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नीतीश कुमार, यदि सुशासन ऐसा ही होता है तो इसे भी जहरीली शराब पीकर मर जाना चाहिए

बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में ज़हरीली शराब से हाहाकार मचा हुआ है। अब तक 30 लोग जान गँवा चुके हैं, जबकि 6 को अपनी आँखों की रोशनी से हाथ धोना पड़ा है। इस मामले में 5 थानाध्यक्ष, 2 ASI और 9 चौकीदारों को निलंबित किया गया है। 60 तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। 5 FIR दर्ज की गई है। लेकिन, इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है, जो निहायत ही संवेदनहीन है।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन 22 मौतों की बात ही कबूल कर रहा है लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में पूर्वी चम्पारण के अलग-अलग इलाकों में पिछले 3 दिनों में 30 मौतों की खबरें सामने आई हैं। सीएम नीतीश कुमार ने सीधा फरमान जारी कर दिया है कि अगर मृतकों के परिवार वाले कह दें कि ‘साहब, हमलोग शराबबंदी के पक्ष में हैं’, शराब पीना बुरी बात है और ‘हम दूसरों को भी प्रेरित करेंगे कि वो शराब न पिएँ’ – तभी उन्हें बिहार सरकार की तरफ से 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

बिहार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भूल कर संवेदनहीन बयान दे रहे CM नीतीश कुमार

नीतीश कुमार का ये बयान दिखाता है कि बिहार की आर्थिक-समाजिक परिस्थिति से अवगत होने के बावजूद वो अपने जिद और राजनीति के लिए इस तरह की बातें कर रहे हैं। मृतकों में अधिकतर गरीब परिवार के लोग हैं। अब उन पर कमाने-खाने का संकट पैदा हो गया है, ऐसे में वो अपने लिए भोजन का इंतजाम करेंगे कि शराबबंदी के पक्ष में लोगों को प्रेरित करते फिरेंगे? मृतकों के पीछे जो छूट गए, भला उनकी क्या गलती है?

बिहार एक गरीब राज्य है। ज़हरीली शराब से जितनी भी मौतें होती हैं, उनमें अधिकतर पिछड़े और गरीब ही होते हैं। वो शिक्षित नहीं होते हैं। उन्हें अच्छे और बुरे शराब का भेद तक नहीं पता होता है। शराबबंदी के कारण ब्रांडेड शराब तो मिल नहीं रही है, ऐसे में उनके पास जो आता है वो पी लेते हैं। सरकार ये कह कर नहीं बच सकती कि हमने दारू बैन कर दिया है कि इसकी तस्करी के लिए भी आम जनता ही जिम्मेदार है।

क्या आपने कभी सुना है कि कोई नेता या कारोबारी ज़हरीली शराब से मर गया? कभी बॉलीवुड सेलेब्रिटीज की पार्टी में जहरीली दारू से मौत की खबरें आती हैं? शराब का सेवन खतरनाक है और इसमें कोई शक नहीं है कि शराब की पहली बूँद से ही व्यक्ति के शरीर को नुकसान पहुँचने लगता है। डॉक्टर भी शराब का सेवन न करने की सलाह देते हैं। लेकिन, बिहार जैसे राज्य में कलम से एक फरमान जारी कर के सब कुछ अचानक नहीं किया जा सकता।

शराबबंदी से मरने वाले और उनके परिवार पीड़ित हैं, अपराधी नहीं। अगर ज़हरीले शराब के सेवन से किसी की जान चली गई, ऐसे में उसकी विधवा को प्रताड़ित करने का क्या फायदा? उसके माता-पिता से सरकार कैसे बदला ले सकती है? उसके बच्चों के सामने कैसे शर्तें रखी जा सकती हैं? गरीब परिवार में एक व्यक्ति के मरने से कमाई बंद हो जाती है और खाने का संकट पैदा हो जाता है, ऐसे में पीड़ित परिवार के सामने शर्तें रखना कहाँ तक उचित है?

एक तो भ्रष्टाचार और नौकरशाही से पीड़ित बिहार जैसे राज्य में साधारण मुआवजे के लिए भी लोगों को सरकारी दफ्तरों की इतनी दौड़-धूप करनी पड़ती है कि पूछिए मत। गरीब तो छोड़िए, माध्यम वर्ग भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में एक तो घर में किसी की मौत हो जाए, ऊपर से महिलाओं-बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता को सरकार की शर्तों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़े और उनके साथ अपराधी की तरह व्यवहार किया जाए, तो इसे जायज कैसे ठहराया जा सकता है?

शराबबंदी का कानून तो बना दिया, ज़हरीली शराब की सप्लाई रोकना सरकार का काम नहीं?

शराब और ज़हरीले शराब में अंतर है। शराबबंदी के प्रावधानों से शराब की दुकानें बंद हो गईं। लेकिन, ज़हरीली शराब की सप्लाई रोकना सरकार का काम है, आम जनता का नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बड़ी चालाकी से शराब और ज़हर को एक साथ देख रहे हैं। जहाँ शराब पर प्रतिबंध नहीं है, वहाँ भी ज़हरीली शराब से मौतें होती हैं और इसकी जिम्मेदारी सरकार पर ही आती है, पुलिस-प्रशासन पर ही आती है, आम जनता पर नहीं।

ये कुछ वैसा ही है, जैसे बाजार में ज़हरीले मसले की पुड़िया बिकनी लगे और उसे खा कर लोग बीमार पड़ने लगें, उनकी मौत होनी लगे। फिर खाद्य विभाग या फिर पुलिस-प्रशासन किसलिए है? राज्य सरकार कह देगी कि हमने फलाँ कानून बना दिया है, मरने वाले और उनके परिवार खुद दोषी हैं। ऐसा कहीं नहीं चलता है। ज़हरीली शराब बाजार में कहाँ से आ रही है, कहाँ बन रही है और लोग इसे कैसे खरीद रहे हैं, कौन लोग इसे बेच रहे हैं – ये देखना पुलिस-प्रशासन का काम है।

अगर किसी गरीब के हाथ में ज़हरीली शराब पहुँच गई है तो ये पुलिस-प्रशासन की नाकामी है, आम जनता की नहीं। इसकी सज़ा मृतक के परिवार वालों को नहीं दी जा सकती। ये वही नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने सारण में ज़हरीली शराब से हुई मौतों पर ‘जो पिएगा, वो मरेगा’ वाला बयान देते हुए एक रुपया भी मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। अब वही नीतीश कुमार कह रहे हैं कि हमारी ये-ये शर्तें मानो, तभी मुआवजा दिया जाएगा।

याद दिला दें कि दिसंबर 2022 के मध्य में बिहार के सारण जिले में ज़हरीली शराब से 70 से भी अधिक लोगों की मौत हो गई थी। CID को इसकी जाँच सौंप दी गई थी। 2016 में बिहार में शराबबंदी का निर्णय लागू होने के बाद ये इस तरह का सबसे बड़ा हादसा था। जहाँ बिहार सरकार ने 38 मौतों का आधिकारिक आँकड़ा दिया था, विपक्षी भाजपा ने ये संख्या 100 से भी ज़्यादा होने का दावा किया था। मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण) वाले मामले में भी यही हो रहा है।

नीतीश कुमार कहते रहे हैं कि शराबबंदी महिलाओं के हित को ध्यान में रख कर की गई है। शराब से होने वाली मौतों के कारण आज वही महिलाएँ सबसे ज़्यादा रोती-बिलखती हुई दिखती हैं, क्योंकि घर में कमाने-खाने का कोई जरिया नहीं बचता। उन्हीं महिलाओं से बिहार सरकार कहती है कि तुम फलाँ चीजें लिख कर दो, तब तुम्हें मुआवजा देंगे। ये संवेदनहीनता नहीं तो क्या है? सरकार को तो मृतकों के घर पहुँच कर उन्हें सांत्वना देनी चाहिए, मुआवजे के लिए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

गरीबों में जागरूकता ज़रूरी, मृतकों के परिवार वालों से अपराधियों वाला व्यवहार क्यों?

जब देश भर में पोलियो ने पाँव पसारा हुआ था, तब केंद्र और राज्य सरकारों ने मिल कर पहल की। पोलियो की दवा समय-समय पर बच्चों को पिलाने के लिए बड़े स्तर पर कर्मचारी लगाए गए। इसके लिए रेडियो से लेकर टीवी और अख़बार तक के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया। पोलियो की दवाओं को लेकर गरीब और अशिक्षित वर्ग में एक प्रकार का भय था, जिसे दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान का सहारा लिया गया।

लोकप्रिय अभिनेता अमिताभ बच्चन को इस अभियान का ब्रांड एम्बेस्डर बनाया गया। तब जाकर कई वर्षों के कई चरणों के अभियान के बाद ये सफल हुआ। अगर सरकार सिर्फ ये कानून बना देती कि पोलियो की दवा पिलाना अनिवार्य है, तो क्या इससे समस्या हल हो जाती? पोलियो से हुई मौतों पर ये कहा जाता कि ये तुम्हारी गलती है, मृतक का परिवार अपराधी है – तो या ये अभियान इतिहास बना पाता? बिलकुल भी नहीं।

फिर बिहार की तो अधिकतर आबादी गरीबी के संकट से ग्रस्त है। उन्हें पलायन करना पड़ता है, क्योंकि राज्य में काम नहीं मिलता। स्किल डेवेलोपमेंट की कोई ट्रेनिंग मिल नहीं पाती। जो बिहार में काम करते हैं, वो कम पैसों में गुजरे को मजबूर हैं। उनमें जागरूकता का अभाव होता है, ऐसे में सरकार को शराबबंदी से पहले चाहिए था कि एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाए। महिलाओं-बच्चों-बुजुर्गों को समझाया जाए, फिर घर-घर में लोगों को शराब के खिलाफ जागरूक किया जाए।

इसके अलावा ज़हरीली शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना बनाई जाती। इसके बाद अगर शराबबंदी होती, तब कहीं ये सफल हो पाती। लेकिन, अब क्या हो रहा है? मोतिहारी शराब काण्ड में एक बीमार व्यक्ति को इलाज कराने की बजाए कार्रवाई के लिए कोट-कचहरी घुमाया जाता रहा, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस कहती रही कि ये जेल जाएगा। पिटाई का भी आरोप है। ऐसी संवेदनशीन पुलिस और मुख्यमंत्री से हम कैसे अपेक्षा करें कि सही फैसले लिए जा रहे हैं।

प्रावधान इतने कड़े कर दिए गए हैं कि ज़हरीली शराब से बीमारी या मौत होने के बाद भी कोई परिवार खुले तौर पर इसे स्वीकार नहीं करता। कारण – पुलिस उन्हें परेशान करेगी और इलाज/मुआवजे की जगह कार्रवाई पर ही जोर दिया जाएगा। जब नीतीश कुमार से इस संबंध में सवाल पूछा जाता है तो वो ये कह कर इतिश्री कर लेते हैं कि शराब गलत चीज है। क्या ज़हरीली शराब पीने वाले व्यक्ति को पता होता है कि ये ज़हरीली है? ऐसा तो किसी भी खाने-पीने वाली चीजों के साथ हो सकता है। इस पर लगाम लगाने के लिए ही तो तमाम सरकारी विभाग हैं।

कुल मिला कर बात ये है कि शराबबंदी के फैसले से कुछ नहीं होगा, व्यापक जागरूकता अभियान ज़रूरी है। ज़हरीली शराब से हो रही मौतों के बाद परिवार को अपराधी बनाना बंद किया जाए। मुआवजे के लिए उन पर अतिरिक्त भार न लादा जाए। ज़हरीली शराब की तस्करी और खरीद-बेच रोकना सरकार का काम है, आम लोगों का नहीं। शराब और ज़हरीली शराब में अंतर है। मुआवजे को लेकर हर घटना के बाद सीएम अलग-अलग बयान दे रहे, जो खुद उनके कन्फ्यूजन की स्थिति की ओर इशारा करता है।

बॉलीवुड की हिरोइन UAE में गिरफ्तार, छुड़ाने के लिए परिवार को घर रखना होगा गिरवी: भाई बोला- ट्रॉफी बोलकर थमाया ड्रग्स, एयरपोर्ट पर पकड़ी गई

‘सड़क 2’ और ‘बाटला हाउस’ फिल्‍मों में काम कर चुकीं बॉलीवुड एक्‍ट्रेस क्रिसन परेरा (Chrisann Pereira) को ड्रग्स तस्करी के आरोप में संयुक्‍त अरब अमीरात में गिरफ्तार किया है। क्रिसन करीब दो हफ्तों से शारजाह सेंट्रल जेल में बंद हैं। भारतीय वाण‍िज्‍य दूतावास ने एक्‍ट्रेस की गिरफ्तारी की खबर परिवार को दे दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रिसन के परिवार का कहना है कि इस मामले में उनकी बेटी आरोपित नहीं, बल्‍क‍ि पीड़‍ित हैं। क्रिसन के भाई केविन ने कहा, “हम पिछले 2 हफ्तों में इमोशनल टॉर्चर से गुजरे हैं। मेरी बहन निर्दोष है और उसे ड्रग्स रैकेट में फँसाया गया है।” परिवार का दावा है कि क्रिसन ने शारजाह हवाई अड्डे पर उतरने के बाद से उन से कोई कांटेक्ट नहीं किया। 72 घंटे बाद उन्हें भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सूचित किया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और शारजाह सेंट्रल जेल में डाल दिया गया है।

एक्ट्रेस का परिवार उन्हें छुड़वाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। इस संबंध में केविन ने 7, 9 और 11 अप्रैल को ट्वीट भी किया था और भारत सरकार व मुंबई पुलिस से तत्काल मदद की गुहार लगाई। क्रिसन परेरा के परिवार के अनुसार, एक्‍ट्रेस को रवि नाम के एक शख्‍स ने बरगलाया था। उसने सबसे पहले क्रिसन की माँ प्रेमिले परेरा से संपर्क किया था। रवि ने बताया था कि वह एक इंटरनेशनल वेब सीरीज के लिए कास्‍ट‍िंग कर रहा है। इसके बाद माँ ने ही रवि को क्रिसन से मिलवाया था। कुछ मुलाकातों के बाद दुबई में वेब सीरीज के लिए ऑडिशन की बात कही गई। फिर रवि ने एक्‍ट्रेस के वहाँ आने-जाने की पूरी व्यवस्था कराई थी।

क्रिसन की माँ प्रेमिला के मुताबिक, “1 अप्रैल को दुबई के लिए फ्लाइट लेने से पहले आरोपित ने क्रिसन को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 10 मिनट की दूरी पर एक कॉफी शॉप में मिलने के लिए बुलाया। उसने उसे एक ट्रॉफी सौंपी शायद यह मेंशन करते हुए कि वो ट्रॉफी ऑडिशन के लिए स्क्रिप्ट का हिस्सा है और ऑडिशन के लिए जरूरी है। इसके बाद वह ट्रॉफी अपने साथ ले गई। शारजाह एयरपोर्ट पर पहुँचने के बाद क्रिसन को वहाँ मौजूद अधिकारियों ने पकड़ लिया। ट्रॉफी से उन्हें ड्रग्‍स बरामद हुई।”

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद 10 अप्रैल को भारतीय वाणिज्य दूतावास ने उन्हें बताया कि पुलिस ने एक्‍ट्रेस को ड्रग्स तस्‍करी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। रवि नाम का वह शख्‍स अब भी फरार बताया जा रहा है। क्रिसन परेरा के परिवार ने दुबई में एक वकील हायर कर लिया है।

क्रिसन के भाई केविन ने कहा, “हमने दुबई में एक वकील हायर कर लिया है। वकील की फीस 13 लाख रुपए है। हमारा परिवार क्रिसन को सुरक्ष‍ित वापस लाने के लिए घर को गिरवी रखने की तैयारी कर रहा है, क्‍योंकि इस मामले में जुर्माना 20-40 लाख रुपए के बीच हो सकता है। 13 दिन से ज्यादा हो गए हैं और हम उसके बारे में सोच-सोचकर काफी परेशान हैं। हम ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, खा नहीं पा रहे हैं, जबकि धोखेबाज खुले घूम रहे हैं।”

कथिततौर पर क्रिसन परेरा के परिवार ने ड्रग तस्कर रवि को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करवाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस संयुक्त अरब अमीरात सरकार से आरोपों की कॉपी का इंतजार कर रही है।

CBI की 9.5 घंटे की पूछताछ… केजरीवाल का गायब दिखा एक दाँत! मीडिया के सामने बदले दिखे दिल्ली CM के हावभाव, ट्रेंड हुआ #DaantDikhaoKejriwal

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने रविवार (16 अप्रैल 2023) को शराब घोटाले में सीबीआई की 9.5 घंटे की पूछताछ के बाद मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, “AAP ईमानदार पार्टी है। शराब घोटाले का आरोप झूठा और गंदी राजनीति से प्रेरित है।”

इस दौरान दिल्ली के सीएम ठीक से अपना मुँह भी नहीं खोल पा रहे थे। इसलिए बयान से ज्यादा लोगों ने उनके चेहरे के हाव भाव को नोटिस किया। इस बीच कुछ लोग केजरीवाल का एक दाँत गायब देखकर हैरान रह गए। इसके बाद सोशल मीडिया पर #DaantDikhaoKejriwal ट्रेंड करने लगा ।

विनोद नाम के यूजर ने ट्विटर पर केजरीवाल की दाँत वाली और बिना दाँत वाली तस्वीरें शेयर करके लिखा, “पहली फोटो सुबह की है और दूसरी शाम की है।”

प्रकाश नाम के यूजर ने अरविंद केजरीवाल के मजे लेते हुए लिखा, “आपने शायद नोटिस नहीं किया कि केजरीवाल उस तरह से अपना मुँह नहीं खोल पा रहे हैं, जितना वह आमतौर पर खोलते हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें अपने एक दाँत की याद सता रही है, जो 2-3 दिन पहले नीतीश कुमार को बधाई देते समय दिखाई दे रहा था। यह अफवाह है कि पूछताछ के दौरान वह सीबीआई कार्यालय में खो गया।”

सोनी ने लिखा, “केजरीवाल दाँत दिखाओ न दाँत।”

अमन वर्मा अपने ट्विटर हैंडल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री को थप्पड़ मारने वाला पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखते हैं, “मेरे विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने इस सीन को तब रीक्रिएट किया, जब केजरीवाल ने उनके साथ सहयोग करने से इनकार कर दिया।”

मुन्ना ने केजरीवाल के एक दाँत के गायब होने का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “इसमें भी मोदी जी का हाथ है।”

बता दें कि दिल्ली के शराब घोटाला मामले में सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को समन भेजकर उन्हें 16 अप्रैल को पूछताछ के लिए बुलाया था। इस मामले में अन्ना हजारे ने कहा है कि यदि केजरीवाल ने गलती की है तो उसे सजा होनी चाहिए। वहीं, शराब घोटाले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी 26 फरवरी 2023 को हुई थी। उसके बाद से उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है। राउज एवेन्यू कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर अब 18 अप्रैल 2023 को सुनवाई होनी है।

पाकिस्तान में चीनी इंजीनियर ‘अल्लाह के अपमान’ में गिरफ्तार, रमजान में धीमे काम पर बोला तो हत्या करने पर उतर गई कट्टरपंथी भीड़: पहले श्रीलंकाई मैनेजर को जलाया था जिंदा

उत्तरी पाकिस्तान में चीन के एक इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है। उस पर अल्लाह के अपमान का आरोप है, जिसके बाद मुस्लिम भीड़ ने जम कर विरोध प्रदर्शन किया था। भीड़ उस पर हमले के लिए अंडा हो गई थी। आरोप है कि काम के दौरान ही उसने एक झगड़े में ईशनिंदा की। वो चीन की कंपनी ‘Gezhouba Group’ में कार्यरत है। वो दासु हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के काम में लगा हुआ था। उसे रविवार (16 अप्रैल, 2023) की शाम को गिरफ्तार किया गया।

इस्लामाबाद से 350 किलोमीटर दूर स्थित कैम्प से उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि कोई गंभीर स्थिति न पैदा हो जाए, इसीलिए ये कार्रवाई की गई। ये घटना पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित कोहिस्तान गाँव की है। इस महीने की शुरुआत में इस कैम्प में शॉर्ट सर्किट के कारण आग भी लग गई थी। प्रोजेक्ट में काम कर रहे मुस्लिम मजदूरों ने इंजीनियर पर अल्लाह के अपमान का आरोप लगाया। इसके बाद सड़क काम कर दिया गया। चीनी कैम्प के बाहर भी बड़ी संख्या में मुस्लिम भीड़ जुटी हुई थी।

रमजान के दौरान काम काफी धीमा हो गया था, इसीलिए इंजीनियर ने मजदूरों को काम तेजी से करने की नसीहत दी थी। वहाँ से कुछ ही दूसरी पर काराकोरम हाइवे स्थित है, पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला एकमात्र राजमार्ग। उसे जाम कर दिया गया। ये इलाका हिमालय पर पड़ता है। इस घटना के बाद वहाँ काम कर रहे अन्य चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है। दंगे की स्थिति पैदा हो गई थी। अब स्थानीय मौलानाओं की बैठक में तय किया जाएगा कि पुलिस में मामला दर्ज कराना है या नहीं।

बता दें कि पाकिस्तान में ईशनिंदा पर मौत की सज़ा का ही प्रावधान है। इससे पहले दिसंबर 2021 में एक वीभत्स घटना सामने आई थी, जब श्रीलंका के एक फैक्ट्री मैनेजर को ज़िंदा जला दिया गया था। उस पर भी ईशनिंदा का आरोप मजदूरों ने लगाया था। पाकिस्तान में चीनी नागरिकों को लेकर भी ऐसी घटनाएँ हुई हैं। 2021 में इसी इलाके में एक बस पर हुए हमले में 12 लोग मारे गए थे, जिनमें 9 चीन के नागरिक थे। 2022 में कराची में हुए एक एक आत्मघाती बम हमले में तीन चीनी शिक्षकों और उनके ड्राइवर को मार डाला गया था।

बठिंडा आर्मी कैंप में फायरिंग करने वाले का जिसने बताया हुलिया, वही निकला हमलावर; CCTV से खुली पोल: पहले राइफल चुराई, फिर उसी से जवानों पर गोलियाँ बरसाई

पंजाब के बठिंडा आर्मी कैंप में हुई फायरिंग में एक जवान की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने इस जवान की पहचान देसाई मोहन के तौर पर बताई है। एशिया की इस सबसे बड़ी छावनी में 12 अप्रैल 2023 को फायरिंग हुई थी। दिलचस्प है कि हमले के बाद फायरिंग करने वाले का हुलिया बताने वाला भी देसाई मोहन ही था।

लेकिन सीसीटीवी फुटेज की जाँच से उसकी पोल खुल गई। बठिंडा एसएसपी गुलनीत सिंह खुराना ने बताया है कि कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने फायरिंग कर साथी जवानों की हत्या करने की बात स्वीकार ली है। इसके लिए उसने पूरी प्लानिंग की थी। पहले आर्मी स्टेशन से राइफल चोरी की। फिर उससे ही साथी जवानों पर गोलियाँ बरसाई।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने भी सेना के दक्षिण-पश्चिमी कमान के मुख्यालय से देसाई की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। बताया है कि वह आर्टिलरी यूनिट में तैनात था। उसने राइफल चोरी और फायरिंग में अपनी संलिप्तता कबूल की है। शुरुआती जाँच से संकेत मिलता है कि ऐसा उसने व्यक्तिगत रंजिश में किया।

कैसे शक के दायरे में आया देसाई मोहन

जाँच टीम ने मिलिट्री स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। फुटेज में कोई भी व्यक्ति मिलिट्री स्टेशन के अंदर आता या बाहर जाता दिखाई नहीं दिया। इससे यह तय हो गया था कि जवानों की हत्या करने वाला मिलिट्री स्टेशन के अंदर का ही है।

पुलिस को शुरुआत से गनर नागा सुरेश और गनर देसाई मोहन पर शक था। पुलिस ने इन दोनों जवानों समेत 4 जवानों से पूछताछ की थी। इनके अलावा सेना ने करीब 1 दर्जन जवानों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। पूछताछ के दौरान पुलिस का शक चश्मदीद देसाई मोहन पर गहराता गया। इसके बाद पुलिस ने उससे कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में उसने साथी जवानों की हत्या की बात कबूल ली। इसके बाद सोमवार (17 अप्रैल 2023) को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कथित तौर पर मोहन ने कहा है कि उत्पीड़न के चलते उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

क्या है मामला

12 अप्रैल 2023 की सुबह बठिंडा मिलिट्री स्टेशन में फायरिंग कर 4 जवानों की हत्या कर दी गई थी। सभी जवान 80 मीडियम रेजिमेंट के थे। घटना का एकमात्र चश्मदीद देसाई मोहन था। उसने दावा किया था कि सफेद कुर्ता-पजामा पहने दो नकाबपोश आए और गोलियाँ बरसाने लगे। साथ ही कुल्हाड़ी से हमले की बात भी कही थी।

क्या गुड्डू मुस्लिम ने करवाई अतीक-अशरफ की हत्या? मीडिया रिपोर्टों में भाटी से लेकर बिश्नोई गैंग कनेक्शन तक की बातें, क्रूड बम भी बना लेता है सनी सिंह

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद अब सुंदर भाटी गैंग भी चर्चा में है। हमला करने वाले तीन शूटरों में से एक सनी सिंह के इस गैंग से जुड़े होने की बात कही जा रही है। सनी पर पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज हैं। कहा जा रहा है कि अतीक की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल भाटी गैंग ने ही सनी को दी थी। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स इस हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की भी मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या में जिगाना पिस्टल का प्रयोग हुआ है। जिगाना पिस्टल तुर्की में बनती है। लगभग 6 लाख रुपए कीमत की यह पिस्टल भारत में बैन है। यह पिस्टल सुंदर भाटी गैंग द्वारा सनी सिंह को देने की आशंका जताई जा रही है। मूल रूप से हमीरपुर के रहने वाले सनी सिंह के सुंदर भाटी से सम्पर्क जेल में होने की बात कही जा रही है। जिगाना पिस्टल आरोपितों के पास कहाँ से आई इसका खुलासा फिलहाल अभी नहीं हो पाया है। पुलिस को अभी तक सुंदर भाटी और अतीक अहमद के बीच किसी पुरानी दुश्मनी का भी सुराग नहीं मिल पाया है। सुंदर भाटी फिलहाल सोनभद्र जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

लॉरेंस गैंग से भी कनेक्शन की आहट

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अतीक और उसके भाई अशरफ को मारने वाले हथियार लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिए थे। इस आशंका को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि इन्हीं हथियारों से सिद्धू मूसेवाला की भी हत्या हुई थी। इस मर्डर में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।

गुड्डू मुस्लिम भी करा सकता है अतीक की हत्या

एक रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि अतीक अहमद के बाद उसकी गैंग का मुखिया गुड्डू मुस्लिम बनना चाहता था। हालाँकि अतीक की पसदं उसका भाई अशरफ था। आशंका जताई जा रही है कि यह बात गुड्डू मुस्लिम को रास नहीं आई होगी और उसने अतीक और अशरफ की हत्या करवा दी होगी। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बमबाज गुड्डू उमेश पाल की हत्या में वांटेड है और उसकी तलाश STF लगातार कर रही है।

दोनों हाथों से गोलियाँ चलाता है सनी

तीनों शूटरों को अतीक और अशरफ की लोकेशन व मूवमेंट आदि की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रहीं थी। सनी के करीबियों ने बताया कि हत्या के 4 दिन पहले उसने कुछ बड़ा करने की बात कही थी। तब उसने कहा था कि जल्द ही पूरे प्रदेश में लोग उसे जान जाएँगे। सनी सिंह 90 के दशक के उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े डॉन रहे और बाद में UP STF के द्वारा मारे गए श्रीप्रकाश शुक्ला का फैन है। बताया जा रहा है कि वह दोनों हाथों से गोलियाँ चला लेता है। सनी के पड़ोसियों के मुताबिक वह अक्सर साइबर कैफे जाकर बड़े अपराधियों के फोटो प्रिंट करवाकर लाता था। कक्षा 8 पास सनी क्रूड बम भी बना लेता है। साल 2021 में वह चित्रकूट जेल में बंद था। फ़िलहाल पुलिस शूटरों से जुड़े तमाम नेटवर्क को खंगाल रही है।

BBC के लिए रॉबिनहुड, CNN को दिखा राजनेता, NYT को योगी के कपड़ों से दिक्कत: माफिया अतीक अहमद के महिमामंडन में विदेशी मीडिया दिखा रहा हिन्दू घृणा

जैसा कि अब तक सभी को पता चल चुका है, प्रयागराज के सबसे बड़े माफिया रहे अतीक अहमद और उसके भाई को शनिवार (15 अप्रैल, 2023) की रात 3 बदमाशों ने मिल कर हत्या कर दी। ये हत्याकांड लाइव टीवी पर रिकॉर्ड हुआ, क्योंकि हत्या के समय अतीक अहमद और उसका भाई मीडिया से ही बात कर रहे थे। हत्यारे भी मीडियाकर्मी का वेश बना कर ही आए थे। ताबड़तोड़ गोलियाँ चलते हुए पूरे देश ने लाइव टीवी पर देखा।

अतीक अहमद की मौत के बाद प्रयागराज के लोगों ने राहत की साँस ली। पूर्वांचल के लोग भी जानते हैं कि 44 वर्षों तक अतीक अहमद के खौफ का वहाँ क्या आलम था। 2005 में उसने विधायक राजू पाल को मरवा दिया था। 5 किलोमीटर तक खदेड़ कर राजू पाल पर गोलीबारी की गई थी। जब उनके समर्थन उन्हें लेकर अस्पताल गए, अतीक अहमद ने फिर से अपने गुर्गे भेजे और उनकी हत्या करवाई। तब उनकी शादी को मात्र 9 दिन ही हुए थे।

इसी तरह, उसने 1996 में अशोक साहू नामक कारोबारी को सिर्फ इसीलिए मरवा दिया था क्योंकि उन्होंने गलती से उसके भाई अशरफ की गाड़ी को ओवरटेक किया था। अशोक साहू ने बाद में अतीक अहमद के घर जाकर माफ़ी भी माँगी, उसने आश्वासन भी दिया लेकिन 2 दिनों बाद ही मरवा दिया। इसी तरह जयश्री कुशवाहा नामक महिला के पति को उसने गायब करवा दिया। उन पर कई बार हमले किए। जयश्री के बेटे पर गोलीबारी करवाई।

जयश्री 33 वर्षों से उससे लड़ रही थीं। 1989 से ही उन्हें नहीं पता है कि उनके पति आखिर गए कहाँ। उनकी 12 बीघा जमीन अतीक अहमद ने हड़प ली थी, सो अलग। राजू पाल हत्याकांड में गवाह थे उमेश पाल, उन्हें भी अतीक अहमद ने इस साल 24 फरवरी को मरवा दिया। उसका बेटा CCTV में गोलीबारी करते हुए कैद हुआ। उमेश पाल के साथ-साथ यूपी पुलिस के जवानों संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह को की भी उसके गुंडों ने हत्या कर दी।

ये तो अतीक अहमद की वो करतूतें हैं, जो चर्चा में रहे। भले ही वो इलाहाबाद पश्चिम से लगातार 5 बार विधायक और फूलपुर से सांसद रहा हो, लेकिन इस तरह के माफिया चुनाव जीतने के लिए किस तरह के हथकंडों का सहारा लेते है, ये किसी से छिपा नहीं है। सीवान में शहाबुद्दीन किस तरह की क्रूरता कर के सांसद बनता था, ये हर एक बिहारी को पता है। अतीक अहमद के खौफ का आलम इसी से समझ लीजिए कि उसकी सैकड़ों करोड़ रुपयों की अवैध संपत्ति ध्वस्त या जब्त की जा चुकी है।

ये संपत्ति उसने कैसे बनाई होगी, आप ही सोच लीजिए? जयश्री कुशवाहा जैसी कितनी पीड़िताएँ होंगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। मुलायम सिंह यादव की पार्टी सपा ने उत्तर प्रदेश में 2 दशकों में 12 वर्षों तक राज़ किया। जब सपा जाती थी तो बसपा को सत्ता मिलती थी। दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने गुंडे-बदमाश पाल रखे थे। अतीक अहमद पर मुलायम सिंह यादव की विशेष कृपा थी। अतीक के कुत्ते से मुलायम की हाथ मिलाती हुई तस्वीर आपने देखी ही होगी।

ऊपर से, उत्तर प्रदेश के पुलिस-प्रशासन में भी कई ऐसे अधिकारी थे जो अतीक अहमद की खुली मदद करते थे। जिस व्यक्ति को पुलिस-प्रशासन और सत्ता का सीधा संरक्षण हासिल हो, सोचिए उसका कोई कैसे कुछ बिगाड़ सकता है? उसके खिलाफ आवाज़ उठाने पर व्यक्ति के साथ क्या हो सकता था, कई उदाहरण हमने देख लिए। उसके खिलाफ चुनाव जीतने, गाड़ी ओवरटेक करने और अपनी जमीन देने की एक ही ‘सज़ा’ थी और वो थी मौत।

अब ज़रा अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या पर विदेशी मीडिया का प्रोपेगंडा देखिए। सबसे पहले बात करते हैं BBC की, जिसने ब्रिटेन के लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं के खिलाफ हुई मुस्लिम भीड़ की हिंसा पर भी जम कर प्रोपेगंडा फैलाया था। बीबीसी ने पीड़ित हिन्दुओं को ही गुंडा दिखाने का ठेका उठा लिया था। उसने ताज़ा घटना पर शीर्षक लिखा, “भारतीय माफिया डॉन से राजनेता बने व्यक्ति की बेशर्मी से हत्या।” सोचिए, एक गुंडे से इतनी सहानुभूति।

सबसे बड़ी बात कि इस लेख को लिखने वाली गीता पांडेय एक भारतीय ही हैं। इसमें अतीक अहमद का महिमामंडन करते हुए हुए मानबूत कद-काठी का व्यक्ति बताया गया है। सबसे बड़ी विडम्बना ये देखिए कि इसमें कपिल सिब्बल के बयान को प्राथमिकता दी गई है, जो लम्बे समय तक कॉन्ग्रेस के नेता रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं। BBC ने लिखा है कि अतीक अहमद का जन्म गरीब परिवार में हुआ था, लेकिन उसकी करतूतों के बारे में कुछ नहीं लिखा।

उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP विक्रम सिंह के हवाले से उसे ‘रॉबिनहुड’ तक लिखा गया। कितने गरीबों को अतीक अहमद ने फायदा पहुँचाया? उसने तो खुद के लिए हजारों करोड़ रुपयों की संपत्ति बना ली। जिन्हें उसने प्रताड़ित किया, उनमें अधिकतर गरीब ही हैं। फिर वो ‘रॉबिनहुड’ कैसे? उसे प्रभावशाली लिखा गया है। लेकिन, BBC लिखता है – अतीक अहमद गरीबों की मदद करता था, ईद पर और शादी-ब्याह में पैसे देता था और गरीब महिलाओं को उनके बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए यूनिफॉर्म-किताबें खरीदने में मदद करता था।

ये वैसा ही है, जैसे दुनिया भर में हजारों की जान लेने वाले ओसामा बिन लादेन को ‘अच्छा अब्बा और अच्छा शौहर’ कह कर उसने गुनाहों को माफ़ करने की बात की जाए। भाजपा को हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी बताते हुए BBC ने लिखा है कि इसके सत्ता में आने के बाद से इसका प्रभाव घटने लगा। उमेश पाल की हत्या की सीसीटीवी फुटेज में अतीक अहमद का बेटा असद साफ़-साफ़ दिख रहा है, फिर भी BBC उन्हें हत्या का आरोपित ही लिखता है।

अंत में, अगर ‘इस्लामोफोबिया’ वाला प्रोपेगंडा न चलाए तो भला बीबीसी काहे का? ब्रिटेन के सरकारी मीडिया संस्थान अपने लेख में अब एक अज्ञात मुस्लिम को लेकर आता है। साथ ही उसके हवाले से लिखता है कि अतीक अहमद को इसीलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वो मुस्लिम था। साथ ही अपील करता है कि राजनेता सब कुछ हिन्दू-मुस्लिम के चश्मे से न देखें। अजीब है ना? यही लोग तो कहते हैं कि अपराधियों का कोई मजहब नहीं होता, तो अब क्या हुआ? हिन्दू-मुस्लिम तो यही कर रहे और दूसरों को सलाह दे रहे कि मत करो।

इसी तरह अब अमेरिका के एक प्रमुख मीडिया संस्थान CNN को ले लीजिए। उसने अतीक अहमद को ‘पूर्व राजनेता’ लिख कर संबोधित किया है। साथ ही उसने हत्यारों पर ‘धार्मिक हिन्दू नारे’ लगाने का आरोप लगाया। क्या दुनिया भर में ‘अल्ला-हू-अकबर’ चिल्ला कर गला रेते जाने की घटनाओं पर भी CNN इस बेबाकी से लिखता है? एक अनाम अधिकारी के हवाले से लिख दिया गया कि शांति के लिए विरोध प्रदर्शनों को रोक दिया गया है।

साथ ही उसने उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए 180 अपराधियों को ‘Suspected Criminals’ लिखा है, अर्थात जिन्हें अपराधी समझा जा रहा हो। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान को इस लेख में प्राथमिकता दी गई है। आप सोचिए, अगर अमेरिका में कोई आतंकी हमला हो और आतकियों का महिमामंडन बाहर की मीडिया करने लगे तो फिर इसे वहाँ की मीडिया गलत कहेगी या नहीं? दूसरे देशों के मामलों पर उनका ये दोहरा रवैया सामने आ जाता है।

इसी तरह, न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की तो पूछिए ही मत। मीडिया संस्थान कई बार भारत विरोधी लेख खुले तौर पर लिख चुका है। इसने इस घटना को ‘असाधारण’ करार दिया। आजकल मोबाइल कैमरों का जमाना है, दुनिया भर में अधिकतर घटनाएँ कैमरे में कैद हो जाती हैं। NYT इसे ‘अवैधानिक हत्या’ लिखता है और उत्तर प्रदेश सरकार को ‘धार्मिक एजेंडे’ वाला लिखता है। अमेरिका में तो राष्ट्रपति ही बाइबिल पर हाथ रख कर शपथ लेते हैं, तो क्या वहाँ के प्रेजिडेंट को मजहबी नहीं कहा जा सकता?

NYT ने भारत और हिन्दुओं के खिलाफ प्रोपेगंडा के लिए तीन-तीन लेखकों से इस लेख को लिखवाया है। यूपी पुलिस के एनकाउंटर्स को ‘Extrajudicial’ हत्याएँ लिखा गया है। योगी सरकार को ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ जोर देकर लिखा गया है। क्या हिन्दू होना गुनाह है या फिर राष्ट्रवादी? भारत को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण वाला समाज कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवा कपड़े पहने जाने पर भी सवाल उठाया गया है।

वो गोरखनाथ स्थित गोरक्षधाम के महंत हैं, पीठाधीश्वर हैं, ऐसे में क्या उन्हें मठ के नियमों के हिसाब से कपड़े पहनने के लिए अमेरिका की अनुमति लेनी होगी? ‘अशोका यूनिवर्सिटी’ के प्रोफेसर से बयान लिया गया है, जो भारत विरोधियों का अड्डा रहा है। NYT ने एक तरह से अपने पूरे लेख में बिना कोई सबूत के किसी भी ऐरे-गैर का बयान लेकर कुछ भी आरोप लगा दिए हैं। क्या NYT, BBC या CNN ने पिछले 44 वर्षों में अतीक अहमद के गुनाहों पर एक भी रिपोर्ट लिखी होगी?

किसी ने घर बुलाकर किया सेक्स, किसी ने स्कूल बिल्डिंग में ही बनाए संबंध: छात्रों के यौन शोषण में US की 6 महिला टीचर गिरफ्तार, स्नैपचैट पर भेजती थी न्यूड तस्वीरें

अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों से पिछले 2 दिनों में 6 महिला टीचरों के अपने छात्रों से यौन संबंध बनाने के मामले सामने आए हैं। इन सभी पर यौन दुराचार के तहत केस दर्ज किया गया था। अरोपित महिला टीचरों की उम्र पीड़ित छात्रों से कहीं अधिक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पहला मामला डैनविल का है। यहाँ की 38 वर्षीया एलेन शेल वुडलॉन एलीमेंट्री स्कूल में सहायक शिक्षिका के तौर पर काम करती हैं। उन पर जुलाई-अगस्त 2022 में उसी स्कूल के 16 साल के 2 अलग-अलग छात्रों के साथ कई मौकों पर सेक्स करने का आरोप है। मामला दर्ज होने के बाद एलेन शेल को छुट्टी पर भेज दिया गया था। अब गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को एलेन को गिरफ्तार कर के गैरार्ड काउंटी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया गया। अमेरिकी कानून के मुताबिक महिला टीचर का अपराध थर्ड डिग्री श्रेणी में आता है।

दूसरे केस में अमेरिका के ही अरकंसास में 32 साल की टीचर हीदर हरे पर एक नाबालिग छात्र से सेक्स करने का आरोप लगा है। अमेरिकी कानून ने इसे फर्स्ट डिग्री अपराध माना है। हीदर को लगभग साढ़े 3 घंटे जेल में बिताना पड़ा। बाद में उन्हें 15 हजार डॉलर की जमानत पर छोड़ा गया। 1 अप्रैल 2023 को हीदर हरे ने स्कूल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।

तीसरा केस ओक्लाहोमा से है। यहाँ वेलस्टन पब्लिक स्कूल की 26 वर्षीया शिक्षिका एमिली हैनकॉक को अप्रैल 2023 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर अपने एक 15 साल के नाबालिग छात्र के साथ अवैध संबंधों का आरोप है। आरोप है कि महिला टीचर ने थोड़े समय की बातचीत के बाद अपने छात्र को अपनी नंगी तस्वीरें स्नैपचैट पर भी भेजी थीं। अदालत ने कहा कि आरोपित टीचर ने अपने छात्र से स्कूल की ही बिल्डिंग में यौन संबंध बनाए थे।

इस कड़ी में चौथा मामला 36 साल की महिला टीचर क्रिस्टन गैंट से जुड़ा हुआ है। वो डेस मोइनेस स्थित आयोवा के एक कैथोलिक हाईस्कूल में इंग्लिश पढ़ाया करती थीं। उन्हें शुक्रवार (14 अप्रैल 2023) को अपने ही स्कूल के एक नाबालिग छात्र से स्कूल के अंदर और बाहर 5 अलग-अलग मौकों पर सेक्स करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि महिला टीचर ने अपने छात्र को सोशल मीडिया पर सम्पर्क किया। उन्हें एक CCTV फुटेज में पीड़ित छात्र के साथ अकेले क्लासरूम में जाते भी देखा गया है जिसमें खिड़की पर कागज लगाया गया था। अरोपिता को स्कूल से निकाल दिया गया है।

पाँचवाँ मामला वर्जीनिया का है। यहाँ के जेम्स मैडिसन हाई स्कूल में पढ़ाने वाली एक 33 साल की टीचर एलीह खेरदमंद को एक छात्र के साथ कई माह तक यौन संबंध बनाने के मामले में आरोपित किया गया है। आरोपित टीचर इस स्कूल में साल 2015 से कार्यकर्त थीं। उनकी गिरफ्तारी गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को हुई है। एलीह पर 4 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।

छठा मामला पेंसिल्वेनिया का है। यहाँ एक स्कूल में भाला फेंक खेल की कोच पर अपने 17 साल के छात्र से यौन संबंध बनाने का आरोप लगा है। आरोपित का नाम हन्ना मार्थ है जिनकी उम्र 25 वर्ष है। उन पर आरोप है कि मई 2021 में उन्होंने अपने छात्र को अपने घर पर बुलाया था और वहीं उसके साथ सेक्स किया। पीड़ित छात्र ने बताया कि उसके हन्ना के साथ अक्टूबर 2022 में भी नाजायज संबंध बने थे। हन्ना को गुरुवार (13 अप्रैल 2023) को गिरफ्तार किया गया था। आखिरकार उन्हें 75 हजार डॉलर की जमानत पर छोड़ दिया गया।

उत्तराखंड में गंगा किनारे भी लैंड जिहाद, बोले CM धामी- 1000 मजार की हुई पहचान, हटाने का अभियान शुरू

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश को लैंड जिहाद से पूरी तरह से मुक्त करने का संकल्प लिया है। उन्होंने देवभूमि पर मजार जिहाद को सफल न होने देने का ऐलान किया है। 1 हजार स्थान चिन्हित करने की जानकारी देते हुए सीएम धामी ने माना कि गंगा नदी के आस-पास भी तमाम स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। ऑपइंडिया ने अपनी पिछली कई रिपोर्ट्स में धर्मनगरी, पर्यटन स्थलों और वन क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को सिलसिलेवार ढंग से बताया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 16 अप्रैल 2023 (रविवार) को ऋषिकेश के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में भी हिस्सा लिया। इस आयोजन के बाद धामी ने वहाँ मौजूद लोगों को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, “आस-पास और गंगा जी के तटों पर जो अनेक प्रकार का अतिक्रमण हुआ है हमने तय किया है कि उत्तराखंड के अंदर जो लैंड जिहाद के नाम पर, जो मजार जिहाद के नाम पर उसको हम किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे। हमने उन अतिक्रमण को हटाने का अभियान प्रारंभ कर दिया है।”

जानकारी के मुताबिक CM पुष्कर सिंह धामी ने खुद से चिन्हित किए गए ऐसे अतिक्रमण की तादाद 1 हजार बताई है। CM धामी के इस बयान का ऋषिकेश में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने तालियाँ बजा कर स्वागत भी किया है। उनके बयान का 37 सेकेण्ड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल ही हो गया है।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया उत्तराखंड में हो रहे डेमोग्राफिक बदलाव, लैंड जिहाद, अवैध मजार और मदरसों को लेकर साल 2021 से समय-समय पर रिपोर्ट करता रहा है। इन रिपोर्ट्स में जिम कार्बेट में बनी मजारों का खुलासा और हल्द्वानी में अवैध तौर पर कब्जाई रेलवे की भूमि का भी असल सच बताना शामिल है। सीएम धामी ने 22 मई 2022 को एक बयान में पहाड़ों पर बनती अवैध मजारों पर चिंता जताई थी। इसके बाद धामी सरकार ने दिसंबर 2022 और मार्च 2023 में कार्रवाई करते हुए 41 अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया था। अब सरकार ने 1000 अवैध अवैध मजारों की एक बार फिर लिस्ट बनाकर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू करने जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट पहुँचा अतीक-अशरफ का मामला, UP में हुए 183 एनकाउंटर की जाँच की माँग: कभी माफिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से अलग हो गए थे 10 जज

प्रयागराज में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हुई तमाम मुठभेड़ों की जाँच की माँग की गई है। इस माँग की एक याचिका वकील विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है। याचिका में विशाल तिवारी ने साल 2017 से अब तक हुए 183 एनकाउंटर की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जाँच की अपील की है। इस याचिका में अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच की माँग भी शामिल है जो फिलहाल UP पुलिस कर रही है। इसी याचिका में एडवोकेट तिवारी ने UP पुलिस को ‘डेयरडेविल्स’ कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिकाकर्ता विशाल तिवारी सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने इस जनहित याचिका के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही मुठभेड़ों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश पुलिस अपने आपको खतरों का खिलाड़ी (डेयरडेविल्स) बनाने की कोशिश कर रही है। ये जनहित याचिका कानून के नियम के उल्लंघन और पुलिस बर्बरता के खिलाफ आर्टिकल 32 के अंतर्गत दायर की जा रही है।”

इस याचिका में विकास दुबे एनकाउंटर की जाँच की माँग है। साथ ही अतीक-अशरफ अहमद की हत्या की जाँच की माँग है। याचिका में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र और कानून के विधान पर खतरा हैं। एनकाउंटर की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए वरना ऐसी हरकतों से अराजकता फैलती है और राज्य में पुलिस तंत्र की स्थापना होती है।

याचिका में विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट से साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हुई सभी 183 मुठभेड़ों की एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जाँच कराए जाने की उम्मीद जताई है। उन्होंने इस समिति का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के ही किसी पूर्व न्यायाधीश को बनाने की माँग की है। याचिकाकर्ता ने अपनी PIL (जनहित याचिका) को दमन और बर्बरता के खिलाफ बताया है।

मुस्लिमों ने ही खड़े किए सवाल

विशाल तिवारी की इस जनहित याचिका को मुस्लिम समाज में शक की नजर से देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि विशाल तिवारी की यह याचिका एक साजिश भी हो सकती है कमजोर दलीलें देकर सुप्रीम कोर्ट से मामले को रफा-दफा कराने की। इस मामले पर भारत सरकार के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के पूर्व सदस्य और फिलहाल में ‘वालेंटियर्स अगेंस्ट हेट’ नामक संगठन से जुड़े डॉ मेराज हुसैन ने लिखा, “ये विशाल तिवारी कौन है ? कई बार ऐसा होता है कि कमजोर सा केस फाइल करके उसे रिजेक्ट करा दो कि कोई और मूव न कर पाए। ये उसी गैंग का मेंबर तो नहीं ?’

मोहम्मद सोहैल ने भी डॉ मेराज हुसैन की हाँ में हाँ मिलाई है। नसरत खान ने विशाल तिवारी को देशद्रोही बताया है। इसके अलावा इरफ़ान अहमद ने लिखा, “ये इसलिए दायर की गई है कि बयान या जवाबदारी न देना पड़े। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बता कर चुप रहने के लिए।” इन सभी के अलावा कई अन्य यूजर्स ने भी विशाल तिवारी की मंशा पर शंका जाहिर की।

अतीक और अशरफ पर वकील उमेश पाल की हत्या का आरोप है। गौरतलब है कि साल 2012 में जब अतीक अहमद जेल में बंद था तब UP में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उसने जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस सुनवाई से 10 जजों ने खुद को अलग कर लिया था। आख़िरकार 11 वें जज ने अतीक का केस सुना था और उसे जमानत दे दी थी।