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‘भाई मैं इतना नहीं चल पाऊँगी’ : शौहर मुफ्ती अनस के खींचने पर बोलीं प्रेग्नेंट सना खान, Video देख लोग मौलाना पर भड़के

बॉलीवुड की दुनिया छोड़कर इस्लाम का रुख करने वाली सना खान इस समय प्रेग्नेंट हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें उनका मौलवी शौहर मुफ्ती अनस उनका हाथ पकड़कर तेजी में कहीं लेकर जा रहा है। वहीं सना परेशान होकर कह रही हैं कि उनसे इतनी तेज नहीं चला जाएगा।

इस वीडियो को ViralBhayani ने अपने इंस्टा पर शेयर किया है। वीडियो में सना को कहते सुना जा सकता है, “भाई मैं इतना नहीं चल पाऊँगी।”

इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ यूजर्स इसे ‘गैरजिम्मेदाराना व्यवहार’ बता रहे हैं तो कुछ इसे ‘केयर’ कह रहे हैं। फिल्मीकरोना नाम के यूजर ने कहा, “ये इन्हें इस तरह क्यों घसीट रहा है… वे प्रेग्नेंट हैं। बेवकूफाना रवैया।”

एक यूजर ने कहा, “अपनी प्रेग्नेंट बीवी के साथ ये कोई व्यवहार नहीं है करने वाला।” वहीं एक मुस्लिम यूजर ने इस बर्ताव का बचाव करते हुए कहा, “वो सिर्फ सना को कैमरों से बचा रहा था क्योंकि हमारी शरीयत में कहा जाता है कि शैतानी नजरें गर्भवती औरतों पर असर डालती हैं।”

बता दें कि वायरल भयानी की वीडियो पर सना खान का भी कमेंट आया है। सना ने लिखा, “ये वीडियो अभी मेरी नोटिस में आया। मुझे मालूम है कि मेरे भाई-बहनों को इस तरह देखना अजीब लग रहा होगा। दरअसल, हम लोग बाहर आने के बाद कार और ड्राइवर से संपर्क खो चुके थे। मुझे खड़े खड़े पसीने आ रहे थे। नैं असहज थीष। इसिलए वो मुझे अंदर ले जा रहे थे ताकि कुछ पानी पी पाऊँ और हवा लग सके।”

सना ने सफाई देते हुए कहा, “मैंने ही उन्हें कहा था कि जल्दी से अंदर चलें। हम लोग पैपराजियों को तंग नहीं करना चाहते थे जो हमारी फोटों खींच रहे थे। इसलिए गुजारिश है कि वीडियो देखकर कुछ और न सोचें। फिक्र दिखाने के लिए एक बार फिर से धन्यवाद।”

बता दें कि सना और मुफ्ती अनस का यह वीडियो बाबा सिद्दीकी की इफ्तार पार्टी का है। दोनों लोग इस पार्टी में शामिल होने गए थे। हालाँकि सना की वहाँ तबीयत बिगड़ गई और अनस को हड़बड़ी में उन्हें बैठाने के लिए अलग ले जाना पड़ा। वीडियो में पीछे फोटोग्राफर्स की भीड़ देखी जा सकती है।

‘गौमूत्र पियो थोड़ी अक्ल आएगी’ : उद्धव ठाकरे ने फिर उड़ाया हिंदुत्व का मजाक, RSS-BJP को कहा- ‘वे गौमूत्रधारी, हम राष्ट्रवादी’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने अपने हिंदुत्व की परिभाषा को भाजपा के हिंदुत्व की परिभाषा से अलग बताया है। उन्होंने कहा है कि उनका हिंदुत्व का अर्थ ‘राष्ट्रवाद’ से है जबकि भाजपा के हिंदुत्व का अर्थ ‘गौमूत्र’ से संबंधी है। उनका यह बयान महा विकास अघाड़ी द्वारा नागपुर में किए गए एकता और शक्ति प्रदर्शन के दौरान दिया गया।

उद्धव ठाकरे ने अपने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की बात पर सफाई देते समय गौमूत्र का मजाक उड़ाया। वह बोले, “हर बार मुझपर आरोप लगाते हैं कि मैं कॉन्ग्रेस के साथ चला गया और हिंदुत्व को छोड़ दिया, क्या कॉन्ग्रेस में हिंदू नहीं हैं? उनका (आरएसएस-भाजपा) हिंदुत्व ‘गौमूत्रधारी हिंदुत्व’ है। उन्होंने संभाजीनगर में उस जगह पर गौमूत्र छिड़का, जहाँ हमने अपनी जनसभा की थी। उन लोगों को खुद भी थोड़ा गौमूत्र पीना चाहिए ताकि उन्हें थोड़ी अक्ल आए। हमारा हिंदुत्व राष्ट्रवाद के बारे में हैं।”

उद्धव बोले, “एक तरफ बीजेपी हनुमान चालीसा पढ़ती है और दूसरी तरफ मस्जिदों में जाकर कव्वाली सुनते हैं। क्या यह उनका हिंदुत्व है। वे यूपी में जाकर हिंदुत्व की बात करते हैं? क्या ये उनका हिंदुत्व है? हमारा हिंदुत्व देश के लिए जीवन बलिदान और उनका हिंदुत्व केवल दिखावा है।”

ऐसा पहली बार नहीं है कि उद्धव ठाकरे ने गौमूत्र का मजाक बनाया हो। 5 मार्च 2023 को दिए बयान में भी उन्होंने कहा था कि गौमूत्र छिड़कने से देश को आजादी नहीं मिली। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा था, “क्या हमारे देश को गौमूत्र छिड़कने से आजादी मिली थी? क्या ऐसा हुआ था कि गौमूत्र छिड़का गया और हमें आजादी मिली? ऐसा नहीं था, स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया था। तब कहीं जाकर हमें आजादी मिली थी।”

गौरतलब है कि हाल में उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने पर भी निशाना साधा था। ठाकरे ने कहा था कि राज्य में किसान ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से पीड़ित थे लेकिन राज्य के सीएम अयोध्या दर्शन के लिए गए थे। वहीं भाजपा को लेकर कहा था कि उन्होंने लोकतंत्र के मूल्यों की हत्या कर दी है। वह सिर्फ अडानी समूह की मदद कर रहे हैं।

‘PM मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता’: प्रधानमंत्री की मुरीद हुईं अमेरिका की वाणिज्य सचिव, कहा- ‘भारतीयों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बता नहीं सकती’

अमेरिका की वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो (Gina Raimondo) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तारीफ की है। रायमोंडो ने पीएम मोदी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता बताते हुए कहा है भारत दौरे पर उन्हें पीएम मोदी के साथ डेढ़ घंटे का समय बिताने का मिला। भारतीयों के लिए पीएम मोदी बहुत अधिक प्रतिबद्ध हैं।

दरअसल, जीना रायमोंडो गत माह 7-10 मार्च तक भारत दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की थी। इस बीच शनिवार (15 अप्रैल, 2023) को अमेरिका स्थित इंडिया हाउस में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी के साथ डेढ़ घंटे से अधिक समय बिताने का मौका मिला। उनसे मुलाकात अविश्वसनीय थी। वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।”

रायमोंडो ने आगे कहा है, “मोदी अविश्वसनीय और दूरदर्शी हैं। भारत के लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के स्तर को बयान नहीं किया जा सकता। वह भारत के लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और देश को वैश्विक शक्ति के रूप में आगे बढ़ाने में उनकी इच्छा शक्ति वास्तविक है। इसको लेकर वह लगातार काम भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात का यह यह सबसे अच्छा हिस्सा था।”

उन्होंने आगे कहा है, “जो कोई भी पीएम मोदी को जानता है उसे यह पता होगा कि वह एक तकनीकी व्यक्ति हैं और टेक्नोलॉजी को लेकर विस्तार पूर्वक बातचीत करते है। इसलिए, जब मैंने उनसे शुक्रवार की रात 7:30 बजे उनके घर पर मुलाकात की, तब वह रेडियो एक्सेस नेटवर्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बात कर रहे थे। यह बेहद हैरान करने वाला था।”

अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने आगे कहा है, “मैंने उनसे कहा है कि टेक्नोलॉजी के इस दौर में भारत और अमेरिका को मिलकर इस दुनिया का नेतृत्व करने की आवश्यकता है। पूरे सप्ताह यात्रा करने के बाद, पीएम मोदी ने मुझसे कहा ठीक है। AI का मतलब सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं बल्कि अमेरिका-इंडिया टेक्नोलॉजी सिस्टम है।”

जब अतीक अहमद ने UPA सरकार को गिरने से बचाने में की थी मदद: जेल से किया गया था रिहा, किताब में 2008 के वाकये को लेकर खुलासा

माफिया अतीक अहमद लगातार 5 बार इलाहाबाद पश्चिम से विधायक रहा है। 1989, 1991, 1993, 1996 और 2002 – वो 5 बार जीत कर लगातार 15 वर्षों तक विधायक बना रहा। पहले 3 बार उसने बतौर निर्दलीय और फिर समाजवादी पार्टी और उसके बाद ‘अपना दल’ के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2004 के लोकसभा चुनाव में उसने फूलपुर से बतौर सपा प्रत्याशी जीत दर्ज की। इसी साल केंद्र में UPA की सरकार भी बनी।

ये तो आपको पता ही होगा कि कॉन्ग्रेस UPA गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी थी और डॉक्टर मनमोहन सिंह को भले ही प्रधानमंत्री बनाया गया था, सत्ता की असली बागडोर सोनिया गाँधी के हाथ में थी। अब अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ मारा जा चुका है। उसके बेटे असद का एनकाउंटर हो चुका है। लेकिन, कभी प्रयागराज में खौफ का दूसरा नाम रहा अतीक अहमद जब सांसद बन बैठा था तब उसने UPA सरकार की मदद की थी।

2004 वो साल था, जब वामपंथी दलों ने 43 सीटें जीत कर लोकसभा में अपनी अच्छी-खासी धमक बनाई थी। लेकिन, 2008 में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते से खफा होकर उन्होंने यूपीए से समर्थन वापस ले लिया था। ऐसे समय में मुलायम सिंह यादव की सपा ने 36 सांसदों के साथ UPA की सरकार बचाई थी। राजेश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक ‘BAAHUBALIS OF INDIAN POLITICS: From Bullet to Ballot’ में इस संबंध में एक खुलासा है।

इसमें बताया गया है कि अतीक अहमद समेत 6 अपराधी सांसदों को तब 48 घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया था, ताकि वो वोट देकर संप्रग की सरकार बना सकें। इनमें अतीक अहमद का नाम भी शामिल था अतीक अहमद ने जेल से निकल कर UPA सरकार के पक्ष में संसद में वोट डाला था। उस समय UPA के 228 सदस्य थे और उसे 44 सांसदों की ज़रूरत थी। सपा के अलावा रालोद और जेडीएस ने भी तब कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था।

अतीक अहमद को 8 तो भाई अशरफ को लगीं 5 गोलियाँ… जिस प्रयागराज में पैदा किया था खौफ, वहीं की मिट्टी में दफ़न हुए दोनों: नहीं पहुँची बीवी शाइस्ता

लंबे समय तक प्रयागराज में खौफ का दूसरा नाम रहे अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को प्रयागराज के कब्रिस्तान में ही दफना दिया गया। इससे पहले, अतीक और अशरफ की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई थी। इस रिपोर्ट के अनुसार अतीक को 8 गोलियाँ और अशरफ को 5 गोलियाँ लगी थीं। दोनों की हत्या शनिवार (15 अप्रैल, 2023) को हुई।

अतीक और अशरफ को प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान में दफनाया गया। यहीं उसके बेटे असद को भी दफनाया गया था। कब्रिस्तान के अंदर अतीक और अशरफ के करीबी रिश्तेदारों को ही जाने दिया गया था। इसमें अशरफ की दोनों बेटियाँ और अतीक के दोनों बेटों का नाम शामिल है। उमेश पाल हत्या कांड के बाद से अतीक के दोनों बेटों को राजरूपपुर स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया है। कहा जा रहा था कि इस दौरान अतीक की फरार पत्नी शाहिस्ता सरेंडर कर सकती है। लेकिन, वह नहीं पहुँची।

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में काल्विन हॉस्पिटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के लिए 3 हमलावर मीडियाकर्मी बनकर आए थे। मीडिया से बात करते समय हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया था। फिलहाल तीनों हमलावर पुलिस की गिरफ्त में हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं, रविवार (16 अप्रैल, 2023) को अतीक और अशरफ का पोस्टमॉर्टम हुआ। इस पूरे पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी कराई गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, अतीक और अशरफ पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई थीं। अतीक के शरीर में कुल 8 गोलियाँ लगीं, वहीं अशरफ को 5 गोलियाँ मारी गईं। अतीक को गोलियाँ उसके सिर, गर्दन, छाती और कमर में मारी गई थी। वहीं, अशरफ के गले, पीठ, कलाई, पेट और कमर में गोलियाँ लगीं। 3 गोलियाँ अशरफ के शरीर में मिलीं। वहीं, 2 गोलियाँ उसके शरीर को चीरते हुए पार कर गईं। पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए थे।

27 मौतों से हाहाकार, इफ्तार के मजे लेती ‘सरकार’… दारुबंदी वाले बिहार में ज़हरीली शराब के कहर से 6 अंधे भी हो गए, CM नीतीश बोले – गलत काम मत करो

बिहार के पूर्वी चम्पारण में ज़हरीली शराब से हुई मौतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर से इफ्तार पार्टी में व्यंजनों का आनंद लेते दिखे। सीएम नीतीश कुमार पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी के आवास पर इफ्तार पार्टी में शामिल हुए। माँझी की पार्टी HAM भी महागठबंधन की सरकार का हिस्सा है। साथ ही बिहार के कई बड़े नेता भी इस इफ्तार पार्टी में इस्लामी टोपी और तौलिए के साथ भोजन करते दिखे।

लेकिन, बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में सब ठीक नहीं है। ज़हरीली शराब से अब तक 27 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 6 की आँखों की रोशनी चली गई है। जिले के 5 अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई घटनाओं में 2 दिन के भीतर इतनी मौतें हुई हैं। उधर सीएम नीतीश कुमार ने ये कह कर इतिश्री कर ली कि किसी को इस तरह का गलत काम नहीं किया जाता, इसके लिए समझाया जाता है। बिहार पुलिस का कहना है कि 400 जगहों पर छापेमारी कर के 60 शराब तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

हालाँकि, पुलिस-प्रशासन ज़हरीली शराब से 14 मौतों की बात ही स्वीकार कर रहा है। इस मामले में अब तक 2 ASI और 9 चौकीदारों को निलंबित किया गया है। जिले में अब तक 5 FIR दर्ज की गई। तुरकौलिया और रघुनाथपुर में 13, हरसिद्धि में 6, पहाड़पुर में 5 और सुगौली में 3 लोगों की जानें गई हैं। आशंका है कि मृतकों का आँकड़ा और बढ़ सकता है। विपक्षी भाजपा भी इस घटना पर राजद-जदयू गठबंधन सरकार पर हमलावर है।

पश्चिम चम्पारण से सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने मिस्र के फराओ से नीतीश कुमार की तुलना करते हुए कहा कि तब शासक की गलती से 2000 लोग मारे गए थे, आज बिहार में लोग अचानक मर रहे और कारण का पता नहीं चल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम नीतीश ने ’पुलिस माफिया गठजोड़ाइटिस’ नामक नई बीमारी का अविष्कार किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने हाईकोर्ट के सिटिंग जज से इस प्रकरण की जाँच कराए जाने की माँग की है।

‘अब हमें शांति मिली, जो हुआ सही हुआ’: अतीक अहमद और अशरफ की हत्या पर बोले दिवंगत संदीप निषाद के परिजन, माँ ने कहा – योगी जी को प्रणाम करती हूँ, पैर छूती हूँ

उमेश पाल हत्याकांड में अतीक अहमद के गुर्गों ने न केवल उमेश पाल बल्कि उनके दो गनर की भी जान ले ली थी। इनमें से एक गनर संदीप निषाद थे। अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या की जानकारी मिलने पर संदीप निषाद के परिवार वालों का कहना है कि असद, गुलाम, अतीक और अशरफ की मौत से उन्हें शांति मिली है।

‘आज तक’ से हुई बातचीत में संदीप निषाद के पिता संतराम निषाद का कहना है, “असद और गुलाम का एनकाउंटर हुआ। इसके बाद अतीक अहमद और अशरफ की हत्या हुई। यह बात सुनकर उन्हें शांति मिली है। उनके पास कुछ नहीं है। कमाने वाला सिर्फ बेटा था वह भी बलिदान हो गया। 6-7 परिवारों के बीच में कमाने वाला कोई नहीं है। इससे बड़ा पहाड़ कौन सा हो सकता था। लड़कों के बच्चे भी हैं उनकी भी पढ़ाई बंद हो गई है।” बलिदान हुए संदीप निषाद के पिता ने अपने परिवार के लिए नौकरी और रहने के लिए घर की भी माँग की है।

वहीं, संदीप निषाद की माँ समुंदरी का कहना है कि अतीक और अशरफ की हत्या से उन्हें तसल्ली मिली है। संदीप घर में इकलौते कमाने वाले हैं। संदीप निषाद की पारिवारिक सदस्य रमावती ने कहा है, “मुख्यमंत्री योगी का धन्यवाद। आज तक कोई भी ऐसा अधिकारी मंत्री नहीं मिला जो कहे और करके दिखाए। मैं योगी जी को प्रणाम करती हूँ। पैर छूती हूँ। मैं चाहती हूँ कि योगी जी संदीप निषाद के परिवार को गोद ले लें। इस परिवार में वही कमाने वाला था। अब कोई कमाने वाला नहीं है। कल जो घटना हुई शांति मिली।”

बलिदानी संदीप निषाद के भाई दीपचन्द्र ने कहा है, “अतीक के साथ जो हुआ है सही हुआ है। योगी जी से यही कहेंगे जो गलत किया है उसके साथ ऐसा ही होना चाहिए। योगी से अनुरोध है घर में नौकरी और यहाँ सड़क बनवा दें।”

संदीप निषाद के पारिवारिक सदस्य बृजेश ने कहा है कि जो हो रहा है अच्छा हो रहा है। जैसे के साथ तैसा होना चाहिए। अतीक और अशरफ की हत्या हुई है, अच्छा हुआ है। जो जैसे करेगा उसके साथ वैसा ही होगा। संदीप निषाद के चचेरे भाई विजय निषाद का कहना है, “इस घटना को सुनकर सब लोगों को तसल्ली मिली है। हम लोग भी यही चाहते थे कि या तो उसका एनकाउंटर हो जाए या फिर फाँसी दे दी जाए। जो जैसा किया था दूसरे के साथ उसके साथ भी वैसा ही हुआ। आज नहीं तो कल, जो गलत करेगा उसके साथ ऐसा ही होगा।”

संदीप के भाई वीरेंद्र निषाद ने कहा है, “अतीक अहमद बहुत लोगों को परेशान किया हुआ था। बहुत से परिवारों का उसने दिल दुखाया है। हमारा भाई भी मारा गया। हम लोगों के साथ भी बहुत दर्दनाक घटना घटी है। हमारी आत्मा भी रो रही है। जिसका दिल टूटता है उसे पता चलता है कि दर्द क्या होता है। अब उसके परिवार को भी पता चलेगा हम लोग कैसे रह रहे हैं। जैसी करनी वैसी भरनी।”

घर जाकर माफ़ी माँगी, फिर भी मरवा दिया… अतीक अहमद और अशरफ ने कारोबारी अशोक साहू को दी थी गाड़ी ओवरटेक करने की ‘सज़ा’, पूर्व DSP ने बताया वाकया

माफिया अतीक अहमद की 15 अप्रैल, 2023 (शनिवार) को प्रयागराज में हत्या कर दी गई। यह हत्या पुलिस कस्टडी में तब हुई जब उसे मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। इस हत्या के साथ अतीक का 4 दशक से अधिक पुराना आपराधिक साम्राज्य ध्वस्त हो गया। इस साम्राज्य में अतीक, उसका भाई अशरफ, उसकी बीवी शाइस्ता और उसके बेटे तक शामिल हुआ करते थे। इस नेटवर्क ने तमाम लोगों की जमीनें कब्जाईं और कई हत्याएँ करवाईं।

इन सभी के अलावा अपहरण जैसे अपराध इस गैंग के पेशे में रूटीन तौर पर शामिल थे। उन्हीं तमाम अपराधों में से एक था अशोक साहू हत्याकांड।

अशोक साहू की हत्या साल 1996 में प्रयागराज के मध्य सिविल लाइंस इलाके में हुई थी। ऑपइंडिया ने इस केस के विवेचक रहे तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय से बात की। उन्होंने बताया कि कैसे अतीक का न सिर्फ आपराधिक दुनिया में अच्छा दखल था बल्कि उसके भाई को बचाने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर तक सक्रिय भागीदार बने थे।

अशरफ को नहीं पहचान पाया था अशोक

ऑपइंडिया से बात करते हुए ex DSP धीरेन्द्र राय ने बताया कि तब वो प्रयागराज में इंस्पेक्टर पद पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि अशरफ और अशोक के बीच सिविल लाइन्स इलाके में झगड़े की शुरुआत गाड़ी की ओवरटेकिंग को ले कर शुरू हुई थी। राय के मुताबिक, तब अशोक अशरफ को नहीं पहचान पाया था, लेकिन बाद में जानकारी होने पर वो काफी डर गया था।

धीरेन्द्र राय ने हमें आगे बताया कि डर के मारे अशोक साहू अतीक के घर गया था। वहाँ उसने अतीक से माफ़ी माँगी। अतीक अहमद ने उस समय कहा कि गलती तो किए हो, लेकिन जाओ और आगे से सही रहना। इस बात पर अशोक आश्वस्त हो कर वहाँ से चला गया था।

माफ़ी माँगने पर भी मार डाला गया अशोक

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय के अनुसार, माफ़ी माँगने के बाद भी अतीक अहमद ने 2 दिनों बाद प्रयागराज के सिविल लाइन्स में अशोक की हत्या करवा दी। यह हत्या गोली मार कर हुई थी। हत्या के बाद पुलिस ने अतीक, उसके भाई अशरफ और उसके अब्बा फिरोज को नामजद किया।

अशरफ का मददगार इंस्पेक्टर मंसूर अहमद काजी

रिटयर्ड DSP धीरेन्द्र राय के अनुसार, तब उत्तर प्रदेश के जिला चंदौली में पोस्टेड इंस्पेक्टर मंसूर अहमद काजी ने अशरफ की गैर-कानूनी ढंग से मदद की। इंस्पेक्टर काजी ने अशरफ की घटना के समय अपने थाने में अवैध तमंचे के साथ गिरफ्तारी दिखा दी थी। हालाँकि, तब इंस्पेक्टर रहे धीरेन्द्र राय ने इंस्पेक्टर काजी और अशरफ को भी अपनी जाँच रिपोर्ट में साजिशकर्ता के तौर पर दिखाया था।

अभी तक केस ही नहीं शुरू हुआ

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय ने हमें बताया कि साल 1996 के इस मामले का ट्रायल भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया था। उन्होंने हमें बताया कि उनकी खुद की खोजबीन में मामले की चार्जशीट MP/MLA कोर्ट में दबी पड़ी मिली। हालाँकि, उन्हें यह भी नहीं पता कि इस मामले में बाद में अशरफ और इंस्पेक्टर काजी का क्या हुआ था। खुद से तत्कालीन इंस्पेक्टर धीरेन्द्र राय ने अतीक और उसके अब्बा फ़िरोज़ अहमद की गिरफ्तारी साल 1996 में की थी।

अशोक साहू का परिवार गुमनाम

पूर्व DSP धीरेन्द्र राय हमें अशोक साहू के परिवार के बारे में अधिक जानकारी नहीं दे पाए। उन्होंने बताया कि बाद में उनका ट्रांसफर लखनऊ हो गया और साल 2015 में उन्होंने राजधानी लखनऊ से ही बतौर डिप्टी SP रिटायरमेंट लिया था।

तमिलनाडु के 45 इलाकों में RSS की भव्य रैली, कई महीनों से अनुमति नहीं दे रही थी DMK सरकार: सुप्रीम कोर्ट में जीत के बाद बड़ा शक्ति प्रदर्शन

तमिलनाडु के 45 इलाकों में ‘राष्ट्रोय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ ने रविवार (16 अप्रैल, 2023) को भव्य रोडशो आयोजित किया। बता दें कि इससे पहले राज्य में मुख्यमंत्री MK स्टालिन की सरकार ने RSS के आयोजन पर रोक लगा दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोडशो का रास्ता साफ हुआ। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रोडशो के लिए रूट पहले से तय था। स्वयंसेवकों के हाथों में ड्रम और लाठियाँ भी थी, जिनका परेड में सामान्यतः इस्तेमाल किया जाता रहा है।

चेन्नई, वेल्लोर, होसुर, सालेम, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, अरानी, कोयम्बटूर, मेट्टूपलायम, पल्लादम, करूर, टेंकसी, कन्याकुमारी, तिरूचुपल्ली और मदुरै – ये वो प्रमुख इलाके हैं, जहाँ RSS के मार्च का आयोजन किया गया। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के कोरत्तूर इलाके में भी रैली आयोजित हुई, जिसमें केंद्रीय मत्स्य पालन एवं पशुपालन राज्यमंत्री डीएल मुरुगन भी शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया।

बता दें कि रैली के आयोजन के लिए RSS को तमिलनाडु की DMK सरकार से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। पहले मद्रास हाईकोर्ट ने और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के खिलाफ और RSS के पक्ष में फैसला सुनाया। राज्य सरकार का तर्क था कि RSS की रैलियों से अस्थिरता फैलेगी और इनका प्रबंधन मुश्किल हो जाएगा। मद्रास हाईकोर्ट ने बंद परिसरों में रैली के आयोजन का सुझाव दिया, इसके बावजूद एमके स्टालिन की सरकार अड़ी रही।

हालाँकि, RSS को न्यायालय ने निर्देश दिया था कि इसकी रैलियों में बाँस के डंडों का इस्तेमाल न किया जाए। अक्टूबर 2022 से ही संगठन इसके लिए अनुरोध कर रहा था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी जा रही थी। तमिलनाडु में भाजपा अब तक मुख्य विपक्षी पार्टी भी नहीं बन पाई है, ऐसे में यहाँ अपने चुनावी प्रदर्शन में सुधार के लिए पार्टी लगातार लगी हुई है। प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के नेतृत्व में पार्टी कैडर सक्रिय है और लगातार जमीन पर काम कर रहा है।

‘अखिलेश यादव को जूते से मारेंगे, ये सपा की चाल’: अतीक के बेटे के जनाजे में शामिल महिलाओं का फूटा गुस्सा, बोलीं – योगी देते हैं राशन, वो गरीबों के मददगार

अतीक अहमद और उसके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले अतीक का बेटा असद भी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था। उसे अब दफनाया जा चुका है। लेकिन इससे पहले उसके जनाजे में आईं महिलाओं का कहना है कि योगी ने जो किया है वह सही है। उन्होंने कहा कि अगर अगर अखिलेश यादव और मायावती वोट माँगने आएँगीं तो जूते से मारकर भगा दिया जाएगा।

दरअसल, ‘द राजधर्म’ नामक यूट्यूब चैनल ने असद अहमद के जनाजे में आई महिलाओं से बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान शबनम नामक महिला ने कहा है कि अखिलेश यादव की चाल के चलते यह सब हुआ है। अखिलेश यादव ने मिट्टी में मिलाने के लिए उकसाया था। अखिलेश यादव मुसलिमों के वोट के लिए सब बोल रहे हैं। मुस्लिम बेवकूफ नहीं है कि उनको वोट देगा। अखिलेश यादव के कारण ही असद मारा गया है। कोई और कारण नहीं है। शबनम ने आगे है कि वह बाबाजी (योगी आदित्यनाथ) को वोट देंगी। लेकिन अखिलेश यादव और बहन जी (मायावती) को वोट नहीं देंगी। उन्हें जूते से मारकर भगाएँगी।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा है कि वह गोरखपुर मठ में गए थे, तब योगी कुछ भी नहीं थे। योगी मुस्लिमों का पहले न्याय करते हैं। अखिलेश यादव ने सीएम योगी को ताव दिला दिया। हो सकता है कि इस सबके पीछे अखिलेश यादव का हाथ हो। उन्हें लगता है कि इसमें सपा की कोई चाल है। इसकी जाँच होनी चाहिए। जाँच में दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। रजिया नामक महिला ने कहा है कि योगी बहुत अच्छे हैं, वह राशन देते हैं। गरीबों की मदद करते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा देते हैं। सब करते हैं। वह कहीं से गलत नहीं है, उन्हें कहीं से भी गलत साबित नहीं किया जा सकता।

एक अन्य महिला ने एनकाउंटर को लेकर कहा है कि अखिलेश यादव ने कहीं न कहीं इस सब में एक खेल खेला है। इन लोगों को इस्तेमाल किया है। इसके बाद यह सब कर दिया। अखिलेश अगर इतने ही अच्छे होते तो वह योगी जी को भड़काते ही क्यों?