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सड़क पर पढ़ी नमाज तो होगी FIR: UP पुलिस ने बकरीद से पहले मस्जिदों पर चिपका दिया नोटिस, लाउडस्पीकर से ऐलान भी

सड़क पर नमाज पढ़ने से ना सिर्फ आम लोगों को भारी परेशानी होती है, बल्कि कानून-व्यवस्था की चुनौती भी खड़ी हो जाती है। अब बकरीद को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस प्रशासन ने मुस्लिमों से सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने की चेतावनी दी है। सड़क पर ईद की नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ प्रशासन मामला दर्ज करेगा।

ईद उल अजहा को देखते हुए पुलिस ने बुधवार (28 जून 2023) को मेरठ के सभी मस्जिदों पर प्रशासन का आदेश चस्पा किया है। आदेश में कहा गया है कि ईदगाह या मस्जिदों के बाहर नमाज अदा की गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल रिपोर्ट दर्ज की जाएगी और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसको लेकर मस्जिदों के मौलवियों का कहना है कि सरकार का जो आदेश है, उससे सभी लोगों को अवगत करा दिया गया है। उन्हें इसका पालन करना चाहिए। वहीं-वहीं, मेरठ शहर के अलग-अलग मस्जिद के मौलवियों, शहर के काजी सहित अन्य मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लोगों से सरकार के आदेश का पालन करने के लिए कहा है।

इससे पहले देवबंद स्थित दारुल उलूम मदरसा ने भी मुस्लिमों से अपील करते हुए कहा था, “हमारे बड़े बुजुर्गों ने हमेशा प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से मना किया है। इसलिए हर मुस्लिम इसका ख्याल रखें और प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से दूर रहे।” खुले में और सड़कों पर कुर्बानी नहीं करने के लिए भी कहा।

वहीं, यूपी के अमेठी में भी प्रशासन नेे इसी तरह की चेतावनी दी है। प्रशासन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं को साफ-साफ कहा है कि प्रतिबंधित पशुओं यानी गोवंश का किसी भी कीमत पर कुर्बानी नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही कुर्बानी बाहर या सार्वजनिक स्थानों पर भी करने से मना किया गया है।

अमेठी पुलिस लाउडस्पीकर के जरिए मुस्लिम समाज के लोगों और मौलवियों से अपील कर रही है कि नमाज किसी भी हालत में सार्वजनिक स्थानों पर नहीं होनी चाहिए। नमाज पर मस्जिदों या किसी परिसर में पढ़ने के लिए कहा गया है। सुरक्षा को देखते हुए अमेठी पुलिस को एक कंपनी PAC और 100 रिक्रूट एसआई दिए गए हैं।

बताते चलें कि मेरठ में हिंदूवादी नेता सचिन सिरोही ने ऐलान किया है कि यदि बकरीद के दिन सड़क पर नमाज अता की गई तो वे हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर बैठक हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ। इसको देखते हुए भी प्रशासन सतर्क हो गया है। गुुरुवार (29 जनवरी 2023) को देश भर में बकरीद मनाया जाएगा।

वहीं, भोपाल में सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि कुर्बानी का वीडियो सोशल मीडिया पर ना डालें। इसको लेकर मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में कहा गया है कि गैर-जरूरी तौर पर सड़कों पर नमाज अता न की जाए।

स्वीडन में फाड़ी और जलाई जाएगी कुरान, वो भी मस्जिद के सामने: कोर्ट और पुलिस ने दे दी है अनुमति, बकरीद के वक्त प्रदर्शन का ऐलान

स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मस्जिद के सामने कुरान जलाई जाएगी। वहाँ की पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को इसकी अनुमति भी प्रदान कर दी है। स्वीडिश पुलिस ने इस संबंध में जानकारी दी है कि मुस्लिमों के फेस्टिवल ईद-अल-अज़हा की शुरुआत के दिन बुधवार (28 जून, 2023) को प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद के सामने कुरान जलाने के लिए अनुमति माँगी थी। पुलिस ने अनुमति प्रदान करते हुए अपने आदेश में लिखा है कि सुरक्षा को लेकर वैसे खतरे नहीं हैं कि इस माँग को नकार दिया जाए।

पुलिस ने मौजूदा कानूनों के हिसाब से फैसला लिए जाने की बात कही है। इससे पहले पुलिस ने कुरान जलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन 2 सप्ताह पहले अदालत ने फटकार लगाते हुए पुलिस को अपना आदेश बदलने के लिए कहा। उस समय पुलिस ने सुरक्षा से जुड़े खतरों का हवाला दिया था। इससे पहले स्वीडन में तुर्की के दूतावास के बाहर कुरान जलाया गया था, जिसके बाद कई हफ़्तों तक दंगे थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

कई इस्लामी मुल्कों में स्वीडन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए वहाँ के उत्पादों के बहिष्कार की बात की गई। साथ ही NATO में स्वीडन की एंट्री को भी बाधित कर दिया गया। तुर्की ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीडन को रोकने का काम किया और कहा कि उसने कुर्द विद्रोहियों पर कार्रवाई नहीं की है। तुर्की कुर्द लड़ाकों को आतंकवादी मानता है। स्वीडन ने इसके बाद कुरान जलाने की दो माँगों को निरस्त किया – जहाँ एक माँग एक व्यक्ति ने की थी, वहीं एक संगठन भी ऐसा करना चाहता था।

इस साल फरवरी में ही तुर्की के साथ-साथ इराक के दूतावास के बाहर भी कुरान जलाने की माँग की गई थी। लेकिन, जून के मध्य में अदालत ने पुलिस के आदेश को नकारते हुए कहा कि सुरक्षा का कोई खतरा नहीं है। 37 वर्षीय सालवन मोमिका का कहना है कि स्टॉकहोम की बड़ी मस्जिद के सामने न सिर्फ कुरान को फाड़ा जाएगा, बल्कि इसे जलाया भी जाएगा। मस्जिद के पास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सुरक्षा बलों की कई कारण वहाँ पर हैं।

स्वीडन के कई राजनेताओं ने कुरान जलाए जाने का विरोध किया, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि यहाँ लोगों के पास अपनी अभिव्यक्ति के प्रदर्शन का अधिकार है। स्वीडन उत्तरी यूरोप में स्थित एक देश है, जो स्कैन्डिनेवियाई प्रायद्वीप में स्थित है। इसकी सीमाएँ नॉर्वे, फ़िनलैंड और डेनमार्क से लगती हैं। 1.1 करोड़ की जनसंख्या वाले इस देश के 52% लोग ‘चर्च ऑफ स्वीडन’ में आस्था रखते हैं। वहीं 8% जनसंख्या मुस्लिम है।

मौज में ‘डिजिटल जेहादी’ जुबैर, पर घर में कैद हैं नुपूर शर्मा: कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे के हत्यारों को साल भर बाद भी सजा नहीं

कन्हैया लाल तेली की हत्या को 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं। अब तक हत्यारों को सज़ा नहीं हो पाई है। फिर जिन्होंने हत्यारों को पनाह दी या उन्हें संसाधन दिए, उन्हें सज़ा की बात तो भूल ही जाइए। हम उस देश में रहते हैं, जहाँ एक ऐसे व्यक्ति को सज़ा देने में 4 साल लग गए। जो आतंकी 166 लोगों का खून बहाने में शामिल था, वो 4 साल तक भारत के जेल में बैठ कर अपनी मनपसंद किताबें पढ़ता रहा और मुँहमाँगे भोजन का आनंद उठाता रहा।

ठीक इसी तरह, कन्हैया लाल के हत्यारों को सज़ा अब तक नहीं मिल पाई है। बेटा नंगे पाँव है तो क्या हुआ, अस्थियाँ अब तक विसर्जन की बाट जोह रही हैं तो क्या हुआ, विधवा पत्नी दिन भर अपने पति की सिलाई मशीन को निहारती रहती है तो क्या हुआ, पुलिसकर्मियों की मर्जी के बिना परिजन चाय पीने तक बाहर नहीं जा सकते तो क्या हुआ, उदयपुर के मालदास स्ट्रीट बाजार का पूरा धंधा ही मंदा पड़ गया तो क्या हुआ, अपराधियों को अब तक सज़ा नहीं मिल पाई।

कैमरे पर हत्या, वीडियो में लहराए हथियार, अब तक सज़ा नहीं

कैमरे पर पूरे देश ने देखा कि कैसे कन्हैया लाल तेली का गला काटा गया। पूरे देश ने ये भी देखा कि कैसे हत्यारों ने हँसते हुए वीडियो बनाया और हथियार लहरा कर अपने कारनामे पर गौरव का इजहार किया। कैमरे में सब कुछ कैद होने के बावजूद अब तक हत्यारों को सज़ा न मिलना क्या ऐसे तत्वों को प्रोत्साहित नहीं करता? कैमरे के सामने ‘सर तन से जुदा’ करने वाले भी जब जेल में ऐश करते रहेंगे, तो क्या इससे उनकी कट्टर विचारधारा से प्रेरित होने वालों की संख्या नहीं बढ़ेगी?

इस घटना में तीसरा किरदार था निजाम का। निजाम पड़ोसी था कन्हैया लाल तेली का। नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण उसने कन्हैया लाल पर FIR दर्ज करा दी थी। इसके बाद कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की पुलिस ने कन्हैया लाल तेली को जेल में बंद कर दिया। जेल से निकलने के बाद पुलिस ने दोनों में तथाकथित सुलह करवाई। इसी निजाम ने कन्हैया लाल की रेकी की और हत्यारों को उनके बारे में सूचित किया।

उमेश कोल्हे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। राजस्थान के उदयपुर की तरह ही महाराष्ट्र के अमरावती में भी ‘सर तन से जुदा’ की घटना हुई थी। केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या करने वालों में उनका 16 वर्षों का दोस्त युसूफ खान का मुख्य हाथ था। युसूफ ने उमेश कोल्हे का पोस्ट इस्लामी कट्टरपंथियों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में फॉरवर्ड कर दिया। इसका सीधा अर्थ है कि वो आपके पड़ोसी हों या दोस्त, उनके मजहब की कट्टरता का उनके लिए पहला स्थान है।

व्यवस्था की सुस्ती तो हमने देख ली, अब व्यवस्था की सुषुप्तावस्था का उदाहरण देख लीजिए। मोहम्मद जुबैर – ये एक कुख्यात नाम है। वही AltNews वाला मोहम्मद जुबैर, जिसका दिन भर का काम ही है इस्लामी कट्टरपंथियों और पाकिस्तान का बचाव करना। उसका काम है कि लोगों को बताना कि तुमने क्रॉप्ड वीडियो शेयर किया है, तुमने बातों को ठीक से नहीं समझा, तुमने वीडियो के बाद या पहले वाला हिस्सा नहीं देखा, तुमने पुराना वीडियो शेयर किया।

इस ‘डिजिटल जिहादी’ की हिम्मत तो देखिए कि जब नूपुर शर्मा ने पूरा वीडियो डालने की चुनौती दी, तब ये जोकर वाले इमोजी लगा कर उन्हें चिढ़ाता रहा। जब नूपुर शर्मा हत्या की धमकियों को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रही थीं, तब ये खुद को पत्रकार बताते हुए उन्हें चिढ़ा रहा था। उन्हें ‘गुस्ताख़-ए-रसूल’ बताए जाने वाले ट्वीट्स को आगे बढ़ाता रहा। वो नूपुर शर्मा की बर्बादी की व्यवस्था कर के इसी के नाम पर अपने फॉलोवर्स से AltNews के लिए पैसे जुटाता रहा।

‘डिजिटल जिहादी’ मोहम्मद जुबैर, जिसने शेयर किया क्रॉप्ड वीडियो

जबकि सच्चाई ये है कि मोहम्मद जुबैर वही व्यक्ति है जिसने नूपुर शर्मा का एडिटेड वीडियो शेयर किया था। एक डिबेट में उन्होंने इस्लामी पुस्तक से उद्धरण भर दिया था, अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा था। क्यों उद्धरण दिया था? क्योंकि सामने ‘मुस्लिम स्कॉलर’ बना कर मीडिया चैनल द्वारा बैठाया गया तस्लीम रहमानी बार-बार भगवान शिव का अपमान कर रहा था। काशी विश्वनाथ विध्वंस का मजाक बना रहा था। शिवलिंग पर पाँव धोने वाले अपने मजहब के साथियों का साथ दे रहा था।

नूपुर शर्मा ने जवाब में सिर्फ बताया कि उसके मजहब की एक किताब में क्या लिखा हुआ है। ‘डिजिटल जिहादी’ मोहम्मद जुबैर ने नूपुर शर्मा का क्रॉप्ड वीडियो शेयर किया, फिर अपने गिरोह के साथ मिल कर क़तर जैसे इस्लामी मुल्कों को टैग करने लगा। देश भर में एक महिला के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ गिरोह नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतरा। कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई। और नूपुर शर्मा? उन्हें घर में कैद होने को मजबूर होना पड़ा।

इस प्रकरण के बाद से फिर नूपुर शर्मा को किसी डिबेट में नहीं देखा गया, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं देखा गया और न ही उनका राजनीतिक करियर आगे बढ़ पाया। नूपुर शर्मा का जीवन अब भी खतरे में है। और तस्लीम रहमानी? वो इस घटना के बाद भी बेधड़क टीवी डिबेट्स में बुलाया जाता रहा। उसका रवैया वैसा ही रहा। इस्लामी कट्टरपंथ वाला प्रोपेगंडा फैलाने में उसने कहीं कोई कमी नहीं की। उसके लिए जीवन और आसान हो गया।

पिछले 1 वर्ष में नूपुर शर्मा और तस्लीम रहमानी के जीवन का जो अंतर है न, वही मोहम्मद जुबैर जैसे ‘डिजिटल जिहादियों’ की सफलता है। कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे के परिवार की आज जो दुर्दशा है न, वही मोहम्मद जुबैर जैसे ‘डिजिटल जिहादियों’ का सुकून है। कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे के हत्यारों को तक सज़ा नहीं मिली है न, वही मोहम्मद जुबैर जैसे ‘डिजिटल जिहादियों’ का उत्साहवर्धन है। इस पूरे प्रकरण को जन्म देने वाला मोहम्मद जुबैर एक ‘डिजिटल जिहादी’ है।

तस्लीम रहमानी आज ईद-बकरीद दोगुनी ख़ुशी से मना रहा है, नूपुर शर्मा के लिए होली-दीवाली सब उदास रहा। तस्लीम रहमानी अबकी बकरीद पर भी इस्लामी कट्टरपंथियों का बचाव करता हुआ घूम रहा है, नूपुर शर्मा के लिए अगली दीवाली पर त्योहार की बधाई या शुभकामना सन्देश देना भी आफत है। एक तस्लीम रहमानी ऐसी कई नूपुर शर्माओं के जीवन को तबाह करने की क्षमता रखता है, क्योंकि उसके साथ एक ‘डिजिटल जिहादी’ है।

आज कन्हैया लाल तेली एक पोटली में बंद हैं, मोहम्मद जुबैर ‘डिजिटल जिहाद’ में दोगुने जोश के साथ लगा हुआ है। व्यवस्था की सुषुप्तावस्था देखिए कि जब जम्मू कश्मीर में एक मस्जिद से ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगे, तब इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और इस्लामी कट्टरपंथियों को इसे वास्तविकता में तब्दील करने में समय नहीं लगा। जब मुस्लिम भीड़ जम्मू के डोडा के भद्रवाह स्थित मस्जिद में इकट्ठी होकर कह रही थी कि अजान या नमाज का विरोध करने वालों को मार डाला जाएगा, उस समय क्या कार्रवाई हुई?

कहीं मस्जिद में नारे, कहीं पुतला टाँगा: सोई रही व्यवस्था

उस मस्जिद में इकट्ठी हुई भीड़ ने जब नारा लगाया कि नूपुर शर्मा का सिर कहीं और फेंका हुआ मिलेगा और धड़ कहीं और, तब उनमें से कितनों को पकड़ कर जेल की सलाखों के पीछे डाला गया? जब वो ललकार रहे थे कि ‘गाय का पेशाब पीने वालों की हैसियत क्या है’, तब कानून ने उन्हें इसके लिए एक बार फटकार तक भी लगाई? अरे, वहाँ मौजूद लोग तो उलटा कह रहे थे कि प्रशासन उनका साथ देता है, आशा है आगे भी ऐसे ही साथ देता रहेगा।

जब कर्नाटक के बेलगावी में नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी के फंदे पर टाँग दिया गया, तब कितने लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई? हत्या की धमकियों और रिहर्सल पर अगर व्यवस्था चुप रहेगी तो हत्या को कैसे रोका जा सकता है? एक महिला का पुतला बना कर लोगों में खौफ पैदा करने के लिए बीच सड़क पर टाँग दिया जाता है, कहीं कोई हलचल नहीं होती। यही कारण है कि एक के बाद एक हत्याएँ होती हैं और हत्यारों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता।

जले पर नमक छिड़कते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज टिप्पणी करते हैं कि नूपुर शर्मा के कारण पूरे देश में आग लगी हुई है और उन्हें राहत देने से इनकार कर देते हैं। सोचिए, इससे उन आतंकियों का मनोबल कितना बढ़ा होगा। न्यायपालिका ने कभी मोहम्मद जुबैर से पूछा कि उसने एडिटेड वीडियो क्यों शेयर किया? भारत के आंतरिक मामले में बाह्य हस्तक्षेप की माँग क्यों की? तस्लीम रहमानी ने क्या बोला था, ये क्यों छिपाया? नूपुर शर्मा ने जो कहा था, वो सच में किताब में लिखा है या नहीं?

‘डिजिटल जिहादी’ ने इसका फैक्ट-चेक करने की जहमत नहीं उठाई, क्योंकि ये उनके एजेंडे में था ही नहीं। लेकिन, न्यायपालिका कहाँ थी? नूपुर शर्मा को डाँटने-फटकारने वाली ये न्यायपालिका आज तक कैमरे के सामने हत्या करने वालों को सज़ा नहीं दे पाई, तो भविष्य में भला इनसे हम क्या उम्मीद रखें। मोहम्मद जुबैर द्वारा क्रॉप्ड वीडियो शेयर किया जाना, जम्मू के मस्जिद में नारा लगना और नूपुर शर्मा का पुतला टाँगा जाना – ये हत्याएँ तो तभी हो गई थीं क्योंकि ऐसा करने वालों को व्यवस्था की सुषुप्तावस्था पर पूरा यकीन था।

ओबामा हों या बायडेन… सबके पुरखों के पास थे अश्वेत गुलाम, डोनाल्ड ट्रंप एकमात्र अपवाद: अमेरिका के वर्तमान व पूर्व जीवित राष्ट्रपतियों की वंशावली पर राॅयटर्स की रिपोर्ट

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Tump) अमेरिका के इकलौते जीवित राष्ट्रपति हैं, जिनके पूर्वजों के पास गुलाम नहीं थे। हालाँकि, वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) और उनके सभी पूर्ववर्ती, जो अभी जीवित हैं, वे उन लोगों के वंशज हैं जिन्होंने अश्वेत लोगों को अपना गुलाम बनाया था। वहीं, अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बराक ओबामा भी इससे अछूते नहीं है।

अमेरिका न्यूज एजेंसी रॉयर्टस ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों के पूर्वजों द्वारा रखे गए गुलामों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। Slavery’s Descendants सीरीज में ‘अमेरिका के पॉलिटिकल एलिट क्लास’ के नाम से जारी डेटा में रॉयटर्स ने बताया है कि पाँच जीवित राष्ट्रपति, दो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, 11 गवर्नर और 100 सांसद ऐसे हैं, जिनके पूर्वजों ने अश्वेत लोगों को गुलाम बनाया था।

अमेरिका के जीवित राष्ट्रपतियों में डोनाल्ड ट्रंप को छोड़कर जिमी कार्टर, जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के पूर्वज गुलाम रखते थे। दरअसल, बराक ओबामा की माँ श्वेत अमेरिकी थी और उनके परिजन गुलाम रखते थे। इसलिए ओबामा भी इनसे अलग नहीं हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के पूर्वज 1865 में गुलामी ख़त्म होने के बाद अमेरिका आए थे।

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप के दादा-दादी का जन्म दक्षिण-पश्चिमी जर्मनी के एक छोटे से शहर कल्स्टेड में हुआ था। वे 1900 की शुरुआत में अमेरिका गए थे। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की माँ मैरी का जन्म स्कॉटलैंड में हुआ था। इसलिए वे अश्वेत लोगों की गुलामी, उत्पीड़न की क्रूर व्यवस्था के हिस्सा नहीं है। इस व्यवस्था के कारण अमेरिका के इतिहास में सबसे घातक संघर्ष हुआ था।

अगर गुलामों संख्या की बात करें तो जिमी कार्टर के पूर्वजों ने 54 गुलाम रखे थे। वहीं, जॉर्ज बुश के पूर्वजों ने 25, बराक ओबामा के पूर्वजों ने दो, बिल क्लिंटन और जो बाइडेन के पूर्वजों ने एक-एक गुलाम रखे थे। अमेरिका के वर्तमान में कम-से-कम 28 प्रतिशत रिपब्लिकन और 8 प्रतिशत डेमोक्रेट ऐसे हैं, जिनके पूर्वजों ने गुलाम रखा था।

वहीं, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के नौ मौजूदा न्यायाधीशों में से दो – एमी कोनी बैरेट और नील गोरसच के प्रत्यक्ष पूर्वजों ने लोगों को गुलाम बनाया था। साल 2022 के अनुसार, अमेरिका के 50 राज्यों में से 11 के वर्तमान गर्वनरों के पूर्वजों ने गुलाम रखे थे। इन 11 गवर्नरों में से 8 के पूर्वजों ने कॉन्फेडरेट स्टेट्स ऑफ अमेरिका का गठन किया था और गुलामी को बनाए रखने के लिए युद्ध छेड़ दिया थी।

वहीं, अमेरिकी कॉन्ग्रेस के दो अश्वेत सदस्य- टिम स्कॉट और जेम्स क्लाइबर्न के पूर्वज गुलाम थे। टिम स्कॉट सीनेटर हैं और रिपब्लिकन पार्टी से अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे हैं। वहीं, अश्वेत सीनेटर जेम्स क्लाइबर्न एक प्रभावशाली डेमोक्रेट हैं। इनके भी पूर्वज गुलाम थे।

दक्षिण कैरोलिना के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के परदादा जोसेफ मैडॉक्स की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति की बिक्री की रसीद तैयार की गई थी। दिनांक 1 फरवरी 1845 को तैयार रसीद में उन आठ लोगों की बिक्री को दिखाया गया है, जिन्हें मैडॉक्स ने गुलाम बनाया था। इन आठ लोगों में 5 बच्चे भी थे: सेला, रुबिन, जेम्स, साल और ग्रीन। मैडॉक्स काल ‘नीग्रो आदमी सैम’ $155.25 में बेचा गया था। उनके नाम पर एक सॉरल घोड़ा ($10.50) और एक फोल्डिंग टेबल ($9.87) सहित वस्तुएँ सूचीबद्ध थीं।

दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर नैन्सी मेस की परदादी ड्रूसिला मेस का बेटा जॉन मेस ने भी गुलाम रखे थे। मुक्ति संग्राम के दशकों बाद एक पूर्व गुलाम व्यक्ति ने एक साक्षात्कार में बताया गया था कि उसे जॉन मेस के लिए काम करने के लिए कहा गया था, जिसने 1860 में सात लोगों को गुलाम बनाया था।

इलिनोइस के डेमोक्रेट सीनेटर टैमी डकवर्थ के परदादा हेनरी कोए ने 1829 में अपनी संपत्ति के मूल्यांकन में गुलामों के नाम और उनके मूल्यांकित डॉलर जिक्र किया था। इसके अलावा, उन्होंने अपने खेत और जानवरों के बारे में बताया था, जिनमें सात भेड़, एक मेमना और एक बछड़ा शामिल था।

सबसे धनी गुलाम धारकों में से एक रिचर्ड सेशंस थे, जो टेक्सास के रिपब्लिकन प्रतिनिधि पीट सेशंस के परदादा थे। रिचर्ड सेशंस के पास दक्षिण की सबसे उपजाऊ भूमि में से लगभग 770 एकड़ भूमि थी। 1860 तक 43 वर्षीय सेशंस अमेरिका के सबसे अमीर 1% लोगों में शामिल थे। चिकोट काउंटी में उनकी ज़मीन की कीमत $75,000 थी।

उनकी व्यक्तिगत संपत्ति – जो मुख्य रूप से मानव संपत्ति में मापी जाती है, $200,000 से कहीं अधिक थी। एक गणना के अनुसार आज के पैसे में यह मूल्य $113 मिलियन (927 करोड़ रुपए) थी। उनके पास सबसे अधिक 96 गुलाम थे। ये गुलाम उनकी जमीन पर काम करते थे और उनके परिवार का ख्याल करते थे।

130 फीट लंबी, बड़े-बड़े स्तन, चमक के आगे सूरज भी फेल: जानिए जन्नत में मिलने वाली ’72 हूरें’ के बारे में क्या बताते हैं मौलाना

अल्लाह के घर यानी जन्नत में बहुत सारी हूरें मिलेंगी। वहाँ बीवी का क्या कामA अल्लाह के घर जाना है तो सबको छोड़ना होगा।

2022 की ही बात है जब गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाले अहमद मुर्तजा अब्बासी ने पूछताछ के दौरान आतंकवाद.निरोधक दस्ते (ATS) के एक सवाल के जवाब में यह बात कही थी। कथित तौर पर जन्नत में 72 हूरें मिलती हैं। अब जन्नत की हूर एक फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म का नाम है- 72 हूरें  (72 Hoorain)। इस्लामी आतंकवाद की पोल खोलती इस फिल्म के ट्रेलर को सर्टिफिकेट देने से सेंसर बोर्ड ने इनकार कर दिया है। यह फिल्म उस मिथक को तोड़ने के लिए बनाई गई है जिसके तहत आतंक के आका काफिरों को मारने और जिहाद के लिए मुस्लिम युवकों को जन्नत और 72 हूरों का लालच देते हैं।

जन्नत में मिलने वाली कथित हूरों की मौलाना बेहद दिलचस्प व्याख्या करते हैं। इनकी खूबसूरती ऐसी बताई जाती है जिसकी चमक के आगे सूरज भी फेल होता है। 130 फीट तक लंबाई बताई जाती है। यह भी दावा किया जाता है कि हूर को शौच-पेशाब तक नहीं लगता। वे जन्नत पाने वालों के साथ हमबिस्तरी करती हैं।

कैसे पैदा होती हैं 72 हूरें

पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील का एक वीडियो है। इसमें वह बताता है कि जन्नत में बईदक नाम का एक नहर है। यह नहर मोतियों से कवर है। इसी नहर से हूर पैदा होती हैं। मौलाना के अनुसार, “बईदक में मुसकामबर जाफ़रान का हूर बहता है। जब अल्लाह किसी जन्नत की लड़की को बनाने का हुक्म फरमाता है तो अपने नूर की तजल्ली डालता है। पूरी 130 फीट की लड़की निकल कर बाहर आ जाती है। फुल ड्रेस्ड।” मौलाना जमील के अनुसार, “जन्नत की लड़की सिर्फ सूरज को ऊँगली दिखा दे तो सूरज नजर नहीं आएगा, क्योंकि जन्नत की हूर का साइज 130 फ़ीट है। उसके इतने लम्बे बाल होते हैं कि जब सर हिलाती है तो पूरे जन्नत में सर्च लाइट जल जाती है।”

‘हूर को पेशाब-शौच नहीं लगती’

इसी तरह केरल के मौलाना ईपी अबूबकर कासमी का भी एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें मुस्लिम होने के फायदा गिनाते हुए वह जन्नत में मिलने में मिलने वाली महिलाओं के बारे में बताता है। कहता है उन महिलाओं के ‘बड़े-बड़े स्तन’ होते हैं। उसके अनुसार, “जन्नत में शराब की नदियाँ बहती हैं। बड़े-बड़े बँगलों के साथ बाग़ बगीचे की सुविधा मिलती है। अल्लाह के जन्नत में जो महिलाएँ होती हैं वो न तो पेशाब करती हैं और न ही उन्हें शौच करने की कभी ज़रूरत पड़ती है। जन्नत जाने वाले मुस्लिमों को वहाँ की हूरों की गोद में बैठना नसीब होता है।”

‘हूरों का दबा कर जैसे चाहो इस्तेमाल करो’

हूर की शान में कसीदे पढ़ने वाला केरल के एक अन्य मौलाना का वीडियो भी सोशल मीडिया में नजर आता है। बीवियों को ‘मैली-कुचैली’ बताते हुए ये मौलवी कहता है, “जन्नत में जो कम दर्जे की हूर होंगी उनकी आँखें खूबसूरत और गुलाबी होंगी। वो तकिया लगा कर तुम्हारे इंतजार में बैठी होगी। कपड़ों में से उन हूरों का गुदा तक नजर आएगा। आपका दिल उनके लिए आइना होगा, जिसे देख कर वो सजेगी-सँवरेगी। हूर केवल चूमने के लिए नहीं मिलेगी, बल्कि हमबिस्तरी भी करेगी। एक-एक मर्द को 100-100 मर्दों की ताकत अल्लाह देंगे। हूरों का दबा कर जैसे चाहो इस्तेमाल करो। एक से पेट भरेगा तो दूसरी आ जाएगी और वो ज्यादा सुंदर होगी।”

बकरीद पर हलाल करने के लिए बकरों को लेकर सोसायटी में आ गया मोहसिन शेख, विरोध में हनुमान चालीसा पाठः मुंबई की घटना, 11 पर FIR

बकरीद से पहले मुंबई में एक मुस्लिम व्यक्ति हलाल करने के लिए 2 बकरे लेकर आया, लेकिन इससे आसपास के लोग आक्रोशित हो गए। मीरा रोड पर स्थित हाउसिंग सोसाइटी के लोगों ने विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रदर्शन भी किया। इस प्रकरण का CCTV फुटेज भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि मोहसिन शेख नाम का व्यक्ति दो बकरे लेकर आया, जिससे सोसाइटी वाले नाराज़ हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में वहाँ लोग जमा हो गए।

मोहसिन शेख का दावा है कि महाराष्ट्र की राजधानी स्थित उक्त हाउसिंग सोसाइटी में 200-250 मुस्लिम परिवार रहते हैं। उसने दावा किया कि रेजिडेंशियल सोसाइटी का जो बिल्डर है, उसने हर साल बकरे रखने के लिए मुस्लिमों को अलग से जगह दी हुई है। हालाँकि, इस साल बिल्डर ने पहले सोसाइटी के बाशिंदों से इस संबंध में पूछने के लिए कहा। उसने पहले की तरह बकरों के लिए अलग से जगह देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद मोहसिन खान बकरे लेकर आ गया।

मोहसिन शेख का कहना है कि सोसाइटी ने जब उसे बकरे रखने वाली जगह का इस्तेमाल करने से मना कर दिया, तब वो बकरों को लेकर घर आ गया। अब मोहसिन शेख कह रहा है कि वो हाउसिंग सोसाइटी के परिसर में बकरों को हलाल नहीं करने जा रहा था, उसकी ऐसी कोई योजना नहीं थी। इसके बाद मुंबई पुलिस को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने सोसाइटी के बाशिंदों को आश्वासन दिया कि परिसर में पशु हत्या की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इसके बाद सोसाइटी वाले शांत हुए। नियम के हिसाब से भी रेजिडेंशियल सोसाइटी के परिसर में पशु हत्या नहीं की जा सकती। पुलिस ने चेताया है कि अगर मोहसिन शेख ने नियम का उल्लंघन करने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मोहसिन शेख ने हाउसिंग सोसाइटी से अपने बकरों को हटाया। ये घटना मंगलवार (27 जून, 2027) की है, जब लोगों ने प्रदर्शन शुरू किया। इस मामले में 11 लोगों पर FIR दर्ज की गई है।

बेंगलुरु और कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट का मुख्य आरोपित, पर मुस्लिमों के लिए ‘हीरो’: केरल में अब्दुल नसीर मदनी का भव्य स्वागत

कई बम धमाकों के आरोपित और संदिग्ध आतंकी अब्दुल नसीर मदनी (Abdul Nasir Madani) का मंगलवार (27 जून 2023) को केरल में मुस्लिम समुदाय द्वारा जबरदस्त स्वागत किया गया। इतना ही नहीं, एक हीरो की तरह उसके वहाँ पहुँचने का मीडिया द्वारा लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है। मदनी केरल के पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) का अध्यक्ष है और बंगलुरु और कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट का आरोपित है।

अब्दुल नसीर मदनी साल 1998 में हुए कोयंबटूर बम ब्लास्ट केस और साल 2008 के बंगलुरु में हुए सीरियल बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपित है। इन बम धमाकों में 58 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। आज भी उन बम धमाकों को याद करके लोग सिहर उठते हैं।

पूर्व पुलिसकर्मी भास्कर राव ने रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए कहा कि एक आरोपित आतंकवादी का जो स्वागत हुआ वह ‘शर्मनाक’ था।

दरअसल, पीडीपी नेता और संदिग्ध आतंकी को बेंगलुरु पुलिस ने कोच्चि लाया था। इससे पहले 18 अप्रैल 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल नासिर मदनी की जमानत शर्तों को संशोधित करते हुए उसे 8 जुलाई 2023 तक केरल में रहने की अनुमति दी थी।

जस्टिस अजय रस्तोगी और बेला त्रिवेदी की बेंच ने कहा था कि यह मदनी की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए अंतरिम उपाय के रूप में मदनी 8 जुलाई 2023 तक की अवधि के लिए कर्नाटक पुलिस की एस्कॉर्ट के साथ केरल जा सकता है और उसी तरीके से वापस लौट सकता है।

दरअसल, मदनी ने अपनी जमानत आवश्यकताओं में छूट के लिए शीर्ष अदालत में आवेदन किया था, ताकि वह अपने मूल राज्य केरल जा सके। इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई 2023 को होगी। वहीं, कर्नाटक पुलिस द्वारा प्रदान किए जाने वाले एस्कॉर्ट का भुगतान खुद मदनी को करना होगा।

मदनी बेंगलुरु से सोमवार (26 जून 2023) की शाम 6 बजे की फ्लाइट पकड़ी और शाम 7 बजे के आसपास कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचा। बेंगलुरु हवाई अड्डे से मीडिया से बात करते हुए मदनी ने कहा कि उसकी सुरक्षा के लिए कर्नाटक पुलिस को कितनी राशि देनी है, इसका अभी तक उसे पता नहीं है।

मदनी ने दावा किया कि वह कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। उसने कहा, “मेरी किडनी कमजोर है और मुझे जल्द ही डायलिसिस कराना पड़ सकता है। मस्तिष्क में रक्त संचार ठीक से न होने के कारण कभी-कभी मुझे स्ट्रोक का भी सामना करना पड़ता है। जब अदालत ने मुझे अप्रैल में एक महीने के लिए केरल जाने की इजाजत दी तो मुझे उम्मीद थी कि मैं मेडिकल जाँच और उचित इलाज करा सकूंगा, लेकिन अब यह संभव नहीं है।”

बताते चलें कि साल 2009 में बांग्लादेश सीमा से लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में दोनों न बेंगलुरु विस्फोट सहित कई बम धमाकों की जानकारी दी थी। इसके बाद कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में धमाकों से मदनी के तार भी जुड़े होने का पता चलने पर कर्नाटक पुलिस ने उसे अगस्त 2010 में गिरफ्तार कर लिया था।

दरअसल, 25 जुलाई 2008 को कर्नाटक के बेंगलुरु में कुल 9 विस्फोट हुए थे, जिनमें 20 लोग घायल हो गए थे और 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी। बम विस्फोटों की शुरुआत होसूर रोड से मैसूरु रोड पर नयंदहल्ली तक हुई थी। इससे राजधानी के लोगों में दहशत फैल गई थी। कम तीव्रता वाले इन धमाकों को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में अंजाम दिए गए थे।

इन धमाकों में मदनी के रोल की बात करते हुए बेंगलुरु शहर के तत्कालीन कमिश्नर शंकर बिदारी ने कहा, “मदनी ने SIMI समूह को इन विस्फोटों को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया था, लेकिन उसका आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से कोई संबंध नहीं था और उसे केरल से पकड़ा गया था। मदनी ने दूसरों को विस्फोट करने के लिए उकसाया था। उसी ने यह सब योजना बनाई थी और साजिश रची थी।”

पूर्व पुलिस आयुक्त के अनुसार, इन धमाकों का उद्देश्य उस साल कर्नाटक में बनी भाजपा सरकार को अस्थिर करने के लिए किया गया था। इसके अलावा, फरवरी 1998 के कोयंबटूर बम विस्फोट मामले में मदनी को एक आरोपी व्यक्ति के रूप में शामिल किया गया था। उसे मार्च 1998 में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 2007 में बरी कर दिया गया था।

मदनी ने 1989 में पीडीपी के अलावा इस्लामिक सेवा संघ की स्थापना की थी। इस्लामी सेवा संघ को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए साल 1992 में बैन कर दिया गया था। मदनी पर बाबरी विध्वंस के बाद समाज में नफरत फैलाने और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया था।

‘एक नहीं, दो नहीं, 72 हूरें’: सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट देने से इनकार, कहा- ‘कुरान का’ हटाओ; मेकर्स ने डिजिटली जारी किया ट्रेलर

अशोक पंडित की फिल्म ’72 हूरें’ को सर्टिफिकेट देने से सेंसर बोर्ड ने इनकार कर दिया, जिसके बाद संस्था का खासा विरोध हो रहा है। ‘सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC)’ के अध्यक्ष प्रसून जोशी की भी लोग आलोचना कर रहे हैं। अशोक पंडित ने बताया कि एक लाश का पाँव इसमें दिखाया गया है, सेंसर बोर्ड ने जिसे हटाने के लिए कहा। साथ ही कुरान का एक रेफरेंस भी हटाने को कहा गया है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं जब भगवान श्रीराम, हनुमान और लक्ष्मण के अलावा माँ सीता को लेकर बनी फिल्म ‘आदिपुरुष’ में देवी-देवताओं को लेकर आपत्तिजनक संवाद और दृश्य पास हो गए, फिर ’72 हूरें’ को लेकर ही क्रिएटिव फ्रीडम का मर्दन क्यों? पशुहित के नाम पर भी एक दृश्य को हटाने के लिए कहा गया है, लेकिन निर्माताओं को इससे कोई समस्या नहीं है। अशोक पंडित ने कहा कि ये नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म है और इसे सर्टिफिकेशन सेंसर बोर्ड ने ही दिया था।

अशोक पंडित ने पूछा कि ट्रेलर में फिल्म के ही तो दृश्य हैं, फिर इससे समस्या क्यों? उन्होंने ऐलान किया कि इसके बावजूद ट्रेलर को डिजिटल रूप से रिलीज कर दिया गया है। पहले इसे PVR में रिलीज करने की योजना थी, लेकिन अब अँधेरी के एक क्लब में ये कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि वो सेंसर बोर्ड की पोल खोलेंगे, राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली एक फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के लिए सर्टिफिकेट न देना गंभीर मुद्दा है।

IFFI में भी ’72 हूरें’ को पैनोरमा सेक्शन में अवॉर्ड मिला है। अशोक पंडित ने कहा कि सेंसर बोर्ड में कुछ बाहर के लोग बैठे हुए हैं, प्रसून जोशी को इसका जवाब देना होगा। बता दें कि फिल्म को पहले ही सेंसर बोर्ड हरी झंडी दिखा चुका है। निर्माताओं ने अब केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। संजय पूरन सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो चुका है।

अशोक पंडित ने कहा, “आप विडम्बना देखिए। फिल्म में जो दृश्य है, उसे ट्रेलर में नहीं चाहिए। कुर्सी पर बैठने वालों के विरोधाभास का हम विरोध कर रहे हैं। ये फिल्म किसी भी धर्म या इंसानियत के खिलाफ नहीं है। ये आतंकवाद के खिलाफ है। जो कंटेंट्स फिल्म में हैं, वो ट्रेलर में क्यों नहीं हो सकते?” एक महिला पत्रकार ने जब प्रोपेगंडा बताया तो अशोक पंडित ने उसे करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिन फिल्मों को देश-विदेश में करोड़ों लोगों ने स्वीकार किया, उसकी इंटेलिजेंस पर आप सवाल उठा रहे हो?

काँवड़ यात्रा के मार्ग पर न बिके मांस; रास्ते में खाने-पीने से लेकर लाइट की हो पूरा इंतजाम… CM योगी का अधिकारियों को आदेश- नदी के किनारे तैनात किए जाएँ गोताखोर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने 4 जुलाई 2023 से शुरू हो रहे सावन माह में प्रशासन को काँवड़ यात्रियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखने के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को यात्रा के मार्ग पर साफ़-सफाई और लाइट के साथ-साथ काँवड़ियों को पीने के लिए साफ़ पानी और खाने के लिए अच्छी क्वालिटी का खाना जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश गया है। यात्रा मार्ग पर मांस की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (27 जून 2023) को विभिन्न जिलों के DM और SP के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “काँवड़ यात्रा मार्ग पर कहीं भी खुले में मांस आदि की खरीद-बिक्री न हो। यात्रा मार्ग पर स्वच्छता-सैनिटाइजेशन की व्यवस्था रहे। स्ट्रीट लाइट की सुविधा हो। गर्मी तेज है। ऐसे में मार्ग में पीने के पानी की व्यवस्था भी कराई जाए। जहाँ खाद्य शिविर लगें, वहाँ खाद्य सामग्री गुणवत्ता की टीम जाँच जरूर करे।”

मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि गाँव या शहर, कहीं भी पर्व-त्योहारों के दौरान बिजली की आपूर्ति सुचारु रखी जाए। कहीं से भी अनावश्यक कटौती की शिकायत न आने पाए। अधिकारियों द्वारा इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। इसी के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए और किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका को समाप्त करने के लिए काँवड़ यात्रा के मार्ग पर जर्जर बिजली के खम्भे, झूलते-लटकते बिजली के तारों आदि को ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।

पिछले वर्ष काँवड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए इस बार वाराणसी सहित प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए कहा गया है। नदी के किनारे गोताखोरों को तैनात करने के साथ काँवड़ यात्रा मार्ग पर CCTV कैमरे से निगरानी रखने के निर्देश दिए गए है। काँवड़ियों की सुविधा के लिए लगने वाले शिविरों को अभी से चिन्हित करने के लिए कहा गया है।

कन्हैया लाल को बचाने दौड़े थे राजकुमार, आज भी शरीर बेजान: खुद से पानी भी नहीं पी पाते, सपने में भी गला काटते दिखते हैं रियाज और गौस मोहम्मद

28 जून 2022। राजस्थान के उदयपुर में मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने कन्हैया लाल तेली (Kanhaiya lal murder) का गला उनकी दुकान में घुसकर काट दिया था। इस बर्बर हत्या के मुख्य चश्मदीद हैं राजकुमार शर्मा (Rajkumar Sharma)। राजकुमार उस दिन भी कन्हैया लाल को बचाने दौड़े थे। इस्लामी कट्टरपंथी हत्यारों ने उन पर भी हमला किया था जो खाली चला गया। लेकिन इस हत्या ने राजकुमार के भीतर जो खौफ पैदा किया, उन्होंने जिस मानसिक तनाव को झेला उसके कारण आज भी उनका शरीर बेजान है।

राजकुमार को लकवा मार चुका है। वे बिस्तर से उठ नहीं पाते। बोलने में दिक्कत होती है। खुद से पानी तक पी नहीं पाते। उनके परिवार के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना भी मुश्किल हो चुका है। जिस बेटी की शादी सालभर पहले हो जानी तय थी, वह आज तक नहीं हो पाई है। राजकुमार शर्मा और उनके परिवार की यह स्थिति दैनिक भास्कर के निखिल शर्मा की रिपोर्ट से सामने आई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राजकुमार उस बर्बर हत्या को आज तक भूल नहीं पाए हैं। उनके सपने में मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद गला काटते दिखते हैं। कन्हैया लाल की खून से लथपथ लाश दिखती है। खौफ ऐसा है कि घर पर लगी नेमप्लेट से अपना नाम मिटा दिया है। अनजान नंबर से काॅल आता है तो परिवार के लोग डर जाते हैं।

राजकुमार की पत्नी पुष्पा ने दैनिक भास्कर को बताया, “बेटी 25 साल की हो गई है। सालभर पहले शादी होनी थी। वो टल गई। अब पता नहीं कब होगी। 20 साल का बेटा नौकरी करता है। उसकी 11 हजार रुपए की सैलरी में किसी तरह घर का खर्चा चलता है।” राजकुमार ने अपनी टूटी-फूटी आवाज में बताया, “न खड़ा हो सकता हूँ, न बैठ सकता हूँ। हालत खराब हो गई है। बार-बार दिमाग में वही सीन घूमता है। सोता हूँ तो वही सपने आते हैं। दो ऑपरेशन हुए। डॉक्टर ने कहा था कि नस काम करेगी तो दूसरा साइड काम करने लगेगा। लेकिन अभी तक कुछ काम नहीं कर रहा।”

कन्हैया लाल की हत्या से पहले राजकुमार टेलर की दुकान में काम करने के अलावा पार्ट ऑनलाइन फूड डिलिवरी भी किया करते थे। सरकार से आज भी सुरक्षा मिली हुई है। 5 लाख की आर्थिक मदद भी मिली थी। सारे पैसे खर्च हो चुके हैं। अब न सरकारी मदद है और न सामाजिक। कथित तौर पर रिश्तेदारों ने भी मुँह मोड़ लिया है। उल्लेखनीय है कि बीते साल अक्टूबर में राजकुमार को ब्रेन हेमरेज हो गया था। उसके बाद उदयपुर के एमबी अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ था।

इधर राजकुमार का परिवार चमत्कार की प्रतीक्षा में है। वे किसी तरह स्वस्थ हो जाएँ। उनकी जिंदगी पहले की तरह सामान्य हो जाए। इधर कन्हैया लाल का बेटा आज भी न्याय की इंतजार में नंगे पैर है। उनका परिवार भी खौफ में जी रहा है। सालभर बाद भी उदयपुर के उस बाजार में सन्नाटा है जहाँ कन्हैया लाल का गला काटा गया था। डर से घरों में बाहर से ताला लगाकर लोग भीतर कैद रहते हैं।