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PM मोदी, राम मंदिर, UCC, हिंदुत्व… सर्वे में जनता ने बताया 2024 में क्यों देंगे BJP को वोट, मुकाबले में भी नहीं I.N.D.I.A.

साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों विपक्षी दलों का गठबंधन I.N.D.I.A. सत्ताधारी गठबंधन NDA से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। इंडिया टुडे-सीवोटर पोल में लोगों ने विपक्षी दलों के गठबंधन को बुरी तरह से नकार दिया है। एजेंसी ने देश की सभी 543 लोकसभा सीटों पर सर्वे करके जनता का मूड जानने की कोशिश की। इस सर्वे में 25,951 लोगों को शामिल किया गया।

टक्कर से ही बाहर दिख रहा विपक्ष का गठबंधन

इस सर्वे में शामिल 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो इस विषय पर कुछ कह नहीं सकते हैं, तो महज 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि शायद ये गठबंधन बाजी मार ले जाए। हालाँकि, 54 प्रतिशत लोगों के सामने 33 प्रतिशत के आँकड़े में इतना अंतर है कि कोई भी सामान्य आदमी जान सकता है कि I.N.D.I.A. गठबंधन भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को हराना तो दूर, काँटे का टक्कर तक नहीं दे पा रहा है।

साभार: इंडिया टुडे

वहीं, अगर 13 प्रतिशत उन लोगों को भी इसमें जोड़ दें, जो स्विंग हो सकते हैं और उन्हें लगता है कि एनडीए को विपक्षी गठबंधन हरा नहीं सकता, तो हराने वाले आँकड़े 33 प्रतिशत के मुकाबले दोगुने से भी अधिक होकर 67 प्रतिशत का हो जाता है।

एनडीए से मुकाबले के लिए खड़ा किया गया I.N.D.I.A. गठबंधन

बता दें कि करीब एक माह पहले बेंगलुरु में कॉन्ग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों ने एक नया गठबंधन बनाया था। इस गठबंधन को I.N.D.I.A. (Indian National Developmental Inclusive Alliance) नाम दिया गया। इस गठबंधन को भाजपा की अगुवाई वाले NDA (National Democratic Alliance) से मुकाबले के लिए खड़ा किया है, जो पिछले दो लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करती रही है।

क्या वोटरों को आकर्षित कर पाएगा I.N.D.I.A. गठबंधन?

साभार : इंडिया टुडे

इसी सर्वे में पूछा गया था कि क्या ये गठबंधन वोटरों को आकर्षित कर पाएगा? इसके जवाब में 30 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ऐसा संभव ही नहीं है। वहीं, 18 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो कुछ कह नहीं सकते। महज 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ये गठबंधन वोटरों को आकर्षित कर सकता है। इसके अलावा 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो इस सवाल का जवाब ही नहीं देना चाहते।

क्यों करेगी जनता NDA को वोट

सर्वे में साफ तौर पर लोगों ने बताया कि वे भाजपा के नेतृत्व वाली NDA गठबंधन को क्यों वोट देंगे। सर्वे में शामिल 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की पीएम नरेंद्र मोदी की गारंटी को लेकर वोट करेंगे। वहीं, 17 प्रतिशत लोगों ने राम मंदिर को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए वोट की वजह बताई।

वहीं, 12 प्रतिशत लोगों ने समान नागरिक संहिता- UCC को लागू करने को अहम मुद्दा माना है और इसके लिए भाजपा को वोट देने की बात कही। 44 प्रतिशत लोगों ने NDA को वोट देने का सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया। वहीं, 22 प्रतिशत लोगों ने विकास को बड़ा मुद्दा बताया। इसी तरह 14 प्रतिशत लोगों ने भाजपा की हिंदुत्ववादी छवि को वोट देने का सबसे बड़ा कारण बताया। 

I.N.D.I.A को किसे करना चाहिए लीड, लोगों ने बताया

सर्वे में विरोधी गठबंधन I.N.D.I.A का नेतृत्व किसे करना चाहिए, इसको लेकर भी सवाल किए गए हैं। इसमें 24 प्रतिशत लोगों ने कहा कि I.N.D.I.A गठबंधन का नेतृत्व राहुल गाँधी को करना चाहिए। वहीं, 15 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसका नेतृत्व पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को करना चाहिए। इतने ही लोगों प्रतिशत लोगों ने अरविंद केजरीवाल को लेकर भी नेतृत्व की बात कही।

वहीं, 33 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ‘भारत जोड़ों यात्रा’ करने के बावजूद राहुल गाँधी की छवि में कोई परिवर्तन नहीं आया है। वहीं, 13 प्रतिशत लोगों ने कहा कि यात्रा के बाद उनकी स्थिति और खराब हो गई है। वहीं, विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गाँधी को 27 प्रतिशत लोगों ने खराब बताया।

‘काला नमक चाट जाऊँगा’: प्रियंका चोपड़ा और अमीषा पटेल के लिए पाकिस्तानी यूट्यूबर के पॉडकास्ट में गंदी बातें, नेटिजंस बोले- दो कौड़ी के…

पाकिस्तानी एक्टर मोअम्मर राणा (Moammar Rana) और मशहूर यूट्यूबर नादिर अली एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और अमीषा पटेल पर भद्दे कॉमेंट्स किए हैं। दोनों ने पॉडकॉस्ट में हुई बातचीत के दौरान दोनों भारतीय अभिनेत्रियों के शरीर और उनकी शक्ल को लेकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है।

इसमें एक्टर राणा नादिर से कह रहे हैं कि पहले उन्हें प्रियंका पर क्रश था, लेकिन उन्हें बगैर मेकअप के देखने पर उनका वो क्रश खत्म हो गया। इसके जवाब में नादिर ने उन्हें अमीषा पटेल के शरीर को लेकर भद्दी बात कही और इसके बाद दोनों हँसने लगे। दोनों को ऐसा करने पर सोशल मीडिया पर लोगों का खासा गुस्सा झेलना पड़ रहा है।

भारत में है भयानक दिखने वाले एक्टर्स

पॉडकॉस्ट में हुई बातचीत के दौरान दोनों फिल्मों पर बाते कर रहे थे। इसी दौरान नादिर ने एक्टर राना से पूछा कि एक ऐसी फिल्मी हस्ती का नाम बताओ जो बगैर मेकअप सबसे भयानक दिखती हो। इसके जवाब में राणा ने कहा कि पाकिस्तान फिल्म इंडस्ट्री में ऐसी कोई एक्ट्रेस नहीं है, लेकिन भारत में है।

इसके बाद उन्होंने एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा पास में प्रियंका चोपड़ा बैठी थी, लेकिन उन्होंने उसे पहचाना नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं और सलमान बैठे हुए थे, एक बंदी आकर वहाँ बैठ गई और दोनों आपस में बात करने लगें। तो मैंने कहा मैं कहाँ जाऊँ, मैं आगे-पीछे होता रहा, थोड़ी देर बाद वो उठकर चली गई, मैंने पूछा कौन थी ये, तो वो कहता तूने नहीं पहचाना, प्रियंका चोपड़ा बैठी हुई थी तेरे साथ।”

इस बीच नादिर कॉमेंट करते हैं कि ‘मेड’ थी क्या? तब एक्टर राणा कहते हैं, “मेरा जो क्रश वगैरह जो भी था प्रियंका को लेकर वो खत्म हो गया। मैंने कहा भाड़ में जाओ साले।” इस बीच फिर से नादिर उन्हें बीच में टोकते हुए कहते हैं, “आपने कहा काला नमक चाट लूँ।” इसके बाद एक्टर राणा कहते हैं कि जो वास्तव में खूबसूरत हैं वो अमीषा पटेल हैं। शी इज वेरी ब्युटीफुल (वो बहुत खूबसूरत हैं)।

इसके बाद नादिर फिर पूछते हैं किस हिसाब से, चेहरा या क्या? तो राणा उन्हें जवाब देते हैं कि चेहरे से अमीषा पटेल खूबसूरत हैं। फिर से एक बार नादिर उन्हें टोकते हुए गुनगुनाते हैं ‘चेहरा क्या देखते हो, दिल में उतर कर देखो न ‘ इस पर राणा हँसते हुए अजीब से अंदाज में कहते हैं कि अब सारा कुछ बोल दूँ।

इसके बाद नादिर फिर उनसे कहता है कि कुछ लोग होते हैं जो चेहरा नहीं देखते हैं, वो फिजिक और बोलने का स्टाइल और हाथ से बस्ट की तरफ इशारा करते हैं। इस पर एक्टर राना कहते हैं वो फिट भी है और खूबसूरत भी है।

हो रहे हैं दोनों ट्रोल

इस पॉडकास्ट क्लिप्स सोशल मीडिया पर आते ही ये दोनों पाकिस्तानियों को सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल किया जा रहा है। इसपर एक यूजर ने कॉमेंट करते हुए लिखा, “औकात दो कौड़ी की नहीं और मजाक उड़ा रहे हैं ग्लोबल स्टार का मिस वर्ल्ड प्रियंका का।”

वहीं एक अन्य ने लिखा, “क्या आप जानते हैं प्रियंका साल 2000 में मिस वर्ल्ड रह चुकी हैं।”

दोनों पाकिस्तानियों को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। लोग उन्हें उनकी औकात बताने से नहीं चूक रहे हैं।

‘महिला को कमर तक दफन करो, फिर पत्थर फेंक कर मार डालो’: ब्रिटिश इमाम का Video, नफरत कम करने के लिए मस्जिद को सरकार ने दिए थे ₹24 करोड़

सोशल मीडिया पर मंगलवार (22 अगस्त 2023) से एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शेख ज़काउल्लाह सलीम नाम का इमाम लोगों के सामने तकरीर (भाषण) पेश कर रहा है। इस लेक्चर में इमाम किसी महिला की पत्थर मार कर हत्या करना सही बता रहा है। साथ ही इमाम ऐसी सजा का तरीका भी सिखा रहा है। यह वायरल वीडियो ब्रिटेन के बर्मिंघम में मौजूद ग्रीन लेन मस्जिद का बताया गया है। इसी मस्जिद को हाल ही में ब्रिटिश सरकार ने युवाओं की मदद के नाम पर £2.2 मिलियन (23.24 करोड़ रुपए) का अनुदान दिया था।

वायरल वीडियो में इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम ने लोगों से बताया कि पत्थर मारने से पहले महिला को कमर तक जमीन में दफना देना चाहिए। आधा शरीर जमीन में गाड़ने के पीछे इमाम ने इस्लाम के ‘शरिया’ कानून का हवाला दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) पर यह वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स का कहना कि क्या सच में शेख ज़काउल्लाह सलीम ऐसी सजा का समर्थन करता है, क्योंकि इसी इमाम का एक और वीडियो भी वायरल है जिसमें पत्थर मार कर की जाने वाली हत्या को ‘ज़िना’ (इस्लाम के मुताबिक अवैध संबंध) की सजा बता रहे हैं।

इस वीडियो में शेख ज़काउल्लाह सलीम ने इस्लामी शरिया का हवाला देते हुए कहा है कि जिना करने वाले व्यक्ति को शरिया के मुताबिक सजा दी जाएगी। इमाम ने बताया कि ज़िना करने वाले विवाहित व्यभिचारी पुरुष या महिला के लिए यही सज़ा है कि उन्हें पत्थर मार-मार कर मार डाला जाए। इमाम ने इस्लामी कानून के ही हवाले से अविवाहितों के लिए जिना पर मुस्लिमों की सभा में 100 कोड़े मारे जाने का कानून बताया।

इमाम ने आगे कहा, “जैसा कि अल्लाह ने सूरह अन-नूर की शुरुआत में कहा है कि जो पुरुष और महिला ज़िना करते हैं उन्हें मारो। जब अल्लाह के मजहब की बात आती है तो आपको किसी भी प्रकार की दया या सहानुभूति नहीं दिखानी चाहिए।” इमाम ने अपनी मज़हबी किताब के हवाले से बाकी लोगों को भी ऐसी सजा का गवाह बनने की अपील की।

वीडियो में दिख रहे इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम का परिचय बर्मिंघम स्थित ग्रीन लेन मस्जिद की वेबसाइट पर दर्ज है। वेबसाइट में इमाम को कारी बताते हुए मस्जिद में शिक्षा का प्रमुख बताया गया है। मज़हबी पढ़ाई के साथ इमाम ने काफी कम उम्र में कुरान रट लिया था। इमाम शेख जाकउल्लाह ने कई मौकों पर तरावीह की नमाज का नेतृत्व भी किया था। इसी के साथ उन्होंने हाल ही में मार्कफील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन से इस्लामिक एजुकेशन में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की है।

वायरल हुए वीडियो में दिख रही ग्रीन लेन मस्जिद के मिशन स्टेटमेंट में ‘इंस्पायर एजुकेट सर्व’ लिखा हुआ है। ख़ास बात ये है कि इस मस्जिद को जुलाई 2023 में ब्रिटिश सरकार ने £2.2 मिलियन (23.24 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद दी थी। यह मदद धार्मिक समुदायों को घृणा अपराधों और आतंकवादी हमलों से रोकने में मदद के नाम पर दी गई थी। हालाँकि, दिए गए पैसे के सदुपयोग के विपरीत वायरल वीडियो में इमाम शेख ज़काउल्लाह सलीम महिला को पत्थर मारकर हत्या करने के लिए उकसा रहा है।

40 साल में ग्रीस पहुँचने वाले पहले प्रधानमंत्री बने मोदी, जानिए उनकी ये यात्रा क्यों है बेहद खास; क्या यूनान बनेगा यूरोप का एंट्री प्वॉइंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स (BRICS) की बैठक में शामिल होने के बाद अब ग्रीस पहुँचे हैं। पिछले 40 सालों में ग्रीस पहुँचने वाले वो पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। आखिरी बार सन 1983 में इंदिरा गाँधी ने बतौर प्रधानमंत्री ग्रीस की यात्रा की थी। ग्रीस पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ की तस्वीरें साझा की हैं।

भारतीय मूल के लोगों से संवाद करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रीस में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद करेंगे। इसके अलावा, वो ग्रीस के प्रधानमंत्री और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करेंगे। इसके बाद व्यापारिक समूह के साथ भी वे बातचीत करेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री की इस ग्रीस यात्रा की पृष्ठभूमि विदेश मंत्री एस जयशंकर की 2021 में हुई ग्रीस की यात्रा के बाद तैयार की, जो बेहद अहम है। आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रीस यात्रा की क्या रणनीति है?

यूरोप के लिए भारत का एंट्री प्वॉइंट बनेगा ग्रीस?

भारत यूरोपीय देश ग्रीस के साथ अपने संबंधों को प्रगाढ़ करना चाहता है। वहीं, ग्रीस चाहता है कि भारत उसके एयरपोर्ट्स और पोर्ट्स का विस्तार करे। भारत भी उन्हें टर्मिनल के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। भारत की कोशिश है कि वो ग्रीस से चीनी प्रभाव को कम करे और अपने सामान की सप्लाई पूरे यूरोप में बढ़ाने के लिए ग्रीस यानि यूनान को बतौर एंट्री प्वॉइंट इस्तेमाल करें।

इसे इस बात से समझा जा सकता है कि भारत अब ईरान के चाबहार पोर्ट की उपयोगिता को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं रह गया है। चूँकि भारत की कोशिश थी कि चाबहार से आगे आर्मीनिया होकर भारत यूरोप के बाजार तक पहुँच बनाए, लेकिन आर्मीनिया और अजरबैजान में नागोर्नो-कराबाख को लेकर संघर्ष की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

ईरान-तुर्की की काट बनेगा ग्रीस!

वहीं, ईरान की चीन से बढ़ती नजदीकी की भी भारत काट चाहता है। इस समय अमेरिका से दुश्मनी के चलते ईरान-चीन की करीबी बढ़ी है। चीन ने ईरान और सऊदी अरब जैसे दो कट्टर दुश्मनों के बीच समझौता कर दिया है। ऐसे में ईरान की चीन से नजदीकी भारत को परेशान कर रही है। इसके अलावा, ग्रीस का इस्तेमाल कर वो पाकिस्तान के खास दोस्त और ग्रीस के कट्टर दुश्मन तुर्की को भी ‘चेक’ करके रख सकता है। इसके लिए ग्रीस और भारत रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हैं। ऐसे में भारत को दोहरा फायदा हो सकता है।

भारत-ग्रीस के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव

ग्रीस का पुराना नाम यूनान है। यूनान यानि ग्रीस से भारत के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। सिकंदर की सेना को टक्कर देने वाले राजा पुरु उर्फ पोरस ने सिंधु नदी के तट पर उसे रोक दिया तो मगध के महानंद वंश की ताकत को जानकर वो सिंधु के पार कभी आया ही नहीं। बाद में मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर के सेनापति रहे सेल्यूकस को युद्ध में हराया और उनकी बेटी से विवाह किया। तब से भारत और यूनान के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे हुए।

गुवाहाटी हाई कोर्ट में होगी मणिपुर हिंसा मामलों की सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, आरोपितों से लेकर गवाह तक हो सकेंगे ऑनलाइन पेश

मणिपुर हिंसा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब गुवाहाटी हाई कोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) को मणिपुर में अलग-अलग जगह हुई हिंसा को लेकर सर्वोच्च अदालत में दाखिल सभी याचिकाओं के निवारण को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं। मणिपुर हिंसा से जुड़े सीबीआई जाँच वाले केस के ट्रायल की सुनवाई गुवाहाटी हाईकोर्ट में होगी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह सीबीआई को जाँच के लिए सौंपे गए 27 मामलों के लिए एक या उससे अधिक स्पेशल जजों की नियुक्ति करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन न्यायाधीशों को नामित करेंगे जो मणिपुर में बोली जाने वाली एक या अधिक भाषाओं से परिचित हों। यह निर्देश मणिपुर की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, जेबी पादरीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने जारी किया। 

दरअसल, मणिपुर के कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी कि असम या मिजोरम जैसे राज्यों में इन मामलों की सुनवाई ना की जाए क्योंकि इससे कई दिक्कतें पैदा होंगी। इसी को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सुरक्षा को देखते हुए अब आरोपितों, गवाहों की पेशी या रिमांड से जुड़ी गतिविधियाँ ऑनलाइन की जा सकेगी, ताकि इनपर कोई खतरा पैदा ना हो। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनिश्चित किया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि के लिए मणिपुर में उचित इंटरनेट सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि उसके निर्देश उन लोगों को नहीं रोकेंगे जो गुवाहाटी में शारीरिक रूप से उपस्थित होना चाहते हैं।

मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि घाटियों और पहाड़ियों में पीड़ित हुए हैं। जो लोग घाटियों में पीड़ित थे, उनके लिए पहाड़ियों की यात्रा करना और दूसरी तरफ जाना मुश्किल होगा। हम इसमें नहीं जा सकते कि किसे अधिक नुकसान हुआ, दोनों समुदायों में पीड़ित हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही कहा है कि कोई भी न्यायिक हिरासत मणिपुर में ही दी जानी चाहिए। साथ ही CRPC 164 के तहत कोई भी बयान लोकल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराना होगा। मणिपुर के मौजूदा  हालात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में ऑनलाइन प्रक्रिया को आगे बढ़ने को कहा है। 

गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई के बाद से ही हिंसा भड़क गई थी, जिसमें अभी तक 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं राज्य में हिंसा की वजह से हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और अलग-अलग हिस्सों में अभी भी हिंसा की चिंगारी भड़की है। बता दें कि मणिपुर में यह विवाद मैतइ और कुकी समुदाय के बीच आरक्षण के मसले को लेकर हुआ था, राज्य की हाईकोर्ट ने मैतइ समुदाय के लिए आरक्षण देने पर विचार करने को कहा था जिसके बाद माहौल बिगड़ गया था। 

जरा थमिए, कहीं नहीं जा रहा रेनॉल्ड्स 045: सचिन तेंदुलकर के लिए था कामयाबी का रंग, हमारी पीढ़ी के लिए है बचपन का प्यार

क्या आपको अपने बचपन का पढ़ाई-लिखाई का वह दौर याद है, जब हम सबका एक पंसदीदा पेन हुआ करता था? याद है दोस्तों के बीच अपनी पेन को लेकर शेखी बघारना? अपने हाथों में लेकर दोस्तों को बताना कि फलाँ कंपनी का है, इतने का है… और भी न जाने क्या-क्या?

बचपन की कलम वाली स्मृतियाँ लोगों के मन से लेकर सोशल मीडिया तक तब अचानक प्रस्फुटित होने लगीं, जब यह खबर आई कि रेनॉल्ड्स 045 फाइन कार्बर बॉल पेन (Reynolds 045 Fine carbure ball pen) अब बंद होने जा रहा है। वैसे इस पेन की बाजार में आमाद पिछले काफी समय से कम है। आसानी से अब मिलती नहीं। तो लोगों ने भी इस खबर को सत्य ही मान लिया। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। रेनॉल्ड्स ने बयान जारी करने 045 बॉल पेन को बंद किए जाने की खबरों को खारिज किया है।

इस पेन पर 045 इसलिए लिखा होता था क्योंकि अमेरिकी कंपनी ने इसे 1945 में शुरू किया था। भले आज की पीढ़ी के लिए 045 बॉल पेन जाना-पहचाना नाम न हो, लेकिन रेनॉल्ड्स का बयान आने से पहले हमारी पी​ढ़ी (जिनका बचपन 80-90 के दशक में बीता है) के लोगों को वह बचपन याद आ गया, जिसके पिटारे में चेलपार्क इंक, टैंक वाली कलम और भी बहुत कुछ सहेजा हुआ है। उस स्याही, दवात वाली कलम के दौर में रेनॉल्ड्स 045 बॉल पेन का आना जैसे एक सुखद एहसास था। सस्ता किफायती और लिखने को आसान कर देने वाला रेनॉल्ड्स पेन उन दिनों हर दिल अजीज हो चला था।

ट्यूशन हो, क्लास हो या फिर किसी को गिफ्ट देना हो तो सफेद रंग पर नीली कैप वाला महज 5 रुपए का ये पेन बेहद खास होता था। अमेरिकी रेनॉल्ड्स इंटरनेशनल कंपनी का बनाया यह पेन भारत के एजुकेशन सिस्टम में ऐसा रचा-बसा की यहीं का होकर रह गया।

चेलपार्क की स्याही की तरह ही अब रेनॉल्ड 045 बॉल पेन का इस्तेमाल सीमित होता जा रहा है। कलम कहें या पेन ये हमारी वर्ड, डॉक्स और पीडीएफ की दुनिया में धीरे-धीरे दम तोड़ता जा रहा है। अभी भी एक कसक सी होती है ये सुनते हुए कि बाजार में रेनॉल्ड्स पेन आसानी से नहीं मिलते। भले ही इस दौर के टेबलेट, मोबाइल फोन वाले बच्चे रेनॉल्ड्स को न जाने, लेकिन हमारे जैसे 80 के दशक के बच्चों में इसका क्रेज अभी भी बना हुआ है।

भारत में 1980 से लेकर 2010 तक हर स्टूडेंट का अजीज रहा रेनॉल्ड्स पेन अमेरिकी कंपनी का था, लेकिन इसकी सरलता हम जैसे बच्चों को भा गई थी और ‘045’ धीरे-धीरे भारत में आइकन बन गया। ये पेन दशकों तक भारतीय शिक्षा और नौकरी प्रणाली का हिस्सा रहा।

आपके जेहन में भी शायद साल 2006 में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का वो एड अभी घूम रहा हो जिसमें वो कहते हैं बल्यू और व्हाइट मेरा रेनॉल्ड्स 045 कामयाबी का रंग दुनिया में। तब महान बल्लेबाज रेनॉल्ड्स के ब्रांड एंबेसडर बने थे।

उस वक्त पेन की दुनिया में अन्य पेन का इस्तेमाल करना मुश्किल लगता था, भले ही वो बहुत महँगे ही क्यों न हो, क्योंकि वे लगातार लीक करते रहते थे, जिससे जेब और स्कूल बैग पर नीले धब्बे लग जाया करते थे, और कभी-कभी तो स्कूल यूनिफॉर्म पर भी ये अपनी अमिट छाप छोड़ देते थे। मशहूर महँगे पार्कर, पायलट और मित्सुबिशी जैसे पेन भारतीय शिक्षा प्रणाली का बोझ नहीं झेल पाते थे।

भारतीय शिक्षा प्रणाली में लिखने की अनोखी ज़रूरतें हैं। आपको हर दिन, हर वक्त लिखना होता है। आपको क्लास नोट्स, होमवर्क, असाइनमेंट और एग्जाम में लिखना होता है। इसके अलावा लेटर, एप्लीकेशन और डायरियों के साथ ही सजा के तौर पर लिखने के लिए दिया गया सुलेख हो तो कहने ही क्या! ऐसे में रेनॉल्ड्स पेन बगैर स्याही फैलाए आपको खूबसूरत तरीके से लिखने की सुविधा देता था।

भारतीय शिक्षा प्रणाली की मुश्किल लिखावट की जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य ब्रांडों के पास एक या दो पेन थे। लेकिन रेनॉल्ड्स के पास पूरा बेड़ा था। इसमें 045 बेहद खास था। ये सचिन तेंदुलकर पेन कहा जाता था। इसकी रिफ़िल कभी लीक नहीं हुई और स्याही कभी फैली नहीं।

हल्का होने की वजह से इसे ‘रबर-बैंड रॉकेट प्रोपेलर’ के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है तो इसके कैप का इस्तेमाल ‘कैप-फाइट’ के लिए किया जा सकता है। ‘देशभक्त छात्र’ पेन पर लिखे अक्षरों को मिटाकर ‘इंडिया’ लिखवा लेते थे। इस पेन के असली पारखी ही जान सकते हैं कि जब इस पेन की बैंगनी, हरे और भूरे रंगों की सिरीज आई तो कितनी खुशी हुई थी।

फिर जेटर पेन आया जिसका इस्तेमाल अक्सर टीचर किया करते थे। ये जोर की ‘क्लिक-क्लैक’ आवाज करता था। इसका ट्राइमैक्स एग्जाम के लिए चैंपियन पेन था। हो सकता है कि पेन ने आपको सबसे अच्छे नंबर लाने में मदद न की हो, लेकिन इसने निश्चित रूप से बगैर किसी झंझट के आपको एग्जाम जल्दी खत्म करने और जल्दी बाहर निकलने में मदद की होगी। फिर रेसर जेल पेन आया जो लिखने और डूडलिंग दोनों के लिए सबसे आसान जेल पेन था। यह ट्रिपी डिजाइनों के साथ भी आया।

लेकिन अब आम तौर पर वर्ड, डॉक्स और पीडीएफ़ की दुनिया में पेन का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। अब दुकानदार कहते हैं कि रेनॉल्ड्स पेन बाज़ार में मौजूद नहीं हैं। रेनॉल्ड्स के कुछ पुराने पेन अमेज़न पर हैं। आज के बच्चे जब रेनॉल्ड्स वर्ड पढ़ेंगे तो शायद एक्टर रयान के बारे में सोचेंगे, लेकिन हमारी उम्र के लोगों के लिए रेनॉल्ड्स हमेशा बचपन का दोस्त ही रहेगा।

‘ऑफिस में सबके सामने जाँघों पर खींच कर बैठा रहा था’ – 2018 से ही प्रेमोदय खाखा दिखा रहा था वहशी रवैया, हाईकोर्ट के आदेश को अनसुना किया AAP सरकार ने

दोस्त की नाबालिग बेटी का रेप और गर्भपात कराने के आरोपित दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निलंबित डिप्टी डायरेक्टर प्रेमोदय खाखा के बारे में नए खुलासे हुए हैं। इस घटना से पहले साल 2018 से 2022 के बीच प्रेमोदय पर 4 महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इन सभी आरोपों में से 2 मामले फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं। एक पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बाद उसे प्रमोदय की तरफ से धमकियाँ भी दी गईं थीं। दिल्ली सरकार पर भी उस समय पीड़िताओं के बजाय खाखा का पक्ष लेने का आरोप है।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, खाखा के खिलाफ यौन शोषण की ये शिकायतें किंग्सवे कैम्प स्थित सेवा कुटीर में चल रही मेंटल हेल्थ यूनिट की 4 महिलाओं ने दर्ज कराई थीं। उस समय खाखा यहाँ सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात थे। शिकायतकर्ता महिलाएँ यहाँ एक NGO के माध्यम से कॉनट्रैक्ट पर कार्यरत थीं। इसमें 2 पीड़िताएँ काउंसलर, 1 मनोवैज्ञानिक और 1 लीगल सेल में कार्यरत थीं। इन शिकायतों के बारे में खाखा के वकील उमाशंकर गौतम को भी कुछ नहीं पता था। नए मामले सामने आने पर उन्होंने हैरानी जताई है।

इन 4 शिकायतों में से 2 में WCD की 5 सदस्यीय आंतरिक समिति (IC) ने आरोप साबित न होना बताकर खाखा को क्लीन चिट दे दी थी। दोनों विभागीय क्लीन चिट को पीड़िताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इनमें से एक मामले में WCD ने 5 फरवरी 2022 को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया। इसकी अगली सुनवाई 26 सितंबर 2023 को है। दूसरे मामले में विभाग ने 30 जून 2023 को अदालत में हलफनामा दायर किया, जिसकी अगली सुनवाई 30 नवंबर 2023 को तय की गई है।

खाखा पर आरोप लगाने वाली तीसरी पीड़िता ने भी जून 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालाँकि, वहाँ से उन्हें सक्षम अधिकारी के पास जाने के निर्देश मिले थे। अभी यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस निर्देश के बाद पीड़िता ने WCD की आंतरिक कमेटी को सम्पर्क किया था या नहीं। चौथी शिकायत को गुमनाम बताते हुए WCD के सतर्कता विभाग ने उसमें लगे आरोपों को विचार या कार्रवाई योग्य नहीं माना था।

पहली शिकायत के मुताबिक, 1 दिसंबर 2018 से 7 अप्रैल 2019 के बीच खाखा ने पीड़िता से कई बार दुर्व्यवहार के साथ अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। खाखा ने महिला से कहा था, “अपना फिगर इतना मेंटेन कैसे रखती हो? क्या दूसरे का कपड़ा पहन कर आती हो कि कुछ पता नहीं चलता?” हिंदुस्तान टाइम्स का कहना है कि पीड़िता ने उसे बताया कि खाखा ने शारीरिक संबंध बनाने के लिए उस पर बार-बार दबाव बनाया। पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपित ने उसे सबके आगे अपनी गोद में खींचने की कोशिश की थी।

शिकायतकर्ता महिला के मुताबिक, जब हालात बर्दाश्त से बाहर हो गए तब उसने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और खाखा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद खाखा पीड़िता को धमकाने लगा। हालाँकि, पीड़िता ने न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखने का एलान किया है। दूसरी और तीसरी पीड़िताओं ने HT मीडिया को बताया कि रिमांड होम और सेवा कुटीर में खाखा ने आतंक मचा रखा था। दूसरी शिकायतकर्ता के मुताबिक, महिलाओं को धक्का देना और उनको पकड़ लेना खाखा के लिए आम बात थी। खाखा पर महिलाओं को खेलने वाला सामान कहने का भी आरोप है।

दूसरी पीड़िता के मुताबिक, एक बार शाम को ऑफिस में खाखा ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ पिलाया। इससे उसे चक्कर आ गया और हालात का फायदा उठाकर खाखा ने महिला को पकड़ना और बदनियती से छूना चाहा। महिला जैसे-तैसे बचकर भाग पाई। इस घटना के बाद पीड़िता कभी खाखा के पास अकेले नहीं गई। वहीं, तीसरी शिकायतकर्ता का आरोप है कि खाखा महिला स्टाफ को फूल और चॉकलेट देकर लुभाने की कोशिश करता था। पीड़िता के मुताबिक, महिलाओं को अकेले में देखकर खाखा कहता था, “मुझसे क्या डरना। मैंने तो नसबंदी करा ली है।” HT मीडिया के मुताबिक, दिल्ली सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री कैलाश गहलोत ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से कई पत्र, दिल्ली का WCD सोया रहा

बताते चलें कि 23 फरवरी 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा WCD विभाग को ‘चाइल्ड सर्वाइवर इंडिया’ के अध्यक्ष अनिल कुमार कालिया की शिकायत पर एक पत्र भेजा गया था। पत्र में लिखा गया है कि जवाब माँगे जाने के बावजूद विभाग ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस पत्र में दिल्ली हाईकोर्ट के जॉइंट रजिस्ट्रार ने दिल्ली सरकार के सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को लिखा कि 5 जुलाई 2019 को पत्र भेजे जाने और बाद में रिमांडर भेजने के बावजूद कोई उत्तर नहीं दिया गया।

इसी तरह, 16 मई 2019 को भेजी गई एक चिट्ठी में भी प्रेमोदय खाखा के खिलाफ फिर से जाँच शुरू करने के लिए कहा गया था। ये पत्र भी दिल्ली हाईकोर्ट के ‘जुवेनाइल जस्टिस सेक्रेटेरिएट’ द्वारा भेजा गया था। साथ ही अब तक जो जाँच हुई उसकी रिपोर्ट माँगी गई थी। इससे ये पता चलता है कि बार-बार पत्र भेजे जाने के बावजूद विभाग इस मामले को लेकर गंभीर नहीं था। खाखा के खिलाफ इतनी शिकायतें आने के बावजूद मंत्री ने उसे अपना OSD बताया। आरोप है कि उसे डिप्टी डायरेक्टर बनाए जाने के लिए भी वरिष्ठों की अनदेखी की गई।

मुंबई बैठक से पहले शरद पवार ने I.N.D.I.A. के होश उड़ाए: भतीजे की बगावत को बताया ‘लोकतांत्रिक’, कहा- NCP में फूट नहीं

31 अगस्त 2023 को मुंबई में 26 विपक्षी दलों के गुट I.N.D.I.A. की बैठक होनी है। शरद पवार इस गुट के बड़े नेताओं में से एक हैं। लेकिन बैठक से पहले उन्होंने साथियों का टेंशन बढ़ाने वाला बयान दिया है। साथ ही इससे उन अटकलों को भी बल मिलता है, जिनमें दावा किया जाता है कि शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की लड़ाई ‘फिक्स’ है।

शरद पवार ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में अजित पवार के साथ मतभेदों को खारिज किया है। उनकी बगावत को ‘लोकतांत्रिक’ बताया है। शरद पवार ने कहा है, “इसमें कोई मतभेद नहीं है कि अजित पवार हमारे नेता हैं। एनसीपी में कोई विभाजन नहीं है। किसी पार्टी में फूट कैसे पड़ती है? ऐसा तब होता है जब राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा समूह पार्टी से अलग हो जाता है, लेकिन आज एनसीपी में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। हाँ, कुछ नेताओं ने अलग रुख अपनाया है। लेकिन इसे फूट नहीं कहा जा सकता। वे लोकतंत्र में ऐसा कर सकते हैं।”

शरद पवार अपनी सांसद बेटी सुप्रिया सुले के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। सुप्रिया ने भी पार्टी में फूट से इनकार करते हुए कहा था कि अजित दादा हमारे नेता हैं। बता दें कि अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी नेताओं का एक धड़ा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन चुका है। 2 जुलाई 2023 को अजित पवार नेमहाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ एनसीपी के 8 अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। एनसीपी पर कब्जे की चाचा-भतीजे की लड़ाई चुनाव आयोग भी पहुँच चुकी है। दोनों गुटों ने अपने विधायकों के समर्थन के साथ पार्टी के चिन्ह ‘घड़ी’ और नाम ‘राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी’ पर अपना-अपना दावा ठोंक रखा है।

बावजूद इसके कई लोगों का मानना है कि एनसीपी की लड़ाई फिक्स है। उनका दावा है कि शरद पवार की सहमति से ही अजित ने अलग रास्ता पकड़ा है। दोनों के बीच 12 अगस्त को पुणे में सीक्रेट मीटिंग की खबर मीडिया में आई थी।

इस मीटिंग के बाद एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार और उनकी सांसद बेटी सुप्रिया सुले को केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बनने का ऑफर दिया था। इस ऑफर का दावा कॉन्ग्रेस के एक पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से किया गया था। लेकिन रिपोर्ट में इस नेता की पहचान नहीं बताई गई थी।

रिपोर्ट में अनाम पूर्व मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया था, “अजीत ने अपने चाचा से कहा था कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में कृषि मंत्री या नीति आयोग उपाध्यक्ष का पद दिया जाएगा। वहीं सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल को क्रमशः केंद्र और राज्य सरकार में शामिल किया जाएगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि शरद पवार ने भतीजे के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही कहा है कि वह किसी भी तरह से भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे।

पहली बार आरोपित की तरह ली गई किसी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की तस्वीर, जेल से निकल ट्विटर पर लौटे डोनाल्ड ट्रंप: चुनाव धोखाधड़ी केस में सरेंडर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लौट आए हैं। वापसी से पहले उन्होंने चुनाव धोखाधड़ी केस में सरेंडर किया। करीब 20 मिनट तक जेल में बिताए। पुलिस ने उनका आरोपितों की तरह तस्वीर (मगशॉट) भी लिया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार (24 अगस्त 2023) को ट्रंप ने फुल्टन काउंटी जेल में सरेंडर किया। मामला जॉर्जिया चुनाव में धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। उन पर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को पलटने की कोशिशों के आरोप हैं।

करीब 20 मिनट काउंटी जेल में रहने के बाद पूर्व राष्ट्रपति को 2 लाख डॉलर के बॉन्ड पर ​रिहा कर दिया गया। इससे पहले उनका मगशॉट लिया गया और पुलिस रिकॉर्ड में उनकी पहचान कैदी नंबर P01135809 के रूप में दर्ज की गई।

मगशॉट ट्रंप ने भी अपने एक्स हैंडल से भी शेयर किया है। अपनी गिरफ्तारी को उन्होंने अमेरिका के लिए दुखद दिन बताया है। उल्लेखनीय है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में ट्रंप फिलहाल सबसे आगे बताए जाते हैं।

ट्रंप का ‘मगशॉट’ वायरल

टाइम्स नॉउ के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मामले में पहली बार अप्रैल में सरेंडर किया था। वे कुल चार बार अदालत के सामने सरेंडर कर चुके हैं। इस मामले में ट्रंप सहित 18 आरोपित हैं। यूएस मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुल्टन काउंटी शेरिफ के ऑफिस ने इस बात की पुष्टि की है कि 77 साल के ट्रंप के लिए भी इस मामले में वही प्रक्रिया अपनाई गई, जैसे इस मामले में सरेंडर कर चुके अन्य आरोपितों के लिए अपनाई गई थी।

यही कारण है कि ट्रंप का मगशॉट लिया गया। मगशॉट आरोपित के चेहरे की तस्वीर होती है जो पुलिस रिकार्ड के लिए लिया जाता है। गिरफ्तारी के बाद दिए गए विवरणों में ट्रंप की लंबाई 6 फीट 3 इंच, वजन 97 किलो और उनके बालों का रंग को स्ट्राबैरी बताया गया है।

सरेंडर के बाद सशर्त जमानत

सरेंडर के बाद ट्रंप को सशर्त जमानत मिली है। इनमें गवाहों को न धमकाने, अन्य आरोपितों से किसी भी तरह का संपर्क नहीं रखने जैसी शर्तें शामिल हैं। रिहाई के बाद ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उस चुनाव को चुनौती देने का पूरा हक है, जिसमें पारदर्शिता और ईमानदारी नहीं बरती गई हो। अपनी गिरफ्तारी को खुले तौर पर न्यायिक व्यवस्था का मजाक करार देते हुए कहा कि ऐसा उनको 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोकने के लिए किया जा रहा है।

नूहं गया बजरंग दल का कार्यकर्ता, अब माँ हर किसी से पूछती है- मेरे प्रदीप को देखा क्या: इसी हत्या में नामजद है AAP नेता जावेद अहमद

प्रदीप शर्मा बजरंग दल के कार्यकर्ता थे। परिजनों के अनुसार यही जुड़ाव उनकी हत्या की वजह बनी। बेटे की मौत के बाद से माँ का दिमाग स्थिर नहीं है। जो भी मिलता है उससे पूछती हैं- मेरे प्रदीप को देखा क्या। प्रदीप की ही हत्या में आम आदमी पार्टी (AAP) का नेता जावेद अहमद नामजद है।

उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले प्रदीप की हत्या हरियाणा के गुरुग्राम जिले के सोहना कस्बे के पास हुई थी। वे मेवात के नूहं से निकलने वाली बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल होने गए थे। 31 जुलाई 2023 को यात्रा में शामिल हिंदुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। प्रदीप नूहं के नल्हड़ मंदिर से बच निकले थे, लेकिन मंदिर से करीब 30 किलोमीटर दूर उनकी हत्या कर दी गई।

30 साल के प्रदीप के पैतृक घर पहुँचकर दैनिक भास्कर ने उनके परिजनों से बात की है। प्रदीप के भाई के हवाले से बताया है कि बजरंग दल का सदस्य होने के कारण हत्या की गई। कथित तौर पर प्रदीप को मारने के लिए हमलावर अस्पताल में भी घुस गए थे। उनकी पट्टियाँ नोच दी थी।

दैनिक भास्कर को प्रदीप के छोटे भाई हैपी ने बताया कि सोहना के पास दंगाइयों ने हमला किया। घायल प्रदीप को एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया। डॉक्टरों ने मरहम-पट्टी की। तभी भीड़ की शक्ल में कुछ लोग अस्पताल में घुस गए। प्रदीप को गालियाँ दी और उनकी पट्टियाँ नोच दी। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से गुरुग्राम ले जाया गया। भाई के अनुसार इस समय तक प्रदीप ठीक थे।

हैपी के मुताबिक प्रदीप को ले जा रही एम्बुलेंस को भीड़ ने रोक दिया। उन्हें बाहर निकालकर सड़क पर फेंक दिया। घायल अवस्था में प्रदीप काफी देर तक सड़क पर ही पड़े रहे। बाद में उन्हें पुलिस सड़क से उठा कर गुरुग्राम के एक अस्पताल में ले गई। हालत बिगड़ने के बाद फिर उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।

हैपी ने बताया है कि सफदरजंग में एडमिट होने तक प्रदीप की हालत काफी खराब हो चुकी थी। उनका सिर से काफी खून बह चुका था। आखिरकार उनकी मौत हो गई। पीड़ित परिवार के मुताबिक अगर हिंसा के दिन प्रदीप को समय पर इलाज मिल गया होता तो वो जीवित होते।

माहौल खराब होने की आशंका में 3 अगस्त को प्रदीप का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित पांची में आनन-फानन में करवा दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप का अंतिम समय में मुँह भी उनकी माँ अंगूरी देवी नहीं देख पाई। अब कोई भी अजनबी उनके घर आता है तो पूछती हैं, “मेरे प्रदीप को देखा क्या? मेरा बेटा भूखा होगा, एक बार बात करवा दो। वह अब फोन नहीं करता, पूछता नहीं कि मां रोटी खाई कि नहीं।”

पीड़ित परिजनों ने प्रदीप को पूरी तरह धर्म के लिए समर्पित बताया। मसाला बेचकर परिवार पालने वाले उनके पिता चंद्रपाल भले ही बार-बार अपनी पत्नी अंगूरी देवी को सँभालते रहते हैं, लेकिन बेटे की चर्चा होते ही वे भी अपने आँसू नहीं रोक पाते हैं।

बताते चलें कि प्रदीप शर्मा की हत्या की FIR में आम आदमी पार्टी का हरियाणा पदाधिकारी जावेद अहमद नामजद है। ऑपइंडिया के पास प्रदीप की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर उपलब्ध है। लगभग 200 से अधिक लोगों की हत्यारी भीड़ द्वारा उनकी हत्या के एक दिन बाद यानी, 2 अगस्त 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्राथमिकी बजरंग दल के एक अन्य कार्यकर्ता पवन कुमार ने दर्ज कराई है। पवन मृतक प्रदीप के साथ थे।

पवन कुमार ने अपनी शिकायत में जावेद अहमद को मुख्य आरोपित बताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ ने जावेद अहमद के आदेश पर प्रदीप कुमार और उनके साथ आए बजरंग दल के अन्य सदस्यों पर जानलेवा हमला किया था। स्थानीय लोगों ने भी प्रदीप हत्याकांड में जावेद अहमद की संलिप्तता की आशंका जताई है।