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मेवात की पहाड़ियों में एनकाउंटर, 2 दंगाई गिरफ्तार-1 को लगी गोली: पाकिस्तान सोशल मीडिया ग्रुप की भी जाँच, नूहं में हिंदुओं पर इस्लामी भीड़ ने किया था हमला

हरियाणा के मेवात में हिंदुओं की शोभायात्रा पर हमले (Nuh, Mewat Violence) के मामले में पुलिस ने दो आरोपितों का एनकाउंटर किया है। दोनों आरोपित राजस्थान की तरफ से नूहं आ रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी।

अरावली की पहाड़ियों में हुई इस मुठभेड़ में हिंदुओं का खून बहाने वाले एक संदिग्ध को गोली लगी है। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घायल आरोपित को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया है। इनके नाम मुनसैद और सैकूल बताए जा रहे हैं। इस बीच, पुलिस हिंसा से जुड़े 12 फेसबुक ग्रुपों की पड़ताल कर रही है, जिनके तार पाकिस्तान से जुड़े हैं।

तावडू़ की पहाड़ियों में हुआ एनकाउंटर

पुलिस को मुखबिरों ने सूचना दी थी कि नूहं में हिंदुओं पर हुए हमले के दो आरोपित राजस्थान से नूहं लौट रहे हैं। वो तावड़ू की पहाड़ियों के रास्ते आ रहे हैं। पुलिस ने उनकी घेरेबंदी की थी। जैसे ही दोनों आरोपित पहाड़ियों में पहुँचे, पुलिस ने उन्हें रुकने का इशारा किया। पुलिस का इशारा पाकर रुकने के बजाय दोनों आरोपितों ने तमंचे से पुलिस पर फायर झोंक दिया।

इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसमें एक आरोपित के पैर में गोली लगी और वह गिर गया। इसके बाद पुलिस ने मुनसैद और सैकूल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के पास से कट्टा, कारतूस और बाइक बरामद किए हैं। यह एनकाउंटर लगभग एक घंटे तक चला। इस दौरान 4-5 राउंड फायर हुए।

पहाड़ियों में छिपे हैं दंगाई, पुलिस कर रही है छापेमारी

हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हुए हमले के आरोपित पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए फरार हैं। इनमें से कई लोग अरावली की पहाड़ियों में छिपे हुए हैं। पुलिस इस इलाके में लगातार छापेमारी कर रही है। इसके लिए एजेंसियाँ ड्रोन की भी मदद ले रही हैं। पुलिस पहाड़ियों में छिपे 8 लोगों को अब तक गिरफ्तार कर चुकी है।

बता दें कि 31 जुलाई 2023 को शोभा यात्रा के दौरान नूहं में हिंदुओं पर हमला हुआ था। इसके बाद यह हिंसा आसपास के कई जिलों में हिंसा फैल गई थी। नूहं में अब धारा 144 लागू है और इंटरनेट पर बैन है। नूहं हिंसा में 6 लोगों की जान चली गई थी। वहीं, पुलिस ने अब तक 188 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुपों पर नजर

इस बीच पुलिस ने ऐसे 12 सोशल मीडिया ग्रुपों की जाँच शुरू की है, जो पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे हैं। इन ग्रुपों में राजस्थान और हरियाणा के लोग बड़ी संख्या में जुड़े हैं। इन सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से हिंसा को और अधिक फैलाई गई थीं। ऐसे ग्रुप फेसबुक, ट्विटर के साथ टेलीग्राम और वॉट्सऐप पर भी चल रहे हैं।

रतलाम में लगे ‘सिर तन से जुदा’ के नारे, इस्लामी भीड़ ने पुलिस चौकी घेरा: सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुआ घंटों चला बवाल

मध्य प्रदेश के रतलाम (Ratlam, Madhya Pradesh) में मुस्लिम समुदाय से जुड़े कुछ लोगों की भीड़ ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के विरोध में जमकर हंगामा किया। भीड़ ने चौकी को घेरने की कोशिश की। बाद में पूरी सड़क को जाम कर खूब नारेबाजी की गई। इस दौरान ‘सर तन से जुदा’ जैसे आपत्तिजनक नारे भी लगाए गए और जमकर बवाल काटा गया।

चौकी को घेरने की कोशिश, फिर सड़क पर लगे आपत्तिजनक नारे

रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक लड़की की आईडी से एक पोस्ट लिखी थी। इसे इस्लाम विरोधी बताकर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग सड़कों पर उतर आए। मुस्लिमों की भीड़ ने लड़की को बुधवार की रात में ही गिरफ्तार करने और उसके घर को बुलडोजर से गिराने की भी माँग की।

हंगामे को देखते हुए उस पोस्ट और प्रोफाइल के खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई है। इसके बाद कुछ लोगों ने भीड़ को समझाया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और लड़की को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके बावजूद सड़क पर जमकर नारेबाजी चलती रही।

पुलिस साइबर सेल की ले रही मदद

पोस्ट के विरोध में भीड़ ने रतलाम के दीन दयाल थाना इलाके में आने वाली हाट रोड पुलिस चौकी को घेर लिया और ‘सर तन से जुदा‘ के नारे लगाए। बताया जा रहा है कि भीड़ ने चौकी में घुसने की भी कोशिश की, लेकिन उसे रोक लिया गया। इस संबंध में ऑपइंडिया ने चौकी प्रभारी से बात की।

सालाखेड़ी चौकी प्रभारी मुकेश‎ सस्तिया ने ऑपइंडिया को बताया कि ये लोग सोशल मीडिया पर इस्लाम पर की गई पोस्ट से गुस्से में थे। ये आईडी किसकी है, इसका पता साइबर सेल की मदद से लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में अभी जाँच चल रही है और फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है।

‘सर तन से जुदा’ की नारेबाजी करने वालों कार्रवाई कब?

जब चौकी प्रभारी से पूछा गया कि सिर तन से जुदा के नारे लगाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई तो उन्होंने थाना इंचार्ज से बात करने के लिए कहा। ऑपइंडिया ने थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क करने की कई बार कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

वहीं, ‘सिर तन के जुदा…’ नारे लगाते वीडियो वायरल होने पर एडिशनल SP राकेश खाखा ने कहा, “इस तरह का VIDEO सामने आया है। इसकी पुष्टि के लिए जाँच की जा रही है।”

‘मम कर्मस्तवं, मम धर्मस्तवं’: अब संस्कृत में सुनिए ‘कर्मा’ का ‘ऐ वतन तेरे लिए’, बोले सुभाष घई- तरक्की के लिए अपनी संस्कृति और भाषा की समझ जरूरी

निर्माता-निर्देशक सुभाष घई की फिल्म ‘कर्मा’ 37 साल पहले रिलीज हुई थी। लेकिन इस फिल्म का गीत ‘ऐ वतन तेरे लिए’ आज भी लोगों को देश प्रेम के जज़्बे से भर देता है। देश की स्वतंत्रता की 76वीं वर्षगाँठ पर इस गाने का संस्कृत वर्जन रिलीज किया गया है।

9 अगस्त 2023 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने इस गाने का संस्कृत वर्जन रिलीज किया। इस मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ, सुभाष घई सहित कर्मा से जुड़े कई लोग मौजूद थे। गाने के संस्कृत वर्जन को आवाज कविता कृष्णमूर्ति ने दी है।

इस अवसर पर सुभाष घई ने कहा, “मुझे खुशी है कि सब लोग बहुत उत्साहित हैं। पूरे देश में इस बात की चर्चा है कि ‘कर्मा’ का गाना ‘ऐ वतन तेरे लिए’ संस्कृत में रिलीज हो रहा है। मै समझता हूँ कि अपना देश जिस तरह से तरक्की की तरफ जा रहा है, अपनी संस्कृति और भाषा को भी समझना बहुत जरूरी है।” उन्होंने कहा, “जब हम अपनी मातृ भाषा हिंदी, मराठी, बांग्ला में बात करते हैं और किसी सामने वाले को अंग्रेजी में बात करते देखते हैं तो हमारा ध्यान तुरंत उसकी तरफ चला जाता है, क्योंकि वह अंग्रेजी बोलता है। आज के 40 साल के बाद तो एक आम मजदूर भी अंग्रेजी में बात करेगा। तब यह कॉमन भाषा हो जाएगी। फिर जो संस्कृत में बात करेगा उसकी तरफ सब देखेंगे कि बड़ा बुद्धिमान व्यक्ति है।”

सुभाष घई ने कहा, “जब भी किसी कार्यक्रम में कहीं भी गया, लोगों को इस गीत को बहुत चाव से गाते हुए सुना। फिर हमने इस साल सोचा कि क्यों न इस गीत को दोबारा से रिकॉर्ड करें। मैं खुद 11वीं तक संस्कृत में पढ़ा हूँ। संस्कृत का अपना एक स्वाभिमान है, आपकी संस्कृति है, संस्कृत आपकी पूजा है। जन्म से लेकर मरण तक संस्कृत ही सुनते हैं। फिर मुझे ख्याल आया कि क्यों इस गाने को संस्कृत वर्जन में रिलीज किया जाए। ताकि आज की पीढ़ी संस्कृत भाषा से जुड़ सके।”

गौरतलब है कि फिल्म ‘कर्मा’ में जैकी श्रॉफ ने भी एक खास किरदार निभाया है। ‘ऐ वतन तेरे लिए’ के रिलीज के समय जैकी श्रॉफ भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, “मेरा नसीब है कि इस फिल्म से जुड़ा रहा हूँ। बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ कि यह गाना आज संस्कृत वर्जन में रिलीज हो रहा है। इस गाने से आज के युवाओं को संस्कृत सीखने की प्रेरणा मिलेगी। मेरा दुर्भाग्य रहा कि मैने संस्कृत नहीं पढ़ी, लेकिन अब मैं खुद संस्कृत सीखूँगा। ताकि लोगों को संस्कृत सीखने के लिए प्रेरित कर सकूँ।”

आप इस पूरे गीत को यहाँ सुन सकते हैं:

बता दें कि फिल्म कर्मा 8 अगस्त 1986 को रिलीज हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी माना दो विधान नहीं चलेगा, कहा- 1947 से पूरे देश में एक ही संविधान: जानिए 370 पर सुनवाई के दौरान क्या हुआ

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बुधवार (9 अगस्त 2023) को चौथे दिन जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान 4 घंटे 40 मिनट तक चली जिरह के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट्स से कई अहम सवाल किए।

कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता के एडवोकेट से कहा कि साल 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था, तभी से पूरे देश में एक ही संविधान लागू है। इस पर याचिकाकर्ता की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने दलील दी कि इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छा के बगैर खत्‍म नहीं किया जा सकता।

इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) चंद्रचूड़ ने कहा, “हमें ध्यान देना चाहिए कि भारतीय संविधान जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा की बात करता है, लेकिन यह जम्मू और कश्मीर के संविधान का बिल्कुल भी जिक्र नहीं करता है।”

दरअसल, इस मामले में याचिकाकर्ता एम इकबाल खान की तरफ से जिरह कर रहे सीनियर एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम ने कोर्ट में दलील दी कि भारत में विलय के वक्त जम्मू-कश्मीर किसी अन्य राज्य जैसा नहीं था। उसका खुद का संविधान था। देश के संविधान में विधानसभा और संविधान सभा दोनों को मान्यता प्राप्त है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सुब्रमण्यम ने कहा कि मूल ढाँचा दोनों के संविधान से निकाला जाएगा। डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान के संघीय होने और राज्यों को विशेष अधिकार की बात कही थी। आर्टिकल 370 के खंड 1 के तहत शक्ति का उद्देश्य आपसी समझ पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और भारत के बीच यह व्यवस्था संघवाद का एक समझौता थी। संघवाद एक अलग तरह का सामाजिक अनुबंध है। 370 इस संबंध का ही एक उदाहरण है। इस संघीय सिद्धांत को अनुच्छेद 370 के अंतर्गत ही पढ़ा जाना चाहिए। इसे निरस्त नहीं किया जा सकता है। धारा 370 संविधान के प्रावधानों का क्रियान्वयन है।

इस दौरान एडवोकेट सुब्रमण्यम ने पूछा क्या जम्मू-कश्मीर संविधान सभा को संविधान बनाने का काम नहीं सौंपा गया था? इस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 1957 के बाद न तो जम्मू-कश्मीर की विधानसभा और न ही देश की संसद ने जम्मू-कश्मीर संविधान को साफ तौर से भारतीय संविधान के दायरे में लाने के लिए देश के संविधान में संशोधन करने के बारे में कभी सोचा।

इस पर सुब्रमण्यम ने दलील दी कि जम्मू-कश्मीर का संविधान जम्मू-कश्मीर के लिए है। यह एक संविधान है क्योंकि इसे एक संविधान सभा ने बनाया था। उन्होंने ये भी कहा कि
जम्मू-कश्मीर संविधान में संशोधन करने की शक्ति केवल उस निकाय के पास हो सकती है जिसे संविधान सभा ने बनाया हो। यही नियम है।

एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, “मैं इस बात पर विचार करने का आग्रह करता हूँ कि विधानसभा और संविधान सभा, दोनों को हमारे संविधान में मान्यता प्राप्त है। मूल संरचना दोनों संविधानों से ली जाएगी।”

‘जो अपनाया गया वह भारतीय संविधान था’

इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा, “जब हमने 1954 के आदेश के पहले भाग को पढ़ा तो यह साफ हो गया कि जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान को अपवादों और संशोधनों के साथ अपनाया गया था। आप इसे जम्मू-कश्मीर का संविधान कह सकते हैं, लेकिन जो अपनाया गया वह भारतीय संविधान था।”

जस्टिस खन्ना ने आगे कहा कि आर्टिकल 370 बहुत लचीला है। आम तौर पर संविधान वक्त और जगह के साथ लचीले होते हैं क्योंकि वे एक बार बनते हैं, लेकिन लंबे वक्त तक बने रहते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि 370 को देखें तो यह कहता है कि इसमें संशोधन किया जा सकता है। जम्मू-कश्मीर पर लागू होने वाले भारत के संविधान में जो कुछ भी हो रहा है, उसे आत्मसात कर लिया जाए। इस पर एडवोकेट सुब्रमण्यम ने दलील दी कि 370 की एकतरफा व्याख्या करना संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर और भारत के बीच खास रिश्ता

इसके बाद याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट जफर शाह ने जिरह आगे बढ़ाई। उन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 को समझने के लिए अलग-अलग नजरिए हैं। जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने जब भारत के साथ संधि की तो उन्होंने रक्षा, संचार और विदेश मामलों के अलावा बाकी शक्तियाँ अपने पास रखीं। इसमें संप्रभुता की शक्ति यानी कानून बनाने की शक्ति भी शामिल है। वह दो देशों के बीच संधि थी।

एडवोकेट शाह ने आगे कहा कि महाराजा चाहते तो जम्मू-कश्मीर का भारत में पूरी तरह विलय कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर और भारत के बीच खास रिश्ता है। इस दौरान सीजेआई ने गुरुवार 11 अगस्त को आगे सुनवाई की बात कही। इससे पहले 2, 3 और 8 अगस्त को याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। इन तीनों दिन एडवोकेट कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से जिरह की थी।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 8 अगस्त को हुई सुनवाई में कहा था कि आर्टिकल 370 खुद कहता है कि इसे खत्म किया जा सकता है। इस पर सिब्बल ने जवाब दिया था कि ‘370 में आप बदलाव नहीं कर सकते, इसे हटाना तो भूल ही जाइए’। एक विधानसभा को संविधान सभा में तब्दील नहीं किया जा सकता। इसके जवाब में सीजेआई ने कहा कि आप सही हैं, इसलिए सरकार के पास खुद 370 में बदलाव करने की कोई पावर नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ अक्टूबर 2020 से आर्टिकल 370 खत्म करने के राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया था।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को चुनौती देते हुए आईएएस शाह फैसल सहित दो दर्जन राजनीतिक दलों, निजी लोगों, वकीलों, कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाएँ दायर की हैं। मार्च 2020 में 5 जजों की संविधान पीठ ने केंद्र के फैसले को संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को 7 न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया था।

इस मामले में 14 दिसंबर 2022 को सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने एक बार फिर 5 जजों की पीठ बनाकर सुनवाई की बात कही थी। इसके बाद 11 जुलाई 2023 को सीजेआई चंद्रचूड़ ने 2 अगस्त से 5 जजों की पीठ के सामने नियमित आधार पर इस मामले की सुनवाई की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 पर 3 साल बाद सुनवाई हो रही है। सुनवाई करने वाले पाँच जजों की बेंच में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एस के कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं।

जिस कॉलेज में एक्टर प्रकाश राज का हुआ ‘प्राइवेट इवेंट’, उस परिसर को छात्रों ने गोमूत्र से किया शुद्ध: कर्नाटक के शिवमोगा का मामला

दक्षिण भारतीय फिल्मों के एक्टर प्रकाश राज (Prakash Raj) ने कर्नाटक के शिवमोगा के एक कॉलेज में हाल ही में एक कार्यक्रम किया था। इस कार्यक्रम के बाद 8 अगस्त 2023 दिन मंगलवार को वहाँ के विद्यार्थियों ने परिसर को गोमूत्र से साफ किया है। दरअसल, विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया था।

मामला शिवमोगा जिले के एम विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स का है। कुछ दिन पहले कॉलेज के एक हॉल में ‘डायलॉग ऑन थिएटर, सिनेमा एंड सोसायटी’ विषय पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस प्राइवेट इवेंट में कॉलेज के विद्यार्थियों को आमंत्रित नहीं किया गया था।

इसके बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने इसका विरोध किया था और कहा था कि एक प्राइवेट कार्यक्रम कॉलेज परिसर में कैसे किया जा सकता है। विद्यार्थियों के इस कार्यक्रम का अन्य लोगों ने भी विरोध किया था। विरोध को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेड लगाकर विद्यार्थियों एवं बाहरी लोगों को कॉलेज में घुसने से रोक दिया था।

इन सब विवादों के बाद इस हॉल को गोमूत्र से साफ किया गया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि प्रकाश राज का कार्यक्रम खत्‍म होने के बाद कॉलेज के छात्रों ने गोमूत्र से धो करके कैंपस का शुद्धिकरण करने की बात कही।

बताते चलें कि प्रकाश राज हिंदुओं और केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ समय-समय पर विवादित टिप्पणी करते रहे हैं। साल 2017 मे प्रकाश राज ने एक ट्वीट करके कहा था, “नैतिकता के नाम पर युवक-युवती से मारपीट आतंक नहीं है तो क्‍या है? लिंचिंग के नाम पर कानून हाथ में लेना आतंकवाद नहीं है तो क्‍या है? गाली गलौच के साथ किसी को ट्रोल करना और उन्‍हें चुप करा देना आतंकवाद नहीं है तो क्‍या है?”

‘ज्ञानवापी सर्वे पर तुरंत लगे रोक’ – अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी पहुँची कोर्ट, ASI सर्वे टीम के खर्च वाला ‘कुतर्क’

वाराणसी में चल रहे ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे पर तुरंत रोक लगाने की माँग को लेकर अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी फिर से कोर्ट पहुँच गई है। मस्जिद कमिटी ने जिला जज की कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए हस्तक्षेप की माँग की और कहा है कि मुकदमे के वादी पक्ष (पूजा की माँग को लेकर कोर्ट पहुँचने वाली महिलाओं के पक्ष) ने एएसआई की सर्वे टीम का खर्चा पानी नहीं दिया है। इसलिए अब सर्वे पर रोक लगाई जाए।

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी वही पक्ष है, जो ज्ञानवापी की देखदेख करती है। इस बीच, बुधवार (9 अगस्त 2023) को ज्ञानवापी सर्वे के मीडिया कवरेज पर कोर्ट ने रोक लगा दी। ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे पर तुरंत रोक लगाने की माँग वाली रिपोर्ट लाइव लॉ ने प्रकाशित की है।

शृंगार गौरी मामले के हिंदू पक्ष को लेकर दायर की याचिका

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी ने अपनी याचिका में 21 जुलाई 2023 के कोर्ट के आदेश को आधार बनाया है, जिसमें कहा गया था कि एएसआई की सर्वे टीम का खर्च शिकायती पक्ष उठाएगा। यहाँ शृंगार गौरी की पूजा अर्चना को लेकर केस दायर किया गया था, जिसके बाद ज्ञानवापी का सर्वे शुरू हुआ। अब अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी ने कहा है कि जनरल सिविल रूल के नियम 70 के तहत एएसआई की टीम का खर्च नहीं दिया गया है, ऐसे में तुरंत सर्वे को रोकने का आदेश जारी किया जाए।

अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमिटी ने इस याचिका में सर्वे टीम की टाइमिंग पर भी उँगली उठाई है। कमिटी ने कहा है कि सर्वे के आदेश में कोई समय सीमा नहीं बताई गई थी, ऐसे में सर्वे टीम कभी भी अपना काम शुरू कर देती है। इनका कहना है कि सर्वे टीम के काम करने के समय और तरीकों को लेकर कोर्ट कोई आदेश जारी करे, इसलिए भी इस सर्वे पर रोक लगाना जरूरी है। इस मामले में अब हिंदू पक्ष 17 अगस्त को अपनी बात कोर्ट में रखेगा।

ज्ञानवापी सर्वे की मीडिया कवरेज पर रोक

बता दें कि 9 अगस्त को वाराणसी कोर्ट ने आदेश दिया है कि ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे की ऑन स्पॉट मीडिया कवरेज नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने सर्वे टीम के सदस्यों को भी निर्देश दिया है कि वो सर्वे से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया के साथ साझा न करें। जिजा जज एके विश्वेश ने ज्ञानवापी मैनेजमेंट कमिटी की याचिका पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिया है। कमिटी ने एएसआई सर्वे की मीडिया कवरेज पर लोग लगाने की माँग की थी।

इस मामले में हिंदू पक्ष के एक वकील मदन मोहन यादव ने कहा कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि सर्वे वाली जगह की ऑन स्पॉट रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए, साथ ही सर्वे की टीम के सदस्य भी मीडिया से बातचीत न करें। इससे जुड़ी कोई भी जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर न की जाए, क्योंकि इससे शांति व्यवस्था के भंग होने का खतरा है। मदन मोहन यादव इस मामले की सुनवाई के समय कोर्ट में मौजूद थे।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास चला बुलडोजर: अतिक्रमण कर लोगों ने बनाए थे घर, नोटिस भेजने पर भी नहीं किया खाली

उत्तर प्रदेश के मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के पास रेलवे की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को बुलडोजर से ढहाया गया। दरअसल रेलवे प्रशासन ने जून में ही नई बस्ती में रहने वालों को जगह खाली करने के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन इसके बाद भी वहाँ लोगों ने जमीन खाली नहीं की। इस वजह से वहाँ ये कार्रवाई की गई। बुधवार (8 अगस्त) को पुलिस टीम के साथ पहुँचे जीआरपी और आरपीएफ के जवानों की मौजूदगी में ये एक्शन लिया गया।

श्री कृष्ण जन्मभूमि और अतिक्रमण

“इस जगह को खाली कर दें, यहाँ बने घरों को ढहाया जाएगा” की आवाज जैसे ही श्री कृष्ण जन्मभूमि के पीछे बसी नई बस्ती के बाशिंदों ने सुनी तो वो हैरान रह गए। इसके साथ ही लोगों ने वहाँ प्रशासनिक अमले के साथ बड़े बुलडोजर को खड़े पाया। वैसे सबको पता था कि ये कार्रवाई होगी, फिर भी लोगों ने समय रहते इंतजाम नहीं किया।

दरअसल यहाँ रहने वाले लोगों को रेलवे की तरफ से जमीन खाली करने को लेकर बीती 7 जून को नोटिस भेजा गया था और इस जगह को एक महीने के अंदर खाली करने को कहा था, लेकिन लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

मजबूरन रेलवे को बुलडोजर लाकर इस अवैध अतिक्रमण को ढहाने का एक्शन लेना पड़ा। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने कहा कि रेलवे की जमीन पर घरों के तौर पर किए इस अतिक्रमणों को मौजूदा मीटर गेज रेलवे ट्रैक को ब्रॉड गेज ट्रैक में बदलने की पहल के हिस्से के तौर पर हटा दिया गया था, जिससे मथुरा और वृंदावन के बीच कनेक्शन की सुविधा मिल सके।

नई बस्ती में बुलडोजर से घरों को धराशायी करने के दौरान जीआरपी, आरपीएफ सहित भारी संख्या में सिविल पुलिस मौजूद रही। साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट, एसडीएम और रेलवे अधिकारी भी मौजूद रहे।

लोगों ने कहा – ‘सालों से यहाँ रह रहे’

वहीं प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण हटाने में कोई प्रतिरोध नहीं हुआ। नई बस्ती के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र के कुछ लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई “दहशत और खौफ” पैदा करने की एक कोशिश है। इस मामले में इस बस्ती में रहने वाले याचिकाकर्ता 66 साल के याकूब ने तर्क दिया कि रेलवे के पास चल रही कानूनी कार्यवाही के कारण रेलवे ट्रैक के किनारे लगभग 200 घरों को तोड़ने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने बताया, “हमारे पूर्वजों ने 1888 में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान रेलवे को इस शर्त के साथ जमीन दी थी कि यदि इसका इस्तेमाल नहीं किया गया तो इसे वापस कर दिया जाएगा। हैरानी की बात यह है कि रेलवे ने जिस जमीन पर अपना दावा किया है, उसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है।”

इस दौरान वहाँ के लोग जमीन के मालिकाना हक की बात भी कहते रहे। एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई बस्ती में रहने वाले लोगों का कहना है कि वो सालों से यहाँ रह रहे हैं। उनके पास जमीन के दस्तावेज भी हैं। लोगों ने रेलवे के नोटिस पर यह जगह खाली न करने को लेकर कहा है कि उन्होंने ये जमीन खरीदी है। उनका कहना है कि जमीन खाली कराने के लिए रेलवे को उन्हें मुआवजे की पेशकश करनी चाहिए।

पाकिस्तान में संसद भंग: अमेरिका ने गिराई इमरान खान की सरकार, लीक हुई रिपोर्ट में डिटेल, भारत से भी कनेक्शन?

पाकिस्तान की राजनीति के लिए 9 अगस्त की रात बड़ी महत्वपूर्ण रही। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सभा मतलब पाकिस्तान की संसद को भंग कर दिया है और चुनाव के लिए रास्ता खोल दिया है। खास बात ये है कि शहबाज शरीफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे इमरान खान को जेल भेजे जाने के बाद अब उनके सामने कोई बड़ी चुनौती बची नहीं है। पाकिस्तान के दूसरे प्रमुख राजनीतिक दल पीपीपी के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी खुद शाहबाज के जूनियर पार्टनर बन कर रह गए हैं, ऐसे में शाहबाज शरीफ को उम्मीद है कि वो चुनाव के बाद फिर से सत्ता में आएँगे।

भारत की तारीफ करने पर अमेरिका को लगी मिर्ची?

इस बीच खबर ये आ रही है कि अमेरिकी दबाव की वजह से इमरान खान को सत्ता से हटाया गया। अमेरिकी दबाव के पीछे यूक्रेन-रूस युद्ध को कारण माना जा रहा है।

इमरान खान यूक्रेन-रूस युद्ध में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलेआम तारीफ करते हुए भारतीय विदेश नीति की प्रशंसा करते थे। वहीं, भारत की विदेश नीति किसी से छिपी नहीं है कि उसने यूक्रेन पर रूसी हमले के मामले में किस तरह का स्टैंड लिया है। वहीं, इमरान खान को हटाने के बाद पाकिस्तान ने खुद को न्यूट्रल दिखाया है।

इमरान खान को सत्ता से हटाने की साजिश का खुलासा

पाकिस्तान में इमरान खान कुछ समय पहले तक सत्ता में थे। उनकी सरकार को अस्थिर करने के लिए गहरी साजिश की जड़ों का खुलासा हुआ है। अमेरिकी दबाव के कारण ही वहाँ महँगाई बेतहाशा बढ़ाई गई। बड़े-बड़े मार्च निकाले गए। सभी विपक्षी एकजुट हो गए। इन सबके बीच इमरान खान मोदी सरकार की नीतियों (खासकर विदेश नीति) की तारीफ करते रहे।

मोदी सरकार की देखादेखी में इमरान खान सस्ते तेल के चक्कर में रूस तक पहुँच गए। अंतत: पाकिस्तान की राजनीति में वो अलग-थलग पड़ गए। उनके ही साथियों ने साथ छोड़ा, तो सरकार गिर गई। उनके खिलाफ 140 मामले चलाए जा रहे हैं। इस दौरान उन्हें गोली मारी गई। जेल में ठूँस दिया गया। जमानत लेकर बाहर निकले तो मात्र कुछ दिनों पहले ही उन्हें तोशाखाना मामले में फिर से जेल भेज दिया गया।

अमेरिका ने सत्ता से हटाने में निभाया बड़ा रोल

इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के मामले में कुछ पेपर लीक हुए हैं। इनसे जानकारी मिल रही है कि ऐसा अमेरिकी दबाव में किया गया, ताकि वो उक्रेन पर पाकिस्तान के स्टैंड को बदल सके।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में लीक हुए दस्तावेजों के हवाले से लिखा गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तानी राजनयिकों से कहा था कि इमरान खान का स्टैंड भले ही न्यूट्रल हो, लेकिन वो न्यूट्रल दिखता नहीं है। इसी रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई।

इमरान खान को बुरी तरह से तोड़ दिया गया

अब हकीकत ये है कि इमरान खान तीन साल की सजा मिलने के बाद से जेल में हैं। इसी साल मई और अगस्त में वो दो बार जेल गए हैं लेकिन दोनों बार में बहुत अंतर आ चुका है। इमरान खान को जब 9 मई को जेल भेजा गया था, तब पूरे देश में बवाल हो गया था। उनके घर को समर्थकों ने किले में बदल दिया था। गिरफ्तारी के लिए पुलिस और सेना को लंबा अभियान चलाना पड़ा था। इसके विरोध में सेना के ठिकानों तक पर लोगों ने हमले किए थे।

अब जब इमरान खान जेल गए हैं तो स्थिति अलग है। उनकी पार्टी के लोग साथ छोड़कर चले गए हैं। इमरान अकेले से पड़ गए। विरोध का सुर दबा हुआ है। बड़े स्तर पर प्रदर्शन तो छोड़िए, उनकी गिरफ्तारी के समय 100-200 कार्यकर्ता भी उनके घर नहीं पहुँचे। अब समझिए कि किस तरह से इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई को नेस्तनाबूद करने के बाद शहबाज शरीफ ने चुनाव की घोषणा की है।

‘मुझे बाहर निकालो, मैं यहाँ नहीं रहना चाहता’

इमरान खान के वकीलों ने 8 अगस्त को 2 घंटे तक उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने अपने वकीलों से कहा कि उन्हें बाहर निकाला जाए, क्योंकि वो इस जगह पर नहीं रहना चाहते।

इमरान खान को टाइप सी जेल में रखा गया है। यहाँ उन्हें राजनीतिक कैदियों वाली अखबार, टीवी जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है, जबकि इमरान खान देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। उनकी हिम्मत को न सिर्फ तोड़ दिया गया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास तक को मटियामेट कर दिया गया है।

90 दिनों में पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया, लौट पाएँगे इमरान?

शहबाज शरीफ अगले तीन दिन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री की भूमिका में रहेंगे, तब तक पाकिस्तान में कार्यवाहक प्रधानमंत्री की नियुक्ति हो जाएगी। पाकिस्तान के संविधान में व्यवस्था है कि सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद और संसद भंग होने की सूरत में कार्यवाहक प्रधानमंत्री की नियुक्ति होती है, ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। हालाँकि ऐसा हकीकत में कभी पाकिस्तान के साथ हुआ नहीं, क्योंकि पाकिस्तान में निष्पक्ष चुनाव के नाम पर सेना द्वारा चुनी गई पार्टियों के लोग सत्ता में काबिज होते रहे हैं।

बहरहाल, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने कार्यकाल की 12 अगस्त की समाप्ति से पहले प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 51-1 के तहत संसद भंग कर दी है। अब पाकिस्तान में कोई मंत्री भी नहीं है। अगले तीन दिन में कार्यवाहक प्रधानमंत्री की नियुक्ति हो जाएगी, जिसके पास चुनाव कराने के लिए 90 दिनों का समय होगा।

इधर ‘Jailer’ ने ‘OMG 2’ और ‘ग़दर 2’ दोनों को पीछे छोड़ा, उधर एकांत साधना के लिए हिमालय पहुँचे सुपरस्टार रजनीकांत: USA में भी फिल्म की धूम

दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में सुपरस्टार रजनीकांत का क्रेज किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। उनकी फिल्म ‘Jailer’ स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज हो रही है। हिंदी दर्शक सनी देओल की ‘ग़दर 2’ और अक्षय कुमार की ‘OMG 2’ को लेकर लड़-भिड़ रहे हैं, लेकिन आप ये जान कर चौंक जाएँगे कि ‘जेलर’ इन दोनों फिल्मों से काफी आगे निकल गई है। इसने एडवांस बुकिंग के मामले में भी रिकॉर्ड बना दिया है। फिल्म काफी ज़्यादा कमाई करने वाली है।

रजनीकांत के कई फैंस तो सिर्फ इसीलिए बेंगलुरु आ रहे हैं, ताकि वो सुबह 6 बजे का पहला शो अटेंड कर सकें। कारण ये है कि तमिलनाडु में इतना सुबह कोई शो है ही नहीं। ये जानने वाली बात है कि फिल्मों में आने से पहले कर्नाटक की रजनीकांत की कर्मभूमि रही है क्योंकि वो यहाँ की बस में कंडक्टर थे। फिल्म में कन्नड़ अभिनेता शिवा राजकुमार भी हैं, ऐसे में कर्नाटक में भी इसे लेकर बड़ा क्रेज देखा जा रहा है। इसी तरह मलयालम के सबसे बड़े स्टार मोहनलाल भी इसमें हैं।

अमेरिका में फिल्म ने रिलीज से पहले ही 1 मिलियन डॉलर (8.28 करोड़ रुपए) की कमाई सुनिश्चित कर ली है। इतना ही नहीं, अमेरिका में इस साल इस आँकड़े को पार करने वाली ये पहली भारतीय फिल्म होगी। उम्मीद है कि रिलीज से पहले ही ‘जेलर’ 2 लाख टिकट बेच लेगी। ये केवल नेशनल चेन्स का आँकड़ा है। ‘ग़दर 2’ ने भी लगभग 1 लाख टिकटें बेचीं हैं। वहीं ‘OMG 2’ काफी पीछे है। लेकिन, ‘Jailer’ के सामने ये दोनों ही फ़िल्में कही नहीं ठहरती।

सिर्फ पहले दिन के लिए ही केवल तमिलनाडु में ‘जेलर’ ने 13 करोड़ रुपए की कमाई सुनिश्चित कर ली है। ट्रेड पंडितों की मानें तो फिल्म दुनिया भर में पहले दिन 50 करोड़ रुपए के आँकड़े को आसानी से पार कर सकती है। इसमें से आधे से ज़्यादा सिर्फ तमिलनाडु से आएँगे। उधर 4 वर्षों बाद सुपरस्टार रजनीकांत हिमालय पर साधने के लिए निकल गए हैं। वो महावतार बाबाजी के भक्त हैं। पहले वो हर साल वहाँ जाया करते थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण ये गैप हो गया।

न्यूजक्लिक के एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ की दिल्ली स्थित फ्लैट सील: ED ने की कार्रवाई, प्रेस क्लब ने बताया- जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा

वामपंथी प्रोपगेंडा वेबसाइट न्यूजक्लिक की फंडिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की है। ED ने 9 अगस्त 2023 दिन बुधवार को न्यूजक्लिक के एडिटर इन चीफ प्रबीर पुरकायस्थ की दिल्ली स्थित एक फ्लैट को जब्त कर लिया है। वहीं, प्रेस क्लब ऑफ ने न्यूजक्लिक पर एजेंसियों की कार्रवाई का विरोध किया है।

इससे पहले सितंबर 2021 में केंद्रीय एजेंसी ने पुरकायस्थ के परिसर पर छापेमारी की थी। ईडी की तलाशी अभियान दिल्ली एनसीआर में स्थित न्यूज़क्लिक स्टूडियो और उससे संबद्ध संस्थाओं के साथ-साथ इसके निदेशकों और शेयरधारकों के कार्यालयों तक फैला हुआ है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है।

ED की हालिया कदम न्यूजक्लिक समाचार पोर्टल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जाँच के हिस्से के रूप में आया है। एजेंसी इस मामले में आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि तलाशी के दौरान विदेशी मुद्रा, संभावित निहितार्थ वाले दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य सहित महत्वपूर्ण निष्कर्ष मिले हैं।

उधर, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर न्यूज़क्लिक और उससे जुड़े पत्रकारों को निशाना बनाए जाने की निंदा की है। प्रेस क्लब ने इसे पत्रकारों के खिलाफ टारगेटेड कैंपेन बताया है।

प्रेस क्लब ने अपने बयान में कहा, “हाल में सांसद सहित कुछ वरिष्ठ राजनेताओं द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि न्यूजपोर्टल पड़ोसी देश माउथपीस के रूप में काम कर रहा है, चिंतनीय एवं निंदनीय है। अन्य मीडिया हाउस की तरह न्यूजक्लिक भी सरकार के कामकाज का गहन विश्लेषण करता है। इससे वह देशद्रोही या विदेशी का टूल नहीं हो जाता।”

प्रेस क्लब ने आगे कहा कि अगर न्यूजक्लिक पोर्टल की फंडिंग के स्रोत को लेकर जाँच हो रही है तो इसी तरह पारदर्शिता उन न्यूज पोर्टलों के लिए भी होनी चाहिए, जो सरकार समर्थक हैं और उसके कामों का समर्थन करती हैं। ऐसे सभी पोर्टल की फंडिंग की जाँच करके उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

बता दें कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया सेलेक्टिव मामलों पर ही बोलता है और उनकी निंदा करता है। प्रबीर पुरकायस्थ के पहले प्रेस क्लब ने विवेक रघुवंशी की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया था। विवेक पर जासूसी का आरोप है। वहीं, एक और पत्रकार राजीव शर्मा पर ही जासूसी और देशद्रोह के आरोप हैं।

प्रेस क्लब उन पत्रकारों के लिए कभी आवाज नहीं उठाता, जो माफियाओं एवं अपराधियों के शिकार बन जाते हैं, क्योंकि ये छोटे शहरों एवं कस्बों के पत्रकार होते हैं और ये प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जैसे एलीट क्लास के नैरेटिव को सही नहीं लगते।