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बकरीद पर हलाल करने के लिए बिल्डिंग में लेकर आ गया 60 बकरे, बाॅम्बे हाई कोर्ट ने कहा- बिना इजाजत सोसायटी में कुर्बानी गलत

बाॅम्बे हाई कोर्ट ने बकरीद पर सोसायटी में कुर्बानी को गलत बताया है। BMC (बृहन्मुंबई महानगर पालिका) को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। तय स्थानों पर ही कुर्बानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने ये निर्देश बुधवार (28 जून 2023) को मुंबई के नैथानी हाइट्स में रहने वाले एक व्यक्ति की याचिका पर दी।

ये निर्देश ऐसे वक्त में सामने आए हैं जब मुंबई के ही मीरा रोड की एक सोसायटी में मोहसिन शेख द्वारा बकरीद पर कुर्बानी के लिए दो बकरे लाने को लेकर विवाद हो गया था। इसके विरोध में सोसायटी के लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था। मंगलवार 27 जून 2023 को हुई इस घटना को लेकर 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नैथानी हाइट्स के एक व्यक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए खुले में या घरों में कुर्बानी पर रोक की अपील की थी। जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जितेंद्र जैन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बिना इजाजत सोसायटी में कुर्बानी जायज नहीं है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुभाष झा ने बहस की। वहीं BMC का पक्ष उनके वकील जोएल कार्लोस ने रखा।

दरअसल नैथानी हाइट्स में रहने वाला एक व्यक्ति कुर्बानी के लिए 60 बकरे लेकर आ गया था। इसके बाद जैन समुदाय के लोगों ने इस पर रोक की अपील करते हुए याचिका दायर की। हाई कोर्ट की पीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि बिना इजाजत सोसायटी में जानवर की कुर्बानी देना गलत है। यदि ऐसा किया जाता है तो प्रशासन को हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान बीएमसी के वकील जोएल कार्लोस ने बेंच को बताया कि कुर्बानी के लिए पहले से जगह तय कर दी गई है। सभी को तय जगह पर ही कुर्बानी के निर्देश BMC ने दिए है। वकील ने कहा कि बकरीद के दौरान सोसायटी में जाँच के लिए BMC अधिकारी भेजेगा और जो भी आदेशों का उललंघन करता दिखाई देगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने अपने निर्देश में कहा है कि कुर्बानी वहीं हो जहाँ के लिए BMC या नगर निगम ने लाइसेंस जारी किया हो। हाई कोर्ट ने BMC के साथ पुलिस को भी निर्देश दिए हैं कि तय किए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। बेंच ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 3 जुलाई 2023 की तारीख तय की है।

ऑपरेशन थिएटर में हिजाब पहनने की मिले इजाजत: MBBS की 7 मुस्लिम छात्राओं का पत्र, केरल के सरकारी मेडिकल कॉलेज का मामला

सात मुस्लिम छात्राओं ने ऑपरेशन थिएटर में हिजाब जैसी पोशाक पहनने की इजाजत माँगी है। केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित सरकारी मेडिकल काॅलेज में ये छात्राएँ एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। काॅलेज प्रिंसिपल को इस संबंध में 26 जून 2023 को छात्राओं ने पत्र लिखा। अपनी मजहबी मान्यताओं का हवाला देकर इसकी इजाजत माँगी है। हालाँकि कॉलेज प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च बता कर इसे नकार दिया है।

सोशरल मीडिया में वायरल यह पत्र एमीबीबीएस 2020 बैच की एक छात्रा ने लिखा है। इस पर 2018, 2021 और 2022 बैच की अन्य छात्राओं के भी हस्ताक्षर हैं। पत्र के विषय में कहा गया है, ‘ऑपरेशन थिएटर में हिजाब पहनने के मुद्दे के संबंध में।’ पत्र में मजहबी परंपरा का हवाला देते हुए सर ढँकना और हिजाब पहनना मुस्लिम महिला के लिए हर हाल में जरूरी बताया गया है।

ऑपरेशन थिएटर में हिजाब की माँग करने वाली लड़कियों ने अन्य देशों के अस्पतालों का हवाला दिया है। उन्होंने लिखा है कि कई ऐसी कम्पनियाँ हैं ऑपरेशन रूम में मुस्लिम महिलाओं के पहनने के लिए विशेष कपड़े सप्लाई करती हैं। लंबी आस्तीन वाले स्क्रब जैकेट और सर्जिकल हुड उपलब्ध हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम छात्राओं की हिजाब वाली माँग मानने से इनकार कर दिया है। तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. लिनेट जे मॉरिस ने हिजाब की माँग वाला पत्र मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान संक्रमण रहित होने के लिए डॉक्टर को पूरे हाथ धोने पड़ते हैं, इसलिए छात्राओं की माँग पर अमल कर पाना संभव नहीं है। मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च बताते हुए प्रिंसिपल ने दोनों पक्षों को सुनने के लिए एक कमेटी के गठन का एलान किया है।

गौरतलब है कि साल 2022 में कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब पहनने की माँग को लेकर काफी हंगामा हुआ था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहन कर स्कूल आने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

आगे-आगे गाय और पीछे-पीछे वंदे भारत एक्सप्रेस: पटना-राँची रूट पर अंतिम ट्रायल के दौरान लगाना पड़ा इमरजेंसी ब्रेक, 15 मिनट तक ट्रैक पर चलती रही गाय

बिहार की राजधानी पटना से राँची के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस के उद्घाटन से एक दिन पहले एक अजीब तरह की घटना सामने आई थी। दरअसल, सोमवार (26 जून 2023) को फाइनल ट्रायल के समय एक गाय ट्रैक पर सामने आ गई। इसके चलते इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकनी पड़ी। इसके बाद 15 मिनट तक गाय आगे-आगे चलती रही और पीछे-पीछे वंदे भारत ट्रेन।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (27 जून 2023) को भोपाल से पटना-राँची पटना वंदे भारत एक्सप्रेस का वर्चुअली उद्धाटन किया। इसके पहले सोमवार को रेलवे के अधिकारी वंदे भारत का फाइनल ट्रायल कर रहे थे। ट्रायल के दौरान वंदे भारत पटना से राँची जा रही थी।

बरकाकाना के बाद दुर्गी सुरंग से जैसे ही ट्रेन बाहर निकली तो ड्राइवर ने देखा कि ट्रैक पर एक गाय आ गई। इसके बाद ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इससे गाय को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। हालाँकि गाय वहाँ से हटी नहीं।

बताया जा रहा है कि जिस जगह यह घटना हुई, वहाँ दोनों तरफ पहाड़ हैं। पहाड़ होने के कारण गाय ट्रैक से हट नहीं सकती थी। इसके कारण वंदे भारत एक्सप्रेस के लोगों को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान गाय रेलवे ट्रैक पर आगे-आगे चलती रही और पीछे-पीछे वंदे भारत ट्रेन चलती रही। लगभग 15 मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा।

अंत में ट्रेन से 4-5 स्टाफ उतरे और गाय को भगाने लगे। इस तरह लगभग 2 किलोमीटर पर रेलकर्मी दौड़ते रहे। अंत में गाय को ट्रैक के एक किनारे रेलकर्मियों ने तब तक पकड़कर रखा, जब तक कि ट्रेन आगे नहीं निकल गई। इसके बाद 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस आगे बढ़ी। 

बताते चलें कि वंदे भारत ट्रेन के सामने पशुओं के आने के कारण कई बार दुर्घटना हो चुकी है। इससे ना सिर्फ जानवरों की मौत होती है, बल्कि ट्रेन की स्पीड के कारण ट्रेन के बोनट को भी काफी क्षति पहुँचती है। इस मामले में कोई नुकसान नहीं हुआ है।

अरबपति जॉर्ज सोरोस की करीबी महिला, उसके साथ राहुल गाँधी… स्मृति ईरानी ने तस्वीर शेयर कर बोला हमला, जमात-ए-इस्लामी वाले के साथ भी संबंध

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने बुधवार (28 जून 2023) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के अमेरिका दौरे पर हमला बोला। उन्होंने राहुल गाँधी और भारत भारत विरोधी अमेरिकी व्यवसायी जॉर्ज सोरोस के साथ साँठगाँठ का आरोप लगाया है। उन्होंने राहुल सोरोस के एक करीबी महिला के साथ राहुल गाँधी की तस्वीर भी साझा की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मेरे हाथ में वो तस्वीर है जिसमें एक देसी महिला विराजमान है राहुल गाँधी के साथ। इनका नाम सुनीता विश्वनाथ है। ये तस्वीर अमेरिका राहुल गाँधी की उनकी मुलाकात की है।” उन्होंने कहा कि जॉर्ज सोरोस के साथ मिलकर वे क्या बात कर रहे थे, इसकी जानकारी उन्हें देश को देनी चाहिए।

स्मृति ईरानी ने कहा, “सोरोस के भारत विरोधी विचार किसी से छुपे नहीं हैं। ऐसे में राहुल का भारत के बाहर भारत विरोधी लोगों से मिलना क्या दर्शाता है, यह भी उन्हें बताना चाहिए।” उन्होंने कहा कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि राहुल गाँधी ने जॉर्ज सोरोस की सहयोगी के साथ अमेरिका में बैठक की। 

स्मृति ने कहा, “जॉर्ज सोरोस और उनके द्वारा फंडेड संगठनों का राहुल गाँधी से ताल्लुक नया नहीं, पुराना है। एक पब्लिकेशन में स्पष्ट हुआ है कि सलील सेठी नाम के एक सज्जन, जो ओपन सोसायटी के ग्लोबल अध्यक्ष हैं, वो जॉर्ज सोरोस के संस्थान के साथ हैं। वे राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी थे।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने इस विषय को पहले भी उठाया था और बताया था कि किस तरह जॉर्ज सोरोस भारत के लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को हटाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि राहुल की अमेरिका यात्रा बीजेपी की तरफ से उन पर की गए FIR से जुड़ी है।

एक इस्लामी कट्टरपंथी संगठन से जुडे व्यक्ति का जिक्र करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि इंटरनेट पर यह जानकारी भी उपलब्ध है कि राहुल गाँधी की 4 जून की न्यूयार्क की बैठक में पंजीयन के लिए एक व्यक्ति का नाम और नंबर दिया गया है। उस व्यक्ति का नाम तजीम अंसारी है।

उन्होंने कहा कि तजीम अंसारी के संबंध इस्लामिक सर्किल ऑफ नॉर्थ अमेरिका से पाए गए है। इसके बारे में 28 फरवरी 2019 को यूएस कॉन्ग्रेस में एक प्रस्ताव में कहा था कि अंसारी का संबंध कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ है।

बता दें कि राहुल गाँधी 28 मई 2023 को 10 दिवसीय अमेरिकी दौरा पर गए थे। यह दौरा कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी को बहुमत मिलने के बाद शुरू हुई थी। इसी लेकर भाजपा उन पर आरोप लगा रही है।

कौन हैं सुनीता विश्वनाथ

सुनीता विश्वनाथ अमेरिकी नागरिक हैं और अमेरिका में मानवाधिकार संगठन ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ (HfHR) की सह-संस्थापक हैं। वह भारतीय अमेरिकी मुस्लिम परिषद जैसे संगठनों के साथ मिलकर कई तरह के कार्यक्रमों की मेजबानी भी करती हैं। उनके लेखों में भारत के प्रति उनकी नफरत उजागर होती है।

कुछ समय पहले विवादित ‘काली’ वेब सीरीज पर उठे विवाद पर इस महिला ने आकर सीरीज की निर्माता के पक्ष में हिंदू देवताओं के लिए उल-जुलूल बातें की थीं। अपने लेख में सुनीता ने महादेव की चिलम फूँकती तस्वीर लगाकर कहा था कि हिंदुओं में शराब और सिगरेट कुछ भी निषेध नहीं है। देवताओं को ये सब चढ़ता है।

सुनीता ने अपने लेख में सेक्स और समलैंगिकता को घुसाकर ये तक लिखा था कि धर्मग्रंथों में अनगिनत ऐसी कहानियाँ भरी पड़ी हैं, जिन्हें पढ़कर समलैंगिकता से पैदा हुए बच्चों का पता चलता है। सुनीता ने यह भी लिखा था कि हिंदुओं के कुछ देवता तो समलैंगिक भी हैं। काली के आपत्तिजनक दृश्यों को सपोर्ट करने के लिए सुनीता ने साफ लिखा था कि हिंदू देवता धूम्रपान, मदिरापान करते हैं। इसके अलावा वो मांस भी खाते हैं।

सुनीता विश्वनाथ को तीन साल पहले अयोध्या में प्रवेश देने से रोक दिया गया था। इतना ही नहीं, दो साल पहले उन्होंने लेख में कहा था कि भाजपा देश के हिंदुओं को झूठ बेच रही है कि वे 80 फीसदी हिंदू आबादी वाले अपने ही देश में खतरे में हैं। वे हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करेंगे, तभी खुशहाल रहेंगे। सुनीता विश्वनाथ के संगठन ‘वुमेन फॉर अफगान वुमेन‘ को सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंडिंग की जाती है।

कौन हैं जॉर्ज सोरोस

92 साल के जॉर्ज सोरोस एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो स्टॉक मार्केट में निवेश करके लाभ कमाते हैं। उनका जन्म 1930 में पश्चिमी देश हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक यहूदी परिवार में हुआ था। कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब यहूदियों पर अत्याचार हो रहा था, तब उन्होंने झूठा पहचान पत्र बनाकर अपना और अपने परिवार की जान बचाई थी।

जब विश्वयुद्ध खत्म हुआ और हंगरी में कम्युनिस्ट सरकार बनी तो वे 1947 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन चले गए। वहाँ उन्होंने रेलवे स्टेशन पर कुली और क्लबों में वेटर का भी काम किया। इस दौरान वे लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाई की। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने लंदन मर्चेंट बैंक में भी काम किया।

साल 1956 में वे लंदन छोड़कर अमेरिका आ गए और फाइनांस एवं इन्वेस्टमेंट में कदम रखा। उसके बाद उनकी किस्मत चमक उठी और रात दूनी दिन चौगुनी तरक्की करने लगे और खूब संपत्ति इकट्ठा की। वित्तीय पत्रिका फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार 17 फरवरी 2023 तक उनके पास 6.7 बिलियन डॉलर (लगभग 55,455 करोड़ रुपए) की संपत्ति है।

सन 1973 में उन्होंने सोरोस फंड मैनेजमेंट की स्थापना की और कथित अत्याचार पीड़ितों की मदद करने लगे। इस दौरान उन्होंने ब्लैक लोगों की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप देना शुरू किया। उनका दावा है कि उन्होंने अब 32 अरब डॉलर (2.62 लाख करोड़ रुपए) जरूरतमंदों को दे चुके हैं। सन 1984 में उन्होंने ओपन सोसायटी नामक संस्था की स्थापना की। आज यह संस्था 70 से अधिक देशों में कार्यरत है।

इन सब मानवीय सेवाओं और दानों के पीछे उनका एक विकृत चेहरा भी है। उन्होंने लाभ कमाने के लिए कई संस्थानों और देशों में वित्तीय संकट खड़ा कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने कई देशों की सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने और उन्हें गिराने के लिए फंडिंग करने का काम किया। ओपन सोसायटी का इसमें नाम आया है। इस तरह के आरोप उन पर लगते रहे हैं।

अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को हटाने के लिए अथाह पैसे खर्च किए थे। साल 2003 में उन्होंने कहा था कि जॉर्ज बुश को हटाना उनके लिए जिंदगी और मौत का सवाल है। उन्होंने कहा था कि अगर बुश को सत्ता से हटाने की अगर कोई गारंटी लेता है और वे अपनी पूरी संपत्ति उस पर लुटा देंगे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ बुश की कार्रवाई का भी खूब विरोध किया था। बुश को हराने के लिए उन्होंने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए थे।

सोरोस को चीन, भारत के नरेंद्र मोदी, ब्लादिमीर पुतिन, अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता पसंद नहीं हैं। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को ठग और पीएम मोदी को तानाशाह कहा था। उन्होंने दुनिया में ‘राष्ट्रवाद’ के बयार से लड़ने के लिए लगभग 100 अरब डॉलर की फंड की स्थापना की है। इन फंड का इस्तेमाल इन लोगों के खिलाफ प्रोपगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उन्होंने कहा था कि दुनिया में राष्ट्रवाद तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा भारत में देखने को मिला है।

सोरोस ने वित्तीय संकट पैदा किया और लाभ कमाया

जॉर्ज सोरोस को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिसने बैंक ऑफ इंग्लैंड को बर्बाद कर दिया। बैंक ऑफ इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक और यह भारत के RBI के समानांतर है। हेज फंड मैनेजर सोरोस ने अपनी साजिशों से ब्रिटिश मुद्रा पाउंड की वैल्यू को गिरा दिया था। इससे उन्होंने लगभग 1 बिलियन डॉलर (8277 करोड़ रुपए) का लाभ कमाया था। उन्हें वित्तीय युद्ध अपराधी तक कहा गया है।

यह कुछ हिंडनबर्ग रिसर्च की तरह ही है। हिंडनबर्ग भी अपनी रिपोर्ट में किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति को खराब बताया है। इससे उसके शेयर गिरने लगते हैं और उसे शॉर्ट सेल करके लाभ कमाता है। अडानी मामले में भी हिंडनबर्ग ने यही तरीका अपनाया। इसके पहले भी वह ऐसा ही करता है। जॉर्ज सोरोस ने बैंक ऑफ इंग्लैंड के मामले में लगभग यही रणनीति अपनाई थी।

साल 1997 में थाईलैंड की मुद्रा बाहत पर सट्टेबाजी हमलों (Speculative Attack) के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया गया था। थाईलैंड की मुद्रा में आई गिरावट के कारण उस साल एशिया के अधिकांश देशों में वित्तीय संकट फैल गया था। मलेशिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने भी वहाँ की मुद्रा रिंगित की गिरावट के लिए सोरोस को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, सोरोस ने इसका खंडन किया था।

इसके अलावा, सोरोस पर अन्य अनैतिक तरीकों से संपत्ति कमाने का आरोप लगा है। वर्ष 2002 में फ्रांस की अदालत ने सोरोस को अनैतिक और अनधिकृत व्यापार का दोषी पाते हुए उन पर 23 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था। सोरोस ने अदालत के इस फैसले को फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोरोस पर लगाए गए इस जुर्माने को बरकरार रखा।

अमेरिका में भी जॉर्ज सोरोस पर बेसबॉल खेलों में पैसा लगाकर अनैतिक तरीके से लाभ कमाने का आरोप लगा। इसी तरह इटली की फुटबॉल टीम एएस रोमा को लेकर भी सोरोस विवादों में आए था। इतना ही नहीं, सोरोस ने साल 1994 में खुलासा किया था कि उन्होंने आत्महत्या करने में अपनी माँ मदद की थी।

सरकारों के खिलाफ प्रोपगेंडा और भारत

राफेल डील में जाँच के लिए फंडिंग: फ्रांस से भारत ने 36 राफेल विमानों को खरीदा था। इसको लेकर विपक्षी दल कॉन्ग्रेस ने हंगामा किया था और कहा था कि इसमें दलाली हुई है। हालाँकि, यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्रांस की एनजीओ शेरपा एसोसिएशन ने इसमें भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराकर जाँच की माँग की थी। इस एनजीओ को जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से फंड जारी किया जाता है।

भारत जोड़ो यात्रा और सोरोस: कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा से भी जॉर्ज सोरोस के नाम जुड़े हैं। 31 अक्टूबर 2022 को सलिल शेट्टी नाम का एक व्यक्ति राहुल गांधी की कर्नाटक के हरथिकोट में उनकी भारत जोड़ी यात्रा में शामिल हुआ। सलिल शेट्टी जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन के वैश्विक उपाध्यक्ष हैं। इसके पहले शेट्टी एमनेस्टी इंटरनेशनल से जुड़े थे।

CAA प्रोटेस्ट: सीएए प्रोटेस्ट में भी जॉर्ज सोरोस का नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध को हवा देने के लिए जॉर्ज सोरो ने फंडिंग की थी। इसकी पुष्टि उनके बयानों से भी होती है। सोरोस ने भारत में लागू किए जा रहे NRC और CAA को मुस्लिम विरोधी बताया था।

कश्मीर से धारा 370 का खात्मा: इसी तरह कश्मीर से जब केंद्र की मोदी सरकार ने धारा 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किया था, तब भी सोरोस सामने आए थे। उन्होंने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। सोरोस ने कहा था कि भारत हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसी तरह किसान आंदोलन और भारत द्वारा कोरोना का वैक्सीन बनाने के बाद उसके खिलाफ वैश्विक मुहिम चलाने में भी सोरोस का नाम आ चुका है।

दरअसल, जॉर्ज सोरोस की भूमिका उन हर बातों में लगभग सामने आई, जो केंद्र की भाजपा सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ रही। जॉर्ज सोरोस की नरेंद्र मोदी के खिलाफ कितनी नरफत है, इसका वे तानाशाह कहकर सबूत दे चुके हैं और समय-समय पर अन्य आरोपों के जरिए इसकी पुष्टि भई करते रहते हैं। वैसे तो सोरोस की कहानी सैकड़ों पन्नों में भी नहीं खत्म होगी, लेकिन फिलहाल संक्षिप्त में इतना ही।

कुरान पर गलत तथ्यों के साथ एक छोटी सी डॉक्यूमेंट्री बनाओ और देखो क्या होता है… हाईकोर्ट ने ‘आदिपुरुष’ के निर्माताओं को फटकारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण (I&B) मंत्रालय और ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC)’ को नोटिस जारी करते हुए ‘आदिपुरुष’ फिल्म को लेकर जवाब माँगा है। फिल्म के आपत्तिजनक दृश्यों और डायलॉग्स को लेकर 2 PIL दायर की गई है, जिस पर दोनों संस्थाओं को उच्च न्यायालय ने एफिडेविट दायर करने के लिए कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेंसर बोर्ड द्वारा इस फिल्म को सर्टिफाई करना एक बड़ा ब्लंडर था और इसने बड़ी संख्या में लोगों की भावनाएँ आहत की हैं।

जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस श्रीप्रकाश सिंह ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए फिल्म निर्माताओं की मानसिकता पर सवाल उठाया और कहा कि कुरान या बाइबिल जैसे पवित्र ग्रंथों को ऐसे नहीं छुआ जाना चाहिए और न ही उनसे छेड़छाड़ किया जाना चाहिए। उच्च न्यायालय ने माना कि ‘आदिपुरुष’ में जिस तरह से रामायण के किरदारों को दिखाया गया है, स्वाभाविक है कि लोगों की भावनाएँ आहत हुई होंगी। जजों ने कहा कि दिन प्रतिदिन ऐसी घटनाएँ बढ़ती ही जा रही हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में ऐसी कई फ़िल्में आई हैं जिनमें हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा कि अगर हमने अभी अपना मुँह बंद कर लिया तो पता है क्या होगा? जजों ने एक फिल्म के दृश्य को याद किया, जिसमें भगवान शिव को त्रिशूल लेकर दौड़ते हुए दिखाया गया था और उनका मजाक बनाया गया था। कोर्ट ने पूछा कि अब ये सब दिखाया जाएगा? साथ ही कहा कि जब फ़िल्में कारोबार करती हैं तो निर्माता कमाते हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “मान लीजिए कभी आपने कुरान पर कोई छोटी सी डॉक्यूमेंट्री बना दी, जिसमें आपने कुछ गलत दिखा दिया। तब देखिए क्या-क्या होता है। ये स्पष्ट करना ज़रूरी है कि ये किसी एक धर्म के बारे में नहीं है। संयोग से ये मामला रामायण से जुड़ा हुआ है, न्यायपालिका तो हर धर्म का है। किसी भी धर्म को खराब तरीके से नहीं दिखाया जाना चाहिए। मुख्य चिंता ये है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जाना चाहिए।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियाँ की हैं, लेकिन फ़िलहाल कोई निर्णय नहीं सुनाया है। जजों ने कहा कि ये चीजें मीडिया में भी आ जाएँगी। हाईकोर्ट ने पूछा कि जैसा फिल्म में दिखाया गया है, धार्मिक किरदारों को कोई ऐसा सोच सकता है? खासकर जिस तरह के कपड़े इन किरदारों को पहनाया गया है, उस पर भी हाईकोर्ट ने सवाल उठाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भगवान राम, लक्ष्मण या माँ सीता का सम्मान करने वाले कभी इस फिल्म को नहीं देख सकते।

‘कोरोना वायरस को चीन ने जैविक हथियार के रूप में विकसित किया’: वुहान लैब के शोधकर्ता ने कहा- 4 तरह के वायरस देकर सबसे प्रभावी खोजने के लिए कहा गया था

साल 2019 के अंत में विश्व के सामने महामारी के रूप में आए कोविड-19 (Covid-19) को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चीन के वुहान लैब के एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि चीन कोविड-19 को जैविक हथियार के रूप में तैयार किया था। इसी के उसने लोगों को जानबूझकर संक्रमित किया था।

बताते चलें कि इस तरह के आरोप चीन पर लगते रहे हैं। पहले भी कहा गया है कि चीन अपने लैब में कोविड-19 वायरस को तैयार कर रहा था। हालाँकि, चीन ने इससे इनकार किया था और कहा था कि यह वायरस चीन के मीट मार्केट (Meat Market) से फैला था।

वुहान के शोधकर्ता चाओ शाओ ने इंटरनेशनल प्रेस एसोसिएशन के सदस्य जेनिफर जेंग के साथ एक साक्षात्कार में यह खुलासा किया है। शाओ ने कहा कि कोरोना वायरस को चीन ने जैव हथियार के रूप में तैयार किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वुहान लैब के वैज्ञानिकों को सबसे प्रभावशाली वायरस पता करे के लिए कहा गया था।

चाओ ने कहा कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में उनके सहयोगी शान चाओ ने उन्हें बताया कि उसके एक सीनियर ने उसे कोरोनो वायरस के चार प्रकार दिए थे। शान ने उन्हें बताया कि उनके साथ काम करने वाले सहयोगियों को चार तरह के वायरस दिए गए थे और पता लगाने के कहा गया था कि कौन-सा सबसे तेजी से फैल सकता है।

चाओ शाओ ने कहा कि कोरोना वायरस कुछ और नहीं, बल्कि यह एक जैव हथियार था। उन्होंने कहा कि उनके कई सहयोगी वुहान में साल 2019 में आयोजित हुए सैन्य विश्व खेलों के दौरान गुम हो गए थे। बाद में उनमें से एक शोधकर्ता ने उन्हें बताया था कि वे सभी विभिन्न देशों से आए एथलीटों की जाँच करने के लिए होटलों में गए थे।

चाओ शाओ ने कहा कि ये बात समझनी चाहिए कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य की जाँच के लिए किसी वायरोलॉजिस्ट की जरूरत नहीं होती है। जाँच करने का काम डॉक्टर आदि करते हैं। चाओ शाओ ने कहा कि इन वायरोलॉजिस्ट को कोरोना वायरस फैलाने के लिए वहाँ भेजा गया था, ताकि यह दुनिया में तेजी से फैल सके।

चाओ शाओ ने आगे कहा, “अप्रैल 2020 में उन्हें शिनजियांग भेजा गया था, ताकि जेलों में बंद उइगरों मुस्लिमों की सेहत की जाँच की जा सके। सेहत जाँचने के बाद उन्हें जल्द आजाद किया जा सके। वायरस की स्टडी करने वाले वैज्ञानिकों को सेहत की जाँच का काम देना कहाँ तक सही है।”

चाओ ने कहा कि वहाँ वायरोलॉजिस्ट को सिर्फ यह देखने के लिए भेजा गया था कि वायरस फैल रहा है या नहीं या फिर उसके जरिए वायरस फैलाया गया। बताते चलें कि कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन हमेशा से सवालों के घेरे में रहा है। ऐसे में यह आरोप उन दावों की एक तरह से पुष्टि कर रहे हैं।
 

बद्रीनाथ में नहीं मनेगी बकरीद, 45 किलोमीटर दूर जोशीमठ जाने को तैयार हुए मुस्लिम: पुरोहित समाज की चेतावनी के बाद बनी सहमति

उत्तराखंड के बद्रीनाथ में बकरीद (ईद-उल-अज़हा) नहीं मनाई जाएगी। इस बार मुस्लिमों का ये त्योहार गुरुवार (29 जून, 2023) को पड़ रहा है। बता दें कि छोटा चारधाम यात्रा का एक पड़ाव बद्रीनाथ भी होता है। यात्रा के समय प्रतिवर्ष यहाँ लाखों श्रद्धालु आते हैं। वहाँ और आसपास रहने वाले मुस्लिमों को पुलिस-प्रशासन द्वारा बोल दिया गया है कि वो 45 किलोमीटर दूर स्थित जोशीमठ में जाकर वहाँ बकरीद का त्योहार मना सकते हैं। मुस्लिम समाज ने इसे मान भी लिया है।

पुजारियों, होटल संघों, बद्रीनाथ मास्टर प्लान के निर्माण में शामिल कंपनियों और स्थानीय मुस्लिमों के साथ मंगलवार को हुई पुलिस-प्रशासन की बैठक के बाद ये निर्णय लिया गया। बद्रीनाथ पुलिस थाने में ये बैठक हुई। बद्रीनाथ में अधिकतर वही मुस्लिम हैं जो बहार से वहाँ मजदूरी करने आए हैं। इनमें बढ़ई और प्लम्बरों के अलावा वो लोग शामिल हैं जिन्हें विकास परियोजनाओं में काम करने के लिए वहाँ लाया गया है। इन सभी को बुधवार से भी छुट्टियाँ दे दी गई हैं, ताकि ये समय पर जोशीमठ पहुँच सकें।

पुरोला और बरकोट में जिस तरह से ‘लव जिहाद’ के खिलाफ तनाव पैदा हुआ है और हिन्दू सड़क पर उतरे हैं, उस परिस्थिति में ये निर्णय लिया गया है। ‘बद्रीनाथ होटल एसोसिएशन’ के अध्यक्ष राजेश मेहता के अलावा परियोजनाओं के ठेकेदारों को भी पुलिस ने बैठक में बुलाया था। होटल व्यवसायी विश्वेश्वर प्रसाद नैथानी ने बताया कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए और किसी की भावनाएँ आहत न हों इसीलिए ये निर्णय लिया गया। मुस्लिम प्रतिनिधियों ने लिखित में दे दिया है कि उन्हें इस निर्णय से कोई आपत्ति नहीं है।

‘बद्रीनाथ केदारनाथ टेम्पल कमिटी (BKTC)’ के अध्यक्ष अजयेन्द्र अजय ने कहा कि मुस्लिम समाज के लोग जोशीमठ जाकर बकरीद मनाने के लिए तैयार हो गए हैं। वहीं थानाध्यक्ष लक्ष्मी प्रदेश बिजलीवन ने कहा कि पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ था। इस बार भी किसी ने आपत्ति नहीं जताई। 2021 में 20 मुस्लिमों द्वारा बद्रीनाथ मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने की घटना के बाद तनाव पैदा हो गया था। हालाँकि, पुलिस ने नकारते हुए कहा था कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

पुजारियों ने इस संबंध में कुछ दिन पहले ही चेतावनी दी थी। बद्रीनाथ के पंडा समाज और पुरोहितों ने चेताया था कि अगर मंदिर क्षेत्र या फिर हनुमान चट्टी पर बकरीद मनाई गई तो वो लोग आंदोलन करेंगे। वैसे भी पुरोला में हिन्दू समाज की लड़की के अपहरण की घटना के बाद से कई मुस्लिम व्यापारी उत्तराखंड से फरार हो गए हैं। उत्तराखंड में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को छोटा चारधाम के नाम से जाना जाता है। अलकनंदा नदी के किनारे सहित भगवान विष्णु का धाम बद्रीनाथ 10,276 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित है और चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव है।

देवबंद में भीम आर्मी सुप्रीमो चंद्रशेखर की गाड़ी पर फायरिंग, छूकर निकल गई गोली: कार में सवार हमलावरों की तलाश में जुटी पुलिस

भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी- कांशीराम के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ पर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद में बुधवार (28 जून 2023) को हमला किया गया। कार सवार बदमाशों ने उनके काफिले पर फायरिंग की। एक गोली चंद्रशेखर के पीठ को छूकर निकल गई। इससे उनके कमर पर जख्म के निशान बन गए। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उनकी हालत खतरे से बाहर है।

सहारनपुर के एसएसपी विपिन टांडा के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने बताया है कि फायरिंग के बाद चंद्रशेखर को सीएचसी अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत ठीक है। हमलावरों की पुलिस तलाश कर रही है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार जिस कार में हमलावर सवार थे वह हरियाणा नंबर की थी। चंद्रशेखर के काफिले पर चार राउंड फायरिंग की गई। इसमें से एक गोली उनको छूकर निकल गई। फायरिंग में उनकी कार के शीशे भी टूट गए। चंद्रशेखर अपने फार्चूनर कार से देवबंद के दौरे पर थे।

चंद्रशेखर ने अस्पताल में मीडिया को बताया, “मुझे याद नहीं है, लेकिन मेरे लोगों ने उनकी (हमलावरों) पहचान की है। उनकी गाड़ी आगे सहारनपुर की तरफ भागी। हमने यू टर्न ले लिया। हमारी गाड़ी अकेली ही थी, कुल 5 लोग थे। हमारे साथी डॉक्टर को भी शायद गोली लगी है।” रिपोर्टों के अनुसार सहारनपुर जिला अस्पताल के बाहर चंद्रशेखर समर्थकों की भीड़ जुट गई है। पुलिस ने इलाके की नाकेबंदी कर दी है। हमलावरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। आजाद समाज पार्टी ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी, उन पर कड़ी कार्रवाई और चंद्रशेखर को सुरक्षा मुहैया कराने की माँग की है।

UCC के समर्थन में AAP, कहा- संविधान इसे लागू करने की बात करता है: दिल्ली में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का भी ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) की बात करके इसे एक बार फिर से विमर्श में ला दिया है। इस बीच पीएम मोदी और भाजपा का बात-बात में विरोध करने वाली आदमी पार्टी (AAP) ने UCC को अपना समर्थन दिया है। AAP ने कहा कि इसको लागू करने से पहले सभी धर्मों, राजनीतिक दलों और संगठनों से विमर्श कर आम सहमति बनानी चाहिए।

AAP नेता संदीप पाठक ने बुधवार (28 जून 2023) को कहा, “देखिए सैद्धांतिक रूप से हम इसके समर्थन में हैं। संविधान की धारा 44 भी इसका समर्थन करती है कि देश में UCC होनी चाहिए। चूँकि यह मुद्दा सभी धर्म-संप्रदाय से जुड़ा हुआ है, इसलिए हम ये चाहते हैं कि इस पर व्यापक स्तर पर बातचीत हो।”

AAP नेता ने कहा, “इसके लिए धर्म, संप्रदाय, राजनीतिक दलों से बातचीत होनी चाहिए। कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं, जिन्हें आप आने वाले समय में रिवर्स नहीं कर सकते। कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं, जो देश के लिए बहुत मूलभूत होते हैं। ऐसे मूलभूत मुद्दों पर तानाशाही तरीके से जाना ठीक नहीं होगा।”

हालाँकि, पाठक ने भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना भी साधा। उन्होंने ने कहा है कि यह भाजपा की कार्यशैली में शामिल है कि जब भी चुनाव आता है तो वह कॉम्प्लिकेटेड और कॉम्प्लेक्स मुद्दे लेकर आती है। पाठक ने आगे कहा कि भाजपा को UCC लागू करने से कोई लेना-देना नहीं है। वह सिर्फ कंफ्यूजन क्रिएट करती है, ताकि देश में खाई पैदा करके चुनाव लड़ा जा सके।

बताते चलें कि कॉन्ग्रेस सहित अधिकतर विपक्षी दलों ने समान नागरिक संहिता को लागू करने के खिलाफ बयान दे रहे हैं। दरअसल, पीएम मोदी ने मंगलवार (27 जून 2023) को भोपाल में UCC की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि जब एक परिवार में दो कानून से नहीं चल सकते। ऐसे में दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? उन्होंने आरोप था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर मुस्लिमों को भड़काया जा रहा है।  

बताते चलें कि AAP और कॉन्ग्रेस बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भाजपा के खिलाफ बनाई जा भी विपक्षी एकजुटता वाली पार्टी के हिस्से हैं। हालाँकि, बैठक के दौरान दिल्ली सेवा अध्यादेश पर AAP ने कॉन्ग्रेस से समर्थन माँगा था। इसके बाद दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे।

अब जिस UCC के खिलाफ कॉन्ग्रेस खड़ी दिख रही है, उसका APP ने समर्थन कर दिया है। इतना ही नहीं, AAP ने कहा कि वह दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। पाठक ने यह भी कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी लोगों को बताएगी की केंद्र का अध्यादेश उनके खिलाफ है।

भारतीय सेना में शामिल होंगी BJP सांसद रवि किशन की बेटी इशिता: ‘अग्निपथ योजना’ के तहत बनेंगी ‘अग्निवीर’, बतौर कैडेट 3 साल लिया है कड़ा प्रशिक्षण

भोजपुरी सुपरस्टार और भाजपा सांसद रवि किशन की बेटी इशिता शुक्ला ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भारतीय सेना का हिस्सा बनेंगी। जून 2022 में ही रवि किशन ने ट्वीट कर के बताया था कि उनकी बेटी ने उनसे कहा कि वो ‘अग्निवीर’ बनना चाहती हैं, जिसके बाद उन्होंने उसका उत्साहवर्धन किया। इशिता फ़िलहाल दिल्ली डायरेक्ट्रेट की 7 गर्ल्स बटालियन का हिस्सा हैं। वो पिछले 3 वर्षों से यहाँ सेवा दे रही हैं। रवि किशन ने ट्वीट कर के बताया था कि वो पिछले 3 वर्षों से कड़ी मेहनत कर रही हैं।

इस साल गणतंत्र दिवस से पहले अपनी बेटी की तस्वीरें शेयर करते हुए गोरखपुर के सांसद ने बताया था कि इशिता देश की सेवा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्होंने बताया था कि कैसे उनकी बेटी गणतंत्र दिवस परेड से पहले प्रशिक्षण के दौरान कड़े ठंड का सामना कर रही हैं और कोहरे के बावजूद लगी हुई हैं। इशिता शुक्ला ने भी इंस्टाग्राम कई कई तस्वीरें पोस्ट कर के बताया था कि कैसे बतौर कैडेट उन्हें काम करना होता था। इन तस्वीरों में वो यूनिफॉर्म में दिखाई देती हैं।

कई भाजपा नेताओं ने भी इस खबर के बाद तस्वीरें ट्वीट कर के रवि किशन को बधाई दी है, कइयों का रवि किशन ने जवाब भी दिया। इस खबर को रवि किशन ने खुद शेयर नहीं किया, लेकिन उन्होंने शुभकामनाओं का धन्यवाद दिया। रवि किशन की बड़ी बेटी रीवा किशन पिता के नक्शेकदम पर ही चल रही हैं और उन्होंने ‘सब कुशल मंगल (2020)’ से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। इन दोनों के अलावा रवि किशन के दो बेटे भी हैं, जिनके नाम हैं तनिष्क और सक्षम।

रवि किशन गोरखपुर से सांसद हैं। साथ ही वो भोजपुरी के शीर्ष अभिनेता भी रहे हैं। उन्होंने बॉलीवुड में भी नाम कमाया है। जहाँ तक ‘अग्निपथ योजना’ का सवाल है, नए नियमों के तहत अभ्यर्थियों को पहले ‘कॉमन इंटरेस्ट एग्जामिनेशन (CEE)’ देना होता है, जिसके बाद उनका फिजिकल फिटनेस व मेडिकल टेस्ट होता है। अग्निवीरों में से हर साल 25% को स्थायी नियुक्ति दी जाएगी, जबकि बाकियों को सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर तक नौकरियाँ मिलेंगी।