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नाजिम हसन ने सोमदत्त से की दोस्ती, फिर उसके बेटे गौरव को बना दिया मुस्लिम: 1 हिंदू युवक के इस्लामी धर्मांतरण के लिए सहारनपुर से बेंगलुरु तक खड़ा किया गया रैकेट

उत्तर प्रदेश एटीएस ने सहारनपुर से नाजिम हसन उर्फ राशिद, अजहर मलिक और मोहम्मद सादिक को गिरफ्तार किया है। इनकी साथी रेशमा की तलाश की जा रही है। वह बेंगलुरु की रहने वाली है। तीनों की गिरफ्तारी 1 जुलाई 2023 को हुई। इन पर बहला-फुसलाकर हिंदू युवक को मुस्लिम बनाने का आरोप है।

एटीएस ने जो जानकारी दी है उससे पता चलता है कि इस युवक के इस्लामी धर्मांतरण से पहले नाजिम ने उसके पिता से दोस्ती की थी। फिर युवक को अपने झाँसे में लिया। सहारनपुर से बेंगलुरु तक रैकेट खड़ा किया गया ताकि वह उनके जाल में फँस जाए। हिंदू युवक को जहन्नुम का डर दिखाया गया। इस्लाम को सबसे अच्छा मजहब बताते हुए अन्य धर्मों को नीच बताया गया। निकाह और नौकरी का लालच दिया गया। रेशमा ने ऑनलाइन गेम के जरिए उसे अपने प्रेमजाल में फँसाने का काम किया।

ATS ने बताया है कि अवैध धर्मांतरण का इनपुट मिलने पर जाँच शुरू की गई थी। सबूतों के आधार पर 1 जुलाई को नाजिम हसन उर्फ राशिद, मोहम्मद सादिक और अजहर मलिक को गिरफ्तार किया गया। तीनों सहारनपुर जिले के रहने वाले हैं। पूछताछ में नाजिम हसन उर्फ राशिद ने बताया कि एक दिन दवा खरीदने के दौरान उसकी मुलाकात सहारनपुर जिले के ही सोमदत्त सिंह से हुई। नजदीकी बढ़ाते हुए कुछ ही दिनों में वह उनके घर आने-जाने लगा।

ATS प्रेसनोट

ATS के अनुसार राशिद मेलजोल बढ़ने के बाद सोमदत्त के बेटे गौरव से मिला। उसने गौरव को नमाज पढ़ना और रोजा रखना जैसे इस्लामी तौर-तरीके सिखाने शुरू कर दिए। राशिद फिर गौरव को मदरसे में बुलाने लगा, जहाँ इस्लाम को सबसे अच्छा मजहब और बाकी धर्मों को गलत बताया जाता था। इस दौरान गौरव को जहन्नुम का भी डर दिखाया गया। इस्लाम कबूलने के लिए उसे अच्छी नौकरी और निकाह का लालच दिया गया।

कुछ समय बाद ऑनलाइन कैरम बोर्ड गेम के रजिए गौरव के सम्पर्क में रेशमा नाम की एक मुस्लिम लड़की आई। वह कर्नाटक के बेंगलुरु की रहने वाली है। रेशमा ने गौरव को अपने प्रेम जाल में फँसा कर इस्लाम कबूल करने के लिए उकसाया। थोड़े समय बाद इस रैकेट में मोहम्मद सादिक और अजहर मलिक भी जुड़ गए। इन दोनों ने गौरव को इस्लाम कबूल करवाने के लिए राशिद की आर्थिक मदद की। आखिरकार सोमदत्त के बेटे गौरव सिंह ने इस्लाम कबूल कर लिया।

ATS ने तीनों आरोपितों के खिलाफ सहारनपुर जिले में IPC की धारा 420, 506, 354 क व 295 ए के साथ 3 व 5(1) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2020 के तहत FIR दर्ज करवाई है। नाज़िम हसन, मोहम्मद सादिक और अजहर मलिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। रेशमा की तलाश की जा रही है।

हसीना खातून मत घबराना, तेरे साथ सारा जमाना… बिहार के 3 मंदिरों में फेंके गए मांस के टुकड़े, पोस्टर लगा कर मोदी-शाह और ‘बजरंग दल’ को धमकी

बिहार के औरंगाबाद जिले में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। बताया जा रहा है कि शनिवार (1 जुलाई, 2023) को यहाँ के 3 मंदिरों में मांस के टुकड़े फेंके गए हैं। एक दुकान पर भकड़ाऊ पोस्टर चिपकाया गया है जिसमें PM मोदी, अमित शाह और RSS से जुड़े लोगों को धमकी दी गई है। हिन्दू संगठनों ने इस हरकत पर नाराजगी जताई है। हालात को देखते हुए घटनास्थल पर अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना औरंगाबाद के अमझर शरीफ इलाके का है। शनिवार को यहाँ हसपुरा बाजार स्थित 3 धर्मस्थलों पर मांस के टुकड़े फेंके गए। इसके अलावा इसी बाजार के व्यापारी कुणाल कुमार की दुकान पर भी मांस का टुकड़ा फेंक कर एक पर्चा चिपका दिया गया। इस पर्चे में पीएम मोदी, अमित शाह, भाजपा के सभी विधायकों के साथ RSS और बजरंग दल वालों को मुर्दाबाद लिखा गया है। कुछ स्थानीय हिन्दू नेताओं के नाम भी चोर बताते हुए लिखे गए हैं। पर्चे में किसी अहले कोरैश नाम का संगठन लिखा हुआ है जिसे अहले कुरैश माना जा रहा है।

भड़काऊ पर्चे के बीच में ‘हसीना खातून मत घबराना, तेरे साथ सारा जमाना’ भी लिखा गया है। रविवार (2 जुलाई) को जब घटना की जानकारी स्थानीय निवासियों को हुई तो वो भड़क गए। मंदिरों में मांस का टुकड़ा मिलने की सूचना से आस-पास के गाँव में भी तनाव फ़ैल गया। नाराज लोगों ने हसपुरा बाजार बंद रखा। घटना की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। DM और SP ने नाराज लोगों को समझाने की कोशिश की। भारी फ़ोर्स ने तनावग्रस्त इलाके में फ्लैग मार्च किया। पुलिस ने धर्म स्थल से मांस के टुकड़े भी साफ़ करवाए।

पुलिस ने इस मामले में अज्ञात FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। लोगों को समझा रहे मौके पर मौजूद सीनियर अधिकारियों ने इसे किसी शरारती तत्व की करतूत बताया है। पुलिस के मुताबिक यह घटना इलाके में तनाव फैलाने की करतूत थी जिसे जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। जाँच के लिए डॉग स्क्वाड, FSL टीमों की मदद ली जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी जुटाया जा रहा है।

फ्रांस में दंगाइयों ने मेयर के घर में घुसा दी जलती कार, पत्नी-बच्चे जान बचाकर भागे तो दागे राॅकेट: हालात अब भी बेकाबू, 45 हजार जवान तैनात

फ्रांस में दंगाइयों ने सड़कों पर दंगा मचाने के बाद अब नेताओं के घरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को आई खबर के अनुसार दंगाइयों ने पेरिस में मेयर विनसेंट जीनब्रून के घर पर हमला बोला। उन्होंने एक कार में आग लगाने से पहले उस कार को पेरिस में मेयर के घर के गेट को तोड़ते हुए घुसा दिया। घटना में उनकी पत्नी घायल हो गई

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के पाँचवे दिन जब दंगाई मेयर के घर के पास पहुँचे और वहाँ कार घुसाई तो मेयर की पत्नी मेलनी नोवाक ने अपने बच्चों के साथ घर से भागने की कोशिश की। लेकिन उस समय उपद्रवियों ने उनके घर पर पटाखे वाले रॉकेट छोड़ दिए। इस पूरी घटना में नोवाक की एक टांग टूट गई। इसके अलावा एक बच्चा भी घायल हो गया।

फ्रांस की पत्रकार नाओमी कैंटन ने इस घटना की जानकारी साझा करते हुए पूछा कि इन लोगों का नाहेल की मौत से क्या लेना-देना था। क्या इसे आतंकवाद नहीं कहा जाएगा। वहीं खुद मेयर ने अपने परिवार और घर पर हुए इस हमले को हत्या का प्रयास बताया।

बता दें कि मेयर जीनब्रून के घर पर हमला हिंसा के पाँचवे दिन हुआ। इससे पहले खबर आई थी 17 साल के नाहेल के शव को कब्रिस्तान में दफनाने के वक्त मस्जिद में भारी भीड़ इकट्ठा हुई और उन्होंने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। वहीं दूसरी ओर यहूदियों के मेमोरियल पर हमला भी किया। इसके अलावा मंगलवार से भड़की हिंसा में अब तक कई शोरूम, कई दुकानें जलाई जा चुकी हैं।

हालातों को संभालने के लिए देश में 45000 जवान तैनात हैं लेकिन दंगाइयों का उपद्रव कम होने का नाम नहीं ले रहा। लगातार ऐसी तस्वीरें और वीडियोज आ रही हैं जिनमें आगजनी, लूटपाट और मारपीट को अंजाम दिया जा रहा है। इसी क्रम में पेरिस के मेयर को भी निशाना बनाया। न उनके घर को छोड़ा गया न बीवी और न बच्चे को।

ऐसे में मेयर ने फ्रांसीसी सरकार से अपील की है कि हालातों को देखते हुए राज्य में आपातकाल लगाया जाए। लेकिन राष्ट्रपति इम्मैनुअल मैक्रो की इस संबंध में अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पुलिस ने मेयर के घर हुए हमले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों को पकड़ने के प्रयास हो रहे हैं। फ्रांस में जगह-जगह उत्पात मचाने के आरोप में अब तक 2000 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।

2 आतंकवादी, एक ड्राइवर-दूसरा सिक्योरिटी गार्ड, मिशन- भारत को इस्लामी मुल्क बनाना: UP एटीएस ने सद्दाम और रिजवान को पकड़ा

उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान रिजवान खान और सद्दाम शेख के तौर पर हुई है। दोनों आतंकी हिज्बुल और अंसार गजवातुल हिन्द से जुड़े हुए हैं। इनका मिशन भारत को इस्लामी मुल्क बनाना था। इसके लिए सोशल मीडिया के जरिए वे युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे।

दोनों आतंकियों में से ड्राइवर और दूसरा सिक्योरिटी गार्ड है। इनके मोबाइल से देश विरोधी गाने और तस्वीरें बरामद हुई हैं। UP ATS ने यह जानकारी रविवार (2 जुलाई 2023) को साझा की है। ATS ने बताया है कि रिजवान खान और सद्दाम शेख काफी समय से सोशल मीडिया पर आतंकियों की फोटो शेयर कर रहे थे। इससे वे ATS की रडार पर आए। रिजवान खान जम्मू-कश्मीर के पुँछ का रहने वाला है। उसने काफी समय तक उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में इंडार्गो फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड में सिक्योरिटी गार्ड का काम किया था। फिलहाल वह बिहार के फारबिसगंज में मरहबा फ़ूड प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में सिक्योरिटी गार्ड था।

ATS प्रेसनोट

दूसरा आतंकी सद्दाम शेख मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का है। वह NTC कम्पनी में ड्राइवर था। ATS की टीम ने दोनों आतंकियों को पकड़ कर पूछताछ की तो उन्होंने अपने देशविरोधी मंसूबों की जानकारी दी। रिजवान ने बताया कि वह ज़ाकिर मूसा और बुरहान वानी को अपना आइडियल मानता है। उसने मुजाहिद बनने की इच्छा जताते हुए ATS से कहा, “जेहाद की राह में फ़िदा होने के लिए इंशाअल्लाह मैं अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था।”

दूसरा आतंकी सद्दाम शेख ओसामा बिन लादेन का फैन है। इन दोनों के मंसूबे भारत को इस्लामी मुल्क बनाकर यहाँ शरिया कानून लागू करना था। सद्दाम ने हथियारों की ट्रेनिंग लेने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से कई आतंकी समूहों को सम्पर्क किया था। वह IMO एप के जरिए पाक अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के भी सम्पर्क में था। सद्दाम ने बाबरी मस्जिद के फैसले से नाखुश था और इसका बदला लेना चाहता था।

ATS प्रेसनोट

पुलिस को दोनों आतंकियों के मोबाइल से नावेद जट, समीर टाइगर, रियाज़ नाइकू जैसे आतंकियों की फोटो मिली। रिजवान के मोबाइल से देश विरोधी गाने भी मिले हैं। रिजवान और सद्दाम मिल कर सोशल मीडिया पर अपने जैसी सोच वाले कट्टरपंथियों की टीम बना रहे थे। दोनों को 1 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

जब आई तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका, भरतनाट्यम देख रहे थे CJI चंद्रचूड़: रिपोर्ट, छुट्टी के दिन 2 बार बैठी सुप्रीम कोर्ट-रात को दी जमानत

गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को बदनाम करने की साजिश रचने वाली तीस्ता सीतलवाड़ को शनिवार (2 जुलाई 2023) में देर रात सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे दी। दिलचस्प बात ये है कि सीजेआई चंद्रचूड़ ने एक भरतनाट्यम का प्रोग्राम देखते हुए उनकी याचिका पर अपनी नजर बनाए रखी और सुनिश्चित किया कि कल यानी कि रविवार को ही मामले की सुनवाई हो जाए।

सीजेआई को करीब 7 बजे पता चला था कि जो पीठ तीस्ता की बेल याचिका सुन रही थी उन्होंने जमानत को लेकर मत अलग दिए हैं। ऐसे में जस्टिस चंद्रचूड़ की इस मामले में एंट्री हुई। उन्होंने दो अन्य जजों को इस पीठ का हिस्सा बनवाया और फिर इस बेल पर मोहर लगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज केवी विश्वनाथन की बेटी सुवर्णा विश्वनाथन का भरतनाट्यम प्रदर्शन चिन्मय मिशन में हो रहा था। इस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रछूड़, सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान और पूर्व न्यायाधीश, सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता समेत कई अन्य वरिष्ठ वकील शामिल हुए थे।

शाम 6 बजे ये प्रोग्राम शुरू हुआ और उसी टाइम ये भी खबर हर जगह आ गई थी कि तीस्ता सीतलवाड़ को जो गुजरात हाईकोर्ट ने तुरंत आत्मसमर्पण करने को कहा है जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में अनुरोध आया है और उसपर सुनवाई शाम 6:30 बजे जस्टिस एएस ओका और प्रशांत कुमार मिश्रा के समक्ष होगी।

इस खबर को सुनते ही तुषार मेहता फौरन सीतलवाड़ की अंतरिम जमानत के खिलाफ गुजरात सरकार की ओर से बहस करने कार्यक्रम से चले गए। लेकिन जब फैसला होने की बारी आई तो जस्टिस ओका और प्रशांत कुमार मिश्रा की राय अलग-अलग निकली।

ऐसे में यही ऑप्शन था कि फैसला बड़ी पीठ करे। इसलिए इस मामले की जानकारी मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को शाम करीबन 7 बजे दी गई। इस दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ कुछ देर के लिए भरतनाट्यम कार्यक्रम को छोड़कर आए और फिर वापस जाकर प्रदर्शन देखना जारी रखा।

जब ये पूरा प्रोग्राम खत्म हो गया तब उन्होंने इस केस में बीआर गवई और जस्टिस एएस बोपन्न को जुड़ने को कहा और दोनों जज पीठ का हिस्सा बनने को सहमत हुए। बाद में ये मामला रात 9:15 बजे जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस ए एस बोपन्ना, जस्टिस बी आर गवई ने सुना जिसके बाद बेल पर मोहर लगी।

घर वापसी कर शबाना बनी ‘रजनी’, हिंदू युवक संग मंदिर में लिए 7 फेरे: घरवालों के दबाव के आगे नहीं झुका प्रेमी जोड़ा

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में शबाना ने घर वापसी कर हिंदू लड़के से मंदिर में शादी कर ली। शबाना हिंदू धर्म अपनाकर रजनी बन गई और उसने बबलू को अपना जीवन साथी बनाया है। दोनों के बीच बीते 4 साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। 6 माह पहले दोनों के घर वालों को इसकी जानकारी हुई तो वे दबाव डालने लगे। लेकिन बबलू और शबाना एक दूसरे से शादी करने की बात पर अड़े रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कौशांबी जिले के करारी कोतवाली थाना क्षेत्र के अलावपुर गाँव का है। शबाना महोबा की रहने वाली है। वहीं बबलू कौशांबी का रहने वाला है। करीब 4 साल पहले दोनों प्रयागराज के एक ईंट भट्ठे में काम करते थे। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हुई और फिर प्यार हो गया। 

हालाँकि 6 महीने पहले शबाना और बबलू के घरवालों को उनके इस रिश्ते के बारे में पता चल गया। इसके बाद परिजन दोनों पर दबाव बनाने लगे। लेकिन शबाना ने अपने घरवालों के सामने बबलू से शादी करने की बात पर अड़ी रही। उसका बब्लू से मिलना जुलना बंद कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर बबलू भी शबाना से शादी करने की बात लगातार कहता रहा। इसी बीच एक दिन बबलू महोबा जाकर शबाना को उसके घर से लेकर अपने गाँव अलावपुर आ गया। 

इसकी जानकारी होने पर शबाना के घर वाले भी अलावपुर पहुँच गए। हालाँकि, शबाना ने उनके साथ जाने से इनकार कर दिया। साथ ही उसने बबलू से शादी करने की ही बात कही। चूँकि शबाना मुस्लिम थी इसलिए इस शादी में महजबी दीवार सामने आ रही थी। ऐसे में शबाना ने हिंदू धर्म अपनाते हुए अपना नाम रजनी कर लिया। फिर मंदिर जाकर बबलू के साथ  7 फेरे लेकर उससे शादी कर ली। 

यूपी तक की रिपोर्ट के अनुसार, इस शादी में शबाना के भाई-भाभी भी शामिल हुए। शादी के बाद वह वापस महोबा लौट गए। वहीं, शबाना से रजनी बनी युवती ने कहा है कि उसने अपनी मर्जी से घर वापसी कर बबलू से शादी की है। वह और बबलू 4 साल से एक दूसरे से प्यार करते हैं। उसकी शादी से उसके माँ-बाप भी खुश हैं। 

शव पर कपड़े नहीं, पूरे चेहरे पर खून… रेप नहीं कर पाया तो 13 साल के नाबालिग ने ईंट से मार-मार के कर दी 6 साल के मासूम की हत्या, टॉफी के बहाने ले गया था

उत्तर प्रदेश के रामपुर में 13 साल के नाबालिग ने 6 साल के बच्चे की हत्या कर दी। आरोपित छोटे बच्चे को टॉफी दिलाने के बहाने अकेले में लेकर गया। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म करने की कोशिश। जब बच्चे ने मना किया तो सिर में ईंट से कई बार हमला कर बच्चे की हत्या कर दी। इसके बाद बच्चे का शव एक गड्ढे में दबाकर मौके से भाग गया। बताया जा रहा है कि आरोपित नशे का आदी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला रामपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के ज्वाला नगर का है। मृतक बच्चा शनिवार (1 जुलाई, 2023) सुबह करीब 10 बजे चॉकलेट लेने गया था। हालाँकि 2 घण्टे तक वह वापस लौटा नहीं। इसके बाद घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान 13 वर्षीय आरोपित भी मृतक की तलाश करता रहा। काफी तलाश के बाद एक स्थानीय व्यक्ति को बच्चे का शव एक गड्ढे पर दबा हुआ दिखाई दिया।

मृतक बच्चे के पिता का कहना है कि जब उन्हें बच्चे का शव मिला तो उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। पूरे चेहरे पर खून लगा हुआ था। इसके बाद सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और मौके से साथ के ही खून से सनी ईंट भी बरामद की। पिता के शक के आधार पर पुलिस ने 13 वर्षीय नाबालिग समेत कई लोगों को हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस की पूछताछ में आरोपित नाबालिग लगातार अपना बयान बदल रहा था। कभी वह गालियाँ देने के कारण हत्या की बात तो कभी कुछ और कह रहा था। सख्ती से पूछताछ के बाद उसने सारी सच्चाई उगल दी।

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ने पुलिस को बताया कि मृतक बच्चा उसे अकेला बाजार जाता दिखाई दिया। इसके बाद वह टॉफी का लालच देकर बच्चे को एकांत में ले गया। जहाँ उसने बच्चे साथ जबरदस्ती संबंध बनाने की कोशिश की। इस पर बच्चा मना करने लगा। दोनों के बीच हाथापाई भी हुई। बात बिगड़ती देख आरोपित ने पास में पड़ी ईंट उठाकर बच्चे के सिर पर कई वार किए। इससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसने मृतक बच्चे का शव पास में बने गड्ढे में दबा दिया और अपने घर भाग गया।

मृतक बच्चे के पिता का कहना है कि आरोपित बहुत नशा करता है। वह स्मैक व शराब का आदी है। उसके घरवाले भी उसे मना नहीं करते हैं। वह अपने बच्चे को आरोपित से मिलने भी नहीं देते थे। वहीं, इस मामले में एसीपी संचार सिंह का कहना है कि आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। 

45 साल पहले जब शरद पवार ने कुर्सी के लिए ‘पीठ में घोंपा था छुरा’, आज भी नहीं भूली वसंतदादा की विधवा… जो बोया, वही काट रहे NCP संस्थापक

अब तक ये खबर तो सभी ने सुन ही ली है कि NCP संस्थापक शरद पवार के भतीजे अजित ने बगावत कर दी और नेता प्रतिपक्ष से सीधा महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन बैठे। इतना ही नहीं, शरद पवार के वरिष्ठ सहयोगी प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल भी उनके साथ हैं। अजित पवार का कहना है कि पार्टी के सारे विधायक उनके साथ हैं। उन्होंने ये भी स्पष्ट कर दिया कि कोई नई पार्टी नहीं बनाई गई है, NCP का नाम-सिंबल सब पर उनका दावा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ़ की।

इस प्रकरण पर पहले तो शरद पवार कहते रहे कि अजित ने बैठक क्यों बुलाई है उन्हें नहीं पता, लेकिन बाद में बागियों पर एक्शन लेने की धमकी देते हुए फिर से पार्टी खड़ा करने का ऐलान किया। उन्होंने अपने समर्थकों को ढाँढस बँधाते हुए कहा कि ये कोई नई बात नहीं है, पहले भी वो इन चुनौतियों से निपट चुके हैं। शरद पवार ने जीतेन्द्र अव्हाड को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया। उन्होंने पुत्री मोह में फँस कर बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया था, जिसके बाद अजित पवार के तेवर कड़े हो गए।

आज भले ही शरद पवार अपने भतीजे को बागी कहें क्योंकि उनकी पार्टी और परिवार में टूट हो चुकी है, लेकिन क्या उन्हें याद नहीं है कि आज से 45 साल पहले उन्होंने भी ‘धोखेबाजी’ कर के ही पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तशरीफ़ रखा था? तब वह मात्र 38 की उम्र में देश में सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन इसके पीछे थी उनके ‘गुरु’ के साथ उनकी ‘दगाबाजी’। उन्होंने आपातकाल के बाद कॉन्ग्रेस के कमजोर होने का फायदा उठाया और कुर्सी लपक ली।

आइए, उस दौर को याद करते हैं। असल में शरद पवार इंदिरा गाँधी वाली कॉन्ग्रेस की विरोधी ‘रेड्डी कॉन्ग्रेस’ का हिस्सा थे, जिसमें शंकर राव चव्हाण और ब्रह्मानंद रेड्डी जैसे नेता शामिल थे। शंकरराव चव्हाण आगे चल कर राजीव गाँधी की सरकार में भारत के वित्त मंत्री और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में गृह मंत्री बने। वो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे और 80 के दशक के उत्तरार्ध में फिर से बने। वो पेशे से अधिवक्ता थे। वो ‘भारत स्काउट्स एन्ड गाइड्स’ के अध्यक्ष पद पर भी रहे।

वहीं ब्रह्मानंद रेड्डी की बात करें तो वो 60 के दशक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे और 1977 में कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। हैंदराबाद और इसके आसपास उद्योग-धंधे को बढ़ावा देने का श्रेय उन्हें ही जाता है। उनकी कॉन्ग्रेस के मुकाबले वहीं इंदिरा गाँधी के रूप में दूसरी तरफ मजबूत विरोधी थी। इंदिरा के साथ महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नासिकराव तिरपुडे थे। वो महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री भी थे। उन्होंने ही विदर्भ को अलग राज्य का दर्जा देने के लिए आंदोलन शुरू किया था।

ये कहानी शुरू होती है 1978 में महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव से। इसमें जहाँ ‘जनता पार्टी’ 99 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बन कर उभरी, वहीं कॉन्ग्रेस के खाते में 69 सीटें आईं। इंदिरा गाँधी वाली कॉन्ग्रेस भी 62 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। जनता पार्टी को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस के दोनों धड़ों ने दिल्ली की दौड़ लगाई और इंदिरा गाँधी की सहमति से वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री और नासिकराव तिरपुडे उप-मुख्यमंत्री बने। वहीं शरद पवार के पास उद्योग मंत्रालय था।

शरद पवार के बारे में जानने लायक बात ये है कि उनका परिवार शुरू से चीनी के कारोबार में था और आज भी अधिकतर चीनी मिल उनके परिवार और इससे जुड़े लोगों के पास ही हैं। शरद पवार ने 40 विधायकों को तोड़ दिया और सुशील कुमार शिंदे समेत कई मंत्री उनके साथ निकल लिए। इसके बाद वसंतदादा पाटिल की सरकार अल्पमत में आई गई और उनके इस्तीफे के बाद शरद पवार मुख्यमंत्री बने। उन्होंने ‘समाजवादी कॉन्ग्रेस’ नाम से एक नई पार्टी का निर्माण कर दिया।

शुरू से जोड़तोड़ में दक्ष रहे शरद पवार ने फिर जनता पार्टी, वामपंथी दलों और ‘शेतकरी कामगार पक्ष’ के साथ मिल कर ‘प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटक फ्रंट’ गठबंधन बनाया और सीएम बने। हालाँकि, 18 महीने चलने के बाद उनकी सरकार को बरख़ास्त कर दिया गया था। आज यही शरद पवार अपने भतीजे को बगावत करने पर नसीहत दे रहे हैं। वो शायद भूल गए हैं कि 45 साल पहले महाराष्ट्र की सत्ता हथियाने के लिए उन्होंने कौन-कौन से हथकंडे अपनाए थे। 17 फरवरी, 1980 तक उनकी सरकार चली।

शरद पवार ने मात्र 4 महीने चली वसंतदादा पाटिल की सरकार को गिरा दिया था। शरद पवार के पिता गोविंद राव बारामती किसान सहकारी बैंक में कार्यरत थे। उनकी माँ खेती-किसानी के काम में लगी हुई थी। शरद पवार ने पुणे में कॉलेज में एडमिशन लिया और छात्र संघ के महासचिव के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1967 में मात्र 26 वर्ष की उम्र में वो बारामती से विधायक बन गए थे। जब उन्होंने सरकार गिराई, तब खुद वसंतदादा पाटिल ने कहा था कि शरद पवार ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है।

वसंतदादा पाटिल की सरकार के समय इंदिरा गाँधी वाली कॉन्ग्रेस के शिवराज पाटिल विधानसभा अध्यक्ष थे। तब जनता पार्टी के कद्दावर नेता चंद्रशेखर हुआ करते थे, जिनसे शरद पवार की नजदीकी थी और सरकार गिराने का कारण भी यही बना। शारद पवार की सरकार में शिवराज पाटिल को हटा कर प्राणलाल वोरा स्पीकर का पद मिला। शरद पवार ने कोऑपरेटिव की राजनीति और चीनी मिलों के जरिए अपना एक नेटवर्क तैयार किया, जिससे उन्हें मानव संसाधन भी मिला और वित्त भी।

ये भी आपको मालूम होगा कि आपातकाल के कारण लोकप्रियता खो चुकीं इंदिरा गाँधी को हरा कर बनी जनता पार्टी की सरकार टिक नहीं पाई थी और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई सबको एक साथ लेकर चलने में नाकाम रहे थे। अतः 1980 में मध्यावधि चुनाव हुए और इंदिरा गाँधी ने सत्ता में आते ही 9 राज्यों की गैर-कॉन्ग्रेसी सरकार को बरख़ास्त कर दिया। 1985 में शरद पवार की कॉन्ग्रेस (समाजवादी) को 54 सीटें मिलीं और वो नेता प्रतिपक्ष बने। 1987 में राजीव गाँधी के ऑफर के बाद शरद पवार फिर कॉन्ग्रेस में लौटे।

बाद में सोनिया गाँधी का विरोध करते हुए उन्होंने कॉन्ग्रेस तोड़ कर NCP बना ली। ये अलग बाद है कि फिर यूपीए में शामिल होकर इसी कॉन्ग्रेस की सरकार में कृषि मंत्री बने। शरद पवार खुद जोड़तोड़ और सौदेबाजी वाले नेता रहे हैं। 2019 में भी जब अजित पवार ने बगावत की थी तब वसंतदादा पाटिल की विधवा शालिनिताई पाटिल ने शरद पवार को उनके करतूतों की याद दिलाई थी। उन्होंने इसे ‘कर्मा’ बताते हुए कहा कि अब शरद पवार को पता चलेगा कि कैसा लगता है।

आज उस शरद पवार को लेकर अगर कोई नैतिकता के दावे करता है तो उसे पहले शरद पवार का इतिहास ही देख लेना चाहिए। शरद पवार ने वसंतदादा पाटिल के साथ जो किया, 41 वर्ष बाद भी उनकी विधवा ये भूली नहीं हैं। अजित पवार वही तो कर रहे हैं, जो उन्होंने घर में रह कर अपने चाचा से सीखा है। शरद पवार पुत्रीमोह में फँसे रह गए और इधर पार्टी और परिवार दोनों टूट गए। शरद पवार को 1978 को याद करना चाहिए और पार्टी के भविष्य को स्वीकार कर लेना चाहिए।

17 साल की हिन्दू छात्रा को लेकर फरार हुई शिक्षिका निदा वहलीम, अब्दुल गफूर का है स्कूल: ‘लव जिहाद’ की चर्चा पर बोली पुलिस – दोनों मर्जी से गए

राजस्थान के बीकानेर जिले में एक मुस्लिम टीचर पर 17 वर्षीया हिन्दू छात्रा को अपने साथ ले कर भागने का आरोप लगा है। अरोपिता 25 वर्षीया निदा वहलीम पर आरोप है कि उसने शुक्रवार (30 जून 2023) को अपने भाइयों जुनैद और नावेद के साथ मिल कर नाबालिग हिन्दू छात्रा को कहीं गायब कर दिया है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना को ‘लव जिहाद’ बताते हुए थाने में हंगामा किया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। मामले की जाँच कर रही पुलिस ने प्रथम दृष्टया छात्रा के अपनी खुद की मर्जी से टीचर के साथ जाने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बीकानेर की श्रीडूंगरढ़ तहसील का है। यहाँ के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा शुक्रवार (30 जून 2023) को अचानक कहीं लापता हो गई। छात्रा के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है जिसमें स्कूल की महिला टीचर निदा वहलीम पर अपनी बेटी को गायब करने का आरोप लगाया। शिकायत में बताया गया है कि अरोपिता महिला टीचर अविवाहित है जो लगभग 2 माह से छात्रा से नजदीकी बढ़ा रही थी। पीड़ित पिता ने निदा के 2 भाइयों जुनैद और नावेद पर भी अपनी बेटी के खिलाफ हुई साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।

यह मामला ए जी मिशन स्कूल का है जिसके मालिक का नाम अब्दुल गफूर है। शिकायत में अरोपिता निदा को अब्दुल गफूर की रिश्तेदार बताया गया है। लड़की के पिता ने स्कूल प्रशासन पर भी अपनी बेटी के गायब होने की साजिश में मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूल स्टाफ को उनकी बेटी और निदा के गायब होने की काफी पहले ही जानकारी मिल गई थी लेकिन उन्होंने इसका जिक्र किसी से नहीं किया। पीड़ित परिवार ने शिकायत कॉपी DGP राजस्थान को भी भेजी है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पुलिस ने यह मामला IPC की धारा 363, 366, 120 बी के साथ 84 जेजे एक्ट में दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस को शुरुआती जाँच में निदा और छात्रा के बीच काफी नजदीकी होने की जानकारी मिली है। बीकानेर की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने बताया कि दोनों लड़कियाँ खुद की मर्जी से घर से बाहर निकली हैं जिन्हें तलाशने के लिए पुलिस की 4 टीमों को लगाया गया है। पुलिस ने छात्रा को जल्द खोज निकालने का भरोसा दिया है।

इस घटना की जानकारी जैसे ही हिन्दू संगठनों को हुई उन्होंने थाने में पहुँच कर हंगामा किया। हिन्दू संगठनों ने घटना को लव जिहाद बताया। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने आरोपित महिला टीचर पर छात्रा बरगलाने और ब्रेनवॉश के आरोप के साथ इस साजिश में कुछ और लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई है। घटना के चलते कस्बे में तनाव और आक्रोश बताया गया है। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

कई लड़कियों और महिलाओं ने लव जिहाद बंद करो के नारे भी लगाए हैं और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ है। हालात को देखते हुए कस्बे में अतिरिक्त फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

‘NCP का सिंबल-नाम सब हमारा, सारे विधायक मेरे साथ’: डिप्टी CM बनने के बाद बोले अजित पवार, चाचा शरद राव बोले – बागियों पर एक्शन लूँगा, पार्टी फिर खड़ी करूँगा

महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर ही रविवार (2 जुलाई, 2023) को तब बदल गई, जब नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने कई विधायकों समेत सरकार में शामिल होने का फैसला लिया। उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ-साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं। प्रफुल्ल पटेल तो NCP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। धनंजय मुंडे और दिलीप वालसे पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी नेता भी अब भतीजे अजित के साथ हैं।

NCP के वरिष्ठ नेताओं छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजित पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 9 वर्षों से विकास के लिए कार्य कर रहे हैं, और विकास को महत्व देना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि इस विकास यात्रा में भागीदारी की इच्छा के कारण ही वो राजग का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने कहा कि 1984 के बाद कोई ऐसा नेता नहीं हुआ जिसके नेतृत्व में देश आगे गया। उन्होंने इसका भी जिक्र किया कि विदेश में पीएम मोदी का कैसे सम्मान हो रहा है।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि विपक्ष में उन्हें ऐसा कोई नेतृत्व नहीं दिखता है। उन्होंने विपक्षी एकता के प्रयासों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष बिखरा हुआ है और ये लोग आपस में ही लड़ रहे हैं। अजित पवार ने NCP के नाम और सिंबल पर भी दावा कर दिया है। उन्होंने कहा कि लगभग सभी विधायक उनके पास पहुँच रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि नागालैंड के भी 7 NCP विधायक ने भाजपा के साथ जाने का निर्णय लिया था। छगन भुजबल ने भी साफ़ किया कि उनलोगों ने कोई नई पार्टी नहीं बनाई है, वो NCP ही हैं।

नए-नवेले मंत्री भुजबल ने कहा कि शरद पवार खुद कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता में लौट रहे हैं और उनलोगों ने उनके इच्छानुरूप ही काम किया है। उधर शरद पवार ने बागियों पर कार्रवाई की बात करते हुए कहा कि वो फिर से पार्टी खड़ा कर के दिखाएँगे। उन्होंने जितेंद्र अव्हाड को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पार्टी का प्रमुख चेहरा अब भी वही हैं। उन्होंने कहा कि ये कोई नई बार नहीं है। साथ ही ED के डर से लोगों के भाजपा के साथ जाने की बात भी कही।