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‘अभद्र इशारा, महिला सांसदों को फ्लाइंग किस’: स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को बताया ‘नारी विरोधी’, कहा- आज देश को उनके ‘खानदानी लक्षण’ का पता चला

संसद में राहुल गाँधी अपनी बात कह कर चलते बने, उनके उत्तर में स्मृति ईरानी ने क्या कहा इसे सुनने के लिए वो सदन में मौजूद नहीं थे। जहाँ राहुल गाँधी ने ‘मणिपुर में भारत माता की हत्या’ और ‘हनुमान ने लंका नहीं जलाई थी’ जैसी बातें की, वहीं स्मृति ईरानी ने उन्हें जवाब देते हुए कश्मीर में गिरिजा टिक्कू और बेंगलुरु में स्नेहलता रेड्डी के साथ हुई क्रूरता की याद दिलाई। इस दौरान स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को महिला विरोधी भी करार दिया।

‘राहुल गाँधी महिला विरोधी हैं’: बिना नाम लिए स्मृति ईरानी ने साधा निशाना

स्मृति ईरानी ने कहा, “जिनको आज मुझसे पहले वक्तव्य देने का अधिकार दिया गया, उन्होंने जाते-जाते एक अभद्र लक्षण के दर्शन कराए। वो एक महिला विरोधी व्यक्ति हैं, जो संसद में फ़्लाइंग किस दे सकते हैं, वो भी जहाँ 6 महिला संसदें बैठी हुई हों। ऐसी गरिमा-विहीन आचरण को इस सदन में कभी नहीं देखा गया। ये उस खानदान के लक्षण हैं, ये आज सदन में देश को पता चल गया। लेकिन वो जहाँ गए हैं, वहाँ पर क्या हालात हैं?”

बता दें कि राहुल गाँधी संसद में अपना भाषण खत्म कर सीधे राजस्थान गए, जहाँ वो एक ट्राइबल रैली में शामिल हो रहे हैं। स्मृति ईरानी ने राजस्थान की मीडिया रिपोर्ट्स के हवाला देते हुए कहा कि वहाँ की कॉन्ग्रेस की सरकार देश की तिजोरी से पैसा लूट रही है। स्मृति ईरानी ने कहा कि इनका सरकार महिला-उत्थान से नहीं है, महिलाओं के बारे में वो क्या सोचते हैं इस बारे में उनके नेता ने जाते-जाते बता दिया है।

स्मृति ईरानी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता का सरोकार चीन से है। केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि चीन में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता बहुत रुचि लेते हैं। उन्होंने इस दौरान बताया कि चीन में आयोजित ’31st यूनिवर्सिटी गेम्स’ में भारत को इस बार 26 (11 स्वर्ण, 5 रजत पदक) मेडल मिले और ये रिकॉर्ड हिंदुस्तान के बच्चों ने स्थापित किया। 1959 से अब तक मात्र 18 मेडल ही मिल पाए थे। स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत माता के टुकड़ों के लिए ताली बजाने वाले भारत की उपलब्धि पर तो ताली बजा दें।

संसद में स्मृति ईरानी का पलटवार

उन्होंने कहा कि भारत माँ की हत्या पर कॉन्ग्रेस ने ताली पीट कर बता दिया है कि गद्दारी किसके मन में है। उन्होंने कहा – मणिपुर खंडित नहीं है, देश का अंग है। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस अपने गठबंधन साथी डीएमके के हटा द्वारा भारत पर दिए बयान का खंडन करे, कश्मीर पर रेफरेंडम की बात करने वाले कॉन्ग्रेस नेता की निंदा करें। उन्होंने कहा कि आप भारत नहीं हैं, क्योंकि आप भ्रष्टाचार और अयोग्यता का प्रतीक हैं। स्मृति ईरानी के अनुसार, यूपीए के नेता ने तमिलनाडु में भारत विरोधी बयान दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कश्मीर में राहुल गाँधी अपने परिजनों के साथ बर्फ खेल रहे थे, ये इसीलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा कि इसी की वजह से कश्मीर की बेटियों को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता था तो उन्हें कानून का सहारा नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर ब्याही जाने पर उन बेटियों को पैतृक संपत्ति पर हक़ नहीं मिलता था। 14 से कम उम्र की बच्चियों का विवाह होता था तो उन्हें कानून का संरक्षण नहीं मिलता था।

स्मृति ईरानी ने इस दौरान कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार और गिरिजा टिक्कू के साथ हुई वारदात को भी याद किया। इस दौरान राहुल गाँधी सदन से निकल कर राजस्थान से निकल गए। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि कैसे कश्मीर में गिरिजा टिक्कू को आड़ी से काट डाला गया था, राजस्थान के भीलवाड़ा में बच्ची के साथ गैंगरेप कर के उसे काटा गया और भट्ठी में डाल दिया गया। उन्होंने पूछा कि आज जो जोर-चोर से चिल्ला रहे हैं, तब उन्होंने न्याय की गुहार नहीं लगाई जब पश्चिम बंगाल में 60 साल की महिला का गैंगरेप हुआ।

‘कश्मीर में धारा 370 हटाने से पहले Brexit की तरह जनमत संग्रह होना चाहिए था’: कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील, CJI बोले- यहाँ संवैधानिक लोकतंत्र है

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटे हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी वैधानिकता पर सवाल अब भी उठाए जा रहे हैं। इस हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है। मंगलवार (08-08-2023) को कॉन्ग्रेस नेता एवं सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन की तरफ से कोर्ट में दलीलें दीं।

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार को आर्टिकल 370 को हटाने से पहले जनता से राय लेनी चाहिए थी, क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश हैं। सारे फैसले जनता के द्वारा होने चाहिए। कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ से अलग होने वाले कानून को बनाने और किसी फैसले पर पहुँचने से पहले जनमत संग्रह कराया था, जिसे ब्रेक्जिट कहा जाता है।

सीजेआई की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय पीठ कर रही सुनवाई

लाइव लॉ के अनुसार, इस मामले की सुनवाई सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में संवैधानिक बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवाई और जस्टिस सूर्य कांत शामिल हैं। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “मिस्टर सिब्बल आप हिंदुस्तान में रहते हैं, जिसका एक संविधान है। उस संविधान के मुताबिक, जनमत संग्रह यानि कि रेफरेंडम जैसी कोई बात लिखी ही नहीं है।”

कपिल सिब्बल की सारी दलीलें खारिज

सिब्बल ने कहा कि ब्रेक्जिट जैसा कानून ब्रिटेन में भी नहीं था, लेकिन आम जनता की रायशुमारी की गई। ऐसा ही कुछ जम्मू-कश्मीर के मामले में होना चाहिए था। कपिल सिब्बल ने कहा कि आर्टिकल 370 को स्थाई मानते हुए कोई लचीला कदम उठाना चाहिए था।

सिब्बल ने कहा कि चूँकि संविधान सभा देश में 1957 के बाद से ही नहीं है, ऐसे में आर्टिकल 370 को स्थाई माना जाना चाहिए था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि संवैधानिक लोकतंत्र में लोगों की राय जानने का काम स्थापित संस्थाओं के जरिए किया जाना चाहिए। इसलिए यहाँ ब्रेक्जिट जैसे जनमत संग्रह के बारे में नहीं सोच सकते।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल की उस दलील को माना कि आर्टिकल 370 को हटाने का फैसला पूरी तरह से राजनीतिक फैसला था। हालाँकि, सु्प्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि भारत के संविधान में जनमत संग्रह जैसी कोई बात भी नहीं है।

4 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है

बता दें कि 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किया गया था। संविधान में जम्मू-कश्मीर को भारत से जोड़ने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। साथ ही जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था।

हालाँकि, 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में लागू होने वाली संविधान की धारा 370 एवं 35A को निरस्त कर दिया थ। इसके साथ ही राज्य का दो हिस्सों में बाँट दिया गया था। दोनों हिस्सों को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। सरकार ने कहा था कि समय आने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।

भीलवाड़ा, स्नेहलता रेड्डी, गिरिजा टिक्कू… स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस को याद दिलाए सारे कर्म, कहा- राहुल गाँधी की ‘भारत माता की हत्या’ पर कॉन्ग्रेसियों ने ताली बजाई

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में राहुल गाँधी के संबोधन का उत्तर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विपक्ष भारत नहीं है, भारत भ्रष्टाचार नहीं है और विपक्षी नेताओं को याद रखना चाहिए कि अंग्रेजों, वंशवाद और भ्रष्टाचार को ‘क्विट इंडिया’ कहा गया था। स्मृति ईरानी ने लोकसभा अध्यक्ष के आसान के प्रति बर्ताव का खंडन करते हुए कहा कि देश के इतिहास में पहली बार भारत माँ की हत्या की बात की गई और कॉन्ग्रेस पार्टी तालियाँ बजाती रही।

उन्होंने कहा कि भारत माँ की हत्या पर कॉन्ग्रेस ने ताली पीट कर बता दिया है कि गद्दारी किसके मन में है। उन्होंने कहा – मणिपुर खंडित नहीं है, देश का अंग है। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस अपने गठबंधन साथी डीएमके के हटा द्वारा भारत पर दिए बयान का खंडन करे, कश्मीर पर रेफरेंडम की बात करने वाले कॉन्ग्रेस नेता की निंदा करें। उन्होंने कहा कि आप भारत नहीं हैं, क्योंकि आप भ्रष्टाचार और अयोग्यता का प्रतीक हैं। स्मृति ईरानी के अनुसार, यूपीए के नेता ने तमिलनाडु में भारत विरोधी बयान दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि कश्मीर में राहुल गाँधी अपने परिजनों के साथ बर्फ खेल रहे थे, ये इसीलिए संभव हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किया। उन्होंने कहा कि इसी की वजह से कश्मीर की बेटियों को दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया जाता था तो उन्हें कानून का सहारा नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर ब्याही जाने पर उन बेटियों को पैतृक संपत्ति पर हक़ नहीं मिलता था। 14 से कम उम्र की बच्चियों का विवाह होता था तो उन्हें कानून का संरक्षण नहीं मिलता था।

स्मृति ईरानी ने इस दौरान कश्मीर में पंडितों पर अत्याचार और गिरिजा टिक्कू के साथ हुई वारदात को भी याद किया। इस दौरान राहुल गाँधी सदन से निकल कर राजस्थान से निकल गए। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि कैसे कश्मीर में गिरिजा टिक्कू को आड़ी से काट डाला गया था, राजस्थान के भीलवाड़ा में बच्ची के साथ गैंगरेप कर के उसे काटा गया और भट्ठी में डाल दिया गया। उन्होंने पूछा कि आज जो जोर-चोर से चिल्ला रहे हैं, तब उन्होंने न्याय की गुहार नहीं लगाई जब पश्चिम बंगाल में 60 साल की महिला का गैंगरेप हुआ।

स्मृति ईरानी ने कहा कि 2012 में असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 2012 में कहा था कि दंगों के बावजूद कॉन्ग्रेस की केंद्र सरकार मदद नहीं कर रही है। स्मृति ईरानी ने कहा कि आज लोकतंत्र की दुहाई देने वाले को आपातकाल को याद करना चाहिए। तब संस्थाओं पर प्रतिबंध और प्रिंटिंग प्रेस पर प्रतिबंध की चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान बेंगलुरु की जेल में एक महिला को इसीलिए बंद किया गया, क्योंकि वो सोशलिस्ट थीं और 2 मई, 1976 को अपनी डायरी में लिखा।

लिखा गया कि जैसे ही महिला को जेल में लाया जाता है, उसे सबके सामने नग्न किया जाता है। स्नेहलता रेड्डी ने अपने संस्मरण में कॉन्ग्रेस की सच्चाई लिखी, जो अस्थमा की रोगी थीं। उन्हें दवा नहीं लेने दी गईं, वो 2 बार कोमा में गईं और उनकी हालत बिगड़ी तो पेरोल पर 15 जनवरी, 1977 को छोड़ा गया और 5 दिन बाद उनका देहांत हो गया। स्मृति ईरानी ने कहा कि जिनका इतिहास खून से सना है, वो आज इस तरह की बातें कर रहे हैं।

स्मृति ईरानी ने कहा, “मणिपुर पर चर्चा करने के लिए बार-बार केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री और गृह मंत्री व रक्षा मंत्री ने भी गुहार लगाई कि मोदी सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन ये भाग गए और हम नहीं भागे। भागने के पीछे कारण ये है कि गृह मंत्री जब बोलने लगेंगे और पत्ते खुलने लगेंगे तो ये मौन साध लेंगे। खुले में शौच की वजह से महिलाओं के रेप की बात 2005 में ही सामने आ चुकी थी और 2010 में वर्ल्ड बैंक ने भी कहा लेकिन ये चुप रहे। 2019 तक शौचालयों के मामले में शत प्रतिशत कवरेज हुआ।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं पर महिलाओं के बलात्कार पर हँसने और भारत माता की हत्या की बात पर ताली पीटने का आरोप लगाया। स्मृति ईरानी ने कहा कि जब देश में यूपीए सरकार थी, तब मात्र 3 करोड़ परिवारों तक पानी पहुँचता था, अब ये संख्या 12.40 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि देश के साधारण महिलाओं का सम्मान बढ़ा, उससे कॉन्ग्रेस का कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने जन-धन के माध्यम से 23 करोड़ महिलाओं का खाता खोले जाने की जानकारी भी दी, इस तरह ‘मुद्रा’ के माध्यम से 27 करोड़ महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 23 लाख करोड़ रुपए का लोन मिला।

स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गाँधी ने ‘मुस्लिम लीग’ पर विश्वास जताया और उसे सेक्युलर बताया, लेकिन 80 के दशक में मुरादाबाद में 82 लोगों को मारने वाली ‘मुस्लिम लीग’ सेक्युलर कैसे हुई इसका जवाब देना होगा। उन्होंने JNU में भारत के टुकड़ों वाले नारे पर राहुल गाँधी से जवाब माँगा। उन्होंने आतंकी अफजल गुरु के समर्थक को कॉन्ग्रेस में शामिल करने पर भी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने विदेश में जाकर कहा कि हिंदुस्तानी सौहार्द-भाईचारे में विश्वास नहीं रखते, वहाँ ध्रुवीकरण है।

‘भारत माता की हत्या की, हनुमान ने नहीं जलाई लंका’: लोकसभा में बोले राहुल गाँधी – आज मैं दिमाग से नहीं बोलूँगा

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की लोकसभा में वापसी हुई है। मोदी सरनेम पर आपत्तिजनक टिप्पणी के कारण सूरत की अदालत ने उन्हें 2 साल की सज़ा सुनाई थी और गुजरात हाईकोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। इससे उनकी संसद सदस्यता जो चली गई थी, वो बहाल हो गई। उन्हें बँगला भी अलॉट हो गया। अब मॉनसून सत्र में जब विपक्षी गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, राहुल गाँधी दूसरे दिन इस पर बोलने के लिए उठे।

राहुल गाँधी ने इस दौरान कहा कि आज जो उनके भाजपा के मित्र हैं, उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने ‘डरो मत, डरो मत’ का नारा भी लगाया। राहुल गाँधी ने कहा कि आज घबराने की ज़रूरत नहीं है, आज वो अपने भाषण को अडानी पर नहीं रखेंगे और इसीलिए भाजपा के लोग शांत रह सकते हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि उनका भाषण आज दूसरी दिशा में जाएगा। इस दौरान उन्होंने रूमी को उद्धृत किया – जो शब्द दिल से आते हैं, वो शब्द दिल में जाते हैं।

उन्होंने कहा कि वो दिमाग नहीं बल्कि दिल से बोलना चाहते हैं। उन्होंने भाषण की शुरुआत में कहा कि वो आज एक-दो गोले ही मारेंगे, उतना ज़्यादा आक्रमण नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 130 दिनों में भारत के एक कोने से दूसरे कोने तक बहुत सारे लोगों के साथ यात्रा की। उन्होंने कहा कि वो समुद्र के तट से कश्मीर की बर्फीली पहाड़ी तक चले। उन्होंने कहा कि यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है, ये जारी है। उन्होंने कहा कि काफी लोगों ने उनसे यात्रा के दौरान और इसके बाद पूछा कि आखिर वो क्यों चलें, उनका लक्ष्य क्या है।

उनसे पूछा गया कि वो कन्याकुमारी से कश्मीर तक क्यों गए? राहुल गाँधी ने कहा कि शुरू में उनसे जवाब देते नहीं बनता था, शायद उन्हें नहीं मालूम था कि जवाब क्या दें। उन्हें पता था कि वो लोगों के बीच जाना चाहते हैं, लेकिन गहराई से उन्हें बाद में समझ आया। बकौल राहुल गाँधी, जिस चीज के लिए वो मरने को तैयार हैं और मोदीजी की जेलों में जाने के लिए तैयार हैं और उन्होंने 10 साल अनवरत गाली खाई है, उस चीज को वो समझना चाहते हैं कि ये है क्या।

उन्होंने कहा कि उनके दिमाग में था कि अगर वो 10 किलोमीटर दौड़ सकते हैं तो 25 किलोमीटर चलने में क्या बात है। उन्होंने कहा कि पहले ये अहंकार की भावना थी कि वो ये कर सकते हैं, लेकिन भारत ने अहंकार को एक सेकेण्ड में मिटा दिया। उन्होंने बताया कि 2-3 दिन में उनके घुटने में जबरदस्त दर्द शुरू हो गया, रोज सुबह उठने पर और हर कदम पर उन्हें दर्द होता था। बकौल राहुल गाँधी, पहले ये अहंकार था और जो भेड़िया निकला था वो चींटी बन गया।

उन्होंने कहा कि वो हिंदुस्तान को अहंकार से देखने निकले थे, लेकिन वो गायब हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें डर लगता था कि वो कल चल पाएँगे या नहीं, लेकिन जब-जब उन्हें डर लगता था तब कोई न कोई शक्ति उनकी मदद करती थी। इस दौरान 8 साल की एक लड़की की चिट्ठी का भी जिक्र किया, जिससे उन्हें शक्ति मिली। राहुल गाँधी ने कहा कि पहले वो किसानों को समझाते थे, लेकिन बाद में वो बोल नहीं सके। वो दूसरों की आवाजें सुनने लगे।

उन्होंने बताया कि उन्हें एक किसान ने एक रुई का टुकड़ा देते हुए कहा कि उसके पास यही बचा है। बकौल राहुल गाँधी, उक्त किसान ने बताया कि उसे बीमा का पैसा नहीं मिला और हिंदुस्तान के बड़े उद्योगपतियों ने उससे ये छीन लिया। राहुल गाँधी की मानें तो उस किसान के दिल का दर्द और बीवी से बात करते वक्त उसकी आँखों की शर्म उनकी आँखों में आई। उन्होंने कहा कि उसकी भूख राहुल गाँधी को समझ आई और उसके बाद यात्रा बिलकुल ही बदल गई और उन्हें भीड़ की आवाज नहीं सुनाई देती थी।

राहुल गाँधी ने कहा कि ये देश सिर्फ एक आवाज़ है, जाति-भाषा-धर्म-धातु नहीं है, देश के लोगों की दुःख और कठिनाइयाँ हैं। उन्होंने कहा कि देश की आवाज को सुनने के लिए अहंकार और सपनों को परे करना पड़ेगा, तब हिंदुस्तान की आवाज सुनाई देगी। उन्होंने मणिपुर में ‘हिंदुस्तान की हत्या’ का भी आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा से कहा कि आप भारत माता के रखवाले नहीं हो, आप भारत माता के हत्यारे हो। उन्होंने कहा कि वो मणिपुर में अपनी माँ की हत्या की बात कर रहे हैं, उनकी माँ की मणिपुर में हत्या की गई है।

राहुल गाँधी ने कहा, “जब तक आप हिंसा को बंद नहीं करोगे, तब तक आप मेरी माँ की हत्या कर रहे हो। हिंदुस्तान की सेना मणिपुर में एक दिन में हिंसा बंद कर सकती है, लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान के दिल की आवाज नहीं सुनते हैं, सिर्फ 2 लोगों की आवाज सुनते हैं। अडानी के लिए मोदीजी ने क्या काम किया है, ये देखिए। रावण 2 लोगों की सुनता था – मेघनाद और कुम्भकरण।मोदी भी 2 लोगों की सुनते हैं – अमित शाह और अडानी। “

मणिपुर में असम राइफल्स को लेकर विवाद, पुलिस ने दर्ज कराई एफआईआर: जानिए क्या है मामला

मणिपुर हिंसा (Manipur Violence) के दौरान राज्य पुलिस ने असम राइफल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस का कहना है कि मैतेई लोगों पर हमले के बाद भाग रहे कुकी हमलावरों को पकड़ने के लिए जब अभियान चलाया जा रहा था, तब असम राइफल्स ने उसके जवानों को रोक लिया। अपनी गाड़ियाँ सड़क पर खड़ी कर दीं और मणिपुर पुलिस को काम करने से रोककर कुकी हमलावरों को भागने में मदद की। मणिपुर पुलिस का आरोप है कि इसकी वजह से कुकी हमलावर मणिपुर पुलिस की गिरफ्त से निकलने में कामयाब रहे।

इस बीच खबरें आईं कि हिंसा प्रभावित इलाके से मणिपुर सरकार के आदेश पर असम राइफल्स की चौकी हटा दी गई है। इससे पहले, म्यांमार से मणिपुर में घुसे 718 लोगों की रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने सख्त नाराजगी जताई थी और असम राइफल्स से पूछा था कि ये लोग मणिपुर में कैसे घुस आए, जब सीमा पर आपकी ही तैनाती थी। मणिपुर सरकार ने इन 718 लोगों को तुरंत राज्य से बाहर म्यांमार वापस भेजने का आदेश दिया था।

मणिपुर पुलिस ने दर्ज कराई एफआईआर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असम के बिष्णुपुर जिले में हिंसा प्रभावित इलाके क्वाक्ता में 5 अगस्त 2023 को मैतेई समुदाय से जुड़े तीन लोगों की हत्या के बाद फिर से हिंसा भड़क उठी थी। उसके बाद हमलावरों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन को अंजाम दे रही मणिपुर पुलिस को बफर जोन में असम राइफल्स के जवानों ने रोक दिया था। मणिपुर पुलिस ने आरोप लगाया है कि असम राइफल्स के जवानों के इस काम से उसके काम में बाधा पहुँची। पढ़ें एफआईआर की कॉपी…

इस वायरल वीडियो के बाद फैली मतभेद की खबरें

इस बीच मीडिया और सोशल मीडिया पर खबरें चलने लगीं कि सुरक्षा बलों के बीच ही मतभेद हो गया है। इसके लिए इस वायरल वीडियो का हवाला दिया जा रहा है।

तेजी से फैली असम राइफल्स को हटाने की खबर

इस दौरान एक खबर तेजी से फैली कि असम राइफल्स की एक चौकी को हटा दिया गया है, जो कि हिंसा प्रभावित इलाकों के बफर जोन में थी। इस चौकी को हटाने के लिए लोग प्रदर्शन कर रहे थे। यहाँ अब सीआरपीएफ की तैनाती की गई है। हालाँकि, सेना की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि हिंसा वाली जगह और जिस चौकी की बात हो रही है, वहाँ सेना की तैनाती थी, असम राइफल्स की नहीं।

भारतीय सेना की ओर से आई सफाई, गुमराह न हों लोग

हालाँकि, भारतीय सेना के स्पियर कॉर्प्स की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि असम राइफल्स के लोग पूरी तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कुछ भी अवैध नहीं किया। प्रेस रिलीज में तीन बातों पर जोर दिया गया है, पहला ये कि असम राइफल्स के जवानों ने मणिपुर पुलिस के जवानों को रोककर अपनी ड्यूटी निभाई है, क्योंकि वो बफर जोन में थे।

दूसरी बात ये है कि सुरक्षा बलों के बीच ऐसी तनावपूर्ण जगहों पर मतभेद हो भी जाते हैं तो वो तुरंत सुलझा लिए जाते हैं। अभी कोई मतभेद नहीं है। सभी बल सामंजस्य के साथ काम कर रहे हैं। तीसरी बात ये कि जिस असम राइफल्स की चौकी की बात की जा रही है कि उसे हटा कर दिया गया है, उसके बारे में गलत खबर का प्रसारण हो रहा है, क्योंकि उस जगह पर असम राइफल्स की तैनाती नहीं है, बल्कि सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला हुआ है।

म्यांमार से हुई घुसपैठ से राज्य सरकार नाराज

मणिपुर में म्यांमार की तरफ से घुसपैठ की खबरों पर राज्य सरकार ने नाराजगी जताई है और असम राइफल्स से इन्हें तुरंत म्यांमार भेजने को कहा है। राज्य सरकार का कहना है कि सीमा पर असम राइफल्स की तैनाती है, उसके बावजूद 718 लोग कैसे भारत की सीमा पार कर मणिपुर में आ गए। राज्य सरकार ने 24 जुलाई 2023 को असम राइफल्स को इन घुसपैठियों को भारत से तुरंत बाहर करने के निर्देश दिए थे। ये 718 लोग 22 और 23 जुलाई को अवैध तरीके से भारत की सीमा में दाखिल हुए थे। इनमें 301 बच्चे बताए जा रहे हैं।

न्यायिक समिति बनी, SIT का भी गठन

मणिपुर हिंसा मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सोमवार (7 अगस्त 2023) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंसा की जाँच तथा राहत एवं पुनर्वास के काम की देखरेख के लिए हाईकोर्ट की 3 रिटायर्ड महिला जजों की न्यायिक समिति बनाई गई है। साथ ही सीबीआई (CBI) जाँच की निगरानी के लिए अधिकारी की नियुक्ति की है।

वहीं, राज्य सरकार 42 SIT का गठन उन मामलों की जाँच के लिए करेगी, जो सीबीआई के पास नहीं हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर SIT में कम से कम एक इंस्पेक्टर दूसरे राज्य से होना चाहिए। इसके साथ ही, दूसरे राज्यों से डीआजी रैंक के 6 अधिकारी शामिल किए जाएँगे।

देखती रही माँ और बीच सड़क पर बेटे ने फाड़ दिए महिला के कपड़े, पॉलिथीन से शरीर को ढक बचाई लाज: हैदराबाद की घटना का Video वायरल

हैदराबाद में नशे में धुत एक युवक ने छेड़छाड़ का विरोध किए जाने पर बीच सड़क पर एक महिला के कपड़े फाड़ दिए। सड़क से गुजर रही अन्य महिलाओं ने पॉलीथिन से ढक कर पीड़िता की इज्जत बचाई। कथित तौर पर आरोपित युवक की माँ भी मौके पर मौजूद थी, लेकिन उसने बेटे को रोकने की कोशिश नहीं की। हैदराबाद के जवाहर नगर इलाके के बालाजी नगर की इस घटना का वीडियो वायरल है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित की पहचान पेद्दामरैया के तौर पर हुई है। घटना 6 अगस्त 2023 की रात करीब 8.30 बजे की है। आरोपित के खिलाफ धारा 354 (बी), 323, 506 आर/डब्ल्यू 34, (शील भंग करना, आपराधिक हमला और धमकी और एक सामान्य कारण के लिए आपराधिक इरादा रखने) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित की माँ के खिलाफ भी बेटे को न रोकने और अपराध को बढ़ावा देने के लिए आईपीसी की दो धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक 28 साल की पीड़िता 6 अगस्त की शाम करीब 8 बजे बालाजी नगर में कपड़ों की एक दुकान से वापस घर लौट रही थी। इसी दौरान सड़क पर चल रहे आरोपित ने उसे गलत तरीके से छुआ। इस पर महिला ने आपत्ति जताते हुए उसे धक्का देकर खुद से दूर कर दिया। इसके बाद आरोपित गुस्से में महिला पर झपट पड़ा। उसने सड़क पर ही कपड़े फाड़कर महिला को निर्वस्त्र कर दिया। इस दौरान आरोपित के साथ चल रही उसकी मां ने भी उसे नहीं रोका। आरोपित एक मजदूर है और उसे शराब की लत है।

मदद के लिए आई महिला से भी बदसलूकी

इस घटना के वक्त वहाँ से दो पहिया वाहन से गुजर रही एक महिला ने जब पीड़ित को बचाने की कोशिश की तो आरोपित ने उसके साथ भी बदसलूकी की। इस दौरान पुलिस ने वहाँ पहुँचकर आरोपित को काबू में कर कस्टडी में ले लिया। मौके पर मौजूद कुछ महिलाओं ने पीड़ित को पॉलीथिन से कवर किया। फिर कुछ लोगों ने कपड़े का इंतजाम कर उसे सुरक्षित जगह पर पहुँचाया। इस घटना के बाद से इलाके की महिलाओं में खौफ है। यहाँ रहने वाली एक महिला ने कहा, “मणिपुर में जो हुआ उसके ठीक दो महीने बाद इस तरह की घटना ने लोगों के विश्वास को हिलाकर रख दिया है।”

भ्रष्टाचार INDIA छोड़ो, परिवारवाद INDIA छोड़ो, तुष्टीकरण INDIA छोड़ो: गाँधीजी को याद कर PM मोदी ने दिया I.N.D.I.A. को मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत छोड़ो आंदोलन और महात्मा गाँधी को याद कर इंडिया को एक नया मंत्र दिया है – भ्रष्टाचार INDIA छोड़ो, परिवारवाद INDIA छोड़ो, तुष्टीकरण INDIA छोड़ो। 9 अगस्त 1942 के ऐतिहासिक दिन की याद दिलाते हुए PM मोदी ने अब के इंडिया में व्याप्त बुराइयों को मिटाने का मंत्र दिया।

Quit India मतलब ‘इंडिया छोड़ो आंदोलन’ को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (9 अगस्त 2023) को महात्मा गाँधी को याद करते हुए कहा:

“पूज्य बापू को याद करते हुए, आज समय की माँग है कि हमें उनकी इच्छाशक्ति को आगे बढ़ाना ही है। आज हमारे सामने विकसित भारत निर्माण का स्वप्न है, संकल्प है। इस संकल्प के सामने कुछ बुराइयाँ रोड़ा बनी हुई हैं। इसलिए आज भारत एक सुर में इन बुराइयों को कह रहा है – Quit India. आज भारत कह रहा है – Corruption Quit India मतलब भ्रष्टाचार इंडिया छोड़ो। आज भारत कह रहा है – Dynasty Quit India मतलब परिवारवाद इंडिया छोड़ो। आज भारत कह रहा है – Appeasement Quit India मतलब तुष्टीकरण इंडिया छोड़ो।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ट्वीट के तुरंत बाद भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। रविशंकर प्रसाद ने विस्तार से समझाया कि परिवारवाद क्या होता है। उनके अनुसार नेता का बेटा ही नेता बनेगा, परिवारवाद है। उन्होंने बताया कि साधारण कार्यकर्ता के लिए पार्टी में जब कोई जगह नहीं होती, तो ऐसे को परिवारवाद कहते हैं।

राहुल गाँधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं पर निशाना लगाते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि क्षमता हो या न हो, अपनी पार्टी की ओर से पीएम/सीएम के दावेदार यही लोग बनेंगे… पूरी पार्टी के बॉस यही लोग रहेंगे।

क्या है I.N.D.I.A.

I.N.D.I.A.: Indian National Developmental Inclusive Alliance मतलब भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक समावेशी गठबंधन। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के खिलाफ 26 विपक्षी दलों का गठबंधन है यह।

  1. कॉन्ग्रेस (Congress)
  2. डीएमके (Dravida Munnetra Kazhagam)
  3. तृणमूल (All India Trinamool Congress)
  4. जदयू [Janata Dal (United)]
  5. आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party)
  6. राजद (Rashtriya Janata Dal)
  7. झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha)
  8. एनसीपी (शरद पवार ग्रुप) (Nationalist Congress Party – Sharad Pawar faction)
  9. शिवसेना (उद्धव ठाकरे) [Shiv Sena (UBT)]
  10. सपा (Samajwadi Party)
  11. आरएलडी (Rashtriya Lok Dal)
  12. अपना दल (कमेरावादी) [Apna Dal (Kamerawadi)]
  13. जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (Jammu and Kashmir National Conference)
  14. पीडीपी (Peoples Democratic Party)
  15. सीपीआई (मार्क्सिस्ट) [Communist Party of India (Marxist)]
  16. सीपाआई (Communist Party of India)
  17. रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी [(Revolutionary Socialist Party (RSP)]
  18. एमडीएमके (Marumalarchi Dravida Munnetra Kazhagam )
  19. विदुथलाई चिरुथिगल काची (Viduthalai Chiruthaigal Katchi)
  20. कोंगुनाडु मक्कल देसिया काची (Kongunadu Makkal Desia Katchi)
  21. सीपीआई (मार्क्सिस्ट-लेनिन) लिबरेशन [Communist Party of India (Marxist-Leninist) Liberation]
  22. मनिथनेया मक्कल काची (Manithaneya Makkal Katchi)
  23. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League)
  24. केरल कॉन्ग्रेस (एम) [Kerala Congress (M)]
  25. केरल कॉन्ग्रेस (जोसेफ) [Kerala Congress (Joseph)]
  26. ऑल इंडिया फॉर्वर्ड ब्लॉक (All India Forward Bloc)

I.N.D.I.A. में शामिल ऊपर के तमाम दल किसी एक आदमी या परिवार के इशारे पर चलता है। हर एक दल के नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हुए हैं। क्षेत्रीय, धार्मिक, भाषाई आधारों पर हर एक दल तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं।

जज ने दिया शिवलिंग हटाने का आदेश, फैसला रिकॉर्ड करते हुए बेहोश हो गए सहायक रजिस्ट्रार: फिर कलकत्ता हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से कर दिया इनकार

कलकत्ता हाई कोर्ट में सोमवार (7 अगस्त 2023) को एक अजीबोगरीब घटना हुई। एक जमीन विवाद में हाई कोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्ता ने शि​वलिंग हटाने का आदेश दिया। लेकिन फैसला रिकॉर्ड करते हुए सहायक रजिस्ट्रार बिश्वनाथ राय अचानक बेहोश हो गए। इसके बाद जज सेनगुप्ता ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार बेहोश होने के बाद हाईकोर्ट के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जज अपने चेंबर में चले गए। थोड़ी बाद जज सेनगुप्ता कोर्ट रूम में लौटे। लेकिन इस बार उन्होंने मामले में हस्तक्षेप से मना कर दिया। वहीं सहायक रजिस्ट्रार के अचानक बेहोश होने के कारण का भी पता नहीं चला है।

शिवलिंग हटाने का आदेश मुर्शिदाबाद बेलडांगा के खिदिरपुर के दो लोगों के बीच जमीनी विवाद में दिया गया था। खिदिरपुर के सुदीप पाल और गोविंद मंडल के बीच यह विवाद चल रहा है। इसको लेकर इसी साल मई में दोनों पक्षों में मारपीट भी हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों ने बेलडांगा थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में निचली अदालत से दोनों को जमानत दे दी थी।

लेकिन विवाद में नया मोड़ तब आ गया जब सुदीप ने गोविंद मंडल पर विवादित जमीन पर शिवलिंग रखने का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। उसने शिवलिंग हटाने की माँग की। उसका आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ सुदीप पाल हाई कोर्ट पहुँच गया।

हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस जय सेनगुप्ता ने गोविंद मंडल के वकील से पूछा कि उनके मुवक्किल ने विवादित वाली जमीन पर शिवलिंग क्यों स्थापित किया? इस पर गोविंद के वकील मृत्युंजय चटर्जी ने कहा कि उनके मुवक्किल ने शिवलिंग स्थापित नहीं किया, बल्कि ये खुद ही जमीन से निकल आया है। इसके बाद जज सेनगुप्ता ने शिवलिंग हटाने का निर्देश दिया। लेकिन जिस वक्त सहायक रजिस्ट्रार इस फैसले को रिकॉर्ड कर रहे थे वे अचानक से बेहोश हो गए।

‘मेरी बेटी नाबालिग है, मैं डरा हुआ हूँ’: प्रशांत भूषण के फेक न्यूज से प्रताड़ित पिता का दर्द जानिए, उत्तराखंड के DGP से ​की शिकायत

फेक न्यूज फैलाने के लिए कुख्यात वामपंथी कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) से शिकायत की गई थी। शिकायत देहरादून की गायिका शिकायना मुखिया (Shekinah Mukhiya) के पिता ने की है। भूषण ने गायिका पिता-पुत्री का एक वीडियो ट्वीट करते हुए झूठा दावा किया था और इन्हें मणिपुर से जोड़ दिया था।

शिकायना के पिता ने 8 अगस्त 2023 को प्रशांत भूषण के खिलाफ शिकायत की। उन्होंने कहा है, “मेरी बेटी नाबालिग है। उन्हें उसके बारे में झूठे दावे करने से पहले थोड़ी पड़ताल कर लेनी चाहिए थी। ये बिल्कुल ठीक नहीं है। एक पिता के तौर पर अपनी बेटी का नाम मणिपुर विवाद से जोड़े जाने के कारण मैं चितित हूँ।”

प्रशांत भूषण और अन्य कॉन्ग्रेसी हैंडल ने 6 अगस्त को मुखिया पिता-पुत्री का वीडियो साझा करते हुए गलत दावे किए थे। इसमें पिता-पुत्री बॉलीवुड का एक पुराना गाना गाते दिख रहे थे। इनके लिए दावा किया गया था कि दोनों मणिपुर के अलग-अलग समुदाय से हैं। इनमें से एक कुकी और दूसरा मैतेई है।

लेकिन इस वामपंथी प्रोपेगेंडे का कुछ ही घंटों में पर्दाफाश हो गया, जब नाबालिग गायिका ने एक फेसबुक पोस्ट में बताया कि वह अपने पिता के साथ गा रही है और वे मणिपुर से ताल्लुक नहीं रखते हैं। उसने लिखा, “वीडियो में दिख रहे व्यक्ति विकास मुखिया और उनकी बेटी शिकायना मुखिया हैं। हम ​मणिपुर से नहीं हैं। न ही हमारा संबंध कुकी या मैतेई समुदाय से है।” शिकायना ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया में किए जा रहे दावे पूरी तरह से झूठे हैं।

इस प्रकरण पर विकास मुखिया ने ऑपइंडिया से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने प्रशांत भूषण की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि झूठे दावों के साथ ट्वीट करने वाले वे पहले व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण खुद एक वकील हैं। उनके सोशल मीडिया में काफी फॉलोअर्स हैं। ऐसे में गलत दावा करने से पहले उन्हें तथ्यों की जाँच कर लेनी चाहिए थी।

उत्तराखंड के देहरादून में अपने परिवार के साथ रहने वाले विकास मुखिया ने कहा, “मेरी बेटी नाबालिग है। अभी अपना करियर बना रही है। उसके बारे में ऐसे दावे स्वीकार्य नहीं है। मुझे नहीं पता है कि किस मंशा के साथ ऐसा किया गया। लेकिन मणिपुर हिंसा के बीच उसका नाम इस तरह से घसीटे जाने से मैं चिंतित हूँ। मुझे डर लग रहा है कि वह केवल 17 साल की है और मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दे से उसका नाम जोड़ा गया। इस समय मैं बेहद डरा हुआ हूँ।”

मुखिया ने यह भी बताया कि इस घटना से पहले वे नहीं जानते थे कि प्रशांत भूषण कौन हैं। ट्वीट वायरल होने के बाद उन्होंने भूषण के बारे में गूगल कर जानकारी इकट्ठा की। उन्होंने बताया, “उनके जैसे वरिष्ठ पेशेवर से यह उम्मीद नहीं की जाती है।” उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार को उन्होंने जो शिकायत दी है उसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें कहा गया है, “हमारा मानना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे से हमारा नाम जोड़ने से पहले इसकी पड़ताल की जानी चाहिए थी। मेरी बेटी नाबालिग है। हम पूरे देश में यात्रा करते रहते हैं। ऐसे में हम अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।”

गौरतलब है कि शिकायना मुखिया उत्तराखंड के देहरादून की मशहूर सिंगर हैं। 5 साल पहले ‘द वॉयस इंडिया किड्स’ नामक टीवी रियलिटी शो में आने के बाद से उनके कई वीडियो वायरल हो चुके हैं। उनका एक यूट्यूब चैनल भी है। इसके 126K से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

‘अंडरवियर उतारो, पैर फैलाओ’: ‘मिस यूनिवर्स’ में सबके सामने लड़कियों से उतरवाए टॉप, चेकअप के नाम पर शूट किए अश्लील वीडियो

मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया कॉम्पिटिशन में भाग लेने वाली 6 लड़कियों ने आयोजकों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। लड़कियों का आरोप कि प्रतियोगिता के दौरान आयोजकों ने उनके कपड़े उतरवाए थे। पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए तेजी से जाँच करने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशियाई की राजधानी जकार्ता में 29 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल हुई 6 लड़कियों का आरोप है कि उनमें से 5 लड़कियों को आयोजकों ने 20 से अधिक लोगों के सामने एक कमरे में बॉडी चेकअप के नाम पर अंडरवियर उतारने के लिए कहा था। इसके बाद उनके फोटो, वीडियो भी लिए गए। यह सब जब हुआ तब कमरे में पुरूष भी मौजूद थे।

शिकायत करने वाली लड़कियों की वकील, मेलिसा एंगग्रेनी का कहना है कि कॉम्पटीशन के नाम पर कपड़े उतारकर जाँच की गई। लेकिन इस तरह की जाँच की कोई आवश्यकता नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, वहीं एक शिकायतकर्ता ने कोम्पास टीवी द्वारा प्रसारित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि उसे पैर खोलकर पोज देने समेत कई तरह से पोज देने के लिए कहा गया था। उसने यह भी कहा है, “मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे घूरा जा रहा है। उस समय मैं बेहद असहज महसूस कर रही थी।”

इस मामले में रायटर्स ने मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया कॉम्पटीशन चलाने वाली कंपनी पीटी कैपेला स्वास्तिका कर्या और कंपनी के संस्थापक पॉपी कैपेला से बात करने की कोशिश की। हालाँकि कंपनी और कंपनी के संस्थापक दोनों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। वहीं, जकार्ता पुलिस के प्रवक्ता ट्रूनोयुडो विस्नु एंडिको का कहना है कि सोमवार (7 अगस्त, 2023) को मिस यूनिवर्स इंडोनेशिया में शामिल रहीं 6 लड़कियों की ओर से को एक शिकायत प्राप्त हुई है। इसकी जाँच की जाएगी।

गौरतलब है कि दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में कई धार्मिक संगठन मिस यूनिवर्स कॉम्पटीशन को लेकर आपत्ति जताते रहे हैं।