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लखनऊ से रामेश्वरम जा रही टूरिस्ट ट्रेन की प्राइवेट बोगी में लगी आग, छिपा के ले जा रहे थे गैस सिलेंडर: 10 की मौत; 20+ घायल

तमिलनाडु के मदुरै से दर्दनाक खबर सामने आई है, जहाँ ट्रेन के निजी डिब्बे में लगी आग से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है, तो करीब 20 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। ये हादसा उस समय हुआ, जब ट्रेन यार्ड में थी। बताया जा रहा है कि ट्रेन का ये टूरिस्ट कोच बीती रात ही ट्रेन में जोड़ा गया था, जिसमें सिलेंडर फटने से आग लग गई। इस कोच में एक समूह से जुड़े लोग थे, जो धार्मिक यात्रा पर निकले थे।

धार्मिक यात्रियों से भरी थी ट्रेन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हादसा पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस में शनिवार (26 अगस्त 2023) को सुबह 5:15 बजे हुआ, जब ट्रेन मदुरै यार्ड में खड़ी थी। इस दौरान निजी कोच में आग लग गई। ये ट्रेन लखनऊ से रामेश्वरम जा रही थी, जिसमें अधिकतर कोच पहले बुक किए गए थे। दुर्घटनाग्रस्त डिब्बा बीच रास्ते में शुक्रवार की रात को ही जोड़ा गया था।

कॉफी बनाने की कोशिश में लगी आग

मदुरै की कलेक्टर एम.एस. संगीता ने बताया कि कोच में तीर्थयात्री थे और वे उत्तर प्रदेश से यात्रा कर रहे थे। आज सुबह जब उन्होंने कॉफी बनाने के लिए गैस स्टोव जलाने की कोशिश की, तो सिलेंडर में विस्फोट हो गया। 55 लोगों को रेस्क्यू किया गया है और अब तक 10 शव निकाले गए हैं। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान जारी है। कहा जा रहा ट्रेन में छिपाकर सिलेंडर ले जाए जा रहे थे। जिनमें विस्फोट हो गया।

सिलेंडर की वजह से लगी आग!

एएनआई से बातचीत में दक्षिणी रेलवे के अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आग अन्य किसी डिब्बे में नहीं फैल पाई, उससे पहले ही उस पर काबू पा लिया गया।

मुजफ्फरनगर स्कूल में बच्चे की पिटाई को हिंदू-मुस्लिम एंगल से फैलाया लिबरल गैंग ने, UP पुलिस ने बताई सच्चाई: जुबैर वीडियो डिलीट कर भागा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक स्कूल का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बच्चे को अन्य छात्र पीटते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे दो वर्गों के बीच का मसला बताया जा रहा है। वहीं, पुलिस ने कहा कि टेबल नहीं याद करने पर उसे दंड दिया गया है। NCPCR ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है।

मामला मुजफ्फरनगर के खुब्बापुर स्थित नेहा पब्लिक स्कूल का है। स्कूल के वायरल वीडियो को लेकर यूपी पुलिस ने हाल ही में एक बयान जारी किया है। पुलिस का कहना है कि जाँच में पता है कि महिला टीचर ने टेबल नहीं याद करने पर पहली कक्षा के बच्चे की अन्य बच्चों से पिटाई लगवाई थी। इसको लेकर संबंधित विभाग विभागीय कार्रवाई करेगा।

पुलिस ने कहा, “थाना मंसूरपुर पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो का संज्ञान प्राप्त हुआ है, जिसमें एक महिला टीचर द्वारा एक बच्चे को टेबल नहीं याद करने पर उसके क्लास के अन्य बच्चों द्वारा मार लगवाई जा रही है। वीडियो में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की जा रही है। इस टिप्पणी के विषय में गहनता से जाँच की गई।”

पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, “स्कूल के प्रिंसिपल से बात की गई तो ये तथ्य प्रकाश में आया कि महिला टीचर द्वारा ये डिक्लेयर किया गया कि जिन मोहम्मडेन बच्चों की माँ, बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देती है उन बच्चों की पढ़ाई का नाश हो जाता है। जो वीडियो बना रहा है, वह शख्स इसकी पुष्टि करता है। इस संबंध में BSE को अवगत करा दिया गया है और बच्चों के द्वारा जो मारपीट की जा रही है, उस संबंध में संबंधित टीचर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

वहीं, इस घटना का राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग- NCPCR ने भी संज्ञान लिया है। NCPCR के चीफ प्रियंक कानूनगो ने X पर अपने पोस्ट में कहा कि इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बच्चों का वीडियो शेयर नहीं करने के लिए भी लोगों से कहा।

प्रियंक कानूनगो ने अपने पोस्ट में लिखा, “मामले का संज्ञान ले कर कार्यवाही हेतु निर्देश जारी किए जा रहे हैं। सभी से निवेदन है कि बच्चे का वीडियो शेयर न करें। इस तरह की घटना की जानकारी ईमेल द्वारा दें। बच्चों की पहचान उजागर कर अपराध के भागी न बनें।”

हालाँकि, इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग रंग देकर सियासत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, समाज में विभाजन पैदा और नफरत फैलाने की कोशिश कुछ लोग कर रहे हैं।

फेक न्यूज फैलाने के बाद जब सच्चाई सामने आई तो वीडियो डिलीट कर भागा जुबैर

इस पूरे मामले में हमेशा की तरह लेफ्ट-लिबरल गैंग आगे है। ऑल्ट न्यूज वाले मोहम्मद जुबैर ने गिरफ्तारी के डर से और सच्चाई सामने आने के बाद अपना वीडियो डिलीट कर दिया।

तेज प्रताप यादव ने जिस शख्स का दबाया गला, उसी पर बिहार पुलिस ने किया FIR: मंत्री ने ट्वीट कर बताई पूरी बात

लालू प्रसाद यादव के बेटे व बिहार सरकार में पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव का गुस्से में एक एक व्यक्ति को धक्का देते हुए वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में तेजप्रताप एक युवक का गला पकड़कर धक्का देते हुए दिख रहे हैं। वहीं अब उसी युवक पर बिहार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। युवक को धक्का देने का वीडियो 22 अगस्त का बताया जा रहा है, जब तेज प्रताप यादव लालू-राबड़ी के साथ फुलवरिया के सेलार कला गाँव में अपने ननिहाल गए थे। 

युवक की पहचान सुमंत यादव के रूप में हुई है। वहीं वायरल वीडियो पर तेजप्रताप यादव ने सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा है, “दुनिया को आधी तस्वीर दिखा मुझे बदनाम करने वाले पर एफआईआर दर्ज करा दिया गया है।”

पोस्ट में तेजप्रताप यादव की आईटी सेल की ओर पुलिस में की गई शिकायत का पत्र जारी किया गया है। जिसमें युवक के नशे में होने और पर्यावरण मंत्री के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप है। पुलिस से जाँच कर उचित कार्रवाई करने की माँग की गई है।

तेज प्रताप यादव ने दर्ज कराई शिकायत

इस पूरे मामले में वीडियो वायरल होने के बाद तेज प्रताप ने सोशल मीडिया में अपनी छवि ख़राब करने को लेकर अधूरा वीडियो शेयर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने अपने पोस्ट में जो पत्र शेयर किया उसमें लिखा है, “निवेदन करना है कि दिनांक 22-08-2023 को सुबह साढ़े 10 बजे माननीय मंत्री जी तेजप्रताप यादव गोपालगंज के सेलार कला ग्राम गए थे। अपने नानाजी के घर के बाहर निकलते समय सुमंत यादव शराब के नशे में माननीय मंत्री जी के साथ धक्का मुक्की करने लगा। मंत्री जी के बार-बार मना करने के बावजूद भी नहीं मान रहा था। स्थानीय प्रशासन द्वारा उसे हटाया गया। घटनाक्रम के दो दिन बाद वह उस दिन का वीडियो एडिट कर के मंत्री जी की छवि भूमिल कर रहा है। सुरक्षा के दृष्टिकोष से भी यह घटना अति संवेदनशील है। आपसे आग्रह है कि तथा कथित सुमंत यादव पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।”

गौरतलब है कि जब तेज प्रताप यादव लालू और राबड़ी देवी के साथ अपने नानी के घर पहुँचे तो वहाँ कार्यकर्ताओं इतनी भीड़ थी कि वे गुस्सा हो गए और पीछे खड़े युवक का गला पकड़कर धक्का दे दिया। कहा जा रहा है उसे गाली भी दी। इसी दौरान किसी ने मंत्री तेज प्रताप का वीडियो बना लिया। वीडियो में दिख रहा दूसरा युवक सुमंत यादव बताया जा रहा है। उसका कहना है कि लालू यादव के साले साधु यादव के कहने पर वह वहाँ व्यवस्था देखने गया था। 

क्या कहा सुमंत यादव ने 

वहीं अब सुमंत यादव का बयान भी सामने आ गया है। सुमंत ने बताया, “लालू यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप भैया के साथ लंबे समय के बाद ससुराल पहुँचे थे। मैं वहाँ साधु यादव के कहने पर व्यवस्था देख रहा था। जब वे लोग अपने घर के अंदर गए तो बाहर भीड़ बढ़ गई थी। मैं तेजप्रताप के पीछे खड़ा था। भीड़ के कारण मुझे किसी ने पीछे से धक्का दिया। इस दौरान मैं उनके शरीर में थोड़ा टच हो गया। उनको लगा की मैंने ही धक्का दिया है। इससे वे गुस्सा हो गए और मेरे गले में हाथ डालकर धक्का दे दिए और कोई बात नहीं है।”

शिवशक्ति प्वाइंट: चंद्रयान 3 के उतरने वाली जगह का नाम… चंद्रयान 2 ने भी जहाँ छोड़े निशान, वो कहलाएगा ‘तिरंगा’ – इसरो में PM मोदी का ऐतिहासिक भाषण

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ग्रीस यात्रा से लौटते ही सीधे बेंगलुरु पहुँचे और वहाँ से इसरो के कमांड सेंटर पहुँचे। यहाँ पीएम मोदी चंद्रयान 3 मिशन को सफल बनाने वाले वैज्ञानिकों से मिले और इसरो के कमांड सेंटर को देखा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला वैज्ञानिकों को प्रणाम भी किया। पीएम मोदी ने चंद्रयान 2 के क्रैश लैंडिंग को भी याद किया। उन्होंने चंद्रयान 2 और चंद्रयान 3 के लैंडिंग प्वॉइंट का नामकरण भी किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि चंद्रमा के जिस स्थान पर चंद्रयान 2 ने अपने पदचिह्न छोड़े हैं, वो स्थान अब ‘तिरंगा’ कहलाएगा। उन्होंने चंद्रयान 3 के लैंडिंग प्वॉइंट को ‘शिवशक्ति प्वाइंट’ नाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तिरंगा प्वॉइंट हमें सीख देगा कि कोई भी विफलता आखिरी नहीं होती, अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं हो सकता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है, जिसने चंद्रमा को छुआ है। पीएम मोदी ने भारत की लंबी अंतरिक्ष यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के पास पहले तकनीक नहीं थी। हमारी गिनती दुनिया के तीसरे पायदान पर खड़े देशों में होती थी। वहाँ से निकलकर आज भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।

आज ट्रेन से लेकर टेक्नोलॉजी तक भारत की गिनती पहली कतार के देशों में हो रही है। भारत की तीसरी कतार से पहली कतार तक पहुँचने की यात्रा में इसरो जैसे संस्थानों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। आपने आज मेक इन इंडिया को चाँद तक पहुँचा दिया है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के दक्षिणी हिस्से से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक की ये यात्रा आसान नहीं थी। हमारे वैज्ञानिकों ने इस काम को अंजाम देने के लिए इसरो की ही लैब में आर्टिफिशियल चाँद तक बना डाला। ढेर सारे प्रयोगों को अंजाम दिया। इसलिए चंद्रयान 3 को सफलता मिलनी ही मिलनी थी। पीएम मोदी ने कहा:

“आज जब मैं देखता हूँ कि भारत की युवा पीढ़ी साइंस, स्पेस और इनोवेशन को लेकर इतनी उर्जा से भरी हुई है, तो उसके पीछे हमारे स्पेस मिशन की सफलता है। मंगलयान, चंद्रयान से लेकर गगनयान तक इसरो ने देश की युवा पीढ़ी को नया मिजाज दे दिया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिकों ने सिर्फ चाँद पर ही तिरंगा नहीं लहराया है, बल्कि आप लोगों ने भारत की पूरी की पूरी पीढ़ी को ही जागृत किया है और उन्हें नई राह दिखाई है। आज से कोई भी बच्चा जब रात में चंद्रमा को देखेगा, तो उसे विश्वास होगा कि जिस हौसले से मेरा देश चाँद पर पहुँचा है। वही हौसला, वही जज्बा बच्चे के भीतर भी है, युवा के भीतर भी है। आज आपने भारत के बच्चों में आकांक्षाओं के जो बीज बोए हैं, वो आने वाले कल में वटवृक्ष बनेंगे और विकसित भारत की नींव बनेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे युवाओं को प्रेरणा मिलती रहे, इसके लिए एक और निर्णय लिया गया है। भारत अब से चंद्रयान 3 के लैंडिंग दिवस यानी 23 अगस्त को ‘नेशनल स्पेस डे’ के तौर पर मनाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेस सेक्टर की जमकर तारीफ की। पीएम मोदी ने कहा कि मौसम का पूर्वानुमान लगाने की वजह से किसानों को मदद मिलती है। आज मछुवारों को नाविक सिस्टम की वजह से बारिश की जो जानकारी मिलती है, वो आपकी वजह से है। आज प्राकृतिक आपदा आती है, तो आपकी वजह से उसकी जानकारी पहले मिल जाती है। साइक्लोन की सूरत में जन और धन की हानि होती है। एक साइक्लोन इतना नुकसान कर जाता था, जो चंद्रयान 3 के मिशन पर खर्च हुए कुल पैसों से भी ज्यादा होता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वो एक सुझाव भी देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि इसरो के रिटायर्ड लोग केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर नेशनल हैकेथॉन का आयोजन करें, जिसमें देश के अधिक से अधिक युवा जुड़ें। ये हैकेथॉन गवर्नेंस पर आधारित हो, जिससे देश के विकास में सहयोग मिलेगा। उन्होंने युवाओं को एक काम भी सौंपा।

भारत वो देश है, जिसने हजारों वर्षों पूर्व ही धरती के बाद अनंत आकाश में देखना शुरू कर दिया था। हमारे यहां सदियों पहले आर्यभट्ट, वाराहमिहिर, भास्कराचार्य जैसे ऋषि मुनि हुए। जब धरती के बारे में किसी को नहीं पता था, तो आर्यभट्ट ने धरती से जुड़ी गणनाएं भी लिख दी थी। धरती गोल है, इस बात की जानकारी भारत ने पहले ही दे दी थी। उन्होंने बाकायदा संस्कृत का श्लोक भी सुनाया और उसका मतलब भी समझाया। उन्होंने बताया कि इस श्लोक में धरती और आकाश के बारे में बताया गया है। हमारे पूर्वजों ने सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी के एक सीध में आने की घटना हमारे कई ग्रंथों में लिखी गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि पृथ्वी ही नहीं, अन्य ग्रहों और उपग्रहों की गति से लेकर आकार तक की जानकारी हमारे ग्रंथों में लिखे गए थे। आज हमारे यहां सैकड़ों वर्षों पहले और बाद के पंचांग तक बनाए जाते हैं।

पीएम मोदी ने युवाओं को चुनौती भी दी। भारत के ग्रंथों में खगोलीय विज्ञान के जो सूत्र लिखे गए हैं, आज के युवा उन्हें प्रतिस्थापित करने के लिए उनपर रिसर्च करें और उन्हें साबित करें। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा ज्ञान गुलामी की मानसिकता के नीचे दब गया था, उन्हें अब उभारना है।
पीएम मोदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को आज के आधुनिक विज्ञान को नए आयाम देने हैं। समंदर की गहराइयों से लेकर आसमान की ऊंचाई तक करने को बहुत कुछ है। आज डीप अर्थ को भी देखिए, डीप सी को भी देखिए। आप नेक्स्ट जेन कंप्यूटर भी बनाइए और जेनेटिक इंजीनियरिंग में भी सिक्का जमाइए। आपके पास करने को बहुत कुछ है।

उन्होंने कहा कि आज की 21वीं सदी में जो देश साइंस और टेक्नोलॉजी में बढ़त बना लेगा, वो देश सबसे आगे बढ़ जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में भारत की स्पेस इंडस्ट्री 8 बिलियन डॉलर से बढ़कर 16 बिलियन डॉलर हो जाएगी, ऐसा विशेषज्ञ बोलते हैं, तो सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। भारत में पिछले कुछ सालों में 4 से बढ़कर करीब 100 स्टार्टअप स्पेस सेक्टर में काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि 1 सितंबर से my.GOV ऐप चंद्रयान मिशन को लेकर बहुत बड़ा क्विज कॉम्पटीशन लॉन्च कर रहा है। मैं चाहता हूं कि सभी युवा, छात्र इससे जुड़े। उन्होंने कहा कि इसरो को इस मिशन को लीड करना चाहिए। इसरो सभी युवाओं के लिए रोल मॉडल है। आपकी वर्षों की तपस्या ने ये साबित किया है कि आप जो ठान लेते हैं, वो आप करके दिखाते हैं। देश के लोगों का विश्वास आप पर है और विश्वास कमाना छोटी बात नहीं होती है।

‘दुर्गा पूजा मेले की तरह एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार है, धार्मिक नहीं’: कलकत्ता हाईकोर्ट ने सार्वजनिक जगह पर पूजा पांडाल बनाने पर लगी प्रशासनिक रोक को हटाया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2023 को दुर्गा पूजा के पांडाल लगाने पर लगाई गई प्रशासनिक रोक को हटा दिया। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा है कि दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल की राजधानी के लिए किसी धार्मिक प्रतीक की बजाय सांस्कृतिक पहचान की तरह है। इसे धर्म के नजरिए से देखने की जगह सेक्युलर नजरिए से देखा जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस दौरान होने वाली धार्मिक जुटान को आम मेले की देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इसे सबसे सेक्युलर त्योहार बताया।

कोलकाता प्रशासन को दिए निर्देश-लगवाए जाएं पांडाल

कलकत्ता हाईकोर्ट 25 अगस्त को एक याचिका पर सुनवाई कर रही था। इसमें सार्वजनिक मैदान पर दुर्गा पूजा का पांडाल लगाने से प्रशासन ने रोक दिया था। केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने ये टिप्पणी की। उन्होंने कोलकाता प्रशासन को निर्देश दिया कि वो दुर्गा पूजा के लिए निर्धारित जगह पर याचिकाकर्ताओं को पांडाल लगाने की अनुमति दे।

दुर्गा पूजा में शामिल होते हैं सर्व समाज के लोग

बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि उन्हें कोलकाता के न्यू टाउन मेला ग्राउंड में पांडाल लगाने की अनुमति दी जाए, क्योंकि प्रशासन इसकी अनुमति नहीं दे रहा है। इस पर जस्टिस सब्यासाची भट्टाचार्य ने अपनै फैसले में कहा, “दुर्गा पूजा का उत्सव कई संस्कृतियों के मिलन की तरह है। ये नारी शक्ति का प्रतीक है। इस उत्सव में धार्मिक के साथ सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इसे सेक्युलर नेचर का माना जाए, धार्मिक नेचर का नहीं। इसमें सभी समाज के लोग शामिल होते हैं।”

हाईकोर्ट बोला- सही जगह लगाया जा रहा पांडाल

इस मामले में प्रशासन सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाने के नियमों के तहत रोक लगाया था। कोलकाता प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए ऐसा फैसला लिया था। इसे कोर्ट में संविधान के आर्टिकल 14 को दृष्टि में रखकर चुनौती दी गई थी। इसमें सभी धर्म के लोगों को अपनी धार्मिक गतिविधियों को अंजाम देने का अधिकार दिया गया है।

इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने किसी सड़क, गली, फुटपाथ और खेल के मैदान में नहीं, बल्कि मेले के लिए निर्धारित जगह पर दुर्गा पूजा का पांडाल लगाने की अनुमति माँगी थी। हाईकोर्ट ने अब इसकी इजाजत दे दी है।

कॉन्ग्रेस ने CBSE के ‘भारत विभाजन’ पाठ का किया विरोध: सांसद टैगोर ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा- इससे युवाओं में बढ़ेगी नफरत

कॉन्ग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सीबीएसई द्वारा भारत-पाक विभाजन पर आधारित प्रदर्शनियों के आयोजन पर रोक लगाने की अपील की है। मनिकम टैगोर ने ये पत्र 21 अगस्त 2023 को लिखा था। इसकी जानकारी उन्होंने X पर 24 अगस्त को दी। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान से सीबीएसई के इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए भी कहा है। उन्होंने तर्क दिया है कि इससे युवाओं के मन में नफरत बढ़ सकती है।

‘सीबीएसई के इस कदम को रोके सरकार’

तमिलनाडु के विरुधुनगर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस के सांसद मनिकम टैगोर ने कहा कि विभाजन की त्रासदी की थीम पर आधारित प्रदर्शनियाँ लगाने से युवा पीढ़ी के मन में सिर्फ नफरत का भाव बढ़ेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि वो सामाजिक सौहार्द्र की रक्षा करने की कोशिश के तहत इस निर्णय को वापस लें।

‘नफरत का भाव पैदा होगा’

मनिकम टैगोर ने अपने पत्र में लिखा है, “मैं सीबीएसई द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनी को लेकर चिंतित हूँ। इस पर फिर से विचार किया जाए और इस फैसले को बदला जाए। इस तरह की प्रदर्शनियों से युवा पीढ़ी के मन में नफरत का भाव जगेगा। इस पर रोक लगाकर हमारे समाज के सामाजिक सौहार्द्र को बचाएँ।” टैगोर का कहना है कि इस तरह की घटनाओं के बारे में समझ विकसित करने के लिए ‘संवेदनशील तरीके’ को अपनाना होगा।

कॉन्ग्रेस सांसद का ये पत्र संवेदनशीलता ‘जताने’ की ‘बैलेंसिंग एक्ट’ ही लगती है। एक तरफ तो वो लिख रहे हैं कि इन महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जानकारी दी जाए तो दूसरी तरफ ‘संवेदनशीलता’ भी अपनाई जाए। इस पत्र में लिखा है कि इन प्रदर्शनियों में रक्तपात और अत्याचारों का चित्रण किया जाएगा, जो समाजिक सौहार्द्र और एकता को प्रभावित कर सकती है।

सीबीएसई पहले ही कह चुकी है ‘संवेदनशीलता बरती जाए’

बता दें कि सीबीएसई ने 14 अगस्त को इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें ‘विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस’ पर आधारित प्रदर्शनियों की बात कही गई थी। भले ही मनिकम टैगोर बोल रहे हों कि विभीषिका को दिखाने में संवेदनशीलता बरती जाए, तो ये काम सीबीएसई पहले ही कर चुकी है। उसने अपने सर्कुलर में लिखा है कि इन प्रदर्शनियों से ‘समाज में किसी का सेंटिमेंट हर्ट’ न हो।

शरद पवार भी कर चुके हैं अपील

कुछ दिनों पहले एनसीपी चीफ शरद पवार भी सीबीएसई के इस फैसले पर ऐसी ही प्रतिक्रिया दे चुके हैं, जिसमें उन्होंने इतिहास के माध्यम से नफरत फैलाने से रोकने की अपील की थी। उन्होंने चिंता जताई थी कि विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस जैसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं, इसकी वजह से समाज के एक खास तबके को लेकर उनके मन में नफरत पैदा हो सकती है।

वैसे, इस विषय पर ऑपइंडिया कई लेख प्रकाशित करके ये समझाने की कोशिश कर चुका है कि ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत समाज को क्यों है और कैसे समाज को इस तरह से तैयार किया जाए कि फिर से ऐसी विभीषिका की नौबत न आए।

हिंदू बीवी संग हिंदू एरिया में रहना चाहता था तोहिदुल अजीज हक, रोहित शर्मा के नाम से बना लिया आधार कार्ड: दो फर्जी आधार बनाने पर सूरत में गिरफ्तार

सूरत में एक मुस्लिम युवक ने एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन-तीन आधार कार्ड बनवा डाले। इनमें से एक आधार हिंदू व्यक्ति के नाम पर है। आरोपित व्यक्ति का नाम मोहम्मद तोहिदुल अजीज हक है। वो अब सूरत पुलिस की गिरफ्त में है। खास बात ये है कि इनमें से एक आधार कार्ड उसने ‘रोहित शर्मा’ के नाम से बनवाया था। इनमें तीनों में एक उसका वास्तविक आधार है, जबकि दो फर्जी हैं।

हिंदू लड़की से शादी के बाद बदल डाली अपनी पहचान

तोहिदुल ने सूरत की स्पा में काम करने वाली एक हिंदू लड़की से शादी भी कर ली। उस लड़की ने जब उसके साथ मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहने से मना कर दिया, तब उसने रोहित शर्मा नाम से नया आधार कार्ड बनवा डाला। स्पा में काम करने के लिए वो अहमद खान नाम का इस्तेमाल करता था। वहीं, हिंदू इलाके में के लिए रोहित शर्मा नाम इस्तेमाल करता था।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने हिंदू नाम पर सरकारी दस्तावेज तैयार किया था क्योंकि वह शहर में एक हिंदू इलाके में रहना चाहता था। पुलिस ने बताया कि मोहम्मद तोहिदुल का एक हिंदू महिला से अफेयर था। उससे शादी करने के बाद आरोपी ने रोहित शर्मा के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया ताकि वे हिंदू इलाके में रह सकें।

महज 1500 रुपए खर्च करके अहमद खान से बना रोहित

खास बात ये है कि उसने महज 1500 रुपयों में न सिर्फ अपना नाम बदल लिया, बल्कि अपनी धार्मिक पहचान भी बदल ली। इसके पहले उसने अहमद खान के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया था। इसके बाद उसने स्पा में नौकरी हासिल की थी। तीनों पर उसकी ही शक्ल है।

पश्चिम बंगाल का निवासी है आरोपित

आरोपित तोहिदुल उर्फ अहमद खान उर्फ रोहित शर्मा मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले का रहने वाला है। यहाँ वो कई तरह के काम कर चुका है। सूरत पुलिस की एसओजी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है और कारनामे को अंजाम देने वाले उसके मददगारों की धरपकड़ कर रही है।

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह सात साल पहले सूरत आया था। उसने शहर के विभिन्न स्पा में मैनेजर के रूप में काम किया। सबसे पहले उसने अहमद अरन खान के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनाया। उसके बाद हिंदू लड़की के साथ हिंदू एरिया में रहने के लिए रोहित शर्मा के नाम से आधार बनवाया।

‘योगी सरकार न होती तो मेरा कत्ल हो जाता’: स्याही कांड में जिस BJP नेता का आया नाम, वो बोले- मुख़्तार के खिलाफ बोलने से नाराज अखिलेश यादव ने रची साजिश

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 21 अगस्त 2023 को भाजपा नेता दारा सिंह चौहान पर स्याही फेंकी गई थी। इस मामले में आरोपित अभिमन्यु यादव ने भाजपा नेता प्रिंस यादव पर स्याही फेंकने के लिए खुद को उकसाने का आरोप लगाया था। हालाँकि, बाद में पुलिस ने आरोपित अभिमन्यु के दावों को गलत बताया था।

अब खुद भाजपा नेता प्रिंस यादव ने गुरुवार (24 अगस्त 2023) को वीडियो जारी करके मामले में अपने खिलाफ रची गई साजिश का खुलासा किया है। भाजपा नेता का आरोप है कि ऑपइंडिया को मुख़्तार अंसारी के खिलाफ इंटरव्यू देने के बाद से माफिया और सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिलकर उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। प्रिंस यादव ने अपनी जान का खतरा भी बताया है।

भाजपा नेता प्रिंस यादव ने वीडियो की शुरुआत में खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सच्चा सिपाही बताया। स्याही फेंकने वाले आरोपित अभिमन्यु को प्रिंस ने राजनैतिक मोहरा बताया। प्रिंस का दावा है कि स्याही साजिश रचकर फेंकी गई थी, क्योंकि मौके पर कैमरामैन और वीडियो शेयर करने वाले भी मौजूद थे।

प्रिंस यादव ने स्याही वाला वीडियो शेयर कर भाजपा पर आरोप लगाने वाले अखिलेश यादव को अपराधियों का सबसे बड़ा संरक्षक और दंगाइयों एवं आतंकियों के मुकदमे वापस लेने वाला नेता बताया। प्रिंस ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है। हालाँकि, उन्होंने ऐसे होना देश और धर्म की भलाई के लिए उचित बताया। प्रिंस ने दावा किया है कि झूठा साबित होने के बावजूद अखिलेश यादव को न तो शर्म आएगी और न ही वो माफ़ी माँगेंगे।

प्रिंस यादव ने अपने खिलाफ हुई साजिश की वजह मई 2023 में ऑपइंडिया को दिया गया इंटरव्यू बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से पूर्वांचल में ग्राउंड रिपोर्ट कर रही ऑपइंडिया टीम के एक पत्रकार राहुल पांडेय को उन्होंने मुख़्तार अंसारी के ऐसे पाप गिनाए थे, जो अभी तक किसी भी मीडिया में हाईलाइट नहीं हुए थे।

प्रिंस ने माफिया मुख़्तार अंसारी को कलंक बताते हुए उसे अखिलेश यादव का सिरमौर कहा। भाजपा नेता के मुताबिक, उन्होंने ऑपइंडिया के माध्यम से पूरे देश में अखिलेश यादव और मुख़्तार अंसारी के रिश्तों को बेनकाब कर दिया था। साथ ही इंटरव्यू में यादवों से हिंदुत्व को समर्पित रहने की अपील भी की गई थी।

प्रिंस यादव ने आगे कहा कि खास मज़हब वाले अपराधी, दादा-परदादा के समय के साथी, मुख़्तार अंसारी का विरोध और हिन्दू समाज की एकजुटता की उनकी अपील को अखिलेश यादव बर्दाश्त नहीं कर पाए। प्रिंस के मुताबिक, बैठे-बैठाए सत्ता पाए अखिलेश यादव की राजनीति ही हिन्दू समाज को तोड़ कर चल रही है।

प्रिंस ने यह भी दावा किया कि ऑपइंडिया को दिए इंटरव्यू के बाद अगर अखिलेश यादव का शासन होता तो मुख़्तार अंसारी अब तक उनकी हत्या करवा चुका होता। प्रिंस ने मुख़्तार अंसारी को सम्बोधित करते हुए आगे कहा, “लेकिन, उसे ये भी पता है कि अब सत्ता योगी आदित्यनाथ महाराज की है और उसे पता है कि मिट्टी में मिलना किसे कहते हैं।”

भाजपा नेता ने कहा कि जब सख्त शासन के चलते मुख़्तार के गुर्गे उनकी हत्या नहीं करवा पाए तो साजिशन अभिमन्यु यादव का प्रयोग किया गया। राजनैतिक छवि धूमिल करने का प्रयास करने के लिए उनका नाम लेने वाले अभिमन्यु यादव को प्रिंस ने मुख़्तार का राजनैतिक शूटर कहा। उन्होंने स्याही कांड को भी अखिलेश यादव के इशारे पर हुआ बताया। प्रिंस ने कहा कि कभी पुलिस कस्टडी में लोगों को गोली मरवाने वाले माफिया अगर आज पुलिस कस्टडी में लोगों पर स्याही फिंकवाने के स्तर पर आ गए तो ये योगी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस की मेहनत है।

प्रिंस यादव ने स्याही फेंकने की घटना में उनका नाम लेने को अखिलेश यादव द्वारा मुख़्तार अंसारी का कर्ज चुकाने जैसा बताया। भाजपा नेता ने मुख़्तार अंसारी को मऊ दंगों में पुलिस की खुली जिप्सी से घूमकर हिन्दुओं का कत्ल करवाने वाला बताया। साथ ही उन्होंने तत्कालीन सपा सरकार पर दंगाई मुख़्तार को ‘शांति का मसीहा घोषित’ करने का भी आरोप लगाया। प्रिंस ने यह भी कहा कि भाजपा शासन में मुख़्तार पहले की तरह न तो अपराध कर सकता है और न ही सफल साजिश। प्रिंस ने जनता को भी आगाह किया कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों तक ऐसी साजिशें लगातार आती रहेंगी।

प्रिंस ने अपने वीडियो में मुख़्तार, अतीक, अबू आज़मी की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि सपा के पास आतंकवाद, अपराध और दंगों के अलावा कुछ भी नहीं। इसी वीडियो में मुजफ्फरनगर में अखिलेश शासन के दौरान साल 2013 में मुस्लिम भीड़ द्वारा कत्ल हुए सचिन और गौरव भी दिखे। प्रिंस ने बताया कि अखिलेश भी जानते हैं कि नरेंद्र मोदी 2024 में पिछली बार से अधिक सीटों के साथ प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, इसलिए अब सपा के पास सिर्फ अफवाहों का ही सहारा है।

अंत में प्रिंस ने कहा, “अखिलेश यादव, शायद कभी आप मुख़्तार जैसे माफिया को इशारा करके मेरी हस्ती को मिटा दो, लेकिन अब प्रिंस यादव जैसे अनगिनत भगवान कृष्ण के कुल के यदुवंशी इस देश और धर्म के लिए स्वयं को बलिदान करने के लिए तैयार हैं।”

बताते चलें कि ऑपइंडिया की टीम ने मई 2023 में पूर्वांचल के उन जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट की थी, जहाँ मुख़्तार अंसारी पर आपराधिक घटनाओं और साजिशों को अंजाम देने का आरोप लगा था। इस दौरान कई राजनेता, पुलिस अधिकारी सहित आम लोगों ने भी मुख़्तार अंसारी के खौफ की तमाम घटनाओं के बारे में बताया था। प्रिंस यादव ने भी तब मुख़्तार अंसारी पर हिन्दू को हिन्दू से लड़वाने, छोटे-छोटे बच्चों को भी अपना दुश्मन मानने और मऊ दंगों में यादवों का नरसंहार करवाने का आरोप लगाया था।

‘राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर देंगे’: पंजाब के राज्यपाल पुरोहित ने CM भगवंत मान को दी चेतावनी, ड्रग्स सहित कई मामलों का माँगा है ब्यौरा

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने आप सरकार पर संविधान के खिलाफ काम करने और उनके पत्रों का जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है। राज्यपाल और भगवंत मान के बीच विवाद इतना बढ़ गया है कि बात राष्ट्रपति शासन लगाने की आ गई है। राज्यपाल ने सीएम भगवंत मान को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि, अगर उन्होंने उनके पत्रों का जवाब नहीं दिया तो वे राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। 

क्या है पूरा मामला

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शुक्रवार (25 अगस्त, 2023) को भगवंत मान को चेतावनी दी कि वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। राज्यपाल ने कहा है कि अगर उन्हें उनके पत्रों का जवाब नहीं मिला तो वह फौजदारी प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं। 

राज्यपाल ने भगवंत मान को भेजे गए पत्र में कहा, “मैं आपसे माँगी गई सूचनाएँ उपलब्ध कराने और राज्य में मादक पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए आपके द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा। ऐसा नहीं होने पर मेरे पास कानून और संविधान के अनुसार कार्रवाई करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं होगा।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि राज्यपाल द्वारा माँगी गई जानकारी न देना स्पष्ट रूप से संवैधानिक कर्तव्य का अपमान है, जोकि सीएम भगवंत मान पर लगाया गया है। दरअसल, भगवंत मान राज्यपाल के पत्रों का जवाब नहीं दे रहे हैं। इस पर राज्यपाल ने कहा कि ऐसा न करने पर उनके पास कानून और संविधान के अनुसार कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में भी उन्हें इस संवैधानिक प्रावधान का सम्मान करने की सलाह दी थी, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को 10-15 पत्र लिखे लेकिन उनमें से कई का जवाब नहीं मिला या अधूरा जवाब मिला। उन्होंने कहा कि मैं कोई भी जानकारी माँगता हूँ तो सीएम मान नाराज हो जाते हैं।”

पुरोहित ने सीएम मान के बयान का विरोध करते हुए कहा कि वो कहते है कि वो केवल तीन करोड़ पंजाबियों के प्रति जवाबदेह हैं, राजभवन के प्रति नहीं, लेकिन उन्हें राज्य को संविधान के अनुसार चलाना है उनकी सनक के अनुसार नहीं, आप बादशाह थोड़े हो।

इससे पहले राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने सीएम भगवंत मान पर जून में हुए विधानसभा सत्र के दौरान उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया था।  उन्होंने कहा था कि पिछले दिनों विधानसभा सत्र के दौरान पारित हुए चार विधेयक में से एक राज्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए राज्यपाल की शक्तियों को छीनने वाला था। राज्यपाल ने इसे पूरी तरह से अवैध करार दिया था। पुरोहित ने सीएम मान पर संविधान की धारा 167 का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। 

संवैधानिक तंत्र की विफलता

राज्यपाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकते हैं। राज्यपाल ने सलाह दी कि वह संविधान के अनुच्छेद 356 और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के तहत अंतिम निर्णय लें, इससे पहले सीएम भगवंत मान उचित कदम उठाएँ।

कॉन्ग्रेस ने कारगिल विजय और सेना के शौर्य पर उठाए थे सवाल, नायकों का किया था अपमान: अब राहुल गाँधी वहाँ फैला रहे हैं प्रोपगेंडा

राहुल गाँधी ने अपने लद्दाख के दौरे के अंतिम दिन 25 अगस्त 2023 दिन शुक्रवार को कारगिल में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की हजारों किलोमीटर जमीन छिनी है और पीएम मोदी कह रहे हैं कि एक इंच भी जमीन नहीं गई है। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल को ये सब जानकारी आखिर देता कौन है। वह हमेशा आधारहीन बातें करते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि राहुल गाँधी को बताना चाहिए कि उनका चीन से क्या रिश्ता है।

बताते चलें कि राहुल गाँधी के परनाना पंडित जवाहरलाल नेहरू के शासन में चीन ने 1962 में भारत पर हमला करके हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया था। हालाँकि, राहुल गाँधी उसकी कभी चर्चा नहीं करते हैं। हालाँकि, भारत सरकार द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण देने के बावजूद वे भाजपा शासन में चीन द्वारा भारतीय भूमि पर कब्जा करने का आरोप लगाते रहते हैं।

लोगों की जानकारी में कारगिल सन 1999 के युद्ध के बाद से आया। अब जबकि राहुल गाँधी भी कारगिल गए हैं तो 1999 के युद्ध और उसके बाद को दौर भी याद करना जरूरी है। कारगिल युद्ध पर कॉन्ग्रेस ने न सिर्फ सवाल उठाए, बल्कि उसे 1999 के चुनाव के लिए एनडीए का सियासी हथकंडा तक करार दे दिया था। राहुल गाँधी की माँ सोनिया गाँधी ने उस समय माँग की थी कि कारगिल युद्ध पर सरकार सदन में सफाई दे और इक्वॉयरी कमीशन बिठाए। यही नहीं, 2004 से 2009 तक यूपीए-1 सरकार ने आधिकारिक तौर पर कारगिल विजय दिवस तक नहीं मनाया था। ये कहानी लंबी है….

राजनीतिक फायदे के लिए लड़ाई-कॉन्ग्रेस

साल 1999 में कॉन्ग्रेस पार्टी ने इंग्लैंड के ‘द गार्जियन’ अखबार में छपे लेख को आधार बनाकर उस समय की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को ये कहकर घेरने की कोशिश की थी कि भारत सरकार को चला रहे लोगों ने पाकिस्तान के साथ समझौता करके ये चुनावी स्टंट खेला है। उसने कारगिल को युद्ध तक मानने से इनकार कर दिया था, क्योंकि ये युद्ध चुनाव से तीन सप्ताह पहले खत्म हो गया था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि ये युद्ध सिर्फ 1999 के चुनाव को जीतने के लिए था।

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के जौहर के आगे पाकिस्तान बेबस रह गया। भारत ने सैन्य और राजनयिक दोनों ही स्तरों पर पाकिस्तान को करारी धूल चटाई। तब इसी कॉन्ग्रेस ने कहा कि ये ‘हार’ है और ‘नुकसान’ पहुँचाने वाला है। कॉन्ग्रेस अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए ‘द गार्जियन’ की वो रिपोर्ट लाई, जिसे पाकिस्तान के तत्कालीन सूचना मंत्री मुशाहिद हुसैन ने छपवाया था। इसमें वाजपेयी सरकार को घेरने की कोशिश की गई थी। इस मामले पर कंचन गुप्ता ने 1999 में लिखे अपने लेख में प्रकाश डाला था।

कारगिल युद्ध का राजनीतिकरण कर कॉन्ग्रेस ने रखी सदन सत्र बुलाने की माँग

करगिल युद्ध के दौरान ही सोनिया गाँधी और उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा का आपातकालीन सत्र बुलाने की माँग कर डाली थी। सोनिया गाँधी ने इसके लिए 1962 में चीन से भारत को मिली हार के बाद बुलाए गए संसद सत्र से जुड़ा जवाहरलाल नेहरु का रेफरेंस दिया था। उन्होंने कहा था, “अगर पंडित जी सदन की बैठक बुला सकते हैं तो अब क्यों नहीं बुलाया जा सकता? हमें कारगिल पर बात करना चाहिए।” ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस ने सरकार की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा तक नहीं लिया।

जब सोनिया गाँधी पता चल गया कि भारत जीत गया है तो उन्होंने कहा था, “सेना भले ही जीत गई हो, लेकिन सरकार हार गई।” जबकि, हकीकत ये थी कि भारत सरकार ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बुरी तरह से एक्सपोज कर दिया था। वहीं, सेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। यही नहीं, जब सरकार ने कारगिल युद्ध की जाँच करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया तो इसी कॉन्ग्रेस ने जाँच कमेटी पर भी सवाल उठा दिए थे।

सालों तक कॉन्ग्रेस ने कारगिल शहीदों और जवानों का किया अपमान

कॉन्ग्रेस की अगुवाई में यूपीए 2004 में सत्ता में आई, लेकिन उसने कारगिल विजय दिवस को मनाने से इनकार करते देश के हीरो का अपमान किया। साल 2017 में तत्कालीन भाजपा सांसद (मौजूदा समय में केंद्रीय राज्यमंत्री) राजीव चंद्रशेखर ने ट्विटर (अब एक्स) पर जुलाई 2009 का एक पत्र साझा किया था, जिसमें उन्होंने कारगिल युद्ध के वीरों के सम्मान की माँग की थी। उन्होंने पत्र में कॉन्ग्रेस पार्टी को सैनिकों की शहादत की याद दिलाते हुए कारगिल विजय दिवस मनाने की अपील की थी।

राजीव चंद्रशेखर ने 21 जुलाई 2009 को एक पत्र राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल को लिखा, जिसमें चेयरमैन से कारगिल विजय दिवस (23 जुलाई) को राज्यसभा में सार्वजनिक महत्व का दिन घोषित करने की माँग की। इसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्रालय और सरकार को हर साल कारगिल विजय दिवस मनाने की अपील की। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं से इसे ‘भाजपा की लड़ाई’ कहना बंद करने के लिए भी अपील की।

राजीव चंद्रशेखर की कोशिशें 2010 में रंग लाईं, जब उन्हें तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी का पत्र लिखा। उस समय ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने कारगिल युद्ध को कहा ‘भाजपा की लड़ाई’

साल 2009 में कॉन्ग्रेस के सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि कारगिल विजय दिवस को पूरे देश को मनाने की कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ एनडीए ही इसे सेलिब्रेट करे, क्योंकि ये उन्हीं (देश की नहीं) की लड़ाई थी। उनका ये बयान देशवासियों और शहीदों के लिए किसी अपमान से कम नहीं था।

कॉन्ग्रेस के पूर्व गृह राज्यमंत्री को याद नहीं कि कारगिल युद्ध कब हुआ

जी हाँ, राशिद अल्वी के बयान के बाद इस बारे में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री श्री प्रकाश जायसवाल से सवाल पूछा गया। इस पर उन्हें यही नहीं पता था कि कारगिल विजय दिवस आखिर क्या है और कब ये मनाया जाता है। उन्हें पता नहीं था कि कारगिल युद्ध कब हुआ था।

सिद्धरमैय्या की कर्नाटक सरकार की करतूत

साल 2018 में कर्नाटक में सिद्धारमैया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। उस समय कारगिल युद्ध के नायकों में से एक कर्नल एमबी रविंद्रनाथ ने 59 वर्ष की उम्र में बेंगलुरू में आखिरी साँस ली। वो कारगिल युद्ध के समय 2 राजपूताना राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर थे, जिसने तोलोलिंग की चोटी को फतह किया था।

कर्नल एमबी रविंद्रनाथ को भारत सरकार ने वीर चक्र से नवाजा था। हालाँकि, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने उनकी अन्त्येष्टि के समय एक अधिकारी तक को नहीं भेजा। वहीं, विवादित पत्रकार गौरी लंकेश को पूरे राजकीय सम्मान के साथ आखिरी विदाई दी गई। गौरी लंकेश के बारे में तो जानते ही होंगे आप?

कमलनाथ की सरकार ने सिलेबस से कारगिल युद्ध का चैप्टर ही हटाया

भोपाल में MVM साइंस कॉलेज काफी मशहूर है। वहाँ मिलिट्री से जुड़ा पाठ्यक्रम भी है। लेकिन, साल 2018 में जब कमलनाथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो कारगिल युद्ध को समर्पित पूरा हिस्सा ही पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि ऐसा कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव में किया गया, ताकि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के नेतृत्व में मिली देश की जीत को कम करके आँका जाए।

राहुल गाँधी लद्दाख से लेकर कारगिल की यात्रा कर रहे हैं। लोगों को संबोधित कर रहे हैं। वो लाल चौक पर तिरंगा फहरा चुके हैं। संसद में भी उन्होंने कहा कि कश्मीर में लोगों से खूब मिले, तो ये सब आज तभी हो रहा है, जब कारगिल में भारतीय सेना ने जौहर दिखाते हुए पाकिस्तानियों को मार गिराया था और उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन, ये तो वही लोग हैं, जो कारगिल से लेकर बालाकोट तक सबूत ही माँगते रहते हैं।