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कॉन्ग्रेस ने बजरंग दल पर बैन का किया वादा: BJP ने बताया- कट्टरपंथी मुस्लिमों का घोषणा पत्र, VHP ने कहा- कर्नाटक से जनाजा निकलना तय

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस ने मंगलवार (2 मई 2023) को अपना घोषणा-पत्र जारी किया। इसमें कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने पर बजरंग दल और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) जैसे संगठनों पर बैन का वादा किया है। दिलचस्प यह है कि कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई पर केंद्र की मोदी सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है। ऐसे में बजरंग दल पर प्रतिबंध का वादा कॉन्ग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत कभी ‘भगवा आतंकवाद’ गढ़ा गया था।

घोषणा-पत्र जारी किए जाने के मौके पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार जैसे पार्टी नेता मौजूद थे। घोषणा-पत्र में पाँच प्रमुख गारंटी का जिक्र करते हुए बजरंग दल, पीएफआई और ऐसे अन्य संगठनों पर प्रतिबंध की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि ये कानून और संविधान का उल्लंघन करते हैं और समुदायों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देते हैं। कॉन्ग्रेस जाति और धर्म के आधार पर समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कड़ी और निर्णायक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कॉन्ग्रेस ने घोषणा पत्र में कहा है, “हम मानते हैं कि कानून और संविधान पवित्र हैं। बजरंग दल, पीएफआई जैसे व्यक्तियों के जरिए बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक समुदायों के बीच शत्रुता या घृणा को बढ़ावा देने वाले अन्य लोगों की तरफ से इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।” बीजेपी ने कॉन्ग्रेस के घोषणा-पत्र को कट्टरपंथी मुसलमानों का मैनिफेस्टो करार दिया है। कहा है कि कॉन्ग्रेस जिन्ना से भी नीचे गिर चुकी है।

कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र का वह हिस्सा जिसमें बजरंग दल पर बैन की बात की गई है

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “गृह मंत्री (अमित शाह) ने PFI को बैन किया तो कॉन्ग्रेस बोल रही है कि वे बजरंग दल को बैन करेंगे, मुस्लिम आरक्षण को फिर से शुरू करेंगे। कॉन्ग्रेस ने जो घोषणा-पत्र जारी किया है, वह पूरा मुस्लिम फंडामेंटलिस्ट का घोषणा-पत्र है।”

कॉन्ग्रेस का जनाजा निकलना तय: VHP

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है कि हिंदू समाज, हिंदू जनमानस, हिंदू आस्था के केंद्रों, मंदिरों और संतों पर हमला कॉन्ग्रेस के लिए कोई नई बात नहीं है। इनका काम जिहादियों को खुश करना और देशद्रोहियों को पनाह देना है। इसी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के तहत इन्होंने अपने घोषणा-पत्र में पीएफआई के साथ बजरंग दल का नाम लिया है। उन्होंने कहा, “ये कॉन्ग्रेस के ताबूत की अंतिम कील साबित होगी। अब कर्नाटक से इसका जनाजा निकलना तय है।”

Vinod Bansal, VHP national spokesperson, talks about Congress' promise to ban Bajrang Dal from OpIndia Videos on Vimeo.

वहीं विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है, “कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए प्रखर राष्ट्र भक्त संगठन बजरंग दल की तुलना कुख्यात, देशद्रोही और प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीएफआई से की है, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। बजरंग दल का एक-एक कार्यकर्ता देश के लिए, समाज के लिए समर्पित है और पीएफआई की गतिविधियों से पूरी दुनिया परिचित है। इसे देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।”

224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा के लिए 10 मई को वोट पड़ेंगे। नतीजे 13 कई को घोषित होंगे।

आए थे आत्मकथा विमोचन को, NCP अध्यक्ष पद से इस्तीफे का ऐलान कर गए शरद पवार: बोले – अब नई पीढ़ी पार्टी को आगे ले जाएगी

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार ने अपनी पार्टी NCP के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने एक कार्यक्रम में खुद इसका ऐलान किया। शरद वपार भारत के रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री भी रहे हैं। उन्होंने जून 1999 में कॉन्ग्रेस तोड़ कर NCP की स्थापना की थी। अब लगभग 24 वर्षों बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही अब MVA (महा विकास अघाड़ी) गठबंधन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिसमें NCP के साथ कॉन्ग्रेस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) भी हैं।

शरद पवार 4 अब्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे हैं। जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे, तब उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था। वहीं मनमोहन सिंह के कार्यकाल में उन्होंने बतौर कृषि मंत्री कार्य किया। शरद पवार अपने उत्तराधिकारी को लेकर कहा कि कमिटी NCP के नए अध्यक्ष को लेकर निर्णय करेगी। उन्होंने मंगलवार (2 मई, 2023) को अपने आत्मकथा विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी पार्टी को उस दिशा में मार्गदर्शित करे, जहाँ वो इसे ले जाना चाहते हैं।

शरद पवार ने इशारा किया है कि NCP में पहले एक कमिटी गठित की जाएगी, जो नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगाएगी। महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजित पवार उनके बाद पार्टी में सबसे ताकतवर नेता हैं, जिन्हें कार्यकर्ता ‘दादा’ भी कहते हैं। वहीं शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी सांसद हैं। हालाँकि, शरद पवार ने साफ़ कर दिया है कि वो राजनीतिक, समाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सक्रिय रहेंगे और काम करते रहेंगे।

शरद पवार इस समय देश के सबसे बुजुर्ग नेताओं में से एक हैं। कुछ ही दिनों पहले वो पंजाब पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने वहाँ के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बदल के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। हाल ही में जिस तरह से उनके भतीजे अजित पवार द्वारा बागी तेवर दिखाने और विधायकों के साथ गायब होने की खबरें आई हैं, उसके बाद से ही पार्टी में राजनीतिक संकट है। अजित पवार भाजपा के साथ जाने की अटकलों से इनकार करते रहे हैं, लेकिन वो नवंबर 2019 में 3 दिन की सरकार भाजपा के साथ मिल कर चला चुके हैं।

‘The Kerala Story’ पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, ‘हेट स्पीच’ बता बैन माँग रहे थे निजाम पाशा-कपिल सिब्बल: सेंसर बोर्ड ने 10 सीन डिलीट कर दिया ‘A’

सुप्रीम कोर्ट ने ‘The Kerala Story’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, वहीं सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट के साथ पास कर दिया है। ‘The Kerala Story’ केरल की उन लड़कियों की वास्तविक कहानी पर आधारित है, जिन्हें झूठे प्यार और इस्लामी धर्मांतरण के जाल में फँसा कर ISIS आतंकियों का सेक्स स्लेव बना दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में फिल्म के खिलफ एक इंटरलॉक्यूटरी एप्लिकेशन (IA) दाखिल किया गया था।

हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (2 मई, 2023) को इस पर सुनवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस BV नागरत्न की पीठ के समक्ष इसका जिक्र किया गया था। हेट स्पीच संबंधी अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पेंडिंग रिट पेटिशन दाखिल की गई है, उसी के तहत इस IA को डाला गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके जरिए किसी फिल्म की रिलीज को चुनौती देना ठीक तरीका नहीं है।

वकील निजाम पाशा ने इस पर तुरंत सुनवाई की माँग की थी। उन्होंने इसे ‘हेट स्पीच की सबसे बुरी घटना’ बता कर पेश किया था। उन्होंने इसे ‘ऑडियो-विजुअल हेट प्रोपेगंडा’ भी करार दिया था। इस पर जजों ने कहा कि इसे हाईकोर्ट क्यों नहीं ले जाया जा सकता और हर प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट से ही क्यों शुरू हो। कपिल सिब्बल ने भी इसके ट्रेलर के ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने की माँग की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने सर्टिफाई कर दिया है, इस पर एक याचिका दायर कर के ही सुनवाई की माँग की जा सकती है।

हालाँकि, कपिल सिब्बल ये दलील देते रहे कि फिल्म की रिलीज को अब कम समय ही बचा है। उन्होंने कहा कि वो मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष याचिका दायर कर त्वरित सुनवाई की माँग करेंगे। जस्टिस जोसेफ ने कहा, “मुझे इस फिल्म के बारे में पता है। मैंने एक टीवी डिबेट में देखा। हम भी टीवी देखते हैं।” उक्त फिल्म शुक्रवार (5 मई, 2023) को रिलीज हो रही है। सुदीप्तो सेन ने इसका निर्देशन किया है जबकि विपुल अमृतलाल शाह इसके निर्माता हैं।

सेंसर बोर्ड ने कुछ बदलावों के साथ इसे रिलीज के लिए तैयार किया है। एक दृश्य में हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर टिप्पणी (मुस्लिम किरदार द्वारा) थी, जिसे हटाया गया है। भारतीय कम्युनिस्टों को दोहरे रवैये वाला बताने वाली एक टिप्पणी में से ‘भारतीय’ शब्द हटाया गया है। केरल के एक पूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदम ने राज्य के इस्लामी स्टेट बनने की भविष्यवाणी की थी, उस टीवी इंटरव्यू को हटाया गया है। सेंसर बोर्ड ने 10 दृश्य हटा कर इसे रिलीज के लिए आगे बढ़ाया है।

मंदिर का झंडा नीचे फेंका, इस्लामी झंडा लहराया… फेसबुक पर Video डाला, बरेली में ग्राम प्रधान मोहम्मद आरिफ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भोजीपुरा थाने की पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर कर धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में मोहम्मद आरिफ उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार किया है। आरोपित के कब्जे से एक मोबाइल भी बरामद किया गया है। 32 वर्षीय मोहम्मद आरिफ भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गाँव भीकमपुर का प्रधान है।

पुलिस के अनुसार, आरिफ उर्फ गुड्डू को बैकुंठापुर फाटक के पास से सोमवार (1 मई 2023) दोपहर करीब 12:20 पर गिरफ्तार किया गया। उसने अपने फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया था। इसमें एक मंदिर पर लगे झंडे को नीचे फेंक उस जगह इस्लामी झंडा लहराते दिखाया गया था।

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राज कुमार अग्रवाल ने बताया कि बरेली पुलिस के सोशल मीडिया सेल से भोजीपुरा पुलिस को एक वीडियो भेजी गई थी। भोजीपुरा थाने के सब इंस्पेक्टर मोदी सिंह को जाँच में पता चला कि गुड्डू के मोबाइल से आपत्तिजनक पोस्ट शेयर कर माहौल खराब करने की कोशिश की गई है। मोदी सिंह की शिकायत के आधार पर गुड्डू के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 (A) (धार्मिक भावना आहत करना) 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और 67 आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

आरोपित खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रधान आरिफ के खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं। 2021 में उस पर सरकारी काम में बाधा डालने, बलवा समेत कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

बता दें कि बरेली में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें सोशल मीडिया का उपयोग आपत्तिजनक टिप्पणी करने, धमकी देने, माहौल खराब करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया गया। पिछले साल जुलाई में बरेली पुलिस ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की गर्दन काटने की धमकी देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद फरीदपुर के कसावन मोहल्ला निवासी नासिर को गिरफ्तार किया था। नासिर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A, 504, 506 और आईटी एक्ट 67 के तहत मामला दर्ज हुआ था।

हिंदू घृणा वाले ‘आर्ट वर्क’ पर यूक्रेन ने माँगी माफी, रक्षा मंत्रालय ने शेयर की थी माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर: विरोध के बाद कर दिया था डिलीट

यूक्रेन ने हिंदू घृणा वाले ट्वीट के लिए माफी माँगी है। यूक्रेन की प्रथम उप विदेश मंत्री एमीन झापरोवा (Emine Dzheppar) ने कहा है कि हिंदुओं की आराध्य देवी माँ काली की तस्वीर के दुरुपयोग का हमें खेद है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने पिछले दिनों ‘आर्ट वर्क’ के नाम पर माँ काली की तस्वीर वाला एक ट्वीट किया था। इसमें यूक्रेनी हमले से उठे गुबार को माँ काली के स्कर्ट के तौर पर दिखाया गया था।

झापरोवा ने मंगलवार (2 मई 2023) को ट्वीट कर कहा, “हमें खेद है कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने हिंदुओं की आराध्य देवी काली माता के चित्र का गलत उपयोग किया। यूक्रेन और यहाँ के लोग भारतीय संस्कृति का दिल से सम्मान करते हैं और भारत के समर्थन की पुरजोर सराहना करते हैं। इस चित्र को पहले ही हटा दिया गया है। हम आपसी सम्मान और दोस्ती की भावना बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।”

यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रविवार (30 अप्रैल 2023) को दो फोटो शेयर की थी। इसमें से एक फोटो में धुएँ का गुबार दिखाई दे रहा था। वहीं, दूसरी फोटो में धुएँ के गुबार के बीच माँ काली की आपत्तिजनक तस्वीर दिखाई दे रही थी, जिसमें उनकी जीभ बाहर निकली हुई और गले में खोपड़‍ियों की माला थी। माँ काली के बाल भी अजीब तरह से उड़ते हुए दिखाई दे रहे थे। इस फोटो को यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने ‘वर्क ऑफ आर्ट’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। इसके जरिए यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने देवी काली की हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो से तुलना करते हुए उन्हें ‘अपस्कर्ट मूमेंट‘ में दिखाया था।

यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय द्वारा शेयर किए गए हिंदूफोबिक ट्वीट का स्क्रीनशॉट

माँ काली के अपमान वाला ट्वीट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसका जमकर विरोध किया था। सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से काफी हैरान थे कि यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक हैंडल ने हिंदू धार्मिक मान्यताओं का मजाक कैसे उड़ाया। उन्होंने यूक्रेन की इस हरकत को लेकर उनसे माफी की माँग की थी। बाला नाम के एक यूजर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची को टैग करते हुए ट्वीट किया था। उन्होंने कहा था, “कृपया काली माँ को बदनाम करने वाली इस अपमानजनक पोस्ट पर ध्यान दें। अगली बार जब यूक्रेन संयुक्त राष्ट्र में मदद और समर्थन की भीख माँगे तो इसे ध्यान में रखें।” हालाँकि, लगातार विरोध के बाद यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था।

कभी अफरीदी-कभी कोहली, हर किसी से भिड़ जाते हैं अफगानी क्रिकेटर नवीन उल हक, अमित मिश्रा न होते तो और बदसूरत होती विराट और गौतम गंभीर की फाइट

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) एक बार फिर गौतम गंभीर और विराट कोहली की भिड़ंत को लेकर चर्चा में है। लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) पर आईपीएल आचार संहिता उल्लंघन के कारण मैच फीस का 100 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।

गंभीर और कोहली को आईपीएल की आचार संहिता के आर्टिकल 2.21 के अंतर्गत लेवल-2 का दोषी पाया गया है। इसके अलावा लखनऊ के तेज गेंदबाज नवीन-उल-हक को मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना देना होगा। उन्हें अनुच्छेद 2.21 के तहत लेवल 1 का दोषी पाया गया है। नवीन-उल-हक अफगानिस्तान के खिलाड़ी हैं और आईपीएल में लखनऊ की ओर से खेल रहे हैं।

लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में सोमवार (1 मई 2023) को खेले गए मैच में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 18 रनों से मात दी। इसके बाद मैदान पर गंभीर और कोहली के बीच हुए झगड़े का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

वायरल वीडियों में आप देख सकते हैं कि विराट कोहली और नवीन-उल-हक के बीच मैच के दौरान यह विवाद शुरू हुआ था। नवीन ने विराट से कुछ कहा था, जो झगड़े में बदल गया। विराट कोहली गुस्से में उन्हें वार्निंग देते हुए नजर आए। हालाँकि, उस वक्‍त मामला शांत हो गया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच फिर विवाद हो गया। मैच के बाद काइल मेयर्स को विराट के साथ बात करते देखा गया। इसी बीच गौतम गंभीर वहाँ आए और मेयर्स को हाथ पकड़कर ले गए। बाद में विराट और गंभीर के बीच कहासुनी हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कई खिलाड़ियों को बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा।

वीडियो में आप दोनों मौकों पर अमित मिश्रा को बचाव करते देख सकते हैं। लखनऊ की टीम से खेल रहे मिश्रा भी विराट और गंभीर की तरह दिल्ली से आते हैं। उन्हें दोनों का करीबी भी माना जाता है। वैसे जिस अफगानी क्रिकेटर नवीन उल हक से इस विवाद की शुरुआत हुई वे पहले भी कई बार इस तरह सीनियर क्रिकेटरों से उलझ चुके हैं। एलपीएल में उनकी थिसारा परेरा से भिड़ंत हुई थी। इसी तरह पीएसएल में उन्हें मोहम्मद आमिर और और शाहिद अफरीदी से उलझते देखा गया था।

बता दें कि इससे पहले (अप्रैल 2023) भी विराट कोहली पर आईपीएल ने मैच फीस का 10% जुर्माना लगाया था। आईपीएल की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बल्लेबाज विराट कोहली पर चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2023 मैच के दौरान आईपीएल आचार संहिता के उल्लंघन के लिए मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।

पुराने घर को गिरा कर बना दिया गार्डन, फिर चोरी-छिपे बनवाया नया ‘महल’: CM केजरीवाल पर नया खुलासा, 42 स्टाफ पर सरकारी खजाने से खर्च

खुद को ‘दिल्ली का मालिक’ बताने वाले अरविंद केजरीवाल के आवास को लेकर एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। नया खुलासा यह है कि केजरीवाल ने चोरी छिपे सीएम आवास में रहने के लिए एक नया ‘महल’ तैयार करवाया है। वहीं, पुराने घर को गिराकर उसकी जगह गार्डन बनाया गया है। यही नहीं, केजरीवाल के इस नए घर की देखरेख के लिए 42 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।

दरअसल, टाइम्स नाउ ने अपनी स्पेशल सीरीज ‘ऑपरेशन शीश महल’ में सेटेलाइट इमेज के सहारे कई बड़े खुलासे किए हैं। नए खुलासे में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल ने सीएम आवास की पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत के नाम पर टेंडर निकाला था। इस टेंडर के तहत पुरानी बिल्डिंग में मरम्मत के साथ ही कुछ बदलाव होने थे। लेकिन, इसकी जगह केजरीवाल ने एक नए सीएम हाउस का निर्माण करवाया है। वहीं, पुरानी बिल्डिंग को गिराकर उसकी जगह एक बड़ा गार्डन बनवाया गया है। इस गार्डन के बगल में लॉन टेनिस के लिए एक कोर्ट भी बनाया गया है।

इस बड़े खुलासे के साथ ही केजरीवाल से यह सवाल पूछा जा रहा है कि यदि पुरानी बिल्डिंग की मरम्मत के लिए टेंडर निकाला गया था तो फिर नई बिल्डिंग क्यों बनाई गई? यदि पुरानी गिराकर नई बिल्डिंग बनवानी ही थी तो इसे छिपाया क्यों गया? इन सभी चीजों का फिलहाल जवाब तो यही है कि केजरीवाल को डर था कि यदि उनके नए ‘महल’ की जानकारी सामने आ गई तो वीआईपी कल्चर खत्म करने की उनकी बातें ढकोसला साबित हो जाएँगी।

केजरीवाल के घर में 42 लोगों का स्टाफ

वहीं, इंडिया टीवी ने अरविंद केजरीवाल के घर की देखरेख करने के लिए नियुक्त किए गए लोगों को लेकर खुलासा किया है। इस खुलासे के अनुसार, केजरीवाल के घर में हाउस कीपिंग यानी कि देखरेख के लिए 42 लोगों का स्टाफ काम कर रहा है। इसमें से 20 लोग सुबह की शिफ्ट में काम करते हैं। वहीं, 10 लोग शाम की शिफ्ट में काम करते हैं। यही नहीं, इन लोगों के काम को देखने के लिए 2 सुपरवाइजर को भी काम पर रखा गया है। इसके अलावा, सीएम हाउस के गार्डन की सफाई और देखरेख के लिए 10 मालियों की नियुक्ति की गई है। इन सभी लोगों को दिल्ली सरकार के खजाने से पैसा दिया जा रहा है।

इससे पहले भी हुए खुलासे

बता दें कि इससे पहले हुए खुलासे में बताया गया था कि CM आवास में 8-8 लाख रुपए के पर्दे लगाए गए। केवल पर्दों पर ही 1 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। कुल 23 पर्दों का ऑर्डर दिया गया था, जिनमें से कुछ अभी लगने बाकी हैं और कुछ लगाए दिए गए हैं। शुरुआत में 8 पर्दे लगाए गए, जिनकी कीमत 45 लाख रुपए थी। दूसरे चरण में 15 पर्दों का ऑर्डर दिया गया, जो 51 लाख रुपए के थे।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री आवास में लगाने के लिए वियतनाम से मार्बल मँगाया गया। इसे ‘डियोर पर्ल मार्बल’ बोला जाता है, जो सुपीरियर क्वालिटी का होता है। इसकी कीमत 15 लाख रुपए होती है। साथ ही इसे लगाने के लिए भी अलग तरीके से फिटिंग की जाती है। वहीं, एक अन्य खुलासे में सामने आया था कि सीएम केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास में एक-दो नहीं, बल्कि 15 बाथरूम हैं और हर बाथरूम को सजाने-सँवारने में एक-एक लाख रुपए खर्च किए गए हैं।

LG ने दिए जाँच के आदेश

गौरतलब है कि इन खुलासे के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मामले में जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेजों को वो अपने संरक्षण में ले लें और साथ ही सभी तथ्यों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर पेश करें।

मुख़्तार के भाई अफजाल अंसारी की सांसदी हुई रद्द: गैंगस्टर एक्ट में हुई थी 4 साल की सजा, गाजीपुर सीट से था BSP सांसद

गाजीपुर से बीएसपी सांसद अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई। उसे शनिवार (29 अप्रैल 2023) को गैंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से ही अफजाल की सांसदी जाना तय माना जा रहा था। अफजाल के साथ ही उसके भाई मुख्तार अंसारी को भी 10 साल की सजा सुनाई गई थी।

दरअसल, मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी पर बीजेपी विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या का आरोप था। यही नहीं, मुख्तार पर कोयला व्यापारी नंदकिशोर रूँगटा का अपहरण और हत्या का आरोप था। इस मामले में गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत सुनवाई करते हुए मुख्तार अंसारी पर 10 साल की सजा के साथ 5 लाख का जुर्माना लगाया था। वहीं, अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा सुनाई गई थी। अफजाल को 1 लाख को जुर्माना भी भरना होगा।

बता दें कि सजा होने के पहले अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर था। लेकिन अब उसे जेल भेजा गया है। वहीं, मुख्तार अंसारी पहले से ही यूपी की जेल में बंद है। वहीं, अफजाल अंसारी जमानत पर बाहर था।

अंसारी बंधुओं की सजा पर कृष्णानंद राय के परिवार ने की थी सीएम योगी की तारीफ

मुख्तार और अफजाल अंसारी की सजा पर कोर्ट के फैसले के बाद कृष्णानंद राय के बेटे पीयूष राय ने कहा था कि उनकी माँ ने कई सालों तक संघर्ष किया है। पूरा परिवार अंसारी बंधुओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था। उन्होंने कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई थी। साथ ही कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसलों के चलते ही माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई हो रही है। मुख्तार और अफजाल को हुई सजा के लिए यूपी की बदली हुई परिस्थितियाँ भी जिम्मेदार हैं।

वहीं, एक अन्य बातचीत में पीयूष राय ने कहा है कि उनके पिता की हत्या 18 साल पहले हुई थी। हत्या के दौरान उनके पिता की शिखा भी काटी गई थी। शिखा सिर्फ उनकी नहीं बल्कि एक समाज की शिखा काटी गई थी। आज न्यायपालिका ने उसका शिखा का मान बढ़ाया है।

मुख़्तार अंसारी के डर से सूअर को मस्जिद से दूर भगाने के लिए पानी में घुसती थी पुलिस, अपराधी खुलेआम घूमे थे: तब मऊ का ऐसा था हाल, पत्रकारों को राइफल से पीटते थे

साल 2005 में हुए मऊ दंगों में मुख्तार अंसारी की भूमिका पर हाल में चश्मदीदों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कुछ खुलासे किए थे। किसी ने बताया था कि मुख्तार के राज में इस्लामी कट्टरपंथी ‘हिंदुओं की चटनी’ बनाने की धमकी देते थे, तो किसी ने बताया था कि माफिया के राज में डीएम हिंदुओं के घरों को जलने को छोड़ देते थे पर पुलिस नहीं भेजते थे।

आइए आज ऑपइंडिया पत्रकार राहुल पांडे और इन चश्मदीदों के बीच हुई बातचीत की कुछ और अहम बातें आपको बतातें हैं। इनसे पता चलता है कि मुख्तार के दौर में पुलिस से लेकर पत्रकारों का क्या हश्र होता था।

पुलिस पकड़ती थी सूअर

दंगों के चश्मदीदों में एक छोटेलाल ने हमसे बातचीत में मऊ दंगों को सुनियोजित दंगा बताया था। उन्होंने बताया था कि कैसे मुख्तार अंसारी उस समय खुली जिप्सी में हथियार लेकर घूम रहा था और कोई रोकने वाला नहीं था। कैमरे के सामने एक आदमी की हत्या हुई थी मगर उसे दिखाने वाला कोई नहीं था। इन्हीं छोटेलाल ने हमें दंगों से पहले का भी एक वाकया बताया। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्तार के डर से पुलिस वाले पानी में कूदकर सूअर पकड़ते थे।

उन्होंने कहा मुख्तार अंसारी के समय में कोतवाल से सूअर दौड़ा-दौड़ा कर पकड़वाया जाता था। ईद आते ही हर जगह सुअरों को पकड़कर बंद करवा दिया जाता था तो तीन दिन न सूअर दिखते थे न उनके बच्चे। छोटेलाल के अनुसार, ‘ईद के दिन में ओवरब्रिज के पास कोतवाल के साथ खड़ा था। मैंने अपनी आँख से देखा है कि छोटा सूअर का बच्चा दौड़ा तो होमगार्ड चिल्लाया- ‘साहब सूअर।’ इतना कहते ही वो उसे पकड़ने के लिए पानी में घुस गए। वो सूअर मस्जिद की तरफ नहीं जा रहा था।”

छोटेलाल बताते हैं कि ये वाकया दंगों से पहले का है। वो इसका जिक्र करते हुए कहते हैं कि उस समय पुलिस सुअर पकड़ने के लिए दौड़ जाती थी लेकिन अपराधी पकड़ने के लिए नहीं। यही वजह थी कि जब पुलिसकर्मी पानी से निकले तो उन्हें छोटेलाल को देखकर शर्म आई कि अपराधी को उन्होंने पकड़ा नहीं और सुअर पकड़ते उन्हें देख लिया गया।

पत्रकार की पिटाई, 24 घंटे बंधक बनाए रखा

इसी तरह गणेश सिंह ने मऊ दंगों से पहले की बात करते हुए बताया कि इस दंगे से पहले भी ठेकेदारों पर, पत्रकारों पर खुलेआम हमले होते थे। उसने एसीबीडब्ल्यू डाक बंगले में अटैक करवाया और जब पत्रकारों ने उसे कवर करना चाहा तो राइफल के बट से कूट-कूटकर उनसे फोटोज डिलीट करवाई। पत्रकार का नाम द्वारिका गुप्ता था जिन्होंने साहस दिखाते हुए राइफल के बट को पकड़ लिया था।

गणेश सिंह के मुताबिक उन्हें छुड़वाने के लिए तत्कालीन सांसद चंददेव राजवैद्य और सपा के ही जिला पंचायत अध्यक्ष राजभवन थे। ये दोनों मुख्तार अंसारी के सामने होटल में हाथ जोड़कर मुख्तार से बोल रहे थे कि द्वारिका भाई को छोड़ दो। लेकिन उसने उन्हें 24 घंटे नहीं छोड़ा। इस दौरान कोतवाल, एसपी ऑफिसर सब मूकदर्शक बने रहे। बाद में उन्हें पीटकर छोड़ा गया।

गरीबों के बच्चों की शादी नहीं गुर्गों के बच्चों की शादी

चश्मदीद गणेश यह भी बताते हैं कि मुख्तार अंसारी की छवि जो रॉबिनहुड के तौर पर पेश की गई है वो बिलकुल गलत है। उन्होंने कहा कि ये जो फैलाया जाता है कि मुख्तार ने गरीबों के बच्चों की शादी करवाई वो सरासर झूठ है। अगर कभी ऐसा हुआ है तो उसने अपने गुर्गों के बच्चों की शादी करवाई होगी। गणेश के मुताबिक मुख्तार ने किसी पर परोपकार नहीं किया है। उसका काम केवल लूटपाट मचाना था।

मऊ दंगों में मुख्तार की भूमिका पर चश्मदीदों ने राहुल पांडे को क्या बताया…इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

GST कलेक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़ रचा इतिहास: अप्रैल 2023 में सरकार की झोली में आए ₹1.87 लाख करोड़, आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी करने वालों को मिला जवाब

वित्तीय वर्ष के पहले ही महीने में जीएसटी कलेक्शन (GST Collection) से सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। दरअसल, केंद्र सरकार ने अप्रैल 2023 के जीएसटी कलेक्शन के आँकड़े जारी किए हैं। इसके मुताबिक अप्रैल में सरकार को जीएसटी से 1.87 लाख करोड़ रुपए हासिल हुए हैं। यह अब तक का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल में जीएसटी का कुल कलेक्शन 187035 करोड़ रुपए रहा। इसमें से सीजीएसटी कलेक्शन 38440 करोड़ रुपये, एसजीएसटी कलेक्शन 47412 करोड़ रुपए, आईजीएसटी 89158 करोड़ रुपए तथा शेष अन्य टैक्स का कलेक्शन 12025 करोड़ रुपए रहा। जीएसटी का यह कलेक्शन अप्रैल 2022 की तुलना में 12% अधिक है। तब सरकार ने जीएसटी से 1.68 लाख करोड़ रुपए जुटाए थे। सीधे तौर पर देखें तो बीते एक साल में जीएसटी कलेक्शन में बम्पर उछाल हुआ है।

मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 20 अप्रैल, 2023 को एक दिन में 9.8 लाख ट्रांजैक्शन हुए। इससे एक ही दिन में 68,228 करोड़ रुपए का जीएसटी कलेक्शन हुआ है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार को जीएसटी से 18.10 लाख करोड़ रुपए मिले थे। वित्तीय वर्ष 2021-2022 की तुलना में जीएसटी का यह कलेक्शन 22% अधिक था। यदि बात बीते पिछले वित्तीय वर्ष से अब तक की करें तो बीते 13 महीनों से लगातार जीएसटी का कलेक्शन 1.40 लाख करोड़ रुपए के स्तर के पार ही रहा है। यही नहीं, जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक तीसरी बार ऐसा हुआ है कि जीएसटी का कलेक्शन 1.60 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा।

जीएसटी कलेक्शन के यह आँकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब जीएसटी का कलेक्शन 1.75 लाख करोड़ रुपए के पार पहुँचा है। साथ ही इससे उन तथाकथित अर्थशास्त्रियों को भी करारा जवाब मिल गया है जो भारत में आर्थिक मंदी की आहट और अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने के दावे करते थे। वास्तव में, यह सरकार की नीतियों का परिणाम है कि वैश्विक मंदी की आहट और अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्ति के बैंकों के डूबने के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार शिखर की ओर बढ़ रही है।