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फ्रांसीसी राष्ट्रपति को पार्सल में भेजी गई ‘जिंदा इंसान’ की अंगुलियाँ: पुलिस ने जाँच के लिए पैकेट नाश्ते वाले फ्रिज में रखा, अधिकारी देखकर हैरान

बेस्टिल डे परेड से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emanuel Macron) को जिंदा व्यक्ति की कटी हुई अंगुली डाक के जरिए भेजी गई हैं। अंगुली वाला पार्सल पेरिस के एलिसी पैलेस (राष्ट्रपति भवन) में सोमवार (10 जुलाई 2023) पहुँचा। बता दें कि पिछले दिनों फ्रांस दंगों की भीषण चपेट में आ गया था। इस दौरान दंगाइयों ने देश भर में जमकर हिंसा की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब अंगुली वाला पार्सल आया तो पुलिस ने उसे फ्रिज में रख दिया, ताकि खराब ना हो और इसकी जाँच की जा सके। इसी फ्रिज में पुलिसकर्मी अपना नाश्ता रखे हुए थे। उंगली के साथ कोई किसी तरह का धमकी वाला पत्र नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अंगुली राष्ट्रपति को क्यों भेजी गई है।

राष्ट्रपति कार्यालय के हवाले से मिरर ने बताया कि कटी हुई अंगुली की परीक्षण से पता चला कि यह ‘जीवित इंसान’ की है। इसके बाद उसकी पहचान करके उस व्यक्ति से संपर्क किया गया और उसे पूरी चिकित्सा सहायता दी गई। हालाँकि, मेडिकल गोपनीयता कानून को देखते हुए उस शख्स की पहचान उजागर नहीं की गई है। 

फ्रांस की पुलिस आपदा में पीड़ितों की पहचान के लिए एकीकृत बायोमेट्रिक्स फिंगरप्रिंट स्कैनर का इस्तेमाल करती है। इसके लिए वहाँ डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन स्क्वॉड बना हुआ है। इसके अलावा, लावारिस लाशों की पहचान के लिए पुलिस स्कैनर का प्रयोग करती है।

इससे पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपतियों को धमकी देने के लिए गोली भी भेजी जाती रही हैं। यह पहली बार है, जब कटा हुआ मानव अंग भेजा गया है। यह पार्सल ऐसे समय में भेजा गया है, जब नाहेल नाम के एक 17 वर्षीय आप्रवासी परिवार के लड़के की मौत के बाद देश भर में दंगे हो गए थे। दंगाइयों ने शहरों को लूटना और आग लगाना शुरू कर दिया था।

फ्रांस में PM मोदी बने ‘सम्मानित अतिथि’, गूँज गया ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ : राष्ट्रपति मैक्रो ने हिंदी में ट्वीट करके खुशी जताई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय फ्रांस दौरे पर हैं। जहाँ फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अगुवाई में पीएम मोदी का लगातार भव्य स्वागत किया जा रहा है। यही नहीं इमैनुएल मैक्रों ने हिंदी में ट्वीट कर भारत को भविष्य के लिए निर्णायक भूमिका वाला देश और रणनीतिक साझेदार बताया है। इसके अलावा उन्होंने ‘बैस्टिल डे’ परेड में पीएम मोदी का स्वागत करने को लेकर खुशी जताई है। परेड के दौरान भारत और फ्रांस के जवान ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा…’ गाने पर कदम ताल करते नजर आए। 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्विटर में हिंदी में लिखा, “विश्व इतिहास में एक विशालकाय, भविष्य के लिए निर्णायक भूमिका निभाने वाला देश, रणनीतिक साझेदार, मित्र। इस साल की 14 जुलाई की परेड के लिए भारत को सम्मानित अतिथि के रूप में स्वागत करते हुए हमें बहुत खुशी हो रही है।”

एक अन्य ट्वीट में मैक्रों ने लिखा, “इस 14 जुलाई को, भारत के सैनिक और राफेल लड़ाकू विमान हमारे सैनिकों के साथ परेड में शामिल हैं। हम उन लोगों की स्मृति का सम्मान करते हैं जो प्रथम विश्व युद्ध में फ्रांसीसी सेना के साथ मिलकर लड़े थे। हम कभी नहीं भूलेंगें।” 

14 जुलाई क्यों है खास?

दरअसल, हर वर्ष 14 जुलाई को फ्रांस में ‘बैस्टिल डे’ मनाया जाता है। इसे फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस भी कहा जाता है। इस दिन फ्रांस में परेड समेत कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। ‘बैस्टिल डे’ को फ्रांसीसी क्रांति की याद में मनाया जाता है। 13वीं शताब्दी के अंत में फ्रांस में बैस्टिल किले का निर्माण कराया गया था। इस किले के जरिए वहाँ सामंतवादी सत्ता राज कर रही थी। समय के साथ ही यह बैस्टिल किला एक जेल में बदल गया। इसलिए बाद में इसे बैस्टिल जेल कहा जाने लगा।

जुलाई 1789 में फ्रांसीसी क्रांति पूरे देश में फैल रही थी। इसी दौरान 14 जुलाई को क्रांतिकारियों ने बैस्टिल जेल में धावा बोलते हुए 7 कैदियों को आजाद करा लिया। यही नहीं क्रांतिकारियों ने किले के गवर्नर व अन्य अधिकारियों की हत्या कर दी थी। इसके बाद से फ्रांस में सामंतवादी सत्ता का पतन होना शुरू हो गया। इसलिए फ्रांस में रहने वाले लोग इस दिन को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। 14 जुलाई 1880 को पहली बार 14 जुलाई की परेड या बैस्टिल डे परेड का आयोजन किया गया था। इसके बाद से हर साल 14 जुलाई को यह परेड होती है। हालाँकि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान साल 1940-1944 और कोरोना महामारी के चलते साल 2020 में यह परेड नहीं पाई थी।

भारत के लिए क्यों खास है यह परेड?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस परेड में शामिल होने के लिए ‘सम्मानित अतिथि’ के रूप में आमंत्रित किया है। यही नहीं भारत की पंजाब रेजिमेंट के 269 जवान में इस परेड का हिस्सा हैं। इसके अलावा इस साल भारत और फ्रांस की मित्रता के 25 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी का इस परेड में शामिल होना दोनों देशों के पारस्परिक संबंधों और ऐतिहासिक रिश्तों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

क्या कॉन्ग्रेसी करवा देंगे 2 बीवी वाले से अपनी बेटी की शादी? : असम CM ने पूछा सीधा सवाल, बताया- ‘बहुविवाह पर तुरंत लगाना चाहते हैं बैन’

यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जारी बहस के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि वह बहुविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। इसके लिए सितंबर में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विधेयक भी पेश किया जाएगा। सीएम सरमा ने यह भी कहा है कि क्या कोई कॉन्ग्रेस नेता अपनी बेटी की शादी ऐसे व्यक्ति से करा सकता है, जिसकी पहले से ही 2 बीवियाँ हों?

हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए कहा है, “हम असम में बहुविवाह पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। यदि एक्सपर्ट कमिटी सितंबर से पहले अपनी रिपोर्ट पेश कर पेश कर देगी। ऐसी स्थिति में सितंबर में होने वाले विधानसभा सत्र में इस पर बैन लगाने के लिए विधेयक पेश करेंगे। यदि किसी वजह से इस सत्र में बिल नहीं ला पाए तो जनवरी में होने वाले विधानसभा सत्र में यह विधेयक लाएँगे।”

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मुद्दे पर बात करते हुए सीएम हिमंता ने आगे कहा है, “यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में केंद्र सरकार द्वारा फैसला किया जाएगा। इस मामले में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद राज्य भी फैसला कर सकते हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामलों में लॉ कमीशन और संसदीय कमेटी विचार कर रही है। इस मामले में असम सरकार पहले ही अपना पक्ष साफ कर चुकी है। हम UCC का समर्थन करते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा है, “यदि केंद्र UCC लेकर आ गया तो हमें विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं होगी। इसके बाद बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून अपने आप ही UCC में विलय हो जाएगा।”

कॉन्ग्रेस द्वारा UCC का विरोध करने को लेकर उन्होंने कहा है, “क्या कोई कॉन्ग्रेस नेता अपनी बेटी ऐसे पुरुष को देगा जिसकी पहले से ही 2 बीवियाँ हों? कॉन्ग्रेस मुस्लिम महिलाओं का दुख नहीं समझ रही है। कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह मुस्लिम महिलाओं का वोट तो ले रही है लेकिन उन्हें कुछ भी वापस नहीं दे रही। वह सिर्फ मुस्लिम पुरुषों के लिए काम कर रही है।”

बता दें कि इससे पहले, 12 मई 2023 को सीएन हिमंता बिस्वा सरमा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए विशेषज्ञों की समिति का ऐलान किया था। सीएम ने कहा था कि 4 सदस्यीय समिति कानूनी विशेषज्ञों सहित समाज के प्रबुद्ध वर्ग से भी बातचीत करेगी। इस समिति में अध्यक्ष के रूप में रिटायर्ड जस्टिस रूमी फूकन काम कर रहीं हैं। वहीं, सदस्य के रूप में असम के एडवोकेट जनरल देबजीत सैकिया, असम के अतिरिक्त महाधिवक्ता नलिन कोहली और वकील नेकिबुर जमान हैं।

गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों को बहुविवाह यानि कि एक से अधिक निकाह करने की छूट है। मुस्लिमों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति यदि एक से अधिक विवाह करता है तो इसे IPC की धारा 494 और 495 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है। वहीं, मुस्लिम IPC की धारा 494 के तहत पहली बीवी की सहमति से 4 निकाह कर सकता है। दरअसल, मुस्लिमों को यह छूट मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत दी गई है। हालाँकि मुस्लिम महिलाओं को 4 शादियाँ करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करनी है तो उसे पहले शौहर को तलाक देना होगा।

‘ जो गवाही दे रहे हैं, उनकी फोटो भिजवा देना’ : कोर्ट में पेशी के दौरान ही मुख्तार अंसारी ने गवाह को धमकाया, एक और FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश की बाँदा जेल में बंद माफिया और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी ने एक बार फिर गवाहों को धमकाना शुरू कर दिया है। आरोप है कि एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी के दौरान मुख्तार अंसारी ने अपने वकील से गवाहों की फोटो माँगी और धमकी दी है। इस मामले में गवाह की शिकायत पर उसके खिलाफ आजमगढ़ में FIR दर्ज हुई है। साथ ही गवाहों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2014 में हुई एक मजदूर की हत्या के मामले में मुख्तार अंसारी आरोपित है। सोमवार (10 जुलाई 2023) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एमपी-एमएलए कोर्ट में मुख़्तार की पेशी थी। इस पेशी के दौरान उसने वकील से गवाह का चेहरा देखने और उसकी फोटो की माँग की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार उसने कहा- ‘ये जो गवाही दे रहे हैं इनकी फोटो भिजवा देना’ हालाँकि इसके बाद गवाह ने आजमगढ़ थाने में धमकी मुख्तार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। गवाह ने मुख्तार अंसारी पर धमकाने का आरोप लगाते हुए अपनी सुरक्षा की माँग की है। 

इस मामले में आजमगढ़ एसपी अनुराग आर्य का कहना है कि गवाह की शिकायत के आधार पर मुख्तार अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच की जा रही है। सभी गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है। 2014 में दर्ज हत्या के एक मुकदमे के गवाहों को वह धमका रहा है। इस केस में प्रभावी पैरवी कर मुख्तार को जल्द-जल्द से सजा दिलाने के लिए स्पेशल सेल का गठन किया गया है।

क्या है मामला

फरवरी 2014 को आजमगढ़ जिले में तरवाँ के ऐरा कला गाँव मे सड़क का निर्माण हो रहा था। इसी दौरान 6 फरवरी को गोलीबारी कर राम इकबाल नामक मजदूर की हत्या कर दी गई थी। वहीं 2 अन्य घायल हुए थे। इस मामले में मुख्तार अंसारी समेत 11 लोगों को आरोपित बनाया गया है। वहीं मुख्तार को इस गोलीकांड का मास्टरमाइंड बताया गया। इस मामले में मुख्तार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मामला दर्ज है। इस मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसी दौरान मुख्तार ने गवाहों को धमकाने की कोशिश की।

हालाँकि मुख्तार अंसारी के वकील लल्लन सिंह ने गवाह को धमकाने के आरोप को बेबुनियाद बताया है। लल्लन सिंह ने कहा है कि मामला कोर्ट का है और मुख्तार अंसारी जेल में है। इसलिए पुलिस ऐसी कार्रवाई नहीं कर सकती। मुख्तार ने फोटो नहीं बल्कि फोटो कॉपी देने की बात कही थी। पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई है। इसलिए वीडियो रिकॉर्डिंग देखी जा सकती है।

पाकिस्तान की इंटरनेशनल एयरलाइंस पर है करोड़ों का कर्जा: सऊदी अरब ने चेतावनी देकर वापस माँगा सारा पैसा, मलेशिया जब्त कर चुका है विमान

सऊदी अरब के रियाद हवाईअड्डा प्राधिकरण (RAA) ने पाकिस्तान को पत्र लिखकर छह महीने की बकाया राशि को 15 जुलाई 2023 तक चुकाने की चेतावनी दी गई है। प्राधिकरण ने पत्र में कहा कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) ने बकाया में एसएआर 8.2 मिलियन सऊदी अरब रियाल (लगभग 18 करोड़ रुपए) से अधिक का भुगतान नहीं किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, RAA ने पाकिस्तान से कहा कि अगर वह बकाया राशि का समय पर भुगतान कर देता है तो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की शीतकालीन उड़ान स्लॉट को मंजूरी देगी। अगर PIA ऐसा नहीं करता है उसकी विदेशी विमान सेवा की एयरलाइन के शीतकालीन स्लॉट की मंजूरी खटाई में पड़ सकती है।

इसके अलावा, देनदारियों का भुगतान नहीं करने पर जेद्दाह हवाईअड्डे ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को चेतावनी दी है। PIA के एक प्रवक्ता ने रिमाइंडर जारी होने की पुष्टि की और कहा कि एयरलाइन भुगतान करने और समस्या को तुरंत हल करने की दिशा में काम कर रही है।

PIA के पट्टेदार एयरकैप ने पिछले महीने मलेशिया की राजधानी कुआलालांपुर में उसके बोइंग-777 विमान को जब्त कर लिया था। पाकिस्तान सरकार द्वारा बकाया का भुगतान करने और इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) क्लियरिंग हाउस के माध्यम से रसीदों की माँग करने के बाद इसे जारी किया गया था।

दरअसल, 4.5 मिलियन डॉलर (लगभग 37 करोड़ रुपए) का कर्ज न चुकाने के कारण मलेशिया को इस साल मई में एक पाकिस्तानी विमान को जब्त करना पड़ा था। कुआलालंपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के बोइंग 777 को जब्त कर लिया।

विमान को जब्त करने के बाद उस में यात्री फँस कर रह गए थे। बाद में उस उड़ान के यात्रियों को समायोजित करने के लिए एक अलग विमान का उपयोग किया गया। दक्षिण-पूर्व एशियाई मुल्क मलेशिया ने पंजीकरण संख्या बीएमएच के साथ विमान को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को पट्टे पर दिया था।

इसी तरह साल 2021 में भी मलेशिया के अधिकारियों ने एक और बोइंग 777 को दो सप्ताह के लिए जब्त कर लिया था। बाद में 173 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के साथ, इसे छोड़ दिया गया और दायित्व के निपटान पर देश से राजनयिक गारंटी प्राप्त करने के बाद उसी वर्ष 27 जनवरी को पाकिस्तान वापस लाया गया।

बताते चलें कि भुगतान न करने पर PIA पर अमेरिका में विलिस लीजिंग ने मुकदमा किया है। प्रतिकूल कार्रवाई से बचने के लिए PIA ने उनसे पट्टे पर लिए गए दो ए-320 विमानों को हटाकर उन्हें वापस कर रही है। पीआईए का इंश्योरेंस ब्रोकर एलियाना ने भी नोटिस जारी कर बकाया राशि की भुगतान की माँग की और कहा कि एक बार बीमा बंद हो जाएगा तो उड़ान संचालन भी बंद हो जाएगा।

पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस PIA में भ्रष्टाचार चरम पर है और यह कभी बंद हो सकती है, क्योंकि ECC जून 2023 तक लंबित दावों के रूप में 22 अरब पाकिस्तानी रुपए जारी करने में असफल रही है। उसने सिर्फ 4 अरब पाकिस्तानी रुपए ही जारी किए। पैसे की कमी के चलते पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस अपने बकाया का भुगतान नहीं कर पा रही है।

PIA का प्रबंधन किस प्रकार है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2020 में यूरोपियन यूनियन एयर सेफ्टी एजेंसी (EASA) ने PIA की उड़ानों पर छह महीने के लिए रोक लगा दी थी। यह रोक जुलाई 2020 से दिसंबर 2020 तक जारी रही।

दरअसल, यह निर्णय फर्जी लाइसेंस वाले पायलट द्वारा विमानों को उड़ाने की खबरों के बाद लिया गया था। पाकिस्तान के उड्डयन मंत्री गुलाम सरवर खान ने 262 पायलटों के लाइसेंस फर्जी होने की बात कही थी। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा 860 से अधिक पायलटों को लाइसेंस जारी किए थे।

तेजाब से बुरी तरह जलाया चेहरा, बॉडी को कुएँ में फेंका: राजस्थान में दलित युवती की निर्मम हत्या, गैंगरेप की भी आशंका; BJP नेता धरने पर बैठे

राजस्थान के करौली जिले में 19 साल की दलित लड़की की हत्या का मामला सामने आया। आरोप है कि लड़की का अपहरण कर उसका बलात्कार किया गया। इसके बाद शव की पहचान न हो सके, इसके लिए आरोपितों ने तेजाब से जलाकर कुएँ में फेंक दिया। पीड़िता बुधवार (12 जुलाई 2023) से लापता थी। मृतक के परिजनों ने आरोपितों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी और 50 लाख रुपए के मुआवजे तथा सरकार नौकरी की माँग की है। 

मीडिता रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला करौली के नदौती थाना क्षेत्र के की है। यहाँ गुरुवार (13 जुलाई 2023) रात एक कुएँ में शव पड़ा दिखाई दिया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कुएँ से निकाला। शव पर कई जगह घाव के निशान थे। इसके बाद शव की पहचान की गई। पुलिस का कहना है कि शव को तेजाब डालकर बुरी तरह से जलाने की कोशिश की गई है। फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद मामला पूरी तरह साफ हो जाएगा।

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर धरना-प्रदर्शन हो रहा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा भी स्थानीय लोगों के साथ धरना प्रदर्शन में शामिल हैं। उनका कहना है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। मीणा ने ट्वीट कर कहा है, “गुढ़ाचंद्रजी, टोडाभीम में 19 साल की दलित बेटी पर एसिड फेंक कुँए में डालने से दर्दनाक मृत्यु की सूचना सिहरन पैदा करने वाली है। मुझे इस बिटिया के साथ कुछ अनहोनी होने की भी आशंका है। पुलिस-प्रशासन इस पर पर्दा डालना चाहता है। प्रशासन द्वारा बेटी के शव को हिंडौन ले जाया गया है।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने सीएम अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा है, “बेटी को न्याय दिलाने के लिए हिंडौन पहुँच गया हूँ। मुखिया जी, आजकल तो अखबारों के पन्ने भी बलात्कार मर्डर, गैंगवार जैसी खबरों से ही भरे हुए हैं। मुखिया जी थोड़ा बहुत काम गृह मंत्री के दायित्व का भी कर लीजिए। कम से कम 4 महीने तो इस प्रदेश की जनता पर ध्यान दे दीजिए।”

वहीं किरोड़ी लाल मीणा का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह अधिकारियों को फटकार लगाते दिखाई दे रहे हैं। 

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी इस घटना की जाँच की माँग की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “हिंडौन क्षेत्र में दलित कॉलेज छात्रा का एसिड से जला शव कुएं में मिलने का मामला दिल दहला देने वाला है, जो कि संदिग्ध प्रतीत होता है। प्रशासन को मामले की हर एंगल से जाँच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लानी चाहिए। प्रदेश में बहन-बेटियों के साथ लगातार हो रहा अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

आसमान को चीरते हुए चंद्रमा की ओर बढ़ा चंद्रयान-3, अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित: सुरक्षित लैंडिंग होगी सबसे बड़ी चुनौती

भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-3 मिशन (Chandrayan-3) का शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को 2:35 बजे सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने ISRO और वैज्ञानिकों को बधाई दी है। चंद्रयान 3 के बूस्टर सफलतापूर्वक अलग होकर अंतरिक्ष की कक्षा में चला गया।

कमांड सेंटर में पूर्व इसरो प्रमुख डॉक्टर शिवन और इसरो के वर्तमान प्रमुख एस सोमनाथ समेत तमाम अंतरिक्ष वैज्ञानिक मौजूद रहे। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग देखने के लिए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में पहुँचे। उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए गौरव का क्षण है।

फ्रांस की यात्रा पर गए पीएम मोदी ने कहा ट्वीट किया, “चंद्रयान-3 ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय लिखा। यह हर भारतीय के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को ऊपर उठाते हुए ऊँची उड़ान भरता है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों के अथक समर्पण का प्रमाण है। मैं उनकी भावना और प्रतिभा को सलाम करता हूँ!”

चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण को देखने के लिए 200 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राएँ आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुँचे। चंद्रयान-3 मिशन को एलवीएम3एम4 रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया। इसरो में इस रॉकेट को ‘फैट बॉय’ भी कहा जाता है। भारी उपकरण ले जाने की क्षमता की वजह से इसे यह नम दिया गया है।

चंद्रयान-2 की तरह ही चंद्रयान-3 में भी लैंडर और रोवर भेजा जाएगा, लेकिन इसमें ऑर्बिटर नहीं होगा। इसरो ने चंद्रयान-2 की तरह ही चंद्रयान 3 के लैंडर को विक्रम और रोवर को प्रज्ञान नाम दिया है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि पिछले मून मिशन का ऑर्बिटर अभी भी अंतरिक्ष में काम कर रहा है।

लगभग 615 करोड़ रुपए की लागत वाली चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग के बाद इसरो का सबसे पहला मकसद चंद्रमा की सतह पर लैंडर की सॉफ्ट और सुरक्षित लैंडिंग कराना है। इसे 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर लैंड कराने का समय निश्चित किया गया है।

लॉन्चिंग के बाद आकाश में 62 किलोमीटर पर पहुँचकर दोनों बूस्टर अलग हो जाएँगे और रॉकेट की पहुंच 7,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच जाएगी। क्रॉयोजनिक इंजन स्टार्ट होने के बाद रॉकेट की रफ्तार 36,968 किलोमीटर प्रति घंटे हो जाएगी।

लॉन्चिंग के 16 मिनट बाद ये पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हो जाएगा। इसके बाद यह धीरे-धीरे चाँद की कक्षा में प्रवेश करेगा। चंद्रयान-3 धरती से चाँद की 3.84 लाख किलोमीटर की दूरी 40 दिनों में तय करेगा। प्रक्षेपण के बाद सब कुछ योजना के अनुसार एवं सामान्य रहा।

इस मिशन का पहला टारगेट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग है। दूसरा टारगेट रोवर का चंद्रमा की सतह पर चहलकदमी करना और तीसरा रोवर से जुटाई जानकारी के आधार पर चंद्रमा के रहस्यों से पर्दा उठाना है।

बता दें कि चंद्रयान-3 को ले जाने वाले रॉकेट के दूसरे चरण के दो इंजन गोदरेज एयरोस्पेस ने बनाए हैं। गोदरेज एयरोस्पेस के बिजनेस हेड मानेक बहरामकामदिन ने बताया, “चंद्रयान 3 एक बहुत ही प्रतिष्ठित मिशन है। गोदरेज ने दो इंजनों के लिए हार्डवेयर में योगदान दिया है, जो दूसरे चरण के इंजन हैं।”

‘लाठीचार्ज में नहीं हुई भाजपा कार्यकर्ता की मौत, हमने सिर्फ हल्का बल प्रयोग किया था’ : बिहार पुलिस का पक्ष, BJP ने कहा- ये हत्या

बिहार की राजधानी पटना में गाँधी मैदान से विधानसभा तक विरोध मार्च निकालने के दौरान कल राज्य पुलिस ने भाजपा नेताओं पर लाठीचार्ज किया था। इसके बाद खबर आई कि एक भाजपा नेता विजय कुमार सिंह की लाठी लगने से घायल होने के बाद मौत हो गई है।

खबर फैलते ही जगह-जगह इस मामले पर रिपोर्टिंग हुई और कुछ देर बाद पुलिस का बयान आया कि बीजेपी लीडर की मौत लाठीचार्ज होने से नहीं हुई। पुलिस ने केवल हल्का बल प्रयोग किया था क्योंकि सामने से पत्थरबाजी होने लगी थी, पुलिस पर लाल मिर्ची फेंकी जाने लगी थी।

इस बाबत एक सीसीटीवी फुटेज से निकालकर कुछ फोटोज को भी जारी किया गया है। वहीं भाजपा का अब भी आरोप है कि ये मृत्यु लाठीचार्ज के बाद हुई। भाजपा मंत्री ने इसे हत्या बताया है।

पटना के एएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस मामले की जाँच के दौरान मृतक विजय सिंह के साथी भरत प्रसाद चंद्रवंशी के बयान के आधार पर इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। इससे यह सामने आया कि विजय सिंह दोपहर में 1: 22 पर गाँधी मैदान के जेपी गोलंबर से निबंधन कार्यालय छज्जूबाग की तरफ जा रहे हैं जो डाकबंगला रोड से अलग है। 1: 27 पर उसी रास्ते में उन्हें दुर्गा अपार्टमेंट के सामने खाली रिक्शा दिखता है और यहाँ से रिक्शा लेकर वो 5 मिनट दूरी पर स्थित तारा अस्पताल पहुँचते हैं।

एसएसपी के अनुसार, विजय सिंह के साथ जो भी हुआ वो इन्हीं 5 मिनटों में छज्जूबाग क्षेत्र में हुआ। वे डाकबंगला के पास नहीं थे। जहाँ दोपहर के लगभग एक बजे भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग हुआ। वहीं छज्जूबाग क्षेत्र में कोई पुलिस बल नहीं था। एसएसपी राजीव मिश्रा के अनुसार, स्पष्ट होता है कि विजय सिंह की मृत्यु लाठीचार्ज से नहीं हुई। उनके शरीर पर चोट के निशान भी नहीं थे। मौत का असली कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आएगा।

बिहार में लाठी चार्ज, भाजपा का बयान

उल्लेखनीय है कि बिहार के पटना में शिक्षा अभ्यार्थियों का समर्थन करने लिए सरकार का विरोध करने उतरे भाजपाई नेताओं पर गुरुवार को लाठीचार्ज हुआ था। कई वीडियोज सामने आई थी जिसमें बीजेपी के एमपी तक पर डंडे बरसाते दिखाई दिए थे। सुशील मोदी ने ट्वीट करके बताया था कि बीजेपी लीडर की लाठीचार्ज में मौत हो गई। यही खबर मीडिया में भी चली। हालाँकि अब पुलिस का अलग बयान आया। उन्होंने कुछ सीसीटीवी तस्वीरें साझा की है और कहा है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम के बाद में स्पष्ट होगा।

वहीं भारतीय जनता पार्टी से मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, “कल बहुत ही दुखद घटना घटी है, ​जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर प्रदेश के शिक्षक अभ्यर्थियों और किसानों के हक में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा शांति मार्च किया गया। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज किया, जिसमें जहानाबाद जिले के भाजपा महामंत्री विजय कुमार सिंह की हत्या कर दी। भाजपा ने बिहार के किसानों, शिक्षकों, मजदूरों और महिलाओं के हक के लिए बड़ी आहूति दी है।”

ऑस्ट्रेलिया में सड़क पर टहल रहा था भारतीय छात्र, खालिस्तानी समर्थकों ने लोहे की रॉड से पीटा: युवक गंभीर रूप से घायल, हाथ की करवानी पड़ी सर्जरी

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर (Sydney, Australia) में शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को एक भारतीय छात्र पर खालिस्तान समर्थकों ने हमला कर बेरहमी से पीट दिया। घायल स्वप्निल सिंह (बदला हुआ नाम) ने स्थानीय मीडिया को बताया कि पश्चिमी सिडनी के उपनगर वेस्टमीड में हमला किया गया और लोहे के रॉड से उनकी पिटाई की गई।

पीड़ित व्यक्ति ने बताया, “आज सुबह 5.30 बजे मैं काम पर जा रहा था। उसी समय 4-5 खालिस्तान समर्थकों ने मुझ पर हमला कर दिया। मैं एक ड्राइवर के रूप में काम करता हूँ और जहाँ रहता हूँ, वहाँ से मेरी गाड़ी सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर खड़ी थी। जैसे ही मैं अपनी ड्राइविंग सीट पर बैठा, ये खालिस्तान समर्थक अचानक आ गए।”

घायल स्वप्निल सिंह ने स्थानीय मीडिया ऑस्ट्रेलिया टुडे को बताया, “हमलावरों में से एक ने उनकी गाड़ी की बाईं ओर का दरवाजा खोला और उनकी बाईं आँख के नीचे गाल की हड्डी पर लोहे की रोड से हमला कर दिया। “जिसके बाद उन्होंने ड्राइवर साइड का दरवाज़ा खोला और मुझे वाहन से बाहर खींच लिया और लोहे की छड़ों से पीटना शुरू कर दिया।”

पीड़ित ने आगे बताया, “उनमें से दो अपने फोन पर वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे जबकि 4-5 मुझे उन्हें मार रहे थे। इस दौरान वे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। वे ये कहते हुए चले गए कि खालिस्तान मुद्दे का विरोध करने के लिए यह मेरे लिए पर्याप्त सबक होना चाहिए, यदि नहीं तो वे मुझे इस तरह और भी सबक देने के लिए तैयार हैं।”

जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान वहाँ से कुछ राहगीर गुजर रहे थे। राहगीरों अथवा पड़ोसियों में से किसी ने फोन करके इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। NSW पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर पैरामेडिक्स को बुलाया और घायल व्यक्ति के सिर, पैर और बाँह पर गंभीर चोटों के कारण वेस्टमीड अस्पताल भेजा।

पुलिस ने बताया कि कंबरलैंड पुलिस एरिया कमांड से जुड़े अधिकारी हमले की रिपोर्ट के बाद रूपर्ट स्ट्रीट, मेरीलैंड्स वेस्ट गए। वहाँ पुलिस को बताया गया है कि एक 23 वर्षीय व्यक्ति रूपर्ट स्ट्रीट पर टहल रहा था, तभी लोहे के रॉड से लैस चार लोगों ने उस पर हमला कर दिया। घायल के बाँह पर सर्जरी की गई है।

बताते चलें कि पिछले कुछ समय से कनाडा के बाद ऑस्ट्रेलिया में खालिस्तान समर्थकों का आतंक लगातार देखने को मिल रहा है। वहाँ कभी मंदिरों पर हमले हो रहे हैं तो कभी राजदूत को मारने के पोस्टर लगाए जा रहे हैं तो कभी दूतावास प हमले किए जा रहे हैं।

कुछ समय पहले ही ऑस्ट्रेलिया के हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की गई थी। इसके बाद ब्रिस्बेन में स्थित एक हिंदू मंदिर को धमकी दी गई थी कि यदि वे महाशिवरात्रि मनाना चाहते हैं तो उन्हें खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करनी होगी।

ऑस्ट्रेलिया में हिंदू लगातार खालिस्तानियों के निशाने पर रहा है। जनवरी 2023 में 20 दिनों के भीतर ही खालिस्तानियों ने 3 हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करते हुए देश विरोधी और खलिस्तान के समर्थन में नारे लिख दिए थे।

खालिस्तानियों ने हिंदू मंदिर में पहला हमला 12 जनवरी को किया था। यह हमला मेलबर्न के BAPS स्वामीनारायण मंदिर में हुआ था। मंदिर में तोड़फोड़ करने के बाद खालिस्तानियों ने मंदिर की दीवार पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’, ‘मोदी हिटलर है’ और ‘भिंडरावाले जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे थे।

इसके बाद खालिस्तानियों ने 16 जनवरी 2023 को मेलबर्न के ही कैरम डाउन्स में स्थित ऐतिहासिक श्री शिव विष्णु मंदिर (Shri Shiva Vishnu Temple) पर हमला किया था। तोड़फोड़ के बाद, मंदिर की दीवारों पर ‘टारगेट मोदी (मोदी को बनाओ निशाना)’, ‘मोदी हिटलर’ और ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए थे।

वहीं, तीसरा हमला मेलबर्न के ही अल्बर्ट पार्क इलाके में स्थित श्रीश्री राधा बल्लभ मंदिर में 22 जनवरी 2023 को हमला हुआ। इस मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। हमले के बाद, मंदिर की दीवारों में ‘खालिस्तान जिंदाबाद’, ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लिखे गए। इसके अलावा, खालिस्तानी आतंकी भिंडरवाले को शहीद बताते हुए भी नारा लिखा गया।

‘मेरा रेप हो गया है माँ…मुझे बचा ले’ : अजमेर 92 का झकझोर देने वाला टीजर जारी, देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल पर बनी है फिल्म

देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल पर आधारित फिल्म ‘अजमेर 92’ (Ajmer 92) का टीजर जारी हो गया है। इसमें राजस्थान के अजमेर शहर के सुप्रसिद्ध गर्ल्स स्कूल की लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनका बलात्कार करने और उनके तत्कालीन सत्ताधारी दल की लीपा-पोती की कहानी है। इस कांड में लगभग 300 हिंदू लड़कियों को निशाना बनाया गया था, जिनमें से कई छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी।

सच्ची घटना से प्रेरित यह फिल्म 21 जुलाई 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म का पोस्टर और टीजर रिलीज होने के बाद लोगों में इस फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। दर्शक फिल्म का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

फिल्म के टीजर की शुरुआत एक लड़की द्वारा फोन उठाने से होती, जिसे एक अनजान शख्स किया है। वह शख्स लड़की को बताता है कि उसकी तस्वीर अखबार में छपी है। इसके बाद अगली सीन में एक दूसरी लड़की माँ को रोते हुए बताती है कि उसका रेप हो गया है। इसमें रेप पीड़िताओं और छात्राओं के डर को बहुत बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है।   

इस सेक्स स्कैंडल में अजमेर स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के कई खादिम भी इसमें शामिल थे। वे उस समय कॉन्ग्रेस के नेता थे। सन 1987 से 1992 के बीच जिन लड़कियों को ब्लैकमेल करके रेप किया गया था, उनमें कई अधिकारियों एवं पावरफुल लोगों की लड़कियाँ भी थीं।

इस फिल्म में सुमित सिंह, मनोज जोशी, करण वर्मा, राजेश शर्मा, जरीना वहाब और शालिनी कपूर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म का लेखन पुष्पेंद्र सिंह, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह और सूरजपाल पाठक ने किया है। फिल्म के डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह हैं। वहीं, उमेश कुमार तिवारी और करण वर्मा ने मिलकर फिल्म को प्रोड्यूस किया है।

इस फिल्म का मुस्लिम संगठन विरोध कर रहे हैं। कई इस्लामिक संगठनों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है। हालाँकि, हालिया निर्णय में राजस्थान हाईकोर्ट ने सिनेमाघरों या ओटीटी की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके पहले, यह फिल्म 14 जुलाई 2023 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब 21 जुलाई को रिलीज होगी।

1992 का अजमेर कांड

बता दें कि अजमेर का ब्लैकमेलिंग कांड का खुलासा अप्रैल 1992 में हुआ था। इसे दुनिया के सामने लाने वाले पत्रकार संतोष कुमार थे। इस रेप और ब्लैकमेलिंग कांड की शिकार अधिकतर स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ थीं। लोग कहते हैं कि इनमें से अधिकतर ने तो आत्महत्या कर ली।

जब ये केस सामने आया था, तब अजमेर कई दिनों तक बन्द रहा था। लोग सड़क पर उतर गए थे और प्रदर्शन चालू हो गए थे। जानी हुई बात है कि आरोपितों में से अधिकतर समुदाय विशेष से थे और पीड़िताओं में सामान्यतः हिन्दू ही थीं।

इस केस में 18 को आरोपित बनाया गया था। इनमें एक फारूक चिश्ती भी था जो कभी कॉन्ग्रेस का नेता हुआ करता था। इस मामले में 200 से भी अधिक पीड़िताएँ थीं लेकिन कुछ ने ही बयान दिया था। अफसोस, इनमें से शायद ही कोई अपने बयान पर कायम रही हों।

कहते हैं उस वक़्त अजमेर में 350 से भी अधिक पत्र-पत्रिका थी और इस सेक्स स्कैंडल के पीड़ितों का साथ देने के बजाए स्थानीय स्तर के कई मीडियाकर्मी उल्टा उनके परिवारों को ब्लैकमेल किया करते थे। आरोपितों को छोड़िए, इस पूरे मामले में समाज का कोई भी ऐसा प्रोफेशन शायद ही रहा हो, जिसने एकमत से इन पीड़िताओं के लिए आवाज़ उठाई हो।

आरोप यह भी है कि जिस लैब में फोटो निकाले गए, जिस टेक्नीशियन ने उसे प्रोसेस किया, जिन पत्रकारों को इसके बारे में पता था- उन सबने मिल कर अलग-अलग ब्लैकमेलिंग का धँधा चमकाया। पीड़ित लड़कियों और उनके परिवारों से सबने रकम ऐंठे। ऐसे में भला कोई न्याय की उम्मीद करे भी तो कैसे? कभी 29 पीड़ित महिलाओं ने बयान दिया था, आज गिन कर इनकी संख्या 2 है। सिस्टम ने हर तरफ से इन्हें तबाह किया।