया था।  उन्होंने कहा था कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान पारित हुए चार विधेयक में से एक राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए राज्यपाल की शक्तियों को छीनने वाला था। राज्यपाल ने इसे पूरी तरह से अवैध करार दिया था। पुरोहित ने सीएम मान पर संविधान की धारा 167 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। 

संवैधानिक तंत्र की विफलता

राज्यपाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं। राज्यपाल ने सलाह दी कि वह संविधान के अनुच्छेद 356 और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के तहत अंतिम निर्णय लें, इससे पहले सीएम भगवंत मान उचित कदम उठाएँ।

कॉन्ग्रेस ने कारगिल विजय और सेना के शौर्य पर उठाए थे सवाल, नायकों का किया था अपमान: अब राहुल गाँधी वहाँ फैला रहे हैं प्रोपगेंडा

राहुल गाँधी ने अपने लद्दाख के दौरे के अंतिम दिन 25 अगस्त 2023 दिन शुक्रवार को कारगिल में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की हजारों किलोमीटर जमीन छिनी है और पीएम मोदी कह रहे हैं कि एक इंच भी जमीन नहीं गई है। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल को ये सब जानकारी आखिर देता कौन है। वह हमेशा आधारहीन बातें करते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि राहुल गाँधी को बताना चाहिए कि उनका चीन से क्या रिश्ता है।

बताते चलें कि राहुल गाँधी के परनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू के शासन में चीन ने 1962 में भारत पर हमला करके हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था। हालाँकि, राहुल गाँधी उसकी कभी चर्चा नहीं करते हैं। हालाँकि, भारत सरकार द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण देने के बावजूद वे भाजपा शासन में चीन द्वारा भारतीय भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते रहते हैं।

लोगों की जानकारी में कारगिल सन 1999 के युद्ध के बाद से आया। अब जबकि राहुल गाँधी भी कारगिल गए हैं तो 1999 के युद्ध और उसके बाद को दौर भी याद करना जरूरी है। कारगिल युद्ध पर कॉन्ग्रेस ने न सिर्फ सवाल उठाए, बल्कि उसे 1999 के चुनाव के लिए एनडीए का सियासी हथकंडा तक करार दे दिया था। राहुल गाँधी की माँ सोनिया गाँधी ने उस समय माँग की थी कि कारगिल युद्ध पर सरकार सदन में सफाई दे और इक्वॉयरी कमीशन बिठाए। यही नहीं, 2004 से 2009 तक यूपीए-1 सरकार ने आधिकारिक तौर पर कारगिल विजय दिवस तक नहीं मनाया था। ये कहानी लंबी है….

राजनीतिक फायदे के लिए लड़ाई-कॉन्ग्रेस

साल 1999 में कॉन्ग्रेस पार्टी ने इंग्लैंड के ‘द गार्जियन’ अखबार में छपे लेख को आधार बनाकर उस समय की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को ये कहकर घेरने की कोशिश की थी कि भारत सरकार को चला रहे लोगों ने पाकिस्तान के साथ समझौता करके ये चुनावी स्टंट खेला है। उसने कारगिल को युद्ध तक मानने से इनकार कर दिया था, क्योंकि ये युद्ध चुनाव से तीन सप्ताह पहले खत्म हो गया था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि ये युद्ध सिर्फ 1999 के चुनाव को जीतने के लिए था।

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के जौहर के आगे पाकिस्तान बेबस रह गया। भारत ने सैन्य और राजनयिक दोनों ही स्तरों पर पाकिस्तान को करारी धूल चटाई। तब इसी कॉन्ग्रेस ने कहा कि ये ‘हार’ है और ‘नुकसान’ पहुँचाने वाला है। कॉन्ग्रेस अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए ‘द गार्जियन’ की वो रिपोर्ट लाई, जिसे पाकिस्तान के तत्कालीन सूचना मंत्री मुशाहिद हुसैन ने छपवाया था। इसमें वाजपेयी सरकार को घेरने की कोशिश की गई थी। इस मामले पर कंचन गुप्ता ने 1999 में लिखे अपने लेख में प्रकाश डाला था।

कारगिल युद्ध का राजनीतिकरण कर कॉन्ग्रेस ने रखी सदन सत्र बुलाने की माँग

करगिल युद्ध के दौरान ही सोनिया गाँधी और उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा का आपातकालीन सत्र बुलाने की माँग कर डाली थी। सोनिया गाँधी ने इसके लिए 1962 में चीन से भारत को मिली हार के बाद बुलाए गए संसद सत्र से जुड़ा जवाहरलाल नेहरु का रेफरेंस दिया था। उन्होंने कहा था, “अगर पंडित जी सदन की बैठक बुला सकते हैं तो अब क्यों नहीं बुलाया जा सकता? हमें कारगिल पर बात करना चाहिए।” ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस ने सरकार की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा तक नहीं लिया।

जब सोनिया गाँधी पता चल गया कि भारत जीत गया है तो उन्होंने कहा था, “सेना भले ही जीत गई हो, लेकिन सरकार हार गई।” जबकि, हकीकत ये थी कि भारत सरकार ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बुरी तरह से एक्सपोज कर दिया था। वहीं, सेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। यही नहीं, जब सरकार ने कारगिल युद्ध की जाँच करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया तो इसी कॉन्ग्रेस ने जाँच कमेटी पर भी सवाल उठा दिए थे।

सालों तक कॉन्ग्रेस ने कारगिल शहीदों और जवानों का किया अपमान

कॉन्ग्रेस की अगुवाई में यूपीए 2004 में सत्ता में आई, लेकिन उसने कारगिल विजय दिवस को मनाने से इनकार करते देश के हीरो का अपमान किया। साल 2017 में तत्कालीन भाजपा सांसद (मौजूदा समय में केंद्रीय राज्यमंत्री) राजीव चंद्रशेखर ने ट्विटर (अब एक्स) पर जुलाई 2009 का एक पत्र साझा किया था, जिसमें उन्होंने कारगिल युद्ध के वीरों के सम्मान की माँग की थी। उन्होंने पत्र में कॉन्ग्रेस पार्टी को सैनिकों की शहादत की याद दिलाते हुए कारगिल विजय दिवस मनाने की अपील की थी।

राजीव चंद्रशेखर ने 21 जुलाई 2009 को एक पत्र राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को लिखा, जिसमें चेयरमैन से कारगिल विजय दिवस (23 जुलाई) को राज्यसभा में सार्वजनिक महत्व का दिन घोषित करने की माँग की। इसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्रालय और सरकार को हर साल कारगिल विजय दिवस मनाने की अपील की। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं से इसे ‘भाजपा की लड़ाई’ कहना बंद करने के लिए भी अपील की।

राजीव चंद्रशेखर की कोशिशें 2010 में रंग लाईं, जब उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी का पत्र लिखा। उस समय ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कारगिल युद्ध को कहा ‘भाजपा की लड़ाई’

साल 2009 में कॉन्ग्रेस के सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस को पूरे देश को मनाने की कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ एनडीए ही इसे सेलिब्रेट करे, क्योंकि ये उन्हीं (देश की नहीं) की लड़ाई थी। उनका ये बयान देशवासियों और शहीदों के लिए किसी अपमान से कम नहीं था।

कॉन्ग्रेस के पूर्व गृह राज्यमंत्री को याद नहीं कि कारगिल युद्ध कब हुआ

जी हाँ, राशिद अल्वी के बयान के बाद इस बारे में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री प्रकाश जायसवाल से सवाल पूछा गया। इस पर उन्हें यही नहीं पता था कि कारगिल विजय दिवस आखिर क्या है और कब ये मनाया जाता है। उन्हें पता नहीं था कि कारगिल युद्ध कब हुआ था।

सिद्धरमैय्या की कर्नाटक सरकार की करतूत

साल 2018 में कर्नाटक में सिद्धारमैया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। उस समय कारगिल युद्ध के नायकों में से एक कर्नल एमबी रविंद्रनाथ ने 59 वर्ष की उम्र में बेंगलुरू में आखिरी साँस ली। वो कारगिल युद्ध के समय 2 राजपूताना राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर थे, जिसने तोलोलिंग की चोटी को फतह किया था।

कर्नल एमबी रविंद्रनाथ को भारत सरकार ने वीर चक्र से नवाजा था। हालाँकि, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने उनकी अन्त्येष्टि के समय एक अधिकारी तक को नहीं भेजा। वहीं, विवादित पत्रकार गौरी लंकेश को पूरे राजकीय सम्मान के साथ आखिरी विदाई दी गई। गौरी लंकेश के बारे में तो जानते ही होंगे आप?

कमलनाथ की सरकार ने सिलेबस से कारगिल युद्ध का चैप्टर ही हटाया

भोपाल में MVM साइंस कॉलेज काफी मशहूर है। वहाँ मिलिट्री से जुड़ा पाठ्यक्रम भी है। लेकिन, साल 2018 में जब कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो कारगिल युद्ध को समर्पित पूरा हिस्सा ही पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि ऐसा कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव में किया गया, ताकि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के नेतृत्व में मिली देश की जीत को कम करके आँका जाए।

राहुल गाँधी लद्दाख से लेकर कारगिल की यात्रा कर रहे हैं। लोगों को संबोधित कर रहे हैं। वो लाल चौक पर तिरंगा फहरा चुके हैं। संसद में भी उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोगों से खूब मिले, तो ये सब आज तभी हो रहा है, जब कारगिल में भारतीय सेना ने जौहर दिखाते हुए पाकिस्तानियों को मार गिराया था और उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन, ये तो वही लोग हैं, जो कारगिल से लेकर बालाकोट तक सबूत ही माँगते रहते हैं।

आमिर ने यूनानी दवा खिलाकर हिंदू महिला से किया बलात्कार, धोखे से कबूलवाया इस्लाम: पुणे से ‘लव जिहाद’ का चौंकाने वाला मामला

जबरन धर्म परिवर्तन और लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। महाराष्ट्र में लोग और कई हिंदू संगठन जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून लागू करने की माँग कर रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र के बीड जिले से लव जिहाद का एक और मामला सामने आया है।

मामला बीड जिले के अंबेजोगाई ( Ambejogai) क्षेत्र का है। जहाँ एक 26 वर्षीय हिंदू लड़की को प्रेम संबंध में फँसाकर, उसे धोखे से इस्लाम कबूल कराया, उसके साथ बलात्कार और मारपीट की गई। उसके बाद उसे पुणे जिले के आमिर तम्बोली से निकाह करने के लिए मजबूर किया गया।

वहीं इस मामले में अंबेजोगाई पुलिस ने आमिर तम्बोली और उसके साथियों नंदिनी बनर्जी, वकील अरशद नेहाल और आसिफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। इन सभी ने मुख्य आरोपित को लड़की का धर्म परिवर्तन कराने में मदद की थी। साथ ही पीड़ित लड़की से ब्लेकमेल कर 6 लाख भी लूटे लिए गए। यूनानी दवाएँ देकर लड़की को नग्न वीडियो कॉल करने के लिए भी मजबूर किया गया।

पुलिस ने मामले में आमिर और नंदिनी को किया गिरफ्तार 

इस मामले में एफआईआर धारा 323 (जानबूझकर से चोट पहुँचाना), 328 (जहर देना ), 34 (सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने में किया गया आपराधिक कृत्य), 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 384 ( जबरन वसूली), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 504 (उकसाने के लिए अपमान करना) और भारतीय दंड संहिता, 1860 की 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज किया गया है। 

पीड़ित लड़की को नौकरी का लालच 

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त एफआईआर की कॉपी के अनुसार, यह सब वर्ष 2021 में तब शुरू हुआ जब अंबेजोगाई की रहने वाली लड़की ने ‘Indeed.com’ नामक एक ऑनलाइन जॉब देने वाले प्लेटफॉर्म पर नौकरी के लिए आवेदन किया। फिर उन्हें रेवरेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नौकरी के लिए इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। लड़की का साक्षात्कार आरोपित आमिर तंबोली द्वारा लिया गया था और बाद में उसे उसकी सहयोगी, सह-आरोपित नंदिनी बनर्जी द्वारा पुणे में नौकरी के बहाने बुला लिया था। 

26 वर्षीय फैशन डिजाइनर लड़की ने एफआईआर में कहा कि इसी नौकरी के दौरान आरोपित आमिर तम्बोली नंदिनी की मदद से पीड़िता के और करीब आया। बातों-बातों में नंदिनी पीड़िता की निजी जानकारी आमिर को देती रही फिर वहाँ से आमिर सीधे पीड़िता के संपर्क में आया। बाद में दिसंबर 2021 में आमिर ने पीड़िता का वर्क फ्रॉम होम रद्द कर उसे पुणे कार्यालय में बुला लिया। 

आरोपित नंदिनी भी मुस्लिम, उसने कबूल लिया था इस्लाम 

पीड़िता के अनुसार, ऑफिस में उसकी मुलाकात के दौरान आमिर ने उसे कुछ नशीला पदार्थ दे दिया था जिससे उसे नींद आने लगी थी और उसका सिर भारी हो गया था। उसके बाद तम्बोली और नंदिनी ने इस्लाम की वाहवाही उसे इस्लाम कबूलने के लिए उकसाने लगीं। उन्होंने उसके सामने हिंदू धर्म को भी अपमानित किया और उसे यह विश्वास दिलाया कि इस्लाम सभी धर्मों में सबसे महान है। इसी समय पीड़िता को बताया गया कि नंदिनी ने भी हिंदू धर्म छोड़ कर इस्लाम कबूल कर लिया है। 

हिन्दू पीड़िता को यह यकीन दिलाया गया इस्लाम में लड़कियाँ सुरक्षित रहती हैं और मुस्लिम महिलाओं के साथ कभी बलात्कार नहीं होता है। उन्होंने मुझे यह भी विश्वास दिलाया गया कि हिंदू महिलाओं के साथ बहुत बलात्कार होता है। पीड़िता ने कहा कि उसे ऐसी कोई जानकारी नहीं थी इसलिए उसके पास उन्हें सुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। पीड़िता ने शिकायत में कहा, “वे स्पष्ट रूप से मुझे इस्लाम कबूल करने के लिए प्रभावित कर रहे थे।”

पीड़िता ने शिकायत में कहा, “आमिर ने मुझसे धर्म के बारे में बात करना शुरू किया और एक दिन उसने मुझे कलमा पढ़ने के लिए दिया। उन्होंने मुझसे इसे याद कर सुनाने को कहा। बाद में उसने मुझे बताया कि कलमा पढ़ने के बाद मैंने इस्लाम कबूल कर लिया है।” इस तरह से धोखे से इस्लाम कबूलवाने की बात भी सामने आई है।

वहीं पीड़िता ने शिकायत में यह भी कहा है कि उसे कुछ यूनानी दवाएँ खिलाकर आमिर उसे नंगे होकर कॉल करने के लिए कहता था। बाद में इन्हीं वीडियो का उपयोग आरोपितों ने लड़की को ब्लैकमेल करने में किया। 

आमिर ने रेप करने से पहले तीन बार ‘कबूल है’ कहलवाया 

पीड़िता ने शिकायत में उल्लेख किया है, “एक दिन ऑफिस टाइम के बाद तम्बोली ने उसके साथ बलात्कार किया। उस दिन रेप से पहले उसने सबसे पहले मुझसे निकाह की बात कही। उन्होंने कहा कि तीन बार ‘कुबूल है’ कहने से हमारी शादी पक्की हो जाएगी। उन्होंने यह कहा और मुझसे यह कहलवाया। बाद में उसने मेरे साथ जबरदस्ती यौन संबंध स्थापित किया।”

निकाह के बाद दिया गया नया नाम ‘ख़दीजा’

आमिर लड़की को मार्च 2022 में अपने घर ले गया और उसे अपनी पहली पत्नी और अपने बच्चों से मिलवाया। जून 2022 में तम्बोली और नंदिनी ने लड़की को उससे निकाह करने के लिए मजबूर किया। निकाह के बाद पीड़ित लड़की को खदीजा नाम दिया गया। उसके कानूनी दस्तावेज़ बदल दिए गए और उसे एक नया मोबाइल सिम कार्ड दिया गया। आरोपित आमिर वकील अरशद नेहाल से बात करने के लिए उसी सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था। जैसा कि शिकायत में बताया गया है, वह कुछ अंतरराष्ट्रीय कॉल भी करता था।

कुछ महीनों के बाद अंबेजोगाई से लड़की के माता-पिता पुणे पहुँचे और उसे वापस आने के लिए कहा। वे उसके रिश्ते और उसके बाद हुए धर्म परिवर्तन से नाखुश थे। हालाँकि, वह आरोपितों के बहकावे में आकर उन्हें यह विश्वास दिला रही थी कि उसने खुद ही अपना धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया है।

फर्जी कबूलनामा

लड़की मई 2023 में, अपने घर अंबेजोगाई गई जहाँ उसके माता-पिता ने उससे इस्लाम छोड़ने और हिंदू धर्म में वापस आने के लिए कहा। लड़की ने यह बात आरोपित तम्बोली को बता दी जिसके बाद उसने उस पर वीडियो बनाने और यह कबूल करने के लिए दबाव डाला कि उसने अब अपना धर्म बदलकर इस्लाम कबूल कर लिया है। पीड़िता को नमाज के लिए भी मजबूर किया गया। 

वहीं नंदिनी की अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल कर पैसे भी ऐंठे गए। आमिर की सहयोगी नंदिनी ने लड़की को उसका एक नग्न वीडियो दिखा कर ब्लैकमेल किया। आमिर और वकील अरशद नेहाल ने उससे पैसे की माँग की थी। ऐसे में लड़की ने डर के मारे बिना किसी से पूछे या बताए आरोपितों को 6 लाख रुपए दे दिए। 

सूत्रों के मुताबिक, इस साल जुलाई, 2023 में लड़की के माता-पिता ने अपनी बेटी को वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन पुणे कोर्ट में लड़की ने अपने माता-पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया था और ब्लेकमेलिंग के दबाव में कहा था कि उसने खुद ही इस्लाम कबूल कर लिया है। हालाँकि, इसी साल 20 अगस्त, 2023 को दर्ज की गई शिकायत में लड़की ने कहा कि उसने डर के मारे और दवाइयों के प्रभाव में पुणे कोर्ट में अपना बयान दिया था। उसे ब्लेकमेल किया गया था।

कहा जाता है जब पीड़िता को दी जाने वाली यूनानी दवाएँ जब ख़त्म हो गईं तो उसे एहसास हुआ और सच्चाई का पता चला कि कैसे तम्बोली ने उसका ब्रेनवॉश किया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया।

पुणे पुलिस कर रही है जाँच 

शिकायत में, लड़की ने यह भी उल्लेख किया है कि आमिर तम्बोली ने उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। आमिर ने पिछले दो वर्षों में कई बार उसके साथ क्रूरतापूर्वक बलात्कार किया। वहीं पुलिस ने शिकायत के बाद आमिर तंबोली, नंदिनी बनर्जी, वकील अरशद नेहाल और आसिफ के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आसिफ पर तंबोली को यूनानी दवाएँ उपलब्ध कराने का मामला है। 

‘बच्ची की निगाहें हर जगह करती हैं पीछा…’: ‘भूतहा’ बताकर पेंटिंग लौटा रहे हैं खरीददार, दुकानदार बोला- शापित है

इंग्लैंड के ईस्ट ससेक्स (East Sussex) के छोटे से शहर सेंट लियोनार्ड्स-ऑन-सी (St Leonards-on-Sea) में एक ‘शापित’ पेंटिंग की चर्चा है। यह पेटिंग एक बच्ची की है, जो लाल पोशाक पहनी हुई है। खास बात यह है कि बच्ची के चेहरे पर एक अलग तरह घबराहट और विवशता है। इस पेंटिंग को खरीदने वाला हर शख्स खुद को परेशान बताकर इसे कुछ दिन बाद लौटा दे रहा है। अब तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस पेंटिंग को किसने बनाया है और पेंटिंग में दिख रही बच्ची कौन है।

शहर की हेस्टिंग्स एडवाइस रिप्रेजेंटेशन सेंटर (HARC) चैरिटी शॉप को किसी अनजान शख्स ने कई अन्य तस्वीरों, फोटो फ्रेम के साथ यह पेंटिंग भी दान में दी थी। इस पेंटिंग को अब शापित (Cursed Painting) बताया जा रहा है। वजह इसे दो लोगों ने खरीदा और दोनों ही बगैर पैसे वापस लिए इसे चैरिटी शॉप को वापस कर गए।

खरीददारों का कहना है कि इसे ले जाने के बाद उनके साथ कुछ भी अच्छा नहीं हुआ। उन्हें लगता है कि ये शापित, भूतिया और खौफनाक है। हालत ये है कि अब शॉप की विडों पर रखी इस पेंटिंग पर ‘वह वापस आ गई है!’, ‘दो बार बेचा और दो बार लौटाया!’, ‘क्या आप बहुत बहादुर हैं?’ नोट लिखकर इसे बिक्री के लिए रखा गया है।

‘पेंटिंग की आँखें घूरती हैं’

मिररयूके के मुताबिक, खुद चैरिटी शॉप के मैनेजर स्टीव ने इस बात की पुष्टि की है कि पेंटिंग की आँखें अजीब तरीके से ‘कमरे के चारों ओर आपका पीछा करती हैं’। उन्होंने खुलासा किया की ये पेंटिंग एक अधेड़ उम्र की शख्स ने शॉप में बहुत सारी पुरानी तस्वीरों और फ्रेमों के साथ दान दी थी।

वो कहते हैं कि उसी वक्त इस पेंटिंग की अजीब क्वालिटी से वो प्रभावित हो गए थे। तब उन्होंने इस पेंटिंग में बच्ची के चेहरे पर उकेरे गए अजीब से मनोभावों को देखकर कहा था, “हे भगवान, उसके चेहरे को देखो।”

मैनेजर स्टीव ही नहीं, बल्कि उन्हें शॉप पर आई एक औरत ने भी बच्ची की इस पेंटिंग को लेकर कुछ ऐसा ही कहा था। उसने कहा था, “क्या यह डरावनी नहीं है?” तब उन्होंने उसे जवाब दिया था कि ‘जी। इसकी आँखें आपका पीछा करती हैं’।

बिक्री के दो दिन बाद ही वापस आई गई पेंटिंग

चैरिटी शॉप ने शुरुआत में ये पेंटिंग एक महिला को 25 पाउंड में बेची गई थी, लेकिन इसकी नई मालकिन दो दिन बाद ही इसे लेकर वापस आ गई। उसने कहा, “मुझे इस तस्वीर से छुटकारा पाना होगा।” उसने कहा कि इसमें एक अजीब तरह की डरावनी आभा है।

मैनेजर स्टीव ने बताया कि इस बार शॉप विडों पर इस पेंटिंग को खरीदारों के लिए छूट के साथ ही एक चेतावनी वासे नोट के साथ बिक्री के लिए रखा गया है। चेतावनी में संभावित खरीददारों को साफ-साफ बताया गया कि शायद ये कलाकृति शापित हो सकती है।

दूसरी खरीददार भी डर कर वापस ले आई

स्टीव की चेतावनी के बावजूद एक दूसरी खरीदार इस पेंटिंग को लेने के लिए आई। शापित होने की चेतावनी के बाद वो 20 पाउंड में बच्ची की इस पेंटिंग को खरीदकर ले गई। हालाँकि, मालकिन जल्द ही शॉप पर बैचेन और घबराकर वापस आई और इसे वापस कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, डरी हुई इस ग्राहक ने मैनेजर स्टीव से कहा कि वह इस शापित चीज़ को दोबारा कभी नहीं देखना चाहेगी। इसके बाद फिर से चैरिटी शॉप की शॉपिंग विंडो में पेंटिंग इस नए चेतावनी नोट ‘वह वापस आ गई है!’, ‘दो बार बेचा और दो बार लौटाया!’, ‘क्या आप बहुत बहादुर हैं?’ रखा गया है।

इंस्टाग्राम पर फँसाया, मेरठ में बुलाया: BSP के पूर्व सांसद शाहिद अख़लाक़ के बेटे दानिश ने लड़की से किया रेप, पीड़िता बोली- और भी हिंदू लड़कियों को फँसा रखा है

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में बसपा के पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के बेटे दानिश पर रेप का आरोप लगा है। दिल्ली की रहने वाली एक हिन्दू लड़की ने शुक्रवार (25 अगस्त 2023) को दानिश के खिलाफ शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित पर लड़की को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को एक लड़की मेरठ के SSP ऑफिस में शिकायत लेकर पहुँची। खुद को दिल्ली की रहने वाली बताते हुए लड़की ने कहा कि कुछ समय पहले उसके इंस्टाग्राम पर दानिश कुरैशी नाम के एक युवक ने मैसेज किया था। थोड़े समय की चैटिंग के बाद दोनों के बीच फोन नंबर की लेन-देन हुई और फिर बातचीत होने लगी। पीड़िता का आरोप है कि दानिश ने खुद को कुँवारा बताया और अपने झाँसे में ले लिया।

दानिश 20 अगस्त को लड़की से मिलने के लिए दिल्ली के हौजखास इलाके में आया। यहाँ उसने खुद को पूर्व सांसद शाहिद अखलाक का बेटा बताया। 2 दिनों के बाद यानी 22 अगस्त को दानिश अख़लाक़ ने लड़की को मेरठ के देहरादून-दिल्ली रोड पर स्थित होटल क्रोम का पता देकर वहाँ मिलने के लिए बुलाया। पीड़िता का कहना है कि होटल में उससे कोई पहचान पत्र नहीं लिया गया। जब वह होटल पहुँची तो मैनेजर ने उसको एक कमरे में भेज दिया।

शिकायत के अनुसार, कुछ देर बाद वहाँ दानिश आया और बातचीत करने लगा। इसी दौरान उसने शराब पीनी शुरू कर दी। शराब पीने के बाद दानिश ने पीड़िता का रेप किया। लड़की रोने लगी तो दानिश ने शादी का वादा करके उसे चुप करा दिया। यहीं नहीं, इसी होटल में आरोपित ने पीड़िता का नहाते हुए वीडियो भी बना लिया। शक होने पर पीड़िता ने दानिश का मोबाइल चेक किया और वीडियो डिलीट कर दिया।

दानिश का मोबाइल चेक करने के दौरान ही पीड़ित युवती को उसके शादीशुदा होने की जानकारी मिली। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि दानिश के फोन की चैटिंग में उसने देखा कि वह कई हिंदू लड़कियों के संपर्क में है। इन सब लड़कियों को वह ऐसे ही बात करके धोखा दे रहा है।

इस घटना से पीड़िता खुद को ठगा महसूस करने लगी। इसके बाद उसने मामले में शिकायत दर्ज करवाई। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। पीड़िता ने मीडिया को दिए गए बयान में यह भी बताया कि उसे धोखा दिया गया है। उसने कहा कि दानिश ने उसे हर सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया है और कॉल भी नहीं उठा रहा है।

शिकायत के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है। हिन्दू संगठनों ने शाहिद अख़लाक़ के बेटे दानिश पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। एक हिन्दू संगठन के पदाधिकारी सचिन सिरोही ने कहा कि शाहिद अख़लाक़ के परिवार का इतिहास साल 1990 से कलंकित रहा है। सचिन का कहना है कि दानिश अख़लाक़ एक बार बंदूक के साथ पकड़ा गया था, जिसे मेरठ पुलिस ने खिलौना बता दिया था।

बताते चलें कि दानिश के अब्बा मोहम्मद शाहिद अख़लाक़ मांस के कारोबारी हैं। वो बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर साल 2004 में सांसद भी रह चुके हैं। शाहिद पर साल 2009 में कमेला (कसाईघर) को लेकर 24 अन्य लोगों के साथ केस भी दर्ज हो चुका है।

अयोध्या में मनेगा जगद्गुरु रामभद्राचार्य का जन्मोत्सव, 14 से 22 जनवरी तक चलेगा अमृत महोत्सव: बोले आचार्य रामचंद्र दास- PM मोदी भी होंगे शामिल

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भव्य राम मंदिर के लोकार्पण के साथ ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य के जन्म का अमृत महोत्सव भी आयोजित होगा। पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्यों की ओर से सूचना देते हुए यह बताया गया कि अमृत महोत्सव का आयोजन 14 से 22 जनवरी तक अयोध्या में होगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 9 दिनों तक आयोजित होने वाले अमृत महोत्सव समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। रामभद्राचार्य के शिष्यों ने बताया कि पीएम मोदी समेत अलग-अलग दिनों में अमृत महोत्सव में शामिल होने वाले खास मेहमानों को औपचारिक तौर पर निमंत्रण भेजा जा चुका है।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि इस अमृत महोत्सव में दुनिया भर के लाखों श्रद्धालुओं की अयोध्या आने की संभावना है। बता दें कि इसी दौरान अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का लोकार्पण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह भी होना है। ऐसे में आचार्य रामचंद्र दास का कहना है कि इस दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को आनंद की दोहरी अनुभूति होगी। उन्हें गुरु और गोविन्द दोनों का लाभ मिल सकेगा। 

मुस्लिम पेश करें मिसाल 

वहीं काशी और मथुरा पर बात करते हुए आचार्य रामचंद्र दास ने कहा है कि काशी में ज्ञानवापी नाम आते ही यह साफ हो जाता है कि यह हिंदुओं की जगह है। इस मामले में अब मुस्लिमों को अपना दावा छोड़ कर मिसाल पेश करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि  एएसआई सर्वे के बाद खुद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उनके मुताबिक मथुरा का विवाद भी गलत है। सभी जानते हैं कि वह जगह भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान है।

आचार्य रामचंद्र दास ने दावा किया कि हमारे गुरु रामभद्राचार्य अयोध्या के राम मंदिर विवाद की तरह मथुरा मामले में भी कोर्ट में सबूत पेश करेंगे। यह ऐसे सबूत होंगे, जिनसे यह साफ हो जाएगा कि वहाँ पहले से मंदिर था और यह वो जगह है जहाँ भगवान श्री कृष्ण का जन्म स्थान है। उन्होंने कहा कि देश में अब धार्मिक स्थलों को लेकर बेवजह के विवाद नहीं खड़े करने चाहिए। क्योंकि, हिंदुओं ने कभी भी मक्का-मदीना पर कोई दावा पेश नहीं किया।

कौन है जगद्गुरु रामभद्राचार्य 

राम मंदिर मामले में कोर्ट में सबूत पेश करने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार में मकर संक्राति के दिन 14 जनवरी, 1950 में हुआ था। जगद्गुरु रामभद्राचार्य 2 महीने की उम्र में आँखों की रोशनी जाने के बाद भी 4 साल की उम्र से ही कविताएँ करने लगे और 8 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने भागवत व रामकथा करनी शुरू कर दी थी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य को भारत सरकार ने उनकी रचनाओं के लिए उन्हें 2015 में पद्मविभूषण से भी सम्मानित किया गया है। 

शरद पवार के ‘अजित हमारे नेता’ बयान से उद्धव की शिवसेना हैरान, कहा- वे भ्रम पैदा कर रहे हैं, हमारे लिए पार्टी छोड़ने वाले गद्दार

शरद पवार ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) में फूट से इनकार करते हुए अजित पवार को अपना नेता बताया है। उनके इस बयान से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) हैरान है। यूबीटी का कहना है कि इससे पार्टी कार्यकर्ता और महाराष्ट्र के लोगों के मन में भ्रम पैदा हो रहा है।

यूबीटी महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी और 26 विपक्षी दलों के गुट I.N.D.I.A. का हिस्सा है। शरद पवार भी इस समूह के प्रमुख नेता है। पवार ने अजित पवार की बगावत को ‘लोकतांत्रिक’ ऐसे समय में बताया है, जब 31 अगस्त से मुंबई में ही I.N.D.I.A. की बैठक होनी है।

शिवसेना (यूबीटी) के एमएलसी और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा है, “इसमें कोई शक नहीं है कि शरद पवार के ऐसे बयान कार्यकर्ताओं और लोगों के मन में भ्रम पैदा कर रहे हैं। अगर वह कह रहे हैं कि अजित पवार उनके नेता हैं, राकांपा में हैं, तो पक्के तौर पर उनके रुख को लेकर भी भ्रम है।”

दानवे ने आगे कहा, “कुछ लोगों ने हमारी पार्टी छोड़ दी और हमें धोखा दिया, हम उन्हें गद्दार कहते हैं। एनसीपी में भी यही हुआ। कुछ लोगों ने पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल रहे। पार्टी छोड़ दी। यह भी विश्वासघात है। वे (एनसीपी) भले ही उन्हें गद्दार न मानें, लेकिन हम उन लोगों को गद्दार ही मानते हैं जिन्होंने सेना छोड़ी।”

साथ ही दानवे ने यह भी उम्मीद जताई कि इस बयान से अघाड़ी में कोई मतभेद या टकराव पैदा नहीं होगा और विपक्षी गठबंधन बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा, “मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि मुद्दा (एनसीपी में विभाजन का) चुनाव आयोग के पास चला गया है और पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संविधान की रक्षा के लिए ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।”

शरद पवार ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा था, “इसमें कोई मतभेद नहीं है कि अजित पवार हमारे नेता हैं। एनसीपी में कोई विभाजन नहीं है। किसी पार्टी में फूट कैसे पड़ती है? ऐसा तब होता है जब राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा समूह पार्टी से अलग हो जाता है, लेकिन आज एनसीपी में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। हाँ, कुछ नेताओं ने अलग रुख अपनाया है। लेकिन इसे फूट नहीं कहा जा सकता। वे लोकतंत्र में ऐसा कर सकते हैं।”

शरद पवार अपनी सांसद बेटी सुप्रिया सुले के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। सुप्रिया ने भी पार्टी में फूट से इनकार करते हुए कहा था कि अजित दादा हमारे नेता हैं। बता दें कि अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी नेताओं का एक धड़ा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन चुका है। 2 जुलाई 2023 को अजित पवार नेमहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ एनसीपी के 8 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। एनसीपी पर कब्जे की चाचा-भतीजे की लड़ाई चुनाव आयोग भी पहुँच चुकी है। दोनों गुटों ने अपने विधायकों के समर्थन के साथ पार्टी के चिन्ह ‘घड़ी’ और नाम ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी’ पर अपना-अपना दावा ठोंक रखा है।

बावजूद इसके एक वर्ग का मानना है कि एनसीपी की लड़ाई फिक्स है। उनका दावा है कि शरद पवार की सहमति से ही अजित ने अलग रास्ता पकड़ा है। दोनों के बीच 12 अगस्त को पुणे में सीक्रेट मीटिंग की खबर मीडिया में आई थी।

इस मीटिंग के बाद एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार और उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले को केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बनने का ऑफर दिया था। इस ऑफर का दावा कॉन्ग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से किया गया था। लेकिन रिपोर्ट में इस नेता की पहचान नहीं बताई गई थी।

रिपोर्ट में अनाम पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया था, “अजीत ने अपने चाचा से कहा था कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री या नीति आयोग उपाध्यक्ष का पद दिया जाएगा। वहीं सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल को क्रमशः केंद्र और राज्य सरकार में शामिल किया जाएगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि शरद पवार ने भतीजे के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही कहा है कि वह किसी भी तरह से भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।

सीमा हैदर ने लगाया ‘जय श्री राम’ का नारा, बेटे फरहान ने हाथ जोड़ पढ़ी हनुमान चालीसा: कहा- जाना चाहती हूँ अयोध्या और मथुरा

पाकिस्तान से आई सीमा हैदर सुर्खियों में बनी हुई है। शुरुआत में तमाम लोगों ने उनके जासूस होने की आशंका जताई थी। हालाँकि, पुलिस की जाँच में अभी तक ऐसी कोई बात निकलकर सामने नहीं आई है। चार बच्चों की माँ इस महिला का सामाजिक और घरेलू ताना-बाना जानने के लिए ऑपइंडिया की टीम नोएडा के रबूपुरा पहुँची। बातचीत के दौरान सीमा हैदर के बेटे फरहान उर्फ राज ने हनुमान चालीसा सुनाई। वहीं, सीमा ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए।

जब ऑपइंडिया की टीम सीमा की ससुराल पहुँची तो पहले से ही कई लोग घर के बाहर खड़े थे। वो सीमा से मिलना चाह रहे थे, लेकिन घरवालों की ओर से उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। सीमा की ससुराल रबूपुरा कस्बे में एक गली के अंदर है। घरवालों के कहने पर जब हम अंदर पहुँचे, तब सीमा हैदर पड़ोस की कुछ महिलाओं से बात कर रही थीं। हम लोगों को देखकर सीमा ने सिर पर पल्लू कर लिया। वो पूरी तरह से भारतीय परिधान में थीं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ से हमारा अभिवादन किया।

इसी दौरान घर के अंदर से सचिन भी आ गए। सीमा हैदर हमें चारपाई पर बैठाकर वो खड़ी रहीं। हमने जब उन्हें बैठने के लिए कहा वो वो अतिथि के सम्मान की बात कहते हुए जमीन पर बैठने लगीं। कई बार कहने के बाद सीमा ने कुर्सी ली। इस दौरान सचिन ने बताया कि भारत आने से पहले उन्होंने नेपाल के एक मंदिर में सीमा से हिन्दू विधि-विधान के अनुसार शादी कर ली है।

बेटे ने सुनाई हनुमान चालीसा तो सीमा ने कहा जय श्रीराम

हम सचिन और सीमा से बात कर ही रहे थे कि अचानक खेलते हुए उनका बेटा फरहान आ गया। फरहान ने हमें नमस्ते किया। सीमा ने बताया कि वो अपने बेटे फरहान को हनुमान चालीसा याद करा रही हैं। उन्होंने फरहान से हनुमान चालीसा सुनाने के लिए भी कहा। फरहान ने हनुमान चालीसा सुनाने से पहले बाकायदा पूजा करने के अंदाज में हाथ जोड़े।

चालीसा के पाठ में फिलहाल कुछ शब्द आगे-पीछे रहे, जिसे फरहान ने जल्द ही सुधार लेने की बात कही। अपने बेटे को हनुमान चालीसा का पाठ करते देख कर सीमा हैदर काफी खुश थीं। पाठ के बाद सीमा ने ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष भी किया। दरअसल, भारत आने के बाद सीमा हैदर ने अपने बेटे फरहान हैदर का नाम बदल दिया है। फरहान अब राज के नाम से जाने जाते हैं।

पति सचिन के साथ अयोध्या दर्शन की इच्छा

सीमा ने हमें बताया कि कानूनी कार्रवाई और भागदौड़ के चलते वो कहीं बाहर नहीं निकल पा रही हैं। उन्होंने खुद को भगवान राम का भक्त बताया और सचिन के साथ अयोध्या घूमने की इच्छा जताई। सीमा हैदर ने बताया कि वो अभी तक मथुरा में भगवान कृष्ण का भी दर्शन नहीं कर पाई हैं। गिरफ्तारी के समय उन्हें मथुरा मार्ग से पुलिस ने पकड़ लिया था। सचिन ने सीमा की इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें जल्द ही देश के तमाम धर्मस्थलों के दर्शन करवाने का भरोसा दिया।

हमसे बातचीत के दौरान सीमा हैदर ने यह भी कहा कि भारत आने के लिए वह पिछले एक साल से कोशिश कर रही थीं, लेकिन कोई-न-कोई अड़चन आ जाती थी। सीमा ने हमसे नेपाल की सीमा से भारत में इंट्री का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वहाँ किसी भी प्रकार की कोई रोक-टोक नहीं थी। सीमा हैदर ने पाकिस्तान में हिन्दुओं के हालात और वहाँ कट्टरपंथियों द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपोगेंडा का भी जिक्र किया। इन बातों को हम अपनी अगली खबर में बताएँगे।