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हिंदू घृणा वाले ‘आर्ट वर्क’ पर यूक्रेन ने माँगी माफी, रक्षा मंत्रालय ने शेयर की थी माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर: विरोध के बाद कर दिया था डिलीट

यूक्रेन ने हिंदू घृणा वाले ट्वीट के लिए माफी माँगी है। यूक्रेन की प्रथम उप विदेश मंत्री एमीन झापरोवा (Emine Dzheppar) ने कहा है कि हिंदुओं की आराध्य देवी माँ काली की तस्वीर के दुरुपयोग का हमें खेद है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने पिछले दिनों ‘आर्ट वर्क’ के नाम पर माँ काली की तस्वीर वाला एक ट्वीट किया था। इसमें यूक्रेनी हमले से उठे गुबार को माँ काली के स्कर्ट के तौर पर दिखाया गया था।

झापरोवा ने मंगलवार (2 मई 2023) को ट्वीट कर कहा, “हमें खेद है कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने हिंदुओं की आराध्य देवी काली माता के चित्र का गलत उपयोग किया। यूक्रेन और यहाँ के लोग भारतीय संस्कृति का दिल से सम्मान करते हैं और भारत के समर्थन की पुरजोर सराहना करते हैं। इस चित्र को पहले ही हटा दिया गया है। हम आपसी सम्मान और दोस्ती की भावना बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।”

यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रविवार (30 अप्रैल 2023) को दो फोटो शेयर की थी। इसमें से एक फोटो में धुएँ का गुबार दिखाई दे रहा था। वहीं, दूसरी फोटो में धुएँ के गुबार के बीच माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर दिखाई दे रही थी, जिसमें उनकी जीभ बाहर निकली हुई और गले में खोपड़‍ियों की माला थी। माँ काली के बाल भी अजीब तरह से उड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। इस फोटो को यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने ‘वर्क ऑफ आर्ट’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। इसके जरिए यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने देवी काली की हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो से तुलना करते हुए उन्हें ‘अपस्कर्ट मूमेंट‘ में दिखाया था।

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय द्वारा शेयर किए गए हिंदूफोबिक ट्वीट का स्क्रीनशॉट

माँ काली के अपमान वाला ट्वीट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसका जमकर विरोध किया था। सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से काफी हैरान थे कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक हैंडल ने हिंदू धार्मिक मान्यताओं का मजाक कैसे उड़ाया। उन्होंने यूक्रेन की इस हरकत को लेकर उनसे माफी की माँग की थी। बाला नाम के एक यूजर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची को टैग करते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने कहा था, “कृपया काली माँ को बदनाम करने वाली इस अपमानजनक पोस्ट पर ध्यान दें। अगली बार जब यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र में मदद और समर्थन की भीख माँगे तो इसे ध्यान में रखें।” हालाँकि, लगातार विरोध के बाद यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था।

कभी अफरीदी-कभी कोहली, हर किसी से भिड़ जाते हैं अफगानी क्रिकेटर नवीन उल हक, अमित मिश्रा न होते तो और बदसूरत होती विराट और गौतम गंभीर की फाइट

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) एक बार फिर गौतम गंभीर और विराट कोहली की भिड़ंत को लेकर चर्चा में है। लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) पर आईपीएल आचार संहिता उल्लंघन के कारण मैच फीस का 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।

गंभीर और कोहली को आईपीएल की आचार संहिता के आर्टिकल 2.21 के अंतर्गत लेवल-2 का दोषी पाया गया है। इसके अलावा लखनऊ के तेज गेंदबाज नवीन-उल-हक को मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना देना होगा। उन्हें अनुच्छेद 2.21 के तहत लेवल 1 का दोषी पाया गया है। नवीन-उल-हक अफगानिस्तान के खिलाड़ी हैं और आईपीएल में लखनऊ की ओर से खेल रहे हैं।

लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में सोमवार (1 मई 2023) को खेले गए मैच में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 18 रनों से मात दी। इसके बाद मैदान पर गंभीर और कोहली के बीच हुए झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

वायरल वीडियों में आप देख सकते हैं कि विराट कोहली और नवीन-उल-हक के बीच मैच के दौरान यह विवाद शुरू हुआ था। नवीन ने विराट से कुछ कहा था, जो झगड़े में बदल गया। विराट कोहली गुस्से में उन्हें वार्निंग देते हुए नजर आए। हालाँकि, उस वक्‍त मामला शांत हो गया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच फिर विवाद हो गया। मैच के बाद काइल मेयर्स को विराट के साथ बात करते देखा गया। इसी बीच गौतम गंभीर वहाँ आए और मेयर्स को हाथ पकड़कर ले गए। बाद में विराट और गंभीर के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कई खिलाड़ियों को बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा।

वीडियो में आप दोनों मौकों पर अमित मिश्रा को बचाव करते देख सकते हैं। लखनऊ की टीम से खेल रहे मिश्रा भी विराट और गंभीर की तरह दिल्ली से आते हैं। उन्हें दोनों का करीबी भी माना जाता है। वैसे जिस अफगानी क्रिकेटर नवीन उल हक से इस विवाद की शुरुआत हुई वे पहले भी कई बार इस तरह सीनियर क्रिकेटरों से उलझ चुके हैं। एलपीएल में उनकी थिसारा परेरा से भिड़ंत हुई थी। इसी तरह पीएसएल में उन्हें मोहम्मद आमिर और और शाहिद अफरीदी से उलझते देखा गया था।

बता दें कि इससे पहले (अप्रैल 2023) भी विराट कोहली पर आईपीएल ने मैच फीस का 10% जुर्माना लगाया था। आईपीएल की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बल्लेबाज विराट कोहली पर चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2023 मैच के दौरान आईपीएल आचार संहिता के उल्लंघन के लिए मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।

पुराने घर को गिरा कर बना दिया गार्डन, फिर चोरी-छिपे बनवाया नया ‘महल’: CM केजरीवाल पर नया खुलासा, 42 स्टाफ पर सरकारी खजाने से खर्च

खुद को ‘दिल्ली का मालिक’ बताने वाले अरविंद केजरीवाल के आवास को लेकर एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। नया खुलासा यह है कि केजरीवाल ने चोरी छिपे सीएम आवास में रहने के लिए एक नया ‘महल’ तैयार करवाया है। वहीं, पुराने घर को गिराकर उसकी जगह गार्डन बनाया गया है। यही नहीं, केजरीवाल के इस नए घर की देखरेख के लिए 42 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।

दरअसल, टाइम्स नाउ ने अपनी स्पेशल सीरीज ‘ऑपरेशन शीश महल’ में सेटेलाइट इमेज के सहारे कई बड़े खुलासे किए हैं। नए खुलासे में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल ने सीएम आवास की पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत के नाम पर टेंडर निकाला था। इस टेंडर के तहत पुरानी बिल्डिंग में मरम्मत के साथ ही कुछ बदलाव होने थे। लेकिन, इसकी जगह केजरीवाल ने एक नए सीएम हाउस का निर्माण करवाया है। वहीं, पुरानी बिल्डिंग को गिराकर उसकी जगह एक बड़ा गार्डन बनवाया गया है। इस गार्डन के बगल में लॉन टेनिस के लिए एक कोर्ट भी बनाया गया है।

इस बड़े खुलासे के साथ ही केजरीवाल से यह सवाल पूछा जा रहा है कि यदि पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत के लिए टेंडर निकाला गया था तो फिर नई बिल्डिंग क्यों बनाई गई? यदि पुरानी गिराकर नई बिल्डिंग बनवानी ही थी तो इसे छिपाया क्यों गया? इन सभी चीजों का फिलहाल जवाब तो यही है कि केजरीवाल को डर था कि यदि उनके नए ‘महल’ की जानकारी सामने आ गई तो वीआईपी कल्चर खत्म करने की उनकी बातें ढकोसला साबित हो जाएँगी।

केजरीवाल के घर में 42 लोगों का स्टाफ

वहीं, इंडिया टीवी ने अरविंद केजरीवाल के घर की देखरेख करने के लिए नियुक्त किए गए लोगों को लेकर खुलासा किया है। इस खुलासे के अनुसार, केजरीवाल के घर में हाउस कीपिंग यानी कि देखरेख के लिए 42 लोगों का स्टाफ काम कर रहा है। इसमें से 20 लोग सुबह की शिफ्ट में काम करते हैं। वहीं, 10 लोग शाम की शिफ्ट में काम करते हैं। यही नहीं, इन लोगों के काम को देखने के लिए 2 सुपरवाइजर को भी काम पर रखा गया है। इसके अलावा, सीएम हाउस के गार्डन की सफाई और देखरेख के लिए 10 मालियों की नियुक्ति की गई है। इन सभी लोगों को दिल्ली सरकार के खजाने से पैसा दिया जा रहा है।

इससे पहले भी हुए खुलासे

बता दें कि इससे पहले हुए खुलासे में बताया गया था कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं। शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है। वहीं, एक अन्य खुलासे में सामने आया था कि सीएम केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास में एक-दो नहीं, बल्कि 15 बाथरूम हैं और हर बाथरूम को सजाने-सँवारने में एक-एक लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

LG ने दिए जाँच के आदेश

गौरतलब है कि इन खुलासे के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेजों को वो अपने संरक्षण में ले लें और साथ ही सभी तथ्यों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर पेश करें।

मुख़्तार के भाई अफजाल अंसारी की सांसदी हुई रद्द: गैंगस्टर एक्ट में हुई थी 4 साल की सजा, गाजीपुर सीट से था BSP सांसद

गाजीपुर से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई। उसे शनिवार (29 अप्रैल 2023) को गैंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से ही अफजाल की सांसदी जाना तय माना जा रहा था। अफजाल के साथ ही उसके भाई मुख्तार अंसारी को भी 10 साल की सजा सुनाई गई थी।

दरअसल, मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी पर बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप था। यही नहीं, मुख्तार पर कोयला व्यापारी नंदकिशोर रूँगटा का अपहरण और हत्या का आरोप था। इस मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत सुनवाई करते हुए मुख्तार अंसारी पर 10 साल की सजा के साथ 5 लाख का जुर्माना लगाया था। वहीं, अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा सुनाई गई थी। अफजाल को 1 लाख को जुर्माना भी भरना होगा।

बता दें कि सजा होने के पहले अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर था। लेकिन अब उसे जेल भेजा गया है। वहीं, मुख्तार अंसारी पहले से ही यूपी की जेल में बंद है। वहीं, अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर था।

अंसारी बंधुओं की सजा पर कृष्णानंद राय के परिवार ने की थी सीएम योगी की तारीफ

मुख्तार और अफजाल अंसारी की सजा पर कोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने कहा था कि उनकी माँ ने कई सालों तक संघर्ष किया है। पूरा परिवार अंसारी बंधुओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई थी। साथ ही कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसलों के चलते ही माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई हो रही है। मुख्तार और अफजाल को हुई सजा के लिए यूपी की बदली हुई परिस्थितियाँ भी जिम्मेदार हैं।

वहीं, एक अन्य बातचीत में पीयूष राय ने कहा है कि उनके पिता की हत्या 18 साल पहले हुई थी। हत्या के दौरान उनके पिता की शिखा भी काटी गई थी। शिखा सिर्फ उनकी नहीं बल्कि एक समाज की शिखा काटी गई थी। आज न्यायपालिका ने उसका शिखा का मान बढ़ाया है।

मुख़्तार अंसारी के डर से सूअर को मस्जिद से दूर भगाने के लिए पानी में घुसती थी पुलिस, अपराधी खुलेआम घूमे थे: तब मऊ का ऐसा था हाल, पत्रकारों को राइफल से पीटते थे

साल 2005 में हुए मऊ दंगों में मुख्तार अंसारी की भूमिका पर हाल में चश्मदीदों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कुछ खुलासे किए थे। किसी ने बताया था कि मुख्तार के राज में इस्लामी कट्टरपंथी ‘हिंदुओं की चटनी’ बनाने की धमकी देते थे, तो किसी ने बताया था कि माफिया के राज में डीएम हिंदुओं के घरों को जलने को छोड़ देते थे पर पुलिस नहीं भेजते थे।

आइए आज ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे और इन चश्मदीदों के बीच हुई बातचीत की कुछ और अहम बातें आपको बतातें हैं। इनसे पता चलता है कि मुख्तार के दौर में पुलिस से लेकर पत्रकारों का क्या हश्र होता था।

पुलिस पकड़ती थी सूअर

दंगों के चश्मदीदों में एक छोटेलाल ने हमसे बातचीत में मऊ दंगों को सुनियोजित दंगा बताया था। उन्होंने बताया था कि कैसे मुख्तार अंसारी उस समय खुली जिप्सी में हथियार लेकर घूम रहा था और कोई रोकने वाला नहीं था। कैमरे के सामने एक आदमी की हत्या हुई थी मगर उसे दिखाने वाला कोई नहीं था। इन्हीं छोटेलाल ने हमें दंगों से पहले का भी एक वाकया बताया। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्तार के डर से पुलिस वाले पानी में कूदकर सूअर पकड़ते थे।

उन्होंने कहा मुख्तार अंसारी के समय में कोतवाल से सूअर दौड़ा-दौड़ा कर पकड़वाया जाता था। ईद आते ही हर जगह सुअरों को पकड़कर बंद करवा दिया जाता था तो तीन दिन न सूअर दिखते थे न उनके बच्चे। छोटेलाल के अनुसार, ‘ईद के दिन में ओवरब्रिज के पास कोतवाल के साथ खड़ा था। मैंने अपनी आँख से देखा है कि छोटा सूअर का बच्चा दौड़ा तो होमगार्ड चिल्लाया- ‘साहब सूअर।’ इतना कहते ही वो उसे पकड़ने के लिए पानी में घुस गए। वो सूअर मस्जिद की तरफ नहीं जा रहा था।”

छोटेलाल बताते हैं कि ये वाकया दंगों से पहले का है। वो इसका जिक्र करते हुए कहते हैं कि उस समय पुलिस सुअर पकड़ने के लिए दौड़ जाती थी लेकिन अपराधी पकड़ने के लिए नहीं। यही वजह थी कि जब पुलिसकर्मी पानी से निकले तो उन्हें छोटेलाल को देखकर शर्म आई कि अपराधी को उन्होंने पकड़ा नहीं और सुअर पकड़ते उन्हें देख लिया गया।

पत्रकार की पिटाई, 24 घंटे बंधक बनाए रखा

इसी तरह गणेश सिंह ने मऊ दंगों से पहले की बात करते हुए बताया कि इस दंगे से पहले भी ठेकेदारों पर, पत्रकारों पर खुलेआम हमले होते थे। उसने एसीबीडब्ल्यू डाक बंगले में अटैक करवाया और जब पत्रकारों ने उसे कवर करना चाहा तो राइफल के बट से कूट-कूटकर उनसे फोटोज डिलीट करवाई। पत्रकार का नाम द्वारिका गुप्ता था जिन्होंने साहस दिखाते हुए राइफल के बट को पकड़ लिया था।

गणेश सिंह के मुताबिक उन्हें छुड़वाने के लिए तत्कालीन सांसद चंददेव राजवैद्य और सपा के ही जिला पंचायत अध्यक्ष राजभवन थे। ये दोनों मुख्तार अंसारी के सामने होटल में हाथ जोड़कर मुख्तार से बोल रहे थे कि द्वारिका भाई को छोड़ दो। लेकिन उसने उन्हें 24 घंटे नहीं छोड़ा। इस दौरान कोतवाल, एसपी ऑफिसर सब मूकदर्शक बने रहे। बाद में उन्हें पीटकर छोड़ा गया।

गरीबों के बच्चों की शादी नहीं गुर्गों के बच्चों की शादी

चश्मदीद गणेश यह भी बताते हैं कि मुख्तार अंसारी की छवि जो रॉबिनहुड के तौर पर पेश की गई है वो बिलकुल गलत है। उन्होंने कहा कि ये जो फैलाया जाता है कि मुख्तार ने गरीबों के बच्चों की शादी करवाई वो सरासर झूठ है। अगर कभी ऐसा हुआ है तो उसने अपने गुर्गों के बच्चों की शादी करवाई होगी। गणेश के मुताबिक मुख्तार ने किसी पर परोपकार नहीं किया है। उसका काम केवल लूटपाट मचाना था।

मऊ दंगों में मुख्तार की भूमिका पर चश्मदीदों ने राहुल पांडे को क्या बताया…इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

GST कलेक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास: अप्रैल 2023 में सरकार की झोली में आए ₹1.87 लाख करोड़, आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी करने वालों को मिला जवाब

वित्तीय वर्ष के पहले ही महीने में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) से सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। दरअसल, केंद्र सरकार ने अप्रैल 2023 के जीएसटी कलेक्शन के आँकड़े जारी किए हैं। इसके मुताबिक अप्रैल में सरकार को जीएसटी से 1.87 लाख करोड़ रुपए हासिल हुए हैं। यह अब तक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल में जीएसटी का कुल कलेक्शन 187035 करोड़ रुपए रहा। इसमें से सीजीएसटी कलेक्शन 38440 करोड़ रुपये, एसजीएसटी कलेक्शन 47412 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 89158 करोड़ रुपए तथा शेष अन्य टैक्स का कलेक्शन 12025 करोड़ रुपए रहा। जीएसटी का यह कलेक्शन अप्रैल 2022 की तुलना में 12% अधिक है। तब सरकार ने जीएसटी से 1.68 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सीधे तौर पर देखें तो बीते एक साल में जीएसटी कलेक्शन में बम्पर उछाल हुआ है।

मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 20 अप्रैल, 2023 को एक दिन में 9.8 लाख ट्रांजैक्शन हुए। इससे एक ही दिन में 68,228 करोड़ रुपए का जीएसटी कलेक्शन हुआ है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार को जीएसटी से 18.10 लाख करोड़ रुपए मिले थे। वित्तीय वर्ष 2021-2022 की तुलना में जीएसटी का यह कलेक्शन 22% अधिक था। यदि बात बीते पिछले वित्तीय वर्ष से अब तक की करें तो बीते 13 महीनों से लगातार जीएसटी का कलेक्शन 1.40 लाख करोड़ रुपए के स्तर के पार ही रहा है। यही नहीं, जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक तीसरी बार ऐसा हुआ है कि जीएसटी का कलेक्शन 1.60 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा।

जीएसटी कलेक्शन के यह आँकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब जीएसटी का कलेक्शन 1.75 लाख करोड़ रुपए के पार पहुँचा है। साथ ही इससे उन तथाकथित अर्थशास्त्रियों को भी करारा जवाब मिल गया है जो भारत में आर्थिक मंदी की आहट और अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने के दावे करते थे। वास्तव में, यह सरकार की नीतियों का परिणाम है कि वैश्विक मंदी की आहट और अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्ति के बैंकों के डूबने के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार शिखर की ओर बढ़ रही है।

स्टुअर्टपुरम का ‘रॉबिनहुड’ चोर, जो चेन्नई जेल तोड़ कर भाग गया: दिलचस्प है कहानी, कश्मीर फाइल्स और ‘कार्तिकेय 2’ के प्रोड्यूसर की अगली पैन-इंडिया फिल्म में रवि तेजा

आंध्र प्रदेश के बापतला जिले के चिराला में स्थित एक गाँव है स्टुअर्टपुरम, जो आजकल खासी शोहरत बटोर रहा है। एक जमाने में इसे चोरों का गाँव भी कहा जाता है, लेकिन अब ये गाँव इससे निकलने में पूरी जोर-आजमाइश कर रहा है। गाँव के चर्चा में आने का कारण है ‘टाइगर नागेश्वर राव’ नाम की एक फिल्म, जिसमें रवि तेजा मुख्य भूमिका में होंगे। अभिषेक अग्रवाल इस फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। ये तेलुगु अभिनेता रवि तेजा की पहली पैन-इंडिया फिल्म होगी।

अभिषेक अग्रवाल का नाम अगर आपने नहीं सुना होगा, तो आपको पता होगा चाहिए कि उन्होंने ही ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ का निर्माण किया था। जहाँ एक फिल्म में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दुनिया के सामने लाया गया, वहीं दूसरी फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े रहस्यों और उनकी महिमा पर बात की गई। अब अभिषेक अग्रवाल अपनी एक और बड़ी फिल्म को लेकर व्यस्त हैं। ‘Tiger Nageswara Rao’ एक ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म होगी।

आंध्र प्रदेश का स्टुअर्टपुरम और चोर ‘टाइगर नागेश्वर राव’: दिलचस्प है कहानी

फिल्म के लिए स्टुअर्टपुरम गाँव का पूरा का पूरा सेट तैयार किया गया। खबरों में सामने आया था कि सिर्फ इस सेट को तैयार करने में 7 करोड़ रुपए लगे थे। फिल्म के पोस्टर्स भी सामने आए हैं, जिनसे लोगों की उत्सुकता और बढ़ी है। 70 और 80 के दशक को दिखाने वाली कई फ़िल्में आजकल रिलीज हुई हैं और इसके लिए अलग से पूरा सेट तैयार करना पड़ता है, बड़ी तैयारी चाहिए होती है। रवि तेजा के बॉडी लैंग्वेज, एक्शन दृश्य और गेटअप से लेकर सब कुछ इस बार अलग होने वाला है।

आगे बढ़ने से पहले आइए जानते हैं उस व्यक्ति के बारे में, जिस पर ये फिल्म बन रही है। असल में ‘नागेश्वर राव’ नाम के सचमुच एक चोर हुआ करता था, जिसे लोगों ने ‘टाइगर’ नाम दे दिया था। उसके इलाके में उसकी छाव ‘रॉबिनहुड’ की थी। वहाँ के लोग कहते थे कि वो उन अमीरों को लूटता था जो गरीबों का शिक्षण करते थे, इसके बाद उस धन को गरीबों में बाँट देता था। नागेश्वर राव का गाँव स्टुअर्टपुरम को आज भी उसी के नाम से पहचाना जाता है। किसी चोर-डकैत से किसी को भी प्रेरणा नहीं लेनी चाहिए, लेकिन बड़े पर्दे पर ऐसी कहानियों को लोग मनोरंजन के लिए देखना पसंद करते हैं।

आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम गाँव में आज भी सभी लोग टाइगर नागेश्वर राव को याद करते हैं। उसके किस्से-कहानियाँ बच्चों को सुनाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि वो गरीबों के अधिकार के लिए लड़ता था। 80 के दशक में उसे जानने वाले लोग कहते हैं कि वो एक काफी दयालु व्यक्ति था, जो हमेशा गाँव के ज़रूरतमंदों की मदद करता था। वो अपनी चीजें भी किसी ज़रूरतमंद को देने से हिचकता नहीं था। लोगों का कहना है कि अपनी दयालुता और उदारता के कारण वो गाँव में लोकप्रिय हो गया था।

असल में स्टुअर्टपुरम गाँव की भी अपनी एक कहानी है। अंग्रेजों के ज़माने में कई इलाकों के चोर-डाकुओं को एक साथ बसाने के लिए तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के सदस्य हेरोल्ड स्टुअर्ट के नाम पर इस गाँव को स्थापित किया गया था। ऐसे में ब्रिटिश सरकार को उन और एक साथ नजर रखने में आसानी होती थी। इसी गाँव में 70 के दशक में और उसके बाद 15 वर्षों तक नागेश्वर राव का दबदबा रहा। आंध्र प्रदेश , तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक – आज जो ये 4 राज्य हैं, इन चारों के इलाकों में वो चोरी करता था।

उसके गाँव के लोग कहते हैं कि वो अपने अच्छे कर्मों की वजह से लोकप्रिय बन गया था। हालाँकि, पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे कई वर्ष जेल में गुजारने पड़े थे। उस पर चोरी और डकैती के कई आरोप थे। बताया जाता है कि जेल में भी वो बाक़ी कैदियों को बढ़ई और सिलाई के काम सिखा कर उनकी मदद करता था। उसके गाँव में कई लोग उसे आज भी हीरो मानते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि वो गाँव का एक लीजेंड है, जिसके किस्से-कहानियों के चर्चे होते रहते हैं।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन और वहाँ के सामाजिक कार्यकर्ता इन बातों से इत्तिफाक नहीं रखते और उनका कहना है कि चोरी-डकैती की घटनाओं को अंजाम देने वालों को सज़ा मिलनी ही चाहिए, क्योंकि जिनका पैसा उन्होंने चुराया होता है, वो भी परेशानी में जीते हैं। सज़ा इसीलिए भी आवश्यक है, ताकि कोई और इस धंधे में न आए। टाइगर नागेश्वर राव के खिलाफ कार्रवाई करने वाले एक पूर्व पुलिस अधिकारी कहते हैं कि लोगों को चोर-डाकुओं की जगह पुलिस का साथ देना चाहिए, हालाँकि, वो ये भी कहते हैं कि पुलिस में भी सब दूध के धुले नहीं होते।

पूर्व पुलिस अधिकारी बताते हैं नागेश्वर राव चोरी में इतना दक्ष था कि लोगों के घर के दरवाजे-खड़कियाँ तोड़ कर भीतर घुसता था और रुपए-गहने चुरा लेता था। हालाँकि, 1987 में एक पुलिस मुठभेड़ में आखिरकार नागेश्वर राव की मौत हो गई। इसके बाद पूरे इलाके में पुलिस के खिलाफ लोग आक्रोशित थे। 1974 में नांदयाल जिले के बनगानपल्ली में आधी रात को पुलिस थाने के सामने स्थित बैंक में लूट की घटना पूरे देश में सुर्खियाँ बनी थीं।

नागेश्वर के भाई प्रभाकर ने BBC को एक इंटरव्यू में बताया था कि बैंक लूट को अंजाम देने वाले गिरोह में 10 सदस्य थे, जिसमें ये दोनों भाई भी शामिल थे। उस ज़माने में 35 लाख रुपया एक बड़ा रकम था। 14 किलो सोना और 50,000 रुपए नकद लेकर सारे डकैत श्मशान घाट गए, जहाँ इसका बँटवारा होना था। लेकिन, पुलिस ने गाँव को घेर रखा था। नागेश्वर राव तब बच निकला था, लेकिन प्रभाकर को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।

नागेश्वर राव को ‘चेन्नई जेल ब्रेक’ के लिए भी जाना जाता है। 1976 में उसे और प्रभाकर को गिरफ्तार किया गया था। तभी उसने अपने भाई से कह दिया था कि वो अब जेल में नहीं रह सकता। बकौल प्रभाकर, जब वो अधिकारियों पर हमला कर के चेन्नई जेल से भाग खड़ा हुआ था, तब इन्हीं पुलिस वालों ने उनसे कहा था, “तुम्हारा भाई वास्तव में टाइगर है।” आज स्टुअर्टपुरम में हालात बदल रहे हैं और बच्चे बाहर जाकर पढ़ रहे हैं, लोग अच्छा काम कर रहे हैं।

इस फिल्म को ‘अभिषेक अग्रवाल आर्ट्स’ नामक कंपनी प्रोड्यूस कर रही है। अभिषेक अग्रवाल कहते हैं कि वो उस तरह के सिनेमा को आगे बढ़ाने में यकीन रखते हैं, जिसकी जड़ें भारत और भारतीय संस्कृति में हों। वो कहते हैं फिल्मों का निर्माण करना उनका पैशन है, इसीलिए वो प्रोड्यूसर बने। उनका कहना है कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और विरासत को प्रमोट करने में उन्हें यकीन है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ इसका ही एक उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि कैसे जब अधिकतर प्रोड्यूसर इसमें पैसा लगाने को तैयार नहीं हो रहे थे, उन्होंने इसका जिम्मा उठाया। इसी तरह, उन्होंने ‘कार्तिकेय 2’ का निर्माण किया, जो तकनीकी रूप से भी काफी अच्छी फिल्म थी।

उत्तर भारत में बीता बचपन, दक्षिण भारत में सुपरस्टारडम: अब पैन-इंडिया फिल्म में दिखेंगे रवि तेजा

जहाँ तक रवि तेजा का सवाल है, उनका नाम तेलुगु राज्यों में किसी पहचान का मोहताज नहीं है। फिल्म में मुख्य अभिनेता होने के साथ-साथ वो कॉमेडी के तड़के के लिए जाने जाते हैं। साउथ के अधिकतर बड़े स्टार्टस की तरह वो भी एक्शन हीरो हैं, लेकिन उनका स्टाइल और उनकी कॉमेडी टाइमिंग उन्हें बाकियों से अलग खड़ा करती है। उन्हें साउथ में ‘मास महाराजा’ के नाम से भी जाना जाता है। 55 वर्षीय रवि तेजा पहली बार पैन-इंडिया फिल्म का हिस्सा बने हैं।

उन्होंने 1990 में ‘कर्तव्यम्’ नाम की फिल्म में एक छोटे से किरदार के साथ अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी। लीड रोल तक पहुँचने में उन्हें लगभग एक दशक लग गया। 1999 में ‘नी कोसम’ नामक रोमांटिक ड्रामा से उनकी बतौर मुख्य अभिनेता शुरुआत हुई। उन्होंने 2 साल बाद ही ‘इटलु श्रावणी सुब्रमण्यम’ से खुद को स्थापित किया। ये भी जानने वाली बात है कि उनका बचपन उत्तर भारत में ही बिता है। उनकी स्कूलिंग जयपुर, दिल्ली, मुंबई और भोपाल से हुई।

यही कारण है कि वो तेलुगु के साथ-साथ हिंदी भाषा भी अच्छी तरह बोलते-समझते हैं। SS राजामौली के निर्देशन में बनी उनकी फिल्म ‘विक्रमकुडू (2006)’ की कई भाषाओं में रीमेक बनी। अक्षय कुमार अभिनीत ‘राउडी राठौड़ (2012)’ भी इसी की रीमेक है। उनकी फिल्म ‘किक’ (2009) के भी कई भाषाओं में रीमेक बने। हिंदी में सलमान खान ने इसमें अभिनय किया। बीच में उनकी कुछ फ़िल्में नहीं चली, लेकिन हाल ही में उनकी फिल्म ‘धमाका’ ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए का आँकड़ा पार किया है और ‘रावणासुर’ को अच्छी समीक्षा मिली है।

10 लाख मकान, हर रोज आधा लीटर दूध, 3 मुफ्त गैस सिलिंडर: कर्नाटक में घोषणा पत्र जारी कर BJP ने साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना, कहा- हम डबल इंजन, वो ट्रबल इंजन

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी (BJP) ने सोमवार (1 मई 2023) को बेंगलुरु में अपना घोषणा पत्र (विजन डॉक्यूमेंट) जारी किया। इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा मौजूद थे।

घोषणा पत्र जारी करने के बाद जेपी नड्डा ने कहा, “हम 30,000 करोड़ रुपए के एक कृषि कोष का गठन करेंगे। इसके तहत सभी ग्राम पंचायतों में माइक्रो कोल्ड-स्टोरेज सुविधाएँ और कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। हम एपीएमसी का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण करेंगे और कृषि-मशीनीकरण में तेजी लाएँगे।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए कहा, “हम डबल-इंजन की सरकार हैं, उनकी ट्रबल-इंजन है। हम यहाँ विकास को गति देने आए हैं, वे विकास को केवल ‘ब्रेक’ देते हैं। आज कर्नाटक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए शीर्ष स्थान बन गया है।”

दरअसल, बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में 6-ए का जिक्र किया है। इसमें अन्न (Anna), अक्षर (Akshara), आरोग्य (Aarogya), अभिवृद्धि (Abhivruddhi), आद्या, (Aadaya) और अभय (Abhaya) शामिल है। इसके अलावा कर्नाटक में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा किया है।

घोषणा पत्र के अनुसार, गरीब परिवारों को हर साल उगादी, गणेश चतुर्थी और दीपावली के मौकों पर 3 मुफ्त गैस सिलेंडर दिए जाएँगे। नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में किफायती, गुणवत्ता वाला और स्वस्थ भोजन देने के लिए अटल आहार केंद्र स्थापित होंगे। पोषण योजना के तहत बीपीएल परिवार को हर दिन आधा लीटर नंदिनी दूध और हर महीने राशन किट के माध्यम से 5 किलो ‘श्री अन्न- श्री धन्य’ प्रदान किया जाएगा।

इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। बेघर लोगों के लिए दस लाख मकान तैयार किए जाएँगे। एससी एसटी घरों की महिलाओं लिए 5 साल की 10 हजार रुपए की एफडी कराई जाएगी। सरकारी स्कूलों अपग्रेड किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों का हर साल मुफ़्त चेकअप कराया जाएगा।

बता दें कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चरण में 10 मई को मतदान होगा और 13 मई 2023 को नतीजे घोषित किए जाएँगे।

अमेरिका के जिस ‘फर्स्ट रिपब्लिक बैंक’ को बचाने के लिए कई बैंकों ने किया निवेश, उसकी भी नैया डूबी: 2 महीने में US से आया तीसरा मामला

सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के बाद अमेरिका का फर्स्ट रिपब्लिक बैंक भी डूब गया। इस बैंक को बचाने के लिए देश के कई बड़े बैंकों ने इसमें निवेश किया था। लेकिन इसके बाद भी इसे डूबने से बचाया नहीं जा सका। बैंक डूबने के बाद रेगुलेटर्स ने अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद अब इस बैंक को जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी ने खरीद लिया।

अमेरिकी फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (FDIC) ने एक बयान जारी कहा है कि वह फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के खाताधारकों के पैसों की सुरक्षा के लिए इस बैंक की संपत्तियों को जेपी मॉर्गन चेस बैंक, नेशनल एसोसिएशन, कोलंबस और ओहियो को बेचा जा रहा है। इसमें सभी जमा राशि और काफी हद तक फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की सभी संपत्तियाँ शामिल है।

फर्स्ट रिपब्लिक बैंक की बिक्री पूरी होने के बाद अब अमेरिका के 8 राज्यों में फर्स्ट रिपब्लिक बैंक के 84 ऑफिस जेपी मॉर्गन चेस बैंक, नेशनल एसोसिएशन के नाम से जाने जाएँगे। बड़ी बात यह है कि फर्स्ट रिपब्लिक बैंक भले ही डूब गया लेकिन सोमवार (1 मई 2023) को बैंक फिर से खुलेगा। बस नाम बदला हुआ होगा। यही नहीं, इस बैंक के सभी खाताधारकों का पूरा पैसा सुरक्षित होगा। अमेरिकी रेगुलेटर्स का अनुमान है कि रिपब्लिक फर्स्ट बैंक के बीमा के को कवर करने के लिए उसे करीब 13 अरब डॉलर का भुगतान करना पड़ेगा।

बैंक डूबने का कारण

गौरतलब है कि फर्स्ट रिपब्लिक की हालत मार्च 2023 की शुरुआत से खराब होती जा रही थी। उसके शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज हो रही थी। 2 मार्च 2023 को बैंक के शेयरों की कीमत 119.74 डॉलर थी। जो कि अब गिरकर महज 3.51 डॉलर रह गई है। शुरुआती गिरावट के बाद ही बैंक को डूबने से बचाने के लिए 16 मार्च को अमेरिका के 11 बड़े बैंकों ने फर्स्ट रिपब्लिक बैंक में में 30 बिलियन डॉलर यानि करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया था। इसमें जेपी मॉर्गन और बैंक ऑफ अमेरिका समेत अन्य बैंक शामिल थे। हालाँकि इसके बाद भी बैंक को बचाया नहीं जा सका।

यही नहीं, इससे पहले गत सोमवार को फर्स्ट रिपब्लिक बैंक ने कहा था कि उसके ग्राहकों ने इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही 102 बिलियन डॉलर निकाल लिए हैं। 2022 के अंत में बैंक का डिपॉजिट 176 बिलियन डॉलर के करीब था। इसका मतलब यह था कि खाताधारकों ने आधे से अधिक पैसा निकाल लिया था। वहीं, बैंक ने इस दौरान 92 बिलियन डॉलर उधार भी लिए थे। यह सब मिलाकर बैंक के डूबने की बड़ी वजह बने।

2 महीने में डूब गए 3 बड़े बैंक

अमेरिका में आर्थिक मंदी जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। बीते 2 महीनों के भीतर 3 बड़े बैंको का डूबना इस बात का सबसे बड़ा संकेत है। फर्स्ट रिपब्लिक बैंक से पहले सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक भी डूब चुके हैं। इसमें सिलिकॉन वैली बैंक अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक था। लेकिन शेयरों में आई भारी गिरावट के चलते बैंक डूब गया।

‘भाई-बहनोई के साथ हलाला कर, तभी साथ रहूँगा’ : सऊदी से लौटे शौहर ने बीवी के सामने रखी शर्त, बात न सुनने पर तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के बांदा में तीन तलाक का मामला सामने आया है। शौहर ने अपनी बीवी को तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कहकर शर्त रखी है कि अब वह उसके साथ तभी रहेगा जब महिला अपने देवर के साथ या फिर ननद के शौहर के साथ हलाला करेगी।

पूरा मामला बांदा के शहर कोतवाली क्षेत्र का है। गायत्रीनगर रहने वाली पीड़िता ने थाने पहुँच कंप्लेन दी। उसने बताया कि उसे उसके शौहर ने कहा था कि अगर वो ट्रिपल तलाक की शिकायत कहीं करती है तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

महिला ने अपने लिए न्याय माँगते हुए शौहर समेत ससुराल के 4 लोगों पर इल्जाम लगाए। पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद केस को पीड़िता की शिकायत के आधार पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और मुस्लिम अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिला का निकाह 22 जुलाई 2015 को साबाद गाँव के युवक से हुआ था। कुछ वक्त बाद ही ससुराल वाले उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे। उसके साथ मार-पीट और गाली-गलौच होता। निकाह के कुछ समय बाद उसका शौहर भी सऊदी चला गया और उस वक्त ससुरालवालों ने उस पर अत्याचार बढ़ा दिए। प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने अपने मायके रहना शुरू किया।

जब शौहर से बात हुई तो उसने ससुराल वालों की हरकत के बारे में बताया। इस पर उसके शौहर ने उलटा उसे ही धमकी दे दी और कहा कि वो दूसरा निकाह कर लेगा पर उसके साथ नहीं रहेगा। 2022 में वो दुबई से लौटकर आया और तब उसने बीवी के घर जाकर उसे तलाक कह दिया।

बताया जा रहा है कि उसने बीवी के सामने शर्त रखी थी अगर उसे दोबारा उसके साथ रहना है तो हलाला करना होगा। शौहर ने ये भी कहा कि ये हलाला उसको अपने देवर से और ननद के शौहर से करना होगा। अगर वो ऐसा नहीं करेगी तो उनका रिश्ता आगे नहीं चल सकता। महिला के मना करने पर वो उसे तीन तलाक देकर चला गया।

गौरतलब है कि बीते दिनों 2018 का एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ था। उस केस में पीड़िता को ससुर और भाई से हलाला करने को मजबूर किया गया था। पीड़िता को तीन तलाक देकर हलाला के नाम पर ससुर से उसका रेप करवाया गया था। वहीं देवर के साथ हलाला करने को लगातार दबाव बनाया जा रहा था। महिला ने बरेली में अपनी शिकायत दी थी।