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’10 भागों में होगी महाभारत फिल्म, यही मेरे जीवन का उद्देश्य’: ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ के डायेरक्टर एसएस राजामौली

भारतीय सिनेमा को ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले मशहूर डायेरक्टर एसएस राजामौली (SS Rajamouli) की अगली फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच राजामौली ने खुलासा किया है कि वह लंबे समय से धर्मग्रन्थ महाभारत (Mahabharata) पर फिल्म बनाने का सपना देख रहे हैं और इसे जल्द ही पूरा भी करने वाले हैं।

एसएस राजामौली ने हैदराबाद में 14 से 16 अप्रैल 2023 को हुए एक इवेंट में यह बात कही। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस दौरान उनसे महाभारत को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या वो टेलीविजन पर 266-एपिसोड के शो महाभारत को एक फिल्म में बदलने के अपने लंबे समय के सपने को जल्द पूरा करेंगे? क्या यह उनके आगामी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने वाला है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत मुश्किल सवाल है। अगर मैं महाभारत बनाने की बात करता हूँ, तो मुझे महाभारत के संस्करण जो देश में उपलब्ध हैं, उन सभी को पढ़ने में एक साल लग जाएगा। मैं उन सभी को पढ़ना चाहता हूँ। मैं केवल यह ​मान सकता हूँ कि यह फिल्म 10 भागों में होगी।”

उन्होंने आगे कहा कि ये उनकी जिंदगी का उद्देश्य है। अब तक जो भी फिल्में वो बनाते आए हैं, उसने उन्हें ‘महाभारत’ को कैसे बनाना है, इसके बारे में सिखाया है। राजमौली से जब पूछा गया कि क्या वो अपने दर्शकों और इस देश के लोगों के लिए यह फिल्म बनाना चाहते हैं तो डायरेक्टर ने मुस्कुराकर कहा कि वो खुद के लिए महाभारत बनाना चाहते हैं। इस इंटरव्यू को Bones to Blockbusters यूट्यूब चैनल पर पूरा अपलोड किया गया है।

वहीं, इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान राजामौली ने बताया था कि उन्होंने कई धर्मग्रन्थों का अध्ययन किया है। तीर्थयात्रा की है। भगवा वस्त्र भी धारण किया है।

बता दें कि एसएस राजामौली की फिल्म ‘आरआरआर’ को देश के साथ-साथ दुनिया भर से खूब सराहना मिली। ‘आरआरआर’ के अलावा राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली’ और ‘बाहुबली-2’ को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था। जनवरी 2023 में राजामौली ने न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता था। उनकी फिल्म ‘आरआरआर’ के गाने ‘नाटू-नाटू’ ने ऑस्कर अवॉर्ड जीता है।

राजस्थान में लिथियम भंडार की खबरों का GSI ने किया खंडन, कहा- सर्वे के बाद बताएँगे क्या मिला: कॉन्ग्रेसी मंत्री ने दावा कर थपथपाई थी गहलोत सरकार की पीठ

कॉन्ग्रेस नेता और राजस्थान सरकार में खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने प्रदेश में लिथियम भंडार मिलने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि राजस्थान में लिथियम का जो भंडार मिला है वह जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कई गुना अधिक बड़ा है। हालाँकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने इस दावे को पूरी तरह से निराधार बताया है।

प्रमोद जैन भाया ने ANI से हुई बातचीत में कहा था, “राजस्थान में जो खनिज संपदा मिली है, वह प्रदेश की जनता का सौभाग्य है। राजस्थान के सीएम का खनिज भंडारों के अधिक से अधिक सर्वे और इसका जनता के लिए इस्तेमाल पर फोकस रहा है। नए लोगों को रोजगार मिले इस भावना को ध्यान में रखते हुए और माइनिंग सेक्टर को बढ़ाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया गया। इसी का परिणाम रहा कि नागौर जिले के डेगाना तहसील में जीएसआई का सर्वे। इस सर्वे में लिथियम के जो भंडार मिले हैं, वह जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से कई गुना अधिक हैं।”

इस दावे के बाद अखबारों से लेकर मीडिया तक में राजस्थान में लीथियम का भंडार मिलने की खबरें छाई हुई थीं। अब इस पर जीएसआई का बयान आया है। इस बयान में कहा गया है कि जीएसआई द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में लीथियम के बड़े भंडार की खोज को लेकर विभिन्न अखबारों में प्रकाशित खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। लिथियम के भंडार की खोज की ऐसी कोई सूचना न तो क्षेत्रीय मुख्यालय की ओर से और न ही जीएसआई के केंद्रीय मुख्यालय की ओर से जारी की गई थी।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह राजस्थान के नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र में टंगस्टन, लिथियम समेत अन्य दुर्लभ धातुओं की खोज में जुटा हुआ है। धातुओं की खोज का यह अभियान साल 2019 से जारी है। इसके अंतर्गत क्षेत्र में खुदाई भी की जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद धातुओं की मात्रा खुदाई का काम पूरा होने और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

गौरतलब है कि इस साल फरवरी में जीएसआई ने जम्मू-कश्मीर के में लिथियम के भंडार की खोज की थी। यह भंडार रियासी जिले के सलाल-हैमाना क्षेत्र में है। लिथियम का यह भंडार करीब 59 लाख टन का है। इस भंडार से चीन जैसे देशों पर भारत की निर्भरता खत्म होने की बात कही जा रही है।

क्या है लिथियम

आप जिस मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं उसमें लगी बैटरी बनाने में लिथियम का उपयोग किया जाता है। वास्तव में, लिथियम दुनिया की सबसे मुलायम और सबसे हल्की धातु है। इसे चाकू से काटा जा सकता है और यह आसानी से पानी में तैरती भी है। लेकिन इसका महत्व इसके मुलायम होने या पानी में तैरने से नहीं, बल्कि बैटरी में उपयोग होने के चलते बहुत अधिक बढ़ गया है। लिथियम रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदल देता है।

आज घर के सभी चार्जेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैटरी से चलने वाले हर गैजेट में लगी बैटरी में लिथियम का उपयोग होता है। दुनिया अब ग्रीन एनर्जी की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर अन्य सभी उपकरणों में लगने वाली बैटरी की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। पूरी दुनिया में हो रही माँग में वृद्धि के चलते ही इसे ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जाता है। एक टन लिथियम की कीमत करीब 57.36 लाख रुपए है।

एक से ज्यादा निकाह (शादी) पर एक्शन की तैयारी में असम सरकार: बनेगी एक्सपर्ट कमिटी, CM हिमंता बिस्वा सरमा का ऐलान

असम सरकार राज्य में बहुविवाह रोकने की तैयारी कर रही है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (9 मई 2023) को कहा है कि राज्य सरकार द्वारा बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है या नहीं, इसकी जाँच करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया गया है। इससे पहले असम में बाल विवाह को लेकर भी बड़ी कार्रवाई हो चुकी है।

दरअसल, बहुविवाह रोकने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता विस्वा सरमा ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा:

“असम सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला किया है। यह समिति इस बात की जाँच करेगी कि क्या विधानसभा को राज्य में बहुविवाह पर रोक लगाने का अधिकार है? यह समिति भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 25 तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एक्ट 1937 के प्रावधानों की जाँच करेगी। यह समिति सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विचार-विमर्श भी करेगी। ताकि सही निर्णय लिया जा सके।”

बता दें कि इससे पहले शनिवार (6 मई 2023) को कर्नाटक के कोडागु जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था “हमें समान नागरिक संहिता भी लागू करना होगा। मुस्लिम महिलाओं और बेटियों की चार से ज्यादा शादियाँ कराई जाती हैं। ये कैसा चलन है? दुनिया में ऐसा नियम नहीं होना चाहिए।”

सीएम हिमंता ने यह भी कहा था, “यहाँ भी हमें समान नागरिक संहिता लानी होगी और इस चलन को समाप्त करना होगा। मुस्लिम बेटियों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाया जाना चाहिए, बच्चा पैदा करने वाली मशीन नहीं। बीजेपी ने सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता पर काम करने का वादा किया है। इसके लिए मैं भाजपा को धन्यवाद देता हूँ।”

गौरतलब है कि देश में मुस्लिमों को बहुविवाह यानी कि एक से अधिक निकाह करने की छूट है। मुस्लिमों को छोड़कर कोई अन्य व्यक्ति यदि एक से अधिक विवाह करता है तो इसे IPC की धारा 494 और 495 के तहत दण्डनीय अपराध माना जाता है। वहीं, मुस्लिम IPC की धारा 494 के तहत पहली बीवी की सहमति से 4 निकाह कर सकता है।

दरअसल, मुस्लिमों को यह छूट मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) 1937 के तहत दी गई है। मुस्लिम महिलाओं को हालाँकि 4 शादियाँ करने का अधिकार नहीं है। यदि किसी मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करनी है तो उसे पहले शौहर को तलाक देना होगा।

बाल विवाह के खिलाफ असम सरकार का एक्शन

बता दें कि इस साल की शुरुआत में असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बाल विवाह के खिलाफ कठोर कदम उठाए थे। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी करते हुए बाल विवाह करने और कराने वालों को गिरफ्तार किया था।

आँकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल 2021 से फरवरी 2023 तक असम में बाल विवाह के 4670 मामले सामने आए। इसमें से 3483 लोगों की गिरफ्तार किया गया। बड़ी बात यह है कि इसमें से 3098 लोगों को इस साल के शुरुआती दो महीनों (जनवरी-फरवरी 2023) में गिरफ्तार किया गया।

‘ब्राह्मण संपादक’ रूपा झा ने तो माफ कर दिया, पर क्या बिहार के ‘एक्टिविस्ट पत्रकार’ वेद प्रकाश के दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी

बिहार में हाल के समय में यूट्यूबर पत्रकारों की एक खेप तैयार हुई है। मनीष कश्यप के मामले के बाद से ये लगातार चर्चा में है। इनमें मनीष कश्यप, रवि भट्ट, निभा सिंह, अभिषेक तिवारी, अभिषेक मिश्रा, सूरज, रवि रंजन जैसे कुछ यूट्यूबर पत्रकार इसलिए चर्चित रहे हैं कि वे ग्राउंड जीरो पर उतरकर व्यवस्था की खामियों को उजागर कर देते हैं। दूसरी ओर वेद प्रकाश (Ved Prakash) जैसे यूट्यूबर हैं जो खुद को पत्रकार से पहले ‘एक्टिविस्ट’ बताते हैं। यहाँ तक कि उनके यूट्यूब चैनल का नाम भी ‘द एक्टिविस्ट (@theActivist)’ ही है। 14 लाख से ज्यादा लोग उनके चैनल को फाॅलो करते हैं। करीब 5000 वीडियो इस यूट्यूब चैनल पर मौजूद हैं।

इनमें से ज्यादातर वीडियो में आप पाएँगे कि ये एक खास राजनीतिक एजेंडे के साथ बनाए गए हैं। यह वही एजेंडा है जिसे दलितों के नाम पर, पिछड़ों के नाम पर, मुस्लिमों के नाम पर राजनीति करने वाले आगे बढ़ाते रहते हैं। वेद प्रकाश यूट्यूबर पत्रकार का चोला ओढ़कर इसे बढ़ाते हैं। वे अपने वीडियो में ‘जय भीम’ कहना नहीं भूलते। अगड़े-पिछड़े की बात करने से नहीं चूकते। यहाँ तक कि छात्रों से यह भी पूछ लेते हैं कि वे सरस्वती की पूजा क्यों करते हैं। कुल मिलाकर वे अपने वीडियो में जातीय पक्ष को उभार देने के लिए वह सब कुछ करते हैं जिसकी सामान्य तौर पर पत्रकारों और पत्रकारिता से अपेक्षा नहीं की जाती है।

बिहार की जमीन पर वीडियो बना-बनाकर अगड़ा-पिछड़ा करने वाले वेद प्रकाश अब एक माफीनामे को लेकर चर्चा में हैं। यह माफीनामा उन्होंने खुद सोशल मीडिया में पोस्ट किया है। माफी उन्होंने बीबीसी के एक ‘ब्राह्मण संपादक’ से माँगी है। उसी ब्राह्मण से जिस पर वे अपने वीडियो में मीडिया व अन्य संस्थानों पर कब्जे का आरोप लगाते रहते हैं। जिसे हर समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

दरअसल वेद प्रकाश को यह माफी एक कानूनी मामले में राहत पाने के लिए माँगनी पड़ी है। इस मामले में भी वे दलित बनाम ब्राह्मण एजेंडा को बढ़ाने के कारण ही फँसे थे। वेद प्रकाश ने माफीनामे में लिखा है, “दलित एक्टिविस्ट और जर्नलिस्ट होने के नाते मीना (Meena Kotwal) को न्याय दिलाने के मकसद से मैंने इस संबंध में खबर बनाई और बीबीसी के इंडियन लैंग्वेज हेड रूपा झा को इस बात का जिम्मेदार बताते हुए उन पर एक पोस्ट किया। जिसकी भाषा उचित नहीं थी और मेरे पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्तिजनक कमेंट्स कर दिए। इस पूरे मामले में रूपा झा ने दिल्ली के बाराखंबा थाने में मुकदमा दर्ज किया था।”

माफीनामे में वेद प्रकाश ने कहा है कि जाँच के दौरान वे अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं पेश कर पाए। हालाँकि इसका जिम्मेदार उन्होंने मीना कोटवाल और उनके पति राजा पांडेय को बताया है। आगे उन्होंने लिखा है, “आज रूपा जी और हमारी आपसी सहमति से केस को खत्म कर दिया गया है। मीना और उसके पति राजा पांडेय द्वारा गलत सूचना दी गई, जिसके आधार पर मैंने पोस्ट किया एवं मेरे पोस्ट और उस पर आने वाली आपत्तिजनक प्रतिक्रिया से रूपा जी की भावनाएँ आहत हुई। इसके लिए मैं क्षमा/खेद और दुख प्रकट करता हूँ।”

वेद प्रकाश ने यह माफीनामा 9 मई 2023 को पोस्ट किया है। पोस्ट के साथ दो तस्वीर भी लगाई है। इसमें से एक में वे मीना तो दूसरे में रूपा झा के साथ दिख रहे हैं। पोस्ट में वेद प्रकाश ने बताया है कि यह केस करीब चार साल से चल रहा था। यह भी दावा किया है कि इस मामले को उठाने और रूपा झा को इसका जिम्मेदार बताने के लिए मीना कोटवाल और उनके पति ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर संपर्क किया था। गौर करने वाली बात यह है कि बीबीसी ने उस समय भी मीना की विदाई का कारण उनका जाॅब काॅन्ट्रैक्ट पूरा होना बताया था। लेकिन उस समय ब्राह्मण बनाम दलित का एजेंडा चलाने वालों ने इसे खारिज कर दिया था। अब कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आश्चर्यजनक तौर पर वेद प्रकाश ने इसे कबूल कर लिया है। इतना ही नहीं मीना और उनके पति पर यह भी आरोप लगाया है कि जब नई दिल्ली की अदालत से जमानत पाने के लिए गारंटर की जरूरत पड़ी और उन्होंने संपर्क किया तब भी पति-पत्नी ने इनकार कर दिया।

उल्लेखनीय है कि जिस मीना कोटवाल को इस प्रकरण का वेद प्रकाश कसूरवार बता रहे हैं, वह इस समय ‘मूकनायक’ नाम से एक वेबसाइट चलाती हैं। पहले बीबीसी में रह चुकी हैं।वायर और द प्रिंट जैसे वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल के लिए लिखती हैं। उनकी पत्रकारिता के मूल में वही सब कुछ है जो वेद प्रकाश की कथित पत्रकारिता का आधार है। वेद प्रकाश के माफीनामे वाले पोस्ट से यह भी पता चलता है कि मीना भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) में उनकी जूनियर थीं।

ऐसे वक्त में जब बिहार के ही एक यूट्यूबर पत्रकार मनीष कश्यप पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया है, उसी राज्य में पत्रकारिता के नाम पर अगड़ा-पिछड़ा एजेंडा चलाने वाले यूट्यूबर पत्रकार वेद प्रकाश को माफ कर देना रूपा झा की सहृदयता है। लेकिन सवाल है कि पत्रकार से पहले खुद को एक्टिविस्ट कहने वाले वेद प्रकाश की नीयत और सोच में इससे फर्क पैदा होगा? वैसे पत्रकार के ‘एक्टिविस्ट’ बनने के जोखिम बहुत सारे हैं, इस फेर में उसे पता भी नहीं चलता कि वह कब एक पक्ष बन गया, फिर भी एक्टिविस्ट से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज के सभी वर्गों की आवाज बनेगा। लेकिन जो एक्टिविस्ट से पहले भी ‘दलित’ जोड़े, एक माफीनामे वाले पोस्ट में ‘जय भीम’ जोड़ने के लिए दर्जन बार एडिट कर ले, लगता नहीं कि उसके दिमाग से ‘जाति’ जा पाएगी। आज भले उसने कानूनी पचड़े से बचने के लिए मीना कोटवाल प्रकरण में जाति का एंगल ठूँसने के लिए माफी माँग ली हो, लेकिन कल को फिर जैसे ही उसे मीडिया से निकाली गई किसी मीना में दलित और किसी रुपा में ब्राह्मण दिखेगा, वह दोबारा मीडिया पर ब्राह्मणों के कब्जे का उतने ही जोर से प्रलाप करेगा।

छत्तीसगढ़ में ₹2000 करोड़ के शराब घोटाले की आँच CM भूपेश बघेल तक: NAN घोटाले के जिस आरोपित IAS को बचाने का उन पर है आरोप, वो इसका भी सूत्रधार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 6 मई 2023 को कॉन्ग्रेस नेता एवं रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर को शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। इस घोटाले की आँच अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) तक पहुँच रही है। जिन अधिकारियों की देखरेख में 2000 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ, उन्हें बचाने का आरोप सीएम बघेल पर लगते रहे हैं।

ED ने अनवर की गिरफ्तार के बाद कहा था कि अनवर ढेबर शराब कारोबार का सरगना है। वहीं, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा उस पैसे का प्रबंधन करते थे। एजेंसी ने दावा किया था कि शराब घोटाले की अवैध कमाई का इस्तेमाल चुनावों में किया गया। IAS टुटेजा वर्तमान में छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

अनिल टुटेजा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खास माने जाते हैं। ये वही अधिकारी हैं, जिनका नाम राज्य के NAN घोटाले में सामने आया था। हालाँकि, भूपेश बघेल ने इन पर कार्रवाई करने के बजाए, इन्हें उद्योग एवं वाणिज्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग में संयुक्त सचिव का पद दे दिया। आरोप है कि सीएम बघेल टुटेजा को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

दरअसल, ED ने पहले इस मार्च में कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके साथ ही विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान यह निकल कर सामने आया कि साल 2019 से 2022 के बीच 2000 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के किया गया है। ED ने इसके सबूत भी एकत्र किए हैं।

ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग जाँच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर की आड़ में उच्च स्तर के राजनीतिक अधिकारियों और नौकरशाहों द्वारा अवैध काम को अंजाम दिया जा रहा था। इसके लिए उन लोगों ने व्यक्तियों एवं संस्थाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया था।

दरअसल, अनवर ढेबर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर बेहिसाब देसी शराब बनवाना शुरू किया था और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचता था। इस तरह वह सरकारी खजाने में एक रुपए भी जमा किए बिना बिक्री की सारी आय खुद रख लेता था। 2019 से 2022 के बीच यह अवैध बिक्री राज्य की कुल शराब बिक्री का लगभग 30-40 प्रतिशत थी।

इस घोटाले को तीन तरीके से अंजाम दिया गया। पहला सरकारी शराब की बोतलों पर 70-150 रुपए प्रति केस अनवर दुकानदारों से कमीशन लेता था। दूसरे पैटर्न में वह नकली शराब बनाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाता था और उसका पैसा खुद रखता था। तीसरा पैटर्न था कि लाइसेंस में कमीशन लेता था। यह एक वार्षिक कमीशन था, जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था।

छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री 800 सरकारी दुकानों के जरिए की जाती है। निजी दुकानों को शराब बेचने का अधिकार नहीं है। दुकान चलाने वाले लोगों के मैन पावर से लेकर कैश कलेक्शन तक का काम राज्य की सरकारी कंपनी छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) देखती है। अनवर ढेबर अपने राजनीतिक आकाओं एवं अधिकारियों के सहयोग से CSMCL के एक आयुक्त और एमडी तक पहुँच बनाने में कामयाब हो गया।

ईडी का कहना है कि सिंडिकेट में राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह, नेता और आबकारी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। फरवरी 2019 में ITS अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी राज्य सरकार के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) में शामिल हुए। ढेबर के कहने पर तीन महीने के भीतर त्रिपाठी को इसका प्रबंध निदेशक बना दिया गया। त्रिपाठी का काम था- रिश्वत संग्रह को अधिकतम करना। आईएएस अधिकारी विकास अग्रवाल पैसा इकट्ठा करने और आईएएस अधिकारी अरविंद सिंह को रसद इकट्ठा करने के काम में लगाया गया था।

इस सिंडिकेट में मैनपावर का इस्तेमाल अग्रवाल के एक सहयोगी की कंपनी सुमसेट फैसिलिटीज लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई थी। होलोग्राम का ठेका प्रिज्म होलोग्राफी एंड फिल्म्स सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कैश कलेक्शन का काम टॉप्स सिक्योरिटीज को दिया गया था, जिसके मालिक सिद्धार्थ सिंघानिया थे, जो अग्रवाल के करीबी सहयोगी थे।

जाँच में ED ने पाया कि मार्च 2019 में देशी शराब निर्माता कंपनी छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड ने ढेबर और त्रिपाठी से मुलाकात की। डिस्टिलर्स को 75 रुपए प्रति केस कमीशन देने का आदेश दिया गया। बदले में ढेबर ने अपनी उधार दरों को बढ़ाने का वादा किया। सिंडिकेट ने कमीशन में एक बड़ी राशि एकत्र की। इसका एक बड़ा हिस्सा एक राजनीतिक दल को दिया गया था।

इतना सब कुछ फिक्स करने के बाद सिंडिकेट ने बेहिसाब कच्ची शराब बनाना शुरू कर दिया। इसे सरकारी दुकानों पर बेचा जा रहा था। इन कच्ची शराब को असली दिखाने के लिए इन पर डुप्लीकेट होलोग्राम भी लगाया गया। डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं और एक डिस्टिलर को सप्लाई की गईं, जो उन्हें भरने का काम करता था।

ढेबर ने मासिक लक्ष्य निर्धारित किए। डिस्टिलर्स द्वारा हर महीने 800 पेटी देशी शराब से लदे 200 ट्रकों की आपूर्ति की जाती थी। 560 रुपए प्रति पेटी के हिसाब से शराब की सप्लाई की जाती थी। एमआरपी 2,880 रुपए प्रति केस था। बाद में इसे बढ़ाकर 3,880 रुपए कर दिया गया।

इसके अलावा, विदेशी शराब की माँग को देखते हुए और विदेशी शराब निर्माताओं से पैसे लेने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए Fl-10A लाइसेंस को लाया गया। यह ढेबर के तीन परिचितों को मिला। इन लोगों ने विदेशी शराब खरीदने के लिए बिचौलियों की तरह काम किया और इसे सरकारी गोदामों में बेच दिया और विदेशी शराब निर्माताओं से लगभग 10% का कमीशन प्राप्त किया।

ED ने पाया कि इस सिंडिकेट की ‘ऊपर’ तक पहुँच थी। इसमें अन्य कई नेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने की आशंका है, जिसकी जाँच केंद्रीय एजेंसी कर रही है। उधर भाजपा ने सीएम भूपेश बघेल की सरकार पर हमला बोला है। भाजपा ने कहा, “भूपेश सरकार के संरक्षण में छत्तीसगढ़ में हुआ 2000 करोड़ का शराब घोटाला… भूपेश जी, जरा आँख उठाकर बताइये तो सही, कितना बँटा और कितना घर पहुँचा?”

विवादित IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और NAN

साल 2015 में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर कॉन्ग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद रमन सिंह की सरकार ने आरोपों की जाँच का आदेश दिया था। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने NAN (नागरिक आपूर्ति निगम या सार्वजनिक वितरण निगम घोटाला) घोटाले का पर्दाफाश किया।

इस घोटाले में 27 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था। जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, उनमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला मुख्य आरोपित थे। साल 2015 में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक चार्जशीट दायर की थी। इसके बाद राज्य में चुनाव हुए और सत्ता बदल गई। कॉन्ग्रेस की सरकार आते ही शुक्ला और टुटेजा के लिए चीजें बदल गईं।

टुटेजा पर लगे आरोपों को अनुचित बताते हुए बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने एक SIT का गठन किया। तब से टुटेजा को बचाने और रमन सिंह को घोटाले में फँसाने की कोशिश की जा रही है। साल 2020 में टुटेजा को मामले में जमानत दिए जाने के तुरंत बाद उन्हें बघेल सरकार ने वाणिज्य और उद्योग का संयुक्त सचिव बना दिया। वहीं, शुक्ला को शिक्षा व अन्य विभागों का प्रभारी प्रमुख सचिव बनाया गया है।

भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने कहा था कि भूपेश बघेल की सरकार ने SIT के प्रमुख GP सिंह को कहा था कि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनकी पत्नी और तत्कालीन प्रमुख सचिव अमन सिंह को फँसाना है। जब जीपी सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया तो उन्हें साजिश रचने का अभियुक्त बनाकर उनके खिलाफ ही कार्रवाई की गई।

राजेश मूणत ने कहा था कि भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अधिकारी चैट करते थे। इसमें आलोक शुक्ला निर्देश देते थे और अनिल टुटेजा इसे इसका संचालन करते थे। मूणत ने कहा कि आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा से कॉन्ग्रेस के क्या रिश्ते हैं, ये पार्टी को बताना चाहिए।

ऑपइंडिया को मिले ह्वाट्सएप चैट से हुआ था खुलासा

फरवरी 2020 में आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान IPS अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के फोन जब्त कर लिए गए थे। व्हाट्सएप पर टुटेजा के दूसरे अधिकारियों के साथ चैट में विभाग को कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। ऑपइंडिया के पास भी यह एक्सक्लूसिव व्हाट्सएप उपलब्ध है। चैट में टुटेजा के एसआरपी कल्लूरी, इंदिरा कल्याण एलेसेला, जीपी सिंह और आरिफ शेख जैसे अधिकारियों के साथ की गई बातचीत उपलब्ध है।

चैट में उपलब्ध बातचीत से यह साफ हो गया है कि अनिल टुटेजा और उनके बेटे यश टुटेजा के इशारे पर राज्य में आपराधिक न्याय प्रणाली का जमकर दुरुपयोग किया गया। व्हाट्सएप चैट से यह भी स्पष्ट होता है कि कैसे राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी NAN घोटाले के मुख्य अभियुक्तों के सहायक बनकर रह गए हैं। चैट से पता चलता है कि राज्य के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला आरोपित टुटेजा के साथ मिलकर उनके केस को कमजोर करने और उनके विरोधियों पर मुकदमा दर्ज कराने की साजिश रच रहे थे।

राज्य के एक प्रमुख आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह द्वारा दिए गए शपथ पत्र और अनिल टुटेजा के साथ हुई व्हाट्सएप चैट से भी मामले में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। जानकारी के मुताबिक आलोक शुक्ला के निर्देशन में अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा, अन्य बड़े पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिलकर राजनीतिक विरोधियों की एक हिटलिस्ट तैयार की थी।

मुख्यमंत्री बघेल न सिर्फ टुटेजा की मदद कर रहे थे बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके परिवार के लोगों, पूर्व प्रमुख सचिव अमन सिंह उनकी पत्नी यास्मीन सिंह, पूर्व डीजी (पुलिस) मुकेश गुप्ता, अशोक चतुर्वेदी और चिंतामणि चंद्राकर जैसे अधिकारियों को भी फँसाने की कोशिश कर रहे थे।

19 अक्टूबर 2022 को छत्तीसगढ़ के NAN घोटाला मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दावा किया कि मुख्य आरोपितों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की राज्य सरकार के बड़े अधिकारियों के साथ मिली भगत है। जो उन्हें बचाने की कोशिश में लगे हैं। ईडी ने मामले को राज्य से बाहर ट्रांसफर करने की अपील की थी।

‘इमरान खान की लाश’ वाली फोटो किसकी, जो हुई पाकिस्तानी सोशल मीडिया में वायरल? पूर्व पीएम को लाया गया इस्लामाबाद कोर्ट

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कोर्ट के अंदर से घसीट कर गिरफ्तार (Imran Khan Arrested) किया गया। इसके बाद ‘शांतिपूर्ण’ मजहब इस्लाम के नाम पर बने मुल्क में जगह-जगह दंगे हो रहे, सेना-पुलिस पर हमले किए जा रहे, उनके घरों और सरकारी संस्थाओं को जलाया जा रहा। इसी बीच पाकिस्तानी सोशल मीडिया में एक खबर वायलर हो गई – इमरान खान के मौत (death of Imran Khan) की।

इमरान खान की मौत से संबंधित एक वायरल फोटो

भारत के भी कुछ सोशल मीडिया हैंडल ने इमरान खान की मौत वाली फोटो शेयर की। पूरे पाकिस्तान में चल रहे बवाल के कारण वहाँ इंटरनेट लिमिटेड कर दिया गया था, इस कारण से इमरान खान के मौत की खबर को 9 मई 2023 की देर रात तक क्रॉस चेक नहीं किया जा सका।

पाकिस्तान में इमरान खान की मौत से संबंधित 2 तस्वीरें वायरल हो रही थीं। एक में वो लेटे हुए हैं और उनकी गर्दन के दोनों ओर तकिए या स्पंज जैसा कुछ सपोर्ट दिया गया है। दूसरी तस्वीर में इमरान खान को कुछ लोग लाद कर ले जा रहे हैं। दोनों तस्वीर के साथ इमरान खान की मौत के बारे में बातें कही गई हैं।

इमरान खान: जिंदा या मुर्दा?

खबर की सच्चाई जानने के लिए 10 मई 2023 को हमने पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट खंगालनी शुरू की। सुबह-सुबह तो कुछ पता नहीं चला लेकिन दोपहर बाद एक खबर आई, साथ में एक फोटो भी। इसमें इमरान खान से संबंधित अल-कादिर ट्रस्ट केस की सुनवाई एक कोर्ट में हुई। खबर में जो फोटो है, उसमें एक कुर्सी पर इमरान खान बैठे हुए हैं, साइड से उनका चेहरा दिख रहा है।

यह खबर ऑथेंटिक है, पाकिस्तान के प्रतिष्ठित मीडिया चैनलों पर भी है। मतलब इमरान खान जिंदा हैं। लेकिन किस हालात में हैं? ब्लूटिकधारी एक ट्विटर यूजर ने इसकी जानकारी दी है। इस ब्लूटिकधारी का ट्विटर हैंडल है @Gene5AK और इनके अनुसार इमरान खान जिंदा तो हैं लेकिन उन्हें पिछले 24 घंटे से सूसू-पॉटी नहीं करने दिया गया है, वॉशरूम ही नहीं जाने दिया गया।

ट्विटर यूजर @Gene5AK की बात को हवा में उड़ाने की जरूरत नहीं। इस यूजर ने नाम अपना सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन जानकारी पुख्ता दी है। क्योंकि आज कोर्ट में इमरान खान ने खुद कहा:

“मैं पिछले 24 घंटे में वॉशरूम नहीं गया। क्या कोई मेरे डॉक्टर फैजल को बुला सकता है? मैं मकसूद चपरासी की तरह नहीं मरना चाहता, वे धीमी मौत के लिए इंजेक्शन लगाते हैं।”

इमरान खान के मौत वाली फोटो डिलीट

जिस ट्विटर यूजर बिन अफजल ( @bin_afzal_ ) ने पाकिस्तान में इमरान खान के मौत से संबंधित फोटो डाली थी, उसने भी अपनी पोस्ट डिलीट कर ली है।

वही सेम-टू-सेम फोटो डाल कर उसने लिखा कि यह तस्वीर तब की है, जब इमरान खान स्टेज से गिर गए थे।

TV पर चल रहा था पवन सिंह का गाना, सामने बैठकर जीव विज्ञान की परीक्षा दे रहे थे छात्रः बिहार के एक सरकारी स्कूल का Video वायरल

बिहार के नालंदा से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोशल मी​डिया पर एक क्लासरूम का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसको लेकर नीतीश सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें एग्जाम हॉल के अंदर एलईडी टीवी पर तेज आवाज में भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का गाना चल रहा है और छात्र परीक्षा देते हुए नजर आ रहे हैं। हैरानी की बात यह ​है कि इस दौरान कोई भी शिक्षक क्लासरूम में मौजूद नहीं है।

वायरल वीडियो में क्लासरूम में एक बेंच पर तीन-तीन छात्र एक साथ बैठकर परीक्षा दे रहे हैं। इस दौरान कई छात्रों को गाने का लुत्फ उठाते, एक-दूसरे की कॉपी से नकल करते, तो कुछ को गाने का वीडियो बनाते हुए देखा जा सकता है। क्लासरूम के अंदर मौजूद किसी छात्र ने ये वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। यह मामला बौरीसराय गाँव के उच्च माध्यमिक विद्यालय का है, जहाँ सोमवार (8 मई 2023) को 11वीं की बायोलॉजी परीक्षा ली जा रही थी।

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) केशव प्रसाद ने बताया है कि वायरल वीडियो का मामला संज्ञान में आया है। इस्लामपुर प्रखंड के शिक्षा पदाधिकारी को जाँच का जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

यह कोई पहला मामला नहीं है, जो बिहार सरकार के शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों की पोल खोल रहा है। इससे पहले इसी साल फरवरी में समस्तीपुर के संत कबीर कॉलेज का एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। परीक्षा केंद्र पर 500 मीटर की परिधि में धारा 144 लगाने के बावजूद कुछ परिजन ग्रिल पर खड़े होकर मोबाइल से परीक्षार्थियों को नकल कराते हुए नजर आए थे।

केरल की एक स्टोरी यह भी: ड्रग्स में डूबी है मलयालम फिल्म इंडस्ट्री, नशे में धुत अभिनेताओं पर बैन; पुलिस के पहरे में शूटिंग

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री काफी समय से विवादों में है। इसका कारण ड्रग्स के बढ़ते मामले हैं। इंडस्ट्री में काम करने वालों कलाकारों ने खुद इसका खुलासा किया है। उनके मुताबिक, मलयालम सिनेमा में नशीली दवाओं का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। कुछ दिन पहले फिल्म के सेट पर एक्टर्स शेन निगम (Shane Nigam) और श्रीनाथ भासी (Sreenath Bhasi) को नशे में धुत पाया गया, जिसके बाद ‘द फिल्म एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ केरल’ (एफईएफकेए)’ और ‘केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन’ ने इन दोनों को 25 अप्रैल 2023 को बैन कर दिया। अब दोनों अभिनेता भविष्य में किसी भी प्रोजेक्ट पर काम नहीं कर सकेंगे। लेकिन उन्हें पहले से साइन किए गए सभी कार्यों को पूरा करना होगा।

जाने-माने फिल्म निर्माता एम रंजीत ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों अभिनेता ड्रग्स के नशे में फिल्म के सेट पर आते थे। इसके अलावा एक्टर्स पर अभद्र व्यवहार करने समेत सेट पर देर से आने, शेड्यूल के मुताबिक काम नहीं करने और स्पॉट एडिट की माँग करने के आरोप लगाए गए हैं। केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (KFPA) ने घोषणा की है कि वे शेन निगम और श्रीनाथ भासी के साथ और कॉपरेट नहीं कर सकते हैं। इसके चलते अब से फिल्म की शूटिंग के सभी लोकेशन्स पर पुलिस मौजूद रहेगी।

शेन निगम और श्रीनाथ भासी की खबर वायरल होने के बाद कई अन्य अभिनेताओं और निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर बड़े पैमाने पर ड्रग्स के इस्तेमाल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। निर्माता सैंड्रा थॉमस ने 3 मई 2023 को सिनेमा एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया, “यह सच है कि मलयालम सिनेमा में ड्रग्स का उपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। अब समय आ गया है कि हम इसे कंट्रोल करें, क्योंकि इसके साथ बहुत सारे मुद्दे जुड़े हुए हैं। जो लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं उन्हें रात में नींद नहीं आती है, इसलिए उन्हें शूट के लिए हमेशा देर हो जाती है। हम यह भी नहीं जानते कि वे कब शांत हो जाते हैं। वे हमारी सभी बातों पर हामी भरेंगे, लेकिन उसे सुनेंगे नहीं। डेट ही भूल जाते हैं, जिसका खामियाजा निर्माता को भुगतना पड़ता है।”

वहीं ​बीते दिनों काम के दौरान ड्रग्स लेने वाले इन दोनों अभिनेताओं का नाम सामने आने के बाद हास्य अभिनेता टिनी टॉम ने कहा कि इंडस्ट्री में ड्रग्स के सेवन के जोखिम के कारण वह और उनकी पत्नी नहीं चाहते हैं कि उनका बेटा मलयालम सिनेमा में काम करे। ध्यान दें कि एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (एएमएमए) के महासचिव एडावेला बाबू ने सबसे पहले इस विवाद के बारे में खुलासा किया था। उन्होंने हाल ही में एक बयान दिया कि वे केरल सरकार को उन अभिनेताओं की एक सूची देंगे, जो ड्रग्स के नशे में काम करते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2022 में केरल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (KFPA) ने मलयालम अभिनेता श्रीनाथ भासी पर एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान एक महिला एंकर के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप में फिल्मों से अस्थायी रूप से बैन लगाने का फैसला किया था।

PM मोदी ने श्रीनाथजी का किया दर्शन, राजस्थान को ₹5500 करोड़ की परियोजनाएँ दी: कहा- जयपुर ब्लास्ट में काॅन्ग्रेस ने वही किया, जिसके लिए कुख्यात रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) बुधवार (10 मई 2023) को राजस्थान के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने राजसमंद में स्थित प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर में भगवान श्रीनाथ जी का दर्शन किया। इसके बाद उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए महापुरुषों को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 5500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मित्र कहकर संबोधित किया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने नाथद्वारा में कहा कि मेवाड़ का यह क्षेत्र हल्दीघाटी की भूमि है, जो राष्ट्ररक्षा के लिए, महाराणा प्रताप के शौर्य, भामाशाह के समर्पण और पन्नाधाय के त्याग के लिए जाता है। उन्होंने कहा, “इस मिट्टी के कण-कण में वीरता रची-बसी है। कल ही देश ने महाराणा प्रताप की जयंती पर उन्हें पुण्य भाव से स्मरण किया है। अपनी विरासत की पूँजी को हमें अधिक से अधिक देश दुनिया तक ले जाना है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत सरकार अलग-अलग धार्मिक सर्किट पर काम कर रही है। कृष्ण सर्किट के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थों को जोड़ा जा रहा है। इससे राजस्थान के जयपुर स्थित गोविंद देव जी, सीकर स्थित खाटू श्याम और नाथद्वारा के श्रीनाथ जी का दर्शन आसान होगा।

भारत माता की जय के नारे लगवाते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत सरकार सेवा भाव को भक्ति भाव मानकर दिन रात काम कर रही है। श्रीनाथ जी का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे। इसलिए विकास कार्यों की आप सबको एक बार और बधाई देता हूँ। मैंने श्रीनाथजी से आजादी के अमृतकाल में विकसित भारत की संकल्प से सिद्धि के लिए आशीर्वाद माँगा है।”

पीएम मोदी ने कहा, “दूरदृष्टि की कमी के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाने का नुकसान राजस्थान ने बहुत उठाया है। इस मरुभूमि में कनेक्टिविटी के अभाव में आना-जाना बहुत मुश्किल होता था। इससे आने-जाने में ही नहीं, बल्कि इससे खेती-कारोबार में भी मुश्किल था।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना साल 2000 में शुरू हुई थी। इसके बाद 2014 तक लगभग 3.80 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गईं। इसके बाद भी हजारों गाँव संपर्क से कटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि साल 2014 में भाजपा सरकार ने संकल्प लिया कि हर गाँव तक पक्की सड़कें पहुँचाई जाएँगी और पिछले 9 वर्ष में 3.50 लाख किलोमीटर नई सड़के गाँव में बनाई गईं। इनमें से 70,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें राजस्थान के गाँवों में बनी हैं।

पीएम ने आगे कहा कि राजस्थान पहली वंदे भारत ट्रेन मिल चुकी है और मावली-मारवाड़ रेल गेज परिवर्तन की माँग भी पूरी हो रही है। अहमदाबाद-उदयपुर के पूरे रूट को ब्रॉडगेज में बदलने का काम पूरा हुआ है। पूरे रेलवे को मानव रहित फाटकों से मुक्त करने के बाद बहुत तेजी से पूरे नेटवर्क का बिजलीकरण किया जा रहा है। बीते 9 साल में राजस्थान के लगभग 75 प्रतिशत रेलवे नेटवर्क का बिजलीकरण किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि यहाँ गेज परिवर्तन और दोहरीकरण का सबसे अधिक लाभ डूंगरपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, पाली, सिरोही और राजसमंद जैसे जिलों को मिला है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले नौ साल में राजस्थान का रेल बजट भी 2014 की तुलना में 14 गुना बढ़ा है। इसका फायदा राज्य को मिल रहा है।

लाखा बंजारा समुदाय की समस्याओं को लेकर पीएम ने कहा कि पानी के लिए इस समुदाय ने अपना जीवन खपा दिया। हालात यह है कि अगर पानी के लिए इतना काम करने वाले, बावड़ी-तालाब बनाने वाले लाखा बंजारा चुनाव में खड़ा हो जाए तो ये नकारात्मक सोच वाले उसे भी हराने के लिए मैदान में आएँगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मित्र कहकर संबोधित किया। इसके बाद अशोक गहलोत ने कहा, “आज यहाँ कॉन्ग्रेस-बीजेपी सब एक मंच पर सब बैठे हुए हैं। ऐसे मौके बहुत कम आते हैं। लोकतंत्र में दुश्मनी तो होती नहीं है, आपस के अंदर विचारधारा की लड़ाई है। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है।”

आबू रोड की जनसभा में पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की नीतियों को लेकर उस पर जमकर हमला बोला। जयपुर बम धमाकों के आरोपियों के छूटने के लिए भी कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार बताया है। पीएम मोदी ने कहा कि जयपुर ब्लास्ट में काॅन्ग्रेस ने वही किया, जिसके लिए कुख्यात रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “दो दिन बाद 13 मई को जयपुर बम धमाकों की बरसी है। आतंकियों ने अनेक अपने छीन लिए। उनके परिवार इस उम्मीद के साथ जी रहे हैं कि एक न एक दिन उन्हें न्याय मिलेगा, लेकिन राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने वही किया, जिसके लिए वह कुख्यात रही है। उसका इतिहास-कारनामे कुख्यात रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस आतंकी विचारधारा के साथ खड़े होने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। उसने आतंकियों पर हमेशा नरम रुख अपनाया है। जयपुर बम धमाकों के केस में कमजोर पैरवी की और आरोपित छूट गए। कॉन्ग्रेस लीपापोती करने की चाहे जितनी कोशिश करे, लेकिन सच्चाई सामने आ चुकी है।”

‘ओडिशा में थका-हारा दिखा गुड्डू मुस्लिम’: नमाज पढ़ने मस्जिद जा रहा था शेख हमीद, मीडिया ने बमबाज का एक्सक्लूसिव CCTV फुटेज बताकर चलाया

बमबाज गुड्डू मुस्लिम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसके लगातार लोकेशन बदलने, हुलिया और पहचान बदलने को लेकर मीडिया में कई बार खबरें आ चुकी है। अब मीडिया में उसके ओडिशा में दिखने की खबर आई है। मीडिया संस्थानों ने एक सीसीटीवी फुटेज का हवाला देकर यह दावा किया। इसमें बताया गया कि गुड्डू मुस्लिम ओडिशा के बारगढ़ में छिपा हुआ है। इस वीडियो की असलियत जानने से पहले यह पढ़िए की मीडिया ने इसे किस तरह पेश किया।

टीवी9 भारतवर्ष ने ट्वीट कर कहा, “ओडिशा में दिखा यूपी का मोस्टवांटेड गुड्डू मुस्लिम, TV9 पर गुड्डू मुस्लिम का नया CCTV वीडियो।”

भारत24 ने भी इसी तरह का दावा करते हुए लिखा, “गुड्डू मुस्लिम की EXCLUSIVE CCTV फुटेज, ओडिशा में देखा गया उमेश पाल हत्याकांड का आरोपित।”

आज तक ने दावा करते हुए लिखा, “11 अप्रैल को ओडिशा में था गुड्डू मुस्लिम, CCTV में दिखा थका-हारा।”

जागरण ने लिखा, “गुड्डू मुस्लिम का नया वीडियो आया सामने, अब ओडिशा में घूमता दिखा बमबाज”

इसी तरह के दावे के साथ अन्य मीडिया संस्थान ने भी इस खबर को शेयर किया। ऑपइंडिया ने मीडिया के इस दावे का फैक्ट चेक किया है। इस दौरान हमें हिमांशु त्रिपाठी नामक ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो मिला। इस वीडियो में शेख मोहम्मद हमीद नामक व्यक्ति यह बता रहा है कि जिस सीसीटीवी फुटेज को गुड्डू मुस्लिम का मीडिया बता रहा है, उसमें दिख रहा व्यक्ति वह खुद है।

शेख मोहम्मद हमीद ने बताया है कि वह ओडिशा के सोहेला का रहने वाला है। उसको लोगों ने बताया है कि उसका वीडियो गुड्डू मुस्लिम बताकर वायरल हो रहा है। लोगों ने उसे मोबाइल पर वीडियो दिखाया। उसने कहा यह सब गलत काम हो रहा है। मैं नमाज पढ़ने आया था और मस्जिद के अंदर जा रहा था। यह वीडियो वहीं का है। जो लोग गलत तरीके से उसका वीडियो वायरल कर रहे हैं, उन्हें सजा होनी चाहिए।

इस तरह से मीडिया द्वारा गुडडू मुस्लिम को लेकर किया जा रहा यह दावा ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में पूरी तरह से फर्जी पाया गया।

उमेश पाल की हत्या के बाद से फरार है गुड्डू मुस्लिम

प्रयागराज में 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल (Umesh Pal Murder Case) की हत्या से बाद से ही गुड्डू मुस्लिम (Guddu Muslim) फरार है। वह अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग जगहों पर भागा फिर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह अपना हुलिया और स्थान लगातार बदल रहा है। इतना ही नहीं, वह हिंदू नाम रखकर लोगों की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। बता दें कि गुड्डू मुस्लिम पर उत्तर प्रदेश की सरकार ने 5 लाख रुपए का ईनाम रखा है। अप्रैल में माफिया ब्रदर्स अतीक अहमद और अशरफ की शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या से पहले इनका आखिरी शब्द भी गुड्डू मुस्लिम ही था। अशरफ गुड्डू मुस्लिम को लेकर मीडिया से कुछ कहने जा रहा था, लेकिन वह उसे पूरा नहीं कर पाया।