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बंगाल में माफिया अतीक अहमद के लिए ‘कैंडल मार्च’, लिखा-उनका हिसाब होगा: बरेली में मौलाना तौकीर रजा भी देगा धरना

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के एक दिन बाद कैंडल मार्च निकाला गया। रविवार (16 अप्रैल 2023) की शाम इस्लामपुर के रामगंज बाजार में मजहबी संगठन ‘रज़ा इस्लामिक मिशन’ की तरफ से यह मार्च निकाला गया। इस्लामी संगठन की तरफ से सोशल मीडिया पर एक पोस्टर भी जारी किया गया था। पोस्टर में कहा गया था कि यह मार्च यूपी पुलिस और गुंडाराज के खिलाफ है।

इस्लामी संगठन की तरफ से अतीक और अशरफ के समर्थन में निकाले गए कैंडल मार्च की जानकारी सोमवार (17 अप्रैल) को एक फेसबुक पोस्ट के जरिए दी गई। रज़ा इस्लामिक मिशन रामगंज (Raza Islamic Mission Ramganj) के फेसबुक अकाउंट पर कैंडल मार्च की तस्वीरें पोस्ट की गई हैं। इस्लामिक मिशन की तरफ से लिखा गया, “किताब सादा रहेगी कब तक, कभी तो आगाज़-ए-बाब होगा। जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली, कभी तो उनका हिसाब होगा।”

पोस्ट में आगे लिखा गया कि इस्लामिक मिशन के सदस्यों ने चेहरे पर काली पट्टी बाँधकर ‘बजरंग दल, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के आतंकियों द्वारा पूर्व सांसद अतीक अहमद की पुलिस कस्टडी में हुई हत्या के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला। इस मौके पर इस्लामिक मिशन के अध्यक्ष असजद रज़ा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सिर्फ 2 लोगों की हत्या नहीं की, बल्कि जम्हूरियत (लोकतंत्र) की भी हत्या की है।

उधर उत्तर प्रदेश के बरेली में मौलाना तौकीर रजा ने अतीक और अशरफ की हत्या को लेकर यूपी पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। तौकीर रजा ने कहा कि यूपी में जंगलराज कायम हो गया है, इसलिए सीएम योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा दे देना चाहिए। उसने आरोप लगाया कि अतीक की हत्या पुलिस और सरकार ने मिलकर करवाई है। तौकीर ने कहा कि अतीक और अशरफ को पुलिस खुद मारना चाहती थी, इसलिए पुलिस ने गुंडे हायर किए, गुंडों को बताया गया कि भाजपा की सरकार तुम्हे हीरो बना देगी। बाद में तुम एमएलए बना दिए जाओगे।

तौकीर रजा ने कहा कि यूपी में हो रहे एनकांउटर भी फेक हैं। इन सबके लिए सिर्फ एक आदमी दोषी है जो कहता है मिट्टी में मिला देंगे। इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष तौकीर रजा ने गुरुवार (20 अप्रैल) को इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर धरना-प्रदर्शन के भी ऐलान किया।

बता दें कि शनिवार (15 अप्रैल 2023) को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज के काल्विन हॉस्पिटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावर मीडियाकर्मी बनकर आए थे। मीडिया से बात करते समय हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया था। फिलहाल तीनों हमलावर जेल में हैं।

इंशाअल्लाह, सबका हिसाब शुरू कर दूँगा… जेल से ही रंगदारी का रैकेट चलाता था अतीक अहमद, एक चैट पर पहुँच जाते थे करोड़ों: कारोबारियों को लेनी होती थी पर्ची

प्रयागराज का सबसे बड़ा माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या हो गई। कई महीनों से वो गुजरात के साबरमती जेल में बंद था। वहीं से उसने उमेश पाल की हत्या की साजिश रची और इसे अंजाम दिया। अब ये खुलासा हुआ है कि वो वहाँ से ही वसूली का रैकेट भी चला रहा था। चैट से खुलासा हुआ है कि बेटों के जरिए उसने गुंडागर्दी जारी रखी थी। एक बिल्डर से उसने 5 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी थी और इसमें से 80 लाख रुपए उसे मिल भी गए थे।

बड़ी बात ये है कि इसी रकम का इस्तेमाल उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम देने के लिए किया गया। यानी, जेल से ही रंगदारी का रैकेट चल रहा था। चैट में ही उसने कहा था कि उसकी गुंडागर्दी वाली विरासत को उसके बेटे आगे बढ़ाएँगे। उसे लिखा था, “मेरे बेटे न डॉक्टर बनेंगे न इंजीनियर। इंशाअल्लाह, जल्द हिसाब शुरू कर दूँगा।” बिल्डर को उसने धमकाया, “ईडी-ईडी करते हो। ED ने आपके पैसे जब्त नहीं किए हैं। अच्छा है पैसे दे दो।”

उसने आगे लिखा था, “कम लफ्जों को ज़्यादा समझो। मैं मरने वाला नहीं हूँ। इंशाल्लाह एक्सरसाइज करता हूँ। दौड़ता हूँ। बेहतर है कि मुझसे आकर मिल लो – साबरमती जेल, गुजरात।” 6 साल से जेल में बंद होने का बवजूद उसने अपना अपराध का साम्राज्य बनाए रखा था। एक फोन या चैट से डर के मारे लोग उसे रंगदारी देने को राजी हो जाते थे। अब इस बात की जाँच होगी कि आखिर जेल में उसे फोन मुहैया कराई किन-किन लोगों ने, कौन-कौन उसके मददगार थे।

अतीक अहमद को उसके एनकाउंटर का डर था, लेकिन मारा गया उसके बेटा असद। एक चैट में उसने लिखा था कि सबका हिसाब होना है। अतीक अहमद हमेशा से चुनाव लड़ने के लिए बिल्डरों और कारोबारियों से रंगदारी लेता रहा है। ‘गुंडा टैक्स वसूली’ की पर्ची भी उसके द्वारा जारी की जाती थी। एक गुलाबी पर्ची होती थी जिसका रेट 3 से 5 लाख रुपए तक था, एक सफ़ेद पर्ची होती थी इससे ज्यादा रकम की। एक बिल्डर अतीक अहमद के डर से 2007 में प्रयागराज छोड़ लखनऊ चला गया था।

हाथ में राइफल लिए अतीक अहमद की तस्वीर भी सामने आई है, जिसका इस्तेमाल शूटर साबिर ने उमेश पाल हत्याकांड में किया था। इस तस्वीर में वो बेटे उमर के साथ खड़ा दिख रहा है। इधर SIT ने अतीक अहमद-अशरफ हत्याकांड की जाँच शुरू कर दी है। चैट में अतीक अहमद ने ये भी लिखा था, “मुस्लिम साहब, पूरे इलाहबाद में बहुतों ने हमसे फायदा उठाया है लेकिन सबसे ज्यादा तुम्हारे घर ने उठाया है। आज हमारे खिलाफ FIR लिखा रहे हैं और पुलिस के साये में काम कर रहे हैं।” उसने लिखा था, “आपको आखिरी बार समझा रहे हैं। बहुत जल्दी हालात बदल रहे हैं। मैंने सब्र कर लिया है।”

सेक्स रैकेट चला रही थी फिल्म इंडस्ट्री की कास्टिंग डायरेक्टर-हिरोइन, मुंबई पुलिस ने किया भंडाफोड़: माॅडलों को छुड़ाया

मुंबई पुलिस ने एक ऐसे सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसे कास्टिंग डायरेक्टर और हिरोइन आरती मित्तल चला रही थी। पुलिस ने आरती मित्तल (Aarti Mittal) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच ने सोमवार (17 अप्रैल 2023) को इस मामले का भंडाफोड़ किया।

मिड-डे के अनुसार, मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच ने दो मॉडलों को भी इस रैकेट से बचाया है। उन्हें रिहैब सेंटर भेजा गया है। मॉडल्स ने पुलिस को बताया कि आरती ने उन्हें 15-15 हजार रुपए देने का वादा किया था। पुलिस ने बताया है कि 27 साल की आरोपित आरती मित्तल ओशिवारा के आराधना अपार्टमेंट में रहती हैं। वह अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए मॉडल्स से मिलती थी और उन्हें प्रॉस्टिट्यूशन में जाने के लिए मोटी रकम देने का ऑफर दिया करती थी।

पुलिस इंस्पेक्टर मनोज सुतार को इस रैकेट के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर उन्होंने कार्रवाई कर रैकेट का खुलासा किया। सुतार ने खुद ग्राहक बनकर आरती से दो लड़कियों के लिए बात की। आरती ने इसके लिए 60,000 रुपए माँगे और सुतार के फोन पर दोनों लड़कियों की तस्वीरें भेजी। पुलिस इंस्पेक्टर से कहा कि दोनों लड़कियाँ या तो जुहू या गोरेगाँव स्थित होटलों में आएँगी। इसके बाद सुतार ने गोरेगाँव के एक होटल में दो कमरे बुक कराए और दो पुलिस वालों को नकली ग्राहक बनाकर होटल में भेजा। मित्तल जैसे ही अपने साथ दो मॉडल्स के साथ होटल पहुँची, उसने उन्हें कंडोम थमा दिया। आरती की सारी हरकतें कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी।

इसके बाद होटल में छापा मारा गया और आरती को रंगे हाथ पकड़ा लिया गया। दिंडोशी पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी के मुताबिक, मित्तल के खिलाफ आईपीसी की धारा 370 और मॉडल सप्लाई करने के आरोप में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की जाँच के लिए मामले को यूनिट 11 क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है।

बता दें कि कास्टिंग डायरेक्टर होने के साथ-साथ आरती एक एक्सट्रेस भी हैं। उन्होंने टेलीविजन शो ‘अपनापन’ में राजश्री ठाकुर के साथ काम किया है। हाल ही में उन्होंने खुलासा किया था कि वह आर माधवन के साथ एक फिल्म की शूटिंग कर रही हैं।

‘शिवसेना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतजार में अजित पवार, 40 विधायकों के साथ जाएँगे BJP के साथ’: चर्चाओं का बाजार गर्म, सुप्रिया सुले बोलीं – होंगे 2 राजनीतिक विस्फोट

महाराष्ट्र की सत्ता में कई बार कायम रही पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की NCP की टूट के चर्चे एक बार फिर से चल पड़े हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कॉन्ग्रेस के साथ उसका गठबंधन है, जिसे ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ नाम दिया गया था। उद्धव ठाकरे की पार्टी के दो फाड़ हो गए और सत्ता ही चली गई। अब शरद पवार के भतीजे अजित पवार के बगावती तेवर के चर्चे हैं। 8 अप्रैल को वो अचानक से कुछ विधायकों के साथ गायब हो गए थे, फिर अगले दिन ही नजर आए थे।

इसी दौरान महाराष्ट्र के कई बड़े भाजपा नेता भी दिल्ली पहुँचे थे, जिसके बाद कई चर्चाओं को बल मिला। महाराष्ट्र में चुनाव के बाद जब शिवसेना ने भाजपा को धोखा देकर गठबंधन तोड़ लिया था, तब कुछ दिनों के लिए अजित पवार ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था और देवेंद्र फड़नवीस फिर मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन, शरद पवार अपने कुनबे को एक करने में सफल रहे और भाजपा की सरकार गिर गई। मात्र 80 घंटे ही ये सरकार चल पाई थी।

महाराष्ट्र के स्टेट कोऑपरेटिव अंक (MSC) घोटाले के मामले में हुए केस में अजित पवार का नाम नहीं आया है। खुद अजित पवार का कहना है कि इसका अर्थ ये नहीं है कि उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। उनके अचानक से बार-बार गायब होने के पीछे क्या राज़ है, ये खुलना अभी बाकी है। पुणे के ग्रामीण क्षेत्र बारामती में अजित पवार खासे लोकप्रिय हैं और उन्हें सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता रहा है। कई बार वो पार्टी से अलग रुख अख्तियार करते रहे हैं।

1991 में उन्होंने बारामती से उपचुनाव जीत कर चुनावी राजनीति में कदम रखा था। तब से वो लगातार 7 बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। अजित पवार ने भाजपा के साथ जाने की चर्चाओं को नकार दिया था। उन्होंने बताया था कि वो उस दिन नवीं मुंबई के खारगर स्थित MGM अस्पताल में थे, ‘महाराष्ट्र भूषण’ सम्मान के दौरान रैली में गर्मी से हुई मौतों के बाद मृतकों के परिजनों के साथ। पिछले सप्ताह कुछ बैठकों को रद्द करने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भाजपा गठबंधन वाली सरकार पर नरम होने के बाद चर्चाएँ शुरू हुई थीं।

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने एक ट्वीट में कहा है कि जब वो एक काम से मंत्रालय गई थीं, तब उन्हें पता चला कि अजित पवार 15 विधायकों को साथ लेकर भाजपा के साथ जाने वाले हैं। हाल ही में अजित पवार ने EVM को लेकर भी विपक्ष को झटका दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा चुका है कि वो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। अजित पवार एक मराठा चेहरा हैं, जिनकी आबादी राज्य में 40% के आसपास है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एनसीपी के 53 में से 40 विधायक अजित पवार के साथ हैं।

NCP के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने भी इन अटकलों को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि शिंदे-फड़नवीस सरकार के पास पहले से ही बहुमत है, उन्हें और विधायकों की ज़रूरत नहीं है। NCP के मुखिया शरद पवार ने भी हाल ही में गौतम अडानी का समर्थन किया था और पीएम मोदी के डिग्री पर उठे विवाद को गैर-ज़रूरी बताया था। अजित पवार का कहना है कि वो विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में ही मौजूद रहेंगे।

ये भी बताया जा रहा है कि शिवसेना के दो फाड़ होने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही अब इंतजार है, जिसके बाद अजित पवार कोई फैसला ले लेंगे। उन्होंने अपने समर्थन में विधायकों को ध्रुवीकृत करना भी शुरू कर दिया है। उधर शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले का बड़ा बयान आया है कि अगले 2 दिनों में दिल्ली और महाराष्ट्र में 2 बड़े राजनीतिक विस्फोट होंगे। अजित पवार के भाजपा में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि गॉसिप के लिए उनके पास समय नहीं है, ये अजित दादा से ही पूछा जाना चाहिए। उन्होंने अजित पवार को मेहनती बताते हुए कहा कि हर कोई ऐसा नेता चाहता है।

अब बिहार में काॅलगर्ल के लिए संपर्क का चला विज्ञापन, डिस्प्ले होते ही लगी भीड़: पटना रेलवे स्टेशन पर चलने लगा था पॉर्न वीडियो

कुछ दिनों पहले पटना रेलवे स्टेशन पर ब्लू फिल्म चलने के बाद बिहार को वैश्विक सुर्खियाँ मिली थी। अब प्रदेश बीच चैराहे काॅलगर्ल से संपर्क का विज्ञापन चलाने को लेकर चर्चा में है। यह घटना भागलपुर की है। रिपोर्टों के मुताबिक भागलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर आंबेडकर की प्रतिमा लगी हुई है। इस जगह को आंबेडकर चौक भी कहते हैं। यही लगे डिस्प्ले बोर्ड पर यह विज्ञापन कई मिनटों तक चलता रहा।

घटना सोमवार (17 अप्रैल 2023) की है। कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। पुलिस ने मामले की जाँच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भागलपुर जंक्शन के बाहर आंबेडकर चौक पर एक LED डिस्प्ले लगा हुआ है। इस पर विज्ञापन चलते रहते हैं। सोमवार को इसी LED पर वेश्यावृत्ति का एक विज्ञापन प्रसारित होने लगा। स्क्रॉल हो रहे इस प्रचार में लिखा था, “र$डी का लिए यहाँ सम्पर्क करा।”

बताया जा रहा है कि इस बोर्ड को चलाने का जिम्मा जीवन जागृति सोसायटी नामक संस्था के पास था। यह मैसेज डिस्प्ले पर लगभग 10 मिनट तक चला। इस दौरान यहाँ लोगों को भीड़ लगा गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। बोर्ड को उतरवा दिया गया है। डिप्टी SP अजय चौधरी के मुताबिक इस घटना के पीछे तकनीकी कारण हैं। मामले की जाँच में पुलिस टेक्नीशियन की भी मदद ले रही है।

पटना जंक्शन पर चली थी अश्लील वीडियो

गौरतलब है कि इसी साल मार्च में पटना रेलवे स्टेशन पर लगे डिस्प्ले में अश्लील वीडियो चलने लगी थी। 3 मिनट चलने के बाद रेलवे प्रशासन ने इसे बंद करवाया था। मामले में FIR दर्ज की गई थी और इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी दत्ता कम्युनिकेशन को ब्लैक लिस्टेड करते हुए उस पर जुर्माना भी ठोंका गया था।

बिहार के एक गाँव में अखंड रामधुन के लिए लगाया जा रहा था झंडा, विरोध में मारपीट: रिपोर्ट में दावा, जमुई पुलिस ने बताया- जमीन का विवाद

बिहार के जमुई जिले में धार्मिक झंडा लगाने को लेकर 2 पक्षों में विवाद की खबर है। दोनों ही पक्ष अलग-अलग समुदाय से बताए जा रहे हैं। झगड़े में 2 लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस इस मामले को जमीनी विवाद बता रही है। अब तक कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी की सूचना है। घटना सोमवार (17 अप्रैल 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जमुई के थाना क्षेत्र सिमुलतला का है। बताया जा रहा है कि यहाँ के गाँव ढोढरी गांव में मंगलवार (18 अप्रैल) को अखंड रामधुन का आयोजन था। इसकी तैयारियों के लिए गाँव भर में झंडा लगाया जा रहा था। आरोप है कि इस दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने झंडे लगाने पर आपत्ति दर्ज की। दावा किया जा रहा है कि ये लोग अपने घरों के आगे झंडा लगाने से नाराज थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी बात को ले कर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई जो बाद में मारपीट और तलवारबाजी तक पहुँच गई।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में दो पक्ष झगड़ रहे हैं, जिसमें महिलाएँ भी शामिल दिख रहीं है। इस दौरान अँधेरा है और पीछे से किसी की आवाज आ रही है। इस आवाज में कोई व्यक्ति हिन्दुओं को तलवार से मारे जाने का भी जिक्र कर रहा है। बजरंग दल के सदस्य राव सुधीर ने 41 सेकेंड के इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशासन से कार्रवाई और दोषियों पर एक्शन लेने की माँग की है।

पुलिस ने बताया जमीनी विवाद

बिहार पुलिस ने इस पूरे मामले को जमीनी विवाद बताया है। पुलिस के मुताबिक साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी दोनों पक्षों के लोगों की हुई है। मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बताते हुए पुलिस ने आम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की भी अपील की है।

वायरल किए गए वीडियो को भी पुलिस ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने की नीयत से बना बताया है। थाना प्रभारी विद्यानंद कुमार ने भी घटना को मामूली बातों पर शुरू हुआ विवाद बताया है।

मदरसे का दरवाजा खटखटाया, नाबालिग लड़कियों को उठाया, सुबह लहूलुहान फेंक गए: प्रयागराज का वो केस जब रात भर हुआ रेप

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को 3 शूटरों ने माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी थी। मारे जाने के बाद इन्हें पीड़ित मुस्लिम बताकर कुछ लोग इनके जघन्य अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ज्यातादार चर्चित मामलों के पीड़ित भी मुस्लिम ही हैं। ऐसा ही एक मामला 2007 का है, जिसे मदरसा रेप कांड के नाम से जाना जाता है। 17 जनवरी को हुई गैंगरेप की इस वारदात ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। तब राज्य में मुलायम सिंह के नेतृत्व में सपा की सरकार थी।

इस घटना में बंदूकधारियों ने दो नाबालिग लड़कियों को मदरसे से उठाया था। उनके साथ रातभर रेप किया गया। अगली सुबह गैंगरेप पीड़िताओं को लहूलुहान मदरसे के गेट पर फेंक दिया गया। अतीक अहमद के भाई अशरफ पर भी रेप के आरोप लगे थे। उस वक्त अतीक खुद सांसद और अशरफ विधायक हुआ करता था।

क्या था मदरसा रेप कांड

यह मामला 17 जनवरी 2007 का था। प्रयागराज में अतीक अहमद के प्रभुत्व वाले इलाके करेली में एक मदरसा चला करता था। इस मदरसे का संचालक वाराणसी संकटमोचन मंदिर ब्लास्ट में फाँसी की सजा पाए आतंकी वलीउल्लाह का भाई था। देर रात इस मदरसे के दरवाजे पर दस्तक हुई और दबंगई से गेट खोलने के लिए कहा गया। अंदर 3 बंदूकधारी घुसे और सीधे वहाँ पहुँचे जहाँ लड़कियाँ सोती थीं। लड़कियों के नकाब हटवाए। यहाँ से 2 लड़कियाँ चुनी गईं और उन्हें उठाकर जंगल ले जाया गया।

आरोप है कि जंगल में 5 लोगों ने दोनों लड़कियों से रेप किया। सुबह लड़कियों को लहूलुहान हालत में मदरसे के गेट पर फ़ेंक दिया गया। तब पुलिस ने प्रयागराज में ही रिक्शा चलाने वाले और दर्जी का काम करने वाले इखलाख अहमद और नौशाद अहमद सहित कुल 5 लोगों की गिरफ्तारी दिखा दी थी। जमानत पाने के बाद पाँचों ने पुलिस पर खुद को बेवजह फँसाने का आरोप लगाया था। इस घटना में अशरफ और उसके साथियों के शामिल होने की बात कही जाती रही।

मुलायम सरकार में यह घटना हुई थी। उसके बाद मायावती की सरकार आई। मामले की सीबीसीआईडी जाँच भी हुई। लेकिन नतीजा सिफर रहा। अपने पहले कार्यकाल में दिसंबर 2021 में योगी सरकार ने इस मामले की फिर से जाँच करवाने के आदेश दिए थे। इस घटना से उठी नाराजगी के बाद अतीक और उसका परिवार दुबारा कभी चुनाव नहीं जीत पाया। स्थानीय मुस्लिमों में भी एक बड़ा धड़ा अतीक अहमद के खिलाफ हो गया था।

एक मीडिया रिपोर्ट में रिटायर्ड इंस्पेक्टर नारायण सिंह परिहार के हवाले से भी इस कांड के बारे में बताया गया है। उन्होंने बताया है कि 2007 में अतीक के भाई अशरफ ने मदरसे से लड़कियों को उठवाया और फिर उनके साथ घिनौनी हरकत की। मामला कोर्ट में गया। गवाही भी हुई। लेकिन बाद में गवाह पलट गए। रिटायर्ड इंस्पेक्टर के अनुसार अतीक अहमद और उसके गुर्गे पीड़िताओं के परिजनों को धमकी देते थे। इसके कारण बाद में गवाह पलट गए और केस नहीं बन पाया। उन्होंने यह भी बताया कि जाँच के दौरान उनको भी धमकियाँ दी गई थी।

‘तुमको मुसलमान कम पड़ गए’: हिंदुओं के साथ जूस पी रही थी लड़की, कट्टरपंथियों ने कैफे से लेकर थाने तक काटा बवाल; मारपीट-पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश के खंडवा में इस्लामी कट्टरपंथियों के बवाल की वजह से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी है। बवाल की शुरुआत एक टी कैफे में हिंदू युवकों के साथ मुस्लिम लड़की के जूस पीने को लेकर हुई। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने कैफे में पहुँचकर हंगामा किया। लड़की से बदसलूकी की। लड़कों को मारपीट कर अगवा कर लिया। बाद में लड़की पर हिंदू लड़कों के खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कराने का दबाव बनाया। थाने पर पत्थरबाजी की।

घटना रविवार (16 अप्रैल 2023) की है। मिली जानकारी के अनुसार अतुल और सत्यम के साथ एक मुस्लिम लड़की आनंदनगर क्षेत्र के टी कैफे में जूस पी रही थी। इस दौरान कुछ मुस्लिम लड़के वहाँ पहुँचकर विवाद करने लगे। लड़की और लड़कों के साथ मारपीट की। फिर लड़कों को उठाकर खानशाहवली कॉलोनी में दरगाह के पास ले गए। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने लड़कों को छुड़ाया। इसके बाद देर रात मुस्लिमों ने मोघट थाने का घेराव किया। वार्ड पार्षद अशफाक सिगड़ लड़की को लेकर पहुँचा और हिंदू लड़कों पर केस दर्ज करने का दबाव बनाने लगा। भीड़ ने पत्थरबाजी और नारेबाजी भी की।

पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इस संबंध में लड़की द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का अंश ट्विटर पर साझा किया है। इसमें कहा गया है, “16 अप्रैल की दोपहर सत्यम बवाने सर और अतुल भैया के साथ मैं आनंद नगर के टी कैफे गई थी। जूस पीते हुए उनसे बातचीत कर रही थी। तभी अजहर अली, मोहम्मद इरफान, शादाब और मोहसिन 3-4 अन्य लोगों के साथ आए। हमलोगों को खींचकर कैफे के बाहर ले गए और मारपीट करने लगे। उनलोगों ने मुझसे कहा कि तुम इनके साथ क्यों आई हो। क्या मुसलमान कम पड़ गए हैं। मुझे अश्लील गालियाँ दी। मारपीट की। शादाब ने मुझे जोर से थप्पड़ मारकर नीचे गिरा दिया। मुझसे कहा कि अब कभी आई तो जान से खत्म कर देंगे।”

पीड़िता की शिकायत पर थाना मोघट में केस दर्ज किया गया। 16 लोगों को आरोपित बनाया गया। इसके बाद पार्षद अशरफ और उमेद भीड़ के साथ थाने पहुँच गया। भीड़ थाने पर नारेबाजी करने लगी। इनलोगों ने पुलिस पर एक और केस लिखने तथा हिंदू युवकों पर कार्रवाई का दबाव बनाया। पुलिस ने जब भीड़ को खदेड़ा तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

थाने पर हंगामा करने वाली भीड़ को लीड कर रहे पार्षद अशरफ का आपराधिक रिकॉर्ड भी है। उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, दलित उत्पीड़न, धमकी आदि देने के केस पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने ताजा मामले में भी उसे आरोपित बनाते हुए IPC की धारा 353, 332, 147, 148 और 149 के तहत केस दर्ज किया है। अशरफ उमेद को गिरफ्तार कर लिया गया है। कैफे में हिन्दू युवकों के साथ मारपीट करने वालों में मोहम्मद इरफ़ान और अजहर अली भी गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर बाकी आरोपितों की तलाश कर रही है।

जालौन में दलित लड़की के हत्यारे भी उसी जाति के, पुलिस एनकाउंटर के बाद अस्पताल में भर्ती है एक हत्यारा: उधर सोशल मीडिया पर जातिवादी चला रहे प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के जालौन में एक दलित लड़की की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर इसे जाति का रंग देते हुए कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में दलित सुरक्षित नहीं हैं। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें देखा जा सकता है कि बीच सड़क पर लड़की का शव पड़ा हुआ है। हत्यारे बाइक से आए थे। लड़की बीए की परीक्षा देकर लौट रही थी। बीच चौराहे पर सिर पर सटा कर गोली मारी गई। स्थानीय कोतवाली से 200 मीटर की दूरी पर पल्सर सवार युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया।

20 वर्षीय रोशनी अहिरवार ऐँधा गाँव की है। राम लखन पटेल महाविद्यालय में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा की हत्या सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को दोपहर 11:40 बजे हो गई। आसपास के लोग दौड़े, तब तक युवक भाग चुके थे। उसकी बहन शीलम भी इसी कॉलेज में फाइनल ईयर में पढ़ती थी और साथ आती-जाती थी, लेकिन छुट्टियों की वजह से वो इस बार साथ नहीं थी। परिजनों ने राज अहिरवार का नाम आरोपित के रूप में लिया है, कदौरा थाना क्षेत्र के जमरेही गाँव का रहने वाला है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार भी कर लिया है और उसके साथी की तलाश जारी है। इस हत्याकांड के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर ली थीं। घटनास्थल से छात्रा का मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड मिला। पुलिस कॉल डिटेल्स निकलवा रही है। एसपी ने बताया है कि पुलिस के पास पुख्ता सबूत हाथ लग गए हैं। हमलावर तमाचा छोड़ कर फरार हुए थे। यूपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 टीमें गठित की, ताकि हत्यारों की धर-पकड़ की जा सके।

अब सोशल मीडिया पर कैसे इस घटना को लेकर प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है, वो देखिए। एक लड़की की दुःखद हत्या हो गई और एजेण्डाबाज इसके सहारे अपनी राजनीति चमकाने में लग गए हैं। ‘दलित टाइम्स’ नामक प्रॉपगैंडा हैंडल ने लिखा, “यूपी में नहीं रुक रहे हैं दलितों पर अत्याचार। उत्तर प्रदेश के जालौन में बाइक सवार दो युवकों ने दिन दहाड़े एक दलित छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।” ये सब तब किया जा रहा है, जब हत्यारे भी ‘अहिरवार’ ही हैं, जो सरनेम मृतका और उसके परिवार का है।

‘दलित टाइम्स’ का एक लड़की की लाश पर प्रोपेगंडा

इसी तरह, ‘Molitics’ नामक मीडिया संस्थान ने भी इस घटना को जाति का रंग दिया। उसने लिखा, “यूपी के जालौन में 22 वर्षीय दलित बेटी रोशनी अहिरवार की कॉलेज से घर लौटते वक़्त बाइक सवार 2 बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी।” अगर उसने थोड़ी और जानकारी जुटाने की कोशिश की होती तो पता चलता कि रोशनी अहिरवार का हत्यारा राज अहिरवार है। इसे जातिवादी मानसिकता के सहारे दंगे भड़काने की कोशिश नहीं तो और क्या कहा जा सकता है?

‘Molitics’ नामक ट्विटर हैंडल ने भी इसे दिया जातिवादी रंग

कुछ अन्य मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया के एजेंडाबाजों ने भी कैसे इस घटना पर प्रोपेगंडा फैलाने की, वो देखिए नीचे आप देख सकते हैं। इन सभी में एक बात कॉमन थी कि तंज कसने के लिए इनमें से अधिकतर ने ‘रामराज्य’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश में जंगलराज’ होने का भी दावा किया। ये वही गिरोह है, जो अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर इन दोनों के महिमामंडन में जुटा हुआ है।

जालौन पुलिस ने भी इस संबंध में बयान जारी किया है। पुलिस ने बताया है कि राज और रोशनी एक वर्ष से भी अधिक समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे और उनकी आपस में बातचीत भी सोशल मीडिया के माध्यम से होती थी। ये दोनों मिलते-जुलते भी थे, लेकिन 2 माह पूर्व विवाद होने के कारण लड़की ने राज से बातचीत बंद कर दी थी। राज ने कई बार प्रयास किया, लेकिन लड़की ने उससे बात नहीं की। इसके बाद राज ने अपने ममेरे भाई के साथ बाइक से इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

राज अहिरवार ने घटनास्थल से कुछ दूरी पर गाड़ी की नंबर प्लेट फेंक दी थी। पुलिस उसे लेकर जब घटनास्थल पर उस नंबर प्लेट को रिकवर करने पहुँची तो उसने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन कर गोली चलाया और भागने का प्रयास किया। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसके बाद वो घायल हुआ है। दोनों एक ही जाति के थे, ऐसे में दोनों के घर वाले भी पहले शादी के लिए तैयार थे। अब बताइए, इस घटना को लेकर ‘दलित सुरक्षित नहीं हैं’ वाला प्रोपेगंडा कहाँ तक उचित है?

पति-पत्नी ने सिर काट कर आग में डाल दिया, खुद से ही बनाया था हथियार: सुसाइड नोट में लिखा – किसी से कोई दिक्कत नहीं

गुजरात के राजकोट में एक पति-पत्नी ने काला जादू के चक्कर में अपना ही सिर काट कर आग में डाल दिया। उन्होंने गर्दन काटने के लिए हथियार भी खुद से ही बनाया था। उन्होंने एक हवन कुंड बना रखा था, जिसमें अपना-अपना सिर काट कर डाल दिया। विन्चिया क्षेत्र में 38 वर्षीय किसान और उसकी पत्नी ने रविवार (16 अप्रैल, 2023) को इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने शुरुआती जाँच में इसे काला जादू के रूप में देखा है।

मृतकों की पहचान हेमू मकवाना और हंसा मकवाना के रूप में हुई है। उनके ही बच्चों ने अपने माता-पिता का धड़ खेत में देखा। उनके बेटे की उम्र जहाँ 13 वर्ष है, वहीं बेटा 12 साल का है। दोनों बच्चे अपने मामा के यहाँ बगल के गाँव में गए थे लेकिन सुबह यहाँ आकर जो देखा उससे वो डर गए। राजकोट के सिविल हॉस्पिटल में दोनों के शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ। दोनों ने अपना-अपना सिर कलम करने के लिए गिलोटिन (गड़ाँसे वाला यंत्र) भी खुद ही बनाया था।

उन्होंने गिलोटिन के ब्लेड से कुछ इस तरह से अपने गर्दन काटे कि उनके सिर गिर कर हवा कुंड में ही गिरें। उन्होंने इस घटना से एक दिन पहले अपने बच्चों को मामा के यहाँ भेज दिया था। इस आत्महत्या का कारण क्या है, ये अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। परिजनों के बयान पुलिस ने दर्ज किए। मोबाइल फोन के साथ एक नोट मिला, जिसमें किसान ने लिखा है कि उसके भाइयों या सालों ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया है।

हंसा की कजन जयंती जतापारा का कहना है कि मृतकों का कोई पारिवारिक झगड़ा नहीं था और न ही वो किसी वित्तीय समस्या से जूझ रहे थे। पुलिस किसी भी एंगल को नकार नहीं रही है। दोनों ने ब्लेड के नीचे सिर रख कर निचे से रस्सी में आग लगा दी थी। दोनों लेटे हुए थे। जैसे ही रस्सी जली, ब्लेड उनके गर्दन पर गिरा और उनके सिर हवन कुंड में। सुसाइड नोट में उन्होंने भाइयों से अपने बच्चों का ख्याल रखने को कहा है। साथ ही स्वेछा से आत्महत्या की बात लिखी है।