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जब एक परिवार ने कर दी लोकतंत्र की हत्या… PM मोदी ने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष करने वालों को याद किया, इमरजेंसी के 48 साल पूरे होने पर BJP मना रही ‘काला दिन’

इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस की सरकार ने साल 1975 में आज ही के दिन यानी 25 जून को देश में आपातकाल की घोषणा की थी। लोकतंत्र के सबसे काले अध्यायों में एक माने जाने वाले आपातकाल 48 वर्ष बीत चुके हैं। 21 महीने तक लागू इमरजेंसी के दौरान कॉन्ग्रेस सरकार ने लगभग एक लाख राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया था।

आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होने वाले लोगों में आम नागरिक से लेकर मीडियाकर्मी, बुद्धिजीवी और राजनीतिक विरोधी थे। इस दौरान राजनीतिक विरोधियों पर आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (MISA) के तहत कार्रवाई होती थी। इस कानून के तहत गिरफ्तार आरोपितों की सुनवाई अदालत में नहीं हो सकती थी। वहीं, आम नागरिकों के भी सारे अधिकार छीन लिए गए थे।

कहा जाता है कि देश में आपातकाल लागू करने में पाँच लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इनमें इंदिरा गाँधी, उनके बेटे संजय गाँधी, राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद, हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल और स्वतंत्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते एवं पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे शामिल हैं। कहा जाता है कि सिद्धार्थ शंकर रे ने ही इंदिरा गाँधी को आपातकाल लगाने की सलाह दी थी।

आपातकाल की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, अमित मालवीय सहित तमाम नेताओं ने इसे लोकतंत्र के काला दिन के रूप में याद किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “मैं उन सभी साहसी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ, जिन्होंने आपातकाल का विरोध किया और हमारी लोकतांत्रिक भावना को मजबूत करने के लिए काम किया। #DarkDaysOfEmergency हमारे इतिहास में एक अविस्मरणीय अवधि है, जो हमारे संविधान द्वारा मनाए गए मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है।”

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आपातकाल को आज 48 साल बाद भी एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है। रातों रात जिस तरह संविधान को ताक पर रखते हुए आपातकाल लगाया गया वह सत्ता के दुरुपयोग, मनमानी और तानाशाही का आज भी सबसे बड़ा उदाहरण है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे लिए 25 जून का यह दिन इसलिए महत्वपूर्ण है कि हम आपातकाल के इस कालखंड को कभी न भूलें और अपने लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने का दृढ़ संकल्प बनाये रखें, ताकि फिर कभी कोई आपातकाल दोहराने की ख्याल भी अपने मन मे न लाए।”

वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा, “आज ही के दिन 1975 में एक परिवार ने अपने हाथ से सत्ता निकलने के डर से जनता के अधिकारों को छीन व लोकतंत्र की हत्या कर देश पर आपातकाल थोपा था। अपने सत्ता-स्वार्थ के लिए लगाया गया आपातकाल, कॉन्ग्रेस की तानाशाही मानसिकता का प्रतीक और कभी न मिटने वाला कलंक है। उस कठिन समय में अनेक यातनाएँ सहकर लोकतंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए लाखों लोगों ने संघर्ष किया। मैं उन सभी देशभक्तों को दिल से नमन करता हूँ।”

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पीएम मोदी के एक कथन को साझा करते हुए लिखा, “विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखने के लिए तानाशाही आपातकाल का प्रखर विरोध करने वाले सभी हुतात्माओं को नमन। #DarkDaysOfEmergency

भाजपा नेता अमित मालवीय ने आपातकाल के दौर के अत्याचारों को बताने वाला एक वीडियो शेयर किया है। इसमें आपातकाल का विरोध करने वाले बिहार के लोगों के साथ किस तरह क्रूर तरीके अपनाए गए थे, उसका जिक्र किया गया है।

इस वीडियो में बताया गया है कि आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी की सरकार ने विरोधियों पर इतना अत्याचार किया कि अंग्रेजों की कालापानी की सजा भी कम नजर आती थी। इस दौरान सबसे अधिक छात्र संगठनों को परेशान किया गया और उनके नेताओं को जेलों में डालकर छात्र संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

इतना ही नहीं, किश्तैया गौड़ और भूमैया को फाँसी दे दी गई। जॉर्ज फर्नांडिस के भाई को इतना मारा गया कि वे वर्षों तक सीधे खड़ा नहीं हो पाए। गर्म तवे और बर्फ की सिल्लियों पर लिटाकर सत्याग्रहियों पीटा जाता था। उनकी अंगुलियों पर कुर्सी रखकर उस पर बैठा जाता था। बेहोश होने तक चाबुक से मारा जाता था। जय प्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर इतना तड़पाया गया कि उनकी किडनी खराब हो गई।

भाजपा हर साल 25 जून को लोकतंत्र का काला दिवस के रूप में मनाती है। भाजपा ने इंदिरा गाँधी द्वारा देश में की गई आपातकाल की घोषणा वाला ऑडियो वाला वीडियो शेयर करते हुए कहा, “आपातकाल… लोकतंत्र का काला अध्याय! कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर देश की आत्मा को कुचलने का काम किया। #DarkDaysOfEmergency

बताते चलें कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक देश में आपातकाल लागू था। इन दौरान मीडिया को प्रतिबंधित कर दिया गया था। न्यायपालिका पर अंकुश लगा दिया गया था। जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता था, उसे जेलों में डाल दिया जाता था। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी।

क्यों लगा था आपातकाल

साल 1971 के लोकसभा चुनावों में इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस भारी बहुमत से जीतकर आई थी। इंदिरा गाँधी खुद भारी अंतर से जीती थीं। यूपी के बरेली से इंदिरा गाँधी की जीत पर सवाल उठाते हुए संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की ओर से उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी राज नारायण सिंह ने 1971 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

राजनारायण सिंह ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि इंदिरा गाँधी ने चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया है। इसके बाद मामले की सुनवाई हुई इंदिरा गाँधी के चुनाव को निरस्त करते हुए कोर्ट ने उन पर किसी भी पद पर रहने के लिए 6 साल का प्रतिबंध लगा दिया।

इसके बाद 25 जून 1975 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए थे। जयप्रकाश ने इसमें नारा दिया कि ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’। इसके बाद शाम तक आपातकाल लागू कर दिया गया और जेपी सहित अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी एवं सभी विपक्षी दलों के नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।

राजू बन फारूख ने दलित युवती को फँसाया, प्यार का वास्ता देकर माँस खिलाया: सच खुलने पर धर्मांतरण का दबाव, वीडियो वायरल करने की धमकी

मध्य प्रदेश के दमोह की एक दलित लड़की का कर्नाटक के बेंगलुरु में धर्मान्तरण के प्रयास का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पीड़िता पर जादू-टोना करने के साथ वशीकरण ताबीज भी पहनाई गई थी। वहीं आरोपित फारुख पर राजू नाम रख कर पीड़िता को नौकरी का झाँसा दे कर अपने जाल में फँसाने का आरोप है। फारुख भगोड़े आतंकी ज़ाकिर नाइक का फॉलोवर बताया जा रहा है। गुरुवार (22 जून 2023) को पुलिस ने केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दमोह जिले की एक दलित लड़की ने 22 जून को पुलिस अधीक्षक को शिकायत दे कर अपनी आपबीती बताई। पीड़िता का आरोप है कि वह बेंगलुरु में नौकरी करती थी। डेढ़ साल पहले उन्हें एक गारमेंट फैक्ट्री में यह नौकरी कौशल विकास योजना के तहत मिली थी। इस दौरान पीड़िता को वहीं काम करने वाला फारुख नाम का एक लड़का मिला। फारुख ने अपना परिचय राजू के तौर पर दिया था। कुछ दिनों की बातचीत के बाद फारुख लड़की को अपने प्रेम जाल में फँसाने में सफल रहा।

फारुख उस फैक्ट्री में 4 वर्षों से काम कर रहा था। वह पीड़िता के आगे पूजा-पाठ करता था और साथ में मंदिर भी जाता था। लड़की का कहना है कि इन हरकतों से उसे कभी राजू के मुस्लिम होने का शक नहीं हुआ। बीच-बीच में राजू बने फारुख ने पीड़िता को शादी का झाँसा दे कर शरीरिक संबंध बनाए। कुछ दिनों बाद एक बार फारुख घर में चिकन बिरयानी ले कर आया। उसने लड़की को प्यार का वास्ता दे कर पहली बार माँसाहार करवाया। इस घटना के बाद लड़की ने राजू पर नजर रखना शुरू किया और थोड़े ही समय में पता लगा लिया कि वो असल में फारुख है।

लड़की का आरोप है कि फारुख की सच्चाई सामने आने के बाद वो दूरी बनाने लगी। जब फारुख को इसकी भनक लगाई तो उसने पीड़िता के तमाम कागजात हड़प लिए जिसमें क्रेडिट कार्ड भी शामिल था। लड़की को 2 महीने से ज्यादा एक कमरे में बंधक बना कर रखा गया। इस दौरान उसे सिर्फ फैक्ट्री तक जाने की परमिशन थी और इस पूरे समय फारुख लड़की के साथ ही रहता था। बीच में एक बार पीड़िता के खाते से 40 हजार रुपए भी आरोपित ने अपने एकाउंट में डलवा लिए।

शिकायत में आगे बताया गया है कि थोड़े समय के बाद फारुख पीड़िता पर धर्म परिवर्तन कर के इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा। ऐसा न करने पर वो लड़की को जान से मारने की धमकियाँ भी देता था। पीड़िता को प्रताड़ित करने के लिए उसने 5 महीने की सैलरी भी हड़प ली। लड़की का कहना है कि इस बीच उसका शारीरिक और मानसिक शोषण होता रहा जिससे वो निकलने के बारे में सोचती रही। आखिरकार एक दिन उसने फारुख से प्यार करने का नाटक किया और निकाह के लिए अपने घर वालों को भी तैयार करने का भरोसा दिया।

घर वालों को निकाह के लिए मनाने का बहाना ले कर पीड़िता बेंगलुरु से अपने घर दमोह आ गई। 3 दिनों बाद फारुख लड़की को कॉल कर के अपने पास बुलाने लगा तो पीड़िता ने वापस आने से मना कर दिया। इस से नाराज हो कर आरोपित ने लड़की के अश्लील वीडियो अपने पास होने और उसे वायरल करने की धमकी दी। सबूत के तौर पर उसने कुछ वीडियो पीड़िता को व्हाट्सएप पर भी भेजे। फारुख इसी दौरान 2 लाख रुपए पीड़िता के खाते से निकालने की भी धमकी देने लगा।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपित फारुख ने उस पर जादू-टोना किया और एक ताबीज ला कर पहना दिया। इस ताबीज में अरबी में कुछ लिखा हुआ था। हालाँकि लड़की के घर वालों ने इस ताबीज को उतरवा दिया। पीड़िता का दावा है कि फारुख ज़ाकिर नाइक का फॉलोवर है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने धर्मान्तरण निरोधक कानून के साथ SC-ST एक्ट में केस दर्ज कर लिया है। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रियंका गाँधी से भी एक बेटी को न्याय दिलाने में मदद करने की अपील की है। दमोह के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह के मुताबिक मध्य प्रदेश पुलिस की एक टीम को बेंगलुरु के लिए भेज दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है।

‘लिख लो ये देश छोड़कर भागेंगे’: TMC नेता कीर्ति आजाद ट्विटर पर जिस अडानी को देते हैं गाली, जन्मदिन पर उन्हें ही ‘गौतम भाई’ कहकर अब दे रहे बधाई

राजनीति में फायदे के लिए कब क्या कहा जाए और और कब क्या किया जाए, ये राजनेताओं को पता होता है। अब क्रिकेटर से नेता बने बिहार के क्रिकेटर कीर्ति झा आजाद को ही देख लीजिए। जब राजनीति करनी होती है तो वो गौतम अडानी को चोरी और भगोड़ा कह देते हैं और जब मौका आता है कि गौतम भाई कहकर उन्हें जन्मदिन की बधाई देने लगते हैं।

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए, जब कीर्ति आजाद ने अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी पर निशाना साधा था। हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने 28 जनवरी 2023 को एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने गौतम अडानी पर कई आरोप लगाए थे।

कीर्ति आजाद ने लिखा था, “भाई, Adani साहेब ने खेल कर दिया, लोगों का 2.75 लाख डुबाया, खुद का थोड़ा नुकसान किया.. और इसी बिनाह पर देश के बैंकों के सबसे बड़े कर्जदार #AdaniGroup का कर्ज़ा माफ हो जायेगा, नहीं तो, देश छोड़ कर भाग जाएँगे/ लिख कर ले लो… HindenburgReport”

इधर, शनिवार (24 जून 2023) को गौतम अडानी का 61वाँ जन्मदिन था, जिसे अडानी दिवस के रूप में मनाया गया। इस दौरान एक भव्य कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था। इस अवसर पर गौतम अडानी ने जन्मदिवस की शुभकामनाएँ देने वालों का आभार जताया।

कार्यक्रम में 1983 क्रिकेट विश्वकप के सभी खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया था और उन्हें गौतम अडानी द्वारा सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में सुनील गावस्कर, कपिलदेव आदि क्रिकेटरों के साथ-साथ कीर्ति आजाद भी शामिल थे। अडानी ने इन सबका आभार जताया।

इस दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता कीर्ति आजाद ने कहा, “गौतम भाई को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। आपका जन्मदिन और उसके बाद हमारा जन्मदिन आता है। ऐसे ही हरेक साल करते रहिए और बुलाते रहिए। आपके जन्मदिन के बाद हम अपना जन्मदिन मनाते रहेंगे।”

बिहार के भागलपुर में कुरैशी के घर ‘बम’ धमाका, जमींदोज हुआ पूरा घर: 1 की मौत, 3 घायल

बिहार के भागलपुर में एक मकान के अंदर तेज विस्फोट की खबर है। विस्फोट से एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि 3 अन्य घायल हुए हैं। जिस घर में यह धमाका हुआ उसके मालिक का नाम मोहम्मद बडुल कुरैशी है। मृतक बडुल कुरैशी का बेटा है। धमाका इतना तेज था कि काफी दूर तक खिड़कियों के शीशे चटक गए। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के मिल कर जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (24 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बबरगंज थानाक्षेत्र के कसाब टोला की है। यहाँ तंग गलियों में मोहम्मद बडुल कुरैशी अपने परिवार के साथ रहता है। शनिवार को अचानक यहाँ तेज आवाज हुई और बडुल कुरैशी का मकान जमींदोज हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि आस-पास के घरों को काफी नुकसान हुआ। दूर घरों की खिड़कियों के शीशे तक चटक गए। यह आवाज 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी है। धमाके की आवाज सुन कर लोग बडुल के घर की तरफ दौड़े तो घर में 17 वर्षीय मोहम्मद तौसीफ की लाश मिली। मृतक तौसीफ बडुल कुरैशी का बेटा है।

धमाके के चलते बडुल की बीवी नाजमा खातून बुरी तरह से घायल हुई हैं। इस विस्फोट की चपेट में आ कर बडुल के पड़ोसी मोहम्मद कलाम और एक 4 साल की बच्ची भी घायल हो गई है। गंभीर रूप से घायल इन तीनों को स्थानीय जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ इनका इलाज चल रहा है। धमाके की सूचना पर फॉरेंसिक टीम के साथ पहुँची पुलिस ने घर को सील कर के जाँच शुरू कर दी। विस्फोट के प्रकार का अभी तक पता नहीं चल पाया है। कुछ लोग इसे बारूद का धमाका बता रहे हैं जबकि कई लोग इसको सिलेंडर से हुआ ब्लास्ट मान रहे है।

बताया जा रहा है कि विस्फोट की आवाज सुन कर महिलाएँ घरों से बाहर निकल आईं। धमाके के बाद मोहल्ले की महिलाओं ने छाती पीट कर कहा, “या अल्लाह ई सिलिंडर विस्फोट नै हो। हिदिर बम फटा हो।” वहीं बेटे की लाश पर रोते हुए मुहम्मद बडुल कुरैशी ने भी इसे बम का विस्फोट बताया। घटना के समय बडुल कुरैशी कहीं बाहर थे। बडुल कुरैशी का आरोप है कि किसी और ने उनके घर के पास बम का विस्फोट किया है।

बंगाल के बांकुरा में हुई 2 मालगाड़ियों की टक्कर, 12 बोगियाँ पटरी से उतरीं: Video सामने आई, प्लेटफॉर्म क्षतिग्रस्त

पश्चिम बंगाल के बांकुरा में रविवार (25 जून 2023) सुबह रेल दुर्घटना हुई। यहाँ के ओंडा रेलवे स्टेशन के करीब दो मालगाड़ियाँ आपस में टकरा गईं। जिसके बाद मालगाड़ी की 12 बोगियाँ पटरी से उतर गए। बताया जा रहा है कि यह टक्कर इतनी गंभीर थी कि दोनों मालगाड़ियों के इंजन न केवल पटरी से उतरकर पलट गए। घटना में ड्राइवर भी घायल हुआ। वहीं प्लेटफॉर्म और सिग्नल रूम क्षतिग्रस्त हो गए।

इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें रेलवे ट्रैक से उतरी मालगाड़ियाँ देखी जा सकती हैं। इस घटना के बाद खड़गपुर-बांकुरा-आद्रा रेल लाइन को बंद कर दिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स बता रही है कि बांकुड़ा से आ रही एक अन्य मालगाड़ी ओडा रेलवे स्टेशन के पास लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से से टकरा गई थी और उसका इंजन खड़ी गाड़ी के ऊपर चढ़ गया था। दोनों ट्रेनें टकराने की आवाज इतनी तेज थी कि स्थानीय फौरन उस ओर भागे और किसी तरह ड्राइवर को बचाया गया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ओडिशा के बालासोर में 3 जून 2023 को तीन ट्रेनें टकराने से भीषण दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में 200+ लोगों के शव बरामद किए गए थे। वहीं 900 से ज्यादा लोग इस दुर्घटना में घायल हुए थे। दुर्घटना के बाद इंटरलॉकिंग सिस्टम में हुई छेड़छाड़ की बात सामने आई थी।

पूर्व रेल मंत्री ने घटना पर बात करते हुए कहा था-“इंटरलॉकिंग सिस्टम और घटना में क्या हुआ, इसके बारे में मेरे पास जो इनपुट और समझ है, मुझे लगता है कि इसमें बड़ी छेड़छाड़ की गई थी। इसी के चलते कोरोमंडल एक्सप्रेस मेन ट्रैक से लूप लाइन पर चली गई। अब और अधिक जानकारी सामने आने के बाद मुझे 100% यकीन है कि यह दुर्घटना किसी बड़े छेड़छाड़ के चलते हुई।”

‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’: मिस्र में PM मोदी को देख खुश हुए बोहरा मुस्लिम, तिरंगा लेकर स्वागत किया; ग्रैंड मुफ्ती बोले- बहुत सम्मानित महसूस हो रहा

अमेरिका से मिस्र (Egypt) की राजकीय यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का भव्य स्वागत हुआ। काहिरा पहुँचते ही वहाँ बोहरा समुदाय के मुस्लिमों ने उनका शानदार स्वागत किया। इस दौरान मिस्र की एक महिला ने बॉलीवुड गाना ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे…’ गाया। यह यात्रा भारत-मिस्र के रिश्ते को नया आयाम देना साबित हो रहा है।

प्रवासी भारतीयों के स्वागत से प्रधानमंत्री मोदी विह्वल नजर आए। उन्होंने ट्वीट किया, “मिस्र में भारतीय प्रवासियों के गर्मजोशी भरे स्वागत से मैं बहुत प्रभावित हुआ। उनका समर्थन और स्नेह वास्तव में हमारे राष्ट्रों के शाश्वत बंधन का प्रतीक है। यह भी उल्लेखनीय था कि मिस्र के लोग भारतीय पोशाक पहनते थे। सचमुच, यह हमारे साझा सांस्कृतिक संबंधों का उत्सव है।”

पीएम मोदी से मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती डॉक्टर शॉकी इब्राहिम अब्देल-करीम अल्लम ने भी मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि वे खुद को सम्मानित महसूस कर रहे हैं। ग्रैंड मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह दूसरी बार मुलाकात थी। उन्होंने कहा कि इन दोनों मुलाकातों के बीच भारत में काफी विकास हो चुका है।

ग्रैंड मुफ्ती ने कहा, “पीएम मोदी भारत जैसे विशाल देश के लिए बुद्धिमान नेतृत्व को दर्शाते हैं। भारत में विभिन्न गुटों के बीच सह-अस्तित्व लाने के लिए पीएम मोदी द्वारा समझदारी भरी नीतियाँ अपनाई जा रही हैं। धार्मिक स्तर पर,भारत के साथ हमारा मजबूत सहयोग है। भारतीय पक्ष यहां एक सूचना प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र भी उपलब्ध कराने जा रहा है। हमारे पास सहयोग की बहुत गुंजाइश है।”

आज रविवार (25 जून 2023) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोहरा समुदाय द्वारा पुनर्निर्मित किए जा रहे अल-हकीम मस्जिद भी जाएँगे। वहाँ पीएम मोदी लगभग आधे घंटे तक रहेंगे। इसके साथ ही प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की ओर लड़कर वीरगति को प्राप्त हुए लगभग 4000 सैनिकों को श्रद्धांजलि देने हेलियोपोलिस वॉर मेमोरियल भी जाएँगे।

मिस्र पहुँचने के बाद पीएम मोदी के स्वागत में मिस्र की एक महिला ने बॉलीवुड का गाना गाया। जेना नाम की ये महिला भारतीय पारंपरिक पोशाक साड़ी पहने हुए थी। इसके बाद जेना ने फिल्म ‘शोले’ के लोकप्रिय गीत ‘ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे’ गाकर मोदी का स्वागत किया। जेना ने यह भी कहा कि वह बहुत कम हिंदी जानती हैं और कभी भारत नहीं आई हैं।

इस गाने को सुनकर प्रधानमंत्री ने खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, “किसी को पता भी नहीं चलेगा कि आप मिस्र की बेटी हो या हिंदुस्तान की बेटी हो।” इस दौरान बोहरा समुदाय के मुस्लिम के पुरुष और महिलाएँ पारंपरिक कुर्ता-पायजामा और साड़ी में मौजूद थे। वे हाथों में तिरंगा लिए प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया।

‘तब उसने देश के साथ गद्दारी की, अब पीड़िताओं का बयान लीक कर दिया’: लाइव आकर योगेश्वर दत्त पर बरसे पहलवान

ओलंपिक मेडल विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले पहलवानों पर ट्रायल में छूट की माँग करने समेत कई तरह के आरोप लगाए थे। बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट ने फेसबुक लाइव के जरिए इन आरोपों को गलत बताया है। साथ ही योगेश्वर दत्त पर देश के साथ गद्दारी करने और बिना ट्रायल 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने का आरोप लगाया।

बजरंग पुनिया ने कहा है, “हम सभी गुरु, कोच और खिलाड़ियों का सम्मान करते हैं। लेकिन कुछ खिलाड़ियों को इज्जत हजम नहीं होती, जो अभी भी समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। योगेश्वर दत्त जो बोल रहे हैं कि यह कुश्ती का काला दिन है। ये लोग ट्रायल एक ट्रायल के लिए बोल रहे हैं। मैं सभी को बताना चाहता हूँ वो ओलंपिक एसोसिएशन कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने वह लेटर पढ़ा है या नहीं पढ़ा। लेटर देखकर बोल रहे हैं या बिना देखे बोल रहे हैं, मुझे यह नहीं पता है। हमने उस लेटर में कहीं पर भी यह नहीं लिखा है कि एक ट्रायल देंगे।”

बजरंग ने आगे कहा है, “हमने सिर्फ समय माँगा है। हम बहन-बेटियों की इज्जत की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए ट्रेनिंग नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए हमें टाइम दिया जाए न कि हमने सिर्फ एक ट्रायल की बात कही है। हमारे पास वह लेटर है। अगर योगेश्वर दत्त ने वह लेटर नहीं पढ़ा है तो हम वह उन्हें पढ़ा देंगे कि हमने उसमें क्या लिखा है।”

बजरंग पुनिया ने योगेश्वर दत्त पर आरोप लगाते हुए कहा है, “साल 2010 में चोटिल थे। साल 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में सीधे टीम भेजी गई थी। इसमें एक फलवान योगेश्वर दत्त थे और दूसरे का मैं नाम नहीं लेना चाहता। ये दो पहलवान रोज जाकर कुश्ती फेडरेशन में बैठते थे और कहते थे कि बिना ट्रायल हमारा सेलेक्शन कर दो। मैं इनसे पूछना चाहता हूँ कि ओलंपिक के बाद इन्होंने कौन से तीर मार दिए थे जिससे बिना ट्रायल आपका सेलेक्शन हुआ।”

उन्होंने आगे कहा है, “साल 2015 में आपने देश के साथ गद्दारी की उसके मेरे पास सबूत हैं। उस साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप जो कि ओलंपिक का क्वालीफायर के लिए टूर्नामेंट होता है। उस टूर्नामेंट से एक महीना पहले योगेश्वर दत्त ने सर्जरी करवाई थी। मैं उनके साथ रहता था। मेरे पास पूरे सबूत हैं। अगर वो कहेंगे तो मैं सबूत सोशल मीडिया पर भी डाल दूँगा। उस समय अमित धनखड़ दूसरे नंबर था, शायद वह क्वालीफाई हो सकता था और वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल आ जाता। लेकिन योगेश्वर दत्त ने चोटिल होने के कारण न तो चैंपियनशिप में भाग लिया और न ही वेट कैटेगरी से अपना नाम वापस लिया। यह देश के साथ बहुत बड़ी गद्दारी थी।”

साक्षी मलिक ने कहा है, “एक न्यूजपेपर में बृजभूषण के खिलाफ दिए गए सातों लड़कियों के बयान छपे थे। जब योगेश्वर दत्त कमिटी में थे। तब सभी लड़कियों ने वही बयान उनके सामने भी दिए थे। इसी बयान के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। इन सबके बाद भी वह कैसे बोल सकते हैं कि उन्हें कुछ नहीं मिला? बृजभूषण को क्लीन चिट मिल गई है। किसी लड़के ने प्रॉपर बयान दिए ही नहीं। फिर वह कैसे कह सकते हैं कि वो पहलवान बेटियों के पक्ष में हैं? अगर पक्ष में होते तो खुलकर बोलते कि लड़कियों के साथ गलत हुआ है।”

वहीं, विनेश फोगाट ने कहा है, “योगेश्वर दत्त के भाई ने फोन करके एक लड़की के हसबैंड को कहा कि आपकी पत्नी कमिटी में बयान देने आई है। इसका मेरे पास स्क्रीनशॉट है। जबकि कमिटी का यह नियम था कि कोई भी अंदर की बात बाहर नहीं बताएगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। मैंने, साक्षी ने और बजरंग ने कमिटी को मेल किया था और सोशल मीडिया पर भी लिखा था कि योगेश्वर दत्त ने लड़कियों के बयान लीक किए हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

विनेश ने आगे कहा है, “योगेश्वर दत्त को जब बड़ोदरा से टिकट नहीं मिल रही थी, तब उन्होंने पूरा कुश्ती जगत लगा दिया था।  टिकट दिलाने के लिए योगेश्वर ने साक्षी मलिक को फोन किया था। इसके बाद वह भी गई थी मुख्यमंत्री जी से मिलवाने के लिए। पूरा कुश्ती जगत आपको टिकट इसलिए दिलवाने में लगा हुआ था ताकि आप कुश्ती में आने वाले नए बच्चों का भला करेंगे। हमारा परिवार बर्बादी की कगार पर खड़ा है। पता नहीं कब किसके साथ क्या हो जाए।”

‘भरोसा रखिए, शांति बहाल करूँगा’: मणिपुर हिंसा पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सर्वदलीय बैठक, विपक्षी पार्टियों ने भी माना – खुले मन से हुई बातचीत

मणिपुर हिंसा और वहाँ के ताजा हालातों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। संसद भवन में करीब 3 घण्टे तक चली इस बैठक में बीजेपी, कॉन्ग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, डीएमके, शिवसेना समेत अन्य पार्टियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक को लेकर RJD सांसद मनोज झा ने कहा है कि सभी ने खुले मन से बातचीत की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी शामिल हुए। इसके अलावा, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा (एनपीपी), एम थंबी दुरई (एआईएडीएमके), तिरुचि शिवा (डीएमके), पिनाकी मिश्रा (बीजेडी), टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, आप सांसद संजय सिंह, राजद सांसद मनोज कुमार झा, एनसीपी महासचिव नरेंद्र वर्मा, मणिपुर के एनसीपी चीफ सोरन इबोयिमा और सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास समेत विपक्ष के कई नेता मौजूद रहे।

इस बैठक को लेकर बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा है, “इस बैठक में सबसे पहले गृह मंत्रालय ने एक प्रेजेंटेशन दिखाई। इसके माध्यम से यह दिखाया गया कि किस प्रकार से यह हिंसा आरंभ हुई थी, हिंसा के क्या कारण थे, अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, भविष्य में शांति के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे। इन सभी विषयों को लेकर एक प्रेजेंटेशन दिया गया। इसके बाद सभी पॉलिटिकल पार्टी के जो प्रतिनिधि वहाँ मौजूद थे एक-एक करके बड़े ही कायदे के साथ बड़े विस्तार के साथ सभी प्रतिनिधियों ने अपने अपने विषय को रखा। अपने अपने सुझाव को रखा। बड़े ही संवेदनशील तरीके से रखा। अगर मोटा-मोटी कहा जाए तो राजनीति से ऊपर उठ करके एक अलग ही पायदान पर सभी राजनीतिक दलों ने विषय को रखा है।”

RJD सांसद मनोज झा ने ANI से हुई बातचीत में कहा है, “बैठक में बड़े खुले मन से बातचीत हुई है। सभी दलों ने अपनी-अपनी राय दी। कई सारी चीजों पर बात हुई। मणिपुर के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर अविश्वास है और यह बात लगभग सभी लोगों ने कही है। हमने कहा कि जो व्यक्ति प्रशासन चला रहा है उसमें कोई विश्वास नहीं है। अगर आपको शांति बहाल करनी है तो ऐसे व्यक्ति के रहते नहीं हो सकती।”

वहीं, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा है, “हमने मणिपुर में पिछले 50 दिनों से अधिक समय से चल रही घटनाओं के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। गृह मंत्री ने सभी की हर एक बात सुनी। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को देख रहे हैं और कहा है कि मुझ पर भरोसा करो। मैं शांति बहाल करूँगा। हमने अनुरोध किया है कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर भेजा जाए। गृह मंत्री ने कहा है कि हमने और अधिक पुलिस तैनात की है।”

अमित शाह ने किया था हिंसा ग्रस्त इलाकों का दौरा

मणिपुर में शांति बहाली के प्रयास में जुटे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के हिंसा ग्रस्त इलाकों का दौरा किया था। तीन दिवसीय दौरे में उन्होंने कुकी और मैतई समाज के विभिन्न संगठनों से मुलाकात की थी। इसमें छात्र संगठनों से लेकर महिला संगठन तक शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने पीड़ितों व घायलों से भी मुलाकात की थी। मणिपुर हिंसा की जाँच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने न्यायिक जाँच आयोग का भी गठन किया है। यह आयोग 6 महीने के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपेगा।

इतिहास कभी भी अपने सच नहीं बताता, छुपाता है… नेताजी बोस की गुम फाइलों पर फिल्म का ट्रेलर रिलीज, ‘SPY’ में दिखे राणा दग्गुबाटि भी

“इतिहास कभी भी अपने सच नहीं बताता, छुपाता है – उसका समाधान हमें ही ढूँढना होगा” – अभिनेता निखिल सिद्धार्थ की फिल्म ‘SPY’ का ट्रेलर आ गया है जिसमें शुरुआत में ही ये पंक्तियाँ सुनाई देती हैं। ट्रेलर में दिखाया गया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी कुछ फाइलें गुम हो जाती हैं और उन्हें ढूँढने के लिए एक जासूस को लगाया जाता है। निखिल सिद्धार्थ को फिल्म में एक्शन दृश्य करते हुए और विदेशी बंदूकें चलाते हुए देखा जा सकता है।

फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं, जिन्हें विदेशों में फिल्माया गया है। मुंबई में एक बड़े कार्यक्रम में ‘SPY’ का ट्रेलर रिलीज किया गया। फिल्म में थिएटर के वरिष्ठ अभिनेता मकरंद देशपांडे ने ख़ुफ़िया एजेंसी का प्रमुख का किरदार निभाया है। ट्रेलर में वो एक इमरजेंसी स्थिति में सारे एजेंट्स को जमा होने का आदेश देते हुए दिखते हैं। फिल्म में इश्वर्या मेनन मुख्य अभिनेत्री के किरदार में हैं। सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म को पास कर दिया है। ये तेलुगू, हिंदी मलयालम और तमिल में रिलीज होगी।

फिल्म में विलेन के रूप में किसी ‘खादिर’ का नाम बार-बार सुनाई देता है। “नेताजी की फाइल्स का खादिर क्या करेगा?” – इस सवाल के जवाब में मकरंद देशपांडे कहते हैं – “खादिर वायरस जैसा है जय।” फिल्म के एक डायलॉग में ये भी सुनने को मिलता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी सारी कहानियाँ कहानी ही हैं, सच नहीं। फिल्म में एक व्यक्ति की रहस्यमयी हत्या को सुलझाने की भी कोशिश की जा रही होती है। इसमें निखिल सिद्धार्थ के किरदार का नाम ‘जय’ है।

ट्रेलर का सबसे सरप्राइजिंग एलिमेंट है ‘बाहुबली’ फिल्म सीरीज में ‘भल्लालदेव’ का किरदार निभा कर सुर्खियाँ बटोर चुके राणा दग्गुबाटि की एंट्री। ट्रेलर के अंत में उन्हें दिखाया गया है। गैरी द्वारा निर्देशित ‘SPY’ में उनका कैमियो अपीयरेंस होगा। ट्रेलर में एक डायलॉग है – “जब सबकुछ हाथ से निकल जाता है, तब हम नए रास्ते ढूँढते हैं।” नेताजी बोस द्वारा कहे गए एक वाक्य, “स्वतंत्रता हमें कोई देता नहीं, छीन कर लेनी पड़ती है” का जिक्र भी किया गया है।

कंगाल पाकिस्तान ने अपना कराची वाला बंदरगाह ही बेच डाला! UAE के साथ हुआ सौदा, ये मुल्क का सबसे पुराना और सबसे व्यस्त पोर्ट

गरीबी और भुखमरी से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने अपने कराची बंदरगाह का एक हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनी एडी पोर्ट्स ग्रुप को 50 साल की लीज पर दिया है। गुरुवार (22 जून, 2023) को एडी पोर्ट्स ग्रुप और कराची पोर्ट ट्रस्ट के बीच 220 मिलियन डॉलर यानि करीब 63.129 अरब रुपए के समझौते पर हस्ताक्षर हुए। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई की कंपनी एडी पोर्ट्स ग्रुप ने कराची पोर्ट के बर्थ 6 से लेकर 9 तक को संचालित और विकसित करने के लिए अमेरिकी कंपनी, काहिल टर्मिनल्स के साथ मिलकर इस समझौते को पूरा किया है। बड़ी बात यह है कि कराची बंदरगाह दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। साथ ही यह पाकिस्तान का सबसे पुराना और सबसे अधि व्यस्त रहने वाला बंदरगाह है। इस बंदरगाह में कुल 33 बर्थ हैं। बर्थ उस प्लेटफॉर्म को कहा जाता है, जहाँ बंदरगाह में आकर जहाज खड़े होते हैं।

चूँकि अब, पाकिस्तान ने यूएई से 50 सालों के लिए समझौता किया है। ऐसे में अगले 50 साल तक 33 में से 4 बर्थ (6, 7, 8, 9) यूएई ही संचालित करेगा। इस समझौते के तहत यूएई पाकिस्तान में 50 मिलियन डॉलर का अग्रिम निवेश करेगा। इसके बाद पाकिस्तान इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल्स (PICT) और पोर्ट कासिम में निवेश करेगा।

कराची बंदरगाह को लीज लाने वाली कंपनी एडी ग्रुप ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि वह अगले 10 वर्षों के दौरान बुनियादी ढाँचे और विकास में महत्वपूर्ण निवेश करेगा। इसमें से अधिकांश निवेश साल 2026 में होगा। कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा जा कि बुनियादी ढाँचे के विकास योजना के तहत बड़े जहाजों को खड़ा करने के लिए बर्थ को गहरा करना होगा। साथ ही, बंदरगाह की दीवार को बढ़ाना और कंटेनर भंडारण क्षेत्र को भी बढ़ाया जाएगा। 

पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने कराची पोर्ट की लीज को लेकर सरकार की आलोचना की है। पीटीआई नेता हम्माद अज़हर ने कहा है कि बंदरगाह को केवल 50 मिलियन डॉलर में लीज पर दिया गया है। इससे बंदरगाह से होने वाला मुनाफा देश से बाहर चला जाएगा। हालाँकि, पाकिस्तान के समुद्री मामलों के मंत्री फैसल सुब्ज़वारी ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि बंदरगाह को लीज देने का मतलब बेचना नहीं है। 

दिवालिया होने से बचने के लिए पाकिस्तान ने उठाया कदम

बता दें कि पाकिस्तान नकदी की कमी से जूझ रहा है। उसका विदेशी मुद्रा भंडार भी एक बार फिर न्यूनतम स्तर की ओर अग्रसर है। ऐसे में खुद को दिवालिया होने बचाने के लिए पाकिस्तान अपनी संपत्तियों को लीज पर देकर काम चलाने की कोशिश में जुटा हुआ है। गौरतलब है कि कराची बंदरगाह से पाकिस्तान को हर साल लगभग 55 मिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त और 30 मिलियन डॉलर का एबिटा (शुद्ध लाभ, ब्याज व कर इत्यादि मिलाकर प्राप्त राशि) मिलता है।

पाकिस्तान इस कदम से कुछ वक्त के लिए न केवल खुद को दिवालिया होने से बचाने में कामयाब हो जाएगा। बल्कि कराची बंदरगाह का विकास भी हो जाएगा।