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बिहार के एक गाँव में अखंड रामधुन के लिए लगाया जा रहा था झंडा, विरोध में मारपीट: रिपोर्ट में दावा, जमुई पुलिस ने बताया- जमीन का विवाद

बिहार के जमुई जिले में धार्मिक झंडा लगाने को लेकर 2 पक्षों में विवाद की खबर है। दोनों ही पक्ष अलग-अलग समुदाय से बताए जा रहे हैं। झगड़े में 2 लोगों के घायल होने की सूचना है। पुलिस इस मामले को जमीनी विवाद बता रही है। अब तक कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी की सूचना है। घटना सोमवार (17 अप्रैल 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जमुई के थाना क्षेत्र सिमुलतला का है। बताया जा रहा है कि यहाँ के गाँव ढोढरी गांव में मंगलवार (18 अप्रैल) को अखंड रामधुन का आयोजन था। इसकी तैयारियों के लिए गाँव भर में झंडा लगाया जा रहा था। आरोप है कि इस दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने झंडे लगाने पर आपत्ति दर्ज की। दावा किया जा रहा है कि ये लोग अपने घरों के आगे झंडा लगाने से नाराज थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि इसी बात को ले कर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हुई जो बाद में मारपीट और तलवारबाजी तक पहुँच गई।

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वायरल वीडियो में दो पक्ष झगड़ रहे हैं, जिसमें महिलाएँ भी शामिल दिख रहीं है। इस दौरान अँधेरा है और पीछे से किसी की आवाज आ रही है। इस आवाज में कोई व्यक्ति हिन्दुओं को तलवार से मारे जाने का भी जिक्र कर रहा है। बजरंग दल के सदस्य राव सुधीर ने 41 सेकेंड के इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रशासन से कार्रवाई और दोषियों पर एक्शन लेने की माँग की है।

पुलिस ने बताया जमीनी विवाद

बिहार पुलिस ने इस पूरे मामले को जमीनी विवाद बताया है। पुलिस के मुताबिक साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी दोनों पक्षों के लोगों की हुई है। मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को सामान्य बताते हुए पुलिस ने आम जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की भी अपील की है।

वायरल किए गए वीडियो को भी पुलिस ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने की नीयत से बना बताया है। थाना प्रभारी विद्यानंद कुमार ने भी घटना को मामूली बातों पर शुरू हुआ विवाद बताया है।

मदरसे का दरवाजा खटखटाया, नाबालिग लड़कियों को उठाया, सुबह लहूलुहान फेंक गए: प्रयागराज का वो केस जब रात भर हुआ रेप

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल 2023 को 3 शूटरों ने माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी थी। मारे जाने के बाद इन्हें पीड़ित मुस्लिम बताकर कुछ लोग इनके जघन्य अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ज्यातादार चर्चित मामलों के पीड़ित भी मुस्लिम ही हैं। ऐसा ही एक मामला 2007 का है, जिसे मदरसा रेप कांड के नाम से जाना जाता है। 17 जनवरी को हुई गैंगरेप की इस वारदात ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। तब राज्य में मुलायम सिंह के नेतृत्व में सपा की सरकार थी।

इस घटना में बंदूकधारियों ने दो नाबालिग लड़कियों को मदरसे से उठाया था। उनके साथ रातभर रेप किया गया। अगली सुबह गैंगरेप पीड़िताओं को लहूलुहान मदरसे के गेट पर फेंक दिया गया। अतीक अहमद के भाई अशरफ पर भी रेप के आरोप लगे थे। उस वक्त अतीक खुद सांसद और अशरफ विधायक हुआ करता था।

क्या था मदरसा रेप कांड

यह मामला 17 जनवरी 2007 का था। प्रयागराज में अतीक अहमद के प्रभुत्व वाले इलाके करेली में एक मदरसा चला करता था। इस मदरसे का संचालक वाराणसी संकटमोचन मंदिर ब्लास्ट में फाँसी की सजा पाए आतंकी वलीउल्लाह का भाई था। देर रात इस मदरसे के दरवाजे पर दस्तक हुई और दबंगई से गेट खोलने के लिए कहा गया। अंदर 3 बंदूकधारी घुसे और सीधे वहाँ पहुँचे जहाँ लड़कियाँ सोती थीं। लड़कियों के नकाब हटवाए। यहाँ से 2 लड़कियाँ चुनी गईं और उन्हें उठाकर जंगल ले जाया गया।

आरोप है कि जंगल में 5 लोगों ने दोनों लड़कियों से रेप किया। सुबह लड़कियों को लहूलुहान हालत में मदरसे के गेट पर फ़ेंक दिया गया। तब पुलिस ने प्रयागराज में ही रिक्शा चलाने वाले और दर्जी का काम करने वाले इखलाख अहमद और नौशाद अहमद सहित कुल 5 लोगों की गिरफ्तारी दिखा दी थी। जमानत पाने के बाद पाँचों ने पुलिस पर खुद को बेवजह फँसाने का आरोप लगाया था। इस घटना में अशरफ और उसके साथियों के शामिल होने की बात कही जाती रही।

मुलायम सरकार में यह घटना हुई थी। उसके बाद मायावती की सरकार आई। मामले की सीबीसीआईडी जाँच भी हुई। लेकिन नतीजा सिफर रहा। अपने पहले कार्यकाल में दिसंबर 2021 में योगी सरकार ने इस मामले की फिर से जाँच करवाने के आदेश दिए थे। इस घटना से उठी नाराजगी के बाद अतीक और उसका परिवार दुबारा कभी चुनाव नहीं जीत पाया। स्थानीय मुस्लिमों में भी एक बड़ा धड़ा अतीक अहमद के खिलाफ हो गया था।

एक मीडिया रिपोर्ट में रिटायर्ड इंस्पेक्टर नारायण सिंह परिहार के हवाले से भी इस कांड के बारे में बताया गया है। उन्होंने बताया है कि 2007 में अतीक के भाई अशरफ ने मदरसे से लड़कियों को उठवाया और फिर उनके साथ घिनौनी हरकत की। मामला कोर्ट में गया। गवाही भी हुई। लेकिन बाद में गवाह पलट गए। रिटायर्ड इंस्पेक्टर के अनुसार अतीक अहमद और उसके गुर्गे पीड़िताओं के परिजनों को धमकी देते थे। इसके कारण बाद में गवाह पलट गए और केस नहीं बन पाया। उन्होंने यह भी बताया कि जाँच के दौरान उनको भी धमकियाँ दी गई थी।

‘तुमको मुसलमान कम पड़ गए’: हिंदुओं के साथ जूस पी रही थी लड़की, कट्टरपंथियों ने कैफे से लेकर थाने तक काटा बवाल; मारपीट-पत्थरबाजी

मध्य प्रदेश के खंडवा में इस्लामी कट्टरपंथियों के बवाल की वजह से सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी है। बवाल की शुरुआत एक टी कैफे में हिंदू युवकों के साथ मुस्लिम लड़की के जूस पीने को लेकर हुई। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने कैफे में पहुँचकर हंगामा किया। लड़की से बदसलूकी की। लड़कों को मारपीट कर अगवा कर लिया। बाद में लड़की पर हिंदू लड़कों के खिलाफ छेड़खानी का मामला दर्ज कराने का दबाव बनाया। थाने पर पत्थरबाजी की।

घटना रविवार (16 अप्रैल 2023) की है। मिली जानकारी के अनुसार अतुल और सत्यम के साथ एक मुस्लिम लड़की आनंदनगर क्षेत्र के टी कैफे में जूस पी रही थी। इस दौरान कुछ मुस्लिम लड़के वहाँ पहुँचकर विवाद करने लगे। लड़की और लड़कों के साथ मारपीट की। फिर लड़कों को उठाकर खानशाहवली कॉलोनी में दरगाह के पास ले गए। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने लड़कों को छुड़ाया। इसके बाद देर रात मुस्लिमों ने मोघट थाने का घेराव किया। वार्ड पार्षद अशफाक सिगड़ लड़की को लेकर पहुँचा और हिंदू लड़कों पर केस दर्ज करने का दबाव बनाने लगा। भीड़ ने पत्थरबाजी और नारेबाजी भी की।

पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इस संबंध में लड़की द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का अंश ट्विटर पर साझा किया है। इसमें कहा गया है, “16 अप्रैल की दोपहर सत्यम बवाने सर और अतुल भैया के साथ मैं आनंद नगर के टी कैफे गई थी। जूस पीते हुए उनसे बातचीत कर रही थी। तभी अजहर अली, मोहम्मद इरफान, शादाब और मोहसिन 3-4 अन्य लोगों के साथ आए। हमलोगों को खींचकर कैफे के बाहर ले गए और मारपीट करने लगे। उनलोगों ने मुझसे कहा कि तुम इनके साथ क्यों आई हो। क्या मुसलमान कम पड़ गए हैं। मुझे अश्लील गालियाँ दी। मारपीट की। शादाब ने मुझे जोर से थप्पड़ मारकर नीचे गिरा दिया। मुझसे कहा कि अब कभी आई तो जान से खत्म कर देंगे।”

पीड़िता की शिकायत पर थाना मोघट में केस दर्ज किया गया। 16 लोगों को आरोपित बनाया गया। इसके बाद पार्षद अशरफ और उमेद भीड़ के साथ थाने पहुँच गया। भीड़ थाने पर नारेबाजी करने लगी। इनलोगों ने पुलिस पर एक और केस लिखने तथा हिंदू युवकों पर कार्रवाई का दबाव बनाया। पुलिस ने जब भीड़ को खदेड़ा तो पत्थरबाजी शुरू हो गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।

थाने पर हंगामा करने वाली भीड़ को लीड कर रहे पार्षद अशरफ का आपराधिक रिकॉर्ड भी है। उस पर हत्या, हत्या के प्रयास, दलित उत्पीड़न, धमकी आदि देने के केस पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने ताजा मामले में भी उसे आरोपित बनाते हुए IPC की धारा 353, 332, 147, 148 और 149 के तहत केस दर्ज किया है। अशरफ उमेद को गिरफ्तार कर लिया गया है। कैफे में हिन्दू युवकों के साथ मारपीट करने वालों में मोहम्मद इरफ़ान और अजहर अली भी गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर बाकी आरोपितों की तलाश कर रही है।

जालौन में दलित लड़की के हत्यारे भी उसी जाति के, पुलिस एनकाउंटर के बाद अस्पताल में भर्ती है एक हत्यारा: उधर सोशल मीडिया पर जातिवादी चला रहे प्रोपेगंडा

उत्तर प्रदेश के जालौन में एक दलित लड़की की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर इसे जाति का रंग देते हुए कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में दलित सुरक्षित नहीं हैं। इस घटना का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें देखा जा सकता है कि बीच सड़क पर लड़की का शव पड़ा हुआ है। हत्यारे बाइक से आए थे। लड़की बीए की परीक्षा देकर लौट रही थी। बीच चौराहे पर सिर पर सटा कर गोली मारी गई। स्थानीय कोतवाली से 200 मीटर की दूरी पर पल्सर सवार युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया।

20 वर्षीय रोशनी अहिरवार ऐँधा गाँव की है। राम लखन पटेल महाविद्यालय में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा की हत्या सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को दोपहर 11:40 बजे हो गई। आसपास के लोग दौड़े, तब तक युवक भाग चुके थे। उसकी बहन शीलम भी इसी कॉलेज में फाइनल ईयर में पढ़ती थी और साथ आती-जाती थी, लेकिन छुट्टियों की वजह से वो इस बार साथ नहीं थी। परिजनों ने राज अहिरवार का नाम आरोपित के रूप में लिया है, कदौरा थाना क्षेत्र के जमरेही गाँव का रहने वाला है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार भी कर लिया है और उसके साथी की तलाश जारी है। इस हत्याकांड के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर ली थीं। घटनास्थल से छात्रा का मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड मिला। पुलिस कॉल डिटेल्स निकलवा रही है। एसपी ने बताया है कि पुलिस के पास पुख्ता सबूत हाथ लग गए हैं। हमलावर तमाचा छोड़ कर फरार हुए थे। यूपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 टीमें गठित की, ताकि हत्यारों की धर-पकड़ की जा सके।

अब सोशल मीडिया पर कैसे इस घटना को लेकर प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है, वो देखिए। एक लड़की की दुःखद हत्या हो गई और एजेण्डाबाज इसके सहारे अपनी राजनीति चमकाने में लग गए हैं। ‘दलित टाइम्स’ नामक प्रॉपगैंडा हैंडल ने लिखा, “यूपी में नहीं रुक रहे हैं दलितों पर अत्याचार। उत्तर प्रदेश के जालौन में बाइक सवार दो युवकों ने दिन दहाड़े एक दलित छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।” ये सब तब किया जा रहा है, जब हत्यारे भी ‘अहिरवार’ ही हैं, जो सरनेम मृतका और उसके परिवार का है।

‘दलित टाइम्स’ का एक लड़की की लाश पर प्रोपेगंडा

इसी तरह, ‘Molitics’ नामक मीडिया संस्थान ने भी इस घटना को जाति का रंग दिया। उसने लिखा, “यूपी के जालौन में 22 वर्षीय दलित बेटी रोशनी अहिरवार की कॉलेज से घर लौटते वक़्त बाइक सवार 2 बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी।” अगर उसने थोड़ी और जानकारी जुटाने की कोशिश की होती तो पता चलता कि रोशनी अहिरवार का हत्यारा राज अहिरवार है। इसे जातिवादी मानसिकता के सहारे दंगे भड़काने की कोशिश नहीं तो और क्या कहा जा सकता है?

‘Molitics’ नामक ट्विटर हैंडल ने भी इसे दिया जातिवादी रंग

कुछ अन्य मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया के एजेंडाबाजों ने भी कैसे इस घटना पर प्रोपेगंडा फैलाने की, वो देखिए नीचे आप देख सकते हैं। इन सभी में एक बात कॉमन थी कि तंज कसने के लिए इनमें से अधिकतर ने ‘रामराज्य’ शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही ‘उत्तर प्रदेश में जंगलराज’ होने का भी दावा किया। ये वही गिरोह है, जो अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर इन दोनों के महिमामंडन में जुटा हुआ है।

जालौन पुलिस ने भी इस संबंध में बयान जारी किया है। पुलिस ने बताया है कि राज और रोशनी एक वर्ष से भी अधिक समय से एक-दूसरे के संपर्क में थे और उनकी आपस में बातचीत भी सोशल मीडिया के माध्यम से होती थी। ये दोनों मिलते-जुलते भी थे, लेकिन 2 माह पूर्व विवाद होने के कारण लड़की ने राज से बातचीत बंद कर दी थी। राज ने कई बार प्रयास किया, लेकिन लड़की ने उससे बात नहीं की। इसके बाद राज ने अपने ममेरे भाई के साथ बाइक से इस हत्याकांड को अंजाम दिया।

राज अहिरवार ने घटनास्थल से कुछ दूरी पर गाड़ी की नंबर प्लेट फेंक दी थी। पुलिस उसे लेकर जब घटनास्थल पर उस नंबर प्लेट को रिकवर करने पहुँची तो उसने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीन कर गोली चलाया और भागने का प्रयास किया। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसके बाद वो घायल हुआ है। दोनों एक ही जाति के थे, ऐसे में दोनों के घर वाले भी पहले शादी के लिए तैयार थे। अब बताइए, इस घटना को लेकर ‘दलित सुरक्षित नहीं हैं’ वाला प्रोपेगंडा कहाँ तक उचित है?

पति-पत्नी ने सिर काट कर आग में डाल दिया, खुद से ही बनाया था हथियार: सुसाइड नोट में लिखा – किसी से कोई दिक्कत नहीं

गुजरात के राजकोट में एक पति-पत्नी ने काला जादू के चक्कर में अपना ही सिर काट कर आग में डाल दिया। उन्होंने गर्दन काटने के लिए हथियार भी खुद से ही बनाया था। उन्होंने एक हवन कुंड बना रखा था, जिसमें अपना-अपना सिर काट कर डाल दिया। विन्चिया क्षेत्र में 38 वर्षीय किसान और उसकी पत्नी ने रविवार (16 अप्रैल, 2023) को इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने शुरुआती जाँच में इसे काला जादू के रूप में देखा है।

मृतकों की पहचान हेमू मकवाना और हंसा मकवाना के रूप में हुई है। उनके ही बच्चों ने अपने माता-पिता का धड़ खेत में देखा। उनके बेटे की उम्र जहाँ 13 वर्ष है, वहीं बेटा 12 साल का है। दोनों बच्चे अपने मामा के यहाँ बगल के गाँव में गए थे लेकिन सुबह यहाँ आकर जो देखा उससे वो डर गए। राजकोट के सिविल हॉस्पिटल में दोनों के शवों का पोस्टमॉर्टम हुआ। दोनों ने अपना-अपना सिर कलम करने के लिए गिलोटिन (गड़ाँसे वाला यंत्र) भी खुद ही बनाया था।

उन्होंने गिलोटिन के ब्लेड से कुछ इस तरह से अपने गर्दन काटे कि उनके सिर गिर कर हवा कुंड में ही गिरें। उन्होंने इस घटना से एक दिन पहले अपने बच्चों को मामा के यहाँ भेज दिया था। इस आत्महत्या का कारण क्या है, ये अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। परिजनों के बयान पुलिस ने दर्ज किए। मोबाइल फोन के साथ एक नोट मिला, जिसमें किसान ने लिखा है कि उसके भाइयों या सालों ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया है।

हंसा की कजन जयंती जतापारा का कहना है कि मृतकों का कोई पारिवारिक झगड़ा नहीं था और न ही वो किसी वित्तीय समस्या से जूझ रहे थे। पुलिस किसी भी एंगल को नकार नहीं रही है। दोनों ने ब्लेड के नीचे सिर रख कर निचे से रस्सी में आग लगा दी थी। दोनों लेटे हुए थे। जैसे ही रस्सी जली, ब्लेड उनके गर्दन पर गिरा और उनके सिर हवन कुंड में। सुसाइड नोट में उन्होंने भाइयों से अपने बच्चों का ख्याल रखने को कहा है। साथ ही स्वेछा से आत्महत्या की बात लिखी है।

सेकुलर नेत्रों ने माफिया में भी देखा ‘पीड़ित मुस्लिम’, इसलिए जो विक्टिम कार्ड कभी था राजनीति में तुरुप का पत्ता अब जोकर बनकर रह गया

2012 में प्रयागराज में मुझे अतीक अहमद के घर जाने का अवसर मिला था। जनवरी-फरवरी में 55 दिन तक मैं उत्तर प्रदेश में था। मुलायम सिंह यादव ने अपने चिरंजीव अखिलेश यादव को सपा की राजनीतिक रियासत का उत्तराधिकारी बनाकर उतारा था। उत्तर प्रदेश मूल के अपने सीनियर शरद गुप्ता के नेतृत्व में मैं भी जातियों के जंगल में चुनाव यात्रा पर था। शरदजी लखनऊ के ही हैं और चुनावी कवरेज का मेरा रूट प्लान उन्होंने ही बनाया था। इस रूट पर इलाहाबाद आया तो एक राजनीतिक हस्ती के रूप में अतीक भी आ गए।

मेरी गाड़ी का ड्राइवर इम्तियाज झाँसी का था, जो मुझे उसके घर तक लेकर गया। मायावती ने मुख्यमंत्री रहते अतीक के घर का मुखमंडल बुरी तरह बिगाड़ दिया था। बुलडोजर नहीं चला था, लेकिन चेहरे पर खरोंचें चुनावी वातावरण तक ठीक नहीं की गई थीं। प्रांगण में अतीक के समर्थक और कार्यकर्ताओं की भीड़ थी। वे कहीं से किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं दिख रहे थे। वह किसी नेता का आवास कम और किसी अड्‌डे जैसा दिखाई दे रहा था।

मैंने उन्हीं में एक से पूछा था कि मुस्लिम समाज सलमान खुर्शीद या आरिफ मोहम्मद खान जैसे पढ़े-लिखे, सुसभ्य छवि वाले महानुभावों को अपना लीडर क्यों नहीं बनाता? मैंने यूपी के ही अतीक जैसे ही आपराधिक आभामंडल वाले मुख्तार अंसारी का भी जिक्र किया, जिनके सत्ता केंद्र मऊ से होकर आया था।

वह कार्यकर्ता कम और पुरानी फिल्मों में अजीत के आसपास बुरी नजर से घूरते रहने वाले शेट्‌टी जैसा अधिक लग रहा था। जवाब में उसने सलमान खुर्शीद को इन शब्दों में निरस्त किया था- उनका क्या दीन-ईमान है? अपने घर की बहन-बेटियों से रिश्ते के लिए उन्हें दीगर धर्मों में जाना पड़ा? मुझे नहीं पता कि वह किस आधार पर खुर्शीद के बारे में ऐसा कह रहा था। मगर पक्के दीन-ईमान वाला अतीक उसके लिए मजहबी शान का प्रतीक था और उसके आपराधिक प्रकरणों से उसे कोई आपत्ति नहीं थी। उसकी नजर में एफआईआर, पुलिस और कोर्ट तो राजनीतिक खेल का हिस्सा थे।

लौटते हुए इम्तियाज का प्रश्न था-‘सर, आप इन जैसों के यहाँ जाते ही क्यों हैं? सबको ज्ञात है कि अतीक किस प्रकार नेता बना और उसका रिकॉर्ड क्या है? क्या आप जैसे लोग भी अतीक जैसों को बड़ा नहीं बनाते?’

अतीक ने अपने स्वर्णिम समय में जिस व्यवस्था का खुलकर मजाक बनाया, उसी व्यवस्था ने उसका भी मजाक खुलकर ही बनाया। यह किसी ऑटोमेटिक मोड पर हिसाब के बराबर होने की कथा है, जिसमें योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा पर पहली आँच केवल इस कारण से है कि प्रहरियोंं के बीच तीन उचक्के आए और दो अपराधी भाइयों को मारकर हाथ ऊँचे करते हुए पुलिस के आश्रय में स्वयं सुरक्षित हो गए। लाभ-हानि का गणित पुलिस लगाए। उसे तो पुराने दो के बदले ऑन स्पॉट तीन नए मिल गए!

अनेक अवसरों पर अपनी गरिमा को पहले ही अच्छी तरह मिट्‌टी में मिला चुके टीवी मीडिया ने जीवित अतीक और अशरफ के उर्स का आयोजन किया, जो उसे कब्र में लिटाकर भी नहीं लौटा है। विद्रूपता के इस उत्सव में मनमोहन देसाई की मसाला मूवी के कव्वाली दृश्य की भाँति तीन नकली कव्वाल मीडिया के वेश में उचककर आए और मीडिया का मर्सिया रचकर फिल्म फेयर ले उड़े!

मैं 25 साल पत्रकारिता में रहा हूँ। मैं मानता हूँ कि मुँह उठाकर घटनाओं के पीछे भागने की इस विक्षिप्त अवस्था पर टीवी वालों को विचार करना चाहिए। यह पत्रकारिता नहीं है। मैं अपने कॅरिअर के मध्यांतर में ढाई वर्ष एक चैनल में भी रहा। वह काम मुझे रास नहीं आया। ग्लैमर और पैसे के बावजूद मैंने उसे तत्काल छोड़ने का निर्णय लिया था। नोएडा में बैठी इनपुट-आउटपुट की अर्द्धविक्षिप्त आत्माओं ने फील्ड में काम कर रहे रिपोर्टरों को कठपुतली बना दिया है, जो कैमरा-माइक की तगारी उठाकर हर दिन समाचारों की मनरेगा के श्रमिक बने हुए हैं। प्रेतों की तरह टूटे पड़े रहना समाचार कवरेज नहीं है। ऐसे समाचारों की किसे 24 घंटे तक आवश्यकता है?

अतीक के बात करने का अंदाज भी एक नेता का नहीं था। वह एक तांगा चलाने वाले का बेटा था और अपराध जगत में डर का साम्राज्य बनाकर सपा के सहारे राजनीतिक पथ पर अपनी शोभायात्राएँ धूमधाम से ले गया था। मुझे किसी ने बताया कि इलाहाबाद के किसी भी विषय में नेताजी सबसे कहा करते थे- ‘अतीक भाई से मिल लीजिए। उनसे ही बात कीजिए।’ वह एक समय इलाहाबाद का मुख्यमंत्री ही था। एक ऐसे व्यक्ति का सत्ता के शीर्ष पर पहुँचना, बहुत से ऐसे ही लोगों को आकर्षित करता है। यह प्रकोप चेन रिएक्शन जैसा बढ़ता है! सपा में इनके लिए सर्वाधिक अनुकूल मौसम और मिट्‌टी था। नेताजी पद्मविभूषण हो गए, अतीक-अशरफ समारोहपूर्वक सुपुर्दे-खाक!

वह सर्वश्रेष्ठ छटा हुआ था इसलिए संसद के लिए फूलपुर से चुना हुआ था और उसके पास सब के सब निचले स्तर के छटे हुए थे। पुलिस उसकी ऊपर की जेब में थी। उसने सरगना से सियासी सर्वेसर्वा बनने तक की सफल यात्रा की थी। मीडियावालों को कभी इलाहाबाद में उसके पीड़ितों की आवाजें सुनना और सुनाना चाहिए, जिनकी सुनने वाला कभी कोई नहीं था! तब अतीक के ही सिक्के चलते थे, क्योंकि लखनऊ में टकसालें चलाने वाले आका हुजूर उसके ही थे।

जो धूमकेतु की तरह आते हैं, उनकी चमक एक क्षण के लिए आकाश में सबको लुभाती है लेकिन वे शीघ्र ही सदा के लिए अंधकार में खो भी जाते हैं। केवल समय की बात है कि कौन कब डूबता है!

कानपुर के विकास दुबे का एनकाउंटर जब हुआ तब किसी हिंदू को उसमें हिंदू नहीं दिखा, केवल दो कौड़ी का एक अपराधी दिखा। किसी ब्राह्मण को उसमें ब्राह्मण कहीं से नहीं दिखा, केवल एक घृणित अपराधी दिखा, जो धरती पर बोझ था? अतीक के सुपुत्र असद के एनकाउंटर पर सेक्युलर सजल नेत्रों को एक पीड़ित मुसलमान दिखा। अखिलेश को भी, औवेसी को भी। यह मानसिकता का अंतर है। यह घिसपिट चुका विक्टिम कार्ड है, जो राजनीति के बावन पत्तों में कभी तुरुप का था, अब केवल एक जोकर रह गया है। किंतु जोकरों की जमातों को उसे जीवनपर्यंत चलाते रहने का सेक्युलर अभिशाप है!

असद के एनकाउंटर पर उसके अंकल अशरफ का एक सत्य वचन सुनाई दिया- ‘अल्लाह की चीज थी। अल्लाह ने वापस ले ली!’ पूरी धरती पर उथलपुथल से भरी अपनी हरियाती दुनिया के धमाकेदार हिसाब में सात आकाशों के ऊपर अत्यंत व्यस्त अल्लाह को भी अपनी गलती का अनुभव हुआ। गलत चीज दे दी थी। वापस ले ली। चार दिन बाद उसने अतीक और अशरफ को भी गलत माल की तरह विनम्रतापूर्वक धरती से वापस ले लिया!

किसी के जीवन का आरंभ कहीं से भी हो सकता है। किंतु समय रहते अपनी भूलों को सुधारकर जीवन में अच्छे मार्गों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा होनी चाहिए। भारतीय परंपरा में एक रत्नाकर का उदाहरण काफी है, जो अपने जीवन के एक भाग में लूटमार करके अपनी आजीविका चलाता है, किंतु समय रहते उसकी चेतना झंकृत होती है और संसार में वह महर्षि बाल्मीकि के रूप में अमर हो जाता है! यह अवसर हरेक के लिए संभव है। उपलब्ध है। अल्लाह ने अतीक को धन और साधन संपन्न बनाकर एक अवसर दिया था, जो उसने गँवा दिया!

अपराधों की दलदल से निकलकर राजनीति में आने के बाद अतीक अपनी अकूत शक्ति से किसी और का न सही, अपने समुदाय का ही कुछ भला कर सकता था। उसकी सर्वाधिक आवश्यकता उन्हें ही थी। वह एक उज्जवल प्रकाश पुंज बन सकता था। बंटवारे के बाद वोट बैंक बनाकर रखे गए अपने भ्रमित समाज को सही दिशा दिखाने में कोई समस्या नहीं थी। मगर सेक्युलर राजनीति में अपराधों से प्राप्त शक्ति का तात्कालिक लाभ वाला मिश्रण उसे रास आया। दबंग राजनीति में वह हिट भी हुआ। किसी भी कथा का अंतिम सार उसके पात्रों के चरित्र से ही निकलता है। अतीक की कथा का अंत ऐसा ही कुछ होना था!

अंत में, अल्लाह अगर ऐसी ताकत किसी को भी दे तो उसके सदुपयोग की संतुलित बुद्धि और प्रेरणा देने में भी कृपणता न दिखाए ताकि एक दिन भूल सुधार करते हुए उसे अपना ही भेजा गया गलत माल ऐसे तमाशे के बीच वापस लेना पड़े!

‘हाईकोर्ट्स में जाइए’: देश भर में रामनवमी हिंसा पर जाँच की माँग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की: कहा था – ‘साजिश करती है मुस्लिम भीड़, शोभा यात्राओं को मिले सुरक्षा’

सुप्रीम कोर्ट ने रामनवमी पर देश भर में श्रद्धालुओं के खिलाफ हुई हिंसा के मामलों की जाँच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। ये याचिका ‘हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक ट्रस्ट द्वारा दायर की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को ख़ारिज कर दिया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस याचिका में कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश भर में हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया और हिन्दू श्रद्धालु इसका शिकार बने।

याचिका में जानकारी दी गई थी कि हर साल रामनवमी के दौरान इस तरह की हिंसा की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि वो पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना में स्थित हाईकोर्ट्स में याचिका दायर करें। बता दें कि महाराष्ट्र में भी इस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल में इसका सबसे ज़्यादा असर देखने को मिला। वहाँ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान से भी कट्टर इस्लामी गुंडों को सह मिला।

इस याचिका में हिन्दू संस्था ने माँग की कि हिन्दुओं की शोभा यात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। रामनवमी के अलावा सभी त्योहारों पर सुरक्षा की माँग की गई। साथ ही कहा गया कि जो मुस्लिम हिन्दू पर्व-त्योहारों को पसंद नहीं करते हैं, वो इस पर हमला कर देते हैं। बताया गया कि एक साजिश के तहत इस तरह के हमले किए जाते हैं। याचिका में माँग की गई कि जिन-जिन राज्यों में ऐसी हिंसा हुई है, वहाँ के मुख्य सचिवों से रिपोर्ट तलब की जाए।

साथ ही राज्य सरकारों को ये आदेश जारी करने का निवेदन भी किया गया था कि हिंसा की इन घटनाओं में जिन पीड़ितों को नुकसान पहुँचा, उनके नुकसान की भरपाई की जाए। पश्चिम बंगाल के हावड़ा, बिहार के नालंदा, तेलंगाना के हैदराबाद, महाराष्ट्र के औरंगाबाद, गुजरात के वरोदड़ा और झारखंड के जमशेदपुर में इस साल हुई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया गया। किसी इलाके को मुस्लिम बहुल क्षेत्र कह कर शोभा यात्रा न निकालने को कहा जाता है – इसे रोकने के लिए राज्य सरकारों को निर्देश देने की माँग भी याचिका में की गई थी।

बिहार में अब बालू माफिया और उसके गुर्गों ने महिला इंस्पेक्टर को घसीट-घसीट कर पीटा, खनन टीम पर बरसाए ईंट-पत्थर: 150 ट्रक भी छुड़ा ले गए

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 160 आपराधिक मामलों वाले गुंडा अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने में लगे हुए हैं। लेकिन, खुद बिहार में अपराध चरम पर है। अब ताज़ा घटना राजधानी पटना से ही सामने आई है। बालू माफिया और उसके गुर्गों ने एक महिला माइनिंग इंस्पेक्टर को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है। इंस्पेक्टर मिन्नतें करती रहीं। माइनिंग टीम के सदस्यों को भी पीटा गया।

इस मामले में महिला माइनिंग इंस्पेक्टर सहित टीम के कई सदस्य भी घायल हुए हैं। जब माफिया और उसके गुर्गों ने खदेड़ना शुरू किया तो किसी तरह टीम के सदस्य वहाँ से भागने में सफल रहे, लेकिन इंस्पेक्टर घिर गईं। ये टीम बालू ओवरलोडिंग की जाँच करने के लिए गई थी। पिटाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बदमाशों को पत्थरबाजी करते हुए भी देखा जा सकता है। बदमाशों ने महिला माइनिंग इंस्पेक्टर को घसीटते हुए पीटा। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंजुमन इस्लामिया में आयोजित इफ्तार पार्टी में भाग लिया और हाथ फैला कर नमाज के मूड में दिखे।

घटना की जानकारी जैसे ही पटना वेस्ट के सिटी एसपी राजेश कुमार को मिली, वो कई थानों की पुलिस के साथ मौके पर पहुँचे। बिहटा में हुई इस घटना के संबंध में 3 FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने 44 लोगों की गिरफ़्तारी की जानकारी दी है। कई अन्य को दबोचने के लिए छापेमारी जारी है। ईंट-पत्थर से भी हमला किया गया। ये घटना परेव गाँव की है। जिला खनन विभाग की महिला इंस्पेक्टर जाँच के लिए आई थीं। इससे पहले 150 ओवरलोडिंग वाले ट्रकों को पकड़ा गया था।

लेकिन, बालू माफिया और उसके गुर्गों ने सारे ट्रकों को छुड़ा लिया। ये घटना सोमवार (17 अप्रैल, 2023) को दोपहर 2 बजे सामने आई। पुलिस का कहना है कि गिरफ़्तारी हो रही है और मामले में कार्रवाई की जा रही है। SSP ने बताया कि टीम भेजी गई है। फरवरी 2023 में छपरा में बालू माफिया ने पूरी खनन टीम को ज़िंदा जलाने की कोशिश की थी और पेट्रोल छिड़क दिया था। सितंबर 2022 में बालू माफिया के बीच हुई गोलीबारी में 5 लोग मारे भी गए थे।

सुप्रीम कोर्ट के नाम पत्र लिखकर मरा है अतीक अहमदः वकील का दावा, कहा- CM योगी को भी भेजेंगे कॉपी, हत्याकांड की जाँच के लिए प्रयागराज पुलिस ने गठित की SIT

अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या की जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इसके लिए तीन सदस्य टीम की नियुक्ति की गई। वहीं, एसआईटी के पर्यवेक्षण के लिए भी तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।

उधर अतीक अहमद के वकील वीसजय मिश्रा का भी सनसनीखेज बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि हत्या से पहले अतीक अहमद ने सुप्रीम कोर्ट के नाम एक पत्र लिखा था, जिसे पोस्ट कर दिया गया है। पत्र की एक प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी जाएगी। वकील का कहना है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने अतीक अहमद को धमकी दी थी, इसकी डिटेल भी इस पत्र में है। पत्र में उसने अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या की जाँच को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ से लेकर पुलिस प्रशासन तक कोई भी किसी प्रकार की कोताही नहीं बरतना चाहते। ऐसे में प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर के आदेश पर स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम यानी विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया है। इस एसआईटी का नेतृत्व डीसीपी क्राइम सतीश चंद्र करेंगे। वहीं, 2 अन्य सदस्यों के रूप में एसीपी सतेंद्र तिवारी और क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ओम प्रकाश सिंह को इस टीम में रखा गया है।

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एसआईटी द्वारा अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच की निगरानी के लिए भी तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इस टीम के प्रमुख प्रयागराज के अपर पुलिस महानिदेशक होंगे। इसके अलावा, प्रयागराज के पुलिस आयुक्‍त और लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक इस टीम के सदस्‍य होंगे। 

हत्या की जाँच के लिए गठित एसआईटी को 2 महीने का वक्त दिया गया है। इन दो महीनों के भीतर एसआईटी अतीक और अशरफ की हत्या की जाँच कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। एसआईटी का गठन उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय के जाँच आयोग अधिनियम, 1952 के तहत किया गया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने इससे पहले, अतीक अहमद और अशरफ अहमद की हत्या की उच्च स्तरीय जाँच के आदेश जारी किए थे। इसके लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग का गठन कर मामले की जाँच करने की बात कही गई थी।

मीडियाकर्मी के वेश में आए थे हमलावर

बता दें कि शनिवार (15 अप्रैल 2023) को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज के काल्विन हॉस्पिटल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के लिए 3 हमलावर मीडियाकर्मी बनकर आए थे। मीडिया से बात करते समय हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया था। फिलहाल तीनों हमलावर पुलिस की गिरफ्त में हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। वहीं, रविवार (16 अप्रैल, 2023) शाम प्रयागराज के कसारी मसारी कब्रिस्तान में दोनों को दफन कर दिया गया।

CM और PM की कुर्सी पर कब्ज़ा करने की धमकी, राजा भैया और पीएम मोदी की पत्नी पर टिप्पणी, दंगे की बातें… मंच से खुलेआम बदजुबानी करता था अतीक अहमद

माफिया से नेता बने अतीक अहमद की 15 अप्रैल, 2023 को प्रयागराज में उसके भाई अशरफ सहित हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 3 शूटरों को गिरफ्तार किया गया है जिनसे पूछताछ चल रही है। अतीक अहमद अपहरण और सहित सहित 100 से अधिक केसों में नामजद था जिसमें एक में उसे सजा भी हुई थी। अतीक की मौत के बाद सोशल मीडिया के कई मुस्लिम और वामपंथी यूजर्स उसे नेकदिल घोषित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।

कोई उसके इल्म (शिक्षा) लेने वाले बयान को शेयर कर रहा तो कोई उसे गरीबों का मददगार बता रहा। हालाँकि, अतीक का असल चेहरा और जुबान कुछ और ही थी।

मोदी की तुलना रावण से

अतीक अहमद ने साल 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी की तुलना रावण से की थी। तब अतीक अहमद ने कहा था कि नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह का कोई भी मुकाबला नहीं है आपस से। इसी के साथ उन्होंने मोदी एक मुखौटा बताते हुए उन्हें दशानन का एक मुँह बताया था।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की कुर्सी कर लूँगा कब्ज़ा

Z न्यूज़ पर वायरल हो रहे एक वीडियो के 8 वें मिनट के बाद मीठी और चिकनी चुपड़ी बातें करता अतीक अहमद अचानक ही असल रंग में आ गया। उसने खुद पर 20 से अधिक मुकदमे बताते हुए कहा, “मुकदमों की जहाँ तक बात है तो हमने तो कह दिया था कि बेगुनाह मुकदमे अगर लगाते रहेंगे तो 20 मुकदमे और हो जाएँ तो मुख्यमंत्री की कुर्सी कब्ज़ा कर लूँगा। 50 मुकदमे और हो जाएँ तो प्रधानमंत्री की कुर्सी कब्ज़ा कर लूँगा।”

फलानी रानी आ रहीं हैं

प्रतापगढ़ जिले में एक भाषण के दौरान अतीक अहमद ने अप्रत्यक्ष तौर पर राजा भैया पर निशाना साधते हुए कहा था, “ये प्रतापगढ़ जाना जाता यही रानी और राजा के नाम से। आप ही जनवाते भी हो। जब कभी आओ-जाओ तो रानी साहिबा आ रहीं हैं। फलानी रानी आ रहीं हैं। फलाने राजा आ रहे हैं। बंद करो ये रानी-राजा का नाम करना।” अतीक का यह तंज वीडियो के 40वें सेकेण्ड पर मौजूद है।

धारा लगने से डरना बंद करो

अतीक अहमद की हत्या के बाद उनके तमाम समर्थक कानून के तहत कार्रवाई की दुहाई दे रहे हैं। हालाँकि खुद अतीक अहमद को कानून कर कितना भरोसा था ये उसके प्रतापगढ़ वाले भाषण में सुना जा सकता है। NMF न्यूज़ द्वारा शेयर किए गए वीडियो के 2 मिनट 30 वें सेकेण्ड पर अतीक ने कहा, “मेरे पास सबसे ज्यादा लोग धारा निकलवा दो, नाम कटवा दो कहने वाले आते हैं। अब धारा निकलवाना और नाम कटवाने से घबराना खत्म कर दो।” उसने कहा है, “जिस दिन आप खत्म कर दोगे उस दिन इज्जत आपकी प्रतापगढ़ के अंदर रहेगी। कोई आप तक पहुँच नहीं पाएगा।”

मोदी के आगे न नाथ, न पीछे पगहा

अपने प्रतापगढ़ वाले भाषण में ही अतीक अहमद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार को लेकर भी टिप्पणी की थी। उसने मंच पर बैठे किसी ओझा टाइटल वाले सपा नेता को सम्बोधित करते हुए कहा था, ” मोदी के न आगे नाथ, न पाछे पगहा। न मेहरारू न लड़का। मायावती जी के पीछे कौन है। कोई नहीं।”

मुलायम की सरकार में सीना तान के चलते हो सड़क पर

अपने इसी भाषण के 5:25 वें मिनट पर अतीक ने सभा में मौजूद मुस्लिमों से कहा, “जब भाजपा और मायावती की सरकार रहती है तब तुम दब के रहते हो घर में। जब मुलायम सिंह की सरकार रहती है तब तुम सीना तान के चलते हो सड़क पर। और जब तुम सीना तान के चलते हो तो ये दूसरों को नागवार गुजरता है और इसीलिए दंगा होता है। जब आप दुबक के घर में बैठे रहोगे तब कौन सा दंगा होगा।”

वामपंथी और मुस्लिम यूजर्स इसी भाषण का एक हिस्सा शेयर कर रहे हैं जिसमें अतीक अहमद लोगों से अपने बच्चों को तालीम देने की बात कह रहा है। यह हिस्सा 9वें मिनट पर है। हालाँकि, इस दौरान भी अतीक अपनी लाठी में भी ताकत होने की बात कह रहा है।

उपरोक्त तमाम भाषण अतीक अहमद ने सार्वजनिक मंच से दिए हैं। इन सभी के अलावा कई कॉल रिकार्डिंग भी सोशल में वायरल हैं जिसमें अतीक अहमद ने व्यापारियों और यहाँ तक कि सपा नेता को भी खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। इन ऑडियो में अतीक पीड़ितों को माँ-बहन की गंदी-गंदी गालियाँ भी देता सुनाई दे रहा है।