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’72 हूरें’ से उस हिरोइन को दिक्कत, जो फिल्मों के लिए सबीहा शेख से बनी ‘रानी चटर्जी’: कहा- कुरान किसी की जान लेना नहीं सिखाता

इस्लामी आतंकवाद के चेहरे को उजागर करती फिल्म ’72 हूरें (72 Hoorain)’ चर्चा में है। ‘रानी चटर्जी (Rani Chatterjee)’ के नाम से फिल्मों में काम करने वाली भोजपुरी एक्ट्रेस सबीहा शेख ने इस फिल्म पर आपत्ति जताई है। कहा है कि ऐसी फिल्में लोगों को धार्मिक आधार पर बाँटने के लिए बनाई जाती है। उन्होंने यह भी कहा है कि फिल्म मेकर्स और डायरेक्टर पैसा कमाने के लिए लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबीहा शेख (Sabiha Shaikh) ने ’72 हूरें’ का ट्रेलर देखने के बाद फिल्म को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “इस फिल्म में कुरान को गलत तरीके से दिखाया गया है। कुरान किसी की जान लेना नहीं सिखाता। अगर ’72 हूरें’ के मेकर्स या डायरेक्टर ने कुरान पढ़ी होती तो वे इस तरह के डायलॉग का इस्तेमाल नहीं करते।”

सबीहा ने आगे कहा है कि हाल ही में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ में कई चीजों को गलत तरीके से दिखाया गया है। इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची है। चाहे वह हिन्दू हों या मुस्लिम सभी को गलत ही लगा है। भारत में रहकर और टीवी में देखकर उन्होंने रामायण के विषय में जितना भी जाना है, उसके हिसाब से तो ‘आदिपुरुष’ देखकर बुरा ही लगेगा।

उन्होंने यह भी कहा है कि ‘द केरल स्टोरी’ के हिट हो जाने के बाद लोगों ने इसे एक ट्रेंड बना लिया है। नफरत या तो राजनीति के माध्यम से फैलाई जा रही है या फिल्मों के माध्यम से। आम जनता का इससे कोई लेना-देना नहीं है। सबीहा शेख ने कहा, “नई पीढ़ी को इस तरह की घृणित फिल्में दिखाकर आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं? कुरान लोगों को मारने के लिए कहाँ कहता है? क्या आप इसे मुझे दिखा सकते हैं? इससे समाज में गलत मैसेज जा रहा है। यह नफरत फैलाने के एजेंडे का हिस्सा है।”

सबीहा ने आगे कहा, “मैं एक मुस्लिम हूँ। लेकिन क्या आप मुझे और मेरे परिवार के सदस्यों को आतंकवादी कहेंगे? ‘द केरल स्टोरी’ से पता चला है कि लड़कियों का जबरन इस्लाम में धर्मांतरण किया जा रहा है। दक्षिण भारत में, लोगों को ईसाई बनाया जा रहा है। लेकिन कोई भी इसके बारे में बात नहीं करना चाहता? आप मुस्लिम विरोधी फिल्म बना रहे हैं। देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए फिल्म  ’72 हूरें’ के अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है। लेकिन इससे जो नफरत फैलेगी उसकी भरपाई कौन करेगा?”

सबीहा शेख से रानी चटर्जी कैसे बनीं?

जून 2020 में हिंदुस्तान को दिए एक इंटरव्यू में सबीहा शेख ने कहा था, “अपनी पहली फिल्म ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ की शूटिंग के दौरान मैं गोरखनाथ मंदिर में थी। फिल्म के एक सीन में मुझे भगवान शिव की मूर्ति के पास अपना सिर मारना था। शूटिंग के दौरान वहाँ कई मीडियाकर्मी मौजूद थे। ऐसे में डायरेक्टर को लगा कि अगर लोगों को मेरा असली नाम पता चल गया तो वे इस सीन की शूटिंग नहीं होने देंगे। यदि वह सीन शूट न हो पाता तो फिल्म के लिए नुकसानदायक हो सकता था। ऐसे में डायरेक्टर ने मुझे ‘रानी’ नाम का उपयोग करने के लिए कहा था। फिल्म में भी मेरा यही नाम था।”

सबीहा शेख ने यह भी कहा था, “किसी ने फिल्म मेकर सुधाकर पांडे से मेरी जाति पूछी थी। उन दिनों रानी मुखर्जी का नाम मशहूर हो चुका था। इसलिए, उन्होंने मेरा नाम रानी मुखर्जी की तरह ‘रानी चटर्जी’ कर दिया। अखबारों में नाम प्रकाशित होने के बाद, मेरे माता-पिता इस नए नाम से खुश नहीं थे। लेकिन बाद में यह नाम मेरे करियर के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ।”

‘बेटी पढ़ाओ, पर बीवी नहीं’: ज्योति मौर्या नहीं तय करेगी ‘हीरा ठाकुर’ का भविष्य, वे अपने अलोक से समाज में हमेशा फैलाते रहेंगे ज्योति

फिल्मों की दुनिया और असल जिंदगी दोनों अलग-अलग होती है। जरूरी नहीं जो काम असल जिंदगी में किया जा रहा है उसका अंजाम फिल्म की हैप्पी एंडिंग जैसा ही हो। हाल में ये बात लोगों को और अच्छे से समझ आई जब उन्होंने ज्योति मौर्या और अलोक मौर्या का केस सुना…। इस केस के सामने आने के बाद ट्विटर पर हीरा ठाकुर ट्रेंड हो रहा है। ऐसा क्यों है आइए बताते हैं।

दरअसल, हीरा ठाकुर, सूर्यवंशम फिल्म का एक कैरेक्टर हैं जो फिल्म में अनपढ़ दिखाया गया है लेकिन उसकी शादी एक पढ़ी-लिखी लड़की से होती है और उसका सपना आईएएस का होता है। हीरा ठाकुर अपनी पत्नी को पढ़ाता है और इतना साथ देता है कि उसे आईएएस भी बनवा देता है। बाद में वही पत्नी जब जिलाधिकारी बनती है तो अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पति हीरा ठाकुर को देती है और आईएएस की कुर्सी पर बैठकर भी ससुर के पाँव छूकर उनका सम्मान करती है।

फिल्म में हीरा ठाकुर का कैरेक्टर ऐसा गढ़ा गया है कि यदि कोई पुरुष उसे देखे तो वो कभी अपनी पत्नी को पढ़ने से न रोके और जितना बन पड़े उसे खुद के पैरों पर खड़ा करवाए। शायद ऐसा ही सोचा होगा अलोक मौर्या ने। अलोक मौर्या एक सफाईकर्मी हैं जिनकी शादी 2010 में ज्योति मौर्या से हुई थी। अलोक को जब पता चला कि उनकी पत्नी के सपने ऊँचे हैं तो वो अपना सब कुछ छोड़कर उसे इलाहाबाद लेकर आ गए। यहाँ उन्होंने उसे उधार ले लेकर पढ़ाया। जब ज्योति ने 2016 में पीसीएस क्लियर की तो उनकी भी खुशी का ठिकाना नहीं था…।

अब यहाँ तक की कहानी तो अलोक मौर्या और हीरा ठाकुर की एक जैसी रही। मगर इसके बाद जो हुआ वो फिल्म की कहानी से बिलकुल अलग है। ज्योति मौर्या जिन्हें अलोक ने उधार लेकर पढ़ाया लिखाया वो पद पर आसित होने के बाद बदल गईं। साल 2020 में उनका प्रेमी कोई और बन गया और वो खुद अलोक को गालियाँ देने लगीं। बात जब ज्यादा बढ़ी तो ज्योति ने अलोक पर दहेज उत्पीड़न का केस करवा दिया। अलोक दर-दर भटके। रोते हुए उनकी वीडियो सामने आई। लेकिन ज्योति मौर्या के सिर का अहंकार नहीं उतरा।

जब सोशल मीडिया पर अलोक के साथ हुई नाइंसाफी की कहानी वायरल हुई तो लोग उनकी आवाज बने और उन्हें इंसाफ दिलाने की माँग शुरू हो गई। अब ये मामला प्रशासन के भी संज्ञान में भी है। जो ज्योति मौर्या कल तक अपनी कुर्सी का रौब दिखाकर अलोक को धमकियाँ दे रही थीं उनकी अब पुरानी वीडियोज सोशल मीडिया पर घूम रही हैं। किसी में वह अलोक की जाति पर उन्हें अपशब्द बोल रही हैं तो किसी में उनकी चैट वायरल है।

सोशल मीडिया पर लोगों का पूछना है कि आखिर जो इंसान इतना एहसान फरामोश है कि अपने घर-परिवार को भूल जाए वो क्या गारंटी है कि सरकारी कुर्सी पाने के बाद जनता के हित में काम करेगा? इतना ही नहीं कुछ लोगों ने तो इस केस के बाद महिलाओं का मजाक बना दिया है।

पुरुषों को तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि वह लोग हीरा ठाकुर बनकर बीवियों को न पढ़ाएँ वरना अलोक मौर्या जैसा हाल हो सकता है। कुछ लोग इस मुद्दे पर मीम बना रहे हैं कि बेटी पढ़ाओ मगर बीवी नहीं। इसी तरह स्क्रीनशॉट वायरल है कि जब लड़की अपने प्रेमी को बताती है कि उसका सपना एसडीएम बनने का है तो लड़का उसे ब्लॉक मारकर दूर भाग जाता है।

अलोक भले आज पीड़ा में हैं। भले उनकी पीड़ा पर मीम बन रहे हैं। पर सच्चाई यही है कि समाज के ऐसे ही अलोक पर्दे के हीरा ठाकुर जैसी भूमिकाओं की प्रेरणा होते हैं। असल जिंदगी के हीरा ठाकुर का भविष्य कोई ज्योति तय नहीं करेगी। हीरा ठाकुर जैसे न केवल अपना भविष्य खुद लिखते हैं, बल्कि अपने साथ वालों का भविष्य भी बुनते हैं। वे आगे भी समाज में शिक्षा, नारी सशक्तिकरण की ज्योति फैलाते रहेंगे।

हिंदू लड़की पर धर्मांतरण और निकाह का दबाव बना रहा था राशिद खान, इनकार करने पर पीड़िता के पिता को फर्जी मामले में जेल भिजवाया

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में राशिद खान नाम के एक युवक पर 28 वर्षीया हिन्दू लड़की को 9 साल तक परेशान करने और बाद में धर्मान्तरण का दबाव बनाने का आरोप लगा है। धर्म परिवर्तन न करने पर पीड़िता को परिवार सहित फर्जी केसों में फँसाने की धमकी दी गई। आरोपित राशिद इलाके का गैंगस्टर बताया जा रहा है। पीड़िता द्वारा शुक्रवार (30 जून 2023) को दर्ज करवाई गई FIR पर पुलिस ने राशिद को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला गोरखपुर जिले कोतवाली क्षेत्र का है। यहाँ हुमायूँपुर मोहल्ले की रहने वाली एक लड़की ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेज कर शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक पीड़िता और राशिद साल 2014 में एक ही साथ एक कोचिंग में पढ़ते थे। पढ़ाई के दौरान राशिद लगातार पीड़िता से बात करने का प्रयास करता रहा। पीड़िता का कहना है कि उसने राशिद की नीयत भाँप कर उससे दूरी बनाए रखी। कुछ दिनों बाद राशिद ने कोचिंग से लड़की का नंबर लिया और मैसेज भेजने लगा।

शिकायत के मुताबिक पीड़िता ने अपने घर में राशिद की करतूत बताई तो लड़की के परिजन आरोपित के घर उलाहना देने गए। इससे राशिद पर कोई फर्क नहीं पड़ा। बीच में पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन आरोपित की हरकतें ज्यों की त्यों जारी रहीं। मजबूरन लड़की ने अपना नंबर बंद कर दिया। इसके बाद राशिद पीड़िता के पिता को मैसेज करने लगा। इन संदेशों में अपनी बेटी को इस्लाम कबूल करवा कर शादी करवाने के लिए कहा जाता था। अपनी बात न मानने पर पीड़िता के घर वालों को फर्जी केस में फँसवा कर जेल भिजवाने की धमकी भी राशिद दिया करता था।

शिकायत में बताया गया है कि राशिद ने कुछ समय बाद एक अंजान लड़की को मोहरा बनाकर पीड़िता के पिता को 12 मई 2023 को रेप केस में जेल भिजवा दिया। अब राशिद लड़की के पिता की जेल से रिहाई की एवज में पीड़िता के धर्मान्तरण और अपने साथ निकाह की शर्त रख रहा है। लड़की का यह भी कहना है कि आरोपित द्वारा न सिर्फ उसका लगातार पीछा किया जा रहा है, बल्कि मोबाइल पर गंदे-गंदे मैसेज भेजे जा रहे हैं। वहीं आरोपित राशिद ने लड़की पर 2 लाख रुपए की रंगदारी माँगने और न देने पर खुद को केस में फँसाने का आरोप लगाया है।

राशिद पर IPC की धारा 354 (घ), 504, 506 सहित उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत कार्रवाई हुई है। पुलिस ने शनिवार (1 जुलाई 2023) को राशिद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

राशिद का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है। वह इलाके का गैंगस्टर है। 23 जनवरी 2019 में उसने गोरखपुर में अपने साथियों सहित अरविन्द सिंह और रमेश यादव नाम के युवकों की गोली मार कर हत्या की थी। जेल से छूटने के बाद राशिद ने 3 माह पहले अपने गवाह अमर चौधरी को घर में घुस कर धमकाया था, जिस पर उसके खिलाफ फिर FIR दर्ज हुई थी। गोरखपुर पुलिस के मुताबिक पीड़िता के पिता को झूठे केस में फँसाने के आरोपों की जाँच करवाई जा रही है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िताने बताया कि जिस जेल में उनके पापा हैं, अब वहीं राशिद भी भेजा गया है। लिहाजा वो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। राशिद के रंगदारी के आरोपों पर पीड़िता का कहना है कि उसके फोन का क्लोनिंग कर के फर्जी चैट बनाए गए थे।

भारत में जहाँ-जहाँ वर्ल्ड कप के मैच, वहाँ सुरक्षा का जायजा लेने आएगा पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल, टीम भेजने को लेकर अपनी सरकार से माँगी इजाजत

वनडे वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड सरकार से इजाजत न मिलने का राग अलाप रहा था। लेकिन, अब सरकार से इजाजत मिलने से पहले ही पाकिस्तान भारत में सुरक्षा का खतरा बताकर यहाँ अपनी जाँच टीम भेजने की बात कर रहा है। जाँच टीम भारत के उन शहरों की सुरक्षा का जायजा लेगी, जहाँ पाकिस्तान को मैच खेलने हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में पाकिस्तान के अंतर-प्रांतीय समन्वय खेल मंत्रालय के आधिकारिक सूत्र के हवाले से कहा जा रहा है कि बकरीद की छुट्टियों के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का नया अध्यक्ष चुना जाएगा। इसके बाद विदेश और आंतरिक मंत्रालय के साथ मिलकर सरकार यह तय करेगी कि सुरक्षा जाँच के लिए प्रतिनिधिमंडल को भारत कब भेजा जाना है। यह प्रतिनिधिमंडल पीसीबी के प्रतिनिधियों के साथ उन शहरों का दौरा करेगा जहाँ पाकिस्तानी टीम को मैच खेलने हैं।

बता दें कि ICC ने गत 27 जून को वनडे वर्ल्ड कप 2023 का शेड्यूल जारी किया था। शेड्यूल जारी होने के बाद पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के भारत दौरे का विरोध कर रहे थे। यहाँ तक कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भी कहा था कि वह सरकार की अनुमति के बिना अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। 

बोर्ड ने अपने बयान में कहा था कि भारत का दौरा करने के लिए बोर्ड को पाकिस्तान सरकार की मंजूरी लेनी होती है। भारत में जहाँ-जहाँ मैच खेलने हैं, उसके लिए भी सरकार से मंजूरी लेनी होगा। वर्ल्ड कप खेलने के लिए अब तक सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। बोर्ड लगातार सरकार के संपर्क में है। अनुमति मिलते ही ICC को सूचित किया जाएगा। PCB ने यह भी कहा था कि जब उसे ICC ने वर्ल्ड कप का ड्राफ्ट शेड्यूल भेजा था तब भी उसने आईसीसी से यही कहा था और अब भी वह यही बात दोहरा रहा है।

PCB ने सरकार से अनुमति के लिए लिखा पत्र

बता दें कि इस बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने सरकार को पत्र लिखकर वर्ल्ड कप खेलने के लिए भारत जाने की अनुमति माँगी है। इस पत्र में कहा गया है कि क्या पाकिस्तानी टीम को भारत की यात्रा करने की अनुमति है? यदि हाँ, तो क्या सरकार को मैच के 5 वेन्यू में से किसी में भी आपत्ति है? साथ ही, क्या पाकिस्तान सरकार सुरक्षा का जायजा लेने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भारत भेजना चाहती है?

पीसीबी ने ईएसपीएनक्रिकइन्फो से हुई बातचीत में कहा है कि भारत का दौरा करने की अनुमति देना पाकिस्तान सरकार का विशेषाधिकार है। सरकार जो भी फैसला करेगी बोर्ड उसका पालन करेगा। सुरक्षा जाँच के लिए टीम भेजने का फैसला भी सरकार का ही है। गौरतलब है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम को भारत दौरे पर वनडे वर्ल्ड कप में 9 लीग मैच खेलने हैं। इस दौरे की शुरुआत 6 अक्टूबर को क्वालीफाई करने वाली पहली टीम के साथ मुकाबले से होगी। वहीं, पाकिस्तान और भारत का मुकाबला 15 अक्टूबर को होगा। 

रियाजुद्दीन की किताब दुकान में छापा, मदरसे में पढ़ने वाला एक युवक हिरासत में: बिहार में कई ठिकानों पर NIA की रेड, PFI-ISI से कनेक्शन

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और बिहार ATS की टीमों ने मिल कर पटना में छापेमारी की है। इस छापेमारी का कनेक्शन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) से जुड़ा बताया जा रहा है। दबिश के दौरान एक किताब की दुकान पर भी टीमें पहुँची हैं। एक अन्य टीम के दरभंगा भी पहुँचने की जानकारी सामने आई है। रविवार (2 जुलाई, 2023) को हो रही इस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में भी लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार-रविवार रात लगभग 2 बजे NIA और ATS की टीमें समूहिक रूप से पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में पहुँचीं। जाँच एजेंसियाँ यहाँ इमारत-ए-शरिया के सामने स्थित एक बुक स्टॉल पर पहुँचीं। यह स्टॉल मोहम्मद रियाजउद्दीन कासमी नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। जाँच एजेंसियों ने इस स्टॉल को खंगाला। हालाँकि, छापेमारी के दौरान क्या मिला इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है। NIA की टीम रियाजुद्दीन के घर पर भी गई, जहाँ से उसने 2 मोबाइल फोन अपने कब्ज़े में ले लिया है।

वहीं जानकारी के अनुसार NIA- ATS की एक अन्य साझा टीम ने दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना क्षेत्र में दबिश दी है। यह दबिश गाँव गाजियाना और छोटकी बाजार में दी गई है। कार्रवाई की पुष्टि एसएसपी दरभंगा IPS अवकाश कुमार ने भी की है। बताया जा रहा है कि जाँच दल ने मदरसे में पढ़ने वाले एक युवक को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिया गया युवक अरबी भाषा का जानकार है जो ट्रांसलेशन किया करता था।

अब तक मिले इनपुट के मुताबिक पकड़े गए संदिग्ध का ISI कनेक्शन भी सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई बिहार ATS द्वारा तमिलनाडु से पकड़े गए मुमताज अंसारी नाम के व्यक्ति से पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर की गई है।

बतातें चलें कि जुलाई 2022 में पटना पुलिस द्वारा फुलवारी शरीफ इलाके में PFI के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया गया था। यहाँ युवाओं को न सिर्फ कट्टरपंथ बल्कि हथियारों और शारीरिक ट्रेनिंग दे कर साल 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए तैयार किया जा रहा था। बिहार पुलिस द्वारा यह केस दर्ज होते ही इस से जुड़ा मुमताज अंसारी फरार हो गया था। मूल रूप से वह पूर्वी चम्पारण के महिषी थानाक्षेत्र का रहने वाला है।

उसकी तलाश में बिहार ATS 10 दिनों तक तमिलनाडु में रुकी रही। आखिरकार उसकी लोकेशन तिरिवल्लूर में एक पेन्नार नाम की कम्पनी में मिली जहाँ मुमताज अपना पहचान बदलकर काम कर रहा था। बिहार ATS ने बाद में मुमताज को NIA के हवाले कर दिया था।

न पार्टी बची न बचा परिवार… जिसे ‘चाणक्य’ बता कर ढोल पीट रही थी मीडिया, उसका उद्धव ठाकरे से भी बुरा हाल: अब क्या करेंगे शरद राव पवार?

महाराष्ट्र में शिवसेना के बाद अब NCP टूट गई है। पार्टी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे अजित पवार अब महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन गए हैं। इतना ही नहीं, उनके साथ-साथ छगन भुजबल, धनंजय मुंडे, दिलीप वालसे पाटिल और अनिल पाटिल जैसे शरद पवार के करीबी भी मंत्री बनाए गए हैं। यहाँ तक कि प्रफुल्ल पटेल, जिन्हें शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था – वो भी उनका साथ छोड़ कर इस शपथग्रहण समारोह में मौजूद रहे।

अब थोड़ा सा पीछे चलते हैं। मई 2023 की शुरुआत में शरद पवार ने जब राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस (NCP) का अध्यक्ष पद छोड़ने की घोषणा की तो मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया । जब जून में उन्होंने बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो इसमें भी मीडिया ने उनका ‘राजनीतिक कौशल’ देखा। कहा गया कि उन्होंने एनसीपी का भविष्य तय कर दिया है और भतीजे अजित पवार को भी उनकी राजनीतिक हैसियत समझा दी है। लेकिन, जुलाई की 2 तारीख आते-आते शरद पवार के मास्टर स्ट्रोक की बत्ती बन चुकी है।

राजनीतिक कौशल का पता नहीं, उनके खुद के राजनीतिक भविष्य पर संकट खडे हो गए हैं। महाराष्ट्र में विधानसभा में करीब-करीब एनसीपी साफ हो गई है। 53 विधायकों वाली पार्टी के ज्यादातर विधायक और अधिकतर बड़े नेता अजित पवार के साथ जा चुके हैं। 82 वर्षीय शरद पवार अब उस अवस्था में भी नहीं रहे कि सक्रियता दिखा कर अपने खेमे को गोलबंद करें और अपनी बेटी के नेतृत्व में काम करने के लिए मनाएँ। कुल मिला कर सुप्रिया सुले को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही पतन शुरू हो गया था।

यानी, मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक जिन फैसलों को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता रहे थे, वही एनसीपी के पतन का कारण बनी। NCP में शरद पवार के बाद अजित ही पार्टी के प्रबंधन से लेकर नेताओं को एकजुट रखने का काम अब तक देखते रहे हैं। ये चौथी बार है, जब अजित पवार राज्य के डिप्टी CM बने हैं। शरद पवार की पार्टी का भी वही हाल हुआ है, जो शिवसेना का हुआ था। आइए, पूरे खेल को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं क्योंकि हमें 2019 विधानसभा चुनाव को समझना पड़ेगा।

संक्षेप में बात करते हैं, फिर मुद्दे पर आएँगे। 2014-19 तक महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार चली। तनातनी की खबरें आती रहीं, लेकिन सरकार पर कोई संकट नहीं आया। 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत भाजपा ने 152 और शिवसेना ने 124 सीटों पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 105 और शिवसेना ने 56 सीटें प्राप्त की। इसके बाद शिवसेना का ड्रामा शुरू हुआ। पार्टी ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को नकारते हुए अपनी पार्टी से CM बनाने की माँग रख दी।

पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर और राज्यसभा सांसद संजय राउत जैसे नेताओं ने उलूल-जलूल बयान देने शुरू कर दिए और कहने लगे कि अगला सीएम शिवसेना से होगा। भाजपा ने मनाने की लाख कोशिश की, लेकिन उद्धव ठाकरे टस से मस नहीं हुए। पार्टी ने अपने विधायकों को बांद्रा में समुद्र किनारे स्थित रंग शारदा होटल में रखा, फिर उन्हें दूर मड आइलैंड्स में रखा। बड़ी बात ये है कि उस समय इन सबमें बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रहे एकनाथ शिंदे और रामदास कदम जैसे नेता अब भाजपा गठबंधन के साथ हैं।

खैर, किसी तरह शरद पवार ने डील फाइनल की और कॉन्ग्रेस-शिवसेना को एक साथ लेकर आए और राज्य में NCP के साथ मिल कर इन दोनों दलों ने ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ की गठबंधन सरकार बनाई। लेकिन, उससे पहले जो हुआ वो चौंकाने वाला था। राष्ट्रपति शासन लग चुका था। अचानक से अजित पवार ने तड़के सुबह भाजपा का साथ देते हुए डिप्टी CM की शपथ ले ली। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, लेखों ये सरकार मात्र 3 दिनों तक चल सकी। अजित पवार वापस चाचा के खेमे में चले गए।

सरकार गिर गई और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाया गया। अजित पवार इस सरकार में भी उप-मुख्यमंत्री बने। लेकिन, इस दौरान मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने शरद पवार का जो महिमामंडन किया, वो देखने लायक था। जिस व्यक्ति ने आज तक कभी मुख्यमंत्री का 5 साल का पूरा कार्यकाल नहीं चलाया, जिसकी पार्टी को कभी राज्य में बहुमत मिला ही नहीं, उसकी तुलना अमित शाह से की जाने लगी। अमित शाह, जो उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

हालाँकि, उद्धव ठाकरे की सरकार ढाई साल चली और जून 2022 में एकनाथ शिंदे सहित कई बड़े नेताओं ने बगावत कर दिया। अंततः एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने और शिवसेना टूट गई। उद्धव ठाकरे की एक जिद ने 40 विधायकों और 13 सांसदों को उनसे दूर कर दिया। ढाई साल बाद ही सही, शिवसेना टूटी और उद्धव ठाकरे के साथ रह गए प्रियंका चतुर्वेदी और संजय राउत। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने। आज उद्धव ठाकरे के साथ जो संख्या है, 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद वो और घट जाएगी।

शिवसेना के टूटने के एक साल बाद अब एनसीपी टूटी है। ये सबक है उन्हें, जो शरद पवार को चाणक्य बताते नहीं थक रहे थे और अमित शाह का मजाक बना रहे थे। मराठी पत्रकार निखिल वागले ने भी शरद पवार को चाणक्य बताया। इसी तरह से तमाम पत्रकारों और भाजपा विरोधी गिरोह ने उन्हें ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया। शिवसेना का मुख्यमंत्री तो भाजपा भी चाहती तो बना सकती थी, शरद पवार ने किसी NCP नेता को तो सीएम बनाया नहीं, लेकिन उनकी तारीफों के पुल बाँधे जाने लगे।

बात यही है कि जिस तरह बालासाहब ठाकरे के पुत्रमोह ने शिवसेना को डूबा दिया, ठीक उसी तरह शरद पवार के पुत्रीमोह NCP को खा गया। सुप्रिया सुले अपने पिता के गढ़ बारामती से सांसद हैं, जहाँ से शरद पवार भी 6 बार जीत चुके हैं। 1991 में अजित पवार भी यहाँ से सांसद बन चुके हैं। अजित पवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और उन्होंने लगातार 7वीं बार बारामती से जीत दर्ज की है। उनके पास अलग-अलग सरकारों में कई मंत्रालयों को सँभालने का अनुभव है और संगठन का भी।

अनुभव हो या राजनीतिक दक्षता, किसी भी क्षेत्र में सुप्रिया सुले अपने बड़े भाई अजित पवार के सामने नहीं टिकतीं। इसके बावजूद शरद पवार ने अपनी बेटी को अपना उत्तराधिकारी बनाया, और मीडिया ने इसे ‘मास्टरस्ट्रोक’ बता दिया। कहा तो ये जाना चाहिए था कि शरद पवार अपने ही परिवार को नहीं सँभाल पा रहे हैं। लेकिन, ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ जैसे मीडिया संस्थानों में अंग्रेजी में लंबा-चौड़ा ओपिनियन लिख कर उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया।

शरद पवार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा तो प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की थी, इसके लिए उन्हें हाथ-पाँव भी मारा। लेकिन, 90 के दशक में अपनी सक्रियता के दौरान भी वो इसमें विफल रहे। उन्हें राष्ट्रपति तक बनाए जाने की बातें चलीं, लेकिन वो भी नहीं हो पाया। अब स्थिति ये हो गई है कि मीडिया ने जिसे ‘चाणक्य’ बता कर पेश किया, वो न अपना पार्टी बचा पाया और न परिवार। अगले चुनाव में उनका और उद्धव का पूरी तरह पत्ता साफ़ होता दिख रहा है।

वैसे अब आश्चर्य न हो कि कल को शरद पवार को ‘चाणक्य’ बता कर उनका महिमामंडन करने वाले अब ये कहने लगें कि ED/CBI जैसी केंद्रीय जाँच एजेंसियों के डर से ये सब हो रहा है। अब बोलने के लिए कुछ बचा ही नहीं, तो चुनाव बाद EVM का रोना की तरह इस तरह का नया क्रंदन भी शुरू हो सकता है। शरद पवार की पार्टी और परिवार, दोनों टूट चुके हैं। उनका समर्थन करने वाले अब नया रोना क्या निकालते हैं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

दिल्ली पुलिस ने पहले हनुमान जी के आगे जोड़े हाथ, फिर हटाया मंदिरः देखिए Video, दिल्ली के भजनपुरा में मजार भी हटाया गया

दिल्ली के भजनपुरा चौक पर रविवार (2 जुलाई 2023) को प्रशासन ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। इस अभियान में तमाम अतिक्रमण के साथ-साथ रास्ते में पड़ने वाली मजार और मंदिर पर भी बुलडोजर चलाया गया है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इस बीच मंदिर पर बुलडोजर चलने से पहले वहाँ स्थापित देवताओं को प्रमाण करते हुए दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर पर हुई कार्रवाई से पहले दिल्ली पुलिस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के एडिशनल DCP अंदर गए। उन्होंने न सिर्फ मंदिर में रखी मूर्तियों को बारी-बारी से प्रमाण किया बल्कि वहाँ पूजा-अर्चना भी की। बाद में मूर्तियों को मंदिर प्रांगण से सुरक्षित हटाया गया। मूर्तियाँ हटाने के बाद वहाँ बुलडोजर चलाया गया। यह अतिक्रमण विरोधी अभियान दिल्ली सरकार के PWD विभाग की देखरेख में चला था।

अतिक्रमण विरोधी इस करवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों सहित पैरामिलिट्री भी तैनात रही। इलाके की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जा रही थी। जिस भजनपुरा में यह कार्रवाई हुई है वहाँ PWD का फ्लाईओवर बन रहा है। इस फ्लाईओवर में ऊपर मेट्रो रुट बनेगा और नीचे सड़क। यहाँ बीच सड़क पर एक मजार भी थी जिसके चलते ट्रैफिक जाम जैसे हालात बन रहे थे। मंदिर एक किनारे था जिसे प्रशासन ने अतिक्रमण किया गया स्थान बताया था। प्रशासन का दावा है कि मंदिर और मजार दोनों से जुड़े पक्षों को पहले ही कार्रवाई की जानकारी दे दी गई थी।

दिल्ली पुलिस के नार्थईस्ट DCP जॉय एन तिर्की ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान मंदिर और मजार को हटा दिया गया है। उन्होंने अतिक्रमण की वजह से अक्सर ट्रैफिक जाम होने की बात कही। DCP का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह से शाँत और सौहार्दपूर्ण रही जिसमें धार्मिक कमेटियों के साथ मीडिया का भी सहयोग मिला। बकौल जॉय एन तिर्की पूजा-अर्चना के बाद खुद पुजारी ने सभी मूर्तियों को हटा कर दूसरी जगह शिफ्ट किया था।

इस कार्रवाई के दौरान एक मूर्ति टूट गई थी जिसे यमुना नदी में प्रवहित कर दिया गया। टूटी मूर्ति हनुमान जी की बताई जा रही है जिसे हिन्दू संगठनों द्वारा नदी में प्रवाहित करने के लिए बुलडोजर पर रख कर लाया गया था। इस दौरान पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद थे।

हिन्दू संगठनों में नाराजगी

स्थानीय हिन्दू संगठनों ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के अध्यक्ष जयभगवान गोयल ने इस कार्रवाई का दोष अरविन्द केजरीवाल पर मढ़ते हुए उन्हें हिन्दू विरोधी एजेंडा चलाने वाला नेता बताया है। जयभगवान गोयल ने कहा कि मंदिर गिरा कर अरविन्द केजरीवाल पूरे देश के मुल्ला-मौलवियों को खुश कर रहे थे। उन्होंने साल 2020 के दिल्ली दंगों की याद दिलाते हुए तब केजरीवाल सरकार द्वारा सिर्फ मुस्लिमों को सहयोग करने का आरोप लगाया।

हालाँकि आम आदमी पार्टी यह आदेश दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) का बता रही है। आम आदमी पार्टी ने कार्रवाई के दौरान धार्मिक स्थानों का ध्यान रखने की नसीहत भी दी है।

UCC का मायावती ने किया समर्थन, कहा- समान कानून से मजबूत होगा देश: जामा मस्जिद के शाही इमाम का फतवा- चुप रहें इस्लामी समूह

संसद के माॅनसून सत्र में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) पर बिल लाने की अटकलें लग रही है। कई विपक्षी दल भी इसका समर्थन कर चुके हैं। बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती ने भी साफ किया है कि उनकी पार्टी इस कानून के खिलाफ नहीं है। इससे देश मजबूत होगा। वहीं दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम ने फतवा जारी कर इस्लामी समूहों से इस मुद्दे पर चुप रहने को कहा है।

मायावती ने कहा है, “विशाल आबादी वाले भारत देश में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध सहित विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। इनके रहन-सहन और जीवनशैली के अपने तौर-तरीके और रस्म-रिवाज हैं। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन दूसरी तरफ यह भी सही है कि यदि सभी धर्म के मानने वालों के लिए एक समान कानून लागू होता है तो उससे देश कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत ही होगा। सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारा भी बढ़ेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “भारतीय संविधान की धारा 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है। हमारी पार्टी यूसीसी के विरोध में नहीं है। लेकिन उसे जबरन थोपने का प्रावधान बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर के संविधान में निहित नहीं है। इसके लिए जागरुकता और आम सहमति को श्रेष्ठ माना गया है। इस पर अमल न करके संकीर्ण स्वार्थ की राजनीति करना देश हित में सही नहीं है, जो इस समय की जा रही है। संविधान की धारा 44 में यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने का प्रयास तो वर्णित है, लेकिन इसे थोपने का नहीं है।”

मायावती ने कहा, “इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही बीजेपी को देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए कोई कदम उठाना चाहिए था। मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि हमारी पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा इसे देश में लागू करने के तरीके से सहमत नहीं है।”

वहीं, न्यूज 18 रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक फतवा जारी किया है। इस फतवे में शाही इमाम ने मुस्लिम समूहों से यूसीसी पर चुप्पी रखने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि बकरीद के समय इमाम विदेश में थे। इसी दौरान उन्होंने यह फतवा जारी किया।

बता दें कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सरकार की आलोचना की है। एक बयान में बोर्ड की ओर से कहा गया है कि सरकार UCC लागू कर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को खत्म करना चाहती है।

एलन मस्क ने फिर किया ट्विटर में बदलाव: ब्लू टिक वाले पढ़ पाएँगे 10 हजार तक ट्वीट, अनवेरिफाइड यूजर्स को 1000 ट्वीट के बाद कुछ नहीं दिखेगा

ट्विटर का मालिक बनने के बाद एलन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई बदलाव कर चुके हैं। इस बार उन्होंने अनवेरिफाइड यूजर्स के लिए ट्वीट की लिमिट को तय किया है। उनके बनाए नियम के अनुसार वेरिफाइड यूजर्स को 10000 ट्वीट पढ़ने का मौका मिलेगा लेकिन अनवेरिफाइड यूजर्स को सिर्फ 1000 ट्वीट ही देखने को मिलेंगे। ये नियम अस्थायी रूप से लागू किया गया है।

नए नियमों को लेकर एलन मस्क ने ट्वीट में पहले बताया कि, “डाटा चोरी होने और सिस्टम में हेरफेर के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमने कुछ अस्थायी नियम लागू किए हैं। इसमें वेरिफाइड यूजर्स एक दिन में अधिकतम 6000 ट्वीट, अनवेरिफाइड यूजर्स एक दिन में 600 ट्वीट व नए अनवेरिफाइड यूजर्स एक दिन में अधिकतम 300 ट्वीट पढ़ सकेंगे।”

इसके बाद मस्क ने अपने इस ट्वीट को रीट्वीट कर कहा कि ट्वीट पढ़ने की लिमिट्स जल्द ही बढ़ाई जाएगी। वेरिफाइड अकाउंट के लिए यह लिमिट 8000, अनवेरिफाइड के लिए 800 और नए अनवेरिफाइड यूजर्स के लिए 400 ट्वीट होगी। हालाँकि इसके बाद अब एक नए ट्वीट में मस्क ने कहा है कि वेरिफाइड यूजर्स के लिमिट 10000 ट्वीट होगी। वहीं अनवेरिफाइड यूजर्स के लिए 1000 और नए अनवेरिफाइड यूजर्स के लिए लिमिट 500 ट्वीट की होगी।

ट्विटर के इस नए नियम लागू होने के बाद शनिवार (1 जुलाई 2023) की शाम दुनियाभर में ट्विटर ठप्प पड़ गया। इससे यूजर्स को परेशानी का सामना करना करना पड़ा। यूजर्स का कहना था कि उन्हें ट्वीट दिखाई नहीं दे रहे। बल्कि बार-बार ‘Can not retrieve Tweets’ का मैसेज दिखाई दे रहा है।

ट्वीट लिमिट सेट को लेकर आई मीम्स की बाढ़:

ट्विटर पर ट्वीट पढ़ने की लिमिट सेट हो जाने से कई यूजर्स निराश नजर आए। खासतौर से अनवेरिफाइड यूजर्स ने लिमिट खत्म होने की शिकायत की। साथ ही ट्विटर पर #RIPTwitter ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने मीम शेयर कर कहा कि ट्वीट लिमिट खत्म होने के बाद यूजर्स इंस्टाग्राम यूज कर रहे हैं। 

वहीं, Danyal नामक यूजर ने कहा कि ट्वीट लिमिट को लेकर शेयर किए मीम्स देखते-देखते ही उसकी लिमिट खत्म हो गई।

विराज नामक यूजर ने बर्तन धोते हुए एक तस्वीर शेयर कर लिखा, “प्रतिदिन ट्वीट पढ़ने की लिमिट खत्म हो जाने के बाद मैं…”

एक अन्य यूजर ने एक शख्स के रोने का वीडियो शेयर कर लिखा, “सुबह 10 बजे ही 600 ट्वीट्स की लिमिट खत्म होने के बाद मैं वास्तविक लोगों से बात करने की कोशिश कर रहा हूँ।”

वहीं, एक यूजर ने मीम शेयर करते हुए कहा कि ट्विटर की मौत हो गई है। उसकी मौत का कारण एलन मस्क है।

आइये देखते हैं कुछ अन्य मीम्स:

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में डिप्टी CM बने अजित पवार: ‘पुत्री मोह’ में डूब गई शरद पवार की पार्टी, शिवसेना के बाद NCP भी टूटी

शरद पवार के भतीजे अजित पवार को महाराष्ट्र में उप-मुख्यमंत्री बनाया गया है। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पद छोड़ने की बात की थी और अब रविवार (2 जुलाई, 2023) को उन्होंने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इसके साथ ही महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार – 2 डिप्टी CM हो गए हैं। छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और दिलीप वैसे पाटिल समेत 9 मंत्रियों ने उनके साथ शपथ ली। अजित पवार के आधिकारिक आवास ‘देवगिरी’ पर बैठकों के बाद ये बदलाव हुए।

महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी NCP (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) के टूटने की खबर आ रही है। नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने अचानक विधायकों की बैठक बुला ली। इस पर शरद पवार ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है कि ये बैठक क्यों बुलाई गई है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने इसकी पुष्टि कर दी कि अजित पवार समेत NCP विधायक पहुँचेंगे और राजभवन में शपथग्रहण समारोह आयोजित होगा। ऐसा होते ही NCP की टूट की घोषणा आधिकारिक हो गई है।

राजभवन पहुँच कर अजित पवार राज्यपाल को विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा और इसके बाद शपथग्रहण समारोह में मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। शपथग्रहण समारोह की तैयारियाँ भी शुरू कर दी गई थीं, तभी से ये कयास लगाए जाने लगे थे। अजित पवार ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद की शपथ ले ली है। इसके साथ ही NCP के भी 2 टुकड़े हो गए। एकनाथ शिंदे फ़िलहाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं, जो शिवसेना से तोड़ कर बनी ‘शिवसेना (बालासाहब ठाकरे)’ से ताल्लुक रखते हैं।

हाल ही में शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया था, इसके बाद से ही अजित पवार के पार्टी में असहज होने की खबरें सामने आ रही थीं। उनके साथ-साथ प्रफुल्ल पटेल को भी ये पद दिया गया था। शरद पवार ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन फिर कार्यकर्ताओं के दबाव की बात करते हुए इस्तीफा वापस ले लिया और नए नेतृत्व को तैयार करने की बात की। हालाँकि, अजित पवार को संगठन में बड़ा पद नहीं दिया गया।