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सेकुलर नेत्रों ने माफिया में भी देखा ‘पीड़ित मुस्लिम’, इसलिए जो विक्टिम कार्ड कभी था राजनीति में तुरुप का पत्ता अब जोकर बनकर रह गया

2012 में प्रयागराज में मुझे अतीक अहमद के घर जाने का अवसर मिला था। जनवरी-फरवरी में 55 दिन तक मैं उत्तर प्रदेश में था। मुलायम सिंह यादव ने अपने चिरंजीव अखिलेश यादव को सपा की राजनीतिक रियासत का उत्तराधिकारी बनाकर उतारा था। उत्तर प्रदेश मूल के अपने सीनियर शरद गुप्ता के नेतृत्व में मैं भी जातियों के जंगल में चुनाव यात्रा पर था। शरदजी लखनऊ के ही हैं और चुनावी कवरेज का मेरा रूट प्लान उन्होंने ही बनाया था। इस रूट पर इलाहाबाद आया तो एक राजनीतिक हस्ती के रूप में अतीक भी आ गए।

मेरी गाड़ी का ड्राइवर इम्तियाज झाँसी का था, जो मुझे उसके घर तक लेकर गया। मायावती ने मुख्यमंत्री रहते अतीक के घर का मुखमंडल बुरी तरह बिगाड़ दिया था। बुलडोजर नहीं चला था, लेकिन चेहरे पर खरोंचें चुनावी वातावरण तक ठीक नहीं की गई थीं। प्रांगण में अतीक के समर्थक और कार्यकर्ताओं की भीड़ थी। वे कहीं से किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं दिख रहे थे। वह किसी नेता का आवास कम और किसी अड्‌डे जैसा दिखाई दे रहा था।

मैंने उन्हीं में एक से पूछा था कि मुस्लिम समाज सलमान खुर्शीद या आरिफ मोहम्मद खान जैसे पढ़े-लिखे, सुसभ्य छवि वाले महानुभावों को अपना लीडर क्यों नहीं बनाता? मैंने यूपी के ही अतीक जैसे ही आपराधिक आभामंडल वाले मुख्तार अंसारी का भी जिक्र किया, जिनके सत्ता केंद्र मऊ से होकर आया था।

वह कार्यकर्ता कम और पुरानी फिल्मों में अजीत के आसपास बुरी नजर से घूरते रहने वाले शेट्‌टी जैसा अधिक लग रहा था। जवाब में उसने सलमान खुर्शीद को इन शब्दों में निरस्त किया था- उनका क्या दीन-ईमान है? अपने घर की बहन-बेटियों से रिश्ते के लिए उन्हें दीगर धर्मों में जाना पड़ा? मुझे नहीं पता कि वह किस आधार पर खुर्शीद के बारे में ऐसा कह रहा था। मगर पक्के दीन-ईमान वाला अतीक उसके लिए मजहबी शान का प्रतीक था और उसके आपराधिक प्रकरणों से उसे कोई आपत्ति नहीं थी। उसकी नजर में एफआईआर, पुलिस और कोर्ट तो राजनीतिक खेल का हिस्सा थे।

लौटते हुए इम्तियाज का प्रश्न था-‘सर, आप इन जैसों के यहाँ जाते ही क्यों हैं? सबको ज्ञात है कि अतीक किस प्रकार नेता बना और उसका रिकॉर्ड क्या है? क्या आप जैसे लोग भी अतीक जैसों को बड़ा नहीं बनाते?’

अतीक ने अपने स्वर्णिम समय में जिस व्यवस्था का खुलकर मजाक बनाया, उसी व्यवस्था ने उसका भी मजाक खुलकर ही बनाया। यह किसी ऑटोमेटिक मोड पर हिसाब के बराबर होने की कथा है, जिसमें योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा पर पहली आँच केवल इस कारण से है कि प्रहरियोंं के बीच तीन उचक्के आए और दो अपराधी भाइयों को मारकर हाथ ऊँचे करते हुए पुलिस के आश्रय में स्वयं सुरक्षित हो गए। लाभ-हानि का गणित पुलिस लगाए। उसे तो पुराने दो के बदले ऑन स्पॉट तीन नए मिल गए!

अनेक अवसरों पर अपनी गरिमा को पहले ही अच्छी तरह मिट्‌टी में मिला चुके टीवी मीडिया ने जीवित अतीक और अशरफ के उर्स का आयोजन किया, जो उसे कब्र में लिटाकर भी नहीं लौटा है। विद्रूपता के इस उत्सव में मनमोहन देसाई की मसाला मूवी के कव्वाली दृश्य की भाँति तीन नकली कव्वाल मीडिया के वेश में उचककर आए और मीडिया का मर्सिया रचकर फिल्म फेयर ले उड़े!

मैं 25 साल पत्रकारिता में रहा हूँ। मैं मानता हूँ कि मुँह उठाकर घटनाओं के पीछे भागने की इस विक्षिप्त अवस्था पर टीवी वालों को विचार करना चाहिए। यह पत्रकारिता नहीं है। मैं अपने कॅरिअर के मध्यांतर में ढाई वर्ष एक चैनल में भी रहा। वह काम मुझे रास नहीं आया। ग्लैमर और पैसे के बावजूद मैंने उसे तत्काल छोड़ने का निर्णय लिया था। नोएडा में बैठी इनपुट-आउटपुट की अर्द्धविक्षिप्त आत्माओं ने फील्ड में काम कर रहे रिपोर्टरों को कठपुतली बना दिया है, जो कैमरा-माइक की तगारी उठाकर हर दिन समाचारों की मनरेगा के श्रमिक बने हुए हैं। प्रेतों की तरह टूटे पड़े रहना समाचार कवरेज नहीं है। ऐसे समाचारों की किसे 24 घंटे तक आवश्यकता है?

अतीक के बात करने का अंदाज भी एक नेता का नहीं था। वह एक तांगा चलाने वाले का बेटा था और अपराध जगत में डर का साम्राज्य बनाकर सपा के सहारे राजनीतिक पथ पर अपनी शोभायात्राएँ धूमधाम से ले गया था। मुझे किसी ने बताया कि इलाहाबाद के किसी भी विषय में नेताजी सबसे कहा करते थे- ‘अतीक भाई से मिल लीजिए। उनसे ही बात कीजिए।’ वह एक समय इलाहाबाद का मुख्यमंत्री ही था। एक ऐसे व्यक्ति का सत्ता के शीर्ष पर पहुँचना, बहुत से ऐसे ही लोगों को आकर्षित करता है। यह प्रकोप चेन रिएक्शन जैसा बढ़ता है! सपा में इनके लिए सर्वाधिक अनुकूल मौसम और मिट्‌टी था। नेताजी पद्मविभूषण हो गए, अतीक-अशरफ समारोहपूर्वक सुपुर्दे-खाक!

वह सर्वश्रेष्ठ छटा हुआ था इसलिए संसद के लिए फूलपुर से चुना हुआ था और उसके पास सब के सब निचले स्तर के छटे हुए थे। पुलिस उसकी ऊपर की जेब में थी। उसने सरगना से सियासी सर्वेसर्वा बनने तक की सफल यात्रा की थी। मीडियावालों को कभी इलाहाबाद में उसके पीड़ितों की आवाजें सुनना और सुनाना चाहिए, जिनकी सुनने वाला कभी कोई नहीं था! तब अतीक के ही सिक्के चलते थे, क्योंकि लखनऊ में टकसालें चलाने वाले आका हुजूर उसके ही थे।

जो धूमकेतु की तरह आते हैं, उनकी चमक एक क्षण के लिए आकाश में सबको लुभाती है लेकिन वे शीघ्र ही सदा के लिए अंधकार में खो भी जाते हैं। केवल समय की बात है कि कौन कब डूबता है!

कानपुर के विकास दुबे का एनकाउंटर जब हुआ तब किसी हिंदू को उसमें हिंदू नहीं दिखा, केवल दो कौड़ी का एक अपराधी दिखा। किसी ब्राह्मण को उसमें ब्राह्मण कहीं से नहीं दिखा, केवल एक घृणित अपराधी दिखा, जो धरती पर बोझ था? अतीक के सुपुत्र असद के एनकाउंटर पर सेक्युलर सजल नेत्रों को एक पीड़ित मुसलमान दिखा। अखिलेश को भी, औवेसी को भी। यह मानसिकता का अंतर है। यह घिसपिट चुका विक्टिम कार्ड है, जो राजनीति के बावन पत्तों में कभी तुरुप का था, अब केवल एक जोकर रह गया है। किंतु जोकरों की जमातों को उसे जीवनपर्यंत चलाते रहने का सेक्युलर अभिशाप है!

असद के एनकाउंटर पर उसके अंकल अशरफ का एक सत्य वचन सुनाई दिया- ‘अल्लाह की चीज थी। अल्लाह ने वापस ले ली!’ पूरी धरती पर उथलपुथल से भरी अपनी हरियाती दुनिया के धमाकेदार हिसाब में सात आकाशों के ऊपर अत्यंत व्यस्त अल्लाह को भी अपनी गलती का अनुभव हुआ। गलत चीज दे दी थी। वापस ले ली। चार दिन बाद उसने अतीक और अशरफ को भी गलत माल की तरह विनम्रतापूर्वक धरती से वापस ले लिया!

किसी के जीवन का आरंभ कहीं से भी हो सकता है। किंतु समय रहते अपनी भूलों को सुधारकर जीवन में अच्छे मार्गों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा होनी चाहिए। भारतीय परंपरा में एक रत्नाकर का उदाहरण काफी है, जो अपने जीवन के एक भाग में लूटमार करके अपनी आजीविका चलाता है, किंतु समय रहते उसकी चेतना झंकृत होती है और संसार में वह महर्षि बाल्मीकि के रूप में अमर हो जाता है! यह अवसर हरेक के लिए संभव है। उपलब्ध है। अल्लाह ने अतीक को धन और साधन संपन्न बनाकर एक अवसर दिया था, जो उसने गँवा दिया!

अपराधों की दलदल से निकलकर राजनीति में आने के बाद अतीक अपनी अकूत शक्ति से किसी और का न सही, अपने समुदाय का ही कुछ भला कर सकता था। उसकी सर्वाधिक आवश्यकता उन्हें ही थी। वह एक उज्जवल प्रकाश पुंज बन सकता था। बंटवारे के बाद वोट बैंक बनाकर रखे गए अपने भ्रमित समाज को सही दिशा दिखाने में कोई समस्या नहीं थी। मगर सेक्युलर राजनीति में अपराधों से प्राप्त शक्ति का तात्कालिक लाभ वाला मिश्रण उसे रास आया। दबंग राजनीति में वह हिट भी हुआ। किसी भी कथा का अंतिम सार उसके पात्रों के चरित्र से ही निकलता है। अतीक की कथा का अंत ऐसा ही कुछ होना था!

अंत में, अल्लाह अगर ऐसी ताकत किसी को भी दे तो उसके सदुपयोग की संतुलित बुद्धि और प्रेरणा देने में भी कृपणता न दिखाए ताकि एक दिन भूल सुधार करते हुए उसे अपना ही भेजा गया गलत माल ऐसे तमाशे के बीच वापस लेना पड़े!

‘हाईकोर्ट्स में जाइए’: देश भर में रामनवमी हिंसा पर जाँच की माँग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की: कहा था – ‘साजिश करती है मुस्लिम भीड़, शोभा यात्राओं को मिले सुरक्षा’

सुप्रीम कोर्ट ने रामनवमी पर देश भर में श्रद्धालुओं के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों की जाँच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। ये याचिका ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक ट्रस्ट द्वारा दायर की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को ख़ारिज कर दिया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस याचिका में कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश भर में हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया और हिन्दू श्रद्धालु इसका शिकार बने।

याचिका में जानकारी दी गई थी कि हर साल रामनवमी के दौरान इस तरह की हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वो पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना में स्थित हाईकोर्ट्स में याचिका दायर करें। बता दें कि महाराष्ट्र में भी इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल में इसका सबसे ज़्यादा असर देखने को मिला। वहाँ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान से भी कट्टर इस्लामी गुंडों को सह मिला।

इस याचिका में हिन्दू संस्था ने माँग की कि हिन्दुओं की शोभा यात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। रामनवमी के अलावा सभी त्योहारों पर सुरक्षा की माँग की गई। साथ ही कहा गया कि जो मुस्लिम हिन्दू पर्व-त्योहारों को पसंद नहीं करते हैं, वो इस पर हमला कर देते हैं। बताया गया कि एक साजिश के तहत इस तरह के हमले किए जाते हैं। याचिका में माँग की गई कि जिन-जिन राज्यों में ऐसी हिंसा हुई है, वहाँ के मुख्य सचिवों से रिपोर्ट तलब की जाए।

साथ ही राज्य सरकारों को ये आदेश जारी करने का निवेदन भी किया गया था कि हिंसा की इन घटनाओं में जिन पीड़ितों को नुकसान पहुँचा, उनके नुकसान की भरपाई की जाए। पश्चिम बंगाल के हावड़ा, बिहार के नालंदा, तेलंगाना के हैदराबाद, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, गुजरात के वरोदड़ा और झारखंड के जमशेदपुर में इस साल हुई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया। किसी इलाके को मुस्लिम बहुल क्षेत्र कह कर शोभा यात्रा न निकालने को कहा जाता है – इसे रोकने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने की माँग भी याचिका में की गई थी।

बिहार में अब बालू माफिया और उसके गुर्गों ने महिला इंस्पेक्टर को घसीट-घसीट कर पीटा, खनन टीम पर बरसाए ईंट-पत्थर: 150 ट्रक भी छुड़ा ले गए

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 160 आपराधिक मामलों वाले गुंडा अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने में लगे हुए हैं। लेकिन, खुद बिहार में अपराध चरम पर है। अब ताज़ा घटना राजधानी पटना से ही सामने आई है। बालू माफिया और उसके गुर्गों ने एक महिला माइनिंग इंस्पेक्टर को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है। इंस्पेक्टर मिन्नतें करती रहीं। माइनिंग टीम के सदस्यों को भी पीटा गया।

इस मामले में महिला माइनिंग इंस्पेक्टर सहित टीम के कई सदस्य भी घायल हुए हैं। जब माफिया और उसके गुर्गों ने खदेड़ना शुरू किया तो किसी तरह टीम के सदस्य वहाँ से भागने में सफल रहे, लेकिन इंस्पेक्टर घिर गईं। ये टीम बालू ओवरलोडिंग की जाँच करने के लिए गई थी। पिटाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बदमाशों को पत्थरबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। बदमाशों ने महिला माइनिंग इंस्पेक्टर को घसीटते हुए पीटा। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंजुमन इस्लामिया में आयोजित इफ्तार पार्टी में भाग लिया और हाथ फैला कर नमाज के मूड में दिखे।

घटना की जानकारी जैसे ही पटना वेस्ट के सिटी एसपी राजेश कुमार को मिली, वो कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुँचे। बिहटा में हुई इस घटना के संबंध में 3 FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने 44 लोगों की गिरफ़्तारी की जानकारी दी है। कई अन्य को दबोचने के लिए छापेमारी जारी है। ईंट-पत्थर से भी हमला किया गया। ये घटना परेव गाँव की है। जिला खनन विभाग की महिला इंस्पेक्टर जाँच के लिए आई थीं। इससे पहले 150 ओवरलोडिंग वाले ट्रकों को पकड़ा गया था।

लेकिन, बालू माफिया और उसके गुर्गों ने सारे ट्रकों को छुड़ा लिया। ये घटना सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को दोपहर 2 बजे सामने आई। पुलिस का कहना है कि गिरफ़्तारी हो रही है और मामले में कार्रवाई की जा रही है। SSP ने बताया कि टीम भेजी गई है। फरवरी 2023 में छपरा में बालू माफिया ने पूरी खनन टीम को ज़िंदा जलाने की कोशिश की थी और पेट्रोल छिड़क दिया था। सितंबर 2022 में बालू माफिया के बीच हुई गोलीबारी में 5 लोग मारे भी गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के नाम पत्र लिखकर मरा है अतीक अहमदः वकील का दावा, कहा- CM योगी को भी भेजेंगे कॉपी, हत्याकांड की जाँच के लिए प्रयागराज पुलिस ने गठित की SIT

अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इसके लिए तीन सदस्य टीम की नियुक्ति की गई। वहीं, एसआईटी के पर्यवेक्षण के लिए भी तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।

उधर अतीक अहमद के वकील वीसजय मिश्रा का भी सनसनीखेज बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि हत्या से पहले अतीक अहमद ने सुप्रीम कोर्ट के नाम एक पत्र लिखा था, जिसे पोस्ट कर दिया गया है। पत्र की एक प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी जाएगी। वकील का कहना है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अतीक अहमद को धमकी दी थी, इसकी डिटेल भी इस पत्र में है। पत्र में उसने अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या की जाँच को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर पुलिस प्रशासन तक कोई भी किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतना चाहते। ऐसे में प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर के आदेश पर स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम यानी विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व डीसीपी क्राइम सतीश चंद्र करेंगे। वहीं, 2 अन्य सदस्यों के रूप में एसीपी सतेंद्र तिवारी और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ओम प्रकाश सिंह को इस टीम में रखा गया है।

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एसआईटी द्वारा अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच की निगरानी के लिए भी तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इस टीम के प्रमुख प्रयागराज के अपर पुलिस महानिदेशक होंगे। इसके अलावा, प्रयागराज के पुलिस आयुक्‍त और लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक इस टीम के सदस्‍य होंगे। 

हत्या की जाँच के लिए गठित एसआईटी को 2 महीने का वक्त दिया गया है। इन दो महीनों के भीतर एसआईटी अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। एसआईटी का गठन उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय के जाँच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत किया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने इससे पहले, अतीक अहमद और अशरफ अहमद की हत्या की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश जारी किए थे। इसके लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग का गठन कर मामले की जाँच करने की बात कही गई थी।

मीडियाकर्मी के वेश में आए थे हमलावर

बता दें कि शनिवार (15 अप्रैल 2023) को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज के काल्विन हॉस्पिटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के लिए 3 हमलावर मीडियाकर्मी बनकर आए थे। मीडिया से बात करते समय हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया था। फिलहाल तीनों हमलावर पुलिस की गिरफ्त में हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं, रविवार (16 अप्रैल, 2023) शाम प्रयागराज के कसारी मसारी कब्रिस्तान में दोनों को दफन कर दिया गया।

CM और PM की कुर्सी पर कब्ज़ा करने की धमकी, राजा भैया और पीएम मोदी की पत्नी पर टिप्पणी, दंगे की बातें… मंच से खुलेआम बदजुबानी करता था अतीक अहमद

माफिया से नेता बने अतीक अहमद की 15 अप्रैल, 2023 को प्रयागराज में उसके भाई अशरफ सहित हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 3 शूटरों को गिरफ्तार किया गया है जिनसे पूछताछ चल रही है। अतीक अहमद अपहरण और सहित सहित 100 से अधिक केसों में नामजद था जिसमें एक में उसे सजा भी हुई थी। अतीक की मौत के बाद सोशल मीडिया के कई मुस्लिम और वामपंथी यूजर्स उसे नेकदिल घोषित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।

कोई उसके इल्म (शिक्षा) लेने वाले बयान को शेयर कर रहा तो कोई उसे गरीबों का मददगार बता रहा। हालाँकि, अतीक का असल चेहरा और जुबान कुछ और ही थी।

मोदी की तुलना रावण से

अतीक अहमद ने साल 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की तुलना रावण से की थी। तब अतीक अहमद ने कहा था कि नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह का कोई भी मुकाबला नहीं है आपस से। इसी के साथ उन्होंने मोदी एक मुखौटा बताते हुए उन्हें दशानन का एक मुँह बताया था।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की कुर्सी कर लूँगा कब्ज़ा

Z न्यूज़ पर वायरल हो रहे एक वीडियो के 8 वें मिनट के बाद मीठी और चिकनी चुपड़ी बातें करता अतीक अहमद अचानक ही असल रंग में आ गया। उसने खुद पर 20 से अधिक मुकदमे बताते हुए कहा, “मुकदमों की जहाँ तक बात है तो हमने तो कह दिया था कि बेगुनाह मुकदमे अगर लगाते रहेंगे तो 20 मुकदमे और हो जाएँ तो मुख्यमंत्री की कुर्सी कब्ज़ा कर लूँगा। 50 मुकदमे और हो जाएँ तो प्रधानमंत्री की कुर्सी कब्ज़ा कर लूँगा।”

फलानी रानी आ रहीं हैं

प्रतापगढ़ जिले में एक भाषण के दौरान अतीक अहमद ने अप्रत्यक्ष तौर पर राजा भैया पर निशाना साधते हुए कहा था, “ये प्रतापगढ़ जाना जाता यही रानी और राजा के नाम से। आप ही जनवाते भी हो। जब कभी आओ-जाओ तो रानी साहिबा आ रहीं हैं। फलानी रानी आ रहीं हैं। फलाने राजा आ रहे हैं। बंद करो ये रानी-राजा का नाम करना।” अतीक का यह तंज वीडियो के 40वें सेकेण्ड पर मौजूद है।

धारा लगने से डरना बंद करो

अतीक अहमद की हत्या के बाद उनके तमाम समर्थक कानून के तहत कार्रवाई की दुहाई दे रहे हैं। हालाँकि खुद अतीक अहमद को कानून कर कितना भरोसा था ये उसके प्रतापगढ़ वाले भाषण में सुना जा सकता है। NMF न्यूज़ द्वारा शेयर किए गए वीडियो के 2 मिनट 30 वें सेकेण्ड पर अतीक ने कहा, “मेरे पास सबसे ज्यादा लोग धारा निकलवा दो, नाम कटवा दो कहने वाले आते हैं। अब धारा निकलवाना और नाम कटवाने से घबराना खत्म कर दो।” उसने कहा है, “जिस दिन आप खत्म कर दोगे उस दिन इज्जत आपकी प्रतापगढ़ के अंदर रहेगी। कोई आप तक पहुँच नहीं पाएगा।”

मोदी के आगे न नाथ, न पीछे पगहा

अपने प्रतापगढ़ वाले भाषण में ही अतीक अहमद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार को लेकर भी टिप्पणी की थी। उसने मंच पर बैठे किसी ओझा टाइटल वाले सपा नेता को सम्बोधित करते हुए कहा था, ” मोदी के न आगे नाथ, न पाछे पगहा। न मेहरारू न लड़का। मायावती जी के पीछे कौन है। कोई नहीं।”

मुलायम की सरकार में सीना तान के चलते हो सड़क पर

अपने इसी भाषण के 5:25 वें मिनट पर अतीक ने सभा में मौजूद मुस्लिमों से कहा, “जब भाजपा और मायावती की सरकार रहती है तब तुम दब के रहते हो घर में। जब मुलायम सिंह की सरकार रहती है तब तुम सीना तान के चलते हो सड़क पर। और जब तुम सीना तान के चलते हो तो ये दूसरों को नागवार गुजरता है और इसीलिए दंगा होता है। जब आप दुबक के घर में बैठे रहोगे तब कौन सा दंगा होगा।”

वामपंथी और मुस्लिम यूजर्स इसी भाषण का एक हिस्सा शेयर कर रहे हैं जिसमें अतीक अहमद लोगों से अपने बच्चों को तालीम देने की बात कह रहा है। यह हिस्सा 9वें मिनट पर है। हालाँकि, इस दौरान भी अतीक अपनी लाठी में भी ताकत होने की बात कह रहा है।

उपरोक्त तमाम भाषण अतीक अहमद ने सार्वजनिक मंच से दिए हैं। इन सभी के अलावा कई कॉल रिकार्डिंग भी सोशल में वायरल हैं जिसमें अतीक अहमद ने व्यापारियों और यहाँ तक कि सपा नेता को भी खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। इन ऑडियो में अतीक पीड़ितों को माँ-बहन की गंदी-गंदी गालियाँ भी देता सुनाई दे रहा है।

‘ट्रैफिक जाम से होती है समस्या, गंदगी का ढेर अलग’: ‘रमजान फ़ूड मेला’ के खिलाफ बेंगलुरु के लोगों का नगरपालिका को पत्र, लिखा – बदबू, धुआँ और शोर से मिले निजात

बेंगलुरु में फ्रेजर टाउन के निवासियों ने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) को पत्र लिखकर हर साल रमजान के महीने में लगने वाले ‘रमजान फूड मेला’ को तुरंत बंद करने को कहा है। बेंगलुरु सेंट्रल एमपी पीसी मोहन ने रविवार (15 अप्रैल, 2023) को इस संबंध में ट्वीट किया, ‘फ्रेजर टाउन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (FTRWA)’ ने बीबीएमपी और पुलिस को एक पत्र लिखा है। इसमें बेंगलुरु की मस्जिद रोड पर ‘रमजान फूड मेला’ को बंद करने का अनुरोध किया गया है।

FTRWA ने रमजान के दौरान लगने वाले ट्रैफिक जाम और कूड़े के ढेर पर चिंता व्यक्त की है।”

दरअसल, रमजान के दौरान फ्रेजर टाउन में मस्जिद रोड पर हर शाम को कबाब और बिरयानी बेचने के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं। स्थानीय लोग इसकी वजह से लगने वाले ट्रैफिक जाम और कचरे के ढेर से बेहद परेशान हैं। बीबीएमपी को लिखे अपने पत्र में उन्होंने बताया, “रमजान फूड मेला का कोई धार्मिक महत्व नहीं है। कोई भी निवासी और मस्जिद से जुड़ा शख्स इस तरह स्टॉल लगाए जाने के पक्ष में नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इन स्टॉल को लगाए जाने के पक्ष में नहीं है और न ही यहाँ से कुछ भी खरीदते हैं। इसके बावजूद यहाँ के लोग, दुकान के मालिक और रमजान के दौरान इबादत करने वाले लोग बहुत परेशान हैं। हमारी गली में दुकानें बाहर से आए लोगों द्वारा खोली गई हैं और यहाँ बाहर के लोग खाने के लिए आते हैं। इससे हमारे इलाके की शांति भंग हो गई है। आपसे अनुरोध है कि आप ‘रमजान फूड मेला’ पर तत्काल रोक लगाएँ।”

द हिंदू (The Hindu) से बात करते हुए सऊद दस्तगीर (Saud Dastagir) नाम के एक स्थानीय निवासी ने कहा कि इन स्टॉल के लगने से बहुत शोर होता है और पूरे इलाके में यहाँ-वहाँ वाहन खड़े करने के कारण ट्रैफिक जाम लग जाता है। सड़क पर खाना बनाने के कारण बदबू आती है और खाना पकाने के दौरान निकलने वाले धुएँ ने हवा को प्रदूषित कर दिया है।

दावा- महिला के चेहरे पर बना था तिरंगा, सेवादार ने स्वर्ण मंदिर में घुसने से रोका: SGPC ने कहा- वह राष्ट्रीय ध्वज नहीं था

पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) में एक युवती के साथ बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो 17 अप्रैल 2023 का है। इसमें एक पुरुष और युवती को एक सिख व्यक्ति से भिड़ते हुए देखा जा सकता है। जब उस पुरुष ने सिख व्यक्ति से पूछा कि उसने गुड़िया को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से क्यों रोका तो वो बोला, “उसके चेहरे पर एक झंडा है।” जब लड़की ने कहा कि यह भारतीय झंडा है, तो सिख व्यक्ति ने कहा, “ये इंडिया नहीं पंजाब है।”

इस वीडियो की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना होने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि बड़ी शर्म की बात है कि लोग ट्वीट कर रहे हैं। यहाँ देश-विदेश से जितने भी श्रदालु आते हैं, हम उनका आदर करते हैं। सिखों ने देश की आजादी में भी अहम भूमिका निभाई, लेकिन हर बार सिखों को ही निशाना बनाया जाता है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, SGPC महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा, “ये एक सिख तीर्थस्थल है। हर धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है। हम सभी का स्वागत करते हैं। अगर किसी ने दुर्व्यवहार किया है, तो हम इसके लिए माफी माँगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इस लड़की के चेहरे पर बना झंडा, राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। इस झंडे में अशोक चक्र नहीं बना हुआ था, बल्कि यह किसी राजनीतिक पार्टी का झंडा हो सकता है।”

वायरल वीडियो पर एक यूजर ने लिखा, “एक नहीं कई खालिस्तानी छुपे बैठे हैं यहाँ…।”

विनीत कुमार सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, “यह झूठ बोल रहा है। सेवादार ने कहा था कि पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है। इस पर क्या कहना है इस आदमी का? कुछ ही दिन हुए हैं, जब अफगानिस्तान में इन पर जुल्म हो रहा था, तब इन्हें भारत याद आ रहा था। अच्छी बात है कि सिखों में इन जैसे मूर्ख कम ही हैं।”

उन्होंने इसके बाद एक और ट्वीट किया कि खालिस्तानी झंडे, जिन पर भिंडरावाले की तस्वीर लगी हुई है, उन्हें अंदर ले जाने की इजाजत है, लेकिन चेहरे पर तिरंगे का टैटू बनाने वालों को अंदर नहीं जाने दिया जाएगा। किसको बेवकूफ बना रहा है यह आदमी? असल बात है कि इनकी जहनियत सड़ चुकी है। इन सबके दिमाग में भूसा भर गया है।

आलोक प्रधान ने इस वीडियो पर सवाल उठाते हुए कहा, “2021 में स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर खालिस्तानी झंडे का स्वागत किया गया, क्यों? स्वर्ण मंदिर प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि आप लोग भारतीय हैं या खालिस्तानी?”

अभिनव खरे नाम के यूजर लिखते हैं कि ये लोग हमारी राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा हैं। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है।

‘फिट है अतीक अहमद का बेटा अली, अस्पताल में नहीं’: जेल प्रशासन, रिपोर्ट में दावा – बैरक में चीखता-चिल्लाता रहा, अब्बा-चाचा की मौत की खबर सुन छोड़ा खाना-पीना

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नैनी जेल में बंद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद द्वारा खुद को चोट पहुँचाने की खबरें कुछ मीडिया संस्थानों ने चलाई। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया जा रहा है कि अली ने खुद का सिर दीवाल में पटक-पटक कर घायल किया है जिसे जेल स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना 17 अप्रैल, 2023 (सोमवार) की है। भाई असद, अब्बा अतीक और चाचा अशरफ के मारे जाने के बाद वो लगातार रोए जा रहा था। हालाँकि, जेल प्रशासन ने इन खबरों को निराधार बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अली को नैनी जेल स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। डॉक्टरों की टीम द्वारा उसका इलाज करवाया जा रहा है। अली की हालत सामान्य बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि अली ने 2 बार खुद का सिर दीवाल पर पटका है। बीच में जेल सुरक्षाकर्मियों द्वारा पहुँच कर अली को पकड़ा गया और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

बताया यह भी जा रहा है कि लगातार 36 घंटे जागने के बाद अली को जेल प्रशासन ने कुछ दवाएँ दी थीं, जिस से उसे नींद आ गई। हालाँकि, जागने के बाद अली फिर से अपनी बैरक में चीखता-चिल्लाता रहा। हालाँकि जेल प्रशसन ने इन खबरों को निराधार बताया है। उत्तर प्रदेश के DG जेल ने अली अहमद को पूरी तरह से स्वस्थ बताते हुए मीडिया में चल रही खबरों का खंडन किया है।

अली अहमद अतीक का दूसरे नंबर का बेटा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अपने अब्बा और चाचा की मौत की खबर सुन कर अली डिप्रेशन में है। उसने खाना-पीना छोड़ दिया है और उसको नींद नहीं आ रही है। अली ने जेल में रोजा रखा था। 5 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगने के मामले में अली को जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया गया था।

अतीक अहमद का एक अन्य बेटा उमर अहमद लखनऊ की जेल में बंद है। कहा जा रहा है कि अब्बा और चाचा की मौत की खबर सुन कर वह जेल के एक कोने में अक्सर गुमसुम हो कर लेटा रहता है। गौरतलब है कि 15 अप्रैल 2023 को अतीक और अशरफ की प्रयागराज में मेडिकल कॉलेज के पास गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

ज़ाकिर नाइक का फॉलोवर निकला ट्रेन में आग लगाने वाला शाहरुख़, देखते रहता था भड़काऊ वीडियो: पुलिस ने बताया – वो बेहद कट्टर, UAPA के तहत होगी कार्रवाई

केरल के कोझिकोड में हुए ट्रेन अग्नि कांड के आरोपित को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने कहा है कि आरोपित शाहरुख सैफी बेहद कट्टरपंथी है। यही नहीं, वह इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक का फॉलोअर भी है। पुलिस ने उसके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया।

दरअसल, कोझिकोड ट्रेन अग्निकांड मामले की जाँच के लिए स्पेशल टीम गठित की गई है। इस टीम के प्रमुख और एडीजीपी एमआर अजीत कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि जाँच में यह साफतौर पर सामने आया है कि शाहरुख ने ही ट्रेन में आग लगाई थी। इसलिए उसके खिलाफ ‘गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ की धारा 16 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने आगे कहा है कि शाहरुख सैफी एक कट्टरपंथी व्यक्ति है। वह जाकिर नाइक और इसरा अहमद जैसे कट्टरपंथियों के वीडियो देखता था। उसने अपराध करने की ठान ली थी। इसके लिए ही वह केरल गया था। आगजनी को अंजाम देने के लिए शाहरुख ने पूरी तरह से प्लानिंग की थी। फिलहाल पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि ट्रेन में आगजनी करने के लिए उसने किसी स्थानीय व्यक्ति की सहायता ली थी या नहीं।

एडीजीपी कुमार ने आगे कहा है कि शाहरुख सैफी दिल्ली से केरल आया था। इसके अलावा वह महाराष्ट्र के रत्नागिरी भी गया था। इस बारे में पुलिस पूरी जानकारी इकट्ठा करने में जुटी हुई है। शाहरुख के चरमपंथी संगठनों से संबंध को लेकर भी जाँच की जा रही है।

बता दें कि इससे पहले पुलिस ने शाहरुख सैफी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। इसके अलावा उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 326A, 436, 438 तथा भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 151 के तहत मामला दर्ज किया था। लेकिन, अब यूएपीए के तहत मामला दर्ज होने के बाद कहा जा रहा है कि उसे आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है।

क्या है मामला

रविवार (2 अप्रैल 2023) की रात करीब 9 बजकर 45 मिनट पर अलप्पुझा-कन्नूर एग्जीक्यूटिव एक्सप्रेस ट्रेन कोझिकोड शहर को क्रॉस कर कोरापुझा रेलवे पुल पर पहुँची थी। इसी दौरान दो लोगों के बीच ट्रेन में चढ़ने को लेकर विवाद हो गया। तभी आरोपित शाहरुख सैफी ने अन्य यात्रियों पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके चलते यात्रियों ने चेन पुलिंग करते हुए ट्रेन को रोका। ट्रेन के रुकते ही आरोपित मौके से फरार हो गया।

बाद में यात्रियों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इस घटना में एक बच्चे समेत 3 लोगों की मौत हो गई। वहीं 8 लोग घायल हुए थे।

कोरोना से मर गई दादी, पोते ने AI से कर दिया ‘जिंदा’: चाइना में डेड चैट, कहा- मैंने तेरे बाप को वाइन नहीं पीने को कहा था

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की सहायता से एक शख्स ने अपनी मरी हुई दादी को ‘वर्चुअली जिंदा’ करने का कमाल कर दिखाया है। दरअसल, एक व्यक्ति ने एआई की सहायता से अपनी दादी का ‘डिजिटल अवतार’ तैयार कर उससे बात की। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया में इसकी जमकर चर्चा हो रही।

मामला चीन के शंघाई शहर का है। वू वूलीयू नामक 24 वर्षीय लड़के की दादी की जनवरी 2023 में कोरोना से मौत हो गई थी। उसके माता-पिता के तलाक के बाद दादी ने ही उसे पाल-पोस कर बड़ा किया था। दादी की मौत के बाद उसे अक्सर उनकी याद आती थी। इसलिए उसने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दादी का एआई कैरेक्टर या वर्चुअल वर्जन बनाने का प्लान बनाया। जल्द ही उसे इसमें कामयाबी भी मिल गई।

वू वूलीयू एक विजुअल डिजाइनर है। दादी का एआई कैरेक्टर बनाने के लिए उसने चैट जीपीटी का उपयोग किया। चूँकि चैट जीपीटी एआई मॉडल से तैयार किया गया प्लेटफार्म है। इसलिए उसने चैट जीपीटी से चैट कर दादी से बातचीत करने का तरीका सीखा। वू के पास उसकी दादी के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। इस रिकॉर्डिंग को उसने एआई एप्लिकेशन में इंपोर्ट किया। इसके अलावा उसने एआई के जरिए दादी की पर्सनैलिटी व अन्य चीजों को प्रोग्राम किया। इसके बाद दादी की फोटो व इन सब चीजों को मिलाकर उसने दादी का एआई कैरेक्टर तैयार कर लिया।

इसके बाद उसने दादी से बातचीत की। इसके बाद बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया साइट्स पर अपलोड कर दिया। इस वीडियो में वू दादी से कहता है, “दादी, मेरे पिता और मैं इस साल आपके साथ चंद्र नव वर्ष मनाने के लिए शहर वापस आएँगे। जब मेरे पिता ने आपको आखिरी बार फोन किया था, तब आपने उनसे क्या कहा था?’ इस पर AI दादी ने जवाब दिया, “मैंने उससे कहा था कि शराब मत पियो। अच्छे आदमी बनो और ताश मत खेलो।”

इसके बाद वू कहता है, “हाँ दादी माँ, आपको उन्हें ऐसा करने के लिए कहना चाहिए। पिताजी अब करीब 50 साल के हो गए हैं। लेकिन अब भी रोज शराब पीते हैं। उनके पास कोई बचत नहीं है। दादी, आपने लूनर न्यू ईयर मनाने के लिए क्या खरीदा है?” इस पर दादी बोलती है, “मैंने खाने के तेल की दो बोलत खरीदी हैं। यह तेल किसानों ने खुद से बनाया है। तेल की खुशबू काफी अच्छी है। एक बोतल 75 युआन की है।” इस वीडियो में सबसे बड़ी बात रही कि AI दादी के बातचीत करने का तरीका और हावभाव पूरी तरह से मनुष्यों की तरह लग रहे थे।