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गुजराती PM, तमिल ‘सेंगोल’, दिल्ली का संसद भवन, राजस्थान के पत्थर, महाराष्ट्र की लकड़ियाँ, 60000 श्रमिक… लोकतंत्र का नया मंदिर भारत की एकता का प्रतीक

भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन हो गया है। इसे महज एक उद्घाटन समारोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे भारत के लोकतंत्र के उस नए मंदिर के रूप में देखा जाना चाहिए जो 150 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा। नया संसद भवन भारत के हर एक राज्य, हर एक व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करेगा – देशवासी इसी आशा में उत्सव का हिस्सा बने हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जन-भागीदारी में विश्वास रखते हैं, ऐसे में नए संसद भवन को लेकर भी जनता का सकारात्मक रुख देखने लायक है।

नई संसद भवन से देश का खजाने की होगी बचत, इसकी थी ज़रूरत

देश का नया संसद भवन लोकतंत्र के लिए कैसे हितकारी है? जैसा कि आपको पता है, नया संसद भवन नई दिल्ली के सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत संसद भवन के अलावा इसके आसपास के इलाके में कई कार्य हो रहे हैं। क्या आपको पता है कि सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पूरा होने से देश का 1000 करोड़ रुपया बचेगा? कई दफ्तरों के लिए ये रकम भारत सरकार रेंट के रूप में खर्च करती आ रही थी, जो अब रुक जाएगा।

केंद्र सरकार के कई ऐसे दफ्तर हैं, जो जगह-जगह बिखरे हुए हैं और उनमें से कई रेंट ली हुई संपत्तियों पर चल रहे हैं। इस रेंट का भुगतान जनता के पैसों से किया जाता है। सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जब पूरी तरह पूरा हो जाएगा तो न सिर्फ देश के खजाने में बचत होगी, बल्कि सारे दफ्तरों के एक जगह होने से कामकाज का समन्वय भी बेहतर होगा। वो दिन दूर नहीं, जब नॉर्थ एवं साउथ ब्लॉक म्यूजियम में बदल जाएगा। 2026 तक नई दिल्ली के इस इलाके की तस्वीर ही बदल जाएगी।

अतः, नया संसद भवन दिखावे के लिए नहीं बना है बल्कि इसकी ज़रूरत थी। संयुक्त सदन की स्थिति में इसमें 888 सांसदों के बैठने की व्यवस्था की गई है। भविष्य में जब संसदीय क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा तो सांसदों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में देश को नए संसद भवन की आवश्यकता पड़नी ही थी, क्योंकि पुराने संसद भवन में 552 सदस्य ही बैठ सकते थे। सुरक्षा के लिहाज से भी एक 100 वर्ष पुरानी इमारत में सैकड़ों नेताओं-अधिकारियों द्वारा देश का कामकाज करना सही नहीं था।

नए संसद भवन के दोनों चैम्बरों में 1272 सीटें हैं। आने-जाने के लिए एक सांसद को किसी दूसरे के डेस्क से होकर नहीं गुजरना होगा। सांसदों के लिए अलग-अलग डेस्क होंगे। तकनीकी रूप से भी ये संसद भवन समृद्ध है। हर मंत्री का अलग-अलग दफ्तर होगा। हजारों वर्ष पुरानी भारतीय संस्कृति का भी दर्शन होगा। कलाकृतियों से नए संसद भवन को सँवारा गया है। चाणक्य से लेकर समुद्र मंथन तक की कलाकृतियों से नेताओं को प्रेरणा मिलेगी।

हमने जाना कि कैसे देश के लिए ये संसद भवन सही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेता के साथ-साथ सामाजिक सुधार के भी प्रणेता रहे हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि वो किसी भी कार्य के पूरा हो जाने के बाद उन श्रमिकों से मिलते हैं, जिनकी वजह से ये संभव हो पाया। प्रधानमंत्री उन्हें ‘श्रमजीवी’ कह कर संबोधित करते हैं। नए संसद भवन के निर्माण में भी 60,000 मजदूरों को रोजगार मिला। कई मजदूरों से पीएम मोदी ने उद्घाटन के दौरान मुलाकात भी की।

उन्होंने इन मजदूरों के लगातार समर्पण और उनके शिल्प-कौशल के लिए उन्हें सम्मानित किया। इसी तरह, अक्टूबर 2022 में उन्होंने उन सफाई कर्मचारियों के पाँव धोए थे, जिन्होंने कुम्भ मेला के दौरान काम किया था। जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन सभी मजदूरों से मुलाकात की थी जिन्होंने इसे संभव बनाया। प्रधानमंत्री ने उन पर फूल बरसाया था। पीएम मोदी को श्रमिकों के साथ भोजन करते हुए भी हम देख चुके हैं।

भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को समेटे नया संसद भवन

सांस्कृतिक लिहाज से भी नया संसद भवन भारत का गौरव बनेगा। हमने बात की कि कैसे इसमें कई ऐसी कलाकृतियाँ हैं जो पौराणिक युग से लेकर डिजिटल युग तक की यात्रा को दर्शाती है। अखंड भारत हो या चाणक्य, या फिर सरदार वल्लभभाई पटेल और भीमराव आंबेडकर की मूर्ति, इन सबसे प्रेरणा मिलेगी। लेकिन, संसद भवन के उद्घाटन से पहले जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया, वो है ‘सेंगोल’। चोल साम्राज्य का राजदंड – ‘सेंगोल’।

मदुरै अधीनम के महंत हरिहर स्वमिगल ने कहा कि पीएम मोदी तमिल संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं, वो हमेशा तमिल जनता के साथ खड़े रहे हैं। आज़ादी के बाद सत्ता हस्तांतरण के दौरान जो ‘सेंगोल’ जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था, उसे बनाने वाले चेट्टी परिवार के सुधाकर बंगारू, जो अब 97 वर्ष के हो गए हैं, उनके चेहरे पर आए भावों ने बता दिए कि इस क्षण का कितना महत्व है। उन्होंने इसे गौरवशाली पल करार दिया।

श्रीलंका, लक्षद्वीप और मालदीव से लेकर भारत में गोदावरी-कृष्णा नदी के मैदानों तक, भटकल में कोंकण के तट तक और पूरे मालाबार के तटों तक राज करने वाला चोल राजवंश हजारों वर्षों तक दक्षिण भारत में शासन का एक प्रमुख स्तम्भ बना रहा। आज प्राचीन चोल राजवंश की संस्कृति दिल्ली के संसद भवन में स्थापित हुई है, तो देश की ‘अनेकता में एकता’ को प्रदर्शित करने का इससे बड़ा माध्यम क्या हो सकता है? तमिलों का ‘सेंगोल’ दिल्ली में अब सत्ता की शान है।

कई राज्यों ने मिल कर बनाया है नया संसद भवन, ये भारत के लोकतंत्र का मंदिर

इस तरह सांस्कृतिक लीजह से भी ये कदम काफी क्रांतिकारी है। तमिल संत गुजराती प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली में हुए समारोह में आमंत्रित किए जाते हैं, और तमिल हिन्दू संस्कृति का प्रतीक ‘सेंगोल’ संसद में स्थापित किया जाता है – इससे बड़ी बात क्या होगी देश की एकता दर्शाने के लिए? संसद भवन के निर्माण में जिन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है, वो भी देश के कई अलग-अलग राज्यों से आई हैं। ऐसे, इसकी भी एक बानगी देखते हैं।

केसरिया-हरे रंग का पत्थर राजस्थान के उदयपुर से आया है। रेड ग्रेनाइट राजस्थान के अजमेर से आया है। राजस्थान के ही अम्बाजी से सफ़ेद संगमरमर भी आया है। इसी तरह सागौन की लकड़ियाँ महाराष्ट्र के नागपुर से लाई गईं और बलुआ पत्थर राजस्थान के धौलपुर में स्थित सरमथुरा से आए। चैंबर की सीलिंग में लगाने के लिए स्टील दमन एवं दीव से लाए गए। उत्तर प्रदेश के नोएडा और राजस्थान के राजनगर से जाली वाले पत्थर लाए गए।

इसी तरह, अशोक चिह्न के लिए मैटेरियल महाराष्ट्र के औरंगाबाद और राजस्थान के जयपुर से लाए गए। लोकसभा के दोनों चैम्बरों में जो बड़ा अशोक चक्र दिख रहा है, वो मध्य प्रदेश के इंदौर से लाए गए माल से बना। हरियाणा के चरखी दादरी से आया बालू भी संसद भवन के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। हरियाणा-उत्तर प्रदेश से ईंटें आईं। इस तरह, इस संसद भवन को पूरे देश ने मिल कर बनाया गया। देश के कई श्रमिकों को इसमें काम मिला।

कहीं हिंदू लड़कों की पिटाई तो कहीं मुस्लिम लड़कियों से बदसलूकी: ‘भगवा लव ट्रैप’ के नाम पर इस्लामी कट्टरपंथियों का आतंक, पढ़ें हाल के 11 मामले

लव जिहाद के बढ़ते मामलों से ध्यान भटकाने के लिए समाज में आजकल एक नया कॉन्सेप्ट चला है- भगवा लव ट्रैप का। इस कॉन्सेप्ट के तहत कुछ मुस्लिम युवक उन हिंदू लड़कों को ढूँढते हैं जिनके साथ मुस्लिम लड़कियाँ होती हैं। इसके बाद उन्हें सरेआम बेइज्जत किया जाता है, उनसे मारपीट होती है और कोई अगर बीच बचाव करने आता है तो उसपर हमला करने से भी ये लोग नहीं चूकते।

हाल में ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मामले सामने आए हैं। जहाँ एक ही पैटर्न के साथ हिंदू लड़का-मु्स्लिम लड़की साथ दिखने पर घेरे गए, उनकी वीडियो बनाई गई, उन्हें प्रताड़ित किया गया… कुछ वीडियोज में खुले में हिंदू लड़के को मारा-पीटा गया तो कुछ में हिजाब-बुर्के में जाती लड़की को निशाना बनाकर उनसे बदसलूकी हुई। इनमें कुछ मामले हाल के हैं।

इंदौर में हिंदू लड़का, मुस्लिम लड़की और इस्लामी कट्टरपंथी

मध्यप्रदेश के इंदौर में एक हिंदू लड़का अपनी मुस्लिम सहेली के साथ किसी रेस्टोरेंट में खाना खाने गया था। लौटते वक्त इस्लामी कट्टरपंथियों ने उसे सड़क पर घेर लिया। लड़की ने बताया कि वो अपनी अम्मी को बताकर उस लड़के के साथ आई है….मगर भीड़ ने उसे नहीं छोड़ा। इस दौरान जो लोग लड़के को बचाने आए उनपर भी भीड़ ने चाकू से हमला किया।

मुरादाबाद में हिंदू पति-मुस्लिम पत्नी दिखने पर भीड़ ने घेरा

मुरादाबाद से कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आई थी जहाँ पेशे से नर्स एक मुस्लिम युवती अपने हिंदू पति के साथ बाजार गई। लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें देखकर भड़क गए और उसके पति के साथ मारपीट की गई। घटना 22 मई की है।

कर्नाटक में मुस्लिम लड़की के साथ हिंदू लड़के ने किया नाश्ता, भीड़ ने मारा

घटना कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर की है। गोपिका चाट पर हिंदू लड़का अपनी सहेली के साथ नाश्ता करने आया। मगर जैसे ही कट्टरपंथियों ने उसे देखा उसे सरेआम मारने लगे।

मुस्लिम दोस्त की बहन को घर छोड़ने पर हिंदू युवक पर हमला

घटना बिजनौर की है। विनोद नाम का युवक अपने मुस्लिम दोस्त की बहन को सिर्फ घर छोड़ने आया था…इतने पर चार लड़कों ने उसे घरे लिया और गाली-गलौच करके उसे पीटने लगे। इनकी गिरफ्तारी के बाद पता चला कि ये लड़के ऐसे ही हिंदुओं की तलाश करने को जुटाए गए थे जो पता लगा सकें कि कौन मुस्लिमों की लड़की लेकर घूम रहा है।

मेरठ में हिंदू लड़के-मुस्लिम लड़की को दुकान पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा

मेरठ के भोजपुर से वायरल हुई एक वीडियो में दुकान पर खड़े लड़के-लड़की को कट्टरपंथियों की भीड़ परेशान करती देखी जा सकती है। लड़के की शर्ट खींच-खींचकर उससे उसका नाम पूछा जाता है। जब लड़की विरोध करती है तो एक कट्टरपंथी कहता है- मुस्लिम लड़के मर गए हैं क्या, तुझे कब्र में नहीं जाना।

होटल में मुस्लिम लड़की के साथ मिलने पर हिंदू युवक को घेरा

बरेली जंक्शन के पास एक होटल में मुस्लिम युवती के साथ मिलने पर हिंदू लड़के को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा और उसका फोन लेकर उसके फोन की चेकिंग और वॉट्सएप चैट भी पढ़ी। इस दौरान उससे पूछा गया। हम तुम्हारी बहनों के साथ ऐसा करेंगे तो तुमको सही लगेगा।

जयपुर में शांति से बैठी लड़की के कैमरा लेकर पीछे पड़े इस्लामी कट्टरपंथी

वीडियो जयपुर के रामनिवास बाग की है। यहाँ एक लड़की बुर्का पहनाकर हरिजन समाज के लड़के साथ बैठी हुई थी। तभी एक शख्स ने आकर मुस्लिम महिला पर कैमरा फोकस किया और दूसरे ने लड़के का कॉलर पकड़कर धमकाना।

अमरोहा में बुर्का हटवाने पर जुटे इस्लामी कट्टरपंथी

यूपी के अमरोहा के हसनपुर में कुछ लोगों ने बुर्के वाली महिला का पीछा किया सिर्फ इसलिए क्योंकि वो हिंदू लड़के के साथ जा रही थी। उसे बार-बार सड़क पर नकाब खोलने को कहा गया।

कर्नाटक में हिंदू लड़के-मुस्लिम लड़की के दिखने पर गाली

कर्नाटक से आई एक और वीडियो में बुर्काधारी लड़की ने कट्टरपंथी को लाइफ में दखलअंदाजी करने से मना किया तो उस कट्टरपंथी ने उस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया। जहाँ उसे र&% जैसी गालियाँ दी गईं।

वीडियो बनाने पर लड़की ने डाँटा तो सोशल मीडिया पर गालियाँ

राजस्थान में एक बुर्काधारी लड़की और हिंदू लड़के को साथ होने पर घेरा गया और हर मामले की तरह यहाँ भी उनकी वीडियो बनाने शुरू हुई। लड़की ने गिड़गिड़ाने की जगह उन्हें जमकर सुनाया और कहा कि वीडियो बंद कर। इसके बाद इतनी सी वीडियो को साझा करके उसके लिए गंदी-गंदी गालियाँ लिखी गईं। उसे काफिर तक कहा गया।

यूपी के देवबंद में 2 मुस्लिम लड़की गैर मुस्लिम के साथ देख भड़के लोग

सहारनपुर के देवबंद में एक हिंदू युवक के साथ दो मुस्लिम औरतों को देख कट्टरपंथियों ने उन्हें रोक लिया और उनका घेराव करके उनके माता-पिता को कॉल करने की बातें कहते रहे।

हेलमेट उतरवाकर हिंदू युवक को घेरा

इसी प्रकार एक मामले में भीड़ ने गाड़ी रुकवाकर हिंदू युवक का हेलमेट उतरवाया और महिलाओं से लोग कहने लगे- तुमपर टेम्पो से जाने के पैसे नहीं थे तो हमसे लेतीं।

हैशटैग पर आया ‘भगवा लव ट्रैप’, या मौलानाओं ने भरा जहरा

बता दें कि लव जिहाद के मामलों की पोल खुलने के बाद ही से भड़के इस्लामी कट्टरपंथी भगवा लव ट्रैप का प्रपंच फैलाकर अपने कुकर्मों को छिपाने में लगे हैं। लेकिन वो भूल गए हैं कि हिंदू जिसका विरोध करते हैं उस लव जिहाद में एक पैटर्न है जो हर दूसरे मामले में देखने को मिलता है। जैसे- झूठे नाम के साथ लड़कियों को फँसाना, फिर उनका धर्मांतरण करवाना आदि।

लेकिन ‘भगवा लव ट्रैप’ क्या है… ये सवाल कोई अगर कट्टरपंथी भीड़ से पूछे तो शायद उन्हें खुद नहीं पता होगा। बस सोशल मीडिया पर एक हैशटैग चलाया जा रहा है कि काफिर के साथ मुस्लिम लड़कियाँ हैं। इसी कुंठा में ये उन मुस्लिम लड़कियों की फोटो-वीडियो डाल देते हैं जिन्हें बदनाम करने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी और खास बात ये है कि ये जो जहर इनके भीतर भरा जा रहा है इसमें सज्जाद नोमानी जैसे कट्टरपंथी मौलानओं का हाथ है जो ऐसे दावे करते हैं कि हजारों लड़कियाँ हिंदू लड़की से भागकर शादी करके हिंदू बन रही है।

वायरल हो रही वीडियोज की ऑपइंडिया भले ही तकनीकी रूप से पुष्टि नहीं कर सकता। लेकिन जो कंटेंट इसमें दिख रहा है उससे पता चल रहा है कि जहाँ हिंदू लड़के-मुस्लिम लड़की को ये भीड़ देखती है, वहाँ ये क्या करती है।

75 रुपए का नया सिक्का… कहाँ से लेंगे, कैसे मिलेगा, जानिए सब कुछ: नए संसद भवन के साथ PM मोदी ने किया जारी

भारत की आज़ादी के 75 साल बाद देश को नए संसद भवन का तोहफा मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (28 मई 2023) को नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के दूसरे चरण में 75 रुपए का सिक्का जारी किया। जारी हुए सिक्के पर संसद भवन की तस्वीर छपी हुई है। सिक्के पर हिंदी में संसद संकुल और अंग्रेजी में पार्लियामेंट कॉम्प्लेक्स लिखा हुआ है। सन 2023 के साथ जारी इस सिक्के को पश्चिम बंगाल में बनाया गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और जयपुर से सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस कार्यक्रम की झलकियों को साझा किया। इसमें सिक्के के जारी होने की तस्वीरें भी शामिल हैं। #NewParliamentBuilding, #MyParliamentMyPride और #AzadiKaAmritMahotsav हैशटैग के साथ अपने ट्वीट में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इसे नए भारत की राष्ट्रगाथा बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 75 रुपए मूल्य के इस सिक्के को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टकसाल में बनाया गया है। 33 ग्राम के इस सिक्के में आधा चाँदी का है। इसके अलावा इसमें 40% कॉपर और 5-5% निकल एवं ज़िंक हैं।

सिक्के का व्यास 44 मिलीमीटर है, जिसके एक तरफ नए संसद भवन का चित्र और दूसरी तरफ बौद्ध सम्राट अशोक का चिह्न स्तंभ बना हुआ है। अशोक स्तंभ के ठीक नीचे 2023 लिखा हुआ है। इसी साइड में एक तरफ हिंदी में भारत और दूसरी तरफ अंग्रेजी में इंडिया लिखा हुआ है। सिक्के के चारों तरफ किनारे भी बनाए गए हैं।

बताते चलें कि ये सिक्के ख़ास मौकों पर स्मृति में जारी किए जाते हैं। साल 1947 से अब तक लगभग 350 अलग-अलग मौकों पर ऐसे विशेष सिक्के जारी किए जा चुके हैं। अभी हाल ही में PM मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के 100वें भाग में 100 रुपए मूल्य का सिक्का जारी किया था।

ऐसे विशेष सिक्कों से खरीद-बिक्री नहीं होती है। इसलिए सर्केुलेशन यानी चलन में भी नहीं होते। हालाँकि, कोई व्यक्ति इसे स्मृति के तौर पर संग्रह करने के लिए रखना चाहे तो इसे खरीद सकता है। इसके लिए कई वेबसाइट हैं। इनमें से एक सरकारी वेबसाइट www.indiagovtmint.in है।

इन वेबसाइटों पर अंकित मूल्य से कई गुणा अधिक कीमत देकर इन्हें खरीदा जा सकता है। जैसे, ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड पर जारी सिक्का खरीदना कोई सिक्का खरीदना चाहे तो उसे दो कीमत चुकानी होगी। प्रूफ सिक्के (बिल्कुल शुरू में ढाले गए चमकीले सिक्के) की कीमत 3781 रुपए है, जबकि अनसर्कुलेटेड सिक्कों (जो बाद में ढाले गए और कम चमकीले होते हैं) की 3494 रुपए है।

इसी तरह की कीमत अन्य मौकों पर जारी किए सिक्कों को लेकर भी है। अब सवाल यह है कि ये सिक्के इतने महँगे क्यों होते हैं। दरअसल, इनकी लागत ज्यादा होती है। जैसे कि 75 रुपए का जो सिक्का जारी किया गया है, उसका वजन 33 ग्राम है। इसमें आधा यानी 16.5 ग्राम सिर्फ चाँदी है। अगर 72 रुपए प्रति ग्राम के हिसाब से लें तो इसमें लगी चाँदी की कीमत ही 1188 रुपए होगी। इसके अलावा, अन्य धातुओं की कीमत और उनकी ढलाई का लागत अलग है।

संसद भवन में ‘समुद्र मंथन’ क्यों? कलाकृतियों में PM मोदी का क्या रोल? – जिन्होंने बनाया, उनसे ही जानिए सब कुछ

भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन समारोह आपने देखा। साथ ही आपके समक्ष संसद भवन के भीतर की तस्वीरें भी आईं, वो कलाकृतियाँ जिन पर पूरा देश आज गर्व कर रहा है। ये वो कलाकृतियाँ हैं, जो भारतीय कला एवं संस्कृति को दर्शाती हैं। हमारे प्राचीन इतिहास को बताती है, जिससे आज प्रेरणा ली जा सके। नए संसद भवन में इन कलाकृतियों को जीवंत करने वाले मूर्तिकार का नाम है नरेश कुमावत, जो इससे पहले भी इस तरह का कमाल दिखा चुके हैं।

उन्होंने मुख्य तौर पर नए संसद भवन में समुद्र मंथन की कलाकृति उकेरी है। पौराणिक कथा है कि देवताओं और दानवों ने मिल कर अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था। नरेश कुमावत मानते हैं कि नया संसद भवन उभरते हुए भारत का मजबूत प्रतीक है। वो मूल रूप से राजस्थान के पिलानी के रहने वाले हैं। नए संसद भवन में उन्होंने कई ऐसी कलाकृतियाँ बनाई हैं, जो आने वाले समय में वर्षों तक इसकी शोभा बढ़ाती रहेगी।

उन्होंने न सिर्फ इन मूर्तियों को बनाया है, बल्कि उसे संसद भवन में इंस्टॉल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरदार वल्लभभाई पटेल और बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर की भी मूर्तियाँ उन्होंने बनाई है। दोनों को नए संसद भवन में साथ में लगाया गया है। नरेश कुमावत ने कहा कि ये उनके लिए काफी सम्मान की बात है कि उन्होंने नए संसद भवन के निर्माण में योगदान दिया है। उनका कहना है कि ये कलाकृतियाँ नेताओं को न्यायपूर्ण ढंग से कार्य करने की प्रेरणा देंगी।

नए संसद भवन में सरदार वल्लभभाई पटेल और भीमराव आंबेडकर की कलाकृति उकेरने के दौरान नरेश कुमावर

समुद्र मंथन वाली कलाकृति का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि जैसे उस समय अमृत निकला था, वैसे ही अब भी गहन चर्चाओं/बहस के बाद देश के लिए अच्छे परिणाम निकलें – यही इसका सन्देश है। उन्होंने समुद्र मंथन की कलाकृति में हर छोटी से छोटी चीज का ध्यान रखा है। नरेश कुमावत इससे पहले नेपाल स्थित कैलाशनाथ महादेव की प्रतिमा बना चुके हैं। दिल्ली के महिपालपुर में स्थित शिव मूर्ति भी उन्होंने ही बनाई है।

उनके द्वारा बनाई गई कुछ अन्य प्रमुख प्रतिमाएँ हैं – हिमाचल प्रदेश के शिमला में स्थित भगवान हनुमान की विशाल मूर्ति, धरमपुर में जैन संत श्रीमद राजचन्द्र की प्रतिमा। उन्होंने जम्मू कश्मीर के नगरोटा में बलिदान हुए मेजर अक्षय गिरीश की प्रतिमा भी बनाई थी, जिस पर बलिदानी सैनिक की माँ ने उन्हें धन्यवाद दिया था। आतंकियों के हमले में 4 की मौत होने के बाद मेजर अक्षय गिरीश के नेतृत्व में 29 नवंबर, 2016 को ‘क्विक रिएक्शन टीम (QRT)’ ने आतंकियों से लोहा लिया था।

नरेश कुमार कुमावत फ़िलहाल हरियाणा गुरुग्राम में रहते हैं। वहीं पर उनका स्टूडियो भी है। उनके स्टूडियो का नाम है – ‘मातूराम आर्ट्स सेंटर’, जो उनके पिता के नाम पर है। उनके पिता और दादाजी भी मूर्तिकार हुआ करते थे, इस तरह वो मूर्तिकारों की तीसरी पीढ़ी हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए मूर्तिकार नरेश कुमावत कहते हैं कि उनके मन में आया कि मूर्तिकला के कार्य को और खूबसूरत बनाया जा सके, इसीलिए उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू किया।

उनका स्टूडियो मानेसर में स्थित है, जहाँ वो 300 लोगों के साथ मिल कर कार्य कर रहे हैं। मूर्तिकला और तकनीक के संगम की वकालत करने वाले नरेश कुमावत इसकी बारीकियाँ कनाडा से सीख के आए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पिता के साथ मिल कर 150 से भी अधिक मूर्तियाँ बनाई हैं। इनमें सबसे विशेष है नाथद्वारा में भगवान शिव की सबसे ऊँची प्रतिमा, जो 370 फ़ीट (112.776 मीटर) की है। इसके बाद उन्हें संसद भवन को सजाने का काम मिला।

नरेश कुमावत से केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने इस काम के लिए संपर्क किया था। भारत सरकार द्वारा संचालित ‘इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA/Indira Gandhi National Centre for the Arts)’ के माध्यम से उनसे संपर्क किया गया था। वहाँ उन्होंने अपना काम दिखाया, जिसके बाद बात आगे बढ़ी और उन्हें इसके लिए चुना गया। उन्होंने कहा कि इस संसद भवन में पौराणिकता से लेकर ‘Digitalised India’ तक को दिखाया गया है।

उन्होंने कहा कि कलाकारों ने अलग-अलग प्रकार के कार्यों के रूप में इन चीजों को काफी खूबसूरती से दिखाया है। इसमें समुद्र मंथन वाले को वो विशेष मानते हैं। उनके शब्दों में जानें तो, “ये इस चीज को दर्शाता है कि ये संसद जो है वो मंथन करने की जगह है। इस चीज को ये कलाकृति प्रतिबिंबित करती है। इसे देख कर ये समझ आता है कि जब सब मिल कर मंथन करते हैं तो अमृत की प्राप्ति होती है। इस समय देश को अमृत की बहुत आवश्यकता है, क्योंकि हम ‘अमृत काल’ से गुजर रहे हैं।”

हालाँकि, संसद भवन में चाणक्य की जो तस्वीर सामने आई है वो नरेश कुमावत ने नहीं बनाए है। लेकिन, इसे फाइनल टच दिए जाने के दौरान उनकी मदद ली गई थी। उन्होंने बताया कि चान्या के चेहरे को सुधारने के लिए उनकी मदद ली गई थी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में ही कलाकृतियाँ बनने का कार्य हुआ है और सब कुछ पहले उनके सामने रखा गया था। उन्होंने बताया कि इसकी डिटेलिंग का आईडिया पीएम मोदी का ही था।

बकौल मूर्तिकार नरेश कुमावत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलाकृतियों के बारे में अच्छे से समझाया और बताया था कि कौन सी चीज किस तरह से होनी चाहिए। इसी के अनुरूप कलाकारों की टीम ने कार्य किया। याद दिलाते चलें कि नरेश कुमावत कोरोना काल में भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने स्वाथ्यकर्मी, सुरक्षाकर्मी और स्वच्छ्ताकर्मी की तीन मूर्तियाँ बना कर कोरोना वॉरियर्स को धन्यवाद दिया था। वो भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी काम कर चुके हैं।

ये पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नरेश कुमावत का नाम जुड़ा हो। दिसंबर 2016 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दीन दयाल उपाध्याय की जिस प्रतिमा का अनावरण किया था, वो नरेश कुमावत ने ही बनाई थी। इसे ग्लास फाइबर से बनाया गया था और इसके ऊपर कॉपर की परत डाली गई थी ताकि इसे जंग लगने से बचाया जाए। आज नरेश कुमावत संसद भवन की कलाकृतियों को उकेरने के बाद देश भर में चर्चा का विषय बन रहे हैं।

‘PM मोदी सेंगोल के साथ, विपक्ष बर्नोल के साथ’ : नए संसद भवन के उद्घाटन से कइयों को लगी मिर्ची, नेटीजन्स ने मजे लिए

नए संसद भवन के उद्घाटन की बात से बौराया विपक्ष अब अपने बयानों से अपनी खीझ व्यक्त कर रहा है। कॉन्ग्रेस के राजतंत्र के युवराज राहुल गाँधी को इससे इतनी मिर्ची लगी है कि उन्होंने सवाल किया है कि आखिर एक उद्घाटन समारोह को राज्यभिषेक जैसा कार्यक्रम क्यों बना दिया गया।

उनकी तरह और भी लोग हैं जिनसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा कि कैसे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ पूजा-पाठ करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन का उद्घाटन कर दिया। कभी ये लोग नए पार्लियमेंट के स्ट्रक्चर को ताबूत जैसा बता रहे हैं कि तो कभी ये पूछ रहे हैं कि इसका उद्घाटन पीएम ने ही क्यों किया।

अब इन्हीं सवालों को देखते हुए नेटीजन्स ने एक बर्नोल अभियान चलाया हुआ है। इसके तहत जिन-जिन को आज के कार्यक्रम के बाद मिर्ची लगी है। उन्हें वह लोग वर्चुअली बर्नोल बाँटकर शांत होने को कह रहे हैं।

एक यूजर ने नए संसद भवन, पीएम मोदी और हिंदू रीति रिवाजों को विरोध करने वाले विपक्ष के लिए कहा, “मोदी जी सेंगोल के साथ, विपक्ष बर्नोल के साथ।”

देख सकते हैं कि रिटायर्ड आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने शाहरुख खान की आड़ में पीएम मोदी के संसद में बैठने पर सवाल उठाए थे। ऐसे में उनके ट्वीट के नीचे बर्नोल मीम्स की बाढ़ आ गई। लोग कहने लगे- देखकर लग रहा है कि सूर्य प्रताप को जल्दी बर्नोल की जरूरत है।

इसी तरह आसिफ खान संसद भवन में संतों की मौजूदगी पर तंज वाले अंदाज में लिख रहे थे- “धर्मनिरपेक्ष भारत में आपका स्वागत है।” इस ट्वीट के नीचे एक ‘बेकार आदमी’ नाम के ट्विटर यूजर द्वारा पोस्ट किया गया- आखिरी बार जब तुम संसद में घुसे तो सब जानते हैं कि क्या हुआ था।

एक नेहरूवादी शांतनु नाम के यूजर ने ‘सेंगोल’ के समक्ष पीएम मोदी द्वारा किए गए प्रणाम का मजाक उड़ाया। उसने कहा कि मोदी नेहरू की छड़ी के आगे दंडवत प्रणाम कर रहा है। नेहरू को आजीवन कोसने के बाद आखिरार मोदी नेहरू की छड़ी के आगे झुक गया। ये ताकत है भारत के महान पुत्र नेहरू में।

इस पर शांतनु को लताड़ लगते हुए कहा गया कि ऐसे ही घटिया बर्ताव के कारण राहुल गाँधी डिस्क्वालिफाई हुआ। कॉन्ग्रेस जोकरों। जाकर बर्नोल ले लो और अपनी कॉमेडी पर उसे मल लो।

उल्लेखनीय है कि नए संसद भवन का उद्घाटन कार्यक्रम आज पूजा पाठ से शुरू होकर सर्वधर्म प्रार्थना के साथ समाप्त हुआ। इस दौरान साधु-संत भी मौजूद रहे। ऐसे में विपक्ष ने इस संसद भवन के धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाए। आरजेडी ने तो इसकी तुलना ताबूत से कर दी जबकि जेडीयू ने इस उद्घाटन को कलंक से लिखा जाने वाला इतिहास कहा। इसी तरह एसीपी की सुप्रिया सुले ने भी इस उद्घाटन कार्यक्रम पर सवाल खड़े किए।

‘तमिल संस्कृति को आगे बढ़ा रहे PM मोदी’: अधीनम के 293वें महंत ने की तारीफ़, ‘सेंगोल’ बनाने वाले 97 साल के वुम्मिडी भी बोले – ये गौरव का क्षण

मदुरै अधीनम के प्रमुख महंत ने नए संसद भवन के उद्घाटन में तमिल संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया है। श्री हरिहर देसिका स्वमिगल ने रविवार (28 मई, 2023) को कहा कि पीएम मोदी ने तमिल अधीनम को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित कर के तमिल संस्कृति को आगे बढ़ाया है। बता दें कि श्री हरिहर देसिका स्वमिगल ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सेंगोल’ भेंट किया था।

उन्होंने कहा, “नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का हिस्सा बन कर मैं काफी गौरव की अनुभूति कर रहा हूँ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से तमिल संस्कृति और तमिल जनता के साथ खड़े हैं। ऐसा करने वाले नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं।” बताते चलें कि स्वमिगल मदुरै अधीनम के 293वें महंत हैं। वहीं ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स’ के चेयरमैन वुम्मिडी सुधाकर ने नए संसद भवन में ‘सेंगोल’ की स्थापना को एक ऐतिहासिक क्षण करार दिया।

वुम्मिडी बंगारू चेट्टी परिवार के 97 वर्षीय वयोवृद्ध मुखिया ने कहा कि ये बहुत बड़े गौरव का क्षण है। लगभग एक घंटे तक चले वैदिक पूजा-पाठ के दौरान ‘सेंगोल’ को संसद में स्थापित किया गया। बता दें कि ये वही सेंगोल’ है, जिसे आज़ादी के बाद सत्ता हस्तांतरण के दौरान जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। नए संसद भवन की खासियत है कि इसमें 888 संसद सदस्य एक साथ बढ़ सकते हैं। भविष्य में संसदीय क्षेत्रों की संख्या बढ़ने पर भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।

बता दें कि भारत के नए संसद भवन का निर्माण TATA कंपनी ने किया है। इसमें एक बड़ा कंस्टीटूशन हॉल भी है, जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत को दर्शाया गया है। इसे 65,000 स्क्वायर मीटर के क्षेत्र में बनाया गया है। सीलिंग के लिए दमन एवं दीव से स्टील, उदयपुर से केसरिया हरा पत्थर, अजमेर से लाल ग्रेनाइट और अम्बाजी से सफ़ेद संगमरमर – नए संसद भवन में इन सबका इस्तेमाल किया गया है। अशोक स्तम्भ के लिए मैटेरियल महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लाया गया।

लोकसभा में मोर, राज्यसभा में कमल और प्रांगण में बरगद… हर तरफ भारतीय संस्कृति की झलक: नए संसद भवन में PM मोदी बोले- नया भारत नए लक्ष्य तय कर रहा

नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सदन को संबोधित किया। इस दौरान सदन में ‘मोदी… मोदी…’ के नारे गूँजे। प्रधानमंत्री ने भारतीय डाक विभाग के स्मारक डाक टिकट जारी किया। इसके बाद उन्होंने भारतीय वित्त विभाग द्वारा तैयार किए गए 75 रुपए का सिक्का जारी किया।

सदन में संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश की यात्रा में कुछ क्षण ऐसे आते हैं, जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कुछ तारीखें, समय के ललाट पर इतिहास का अमिट हस्ताक्षर बन जाती हैं। उन्होंने कहा, “आज ऐसा ही अवसर है। आज सुबह ही संसद परिसर में सर्वधर्म प्रार्थना हुई।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं सभी देशवासियों को भारतीय लोकतंत्र के इस स्वर्णिम क्षण की बधाई देता हूँ। ये सिर्फ एक भवन नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। ये विश्व को भारत के दृढ़ संकल्प का संदेश देता हमारे लोकतंत्र का मंदिर है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए रास्तों पर चलकर ही नए कीर्तिमान गढ़े जाते है। नया भारत नए लक्ष्य तय कर रहा है। नया जोश है, नया उमंग है, नया सफर है, नई सोच है। दिशा नई है, दृष्टि नई है, संकल्प नया है, विश्वास नया है। उन्होंने कहा, जो रुक जाता है, उसका भाग्य भी रुक जाता है। जो चलता रहता है, उसका भाग्य भी चलता रहता है। इसलिए चलते रहो।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के बाद भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की थी। वो यात्रा कितने ही उतार-चढ़ाव से होते हुए, कितनी ही चुनौतियों को पार करते हुए आजादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले 25 सालों में भारत की आजादी की 100वीं वर्षगाँठ होगी। इस अवसर पर भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य होना चाहिए।

संसद भवन की नई इमारत की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा, “संसद की नई इमारत इस प्रयास का जीवंत प्रतीक बनी है। इस भवन में विरासत भी है, वास्तु भी, कला भी है, कौशल भी है। इसमें संस्कृति और संविधान के स्वर भी हैं। लोकसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आधारित है। राज्यसभा का हिस्सा राष्ट्रीय फूल कमल पर आधारित है और संसद के प्रांगण में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी है। देश के अलग-अलग हिस्सों की विविधता को नए भवन में समाहित किया है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत न सिर्फ लोकतंत्र का सबसे बड़ा देश है, बल्कि मदर ऑफ डेमोक्रेसी (लोकतंत्र की जननी) भी है। यह वैश्विक लोकतंत्र की नींव भी है। लोकतंत्र भारत का ‘संस्कार’, विचार और परंपरा है। नए भवन को लेकर उन्होंने कहा, “यह भवन आधुनिक सुविधाओं और नवीनतम उपकरणों से सुसज्जित है। इसने 60,000 से अधिक मजदूरों को रोजगार दिया है। हमने उनकी कड़ी मेहनत का सम्मान करने के लिए एक डिजिटल गैलरी बनाई है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने अपने 9 साल की रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया। उन्होंने कहा कि ये 9 साल भारत में नवनिर्माण के रहे हैं। गरीब कल्याण के रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नौ साल में गरीबों के 4 करोड़ घर बनाने का भी संतोष है। मुझे बीते नौ साल में बने 11 करोड़ शौचालयों का भी संतोष हैं, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा की रक्षा की, उनका सिर ऊंचा कर दिया।

उन्होंने आगे कहा, “बीते नौ साल में गाँवों को जोड़ने के लिए चार लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ। हमने पानी की एक-एक बूँद बचाने के लिए 50,000 से ज्यादा अमृत सरोवरों का निर्माण किया है। हमने नई संसद भवन का निर्माण किया है तो देश में 30,000 से ज्यादा नए पंचायत भवन भी बनाए हैं। हमारी प्रेरणा एक ही है- देश का विकास, देश के लोगों का विकास।”

नए संसद भवन में अपने भाषण को खत्म करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं मुलाकात की और उनसे बातचीत की। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हैं।

इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश पढ़ा। उन्होंने कहा, “इस बात का संतोष है कि नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। संसद का नया भवन नीतियों के माध्यम से हासिए पर पड़े हुए लोगों सहित सभी देशवासियों की आवश्यकताओं का समाधान सुनिश्चित करेगा। ये लोकतंत्र का पालना है।”

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संदेश को पढ़ते हुए हरिवंश नारायण सिंह ने कहा, “नया संसद भवन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। नई संसद गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक है। देश के हर कोने से लाई गई संस्कृति की भव्यता है। यह गौरवशाली भवन नया इतिहास लिखेगा।”

वहीं, सदन को संबोधित करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि पूरा देश आज इस पल का गवाह बन रहा है। नए वातावरण में नए विचारों का सृजन होगा. ऐसा मेरा विश्वास है। यह भवन ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, ग्रीन वातावरण, कला संस्कृति, वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। इस भवन में प्रत्येक भारतीय को अपने राज्य की संस्कृति की झलक दिखेगी।

राम चरण ने वीर सावरकर की जयंती पर की फिल्म की घोषणा, कहा – वो महान स्वतंत्रता सेनानी: ‘The Kashmir Files’ के निर्माता से मिलाया हाथ

‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल ने तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता राम चरण के साथ हाथ मिलाया है। दोनों मिल कर एक नई फिल्म का निर्माण करेंगे, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित होगा। इस फिल्म का नाम होगा ‘The India House’, जिसमें निखिल सिद्धार्थ और अनुपम खेर मुख्य भूमिकाओं में होंगे। फिल्म का टाइटल अनाउंसमेंट वीडियो भी जारी कर दिया गया है, जो खासा पसंद किया जा रहा है।

राम चरण ने इसकी घोषणा करते हुए लिखा, “हमारे महान स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की 140वीं जयंती पर हम अपनी अगली पैन-इंडिया फिल्म की घोषणा कर रहे हैं – The India House.” बता दें कि राम वामसी कृष्णा इस फिल्म का निर्देशन करेंगे। राम चरण की कंपनी ‘V मेगा पिक्चर्स’ और अभिषेक अग्रवाल की ‘अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स’ मिल कर इस फिल्म को बना रही है। फिल्म लंदन में हुए एक बम ब्लास्ट के इर्दगिर्द घूमती नजर आ रही है।

इस फिल्म में अनुपम खीर प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा का किरदार निभाएँगे, वहीं निखिल सिद्धार्थ के किरदार का नाम ‘शिवा’ होगा। बता दें कि क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रणेताओं में से एक थे, जिन्होंने दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने की वकालत की। उनका कहना था कि आक्रामकता का विरोध करना सिर्फ न्यायसंगत ही नहीं है, बल्कि ज़रूरी भी है। सन् 1905 में उन्होंने ‘India House’ और ‘The Indian Sociologist’ की स्थापना की।

आगे चल कर यही इंडिया हाउस क्रांतिकारियों की बैठकों का एक प्रमुख स्थल बन गया। ये उस समय ब्रिटेन में भारतीय राष्ट्रवाद का बड़ा स्थल था। काशी के ब्राह्मणों द्वारा उन्हें ‘पंडित’ की उपाधि से नवाजा गया। वो पेशे से अधिवक्ता थे। वो वैदिक दर्शन के विद्वान भी थे। वो कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा अंग्रेजों से बार-बार गुहार लगाए जाने के फैसलों के एकदम खिलाफ थे। 20वीं शताब्दी की शुरुआत की कहानी दिखाने वाली उन पर आधारित नई फिल्म में दिखाया जाएगा कैसे ‘इंडिया हाउस’ को जला दिया गया था।

साथ ही स्वतंत्रता संग्राम की गाथा के बीच एक प्रेम कहानी को भी दिखाया जाएगा। ये फिल्म भारत की कई प्रमुख भाषाओं में रिलीज होगी और विदेशी भाषाओं में भी इसे बनाया जाएगा। कैमरून ब्रायसन इसकी सिनेमेटोग्राफी का कार्य देखेंगे। फिल्म से जुड़े अन्य कलाकारों की डिटेल्स आगे सार्वजनिक की जाएगी। श्यामजी कृष्ण वर्मा के बाद वीर सावरकर लंदन में क्रांतिकारियों के नेता बने। यही कारण है कि उनकी जयंती पर फिल्म की घोषणा की गई है।

PM मोदी ने ‘मन की बात’ के 101वें एपिसोड में की युवा संगम से लेकर जल संकट तक की चर्चा, कहा- ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम देश को जोड़ने वाला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (28 मई 2023) को अपनी ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) का 101वाँ एपिसोड पूरा किया। इस एपिसोड में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया। इस दौरान पीएम ने केंद्र की भाजपा द्वारा की गई पहल और सफलताओं का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने विनायक दामोदर सावरकर को भी याद किया। सावरकर की आज जयंती है।

बता दें कि 30 अप्रैल 2023 को पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 100 एपिसोड किया था। इस एपिसोड का सीधा प्रसारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (UN Head Quarter) सहित पूरी दुनिया में किया गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ का ये एपिसोड सेकेंड सेंचुरी का प्रारंभ है। पिछले महीने देश ने इसकी स्पेशल सेंचुरी को सेलिब्रेट किया था। उन्होंने कहा कि देशवासियों की भागीदारी ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत है। पिछले एपिसोड के एक वाकये को शेयर किया।

पीएम ने कहा, “जब ‘मन की बात’ का प्रसारण हुआ तो उस समय दुनिया के अलग-अलग देशों में, अलग-अलग Time zone में… कहीं शाम हो रही थी तो कहीं देर रात थी। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में लोगों ने 100वें एपिसोड को सुनने के लिए समय निकाला। मैंने हजारों मील दूर न्यूजीलैंड का वो वीडियो भी देखा, जिसमें 100 वर्ष की एक माताजी अपना आशीर्वाद दे रही हैं।”

सारवरकर को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वीर सावरकर का व्यक्तित्व दृढ़ता और विशालता से समाहित था। उनके निर्भीक और स्वाभिमानी स्वाभाव को गुलामी की मानसिकता बिल्कुल भी रास नहीं आती थी। स्वतंत्रता आंदोलन ही नहीं, सामाजिक समानता और सामाजिक न्याय के लिए भी वीर सावरकर ने जितना कुछ किया उसे आज भी याद किया जाता है।”

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के तहत चलने वाले कार्यक्रम ‘युवा संगम’ के आयोजन को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह युवाओं का सबसे बड़ा मंच है। इसको लेकर पीएम ने अरुणाचल प्रदेश के छात्र ग्यामर न्योकुम और बिहार के सासाराम जिले की विशाखा सिंह से फोन पर बात भी की। पीएम मोदी ने दोनों से बात करने के दौरान युवा संगम से जुड़े उनके अनुभव की जानकारी ली और इस पर ब्लॉग लिखने की सलाह दी।

विशाखा सिंह ने युवा संगम की अपनी यादें पीएम मोदी से साझा करते हुए कहा कि इसके चलते तमिलनाडु में उनके कई दोस्त भी बन गए हैं। विशाखा सिंह ने तमिलनाडु के राज्यपाल से मुलाकात और इसरो (ISRO) के दफ्तर में जाने को यादगार बताया। पीएम से बातचीत के दौरान विशाखा सिंह ने तमिलनाडु के खानपान से लेकर संस्कृति तक के अपने अनुभव साझा किए।

जी-7 देशों की बैठक में जापान के बारे में बोलते हुए पीएम ने कहा, “कुछ दिन पहले ही मैं जापान में हिरोशिमा में था। वहां मुझे Hiroshima Peace Memorial Museum में जाने का अवसर मिला। ये एक भावुक कर देने वाला अनुभव था। जब हम इतिहास की यादों को संजोकर रखते हैं तो वो आने वाली पीढ़ियों की बहुत मदद करता है। कई म्यूजियम में हमें नए सबक मिलते हैं तो कई बार बहुत कुछ सीखने को मिलता है।”

इस दौरान पीएम ने गुरुग्राम के म्यूजियम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “गुरुग्राम में एक अनोखा संग्रहालय है – Museo Camera, इसमें 1860 के बाद के 8 हजार से ज्यादा कैमरों का collection मौजूद है। तमिलनाडु के Museum of Possibilities को हमारे दिव्यांगजनों को ध्यान में रखकर design किया गया है। मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय एक ऐसा museum है, जिसमें 70 हजार से भी अधिक चीजें संरक्षित की गई हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पहले ही भारत में International Museum Expo का भी आयोजन किया था। इसमें दुनिया के 1200 से अधिक Museums की विशेषताओं को दर्शाया गया। हमारे यहां भारत में अलग-अलग प्रकार के ऐसे कई Museums हैं, जो हमारे अतीत से जुड़े अनेक पहलुओं को प्रदर्शित करते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “2010 में स्थापित Indian Memory Project एक तरह का Online Museum है। ये जो दुनियाभर से भेजी गयी तस्वीरों और कहानियों के माध्यम से भारत के गौरवशाली इतिहास की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। विभाजन की विभिषिका से जुड़ी स्मृतियों को भी सामने लाने का प्रयास किया गया है।”

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “बीते वर्षों में भी हमने भारत में नए-नए तरह के museum और memorial बनते देखे हैं। स्वाधीनता संग्राम में आदिवासी भाई-बहनों के योगदान को समर्पित 10 नए museum बनाए जा रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और उसके कारण होने वाले जल संकट पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम सबने एक कहावत कई बार सुनी होगी, बार-बार सुनी होगी – बिन पानी सब सून। बिना पानी जीवन पर संकट तो रहता ही है, व्यक्ति और देश का विकास भी ठप्प पड़ जाता है। भविष्य की इसी चुनौती को देखते हुए आज देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “1965 के युद्ध के समय, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया था। बाद में अटल जी ने इसमें जय विज्ञान भी जोड़ दिया था। कुछ वर्ष पहले, देश के वैज्ञानिकों से बात करते हुए मैंने जय अनुसंधान की बात की थी। ‘मन की बात’ में आज बात एक ऐसे व्यक्ति की, एक ऐसी संस्था की, जो जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान, इन चारों का ही प्रतिबिंब है।”

वीर सावरकर को नए संसद भवन में श्रद्धांजलि, PM नरेंद्र मोदी ने कहा – उनके त्याग, साहस और संकल्प-शक्ति की गाथाएँ आज भी देती हैं प्रेरणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर उनकी तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी भी उपस्थित रहे। इन बड़े नेताओं के अलावा कई अन्य सांसदों ने भी वीर सावरकर को उनकी जन्म-जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वीर सावरकर का जन्म 28 मई, 1889 को महाराष्ट्र के नासिक स्थित भागपुर में हुआ था।

इस तरह वीर सावरकर के जन्म के 140 वर्ष पूरे हो चुके हैं। ध्यान देने वाली बात है कि रविवार (28 मई, 2023) को ही नए संसद भवन का उद्घाटन भी हुआ है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चोल राजदंड ‘सेंगोल’ को तमिल ‘अधीनम’ पुरोहितों की मौजूदगी में इसमें स्थापित किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य शीर्ष नेताओं के साथ वीर सावरकर की तस्वीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की, और हाथ जोड़ कर उन्हें नमन किया।

‘मन की बात’ के 101वें एपिसोड में भी पीएम मोदी ने वीर सावरकर को याद किया और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों की चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर सावरकर के त्याग, साहस और संकल्प-शक्ति की गाथाएँ आज भी हमें प्रेरित करती हैं। उन्होंने उस दिन को याद किया, जब वो अंडमान में उस कोठरी में गए थे जहाँ वीर सावरकर को अंग्रेजों ने कालापानी की सज़ा के दौरान डाला था। पीएम मोदी ने कहा कि वीर सावरकर का व्यक्तित्व वीरता और विशालता में समाहित था, उनके निर्भीक और स्वाभिमानी स्वभाव को गुलामी की मानसिकता रास नहीं आती थी।

बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, स्वतंत्रता आंदोलन के अलावा सामाजिक न्याय और समानता के लिए भी वीर सावरकर ने काफी कुछ किया। बता दें कि ‘हिंदुत्व’ शब्द को जन-जन तक पहुँचाने वाले वीर सावरकर को अंग्रेजों ने आजीवन कारावास की दो-दो सज़ाएँ सुनाई थीं। उन्होंने अपने भाई के साथ मिल कर ‘अभिनव भारत’ सोसाइटी की स्थापना की थी। उनकी पुस्तक ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था।