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ब्यूटी पार्लर से आ रही थी फरहाना, बकरीद से पहले भाइयों ने ही घेरकर मार दी गोली: गाँव के ही शाहिद के साथ निकाह करने से थे खफा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बकरीद से एक दिन पहले फरहाना नाम की युवती को उसके भाइयों ने ही गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या की लव मैरिज है। फरहाना ने गाँव के ही युवक से शादी कर ली थी। इसके बाद उसके भाई ने कहा था कि अगर वह गाँव आई तो वह उसकी हत्या कर देगा। दो साल बाद उसने ऐसा ही किया।

घटना बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र के अलीपुर अटेरना गाँव की है। यहाँ की रहने वाली फरहाना गाँव के ही शाहिद से प्यार करती थी। हालाँकि, घरवाले उसकी शादी के लिए तैयार नहीं थे। दरअसल फरहाना और शाहिद की जाति अलग-अलग थी। फरहाना पठान जाति की थी, जबकि शाहिद अल्वी (फकीर) जाति का है।

फरहाना के भाई नहीं चाहते थे कि उसकी बहन अपने से निम्न जाति में शादी करे। हालाँकि, फरहाना और शाहिद का मेल-मिलाप कम नहीं हुआ। आखिरकार दोनों ने दो साल पहले यानी साल 2021 में कोर्ट मैरिज कर ली। इसके बाद फरहाना के परिजनों के डर से वे गाँव छोड़कर कहीं और चले गए।

लव मैरिज से गुस्साए फरहाना के परिजनों ने उसे धमकी दी थी कि अब वह कभी गाँव ना लौटे। अगर वह गाँव लौटी तो वे उसकी हत्या कर देंगे। वे दो साल तक मुजफ्फरनगर और इधर-उधर छिपकर रहते रहे। दोनों करीब 20 दिन पहले 7 जून 2023 ही गाँव लौटे थे। गाँव में फरहाना ने ब्यूटी पार्लर में ब्यूटीशियन का काम करना शुरू कर दिया था।

शाहिद के भाई सलीम ने कहा कि भाभी के घर वालों ने पहले ही धमकी दी थी कि अगर वो शादी के बाद घर लौटीं तो वे उसे मार देंगे। 20 दिन पहले भी यही धमकी दी गई थी। भाई ने बताया कि आखिरकार बुधवार (28 जून 2023) की शाम लगभग 6 बजे एक चौराहे पर उसकी सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन शाम को फरहाना ब्यूटी पार्लर से अपने घर लौट रही थी। इसी दौरान उसके भाइयों ने रोक लिया। थोड़ी देर बातचीत करने के बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। कहा जा रहा है कि फरहाना के भाइयों- सलमान, फरमान, नोमान और मेहरबान ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और हत्या कर दी।

सूचना मिलने के बाद पुलिस गाँव पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि हत्या में 5-6 लोगों के नाम सामने आए हैं। मुकदमे के लिए तहरीर का इंतजार कर रही है। वहीं, दो टीम बनाकर पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है।

मणिपुर में राहुल गाँधी के खिलाफ लगे नारे: AMSU बोली- राज्य की मौजूदा हालात के लिए कॉन्ग्रेस दोषी, BJP बोली- अब चिंगारी लगाने से बचें पूर्व सांसद

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) हिंसाग्रस्त मणिपुर पहुँचे हैं। सड़क मार्ग से चुड़ाचाँदपुर जाते समय उन्हें मणिपुर पुलिस ने बिष्णुपुर में रोक दिया। इसके बाद कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। पुलिस आखिरकार लाठी चार्ज करनी पड़ी। पुलिस का कहना है कि राहुल गाँधी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें रोका गया।

दरअसल, राहुल गाँधी की यात्रा को लेकर स्थानीय महिलाएँ विरोध कर रही हैं। इसके अलावा, ऑल मणिपुर स्टूडेंट यूनियन (AMSU) ने राहुल गाँधी के आगमन का बहिष्कार करने की अपील की थी। इसके अलावा, कई सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन ने भी कहा था कि राहुल गाँधी मणिपुर न आएँ और यहाँ चिंगारी भड़काने का काम न करें।

AMSU के महासचिव ने कॉन्ग्रेस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “हमारा मानना है कि मणिपुर की मौजूदा स्थिति यहाँ लगातार शासन करने वाली सरकारों द्वारा की गई राजनीतिक भूलों का परिणाम है और इसमें कॉन्ग्रेस पार्टी की बड़ी भूमिका है।” AMSU ने इससे पहले के कॉन्ग्रेस शासन पर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा, “साल 2012 में कॉन्ग्रेस पार्टी ने इंफाल पश्चिमी जिले के चार ग्राम पंचायतों और एक जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र को मणिपुर पंचायती राज प्रणाली से हटा दिया और उन्हें कांगोपी जिले की स्वायत्त जिला परिषद के तहत आने के लिए आवंटित किया गया। इसने एक देश के रूप में कुकी के सपनों को और बढ़ावा दिया।”

उन्होंने कहा, हमारा कहना है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने ऐसी भयानक राजनीतिक भूल क्यों की। उन्होंने कहा कि मणिपुर की यात्रा करके राहुल गाँधी को राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी राजनीतिक दल मणिपुर आएँगे, उनका विरोध किया जाएगा।

AMSU ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे मणिपुर की समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करें। उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्तमान मुख्यमंत्री को बदला जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का विरोध किया।

उधर, राहुल गाँधी की मणिपुर यात्रा पर भाजपा ने सवाल उठाया और पहले से ही खराब माहौल को और खराब करने का आरोप लगाया है। भाजपा नेता संबित पात्रा ने AMSU द्वारा बहिष्कार का हवाला देते हुए राहुल गाँधी को गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार वाला नेता बताया।

पात्रा ने कहा कि मणिपुर की स्थिति विरासत के मुद्दे के कारण है, जिसमें कॉन्ग्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन मुद्दों का हवाला देना अभी ठीक नहीं है, क्योंकि उनसे जुड़ी संवेदनशीलता है। राहुल गाँधी को मणिपुर आकर चिंगारी नहीं भड़कानी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि राहुल गाँधी और जिम्मेदारी कभी साथ-साथ नहीं चलते।”

पात्रा ने आगे कहा कि स्थानीय प्रशासन ने उनसे हेलीकॉप्टर से जाने की अपील की थी, लेकिन राहुल गाँधी जिद करते हुए सड़क से चले गए। इस दौरान लोगों ने ‘राहुल गाँधी गो बैक’ के नारे लगाए। उन्होंने कहा, “विष्णुपुर में राहुल गाँधी को रोकना पड़ा और अब खुद ही वो वापस आ रहे हैं। उन्हें और संवेदनशील होना चाहिए। वहाँ के हालात काबू में आ रहे हैं। ऐसे में उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए।”

दरअसल, राहुल गाँधी हेलीकॉप्टर से चुड़ाचाँदपुर की ओर रवाना हो गए हैं। इससे पहले विष्णुपुर में जब उनके काफिले को रोका गया था कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। कहा जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले दागने पड़े।

बताते चलें कि चुड़ाचाँदपुर में राहुल गाँधी जा रहे हैं, वह ज़िला सबसे अधिक हिंसा से प्रभावित जिलों में से एक है। 3 मई 2023 से शुरू हुई मणिपुर हिंसा में अब तक 120 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चुड़ाचाँदपुर में भी कई लोगों ने अपनी जान गँवाई है।

होली-दीवाली पर ‘ज्ञान’ देने वाले आज कह रहे ‘बकरा हमारा’, बकरीद पर निरीह पशुओं को काटने वाले ‘मोहब्बत की दुकान’ कर रहे आबाद: पत्रकार हो या RJ, सबकी खाल एक जैसी

मुंबई के मीरा रोड पर मोहसिन खान के सोसायटी में बकरा लाने पर हुआ विवाद बकरीद से पहले खूब तूल पकड़ा। इस बीच दिल की तसल्ली के लिए जानवर के कितने टुकड़े काटकर बकरीद पर खाएँगे इसका एक नया ट्रेंड भी इस दिन सोशल मीडिया पर देखने को मिला। खुद को पत्रकार बताने वाली काविश अजीज ने सोशल मीडिया पर उस समय अपनी भड़ास निकाली जब एक अन्य पत्रकार सिर्फ ये अपील कर रहे थे कि मजहब के नाम पर जानवरों को न काटा जाए।

काविश ने इतनी सी बात पर एक भारी भरकम बकरे के साथ अपनी तस्वीर डाली और लिखा, “ये ट्विटर है तुम्हारे बाप का बगीचा नहीं जो कुछ भी लिख कर चले जाओगे और सुनो बकरा हमारा, त्योहार हमारा, कुर्बानी देंगे, कीमा कलेजी, कबाब, बिरयानी खाएँगे हम, मगर जलेगी तुम्हारी….”

अब कोई शाकाहारी व्यक्ति इस पोस्ट को अचानक पढ़े तो शायद उसे ऐसी भाषा पढ़ते ही उलटी हो या फिर पत्रकार से ही हमेशा के लिए घिन्न हो जाए… क्योंकि इस पोस्ट को देखकर यही पता नहीं चल रहा कि बकरा दिखाकर त्योहार मनाने की बात हो रही है या त्योहार के नाम पर जो उसका कत्ल किया जाना है उसकी उत्सुकता जाहिर हो रही है। 

ऐसा पोस्ट लिखने वाली पत्रकार अच्छे से जानती होंगी कि उन्होंने लिखा क्या है। उन्हें पता है कुर्बानी का अर्थ कोई केक कटिंग जैसा नहीं है। उसमें बाकायदा एक जीव का गला रेतकर उसकी खाल को नोचा जाता है। उसके माँस के धारदार चाकू से टुकड़े होते हैं, उसमें जो खून लगा होता है उसे धो-पोंछकर ही वो कीमा कलेजी, कबाब, बिरयानी बनता है जिसे खाने के लिए काविश की लार टपक रही है।

काविश मानती हैं कि उनका ये जवाब सिर्फ हेटर्स के लिए है जिसे देकर उनके दिल को सुकून मिल रहा है। वो मजहब के नाम पर इतना अंधी हो गईं हैं कि वो ये नहीं समझ पा रहीं सामने वाला उनसे क्या अपील कर रहा है। अभय प्रताप सिंह ने सिर्फ इतना ही तो लिखा – बकरीद आने वाली है। खून बहाया जाएगा, बेजुबान काटे जाएँगे। हमें ये सब बंद करना होगा। मजहब के नाम पर जानवरों का कत्लेआम सही नहीं है। आओ बकरों को बचाएँ… बकरा फ्री ईद मनाएँ…केक का बकरा काटकर ईको फ्रेंडली ईद मनाएँ।

बताइए इस पूरे पोस्ट में गलत क्या है। क्या इससे पहले दिवाली-होली पर आपने ऐसी चिंताएँ नहीं देखीं। होली पर जब कहा जाता है कि सैंकड़ो लीटर पानी बर्बाद होगा, दिवाली पर तर्क दिया जाता है कि प्रदूषण बढ़ेगा तब क्या कोई आपको बकरीद पर ये नहीं समझा सकता कि ये एक हिंसात्मक प्रक्रिया है और त्योहार के नाम पर इसे बढ़ावा देना गलत है। इस अपील को मानने की बजाय उसपर ढिठाई दिखाई जा रही है कि हम खाएँगे जो मन हो कर लो।

आपको किसी ने मांसाहार खाने से मना नहीं किया है। ये बात सब जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में माँस का निर्यात कितनी अहम भूमिका निभाता है या ये कितने लोगों के व्यापार का सहारा है। बकरीद पर कुर्बानी न देने की अपील सिर्फ इसलिए है ताकि त्योहार के नाम पर सालों से चली आ रही हिंसात्मक प्रक्रिया पर विराम लगे और समाज में सकारात्मक संदेश जाए कि बिन हिंसा भी त्योहार मनते हैं उसके लिए जीव हत्या जरूरी नहीं।

लेकिन, पत्रकार काविश अकेली नहीं हैं जिन्हें ये सुनकर गुस्सा आता है कि वो आखिर क्यों कोई उन लोगों से ये कह रहा है कि त्योहार पर बकरा न काटें जाए। इस लिस्ट में आरजे सायमा बहुत पुराना नाम हैं। वह हर साल जब एक अभियान को चलता देखती हैं कि कैसे बकरा काटने से मना किया जा रहा है तो उन्हें दुख होता है। एक बार उन्होंने इस अपील को बेहद शर्मनाक बताया था।

उन्होंने कहा था, ”ये बहुत शर्मनाक है कि आप एक समुदाय को उनका त्योहार शांति, खुशी और उल्लास के साथ मनाने देना नहीं चाहते। मैं इसको कोई तूल नहीं देती। ये मजाक तुम पर नहीं है। तुम ही मजाक हो।”

आज वो सायमा राहुल गाँधी के ईद मुबारक पर लिख रही हैं कि मोहब्बत की दुकान आबाद रहे। ईद के मौके पर मोहब्बत की दुकान कौन सी है ये समझना मुश्किल है। क्या ये वो दुकानें हैं जहाँ बेजुबान पशुओं को काटा जाता है और अगर कोई ऐसा करने से रोके तो उसे असहिष्णु कह दिया जाता है कि एक समुदाय को उसका त्योहार मनाने से मना कर रहे हैं। अगर नहीं, तो फिर आरजे सायमा को उन लोगों से दिक्कत क्यों होती रही है जो बकरीद पर कुर्बानी न देने की अपील करते हैं।

बीते समय में जाइए और याद करिए कि मुस्लिमों के कौन से त्योहार को कभी मनाने से रोका गया है! सिर्फ एक बकरीद ऐसा त्योहार है जिसे कोई मनाने से मना नहीं कर रहा सिर्फ उसका तरीका बदलने को कह रहा है।

सोचिए, मोहसिन को सोसायटी में बकरा नहीं लाने दिया गया तो उसपर इतना हंगामा हो गया। लेकिन आपको नहीं लगता ये सब अनुमति के साथ होना चाहिए। हो सकता है बकरे की कुर्बानी आपके लिए एक सामान्य प्रक्रिया हो लेकिन किसी के लिए ये झकझोरने वाले दृश्य भी हो सकते हैं। हो सकता है मोहसिन उसकी कुर्बानी सोसायटी से बाहर देता लेकिन कुर्बानी के उद्देश्य से उसे घर पर लाना क्या किसी को प्रभावित नहीं कर सकता?

सोसायटी में कितने लोग रहते हैं, किस धर्म के हैं, कुर्बानी के लिए उनकी अनुमति है या नहीं ये सब मैटर करता है। मोहब्बत की दुकान आबाद तभी नहीं रहेगी जब बकरे का खून बहेगा और वो गोश्त बनकर घर-घर बँटेगा। मोब्बत की दुकान तब भी आबाद रह सकती है जब आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत कौम के लोग के सालों से चली आ रही हिंसात्मक प्रक्रिया को बदलें या उसे बदलने का प्रयास करें। न कि इस बात पर अड़ें कि अरे जब सालों से बकरा-भैंसा कुर्बानी के लिए काटा गया है तो अब क्यों नहीं काटा जा सकता।

हवा में उछाला, लात मारी, पन्ने फाड़े और लगा दी आग: बकरीद पर स्वीडन में मस्जिद के सामने जली कुरान, इराक का है प्रदर्शनकारी

यूरोपीय देश स्वीडन में कोर्ट से आदेश मिलने के बाद बकरीद के दिन यानी बुधवार (28 जून 2023) को प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद के सामने मुस्लिमों के धार्मिक ग्रंथ कुरान को फाड़ा और जलाया। दरअसल, स्वीडिश पुलिस ने इसके लिए अनुमति नहीं दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने। उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आखिरकार इसकी इजाजत मिली।

ईद उल अजहा के दिन कुरान जलाने का वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में दिख रहा है कि स्टॉकहोम की एक मस्जिद के सामने दो लोग कुरान को फुटबॉल की तरह पैरों से मार रहे हैं। उसे जमीन पर फेंकते हैं और फिर पैरों के कुचलते हैं। आखिर उसे फाड़कर आग के हवाले कर देते हैं। प्रदर्शनकारी ईराक के बताए जा रहे हैं।

जिस समय यह प्रदर्शन किया जा रहा था, उस वक्त लगभग 200 लोग वहाँ दर्शक के तौर पर खड़े थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए और प्रदर्शनकारियों को पत्थर फेंकने की कोशिश की। पत्थर फेंकने वाले को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। वहीं, बाद में पुलिस ने प्रदर्शन करने वालों पर एक जातीय या राष्ट्रीय समूह को भड़काने का मामला दर्ज कर जाँच शुरू की है।

जिस मस्जिद के सामने यह प्रदर्शन किया गया, उसके निदेशक एवं इमाम महमूद खल्फी ने कहा कि ईद अल-अधा के दिन मस्जिद के सामने विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने के कारण वे निराश थे। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस चाहती तो इस प्रदर्शन को कहीं और करने के लिए कह सकती थी।

खल्फी ने कहा, “मस्जिद ने पुलिस को कम-से-कम प्रदर्शन को किसी अन्य स्थान पर लेने का सुझाव दिया था, जो कि कानून द्वारा संभव है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं करने का फैसला किया।” खल्फी के अनुसार, हर साल ईद समारोह के लिए स्टॉकहोम की मस्जिद में 10,000 से अधिक आगंतुक आते हैं।

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फ़िदान ने एक ट्वीट में इस घटना की निंदा की और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस्लाम विरोधी प्रदर्शन की अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता ने वेदांत पटेल ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों को जलाना अपमानजनक और दुखद है। उन्होंने कहा, “जो कानूनी हो सकता है, वह जरूरी नहीं कि निश्चित रूप से उचित हो।”

इस घटना को लेकर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने कहा कि अब वह इस बारे में अटकलें नहीं लगाएँगे कि कुरान का विरोध स्वीडन को नाटो (NATO) में शामिल होने की प्रक्रिया में कैसे रोड़ा बन सकता है। उन्होंने कहा, “यह कानूनी है, लेकिन उचित नहीं है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कुरान जलाने पर निर्णय लेना पुलिस का काम है।

दरअसल, स्वीडन NATO का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका इकलौता मुस्लिम सदस्य देश तुर्किये इसमें बाधा डालते रहता है। NATO का नियम है कि इसमें कोई भी नया सदस्य तभी शामिल किया जा सकता है, जब उसमें सभी सदस्य देशों की सहमति हो।

इस साल जनवरी के अंत में तुर्किये ने नाटो आवेदन पर स्वीडन के साथ बातचीत को निलंबित कर दिया था, क्योंकि एक दक्षिणपंथी डेनिश ने स्टॉकहोम में तुर्किये दूतावास के पास कुरान की प्रति जला दी थी। इसके कारण मुस्लिम देशों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस्लामी मुल्क स्वीडन के झंडे जलाए गए थे।

बताते चलें कि कुरान जलाने की घटनाएँ सिर्फ स्वीडेन में ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देश डेनमार्क और नीदरलैंड में भी कुरान जलाने की कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। इस साल जनवरी में स्वीडन के बाद नीदरलैंड में कुरान जलाया गया था। इसके बाद डेनमार्क में भी इसे दोहराया गया।

स्वीडन उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है, जो स्कैन्डिनेवियाई प्रायद्वीप में स्थित है। इसकी सीमाएँ नॉर्वे, फ़िनलैंड और डेनमार्क से लगती हैं। 1.1 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश के 52% लोग ‘चर्च ऑफ स्वीडन’ में आस्था रखते हैं। वहीं 8% जनसंख्या मुस्लिम है।

दरअसल, तुर्किये स्वीडन पर कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) से संबंध होने का आरोप लगाता है। इसके साथ ही वह स्वीडन से इस संगठन के नेता मौलवी फतुल्लाह गुलेन के प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी तुर्किये से अलग कुर्दों के लिए मुल्क की माँग करती है।

अलग देश के लिए कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी के सशस्त्र आंदोलन को तुर्किये आतंकवादी गतिविधि कहता है। तुर्किये ने इस संगठन को आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है। तुर्किये के अलावा, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी उसे आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

तुर्किये का कहना है कि PKK के खिलाफ स्वीडन संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर रहा है। वहीं, स्वीडन में लोग कुर्द और PKK के समर्थन में हैं। इसको लेकर दोनों देशों के बीच रिश्ते तल्ख रहते हैं और तुर्किये यूरोपीय देश स्वीडन को NATO का सदस्य बनने से रोकता है। इनमें कुरान जलाने की घटनाएँ और तल्खी पैदा करती हैं।

मुस्लिम जोड़े की पोल मीरा सोसायटी के निवासियों ने खोली: बताया- अपार्टमेंट में बकरा लाने की दी थी धमकी, रोकने पर दी गाली; फिर माॅब लिंचिंग का झूठ भी फैलाया

मुंबई के मीरा रोड स्थित जेपी इंफ्रा हाउसिंग सोसायटी में बकरीद से पहले बकरों के लाने पर विवाद खड़ा हो गया। हाउसिंग सोसायटी के निवासियों ने ऐसा करने वाले मुस्लिम जोड़े के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिम परिवार पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।

इस मामले की शुरुआत मंगलवार (27 जून 2023) को हुई। इस दिन मोहसिन शेख और उसकी बीवी यास्मीन खान बकरीद से पहले कुर्बानी के लिए दो सफेद बकरे अपार्टमेंट में ले जाते दिखे थे। CCTV में कैद इसका फुटेज सोशल मीडिया में वायरल भी है।

सोसायटी के निवासियों ने बकरियों को आवासीय परिसर से हटाने की माँग की। उनका कहना था कि वे आवासीय परिसर में बकरों की कुर्बानी नहीं होने देंगे। लेकिन मोहसिन और उसकी बीवी पर इस अपील का कोई असर नहीं पड़ा। मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसने मौके पर पहुँचकर हालात को सँभाला। पुलिस ने सोसायटी निवासियों को समझाया कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत किसी को अपने घर में बकरे ले जाने से रोका जा सके। हालाँकि उन्होंने इतना जरूर कहा कहा कि अगर इन बकरों को सोसायटी या आपर्टमेंट के अंदर काटा गया तो आरोपित दम्पति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मोहसिन के दुर्व्यवहार पर हुआ प्रदर्शन

मोहसिन और उसकी बीवी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्हें न सिर्फ गालियाँ दी गईं, बल्कि महिलाओं के लिए भी अपमानजनक शब्द बोले गए। ऑपइंडिया से बात करते हुए निवासियों ने मोहसिन की हरकतों को सोसायटी के लिए समस्या बताया। उन्होंने कहा कि मोहसिन ने सोसायटी के कई नियमों को तोड़ा है। पहले आम सहमति थी कि कुर्बानी के लिए कोई भी पशु को लेकर बिल्डिंग में नहीं आएगा। निवासियों ने खुद को पीड़ित बताते हुए मुस्लिम दम्पति पर कानूनी कार्रवाई की माँग की।

मोहसिन ने तोड़े सोसायटी के नियम

सोसायटी के एक अन्य निवासी ने बताया कि बकरों को जान बूझकर बिल्डिंग में लाया गया। उनका दावा है कि ऐसा कर मोहसिन बाकी लोगों को अपनी ताकत दिखाना चाह रहा था। स्थानीय निवासी का दावा है कि सोसायटी में और भी मुस्लिम रहते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसी हरकत नहीं की। उन्होंने सोसायटी के उस नियम का पालन किया जिसके तहत आवासीय परिसर में जानवर लाने की मनाही है। लोगों का कहना है कि जेपी इंफ़्रा सोसायटी ने जानवरों को रखने के लिए पास में ही अलग से जमीन आवंटित कर रखी है। लेकिन मोहसिन बकरों को वहाँ नहीं रखना चाहता।

मोहसिन की बीवी ने दर्ज कराई FIR

मोहसिन ने सोसायटी वालों पर मारपीट का आरोप लगाया है। उसकी बीवी यास्मीन खान ने सोसायटी के 8 लोगों को नामजद किया है। इनके नाम आशीष त्रिपाठी, लाल सिंह, चंद्र सेन, अमित तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, राम लखन सिंह, आनंद पटवारी और श्रीमंत शेखर हैं। इन सभी पर IPC की धारा 143, 147, 149, 354, 323, 341 और 504 के तहत FIR दर्ज हुई है। FIR में यास्मीन ने आरोप लगाया है कि सोसायटी के नामजद निवासियों ने उनके शौहर की गर्दन पड़की, छाती पर घूँसे मारे और धक्का दिया। यास्मीन ने आरोपित किए गए लोगों पर अपने कपड़ों को भी फाड़ने का आरोप लगाया।

FIR Copy
यास्मीन द्वारा दर्ज शिकायत

वीडियो फुटेज में नहीं दिखी मारपीट

मोहसिन और उसकी बीवी यास्मीन के आरोपों को सोसायटी के अन्य निवासियों ने मनगढ़ंत करार दिया है। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा। वीडियो में यास्मीन फोन पर किसी से बातचीत में मॉब लिंचिंग का आरोप लगा रही है। वीडियो में स्थानीय निवासी मुस्लिम दम्पति से सोसायटी में बकरों को लाने पर सवाल-जवाब करते दिख रहे हैं। इसी वीडियो में मोहसिन सोसायटी के लोगों को गालियाँ देता सुनाई दे रहा है।

सोसायटी वालों ने यास्मीन के आरोपों को मनगढ़ंत बताया

ऑपइंडिया से बात करते हुए सोसायटी के लोगों ने यास्मीन द्वारा FIR में लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया। एक हिन्दू महिला ने बताया कि यास्मीन को किसी ने नहीं पीटा और उसके आरोप झूठे हैं। महिला ने सबूत के तौर पर CCTV फुटेज होने का दावा करते हुए कहा कि यास्मीन को किसी ने हाथ भी नहीं लगाया है। उन्होंने खुद को पीड़ित बताते हुए मोहसिन पर महिलाओं संग दुर्व्यवहार करने और गालियाँ देने का आरोप लगाया। स्थानीय निवासियों के मुताबिक मोहसिन शिव सेना पार्टी से जुड़ा था, जिसे इस घटना के बाद से निकाल दिया गया है।

मुस्लिमों ने दे रखी थी बकरों को सोसायटी के अंदर बाँधने की चेतावनी

ऑपइंडिया के पास वो कॉपी मौजूद है जिसमें मोहसिन ने खुद माना है कि उसे जेपी इंफ्रा हाउसिंग सोसाइटी से बकरे रखने की अलग जगह मिली हुई थी। साल 2022 के बाद सोसायटी के एक नया प्रोजेक्ट बनने के कारण मुस्लिमों के लिए बकरे रखने की वो जगह नहीं बच पाई। थोड़े समय बाद सोसायटी के बगल जानवरों को रखने की एक और जगह आवंटित हुई। सोसायटी के मुस्लिमों ने बाहर जगह लेने से इनकार करते हुए कैम्पस के भीतर जगह माँगी थी। मुस्लिम निवासियों की तरफ से सोसायटी के अधिकारियों को यह धमकी मिली थी कि अगर उन्हें अंदर जगह नहीं दी गई तो वे बकरों को अपने आपर्टमेंट में ले जाएँगे।

जे पी इंफ़्रा द्वारा बकरे बाँधने के लिए दी गई जमीन

भ्रम फ़ैलाने वालों में मोहम्मद जुबैर भी शामिल

इससे पहले कई वामपंथी संस्थानों की कुछ रिपोर्टों में मोहसिन का समर्थन करते हुए उसकी हरकत का विरोध करने वाले सोसायटी के निवासियों के लिए ‘असभ्य’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए थे। कुछ इस्लामी समूहों ने यह भी दावा किया था कि बकरों को आपर्टमेंट में कुर्बानी के लिए नहीं लाया गया था। ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने भी सोसायटी को ही दोषी ठहरा दिया था।

जेपी इंफ़्रा ने दी बकरे बाँधने के लिए अलग से जमीन

ऑपइंडिया से बात करते हुए जेपी इंफ्रा सोसायटी के निवासी गीगराज कुमावत ने मोहसिन और उसकी बीवी यास्मीन पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने मारपीट किए जाने के मुस्लिम जोड़े के दावों को मनगढ़ंत करार दिया। कुमावत के मुताबिक बिल्डर ने बकरों को रखने के लिए किराए पर एक जमीन ली थी। लेकिन मोहसिन की जिद उन्हें सोसायटी के अंदर रखने की थी। उन्होंने दावा किया कि मोहसिन ने पहले से बिल्डर को धमकी दे रखी थी कि वो बकरों को सोसाइटी में ही लाएगा।

गीगराज कुमावत ने हमें आगे बताया कि सोसायटी के बाकी लोग मोहसिन और उसकी बीवी द्वारा लगाए जा रहे झूठे आरोपों और दर्ज करवाई गई FIR से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यास्मीन और उसके शौहर की हरकत से न सिर्फ सोसायटी की शांति भंग हुई है, बल्कि स्थानीय लोग यहाँ तक सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि वे भारत में हैं या पाकिस्तान में। पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है और सोसायटी परिसर में बकरों की कुर्बानी नहीं होने दी जाएगी। लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की गई है।

SSR की मौत मामले में पुलिस को मिले ‘ठोस’ सबूत: महाराष्ट्र डिप्टी CM का खुलासा, दिशा सालियान केस पर बोले- उसकी भी जाँच जारी है

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के 3 साल बाद महाराष्ट्र के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में बड़ा अपडेट दिया है। मीडिया से बात करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में लोगों ने कुछ सबूत पुलिस को सौंपें हैं। फिलहाल उनकी विश्वसनीयता की जाँच की जा रही है।

उन्होंने मीडिया के सामने ये भी कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी कहना या निष्कर्ष तक आना जल्दबाजी होगी। लेकिन सबूत इकट्ठा करके इसमें जाँच की जा रही है। महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने दिशा सालियान की मौत मामले पर भी रिपब्लिक भारत से कहा कि अभी इस मामले में जाँच चल रही है और अभी सारा ध्यान सबूतों की प्रमाणिकता जाँचने पर है।

इंटरव्यू में उन्होंने बताया, “पहले से उपलब्ध जानकारी केवल अफवाहों पर आधारित थी, फिर कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके पास मामले में ठोस सबूत हैं। उसके बाद इन लोगों से संपर्क किया गया और पुलिस को सबूत सौंपने के लिए कहा गया। अब इन सबूतों की प्रमाणिकता जाँची जा रही है।”

उन्होंने इंटरव्यू में पालघर में हुई साधुओं की हत्या पर भी बात रखी। वह बोले कि ये मामला अब भी कोर्ट में हैं। पिछली सरकार ने इस केस को सीबीआई को न सौंपने के लिए कोर्ट में हलफनामा दिया था। लेकिन हमने इस मामले पर अपनी जाँच की और पाया कि उस समय पुलिस ने केस की सही से पड़ताल ही नहीं की थी। इसलिए वो लोग इस केस के लिए कोर्ट भी गए और मामले को सीबीआई को सौंपने की गुहार लगाई।

उन्होंने साथ में ये भी कहा कि इन मामलों की जाँच में जितना समय लगा ये चिंता का विषय है क्योंकि आरोपित इसका फायदा उठा सकते हैं। क्योंकि जैसे-जैसे टाइम बीतता है आरोपित सबूत मिटा सकते हैं, उन्हें नष्ट कर सकते हैं या फिर उनकी वैल्यू खत्म हो सकती है। लेकिन फिर भी उनकी सरकार सत्य तक पहुँचने के लिए दृढ़ और प्रतिबद्ध है।

मध्य प्रदेश के स्कूली किताबों में होंगे सावरकर, मुंबई का सी लिंक भी स्वातंत्र्यवीर के नाम: हार्बर लिंक को मिला अटल बिहारी वाजपेयी का नाम

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार ने वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति न्हावा शेवा अटल सेतु कर दिया है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) पर अध्याय शामिल करेगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, हमने वर्सोवा-बांद्रा सी लिंक का नाम बदलकर वीर सावरकर सेतु और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का नाम बदलकर भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में अटल सेतु कर दिया गया है।”

इसके अलावा, सीएम शिंदे ने आगे कहा, “हमने महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना की सीमा 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का भी बड़ा निर्णय लिया है। यह पीले और केसरी राशन कार्ड धारक तक सीमित नहीं रहेगी। इसका लाभ राज्य के सभी लोगों को दिया जाएगा।”

उधर, मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सावरकर, भगवद्गीता, परशुराम, भगत सिंह जैसे महापुरुषों से संबंधित अध्याय को स्कूली पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इसकी घोषणा की है।

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, “दुर्भाग्य से कॉन्ग्रेस ने भारत के सच्चे क्रांतिकारियों के बारे में नहीं पढ़ाया। हम सच्चे नायकों की जीवनियाँ शामिल करेंगे। नए पाठ्यक्रम में वीर सावरकर, भगवदगीता संदेश, परशुराम, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और अन्य को शामिल किया जाएगा।”

शिक्षा मंत्री ने आगे कहा, “वीर सावरकर हमारे महान क्रांतिकारियों में से हैं, जिनको एक जन्म में दो-दो आजीवन कारावास की सजा हुई। वे पहले ऐसे लेखक हुए, जिन्होंने 1857 के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम कहा, नहीं तो लोग इसे गदर ही कहते थे। कॉन्ग्रेस शासन में विदेशी आक्रांताओं को महान लिखा गया। देशभक्तों को महान नहीं लिखा गया।”

राज्य की पिछली कॉन्ग्रेस की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “2018 में कुछ समय के लिए कमलनाथ जी की सरकार बनी थी। वीर सावरकर की किताब एक स्कूल में बाँट दी गई थी। कमलनाथ जी की सरकार ने उस प्राचार्य को निलंबित कर दिया था। दरअसल, कॉन्ग्रेस के लोग हमारे क्रांतिकारियों को बच्चों तक पहुँचाना नहीं चाहते थे। ये उन्होंने अपनी सरकार में करके दिखाया।”

कौन है सुनीता विश्वनाथ, जिसकी तस्वीर दिखाकर स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी से पूछे सवाल

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने हाल में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के अमेरिकी दौरे के वक्त उनके साथ दिखाई दी सुनीता विश्वनाथ नाम की एक महिला की उपस्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में फोटो दिखाते हुए बताया कि इस महिला के अमेरिकी व्यवसायी व भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस से संबंध हैं इसलिए राहुल गाँधी को स्पष्ट करना चाहिए कि इनसे मुलाकात में उनकी क्या बातें हुई थीं। केंद्रीय मंत्री ने सोरोस से कॉन्ग्रेस के पुराने संबंधों का जिक्र कर उन भारत विरोधी लोगों के नाम बताए जो राहुल गाँधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुए थे।

कौन है सुनीता विश्वनाथ?

बता दें कि सुनीता विश्वनाथ हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स नामक संगठन की सह-संस्थापक हैं जो समय-समय पर हिंदुओं के नाम पर हिंदुओं के खिलाफ झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करता है। ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ के नैरेटिव चलाकर लोगों को भ्रमित करने का काम ये संगठन करता रहा है। वहीं खुद सुनीता विश्वनाथ हिंदू देवी देवताओं को बदनाम करने के लिए उल-जुलूस बातें करती भी देखी जा चुकी हैं।

हिंदू देवताओं पर लिखी आपत्तिजनक बातें

कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेबसीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूस बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर यहाँ तक कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है। सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो माँस-मीट भी खाते हैं।

भारत विरोधी सुनीता विश्वनाथ

सुनीता के लेखों में भाजपा के प्रति नफरत भी उजागर होती रही है। करण थापर के एक शो में उन्होंने कहा था कि भारत के हिंदुओं के लिए जरूरी है कि वो हिंदुत्व से लड़ें क्योंकि जो आज हो रहा है वो नरसंहार की शुरुआत है। सुनीता का पक्ष देखने के बाद ये भी हैरान करने वाला नहीं है कि उनके संबंध प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष भारत विरोधी इस्लामी संगठनों (जमात-ISI) से हैं। वह भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC) जैसे इस्लामी संगठनों के साथ कई कार्यक्रमों की मेजबानी करती और साथ ही उनकी एक संस्था ‘वीमन फॉर अफगान वीमन’ एंटी इंडिया जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन से खुला फंड पाती है। 

याद दिला दें कि जॉर्ज पिछले कुछ समय में से भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा चलाने के लिए काफी चर्चा में रह चुका है। सुनीता-जॉर्ज के कनेक्शन पर ही अमित मालवीय ने उजागर करते हुए कहा कि सुनीता जॉर्ज सोरोस की प्रतिनिधि हैं, जिन्होंने विपक्षी नेताओं, थिंक टैंक, पत्रकारों, वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए $1 बिलियन का वादा किया है।

एक महीना कम, कम से कम 6 महीने चाहिए: UCC पर मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड की विधि आयोग को चिट्ठी, कहा- यह इतना जरूरी कैसे हो गया

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर भारतीय विधि आयोग (Law Commission) को पत्र भेजकर आपत्ति जाहिर की है। बीते शुक्रवार (23 जून 2023) को AIMPLB ने कॉमन सिविल कोड को पूर्व में हुई जाँच का हवाला देते हुए गैर-जरूरी बताया। साथ ही जनता से माँगी गई राय की समय सीमा काफी कम बताते हुए इसे कम-से-कम 6 महीने के लिए बढ़ाने की अपील की।

बुधवार (28 जून 2023) को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भारतीय विधि आयोग को भेजा गया अपना पत्र शेयर किया है। AIMPLB ने खुद को भारत में मुस्लिमों का सबसे बड़ा मज़हबी संगठन बताया है। इस पत्र में विधि आयोग द्वारा जारी नोटिस को बेहद सामान्य और अस्पष्ट बताया गया है। बोर्ड ने सवाल किया है कि माँगे गए सुझाव की शर्तें क्या-क्या हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आयोग से पूछा है कि यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण कैसे हो गया जबकि इसे पहले हुई जाँच में गैर-जरूरी बताया जा चुका है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक, भारतीय विधि आयोग द्वारा कॉमन सिविल कोड के मुद्दे पर माँगे गए सुझाव के लिए दिया गया समय काफी कम है। बोर्ड ने इस समय सीमा को कम से कम 6 माह के लिए बढ़ाने की अपील की है। साथ ही यह भी पूछा कि यह मुद्दा अचानक इतना महत्वपूर्ण कैसे हो गया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्देदी के मुताबिक, AIMPLB अपना जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (27 जून 2023) को कॉमन सिविल कोड की जोरदार पैरवी की थी। इसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जल्दबाजी में देर रात एक इमर्जेंसी मीटिंग की थी। करीब 3 घंटे चली इस मीटिंग में देश भर के मुस्लिम धर्मगुरुओं और प्रबुद्ध व्यक्तियों को ऑनलाइन जोड़ा गया था। मीटिंग में तय किया गया कि UCC के मुद्दे पर लॉ कमीशन को एक ड्राफ्ट तैयार करके भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही UCC के विरोध करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

गौरतलब है कि भारतीय विधि आयोग ने 14 जून 2023 को एक नोटिस जारी करके समान नागरिक संहिता के बारे में मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों के विचारों को जानने के लिए फिर से निर्णय लिया। आयोग ने कहा था कि जिन लोगों को इसमें रुचि है और अपनी राय देना चाहते हैं, वे राय दे सकते हैं। नोटिस पर राय या सुझाव देने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। अपनी राय को भारत सरकार के विधि आयोग की ई-मेल [email protected] पर भी भेजा जा सकता है।

बिहार ही नहीं, छत्तीसगढ़ में भी भरभरा कर गिरता है ‘भ्रष्टाचार का पुल’: पहली बारिश में ही बहा, आपने Video देखा क्या

बिहार के पुल भरभरा कर गिरने को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। अब छत्तीसगढ़ से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। यहाँ दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी पर बन रहा पुल पहली बारिश में ही ढह गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है।

16.40 करोड़ रुपए की लागत से 400 मीटर लंबा पुल दुर्ग जिले के धमधा ब्लाॅक में शिवनाथ नदी के सगनी घाट पर बनाया जा रहा है। बुधवार (28 जून 2023) की सुबह जब लोग नदी का जलस्तर देखने गए थे तभी अचानक पुल का स्ट्रक्चर गिर गया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुल के बहने के बाद भी मौके पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। इंजीनियर, सुपरवाइजर, ठेकेदार कोई भी मौके पर नहीं था।

माॅनसून की शुरुआत होते ही पुल के बहने के बाद काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सगनी गाँव के इतवारी राम साहू के हवाले से बताया गया है कि पुल गिरने के बाद से ग्रामीण डरे हुए हैं। पीडब्ल्यूडी के सेतू निर्माण विभाग का कहना है कि ब्रिज के 15 वें स्पॉन के स्टेजिंग और सेंट्रिंग का ढांचा बहा है। शेष ब्रिज को नुकसान नहीं हुआ है।

इसी तरह पिछले दिनों बिहार के किशनगंज जिले में मेची नदी पर बन रहा पुल धँस गया है। एक पाया धँसने के कारण छह पाये का यह पुल बीच से झुक गया। इसके अलावे भी बिहार में बीते एक साल में 8 पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। इससे पहले 4 जून, 2023 को बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर 1700 करोड़ रुपए की लागत से बना रहा पुल टूट कर नदी में गिर गया था। वहीं, बीते महीने 16 मई को बिहार के पूर्णिया जिले में एक निर्माणाधीन पुल कंक्रीट पड़ने के महज चार घंटे बाद ही ढह गया था।

इससे पहले 19 मार्च 2023 को राज्य के सारण जिले में अंग्रेजों के जमाने का एक सड़क पुल गिरने से दो लोग घायल हो गए थे। वहीं, 19 फरवरी 2023 को पटना जिले के बिहटा सरमेटा में एक निर्माणाधीन पुल गिर गया था। इस साल की शुरुआत यानी कि 16 जनवरी 2023 को दरभंगा जिले के कुशेश्वर में ओवरलोड ट्रक के कारण लोहे का पुल गिर गया था।

इससे पहले 18 नवंबर 2022 को बिहार के नालंदा जिले के वेना में एक निर्माणाधीन फोर लेन सड़क पुल गिरने से एक व्यक्ति की गौत हो गई थी। इसी प्रकार की घटना 9 जून 2022 को बिहार के सहरसा जिले के सिमटी बख्तियारपुर में हुई। यहाँ पुल का एक हिस्सा गिरने से तीन मजदूर घायल हो गए थे। वहीं, 20 मई 2022 को पटना में अत्यधिक बारिश के चलते 136 साल पुराना पुल ढह गया था।